PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत माता की… भारत माता की…

राम राम भाई सारे नै!

आज बुद्ध पूर्णिमा है। मैं समस्त देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मैं श्रद्धेय गुरु जयराम दास, चमन ऋषि और महान सेनानी राव तुलाराम जी को नमन करता हूं। मैं रेजांगला के शहीदों और अहीरवाल की इस भूमि को प्रणाम करता हूं। मैं अगर हरियाणा में आऊं तो पुरानी यादें ताजा ना हो जाए, ऐसा हो नहीं सकता। यहां भी वहां भी बहुत सारे परिचित चेहरे नजर आ रहे हैं। पुरानी-पुरानी यादें भी, क्योंकि हरियाणा तो वर्षों तक एक प्रकार से मेरा घर ही बन गया था। और मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं मुझे राजनीति की बहुत सारी शिक्षा हरियाणा और पंजाब से मिली। और यह मेरा सौभाग्य रहा इस मिट्टी ने भी मुझे गढ़ा है। वो 1995 का शायद कालखंड होगा जब मैं प्रभारी के रूप में यहां आया था। लेकिन आमतौर पर प्रभारी आते हैं दौरा करने के लिए। मैं यहां ‘मुकाब’ करने आ गया था। मैं यहीं पर रहता था और उस समय हमारे मनोहर लाल जी संगठन का काम देखते थे। उस समय हमारे रमेश जोशी जी अध्यक्ष हुआ करते थे। रमेश जी, मैं, मनोहर लाल जी ने हरियाणा की खूब खाक छानी थी। मैंने यहां माताओं-बहनों के हाथ का खाना भी खूब खाया है। और हमारे नारनौल के सुरजा हलवाई और महेंद्रगढ़ की मिठाई शायद इसी के कारण ये हमारा राबिला डायबिटिक हो गया। लेकिन अब भी उतनी ही अच्छी बनती है ना सब कुछ। गर्मी के सीजन में एक गिलास राबड़ी, मोटी रोटी और एक प्याज सारी भूख मिटा देता था। जिद सिदा सादा खाना वो मेरा हरियाणा।

साथियों,

हरियाणा के घी-मक्खन का जोर तो आज पूरी दुनिया देख रही है। सारी भारत-विरोधी ताक़तें लगी रहतीं हैं। लेकिन, मोदी इनके झुकाए नहीं झुकता है। अभी मोदी को आपका कर्ज चुकाने के लिए बहुत काम करना है। हमारे हरियाणा को नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। और इसके लिए जरूरी है- फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार।

साथियों,

ये चुनाव देश का प्रधानमंत्री चुनने का चुनाव है। आप प्रधानमंत्री ही नहीं चुनेंगे, देश का भविष्य भी चुनेंगे। एक ओर आपका जांचा-परखा सेवक मोदी है। दूसरी ओर कौन है? कोई अता-पता ही नहीं है। और हरियाणा के लिए तो मोदी मतलब, शायद यहां हरियाणा में आपको कम से कम 5000 लोग ऐसे मिल जाएंगे जो दूर से चिल्ला के कहेंगे, ऐ मोदी जी जरा रुक जाओ। ऐसे कहने वाले 5000 लोग मिल जाएंगे यानि हरियाणा के साथ मेरा जो अपनापन रहा है, हरियाणा ने मुझे जो प्यार दिया है और इसलिए हरियाणा का अधिकार भी मुझ पर बनता है। चलते-फिरते मुझे कह सकता है ऐ मोदी जी गलत कर रहे हो, ऐसा मत करो। इतना मेरा आपसे नाता रहा है। और पिछले 10 साल में आपने उस प्यार में कभी कमी नहीं आने दी इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। और ये इंडी अलायंस वालों का हाल तो ऐसा है कि गाय ने दूध दिया नहीं, लेकिन घी खाने के लिए इंडी वालों में झगड़ा शुरू हो गया। अब ये लोग कह रहे हैं हर साल एक आदमी भारत का प्रधानमंत्री होगा। पांच साल 5 पीएम। आप मुझे बताइए, ऐसे देश चलेगा क्या? चलेगा क्या? और हमारे हरियाणा के लोगों में तो ग्रामीण भाषा में चौपाल में बैठ कर के जो ठहाके लेने की ताकत है ना। मुझे पक्का विश्वास है कि 5 साल में पांच प्रधानमंत्री, 5000 चुटकुले हरियाणा वाले बना देंगे। साथियों ये लोग देश को फिर से गड्ढे में धकेलेंगे नहीं तो क्या करेंगे?

साथियों,

इंडी गठबंधन के लोग ये घोर सांप्रदायिक हैं, घोर जातिवादी हैं, घोर परिवारवादी लोग हैं। (अरे वो ताऊजी को परेशान मत कर भाई थोड़ा इधर-उधर हो जा रे) देश की जनता इंडी जमात के इरादे पहले ही भांप चुकी है। इसलिए, इनका ये हाल हुआ है, पांच चरणों में ही इंडी जमात का ढोल फट गया है और आपने देखा होगा तीसरे चरण के बाद इन्होंने रोना-धोना शुरू कर दिया। इलेक्शन कमीशन आंकड़े क्यों नहीं देता है? आंकड़े देर से क्यों देता है? इलेक्शन कमीशन ऐसा क्यों करता है? इलेक्शन कमीशन वैसा क्यों करता है? उधर ईवीएम बंद हो गया, उधर ईवीएम चलता नहीं है, उधर ईवीएम का ये...यानि उन्होंने ग्राउंड बनाना शुरू कर दिया है कि पराजय का ठीकरा किसके सिर पर फोड़ा जाए और इसलिए बराबर जमकर के इस बार ईवीएम को गालियां दे रहे हैं। हम सब जानते हैं भाई जिस भूमि में कोई पैदावर ना हो, कोई किसान उसमें एक भी बीज डालेगा क्या? जिसमें फसल ना हो ऐसी जमीन पर या ऐसे सीजन में कोई किसान एक भी बीज डालेगा क्या? जब पता है कि इनकी सरकार नहीं बनने वाली तो कोई उधर वोट डालेगा क्या? कोई डालेगा क्या? ये हरियाणा वालों को कहने की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि उनको मालूम है भाई इनकी सरकार सात जन्म में भी बनने वाली नहीं है। और कांग्रेस को दिया हर वोट बेकार ही होना है। इसलिए आपको सरकार बनाने के लिए वोट करना है। और सरकार किसकी बनने जा रही है? किसकी सरकार बनेगी? बच्चे-बच्चे को पता है किसकी सरकार बनेगी?

साथियों,

चौबीस के इस चुनाव में पूरा देश कांग्रेस की सच्चाई जान गया है। कांग्रेस औऱ इंडी वालों के लिए देश से भी बड़ा उसका अपना वोटबैंक है। इन लोगों ने वोटबैंक के लिए देश का विभाजन करवाया। एक भारत और दो-दो मुस्लिम राष्ट्र बनाए। अब इंडी वाले लोग कह रहे हैं कि बचे हुए भारत पर भी पहला अधिकार मुसलमानों का है। इन्होंने SC, ST, OBC इनको जो बाबा साहेब आंबेडकर ने आरक्षण दिया है, भारत के संविधान ने जो आरक्षण दिया है। इसको छीनकर के वे वोट जिहाद करने वाले लोगों को देना चाहते हैं। आपने कल अखबारों में देखा होगा, टीवी पर देखा होगा, सोशल मीडिया में देखा होगा। बंगाल की हाई कोर्ट का जजमेंट आया है और बंगाल में भी इंडी जमात का SC, ST, OBC के आरक्षण के खिलाफ उनका जो षड्यंत्र है, आरक्षण विरोधी उनकी जो मानसिकता है उसका भंडा फूट गया है। बंगाल में इन लोगों ने क्या किया। बंगाल में इन लोगों ने मुसलमानों को रातों रात ओबीसी का सर्टिफिकेट दे दिया था। जो आरक्षण ओबीसी को मिलना चाहिए वह सारा का सारा मुसलमानों को और वह भी घुसपैठियों में बांटा जा रहा था। हाई कोर्ट ने बंगाल में पिछले 10- 12 साल में मुसलमानों को दिए सारे ओबीसी सर्टिफिकेट रदद कर दिए। अब आप देखिए, कोर्ट ना होती तो क्या होता। ये पिछड़े समाज के लोग करते क्या, ये मेरे दलित भाई बहन क्या करते, ये मेरे आदिवासी भाई बहन क्या करते। लेकिन साथियों आप ये इंडी जमात वालों की मानसिकता देखिए। बंगाल की सीएम ने घोषणा कर दी है कि वो हाई कोर्ट का फैसला नहीं मानेगी। वो मुसलमानों को ओबीसी का आरक्षण देकर रहेगी। आप मुझे बताइए, कांग्रेस हो टीएमसी हो इंडी गठबंधन के सारे दल तो अपने वोट बैंक के साथ डटकर खड़े हो गए हैं। फिर आपके साथ, हरियाणा के साथ कौन खड़ा होगा? कौन खड़ा होगा? इसलिए मैं हरियाणा के हर SC, हर ST, हर OBC को भरोसा देने आया हूं जब तक मोदी जिंदा है। कोई माई का लाल दलित का, आदिवासी का, पिछड़ों का आरक्षण छीन नहीं सकता है। वंचितों का जो अधिकार है, मोदी उसका चौकीदार है। और भाइयों-बहनों ये चुनावी भाषण नहीं है, ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए इंडी गठबंधन वाले कुछ भी कर सकते हैं। हमारे यहां हरियाणा में हर कोई दिन में दो सौ-चार सौ बार राम-राम बोलता है। हर दस कदम पे वो राम-राम बोलेगा ही। राम-राम के बिना हरियाणा में कोई काम होता है क्या? लेकिन, कांग्रेस का बस चले तो हरियाणा में राम का नाम लेने वालों को ये गिरफ्तार कर ले। कांग्रेस पूरे देश से ही राम को हटाना चाहती है। कांग्रेस जब तक सत्ता में रही, उसने राममंदिर नहीं बनने दिया। कांग्रेस ने राममंदिर प्राणप्रतिष्ठा तक का बहिष्कार कर दिया है। और अब तो शहजादे के सलाहकार ने तो एक और बड़ा खुलासा किया है। कांग्रेस अब अगर सत्ता में आई तो राममंदिर पर ताला लगाने की फिराक में है। कांग्रेस चाहती है कि हरियाणा के लोग रामलला के दर्शन तक नहीं कर पाएं। वो राम लला को फिर से टेंट में भेजना चाहते हैं। क्या हरियाणा के लोग ऐसा होने देंगे क्या? राम लला को फिर से अपमानित करेंगे क्या, क्या ऐसे लोगों को मेरा हरियाणा जवाब देगा कि नहीं देगा? हर बूथ में चुन-चुन कर उनको साफ करेगा कि नहीं करेगा?

साथियों,

कांग्रेस हमारी आस्था का ही नहीं, हमारे तिरंगे का भी अपमान करती है। 370 के नाम पर कश्मीर को देश से अलग किसने रखा? 70 साल तक कश्मीर में तिरंगा किसने नहीं फहरने दिया? आज ये लोग कह रहे हैं, ये सत्ता में आए तो फिर से 370 वापस लाएंगे। क्या हम कश्मीर में हुए बलिदानों को बेकार जाने देंगे? कांग्रेस के मंसूबों को क्या हरियाणा कामयाब होने देगा क्या?

साथियों,

कांग्रेस ने देश के पूर्व फौजियों के साथ भी धोखा किया। उन्हें दशकों तक पूर्व फौजियों को वन रैंक, वन पेंशन नहीं मिलने दी। कांग्रेस झूठ बोलती थी कि OROP के 500 करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को देंगे। अब ये चुनाव जीतने के लिए पूर्व सैनिकों के साथ धोखा किया गया और कांग्रेस के जेहन में सेना के प्रति, सैनिकों के प्रति नफरत का भाव भरा पड़ा है और 1962 में पंडित नेहरू की जो औरा का गुब्बारा जो फूट गया। चाइना के हाथों जो हमारी पिटाई हुई, वो उसके लिए गुनहगार हमारी देश की सेना को मानते हैं। और आज भी वो परिवार उसी मिजाज में हमारी सेना का अपमान करने के मौके ढूंढती रहती है। और उसी बदले की भाव से उसने 500 करोड़ रुपये ऐसे ही फेंक दिया और कह दिया कि OROP हो जाएगा। OROP होने का मतलब क्या होता है वह मोदी ने आकर के बताया। मोदी ने आकर के जब OROP लागू किया वन रैंक वन पेंशन लागू किया। उन्होंने 500 करोड़ रुपये का खेल खेला था। आपकी आंखों में धूल झोंकने का पाप किया था। मोदी ने जब एक्चुअली OROP लगाया, सवा लाख करोड़ रुपया लगा। कितना? अरे जरा बताइए ना, सवा लाख करोड़ रुपया। अब कोई मुझे बताए कहां 500 करोड़ और कहां सवा लाख करोड़। ये सवा लाख करोड़ रुपया पूर्व सैनिकों के परिवारों के बैंक के खाते में जमा हो चुका है। जब सैनिकों का मान रखने का जज्बा होता है तो काम भी उसी जज्बे से होता है।

साथियों,

हमारे हरियाणा को भी लूटने में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। मैंने तो अपनी आंखो से देखा है कांग्रेस के समय में क्या हाल था हरियाणा का। जो मुख्यमंत्री बनता था, वो अपने जिले के बाहर नहीं देखता था। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जिसे लूटने का खुला खेल न चलता हो! आपको याद है न, नौकरी दिलवाने के नाम पर ये लोग ज़मीनें बिकवा देते थे। ट्रान्सफर पोस्टिंग की तो खुली इंडस्ट्री चलती थी। सड़कें गड्ढों में होती थीं। उद्योगों पर संकट आने लगा था। आप कल्पना करिए, अगर कांग्रेस कुछ दिन और रह जाती, तो हरियाणा का क्या हाल करती!

साथियों,

बीते 10 वर्षों में हमने कांग्रेस के पाप धोने में बहुत मेहनत की है। आज हरियाणा में आधुनिक हाइवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। अब न दिल्ली दूर है, न चंडीगढ़ दूर है। अब नारनौल वाले सुबह चंडीगढ़ जाते हैं, शाम को वापस घर! गुरुग्राम वालों का तो जीवन ही द्वारका एक्सप्रेसवे ने आसान कर दिया। इसीलिए, अब इस पूरे एरिया में नए नए उद्योग लग रहे हैं। रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

भाइयों बहनों,

मैं गुरुग्राम के युवाओं से भी कहना चाहता हूं। अगले 5 साल, ये देश में एक बड़ी क्रांति का समय होने वाला है। आप देखिए कैसे नए-नए सेक्टर हमारे नौजवानों का भाग्य बदलने वाले हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर, ड्रोन सेक्टर, स्टार्टअप सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन एनर्जी सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन फार्मा हब अनगिनत और इन सब में बहुत से ज्यादा काम मेरे देश के नौजवानों को मिलने वाला है। आपके हर सपने पूरे होंगे, क्योंकि आपका सपना ये मोदी का संकल्प हैं।

साथियों,

कांग्रेस के विश्वासघात का भुक्तभोगी तो हरियाणा का किसान भी रहा है। यहां उसने किसान को सिंचाई के पानी तक का इंतजाम नहीं किया। हम नहरों को जोड़कर यहां तक पानी पहुंचा रहे हैं। हमारी सरकार हरियाणा में 14 फसलों को MSP पर खरीद रही है। हमारे भिवानी का किसान बाजरा, और यहां जो बाजरे की खेती है और हमारा यहां का किसान जो बाजरा पैदा करता है मेरे प्रिय बाजरे में से वो है। और मुझे याद है यहां जब भी आया बाजरे की खिचड़ी खाई और मजा है कि जब बाजरे की खिचड़ी खाओ तो आधी खिचड़ी आधा घी, तब बोले खिचड़ी खाने का मजा होता है। अब मैं गुजराती आदमी इतना खा तो नहीं सकता था, लेकिन उनका प्यार हरियाणा के लोगों का, यहां का बाजरा आज भी वो मुझे याद हमेशा रहता है। लेकिन अब आपके बाजरे के श्री अन्न के प्रचार की जिम्मेदारी खुद मोदी ने ले रखी है। मैंने जितने मिलेट हैं, जितना मोटा अनाज है उसके लिए एक नाम दे दिया श्री अन्न। और मैं दुनियाभर में उसका एंबेसडर बन गया हूं, उसका सेल्समैन बन गया हूं। आपने देखा होगा हमारे देश में जी 20 की समिट हुई। दुनियाभर के बड़े-बड़े नेता यहां आए थे। दुनिया की सबसे बड़ी ताकत जिसको कहें वो सब जी 20 में थी और मोदी ने उनको क्या खिलाया। मोदी ने उनको बाजरा खिलाया। और बड़े-बड़े नेताओं को मैंने कहा ये सुपर फूड है। और उसका एक परिणाम ये आया कि मुझे अभी अमेरिका बुलाया था वाइट हाउस में भोजन था। वाइट हाउस में उस दिन काफी लोगों को उन्होंने खाने पर बुलाया था देश भर के लोगों को और सबको उन्होंने बाजरा खिलाया वाइट हाउस में अमेरिका में। साथियों इससे क्या मोदी का प्रचार हुआ क्या। इससे प्रचार हुआ हरियाणा का, हरियाणा के किसानों का, हरियाणा के बाजरे का।

साथियों,

इस क्षेत्र के विकास के लिए हमने चौधरी बंसीलाल के साथ मिलकर सरकार चलाई थी। चौधरी बंसीलाल भिवानी-महेंद्रगढ़ के विकास के लिए कटिबद्ध थे। और मुझे बड़ा मेरा सौभाग्य रहा चौधरी बंसीलाल जी से मेरी बड़ी निकटता रही और वो रात को देर तक जागने के आदी थे। तो कभी-कभी हमारी मीटिंग रात को एक बजे के बाद शुरू होती थी और कभी-कभी सुबह तक चलती थी। उनके पास अनुभव की इतनी बातें हुआ करती थी और मैं देखता था कि जब भी बातों में स्वामी दयानंद सरस्वती जी की बात आती थी, ऐसी एक मीटिंग नहीं होगी कि स्वामी दयानंद सरस्वती की बात निकली हो और चौधरी बंसीलाल जी की आंख से आंसू ना टपके हों और वह मुझे इतना प्यार करते थे क्योंकि मैं गुजरात का था, दयानंद सरस्वती जी का जन्म गुजरात में हुआ था, तो एक नाता ऐसा बन गया था और गवर्नेंस की दुनिया में भी साथ-साथ काम किया, वर्षों तक साथ में काम किया।

साथियों,

लेकिन यह जो महापुरुष है उन सबसे प्रेरणा लेते हुए आज मेरी भी गारंटी है कि हरियाणा का विकास हम रुकने नहीं देंगे। लेकिन इसके लिए 25 मई को भिवानी महेंद्रगढ़ से चौधरी धरमबीर सिंह जी, और गुरुग्राम से राव इंदरजीत सिंह जी मेरे इन दोनों साथियों को भारी बहुमत से विजयी बनाइए और आप जब उनको कमल के निशान पर वोट देंगे ना वो वोट सीधा सधा मोदी के खाते में जाएगा। तो आप पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ेंगे? मतदान ज्यादा से ज्यादा कराएंगे? हर पोलिंग बूथ में विजय प्राप्त करेंगे? अच्छा मेरा एक काम है करेंगे आप लोग। अरे क्या कमाल है भाई, ठंडे हो गए एकदम। मेरा पर्सनल काम है करेंगे। अरे मैं भी तो हरियाणा वाला हूं यार बोलो ना मेरा एक काम करेंगे। देखिए पहले तो मैं यहां गांव गांव जाता था हर इलाके में गया हूं हजारों परिवारों में गया हूं लेकिन अब समय की कठिनाई है जा नहीं पाता हूं। तो मुझे आपकी मदद चाहिए, करोगे मदद सब लोग करोगे। ऐसे ही नहीं बता रहे हो ना सही में करोगे ना। एक काम करना यहां से जाने के बाद ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाना, ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना और हर परिवार के लोगों को बिठा कर के कहना कि अपने मोदी जी आए थे, मोदी जी ने आपको राम राम कहा है। मेरा राम राम पहुंचा दो मुझे तसल्ली हो जाएगी। मुझे लगेगा कि चलो भाई इन सबके मुझे आशीर्वाद मिल जाएंगे। तो आप करेंगे, मेरा राम राम पहुंचाएंगे हर परिवार में, हर घर में पहुंचाएंगे।

बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

बहुत-बहुत धन्यवाद