उपस्थित सभी महानुभाव,

आप सबको क्रिसमस के पावन पर्व की बुहत-बहुत शुभकामनाएं। ये आज सौभाग्य है कि 25 दिसंबर, पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जन्म जयंती पर, मुझे उस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जिसके कण-कण पर पंडित जी के सपने बसे हुए हैं। जिनकी अंगुली पकड़ कर के हमें बड़े होने का सौभाग्य मिला, जिनके मार्गदर्शन में हमें काम करने का सौभाग्य मिला ऐसे अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी आज जन्मदिन है और आज जहां पर पंडित जी का सपना साकार हुआ, उस धरती के नरेश उनकी पुण्यतिथि का भी अवसर है। उन सभी महापुरुषों को नमन करते हुए, आज एक प्रकार से ये कार्यक्रम अपने आप में एक पंचामृत है। एक ही समारोह में अनेक कार्यक्रमों का आज कोई-न-कोई रूप में आपके सामने प्रस्तुतिकरण हो रहा है। कहीं शिलान्यास हो रहा है तो कहीं युक्ति का Promotion हो रहा है तो Teachers’ Training की व्यवस्था हो रही है तो काशी जिसकी पहचान में एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि यहां कि सांस्कृतिक विरासत उन सभी का एक साथ आज आपके बीच में उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

मैं विशेष रूप से इस बात की चर्चा करना चाहता हूं कि जब-जब मानवजाति ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तब-तब भारत ने विश्व गुरू की भूमिका निभाई है और 21वीं सदी ज्ञान की सदी है मतलब की 21वीं सदी भारत की बहुत बड़ी जिम्मेवारियों की भी सदी है और अगर ज्ञान युग ही हमारी विरासत है तो भारत ने उस एक क्षेत्र में विश्व के उपयोगी कुछ न कुछ योगदान देने की समय की मांग है। मनुष्य का पूर्णत्व Technology में समाहित नहीं हो सकता है और पूर्णत्व के बिना मनुष्य मानव कल्याण की धरोहर नहीं बन सकता है और इसलिए पूर्णत्व के लक्ष्य को प्राप्त करना उसी अगर मकसद को लेकर के चलते हैं तो विज्ञान हो, Technology हो नए-नए Innovations हो, Inventions हो लेकिन उस बीच में भी एक मानव मन एक परिपूर्ण मानव मन ये भी विश्व की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

हमारी शिक्षा व्यवस्था Robot पैदा करने के लिए नहीं है। Robot तो शायद 5-50 वैज्ञानिक मिलकर शायद लेबोरेटरी में पैदा कर देंगे, लेकिन नरकर्णी करे तो नारायण हो जाए। ये जिस भूमि का संदेश है वहां तो व्यक्तित्व का संपूर्णतम विकास यही परिलक्षित होता है और इसलिए इस धरती से जो आवाज उठी थी, इस धरती से जो संस्कार की गंगा बही थी उसमें संस्कृति की शिक्षा तो थी लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण था शिक्षा की संस्कृति और आज कहीं ऐसा तो नहीं है सदियों से संजोयी हुई हमारी शैक्षिक परंपरा है, जो एक संस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित हुई है। वो शिक्षा की संस्कृति तो लुप्त नहीं हो रही है? वो भी तो कहीं प्रदूषित नहीं हो रही है? और तब जाकर के आवश्यकता है कि कालवाह्य चीजों को छोड़कर के उज्जवलतम भविष्य की ओर नजर रखते हुए पुरानी धरोहर के अधिष्ठान को संजोते हुए हम किस प्रकार की व्यवस्था को विकसित करें जो आने वाली सदियों तक मानव कल्याण के काम आएं।

हम दुनिया के किसी भी महापुरुष का अगर जीवन चरित्र पढ़ेंगे, तो दो बातें बहुत स्वाभाविक रूप से उभर कर के आती हैं। अगर कोई पूछे कि आपके जीवन की सफलता के कारण तो बहुत एक लोगों से एक बात है कि एक मेरी मां का योगदान, हर कोई कहता है और दूसरा मेरे शिक्षक का योगदान। कोई ऐसा महापुरुष नहीं होगा जिसने ये न कहा हो कि मेरे शिक्षक का बुहत बड़ा contribution है, मेरी जिंदगी को बनाने में, अगर ये हमें सच्चाई को हम स्वीकार करते हैं तो हम ये बहुमूल्य जो हमारी धरोहर है इसको हम और अधिक तेजस्वी कैसे बनाएं और अधिक प्राणवान कैसे बनाएं और उसी में से विचार आया कि, वो देश जिसके पास इतना बड़ा युवा सामर्थ्य है, युवा शक्ति है।

आज पूरे विश्व को उत्तम से उत्तम शिक्षकों की बहुत बड़ी खोट है, कमी है। आप कितने ही धनी परिवार से मिलिए, कितने ही सुखी परिवार से मिलिए, उनको पूछिए किसी एक चीज की आपको आवश्यकता लगती है तो क्या लगती है। अरबों-खरबों रुपयों का मालिक होगा, घर में हर प्रकार का सुख-वैभव होगा तो वो ये कहेगा कि मुझे अच्छा टीचर चाहिए मेरे बच्चों के लिए। आप अपने ड्राइवर से भी पूछिए कि आपकी क्या इच्छा है तो ड्राइवर भी कहता है कि मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षी ही मेरी कामना है। अच्छी शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के दायरे में नहीं आती। Infrastructure तो एक व्यवस्था है। अच्छी शिक्षा अच्छे शिक्षकों से जुड़ी हुई होती है और इसलिए अच्छे शिक्षकों का निर्माण कैसे हो और हम एक नए तरीके से कैसे सोचें?

आज 12 वीं के बीएड, एमएड वगैरह होता है वो आते हैं, ज्यादातर बहुत पहले से ही जिसने तय किया कि मुझे शिक्षक बनना है ऐसे बहुत कम लोग होते हैं। ज्यादातर कुछ न कुछ बनने का try करते-करके करके हुए आखिर कर यहां चल पड़ते हैं। मैं यहां के लोगों की बात नहीं कर रहा हूं। हम एक माहौल बना सकते हैं कि 10वीं,12वीं की विद्यार्थी अवस्था में विद्यार्थियों के मन में एक सपना हो मैं एक उत्तम शिक्षक बनना चाहता हूं। ये कैसे बोया जाए, ये environment कैसे create किया जाए? और 12वीं के बाद पहले Graduation के बाद law faculty में जाते थे और वकालत धीरे-धीरे बदलाव आया और 12वीं के बाद ही पांच Law Faculty में जाते हैं और lawyer बनकर आते हैं। क्या 10वीं और 12वीं के बाद ही Teacher का एक पूर्ण समय का Course शुरू हो सकता है और उसमें Subject specific मिले और जब एक विद्यार्थी जिसे पता है कि मुझे Teacher बनना है तो Classroom में वो सिर्फ Exam देने के लिए पढ़ता नहीं है वो अपने शिक्षक की हर बारीकी को देखता है और हर चीज में सोचता है कि मैं शिक्षक बनूंगा तो कैसे करूंगा, मैं शिक्षक बनूंगा ये उसके मन में रहता है और ये एक पूरा Culture बदलने की आवश्यकता है।

उसके साथ-साथ भले ही वो विज्ञान का शिक्षक हो, गणित का शिक्षक हो उसको हमारी परंपराओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे Child Psychology का पता होना चाहिए, उसको विद्यार्थियों को Counselling कैसे करना चाहिए ये सीखना चाहिए, उसे विद्यार्थियों को मित्रवत व्यवहार कैसे करना है ये सीखाना चाहिए और ये चीजें Training से हो सकती हैं, ऐसा नहीं है कि ये नहीं हो सकता है। सब कुछ Training से हो सकता है और हम इस प्रकार के उत्तम शिक्षकों को तैयार करें मुझे विश्वास है कि दुनिया को जितने शिक्षकों की आवश्यकता है, हम पूरे विश्व को, भारत के पास इतना बड़ा युवा धन है लाखों की तादाद में हम शिक्षक Export कर सकते हैं। Already मांग तो है ही है हमें योग्यता के साथ लोगों को तैयार करने की आवश्यकता है और एक व्यापारी जाता है बाहर तो Dollar या Pound ले आता है लेकिन एक शिक्षक जाता है तो पूरी-पूरी पीढ़ी को अपने साथ ले आता है। हम कल्पना कर सकते हैं कितना बड़ा काम हम वैश्विक स्तर पर कर सकते हैं और उसी एक सपने को साकार करने के लिए पंड़ित मदन मोहन मालवीय जी के नाम से इस मिशन को प्रारंभ किया गया है। और आज उसका शुभारंभ करने का मुझे अवसर मिला है।

आज पूरे विश्व में भारत के Handicraft तरफ लोगों का ध्यान है, आकर्षण है लेकिन हमारी इस पुरानी पद्धतियों से बनी हुई चीजें Quantum भी कम होता है, Wastage भी बहुत होता है, समय भी बहुत जाता है और इसके कारण एक दिन में वो पांच खिलौने बनाता है तो पेट नहीं भरता है लेकिन अगर Technology के उपयोग से 25 खिलौने बनाता है तो उसका पेट भी भरता है, बाजार में जाता है और इसलिए आधुनिक विज्ञान और Technology को हमारे परंपरागत जो खिलौने हैं उसका कैसे जोड़ा जाए उसका एक छोटा-सा प्रदर्शन मैंने अभी उनके प्रयोग देखे, मैं देख रहा था एक बहुत ही सामान्य प्रकार की टेक्नोलोजी को विकसित किया गया है लेकिन वो उनके लिए बहुत बड़ी उपयोगिता है वरना वो लंबे समय अरसे से वो ही करते रहते थे। उसके कारण उनके Production में Quality, Production में Quantity और उसके कारण वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की संभावनाएं और हमारे Handicrafts की विश्व बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं। आज हम उनको Online Marketing की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। युक्ति, जो अभियान है उसके माध्यम से हमारे जो कलाकार हैं, काश्तकारों को ,हमारे विश्वकर्मा हैं ये इन सभी विश्वकर्माओं के हाथ में हुनर देने का उनका प्रयास। उनके पास जो skill है उसको Technology के लिए Up-gradation करने का प्रयास। उस Technology में नई Research हो उनको Provide हो, उस दिशा में प्रयास बढ़ रहे हैं।

हमारे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो बहुत होते रहते हैं। कई जगहों पर होते हैं। बनारस में एक विशेष रूप से भी आरंभ किया है। हमारे टूरिज्म को बढ़ावा देने में इसकी बहुत बड़ी ताकत है। आप देखते होंगे कि दुनिया ने, हम ये तो गर्व करते थे कि हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने हमें योग दिया holistic health के लिए preventive health के लिए योग की हमें विरासत मिली और धीरे-धीरे दुनिया को भी लगने लगा योग है क्या चीज और दुनिया में लोग पहुंच गए। नाक पकड़कर के डॉलर भी कमाने लग गए। लेकिन ये शास्त्र आज के संकटों के युग में जी रहे मानव को एक संतुलित जीवन जीने की ताकत कैसे मिले। योग बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। मैं सितंबर में UN में गया था और UN में पहली बार मुझे भाषण करने का दायित्व था। मैंने उस दिन कहा कि हम एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएं और मैंने प्रस्तावित किया था 21 जून। सामान्य रूप से इस प्रकार के जब प्रस्ताव आते हैं तो उसको पारित होने में डेढ़ साल, दो साल, ढ़ाई साल लग जाते हैं। अब तक ऐसे जितने प्रस्ताव आए हैं उसमें ज्यादा से ज्यादा 150-160 देशों नें सहभागिता दिखाई है। जब योग का प्रस्ताव रखा मुझे आज बड़े आनंद और गर्व के साथ कहना है और बनारस के प्रतिनिधि के नाते बनारस के नागरिकों को ये हिसाब देते हुए, मुझे गर्व होता है कि 177 Countries Co- sponsor बनी जो एक World Record है। इस प्रकार के प्रस्ताव में 177 Countries का Co- sponsor बनना एक World Record है और जिस काम में डेढ़-दो साल लगते हैं वो काम करीब-करीब 100 दिन में पूरा हो गया। UN ने इसे 21 जून को घोषित कर दिया ये भी अपने आप में एक World Record है।

हमारी सांस्कृतिक विरासत की एक ताकत है। हम दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ कैसे ले जाएं। हमारा गीत-संगीत, नृत्य, नाट्य, कला, साहित्य कितनी बड़ी विरासत है। सूरज उगने से पहले कौन-सा संगीत, सूरज उगने के बाद कौन-सा संगीत यहां तक कि बारीक रेखाएं बनाने वाला काम हमारे पूर्वजों ने किया है और दुनिया में संगीत तो बहुत प्रकार के हैं लेकिन ज्यादातर संगीत तन को डोलाते हैं बहुत कम संगीत मन को डोलाते हैं। हम उस संगीत के धनी हैं जो मन को डोलाता है और मन को डोलाने वाले संगीत को विश्व के अंदर कैसे रखें यही प्रयासों से वो आगे बढ़ने वाला है लेकिन मेरे मन में विचार है क्या बनारस के कुछ स्कूल, स्कूल हो, कॉलेज हो आगे आ सकते हैं क्या और बनारस के जीवन पर ही एक विषय पर ही एक स्कूल की Mastery हो बनारस की विरासत पर, कोई एक स्कूल हो जिसकी तुलसी पर Mastery हो, कोई स्कूल हो जिसकी कबीर पर हो, ऐसी जो भी यहां की विरासत है उन सब पर और हर दिन शाम के समय एक घंटा उसी स्कूल में नाट्य मंच पर Daily उसका कार्यक्रम हो और जो Tourist आएं जिसको कबीर के पास जाना है उसके स्कूल में चला जाएगा, बैठेगा घंटे-भर, जिसको तुलसी के पास जाना है वो उस स्कूल में जाए बैठेगा घंटे भर , धीरे-धीरे स्कूल टिकट भी रख सकता है अगर popular हो जाएगी तो स्कूल की income भी बढ़ सकती है लेकिन काशी में आया हुआ Tourist वो आएगा हमारे पूर्वजों के प्रयासों के कारण, बाबा भोलेनाथ के कारण, मां गंगा के कारण, लेकिन रुकेगा हमारे प्रयासों के कारण। आने वाला है उसके लिए कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं क्योंकि वो जन्म से ही तय करके बैठा है कि जाने है एक बार बाबा के दरबार में जाना है लेकिन वो एक रात यहां तब रुकेगा उसके लिए हम ऐसी व्यवस्था करें तब ऐसी व्यवस्था विकसित करें और एक बार रात रुक गया तो यहां के 5-50 नौजवानों को रोजगार मिलना ही मिलना है। वो 200-500-1000 रुपए खर्च करके जाएगा जो हमारे बनारस की इकॉनोमी को चलाएगा और हर दिन ऐसे हजारों लोग आते हैं और रुकते हैं तो पूरी Economy यहां कितनी बढ़ सकती है लेकिन इसके लिए ये छोटी-छोटी चीजें काम आ सकती हैं।

हमारे हर स्कूल में कैसा हो, हमारे जो सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, परंपरागत जो हमारे ज्ञान-विज्ञान हैं उसको तो प्रस्तुत करे लेकिन साथ-साथ समय की मांग इस प्रकार की स्पर्धाएं हो सकती हैं, मान लीजिए ऐसे नाट्य लेखक हो जो स्वच्छता पर ही बड़े Touchy नाटक लिखें अगर स्वच्छता के कारण गरीब को कितना फायदा होता है आज गंदगी के कारण Average एक गरीब को सात हजार रुपए दवाई का खर्चा आता है अगर हम स्वच्छता कर लें तो गरीब का सात हजार रुपए बच जाता है। तीन लोगों का परिवार है तो 21 हजार रुपए बच जाता है। ये स्वच्छता का कार्यक्रम एक बहुत बड़ा अर्थ कारण भी उसके साथ जुड़ा हुआ है और स्वच्छता ही है जो टूरिज्म की लिए बहुत बड़ी आवश्यकता होती है। क्या हमारे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाट्य मंचन में ऐसे मंचन, ऐसे काव्य मंचन, ऐसे गीत, कवि सम्मेलन हो तो स्वच्छता पर क्यों न हो, उसी प्रकार से बेटी बचाओ भारत जैसा देश जहां नारी के गौरव की बड़ी गाथाएं हम सुनते हैं। इसी धरती की बेटी रानी लक्ष्मीबाई को हम याद करते हैं लेकिन उसी देश में बटी को मां के गर्भ में मार देते हैं। इससे बड़ा कोई पाप हो नहीं सकता है। क्या हमारे नाट्य मंचन पर हमारे कलाकारों के माध्यम से लगातार बार-बार हमारी कविताओं में, हमारे नाट्य मंचों पर, हमारे संवाद में, हमारे लेखन में बेटी बचाओ जैसे अभियान हम घर-घर पहुंच सकते हैं।

भारत जैसा देश जहां चींटी को भी अन्न खिलाना ये हमारी परंपरा रही है, गाय को भी खिलाना, ये हमारी परंपरा रही है। उस देश में कुपोषण, हमारे बालकों को……उस देश में गर्भवती माता कुपोषित हो इससे बड़ी पीड़ा की बात क्या हो सकती है। क्या हमारे नाट्य मंचन के द्वारा, क्या हमारी सांस्कृतिक धरोहर के द्वारा से हम इन चीजों को प्रलोभन के उद्देश्य में ला सकते हैं क्या? मैं कला, साहित्य जगत के लोगों से आग्रह करूंगा कि नए रूप में देश में झकझोरने के लिए कुछ करें।

जब आजादी का आंदोलन चला था तब ये ही साहित्यकार और कलाकार थे जिनकी कलम ने देश को खड़ा कर दिया था। स्वतंत्र भारत में सुशासन का मंत्र लेकर चल रहे तब ये ही हमारे कला और साहित्य के लोगों की कलम के माध्यम से एक राष्ट्र में नवजागरण का माहौल बना सकते हैं।

मैं उन सबको निमंत्रित करता हूं कि सांस्कृतिक सप्ताह यहां मनाया जा रहा है उसके साथ इसका भी यहां चिंतन हो, मनन हो और देश के लिए इस प्रकार की स्पर्धाएं हो और देश के लिए इस प्रकार का काम हो।

मुझे विश्वास है कि इस प्रयास से सपने पूरे हो सकते हैं साथियों, देश दुनिया में नाम रोशन कर सकता है। मैं अनुभव से कह सकता हूं, 6 महीने के मेरे अनुभव से कह सकता हूं पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है हम तैयार नहीं है, हम तैयार नहीं है हमें अपने आप को तैयार करना है, विश्व तैयार बैठा है।

मैं फिर एक बार पंडित मदन मोहन मालवीय जी की धरती को प्रणाम करता हूं, उस महापुरुष को प्रणाम करता हूं। आपको बहुत-बुहत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद

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Inspired by the ideals of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, the BJP entered politics with a commitment to ‘clean and value-based governance’: PM Modi
India is achieving its climate goals ahead of time and has significantly expanded its renewable energy capacity, especially in solar power: PM Modi
The BJP has balanced development with heritage, ensuring due recognition to all great personalities of India, including Netaji Subhas Chandra Bose and the Azad Hind Fauj, while also promoting Khadi: PM
The BJP has consistently worked to strengthen national unity through initiatives like One Nation One Tax with GST, One Nation One Ration Card, and One Nation One Grid: PM Modi

भाजपा परिवार के सभी वरिष्ठ जन और मेरे प्यारे कार्यकर्ता साथियो। भारतीय जनता पार्टी एक मात्र ऐसा राजनैतिक दल है, जहां हम पार्टी को अपनी मां मानते हैं। इसलिए, पार्टी का स्थापना दिवस हमारे लिए ये केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं होता। ये हम सब कार्यकर्ताओं के लिए एक भावुक अवसर होता है। ये दिन हमें पार्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका देता है कि पार्टी ने हमें राष्ट्र सेवा का सौभाग्य दिया। मैं आप सभी को, देश भर के कोटि-कोटि भाजपा कार्यकर्ताओं को भाजपा के विशाल समर्थन करने वाले, मेरे देश के सभी नागरिकों को भाजपा स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।


साथियों,

मैं इस अवसर पर पार्टी के संस्थापकों और वरिष्ठों को भी आदरपूर्वक याद करता हूं। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी..दीनदयाल उपाध्याय जी...नानाजी देशमुख, कुशाभाऊ ठाकरे जी, जेना कृष्णमूर्ति जी, राजमाता विजया राजे सिंधिया जी, सुंदर सिंह भंडारी जी, अटल जी...आडवाणी जी...मुरली मनोहर जोशी जी...पी परमेश्वरन जी, कबीन्द्र पुरकायस्थ जी...ऐसे अनगिनत उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम हिंदुस्तान के कोने-कोने में ऐसी सभी विभूतियों को मैं आज आदरपूर्वक नमन करता हूँ।

साथियों,

मैं हमारे युवा अध्यक्ष श्रीमान नितिन जी का भी इस आयोजन के लिए विशेष रूप से धन्यवाद करता हूँ। उनके अध्यक्ष बनने के बाद ये पार्टी की स्थापना दिवस का पहला अवसर है। आपकी लीडरशिप में पार्टी पूरी ऊर्जा से देशसेवा में लगी है। इस समय जिन पाँच राज्यों में चुनाव है। वहां भी पार्टी में...एक नई ऊर्जा देख रहा हूं...कार्यशैली में नयापन देख रहा हूं...ऐसा लग रहा है...नवीन जी ने पार्टी में नवीनता भर दी है।

साथियों,

आज बीजेपी जिस शिखर पर है, उसकी चमक सबको दिखती है। लेकिन, यहाँ तक पहुँचने के लिए लाखों कार्यकर्ताओं का जो श्रम है, उन्होंने जो तप, त्याग और तितिक्षा की पराकाष्ठा की है...उसे वही जान सकता है...जो इस पार्टी के संकल्पों के लिए समर्पित होकर स्वयं इस साधना का हिस्सा रहा है। एक वो भी दौर था...भाजपा के पास किसी कोने में दूर-दूर तक सत्ता का नामोनिशान नहीं था। न कोई संसाधन और न ही कोई सुविधा थी! उस समय भाजपा कार्यकर्ता के लिए कहा जाता था कि उसका एक पैर रेल में और दूसरा जेल में होता है। जनता के साथ जुड़ने के लिए भाजपा कार्यकर्ता रेल से एक शहर से दूसरे शहर भागता रहता था, दौड़ता रहता था...और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए जेल जाने में भी संकोच नहीं करता था। उस कठिन समय में भी भाजपा के कार्यकर्ताओं के पास...सबसे बड़ी चीज थी- आने वाले भविष्य पर भरोसा। उनका दृढ़ विश्वास था कि वो आज जो मेहनत कर रहे हैं...उससे आने वाले भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा। और इस भरोसे के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने क्या-क्या नहीं सहा! आपातकाल, इमर्जेंसी का घनघोर दमन...काँग्रेस के षड्यंत्र....राजनीतिक रूप से अछूत हमें बनाने की लगातार कोशिशें...इन सबसे लड़कर हमारे निःस्वार्थ कार्यकर्ता पार्टी को अपने परिश्रम से, अपनी साधना से, अपने संकल्प से यहाँ तक लेकर आए हैं। और इस यात्रा में हमारे कितने ही कार्यकर्ताओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है! हमने बंगाल और केरलम जैसे राज्यों में देखा है...वहाँ किस तरह हिंसा को पॉलिटिकल कल्चर बना दिया गया है। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता, ऐसे हालातों में भी डिगा नहीं...डरा नहीं। आज भी भाजपा का कार्यकर्ता देशसेवा के भाव के साथ निरंतर काम कर रहा है। आज भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी के लिए अपना जीवन गंवाने वाले सभी कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देता हूं, नमन करता हूं।

साथियों,

आज लोकतन्त्र की कितनी ही उपलब्धियां बीजेपी के नाम पर हैं। देश में लंबे अंतराल के बाद किसी पार्टी को इतना स्पष्ट जनमत मिला है। लेकिन हम इस सफलता की विवेचना करें...तो हमें नीयत...नीति ...निष्ठा...की एक लंबी यात्रा हम भली-भांति देख सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विशाल और पवित्र वटवृक्ष के नीचे...हमें साफ नीयत के साथ...शुचिता के साथ राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा मिली। फिर शुरुआत के कुछ दशकों में, चाहे वो जनसंघ का समय रहा हो या भाजपा का, हमने एक संगठन के लिए नीतियां निर्धारित करने में अपनी ऊर्जा लगाई। फिर उसके बाद जो समय आया… उसमें भाजपा ने पूरी निष्ठा से अपनी ताकत खुद को एक सशक्त काडर बेस्ड पार्टी बनाने में झोंक दी। हमने कार्यकर्ताओं का एक ऐसा विशाल काडर खड़ा किया...जिनमें सेवा भावना से कार्य करने का समर्पण था। जिन्होंने पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन का आदर्श बनाया...और, जिन्होंने…किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से समझौता स्वीकार नहीं किया।

साथियों,

हम एक ओर अपने मूल्यों पर अडिग रहे...वहीं साथ ही....लोक सेवा यानी जन कल्याण को अपनी प्राथमिकता बनाया। हमारे पास संसाधन सीमित थे...तब हम कहीं सरकार में भी नहीं थे...लेकिन हमारी पार्टी लोगों की सेवा के लिए समर्पित रही। चाहे आपदा हो, या समाज में कोई सकारात्मक बदलाव हो, हर जगह हमारे कार्यकर्ता सेवाभाव से जनता के बीच उपस्थित रहे। इसी सेवाभाव के कारण लोगों का बीजेपी पर विश्वास बढ़ता चला गया।

साथियों,

हम सभी सन उन्नीस सौ चौरासी का वो दौर भूल नहीं सकते, जब कांग्रेस ने रिकॉर्ड सीटें जीती थीं। लेकिन देश की जनता देख रही थी कि कैसे कांग्रेस सत्ता हासिल करके उसके साथ विश्वासघात कर रही है। ऐसे में देश के लोगों का भाजपा पर भरोसा दिनों-दिन बढ़ रहा। भाजपा धीरे-धीरे चुनाव जीतने लगी थी। और हमारे आने से, देश की राजनीति में दो धाराएं बहुत स्पष्ट हो गईं। एक धारा बनी, सत्ता आधारित राजनीति की। तो दूसरी धारा बनी, सेवा आधारित राजनीति की। सत्ता को प्राथमिकता देने वाली राजनीति का धीरे-धीरे पतन होने लगा! और, सेवाभाव वाली राजनीति को धीरे-धीरे लोगों का भारी समर्थन मिलने लगा। आज हमें इस बात पर गर्व है कि...हमने अपने आचरण से भारत की राजनीति में एक नया सिद्धान्त स्थापित किया है! ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धान्त! राष्ट्रीय एकता...राष्ट्रहित सर्वोपरि...ये हमारी पहचान बन गई है।

साथियों,

भारत की राजनीति में भाजपा ने गठबंधन की राजनीति का भी एक नया आदर्श स्थापित किया। हमारे देश में सत्ता के लिए गठबंधन के अनेक प्रयोग हुए। लेकिन राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए, राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, अगर कोई गठबंधन बना...तो वो भाजपा द्वारा बनाया गया गठबंधन था- NDA…अब तो NDA गठबंधन 25 वर्ष से भी ज्यादा का हो गया है। हमारे NDA परिवार का निरंतर बढ़ना ये दिखाता है...कि भाजपा कितनी सर्वसमावेशी है और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को सर्वोपरि रखते हुए काम करती है।

साथियों,
हमसे पहले देश ने परिवारवादी-वंशवादी राजनीति का बोलबाला देखा था। और आज भी अलग-अलग कोने में वो खेल चल ही रहा है। या तो फिर, लेफ्ट का गवर्नेंस मॉडल देखा था। लेकिन, हमारा गवर्नेंस मॉडल यूनीक रहा। हमारे गवर्नेंस मॉडल में पॉलिसी में स्थिरता थी... सरकार में स्थिरता थी। हमने जो कहा, वो करके दिखाया। आज भाजपा की पहचान के साथ, ये बात जुड़ गई है कि जो वो कहती है, वो जरूर करती है।

साथियों,
भाजपा ने वडोदरा में 1994 में महिला आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया था। हमने ये भी तय किया था कि संगठन में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आगे बढ़ाएंगे। और सरकार में आने के बाद हमने महिला आरक्षण का अपना वायदा पूरा करके दिखाया। अब हम पूरी शक्ति से जुटे हैं कि साल 2029 में नारीशक्ति वंदन अधिनियम की भावना के अनुरूप ही चुनाव हो।

साथियों,
आज भाजपा गुड गवर्नेंस का सिंबल बन गई है...लास्ट माइल तक डिलीवरी का सिंबल बन गई है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने हमें अंत्योदय का सिद्धांत दिया था। हमने इसी विजन पर चलते हुए सैचुरेशन का मार्ग अपनाया...इसी का नतीजा था कि देश के 25 करोड़ गरीबों को...गरीबी से बाहर निकालने में हम कामयाब रहे।

साथियों,
डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के लिए अपना बलिदान तक दे दिया था। दशकों से जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370…देश की संवैधानिक एकता और अखंडता के लिए एक चुनौती बना हुआ था। एक दीवार खड़ी कर दी गई थी। उस समय कश्मीर से 370 को खत्म करना.... इसे पूरी तरह से असंभव माना जाता था, नामुमकिन माना जाता था। लेकिन, अपनी स्थापना के दिन से ही भाजपा का ये संकल्प था कि 370 का कलंक देश के माथे से हटकर रहेगा। और, हमने ये काम करके दिखाया।

साथियों,
राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद पर प्रहार...ये भाजपा के लिए ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन पर हमारी पार्टी हमेशा अडिग रही है। आज हम डिफेंस में देश को आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बॉर्डर पर सुरक्षा के लिए नए-नए उपाय कर रहे हैं...सीमावर्ती गांवों को प्रथम मानकर वहां विकास कर रहे हैं ताकि भारत की सीमाएं हमेशा सुरक्षित रहें। इसी तरह देश में नक्सलवाद-माओवाद की कमर तोड़ने का काम भी अगर किसी ने किया है...तो वो भाजपा है।

साथियों,
भाजपा के शुरुआती दिनों से ही हम कहा करते थे- कच्छ हो या कोहिमा...अपना देश...अपनी माटी। भाजपा आज एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ देश की एकता के लिए काम कर रही है। GST लाकर हमने One Nation One Tax का संकल्प साकार किया। One Nation- One Ration Card....One Nation- One Grid ऐसे कितने की प्रयासों से देश को हम जोड़ रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से हम मातृभाषा पर... स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर भी जोर दे रहे हैं।

साथियों,
हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया है- वसुधैव कुटुंबकम...हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं। आज युद्ध के इस समय में भी भारत की इस भावना को हम प्रतिष्ठापित होते देख रहे हैं। एक समय था जब भारत सबसे समान दूरी बनाके रखने में गर्व करता था। आज का भारत...सबसे समान निकटता बनाकर चल रहा है।

साथियों,
हम विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं। कांग्रेस ने हमेशा सिर्फ एक परिवार को प्राथमिकता दी है..बाकी के साथ अन्याय किया। घोर अन्याय किया। जबकि भाजपा...मां भारती की हर महान संतान को उचित सम्मान दे रही है। नेताजी सुभाष बाबू के नाम पर पराक्रम दिवस...अंडमान में उनकी प्रेरणा से द्वीपों के नाम...26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज को सैल्यूट...ऐसे कितने ही काम हुए हैं जो कांग्रेस सरकार में सोचे तक नहीं गए। खादी को पुनर्जीवित करना हो...स्वदेशी के लिए लोगों को फिर से जागृत करना हो...भाजपा ने राष्ट्र की चेतना को नई ऊर्जा दी है, नई प्रेरणा दी है।

साथियों,

पूरे विश्व में एक अवधारण रही है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए विकास बहुत मुश्किल होता है। लेकिन भारत ने इस अवधारण को भी तोड़ा है। हमने पर्यावरण की रक्षा करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को तेज गति दी है। 11 साल पहले भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। इतने कम वर्षों में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने हैं। और ये तेज विकास...पर्यावरण की रक्षा करते हुए हुआ है। भारत आज क्लाइमेट चेंज से जुड़े लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त कर रहा है। जब बात environment-friendly स्रोतों से 50 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के वैश्विक संकल्प की आती है...तो उसे हासिल करने वाले देशों में भारत सबसे अग्रणी रहा है। 2014 से पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से भी कम थी...लेकिन आज यह बढ़कर 140 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

साथियों,
21वीं सदी के भारत में भाजपा के पास अपने लक्ष्य हैं...अपने संकल्प हैं। हम वर्तमान चुनौतियों से निपटने के साथ ही...देश को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। डेमोग्राफी में हो रहा बदलाव...घुसपैठियों का ज्वलंत मुद्दा...भ्रष्टाचार...परिवारवाद....गुलामी की मानसिकता...बहुत से विषय हैं जिन पर लगातार काम हो रहा है। और भाजपा को इन चुनौतियों से देश को मुक्त करना ही होगा। ये जिम्मेवारी भाजप ही पूरा कर सकता है। हमारी ईमानदार कोशिशों के नतीजे...भूतकाल गवाह है, परिणाम सकारात्मक रहे हैं। आगे भी रहेंगे। देश जानता है कि हर चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ईमानदारी से कोशिश करती है। आज भी करते हैं। आगे भी करते हैं। पहले भी सकारात्मक नतीजे मिले हैं। आगे भी सकारात्मक नतीजे मिलने वाले हैं।

साथियों,
अंग्रेजों के दौर के सैकड़ों काले क़ानूनों का अंत....लोकतन्त्र के लिए नए संसद भवन का निर्माण....सामान्य समाज के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण…कानून बनाकर तीन तलाक पर रोक…CAA का कानून...अयोध्या में राममंदिर का निर्माण....ऐसे कितने ही काम हैं... जो भाजपा के ईमानदार प्रयासों का नतीजा हैं। और, हमारा मिशन अभी भी जारी है। Uniform Civil Code….One nation, one election……ऐसे सभी विषयों पर आज देश में एक गंभीर चर्चा भी हो रही है, और इस दिशा में सकारात्मक प्रगति भी हो रही है।

साथियों,
हमारा लक्ष्य है- विकसित भारत का निर्माण...आत्मनिर्भर भारत का निर्माण...और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम निःस्वार्थ भाव से लगे रहेंगे।

साथियों,
कुछ ही वर्षों में भाजपा अपने 50 वर्ष पूरे करने जा रही है। ये बहुत बड़ा पड़ाव है, बहुत बड़ी प्रेरणा है। हमें नए लक्ष्यों का मंथन भी करना है और बदलती टेक्नोलॉजी के इस जमाने में खुद को ढालना भी है। मैं एक बार फिर, अपने करोड़ों कार्यकर्ताओं को भाजपा स्थापना दिवस की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
वंदे मातरम।