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सभी विशिष्‍ट महानुभाव और विशालसंख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाईयों और बहनों,

Seychelles की मेरी पहली मुलाकात है, लेकिन लग रहा है आप लोगों से बहुत पहले से जुड़ा हुआ हूं।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (1)

कल मैं रात देर से आया उसके बावजूद भी पूरे रास्‍ते भर मैं Seychelles के लोगों के प्‍यार को अनुभव कर रहा था। जिस प्रकार का स्‍वागत सम्‍मान किया, इसके लिए मैं यहां की सरकार का, यहां के नागरिकों का और आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

Seychelles और भारत - विज्ञान यह कहता है कि हजारों साल पहले हम एक ही धरती थे, लेकिन जब प्रलय होता है तो सब बिखर जाता है। यह धरती और भारत की धरती, इसके बीच हजारों साल पहले हजारों मील का फासला हो गया। प्रकृति ने धरती को अलग किया, लेकिन हमारे दिलों को जुदा नहीं किया।

और कभी-कभी लगता है कि भारत और हमारे Seychelles के बीच में एक बहुत बड़ा समंदर है। लेकिन यह समंदर हमें बिछड़ने के लिए नहीं है, यह समंदर है जो हमें जोड़ता है। समंदर के तट पर खड़े होकर के हम ऊंगली करके कह सकते हैं उधर मेरा मुंबई है, उधर मेरा चेन्‍नई है, उधर मेरा कोच्चि है। यह नजदीकी, ये अपनापन.. और इस अर्थ में, समझता हूं कि हम लोगों का एक विशेष नाता है।

आज भारत इस बात का गर्व करता है कि आप भारतवासी जहां भी गए, जिस अवस्‍था में गए, जिस कठिनाइयों के बीच जिंदगी को जीये, शताब्‍दीभर - कुछ कम समय नहीं होता है - कहते हैं शुरू में 1717 में कुछ लोग यहां आए थे, और तब से सिलसिला चला। सौ सवा सौ वर्ष, बहुत बड़ी मात्रा में आना जाना हुआ। लेकिन इस पूरे कालखंड में आपके व्‍यवहार से आपकी वाणी से यहां के लोगों ने आपको अपना बना लिया और आपने इस देश को अपना बना लिया है। यही तो हमारी मूल सांस्‍कृति धरोहर है - वसुदेव कुटुम्‍बकम - पूरा विश्‍व एक परिवार है। और जो इन संस्‍कारों से पले-बढ़े हैं, जिनके लिए पृथ्‍वी यह माता है, उनके लिए अपनेपन के लिए भौगोलिक सीमाएं नहीं होती है।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (4)

देश की सीमाएं उनकी भावनाओं को बांटकर के नहीं रखती है। भावनाएं आपार सागर की तरह फैली होती है, और आपके व्‍यवहार से वो देश गर्व अनुभव करता है कि आपने सारी दुनिया में... आज भी कहीं पर भी जाओ दुनिया में कांतिलाल जीवन शाह का नाम दोगे। अब तो हमारे बीच रहे नहीं, लेकिन उन्होंने काम के द्वारा दुनिया में Seychelles का भी नाम रोशन किया, एक मूल भारतीय के नाते भी नाम रोशन किया। विश्व ने उनको सम्मानित किया। अनेक Award मिले उनको। और वो सिर्फ आर्थिक कारोबार के कारण नहीं है। उन्होंने ज्यादातर चिंता की थी प्रकृति की रक्षा के लिए। आज जिस Climate change को लेकर के दुनिया चिंतित है, कांतिलाल शाह अपनी जवानी के समय से उन मुद्दों को लेकर के Seychelles के अंदर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे थे, लोगों को जगा रहे थे। सामूहिक की संपदा के लिए लोगों को जगा रहे थे, संवेदनाएं पैदा कर रहे थे। एक भारतीय के नाते इस प्रकार का उनका जीवन, इस प्रकार का उनका काम, हर हिंदुस्तानी को गर्व देता है, अभिमान देता है। और ऐसे तो यहां अनगिनत लोग हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि, शक्ति, क्षमता, कल्पना शक्ति, समार्थ्य, धन - इन सबके द्वारा Seychelles के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इतनी बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय यहां रहता है। और हम गुजरात के लोग तो एक पुरानी घटना से बड़े परिचित हैं कि जब ईरान से पारसी आए और राजा ने भरा हुआ दूध का कटोरा भेजा और पारसी समुदाय ने उसमें चीनी मिलाई और वापिस भेजा। कटोरा भरा हुआ था लेकिन जब चीनी मिलाकर के भेजा तो दूध बाहर नहीं गया अंदर ही रहा। पूरा भरा रहा लेकिन दूध मीठा हो गया। और तब ये symbolic संदेश था कि पारसी ने संदेश दिया कि भले ही हम ईरान से आए हैं लेकिन हम हिंदुस्तान की धरती पर ऐसे घुल-मिल जाएंगे जिसके कारण आपकी sweetness में बढ़ोतरी होगी। मैं समझता हूं उसी परंपरा... भारतीय समुदाय के लोग यहां आ के Seychelles में उसी तरह घुल-मिल गए हैं कि जिसने Seychelles की sweetness को बढ़ाया है उसकी रोशनी को उजागर किया है, उसको सामर्थ्य दिया है। और इस प्रकार से अपने व्यवहार से, अपने आचरण से, जब कोई मेरा भारतीय भाई दुनिया के किसी भी कोने में जाकर के उस समाज की भलाई के लिए जीता है, उस समाज की भलाई के लिए काम करता है, उस धरती के लिए अपना जीवन लगा देता है, तब भारत के नाते हम लोगों को बड़ा गर्व होता है। मैं आज आपके बीच मेरे गर्व की अभिव्‍यक्ति आपके सामने कर रहा हूं। आनंद की अभिव्यक्ति कर रहा हूं, आपका अभिनंदन कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाली हमारी पीढि़या भी इन संस्‍कारों को इन परंपराओं को बनाए रखेगी, और विश्‍व में भारत का गौरव भारत की पहचान बनाने में हमारी अहम भूमिका रहेगी।

भाईयों-बहनों, कुछ महीने पहले भारत में चुनाव हुए और बहुत वर्षों के बाद, करीब-करीब 30 वर्ष के बाद भारत में पूर्ण बहुमत से चुनकर के लोगों ने एक सरकार बनाई। और मुझे बताया गया कि भारत में जब चुनावी नतीजे आ रहे थे, result आ रहे थे, तब आप भी यहां उत्‍सव मना रहे थे। यह उत्‍सव इस बात से भी जुड़ा हुआ था कि आप भी - Seychelles की प्रगति तो चाहते ही चाहते हैं, उसके लिए प्रयास भी करते हैं - लेकिन आपके दिल में यह भी है कि भारत भी प्रगति करे, भारत भी नई ऊंचाईयों को पाएं।

और हम तो वो लोग हैं जो वसुदेव कुटुम्‍ब कहते हैं तो हमारी तो कल्‍पना है पूरा विश्‍व आगे बढ़े, पूरा विश्‍व शांति से जीए, पूरा विश्‍व प्रगति करे। यही तो हमारे सपने हैं, यही तो हमारे संस्‍कार हैं, यही हमारा संकल्‍प है कि हम जय जगत वाले लोग हैं, विश्‍व कल्‍याण वाले लोग हैं। और उस काम को करने के लिए भारत को भी अपनी जिम्‍मेवारी निभाने के लिए सक्षम होना पड़ेगा। अगर भारत गरीब रहा, भारत पिछड़ा रहा, भारत दुर्लभ रहा तो दुनिया की आशा-आकांक्षा वो पूरी करने में भारत कोई भूमिका नहीं निभा सकता। तो विश्‍व कल्‍याण की भी अगर भूमिका निभानी है तो भारत का मजबूत होना जरूरी है, भारत का सामर्थ्‍यवान होना जरूरी है, भारत का सुख-शांति से हरा-भरा देश बनना जरूरी है। और इसलिए पिछले नौ-दस महीने में कोशिश की गई है कि देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे। भारत का सर्वांगीण विकास हो और भारत विश्‍व से ज्‍यादा से ज्‍यादा जुड़े।

आज दुनिया के छोटे-छोटे देश जो टापुओं पर बसे हैं, आईलैंड्स पर बसे हैं, उन सबकी एक सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया को कौन nuclear बम बनाता है कौन नहीं बनाता है - यह आईलैंड में रहने वाले लोगों की चिंता का विषय नहीं है, लेकिन उनकी चिंता का विषय है कि “यह Global Warming होता रहेगा तो हम रहेंगे कि नहीं रहेंगे? कहीं यह हमारा टापू पानी के अंदर चला तो नहीं जाएगा? सदियों से जिसको संजोया है, दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी जिसमें खप गई है, कहीं यह तो डूब नहीं जाएगा?”

और दुनिया को बचाने का काम सिर्फ आईलैंड पर बैठे हुए लोग अपनी रक्षा के लिए कुछ करें और इसलिए सब हो जाएगा, ऐसा नहीं है। पूरे विश्‍व ने मिलजुल करके climate change की उतनी ही चिंता करनी पड़ेगी, जितनी आज विश्व Terrorism की चर्चा करता है। जितना संकट आतंकवाद से नजर आता है गहरा लगता है उतना ही, इन छोटे-छोटने Island पर रहने वाले लोगों के लिए, Climate change के कारण संकट महसूस होता है।

भारत ने... सदियों से हमारे तो संस्कार रहे हैं, हमें तो वो संस्कार मिले हैं कि बालक सुबह बिस्‍तर से उठकर के पैर जमीन पर रखता है तो उसे सिखाया जाता है कि तुम ये पैर पृथ्वी माता के ऊपर रख रहे हो। पहले पृथ्वी माता की माफी मांगो। यानि हमें इस मां को पीड़ा देने का कोई हक नहीं है, ये हमारी संस्कृति और संस्कार में है। प्रकृति से प्यार करो, प्रकृति से संवाद करो, प्रकृति से सीखो - यही तो हमें सिखाया गया है। पूरे ब्रहमांड को एक परिवार के रूप में माना गया है, और इसलिए विश्व को इस संकट से बचाने का काम भी - हम जिस परंपरा से बने-पले हैं, जिस संस्कारों से हम आगे बढ़े हैं, जिस संस्कृति को हमने विरासत में पाया है - अगर हम उसे जीना सीख लें, लोगों को जीने का रास्ता दिखा दें और जगत उसे जीने की आदत बना ले, तो हो सकता है इतने बड़े संकट से बाहर निकलने के लिए पूरी मानव जात सरलता से एक रास्ते पर चल सकती है और आगे बढ़ सकती है

। हम वो लोग हैं जो नदी को मां मानते हैं, वो लोग हैं जो पौधे में परमात्मा देखते हैं। यही तो बातें हैं, जो Climate की रक्षा के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन इन परंपराओं के साथ-साथ, आधुनिक चीजों पर भी बल देना पड़ता है। हमें विकास की उस राह को अपनाना होगा जो सदियों के बाद भी मानव जात के कल्याण में रुकावट पैदा न कर सके। हम सबको परमात्मा ने हमारे लिए जो दिया है, उसका तो उपभोग करने का अधिकार है। लेकिन हम लोगों को हमारी संतानों के लिए जो दिया गया है, उसका उपभोग करने का अधिकार नहीं है। ऐसा कोई मां-बाप होते हैं क्या? दुनिया में ऐसे कोई मां-बाप होते हैं क्या जो अपने बच्चों का भी खा जाएं? कोई मां-बाप ऐसा नहीं होते। और इसलिए आज से 100 साल बाद आपके बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे। उनको पानी मिलेगा क्या नहीं मिलेगा? उनको शुद्ध हवा मिलेगी कि नहीं मिलेगी? उनको रहने के लिए अच्छी पृथ्वी मिलेगी कि नहीं मिलेगी? हमें उनको वो विरासत में देकर के जाना है तो हमें आज अपनी जिंदगी को बदलना पड़ेगा। और इसलिए उस दिशा में हम काम करें।

भारत ने एक बहुत बड़ा बीड़ी उठाया है। और वो बीड़ी है Solar energy और Wind energy का। हम चाहते हैं कि दुनिया को इस संकट से बचाने के लिए भारत की जो भूमिका है, उस भूमिका को अदा करना चाहिए और उस भूमिका को अदा करने के लिए 100 Giga Watt Solar energy का संकल्प हमने लिया है 2022 में - जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे। जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मनाएगा, हम दुनिया को एक सौगात देना चाहते हैं ताकि विश्व को Global Warming में से बचाने में भारत भी अपनी अहम भूमिका निभाए। हम 60 Gigawatt Wind energy की ओर जा रहे हैं। ये Target बहुत बड़े हैं, छोटे नहीं हैं। लेकिन इन संकल्पों को हम इसलिए लेकर के चले हैं क्‍योंकि हमारी प्रेरणा... हमारी प्रेरणा सिर्फ हिंदुस्‍तान के किसी घर में दीया जले, वो नहीं है। हमारी प्रेरणा इन छोटे-छोटे टापुओं पर जो लोग जीते हैं, रह रहे हैं, छोटे-छोटे देशों के रूप में उनके जीवन की रक्षा करना यह हमारी प्रेरणा है, यह हमारा संकल्‍प है। और इसलिए सोलर पावर होगा तो हिंदुस्‍तान में लेकिन सीधा-सीधा फायदा मिलेगा Seychelles की भावी पीढ़ी को, यह सपने लेकर के हम काम कर रहे हैं।

आज भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की 35 age group से नीचे है। जिस देश में करोड़ों लोग नौजवान हो, वो दुनिया का भी भाग्‍य बदल सकते हैं अगर उन्‍हें अवसर मिल जाए। इस नई सरकार की कोशिश यह है कि हम नौजवानों को अधिकतम अवसर कैसे दें, ज्‍यादा से ज्‍यादा अवसर उनकों विकास के लिए कैसे मिले। उस दिशा में हमारा प्रयास है। और इसलिए Make In India यह हमने अभियान चलाया है। मैं दुनिया को निमंत्रण दे रहा हूं आइए, आप जो कुछ भी बना रहे हैं, मेरे देश में आकर के बनाइये।

और मैं विश्‍वास दिलाता हूं आप जो बनाते हैं उससे कम खर्चे में बनेगा, जल्‍दी बनेगा, अच्‍छा बनेगा। आज आपकी product पांच देशों में जाती हैं, हिंदुस्‍तान में बनाइये, 50 देशों में पहुंचना शुरू हो जाएगी। आज आपकी Balance Sheet में पाँच, दस, जीरो होंगे। देखते ही देखते आपकी Balance Sheet में और पाँच, दस जीरों जुड़ जाएंगे, यह ताकत है। और मैं देख रहा हूं कि दुनिया में आकर्षण पैदा हुआ है।

भारत की रेलवे की बड़ी चर्चा है। इतनी बड़ी विशाल रेल। यानी हिंदुस्‍तान में अगर 24 घंटे में हिंदुस्तान में रेलवे में कितने Passenger Travel करते हैं, इसका अगर मैं हिसाब लगाऊं, तो शायद hundred Seychelles, at a time, हिंदुस्‍तान में रेलवे के डिब्‍बे में हो। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि रेलवे में कितने विकास की संभावना है। रेलवे को हम आधुनिक बनाना चाहते हैं। रेलवे को हम दूर-सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहते हैं। और यह रेलवे के लोगों के हम पीछे क्‍यों लगे हैं? सिर्फ भारत के लोगों को Transportation की सुविधा मिले इतना मकसद नहीं है। रेलवे वो व्‍यवस्‍था है जो Global Warming के संकट को बचाने के जो अनेक साधन है, उसमें वो भी एक साधन है। Mass Transportation से emission कम होता है। और जब emission कम होता है तो Global Warming में कमी आती है। और Global Warming में कमी आती है तो Climate Change की चिंता टलती है और Climate Change की चिंता टलती है मतलब Seychelles को जीने की गारंटी पैदा होती है।

रेलवे वहां बनेगी, रेलवे वहां बढ़ेगी, लेकिन लाभ इन छोटे-छोटे टापुओं पर बसने वाले दुनिया के इन छोटे-छोटे देशों के नागरिकों को होने वाला है। क्‍योंकि भारत इतना बड़ा देश है। हम चाहते हैं भारत की रेल तेज गति से चले। हम चाहते हैं भारत की रेल आगे विस्‍तृत हो, हम चाहते हैं भारत की रेल आधुनिक बने और इसलिए हमने 100 percent Foreign Direct Investment के लिए रास्ते खोल दिए हैं। मैंने दुनिया को कहा कि आपके पास Technology है, आईए। आपके पास धन है, आईए। आप अपने व्यापार का विस्तार करना चाहते हैं, आईए। भारत की रेल भी दुनिया के अनेक देशों की Economy को बढ़ा सके, इतनी ताकतवर है। और इसलिए मैं Make in India में इस काम को लगा रहा हूं।

सेशेल्स जैसे छोटे-छोटे देश, क्या उनकी रक्षा नहीं होनी चाहिए क्या? छोटे-छोटे देशों से piracy के कारण जो समस्या होती हैं। उनके सारे समुद्री व्यापार संकट में पड़ जाते हैं। क्या इस सामुहिक रक्षा का चिता होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? क्या भारत का दायित्व नहीं है कि Indian Ocean में सुरक्षा की गारंटी में भारत भी अपना हाथ बढ़ाए, पूरी ताकत से बढ़ाए? ताकि सेशेल्स जैसे नागरिकों को विश्व व्यापार में आगे बढ़ना है ताकि पाइरेसी जैसे संकटों से इस समुद्री तट को बचाया जा सके? अगर वो बचाना है तो भारत को Defence Sector में आगे बढ़ना पड़ेगा और बढ़ने के लिए हमने भारत में Make in India में Defence Sector में Manufacturing को बल दिया है। Indigenous व्यवस्थाएं हम विकसित करना चाहते हैं।

आज यहां मैंने एक राडार का लोकार्पण किया है। इस राडार के लोकार्पण के कारण सेशेल्स की सामुद्रिक सुरक्षा के लिए एक नई ताकत मिलती है, नई दृष्टि मिलती, नई आंख मिलती है। वो देख सकते हैं 150 किलोमीटर की रेंज में कहीं कुछ हलचल, गड़बड़ तो नहीं हो रही है। ये काम भारत कैसे कर पाया? क्योंकि भारत में indigenous manufacturing की संभावना पैदा हुई है। हम आगे चलकर के Defence के Sector में और चीजों को बढ़ाना चाहते हैं ताकि उसका लाभ मिले। लाभ किसको मिलेगा? आप जैसे हमारे मित्र देशों को मिलेगा, पड़ोसी देशों को मिलेगा, इस Indian Ocean की Security को मिलेगा। और इसलिए हमारे हर कदम, भारत की धरती पर होने वाले हर कदम वैश्विक कल्याण की हमारी जो संकल्पना है, उसके अनुरूप और अनुकूल बनाने की हमारी कोशिश है और उसका लाभ आपको मिलने वाला है।

हम Skill development पर बल दे रहे हैं। आज पूरे विश्व को, विश्व के बहुत बड़े-बड़े देश, बड़ी-बड़ी Economy वो एक संकट से जूझ रही है और जिसका उपाय उनके पैसों में संभव नहीं है। जिसका उपाय उनकी Technology से संभव नहीं है। और वो है Man power. हर किसी को Work force चाहिए। दुनिया की Fastest Economy को भी Talented Workforce की जरूरत है। आने वाले 20 साल में पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा Workforce देने की ताकत है तो हिंदुस्तान की है। क्योंकि वो देश है, उसके हाथ में हुनर हो, Skill हो, दुनिया को जिस प्रकार के मानव बल की आवश्यकता है, उस प्रकार का मानव बल तैयार हो - उस दिशा में हमारा प्रयत्न है। Skill development को हमने एक Mission रूप में लिया है। और हम Skill development के द्वारा ऐसे नौजवान तैयार करना चाहते हैं जो स्वंय अच्छे entrepreneur बन सकें। जो entrepreneur नहीं बन सकते हैं वो स्वंय Skilled manpower के रूप में Job प्राप्त कर सकें। कुछ Job seekers हैं, उनको अच्छी Job मिल सके। कुछ Job creator बन सकें। एक प्रकार से विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति में जो चीजों काम आ सकें, उन-उन चीजों को बल देकर के और भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय़ लिए हैं। राष्ट्रपतिजी Michel के साथ आज मेरी विस्तार से बातें हुई हैं। और भारत और Seychelles मिलकर के हम कितनी ताकत से आगे बढ़ सकते हैं। हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। आप सबको बहुत खुशी होगी सुनकर के। सुनाऊं? भारत सरकार ने निर्णय किया है कि Seychelles के जो नागरिक हिंदुस्तान आने चाहते हैं, उनको तीन महीने का वीजा मुफ्त में दिया जाएगा। उतना ही नहीं, अब आपको यहां जाकर के दफ्तर में कतार लगाकर के खड़े नहीं रहना पड़ेगा। Embassy के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब Visa On Arrival होगा। आप Airport पर आए ठप्पा लग गया, आ जाओ।

हम चाहते हैं भारत और सेश्लस के बीच में Tourism बढ़ना चाहिए। और यहां जो गुजराती लोग हैं, उनको तो मालूम है। गुजराती लोग तो ढूढते रहते हैं कि Sunday को कहां जाऊं? इस Weekend पर कहां जाऊं? हम चाहते हैं कि Air Frequency बढ़े, Direct flights बढ़े। हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न कोने से Seychelles को सीधे हवाई जहाज जाएं। वहां से यहां आएं। उससे Tourism को बढ़ावा मिलेगा और Tourism को बढ़ावा मिलेगा तो उसके कारण Seychelles से जो लोग हिंदुस्तान जाएंगे वो भारत को अच्छी तरह जानेंगे। और भारत से जो लोग यहाँ आएंगे वो Seychelles की Economy को ताकतवर बनाएंगे।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH

और मैं मानता हूं Tourism दुनिया में तेज गति से बढ़ रहा व्यवसाय है, तेज गति से। लेकिन Tourism मानव जाति को जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम है। विश्व को जानना-समझना, अपना बनाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। और उस अवसर को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयों-बहनों आज समय की सीमा है। कुछ ही घंटों के लिए मैं आया हूं, पहली बार आया हूं। लेकिन लगता ऐसा है कि अच्छा होता, मैं ज्यादा समय के लिए आया होता। अब आप लोगों ने इतना प्यार दिया है तो फिर तो आना ही पड़ेगा। ज्यादा समय लेकर के आना पड़ेगा, आप सबके बीच रहना होगा, इस सुंदर देश को देखना होगा। तो मैं फिर एक बार आपके प्यार के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और मेरी तरफ से समग्र देशवासियों की तरफ से आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। और स्वागत सम्मान के लिए आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

आवजो। नमस्ते।

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সাতটি নতুন প্রতিরক্ষা কোম্পানিকে জাতির উদ্দেশে সমর্পণ অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
October 15, 2021
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৭টি সংস্থা তৈরির মধ্যে দিয়ে ডঃ কালামের শক্তিশালী ভারত গঠনের স্বপ্ন আরও মজবুত হবে
এই নতুন ৭টি সংস্থা আগামী দিনে দেশের সামরিক শক্তি ক্ষেত্রে এক শক্তিশালী ভিত তৈরি করবে
৬৫ হাজার কোটি টাকারও বেশি অর্ডার বুক কর মাধ্যমে এই সংস্থাগুলির প্রতি দেশের ক্রমবর্ধমান আস্থায় প্রতিফলিত হয়েছে
প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে বিশ্বাসযোগ্যতা, আমূল পরিবর্তন এবং প্রযুক্তি নির্ভরতার ওপর আস্থা তৈরি হয়েছে
গত ৫ বছরে আমাদের প্রতিরক্ষা রপ্তানি ৩২৫ শতাংশ বৃদ্ধি পেয়েছে
প্রতিযোগিতা আমাদের শক্তি, গুণমান ও নির্ভরযোগ্যতা আমাদের পরিচয় হওয়া উচিত

নমস্কার!

দেশ রক্ষার সঙ্গে যুক্ত এই গুরুত্বপূর্ণ অনুষ্ঠানে আমার সঙ্গে যুক্ত হয়েছেন দেশের প্রতিরক্ষা মন্ত্রী শ্রদ্ধেয় রাজনাথ সিং-জি, প্রতিরক্ষা দপ্তরের প্রতিমন্ত্রী শ্রী অভয় ভট্টজি, প্রতিরক্ষা মন্ত্রকের সমস্ত আধিকারিকগণ, আর দেশের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে এই অনুষ্ঠানের সঙ্গে যুক্ত হওয়া সকল বন্ধুগণ!

আজ থেকে দু’দিন আগেই নবরাত্রির এই পবিত্র উৎসবের মাঝে, মহাষ্টমীর দিনে আমার দেশের জন্য একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ কম্প্রিহেনসিভ প্ল্যানিং বা সংহত পরিকল্পনার সম্পূর্ণ প্রকল্প ‘প্রধানমন্ত্রী গতিশক্তি’ জাতির উদ্দেশে উৎসর্গ করার সৌভাগ্য হয়েছে, আর আজ বিজয়া দশমীর এই পবিত্র উৎসবের দিন দেশকে শক্তিশালী করে গড়ে তোলার জন্য, জাতিকে অজেয় করে তোলার জন্য যাঁরা দিন-রাত এক করে তটস্থ থাকেন, সীমান্তে মোতায়েন থাকেন, তাঁদের সামর্থ্যকে আরও উন্নত করতে, তাঁদের সামরিক সরঞ্জামে আরও আধুনিকতা আনতে একটি নতুন লক্ষ্যের দিকে এগিয়ে যাওয়ার সুযোগ হয়েছে। এই সুযোগ আমাদের সামনে এসেছে; বিজয়া দশমীর পবিত্র উৎসবের দিনে যা আমাদের মন ও মস্তিষ্কে শুভ সঙ্কেত নিয়ে এসেছে। এই কর্মসূচির গোড়াতেই ভারতের মহান পরম্পরা অনুসরণ করে অস্ত্র পুজো করা হয়েছে। আমরা শক্তিকে সৃষ্টির মাধ্যম বলে মনে করি। এই ভাবনা নিয়েই আজ দেশ তার সামর্থ্য সৃষ্টি করছে, আর আপনারা সবাই আজ দেশের এই সঙ্কল্পগুলি বাস্তবায়নের রথের সারথী হয়ে উঠেছেন। আমি আপনাদের সবাইকে, আর গোটা দেশকে এই অবসরে আরেকবার বিজয়া দশমীর আন্তরিক শুভকামনা জানাই।

বন্ধুগণ,

আজকের দিনে ভারতের প্রাক্তন রাষ্ট্রপতি, ভারতরত্ন, শ্রদ্ধেয় ডঃ এ পি জে আব্দুল কালামজির জন্মজয়ন্তীও। কালাম সাহেব যেভাবে তাঁর সম্পূর্ণ জীবন শক্তিশালী ভারত গড়ে তোলার জন্য সমর্পণ করেছিলেন, তা আমাদের সবাইকে প্রতিনিয়ত প্রেরণা যোগায়। প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে আজ যে নতুন সাতটি কোম্পানি তাদের যাত্রা শুরু করছে, তারা আমাদের শক্তিশালী রাষ্ট্রের সেই সঙ্কল্পগুলিকে বাস্তবায়নের অভিযানকে আরও শক্তি যোগাবে, আরও মজবুত করবে।

বন্ধুগণ,

এ বছর ভারত তার স্বাধীনতার ৭৫তম বর্ষে পা রেখেছে। স্বাধীনতার এই অমৃতকালে দেশ একটি নতুন ভবিষ্যৎ নির্মাণের জন্য নতুন নতুন সঙ্কল্প গ্রহণ করছে, আর যে কাজগুলি অনেক দশক ধরে অসম্পূর্ণ ছিল বা ঝুলে ছিল, সেগুলির কাজও সম্পূর্ণ করছে। ৪১টি অর্ডিন্যান্স ফ্যাক্টরিকে নতুন স্বরূপে আধুনিকীকরণের সিদ্ধান্ত, পাশাপাশি, সাতটি নতুন কোম্পানির এই শুভ সূচনা দেশের এই সঙ্কল্প বাস্তবায়ন যাত্রাপথের অংশ। এই সিদ্ধান্ত বিগত ১৫-২০ বছর ধরে ঝুলে ছিল। আমার দৃঢ় বিশ্বাস যে, এই সাতটি কোম্পানি আগামীদিনে ভারতের সৈন্যশক্তির এক একটি বড় ভিত্তি হয়ে উঠবে।

বন্ধুগণ,

আমাদের দেশের অর্ডিন্যান্স ফ্যাক্টরিগুলিকে এক সময়ে বিশ্বের অন্যতম শক্তিশালী কোম্পানিগুলির মধ্যে ধরা হত। এই ফ্যাক্টরিগুলির গৌরবোজ্জ্বল ইতিহাসে ১০০-১৫০ বছরেরও বেশি অভিজ্ঞতা রয়েছে। দু-দুটি বিশ্বযুদ্ধের সময় ভারতের অর্ডিন্যান্স ফ্যাক্টরিগুলির উৎপাদন ক্ষমতা ও উৎপাদিত অস্ত্রের উৎকর্ষ সারা পৃথিবী দেখেছে। আমাদের দেশেও উন্নত সম্পদ তৈরি হত। বিশ্বমানের দক্ষতা ছিল। স্বাধীনতার পর সেই ফ্যাক্টরিগুলিকে আধুনিকীকরণের প্রয়োজন ছিল। নতুন নতুন প্রযুক্তি প্রয়োগ করার প্রয়োজন ছিল। কিন্তু দুর্ভাগ্যবশত, সেদিকে কোনও লক্ষ্য দেওয়া হয়নি। ফলস্বরূপ, সময়ের চাহিদা অনুসারে ভারত ক্রমে তার সামরিক প্রয়োজন মেটাতে বিদেশি অস্ত্রশস্ত্র ও সমর সরঞ্জামের ওপর নির্ভরশীল হয়ে পড়ে। এই পরিস্থিতির পরিবর্তন আনতে আজ শুরু হওয়া এই সাতটি নতুন প্রতিরক্ষা কোম্পানি অনেক বড় ভূমিকা পালন করবে।

বন্ধুগণ,

আত্মনির্ভর ভারত অভিযানের মাধ্যমে ভারতের লক্ষ্য দেশকে নিজের ক্ষমতায় বিশ্বের অন্যতম বড় সৈন্যশক্তি হিসেবে প্রতিষ্ঠা করতে, দেশে এই আধুনিক সৈন্য সরঞ্জাম ও সমরাস্ত্র শিল্পোদ্যোগের বিকাশ হচ্ছে সময়ের চাহিদা মেনে। বিগত সাত বছরে দেশ ‘মেক ইন ইন্ডিয়া’র মন্ত্র নিয়ে তার এই সঙ্কল্পগুলি বাস্তবায়নের লক্ষ্যে কাজ করে চলেছে। আজ দেশের প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে যতটা ট্রান্সপারেন্সি বা স্বচ্ছতা রয়েছে, যতটা ট্রাস্ট বা আস্থার সৃষ্টি হয়েছে আর টেকনলজি-ড্রিভেন অ্যাপ্রোচ বা প্রযুক্তি-চালিত দৃষ্টিকোণ তৈরি হয়েছে - তা আগে কখনও ছিল না। স্বাধীনতার পর প্রথমবার আমাদের প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে এত বড় সংস্কারসাধনের কাজ হচ্ছে। কোনও প্রকল্প থামিয়ে রাখা বা ঝুলিয়ে রাখার নীতির জায়গায় ‘সিঙ্গল উইন্ডো সিস্টেম’ বা ‘এক জানালা’ ব্যবস্থা চালু করা হয়েছে। এর ফলে, আমাদের শিল্পোদ্যোগগুলির প্রত্যয় অনেক বাড়ছে। আমাদের দেশের নিজস্ব কোম্পানিগুলি প্রতিরক্ষা সরঞ্জাম ও সমরাস্ত্র উৎপাদন শিল্পোদ্যোগের ক্ষেত্রে নিজেদের সম্ভাবনার অন্বেষণ শুরু করেছে, আর এখন বেসরকারি ক্ষেত্র ও সরকার - উভয় মিলে দেশ রক্ষার মিশন বা লক্ষ্যে এগিয়ে চলার অভিযান শুরু করেছে।

উত্তরপ্রদেশ এবং তামিলনাড়ু ডিফেন্স করিডর দুটির উদাহরণ আমাদের সামনে রয়েছে। এত কম সময়ে বড় বড় কোম্পানিগুলি এই ‘মেক ইন ইন্ডিয়া’ মন্ত্রের প্রতি তাদের উৎসাহ দেখিয়েছে। এর ফলে দেশের নবীন প্রজন্মের জন্য নতুন নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি হচ্ছে আর সরবরাহ শৃঙ্খল রূপে অনেক অতিক্ষুদ্র, ক্ষুদ্র ও মাঝারি শিল্পোদ্যোগের জন্যও নতুন নতুন সম্ভাবনা তৈরি হচ্ছে। দেশের সরকার যে নীতিগত পরিবর্তনগুলি এনেছে এর পরিণামস্বরূপ বিগত পাঁচ বছরে আমাদের প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে রপ্তানি ৩২৫ শতাংশেরও অধিক বৃদ্ধি পেয়েছে।

বন্ধুগণ,

কিছুদিন আগেই আমাদের প্রতিরক্ষা মন্ত্রক এমন ১০০টিরও বেশি সামরিক সরঞ্জামের তালিকা ঘোষণা করেছিল যেগুলি এখন আর বিদেশ থেকে আমদানি করা হবে না। এই নতুন কোম্পানিগুলিকে দেশ শুরুতেই ৬৫ হাজার কোটি টাকার সমরাস্ত্র ও যুদ্ধ সরঞ্জামের বরাত দিয়েছে। এটাই আমাদের সরকারের দেশীয় প্রতিরক্ষা শিল্পোদ্যোগের প্রতি বিশ্বাসের উদাহরণ। এতে তাঁদের প্রতি আমাদের ক্রমবর্ধমান আস্থা পরিলক্ষিত হচ্ছে। একটি কোম্পানি অস্ত্রশস্ত্র এবং বিস্ফোরক উৎপাদনের প্রয়োজন মেটাবে, আরেকটি কোম্পানি সেনাবাহিনীর জন্য প্রয়োজনীয় যানবাহন উৎপাদন করবে। এভাবে বিভিন্ন অত্যাধুনিক সমরাস্ত্র এবং সাজসরঞ্জাম, ট্রুপস কমফর্ট আইটেমস বা প্রতিকূল পরিবেশে দীর্ঘকালীন যুদ্ধ চালিয়ে যাওয়ার সামর্থ্য অর্জন করতে সেনাবাহিনীর জন্য প্রয়োজনীয় অত্যাধুনিক পোশাক-আশাক, খাদ্য ও আনুষঙ্গিক সমস্ত কিছু উৎপাদন, অপটিক্যাল ইলেক্ট্রনিক্স উৎপাদন কিংবা প্যারাস্যুট উৎপাদন ইত্যাদি বিভিন্ন ক্ষেত্রে ভারতের এই এক একটি কোম্পানি আরও বিশেষজ্ঞতা অর্জন করুক, আর তারা এক একটি গ্লোবাল ব্র্যান্ড হিসেবে আন্তর্জাতিক ক্ষেত্রে সুনাম অর্জন করুক। কম্পিটিটিভ কস্ট বা প্রতিযোগিতামূলক ব্যয়ে উৎকৃষ্ট ও সুলভ সরঞ্জাম উৎপাদন হোক আমাদের মূল শক্তি। উৎকর্ষ এবং নির্ভরযোগ্যতা আমাদের পরিচয় হয়ে ওঠা উচিৎ।

বন্ধুগণ,

আমার দৃঢ় বিশ্বাস, এই নতুন ব্যবস্থার মাধ্যমে আমাদের দেশে অর্ডিন্যান্স ফ্যাক্টরিগুলির যে মেধা ও অভিজ্ঞতা রয়েছে, যাঁরা নতুন কিছু করতে চান, তাঁরা নিজেদের প্রতিভা দেখানোর সম্পূর্ণ স্বাধীনতা পাবেন। এ ধরনের বিশেষজ্ঞরা সময়ের চাহিদা অনুযায়ী যদি নতুন নতুন উদ্ভাবনের সুযোগ পান, নতুন কিছু করে দেখানোর সুযোগ পান, তখন তাঁরা অসাধারণ কিছু করে দেখান। আপনারা নিজেদের অভিজ্ঞতা ও বিশেষজ্ঞতার মাধ্যমে যে পণ্য তৈরি করে দেখাবেন তা ভারতের প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রের ক্ষমতা তো বাড়াবেই, স্বাধীনতার পর থেকে এত বছরে যে একটি বিরাট শূণ্যতার সৃষ্টি হয়েছিল, সেটিও দূর করবে।

বন্ধুগণ,

একবিংশ শতাব্দীতে কোনও দেশ কিংবা কোনও কোম্পানি তার গ্রোথ বা অগ্রগতি এবং ব্র্যান্ড ভ্যালু তার গবেষণা ও উৎপাদনের মাধ্যমেই হাসিল করে। সফটওয়্যার থেকে শুরু করে মহাকাশ ক্ষেত্র পর্যন্ত ভারতের অগ্রগতি, ভারতের নতুন পরিচয় গড়ে ওঠা এর সবচাইতে বড় উদাহরণ। সেজন্য আজ যাত্রা শুরু করা এই সাতটি কোম্পানির প্রতি আমার বিশেষ অনুরোধ যে আপনারা অবশ্যই গবেষণা ও উদ্ভাবনকে নিজেদের কর্মসংস্কৃতির অঙ্গ করে তুলুন। এগুলিকেই অগ্রাধিকার দিন। তাহলেই দেখবেন আপনারা শুধু বিশ্বের বড় বড় কোম্পানিগুলির সমতুল হয়ে উঠবেন না, ভবিষ্যৎ প্রযুক্তির ক্ষেত্রেও নেতৃত্ব দিতে পারবেন। সেজন্য আপনাদের নতুনভাবে ভাবার প্রয়োজন রয়েছে, নতুন চিন্তাভাবনাকে গুরুত্ব দেওয়ার প্রয়োজন রয়েছে। গবেষণায় আগ্রহী নবীন প্রজন্মকে বেশি করে সুযোগ দেওয়ার প্রয়োজন রয়েছে। তাদের স্বাধীনভাবে ভাবনা-চিন্তার ক্ষেত্রে সম্পূর্ণ স্বাধীনতা দেওয়ার প্রয়োজন রয়েছে। আমি দেশের স্টার্ট-আপগুলিকে বলব, আপনারা এই সাতটি কোম্পানির মাধ্যমে দেশ যে নতুন যাত্রা আজ শুরু করেছে তার অংশ হয়ে উঠুন। আপনাদের গবেষণা, আপনাদের উৎপাদিত পণ্যগুলি কিভাবে এই কোম্পানিগুলির সঙ্গে পরস্পরের ক্ষমতা থেকে উপকৃত হতে পারে - তা নিয়ে আরও ভাবনা-চিন্তা করুন।

বন্ধুগণ,

সরকার সমস্ত কোম্পানিগুলিকে একটি উন্নত প্রোডাকশন এনভায়রনমেন্ট বা উৎপাদনের আবহ প্রদানের পাশাপাশি সম্পূর্ণ ফাংশনাল অটোনমি বা সম্পাদনের ক্ষেত্রে পূর্ণ স্বাধীনতা প্রদান করছে। পাশাপাশি, এটাও সুনিশ্চিত করছে যে এই ফ্যাক্টরিগুলির কর্মচারীদের হিত যেন সম্পূর্ণরূপে সুরক্ষিত থাকে। আমার দৃঢ় বিশ্বাস, দেশ আপনাদের বিশেষজ্ঞতা ও নতুন ভাবনা-চিন্তার মাধ্যমে অনেক উপকৃত হবে, আর আমরা সবাই মিলে আমাদের আত্মনির্ভর ভারতের সঙ্কল্পকে বাস্তবায়িত করতে পারব।

এই ভাবনা নিয়ে আরেকবার আপনাদের সবাইকে শুভ বিজয়া দশমীর অনেক অনেক শুভকামনা জানাই। আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক ধন্যবাদ!