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उपस्थित सभी महानुभाव,

आप सबको क्रिसमस के पावन पर्व की बुहत-बहुत शुभकामनाएं। ये आज सौभाग्य है कि 25 दिसंबर, पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जन्म जयंती पर, मुझे उस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जिसके कण-कण पर पंडित जी के सपने बसे हुए हैं। जिनकी अंगुली पकड़ कर के हमें बड़े होने का सौभाग्य मिला, जिनके मार्गदर्शन में हमें काम करने का सौभाग्य मिला ऐसे अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी आज जन्मदिन है और आज जहां पर पंडित जी का सपना साकार हुआ, उस धरती के नरेश उनकी पुण्यतिथि का भी अवसर है। उन सभी महापुरुषों को नमन करते हुए, आज एक प्रकार से ये कार्यक्रम अपने आप में एक पंचामृत है। एक ही समारोह में अनेक कार्यक्रमों का आज कोई-न-कोई रूप में आपके सामने प्रस्तुतिकरण हो रहा है। कहीं शिलान्यास हो रहा है तो कहीं युक्ति का Promotion हो रहा है तो Teachers’ Training की व्यवस्था हो रही है तो काशी जिसकी पहचान में एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि यहां कि सांस्कृतिक विरासत उन सभी का एक साथ आज आपके बीच में उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

मैं विशेष रूप से इस बात की चर्चा करना चाहता हूं कि जब-जब मानवजाति ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तब-तब भारत ने विश्व गुरू की भूमिका निभाई है और 21वीं सदी ज्ञान की सदी है मतलब की 21वीं सदी भारत की बहुत बड़ी जिम्मेवारियों की भी सदी है और अगर ज्ञान युग ही हमारी विरासत है तो भारत ने उस एक क्षेत्र में विश्व के उपयोगी कुछ न कुछ योगदान देने की समय की मांग है। मनुष्य का पूर्णत्व Technology में समाहित नहीं हो सकता है और पूर्णत्व के बिना मनुष्य मानव कल्याण की धरोहर नहीं बन सकता है और इसलिए पूर्णत्व के लक्ष्य को प्राप्त करना उसी अगर मकसद को लेकर के चलते हैं तो विज्ञान हो, Technology हो नए-नए Innovations हो, Inventions हो लेकिन उस बीच में भी एक मानव मन एक परिपूर्ण मानव मन ये भी विश्व की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

हमारी शिक्षा व्यवस्था Robot पैदा करने के लिए नहीं है। Robot तो शायद 5-50 वैज्ञानिक मिलकर शायद लेबोरेटरी में पैदा कर देंगे, लेकिन नरकर्णी करे तो नारायण हो जाए। ये जिस भूमि का संदेश है वहां तो व्यक्तित्व का संपूर्णतम विकास यही परिलक्षित होता है और इसलिए इस धरती से जो आवाज उठी थी, इस धरती से जो संस्कार की गंगा बही थी उसमें संस्कृति की शिक्षा तो थी लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण था शिक्षा की संस्कृति और आज कहीं ऐसा तो नहीं है सदियों से संजोयी हुई हमारी शैक्षिक परंपरा है, जो एक संस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित हुई है। वो शिक्षा की संस्कृति तो लुप्त नहीं हो रही है? वो भी तो कहीं प्रदूषित नहीं हो रही है? और तब जाकर के आवश्यकता है कि कालवाह्य चीजों को छोड़कर के उज्जवलतम भविष्य की ओर नजर रखते हुए पुरानी धरोहर के अधिष्ठान को संजोते हुए हम किस प्रकार की व्यवस्था को विकसित करें जो आने वाली सदियों तक मानव कल्याण के काम आएं।

हम दुनिया के किसी भी महापुरुष का अगर जीवन चरित्र पढ़ेंगे, तो दो बातें बहुत स्वाभाविक रूप से उभर कर के आती हैं। अगर कोई पूछे कि आपके जीवन की सफलता के कारण तो बहुत एक लोगों से एक बात है कि एक मेरी मां का योगदान, हर कोई कहता है और दूसरा मेरे शिक्षक का योगदान। कोई ऐसा महापुरुष नहीं होगा जिसने ये न कहा हो कि मेरे शिक्षक का बुहत बड़ा contribution है, मेरी जिंदगी को बनाने में, अगर ये हमें सच्चाई को हम स्वीकार करते हैं तो हम ये बहुमूल्य जो हमारी धरोहर है इसको हम और अधिक तेजस्वी कैसे बनाएं और अधिक प्राणवान कैसे बनाएं और उसी में से विचार आया कि, वो देश जिसके पास इतना बड़ा युवा सामर्थ्य है, युवा शक्ति है।

आज पूरे विश्व को उत्तम से उत्तम शिक्षकों की बहुत बड़ी खोट है, कमी है। आप कितने ही धनी परिवार से मिलिए, कितने ही सुखी परिवार से मिलिए, उनको पूछिए किसी एक चीज की आपको आवश्यकता लगती है तो क्या लगती है। अरबों-खरबों रुपयों का मालिक होगा, घर में हर प्रकार का सुख-वैभव होगा तो वो ये कहेगा कि मुझे अच्छा टीचर चाहिए मेरे बच्चों के लिए। आप अपने ड्राइवर से भी पूछिए कि आपकी क्या इच्छा है तो ड्राइवर भी कहता है कि मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षी ही मेरी कामना है। अच्छी शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के दायरे में नहीं आती। Infrastructure तो एक व्यवस्था है। अच्छी शिक्षा अच्छे शिक्षकों से जुड़ी हुई होती है और इसलिए अच्छे शिक्षकों का निर्माण कैसे हो और हम एक नए तरीके से कैसे सोचें?

आज 12 वीं के बीएड, एमएड वगैरह होता है वो आते हैं, ज्यादातर बहुत पहले से ही जिसने तय किया कि मुझे शिक्षक बनना है ऐसे बहुत कम लोग होते हैं। ज्यादातर कुछ न कुछ बनने का try करते-करके करके हुए आखिर कर यहां चल पड़ते हैं। मैं यहां के लोगों की बात नहीं कर रहा हूं। हम एक माहौल बना सकते हैं कि 10वीं,12वीं की विद्यार्थी अवस्था में विद्यार्थियों के मन में एक सपना हो मैं एक उत्तम शिक्षक बनना चाहता हूं। ये कैसे बोया जाए, ये environment कैसे create किया जाए? और 12वीं के बाद पहले Graduation के बाद law faculty में जाते थे और वकालत धीरे-धीरे बदलाव आया और 12वीं के बाद ही पांच Law Faculty में जाते हैं और lawyer बनकर आते हैं। क्या 10वीं और 12वीं के बाद ही Teacher का एक पूर्ण समय का Course शुरू हो सकता है और उसमें Subject specific मिले और जब एक विद्यार्थी जिसे पता है कि मुझे Teacher बनना है तो Classroom में वो सिर्फ Exam देने के लिए पढ़ता नहीं है वो अपने शिक्षक की हर बारीकी को देखता है और हर चीज में सोचता है कि मैं शिक्षक बनूंगा तो कैसे करूंगा, मैं शिक्षक बनूंगा ये उसके मन में रहता है और ये एक पूरा Culture बदलने की आवश्यकता है।

उसके साथ-साथ भले ही वो विज्ञान का शिक्षक हो, गणित का शिक्षक हो उसको हमारी परंपराओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे Child Psychology का पता होना चाहिए, उसको विद्यार्थियों को Counselling कैसे करना चाहिए ये सीखना चाहिए, उसे विद्यार्थियों को मित्रवत व्यवहार कैसे करना है ये सीखाना चाहिए और ये चीजें Training से हो सकती हैं, ऐसा नहीं है कि ये नहीं हो सकता है। सब कुछ Training से हो सकता है और हम इस प्रकार के उत्तम शिक्षकों को तैयार करें मुझे विश्वास है कि दुनिया को जितने शिक्षकों की आवश्यकता है, हम पूरे विश्व को, भारत के पास इतना बड़ा युवा धन है लाखों की तादाद में हम शिक्षक Export कर सकते हैं। Already मांग तो है ही है हमें योग्यता के साथ लोगों को तैयार करने की आवश्यकता है और एक व्यापारी जाता है बाहर तो Dollar या Pound ले आता है लेकिन एक शिक्षक जाता है तो पूरी-पूरी पीढ़ी को अपने साथ ले आता है। हम कल्पना कर सकते हैं कितना बड़ा काम हम वैश्विक स्तर पर कर सकते हैं और उसी एक सपने को साकार करने के लिए पंड़ित मदन मोहन मालवीय जी के नाम से इस मिशन को प्रारंभ किया गया है। और आज उसका शुभारंभ करने का मुझे अवसर मिला है।

आज पूरे विश्व में भारत के Handicraft तरफ लोगों का ध्यान है, आकर्षण है लेकिन हमारी इस पुरानी पद्धतियों से बनी हुई चीजें Quantum भी कम होता है, Wastage भी बहुत होता है, समय भी बहुत जाता है और इसके कारण एक दिन में वो पांच खिलौने बनाता है तो पेट नहीं भरता है लेकिन अगर Technology के उपयोग से 25 खिलौने बनाता है तो उसका पेट भी भरता है, बाजार में जाता है और इसलिए आधुनिक विज्ञान और Technology को हमारे परंपरागत जो खिलौने हैं उसका कैसे जोड़ा जाए उसका एक छोटा-सा प्रदर्शन मैंने अभी उनके प्रयोग देखे, मैं देख रहा था एक बहुत ही सामान्य प्रकार की टेक्नोलोजी को विकसित किया गया है लेकिन वो उनके लिए बहुत बड़ी उपयोगिता है वरना वो लंबे समय अरसे से वो ही करते रहते थे। उसके कारण उनके Production में Quality, Production में Quantity और उसके कारण वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की संभावनाएं और हमारे Handicrafts की विश्व बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं। आज हम उनको Online Marketing की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। युक्ति, जो अभियान है उसके माध्यम से हमारे जो कलाकार हैं, काश्तकारों को ,हमारे विश्वकर्मा हैं ये इन सभी विश्वकर्माओं के हाथ में हुनर देने का उनका प्रयास। उनके पास जो skill है उसको Technology के लिए Up-gradation करने का प्रयास। उस Technology में नई Research हो उनको Provide हो, उस दिशा में प्रयास बढ़ रहे हैं।

हमारे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो बहुत होते रहते हैं। कई जगहों पर होते हैं। बनारस में एक विशेष रूप से भी आरंभ किया है। हमारे टूरिज्म को बढ़ावा देने में इसकी बहुत बड़ी ताकत है। आप देखते होंगे कि दुनिया ने, हम ये तो गर्व करते थे कि हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने हमें योग दिया holistic health के लिए preventive health के लिए योग की हमें विरासत मिली और धीरे-धीरे दुनिया को भी लगने लगा योग है क्या चीज और दुनिया में लोग पहुंच गए। नाक पकड़कर के डॉलर भी कमाने लग गए। लेकिन ये शास्त्र आज के संकटों के युग में जी रहे मानव को एक संतुलित जीवन जीने की ताकत कैसे मिले। योग बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। मैं सितंबर में UN में गया था और UN में पहली बार मुझे भाषण करने का दायित्व था। मैंने उस दिन कहा कि हम एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएं और मैंने प्रस्तावित किया था 21 जून। सामान्य रूप से इस प्रकार के जब प्रस्ताव आते हैं तो उसको पारित होने में डेढ़ साल, दो साल, ढ़ाई साल लग जाते हैं। अब तक ऐसे जितने प्रस्ताव आए हैं उसमें ज्यादा से ज्यादा 150-160 देशों नें सहभागिता दिखाई है। जब योग का प्रस्ताव रखा मुझे आज बड़े आनंद और गर्व के साथ कहना है और बनारस के प्रतिनिधि के नाते बनारस के नागरिकों को ये हिसाब देते हुए, मुझे गर्व होता है कि 177 Countries Co- sponsor बनी जो एक World Record है। इस प्रकार के प्रस्ताव में 177 Countries का Co- sponsor बनना एक World Record है और जिस काम में डेढ़-दो साल लगते हैं वो काम करीब-करीब 100 दिन में पूरा हो गया। UN ने इसे 21 जून को घोषित कर दिया ये भी अपने आप में एक World Record है।

हमारी सांस्कृतिक विरासत की एक ताकत है। हम दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ कैसे ले जाएं। हमारा गीत-संगीत, नृत्य, नाट्य, कला, साहित्य कितनी बड़ी विरासत है। सूरज उगने से पहले कौन-सा संगीत, सूरज उगने के बाद कौन-सा संगीत यहां तक कि बारीक रेखाएं बनाने वाला काम हमारे पूर्वजों ने किया है और दुनिया में संगीत तो बहुत प्रकार के हैं लेकिन ज्यादातर संगीत तन को डोलाते हैं बहुत कम संगीत मन को डोलाते हैं। हम उस संगीत के धनी हैं जो मन को डोलाता है और मन को डोलाने वाले संगीत को विश्व के अंदर कैसे रखें यही प्रयासों से वो आगे बढ़ने वाला है लेकिन मेरे मन में विचार है क्या बनारस के कुछ स्कूल, स्कूल हो, कॉलेज हो आगे आ सकते हैं क्या और बनारस के जीवन पर ही एक विषय पर ही एक स्कूल की Mastery हो बनारस की विरासत पर, कोई एक स्कूल हो जिसकी तुलसी पर Mastery हो, कोई स्कूल हो जिसकी कबीर पर हो, ऐसी जो भी यहां की विरासत है उन सब पर और हर दिन शाम के समय एक घंटा उसी स्कूल में नाट्य मंच पर Daily उसका कार्यक्रम हो और जो Tourist आएं जिसको कबीर के पास जाना है उसके स्कूल में चला जाएगा, बैठेगा घंटे-भर, जिसको तुलसी के पास जाना है वो उस स्कूल में जाए बैठेगा घंटे भर , धीरे-धीरे स्कूल टिकट भी रख सकता है अगर popular हो जाएगी तो स्कूल की income भी बढ़ सकती है लेकिन काशी में आया हुआ Tourist वो आएगा हमारे पूर्वजों के प्रयासों के कारण, बाबा भोलेनाथ के कारण, मां गंगा के कारण, लेकिन रुकेगा हमारे प्रयासों के कारण। आने वाला है उसके लिए कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं क्योंकि वो जन्म से ही तय करके बैठा है कि जाने है एक बार बाबा के दरबार में जाना है लेकिन वो एक रात यहां तब रुकेगा उसके लिए हम ऐसी व्यवस्था करें तब ऐसी व्यवस्था विकसित करें और एक बार रात रुक गया तो यहां के 5-50 नौजवानों को रोजगार मिलना ही मिलना है। वो 200-500-1000 रुपए खर्च करके जाएगा जो हमारे बनारस की इकॉनोमी को चलाएगा और हर दिन ऐसे हजारों लोग आते हैं और रुकते हैं तो पूरी Economy यहां कितनी बढ़ सकती है लेकिन इसके लिए ये छोटी-छोटी चीजें काम आ सकती हैं।

हमारे हर स्कूल में कैसा हो, हमारे जो सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, परंपरागत जो हमारे ज्ञान-विज्ञान हैं उसको तो प्रस्तुत करे लेकिन साथ-साथ समय की मांग इस प्रकार की स्पर्धाएं हो सकती हैं, मान लीजिए ऐसे नाट्य लेखक हो जो स्वच्छता पर ही बड़े Touchy नाटक लिखें अगर स्वच्छता के कारण गरीब को कितना फायदा होता है आज गंदगी के कारण Average एक गरीब को सात हजार रुपए दवाई का खर्चा आता है अगर हम स्वच्छता कर लें तो गरीब का सात हजार रुपए बच जाता है। तीन लोगों का परिवार है तो 21 हजार रुपए बच जाता है। ये स्वच्छता का कार्यक्रम एक बहुत बड़ा अर्थ कारण भी उसके साथ जुड़ा हुआ है और स्वच्छता ही है जो टूरिज्म की लिए बहुत बड़ी आवश्यकता होती है। क्या हमारे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाट्य मंचन में ऐसे मंचन, ऐसे काव्य मंचन, ऐसे गीत, कवि सम्मेलन हो तो स्वच्छता पर क्यों न हो, उसी प्रकार से बेटी बचाओ भारत जैसा देश जहां नारी के गौरव की बड़ी गाथाएं हम सुनते हैं। इसी धरती की बेटी रानी लक्ष्मीबाई को हम याद करते हैं लेकिन उसी देश में बटी को मां के गर्भ में मार देते हैं। इससे बड़ा कोई पाप हो नहीं सकता है। क्या हमारे नाट्य मंचन पर हमारे कलाकारों के माध्यम से लगातार बार-बार हमारी कविताओं में, हमारे नाट्य मंचों पर, हमारे संवाद में, हमारे लेखन में बेटी बचाओ जैसे अभियान हम घर-घर पहुंच सकते हैं।

भारत जैसा देश जहां चींटी को भी अन्न खिलाना ये हमारी परंपरा रही है, गाय को भी खिलाना, ये हमारी परंपरा रही है। उस देश में कुपोषण, हमारे बालकों को……उस देश में गर्भवती माता कुपोषित हो इससे बड़ी पीड़ा की बात क्या हो सकती है। क्या हमारे नाट्य मंचन के द्वारा, क्या हमारी सांस्कृतिक धरोहर के द्वारा से हम इन चीजों को प्रलोभन के उद्देश्य में ला सकते हैं क्या? मैं कला, साहित्य जगत के लोगों से आग्रह करूंगा कि नए रूप में देश में झकझोरने के लिए कुछ करें।

जब आजादी का आंदोलन चला था तब ये ही साहित्यकार और कलाकार थे जिनकी कलम ने देश को खड़ा कर दिया था। स्वतंत्र भारत में सुशासन का मंत्र लेकर चल रहे तब ये ही हमारे कला और साहित्य के लोगों की कलम के माध्यम से एक राष्ट्र में नवजागरण का माहौल बना सकते हैं।

मैं उन सबको निमंत्रित करता हूं कि सांस्कृतिक सप्ताह यहां मनाया जा रहा है उसके साथ इसका भी यहां चिंतन हो, मनन हो और देश के लिए इस प्रकार की स्पर्धाएं हो और देश के लिए इस प्रकार का काम हो।

मुझे विश्वास है कि इस प्रयास से सपने पूरे हो सकते हैं साथियों, देश दुनिया में नाम रोशन कर सकता है। मैं अनुभव से कह सकता हूं, 6 महीने के मेरे अनुभव से कह सकता हूं पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है हम तैयार नहीं है, हम तैयार नहीं है हमें अपने आप को तैयार करना है, विश्व तैयार बैठा है।

मैं फिर एक बार पंडित मदन मोहन मालवीय जी की धरती को प्रणाम करता हूं, उस महापुरुष को प्रणाम करता हूं। आपको बहुत-बुहत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद

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Text of PM Modi's Speech at public meeting in Mathurapur, West Bengal
May 16, 2019
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The election results of 23rd May will provide a reality check to the arrogant and repressive regime of Mamata Didi: PM Modi
With renewed supprt from the people, the BJP will make reviving Bengali culture a priority: Prime Minister Modi

 

भारत माता की…जय

भारत माता की…जय

भारत माता की…जय

गंगा के तट पर बसे आप सभी साथियो को गंगा मां के इस बेटे का प्रणाम।

भाइयो और बहनो, 2019 के इस चुनाव अभियान में पूरे देश ने अपने इस सेवक को भरपूर समर्थन दिया है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग एक विशिष्ट दायित्व निभाने जा रहे हैं। उनका ये सेवक एक मजबूत सरकार बना पाए, बुलंद हौसले वाली सरकार बना पाए, इसीलिए पश्चिम बंगाल कि जनता ने ठान लिया है की वो बीजेपी को 300 सीटें पार कराएगी। भाइयो-बहनो, अभी मैं हेलीपैड से उतरा, मुझे वहां गाड़ी से बाहर निकल कर रोड शो करना पड़ा। जितने लोग मैं यहां देख रहा हूं, इससे 3 गुना ज्यादा वहां हेलीपैड के पास दोनों तरफ खड़े थे। ये आपका अद्भुत प्यार मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ये जो मंच पर चढ़ गए उनको नीचे उतारिए, ये पूरा मंच नीचे गिरेगा। वो लाल शर्ट वाले सज्जन, आप नीचे आइए भैया, जो ऊपर हैं सब नीचे आ जाइए। देखिए आपका कोई भी नुकसान वो मेरा नुकसान है। कृपा करके नीचे आ जाइए। देखिए कभी चोट लग जाएगी तो मुझे बहुत दुख होगा भैया। शाबाश, बहुत समझदार लोग हैं।

बहनो और भाइयो, बीजेपी पर इस विशेष आशीर्वाद के साथ ही बंगाल की जनता, दीदी को लोकतंत्र का मतलब भी समझाने जा रही है। जिस प्रकार दीदी, पश्चिम बंगाल को अपनी और अपने भतीजे की जागीर समझ बैठी है, जिस तरह की हरकतें कर रही है, उसे देश भली-भांति जान गया है।

साथियो, चुनाव प्रचार के दौरान और खासकर बीते 3-4 दिन से यहां जो हो रहा है, वो आप सभी देख रहे हैं। टीएमसी के गुंडों ने जो नर्क यहां बना रखा है, जिस प्रकार की हिंसा यहां फैला रखी है, उसके कारण गणतंत्र बदनाम हुआ है। टीएमसी के इन गुंडों ने जिस प्रकार का तूफान मचा दिया और एक कमरे में बंद जहां ताला लगा हुआ है, वहां पर रात को महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की मूर्ति को तोड़ दिया गया। उस कॉलेज में CCTV कैमरा लगे हुए हैं। क्या कारण है सरकार जैसे नारदा-शारदा के सबूत मिटाए, वैसे इसके सबूत भी मिटाने में लगी है। ये साफ दिखाता है कि वोटबैंक की राजनीति के लिए दीदी किस स्तर पर जा सकती है।  

साथियो, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी सिर्फ बंगाल के ही नहीं पूरे देश के सपूत थे। उनकी मूर्ति को नुकसान पहुंचाकर, जिन लोगों ने काम किया है, ये पाप किया है मूर्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को कड़ी कार्रवाई की जानी, कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए, ये मेरी मांग है। भाइयो और बहनो, स्वामी विवेकानंद से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी तक भारतीय जनता पार्टी के चिंतन को गढ़ने में बंगाल की संस्कृति का बहुत बड़ा योगदान रहा है। बंगाल के गौरव की रक्षा करना, ये भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकता है। आज ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी जहां भी होंगे, वो देख रहे होंगे की कौन सा दल बंगाल के गौरव की रक्षा के लिए लड़ रहा है और कौन घुसपैठियों की रक्षा लिए काम कर रहा है।   

साथियो, ये भाजपा ही है जिसने बंगाल में हो रहे अत्याचार के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई। यहां दुर्गा पूजा को लेकर दिक्कत है, सरस्वती पूजा को लेकर दिक्कत है, जय श्री राम बोलना भी यहां गुनाह हो गया है। बंगाल की जनता कुछ वर्षों से इन बातों से बहुत ज्यादा परेशान थी। इन विषयों को राष्ट्रीय पटल पर कौन लेकर के आया, कौन सी पार्टी आज बंगाल की आवाज बनी है? इसका जवाब एक ही है और वो है भारतीय जनता पार्टी।

भाइयो और बहनो, हार की हताशा दीदी को इस तरह से डरा रही है कि वो सरेआम धमकियों पर उतर आई है। आज सुबह-सुबह ही मुझे जेल भेजने की धमकी दी गई है। कल मीडिया में मैंने देखा कि दीदी ने बीजेपी के दफ्तर पर, बीजेपी के ऑफिस पर कब्जा करने की भी धमकी दी है। दीदी, बीजेपी के कार्यकर्ताओं के घर पर कब्जा करने की भी धमकी दे रही है। दीदी, जनता के बीच आपकी जो पहचान बनी है, उसका कारण जमीन और प्रॉपर्टी के लिए आपकी अंधी दौड़ है। इसी मानसिकता से अब आपको बीजेपी के कार्यालयों को भी हड़पना है, इसी मानसिकता से पश्चिम बंगाल आपसे परेशान है और आपका बोरिया-बिस्तर पैक करने की ठान चुका है। ममता दीदी, चुनाव में जय और पराजय तो आता जाता रहता है। ये लोकतंत्र का हिस्सा है। कभी इसी बंगाल की जनता ने आपको इतना स्नेह दिया था, आज वही जनता आज खुले आम आपको हटाना चाहती है। भयभीत मत होइए दीदी, ये बंगाल की सच्चाई को स्वीकार कीजिए।

भाइयो और बहनो, दीदी को पश्चिम बंगाल के सामान्य मानवी की जरा भी चिंता नहीं है, सिर्फ और सिर्फ सत्ता का अहंकार है। वो भारत के प्रधानमंत्री को, अपना प्रधानमंत्री नहीं मानती, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते वो थकती नहीं हैं। वो बंगाल के बच्चों को, बंगाल की बेटियों को बात-बात पर जेल में ठूंस देती है, लेकिन घुसपैठियों और तस्करों को उन्होंने खुली छूट दी है। दीदी के गुंडे बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर हमले करते हैं, उन्हें फांसी पर लटका देते हैं, लेकिन दीदी ऐसा करने वालों को और आगे बढ़ाती है। आखिर किस दिशा में बंगाल को वो ले जाना चाह रही है।

भाइयो और बहनो, अपने भतीजे के साथ मिलकर इन्होंने टोलाबाजों और तस्करों का एक सिंडिकेट चला रखा है। जिसने बंगाली मानुष को परेशान कर के रखा है और पश्चिम बंगाल के विकास पर स्पीड ब्रेकर लगा रखा है।

भाइयो और बहनो, पूरे देश में किसानों के बैंक के खाते में मोदी सरकार सीधे पैसे जमा कर रही है, लेकिन दीदी की सरकार सोई हुई है। पूरे देश में गरीब परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है, लेकिन दीदी ने उसमें भी यहां के गरीबों को वंचित कर दिया है।  

भाइयो और बहनो, गरीबों की जिंदगी आसान बनाने वाले हर काम में दीदी लूट का रास्ता निकाल रही है। दिल्ली से आपका ये सेवक, जो आपके लिए मदद भेजता है उसमें वो अपना स्टीकर लगाती है ताकि आसानी से टोलाबाजी की जा सके। भाइयो बहनो, ये जगह बहुत छोटी है, आप आगे आने की कोशिश मत कीजिए, आपके प्यार के लिए मैं आपका आभारी हूं। आप एक दूसरे को धक्का मत लगाइये। देखिए कुछ माताएं छोटे बच्चे भी लेकर आयी हैं, उनको परेशानी नहीं होनी चाहिए। आप इतना प्यार दे रहे हो, इतना आशीर्वाद दे रहे हो, बस थोड़ी धीरज रखो।  

भाइयो बहनो, सस्ते राशन की योजना हो, घर बनाने की योजना, सड़क बनाने की योजना और सभी केंद्रीय योजनाओं पर दीदी ने अपना स्टीकर लगा दिया है। अरे! स्टीकर दीदी, अपना स्टीकर लगाएं इसे मुझे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जरा काम तो ढंग से करिए, काम तो जरा देश के लिए करिए। ये देश का काम है, गरीबों का है इतना तो ईमानदारी रखिए, अरे आपको भी पुण्य मिलेगा।

भाइयो और बहनो, पूरे देश में गांव की सड़कें तेज गति से बन रही है लेकिन पश्चिम बंगाल में हालत खराब है। गंगा जी पर पुल तक यहां की सरकार नहीं बना पा रही है, जबकि हमारा प्रयास की है देश के समुद्री किनारों की कनेक्टिविटी सशक्त हो। इसके लिए देश भर में सागरमाला के तहत बंदरगाहों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। गंगा जी पर जैसे हल्दिया से वाराणसी तक जल मार्ग को विकसित किया गया है, वैसे ही दूसरी नदियों के जल मार्ग पर भी काम चल रहा है। इससे समुद्री किनारे पर बसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, यहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाइयो और बहनो, हमारे मछुआरे साथियो की सुविधा के लिए हम व्यापक काम कर रहे हैं। हमने घोषणा की है कि मछुआरों के लिए एक अलग मंत्रालय विभाग बनाया जाएगा। अभी तक पशुपालन विभाग के तहत ही मछली के कारोबार का संचालन होता था। अब अलग विभाग ये सारे काम करेगा। इतना ही नहीं अब मछुआरों के लिए भी किसानों की तरह किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी गई है।   

साथियो, एक तरफ हम लोगों का जीवन आसान बनाने में जुटे हैं, वही तृणमूल अपनी गुंडागर्दी के दम पर आपका जीवन मुश्किल बना रही है, इस गोरख धंधे को बंद करना जरूरी है। आपको एक ही बात याद रखनी है, चुप चाप-कमल छाप

 

मेरे साथ एक नारा बोलेंगे, आप सब मेरे साथ एक नारा बोलेंगे, सब के सब बोलेंगे, सब के सब बोलेंगे? मैं कहूंगा चुप चाप आप कहेंगे कमल छाप। चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप और दूसरा नारा बुलवाता हूं, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ। बूथ=-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ। चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप।   

भाइयो-बहनो, कमल छाप पर पड़ा हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, इनकी सरकार, उनके गुंडे, उनका जुल्म, आपको कुछ नहीं कर सकता। बूथ में जाइए और किसी और को बटन मत दबाने देना, आप खुद अपनी उंगली से कमल के निशान पर बटन दबाना। मतदान करने जाएंगे, सब के सब जाएंगे, भारी मतदान करेंगे, भाजपा को जिताएंगे?

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। आप इतनी बड़ी मात्रा में आशीर्वाद देने आए, अब दोनों हाथ ऊपर कर के मुट्ठी बंद कर के मेरे साथ बोलिए

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

बहुत बहुत धन्यवाद।