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उपस्थित सभी महानुभाव,

आप सबको क्रिसमस के पावन पर्व की बुहत-बहुत शुभकामनाएं। ये आज सौभाग्य है कि 25 दिसंबर, पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जन्म जयंती पर, मुझे उस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जिसके कण-कण पर पंडित जी के सपने बसे हुए हैं। जिनकी अंगुली पकड़ कर के हमें बड़े होने का सौभाग्य मिला, जिनके मार्गदर्शन में हमें काम करने का सौभाग्य मिला ऐसे अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी आज जन्मदिन है और आज जहां पर पंडित जी का सपना साकार हुआ, उस धरती के नरेश उनकी पुण्यतिथि का भी अवसर है। उन सभी महापुरुषों को नमन करते हुए, आज एक प्रकार से ये कार्यक्रम अपने आप में एक पंचामृत है। एक ही समारोह में अनेक कार्यक्रमों का आज कोई-न-कोई रूप में आपके सामने प्रस्तुतिकरण हो रहा है। कहीं शिलान्यास हो रहा है तो कहीं युक्ति का Promotion हो रहा है तो Teachers’ Training की व्यवस्था हो रही है तो काशी जिसकी पहचान में एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि यहां कि सांस्कृतिक विरासत उन सभी का एक साथ आज आपके बीच में उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

मैं विशेष रूप से इस बात की चर्चा करना चाहता हूं कि जब-जब मानवजाति ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तब-तब भारत ने विश्व गुरू की भूमिका निभाई है और 21वीं सदी ज्ञान की सदी है मतलब की 21वीं सदी भारत की बहुत बड़ी जिम्मेवारियों की भी सदी है और अगर ज्ञान युग ही हमारी विरासत है तो भारत ने उस एक क्षेत्र में विश्व के उपयोगी कुछ न कुछ योगदान देने की समय की मांग है। मनुष्य का पूर्णत्व Technology में समाहित नहीं हो सकता है और पूर्णत्व के बिना मनुष्य मानव कल्याण की धरोहर नहीं बन सकता है और इसलिए पूर्णत्व के लक्ष्य को प्राप्त करना उसी अगर मकसद को लेकर के चलते हैं तो विज्ञान हो, Technology हो नए-नए Innovations हो, Inventions हो लेकिन उस बीच में भी एक मानव मन एक परिपूर्ण मानव मन ये भी विश्व की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

हमारी शिक्षा व्यवस्था Robot पैदा करने के लिए नहीं है। Robot तो शायद 5-50 वैज्ञानिक मिलकर शायद लेबोरेटरी में पैदा कर देंगे, लेकिन नरकर्णी करे तो नारायण हो जाए। ये जिस भूमि का संदेश है वहां तो व्यक्तित्व का संपूर्णतम विकास यही परिलक्षित होता है और इसलिए इस धरती से जो आवाज उठी थी, इस धरती से जो संस्कार की गंगा बही थी उसमें संस्कृति की शिक्षा तो थी लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण था शिक्षा की संस्कृति और आज कहीं ऐसा तो नहीं है सदियों से संजोयी हुई हमारी शैक्षिक परंपरा है, जो एक संस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित हुई है। वो शिक्षा की संस्कृति तो लुप्त नहीं हो रही है? वो भी तो कहीं प्रदूषित नहीं हो रही है? और तब जाकर के आवश्यकता है कि कालवाह्य चीजों को छोड़कर के उज्जवलतम भविष्य की ओर नजर रखते हुए पुरानी धरोहर के अधिष्ठान को संजोते हुए हम किस प्रकार की व्यवस्था को विकसित करें जो आने वाली सदियों तक मानव कल्याण के काम आएं।

हम दुनिया के किसी भी महापुरुष का अगर जीवन चरित्र पढ़ेंगे, तो दो बातें बहुत स्वाभाविक रूप से उभर कर के आती हैं। अगर कोई पूछे कि आपके जीवन की सफलता के कारण तो बहुत एक लोगों से एक बात है कि एक मेरी मां का योगदान, हर कोई कहता है और दूसरा मेरे शिक्षक का योगदान। कोई ऐसा महापुरुष नहीं होगा जिसने ये न कहा हो कि मेरे शिक्षक का बुहत बड़ा contribution है, मेरी जिंदगी को बनाने में, अगर ये हमें सच्चाई को हम स्वीकार करते हैं तो हम ये बहुमूल्य जो हमारी धरोहर है इसको हम और अधिक तेजस्वी कैसे बनाएं और अधिक प्राणवान कैसे बनाएं और उसी में से विचार आया कि, वो देश जिसके पास इतना बड़ा युवा सामर्थ्य है, युवा शक्ति है।

आज पूरे विश्व को उत्तम से उत्तम शिक्षकों की बहुत बड़ी खोट है, कमी है। आप कितने ही धनी परिवार से मिलिए, कितने ही सुखी परिवार से मिलिए, उनको पूछिए किसी एक चीज की आपको आवश्यकता लगती है तो क्या लगती है। अरबों-खरबों रुपयों का मालिक होगा, घर में हर प्रकार का सुख-वैभव होगा तो वो ये कहेगा कि मुझे अच्छा टीचर चाहिए मेरे बच्चों के लिए। आप अपने ड्राइवर से भी पूछिए कि आपकी क्या इच्छा है तो ड्राइवर भी कहता है कि मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षी ही मेरी कामना है। अच्छी शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के दायरे में नहीं आती। Infrastructure तो एक व्यवस्था है। अच्छी शिक्षा अच्छे शिक्षकों से जुड़ी हुई होती है और इसलिए अच्छे शिक्षकों का निर्माण कैसे हो और हम एक नए तरीके से कैसे सोचें?

आज 12 वीं के बीएड, एमएड वगैरह होता है वो आते हैं, ज्यादातर बहुत पहले से ही जिसने तय किया कि मुझे शिक्षक बनना है ऐसे बहुत कम लोग होते हैं। ज्यादातर कुछ न कुछ बनने का try करते-करके करके हुए आखिर कर यहां चल पड़ते हैं। मैं यहां के लोगों की बात नहीं कर रहा हूं। हम एक माहौल बना सकते हैं कि 10वीं,12वीं की विद्यार्थी अवस्था में विद्यार्थियों के मन में एक सपना हो मैं एक उत्तम शिक्षक बनना चाहता हूं। ये कैसे बोया जाए, ये environment कैसे create किया जाए? और 12वीं के बाद पहले Graduation के बाद law faculty में जाते थे और वकालत धीरे-धीरे बदलाव आया और 12वीं के बाद ही पांच Law Faculty में जाते हैं और lawyer बनकर आते हैं। क्या 10वीं और 12वीं के बाद ही Teacher का एक पूर्ण समय का Course शुरू हो सकता है और उसमें Subject specific मिले और जब एक विद्यार्थी जिसे पता है कि मुझे Teacher बनना है तो Classroom में वो सिर्फ Exam देने के लिए पढ़ता नहीं है वो अपने शिक्षक की हर बारीकी को देखता है और हर चीज में सोचता है कि मैं शिक्षक बनूंगा तो कैसे करूंगा, मैं शिक्षक बनूंगा ये उसके मन में रहता है और ये एक पूरा Culture बदलने की आवश्यकता है।

उसके साथ-साथ भले ही वो विज्ञान का शिक्षक हो, गणित का शिक्षक हो उसको हमारी परंपराओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे Child Psychology का पता होना चाहिए, उसको विद्यार्थियों को Counselling कैसे करना चाहिए ये सीखना चाहिए, उसे विद्यार्थियों को मित्रवत व्यवहार कैसे करना है ये सीखाना चाहिए और ये चीजें Training से हो सकती हैं, ऐसा नहीं है कि ये नहीं हो सकता है। सब कुछ Training से हो सकता है और हम इस प्रकार के उत्तम शिक्षकों को तैयार करें मुझे विश्वास है कि दुनिया को जितने शिक्षकों की आवश्यकता है, हम पूरे विश्व को, भारत के पास इतना बड़ा युवा धन है लाखों की तादाद में हम शिक्षक Export कर सकते हैं। Already मांग तो है ही है हमें योग्यता के साथ लोगों को तैयार करने की आवश्यकता है और एक व्यापारी जाता है बाहर तो Dollar या Pound ले आता है लेकिन एक शिक्षक जाता है तो पूरी-पूरी पीढ़ी को अपने साथ ले आता है। हम कल्पना कर सकते हैं कितना बड़ा काम हम वैश्विक स्तर पर कर सकते हैं और उसी एक सपने को साकार करने के लिए पंड़ित मदन मोहन मालवीय जी के नाम से इस मिशन को प्रारंभ किया गया है। और आज उसका शुभारंभ करने का मुझे अवसर मिला है।

आज पूरे विश्व में भारत के Handicraft तरफ लोगों का ध्यान है, आकर्षण है लेकिन हमारी इस पुरानी पद्धतियों से बनी हुई चीजें Quantum भी कम होता है, Wastage भी बहुत होता है, समय भी बहुत जाता है और इसके कारण एक दिन में वो पांच खिलौने बनाता है तो पेट नहीं भरता है लेकिन अगर Technology के उपयोग से 25 खिलौने बनाता है तो उसका पेट भी भरता है, बाजार में जाता है और इसलिए आधुनिक विज्ञान और Technology को हमारे परंपरागत जो खिलौने हैं उसका कैसे जोड़ा जाए उसका एक छोटा-सा प्रदर्शन मैंने अभी उनके प्रयोग देखे, मैं देख रहा था एक बहुत ही सामान्य प्रकार की टेक्नोलोजी को विकसित किया गया है लेकिन वो उनके लिए बहुत बड़ी उपयोगिता है वरना वो लंबे समय अरसे से वो ही करते रहते थे। उसके कारण उनके Production में Quality, Production में Quantity और उसके कारण वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की संभावनाएं और हमारे Handicrafts की विश्व बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं। आज हम उनको Online Marketing की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। युक्ति, जो अभियान है उसके माध्यम से हमारे जो कलाकार हैं, काश्तकारों को ,हमारे विश्वकर्मा हैं ये इन सभी विश्वकर्माओं के हाथ में हुनर देने का उनका प्रयास। उनके पास जो skill है उसको Technology के लिए Up-gradation करने का प्रयास। उस Technology में नई Research हो उनको Provide हो, उस दिशा में प्रयास बढ़ रहे हैं।

हमारे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो बहुत होते रहते हैं। कई जगहों पर होते हैं। बनारस में एक विशेष रूप से भी आरंभ किया है। हमारे टूरिज्म को बढ़ावा देने में इसकी बहुत बड़ी ताकत है। आप देखते होंगे कि दुनिया ने, हम ये तो गर्व करते थे कि हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने हमें योग दिया holistic health के लिए preventive health के लिए योग की हमें विरासत मिली और धीरे-धीरे दुनिया को भी लगने लगा योग है क्या चीज और दुनिया में लोग पहुंच गए। नाक पकड़कर के डॉलर भी कमाने लग गए। लेकिन ये शास्त्र आज के संकटों के युग में जी रहे मानव को एक संतुलित जीवन जीने की ताकत कैसे मिले। योग बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। मैं सितंबर में UN में गया था और UN में पहली बार मुझे भाषण करने का दायित्व था। मैंने उस दिन कहा कि हम एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएं और मैंने प्रस्तावित किया था 21 जून। सामान्य रूप से इस प्रकार के जब प्रस्ताव आते हैं तो उसको पारित होने में डेढ़ साल, दो साल, ढ़ाई साल लग जाते हैं। अब तक ऐसे जितने प्रस्ताव आए हैं उसमें ज्यादा से ज्यादा 150-160 देशों नें सहभागिता दिखाई है। जब योग का प्रस्ताव रखा मुझे आज बड़े आनंद और गर्व के साथ कहना है और बनारस के प्रतिनिधि के नाते बनारस के नागरिकों को ये हिसाब देते हुए, मुझे गर्व होता है कि 177 Countries Co- sponsor बनी जो एक World Record है। इस प्रकार के प्रस्ताव में 177 Countries का Co- sponsor बनना एक World Record है और जिस काम में डेढ़-दो साल लगते हैं वो काम करीब-करीब 100 दिन में पूरा हो गया। UN ने इसे 21 जून को घोषित कर दिया ये भी अपने आप में एक World Record है।

हमारी सांस्कृतिक विरासत की एक ताकत है। हम दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ कैसे ले जाएं। हमारा गीत-संगीत, नृत्य, नाट्य, कला, साहित्य कितनी बड़ी विरासत है। सूरज उगने से पहले कौन-सा संगीत, सूरज उगने के बाद कौन-सा संगीत यहां तक कि बारीक रेखाएं बनाने वाला काम हमारे पूर्वजों ने किया है और दुनिया में संगीत तो बहुत प्रकार के हैं लेकिन ज्यादातर संगीत तन को डोलाते हैं बहुत कम संगीत मन को डोलाते हैं। हम उस संगीत के धनी हैं जो मन को डोलाता है और मन को डोलाने वाले संगीत को विश्व के अंदर कैसे रखें यही प्रयासों से वो आगे बढ़ने वाला है लेकिन मेरे मन में विचार है क्या बनारस के कुछ स्कूल, स्कूल हो, कॉलेज हो आगे आ सकते हैं क्या और बनारस के जीवन पर ही एक विषय पर ही एक स्कूल की Mastery हो बनारस की विरासत पर, कोई एक स्कूल हो जिसकी तुलसी पर Mastery हो, कोई स्कूल हो जिसकी कबीर पर हो, ऐसी जो भी यहां की विरासत है उन सब पर और हर दिन शाम के समय एक घंटा उसी स्कूल में नाट्य मंच पर Daily उसका कार्यक्रम हो और जो Tourist आएं जिसको कबीर के पास जाना है उसके स्कूल में चला जाएगा, बैठेगा घंटे-भर, जिसको तुलसी के पास जाना है वो उस स्कूल में जाए बैठेगा घंटे भर , धीरे-धीरे स्कूल टिकट भी रख सकता है अगर popular हो जाएगी तो स्कूल की income भी बढ़ सकती है लेकिन काशी में आया हुआ Tourist वो आएगा हमारे पूर्वजों के प्रयासों के कारण, बाबा भोलेनाथ के कारण, मां गंगा के कारण, लेकिन रुकेगा हमारे प्रयासों के कारण। आने वाला है उसके लिए कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं क्योंकि वो जन्म से ही तय करके बैठा है कि जाने है एक बार बाबा के दरबार में जाना है लेकिन वो एक रात यहां तब रुकेगा उसके लिए हम ऐसी व्यवस्था करें तब ऐसी व्यवस्था विकसित करें और एक बार रात रुक गया तो यहां के 5-50 नौजवानों को रोजगार मिलना ही मिलना है। वो 200-500-1000 रुपए खर्च करके जाएगा जो हमारे बनारस की इकॉनोमी को चलाएगा और हर दिन ऐसे हजारों लोग आते हैं और रुकते हैं तो पूरी Economy यहां कितनी बढ़ सकती है लेकिन इसके लिए ये छोटी-छोटी चीजें काम आ सकती हैं।

हमारे हर स्कूल में कैसा हो, हमारे जो सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, परंपरागत जो हमारे ज्ञान-विज्ञान हैं उसको तो प्रस्तुत करे लेकिन साथ-साथ समय की मांग इस प्रकार की स्पर्धाएं हो सकती हैं, मान लीजिए ऐसे नाट्य लेखक हो जो स्वच्छता पर ही बड़े Touchy नाटक लिखें अगर स्वच्छता के कारण गरीब को कितना फायदा होता है आज गंदगी के कारण Average एक गरीब को सात हजार रुपए दवाई का खर्चा आता है अगर हम स्वच्छता कर लें तो गरीब का सात हजार रुपए बच जाता है। तीन लोगों का परिवार है तो 21 हजार रुपए बच जाता है। ये स्वच्छता का कार्यक्रम एक बहुत बड़ा अर्थ कारण भी उसके साथ जुड़ा हुआ है और स्वच्छता ही है जो टूरिज्म की लिए बहुत बड़ी आवश्यकता होती है। क्या हमारे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाट्य मंचन में ऐसे मंचन, ऐसे काव्य मंचन, ऐसे गीत, कवि सम्मेलन हो तो स्वच्छता पर क्यों न हो, उसी प्रकार से बेटी बचाओ भारत जैसा देश जहां नारी के गौरव की बड़ी गाथाएं हम सुनते हैं। इसी धरती की बेटी रानी लक्ष्मीबाई को हम याद करते हैं लेकिन उसी देश में बटी को मां के गर्भ में मार देते हैं। इससे बड़ा कोई पाप हो नहीं सकता है। क्या हमारे नाट्य मंचन पर हमारे कलाकारों के माध्यम से लगातार बार-बार हमारी कविताओं में, हमारे नाट्य मंचों पर, हमारे संवाद में, हमारे लेखन में बेटी बचाओ जैसे अभियान हम घर-घर पहुंच सकते हैं।

भारत जैसा देश जहां चींटी को भी अन्न खिलाना ये हमारी परंपरा रही है, गाय को भी खिलाना, ये हमारी परंपरा रही है। उस देश में कुपोषण, हमारे बालकों को……उस देश में गर्भवती माता कुपोषित हो इससे बड़ी पीड़ा की बात क्या हो सकती है। क्या हमारे नाट्य मंचन के द्वारा, क्या हमारी सांस्कृतिक धरोहर के द्वारा से हम इन चीजों को प्रलोभन के उद्देश्य में ला सकते हैं क्या? मैं कला, साहित्य जगत के लोगों से आग्रह करूंगा कि नए रूप में देश में झकझोरने के लिए कुछ करें।

जब आजादी का आंदोलन चला था तब ये ही साहित्यकार और कलाकार थे जिनकी कलम ने देश को खड़ा कर दिया था। स्वतंत्र भारत में सुशासन का मंत्र लेकर चल रहे तब ये ही हमारे कला और साहित्य के लोगों की कलम के माध्यम से एक राष्ट्र में नवजागरण का माहौल बना सकते हैं।

मैं उन सबको निमंत्रित करता हूं कि सांस्कृतिक सप्ताह यहां मनाया जा रहा है उसके साथ इसका भी यहां चिंतन हो, मनन हो और देश के लिए इस प्रकार की स्पर्धाएं हो और देश के लिए इस प्रकार का काम हो।

मुझे विश्वास है कि इस प्रयास से सपने पूरे हो सकते हैं साथियों, देश दुनिया में नाम रोशन कर सकता है। मैं अनुभव से कह सकता हूं, 6 महीने के मेरे अनुभव से कह सकता हूं पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है हम तैयार नहीं है, हम तैयार नहीं है हमें अपने आप को तैयार करना है, विश्व तैयार बैठा है।

मैं फिर एक बार पंडित मदन मोहन मालवीय जी की धरती को प्रणाम करता हूं, उस महापुरुष को प्रणाम करता हूं। आपको बहुत-बुहत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद

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May 26, 2022
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Acknowledges the role of students of ISB in the economic and business landscape of the country
“Today the world is realising that India means business”
“I would like to ask you to link your personal goals with the goals of the country”
“Due to the continuous political instability in the last three decades, the country has seen a lack of political willpower and stayed away from reforms and big decisions”
“In the system now government reforms, bureaucracy performs and people’s participation leads to transformation”
“To make India future-ready, we have to ensure that India becomes self-reliant. All you business professionals have a big role in this”

तेलंगाना की राज्यपाल श्रीमती तमिलसाई सौन्दर्यराजन सौंदरराजन जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री जी कृष्ण रेड्डी जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री, इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन, डीन, अन्य प्रोफेसर्स, टीचर्स, पेरेंट्स और मेरे प्यारे युवा साथियों !

आज इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस ने अपनी गौरवमयी यात्रा का एक अहम माइलस्टोन पार किया है। हम सभी ISB की स्थापना के 20 साल पूरे होने को सेलिब्रेट कर रहे हैं। आज अनेक साथियों को अपनी डिग्री मिली है, गोल्ड मेडल मिले हैं। ISB को सफलता के इस पड़ाव पर पहुंचाने में अनेकों लोगों की तपस्या रही है। मैं आज उन सभी को याद करते हुए आप सभी को, ISB के प्रोफेसर्स, फेकल्टी, सभी स्टूडेंट्स को, पेरेन्ट्स को, आई एस बी के एल्यूमनाइज को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

साल 2001 में अटल जी ने इसे देश को समर्पित किया था। तब से लेकर आज तक लगभग 50 हज़ार एक्ज़ीक्यूटिव यहाँ से ट्रेन होकर निकले हैं। आज आई एस बी एशिया के टॉप बिजनेस स्कूलों में से एक है। आई एस बी से निकलने वाले जो प्रोफेशनल्स हैं। वे देश के बिजनेस को गति दे रहे हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियों का मैनेजमेंट संभाल रहे हैं। यहाँ के स्टूडेंट्स ने अनेक स्टार्ट अप्स बनाए हैं, अनेकों यूनिकॉर्न्स निर्माण में उनकी भूमिका रही है। ये आई एस बी के लिए उपलब्धि तो है ही पूरे देश के लिए गर्व का विषय भी है।

साथियों,

मुझे बताया गया है कि ये हैदाराबाद और मोहाली कैंपस की पहली जॉइंट ग्रेजुएशन सेरेमनी है। आज जो स्टूडेंट्स पास होकर निकल रहे हैं, उनके लिए ये इसलिए भी खास है क्योंकि इस समय देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है, अमृत महोत्सव मना रहा है। हम बीते 75 साल की उपलब्धियों को देख रहे हैं और आने वाले 25 साल के संकल्पों का रोडमैप भी बना रहे हैं। आज़ादी के इस अमृतकाल में, आने वाले 25 साल के लिए जो संकल्प हमने लिए हैं, उसकी सिद्धि में आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है। और आज भारत में जो आशा है, लोगों में जो आत्मविश्वास है, नए भारत के निर्माण के लिए जो इच्छाशक्ति है, वो आपके लिए भी अनेक संभावनाओं के द्वार खोल रही है। आप खुद देखिए, आज भारत G20 देशों के समूह में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी है। Smartphone date consumer के मामले में भारत पहले नंबर पर है। Internet users की संख्या को देखें तो भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। Global Retail Index में भी भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem भारत में है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Consumer Market भारत में है। ऐसी कई चीजें मैं आपके सामने रख सकता हूँ, गिना सकता हूँ। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में हम सबने और दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा है। सदी की इस सबसे बड़ी आपदा में ग्लोबल सप्लाई चेन्स में इतना बड़ा disruption हुआ, फिर युद्ध ने भी इस संकट को और बढ़ा दिया। इन सबके बीच भी, भारत आज ग्रोथ के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। पिछले साल भारत में अब तक का सबसे ज्यादा, रेकॉर्ड FDI आया। आज दुनिया ये महसूस कर रही है कि India means business. और ये केवल अकेले सरकार के प्रयासों के कारण संभव नहीं हुआ है। इसमें ISB जैसे बिज़नेस स्कूल्स का, यहाँ से निकलने वाले प्रोफेशनल्स का, देश के युवा का भी बहुत बड़ा योगदान है। चाहे स्टार्टअप्स हों, या traditional business हो, चाहे manufacturing हो या सर्विस सेक्टर हो, हमारे युवा ये साबित कर रहे हैं कि वो दुनिया को लीड कर सकते हैं। मैं सही बता रहा हूँ ना, आपको भरोसा है कि नहीं अपने आप पर। मुझे आप पर भरोसा है। आपको अपने आप पर है?

साथियों,

इसीलिए आज दुनिया भारत को, भारत के युवाओं को, और भारत के products को एक नए सम्मान और नए भरोसे के साथ देख रही है।

साथियों,

भारत जिस स्केल पर लोकतांत्रिक तरीके से अनेक चीजें अपने यहाँ कर सकता है, जिस तरीके से हम यहाँ कोई नीति या निर्णय लागू कर सकते हैं, वो पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का सीखने का विषय बन जाता है। और इसलिए हम अक्सर Indian solutions को globally implement होते हुए देखते हैं। और इसलिए मैं आज इस महत्वपूर्ण दिन पर आपसे कहूंगा कि आप अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को, देश के लक्ष्यों के साथ जोड़िए। आप जो सीखते हैं, आपका जो भी अनुभव होता है, आप जो भी initiatives लेते हैं, उससे देशहित कैसे सधेगा, इस बारे में हमेशा सोचना चाहिए, जरूर सोचिये। आज देश में चाहे Ease of Doing Business के लिए अभियान हो, डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों और हजारों compliances को समाप्त करने का काम हो, टैक्स के अनेकों कानूनों को समाप्त करके GST जैसी पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण हो, Entrepreneurs और innovation को बढ़ावा देना हो, नई स्टार्ट अप पॉलिसी हो, ड्रोन पॉलिसी हो, अनेक नए सेक्टर्स को खोलना हो, 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करना हो, ये सारे बड़े बदलाव आप जैसे युवाओं के लिए ही तो हो रहे हैं। आप जैसे युवाओं की तरफ से आने वाले जो solutions हैं, उन solutions को implement करने के लिए, आपके idea को देश की ताकत बनाने के लिए हमारी सरकार हमेशा देश की युवा शक्ति के साथ खड़ी है।

साथियों,

आपने सुना होगा कई बार मैं एक बात को बार-बार दोहराता भी हूँ और अक्सर मैं कहता हूँ Reform, Perform, Transform की बात करता हूँ। ये मंत्र, देश में आज जो governance है, उसे define करता है। ये आप जैसे मैनेजमेंट के स्टूडेंटस, प्रोफेशनल्स के लिए भी बहुत अहम है। मैं ये सारी बातें आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि आप लोग यहाँ से निकलने के बाद बहुत सारे Policy decisions लेने वाले हैं। Policy सिर्फ ड्रॉइंग बोर्ड पर अच्छी हो, कागज़ पर बेहतर हो, जमीन पर अगर नतीजे ना दें, तो उसका कोई लाभ नहीं होता। इसलिए पॉलिसी का आकलन, Implementation और End Result के आधार पर होना चाहिए। Reform, Perform, Transform के मंत्र ने कैसे Policies को, देश की Governance को Redefine किया है, ये भी मैं चाहूँगा कि आप जैसे नौजवानों ने जानना बहुत जरूरी है।

साथियों,

बीते 8 साल की तुलना अगर आप उससे पहले के 3 दशक से करेंगे तो, एक बात जरूर नोट करेंगे। हमारे देश में रिफॉर्म्स की ज़रूरत तो हमेशा से महसूस की जाती रही थी लेकिन Political willpower की हमेशा कमी रहती थी। पिछले तीन दशकों में लगातार बनी रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश ने लंबे समय तक Political willpower की कमी देखी। इस वजह से देश reforms से, बड़े फैसले लेने से दूर ही रहा है। 2014 के बाद से हमारा देश राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी देख रहा है और लगातार Reforms भी हो रहे हैं। हमने दिखाया है कि अगर ईमानदारी के साथ, इच्छाशक्ति के साथ reform की प्रक्रिया को आगे बढ़ाई जाए तो जनसमर्थन अपने आप बढ़ता है। Fintech का उदाहरण हमारे सामने है। जिस देश में कभी बैंकिंग ही एक privilege मानी जाती थी, उसी देश में fintech सामान्य नागरिकों के जीवन को बदल रही है। जहाँ कभी बैंकों के प्रति भरोसा कायम करने के लिए बहुत सारी मेहनत करनी पड़ती थी, वहाँ अब दुनिया की 40 प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शन हिन्दुस्तान में हो रही हैं। हमारे Health Sector को भी ये माना जाता था कि ये किसी बड़ी चुनौती को respond नहीं कर पाएगा। लेकिन Health Sector में reform की देश की इच्छाशक्ति का परिणाम हमने 100 साल की सबसे बड़ी महामारी के दौरान अनुभव किया है। कोरोना ने जब दस्तक दी तब हमारे पास PPE किट्स बनाने वाले मैन्युफेक्चरर ना के बराबर थे, कोरोना स्पेसिफिक ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था। लेकिन देखते ही देखते 1100 से अधिक PPE manufacturers का नेटवर्क भारत में तैयार हो गया। कोरोना की टेस्टिंग के लिए भी शुरुआत में कुछ दर्जन लैब्स थीं। बहुत कम समय में देश में ढाई हज़ार से अधिक टेस्ट लैब्स का नेटवर्क बन गया। कोविड वैक्सीन्स के लिए तो हमारे यहाँ चिंता जताई जा रही थी कि हमें विदेशी वैक्सीन मिल पाएगी भी या नहीं। लेकिन हमने अपनी वैक्सीन्स तैयार कीं। इतनी वैक्सीन्स बनाईं कि भारत में भी 190 करोड़ से ज्यादा डोज़ लगाई जा चुकी हैं। भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी वैक्सीन्स भेजी हैं। इसी प्रकार मेडिकल एजुकेशन में भी हमने एक के बाद एक अनेक रिफार्म किए। इसी का परिणाम है कि बीते 8 सालों में मेडिकल कॉलेज की संख्या 380 से बढ़कर 600 से भी अधिक हो गई है। देश में मेडिकल की ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की सीटें 90 हज़ार से बढ़कर डेढ़ लाख से ऊपर हो चुकी हैं।

साथियों,

पिछले आठ वर्षों में देश ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, उसकी वजह से एक और बड़ा बदलाव आया है। अब ब्यूरोक्रेसी भी पूरी शक्ति से Reforms को जमीन पर उतारने में जुटी है। सिस्टम वही है, लेकिन अब नतीजे बहुत संतोषजनक मिल रहे हैं। और इन आठ वर्षों में जो सबसे बड़ी प्रेरणा बनी है, वो है जनभागीदारी। देश की जनता खुद आगे बढ़कर Reforms को गति दे रही है। और हमने ये स्वच्छ भारत अभियान में देखा है। और अब वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान में भी हम जनभागीदारी की ताकत को देख रहे हैं। जब जनता सहयोग करती है तो नतीजे अवश्य मिलते हैं, जल्दी मिलते हैं। यानि सरकारी व्यवस्था में सरकार reform करती है, ब्यूरोक्रेसी perform करती है और जनता के सहयोग से transformation होता है।

साथियों,

ये आपके लिए एक बहुत बड़ी केस स्टडी है, Reform, Perform, Transform की जो ये डायनिमिक्स है, वो आपके लिए रिसर्च का विषय है। ISB जैसे बड़े संस्थान को अध्ययन करके, analysis करके दुनिया के सामने इसे लाना चाहिए। यहाँ से जो युवा साथी पढ़कर निकल रहे हैं, उन्हें भी Reform, Perform, Transform के इस मंत्र को हर क्षेत्र में लागू करने का प्रयास करना चाहिए।

साथियों,

मैं आपका ध्यान, देश के sports ecosystem में आए ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ भी दिलाना चाहता हूँ। आखिर क्या कारण है कि 2014 के बाद हमें खेल के हर मैदान में अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिल रहा है? इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे एथलीट्स का आत्मविश्वास। आत्मविश्वास तब आता है, जब सही टैलेंट की खोज होती है, जब टैलेंट की handholding होती है, जब एक transparent selection होता है, ट्रेनिंग का, कंपीटिशन का एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है। खेलो इंडिया से लेकर ओलंपिक्स पोडियम स्कीम तक ऐसे अनेक रिफॉर्म्स के चलते आज sports को Transform होते हम अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं, अनुभव कर सकते हैं।

साथियों,

मैनेजमेंट की दुनिया में performance, value addition, productivity और motivation, इन बातों पर भी बहुत चर्चा होती है। अगर आपको पब्लिक पॉलिसी में इसका उत्तम उदाहरण देखना है, तो आपको aspirational district program को ज़रूर स्टडी करना चाहिए। हमारे देश में 100 से अधिक ऐसे जिले थे, जो विकास की दौड़ में काफी पीछे थे। देश के लगभग सभी राज्यों में एकाद दो-एकाद दो कहीं पर थोड़े ज्यादा ऐसे aspirational district हैं। विकास से जुड़े हर पैरामीटर में ये जिले बहुत कम स्कोर करते थे। इसका सीधा प्रभाव देश की ओवरऑल performance पर, रेटिंग पर, ओवरऑल प्रदर्शन पर बड़ा नेगेटिव असर पड़ता था। इनको ये समझकर कुछ हो नहीं रहा है, बदलाव दिख नहीं रहा है, हालात बुरे हैं, और इसलिए सरकारें क्या करती थीं। उसको पिछड़ा घोषित कर देती थी।, ये तो backward district है, अगर यही सोच है तो उनके मन में भी हो जाता आया आता ऐसी ही रहेगा कुछ बदलाव नही होगा। सरकारी सिस्टम में जिन अफसरों को सबसे कम प्रोडक्टिव माना जाता था, निकम्मा माना जाता था, उनको अक्सर इन जिलों में तैनात करने देना और जाओ बई तुम तुम्हारा जानो तुम्हारा नसीब जाने पडे रहो।

लेकिन साथियों,

हमने अप्रोच बदली। जिसे कल तक backward district कहते थे। हमने कहा ये backward नहीं है ये aspirational district है हमने उनको aspirational घोषित किया, और हमने तय किया कि हम इन जिलों में विकास की आकांक्षा जगाएंगे, एक नई भूख जगाएंगे। देश के Efficient, युवा अधिकारियों को चिन्हित करके इन जिलों में भेजा गया। इन जिलों में होने वाले हर काम को विशेष तौर पर मॉनीटर किया गया, डैस्क बोर्ड पर रियल टाइम मॉनिटरिंग करने की व्यव्सथा की है। जहाँ-जहाँ कमियाँ नजर आती थी उन कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। और साथियों आपको जानकर के खुशी होगी आज स्थिति ये है कि इनमें से कई जिले आज देश के दूसरे बेहतर समझे जाने वाले जिलों से कहीं ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। जिन्हें कभी पिछड़े जिले कहते थे देश के development parameters को प्रभावित करते थे, वो आज aspirational district बनकर, देश के विकास को गति दे रहे हैं। अब हमने राज्यों से कहा है इस अप्रोच को और विस्तार दें। हर जिले में ऐसे ब्लॉक्स होते हैं जो विकास के मामले में दूसरों से पिछड़ गए हैं। ऐसे ब्लॉक्स को identify करके aspirational blocks अभियान को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। देश में हो रहे ये बदलाव, इनकी जानकारी, आपको policy decisions में, मैनेजमेंट में बहुत मदद करेगी।

साथियों,

आपके लिए ये सब जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज देश में ‘business' के मायने भी बदल रहे हैं और ‘business’ का दायरा भी बढ़ रहा है। आज भारत में economic landscape, small, medium, cottage और यहाँ तक की informal enterprises तक में फैल रहा है। ये बिजनेस लाखों-लाख लोगों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं। इनका सामर्थ्य बहुत ज्यादा है, इनमें आगे बढ़ने का कमिटमेंट बहुत ज्यादा है। इसलिए आज जब देश आर्थिक विकास के नए अध्याय को लिख रहा है तो हमें एक और बात याद रखनी होगी। हमें छोटे व्यापारियों, small business का भी उतना ही ध्यान रखना होगा। हमें उन्हें ज्यादा बड़े प्लेटफॉर्म देने होंगे, Grow करने के लिए ज्यादा बेहतर मौके देने होंगे। हमें उन्हें देश-विदेश में नए-नए बाजारों से जोड़ने में मदद करनी होगी। हमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी से जोड़ना होगा। और यहीं पर इसी बात पर ISB जैसे संस्थान, ISB के Students की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। एक future business leader के तौर पर आप सभी को हर बिजनेस को और बड़ा और विस्तार देने करने के लिए आगे आना होगा, जिम्मेवारियाँ संभालनी होगी। और आप देखिएगा, आप छोटे business को grow करने में मदद करेंगे तो आप लाखों entrepreneurs के निर्माण में मदद करेंगे, करोड़ों परिवारों की मदद करेंगे। भारत को future-ready बनाने के लिए हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि भारत आत्मनिर्भर बने। और इसमें आप भी बिजनेस प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका है। और ये आपके लिए एक तरह से देश की सेवा का अहम उदाहरण होगा।

साथियों,

देश के लिए कुछ करने का, देश के लिए कुछ कर गुजरने का आपका जज्बा, देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। मुझे ISB पर, ISB के Students पर, आप सभी नौजवानों पर बहुत भरोसा है, बहुत विश्वास है। आप एक purpose के साथ इस प्रतिष्ठित संस्थान से बाहर निकलें। आप अपने goals को राष्ट्र के संकल्पों के साथ जोड़िए। हम जो कुछ भी करेंगे, उससे एक राष्ट्र के रूप में सशक्त होंगे, इस कमिटमेंट के साथ जब आप कोई भी प्रयास करेंगे तो सफलता आपके कदम पर होगी। एक बार फिर आज जिन-जिन साथियों को मुझे मैडल देने का अवसर मिला है और भी जो लोगों ने सिद्धियाँ प्राप्त की हैं उनको उनके परिवारजनों को अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ। और ISB भरत की विकास यात्रा में ऐसी पीढ़ियों को तैयार करता रहे, ऐसी पीढ़ियां राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करती रहे, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद !