PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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नमस्कार !

केमन आछेन बारासात बासी, बशीरहाट बासी? आपनादेर सकोलके आमार बिनम्रो श्रध्या, प्रणाम आर भालोबासा ! सबसे पहले तो मैं मां काली को प्रणाम करता हूं, उनके आशीर्वाद से हम सबने मिलकर साइक्लोन का मुकाबला किया है। साइक्लोन पर लगातार भारत सरकार की नजर थी। मैं भी लगातार संपर्क में था। हमारी NDRF और दूसरी टीमों ने अच्छा काम किया है। केंद्र सरकार हर प्रकार से, हर संभव मदद राज्य सरकार को दे रही है।

भाइयों और बहनों,

आज भारत विकसित होने के रास्ते पर चल पड़ा है। इस विकास का सबसे मज़बूत पिलर हमारा पूर्वी भारत है। पिछले 10 साल में बीजेपी सरकार ने जितना पूर्वी भारत पर खर्च किया है, उतना पिछले 60-70 साल में नहीं हुआ था। (जरा एसपीजी और कैमरामैन ये कुछ बच्चे बहुत बढ़िया-बढ़िया तस्वीर बनाकर लाए हैं। इधर भी एक बेटी कब से खड़ी है जरा ले लीजिए। आपने एड्रेस लिखा है पीछे, अपना नाम एड्रेस लिख देना, मैं आपको जरूर चिट्ठी भेजूंगा। भारत माता की, भारत माता की, जय श्री राम, जय श्री राम।) आप देखते हैं जब से आपने मुझे सेवा करने का मौका दिया हमने रेलवे, एक्सप्रेसवे, वॉटरवे, एयरपोर्ट, हर तरह से पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए काम किया है। कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ये निवेश, पूर्वी भारत में रोजगार और स्वरोजगार के भी नए मौके बना रहा है।

साथियों,

यहां पश्चिम बंगाल के एक हिस्से में कोयला और दूसरी खनिज संपदा है। तो दूसरी तरफ एक बड़ी कोस्टल - लाइन है। यहां डायमंड हार्बर जैसा ट्रेडिंग सेंटर है। आजादी के पहले एक समय वो भी था जब बंगाल लाखों देशवासियों को रोजगार देता था। आज बंगाल में ज्यादातर फैक्ट्रियां बंद हैं। यहां से नौजवान पलायन करने के लिए मजबूर हैं। मैं जरा आपसे पूछना चाहता हूं। ये बंगाल की दुर्दशा हुई है। बंगाल की बर्बादी हुई है। ये हाल किसने किया? मैं आपसे जानना चाहता हूं यह बर्बादी कौन लाया? यहां पर पहले बंगाल को कांग्रेस ने लूटा, फिर लेफ्ट ने लूटा और अब टीएमसी दोनों हाथों से लूट रही है। कांग्रेस, CPM और TMC तीनों ही पश्चिम बंगाल की गुनहगार हैं। लोग यह भी जानते हैं कि सीपीएम को दिया हर वोट ये टीएमसी के खाते में जाएगा। ये पर्दे के पीछे टीएमसी और लेफ्ट वो एक ही सिक्के की दो बाजू है और यहां के मुख्यमंत्री ने घोषणा भी कर दी है वो दिल्ली में इनका सहयोग करेगी। इसलिए अब बंगाल पर्दे के पीछे चलने वाले सारे खेल समझ चुका है। और इसलिए पश्चिम बंगाल हर कोने से एक ही आवाज आ रही है। फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार, आबार एकबार, मोदी शोरकार।

भाइयों और बहनों,

10 साल पहले जब आपने मुझे अवसर दिया था तो मैंने गारंटी दी थी- ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा। याद है न। मैंने केंद्रीय स्तर पर 10 साल में एक भी घोटाला नहीं होने दिया। अब मोदी देश को एक और बड़ी गारंटी दे रहा है। पहले मैंने गारंटी दी थी ना खाऊंगा ना खाने दूंगा। अब मेरी गारंटी है जिसने खाया है उससे बाहर निकालूंगा और जिसका खाया है उसको मैं लौटाउंगा। ये मोदी की गारंटी है। TMC के नेताओं के पास से नोटों के जो ये पहाड़ निकले हैं, एक-एक रुपये का हिसाब होगा। जिसका लूटा है उसको ये वापस कैसे मिले इसके मैं लिए कानूनी रास्ते बना रहा हूं। जो लोगों से लूटा गया था, अब तब लगभग 17 हजार करोड़ रुपए मैं लौटा चुका हूं। बंगाल में भी आपका लूटा हुआ धन, आपको वापस मिले, मैं उसके लिए पूरी कोशिश कर रहा हूं। इंडी वाले गरीब और मध्यम वर्ग की कमाई का एक्स-रे करने की बात करते हैं। अब मोदी इन भ्रष्टाचारियों की, काले धन की, गंदी कमाई की अब मैं उसका एक्स-रे निकालूंगा। ऐसा एक्स-रे कि इनकी आने वाली पीढ़ियां भी भ्रष्टाचार करने से पहले 100 बार सोचेंगी।

साथियों,

आपका ये प्यार, आपका ये उत्साह, आपका ये आशीर्वाद मेरी जिंदगी की बहुत बड़ी ऊर्जा है। मैं देख रहा हूं यहां आपके पास खड़े रहने की जगह नहीं है। बारिश के कारण तकलीफ हुई कल और आज इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं आप। लोग छत पर खड़े हैं और अभी मैं हेलीपैड से आया साढ़े किलोमीटर दोनों तरफ ऐसी ही भीड़ थी। यानी ये प्यार, ये उत्साह, आपका यह कर्ज है ना वो बंगाल का विकास करके कर्ज चुकाऊंगा।

भाइयों और बहनों,

TMC और इंडी गठबंधन को आपके विकास से कोई मतलब नहीं है। इनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है- अपने वोटबैंक का तुष्टिकरण। देश में संविधान-संविधान, तानाशाही-तानाशाही चिल्लाने वालों की जो जमात है न वो पश्चिम बंगाल में क्या हो रहा है, ज़रा यहां आकर देखे, आपकी बोलती बंद हो जाएगी। बंगाल में TMC ने OBC को जो धोखा दिया, उसकी कलई कोर्ट ने खोल दी है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि 77 मुसलमान जातियों को ओबीसी घोषित करना ये गैरकानूनी है, असंवैधानिक है, संविधान के खिलाफ है। यानि TMC ने लाखों OBC नौजवानों का जो हक मिला था उनको। संविधान ने दिया था। बाबा साहेब अंबेडकर ने दिया था। देश की पार्लियामेंट ने दिया था। वो OBC का जो हक था, रातों-रात ये वोट जिहाद वालों को मदद करने के लिए इन्होंने लूट लिया है। और आप देख रहे हैं कि कोर्ट के इस फैसले के बाद TMC की सीएम का क्या रवैया है। मैं तो हैरान हूं, यहां जजों की नीयत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हमारी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हमारी न्यायपालिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मैं TMC से पूछना चाहता हूं, अब क्या जजों के पीछे भी अपने गुंडे छोड़ दोगे क्या? पूरा देश देख रहा है कि कैसे TMC बंगाल में न्यायपालिका का गला घोंट रही है।

साथियों,

TMC से सच बर्दाश्त नहीं होता। जो कोई भी TMC के गुनाह सामने लाता है, TMC उनको टारगेट करती है। आपने भी देखा है कि TMC के MLA ने साफ-साफ कहा कि हिंदुओं को भगीरथी में बहा देंगे। इस पर बंगाल के संतों ने TMC को रिक्वेस्ट की कि जरा आप अपनी गलती सुधार लीजिए। और बड़ी नम्रता से रिक्वेस्ट की। लेकिन TMC ने हमारे संत समाज को ही दनादन गालियां देनी शुरु कर दी। इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, भारत सेवाश्रम संघ ये ऐसी महान संस्थाएं है, दुनिया में उनकी प्रतिष्ठा है, उनके संतों को अपमानित करना। भाइयों-बहनों, ये सब अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए, वोट जिहाद को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। यहां संदेशखाली की बहनों ने इंसाफ मांगा तो TMC ने उनको ही टारगेट किया। बशीरहाट से उम्मीदवार हमारी बहन रेखा पात्रा अभी यहां मंच पर ही हैं। और क्या बढ़िया भाषण किया उन्होंने। ये मीडिया वालों का ध्यान गया कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं। TMC के पास एक नेता ऐसा नहीं होगा जो बहन रेखा पात्रा जी जैसा भाषण कर सके। देश देख रहा है कि कैसे एक गरीब की बेटी को बीजेपी ने देश की संसद में सम्मानपूर्वक पहुंचाने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया है। और मुझे विश्वास है ये एक पवित्र कार्य है, ये नारी शक्ति के सम्मान की लड़ाई लड़ रही है। अगर रेखा पात्रा ताकतवर होगी तो हिंदुस्तान की महिलाओं की आवाज वो हिंदुस्तान की संसद में उठाएगी। मैं उनके साहस की, उनकी हिम्मत की सराहना करूंगा। वो टीएमसी की इतनी बड़ी सत्ता से टकरा रही है। वो खुद मां दुर्गा की सच्ची पुजारी लगती है। बंगाल में शाहजहां शेख जैसे अत्याचारियों का हौसला और ऐसे एक दो नहीं हैं, हर गली मोहल्ले में ऐसे लोग बैठे हैं। इनका हौसला ना बढ़े इसलिए बहन रेखा पात्रा को जिताना बहुत जरूरी है।

साथियों,

मां-माटी-मानुष की बात कहने वाली TMC ने मां को भय दिया है, माटी का अपमान किया है। यहां तक कि महिला MLA जो TMC के अंदर गुंडागर्दी के खिलाफ बोलती हैं, उनको भी टारगेट किया जा रहा है। मैं पश्चिमी मेदिनीपुर में केशपुर की माताओं-बहनों का वीडियो देख रहा था। वो भी TMC के गुंडों से बचाने की गुहार लगा रही हैं। ऐसी TMC को अपने वोट की ताकत से सजा देना बहुत जरूरी है।

साथियों,

तुष्टिकरण की राजनीति के कारण, appeasement की पॉलिटिक्स के कारण TMC ने CAA के खिलाफ भी झूठ फैलाया है। CAA के खिलाफ झूठ फैलाने से पहले CAA को रोकने की कोशिश की। मोदी डरा नहीं, मोदी झुका नहीं, मोदी ने कहा मैं सही समय देख कर के ले आऊंगा। मैं लाया। अब उनको हाथ पैर पछाड़ रहे। पहले कहते थे लागू नहीं करूंगी, लागू हो गया। यहां के लोगों को नागरिकता मिलने लगी अब वो झूठ फैला रही है, भ्रम फैला रही है लेकिन आज पूरा देश देख रहा है कि सैकड़ों शरणार्थियों को नागरिकता मिल चुकी है। किसी से कुछ नहीं छीना गया, बल्कि उन्हें नागरिकता देकर के मां भारती के बेटे के रूप में, बेटी के रूप में सम्मान दिया है। इसलिए, मतुआ साथियों को भी मैं आज यहां आया हूं तो बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपको अब भारत की नागरिकता से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती है। और मोदी काम शुरू कर चुका है, नागरिकता देना चल रहा है और कुछ ही महीनों काम पूरा भी हो जाएगा। ये नागरिकता देश का संविधान, हमारा constitution दे रहा है। और मैं आपको एक और गारंटी दूंगा। TMC तो क्या, दुनिया की कोई भी ताकत मोदी के इस संकल्प को ना हिला सकती है ना डुला सकती है। और ना ही कोई रोक सकता है।

भाइयों और बहनों,

विशेष रूप से हमारी माताओं-बहनों को सशक्त करना मोदी की प्राथमिकता है। तभी तो मोदी आज पक्का घर दे रहा है और वो भी महिलाओं के नाम पक्का घर दे रहा है। और मोदी सिर्फ चार दीवारें ही नहीं देता, जब घर देता है तो घर में टॉयलेट, बिजली, सस्ता सिलेंडर, नल और नल से जल, मुफ्त अनाज, मुफ्त इलाज क्या कुछ नहीं है। जिंदगी जीने के लिए सब कुछ है। इससे हमारी नारीशक्ति को बहुत मदद मिली है। अब तो माताओं-बहनों को चावल की चिंता भी नहीं करनी पड़ती। मोदी आने वाले 5 साल तक मुफ्त चावल देता रहेगा।

साथियों,

अब मोदी ने एक और गारंटी दी है। ये गारंटी, आपका बिजली का बिल ज़ीरो करने की है। मैं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरु कर चुका हूं। इसमें एप्लाई करने वाले परिवार को छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए, मोदी सरकार 75 हज़ार रुपए देगी। इससे मुफ्त बिजली भी मिलेगी और ज्यादा बिजली होगी तो सरकार उसको खरीदेगी, उसकी कमाई भी होगी।

साथियों,
मोदी, हर आयु के लोगों की चिंता कर रहा है। आज हमारे देश में करीब 6 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी आयु 70 साल से ऊपर की है। ऐसे अनेकों बुजुर्ग यहां बंगाल में भी हैं। मोदी ने तय किया है कि ऐसे सभी साथियों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। लेकिन TMC की सरकार यहां आयुष्मान योजना लागू नहीं होने दे रही है। बीजेपी को मिला आपका हर वोट TMC पर इस योजना से जुड़ने का दबाव डालेगा।

साथियों,

देश ने दिल्ली में मोदी सरकार बनाना पक्का कर लिया है। इसलिए 1 जून को बारासात सहित हर सीट पर कमल ही खिलना चाहिए। खिलेगा? घर-घर जाएंगे? मतदान कराएंगे? बारासात से हमारे साथी स्वपन मजूमदार जी को भारी वोटों से जिताकर दिल्ली भेजना है। बशीरहाट से बहादुर बेटी रेखा पात्रा जी को भी आपको ज्यादा से ज्यादा वोटों से जिताना है। इनको मिला हर वोट, कमल के निशान पर बटन दबाएंगे ना तो वह कमल सीधा सधा दिल्ली में मोदी के खाते में जमा हो जाएगा। और इसलिए मोदी को मजबूत करने के लिए इन दोनों को विजयी बनाइए। आप एक मेरा काम करेंगे? आप लोग मेरा एक काम करेंगे? जरा हाथ ऊपर करके बताइए करेंगे? पक्का करेंगे? अच्छा घर-घर गांव-गांव जाइएगा और वहां जो भी देवस्थान हो, तीर्थ स्थान हो, पूजा स्थान हो मोदी की तरफ से वहां जाकर के मथ्था टेकना। और परमात्मा से आशीर्वाद मांगना कि मोदी जी की तरफ से मैं मथ्था टेक रहा हूं या टेक रही हूं और ईश्वर से आशीर्वाद मांगिए, मोदी के लिए नहीं, मोदी के परिवार के लिए नहीं, हमारे भारत को विकसित भारत बनाने के लिए आशीर्वाद मांगिए। जाएंगे आप लोग घर-घर गांव-गांव जाएंगे।

बोलिए भारत माता की। भारत माता की। बहुत-बहुत धन्यवाद।