PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत माता की जय
भारत माता की जय
भारत माता की जय

सब भइया बहिनी कै राम राम ! आप सभैं हमरे लिए हियां पै सुबहियैं से अगोरत हौ ! हम आप सभैं के करजा मा डूब गयन! आपके इस कर्ज को मैं और ज्यादा मेहनत करके चुकाउंगा...

साथियों,
4 जून बहुत दूर नहीं है। आज पूरा देश जानता है...पूरी दुनिया जानती है कि मोदी सरकार की हैट्रिक बनने जा रही है। नई सरकार में मुझे गरीबों के लिए, युवाओं-महिलाओं के लिए, किसानों के लिए बहुत सारे फैसले लेने हैं। इसलिए मैं बाराबंकी और मोहनलालगंज के लोगों से आशीर्वाद मांगने आया हूं।

साथियों,
आज आपके एक तरफ देशहित के लिए समर्पित BJP-NDA का गठबंधन है, तो दूसरी तरफ देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए इंडी गठबंधन मैदान में है। जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहा है, ये इंडी वाले, ताश के पत्तों की तरफ बिखरना शुरू हो गए हैं। यहां जो बबुआ जी हैं... बबुआ जी यानि हमारे समाजवादी शहजादे...उन्होंने एक नई बुआ जी की शरण ली है। ये उनकी नई बुआ जी हैं बंगाल में...उन्होंने इंडी वालों को कह दिया है- मैं बाहर से सपोर्ट करूंगी। इंडी गठबंधन की एक और पार्टी ने दूसरी को कह दिया है...खबरदार जो हमारे खिलाफ पंजाब में बोला...पीएम पद को लेकर भी सबके सब मुंगेरी लाल को पीछे छोड़ रहे हैं। इनके सपनों की इंतेहा देखिए...कांग्रेस के एक नेता ने कह दिया कि रायबरेली के लोग प्रधानमंत्री चुनेंगे। ये सुनते ही समाजवादी शहजादे का दिल ही टूट गया...बस आंसू नहीं निकले, लेकिन दिल के सारे अरमा बह गए। अब आप बताइए…आप सब लोग इतने तेज तर्रार हैं कि सारी बात इशारों-इशारों में समझ लेते हैं।

अब आप बताइए, इस ऊंट-पटांग खिचड़ी को आप लोग वोट देकर अपना वोट बर्बाद करेंगे क्या? कोई भी आपना वोट बर्बाद करना चाहेगा क्या। अच्छा होगा यहां बाराबंकी में मोहनलालगंज में भाजपा का सांसद हो...भाजपा सांसद दिल्ली से और लखनऊ से आपके लिए ज्यादा से ज्यादा योजनाएं लेकर आएंगे...भाजपा सांसद यहां के विकास के लिए ज्यादा काम करेंगे...अगर इंडी गठबंधन वाला यहां से सांसद बनता है तो उसके पास क्या काम होगा। उसकी पार्टी उसको क्या काम देगी। उसका एक ही मापदंड होगा की तुमने मोदी को एक दिन में कितनी गालियां दी। तुमने मोदी को कितनी बड़ी गाली दी। तुम्हारी गाली में कोई ताकत थी क्या, ताकि मोदी परेशान हो जाए। अगर आपने इंडी गठबंधन के सांसद को चुना, तो उसको यही काम होगा, सुबह उठो मोदी को गाली दो, दोपहर में दो गाली दो, शाम को 4-6 और दे दो और फिर सो जाओ। आप मुझे बताइए भाई, आपको अपने घर में अगर किसी सहायक की जरूरत पड़ती है। आपके दुकान में आपके व्यापार में तो आप उसको लेंगे और कहेंगे कि ये 10 काम करने हैं, इतना तनख्वाह मिलेगा। मेरे ये काम तुम्हें पूरे करने हैं। कोई ऐसा आदमी रखेगा कि तुमको मेरे दुकान के बाहर खड़े रहना है और सामने वाले को बस गाली देते रहना है। इसके लिए कोई तनख्वाह देगा क्या ? इसके लिए कोई किसी को रखेगा क्या ? कोई समझदार आदमी ऐसा करेगा क्या ? क्या गाली देने के लिए हम किसी को रखते हैं क्या ? गाली देने वालों की जरूरत क्या है भाई, आपको तो काम करने वाले सांसद चाहिए। आपका भला करने वाले सांसद चाहिए। 5 साल मोदी को गाली देने वाले नहीं, क्षेत्र का विकास करने वाले सांसद चाहिए, तो इसके लिए आपके पास एक ही विकल्प है, ओनली कमल। इसलिए, बाराबंकी से राजरानी रावत जी और मोहनलालगंज से भाई कौशल किशोर को...को हर बूथ पर विजयी बनाना है।

साथियों,
जब देश में दमदार सरकार होती है...तो फर्क दिखता है। कमजोर सरकार का क्या है...आज है...कल नहीं है... कमजोर सरकार का पूरा फोकस इसी बात पर होता है कि किसी तरह गाड़ी चलती रहे, समय पूरा हो जाए। बस...आप मुझे बताइए...यहां नौजवान भी हैं, किसान भी हैं, बड़ी आसानी से समझ जाएंगे। आप मुझे बताइए 100 सीसी के इंजन से आप हजार सीसी की रफ्तार ले सकते हैं क्या... ले सकते हैं क्या...आपको विकास की तेज रफ्तार चाहिए, तो वो सिर्फ दमदार सरकार ही दे सकती है....बीजेपी सरकार ही दे सकती है।

साथियों,
भाजपा की दमदार सरकार का मतलब क्या होता है...ये अवध बेहतर जानता है, उससे भला अच्छा कौन जान सकता है ? यहां बाराबंकी से लोग राम नाम वाली ईंट लेकर, अयोध्या के लिए पैदल निकलते थे। जो पहली बार वोट डाल रहे हैं, जो युवा हैं...उन्हें बहुत पता नहीं होगा...500 साल के इंतजार के बाद, 500 साल का इंतजार, ये इतिहास की बहुत बड़ी घटना है ये। पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे पूर्वज संघर्ष करते रहे, बलिदान देते रहे, त्याग की पराकाष्ठा करते रहे। 500 साल के बाद, वो दिन याद कीजिए जब लोग हमारे राम लला को टैंट में देखते थे, उनके आंसू नहीं सूखते थे और लोग सरकार को जितनी भद्दी भाषा में गालियां दे सकें देते थे। आज 500 साल का इंतजार खत्म हुआ कि नहीं हुआ। 500 साल का इंतजार खत्म हुआ कि नहीं हुआ। राम लला भव्य मंदिर में विराजित हुए की नहीं हुए। किसके कारण... किसके कारण... किसके कारण...अरे भाई मोदी...मोदी मत करो..ये आपके एक वोट के कारण हुआ है। ये आपके एक वोट की ताकत है, जिसने ये दमदार सरकार बनाई। एक मजबूत सरकार बनाई और आपका 500 साल का इंतजार समाप्त हुआ। आपका वोट 500 साल का इंतजार खत्म कर सकता है। इसलिए भाइयों-बहनों कमल के निशान पर बटन दबाकर आगे भी ये दमदार सरकार बनानी है और दमदार फैसले भी लेने हैं।

साथियों,
दूसरी तरफ ये कांग्रेस वाले, ये सपा वाले क्या कह रहे हैं? पहले इन्होंने राम लला को टैंट में पहुंचाया…फिर अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए इन्होंने कहा कि मंदिर की जगह कोई धर्मशाला बना दो, स्कूल बना दो, अस्पताल बना दो...अब जब मंदिर बन गया...तो इनके पेट में इतना जहर भरा हुआ है। पता नहीं इनकी राम से क्या दुश्मनी है कि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया। अब यहां सपा के बड़े नेता यहां तक कहते हैं, रामनवमी के दिन कहते हैं। राम मंदिर को बेकार बताते हैं, भद्दी-भद्दी बातें करते हैं। और कांग्रेस तो राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के ही एक नेता ने कहा है कि वे लोग सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटना चाहते हैं। भ्रम में मत रहिए देश जब आजादी का आंदोलन कर रहा था ना और देश के टुकड़े करने की बात आती थी। तो देश का हर व्यक्ति कहता था कि देश के टुकड़े थोड़े होते हैं। हो गए की नहीं हो गए, इन्होंने कर दिया कि नहीं कर दिया। ये किसी भी हद तक जा सकते हैं जी। इनका ट्रैक रिकॉर्ड ही ऐसा है। इनके लिए देश-वेश कुछ नहीं है भाई। इनके लिए तो इनका परिवार और बाबर यही उनका खेल है। सपा-कांग्रेस वाले सरकार में आए तो राम लला को फिर से टेंट में भेजेंगे और मंदिर पर बुलडोजर चलवा देंगे। क्या योगी जी से यही सीखना है क्या। जरा योगी जी से ट्यूशन लो बुलडोजर कहां चलाना है, कहां नहीं चलाना।

साथियों,
चुनावी सभा के लिए मैं ये कहने के लिए नहीं आया हूं। मुझे चिंता है क्योंकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा है। यही इनकी साजिश है। आप ऐसे लोगों को वोट दे सकते हैं क्या। आप ऐसे लोगों को वोट दे सकते हैं क्या। ऐसे लोगों को वोट तो छोड़िए, ऐसी सजा करनी चाहिए, ऐसी सजा करनी चाहिए कि उनकी जमानत जब्त हो जाए।

साथियों,
सपा-कांग्रेस के लिए अपने वोटबैंक से बड़ा कुछ नहीं है। और जब मैं इनकी पोल खोलता हूं, तो ये बेचैन हो जाते हैं, नींद हराम हो जाती है, तो फिर क्या करते हैं, जैसे बहुत बुखार चढ़ जाए ना तो आदमी कुछ भी बोलता है, ये भी कुछ भी बोलना शुरू कर देते हैं। ऐसी गालियां देते हैं। आप मुझे बताइए...बाबासाहेब अम्बेडकर जब संविधान बन रहा था, तब धर्म के आधार पर आरक्षण के सबसे बड़े विरोधी थे। धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होगा ये संविधान सभा ने निर्णय किया था और बहुत सोच विचार करके किया था। इतना ही नहीं इनके परनाना ने भी धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध किया था। लेकिन 10 साल पहले यहां यूपी में इन लोगों ने धर्म के आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की थी और कर्नाटक में तो कर दिया। कर्नाटक को इन्होंने अपनी लेबोरेटरी बनाया है। कर्नाटक में क्या किया...कर्नाटक में जितने मुसलमान थे, उन सब मुसलमानों को रातों-रात ओबीसी बना दिया। ठप्पा मार दिया कागज निकाल दिया। अब जो ओबीसी को आरक्षण मिला था उसका बहुत बड़ा हिस्सा ये लूट करके चले गए और लोग हाथ मलते रह गए। क्या यहां आपका आरक्षण कोई लूट जाए, आपको मंजूर है क्या? क्या आरक्षण लूटने देंगे क्या ? क्या ओबीसी का हक छीनने देंगे क्या? क्या एससी का हक छीनने देंगे क्या? क्या एसटी का हक छीनने देंगे क्या? अरे बाबासाहेब अम्बेडकर ने जो दिया है, उसको कोई भी हाथ नहीं लगा सकता है। बिहार के इनके चारा घोटाले के जो चैंपियन हैं ना, अदालत ने जिनको सजा फरमाई है। अभी जेल से तबीयत के बहाने बाहर घूम रहे हैं, वो तो यहां तक कहते हैं कि पूरा का पूरा आरक्षण अब मुसलमान को मिलना चाहिए। इसका मतलब दलित, आदिवासी, ओबीसी इनके पास कुछ बचेगा नहीं भाई। मैं आपकी रक्षा करने के लिए आपके अधिकारों की रक्षा करने के लिए 400 पार मांगता हूं आपसे।

कांग्रेस के शहजादे कहते हैं...ये नया ले आए भाई। वो कहते हैं कि आपकी कमाई का एक्स-रे करेंगे। मतलब आपके लॉकर में क्या है, जमीन कितनी है, गहनें कितने हैं, सोना कितना, चांदी कितनी, आपके मंगलसूत्र कहां है ? वो लूट चलाना चाहते हैं, वो कहते हैं आपके पास जो है। आपसे लेकर के जिसके पास नहीं है उसको दे दिया जाएगा। मतलब जो वोट जिहाद करेगा उनको दिया जाएगा।

भाइयों-बहनों,
ये इनका ट्रैक रिकॉर्ड है। सपा-कांग्रेस, तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुकी हैं। और मोदी जब इनकी सच्चाई देश को बता रहा है....तो वो क्या कहते हैं और ये लंबे समय से उनकी कोशिश है। उनकी बेईमानी को अगर बेनकाब कर दो, उनकी घोर सांप्रदायिकता को अगर बेनकाब कर दो, उनकी वोट बैंक की राजनीति को बेनकाब कर दो, दिन-रात हिंदु-मुसलमान करने वाली उनकी सोच को बेनकाब कर दो। तो ये कहते हैं कि मोदी हिंदु-मुसलमान करता है। अरे मोदी को बोलना पड़ता है, तुम्हारे पापों का इतिहास देश को बताने के लिए।

साथियों,
ये लोग, संविधान विरोधी हैं, दलित-पिछड़े विरोधी हैं। मोदी ने आर्टिकल-370 हटाया। इससे जम्मू-कश्मीर में भी संविधान लागू हुआ...वहां दलितों को भी अनेक अधिकार मिले। दो दिन पहले ही CAA कानून के तहत शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी शुरु हुई है। बड़ी खुशी-खुशी वो कागज लेकर के फोटो निकलवा रहे है। ऐसे गरीब लोग निराधार पड़े थे देश में, कोई उनको पूछने वाला नहीं था। इसके जो लाभार्थी हैं, उनमें भी ज्यादातर दलित,पिछड़े समाज के लोग हैं। सपा-कांग्रेस के लोग इसका भी विरोध करते हैं। सपा के लोगों ने यूपी में दलितों के साथ कितना अन्याय किया है...ये बच्चा-बच्चा जानता है। जो मोदी देश के संविधान को सशक्त कर रहा है...उसको लेकर अफवाहें फैलाते हैं।

संस्कार देखिए साथियों...
भाजपा सरकार बाराबंकी के किसान रामशरण वर्मा जी को पद्म सम्मान देती है। कृषि में उनके योगदान को नमन करती है। और ये कांग्रेसी, बेनी बाबू जैसे वरिष्ठ नेता का डगर-डगर अपमान करते हैं और ये देखकर भी सपा के शहजादे चुप रहते हैं। वो बेनी बाबू, जिन्होंने देश और समाज की सेवा में पूरा जीवन खपा दिया। उनको इस तरह अपमानित किया है कांग्रेस-सपा ने।

साथियों,
भाजपा सरकार, सबका साथ-सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास इस पवित्र मंत्र पर चलती है। मुफ्त अनाज हो, मुफ्त इलाज हो...पक्का घर हो या फिर सस्ता गैस का सिलेंडर हो या नल से जल हो ये बिना भेदभाव सबको दिया जाता है। आपको याद है ना सपा के शासन में क्या होता था? उस समय बिजली भी, जो वोट जिहाद करेगा उसके लिए रिजर्व रहती थी, बाकियों को बिजली नहीं मिलती थी और मैं आज एक और बात कह रहा हूं...जिस वोटबैंक के पीछे ये लोग भागते हैं...वो वोटबैंक भी अब इनकी सच्चाई समझने लगा है। तीन तलाक कानून से खुश हमारी माताएं-बहनें बीजेपी को लगातार आशीर्वाद दे रही हैं।

भाइयों और बहनों,
रामकाज से आगे अब राष्ट्रकाज का समय है। रामकाज की प्रेरणा अब राष्ट्रकाज के लिए है। यहां मेंथा की खेती बहुत होती है। ऐसी हर कृषि उपज से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योग के लिए यहां अनंत संभावनाएं हैं। बाराबंकी-मोहनलालगंज के छोटे किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के भी करीब-करीब 1600 करोड़ रुपए मिले हैं। यहां का गमछा जो मुझे भेंट दिया गया, अब ये गमछा बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। हमारे योगी जी ने वन डिस्ट्रिक्ट- वन प्रोडक्ट का मिशन चलाया ना। आज मैं भी दुनिया में कहीं जाता हूं, तो मैं गिफ्ट क्या लेकर जाऊंगा मुझे दिमाग नहीं खपाना पड़ता है। मैं लखनऊ में उनकी सरकार की वेबसाइट पर जाता हूं, योगी जी का वन डिस्ट्रिक्ट- वन प्रोडक्ट देख लेता हूं और कहता हूं कि चलिए ये 6-7 चीजें ले लो वहां दे दूंगा लोगों को। योगी जी की सरकार ने जिस प्रकार इसे जीआई टैग दिया इसकी प्रसिद्धी की है।

साथियों,
आप तो जानते हैं, मैं 2014 से काम में लगा हूं। स्वच्छता अभियान, सफाई कर रहा हूं। देश साफ सुथरा होना चाहिए की नहीं होना चाहिए। स्वच्छता होनी चाहिए की नहीं होनी चाहिए। हमारे योगी जी भी सफाई कर रहे हैं। वो भी सफाई होनी चाहिए ना। दुर्गन्ध आती है तो नींद आती है क्या? तो दुर्गन्ध हटानी पड़ती है ना, तो योगी जी भी वो काम बहुत अच्छा कर रहे हैं। सफाई होने के कारण उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल बना है। लोग विश्वास के साथ उत्तर प्रदेश में उद्योग धंधे के लिए रुपये लगाने के लिए तैयार हैं।

साथियों,
जहां-जहां राम के निशान हैं, उन क्षेत्रों को रामायण सर्किट के तहत विकसित बनाने की योजना है। यहां तो सतरिख आश्रम है, जहां राजकुमारों की शिक्षा-दीक्षा हुई थी। महादेव कॉरिडोर के विकास का काम भी चल रहा है। ऐसे विकास कार्य हमारी विरासत को भी सशक्त करेंगे...और पर्यटन उद्योग से युवाओं को नए अवसर भी देंगे।

साथियों,
विकास और विरासत से विकसित भारत बनाने के लिए आपके आशीर्वाद मांगता हूं, आपको भारी मतदान करना है, ज्यादा से ज्यादा मतदान करेंगे... ज्यादा से ज्यादा मतदान करेंगे... ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान करने के लिए निकलेंगे, सुबह 10 बजे से पहले मतदान होगा। पहले मतदान फिर जलपान... पहले मतदान फिर जलपान...अब ऐसा तो नहीं होगा, ना कि जलपान याद रखोगे और मतदान भूल जाओगे। ऐसा नहीं होगा ना। अच्छा पोलिंग बूथ जीतोगे, सारे पोलिंग बूथ जीतोगे। पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ोगे। अच्छा मेरा एक काम करोगे... मेरा एक काम करोगे। जरा हाथ ऊपर करके बताइए मेरा एक काम करोगे क्या। ये चुनाव वाला काम नहीं है मेरा पर्सनल काम है करोगे। पक्का करोगे। अच्छा घर-घर जाइएगा...ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाइएगा, परिवार के मुखिया के साथ बैठिएगा। उनको कहिएगा कि मोदी आए थे और मोदी जी ने सबको राम-राम कहा है। मेरा राम-राम पहुंचा देंगे...हर घर में पहुंचा देंगे। बोलिए...

भारत माता की जय
भारत माता की जय
भारत माता की जय
बहुत-बहुत धन्यवाद !