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उपस्थित सभी महानुभाव,

आप सबको क्रिसमस के पावन पर्व की बुहत-बहुत शुभकामनाएं। ये आज सौभाग्य है कि 25 दिसंबर, पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जन्म जयंती पर, मुझे उस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जिसके कण-कण पर पंडित जी के सपने बसे हुए हैं। जिनकी अंगुली पकड़ कर के हमें बड़े होने का सौभाग्य मिला, जिनके मार्गदर्शन में हमें काम करने का सौभाग्य मिला ऐसे अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी आज जन्मदिन है और आज जहां पर पंडित जी का सपना साकार हुआ, उस धरती के नरेश उनकी पुण्यतिथि का भी अवसर है। उन सभी महापुरुषों को नमन करते हुए, आज एक प्रकार से ये कार्यक्रम अपने आप में एक पंचामृत है। एक ही समारोह में अनेक कार्यक्रमों का आज कोई-न-कोई रूप में आपके सामने प्रस्तुतिकरण हो रहा है। कहीं शिलान्यास हो रहा है तो कहीं युक्ति का Promotion हो रहा है तो Teachers’ Training की व्यवस्था हो रही है तो काशी जिसकी पहचान में एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि यहां कि सांस्कृतिक विरासत उन सभी का एक साथ आज आपके बीच में उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

मैं विशेष रूप से इस बात की चर्चा करना चाहता हूं कि जब-जब मानवजाति ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है तब-तब भारत ने विश्व गुरू की भूमिका निभाई है और 21वीं सदी ज्ञान की सदी है मतलब की 21वीं सदी भारत की बहुत बड़ी जिम्मेवारियों की भी सदी है और अगर ज्ञान युग ही हमारी विरासत है तो भारत ने उस एक क्षेत्र में विश्व के उपयोगी कुछ न कुछ योगदान देने की समय की मांग है। मनुष्य का पूर्णत्व Technology में समाहित नहीं हो सकता है और पूर्णत्व के बिना मनुष्य मानव कल्याण की धरोहर नहीं बन सकता है और इसलिए पूर्णत्व के लक्ष्य को प्राप्त करना उसी अगर मकसद को लेकर के चलते हैं तो विज्ञान हो, Technology हो नए-नए Innovations हो, Inventions हो लेकिन उस बीच में भी एक मानव मन एक परिपूर्ण मानव मन ये भी विश्व की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

हमारी शिक्षा व्यवस्था Robot पैदा करने के लिए नहीं है। Robot तो शायद 5-50 वैज्ञानिक मिलकर शायद लेबोरेटरी में पैदा कर देंगे, लेकिन नरकर्णी करे तो नारायण हो जाए। ये जिस भूमि का संदेश है वहां तो व्यक्तित्व का संपूर्णतम विकास यही परिलक्षित होता है और इसलिए इस धरती से जो आवाज उठी थी, इस धरती से जो संस्कार की गंगा बही थी उसमें संस्कृति की शिक्षा तो थी लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण था शिक्षा की संस्कृति और आज कहीं ऐसा तो नहीं है सदियों से संजोयी हुई हमारी शैक्षिक परंपरा है, जो एक संस्कृतिक विरासत के रूप में विकसित हुई है। वो शिक्षा की संस्कृति तो लुप्त नहीं हो रही है? वो भी तो कहीं प्रदूषित नहीं हो रही है? और तब जाकर के आवश्यकता है कि कालवाह्य चीजों को छोड़कर के उज्जवलतम भविष्य की ओर नजर रखते हुए पुरानी धरोहर के अधिष्ठान को संजोते हुए हम किस प्रकार की व्यवस्था को विकसित करें जो आने वाली सदियों तक मानव कल्याण के काम आएं।

हम दुनिया के किसी भी महापुरुष का अगर जीवन चरित्र पढ़ेंगे, तो दो बातें बहुत स्वाभाविक रूप से उभर कर के आती हैं। अगर कोई पूछे कि आपके जीवन की सफलता के कारण तो बहुत एक लोगों से एक बात है कि एक मेरी मां का योगदान, हर कोई कहता है और दूसरा मेरे शिक्षक का योगदान। कोई ऐसा महापुरुष नहीं होगा जिसने ये न कहा हो कि मेरे शिक्षक का बुहत बड़ा contribution है, मेरी जिंदगी को बनाने में, अगर ये हमें सच्चाई को हम स्वीकार करते हैं तो हम ये बहुमूल्य जो हमारी धरोहर है इसको हम और अधिक तेजस्वी कैसे बनाएं और अधिक प्राणवान कैसे बनाएं और उसी में से विचार आया कि, वो देश जिसके पास इतना बड़ा युवा सामर्थ्य है, युवा शक्ति है।

आज पूरे विश्व को उत्तम से उत्तम शिक्षकों की बहुत बड़ी खोट है, कमी है। आप कितने ही धनी परिवार से मिलिए, कितने ही सुखी परिवार से मिलिए, उनको पूछिए किसी एक चीज की आपको आवश्यकता लगती है तो क्या लगती है। अरबों-खरबों रुपयों का मालिक होगा, घर में हर प्रकार का सुख-वैभव होगा तो वो ये कहेगा कि मुझे अच्छा टीचर चाहिए मेरे बच्चों के लिए। आप अपने ड्राइवर से भी पूछिए कि आपकी क्या इच्छा है तो ड्राइवर भी कहता है कि मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षी ही मेरी कामना है। अच्छी शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के दायरे में नहीं आती। Infrastructure तो एक व्यवस्था है। अच्छी शिक्षा अच्छे शिक्षकों से जुड़ी हुई होती है और इसलिए अच्छे शिक्षकों का निर्माण कैसे हो और हम एक नए तरीके से कैसे सोचें?

आज 12 वीं के बीएड, एमएड वगैरह होता है वो आते हैं, ज्यादातर बहुत पहले से ही जिसने तय किया कि मुझे शिक्षक बनना है ऐसे बहुत कम लोग होते हैं। ज्यादातर कुछ न कुछ बनने का try करते-करके करके हुए आखिर कर यहां चल पड़ते हैं। मैं यहां के लोगों की बात नहीं कर रहा हूं। हम एक माहौल बना सकते हैं कि 10वीं,12वीं की विद्यार्थी अवस्था में विद्यार्थियों के मन में एक सपना हो मैं एक उत्तम शिक्षक बनना चाहता हूं। ये कैसे बोया जाए, ये environment कैसे create किया जाए? और 12वीं के बाद पहले Graduation के बाद law faculty में जाते थे और वकालत धीरे-धीरे बदलाव आया और 12वीं के बाद ही पांच Law Faculty में जाते हैं और lawyer बनकर आते हैं। क्या 10वीं और 12वीं के बाद ही Teacher का एक पूर्ण समय का Course शुरू हो सकता है और उसमें Subject specific मिले और जब एक विद्यार्थी जिसे पता है कि मुझे Teacher बनना है तो Classroom में वो सिर्फ Exam देने के लिए पढ़ता नहीं है वो अपने शिक्षक की हर बारीकी को देखता है और हर चीज में सोचता है कि मैं शिक्षक बनूंगा तो कैसे करूंगा, मैं शिक्षक बनूंगा ये उसके मन में रहता है और ये एक पूरा Culture बदलने की आवश्यकता है।

उसके साथ-साथ भले ही वो विज्ञान का शिक्षक हो, गणित का शिक्षक हो उसको हमारी परंपराओं का ज्ञान होना चाहिए। उसे Child Psychology का पता होना चाहिए, उसको विद्यार्थियों को Counselling कैसे करना चाहिए ये सीखना चाहिए, उसे विद्यार्थियों को मित्रवत व्यवहार कैसे करना है ये सीखाना चाहिए और ये चीजें Training से हो सकती हैं, ऐसा नहीं है कि ये नहीं हो सकता है। सब कुछ Training से हो सकता है और हम इस प्रकार के उत्तम शिक्षकों को तैयार करें मुझे विश्वास है कि दुनिया को जितने शिक्षकों की आवश्यकता है, हम पूरे विश्व को, भारत के पास इतना बड़ा युवा धन है लाखों की तादाद में हम शिक्षक Export कर सकते हैं। Already मांग तो है ही है हमें योग्यता के साथ लोगों को तैयार करने की आवश्यकता है और एक व्यापारी जाता है बाहर तो Dollar या Pound ले आता है लेकिन एक शिक्षक जाता है तो पूरी-पूरी पीढ़ी को अपने साथ ले आता है। हम कल्पना कर सकते हैं कितना बड़ा काम हम वैश्विक स्तर पर कर सकते हैं और उसी एक सपने को साकार करने के लिए पंड़ित मदन मोहन मालवीय जी के नाम से इस मिशन को प्रारंभ किया गया है। और आज उसका शुभारंभ करने का मुझे अवसर मिला है।

आज पूरे विश्व में भारत के Handicraft तरफ लोगों का ध्यान है, आकर्षण है लेकिन हमारी इस पुरानी पद्धतियों से बनी हुई चीजें Quantum भी कम होता है, Wastage भी बहुत होता है, समय भी बहुत जाता है और इसके कारण एक दिन में वो पांच खिलौने बनाता है तो पेट नहीं भरता है लेकिन अगर Technology के उपयोग से 25 खिलौने बनाता है तो उसका पेट भी भरता है, बाजार में जाता है और इसलिए आधुनिक विज्ञान और Technology को हमारे परंपरागत जो खिलौने हैं उसका कैसे जोड़ा जाए उसका एक छोटा-सा प्रदर्शन मैंने अभी उनके प्रयोग देखे, मैं देख रहा था एक बहुत ही सामान्य प्रकार की टेक्नोलोजी को विकसित किया गया है लेकिन वो उनके लिए बहुत बड़ी उपयोगिता है वरना वो लंबे समय अरसे से वो ही करते रहते थे। उसके कारण उनके Production में Quality, Production में Quantity और उसके कारण वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की संभावनाएं और हमारे Handicrafts की विश्व बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं। आज हम उनको Online Marketing की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। युक्ति, जो अभियान है उसके माध्यम से हमारे जो कलाकार हैं, काश्तकारों को ,हमारे विश्वकर्मा हैं ये इन सभी विश्वकर्माओं के हाथ में हुनर देने का उनका प्रयास। उनके पास जो skill है उसको Technology के लिए Up-gradation करने का प्रयास। उस Technology में नई Research हो उनको Provide हो, उस दिशा में प्रयास बढ़ रहे हैं।

हमारे देश में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो बहुत होते रहते हैं। कई जगहों पर होते हैं। बनारस में एक विशेष रूप से भी आरंभ किया है। हमारे टूरिज्म को बढ़ावा देने में इसकी बहुत बड़ी ताकत है। आप देखते होंगे कि दुनिया ने, हम ये तो गर्व करते थे कि हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने हमें योग दिया holistic health के लिए preventive health के लिए योग की हमें विरासत मिली और धीरे-धीरे दुनिया को भी लगने लगा योग है क्या चीज और दुनिया में लोग पहुंच गए। नाक पकड़कर के डॉलर भी कमाने लग गए। लेकिन ये शास्त्र आज के संकटों के युग में जी रहे मानव को एक संतुलित जीवन जीने की ताकत कैसे मिले। योग बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। मैं सितंबर में UN में गया था और UN में पहली बार मुझे भाषण करने का दायित्व था। मैंने उस दिन कहा कि हम एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएं और मैंने प्रस्तावित किया था 21 जून। सामान्य रूप से इस प्रकार के जब प्रस्ताव आते हैं तो उसको पारित होने में डेढ़ साल, दो साल, ढ़ाई साल लग जाते हैं। अब तक ऐसे जितने प्रस्ताव आए हैं उसमें ज्यादा से ज्यादा 150-160 देशों नें सहभागिता दिखाई है। जब योग का प्रस्ताव रखा मुझे आज बड़े आनंद और गर्व के साथ कहना है और बनारस के प्रतिनिधि के नाते बनारस के नागरिकों को ये हिसाब देते हुए, मुझे गर्व होता है कि 177 Countries Co- sponsor बनी जो एक World Record है। इस प्रकार के प्रस्ताव में 177 Countries का Co- sponsor बनना एक World Record है और जिस काम में डेढ़-दो साल लगते हैं वो काम करीब-करीब 100 दिन में पूरा हो गया। UN ने इसे 21 जून को घोषित कर दिया ये भी अपने आप में एक World Record है।

हमारी सांस्कृतिक विरासत की एक ताकत है। हम दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ कैसे ले जाएं। हमारा गीत-संगीत, नृत्य, नाट्य, कला, साहित्य कितनी बड़ी विरासत है। सूरज उगने से पहले कौन-सा संगीत, सूरज उगने के बाद कौन-सा संगीत यहां तक कि बारीक रेखाएं बनाने वाला काम हमारे पूर्वजों ने किया है और दुनिया में संगीत तो बहुत प्रकार के हैं लेकिन ज्यादातर संगीत तन को डोलाते हैं बहुत कम संगीत मन को डोलाते हैं। हम उस संगीत के धनी हैं जो मन को डोलाता है और मन को डोलाने वाले संगीत को विश्व के अंदर कैसे रखें यही प्रयासों से वो आगे बढ़ने वाला है लेकिन मेरे मन में विचार है क्या बनारस के कुछ स्कूल, स्कूल हो, कॉलेज हो आगे आ सकते हैं क्या और बनारस के जीवन पर ही एक विषय पर ही एक स्कूल की Mastery हो बनारस की विरासत पर, कोई एक स्कूल हो जिसकी तुलसी पर Mastery हो, कोई स्कूल हो जिसकी कबीर पर हो, ऐसी जो भी यहां की विरासत है उन सब पर और हर दिन शाम के समय एक घंटा उसी स्कूल में नाट्य मंच पर Daily उसका कार्यक्रम हो और जो Tourist आएं जिसको कबीर के पास जाना है उसके स्कूल में चला जाएगा, बैठेगा घंटे-भर, जिसको तुलसी के पास जाना है वो उस स्कूल में जाए बैठेगा घंटे भर , धीरे-धीरे स्कूल टिकट भी रख सकता है अगर popular हो जाएगी तो स्कूल की income भी बढ़ सकती है लेकिन काशी में आया हुआ Tourist वो आएगा हमारे पूर्वजों के प्रयासों के कारण, बाबा भोलेनाथ के कारण, मां गंगा के कारण, लेकिन रुकेगा हमारे प्रयासों के कारण। आने वाला है उसके लिए कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं क्योंकि वो जन्म से ही तय करके बैठा है कि जाने है एक बार बाबा के दरबार में जाना है लेकिन वो एक रात यहां तब रुकेगा उसके लिए हम ऐसी व्यवस्था करें तब ऐसी व्यवस्था विकसित करें और एक बार रात रुक गया तो यहां के 5-50 नौजवानों को रोजगार मिलना ही मिलना है। वो 200-500-1000 रुपए खर्च करके जाएगा जो हमारे बनारस की इकॉनोमी को चलाएगा और हर दिन ऐसे हजारों लोग आते हैं और रुकते हैं तो पूरी Economy यहां कितनी बढ़ सकती है लेकिन इसके लिए ये छोटी-छोटी चीजें काम आ सकती हैं।

हमारे हर स्कूल में कैसा हो, हमारे जो सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, परंपरागत जो हमारे ज्ञान-विज्ञान हैं उसको तो प्रस्तुत करे लेकिन साथ-साथ समय की मांग इस प्रकार की स्पर्धाएं हो सकती हैं, मान लीजिए ऐसे नाट्य लेखक हो जो स्वच्छता पर ही बड़े Touchy नाटक लिखें अगर स्वच्छता के कारण गरीब को कितना फायदा होता है आज गंदगी के कारण Average एक गरीब को सात हजार रुपए दवाई का खर्चा आता है अगर हम स्वच्छता कर लें तो गरीब का सात हजार रुपए बच जाता है। तीन लोगों का परिवार है तो 21 हजार रुपए बच जाता है। ये स्वच्छता का कार्यक्रम एक बहुत बड़ा अर्थ कारण भी उसके साथ जुड़ा हुआ है और स्वच्छता ही है जो टूरिज्म की लिए बहुत बड़ी आवश्यकता होती है। क्या हमारे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाट्य मंचन में ऐसे मंचन, ऐसे काव्य मंचन, ऐसे गीत, कवि सम्मेलन हो तो स्वच्छता पर क्यों न हो, उसी प्रकार से बेटी बचाओ भारत जैसा देश जहां नारी के गौरव की बड़ी गाथाएं हम सुनते हैं। इसी धरती की बेटी रानी लक्ष्मीबाई को हम याद करते हैं लेकिन उसी देश में बटी को मां के गर्भ में मार देते हैं। इससे बड़ा कोई पाप हो नहीं सकता है। क्या हमारे नाट्य मंचन पर हमारे कलाकारों के माध्यम से लगातार बार-बार हमारी कविताओं में, हमारे नाट्य मंचों पर, हमारे संवाद में, हमारे लेखन में बेटी बचाओ जैसे अभियान हम घर-घर पहुंच सकते हैं।

भारत जैसा देश जहां चींटी को भी अन्न खिलाना ये हमारी परंपरा रही है, गाय को भी खिलाना, ये हमारी परंपरा रही है। उस देश में कुपोषण, हमारे बालकों को……उस देश में गर्भवती माता कुपोषित हो इससे बड़ी पीड़ा की बात क्या हो सकती है। क्या हमारे नाट्य मंचन के द्वारा, क्या हमारी सांस्कृतिक धरोहर के द्वारा से हम इन चीजों को प्रलोभन के उद्देश्य में ला सकते हैं क्या? मैं कला, साहित्य जगत के लोगों से आग्रह करूंगा कि नए रूप में देश में झकझोरने के लिए कुछ करें।

जब आजादी का आंदोलन चला था तब ये ही साहित्यकार और कलाकार थे जिनकी कलम ने देश को खड़ा कर दिया था। स्वतंत्र भारत में सुशासन का मंत्र लेकर चल रहे तब ये ही हमारे कला और साहित्य के लोगों की कलम के माध्यम से एक राष्ट्र में नवजागरण का माहौल बना सकते हैं।

मैं उन सबको निमंत्रित करता हूं कि सांस्कृतिक सप्ताह यहां मनाया जा रहा है उसके साथ इसका भी यहां चिंतन हो, मनन हो और देश के लिए इस प्रकार की स्पर्धाएं हो और देश के लिए इस प्रकार का काम हो।

मुझे विश्वास है कि इस प्रयास से सपने पूरे हो सकते हैं साथियों, देश दुनिया में नाम रोशन कर सकता है। मैं अनुभव से कह सकता हूं, 6 महीने के मेरे अनुभव से कह सकता हूं पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है हम तैयार नहीं है, हम तैयार नहीं है हमें अपने आप को तैयार करना है, विश्व तैयार बैठा है।

मैं फिर एक बार पंडित मदन मोहन मालवीय जी की धरती को प्रणाम करता हूं, उस महापुरुष को प्रणाम करता हूं। आपको बहुत-बुहत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद

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June 23, 2018
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सबी बेन भई पांवणा, ओरएं म्हारो राम राम जी।

विशाल संख्या में पधारे हुए राजगढ़ क्षेत्र के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

जून महीने की इस भयानक गर्मी में आप सभी का इतनी बड़ी संख्या में आना मेरे लिए, हम सभी सा‍थियों के लिए, एक बहुत बड़ा आशीर्वाद है। आपके इस स्नेह के आगे मैं सिर झुका करके नमन करता हूं। आपकी यही ऊर्जा, यही आशीर्वाद, भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता को आपकी सेवा करने के लिए नित्‍य नूतन प्रेरणा देता रहता है।

ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज 4 हज़ार करोड़ रुपए की मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के लोकार्पण के साथ-साथ पानी की तीन बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने का भी अवसर मिला। इन सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े हर व्यक्ति को, अपने सिर पर ईंटे उठाने वाले महानभावों को, तसला उठाने वाली माताओं, बहनों, भाइयों को, फावड़ा चलाने वालों को, छोटी-छोटी मशीनों से ले करके बड़े-बड़े यंत्र चलाने वाले को मैं इस सफलता के लिए प्रणाम करता हूं, उनका मैं अभिनंदन करता हूं।

गर्मी हो या बरसात, राष्ट्र निर्माण के जिस पुण्य कार्य में वे जुटे हैं, वो अतुलनीय है। मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, बटन दबाकर लोकार्पण करना एक महज औपचारिकता है, लेकिन इन परियोजनाओं का असली लोकार्पण तो आपके पसीने से हुआ है, आपके श्रम से हुआ है। आपके पसीने की महक से ये महक उठा है।  

आप जैसे करोड़ों लोगों के इसी श्रम से, इसी आशीर्वाद की वजह से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सफलतापूर्वक जनसेवा करते-करते, एक के बाद एक जनकल्‍याण के फैसले लेते-लेते चार वर्ष की यात्रा पूर्ण की है। इतनी बड़ी संख्या में आपका आना इस बात की गवाही दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर, उसकी नीतियों पर आपका कितना विश्वास है। जो लोग देश में भ्रम फैलाने में लगे हैं, झूठ फैलाने में लगे हैं, निराशा फैलाने में लगे हैं, वो जमीनी सच्चाई से किस तरह कट चुके हैं, आप इसकी साक्षात तस्वीर हैं।

ये भी बहुत बड़ा संयोग है कि आज 23 जून, देश के महान सपूत, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है। 23 जून के दिन कश्मीर में उनकी शंकास्पद मृत्यु हुई थी। आज के इस अवसर पर मैं डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुण्‍य स्‍मरण करता हूं, उनको नमन करता हूं, और आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

भाइयों और बहनों, डॉक्टर मुखर्जी कहा करते थे- कोई भी राष्ट्र सिर्फ अपनी ऊर्जा से ही सुरक्षित रह सकता है।‘ उनका भरोसा था देश के साधनों पर, संसाधनों पर, देश के प्रतिभाशाली लोगों पर।

स्वतंत्रता के बाद देश को हताशा से, निराशा से निकालने का उनका vision आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रहा है। देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के तौर पर उन्होंने देश की पहली औद्योगिक नीति बनाई। वे कहते थे-

“अगर सरकार, देश के शिक्षण संस्थान और औद्योगिक संगठन मिलकर उद्योगों को बढ़ावा देंगे, तो देश बहुत जल्द ही आर्थिक तौर पर भी स्वतंत्र हो जाएगा”।

शिक्षा से जुड़े क्षेत्र के लिए, महिला सशक्तिकरण के लिए, देश की परमाणु नीति को दिशा देने के लिए उन्होंने जो कार्य किया, जो विचार रखे वो उस दौर की सोच से भी बहुत आगे के थे। देश के विकास में जनभागीदारी का महत्व समझते हुए उन्होंने जो रास्ते सुझाए, वो आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

साथियों, डॉक्टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी कहते थे कि ‘शासन का पहला कर्तव्य धनहीन, गृहहीन जनता की सेवा और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का है”। यही वजह है कि देश का उद्योग मंत्री बनने से पहले जब वो बंगाल के वित्त मंत्री थे, finance minister थे, तब बहुत व्यापक स्तर पर उन्होंने भूमि सुधार का काम किया था। उनका मानना था कि शासन अंग्रेजों की तरह राज करने के लिए नहीं बल्कि नागरिकों के सपने पूरे करने के लिए होना चाहिए।

डॉक्‍टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सबसे ज्यादा महत्व शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को दिया। वो कहते थे कि "सरकार को शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, इसके लिए व्यापक सुविधाएं जुटानी चाहिए, युवाओं में छिपी प्रतिभा को निकालने के लिए उचित माहौल बनाया जाना चाहिए। ताकि हमारे युवा अपने गांव, अपने नगर की सेवा करने के लिए समर्थ बन सकें।“  डॉक्‍टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन विद्या, वित्त और विकास; विद्या, वित्त और विकास- इन तीन मूलभूत चिंतन से जुड़ी धाराओं का संगम था।

ये हमारे देश का दुर्भाग्य रहा, कि एक परिवार का महिमामंडन करने के लिए, देश के अनेक सपूतों को और उनके योगदान को जानबूझ करके छोटा कर दिया गया, भुला देने के भरपूर प्रयास किए गए।

साथियों, आज केंद्र हो या फिर देश के किसी भी राज्य में चलने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो, डॉक्टर मुखर्जी के विजन से अलग नहीं है। चाहे युवाओं के लिए स्किल इंडिया मिशन हो, स्टार्ट अप योजना हो, स्वरोजगार के लिए बिना बैंक गारंटी कर्ज देने की सुविधा देने वाली मुद्रा योजना हो या फिर मेक इन इंडिया हो, इनमें आपको डॉक्टर मुखर्जी के विचारों की झलक मिलेगी।

आपका ये राजगढ़ जिला भी अब इसी विजन के साथ पिछड़े होने की अपनी पहचान को छोड़ने जा रहा है। सरकार ने इसे आकांक्षी जिलों या Aspirational District के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया है। आपके जिले में अब स्वास्थ्य, शिक्षा, सफाई, पोषण, जल संरक्षण, कृषि जैसे विषयों पर और तेजी से काम किया जाएगा।

इन जिलों के गांवों में अब राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत जरूरी सुविधाओं को पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। सरकार अब ये सुनिश्चित कर रही है कि आने वाले समय में इन जिलों के हर गांव में, सभी के पास उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन हो; सौभाग्य योजना के तहत हर घर में बिजली कनेक्शन हो; जनधन योजना के तहत सभी के पास बैंक खाते हों; सभी को सुरक्षा बीमा का कवच मिला हो; इंद्र धनुष योजना के तहत हर गर्भवती महिला और बच्चे का टीकाकरण हो।

साथियों, ये कार्य पहले भी हो सकते थे, पहले की सरकारों को किसी ने रोका नहीं था। लेकिन ये दुर्भाग्य है कि देश पर लंबे समय तक जिस दल ने शासन किया, उन्होंने आप लोगों पर, आपकी मेहनत पर भरोसा नहीं किया था। उसने कभी देश के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं किया।

आप मुझे बताइए, पिछले चार वर्षों में भारत सरकार ने कभी भी निराशा की बात कही है? हताशा की बात कही है? हम क्‍या करें ये तो हो सकता है, नहीं हो सकता है। हमने हर बार संकल्‍प करके अच्‍छा करने के लिए कदम उठाए हैं, जी-जान से प्रयास किया है।

और इसलिए भाइयों, बहनों हम हमेशा एक आशा और विश्‍वास के साथ आगे बढ़ने वाले लोग हैं। साथियों, हमारी सरकार देश की आवश्यकताओं को समझते हुए, देश के संसाधनों पर भरोसा करते हुए, देश को 21वीं सदी में नई ऊँचाई पर पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है और प्रयत्‍नरत है।

बीते चार वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा और बीते 13 वर्षो में भारतीय जनता पार्टी की मध्‍य प्रदेश की सरकार ने गरीबों-पिछड़ों-शोषितों-वंचितों-किसानों को सशक्त करने का काम किया है। पिछले 5 वर्षों में मध्य प्रदेश में कृषि विकास दर सालाना औसतन 18 प्रतिशत रही है, जो देश में सबसे अधिक है। देश में दलहन के कुल उत्पादन की बात हो, तिलहन के कुल उत्पादन की बात हो, चना या सोयाबीन, टमाटर, लहसुन के उत्पादन में मध्य प्रदेश पूरे देश में नंबर एक रहा है। गेंहूं उत्पादन और अरहर, सरसो, आंवला, धनिया, इसके उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है और एक नंबर के दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा है।

शिवराज जी के शासन में मध्य प्रदेश ने विकास की नई गाथा लिखी है। आज यहां मोहनपुरा में सिंचाई परियोजना का लोकार्पण और तीन वॉटर सप्लाई स्कीमों पर काम शुरू होना, इस कड़ी का एक महत्‍वूपूर्ण हिस्सा है। ये परियोजना राजगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की भी बड़ी परियोजनाओं में से एक है।

साथियों, इस प्रोजेक्ट से सवा सात सौ गांव के किसान भाई-बहनों को सीधा लाभ होने वाला है। आने वाले दिनों में, इन गांवों की सवा लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर ना सिर्फ सिंचाई की व्यवस्था होगी बल्कि 400 गांवों में पीने के पानी की समस्या से भी लोगों को मुक्ति मिलेगी। और 400 गांवों में पीने के पानी की समस्‍या से मुक्ति मिलना, इसका मतलब यहां की लाखों माताओं-बहनों का आशीर्वाद मिलना होगा। पानी की कठिनाई माताएं-बहने जितनी समझती हैं, शायद ही कोई और समझ सकता है। एक प्रकार से ये माताओं-बहनों की उत्‍तम सेवा का काम हुआ है।

ये परियोजना ना सिर्फ तेजी से होते विकास का उदाहरण है बल्कि सरकार के काम करने के तौर तरीके का भी सबूत है। लगभग 4 वर्ष के भीतर इस परियोजना को पूरा कर लिया  गया है। इसमें micro irrigation का विशेष ध्यान रखा गया है, यानि खुली नहर को नहीं बल्कि पाइपलाइन बिछाकर खेत तक पानी पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई है।

भाइयों और बहनों, यहां मालवा में एक कहावत है- मालव धरती गगन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर । ये कहावत पुरानी है-

यानि एक जमाना था जब मालवा की धरती में ना तो धन धान्य की कमी थी और ना ही पानी की कोई कमी थी। कदम-कदम पर यहां पानी मिला करता था। लेकिन पहले की सरकारों ने जिस तरह का काम किया, उसमें पानी के साथ ये कहावत भी संकट में पड़ गई। लेकिन बीते वर्षों में शिवराज जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने मालवा और मध्य प्रदेश की पुरानी पहचान को लौटाने का गंभीर प्रयास किया है।

साथियों, 2007 में सिंचाई परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सिर्फ साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई होती थी। शिवराज जी के शासन में अब ये बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गई है। जो लोग टीवी पर देश में सुन रहे हैं, उनको भी मैं कहता हूं भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने से पहले साढ़े सात लाख हेक्‍टेयर और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में 40 लाख हेक्‍टेयर। अब तो राज्य सरकार इसे 2024 तक दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। Micro irrigation system के विस्तार के लिए 70 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

आप सभी को मैं यहां विश्वास दिलाने आया हूं कि जो लक्ष्य राज्य सरकार ने तय किया है, उससे भी अधिक हासिल करने का प्रयास किया जाएगा और भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ चलेगी।  

मध्य प्रदेश को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से भी पूरी मदद मिल रही है। राज्य में इस योजना के तहत 14 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मध्य प्रदेश को भी इस योजना के तहत करीब 1400 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना के माध्यम से ‘per drop more crop’ के मिशन को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। चार वर्षों के परिश्रम का परिणाम है कि देशभर में माइक्रो इरीगेशन का दायरा 25 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि मध्य प्रदेश की है।

साथियों, आजकल आप भी देख रहे होंगे कि सरकारी योजनाओं के बारे में वीडियो तकनीक और नमो एप्प के माध्यम से मैं अलग-अलग लोगों से बात कर रहा हूं। तीन दिन पहले ही मैंने देशभर के किसानों से बात की थी। इसी कार्यक्रम में मुझे झाबुआ के किसान भाई-बहनों से बात करने का अवसर मिला। झाबुआ की एक किसान बहन ने मुझे विस्तार से बताया कि कैसे ड्रिप इरिगेशन से उसकी टमाटर की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

साथियों, New India के नए सपने में देश के गांव और किसान की महत्वपूर्ण भूमिका है। और इसलिए New India के उदय के साथ ही किसानों की आय को दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में बीज से ले करके बाजार तक, एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं। 

साथियों, पिछले चार वर्षों में देशभर में लगभग 14 करोड़ soil health card बांटे गए हैं, जिसमें से लगभग सवा करोड़ यहां मध्य प्रदेश के मेरे किसान भाई-बहनों को भी मिले हैं। इसमें अब किसान भाईयों को आसानी से पता लग रहा है कि उनकी जमीन के लिए कौन सा उर्वरक कितनी मात्रा में उपयुक्त है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मध्य प्रदेश के भी 35 लाख से ज्यादा किसान उठा रहे हैं।

किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए देशभर की मंडियों को ऑनलाइन बाजार से जोड़ा जा रहा है। अब तक देश की पौने 600 मंडियों को E-NAM प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, मध्य प्रदेश भी, उसकी भी आज 58 मंडियां इसके साथ जुड़ गई हैं। वो दिन दूर नहीं जब देश का ज्यादा से ज्यादा किसान सीधे अपने गांव के कॉमन सर्विस सेंटर या अपने मोबाइल फोन से ही देश की किसी भी मंडी में सीधे अपनी फसल वो बेच सकेगा।

भाइयों और बहनों, सरकार गांव और गरीब के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठा रही है। विशेष रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े समाज की माताओं बहनों को जहरीले धुएं से मुक्ति दिलाने का काम निरंतर चल रहा है।

अब तक देश में 4 करोड़ से अधिक गरीब माताओं-बहनों को रसोई में मुफ्त एलपीजी सिलेंडर पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश में भी अब तक लगभग 40 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जा चुका है।

साथियों, ये सरकार श्रम का सम्मान करने वाली सरकार है। देश में अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न करने वाले उद्यमी कैसे आगे आएं, इसकी चिंता आज भारत सरकार कर रही है। श्रम के प्रति कुछ लोगों का रवैया भले ही सकारात्मक ना हो, वो रोजगार का मजाक उड़ाते हों, लेकिन इस सरकार के प्रयास आज सफलता के रूप में सबके सामने हैं।

देश में आज मुद्रा योजना के तहत छोटे से छोटे उद्यमियों को बिना बैंक गारंटी कर्ज दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश के भी 85 लाख से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया है।

भाइयों और बहनों, दिल्ली और भोपाल में लगा विकास का ये डबल इंजन पूरी शक्ति के साथ मध्‍य प्रदेश को आगे बढ़ रहा है।

मुझे याद है कि कभी मध्य प्रदेश की स्थिति ऐसी थी कि उसके साथ एक अपमानजनक शब्द जोड़ दिया गया था-और वो शब्‍द था जो हमें किसी को पसंद नहीं है, वो शब्‍द था- बीमारू। देश के बीमार राज्यों में मध्य प्रदेश को गिना जाता था। राज्य में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस को मध्य प्रदेश का ये अपमान कभी दिखता नहीं था, चुभता नहीं था।

जन सामान्य को अपनी प्रजा समझकर, हमेशा अपनी जय जयकार लगवाना, यही कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश के अंदर करते रहे और न ही आने वाले भविष्य पर उन्‍होंने कोई गौर किया।

राज्य को उस स्थिति से निकालकर देश के विकास का प्रमुख भागीदार बनाने का काम यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है। शिवराज जी को आपने एक पद दिया है लेकिन वो सेवक की तरह इस महान भूमि की, यहां की जनता की सेवा कर रहे हैं।

आज मध्य प्रदेश सफलता के जिस मार्ग पर है, उसके लिए मैं यहां के लोगों को, यहां की सरकार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

एक बार फिर आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आप सभी यहां भारी संख्या में आए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

मेरे साथ जोर से बोलिए, दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए –

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।