भारत के युवा विकसित भारत की यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं: प्रधानमंत्री
रोजगार मेला युवा शक्ति को नए अवसर प्रदान करने की हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत के युवाओं और टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस को लेकर पूरी दुनिया उत्साहित है और आज ग्लोबल कम्युनिटी भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहती है: पीएम
क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इन क्षेत्रों में बन रही पार्टनरशिप नए अवसर पैदा कर रही हैं: पीएम मोदी
हर भारतीय 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है: रोजगार मेले में पीएम मोदी
ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है; बेहतर संपर्क ने किसानों, छोटे व्यापारियों और छात्रों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं: प्रधानमंत्री
‘विकसित भारत’ का निर्माण ऐसे युवाओं के प्रयासों से होगा, जो अपने काम को देशसेवा का माध्यम मानते हैं: पीएम मोदी

साथियों,

आज देशभर के हजारों युवाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। आज 51 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिला है। आज आप सभी देश की विकास यात्रा में अहम भागीदार बन रहे हैं, जिम्मेदार भागीदार बन रहे हैं। रेलवे, बैंकिंग, डिफेंस, हेल्थ, एजूकेशन और दूसरे कई क्षेत्रों में आप सभी नई जिम्मेदारियां संभालने जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने में आप सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

साथियों,

यहां तक पहुंचने के लिए आप सभी ने लंबी तैयारी और कड़ा परिश्रम जरूर किया होगा। इस उपलब्धि के लिए मैं आपको भी और आपके परिवारजनों को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपको यहां तक पहुंचाने में आपके माता-पिता और परिवार का योगदान कम नहीं होता है। लेकिन इतना भी नहीं है, कि जैसे परिवार का योगदान होता है, समाज का भी बहुत बड़ा योगदान होता है, हमें यहां पहुंचाने के लिए। हम सिर्फ अपने कारण नहीं पहुंचते, सिर्फ अपने परिवार के कारण नहीं पहुंचते। इस विशाल देश के 140 करोड़ के नागरिकों के योगदान का भी बहुत बड़ा महत्व होता है। और इसलिए हमारा दायित्व खुद के प्रति, खुद के परिवार के प्रति, वैसे ही संपूर्ण समाज के प्रति भी रहता है। और मुझे विश्वास है कि इन सभी कामों के लिए आप अपने आप को और अधिक योग्य बनाएंगे। मैं आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आप सबको पता है अभी दो दिन पहले ही मैं 5 देशों की यात्रा करके लौटा हूं। कहने को तो ये सिर्फ पांच देशों की यात्रा थी, लेकिन इस दौरान मेरी दर्जनों देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियों के लीडर्स से बातें हुईं, विस्तार से चर्चा हुई, मुलाकात हुई, और हर जगह मैंने एक बात समान रूप से महसूस की है। दुनिया, भारत के युवाओं और भारत की टेक्नोलोजिक्ल प्रोग्रेस को लेकर बहुत उत्साहित है। आज दुनिया भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहती है। भारत भी दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है। इसका उद्देश्य यही है कि भारत के युवाओं को अवसर मिले, रोजगार मिले, उनका सामर्थ्य खिल उठे। साक्षात मैं चाहता हूं मेरे देश के नौजवानों को ग्लोबल एक्सपोजर भी मिले। इस यात्रा के दौरान, अब जैसे नीदरलैंड्स की मैं बात करूं, तो नीदरलैंड्स के साथ सेमीकंडक्टर्स, वॉटर, एग्रीकल्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर चर्चा हुई - स्वीडन के साथ आर्टिफ़िशियल (एआई) और डिजिटल इनोवेशन, उस पर सहयोग की बहुत सारी बातें हुई, - नॉर्वे के साथ ग्रीन टेक्नॉलॉजी और मेरिटाइम कोऑपरेशन की बात आगे बढ़ी है, UAE के साथ स्ट्रैटेजिक एनर्जी और टेक्नॉलॉजी पार्टनरशिप्स पर महत्वपूर्ण समझौते हुए, इटली के साथ डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, science & technology ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पार्टनरशिप्स पर एग्रीमेंट हुए।

साथियों,

इन सारे एग्रीमेंट्स का सीधा लाभ भारत के युवाओं को मिलने वाला है। और आपने देखा होगा, ये सारे विषय एक उज्जवल समर्थ भारत के भविष्य की गारंटी लेकर के आते हैं। क्योंकि हर नया निवेश, हर टेक्नॉलॉजी पार्टनरशिप, हर इंडस्ट्रियल कोलैबोरेशन, भारत के युवाओं के लिए नई अपॉरचुनिटीज तो लेकर के आता ही है, लेकिन अनगिनत नए अवसर तैयार करता है।

मेरे नौजवान साथियों,

हमें याद रखना है, ये वो सेक्टर्स हैं जिनमें आने वाला इंवेस्टमेंट और पार्टनरशिप, आने वाले 3-4 दशक की ग्लोबल ग्रोथ को ये शेप करने वाली इंडस्ट्रीज तैयार करेंगी। और निश्चित तौर पर भारत के युवाओँ की इसमें बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

भारत किस तरह दुनिया का एक भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बन रहा है, इसका मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। जैसे नीदरलैंड्स की सेमीकंडक्टर कंपनी, आपमें से बहुत लोग इस नाम से परिचित होंगे ASML, ASMLके साथ भारत की टाटा कंपनी का एग्रीमेंट है। भारत, दुनिया के कुछ ही देशों में से एक है जिसके साथ इस कंपनी ने समझौता किया है। ASML-टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच ये अकेला समझौता ही भारत में रोजगार के अनगिनत नए मौके बनाएगा, और भारत को एक नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी में प्रवेश द्वार खोल देगा। ऐसे ही स्वीडन के साथ टेक्नॉलॉजी और AI पार्टनरशिप्स, UAE के साथ सुपरकंप्यूटिंग कोऑपरेशन, भारत की टेक्नॉलॉजी क्षमता को बहुत मजबूत करने वाले हैं। इन एग्रीमेंट्स से युवाओं के लिए नए अवसर तो होंगे ही होंगे।

साथियों,

आज क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर्स भी बहुत तेजी से ग्रो कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं। इनसे जुड़ी पार्टनरशिप एक नई इकोनॉमी के, new opportunities के दरवाजे खोल रही हैं। स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे देशों के साथ, ग्रीन ट्रांजिशन और सस्टेनेबल टेक्नॉलॉजी में भी सहयोग बढ़ रहा है। ये भारत को क्लीन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी फ्यूचर इंडस्ट्रीज में मजबूत करेगा। इसके अलावा भारत ने पोर्ट्स, शिपिंग और मेरिटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एग्रीमेंट्स पर तेजी से काम किया है। UAE और नॉर्वे के साथ पार्टनरशिप से भारत का शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा। और आप तो जानते हैं शिपबिल्डिंग यानी, स्किल मेनपावर की बहुत जरूरत पड़ती है। यानी भारत के इंजीनियर्स, टेक्नीशियन्स और स्किल्ड वर्कर्स के लिए इतनी मांग बढ़ने वाली है, जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं, इतने अवसर तैयार होंगे।

साथियों,

हर नई पार्टनरशिप के साथ हम भारतीय स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और यंग प्रोफेशनल्स के लिए दुनिया से जुड़ने के नए रास्ते बना रहे हैं। इससे भारतीय युवाओं को एडवांस्ड एक्सपर्टीज, ग्लोबल मार्केट्स और ग्रोथ के नए मौके भी मिलेंगे। आज दुनिया उन देशों का सम्मान करती है, जो इनोवेट करते हैं, जो बिल्ड करते हैं, और जो बड़े स्तर पर डिलीवरी कर सकते हैं। भारत आज इन तीनों दिशाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत आप सब मेरे नौजवान साथी हैं, भारत का युवा है, और मैं दुनिया में जहां भी जाता हूं, मैं काफी समय चर्चा में भारत की युवाशक्ति की चर्चा करता हूं।

साथियों,

आज हर भारतीय, एक बड़े संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। ये संकल्प, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आज देश अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश कर रहा है। और इस निवेश से देश के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर बन रहे हैं। जैसे, आज भारत में सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन तैयार की जा रही है। आने वाले समय में भारत की 10 बड़ी सेमीकंडक्टर यूनिट्स, दुनिया में अपना परचम लहराएंगी। इनमें बड़ी संख्या में भारत के नौजवानों का सामर्थ्य होगा, भारत के नौजवानों की बुद्धि प्रतिभा होगी, भारत के नौजवानों का कमिटमेंट होगा और स्वाभाविक है रोजगार तो है ही है। भारत आज शिप-बिल्डिंग से लेकर शिप रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग का भी इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। इसके लिए करीब 75 हजार करोड़ रुपए, Seventy Five Thousand Crore Rupees का निवेश किया जा रहा है। इसी तरह भारत में ही हम पूरा MRO इकोसिस्टम, यानी मेंटेनेंस, ओवरहॉल और रिपेयर फेसिलिटीज तैयार कर रहे हैं। इससे देश के एविएशन सेक्टर को बहुत मदद मिलने वाली है, और भारत के युवाओं के लिए रोजगार का नया सेक्टर तो खुलना ही खुलना है।

साथियों,

भारत आज एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरर है। और हम इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंप्लीट वैल्यू चेन, भारत में ही बना रहे हैं। इसके लिए जो PLI स्कीम चल रही है, उससे देश में रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्शन हो रहा है, और युवाओं को लाखों की संख्या में Jobs भी मिल रही हैं।

साथियों,

ऐसे अनेकों अभियानों पर भारत का पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर मिलकर बहुत बड़ा निवेश कर रहा है। ये निवेश देश के युवाओं को देश में ही- Jobs दे रहा है, उनके सपने पूरे कर रहा है। एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते, जोकि आज नियुक्ति पत्र के भरने के बाद आपकी पहचान बनने वाली है, कि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं। तो उस नाते आपको भी हमेशा ये ध्यान रखना है कि Ease of Doing Business देश की कितनी बड़ी प्राथमिकता है।

साथियों,

भारत की ग्रोथ स्टोरी और इंप्लॉयमेंट जनरेशन, इसमें ये मानी हुई बात है, आप भी जानते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब गांव, छोटे शहर और दूर-दराज के इलाके विकास से जुड़ते हैं, तभी देश की प्रगति का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। पिछले 12 वर्षों में रेलवे, हाईवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कल्पनाभर का तेज गति से विस्तार हुआ है, विकास हुआ है, हर स्तर पर काम हुआ है। आज आप अपने क्षेत्र में, किसी की भी दिशा में 100 किलोमीटर अगर जाएंगे, तो भारत सरकार द्वारा कोई न कोई काम चलता हुआ नजर आएगा आपको। आज गांवों में भी बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है। कनेक्टिविटी बढ़ने से किसानों, छोटे व्यापारियों, विद्यार्थियों के लिए नए रास्ते खुले हैं। आज करोड़ों परिवारों को पक्का घर मिला है। यानी दुनिया के कई देश हैं, जिनके पास टोटल घर होते हैं, उससे अनेक गुणा घर हम नए बनाते हैं। इतना ही नहीं, जो मेरा स्वच्छता का अभियान है, उसको तो मैं कभी भी भूलने नहीं देता हूं लोगों को, और न ही मैं भी भूलता हूं, उसमें शौचालय की बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है, हम उस पर भी बल दे रहे हैं। करोड़ों घरों तक आज बिजली पहुंची है। रूफटॉप सोलर एनर्जी, कितने नए-नए वेंडर्स मैदान में आए हैं। अब देखिए जल जीवन मिशन से, नल से जल पहुंचाना, मैं अभी देख रहा था, कि मैं चाहता था कि शहरों में पीएनजी के कनेक्शन बढ़ें, तो मुझे पलम्बर नहीं मिल रहे थे, कमी पड़ रही थी, क्योंकि जल जीवन के मिशन में कई सारी बड़ी संख्या में पलम्बर वहां लगे हुए थे। अब इधर मुझे एनर्जी के लिए बड़े शहरों में पीएनजी के कनेक्शन तेजी से बढ़ाने थे, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि कभी-कभी लोगों की जरूरत पड़े तो लोग कम पड़ जाते हैं।

साथियों,

इन बदलावों का असर सिर्फ सामान्य नागरिकों की सुविधाओं तक सीमित नहीं रहता। गांव तक सड़क पहुंची, तो मार्केट तक आना-जाना आसान हुआ। बिजली की सुविधा बेहतर हुई, तो छोटे उद्योग-धंधे आगे बढ़ने लगे। गांव में भी एग्रीकल्चर में वेल्यु एडिशन होने लगा। पहले अगर वो लाल मिर्ची बेचते थे, अब बिजली आई तो लाल मिर्ची का पाउडर बनाते हैं, पाउडर बनाकर के पैकेट बनाते हैं, पैकेट बनाकर के बेचते हैं। तो गांव में भी छोटे -छोटे-छोटे-छोटे उद्योग इसके कारण बढ़ते जाते हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी, तो गांव के लोग भी पूरे विश्व के साथ जुड़ रहे हैं, आधुनिकता से जुड़ रहे हैं। शहर और गांव का फर्क मिटता चला जा रहा है। और इससे अर्थव्यवस्था की गति तेज हुई है। और इन सबका पॉजिटिव प्रभाव देश के नौजवानों के उज्जवल भविष्य की गारंटी बन जाता है। रोजगार तो निर्माण होते ही होते हैं, लेकिन राष्ट्र भी एक नए स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ जाता है, लाखों लोगों को नए मौके भी मिल जाते हैं।

साथियों,

आज भारत के युवा के पास जिस तरह से आगे बढ़ने के, अपने सपने पूरा करने के मौके हैं, ऐसा अवसर पहले नहीं मिला है, मैं किसी का दोष नहीं कर रहा हूं, लेकिन ये हकीकत है कि आज बहुत तेज गति से सब हो रहा है, विशाल फलक पर हो रहा है, विविधताओं से भरा हो रहा है। आज मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नॉलॉजी, स्टार्टअप, डिजिटल सर्विसेज, रेलवे, डिफेंस, इतना ही नहीं स्पेस, ऐसे अनेक क्षेत्रों में अनगिनत अवसर हमारा इंतजार कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा युवा नए अवसरों का लाभ उठा सकें, और देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिले। इसलिए, स्किल डेवलपमेंट, industry-linked education और फ्यूचर टेक्नॉलजी पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ITIs को modern बनाया जा रहा है। National Skill Training Institutes को मजबूत किया जा रहा है। PM SETU जैसे अभियान इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

साथियों,

पिछले कुछ वर्षों में देश में self-employment और entreprenurship की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। देश में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा , ये आंकड़ा याद रखिये, 2 लाख 30 हजार से ज्यादा recognised startups हैं। और उसमें भी दो चार-दो चार नौजवान भी जुड़े हुए होते हैं। अहम बात ये है कि ये बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है और मुझे इसका सबसे ज्यादा आनंद है। आजकल तो टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी, बहुत बड़ी संख्या में स्टार्टअप और इनोवेशन की दुनिया में अपनी ताकत दिखा रहे हैं, उनके सामर्थ्य की note लेनी पड़ रही है। ये परिवर्तन अब देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस बदलाव में हमारी नारीशक्ति की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। आज बड़ी संख्या में women-led start-ups, ये जब सुनते हैं ना मन गर्व से भर जाता है, मैं तो दुनिया के लोगों को बताता हूं कि हमारे यहां स्टार्टअप में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका बढ़ रही है, बहुत बड़ी मात्रा में महिलाएं आगे आ रही हैं। मुद्रा योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को फाइनेंशियल सपोर्ट मिला है। पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं ने भी लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। आज गांवों में, छोटे शहरों में, पहले से ज्यादा महिलाएं अपने दम पर नए काम शुरू कर रही हैं।

साथियों,

नीतियों और निर्णयों के इस अभियान के बीच, आपको एक और बात याद रखनी है। किसी भी व्यवस्था की असली ताकत उसके लोग होते हैं। जनता जनार्दन की शक्ति होती है, जन शक्ति होती है और जनशक्ति ही तो राष्ट्रशक्ति बनती है। आप सभी जिस व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहे हैं, उसका सीधा संबंध करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के जीवन से है, करोड़ों-करोड़ों देशवासियों की आशा-आकांक्षाओं से है। सरकारी नौकरी लोगों के जीवन को आसान बनाने का माध्यम ही होती है। आप जिस भी विभाग में काम करेंगे, वहां आपके व्यवहार, संवेदनशीलता और काम करने के तरीके का बहुत महत्व होगा। देश ने आप पर भरोसा किया है। अब ये जिम्मेदारी आपकी है कि आप अपने काम से, अपने आचरण से, अपनी वाणी से, अपने व्यवहार से, उस भरोसे को और मजबूती देंगे। देशवासियों के हृदय में एक नया विश्वास भर जाएगा, आपको मिलते ही वो नई आशा के साथ आगे बढ़ेगा, इसलिए हर युवा कर्मयोगी अपने काम को जिम्मेदारी की तरह देखे। और मेरे लिए तो आप बहुत कुछ हैं। पहले जमाने में जब हम सुनते थे ना – सहस्त्रबाहु बाले फलाने, सहस्त्रबाहु बाले ढिकने। आज सरकार के बाहु आप ही हैं, सरकार का सामर्थ्य आप ही हैं, जो पहले से सरकार में हैं वो भी हैं, जो नए आ रहे हैं वो भी हैं। आज भारत के लोगों की आकांक्षाएं बहुत बढ़ रही हैं, और मैं इसे विकास की पोजिटिव साइन मानता हूं। हमें अपने देश के लोगों की Aspirations को समझना भी है और उसके हिसाब से उतनी ही तेज गति से काम भी करना है। ऐसे में पब्लिक सर्विस में आने वाले युवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। आपको लगातार सीखते रहना होगा। खुद को नई टेक्नॉलजी, नए सिस्टम और नई जरूरतों के हिसाब से तैयार करना होगा। इसमें आपको iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से बहुत मदद मिलेगी। कर्मयोगी प्रारंभ जैसे मॉड्यूल से आपको अपनी जिम्मेदारियां समझने में बहुत सहूलियत होगी। मेरा आपसे आग्रह है कि इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं।

साथियों,

आज भारत का युवा दुनिया के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। यही स्पिरिट, यही ऊर्जा public service में भी दिखाई देनी चाहिए। विकसित भारत ऐसे ही युवाओं के प्रयास से बनेगा, जो अपने काम को देशसेवा का माध्यम मानते हैं, जनसेवा का माध्यम मानते हैं, और हमारे यहां तो कहा गया है – जनसेवा ही प्रभुसेवा। मुझे पूरा विश्वास है, आज नियुक्ति पत्र पाने वाले हमारे युवा साथी, भारत की विकास यात्रा को नई गति देंगे। आपके काम, आपके फैसलों से विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि होगी, और आपको वो मंत्र कभी भूलना नहीं है, हमारा मंत्र है – नागरिक देवो भव। नागरिक देवो भव। नागरिक का कल्याण ही हमारा कर्तव्य है। मैं एक बार फिर आज नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी युवाओं को आगे के जीवन के लिए, देशसेवा के इस अवसर को निभाने के लिए, अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s address at the Economic Times World Leaders Forum 2026
August 21, 2026

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !