Share
 
Comments
PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

بھارتی اولمپئنس کی حوصلہ افزائی کریں۔ #Cheers4India
Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi

Popular Speeches

It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi
One Nation, One Ration Card Scheme a boon for migrant people of Bihar, 15 thousand families benefitted

Media Coverage

One Nation, One Ration Card Scheme a boon for migrant people of Bihar, 15 thousand families benefitted
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
yسردار ولبھ بھائی پٹیل نیشنل پولیس اکیڈمیں آئی پی ایس پروبیشنرس سے وزیر اعظم کے ذریعہ کیے گئے خطاب کا متن
July 31, 2021
Share
 
Comments
آپ خوش قسمت ہیں کہ آپ نے ملک کی آزادی کے 75ویں سال میں خدمات کے شعبے میں قدم رکھا ہے؛ اگلے 25 سال آپ اور ہندوستان دونوں ہی کے لئے انتہائی اہم ہیں:وزیر اعظم
انہوں نے ’’سوراج ‘‘ کے لیے لڑائی لڑی؛ آپ کو ’’سو-راج‘‘ کے لئے آگے بڑھنا ہوگا : وزیر اعظم
وسیع تکنیکی تبدیلی کے اس دور میں پولس کو پوری طرح سے تیار رکھناچیلنج ہے:وزیر اعظم
آپ’’ایک بھارت –شریشٹھ بھارت‘‘کے پرچم بردار ہیں’’راشٹر پہلے، سدیو پہلے‘‘کے اصول کو ہمیشہ سب سے اوپر رکھیں:وزیر اعظم
ہمیشہ دوست نواز رہیں اور وردی کے وقار کو اولیت دیں:وزیر اعظم
میں خاتون افسروں کی ایک روشن نئی نسل دیکھ رہا ہوں، ہم نے پولس فورس میں خواتین کی حصے داری بڑھانے کا ہمیشہ دھیان رکھا ہے:وزیر اعظم
وباء کے دوران اپنی جان گنوادینے والے پولس سروس کے ممبروں کو خراج عقیدت پیش کی
پڑوسی ملکوں کے ٹرینی افسران ہمارے ملک کے ساتھ قربت اور گہرے روابط کو ظاہر کرتے ہیں:وزیر اعظم

آپ سبھی سے بات کرکے مجھے بہت اچھا لگا۔ میری ہر سال یہی کوشش رہتی ہے کہ آپ جیسے نوجوان ساتھیوں سے گفتگو کروں، آپ کے خیالات کو مسلسل جانتا رہوں۔ آپ کی باتیں، آپ کے سوال، آپ کا تجسس، مجھے بھی مستقبل کی چنوتیوں سے نمٹنے میں مدد فراہم کرتے ہیں۔

ساتھیو

اس مرتبہ کی یہ گفتگو ایسے وقت ہو رہی ہے جب بھارت، اپنی آزادی کے 75 برس کا امرت مہوتسو منا رہا ہے۔ اس سال کی 15 اگست کی تاریخ، اپنے ساتھ آزادی کی 75ویں سالگرہ لے کر آرہی ہے۔ گذشتہ 75 برسوں میں بھارت نے ایک بہتر پولیس سروس کے قیام کی کوشش کی ہے۔ پولیس تربیت سے متعلق بنیادی ڈھانچے میں بھی حالیہ برسوں میں بہت بہتری واقع ہوئی ہے۔ آج جب میں آپ سے بات کر رہا ہوں، تو ان نوجوانوں کو دیکھ رہا ہوں، جو آئندہ 25 برسوں تک بھارت میں امن و امان کے قیام کو یقینی بنانے میں حصہ لیں گے۔ یہ بہت بڑی ذمہ داری ہے۔ اس لیے اب ایک نئی شروعات، ایک نئے عزم کے ساتھ آگے بڑھنا ہے۔

ساتھیو،

مجھے بہت معلومات تو نہیں کہ آپ میں سے کتنے لوگ دانڈی گئے ہوئے ہیں یا پھر کتنوں نے سابرمتی آشرم دیکھا ہے۔ تاہم میں آپ کو 1930 کی دانڈی یاترا کی یاد دلانا چاہتا ہوں۔ گاندھی جی نے نمک ستیہ گرہ کی طاقت پر انگریزی حکومت کی بنیاد ہلا دینے کی بات کہی تھی۔ انہوں نے یہ بھی کہا تھا کہ ’’جب وسائل منصفانہ اور صحیح ہوتے ہیں تو بھگوان بھی ساتھ دینے کے لئے موجود ہوتےہیں۔‘‘

 

 

ساتھیو،

ایک چھوٹے سے گروپ کو ساتھ لے کر مہاتما گاندھی سابرمتی آشرم سے نکل پڑے تھے۔ ایک ایک دن گزرتا گیا، اور جو لوگ جہاں تھے، وہ نمک ستیہ گرہ سے جڑتے چلے گئے تھے۔ 24 دن بعد جب گاندھی جی نے دانڈی میں اپنا سفر مکمل کیا، تو پورا ملک، ایک طرح سے پورا ملک اُٹھ کھڑا ہوا۔ کشمیر سے کنیاکماری، اٹک سے کٹک۔ پورا ہندوستان بیدار ہوچکا تھا۔ اس احساس کو یاد کیجئے، اس قوت ارادی کو یاد کیجئے۔ اسی جوش نے، اسی اتحاد نے بھارت کی آزادی کی لڑائی کو اجتماعی طاقت سے بھر دیا تھا۔ تبدیلی کا وہی احساس، عزم میں وہی قوت ارادی آج ملک آپ جیسے نوجوانوں سے مانگ رہا ہے۔ 1930 سے 1947 کے دوران ملک میں جو زبردست لہر آئی تھی، جس طرح ملک کے نوجوان آگے بڑھ کر آئے، ایک ہدف کے لئے متحد ہوکر پوری نوجوان نسل جٹ گئی، آج وہی احساس آپ کے اندر بھی ہونا چاہئے۔ ہم سب کو  اس احساس میں جینا ہوگا۔ اس عزم کے ساتھ جڑنا ہوگا۔ اس وقت ملک کے لوگ خاص کر ملک کے نوجوان سواراج کے لئے لڑے تھے۔ آج آپ کو سوراجیہ کے لئے جی جان سے محنت کرنی ہے۔ اس وقت لوگ ملک کی آزادی کے لئے مرنے مٹنے کو تیار تھے۔ آج آپ کو ملک کے لئے جینے کا احساس لے کر آگے بڑھنا ہے۔ 25 سال بعد جب بھارت کی آزادی کے 100 برس مکمل ہوں گے، تب ہماری پولیس سروس کیسی ہوگی، کتنی طاقتور ہوگی، وہ آپ کے آج کے کاموں پر منحصر کرے گا۔ آپ کو وہ بنیاد تیار کرنی ہے، جس پر 2047 کے شاندار، منظم بھارت کی عمارت تعمیر کرنی ہوگی۔ وقت نے اس عزم کی کامیابی کے لئے آپ جیسے نوجوانوں کو منتخب کیا ہے۔ اور میں اسے آپ سبھی کی بہت بڑی خوش قسمتی مانتا ہوں۔ آپ ایک ایسے وقت میں کرئیر شروع کر رہے ہیں، جب بھارت ہر شعبے، ہر سطح پر تغیراتی دور سے گزر رہا ہے۔ آپ کے کرئیر کے آنے والے 25 برس، بھارت کی ترقی کے بھی سب سے اہم 25 برس ہونے والے ہیں۔ اس لیے آپ کی تیاری، آپ کا مزاج، اسی بڑے ہدف کے مطابق ہونا چاہئے۔ آنے والے 25 برسوں کے دوران  آپ ملک کے مختلف حصوں میں مختلف عہدوں پر کام کریں گے، الگ ۔الگ ذمہ داریاں نبھائیں گے۔ آپ سبھی پر ایک جدید، مؤثر اور حساس پولیس سروس کی ترقی کی ایک بہت بڑی ذمہ داری ہے۔ اور اس لیے، آپ کو ہمیشہ یہ یاد رکھنا ہے کہ آپ 25 سال کے ایک اہم مشن پر ہیں، اور بھارت نے اس کے لئے خصوصی طور پر آپ کو منتخب کیا ہے۔

ساتھیو،

دنیا بھر کے تجربات بتاتے ہیں کہ جب کوئی ملک ترقی کے راستے پر آگے بڑھتا ہے، تو ملک کے باہر سے اور ملک کے اندر سے، چنوتیاں بھی اتنی ہی بڑھتی ہیں۔ ایسے میں آپ کی چنوتی، تکنالوجی  کے خلل کے دور میں پولیس خدمات کو مسلسل تیار کرنے کی ہے۔ آپ کی چنوتی، جرائم کے نئے طور طریقوں کو اس سے بھی زیادہ اختراعی طریقے سے روکنے کی ہے۔ خصوصی طور سے سائبر سکیورٹی کو لے کر نئے تجربات، نئی تحقیق اور نئے طور طریقوں کو آپ کو تیار بھی کرنا ہوگا اور ان کو عمل میں بھی لانا ہوگا۔

 

ساتھیو،

ملک  کے آئین نے، ملک کی جمہوریت نے، جو بھی اختیارات اہل وطن کو دیے ہیں، جن فرائض کو نبھانے کی امید کی ہے، ان کو یقینی بنانے میں آپ کا کردار اہم ہے۔ اور اس لیے، آپ سے امیدیں وابستہ رہتی ہیں، آپ کے رویہ پر ہمیشہ نظر رہتی ہے۔ آپ پر دباؤ بھی بہت آتے رہیں گے۔ آپ کو صرف پولیس تھانے سے لے کر پولیس ہیڈکوارٹر کی حدود تک ہی نہیں سوچنا ہے۔ آپ کو سماج میں ہر ذمہ داری، ہر کردار سے آگاہ بھی رہنا ہے، دوستی والا رویہ بھی اپنانا  ہے اور وردی کی آبرو کو بھی ہمیشہ ترجیح دینی ہے۔ ایک اور بات کا آپ کو ہمیشہ خیال رکھنا ہوگا۔ آپ کی خدمات، ملک کے الگ الگ اضلاع میں ہوں گی، شہروں میں ہوں گی۔ اس لیے آپ کو ایک اصول ہمیشہ یاد رکھنا ہے۔ میدان میں رہتے ہوئے آپ جو بھی فیصلے لیں، اس میں ملک کا مفاد ہونا چاہئے، قومی نقطہ نظر ہونا چاہئے۔ آپ کے کام کاج کا دائرہ اور پریشانیاں اکثر مقامی ہوں گی، ایسے میں ان سے نمٹتے ہوئے یہ اصول بہت کام آئے گا۔ آپ کو ہمیشہ یاد رکھنا ہے کہ آپ ایک بھارت، شریشٹھ بھارت کے بھی علمبردار ہیں۔ اس لیے، آپ کا ہر عمل، آپ کی ہر سرگرمی پر ملک کو اولیت، ہمیشہ اولیت کے جذبے کی عکاس ہونی چاہئے۔

ساتھیو،

میں اپنے سامنے پرجوش خواتین افسران کی نئی نسل کو بھی دیکھ رہا ہوں۔ گذشتہ برسوں میں پولیس فورس میں بیٹیوں کی حصہ داری کو بڑھانے کے لئے مسلسل کوششیں کی گئی ہیں۔ ہماری بیٹیاں پولیس سروس میں مؤثریت اور جوابدہی کے ساتھ ساتھ شائستگی، آسانی اور حساسیت کے اقدار کو بھی مضبوط بناتی ہیں۔ اسی طرح 10 لاکھ سے زائد آبادی والے شہروں میں کمشنرنظام نافذ کرنے کو لے کر بھی ریاستیں کام کر رہی ہیں۔ ابھی تک 16 ریاستوں کے مختلف شہروں میں یہ نظام نافذ کیا جا چکا ہے۔ مجھے یقین ہے کہ بقیہ جگہوں پر بھی اس کو لے کر مثبت  اقدامات کیے جائیں گے۔

ساتھیو،

پولیسنگ کو مستقبل کے لحاظ سے مؤثر بنانے میں اجتماعیت اور حساسیت کے ساتھ کام کرنا بہت ضروری ہے۔ کورونا کے اس دور میں ہم نے دیکھا ہے کہ پولیس کے ساتھیوں نے کس طرح صورتحال کو سنبھالنے میں بہت بڑا کردار ادا کیا ہے۔ کورونا کے خلاف نبردآزمائی میں ہمارے پولیس والوں نے، اہل وطن کے ساتھ کندھے سے کندھا ملاکر کام کیا ہے۔ اس کوشش میں کئی پولیس والوں کو اپنی جان بھی قربان کرنی پڑی ہے۔ میں ان تمام جوانوں کو پولیس ساتھیوں کو خراج عقیدت پیش کرتا ہوں اور ملک کی طرف سے ان کے کنبوں کے تئیں اظہار تعزیت کرتا ہوں۔

 

ساتھیو،

آج آپ سے بات کرتے ہوئے، میں ایک اور پہلو آپ کے سامنے رکھنا چاہتا ہوں۔ آج کل ہم دیکھتے ہیں کہ جہاں جہاں قدرتی آفات آتی ہیں، کہیں سیلاب، کہیں سمندری طوفان، کہیں زمین کھسکنا، تو ہمارے این ڈی آر ایف کے ساتھی پوری مستعدی کے ساتھ وہاں نظر آتے ہیں۔ مصیبت کے وقت این ڈی آر ایف کا نام سنتے ہی لوگوں میں ایک یقین جاگتا ہے۔ یہ شبیہ این ڈی آر ایف نے اپنے بہترین کام سے بنائی ہے۔ آج لوگوں کو یہ بھروسہ ہے کہ مصیبت کے وقت این ڈی آر ایف کے جوان ہمیں جان کی بازی لگاکر بھی بچائیں گے۔ این ڈی آر ایف میں بھی تو زیادہ تر پولیس فورس کے ہی جوان ہوتے ہیں، آپ کے ہی ساتھی ہوتے ہیں۔ لیکن کیا یہی جذبہ، یہ عزت، سماج میں پولیس کے لئے ہے؟ این ڈی آر ایف میں پولیس کے لو گ ہیں۔ این ڈی آر ایف کو عزت بھی ملتی ہے۔ این ڈی آر ایف میں کام کرنے والے پولیس کے جوان کو بھی عزت ملتی ہے۔ لیکن سماجی نظام ویسا ہے کیا؟ آخر کیوں؟ اس کا جواب، آپ کو بھی پتہ ہے۔ عوام الناس کے درمیان پولیس کے تعلق سے جو منفی تصور پایا جاتا ہے، یہ اپنے آپ میں بڑی چنوتی ہے۔ کورونا کے دور کی شروعات میں محسوس کیا گیا تھا کہ یہ تصور تھوڑا بدلا ہے۔ کیونکہ لوگ جب ویڈیو دیکھ رہے تھے، سوشل میڈیا دیکھ رہے تھے۔ پولیس کے لوگ غریبوں کی خدمت کر رہے ہیں۔ بھوکے کو کھلا رہے ہیں۔ کہیں کھانا پکاکر غریبوں کو پہنچا رہے ہیں تو سماج میں پولیس کی جانب دیکھنے کا، سوچنے کا ماحول تبدیل ہو رہا تھا۔ تاہم اب پھر وہی پرانی صورتحال ہوگئی ہے۔ آخر عوام کا یقین کیوں نہیں بڑھتا، شبیہ کیوں نہیں سدھرتی؟

ساتھیو،

ملک کی سلامتی  کے لئے، قانونی نظام بنائے رکھنے کے لئے، دہشت کو مٹانے کے لئے ہماری پولیس کے ساتھی، اپنی جان تک نیوچھاور کر دیتے ہیں۔ کئی کئی دن تک آپ گھر نہیں جا پاتے، تیوہاروں میں بھی اکثر آپ کو اپنے کنبے سے دور رہنا پڑتا ہے۔ لیکن جب پولیس کی شبیہ کی بات آتی ہے ، تو لوگوں کا احساس بدل جاتا ہے۔ پولیس میں آرہی نئی نسل کا یہ فرض ہے کہ اس شبیہ کو بدلے، پولیس کے تعلق سے یہ منفی تصور ختم ہو۔ یہ آپ لوگوں کو ہی کرنا ہے۔ آپ کی تربیت، آپ کی سوچ کے درمیان برسوں سے چلی آرہی پولیس محکمے کی جو قائم شدہ روایت ہے، اس سے آپ کا ہر روز آمنا سامنا ہونا ہی ہے۔ سسٹم آپ کو بدل دیتا ہے یا آپ سسٹم کو بدل دیتے ہیں، یہ آپ کی تربیت، آپ کی قوت ارادی اور آپ کے حوصلے پر منحصر ہے۔ آپ کے ارادے کیا ہیں۔ کن اصولوں سے آپ جڑے ہوئے ہیں۔ ان اصولوں کی تکمیل کے لئے کس جذبے کے ساتھ آپ چل رہے ہیں۔ آپ کے رویہ کے تعلق سے یہی اہم ہے۔  یہ ایک طرح سے آپ کی ایک اور آزمائش ہوگی۔ اور مجھے بھروسہ ہے، آپ اس میں بھی کامیاب ہوں گے، ضرور کامیاب ہوں گے۔

ساتھیو،

یہاں جو ہمارے پڑوسی ممالک کے نوجوان افسران ہیں، ان کو بھی میں بہت بہت مبارکباد دینا چاہوں گا۔ بھوٹان ہو، نیپال، مالدیپ ہو، ماریشس ہو، ہم سبھی صرف پڑوسی ہی نہیں ہیں، بلکہ ہماری سوچ اور سماجی تانے بانے میں بھی بہت مشابہت ہے۔ ہم سبھی خوشی و غم کے ساتھی ہیں۔ جب بھی کوئی مصیبت آتی ہے، آفت آتی ہے، تو سب سے پہلے ہم ہی ایک دوسرے کی مدد کرتے ہیں۔ کورونا کے دور میں بھی ہم نے یہ محسوس کیا ہے۔ اس لیے، آنے والے برسوں میں ہونے والی ترقی میں بھی ہماری حصہ داری بڑھنا طے ہے۔ خصوصاً آج جب جرائم اور مجرمین، سرحدوں کے پار ہیں، ایسے میں آپسی تال میل اور زیادہ ضروری ہے۔ مجھے یقین ہے کہ سردار پٹیل اکیڈمی میں گذارے گئے آپ کے یہ دن، آپ کے کرئیر، آپ کی قومی اور سماجی عہد بستگی اور بھارت کے ساتھ دوستی کو مضبوط کرنے میں مدد فراہم کریں گے۔ ایک مرتبہ پھر آپ سبھی کو بہت بہت مبارکباد۔ شکریہ!