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सभी विशिष्‍ट महानुभाव और विशालसंख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाईयों और बहनों,

Seychelles की मेरी पहली मुलाकात है, लेकिन लग रहा है आप लोगों से बहुत पहले से जुड़ा हुआ हूं।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (1)

कल मैं रात देर से आया उसके बावजूद भी पूरे रास्‍ते भर मैं Seychelles के लोगों के प्‍यार को अनुभव कर रहा था। जिस प्रकार का स्‍वागत सम्‍मान किया, इसके लिए मैं यहां की सरकार का, यहां के नागरिकों का और आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

Seychelles और भारत - विज्ञान यह कहता है कि हजारों साल पहले हम एक ही धरती थे, लेकिन जब प्रलय होता है तो सब बिखर जाता है। यह धरती और भारत की धरती, इसके बीच हजारों साल पहले हजारों मील का फासला हो गया। प्रकृति ने धरती को अलग किया, लेकिन हमारे दिलों को जुदा नहीं किया।

और कभी-कभी लगता है कि भारत और हमारे Seychelles के बीच में एक बहुत बड़ा समंदर है। लेकिन यह समंदर हमें बिछड़ने के लिए नहीं है, यह समंदर है जो हमें जोड़ता है। समंदर के तट पर खड़े होकर के हम ऊंगली करके कह सकते हैं उधर मेरा मुंबई है, उधर मेरा चेन्‍नई है, उधर मेरा कोच्चि है। यह नजदीकी, ये अपनापन.. और इस अर्थ में, समझता हूं कि हम लोगों का एक विशेष नाता है।

आज भारत इस बात का गर्व करता है कि आप भारतवासी जहां भी गए, जिस अवस्‍था में गए, जिस कठिनाइयों के बीच जिंदगी को जीये, शताब्‍दीभर - कुछ कम समय नहीं होता है - कहते हैं शुरू में 1717 में कुछ लोग यहां आए थे, और तब से सिलसिला चला। सौ सवा सौ वर्ष, बहुत बड़ी मात्रा में आना जाना हुआ। लेकिन इस पूरे कालखंड में आपके व्‍यवहार से आपकी वाणी से यहां के लोगों ने आपको अपना बना लिया और आपने इस देश को अपना बना लिया है। यही तो हमारी मूल सांस्‍कृति धरोहर है - वसुदेव कुटुम्‍बकम - पूरा विश्‍व एक परिवार है। और जो इन संस्‍कारों से पले-बढ़े हैं, जिनके लिए पृथ्‍वी यह माता है, उनके लिए अपनेपन के लिए भौगोलिक सीमाएं नहीं होती है।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (4)

देश की सीमाएं उनकी भावनाओं को बांटकर के नहीं रखती है। भावनाएं आपार सागर की तरह फैली होती है, और आपके व्‍यवहार से वो देश गर्व अनुभव करता है कि आपने सारी दुनिया में... आज भी कहीं पर भी जाओ दुनिया में कांतिलाल जीवन शाह का नाम दोगे। अब तो हमारे बीच रहे नहीं, लेकिन उन्होंने काम के द्वारा दुनिया में Seychelles का भी नाम रोशन किया, एक मूल भारतीय के नाते भी नाम रोशन किया। विश्व ने उनको सम्मानित किया। अनेक Award मिले उनको। और वो सिर्फ आर्थिक कारोबार के कारण नहीं है। उन्होंने ज्यादातर चिंता की थी प्रकृति की रक्षा के लिए। आज जिस Climate change को लेकर के दुनिया चिंतित है, कांतिलाल शाह अपनी जवानी के समय से उन मुद्दों को लेकर के Seychelles के अंदर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे थे, लोगों को जगा रहे थे। सामूहिक की संपदा के लिए लोगों को जगा रहे थे, संवेदनाएं पैदा कर रहे थे। एक भारतीय के नाते इस प्रकार का उनका जीवन, इस प्रकार का उनका काम, हर हिंदुस्तानी को गर्व देता है, अभिमान देता है। और ऐसे तो यहां अनगिनत लोग हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि, शक्ति, क्षमता, कल्पना शक्ति, समार्थ्य, धन - इन सबके द्वारा Seychelles के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इतनी बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय यहां रहता है। और हम गुजरात के लोग तो एक पुरानी घटना से बड़े परिचित हैं कि जब ईरान से पारसी आए और राजा ने भरा हुआ दूध का कटोरा भेजा और पारसी समुदाय ने उसमें चीनी मिलाई और वापिस भेजा। कटोरा भरा हुआ था लेकिन जब चीनी मिलाकर के भेजा तो दूध बाहर नहीं गया अंदर ही रहा। पूरा भरा रहा लेकिन दूध मीठा हो गया। और तब ये symbolic संदेश था कि पारसी ने संदेश दिया कि भले ही हम ईरान से आए हैं लेकिन हम हिंदुस्तान की धरती पर ऐसे घुल-मिल जाएंगे जिसके कारण आपकी sweetness में बढ़ोतरी होगी। मैं समझता हूं उसी परंपरा... भारतीय समुदाय के लोग यहां आ के Seychelles में उसी तरह घुल-मिल गए हैं कि जिसने Seychelles की sweetness को बढ़ाया है उसकी रोशनी को उजागर किया है, उसको सामर्थ्य दिया है। और इस प्रकार से अपने व्यवहार से, अपने आचरण से, जब कोई मेरा भारतीय भाई दुनिया के किसी भी कोने में जाकर के उस समाज की भलाई के लिए जीता है, उस समाज की भलाई के लिए काम करता है, उस धरती के लिए अपना जीवन लगा देता है, तब भारत के नाते हम लोगों को बड़ा गर्व होता है। मैं आज आपके बीच मेरे गर्व की अभिव्‍यक्ति आपके सामने कर रहा हूं। आनंद की अभिव्यक्ति कर रहा हूं, आपका अभिनंदन कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाली हमारी पीढि़या भी इन संस्‍कारों को इन परंपराओं को बनाए रखेगी, और विश्‍व में भारत का गौरव भारत की पहचान बनाने में हमारी अहम भूमिका रहेगी।

भाईयों-बहनों, कुछ महीने पहले भारत में चुनाव हुए और बहुत वर्षों के बाद, करीब-करीब 30 वर्ष के बाद भारत में पूर्ण बहुमत से चुनकर के लोगों ने एक सरकार बनाई। और मुझे बताया गया कि भारत में जब चुनावी नतीजे आ रहे थे, result आ रहे थे, तब आप भी यहां उत्‍सव मना रहे थे। यह उत्‍सव इस बात से भी जुड़ा हुआ था कि आप भी - Seychelles की प्रगति तो चाहते ही चाहते हैं, उसके लिए प्रयास भी करते हैं - लेकिन आपके दिल में यह भी है कि भारत भी प्रगति करे, भारत भी नई ऊंचाईयों को पाएं।

और हम तो वो लोग हैं जो वसुदेव कुटुम्‍ब कहते हैं तो हमारी तो कल्‍पना है पूरा विश्‍व आगे बढ़े, पूरा विश्‍व शांति से जीए, पूरा विश्‍व प्रगति करे। यही तो हमारे सपने हैं, यही तो हमारे संस्‍कार हैं, यही हमारा संकल्‍प है कि हम जय जगत वाले लोग हैं, विश्‍व कल्‍याण वाले लोग हैं। और उस काम को करने के लिए भारत को भी अपनी जिम्‍मेवारी निभाने के लिए सक्षम होना पड़ेगा। अगर भारत गरीब रहा, भारत पिछड़ा रहा, भारत दुर्लभ रहा तो दुनिया की आशा-आकांक्षा वो पूरी करने में भारत कोई भूमिका नहीं निभा सकता। तो विश्‍व कल्‍याण की भी अगर भूमिका निभानी है तो भारत का मजबूत होना जरूरी है, भारत का सामर्थ्‍यवान होना जरूरी है, भारत का सुख-शांति से हरा-भरा देश बनना जरूरी है। और इसलिए पिछले नौ-दस महीने में कोशिश की गई है कि देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे। भारत का सर्वांगीण विकास हो और भारत विश्‍व से ज्‍यादा से ज्‍यादा जुड़े।

आज दुनिया के छोटे-छोटे देश जो टापुओं पर बसे हैं, आईलैंड्स पर बसे हैं, उन सबकी एक सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया को कौन nuclear बम बनाता है कौन नहीं बनाता है - यह आईलैंड में रहने वाले लोगों की चिंता का विषय नहीं है, लेकिन उनकी चिंता का विषय है कि “यह Global Warming होता रहेगा तो हम रहेंगे कि नहीं रहेंगे? कहीं यह हमारा टापू पानी के अंदर चला तो नहीं जाएगा? सदियों से जिसको संजोया है, दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी जिसमें खप गई है, कहीं यह तो डूब नहीं जाएगा?”

और दुनिया को बचाने का काम सिर्फ आईलैंड पर बैठे हुए लोग अपनी रक्षा के लिए कुछ करें और इसलिए सब हो जाएगा, ऐसा नहीं है। पूरे विश्‍व ने मिलजुल करके climate change की उतनी ही चिंता करनी पड़ेगी, जितनी आज विश्व Terrorism की चर्चा करता है। जितना संकट आतंकवाद से नजर आता है गहरा लगता है उतना ही, इन छोटे-छोटने Island पर रहने वाले लोगों के लिए, Climate change के कारण संकट महसूस होता है।

भारत ने... सदियों से हमारे तो संस्कार रहे हैं, हमें तो वो संस्कार मिले हैं कि बालक सुबह बिस्‍तर से उठकर के पैर जमीन पर रखता है तो उसे सिखाया जाता है कि तुम ये पैर पृथ्वी माता के ऊपर रख रहे हो। पहले पृथ्वी माता की माफी मांगो। यानि हमें इस मां को पीड़ा देने का कोई हक नहीं है, ये हमारी संस्कृति और संस्कार में है। प्रकृति से प्यार करो, प्रकृति से संवाद करो, प्रकृति से सीखो - यही तो हमें सिखाया गया है। पूरे ब्रहमांड को एक परिवार के रूप में माना गया है, और इसलिए विश्व को इस संकट से बचाने का काम भी - हम जिस परंपरा से बने-पले हैं, जिस संस्कारों से हम आगे बढ़े हैं, जिस संस्कृति को हमने विरासत में पाया है - अगर हम उसे जीना सीख लें, लोगों को जीने का रास्ता दिखा दें और जगत उसे जीने की आदत बना ले, तो हो सकता है इतने बड़े संकट से बाहर निकलने के लिए पूरी मानव जात सरलता से एक रास्ते पर चल सकती है और आगे बढ़ सकती है

। हम वो लोग हैं जो नदी को मां मानते हैं, वो लोग हैं जो पौधे में परमात्मा देखते हैं। यही तो बातें हैं, जो Climate की रक्षा के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन इन परंपराओं के साथ-साथ, आधुनिक चीजों पर भी बल देना पड़ता है। हमें विकास की उस राह को अपनाना होगा जो सदियों के बाद भी मानव जात के कल्याण में रुकावट पैदा न कर सके। हम सबको परमात्मा ने हमारे लिए जो दिया है, उसका तो उपभोग करने का अधिकार है। लेकिन हम लोगों को हमारी संतानों के लिए जो दिया गया है, उसका उपभोग करने का अधिकार नहीं है। ऐसा कोई मां-बाप होते हैं क्या? दुनिया में ऐसे कोई मां-बाप होते हैं क्या जो अपने बच्चों का भी खा जाएं? कोई मां-बाप ऐसा नहीं होते। और इसलिए आज से 100 साल बाद आपके बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे। उनको पानी मिलेगा क्या नहीं मिलेगा? उनको शुद्ध हवा मिलेगी कि नहीं मिलेगी? उनको रहने के लिए अच्छी पृथ्वी मिलेगी कि नहीं मिलेगी? हमें उनको वो विरासत में देकर के जाना है तो हमें आज अपनी जिंदगी को बदलना पड़ेगा। और इसलिए उस दिशा में हम काम करें।

भारत ने एक बहुत बड़ा बीड़ी उठाया है। और वो बीड़ी है Solar energy और Wind energy का। हम चाहते हैं कि दुनिया को इस संकट से बचाने के लिए भारत की जो भूमिका है, उस भूमिका को अदा करना चाहिए और उस भूमिका को अदा करने के लिए 100 Giga Watt Solar energy का संकल्प हमने लिया है 2022 में - जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे। जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मनाएगा, हम दुनिया को एक सौगात देना चाहते हैं ताकि विश्व को Global Warming में से बचाने में भारत भी अपनी अहम भूमिका निभाए। हम 60 Gigawatt Wind energy की ओर जा रहे हैं। ये Target बहुत बड़े हैं, छोटे नहीं हैं। लेकिन इन संकल्पों को हम इसलिए लेकर के चले हैं क्‍योंकि हमारी प्रेरणा... हमारी प्रेरणा सिर्फ हिंदुस्‍तान के किसी घर में दीया जले, वो नहीं है। हमारी प्रेरणा इन छोटे-छोटे टापुओं पर जो लोग जीते हैं, रह रहे हैं, छोटे-छोटे देशों के रूप में उनके जीवन की रक्षा करना यह हमारी प्रेरणा है, यह हमारा संकल्‍प है। और इसलिए सोलर पावर होगा तो हिंदुस्‍तान में लेकिन सीधा-सीधा फायदा मिलेगा Seychelles की भावी पीढ़ी को, यह सपने लेकर के हम काम कर रहे हैं।

आज भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की 35 age group से नीचे है। जिस देश में करोड़ों लोग नौजवान हो, वो दुनिया का भी भाग्‍य बदल सकते हैं अगर उन्‍हें अवसर मिल जाए। इस नई सरकार की कोशिश यह है कि हम नौजवानों को अधिकतम अवसर कैसे दें, ज्‍यादा से ज्‍यादा अवसर उनकों विकास के लिए कैसे मिले। उस दिशा में हमारा प्रयास है। और इसलिए Make In India यह हमने अभियान चलाया है। मैं दुनिया को निमंत्रण दे रहा हूं आइए, आप जो कुछ भी बना रहे हैं, मेरे देश में आकर के बनाइये।

और मैं विश्‍वास दिलाता हूं आप जो बनाते हैं उससे कम खर्चे में बनेगा, जल्‍दी बनेगा, अच्‍छा बनेगा। आज आपकी product पांच देशों में जाती हैं, हिंदुस्‍तान में बनाइये, 50 देशों में पहुंचना शुरू हो जाएगी। आज आपकी Balance Sheet में पाँच, दस, जीरो होंगे। देखते ही देखते आपकी Balance Sheet में और पाँच, दस जीरों जुड़ जाएंगे, यह ताकत है। और मैं देख रहा हूं कि दुनिया में आकर्षण पैदा हुआ है।

भारत की रेलवे की बड़ी चर्चा है। इतनी बड़ी विशाल रेल। यानी हिंदुस्‍तान में अगर 24 घंटे में हिंदुस्तान में रेलवे में कितने Passenger Travel करते हैं, इसका अगर मैं हिसाब लगाऊं, तो शायद hundred Seychelles, at a time, हिंदुस्‍तान में रेलवे के डिब्‍बे में हो। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि रेलवे में कितने विकास की संभावना है। रेलवे को हम आधुनिक बनाना चाहते हैं। रेलवे को हम दूर-सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहते हैं। और यह रेलवे के लोगों के हम पीछे क्‍यों लगे हैं? सिर्फ भारत के लोगों को Transportation की सुविधा मिले इतना मकसद नहीं है। रेलवे वो व्‍यवस्‍था है जो Global Warming के संकट को बचाने के जो अनेक साधन है, उसमें वो भी एक साधन है। Mass Transportation से emission कम होता है। और जब emission कम होता है तो Global Warming में कमी आती है। और Global Warming में कमी आती है तो Climate Change की चिंता टलती है और Climate Change की चिंता टलती है मतलब Seychelles को जीने की गारंटी पैदा होती है।

रेलवे वहां बनेगी, रेलवे वहां बढ़ेगी, लेकिन लाभ इन छोटे-छोटे टापुओं पर बसने वाले दुनिया के इन छोटे-छोटे देशों के नागरिकों को होने वाला है। क्‍योंकि भारत इतना बड़ा देश है। हम चाहते हैं भारत की रेल तेज गति से चले। हम चाहते हैं भारत की रेल आगे विस्‍तृत हो, हम चाहते हैं भारत की रेल आधुनिक बने और इसलिए हमने 100 percent Foreign Direct Investment के लिए रास्ते खोल दिए हैं। मैंने दुनिया को कहा कि आपके पास Technology है, आईए। आपके पास धन है, आईए। आप अपने व्यापार का विस्तार करना चाहते हैं, आईए। भारत की रेल भी दुनिया के अनेक देशों की Economy को बढ़ा सके, इतनी ताकतवर है। और इसलिए मैं Make in India में इस काम को लगा रहा हूं।

सेशेल्स जैसे छोटे-छोटे देश, क्या उनकी रक्षा नहीं होनी चाहिए क्या? छोटे-छोटे देशों से piracy के कारण जो समस्या होती हैं। उनके सारे समुद्री व्यापार संकट में पड़ जाते हैं। क्या इस सामुहिक रक्षा का चिता होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? क्या भारत का दायित्व नहीं है कि Indian Ocean में सुरक्षा की गारंटी में भारत भी अपना हाथ बढ़ाए, पूरी ताकत से बढ़ाए? ताकि सेशेल्स जैसे नागरिकों को विश्व व्यापार में आगे बढ़ना है ताकि पाइरेसी जैसे संकटों से इस समुद्री तट को बचाया जा सके? अगर वो बचाना है तो भारत को Defence Sector में आगे बढ़ना पड़ेगा और बढ़ने के लिए हमने भारत में Make in India में Defence Sector में Manufacturing को बल दिया है। Indigenous व्यवस्थाएं हम विकसित करना चाहते हैं।

आज यहां मैंने एक राडार का लोकार्पण किया है। इस राडार के लोकार्पण के कारण सेशेल्स की सामुद्रिक सुरक्षा के लिए एक नई ताकत मिलती है, नई दृष्टि मिलती, नई आंख मिलती है। वो देख सकते हैं 150 किलोमीटर की रेंज में कहीं कुछ हलचल, गड़बड़ तो नहीं हो रही है। ये काम भारत कैसे कर पाया? क्योंकि भारत में indigenous manufacturing की संभावना पैदा हुई है। हम आगे चलकर के Defence के Sector में और चीजों को बढ़ाना चाहते हैं ताकि उसका लाभ मिले। लाभ किसको मिलेगा? आप जैसे हमारे मित्र देशों को मिलेगा, पड़ोसी देशों को मिलेगा, इस Indian Ocean की Security को मिलेगा। और इसलिए हमारे हर कदम, भारत की धरती पर होने वाले हर कदम वैश्विक कल्याण की हमारी जो संकल्पना है, उसके अनुरूप और अनुकूल बनाने की हमारी कोशिश है और उसका लाभ आपको मिलने वाला है।

हम Skill development पर बल दे रहे हैं। आज पूरे विश्व को, विश्व के बहुत बड़े-बड़े देश, बड़ी-बड़ी Economy वो एक संकट से जूझ रही है और जिसका उपाय उनके पैसों में संभव नहीं है। जिसका उपाय उनकी Technology से संभव नहीं है। और वो है Man power. हर किसी को Work force चाहिए। दुनिया की Fastest Economy को भी Talented Workforce की जरूरत है। आने वाले 20 साल में पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा Workforce देने की ताकत है तो हिंदुस्तान की है। क्योंकि वो देश है, उसके हाथ में हुनर हो, Skill हो, दुनिया को जिस प्रकार के मानव बल की आवश्यकता है, उस प्रकार का मानव बल तैयार हो - उस दिशा में हमारा प्रयत्न है। Skill development को हमने एक Mission रूप में लिया है। और हम Skill development के द्वारा ऐसे नौजवान तैयार करना चाहते हैं जो स्वंय अच्छे entrepreneur बन सकें। जो entrepreneur नहीं बन सकते हैं वो स्वंय Skilled manpower के रूप में Job प्राप्त कर सकें। कुछ Job seekers हैं, उनको अच्छी Job मिल सके। कुछ Job creator बन सकें। एक प्रकार से विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति में जो चीजों काम आ सकें, उन-उन चीजों को बल देकर के और भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय़ लिए हैं। राष्ट्रपतिजी Michel के साथ आज मेरी विस्तार से बातें हुई हैं। और भारत और Seychelles मिलकर के हम कितनी ताकत से आगे बढ़ सकते हैं। हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। आप सबको बहुत खुशी होगी सुनकर के। सुनाऊं? भारत सरकार ने निर्णय किया है कि Seychelles के जो नागरिक हिंदुस्तान आने चाहते हैं, उनको तीन महीने का वीजा मुफ्त में दिया जाएगा। उतना ही नहीं, अब आपको यहां जाकर के दफ्तर में कतार लगाकर के खड़े नहीं रहना पड़ेगा। Embassy के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब Visa On Arrival होगा। आप Airport पर आए ठप्पा लग गया, आ जाओ।

हम चाहते हैं भारत और सेश्लस के बीच में Tourism बढ़ना चाहिए। और यहां जो गुजराती लोग हैं, उनको तो मालूम है। गुजराती लोग तो ढूढते रहते हैं कि Sunday को कहां जाऊं? इस Weekend पर कहां जाऊं? हम चाहते हैं कि Air Frequency बढ़े, Direct flights बढ़े। हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न कोने से Seychelles को सीधे हवाई जहाज जाएं। वहां से यहां आएं। उससे Tourism को बढ़ावा मिलेगा और Tourism को बढ़ावा मिलेगा तो उसके कारण Seychelles से जो लोग हिंदुस्तान जाएंगे वो भारत को अच्छी तरह जानेंगे। और भारत से जो लोग यहाँ आएंगे वो Seychelles की Economy को ताकतवर बनाएंगे।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH

और मैं मानता हूं Tourism दुनिया में तेज गति से बढ़ रहा व्यवसाय है, तेज गति से। लेकिन Tourism मानव जाति को जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम है। विश्व को जानना-समझना, अपना बनाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। और उस अवसर को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयों-बहनों आज समय की सीमा है। कुछ ही घंटों के लिए मैं आया हूं, पहली बार आया हूं। लेकिन लगता ऐसा है कि अच्छा होता, मैं ज्यादा समय के लिए आया होता। अब आप लोगों ने इतना प्यार दिया है तो फिर तो आना ही पड़ेगा। ज्यादा समय लेकर के आना पड़ेगा, आप सबके बीच रहना होगा, इस सुंदर देश को देखना होगा। तो मैं फिर एक बार आपके प्यार के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और मेरी तरफ से समग्र देशवासियों की तरफ से आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। और स्वागत सम्मान के लिए आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

आवजो। नमस्ते।

সেৱা আৰু সমৰ্পণৰ ২০ বছৰক সূচিত কৰা ২০ খন আলোকচিত্ৰ
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PM's speech at launch of PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission in Varanasi
October 25, 2021
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“In post-independence India, health infrastructure did not get the required attention for a very long time and citizens had to run from pillar to post for proper treatment, leading to worsening of the condition and financial strain”
“Government at the Center and in the state understands the pain of the poor, downtrodden, oppressed, backward and middle class”
“Through PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission an entire ecosystem for services from treatment to critical research will be created in every corner of the country”
“PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission, along with health, is also a medium of aatmnirbharta.”
“Heart of Kashi is the same, the mind is the same, but sincere efforts are being made to improve the body”
“Today, from technology to health, unprecedented facilities are being created in BHU. Young friends from all over the country are coming here for studies”

 

हर-हर, महादेव !

मैं शुरु करु अब आप लोग इजाज़त दे, तो मैं बोलना शुरु करुँ। हर-हर महादेव, बाबा विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा की नगरी काशी की पुण्य भूमि के सभी बंधु एवं भगिनी लोगन के प्रणाम बा। दीपावली, देव दीपावली, अन्नकूट, भईयादूज ,प्रकाशोत्सव एवंम आवै वाले डाला छठ क आप सब लोगन के बहुत – बहुत शुभकामना। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, यूपी के ऊर्जावान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया जी, यूपी सरकार के अन्यमंत्री गण केंद्र के हमारे एक और साथी महेंद्रनाथ पांडे जी, राज्य के एक और मंत्री अनिल राजभर जी, नीलकंठ तिवारी जी, रविंद्र जायसवाल जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद में हमारी साथी श्रीमती सीमा द्विवेदी जी, बी.पी.सरोज जी, वाराणसी की मेयर श्रीमती मृदुला जायसवाल जी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, टेक्नोलॉजी के माध्यम से देश के कोने-कोने से जुड़े हेल्थ प्रोफेशनल्स, जिला अस्पताल, मेडिकल संस्थान और यहां उपस्थित बनारस के मेरे भाइयों और बहनों।

देश ने कोरोना महामारी से अपनी लड़ाई में 100 करोड़ वैक्सीन डोज के बड़े पड़ाव को पूरा किया है। बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से, मां गंगा के अविरल प्रताप से, काशीवासियों के अखंड विश्वास से, सबको वैक्सीन- मुफ्त वैक्सीन का अभियान सफलता से आगे बढ़ रहा है। मैं आप सभी स्वजनों का आदर पूर्वक वंदन करता हूं। आज ही कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में मुझे उत्तर प्रदेश को 9 नए मेडिकल कॉलेज अर्पण करने का सौभाग्य मिला हैं। इससे पूर्वांचल और पूरे यूपी के करोड़ों गरीबों, दलितों-पिछड़ों-शोषितों-वंचितों को ऐसे समाज के सब वर्गों को बहुत फायदा होगा, दूसरे शहरों के बड़े अस्पतालों के लिए उनकी जो भागदौड़ होती थी, वो कम होगी।

साथियों,

मानस में एक सोरठा है –

मुक्ति जन्म महि जानि,ज्ञान खानिअघ हानि कर।

जहं बस सम्भु भवानि,सो कासी सेइअ कस न।।

अर्थात्, काशी में तो शिव और शक्ति साक्षात निवास करते हैं। ज्ञान का भंडार काशी तो कष्ट और क्लेश दोनों से मुक्त करती है। फिर स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी बड़ी योजना, बीमारियों कष्टों से मुक्ति का इतना बड़ा संकल्प, इसकी शुरुआत के लिए काशी से बेहतर जगह और क्या हो सकती है? काशी के मेरे भाईयों- बहनों आज इस मंच पर दो बड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। एक भारत सरकार का और पूरे भारत के लिए 64 हजार करोड़ से भी ज्यादा रकम का यह कार्यक्रम आज काशी की पवित्र धरती से लाँच हो रहा है। और दूसरा काशी और पूर्वाचँल के विकास के हजारों करोड़ के कार्यक्रमों का लोकार्पण और एक प्रकार से मैं कहूँ कि पहले वाला कार्यक्रम और यहाँ का कार्यक्रम सब मिलाके मैं कहूँ आज करीब- करीब 75 हजार करोड़ रुपये के कामों का आज यहाँ निर्णय या लोकार्पण हो रहा है। काशी से शुरू होने जा रही इस योजनाओं में महादेव का आशीर्वाद भी है। और जहां महादेव का आशीर्वाद है वहां तो कल्याण ही कल्याण है, सफलता ही सफलता है। और जब महादेव का आर्शीवाद होता है तो कष्टों से मुक्ति भी स्वाभाविक है।

साथियों,

आज यूपी सहित पूरे देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को ताकत देने के लिए, भविष्य में महामारियों से बचाव के लिए हमारी तैयारी उच्च स्तर की हो, गांव और ब्लॉक स्तर तक हमारे हेल्थ सिस्टम में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता आए, इसके लिए आज काशी से मुझे 64 हज़ार करोड़ रुपए का आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला है। आज काशी के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण अभी किया गया है। इसमें सड़कों से लेकर घाटों की सुंदरता, गंगा जी और वरुणा की साफ-सफाई, पुलों, पार्किंग स्थलों, BHU में अनेक सुविधाओं से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट । त्योहारों के इस मौसम में, जीवन को सुगम, स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए काशी में हो रहा ये विकास पर्व, एक प्रकार से पूरे देश को नई ऊर्जा, नई शक्ति, नया विश्वास देने वाला है। इसके लिए काशी सहित आज में काशी की धरती से 130 करोड़ देशवासियों को हिन्दुस्तान के कोन- कोने को हिन्दुस्तान के गाँव को हिन्दुस्तान के शहर को हर किसी को बहुत-बहुत बधाई !

भाइयों और बहनों,

हमारे यहां हर कर्म का मूल आधार आरोग्य माना गया है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया गया निवेश, हमेशा उत्तम निवेश माना गया है। लेकिन आज़ादी के बाद के लंबे कालखंड में आरोग्य पर, स्वास्थ्य सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितनी देश को जरूरत थी। देश में जिनकी लंबे समय तक सरकारें रहीं, उन्होंने देश के हेल्थकेयर सिस्टम के संपूर्ण विकास के बजाय, उसे सुविधाओं से वंचित रखा। गांव में या तो अस्पताल नहीं, अस्पताल थे तो इलाज करने वाला नहीं। ब्लॉक के अस्पताल में गए तो टेस्ट की सुविधा नहीं। टेस्ट हों, टेस्ट हो भी जाए भी तो नतीजों को लेकर भ्रम रहा, सटीक होने पर शंका, जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि जो गंभीर बीमारी डिटेक्ट हुई है, उसमें तो सर्जरी होगी। लेकिन जो सर्जरी होनी है उसकी तो वहां सुविधा ही नहीं है, इसलिए फिर और बड़े अस्पताल भागो, बड़े अस्पताल में उससे ज्यादा भीड़, लंबा इंतज़ार। हम सभी गवाह हैं कि मरीज़ और उसका पूरा परिवार ऐसी ही परेशानियों से उलझता रहता था। जिंदगी जूझने में चली जाती थी इससे एक तो गंभीर बीमारी कई बार और ज्यादा बिगड़ जाती है, ऊपर से गरीब पर जो अनावश्यक आर्थिक बोझ पढ़ता है, वो अलग।

साथियों,

हमारे हेल्थकेयर सिस्टम में जो बड़ी कमी रही, उसने, गरीब और मिडिल क्लास में इलाज को लेकर हमेशा बनी रहने वाली चिंता पैदा कर दी। आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन - देश के हेल्थकेयर सिस्टम के इसी कमी को दूर का एक समाधान है। भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने में हम तैयार हों, सक्षम हों, इसके लिए अपने हेल्थ सिस्टम को आज तैयार किया जा रहा है। कोशिश ये भी है की बीमारी जल्दी पकड़ में आए, जांच में देरी ना हो। लक्ष्य ये है कि आने वाले 4-5 सालों में देश के गांव से लेकर ब्लॉक, जिला, रीजनल और नेशनल लेवल तक क्रिटिकल हेल्थकेयर नेटवर्क को सशक्त किया जाए। विशेष रूप से जिन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव अधिक है, जो हमारे पहाड़ी और नॉर्थ ईस्ट के राज्य हैं, उन पर और अधिक फोकस किया जा रहा है। जैसे उत्तराखंड हैं हिमाचल है।

साथियों,

देश के हेल्थ सेक्टर के अलग-अलग गैप्स को एड्रेस करने के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के 3 बड़े पहलू हैं। पहला, डाइअग्नास्टिक और ट्रीटमेंट के लिए विस्तृत सुविधाओं के निर्माण से जुड़ा है। इसके तहत गांवों और शहरों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं, जहां बीमारियों को शुरुआत में ही डिटेक्ट करने की सुविधा होगी। इन सेंटरों में फ्री मेडिकल कंसलटेशन, फ्री टेस्ट, फ्री दवा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। समय पर बीमारी का पता चलेगा तो बीमारियों के गंभीर होने की आशंका कम होगी। गंभीर बीमारी की स्थिति में उसके इलाज के लिए 600 से अधिक जिलों में, क्रिटिकल केयर से जुड़े 35 हजार से ज्यादा नए बेड्स तैयार किए जाएंगे। बाकी लगभग सवा सौ जिलों में रैफरल की सुविधा दी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए ट्रेनिंग और दूसरी कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए 12 केंद्रीय अस्पतालों में ज़रूरी सुविधाएं विकसित करने पर भी काम हो रहा है। इस योजना के तहत राज्यों में भी सर्जरी से जुड़े नेटवर्क को सशक्त करने के लिए 24x7 चलने वाले 15 इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स भी तैयार किए जाएंगे।

साथियों,

योजना का दूसरा पहलू, रोगों की जांच के लिए टेस्टिंग नेटवर्क से जुड़ा है। इस मिशन के तहत, बीमारियों की जांच, उनकी निगरानी कैसे हो, इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा। देश के 730 जिलों में इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और देश में चिन्हित साढ़े 3 हज़ार ब्लॉक्स में, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स बनाई जाएंगी। 5 रीजनल नेशनल सेंटर्स फॉर डिज़ीज कंट्रोल, 20 मेट्रोपॉलिटन यूनिट्स और 15 BSL लैब्स भी इस नेटवर्क को और सशक्त करेंगी।

भाइयों और बहनों,

इस मिशन का तीसरा पहलू महामारी से जुड़े रिसर्च संस्थानों के विस्तार का है, उनको सशक्त बनाने का है। इस समय देश में 80 Viral Diagnostics और research labs हैं। इनको और बेहतर बनाया जाएगा। महामारियों में बायोसेफ्टी लेवल-3 की लैब्स चाहिए। ऐसी 15 नई लैब्स को ऑपरेशनल किया जाएगा। इसके अलावा देश में 4 नए National Institutes of Virology और एक National institute for one health भी स्थापित किया जा रहा है। दक्षिण एशिया के लिए WHO का रीजनल रिसर्च प्लेटफॉर्म भी रिसर्च के इस नेटवर्क को सशक्त करेगा। यानि आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के माध्यम से देश के कोने-कोने में इलाज लेकर क्रिटिकल रिसर्च तक, एक पूरा इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।

साथियों,

वैसे यह काम दशकों पहले हो जाने चाहिए थे। लेकिन हाल क्या है उसका वर्णन मुझे कहने की मुझे ज़रुरत नही है हम पिछले 7 साल से लगातार सुधार कर रहे हैं लेकिन अब एक बहुत बड़े स्केल पर, बहुत बड़े aggressive approach के साथ इस काम को करना है। कुछ दिन पहले आपने देखा होगा मैनें दिल्ली में पूरे देश के लिए एक गति- शक्ति एक बहुत बड़ा देशव्यापी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यक्रम को लाँच किया था। आज यह दूसरा, करीब 64 हजार रुपये का हेल्थ को ही ले करके, आरोग्य को ले करके, बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए देश के हर नागरिक को स्वस्थ रखने के लिए इतना बड़ा एक मिशन ले करके आज काशी की धरती से हम देशभर में निकल रहे हैं।

साथियों,

जब ऐसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, तो इससे हेल्थ सर्विस तो बेहतर होती ही है, इससे रोज़गार का भी एक पूरा वातावरण विकसित होता है। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, लैब, फार्मेसी, साफ-सफाई, ऑफिस, ट्रैवल-ट्रांसपोर्ट, खान-पान, ऐसे अनेक प्रकार के रोज़गार इस योजना से बनने वाले हैं। हमने देखो है एक बड़ा अस्पताल बनता है तो उसके आसपास एक पूरा शहर बस जाता है। जो अस्पताल से जुड़ी गतिविधियों के रोज़ी रोटी का केंद्र बन जाता है। बहुत बड़ी आर्थिक गतिविधि का केंद्र बन जाता है। और इसलिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी माध्यम है। ये एक होलिस्टिक हेल्थकेयर के लिए हो रहे प्रयासों की एक कड़ी है। होलिस्टिक हेल्थकेयर यानि जो सभी के लिए सुलभ हो, जो सस्ता हो और सबकी पहुंच में हो। होलिस्टिक हेल्थकेयर यानि जहां हेल्थ के साथ ही वेलनेस पर भी फोकस हो। स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन, उज्जवला योजना, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, ऐसे अनेक अभियानों ने देश के करोड़ों गरीबों को बीमारी से बचाया है, उन्हें बीमार होने से बचाया है। आयुष्मान भारत योजना ने दो करोड़ से ज्यादा गरीबों का अस्पताल में मुफ्त इलाज भी करवाया है। इलाज से जुड़ी अनेक परेशानियों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के ज़रिए हल किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,

हमसे पहले बरसों तक जो सरकार में रहे, उनके लिए स्वास्थ्य सेवा, पैसा कमाने, घोटाले का जरिया रही है। गरीब की परेशानी देखकर भी, वो उनसे दूर भागते रहे। आज केंद्र और राज्य में वो सरकार है जो गरीब, दलित, शोषित-वंचित, पिछड़े, मध्यम वर्ग, सभी का दर्द समझती है। देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए हम दिन-रात एक कर रहे हैं। पहले जनता का पैसा घोटालों में जाता था, ऐसे लोगों की तिजोरियों में जाता था, आज बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में पैसा लग रहा है। इसलिए आज इतिहास की सबसे बड़ी महामारी से भी देश निपट रहा है और आत्मनिर्भर भारत के लिए लाखों करोड़ रुपए का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना रहा है।

साथियों,

मेडिकल सुविधाएं बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या भी उतनी ही तेजी से बढ़े। यूपी में जिस तेजी के साथ नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, उसका बहुत अच्छा प्रभाव मेडिकल की सीटों और डॉक्टरों की संख्या पर पड़ेगा। ज्यादा सीटें होने की वजह से अब गरीब माता-पिता का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना देख सकेगा और उसे पूरा कर सकेगा।

भाइयों और बहनों,

आजादी के बाद 70 साल में देश में जितने डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों से पढ़कर निकले हैं, उससे ज्यादा डॉक्टर अगले 10-12 वर्षों में देश को मिलने जा रहे हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि मेडिकल क्षेत्र में कितना बड़ा काम देश में हो रहा है। जब ज्यादा डॉक्टर होंगे तो देश के कोने-कोने में, गांव-गांव में उतनी ही आसानी से डॉक्टर उपलब्ध होंगे। यही नया भारत है जहां अभाव से आगे बढ़कर हर आकांक्षा की पूर्ति के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,

अतीत में चाहे देश में हो या फिर उत्तर प्रदेश में, जिस प्रकार काम हुआ, अगर वैसे ही काम होता तो आज काशी की स्थिति क्या होती ? दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी को, भारत की सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक काशी को इन्होंने अपने हाल पर छोड़ रखा था। वो लटकते बिजली के तार, उबड़-खाबड़ सड़कें, घाटों और गंगा मैया की दुर्दशा, जाम, प्रदूषण, अव्यवस्था, यही सबकुछ चलता रहा। आज काशी का हृदय वही है, मन वही है, लेकिन काया को सुधारने का ईमानदारी से प्रयास हो रहा है। जितना काम वाराणसी में पिछले 7 साल में हुआ है, उतना पिछले कई दशकों में नहीं हुआ।

भाइयों और बहनों,

रिंग रोड के अभाव में काशी में जाम की क्या स्थिति होती थी, इसे आपने सालों साल अनुभव किया है। ‘नो एंट्री’ के खुलने का इंतज़ार तो बनारस वालों की आदत बन गया था। अब रिंग रोड बनने से प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, दिल्ली, कोलकाता, कहीं भी आना-जाना हो तो शहर में आ करके शहर वालों को परेशान करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी । यही नहीं, रिंग रोड अब गाज़ीपुर के बिरनोन तक फोर लेन नेशनल हाईवे से जुड़ गई है। जगह-जगह सर्विस रोड की सुविधाएं भी दी गई हैं। इससे अनेक गांवों के साथ-साथ प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर और बिहार, नेपाल तक आवाजाही सुविधानजक हो गई है। इससे यात्रा तो आसान होगी ही, व्यापार-कारोबार को गति मिलेगी, ट्रांसपोर्ट की कीमत कम होगी।

भाईयों और बहनों,

जब तक देश में एक डेडीकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ना हो, तब तक विकास की गति अधूरी रहती है। वरुणा नदी पर दो पुल बनने से दर्जनों गांवों के लिए अब शहर आना-जाना आसान हुआ है। इससे एयरपोर्ट आने जाने वाले प्रयागराज, भदोही और मिर्जापुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी। कालीन उद्योग से जुड़े साथियों को भी लाभ होगा और मां विन्ध्यवासिनी के दर्शन करने के लिए एयरपोर्ट से सीधे मिर्जापुर जाने के इच्छुक मां भक्तों को भी सुविधा मिलेगी। सड़कों, पुलों, पार्किंग स्थलों से जुड़े ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स आज काशीवासियों को समर्पित किए गए हैं, जिससे शहर और आसपास जीवन और अधिक सुगम होगा। रेलवे स्टेशन पर बने आधुनिक एग्जीक्यूटिव लाउंज से यात्रियों की सहूलियत और बढ़ेगी।

साथियों,

गंगा जी की स्वच्छता और निर्मलता के लिए बीते सालों में व्यापक काम किया जा रहा है, जिसका परिणाम आज हम आज अनुभव भी कर रहे हैं। घरों से गंदा पानी गंगा जी में ना जाए, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अब रामनगर में 5 नालों से बहने वाले सीवेज को ट्रीट करने के लिए आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट काम करना शुरु कर चुका है। इससे आसपास की 50 हज़ार से अधिक आबादी को सीधा लाभ हो रहा है। गंगा जी ही नहीं, बल्कि वरुणा की स्वच्छता को लेकर भी प्राथमिकता के आधार पर काम हो रहा है। लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रही वरुणा, अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच चुकी थी। वरुणा को बचाने के लिए ही चैनलाइजेशन की योजना पर काम किया गया। आज स्वच्छ जल भी वरुणा में पहुंच रहा है, 13 छोटे-बड़े नालों को भी ट्रीट किया जा रहा है। वरुणा के दोनों किनारे पाथवे, रेलिंग, लाईटिंग, पक्के घाट, सीढ़ियां, ऐसी अनेक सुविधाओं का भी निर्माण पूरा हो रहा है।

साथियों,

काशी आध्यात्म के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी एक अहम केंद्र है। काशी सहित संपूर्ण पूर्वांचल के किसानों की उपज को देश-विदेश के बाज़ारों तक पहुंचाने के लिए बीते सालों में अनेक सुविधाएं विकसित की गई हैं। पैरिशेबल कार्गो सेंटर्स से लेकर पैकेजिंग और प्रोसेसिंग का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को यहां विकसित किया गया है। इसी कड़ी में लाल बहादुर शास्त्री फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट का आधुनिकीकरण हुआ है, जो रेनोवेशन हुआ है, उससे किसानों को बहुत सुविधा होने वाली है। शहंशाहपुर में बॉयो- सीएनजी प्लांट के बनने से बायोगैस भी मिलेगी और हज़ारों मैट्रिक टन ऑर्गनिक खाद भी किसानों को उपलब्ध होगी।

भाइयों और बहनों,

बीते सालों की एक और बड़ी उपलब्धि अगर काशी की रही है, तो वो है BHU का फिर से दुनिया में श्रेष्ठता की तरफ अग्रसर होना। आज टेक्नॉलॉजी से लेकर हेल्थ तक, BHU में अभूतपूर्व सुविधाएं तैयार हो रही हैं। देशभर से यहां युवा साथी पढ़ाई के लिए आ रहे हैं। यहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं के लिए जो आवासीय सुविधाएं बनी हैं, वो युवा साथियों को बेहतर करने में मददगार सिद्ध होगी। विशेष रूप से सैकड़ों छात्राओं के लिए जो होस्टल की सुविधा तैयार हुई है, उससे मालवीय जी के विजन को साकार करने में और बल मिलेगा। बेटियों को उच्च और आधुनिक शिक्षा देने के लिए जिस संकल्प के साथ वो जीयें, उसको सिद्ध करने में हमें मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

विकास के ये सभी प्रोजेक्ट आत्मनिर्भरता के हमारे संकल्प को सिद्ध करने वाले हैं। काशी और ये पूरा क्षेत्र तो मिट्टी के अद्भुत कलाकारों, कारीगरों और कपड़े पर जादूगरी बिखेरने वाले बुनकरों के लिए जाना जाता है। सरकार के प्रयासों से बीते 5 साल में वाराणसी में खादी और दूसरे कुटीर उद्योगों के उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत और बिक्री में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसलिए एक बार फिर मैं यहां से सभी देशवासियों से आग्रह करुंगा कि इस दीवाली हमें, अपने इन साथियों की दीपावली का भी ध्यान रखना है। अपने घर की सजावट से लेकर, अपने कपड़ों और दीवाली के दीयों तक, लोकल के लिए हमें वोकल रहना है। धन तेरस से लेकर दीवाली तक लोकल की जमकर खरीदारी करेंगे तो, सबकी दीवाली खुशियों से भर जाएगी। और जब मैं लोकल से वोकल की बात करता हूँ, तो मैनें देखा है कि हमारे टीवी वाले भी सिर्फ मिट्टी के दीये दिखाते हैं। वोकल फॉर लोकल सिर्फ दीयों तक सीमित नहीं है भई, हर चीज़ में वो उत्पादन जिसमें मेरे देशवासियों का पसीना है, जिस उत्पादन में मेरे देश की मिट्टी की सुगंध है, वो मेरे लिए है। और एक बार हमारी आदत बन जाएगी देश की चीज़े खरीदने की तो उत्पादन भी बढ़ेगा, रोजगार भी बढ़ेगा, गरीब से गरीब को काम भी मिलेगा और यह काम सब मिल करके कर सकते हैं, सबके प्रयास से बहुत बड़ा परिवर्तन हम लोग ला सकते हैं।

साथियों,

एक बार फिर आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए पूरे देश को और विकास के अनेक प्रोजेक्ट्स के लिए काशी को, बहुत-बहुत बधाई। आप सबको आने वाले सभी त्योहारों की फिर से एक बार अनेक- अनेक अग्रिम शुभकामनाएं बहुत- बहुत धन्यवाद !