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सभी विशिष्‍ट महानुभाव और विशालसंख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाईयों और बहनों,

Seychelles की मेरी पहली मुलाकात है, लेकिन लग रहा है आप लोगों से बहुत पहले से जुड़ा हुआ हूं।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (1)

कल मैं रात देर से आया उसके बावजूद भी पूरे रास्‍ते भर मैं Seychelles के लोगों के प्‍यार को अनुभव कर रहा था। जिस प्रकार का स्‍वागत सम्‍मान किया, इसके लिए मैं यहां की सरकार का, यहां के नागरिकों का और आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

Seychelles और भारत - विज्ञान यह कहता है कि हजारों साल पहले हम एक ही धरती थे, लेकिन जब प्रलय होता है तो सब बिखर जाता है। यह धरती और भारत की धरती, इसके बीच हजारों साल पहले हजारों मील का फासला हो गया। प्रकृति ने धरती को अलग किया, लेकिन हमारे दिलों को जुदा नहीं किया।

और कभी-कभी लगता है कि भारत और हमारे Seychelles के बीच में एक बहुत बड़ा समंदर है। लेकिन यह समंदर हमें बिछड़ने के लिए नहीं है, यह समंदर है जो हमें जोड़ता है। समंदर के तट पर खड़े होकर के हम ऊंगली करके कह सकते हैं उधर मेरा मुंबई है, उधर मेरा चेन्‍नई है, उधर मेरा कोच्चि है। यह नजदीकी, ये अपनापन.. और इस अर्थ में, समझता हूं कि हम लोगों का एक विशेष नाता है।

आज भारत इस बात का गर्व करता है कि आप भारतवासी जहां भी गए, जिस अवस्‍था में गए, जिस कठिनाइयों के बीच जिंदगी को जीये, शताब्‍दीभर - कुछ कम समय नहीं होता है - कहते हैं शुरू में 1717 में कुछ लोग यहां आए थे, और तब से सिलसिला चला। सौ सवा सौ वर्ष, बहुत बड़ी मात्रा में आना जाना हुआ। लेकिन इस पूरे कालखंड में आपके व्‍यवहार से आपकी वाणी से यहां के लोगों ने आपको अपना बना लिया और आपने इस देश को अपना बना लिया है। यही तो हमारी मूल सांस्‍कृति धरोहर है - वसुदेव कुटुम्‍बकम - पूरा विश्‍व एक परिवार है। और जो इन संस्‍कारों से पले-बढ़े हैं, जिनके लिए पृथ्‍वी यह माता है, उनके लिए अपनेपन के लिए भौगोलिक सीमाएं नहीं होती है।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (4)

देश की सीमाएं उनकी भावनाओं को बांटकर के नहीं रखती है। भावनाएं आपार सागर की तरह फैली होती है, और आपके व्‍यवहार से वो देश गर्व अनुभव करता है कि आपने सारी दुनिया में... आज भी कहीं पर भी जाओ दुनिया में कांतिलाल जीवन शाह का नाम दोगे। अब तो हमारे बीच रहे नहीं, लेकिन उन्होंने काम के द्वारा दुनिया में Seychelles का भी नाम रोशन किया, एक मूल भारतीय के नाते भी नाम रोशन किया। विश्व ने उनको सम्मानित किया। अनेक Award मिले उनको। और वो सिर्फ आर्थिक कारोबार के कारण नहीं है। उन्होंने ज्यादातर चिंता की थी प्रकृति की रक्षा के लिए। आज जिस Climate change को लेकर के दुनिया चिंतित है, कांतिलाल शाह अपनी जवानी के समय से उन मुद्दों को लेकर के Seychelles के अंदर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे थे, लोगों को जगा रहे थे। सामूहिक की संपदा के लिए लोगों को जगा रहे थे, संवेदनाएं पैदा कर रहे थे। एक भारतीय के नाते इस प्रकार का उनका जीवन, इस प्रकार का उनका काम, हर हिंदुस्तानी को गर्व देता है, अभिमान देता है। और ऐसे तो यहां अनगिनत लोग हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि, शक्ति, क्षमता, कल्पना शक्ति, समार्थ्य, धन - इन सबके द्वारा Seychelles के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इतनी बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय यहां रहता है। और हम गुजरात के लोग तो एक पुरानी घटना से बड़े परिचित हैं कि जब ईरान से पारसी आए और राजा ने भरा हुआ दूध का कटोरा भेजा और पारसी समुदाय ने उसमें चीनी मिलाई और वापिस भेजा। कटोरा भरा हुआ था लेकिन जब चीनी मिलाकर के भेजा तो दूध बाहर नहीं गया अंदर ही रहा। पूरा भरा रहा लेकिन दूध मीठा हो गया। और तब ये symbolic संदेश था कि पारसी ने संदेश दिया कि भले ही हम ईरान से आए हैं लेकिन हम हिंदुस्तान की धरती पर ऐसे घुल-मिल जाएंगे जिसके कारण आपकी sweetness में बढ़ोतरी होगी। मैं समझता हूं उसी परंपरा... भारतीय समुदाय के लोग यहां आ के Seychelles में उसी तरह घुल-मिल गए हैं कि जिसने Seychelles की sweetness को बढ़ाया है उसकी रोशनी को उजागर किया है, उसको सामर्थ्य दिया है। और इस प्रकार से अपने व्यवहार से, अपने आचरण से, जब कोई मेरा भारतीय भाई दुनिया के किसी भी कोने में जाकर के उस समाज की भलाई के लिए जीता है, उस समाज की भलाई के लिए काम करता है, उस धरती के लिए अपना जीवन लगा देता है, तब भारत के नाते हम लोगों को बड़ा गर्व होता है। मैं आज आपके बीच मेरे गर्व की अभिव्‍यक्ति आपके सामने कर रहा हूं। आनंद की अभिव्यक्ति कर रहा हूं, आपका अभिनंदन कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाली हमारी पीढि़या भी इन संस्‍कारों को इन परंपराओं को बनाए रखेगी, और विश्‍व में भारत का गौरव भारत की पहचान बनाने में हमारी अहम भूमिका रहेगी।

भाईयों-बहनों, कुछ महीने पहले भारत में चुनाव हुए और बहुत वर्षों के बाद, करीब-करीब 30 वर्ष के बाद भारत में पूर्ण बहुमत से चुनकर के लोगों ने एक सरकार बनाई। और मुझे बताया गया कि भारत में जब चुनावी नतीजे आ रहे थे, result आ रहे थे, तब आप भी यहां उत्‍सव मना रहे थे। यह उत्‍सव इस बात से भी जुड़ा हुआ था कि आप भी - Seychelles की प्रगति तो चाहते ही चाहते हैं, उसके लिए प्रयास भी करते हैं - लेकिन आपके दिल में यह भी है कि भारत भी प्रगति करे, भारत भी नई ऊंचाईयों को पाएं।

और हम तो वो लोग हैं जो वसुदेव कुटुम्‍ब कहते हैं तो हमारी तो कल्‍पना है पूरा विश्‍व आगे बढ़े, पूरा विश्‍व शांति से जीए, पूरा विश्‍व प्रगति करे। यही तो हमारे सपने हैं, यही तो हमारे संस्‍कार हैं, यही हमारा संकल्‍प है कि हम जय जगत वाले लोग हैं, विश्‍व कल्‍याण वाले लोग हैं। और उस काम को करने के लिए भारत को भी अपनी जिम्‍मेवारी निभाने के लिए सक्षम होना पड़ेगा। अगर भारत गरीब रहा, भारत पिछड़ा रहा, भारत दुर्लभ रहा तो दुनिया की आशा-आकांक्षा वो पूरी करने में भारत कोई भूमिका नहीं निभा सकता। तो विश्‍व कल्‍याण की भी अगर भूमिका निभानी है तो भारत का मजबूत होना जरूरी है, भारत का सामर्थ्‍यवान होना जरूरी है, भारत का सुख-शांति से हरा-भरा देश बनना जरूरी है। और इसलिए पिछले नौ-दस महीने में कोशिश की गई है कि देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे। भारत का सर्वांगीण विकास हो और भारत विश्‍व से ज्‍यादा से ज्‍यादा जुड़े।

आज दुनिया के छोटे-छोटे देश जो टापुओं पर बसे हैं, आईलैंड्स पर बसे हैं, उन सबकी एक सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया को कौन nuclear बम बनाता है कौन नहीं बनाता है - यह आईलैंड में रहने वाले लोगों की चिंता का विषय नहीं है, लेकिन उनकी चिंता का विषय है कि “यह Global Warming होता रहेगा तो हम रहेंगे कि नहीं रहेंगे? कहीं यह हमारा टापू पानी के अंदर चला तो नहीं जाएगा? सदियों से जिसको संजोया है, दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी जिसमें खप गई है, कहीं यह तो डूब नहीं जाएगा?”

और दुनिया को बचाने का काम सिर्फ आईलैंड पर बैठे हुए लोग अपनी रक्षा के लिए कुछ करें और इसलिए सब हो जाएगा, ऐसा नहीं है। पूरे विश्‍व ने मिलजुल करके climate change की उतनी ही चिंता करनी पड़ेगी, जितनी आज विश्व Terrorism की चर्चा करता है। जितना संकट आतंकवाद से नजर आता है गहरा लगता है उतना ही, इन छोटे-छोटने Island पर रहने वाले लोगों के लिए, Climate change के कारण संकट महसूस होता है।

भारत ने... सदियों से हमारे तो संस्कार रहे हैं, हमें तो वो संस्कार मिले हैं कि बालक सुबह बिस्‍तर से उठकर के पैर जमीन पर रखता है तो उसे सिखाया जाता है कि तुम ये पैर पृथ्वी माता के ऊपर रख रहे हो। पहले पृथ्वी माता की माफी मांगो। यानि हमें इस मां को पीड़ा देने का कोई हक नहीं है, ये हमारी संस्कृति और संस्कार में है। प्रकृति से प्यार करो, प्रकृति से संवाद करो, प्रकृति से सीखो - यही तो हमें सिखाया गया है। पूरे ब्रहमांड को एक परिवार के रूप में माना गया है, और इसलिए विश्व को इस संकट से बचाने का काम भी - हम जिस परंपरा से बने-पले हैं, जिस संस्कारों से हम आगे बढ़े हैं, जिस संस्कृति को हमने विरासत में पाया है - अगर हम उसे जीना सीख लें, लोगों को जीने का रास्ता दिखा दें और जगत उसे जीने की आदत बना ले, तो हो सकता है इतने बड़े संकट से बाहर निकलने के लिए पूरी मानव जात सरलता से एक रास्ते पर चल सकती है और आगे बढ़ सकती है

। हम वो लोग हैं जो नदी को मां मानते हैं, वो लोग हैं जो पौधे में परमात्मा देखते हैं। यही तो बातें हैं, जो Climate की रक्षा के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन इन परंपराओं के साथ-साथ, आधुनिक चीजों पर भी बल देना पड़ता है। हमें विकास की उस राह को अपनाना होगा जो सदियों के बाद भी मानव जात के कल्याण में रुकावट पैदा न कर सके। हम सबको परमात्मा ने हमारे लिए जो दिया है, उसका तो उपभोग करने का अधिकार है। लेकिन हम लोगों को हमारी संतानों के लिए जो दिया गया है, उसका उपभोग करने का अधिकार नहीं है। ऐसा कोई मां-बाप होते हैं क्या? दुनिया में ऐसे कोई मां-बाप होते हैं क्या जो अपने बच्चों का भी खा जाएं? कोई मां-बाप ऐसा नहीं होते। और इसलिए आज से 100 साल बाद आपके बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे। उनको पानी मिलेगा क्या नहीं मिलेगा? उनको शुद्ध हवा मिलेगी कि नहीं मिलेगी? उनको रहने के लिए अच्छी पृथ्वी मिलेगी कि नहीं मिलेगी? हमें उनको वो विरासत में देकर के जाना है तो हमें आज अपनी जिंदगी को बदलना पड़ेगा। और इसलिए उस दिशा में हम काम करें।

भारत ने एक बहुत बड़ा बीड़ी उठाया है। और वो बीड़ी है Solar energy और Wind energy का। हम चाहते हैं कि दुनिया को इस संकट से बचाने के लिए भारत की जो भूमिका है, उस भूमिका को अदा करना चाहिए और उस भूमिका को अदा करने के लिए 100 Giga Watt Solar energy का संकल्प हमने लिया है 2022 में - जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे। जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मनाएगा, हम दुनिया को एक सौगात देना चाहते हैं ताकि विश्व को Global Warming में से बचाने में भारत भी अपनी अहम भूमिका निभाए। हम 60 Gigawatt Wind energy की ओर जा रहे हैं। ये Target बहुत बड़े हैं, छोटे नहीं हैं। लेकिन इन संकल्पों को हम इसलिए लेकर के चले हैं क्‍योंकि हमारी प्रेरणा... हमारी प्रेरणा सिर्फ हिंदुस्‍तान के किसी घर में दीया जले, वो नहीं है। हमारी प्रेरणा इन छोटे-छोटे टापुओं पर जो लोग जीते हैं, रह रहे हैं, छोटे-छोटे देशों के रूप में उनके जीवन की रक्षा करना यह हमारी प्रेरणा है, यह हमारा संकल्‍प है। और इसलिए सोलर पावर होगा तो हिंदुस्‍तान में लेकिन सीधा-सीधा फायदा मिलेगा Seychelles की भावी पीढ़ी को, यह सपने लेकर के हम काम कर रहे हैं।

आज भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की 35 age group से नीचे है। जिस देश में करोड़ों लोग नौजवान हो, वो दुनिया का भी भाग्‍य बदल सकते हैं अगर उन्‍हें अवसर मिल जाए। इस नई सरकार की कोशिश यह है कि हम नौजवानों को अधिकतम अवसर कैसे दें, ज्‍यादा से ज्‍यादा अवसर उनकों विकास के लिए कैसे मिले। उस दिशा में हमारा प्रयास है। और इसलिए Make In India यह हमने अभियान चलाया है। मैं दुनिया को निमंत्रण दे रहा हूं आइए, आप जो कुछ भी बना रहे हैं, मेरे देश में आकर के बनाइये।

और मैं विश्‍वास दिलाता हूं आप जो बनाते हैं उससे कम खर्चे में बनेगा, जल्‍दी बनेगा, अच्‍छा बनेगा। आज आपकी product पांच देशों में जाती हैं, हिंदुस्‍तान में बनाइये, 50 देशों में पहुंचना शुरू हो जाएगी। आज आपकी Balance Sheet में पाँच, दस, जीरो होंगे। देखते ही देखते आपकी Balance Sheet में और पाँच, दस जीरों जुड़ जाएंगे, यह ताकत है। और मैं देख रहा हूं कि दुनिया में आकर्षण पैदा हुआ है।

भारत की रेलवे की बड़ी चर्चा है। इतनी बड़ी विशाल रेल। यानी हिंदुस्‍तान में अगर 24 घंटे में हिंदुस्तान में रेलवे में कितने Passenger Travel करते हैं, इसका अगर मैं हिसाब लगाऊं, तो शायद hundred Seychelles, at a time, हिंदुस्‍तान में रेलवे के डिब्‍बे में हो। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि रेलवे में कितने विकास की संभावना है। रेलवे को हम आधुनिक बनाना चाहते हैं। रेलवे को हम दूर-सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहते हैं। और यह रेलवे के लोगों के हम पीछे क्‍यों लगे हैं? सिर्फ भारत के लोगों को Transportation की सुविधा मिले इतना मकसद नहीं है। रेलवे वो व्‍यवस्‍था है जो Global Warming के संकट को बचाने के जो अनेक साधन है, उसमें वो भी एक साधन है। Mass Transportation से emission कम होता है। और जब emission कम होता है तो Global Warming में कमी आती है। और Global Warming में कमी आती है तो Climate Change की चिंता टलती है और Climate Change की चिंता टलती है मतलब Seychelles को जीने की गारंटी पैदा होती है।

रेलवे वहां बनेगी, रेलवे वहां बढ़ेगी, लेकिन लाभ इन छोटे-छोटे टापुओं पर बसने वाले दुनिया के इन छोटे-छोटे देशों के नागरिकों को होने वाला है। क्‍योंकि भारत इतना बड़ा देश है। हम चाहते हैं भारत की रेल तेज गति से चले। हम चाहते हैं भारत की रेल आगे विस्‍तृत हो, हम चाहते हैं भारत की रेल आधुनिक बने और इसलिए हमने 100 percent Foreign Direct Investment के लिए रास्ते खोल दिए हैं। मैंने दुनिया को कहा कि आपके पास Technology है, आईए। आपके पास धन है, आईए। आप अपने व्यापार का विस्तार करना चाहते हैं, आईए। भारत की रेल भी दुनिया के अनेक देशों की Economy को बढ़ा सके, इतनी ताकतवर है। और इसलिए मैं Make in India में इस काम को लगा रहा हूं।

सेशेल्स जैसे छोटे-छोटे देश, क्या उनकी रक्षा नहीं होनी चाहिए क्या? छोटे-छोटे देशों से piracy के कारण जो समस्या होती हैं। उनके सारे समुद्री व्यापार संकट में पड़ जाते हैं। क्या इस सामुहिक रक्षा का चिता होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? क्या भारत का दायित्व नहीं है कि Indian Ocean में सुरक्षा की गारंटी में भारत भी अपना हाथ बढ़ाए, पूरी ताकत से बढ़ाए? ताकि सेशेल्स जैसे नागरिकों को विश्व व्यापार में आगे बढ़ना है ताकि पाइरेसी जैसे संकटों से इस समुद्री तट को बचाया जा सके? अगर वो बचाना है तो भारत को Defence Sector में आगे बढ़ना पड़ेगा और बढ़ने के लिए हमने भारत में Make in India में Defence Sector में Manufacturing को बल दिया है। Indigenous व्यवस्थाएं हम विकसित करना चाहते हैं।

आज यहां मैंने एक राडार का लोकार्पण किया है। इस राडार के लोकार्पण के कारण सेशेल्स की सामुद्रिक सुरक्षा के लिए एक नई ताकत मिलती है, नई दृष्टि मिलती, नई आंख मिलती है। वो देख सकते हैं 150 किलोमीटर की रेंज में कहीं कुछ हलचल, गड़बड़ तो नहीं हो रही है। ये काम भारत कैसे कर पाया? क्योंकि भारत में indigenous manufacturing की संभावना पैदा हुई है। हम आगे चलकर के Defence के Sector में और चीजों को बढ़ाना चाहते हैं ताकि उसका लाभ मिले। लाभ किसको मिलेगा? आप जैसे हमारे मित्र देशों को मिलेगा, पड़ोसी देशों को मिलेगा, इस Indian Ocean की Security को मिलेगा। और इसलिए हमारे हर कदम, भारत की धरती पर होने वाले हर कदम वैश्विक कल्याण की हमारी जो संकल्पना है, उसके अनुरूप और अनुकूल बनाने की हमारी कोशिश है और उसका लाभ आपको मिलने वाला है।

हम Skill development पर बल दे रहे हैं। आज पूरे विश्व को, विश्व के बहुत बड़े-बड़े देश, बड़ी-बड़ी Economy वो एक संकट से जूझ रही है और जिसका उपाय उनके पैसों में संभव नहीं है। जिसका उपाय उनकी Technology से संभव नहीं है। और वो है Man power. हर किसी को Work force चाहिए। दुनिया की Fastest Economy को भी Talented Workforce की जरूरत है। आने वाले 20 साल में पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा Workforce देने की ताकत है तो हिंदुस्तान की है। क्योंकि वो देश है, उसके हाथ में हुनर हो, Skill हो, दुनिया को जिस प्रकार के मानव बल की आवश्यकता है, उस प्रकार का मानव बल तैयार हो - उस दिशा में हमारा प्रयत्न है। Skill development को हमने एक Mission रूप में लिया है। और हम Skill development के द्वारा ऐसे नौजवान तैयार करना चाहते हैं जो स्वंय अच्छे entrepreneur बन सकें। जो entrepreneur नहीं बन सकते हैं वो स्वंय Skilled manpower के रूप में Job प्राप्त कर सकें। कुछ Job seekers हैं, उनको अच्छी Job मिल सके। कुछ Job creator बन सकें। एक प्रकार से विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति में जो चीजों काम आ सकें, उन-उन चीजों को बल देकर के और भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय़ लिए हैं। राष्ट्रपतिजी Michel के साथ आज मेरी विस्तार से बातें हुई हैं। और भारत और Seychelles मिलकर के हम कितनी ताकत से आगे बढ़ सकते हैं। हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। आप सबको बहुत खुशी होगी सुनकर के। सुनाऊं? भारत सरकार ने निर्णय किया है कि Seychelles के जो नागरिक हिंदुस्तान आने चाहते हैं, उनको तीन महीने का वीजा मुफ्त में दिया जाएगा। उतना ही नहीं, अब आपको यहां जाकर के दफ्तर में कतार लगाकर के खड़े नहीं रहना पड़ेगा। Embassy के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब Visa On Arrival होगा। आप Airport पर आए ठप्पा लग गया, आ जाओ।

हम चाहते हैं भारत और सेश्लस के बीच में Tourism बढ़ना चाहिए। और यहां जो गुजराती लोग हैं, उनको तो मालूम है। गुजराती लोग तो ढूढते रहते हैं कि Sunday को कहां जाऊं? इस Weekend पर कहां जाऊं? हम चाहते हैं कि Air Frequency बढ़े, Direct flights बढ़े। हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न कोने से Seychelles को सीधे हवाई जहाज जाएं। वहां से यहां आएं। उससे Tourism को बढ़ावा मिलेगा और Tourism को बढ़ावा मिलेगा तो उसके कारण Seychelles से जो लोग हिंदुस्तान जाएंगे वो भारत को अच्छी तरह जानेंगे। और भारत से जो लोग यहाँ आएंगे वो Seychelles की Economy को ताकतवर बनाएंगे।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH

और मैं मानता हूं Tourism दुनिया में तेज गति से बढ़ रहा व्यवसाय है, तेज गति से। लेकिन Tourism मानव जाति को जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम है। विश्व को जानना-समझना, अपना बनाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। और उस अवसर को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयों-बहनों आज समय की सीमा है। कुछ ही घंटों के लिए मैं आया हूं, पहली बार आया हूं। लेकिन लगता ऐसा है कि अच्छा होता, मैं ज्यादा समय के लिए आया होता। अब आप लोगों ने इतना प्यार दिया है तो फिर तो आना ही पड़ेगा। ज्यादा समय लेकर के आना पड़ेगा, आप सबके बीच रहना होगा, इस सुंदर देश को देखना होगा। तो मैं फिर एक बार आपके प्यार के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और मेरी तरफ से समग्र देशवासियों की तरफ से आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। और स्वागत सम्मान के लिए आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

आवजो। नमस्ते।

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سپریم کورٹ کے زیر اہتمام یوم آئین کی تقریبات میں وزیر اعظم کے خطاب کا متن
November 26, 2021
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"ہم سب کے مختلف کردار، مختلف ذمہ داریاں، کام کرنے کے مختلف طریقے ہو سکتے ہیں، لیکن ہمارا یقین، تحریک اور توانائی کا منبع ایک ہی ہے – ہمارا آئین"
"سب کا ساتھ – سب کا وکاس ، سب کا وشواس – سب کا پریاس، آئین کی روح کا سب سے طاقتور مظہر ہے۔ حکومت آئین کےتئیں وقف ہے، ترقی میں کوئی امتیاز نہیں کرتی ہے"
"ہندوستان واحد ملک ہے جس نے پیرس معاہدے کے اہداف کو وقت سے پہلے حاصل کیا ہے۔ اور پھر بھی ماحولیات کے نام پرہندوستان پرمختلف قسم کے دباؤ ڈالے جاتے ہیں۔ یہ سب نوآبادیاتی ذہنیت کا نتیجہ ہے
اقتدار کی علیحدگی کی مضبوط بنیاد پر ہمیں اجتماعی ذمہ داری کا راستہ ہموار کرنا ،ایک لائحہ عمل تیار کرنا ، اہداف کا تعین کرنا اور ملک کو اس کی منزل تک لے جانا ہے

نمسکار !

چیف جسٹس این وی رمنا جی، جسٹس یو یو للت جی، وزیر قانون جناب کرن رجیجو جی، جسٹس ڈی وائی چندرچوڑ جی، اٹارنی جنرل جناب کےکے وینوگوپال جی، سپریم کورٹ بار ایسوسی ایشن کے صدر جناب وکاس سنگھ جی، اور ملک کے عدالتی نظام سے وابستہ خواتین و حضرات!

آج صبح میں مقننہ اور عاملہ میں اپنے ساتھیوں کے ساتھ تھا۔ اور اب میں عدلیہ سے وابستہ آپ تمام دانشوروں  کے درمیان ہوں۔ ہم سب کے مختلف کردار، مختلف ذمہ داریاں، اور کام کرنے کے مختلف طریقے بھی  ہو سکتے ہیں، لیکن ہمارا عقیدہ ، تحریک اور توانائی کا منبع ایک ہی ہے –  ہمارا آئین! مجھے خوشی ہے کہ آج یوم آئین  کے موقع پر اس تقریب کی شکل میں ہمارے اجتماعی جذبے کا اظہار ہو رہا ہے، جس سے ہماری آئینی عزائم کو تقویت مل رہی ہے۔ اس کام سے وابستہ تمام لوگ مبارکباد کے مستحق ہیں۔

معززین،
آزادی کے لیے جینے مرنے والے لوگوں نے جو خواب دیکھے تھے ، ان خوابوں کی روشنی میں  اور ہندوستان کی ہزاروں سال کی عظیم روایت کو پروان چڑھاتے ہوئے ، ہمارے آئین سازوں نے ہمیں آئین دیا۔ سینکڑوں سال کی غلامی نے ہندوستان کو بہت سی مشکلات میں مبتلا کر دیا تھا۔ کسی عہد میں سونے کی چڑیا کہا جانے والا ہندوستان ، غربت، بھوک اور بیماری سے نبرد آزما تھا۔ اس پس منظر میں ملک کو آگے لے جانے میں آئین ہمیشہ ہماری مدد کرتا رہاہے۔ لیکن آج دنیا کے دیگر ممالک کے مقابلے میں جو ممالک تقریباً ہندوستان کے ساتھ ہی آزاد ہوئے، وہ آج ہم سے بہت آگے ہیں۔ یعنی ابھی بہت کچھ کیا جانا باقی ہے، ہمیں مل کر ہدف تک پہنچنا ہے۔ ہم سب جانتے ہیں کہ ہمارے آئین میں شمولیت پر کتنا زور دیا گیا ہے۔ لیکن یہ بھی ایک حقیقت رہی ہے کہ آزادی کی اتنی دہائیوں کے بعد بھی ملک کے عوام کی ایک بڑی تعداد محرومی  کا شکار ہونے پر مجبورہے ۔ وہ کروڑوں لوگ، جن کے گھروں میں بیت الخلاء تک نہیں تھا، کروڑوں لوگ جو بجلی نہ ہونے کی وجہ سے اپنی زندگی اندھیرے میں گزار رہے تھے، وہ کروڑوں لوگ جن کی زندگی میں سب سے بڑی جدوجہد گھر کے لیے پانی حاصل کرنے کے لیے تھی،  ان کی مشکلات، ان کے درد کو سمجھ کر، ان کی زندگی کو آسان بنانے کے لیے اپنے آپ کو نچھاور کر دینا ، میں آئین کا حقیقی احترام سمجھتا ہوں۔ اور اس لیے آج مجھے اطمینان ہے کہ ملک میں آئین کی اس بنیادی روح کے مطابق اخراج کو شمولیت میں تبدیل کرنے کی بھاگیرتھ مہم تیز رفتاری سے جاری ہے۔ اور اس کا جو سب سے بڑا فائدہ ہوا ہے،اسے بھی  ہمیں سمجھنا ہوگا۔جن  2 کروڑ سے زیادہ غریبوں کو آج اپنا پختہ مکان ملا ہے ،جن  8 کروڑ سے زیادہ غریب خاندانوں کو اجولا اسکیم کے تحت مفت گیس کنکشن ملا ہے،جن 50 کروڑ سے زیادہ غریبوں کو 5 لاکھ روپے تک کا  بڑے سے بڑے اسپتال میں مفت علاج کو یقینی بنایا گیا ہے۔ یقینی بنایا گیا، جن کروڑوں غریبوں کو پہلی باربیمہ اور پنشن جیسی بنیادی سہولتیں ملی ہیں، ان غریبوں کی زندگی کی بہت سی پریشانیاں کم ہوئی ہیں، یہ اسکیمیں ان کے لیے بڑا سہارا بن گئی ہیں۔ اسی کورونا  کے دوران، پچھلے کئی مہینوں سے 80 کروڑ سے زیادہ لوگوں کو مفت اناج کی فراہمی کو یقینی بنایا جا رہا ہے۔ حکومت پردھان منتری غریب کلیان اَن یوجنا پر 2 لاکھ 60 ہزار کروڑ روپے سے زیادہ خرچ کرکے غریبوں کو مفت اناج دے رہی ہے۔ ابھی کل ہی ہم نے اس اسکیم کو اگلے سال مارچ تک بڑھا دیا ہے۔ ہمارے جو رہنما اصول ہیں – "شہریوں، مردوں اور عورتوں کو یکساں طور پر، مناسب ذریعہ معاش کا حق حاصل ہے"وہ اسی جذبے کے عکاس ہیں۔ آپ سب یقین کریں گے کہ جب ملک کا عام آدمی، ملک کا غریب، ترقی کے مرکزی دھارے میں شامل ہوتا ہے، جب اسے برابری اور یکساں مواقع ملتے ہیں، تو اس کی دنیا یکسر بدل جاتی ہے۔ جب ریہڑی ، ٹھیلے ، پٹری والا شخص بھی بینک کریڈٹ کے نظام میں شامل ہوتا ہے، تب اسے قوم کی تعمیر میں حصہ لینے کا احساس ہوتا ہے۔ جب عوامی مقامات، پبلک ٹرانسپورٹ اور دیگر سہولیات معذور افراد کو ذہن میں رکھ کر بنائی جاتی ہیں، جب انہیں آزادی کے 70 سال بعد پہلی بار عام اشاروں کی زبان ملتی ہے، تو ان میں خود اعتمادی کا احساس جاگتا ہے۔ جب خواجہ سراؤں کو قانونی تحفظ ملتا ہے، خواجہ سراؤں کو پدم ایوارڈ ملتا ہے، تو سماج اور  آئین کے تئیں ان کا بھی اعتماد مضبوط ہوتا ہے۔ جب تین طلاق جیسی برائی کے خلاف سخت قانون بنتا ہے تو آئین کے تئیں ان بہنوں اور بیٹیوں کا اعتماد مزید  مضبوط ہوتا ہے جو ہر طرح سے ناامیدہوچکی ہوتی  تھیں۔

معززین،
سب کا ساتھ-سب کا وکاس، سب کا وشواس-سب کا پریاس، یہ آئین کی روح کا سب سے طاقتور مظہر ہے۔ آئین کے لیے وقف حکومت ، ترقی میں کوئی امتیاز نہیں کرتی اور ہم نے یہ کر کے دکھایا ہے۔ آج غریب ترین غریبوں کو معیاری انفراسٹرکچر تک وہی رسائی مل رہی ہے جو کبھی وسائل رکھنے والے لوگوں تک محدود تھی۔ آج لداخ، انڈمان اور نکوبار، شمال مشرق کی ترقی پربھی ملک  اتنی ہی توجہ مرکوز کیے ہوا ہے جتنا کہ دہلی اور ممبئی جیسے میٹرو شہروں پرہے۔ لیکن اس سب کے درمیان میں آپ کی توجہ ایک اور بات کی طرف مبذول کرانا چاہوں گا۔ آپ نے یہ بھی تجربہ کیا ہوگا کہ جب حکومت کسی ایک طبقہ کے لیے، کسی ایک چھوٹے سے ٹکڑے کے لیے کچھ کرتی ہے تو بڑی اعتدال پسند کہلاتی ہے، اس کی بہت ستائش کی جاتی ہے کہ  دیکھیں کہ ان کے لیے کچھ کیا لیکن میں حیران ہوں ،کبھی کبھی ہم دیکھتے ہیں کوئی حکومت ایک ریاست کے لیے کچھ کرے ، جس سے ریاست کا بھلا ہو تو بہت ستائش ہوتی ہے۔ تاہم جب حکومت سب کے لیے کرتی ہے ، ہر شہری کے لیے کرتی ہے، ہر ریاست کے لیے کرتی ہے، تو اسے اتنی اہمیت نہیں دی جاتی، اس کا ذکر تک نہیں ہوتا۔ حکومت کی اسکیموں سے ہر طبقہ، ہر ریاست کو یکساں طور پر کس طرح فائدہ پہنچایا جا رہا ہے اس پر زیادہ توجہ نہیں دی جاتی ہے۔ پچھلے سات سالوں میں ہم نے ترقی کو بلا امتیاز، تعصب کے بغیر، ہر فرد، ہر طبقے اور ملک کے ہر کونے تک پہنچانے کی کوشش کی ہے۔ اس سال 15 اگست کو، میں نے غریبوں کی فلاح و بہبود سے متعلق اسکیموں کے بارے میں بات کی اور اس کے لیے ہم مشن موڈ پر کام بھی کر رہے ہیں۔ سروجن ہتائے، سروجن سکھائے، اس منتر کے ساتھ کام کرنے کی ہماری کوشش ہے۔آج اس سے ملک کی تصویر کس طرح بدلی ہے یہ ہمیں حالیہ قومی فیملی صحت سروے رپورٹ میں بھی نظر آتے ہیں۔  اس رپورٹ کے بہت سے حقائق اس نکتے کو ثابت کرتے ہیں کہ جب نیک نیتی کے ساتھ کام کیا جائے، درست سمت میں پیشرفت کی جائے اور پوری قوت کو یکجا کر کے مقصد کے حصول کی کوشش کی جائے تو یقینی طور پر خوش آئند نتائج برآمد ہوتے ہیں۔ صنفی مساوات کی بات کریں تو اب مردوں کے مقابلے میں بیٹیوں کی تعداد بڑھ رہی ہے۔ حاملہ خواتین کے لیے ہسپتال میں زچگی کے مزید مواقع دستیاب ہو رہے ہیں۔ جس کی وجہ سے زچگی کی شرح اموات اور نوزائیدہ بچوں کی شرح اموات میں کمی آرہی ہے۔ بہت سے دوسرے اشارے ایسے ہیں جن پر ہم بحیثیت ملک بہت اچھا کام کر رہے ہیں۔ ان تمام اشاریوں میں ہر فیصد پوائنٹ میں اضافہ صرف ایک اعداد و شمار نہیں ہے۔ یہ اس بات کا ثبوت ہے کہ کروڑوں ہندوستانیوں کو حقوق حاصل ہو  رہے ہیں۔ یہ بہت ضروری ہے کہ عوام کو فلاح عامہ سے متعلق اسکیموں کا بھرپور فائدہ ملے، انفراسٹرکچر سے متعلق منصوبوں کو وقت پر مکمل کیا جائے۔ کسی بھی وجہ سے غیر ضروری تاخیر شہری کو اس کے حق سے محروم رکھتی ہے۔ میں گجرات سے ہوں اس لیے سردار سروور ڈیم کی مثال دینا چاہتا ہوں۔ سردار پٹیل نے ماں نرمدا پر اس طرح کے ڈیم کا خواب دیکھا تھا۔ پنڈت نہرو نے اس کا سنگ بنیاد رکھا تھا۔ لیکن یہ منصوبہ کئی دہائیوں سے زیر التواء رہا۔ ماحولیات کے نام پر تحریک میں پھنسا رہا ۔ اس پر فیصلہ لینے سے عدالت ہچکچا تی رہی ۔عالمی بینک نے بھی اس کے لیے رقم دینے سے انکار کر دیا تھا۔ لیکن اسی نرمدا کے پانی کی وجہ سے کچھ میں ترقی کا کام ہوا، آج کچھ ضلع ہندوستان کے تیزی سے ترقی کرنے والے اضلاع میں سے ایک ہے۔ کچھ تو ایک طرح سے ریگستان جیسا علاقہ ہے،لیکن تیزی سے ترقی کرنے والے خطے میں اس کی جگہ بن گئی۔ کسی زمانے میں صحرا کے طور پر جانا جانے والا کچھ، اپنی نقل مکانی کے لیے جانا جاتا تھا، آج زرعی برآمدات کی وجہ سے اپنی پہچان بنا رہا ہے۔ اس سے بڑا گرین ایوارڈ اور کیا ہو سکتا ہے۔

معززین،
ہندوستان کے لیے اور دنیا کےمتعدد ممالک کے لیے، ہماری کئی نسلوں کے لیے،نوآبادیات کی بیڑیوں میں جکڑے ہوئے  زندگی گزارنا ایک مجبوری تھی۔ ہندوستان کی آزادی کے بعد سے پوری دنیا میں نوآبادیاتی دور کا آغاز ہوا، کئی ممالک آزاد ہوئے۔ آج پوری دنیا میں کوئی ملک ایسا نہیں جو بظاہر کسی دوسرے ملک کی نوآبادی کے طور پر موجود ہو۔ لیکن اس کا مطلب یہ نہیں ہے کہ نوآبادیاتی ذہنیت ختم ہو چکی ہے۔ ہم دیکھ رہے ہیں کہ یہ ذہنیت بہت سی بگاڑ کو جنم دے رہی ہے۔ اس کی سب سے واضح مثال ترقی پذیر ممالک کی ترقی کے سفر میں ہمیں درپیش رکاوٹوں میں نظر آتی ہے۔جن وسائل سے جن راہوں پر چلتے ہوئے  آج ترقی یافتہ دنیا جس مقام پر پہنچی ہے، آج وہی وسائل ، وہی راستے ترقی پذیر ممالک کے لیے بند کرنے کی کوششیں کی جاتی ہیں۔ پچھلی دہائیوں میں اس کے لیے مختلف قسم کی اصطلاحات کا ایک جال بنایا گیا ہے۔ لیکن مقصد ایک ہی رہا ہے - ترقی پذیر ممالک کی ترقی کو روکنا۔ آج کل ہم دیکھتے ہیں کہ اسی مقصد کے لیے ماحولیات کے مسئلے کو ہائی جیک کرنے کی کوششیں کی جا رہی ہیں۔ ہم نے چند ہفتے قبل کوپ – 26 سربراہی اجلاس میں اس کی زندہ مثال دیکھی۔اگر مطلق مجموعی اخراج کی بات کریں تو ترقی یافتہ ممالک نے مل کر 1850 سےاب تک  ہندوستان سے 15 گنا زیادہ اخراج کیا ہے۔ اگر ہم فی کس کی بنیاد پر بات کریں، پھر بھی ترقی یافتہ ممالک نے ہندوستان سے 15 گنا زیادہ اخراج کیا ہے۔ امریکہ اور یورپی یونین کا مطلق مجموعی اخراج ہندوستان کے مقابلے میں 11 گنا زیادہ ہے۔ اس میں بھی فی کس بنیاد پر امریکہ اور یورپی یونین نے ہندوستان کے مقابلے 20 گنا زیادہ اخراج کیا ہے۔ اس کے باوجود آج ہمیں ہندوستان پر فخر ہے جس کی تہذیب و ثقافت میں ہی فطرت کے ساتھ رہنے کا رجحان ہے جہاں پتھروں میں، درختوں میں اور فطرت کے ہر ذرے میں خدا نظر آتا ہے، جہاں اس کی شکل نظر آتی ہے، جہاں دھرتی کی ایک ماں کے طور پر پوجا کی جاتی ہے، اس ہندوستان کو ماحولیاتی تحفظ کے پیغام سنائے جاتے ہیں۔ اور ہمارے لیے یہ اقدار صرف کتابی نہیں، کتابی چیزیں نہیں ہیں۔ آج ہندوستان میں  شیروں، ببروں، ڈالفنوں وغیرہ کی تعداد، اور حیاتیاتی تنوع کی کئی اقسام کے پیرامیٹر میں مسلسل بہتری آرہی ہے۔ ہندوستان میں جنگلات کا رقبہ بڑھ رہا ہے۔ ہندوستان میں غیر استعمال شدہ زمین بہتر ہو رہی ہے۔ ہم نے رضاکارانہ طور پر گاڑیوں کے ایندھن کے معیار میں اضافہ کیا ہے۔ ہم ہر قسم کی قابل تجدید توانائی میں دنیا کے سرکردہ ممالک میں سے ایک ہیں۔ اور پیرس معاہدے کے اہداف کے حصول کے ابتدائی مراحل میں اگر کوئی ہے تو صرف ہندوستان ہی ہے۔ جی 20 ممالک کے گروپ میں بہتر سے بہتر کام کرنے والا کوئی ملک ہے ، تو دنیا نے تسلیم کیا ہےکہ وہ ہندوستان ہے اور پھر بھی ماحول کے نام پر ایسے ہندوستان پر مختلف قسم کے دباؤ ڈالے جاتے ہیں۔ یہ سب نوآبادیاتی ذہنیت کا نتیجہ ہے۔ لیکن بدقسمتی یہ ہے کہ ہمارے ملک میں بھی ایسی ہی ذہنیت کی وجہ سے اپنے ہی ملک کی ترقی میں رکاوٹیں کھڑی کی جاتی ہیں۔ کبھی آزادی اظہار کے نام پر اور کبھی کسی اور چیز کی مدد سے۔ ہمارے ملک کے حالات، ہمارے نوجوانوں کی خواہشات، خوابوں کو جانے بغیر، کئی بار ہندوستان کو دوسرے ممالک کے معیار پر تولنے کی کوشش کی جاتی ہے اور اس کی آڑ میں ترقی کے راستے بند کرنے کی کوشش کی جاتی ہے۔ اس کا نقصان ایسے لوگوں کو بھگتنا نہیں پڑتا جو یہ کرتے ہیں۔ اس کا نقصان اس ماں کو بھگتنا پڑتا ہے جس کا بچہ پاور پلانٹ نہ لگنے کی وجہ سے پڑھنے سے قاصر ہے۔ اس کا نقصان اس باپ کو بھگتنا پڑتا ہے جو زیر التواء سڑک منصوبے سے اپنے بچے کو بروقت اسپتال نہیں لے جا پاتے ہیں۔ اس کا خمیازہ اس متوسط ​​طبقے کے خاندان کو بھگتنا پڑتا ہے جس سے ماحولیات کے نام پر جدید زندگی کی سہولیات اس کی استطاعت سے باہر پہنچا دی  گئی ہیں۔ اسی نوآبادیاتی ذہنیت کی وجہ سے ہندوستان جیسے ملک میں ترقی کے لیے کوشاں ملک میں کروڑوں امیدیں دم توڑ جاتی ہیں، امنگیں دم توڑ دیتی ہیں۔ یہ نوآبادیاتی ذہنیت تحریک آزادی میں پیدا ہونے والی قوت ارادی کو مزید مضبوط کرنے میں بڑی رکاوٹ ہے۔ ہمیں اسے دور کرنا ہی ہوگا۔ اور اس کے لیے، ہماری سب سے بڑی طاقت، ہماری سب سے بڑی تحریک، ہمارا آئین ہے۔

معززین،
حکومت اور عدلیہ دونوں نے آئین کی کوکھ سے جنم لیا ہے ۔ لہذا، دونوں ہی جڑواں ہیں. یہ دونوں آئین کی وجہ سے  ہی وجود میں آئے ہیں۔ اس لیے، وسیع تر نقطہ نظر سے دیکھیں تو مختلف ہونے کے باوجود بھی  دونوں ایک دوسرے کی تکمیل کرتے ہیں۔

ہمارےیہاں شاستروں میں بھی کہا گیا ہے-

ایکیم بلم سماجسیہ، تت ابھاوے سے دُربل

تسمات ایکیم پرشنسنتی ، دیڑھم راشٹر ہیتوشم:

یعنی کسی معاشرے اور ملک کی مضبوطی اس کے اتحاد اور متحدہ کوششوں میں ہوتی  ہے۔ اس لیے جو لوگ ایک مضبوط قوم کے خیر خواہ ہیں، وہ اتحاد کی ستائش کرتے ہیں، اس پر زور دیتے ہیں۔ ملکی مفادات کو مقدم رکھتے ہوئے یہی اتحاد ملک کے ہر ادارے کی کوششوں میں ہونا چاہیے۔ آج جب ملک امرت کال میں اپنے لیے غیر معمولی اہداف کا تعین کر رہا ہے، دہائیوں پرانے مسائل کا حل تلاش کر رہا ہے اور نئے مستقبل کا عزم کر رہا ہے، تو یہ کارنامہ سب کے ساتھ ہی پورا ہو گا۔ یہی وجہ ہے کہ ملک نے آنے والے 25 سالوں میں جب ملک آزادی کی 25ویں صدی کا جشن منائے گا اور اسی لیے 'سب کا پریاس' کی اپیل کی ہے۔ یقیناً اس اپیل میں عدلیہ کا بھی بڑا کردار ہے۔

معززین،

ہماری بحث میں ایک بات بھولے بغیر لگاتار سننے کو ملتی ہے، اسے بار بار دہرایا جاتا ہے یعنی اقتدار کی علیحدگی۔ اقتدار کی علیحدگی کا معاملہ چاہے وہ عدلیہ کا ہو، عاملہ کا یا مقننہ کا، اپنے آپ میں بہت اہم رہا ہے۔ اس کے ساتھ ہی آزادی کے اس امرت کال میں، ہندوستان کی آزادی کے 100 سال مکمل ہونے تک، اس امرت کال میں آئین کی روح کے مطابق اجتماعی عزم کا اظہار کرنے کی ضرورت ہے۔ آج ملک کا عام آدمی اس سے زیادہ کا مستحق ہے جو اس کے پاس ہے۔ جب ہم ملک کی آزادی کا صد سالہ جشن منائیں گے تو اس وقت کا ہندوستان کیسا ہوگا، اس کے لیے ہمیں آج ہی کام کرنا ہے۔ اس لیے ملک کی امنگوں کی تکمیل کے لیے اجتماعی ذمہ داری کے ساتھ چلنا بہت ضروری ہے۔ اقتدار کی علیحدگی کی مضبوط بنیاد پر ہمیں اجتماعی ذمہ داری کا راستہ طے کرنا ہے، لائحہ عمل تیار کرنا ہے ، اہداف کا تعین کرنا ہے اور ملک کو منزل تک پہنچانا ہے۔

معزز،
کورونا کے دور نے انصاف کی فراہمی میں ٹیکنالوجی کے استعمال نے نیا اعتماد پیدا کیا ہے۔ ڈیجیٹل انڈیا کے میگا مشن میں عدلیہ شامل ہے۔ 18 ہزار سے زائد عدالتوں کو کمپیوٹرائزڈ کیا جانا ، 98 فیصد کورٹ کمپلیکس کا وسیع ایریا نیٹ ورک سے منسلک کیا جانا ، جوڈیشل ڈیٹا کی حقیقی وقت میں ترسیل کے لیے نیشنل جوڈیشل ڈیٹا گرڈ کو فعال کیا جانا ، ای کورٹ پلیٹ فارم لاکھوں لوگوں تک پہنچنا، یہ بتاتا ہے کہ آج ٹکنالوجی ہمارے ہمارے نظام انصاف کی اتنی بڑی طاقت بن چکی ہے اور آنے والے وقت میں ہم ایک جدید ترین عدلیہ کو کام کرتے ہوئے دیکھیں گے۔ وقت بدلتا رہتا ہے، دنیا بدلتی رہتی ہے، لیکن یہ تبدیلیاں انسانیت کے ارتقاء کا ذریعہ بنی ہیں۔ اس کی وجہ یہ ہے کہ انسانیت نے ان تبدیلیوں کو قبول کیا، اور ساتھ ہی انسانی اقدار کو برقرار رکھا۔ انصاف کا تصور ان انسانی اقدار میں سب سے زیادہ بہتر تصور ہے۔ اور، آئین انصاف کے اس تصور کا سب سے جدید ترین نظام ہے۔ اس نظام کو متحرک اور ترقی پذیر رکھنے کی ذمہ داری ہم سب پر ہے۔ ہم سب ان کرداروں کو پوری لگن کے ساتھ نبھائیں گے، اور آزادی کے سو سال سے پہلے ایک نئے ہندوستان کا خواب پورا ہو  گا۔ ہم مسلسل  ان باتوں سے متاثر ہیں، جن  باتوں پر ہمیں فخر ہے اور وہ منتر ہمارے لیے ہے – سنگچدھوں ، سموددھوں، سم وہ منانسی جتنم۔ ہمارے مقاصد یکساں ہوں ، ہمارے ذہن یکساں ہوں اور ہم مل کر ان مقاصد کو حاصل کریں۔ میں اسی جذبے کے ساتھ آج یوم آئین کے اس مقدس ماحول میں آپ سب کو اور اہل وطن کو نیک خواہشات پیش کرتے ہوئے اپنی تقریر ختم کرتا ہوں۔ ایک بار پھر آپ سب کو بہت بہت مبارک ہو۔

بہت بہت شکریہ!