PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
77ನೇ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ದಿನಾಚರಣೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೆಂಪು ಕೋಟೆಯ ಕೊತ್ತಲದಿಂದ ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಪಠ್ಯಾಂತರ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

77ನೇ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ದಿನಾಚರಣೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೆಂಪು ಕೋಟೆಯ ಕೊತ್ತಲದಿಂದ ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಪಠ್ಯಾಂತರ
Unstoppable bull run! Sensex, Nifty hit fresh lifetime highs on strong global market cues

Media Coverage

Unstoppable bull run! Sensex, Nifty hit fresh lifetime highs on strong global market cues
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
SP government had tarnished the name of Mirzapur: PM Modi in Mirzapur, UP
May 26, 2024
SP government had tarnished the name of Mirzapur: PM Modi in Mirzapur, UP
For a strong nation, the Prime Minister should also be strong: PM Modi in Mirzapur, UP
SP-Congress people are dedicated to their vote bank: PM Modi in Mirzapur, UP

भारत माता की,

भारत माता की...

माता विंध्यवासिनी की…जय !

आप लोगन क का हाल-चाल बा, आप लोग मजे में हएन, आप लोगन के हम हाथ जोड़ के प्रणाम करत हई। जय श्री राम। मां विंध्यवासिनी, माता बड़ी शीतला, मां अष्टभुजा और काली खोह माता की पुण्य भूमि को मेरा शत-शत प्रणाम। ज्येष्ठ का ये महीना हमारी परंपरा में विशेष होता है। इसका हर मंगलवार बहुत खास होता है। कोई बड़ा मंगल कहता है, कोई बुढ़वा मंगल कहता है। इस बार ये बुढ़वा मंगल और भी विशेष है। क्योंकि 500 साल बाद ये पहला बड़ा मंगल होने वाला है...जब बजरंग बली के प्रभु राम, अयोध्या में अपने भव्य मंदिर में विराजे होंगे। और यह इतनी बड़ी खुशी है, इतनी बड़ी खुशी है कि शायद हम सबसे ज्यादा बजरंग बली खुश होते होंगे। भाई बहन, जरा मेरे एक सवाल का जवाब देंगे आप? मेरे एक सवाल का जवाब देंगे आपलोग? आपकी आवाज नहीं आ रही है। मेरे एक सवाल का जवाब देंगे? 500 साल बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर, बजरंग बली की खुशी, ये मंगल अवसर किसके कारण आया? किसके कारण आया? किसके कारण आया? किसके कारण आया? यह पुण्य काम किसने किया? यह पुण्य काम किसने किया? आपका जवाब गलत है। आपको भी पता नहीं है कि इतना बड़ा पुण्य काम आपके एक वोट ने किया है। यह आपके वोट की ताकत है कि आज राम मंदिर भी बना है। और जैसा योगी जी ने कहा यहां मां विंध्यवासिनी का भव्य नव्य कॉरिडोर भी बन रहा है। और संयोग देखिए, 4 जून को भी बड़ा मंगल है। (ये जो कुछ नौजवान चित्र लेकर के आए हैं वह हमारे साथी कलेक्ट कर लेंगे। आपका प्यार मुझ तक पहुंच जाएगा। उधर भी दो लोग हैं जरा ले लीजिए भाई। सबको संतोष हो गया, धन्यवाद जी।) साथियों, 4 जून को बड़ा मंगल के दिन फिर एक बार...मोदी सरकार ! 6 चरणों में देश ने तीसरी बार BJP-NDA की बहुत मजबूत सरकार बनाना पक्का कर दिया है।

भाइयों और बहनों,

भारत ने तीसरी बार मोदी सरकार बनाने का मन क्यों बनाया? इसका सीधा-सीधा कारण है- नेक नीयत, नेक नीतियां और नेशन फर्स्ट, मेरा देश सबसे ऊपर, राष्ट्रनिष्ठा! आप मुझे बताइए साथियों, आज जरा एक-एक चीज में बात करता हूं ना। मैं भाषण नहीं करूंगा आज। आपसे बातें करूंगा, ठीक है चलेगा ना। अच्छा आप मुझे बताइए, जरा सोचिए, आप अपना घर बनाते हैं और घर बनाने के लिए किसी मिस्त्री को लगा देते हैं। ये नारे वगैरह बताइए लेकिन बीच बीच में जब जगह हो तब बुलाइए। ठीक है, और फिर एक जून को भी करना पड़ेगा, चार जून को तो बहुत ज्यादा करना पड़ेगा तो थक जाओगे। अच्छा हम अपना घर बनाते हैं और एक मिस्त्री या किसी काम करने वालों को तय करते हैं क्या कभी कोई सामान्य मानवी भी अपना घर बनाने के लिए जो मिस्त्री रख ले, एक महीने के लिए ये मिस्त्री काम करेगा, दूसरे महीने दूसरा मिस्त्री आएगा, तीसरे महीने तीसरा मिस्त्री आएगा। चौथे महीने चौथा मिस्त्री आएगा। तो घर बनेगा क्या? घर बनेगा क्या? जो घर बनेगा वह रहने लायक बनेगा क्या? आंखों को अच्छा लगे ऐसा बनेगा क्या? वो किसी को दिखाने लायक बनेगा क्या? सामान्य मानवी को भी मालूम है एक छोटा सा घर भी बनाना है तो बार-बार मिस्त्री नहीं बदलते भाई। अब यह सपा, कांग्रेस, इंडी गठबंधन यह कह रहा है कि पांच साल में पांच प्रधानमंत्री। अब बताइए भाई, ये पांच साल में पांच प्रधानमंत्री कोई रखता है क्या। अरे कोई मिस्त्री नहीं रखता तो यह प्रधानमंत्री, अब ये क्योंकि उनको बांट के खाना है, वह कहते हैं पांच साल में पांच प्रधानमंत्री। अब बताइए, जहां प्रधानमंत्री अपनी कुर्सी बचाने में लगा रहेगा तो वह क्या देश को मजबूत बना सकता है क्या? इसलिए देश ने तय किया कि मजबूत देश के लिए प्रधानमंत्री भी मजबूत होना चाहिए। होना चाहिए नहीं होना चाहिए। तभी एनडीए को इतना भारी जनादेश मिल रहा है। समाजवादी पार्टी पर अपना वोट कोई बर्बाद नहीं करना चाहता। मुझे बताइए भैया हम लोग, हमारे उत्तर प्रदेश के लोग राजनीति को समझने में बड़े माहिर हैं। यहां तो गांव का बच्चा भी राजनीति समझ जाता है। कोई समझदार कभी भी, अपन मान लीजिए कोई कंपनी डूब रही है तो उस कंपनी का शेयर कोई खरीदेगा क्या? आप बताइए ना खरीदेगा क्या? 10 रुपये का शेयर भी खरीदेगा क्या? जो डूबता है उसमें कोई पैसा डालेगा क्या? जो डूब रहे हैं उसको कोई वोट देगा क्या? देगा क्या? पता ही है कि इनका डूबना तय है तो कौन वोट डालने की गलती करेगा भाई। सामान्य मानवी वोट उसी को डालेगा जिसकी सरकार बनना तय है। आप बताइए आप मिर्जापुर में चौराहे पर जाकर खड़े रहिए किसी भी 100 लोगों को पूछिए कि बताओ भाई किसकी सरकार बनेगी। 90 लोग क्या बोलेंगे बताइए। क्या बोलेंगे, तो फिर वोट उसको ही देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। वोट बर्बाद करना चाहिए क्या?

भाइयों और बहनों,

इंडी-गठबंधन वालों को देश अच्छी तरह जान गया है। ये लोग घोर सांप्रदायिक हैं। ये लोग घोर जातिवादी हैं। ये लोग घोर परिवारवादी हैं। जब भी इनकी सरकार बनती है तो इसके आधार पर ही ये फैसला लेते हैं। अभी देखिए यहां पर चुनाव हुए हमारे यादव समाज में इतने होनहार लोग हैं, इतने होनहार लोग हैं लेकिन उन्होंने अपने परिवार के लोगों को ही टिकट दिया, बाहर के एक को भी को नहीं दिया। साथियों, इतने दशकों तक देश ने बम धमाके झेले हैं। आतंकवाद ने सैकड़ों जीवन तबाह किए हैं। यहां सपा वाले क्या करते थे? कानून व्यवस्था और समाजवादी पार्टी का छत्तीस का आंकड़ा है। जो आतंकी पकड़े जाते थे, उनको भी ये सपा वाले छोड़ देते थे। जो पुलिस अफसर इसमें आनाकानी करता था सपा सरकार उसे सस्पेंड कर देती थी कि तुमने आतंकवादी को पकड़ा क्यों, घर जाओ।

साथियों,

मिर्ज़ापुर को तो इन्होंने बदनाम करके रखा था। इन्होंने पूरे यूपी को, पूर्वांचल को माफिया का सुरक्षित ठिकाना बना दिया था। जीवन हो या ज़मीन...कब छिन जाए कोई नहीं जानता था। और सपा सरकार में माफिया को भी वोटबैंक के हिसाब से देखा जाता था। अब ऐसा नहीं है। अब यहां हमारे योगी जी और उनकी पूरी सरकार मेरा जो स्वच्छता अभियान है न उसको बड़ी बहादुरी से आगे बढ़ा रहे हैं यहां पर। यहां बराबर सफाई चली है। सपा सरकार में पहले जनता थरथर कांपती थी अब भाजपा सरकार में माफिया थरथर कांप रहा है।

भाइयों और बहनों,

अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए इंडी गठबंधन वाले, समाजवादी पार्टी वाले, कोई भी हद पार कर सकते हैं। अब तो इनके निशाने पर हमारा पवित्र संविधान आ गया है। ये दलित-पिछड़ों-आदिवासियों के हक को लूटना चाहते हैं। हमारा संविधान साफ-साफ कहता है कि धर्म के आधार पर आरक्षण हो ही नहीं सकता। इनके इरादे कितने खतरनाक हैं, इससे जुड़ा एक नया खुलासा मैं आज कर रहा हूं। 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव के समय, जनवरी में सपा ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था। तब सपा ने अपने घोषणापत्र में कहा था। जैसे दलितों को आरक्षण मिला है वैसा ही मुसलमानों को दिया जाएगा। ये सपा ने 2012 के घोषणापत्र में कहा था। सपा ने डंके की चोट पर कहा था कि वो इसके लिए संविधान तक बदल देगी। (आप नीचे रखो भैया, पीछे परेशान हो रहे हैं। पहले आप अपने बेटे को कंधे पर बिठाए रखा, लोग परेशान हुए, अब दूसरे का चित्र उठा के ले आए, फिर लोगों को परेशान कर रहे हैं।) इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने फिर अपना घोषणापत्र जारी किया। इसमें फिर सपा ने मुसलमानों को आरक्षण देने का ऐलान किया। देखिए इनकी आदत। और इतना ही नहीं, सपा ने घोषणा की थी कि पुलिस और PAC में भी 15 प्रतिशत आरक्षण मुसलमानों को दिया जाएगा। आप कल्पना कर सकते हैं, ये लोग अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए किस तरह SC-ST-OBC का हक छीनने पर तुले हुए थे। भाइयों-बहनों, मैं भी आप में से कईयों की तरह अति पिछड़े समाज से निकल कर के यहां पहुंचा। मुझे उनकी पीड़ा मालूम है। पिछड़ों ने कैसी जिंदगी जी है वह मुझे मालूम है। उसको भी लूटना चाहते हैं। सरकार में आने के बाद इन्होंने अपनी मनमानी भी की, लेकिन मामला तबसे सुप्रीम कोर्ट में फंसा हुआ है। बावजूद इसके ये पिछले दरवाजे से ओबीसी का हक मुसलमानों को देते रहे हैं। लेकिन बार-बार कभी हाईकोर्ट, कभी सुप्रीम कोर्ट इसको रोक लगाती है, गंभीर सवाल पूछती, मामले लटके रहते हैं। अब इंडी वालों ने मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए आखिरी उपाय खोज लिया है। सपा-कांग्रेस वाले अब संविधान में लिख देना चाहते हैं कि मुसलमानों को आरक्षण दिया जाएगा। इसलिए ये लोग संविधान बदलना चाहते हैं। ये कोर्ट-कचहरी के झंझट को एक बार में ही खत्म कर देना चाहते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं मेरे भाई-बहन क्या आप ये होने देंगे क्या? आपका हक जाने देंगे क्या? क्या वोट बैंक के आधार पर हक छीना जाएगा क्या? क्या बाबा साहेब आंबेडकर की पीठ पर छुरा भोंकने देंगे क्या? क्या संविधान का अपमान होने देंगे क्या? क्या संविधान की हत्या करने देंगे क्या?

साथियों,

सपा-कांग्रेस के लोग वोटबैंक को समर्पित हैं, वहीं मोदी गरीब-दलित-पिछड़ों के हितों के लिए समर्पित है। मोदी 5 साल तक मुफ्त अनाज दे रहा है। मोदी 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज दे रहा है। अब तो मोदी की गारंटी है जितने भी परिवार हैं, मोदी.हर परिवार के बुजुर्गों का मुफ्त इलाज कराएगा।

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि से मिर्जापुर के किसानों के खाते में करीब 1 हज़ार करोड़ रुपए पहुंचे हैं। मोदी ने 4 करोड़ पक्के घर बनाकर दे दिए हैं। 3 करोड़ पक्के घर गरीबों को और मिलने वाले हैं। ये एक-एक घर लाखों रुपए का है, जो माता-बहन के नाम पर मिल रहा है।

साथियों,

आप बिजली से कमाई कर सकें, मोदी इसके लिए भी रास्ता बना रहा है। पहला तो आपका बिजली बिल जीरो, आपका बिजली बिल जीरो, इतना ही नहीं आपके पास जो अतिरिक्त बिजली होगी वो सरकार खरीदेगी। बिजली के बदले में पैसे देगी और आपको बिजली से कमाई होगी। और इसलिए मोदी ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली की योजना शुरू की है। यह शुरू कर दिया है वादा नहीं कर रहा हूं। गारंटी चालू हो गया। आप ऑनलाइन जाकर के रजिस्ट्री करवा दीजिए और यह काम करने के लिए हमारी सरकार आपके घर के छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए हर घर को 75 हजार तक देगी। हर घर को सरकार के पैसों से सोलर पैनल लगेगा और उससे बिजली से आपको कमाई होगी। बताइए आपको डबल मुनाफा है कि नहीं है। मुक्त बिजली का लाभ है कि नहीं है।

भाइयों और बहनों,

ये क्षेत्र, हमारे हस्तशिल्पियों का, कलाकारों का, विश्वकर्मा परिवारों का क्षेत्र है। यहां का पीतल उद्योग, कारपेट उद्योग, मिट्टी के बर्तनों का उद्योग हमारी ताकत रहा है। आपके उत्पाद देश ही नहीं, विश्व के बाज़ार में पहुंचे, ये काम करने में मोदी जुटा है। पहले हमने यहां एक जनपद एक उत्पाद योजना चलाई। अब मोदी पीएम विश्वकर्मा योजना लेकर आया है। इस योजना के तहत विश्वकर्मा साथियों को ट्रेनिंग सरकार दे रही है। आधुनिक औज़ारों के लिए पैसा सरकार दे रही है। और बैंक से लाखों रुपए की मदद सीधे मिल रही है, ये मोदी की गारंटी है कि उसको पैसा मिले। इससे हर प्रकार के बर्तन, खिलौने बनाने वाले साथियों को लाभ होगा। कुछ साल पहले तक भारत विदेशों से खिलौने आयात करता था। मैंने देश के खिलौना उद्योग को प्रोत्साहन दिया, उनका हाथ पकड़ा। आज भारत के खिलौने पूरी दुनिया में पहुंच रहे हैं। इसलिए मिर्ज़ापुर के खिलौना बनाने वाले साथियों के लिए भी अवसर ही अवसर हैं।

भाइयों और बहनों,

मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज नारी सशक्तिकरण के मॉडल बनकर उभरे हैं। बहन अनुप्रिया तो मेरे मंत्रिमंडलीय मजबूत साथी है। और इस बार तो बहन रिंकी कौल ने भी इतिहास बनाया है। अगर मैं गलत नहीं हूं तो ये राबर्ट्सगंज से पहली महिला उम्मीदवार हैं। और देखिए मेरा नाता कैसा है। मैं बचपन में कब प्लेट धोते धोते बड़ा हुआ हूं। चाय पिलाते पिलाते बड़ा हुआ हूं। और आपने देखा होगा कि जैसे ही विजय का सूरज उगता है तो कमल भी खिलता है और उसी समय कप प्लेट की भी याद आती है, चाय की चुस्की लेने का मन करता है। और मोदी और चाय का नाता भी इतना तगड़ा है यानी मोदी है, कप प्लेट है, चाय की चुस्की है, कमल खिल रहा है, देखिए चारों तरफ जय-जयकार है। इसलिए आपका एक-एक वोट नारीशक्ति को सशक्त करने के लिए पड़ना चाहिए। यहां दुद्धी में भी उपचुनाव हो रहा है। वहां से हमारे साथी भाई श्रवण गौंड जी को भी भारी मतों से विजयी बनाना है। और आपको याद रखना होगा जहां दो निशान हैं, वहां दो अलग अलग निशान होंगे, एक जगह पर ऊपर कपप्लेट होगी वहीं कमल भी होगा। तो आपको ये ध्यान रख कर के वोट करना है। याद रखिएगा आप सिर्फ एमपी नहीं चुन रहे आप पीएम भी चुन रहे हैं। और इसलिए ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे। ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे?

मैं आपको पूछ रहा हूं मेरी आवाज सुनाई दे रही है। आप ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे? हाथ ऊपर करके बताइए ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे? हर पोलिंग बूथ में विजय होकर आएंगे? घर घर जाएंगे? मतदान के पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ेंगे? अच्छा मेरा एक काम करोगे? ये मेरा पर्सनल काम है करोगे? देखिए गांव-गांव हमारे यहां हर गांव में ग्राम मंदिर होते हैं पवित्र मंदिर होते हैं। आप सब वहां जाना और मोदी की तरफ से वहां मथ्था टेकना और परमात्मा से आशीर्वाद मांगना। मोदी के लिए नहीं मोदी के परिवार के लिए, नहीं 140 करोड़ देशवासियों के लिए विकसित भारत बनाने के लिए आशीर्वाद मांगना। मांगेंगे? हर मंदिर में जाएंगे हर तीर्थ स्थान में जाएंगे? श्रद्धा पूर्वक परमात्मा से प्रार्थना करेंगे?

बोलिए भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत-बहुत धन्यवाद।