Text of PM’s address at the Civic Reception in Seychelles

Published By : Admin | March 11, 2015 | 16:15 IST

सभी विशिष्‍ट महानुभाव और विशालसंख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाईयों और बहनों,

Seychelles की मेरी पहली मुलाकात है, लेकिन लग रहा है आप लोगों से बहुत पहले से जुड़ा हुआ हूं।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (1)

कल मैं रात देर से आया उसके बावजूद भी पूरे रास्‍ते भर मैं Seychelles के लोगों के प्‍यार को अनुभव कर रहा था। जिस प्रकार का स्‍वागत सम्‍मान किया, इसके लिए मैं यहां की सरकार का, यहां के नागरिकों का और आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

Seychelles और भारत - विज्ञान यह कहता है कि हजारों साल पहले हम एक ही धरती थे, लेकिन जब प्रलय होता है तो सब बिखर जाता है। यह धरती और भारत की धरती, इसके बीच हजारों साल पहले हजारों मील का फासला हो गया। प्रकृति ने धरती को अलग किया, लेकिन हमारे दिलों को जुदा नहीं किया।

और कभी-कभी लगता है कि भारत और हमारे Seychelles के बीच में एक बहुत बड़ा समंदर है। लेकिन यह समंदर हमें बिछड़ने के लिए नहीं है, यह समंदर है जो हमें जोड़ता है। समंदर के तट पर खड़े होकर के हम ऊंगली करके कह सकते हैं उधर मेरा मुंबई है, उधर मेरा चेन्‍नई है, उधर मेरा कोच्चि है। यह नजदीकी, ये अपनापन.. और इस अर्थ में, समझता हूं कि हम लोगों का एक विशेष नाता है।

आज भारत इस बात का गर्व करता है कि आप भारतवासी जहां भी गए, जिस अवस्‍था में गए, जिस कठिनाइयों के बीच जिंदगी को जीये, शताब्‍दीभर - कुछ कम समय नहीं होता है - कहते हैं शुरू में 1717 में कुछ लोग यहां आए थे, और तब से सिलसिला चला। सौ सवा सौ वर्ष, बहुत बड़ी मात्रा में आना जाना हुआ। लेकिन इस पूरे कालखंड में आपके व्‍यवहार से आपकी वाणी से यहां के लोगों ने आपको अपना बना लिया और आपने इस देश को अपना बना लिया है। यही तो हमारी मूल सांस्‍कृति धरोहर है - वसुदेव कुटुम्‍बकम - पूरा विश्‍व एक परिवार है। और जो इन संस्‍कारों से पले-बढ़े हैं, जिनके लिए पृथ्‍वी यह माता है, उनके लिए अपनेपन के लिए भौगोलिक सीमाएं नहीं होती है।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH (4)

देश की सीमाएं उनकी भावनाओं को बांटकर के नहीं रखती है। भावनाएं आपार सागर की तरह फैली होती है, और आपके व्‍यवहार से वो देश गर्व अनुभव करता है कि आपने सारी दुनिया में... आज भी कहीं पर भी जाओ दुनिया में कांतिलाल जीवन शाह का नाम दोगे। अब तो हमारे बीच रहे नहीं, लेकिन उन्होंने काम के द्वारा दुनिया में Seychelles का भी नाम रोशन किया, एक मूल भारतीय के नाते भी नाम रोशन किया। विश्व ने उनको सम्मानित किया। अनेक Award मिले उनको। और वो सिर्फ आर्थिक कारोबार के कारण नहीं है। उन्होंने ज्यादातर चिंता की थी प्रकृति की रक्षा के लिए। आज जिस Climate change को लेकर के दुनिया चिंतित है, कांतिलाल शाह अपनी जवानी के समय से उन मुद्दों को लेकर के Seychelles के अंदर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे थे, लोगों को जगा रहे थे। सामूहिक की संपदा के लिए लोगों को जगा रहे थे, संवेदनाएं पैदा कर रहे थे। एक भारतीय के नाते इस प्रकार का उनका जीवन, इस प्रकार का उनका काम, हर हिंदुस्तानी को गर्व देता है, अभिमान देता है। और ऐसे तो यहां अनगिनत लोग हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि, शक्ति, क्षमता, कल्पना शक्ति, समार्थ्य, धन - इन सबके द्वारा Seychelles के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इतनी बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय यहां रहता है। और हम गुजरात के लोग तो एक पुरानी घटना से बड़े परिचित हैं कि जब ईरान से पारसी आए और राजा ने भरा हुआ दूध का कटोरा भेजा और पारसी समुदाय ने उसमें चीनी मिलाई और वापिस भेजा। कटोरा भरा हुआ था लेकिन जब चीनी मिलाकर के भेजा तो दूध बाहर नहीं गया अंदर ही रहा। पूरा भरा रहा लेकिन दूध मीठा हो गया। और तब ये symbolic संदेश था कि पारसी ने संदेश दिया कि भले ही हम ईरान से आए हैं लेकिन हम हिंदुस्तान की धरती पर ऐसे घुल-मिल जाएंगे जिसके कारण आपकी sweetness में बढ़ोतरी होगी। मैं समझता हूं उसी परंपरा... भारतीय समुदाय के लोग यहां आ के Seychelles में उसी तरह घुल-मिल गए हैं कि जिसने Seychelles की sweetness को बढ़ाया है उसकी रोशनी को उजागर किया है, उसको सामर्थ्य दिया है। और इस प्रकार से अपने व्यवहार से, अपने आचरण से, जब कोई मेरा भारतीय भाई दुनिया के किसी भी कोने में जाकर के उस समाज की भलाई के लिए जीता है, उस समाज की भलाई के लिए काम करता है, उस धरती के लिए अपना जीवन लगा देता है, तब भारत के नाते हम लोगों को बड़ा गर्व होता है। मैं आज आपके बीच मेरे गर्व की अभिव्‍यक्ति आपके सामने कर रहा हूं। आनंद की अभिव्यक्ति कर रहा हूं, आपका अभिनंदन कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आने वाली हमारी पीढि़या भी इन संस्‍कारों को इन परंपराओं को बनाए रखेगी, और विश्‍व में भारत का गौरव भारत की पहचान बनाने में हमारी अहम भूमिका रहेगी।

भाईयों-बहनों, कुछ महीने पहले भारत में चुनाव हुए और बहुत वर्षों के बाद, करीब-करीब 30 वर्ष के बाद भारत में पूर्ण बहुमत से चुनकर के लोगों ने एक सरकार बनाई। और मुझे बताया गया कि भारत में जब चुनावी नतीजे आ रहे थे, result आ रहे थे, तब आप भी यहां उत्‍सव मना रहे थे। यह उत्‍सव इस बात से भी जुड़ा हुआ था कि आप भी - Seychelles की प्रगति तो चाहते ही चाहते हैं, उसके लिए प्रयास भी करते हैं - लेकिन आपके दिल में यह भी है कि भारत भी प्रगति करे, भारत भी नई ऊंचाईयों को पाएं।

और हम तो वो लोग हैं जो वसुदेव कुटुम्‍ब कहते हैं तो हमारी तो कल्‍पना है पूरा विश्‍व आगे बढ़े, पूरा विश्‍व शांति से जीए, पूरा विश्‍व प्रगति करे। यही तो हमारे सपने हैं, यही तो हमारे संस्‍कार हैं, यही हमारा संकल्‍प है कि हम जय जगत वाले लोग हैं, विश्‍व कल्‍याण वाले लोग हैं। और उस काम को करने के लिए भारत को भी अपनी जिम्‍मेवारी निभाने के लिए सक्षम होना पड़ेगा। अगर भारत गरीब रहा, भारत पिछड़ा रहा, भारत दुर्लभ रहा तो दुनिया की आशा-आकांक्षा वो पूरी करने में भारत कोई भूमिका नहीं निभा सकता। तो विश्‍व कल्‍याण की भी अगर भूमिका निभानी है तो भारत का मजबूत होना जरूरी है, भारत का सामर्थ्‍यवान होना जरूरी है, भारत का सुख-शांति से हरा-भरा देश बनना जरूरी है। और इसलिए पिछले नौ-दस महीने में कोशिश की गई है कि देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे। भारत का सर्वांगीण विकास हो और भारत विश्‍व से ज्‍यादा से ज्‍यादा जुड़े।

आज दुनिया के छोटे-छोटे देश जो टापुओं पर बसे हैं, आईलैंड्स पर बसे हैं, उन सबकी एक सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया को कौन nuclear बम बनाता है कौन नहीं बनाता है - यह आईलैंड में रहने वाले लोगों की चिंता का विषय नहीं है, लेकिन उनकी चिंता का विषय है कि “यह Global Warming होता रहेगा तो हम रहेंगे कि नहीं रहेंगे? कहीं यह हमारा टापू पानी के अंदर चला तो नहीं जाएगा? सदियों से जिसको संजोया है, दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी जिसमें खप गई है, कहीं यह तो डूब नहीं जाएगा?”

और दुनिया को बचाने का काम सिर्फ आईलैंड पर बैठे हुए लोग अपनी रक्षा के लिए कुछ करें और इसलिए सब हो जाएगा, ऐसा नहीं है। पूरे विश्‍व ने मिलजुल करके climate change की उतनी ही चिंता करनी पड़ेगी, जितनी आज विश्व Terrorism की चर्चा करता है। जितना संकट आतंकवाद से नजर आता है गहरा लगता है उतना ही, इन छोटे-छोटने Island पर रहने वाले लोगों के लिए, Climate change के कारण संकट महसूस होता है।

भारत ने... सदियों से हमारे तो संस्कार रहे हैं, हमें तो वो संस्कार मिले हैं कि बालक सुबह बिस्‍तर से उठकर के पैर जमीन पर रखता है तो उसे सिखाया जाता है कि तुम ये पैर पृथ्वी माता के ऊपर रख रहे हो। पहले पृथ्वी माता की माफी मांगो। यानि हमें इस मां को पीड़ा देने का कोई हक नहीं है, ये हमारी संस्कृति और संस्कार में है। प्रकृति से प्यार करो, प्रकृति से संवाद करो, प्रकृति से सीखो - यही तो हमें सिखाया गया है। पूरे ब्रहमांड को एक परिवार के रूप में माना गया है, और इसलिए विश्व को इस संकट से बचाने का काम भी - हम जिस परंपरा से बने-पले हैं, जिस संस्कारों से हम आगे बढ़े हैं, जिस संस्कृति को हमने विरासत में पाया है - अगर हम उसे जीना सीख लें, लोगों को जीने का रास्ता दिखा दें और जगत उसे जीने की आदत बना ले, तो हो सकता है इतने बड़े संकट से बाहर निकलने के लिए पूरी मानव जात सरलता से एक रास्ते पर चल सकती है और आगे बढ़ सकती है

। हम वो लोग हैं जो नदी को मां मानते हैं, वो लोग हैं जो पौधे में परमात्मा देखते हैं। यही तो बातें हैं, जो Climate की रक्षा के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन इन परंपराओं के साथ-साथ, आधुनिक चीजों पर भी बल देना पड़ता है। हमें विकास की उस राह को अपनाना होगा जो सदियों के बाद भी मानव जात के कल्याण में रुकावट पैदा न कर सके। हम सबको परमात्मा ने हमारे लिए जो दिया है, उसका तो उपभोग करने का अधिकार है। लेकिन हम लोगों को हमारी संतानों के लिए जो दिया गया है, उसका उपभोग करने का अधिकार नहीं है। ऐसा कोई मां-बाप होते हैं क्या? दुनिया में ऐसे कोई मां-बाप होते हैं क्या जो अपने बच्चों का भी खा जाएं? कोई मां-बाप ऐसा नहीं होते। और इसलिए आज से 100 साल बाद आपके बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे, बच्चों के बच्चे होंगे। उनको पानी मिलेगा क्या नहीं मिलेगा? उनको शुद्ध हवा मिलेगी कि नहीं मिलेगी? उनको रहने के लिए अच्छी पृथ्वी मिलेगी कि नहीं मिलेगी? हमें उनको वो विरासत में देकर के जाना है तो हमें आज अपनी जिंदगी को बदलना पड़ेगा। और इसलिए उस दिशा में हम काम करें।

भारत ने एक बहुत बड़ा बीड़ी उठाया है। और वो बीड़ी है Solar energy और Wind energy का। हम चाहते हैं कि दुनिया को इस संकट से बचाने के लिए भारत की जो भूमिका है, उस भूमिका को अदा करना चाहिए और उस भूमिका को अदा करने के लिए 100 Giga Watt Solar energy का संकल्प हमने लिया है 2022 में - जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे। जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मनाएगा, हम दुनिया को एक सौगात देना चाहते हैं ताकि विश्व को Global Warming में से बचाने में भारत भी अपनी अहम भूमिका निभाए। हम 60 Gigawatt Wind energy की ओर जा रहे हैं। ये Target बहुत बड़े हैं, छोटे नहीं हैं। लेकिन इन संकल्पों को हम इसलिए लेकर के चले हैं क्‍योंकि हमारी प्रेरणा... हमारी प्रेरणा सिर्फ हिंदुस्‍तान के किसी घर में दीया जले, वो नहीं है। हमारी प्रेरणा इन छोटे-छोटे टापुओं पर जो लोग जीते हैं, रह रहे हैं, छोटे-छोटे देशों के रूप में उनके जीवन की रक्षा करना यह हमारी प्रेरणा है, यह हमारा संकल्‍प है। और इसलिए सोलर पावर होगा तो हिंदुस्‍तान में लेकिन सीधा-सीधा फायदा मिलेगा Seychelles की भावी पीढ़ी को, यह सपने लेकर के हम काम कर रहे हैं।

आज भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की 35 age group से नीचे है। जिस देश में करोड़ों लोग नौजवान हो, वो दुनिया का भी भाग्‍य बदल सकते हैं अगर उन्‍हें अवसर मिल जाए। इस नई सरकार की कोशिश यह है कि हम नौजवानों को अधिकतम अवसर कैसे दें, ज्‍यादा से ज्‍यादा अवसर उनकों विकास के लिए कैसे मिले। उस दिशा में हमारा प्रयास है। और इसलिए Make In India यह हमने अभियान चलाया है। मैं दुनिया को निमंत्रण दे रहा हूं आइए, आप जो कुछ भी बना रहे हैं, मेरे देश में आकर के बनाइये।

और मैं विश्‍वास दिलाता हूं आप जो बनाते हैं उससे कम खर्चे में बनेगा, जल्‍दी बनेगा, अच्‍छा बनेगा। आज आपकी product पांच देशों में जाती हैं, हिंदुस्‍तान में बनाइये, 50 देशों में पहुंचना शुरू हो जाएगी। आज आपकी Balance Sheet में पाँच, दस, जीरो होंगे। देखते ही देखते आपकी Balance Sheet में और पाँच, दस जीरों जुड़ जाएंगे, यह ताकत है। और मैं देख रहा हूं कि दुनिया में आकर्षण पैदा हुआ है।

भारत की रेलवे की बड़ी चर्चा है। इतनी बड़ी विशाल रेल। यानी हिंदुस्‍तान में अगर 24 घंटे में हिंदुस्तान में रेलवे में कितने Passenger Travel करते हैं, इसका अगर मैं हिसाब लगाऊं, तो शायद hundred Seychelles, at a time, हिंदुस्‍तान में रेलवे के डिब्‍बे में हो। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि रेलवे में कितने विकास की संभावना है। रेलवे को हम आधुनिक बनाना चाहते हैं। रेलवे को हम दूर-सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाना चाहते हैं। और यह रेलवे के लोगों के हम पीछे क्‍यों लगे हैं? सिर्फ भारत के लोगों को Transportation की सुविधा मिले इतना मकसद नहीं है। रेलवे वो व्‍यवस्‍था है जो Global Warming के संकट को बचाने के जो अनेक साधन है, उसमें वो भी एक साधन है। Mass Transportation से emission कम होता है। और जब emission कम होता है तो Global Warming में कमी आती है। और Global Warming में कमी आती है तो Climate Change की चिंता टलती है और Climate Change की चिंता टलती है मतलब Seychelles को जीने की गारंटी पैदा होती है।

रेलवे वहां बनेगी, रेलवे वहां बढ़ेगी, लेकिन लाभ इन छोटे-छोटे टापुओं पर बसने वाले दुनिया के इन छोटे-छोटे देशों के नागरिकों को होने वाला है। क्‍योंकि भारत इतना बड़ा देश है। हम चाहते हैं भारत की रेल तेज गति से चले। हम चाहते हैं भारत की रेल आगे विस्‍तृत हो, हम चाहते हैं भारत की रेल आधुनिक बने और इसलिए हमने 100 percent Foreign Direct Investment के लिए रास्ते खोल दिए हैं। मैंने दुनिया को कहा कि आपके पास Technology है, आईए। आपके पास धन है, आईए। आप अपने व्यापार का विस्तार करना चाहते हैं, आईए। भारत की रेल भी दुनिया के अनेक देशों की Economy को बढ़ा सके, इतनी ताकतवर है। और इसलिए मैं Make in India में इस काम को लगा रहा हूं।

सेशेल्स जैसे छोटे-छोटे देश, क्या उनकी रक्षा नहीं होनी चाहिए क्या? छोटे-छोटे देशों से piracy के कारण जो समस्या होती हैं। उनके सारे समुद्री व्यापार संकट में पड़ जाते हैं। क्या इस सामुहिक रक्षा का चिता होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? क्या भारत का दायित्व नहीं है कि Indian Ocean में सुरक्षा की गारंटी में भारत भी अपना हाथ बढ़ाए, पूरी ताकत से बढ़ाए? ताकि सेशेल्स जैसे नागरिकों को विश्व व्यापार में आगे बढ़ना है ताकि पाइरेसी जैसे संकटों से इस समुद्री तट को बचाया जा सके? अगर वो बचाना है तो भारत को Defence Sector में आगे बढ़ना पड़ेगा और बढ़ने के लिए हमने भारत में Make in India में Defence Sector में Manufacturing को बल दिया है। Indigenous व्यवस्थाएं हम विकसित करना चाहते हैं।

आज यहां मैंने एक राडार का लोकार्पण किया है। इस राडार के लोकार्पण के कारण सेशेल्स की सामुद्रिक सुरक्षा के लिए एक नई ताकत मिलती है, नई दृष्टि मिलती, नई आंख मिलती है। वो देख सकते हैं 150 किलोमीटर की रेंज में कहीं कुछ हलचल, गड़बड़ तो नहीं हो रही है। ये काम भारत कैसे कर पाया? क्योंकि भारत में indigenous manufacturing की संभावना पैदा हुई है। हम आगे चलकर के Defence के Sector में और चीजों को बढ़ाना चाहते हैं ताकि उसका लाभ मिले। लाभ किसको मिलेगा? आप जैसे हमारे मित्र देशों को मिलेगा, पड़ोसी देशों को मिलेगा, इस Indian Ocean की Security को मिलेगा। और इसलिए हमारे हर कदम, भारत की धरती पर होने वाले हर कदम वैश्विक कल्याण की हमारी जो संकल्पना है, उसके अनुरूप और अनुकूल बनाने की हमारी कोशिश है और उसका लाभ आपको मिलने वाला है।

हम Skill development पर बल दे रहे हैं। आज पूरे विश्व को, विश्व के बहुत बड़े-बड़े देश, बड़ी-बड़ी Economy वो एक संकट से जूझ रही है और जिसका उपाय उनके पैसों में संभव नहीं है। जिसका उपाय उनकी Technology से संभव नहीं है। और वो है Man power. हर किसी को Work force चाहिए। दुनिया की Fastest Economy को भी Talented Workforce की जरूरत है। आने वाले 20 साल में पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा Workforce देने की ताकत है तो हिंदुस्तान की है। क्योंकि वो देश है, उसके हाथ में हुनर हो, Skill हो, दुनिया को जिस प्रकार के मानव बल की आवश्यकता है, उस प्रकार का मानव बल तैयार हो - उस दिशा में हमारा प्रयत्न है। Skill development को हमने एक Mission रूप में लिया है। और हम Skill development के द्वारा ऐसे नौजवान तैयार करना चाहते हैं जो स्वंय अच्छे entrepreneur बन सकें। जो entrepreneur नहीं बन सकते हैं वो स्वंय Skilled manpower के रूप में Job प्राप्त कर सकें। कुछ Job seekers हैं, उनको अच्छी Job मिल सके। कुछ Job creator बन सकें। एक प्रकार से विश्व की आवश्यकताओं की पूर्ति में जो चीजों काम आ सकें, उन-उन चीजों को बल देकर के और भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय़ लिए हैं। राष्ट्रपतिजी Michel के साथ आज मेरी विस्तार से बातें हुई हैं। और भारत और Seychelles मिलकर के हम कितनी ताकत से आगे बढ़ सकते हैं। हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। आप सबको बहुत खुशी होगी सुनकर के। सुनाऊं? भारत सरकार ने निर्णय किया है कि Seychelles के जो नागरिक हिंदुस्तान आने चाहते हैं, उनको तीन महीने का वीजा मुफ्त में दिया जाएगा। उतना ही नहीं, अब आपको यहां जाकर के दफ्तर में कतार लगाकर के खड़े नहीं रहना पड़ेगा। Embassy के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब Visa On Arrival होगा। आप Airport पर आए ठप्पा लग गया, आ जाओ।

हम चाहते हैं भारत और सेश्लस के बीच में Tourism बढ़ना चाहिए। और यहां जो गुजराती लोग हैं, उनको तो मालूम है। गुजराती लोग तो ढूढते रहते हैं कि Sunday को कहां जाऊं? इस Weekend पर कहां जाऊं? हम चाहते हैं कि Air Frequency बढ़े, Direct flights बढ़े। हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न कोने से Seychelles को सीधे हवाई जहाज जाएं। वहां से यहां आएं। उससे Tourism को बढ़ावा मिलेगा और Tourism को बढ़ावा मिलेगा तो उसके कारण Seychelles से जो लोग हिंदुस्तान जाएंगे वो भारत को अच्छी तरह जानेंगे। और भारत से जो लोग यहाँ आएंगे वो Seychelles की Economy को ताकतवर बनाएंगे।

8 PM Modi in Seychelles At Civic Reception SPEECH

और मैं मानता हूं Tourism दुनिया में तेज गति से बढ़ रहा व्यवसाय है, तेज गति से। लेकिन Tourism मानव जाति को जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्यम है। विश्व को जानना-समझना, अपना बनाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। और उस अवसर को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयों-बहनों आज समय की सीमा है। कुछ ही घंटों के लिए मैं आया हूं, पहली बार आया हूं। लेकिन लगता ऐसा है कि अच्छा होता, मैं ज्यादा समय के लिए आया होता। अब आप लोगों ने इतना प्यार दिया है तो फिर तो आना ही पड़ेगा। ज्यादा समय लेकर के आना पड़ेगा, आप सबके बीच रहना होगा, इस सुंदर देश को देखना होगा। तो मैं फिर एक बार आपके प्यार के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और मेरी तरफ से समग्र देशवासियों की तरफ से आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। और स्वागत सम्मान के लिए आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

आवजो। नमस्ते।

Explore More
ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ମନ୍ଦିର ଧ୍ଵଜାରୋହଣ ସମାରୋହରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ମନ୍ଦିର ଧ୍ଵଜାରୋହଣ ସମାରୋହରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ
India’s rousing $14.8 billion coaching industry story gets 'vidyapeeth' partner

Media Coverage

India’s rousing $14.8 billion coaching industry story gets 'vidyapeeth' partner
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ଲାଲକିଲ୍ଲାର ପ୍ରାଚୀରରୁ ୮୦ତମ ସ୍ୱାଧୀନତା ଦିବସ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ
August 15, 2026
Today is a day to move forward with our dreams, resolve and strength: PM
Today, with firm resolve, India has envisioned a very big dream; That dream is that when we mark 100 years of independence, by 2047, we will have built a Viksit Bharat: PM
We must believe in ourselves and take pride in building an Aatmanirbhar Bharat: PM
Sectors that were once seen as 'No-Go Areas' are now 'Go-Ahead Areas’: PM
Every Indian is embracing the spirit of Make in India and Vocal for Local: PM
India has a stable political mandate, a stable government, a vibrant democracy, a strong judicial system and a Constitution that guides us all: PM
We need to focus on three things; Cost, quality and scale: PM
Our factories must be competitive, our products user-friendly and our packaging must be the best: PM
Places once affected by Naxal violence are witnessing peace, development and new hope: PM
In the coming years, these Saptadharas will drive India forward and take the nation to new heights: PM

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆଜି ଆମେ ସମସ୍ତେ ଅଶୀତମ ସ୍ୱାଧୀନତା ଦିବସ ପାଳନ କରୁଛୁ। ଆଜି ପ୍ରତ୍ୟେକଟି ହୃଦୟର ସ୍ପନ୍ଦନ ବନ୍ଦେ ମାତରମ ନାଦରେ ପ୍ରତିଧ୍ୱନିତ ହେଉଛି। ଆଜି ଦେଶର ପ୍ରତିଟି ଘରେ ତ୍ରିରଙ୍ଗା ଉଡ଼ୁଛି, ଆଉ ପ୍ରତିଟି ମନ ମଧ୍ୟ ତ୍ରିରଙ୍ଗା ହୋଇଛି । ଆଉ, ଦେଶ ଆଜି ଉତ୍ସାହ ତଥା ଉଦ୍ଦୀପନା ସହିତ ନୂତନ ସଂକଳ୍ପର ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସ୍ୱାଧୀନତା ଦିବସର ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାମନା। ଦେଶ ଆଜି ସେହି ମହାନ ସୁପୁତ୍ରମାନଙ୍କୁ ପୁଣ୍ୟ ସ୍ମରଣ କରୁଛି, ଯେଉଁମାନେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତା ପାଇଁ ତ୍ୟାଗ ଓ ବଳିଦାନର ପରାକାଷ୍ଠା ଦେଖାଇଛନ୍ତି।, ନିଜର ତପସ୍ୟା, ତ୍ୟାଗ ଏବଂ ବଳିଦାନ ଜରିଆରେ ସ୍ୱାଧୀନତାର ସେହି ଏକମାତ୍ର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ନେଇ ନିଜର ସମଗ୍ର ଜୀବନ ଉତ୍ସର୍ଗ କରି ଦେଇଥିଲେ । ପୂଜ୍ୟ ବାପୁଙ୍କ ସମେତ ସମସ୍ତ ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମୀ ଏବଂ ବଳିଦାନର ମହାନ ପରମ୍ପରାକୁ ଜାଗ୍ରତ କରିଥିବା କ୍ରାନ୍ତିକାରୀମାନଙ୍କୁ ଆଜି ମୁଁ ଶ୍ରଦ୍ଧାପୂର୍ବକ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି। ଆଜି ଯେଉଁମାନେ ଏହି ସମାରୋହରେ ଉପସ୍ଥିତ ଅଛନ୍ତି, ସେ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଆଜି ଏକ ଐତିହାସିକ ମୁହୂର୍ତ୍ତ ମଧ୍ୟ । ସ୍ୱାଧୀନତା ପରେ ଏଇ ଅଗଷ୍ଟ ୧୫ ତାରିଖରେ ଲାଲକିଲ୍ଲାରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ବନ୍ଦେ ମାତରମ ଗୁଞ୍ଜରିତ ହେଉଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଆମେ ସାରା ଦେଶବାସୀ ବନ୍ଦେମାତରମର ୧୫୦ ବର୍ଷ ପାଳନ କରୁଛୁ, ଏହାଠାରୁ ବଳି ଉତ୍ତମ ସୁଯୋଗ ଆଉ କ’ଣ ହୋଇପାରେ ?

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ବିଗତ କିଛି ଦିନ ହେବ ଦେଶର କେତେକ ଅଞ୍ଚଳରେ ବନ୍ୟାର ପ୍ରକୋପ ଦେଖାଦେଇଛି, ଭୂସ୍ଖଳନ ହୋଇଛି, ଏଥିରେ ଅନେକ ପରିବାର ପ୍ରଭାବିତ ହୋଇଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କର ଦୁଃଖ କଷ୍ଟକୁ ଆମେ ଭଲ ଭାବରେ ଅନୁଭବ କରୁଛୁ। ପୀଡ଼ିତ ପରିବାରଙ୍କୁ ମୁଁ ବିଶ୍ୱାସ ଦେଉଛି ଯେ, ଆଜି ସାରା ଦେଶ ସେମାନଙ୍କ ସହ ଠିଆ ହୋଇଛି।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ରାଷ୍ଟ୍ର ମହାନ ହୁଏ, ସେତେବେଳେ ଏହା ନିଜର ସିଦ୍ଧିଗୁଡ଼ିକୁ ହାସଲ କରିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଏହା ନିଜର ସ୍ୱପ୍ନ, ନିଜର ସଂକଳ୍ପ ଏବଂ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟ ବଳରେ ଆଗକୁ ବଢ଼େ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଏବେ, ଛୋଟ ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖିଲେ ଚଳିବ ନାହିଁ। ଆମକୁ ବଡ଼ ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖିବାକୁ ହେବ, କାରଣ ବଡ଼ ସ୍ୱପ୍ନ ଆମର ବିଚାରକୁ ପ୍ରସାରିତ କରେ, ତାହା ଆମର ବିଚାରଧାରାର ଦିଗବଳୟକୁ ଆହୁରି ବିସ୍ତୃତ କରେ। ଏହା ହିଁ ଆମର ସଂକଳ୍ପ ହେବା ଉଚିତ। ସଂକଳ୍ପ ଦୃଢ଼ ହେଲେ, କଷ୍ଟକର ପରିସ୍ଥିତି ଏବଂ ବିପତ୍ତି ମଧ୍ୟରୁ ବାଟ କାଢ଼ିବାର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଆପେ ଆପେ ପ୍ରକଟ ହୋଇଥାଏ।

ଆଉ ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆମର ସଂକଳ୍ପ ମଧ୍ୟ ଉଚ୍ଚ ହେବା ଉଚିତ, କାରଣ ସ୍ୱପ୍ନ ଯେତେ ଉଚ୍ଚା ହୁଏ ଏବଂ ସଂକଳ୍ପ ଯେତେ ବଡ଼ ହୁଏ, ଆମ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଏବଂ ଆମ ପ୍ରୟାସର ଉଚ୍ଚତା ମଧ୍ୟ ସେତିକି ବୃଦ୍ଧି ପାଏ। ଆମ ପ୍ରୟାସର ଉଚ୍ଚତା ବଢ଼ିଲେ ଯାଇ ଆମେ ଆମର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସାକାର କରିପାରିବା ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆଜି ଭାରତ ମଧ୍ୟ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖିଛି, ଦୃଢ଼ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଦେଖିଛି। ନୂତନ ଶିଖରକୁ ଛୁଇଁବା ପାଇଁ ଏ ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖିଛି, ସେ ସ୍ୱପ୍ନଟି ହେଉଛି ୨୦୪୭ ମସିହାର, ଯେତେବେଳେ ଦେଶ ସ୍ୱାଧୀନତାର ଶହେ ବର୍ଷ ପୂରଣ କରିବ। ଆମେ ନିଶ୍ଚୟ ବିକଶିତ ଭାରତ ଗଢ଼ି ତୋଳିବା । ୧୪୦ କୋଟି ଦେଶବାସୀଙ୍କ ପୁରୁଷାର୍ଥ ବଳରେ ଆମକୁ ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବାକୁ ହେବ। ଯେତେବେଳେ ବିଶ୍ୱର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଜନସଂଖ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ଦେଶ ବିକଶିତ ହେବାର ସଂକଳ୍ପ ନିଏ, ଏହା ଦୁନିଆ ନଜରରେ ମଧ୍ୟ ଆମ ସାହସର ପରିଚାୟକ ହୋଇଯାଏ। ଦୁନିଆ ଆମ ପ୍ରତି ଦେଖିବାର ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ବଦଳାଇବାକୁ ବାଧ୍ୟ ହୋଇଯାଏ।

ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ ଏହାକୁ ଏମିତି କହୁନାହିଁ। ଗତ ୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଦେଶର କୋଟି କୋଟି ନାଗରିକ, ସେମାନେ ଦଳିତ ହୁଅନ୍ତୁ କି ପୀଡ଼ିତ ହୁଅନ୍ତୁ, ବଞ୍ଚିତ, ଆଦିବାସୀ ଅଥବା ଗାଁରେ ରହୁଥିବା ଲୋକ ହୁଅନ୍ତୁ କିମ୍ବା ସହରବାସୀ। ଗରିବ ହୁଅନ୍ତୁ, ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ହୁଅନ୍ତୁ, ଯୁବକ କିମ୍ବା ବୃଦ୍ଧ ହୁଅନ୍ତୁ, ନାରୀ କିମ୍ବା ପୁରୁଷ ହୁଅନ୍ତୁ, ଉତ୍ତର କିମ୍ବା ଦକ୍ଷିଣ, ପୂର୍ବ କିମ୍ବା ପଶ୍ଚିମର ଲୋକ ହୁଅନ୍ତୁ । ଗତ ୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତି ଗୋଟିଏ ସଂକଳ୍ପ ଏବଂ ସମର୍ପଣ ଭାବନା ସହିତ ଦେଶକୁ ଏକ ନୂତନ ଶିଖରକୁ ନେଇଯିବା ପାଇଁ ସବୁ ପ୍ରକାର ପ୍ରୟାସ କରିଛନ୍ତି । ମୁଁ ସେମାନଙ୍କର ପ୍ରୟାସକୁ ଆଦରର ସହିତ ସ୍ୱୀକାର କରୁଛି । ଏହାର ପରିଣାମସ୍ୱରୂପ, ଏତେ କମ୍ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ୨୫ କୋଟି ଦେଶବାସୀ ଦାରିଦ୍ର୍ୟକୁ ପରାସ୍ତ କରି ଏଥିରୁ ମୁକ୍ତ ହୋଇପାରିଛନ୍ତି । ଏକଦା ଆମେ ଦୁର୍ବଳ ପାଞ୍ଚଟି ଦେଶ ମଧ୍ୟରେ ଗଣାଯାଉଥିଲୁ । କିନ୍ତୁ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ପ୍ରୟାସ କାରଣରୁ ମାତ୍ର ୧୨ ବର୍ଷରେ ଆମେ ପ୍ରମୁଖ ଅର୍ଥ୍ୟବସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଦ୍ରୁତ ପ୍ରଗତିଶୀଳ ଅର୍ଥବ୍ୟବସ୍ଥା ପାଲଟି ଯାଇଛୁ।

ସାଥୀମାନେ,

ଦେଶ ସ୍ୱାଧୀନ ହେଲା, ବହୁତ ସାରା ସ୍ୱପ୍ନ ନେଇ ଦେଶ ସ୍ୱାଧୀନ ହେଲା। କିନ୍ତୁ ଆମେ ବିକାଶର ଗତି ଧରିପାରିଲୁ ନାହିଁ, ଆଗକୁ ବଢ଼ିପାରିଲୁ ନାହିଁ । ସବୁକିଛି ଏମିତି 'ହୁଏ, ଚାଲେ', ଭଳି ମନ୍ଥର ଭାବେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଲା । ଆରେ, ହୋଇଯିବ... ଦେଖାଯିବ... ଆମେ ସେଇଥିରେ ହିଁ ହଜି ଗଲୁ। ୨୦୧୪ ମସିହା ବେଳକୁ ତ’ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଆମକୁ 'ଫ୍ରେଜାଇଲ୍ ଫାଇଭ୍' ଶ୍ରେଣୀରେ ଫିଙ୍ଗି ଦେଇଥିଲା। ଏଭଳି ସମୟରେ ବିଗତ ୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଭାରତ ଏକ ନୂଆ ଗତି ଧରିଛି। ଆମେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ ଏବଂ ଏହା ହେଉଛି ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସଂକଳ୍ପ ଯେ ଏବେ ୧୪୦ କୋଟି ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସଂକଳ୍ପ ଓ ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ରୋକିବା ଅସମ୍ଭବ ।

ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ବିଗତ ୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଉତ୍ପାଦନ ପ୍ରାୟ ୪ ଗୁଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି । ଖଦୀ ଏବଂ ଗ୍ରାମୋଦ୍ୟୋଗ ଉତ୍ପାଦନ ପାଞ୍ଚ ଗୁଣ ବଢ଼ିଛି । ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ ଉତ୍ପାଦନ ପ୍ରାୟ ସାତ ଗୁଣ ବଢ଼ିଛି ଏବଂ ଆଧୁନିକ ରେଳବାଇ କୋଚ୍ ନିର୍ମାଣ ଏକୋଇଶ ଗୁଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି । ମୋବାଇଲ୍ ଫୋନ୍ ଉତ୍ପାଦନ ୩୩ ଗୁଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି । କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ଆଧୁନିକ ଯୁଗକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି ଡିଜିଟାଲ୍ ଏବଂ ଇନୋଭେସନ ଦୁନିଆରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ନିଜର ବିଜୟ ପତାକା ଉଡ଼ାଇଛୁ । ଇଣ୍ଟରନେଟ୍ ବ୍ୟବହାରକାରୀ ଏବଂ ଉପଭୋକ୍ତାଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ପ୍ରାୟ ୪ଗୁଣ ବଢ଼ିଛି, ପେଟେଣ୍ଟ୍ ଅନୁମୋଦନ ସଂଖ୍ୟା୪ ଗୁଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ୍ ନେଣଦେଣ ଶହେ ଗୁଣ ବଢ଼ିଛି । ସାଧାରଣ ଲୋକଙ୍କ ସୁବିଧା ଦିଗରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ସେତିକି ଗମ୍ଭୀରତାର ସହ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛୁ। ପ୍ରତିବର୍ଷ ହାରାହାରି ୧୫ ଗୁଣ ଅଧିକ ବେଗରେ ଆମେ ନଳରୁ ଜଳ ସଂଯୋଗ ଦେଇଛୁ। ବାର୍ଷିକ ହାରାହାରି ୬ ଗୁଣ ଅଧିକ ବେଗରେ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ଦିଆଯାଇଛି । ପ୍ରତିବର୍ଷ ୪ ଗୁଣ ବେଗରେ ଗରିବଙ୍କ ପାଇଁ ଶୌଚାଳୟ ନିର୍ମାଣ କରାଯାଇଛି । ବାର୍ଷିକ ତିନି ଗୁଣ ଅଧିକ ବେଗରେ ଗରିବମାନଙ୍କୁ ଘର ଯୋଗାଇ ଦେବାର କାର୍ଯ୍ୟ କରାଯାଇଛି । ଦେଶର ପ୍ରଶାସନରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଆସିଛି । ହଜାର ହଜାର ସଂଖ୍ୟାରେ ଅନୁପାଳନ ଉଚ୍ଛେଦ କରାଯାଇଛି। ଶହ-ଶହ ସଂଖ୍ୟାରେ ପୁରୁଣା ଆଇନ ଉଚ୍ଛେଦ କରାଯାଇଛି। ବିଗତ ଶତାବ୍ଦୀର ଆଇନରେ ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀ ଚାଲିପାରିବ ନାହିଁ । ଆମେ ଆଧୁନିକ ଭିତ୍ତିଭୂମି ପାଇଁ ମେଟ୍ରୋର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରିଛୁ । ସାଧାରଣ ପରିବହନକୁ ଅଧିକ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିଛୁ । ଯେଉଁ ଗତିରେ କାମ ହୋଇଛି, ଯେଉଁ ବ୍ୟାପକତାର ସହ କାମ ହୋଇଛି, ଏହି ସବୁ ଗତି, ଏହି ବିସ୍ତାର ଏବଂ ଏହି ଉପଲବ୍ଧି ସ୍ୱାଧୀନତା ପରେ ଏକ ବଡ଼ ସଫଳତା । ବିଗତ ଗୋଟିଏ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ଏହା ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଛି । ଯେତେବେଳେ ଏତେଗୁଡ଼ିଏ ସଫଳତା ଆମ ସମ୍ମୁଖରେ ଏଭଳି ଦ୍ରୁତ ଗତି ଦେଖିବାକୁ ମିଳୁଥାଏ, ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟ ପ୍ରତି ମୁହୂର୍ତ୍ତରେ ପ୍ରକଟ ହୁଏ। ସେତେବେଳେ ୨୦୪୭ ସୁଦ୍ଧା ବିକଶିତ ଭାରତ ଗଠନର ସଂକଳ୍ପ କଦାପି ଅଧୁରା ରହିପାରିବ ନାହିଁ । ଏ ସମସ୍ତ ପରିସଂଖ୍ୟାନ ଏ କଥାର ପ୍ରମାଣ ଦେଉଛି ଯେ ଆମେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ଯାଉଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

କିନ୍ତୁ ସେଥିପାଇଁ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି। ଆତ୍ମଗୌରବର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି ଏବଂ ତା’ସହିତ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତ ହେବା ମଧ୍ୟ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ । ସେଥିପାଇଁ ବିଗତ ବର୍ଷଗୁଡ଼ିକରେ ଆମର ଏହି ସଂକଳ୍ପ ରହିଛି ଯେ ଭାରତକୁ ଆମେ ଏବେ ଅନ୍ୟ ଦେଶ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରି ରହିବାକୁ ଦେବା ଉଚିତ ନୁହେଁ । ଆମକୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଦୁନିଆରେ ବହୁତ କିଛି ମିଳିଥାଏ, ଶସ୍ତାରେ ମିଳିଥାଏ, ଶୀଘ୍ର ମଧ୍ୟ ମିଳିପାରେ। କିନ୍ତୁ ସେଥିରେ ଆମର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଉପସ୍ଥାପିତ ହୋଇନଥାଏ । ଆମ ସାମର୍ଥ୍ୟର ପରୀକ୍ଷା ମଧ୍ୟ ହୋଇନଥାଏ । ସେଥିପାଇଁ ଆମକୁ ମଧ୍ୟ ନିଜର ଦକ୍ଷତା ବୃଦ୍ଧି କରିବାକୁ ହେବ, ନିଜ ସ୍ୱାର୍ଥର ସୁରକ୍ଷା ନିଜକୁ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଆଉ ସେଥିପାଇଁ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତର ସଂକଳ୍ପକୁ ନେଇ ଆମେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ । ମେକ୍ ଇନ୍ ଇଣ୍ଡିଆ, ସ୍ୱଦେଶୀ, ଭୋକାଲ୍ ଫର୍ ଲୋକାଲ୍, ଏହି ସବୁ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆଜି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭାରତୀୟଙ୍କ ମନ ଯୋଡ଼ି ହେଉଛି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟରର ଉଦାହରଣ ଦେଉଛି । ଦେଶ ସ୍ୱାଧୀନ ହେବା ପରେ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ବିଷୟରେ ଚର୍ଚ୍ଚା ଆରମ୍ଭ ହୋଇସାରିଥିଲା । ଆମ ଦେଶରେ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ଚର୍ଚ୍ଚା ହେଉଥିଲା, କିନ୍ତୁ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟରର କୌଣସି ବଡ଼ ଯୋଜନା ଆମେ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇ ପାରିନଥିଲୁ। ଆଉ ଆଜିର ସ୍ଥିତି କ’ଣ? ଆଜିର ଡିଜିଟାଲ୍ ଦୁନିଆରେ, ଟେକ୍ନୋଲୋଜି କ୍ଷେତ୍ରରେ, ଚିପ୍‌ ର ମହତ୍ତ୍ୱକୁ ଆମେ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝିଛୁ । ଯେକୌଣସି ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ ସାମଗ୍ରୀ ହେଉ, ମେଡିକାଲ୍ ଇକ୍ୟୁପମେଣ୍ଟ ହେଉ କିମ୍ବା ପରିବହନ ମାଧ୍ୟମଗୁଡ଼ିକ ହେଉ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଚିପ୍ ଅପରିହାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇପଡ଼ିଛି ଏବଂ ଏହି ଚିପ୍ ବିନା, ସାରା ଦୁନିଆ ଅଟକି ଯିବ, ଏଭଳି ଏକ ସ୍ଥିତି ଆଜି ସୃଷ୍ଟି ହୋଇସାରିଛି । ସେଥିପାଇଁ ଭାରତ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ହେବା ଦିଗରେ ନିଜର ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ପ୍ଲାଣ୍ଟ, ବଡ଼ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ପ୍ଲାଣ୍ଟ, ଏଭଳି ତିନୋଟି ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ପ୍ଲାଣ୍ଟ ଆରମ୍ଭ କରିସାରିଛି । ଆଉ ମୁଁ ଜାଣିବାକୁ ପାଇଛି, ସେଠାରେ ଯେଉଁ ଉତ୍ପାଦନ ହେଉଛି, ତାହାର ଏବେ ରପ୍ତାନି ଆରମ୍ଭ ହୋଇସାରିଛି । ମୁଁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ଆସନ୍ତା ସାତ-ଆଠ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆହୁରି ପାଞ୍ଚ, ସାତ କିମ୍ବା ଆଠଟି ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ପ୍ଲାଣ୍ଟ ଖୁବ୍ ଶୀଘ୍ର ଆରମ୍ଭ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏହି ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତ ଆମକୁ ବିକଶିତ-ଭାରତ ଦିଗରେ ଯିବା ପାଇଁ ଏକ ମହାମାର୍ଗ ପ୍ରଦାନ କରୁଛି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ସେହିଭଳି ଏବେ କ୍ରିଟିକାଲ ମିନେରାଲକୁ ନେଇ ଚର୍ଚ୍ଚା ହେଉଛି ଏବଂ ସମଗ୍ର ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ଏହି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ଉପରେ ହିଁ ନିର୍ଭରଶୀଳ । ଭାରତ ଏଥିରେ ମଧ୍ୟ ନିଜକୁ ସୁରକ୍ଷିତ କରିବାରେ ଲାଗିଛି । ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଯୋଗାଇ ଦିଆଯାଉ । ଆମେ ନେସନାଲ କ୍ରିଟିକାଲ ମିନେରାଲ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆରମ୍ଭ କରିଛୁ ଯେଉଁଥିରେ ଆମେ କ୍ରିଟିକାଲ ମିନେରାଲ କରିଡର ଘୋଷଣା କରିଛୁ । ଅନେକ ଦେଶ ସହ ଏଥିପାଇଁ ରାଜିନାମା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି । ବିଶ୍ୱର ଅନେକ ଦେଶ ଏବେ ଏହି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ବିଷୟରେ ଭାରତ ଉପରେ ଭରସା କରିବାକୁ ଲାଗିଲେଣି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଯେମିତି ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର କଥା ହେଉ କିମ୍ବା କ୍ରିଟିକାଲ ମିନେରାଲ ବିଷୟରେ ହେଉ, ସେମିତି ଯେଉଁ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ଦିଗରେ ଆମେ ଗତି କରୁଛୁ ଏବଂ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି, ସେଥିରେ ବିଦ୍ୟୁତ ଶକ୍ତିର ଗୁରୁତ୍ୱ ଆହୁରି ବଢ଼ିବାରେ ଲାଗିଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଶକ୍ତି ବିନା ଏହି ନୂତନ ଦୁନିଆକୁ ଚଲାଇବା କଷ୍ଟକର । ଆଉ ସେଥିପାଇଁ ଚିପ୍ ହେଉ, ଏଆଇ ହେଉ କିମ୍ବା ଡାଟା ସେଣ୍ଟର ହେଉ, ଆମକୁ ବହୁତ ବଡ଼ ପରିମାଣରେ ବିଦ୍ୟୁତ୍ ଶକ୍ତିର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିବ । ଶକ୍ତି ସୁରକ୍ଷା, ଏହା ଆମ ସମୟର ଏକ ବଡ଼ ଆବଶ୍ୟକତା । ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ସେ ଦିଗରେ ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ ଦୃଢ଼ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରିଛୁ । ଶକ୍ତି ସୁରକ୍ଷା ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ଏକ ବଡ଼ ମାଧ୍ୟମ ହେଉଛି ପରମାଣୁ ଶକ୍ତି, ନ୍ୟୁକ୍ଲିୟର ଏନର୍ଜି । ଆମେ ପାର୍ଲାମେଣ୍ଟରେ ଶାନ୍ତି ଆଇନ ଗୃହୀତ କରି ଏକ ନୂଆ ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ ପାଇଁ ମାର୍ଗ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିସାରିଛୁ, ଯାହା ୨୦୪୭ ସୁଦ୍ଧା ଏକ ସୁଦୃଢ଼ ଭିତ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିବ । ଆମେ ୧୦୦ ଗିଗାୱାଟ ପରମାଣୁ ଶକ୍ତି ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ । ଏହି ଗୋଟିଏ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ପାଞ୍ଚଟି ନୂଆ ନ୍ୟୁକ୍ଲିୟର ରିଆକ୍ଟର ଆରମ୍ଭ କରିବାର ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ କାମ କରୁଛୁ । ଏ ବର୍ଷ ଭାରତ ଫାଷ୍ଟ ବ୍ରିଡର୍ ନ୍ୟୁକ୍ଲିୟର ଟେକ୍ନୋଲୋଜିରେ ଦକ୍ଷତା ହାସଲ କରି ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ମାଇଲଖୁଣ୍ଟ ଅତିକ୍ରମ କରିଛି । ଫଳରେ ପରମାଣୁ ଶକ୍ତି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବା ଦିଗରେ ଆମେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସଫଳତା ଦିଗରେ ପାଦ ପକାଇଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ,

ଅନେକ ସମୟରେ, ସମ୍ବଳର ଅଭାବ ଯୋଗୁଁ ଦେଶ ଅଟକି ନଥାଏ, କିନ୍ତୁ ଅଟକିବାର ପ୍ରକୃତ କାରଣ ହେଉଛି, ଆମ ଚିନ୍ତାଧାରାର ସୀମା। ଯେତେବେଳେ ଚିନ୍ତାଧାରା ବାନ୍ଧି ହୋଇଯାଏ ଏବଂ ସୀମା ଭିତରେ ଆବଦ୍ଧ ହେବାକୁ ଲାଗେ, ସେତେବେଳେ ଆମେ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ମଧ୍ୟ ଚିହ୍ନି ପାରି ନଥାଉ। ଦେଶକୁ ଆଜି ଅଶୋଧିତ ତୈଳ ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ ପଡ଼ୁଛି । ଏହା ଆମର ଭୁଲ ଚିନ୍ତାଧାରା ଯୋଗୁଁ ହିଁ ହୋଇଛି । ଆପଣ ଜାଣିଲେ ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ହେବେ, ଆମ ସାମୁଦ୍ରିକ ଉପକୂଳର ପ୍ରାୟ ଅନେଶତ ପ୍ରତିଶତ ଅଂଶକୁ ଏଭଳି ଚିନ୍ତାଧାରା କାରଣରୁ ନୋ ଗୋ ଏରିଆ ଘୋଷଣା କରି ରଖାଯାଇଥିଲା। ଆମେ ନିଜେ ହିଁ ସମୁଦ୍ର ଭିତରକୁ ଯାଇ ଅନୁସନ୍ଧାନ ନ କରିବା ପାଇଁ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଥିଲୁ । ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା ହିଁ ଦୁର୍ବଳ ଥିଲା । ଆମେ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଲୁ ଯେ ଏହା ଆଉ ଚଳିବ ନାହିଁ । ଯେଉଁ ୯୯ ପ୍ରତିଶତ ଅଞ୍ଚଳ ଦିନେ ନୋ ଗୋ ଏରିଆ ହୋଇ ରହିଥିଲା, ଆମେ ତା’କୁ ଗୋ ଏହେଡ ଏରିଆ ଭାବରେ ଉନ୍ମୁକ୍ତ କରିଦେଇଛୁ । ବର୍ତ୍ତମାନ ଆମେ ସମୁଦ୍ର ଭିତରେ ମଧ୍ୟ ଏକ୍ସପ୍ଲୋରେସନ କରିବା ଏବଂ ନୂଆ ନୂଆ ଭଣ୍ଡାର ଖୋଜିବା ଦିଗରେ ନିୟୋଜିତ ହୋଇଛୁ । ଆମେ ପ୍ରୟାସ କରୁଛୁ। ଆମେ ଗତବର୍ଷ ସେହି ଦିଗରେ ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରି ସମୁଦ୍ର ମନ୍ଥନର ଘୋଷଣା କରିଥିଲୁ ଏବଂ ଗତ କିଛି ଦିନ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ୮୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ଆବଣ୍ଟନ କରି କାମକୁ ଗତି ଦେବା ପାଇଁ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଛୁ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଶକ୍ତି ସୁରକ୍ଷା ବିଷୟରେ ମୁଁ କହିଛି ଯେ ଆମକୁ ବିକଳ୍ପ ଉତ୍ସ ଗୁଡ଼ିକ ପ୍ରତି ମଧ୍ୟ ସମସ୍ତ ଶକ୍ତି ଲଗାଇବା ବହୁତ ଜରୁରୀ। ଆଉ ସେଥିପାଇଁ ଶକ୍ତିର ସଠିକ ବ୍ୟବହାରକୁ ବୃଦ୍ଧି କରି ଭାରତ ଆଜି ଏ ଦିଗରେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଅର୍ଥାତ୍ ଆଜିଠାରୁ ୧୨ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ଆମ ଦେଶର ମାତ୍ର ୭୦ଟି ସହରରେ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଥିଲା, ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ଗ୍ୟାସ ଡିଷ୍ଟ୍ରିବ୍ୟୁସନ ହେଉଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଗତ ବାର ବର୍ଷରେ ଆମେ ଏହି ସତୁରିଟି ସହରକୁ ୭୦୦ ସହର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଞ୍ଚାଇ ଦେଇଛୁ । ଏହାକୁ କୁହାଯାଏ ଗତି । ଏହା ହିଁ ହେଉଛି ବିସ୍ତାର । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଅତି କଷ୍ଟରେ ମାତ୍ର ୨୦-୨୨ ଲକ୍ଷ ଘରକୁ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ଗ୍ୟାସ ପହଞ୍ଚୁଥିଲା, କିନ୍ତୁ ଆଜି ପ୍ରାୟ ୧ କୋଟି ୭୫ ଲକ୍ଷ ଘରକୁ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ଗ୍ୟାସ ପହଞ୍ଚାଇବା କାମ ଜାରି ରହିଛି । ୧୨ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ଆମ ଦେଶରେ ସୌର ଶକ୍ତିର କ୍ଷମତା ମାତ୍ର ୨ଗିଗାୱାଟ ଥିଲା। ମାତ୍ର ୨ ଗିଗାୱାଟ ? ଆଜି ଆମେ ୧୬୦ ଗିଗାୱାଟର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିସାରିଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ, ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆଉ ଏକ ସୂଚନା ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଏହାର ଲାଭ ଯେପରି ଦେଶର ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ବର୍ଗ ଏବଂ ସାଧାରଣ ପରିବାରଗୁଡ଼ିକୁ ମିଳିବ, ସେ ଦିଗରେ ଆମେ ସମାନ ଭାବରେ ଧ୍ୟାନ କେନ୍ଦ୍ରୀଭୂତ କରିଛୁ । ଆମେ ପିଏମ ସୂର୍ଯ୍ୟ ଘର ମାଗଣା ବିଜୁଳି ଯୋଜନା ଆରମ୍ଭ କରିଛୁ ଏବଂ ଆଜି ମୋତେ ସନ୍ତୋଷ ଲାଗୁଛି ଯେ ଏତେ କମ୍ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ପଚାଶ ଲକ୍ଷ ଘରରେ ସୋଲାର ଏନର୍ଜି କ୍ଷେତ୍ରରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରି ଆମେ ପୂର୍ବ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ଅତିକ୍ରମ କରିସାରିଛୁ, ଏହି କାମ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଚାଲିଛି । ଏହି କାରଣରୁ ହଜାର ହଜାର ଘରର ବିଜୁଳି ବିଲ୍ ଜିରୋ ହୋଇଯାଇଛି । ଆଜି ହଜାର ହଜାର ପରିବାର ନିଜର ବିଜୁଳି ବ୍ୟବହାର କରିବା ପରେ ବଳକା ବିଜୁଳି ବିକ୍ରି କରି ରୋଜଗାର ମଧ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି । ଏହି କାମ ପାଇଁ, ସରକାରଙ୍କ ପକ୍ଷରୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାରକୁ ୮୦ ହଜାର ଟଙ୍କା ଲେଖାଏଁ ସହାୟତା ପ୍ରଦାନ କରାଯାଉଛି । ଏପରି ଭାବରେ ଆମେ ଏ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କରୁଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆପଣମାନେ ଜାଣିଲେ ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ହେବେ - ଆମ ଦେଶରେ ରେଳବାଇର ବିଦ୍ୟୁତିକରଣ କାମ ୧୯୨୫ ମସିହାରେ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିଲା । ୧୯୨୫ ମସିହାରେ ବିଦ୍ୟୁତିକରଣ କାମ ଆରମ୍ଭ ତ ହୋଇଥିଲା, କିନ୍ତୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ୯୦ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଅର୍ଥାତ୍ ୧୯୨୫ ରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଦୀର୍ଘ ୯୦ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ମାତ୍ର ୩୦ ପ୍ରତିଶତ ରେଳବାଇର ବିଦ୍ୟୁତିକରଣ କାମ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ହୋଇପାରିଥିଲା । ଅର୍ଥାତ୍ ୯୦ ବର୍ଷରେ ୩୦ ପ୍ରତିଶତ ! ହେଲେ ଆମର ଗତି ଦେଖନ୍ତୁ ! ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ଆମର ଦୌଡ଼କୁ ଦେଖନ୍ତୁ । ଆମେ ଗତ ଏକ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ଶତ ପ୍ରତିଶତ କାମ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କରିଦେଇଛୁ । ୯୦ ବର୍ଷରେ ୩୦ ପ୍ରତିଶତ ଏବଂ ମାତ୍ର ୧୦ ବର୍ଷରେ ୭୦ ପ୍ରତିଶତ । ଏହାକୁ ହିଁ କୁହାଯାଏ ପ୍ରକୃତ କାମ ଏବଂ ଏହି କାରଣରୁ ଡିଜେଲ, ଯାହା ଆମକୁ ବାହାରୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା, ସେଥିରେ ଏବେ ହ୍ରାସ ଘଟିଛି । ସେଥିରେ ସଞ୍ଚୟ ହୋଇଛି । ବିଦ୍ୟୁତରେ ଆମ ଟ୍ରେନ୍ ଗୁଡ଼ିକ ଚାଲିଲା, ପରିବେଶକୁ ମଧ୍ୟ ଲାଭ ହେଲା।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆମେ ଏତିକିରେ ଅଟକି ଯାଇନାହୁଁ । ଆମେ ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ପଛୁଆ ହୋଇ ରହିବାକୁ ଚାହୁଁନୁ । ଗତ କିଛି ଦିନ ମଧ୍ୟରେ ଆପଣମାନେ ଖବର ଶୁଣିଥିବେ -ଭାରତ ଇନ୍ଧନର ଏକ ନୂତନ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ସ୍ପର୍ଶ କରିଛି । ଦେଶ ବର୍ତ୍ତମାନ ପ୍ରଥମ କରି ହାଇଡ୍ରୋଜେନ ଟ୍ରେନର ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିଛି, ମୋତେ ଖୁସି ଲାଗୁଛି ଯେ, ଏହା ହେଉଛି ସବୁଠାରୁ ଲମ୍ବା ଟ୍ରେନ୍‌ । ସବୁଠାରୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଟ୍ରେନ ଏବଂ ବିଶ୍ୱରେ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ ଟ୍ରେନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ନିଜର ବାନା ଉଡ଼ାଇଛି ।

ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଗତ ୧୦-୧୨ ବର୍ଷ ହେବ ଆମେ ନିରନ୍ତର ଭାବରେ ୨୦୪୭ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ଦୌଡ଼ୁଛୁ ଏବଂ ଏହି ପଥରେ ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ ସୋପାନ ଅତିକ୍ରମ କରି ସଫଳତା ହାସଲ କରୁଛୁ । ଆମେ କେବେ ଭାବି ନଥିଲୁ ଯେ ଆମକୁ ଏଥିରେ ମଧ୍ୟ କିଛି ଅସୁବିଧାର ସମ୍ମୁଖୀନ ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ, କିନ୍ତୁ ଗତ ୧୦-୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମକୁ ଅନେକ ସଙ୍କଟର ସାମ୍ନା କରିବାକୁ ପଡ଼ିଛି। କୋରୋନା ଭଳି ଏକ ଜାଗତିକ ମହାମାରୀ ସାରା ବିଶ୍ୱକୁ ଚିନ୍ତାରେ ପକାଇ ଦେଇଥିଲା । ସବୁ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଦୋହଲି ଯାଇଥିଲା। କୋରୋନାରୁ ମୁକ୍ତ ହେବା ପରେ ଯୁଦ୍ଧର ବିଭୀଷିକାମୟ ଖବର ଆସିବାକୁ ଲାଗିଲା। କେଉଁଠି ୟୁକ୍ରେନ ତ’ ଆଉ କେଉଁଠି ପଶ୍ଚିମ ଏସିଆ, ସବୁଠି ଉତ୍ତେଜନାପୂର୍ଣ୍ଣ ବାତାବରଣ। ଆଉ ଭବିଷ୍ୟତବକ୍ତାମାନେ ତ’ କେଜାଣି କେତେ କଣ ସବୁ ଘୋଷଣା କରିସାରିଥିଲେ। ଦେଶକୁ ଡରାଇ ରଖିବା, ଦେଶକୁ ଭୟଭୀତ କରି ରଖିବା ଏବଂ ଦେଶକୁ ଚିନ୍ତିତ ରଖିବା -ଏଥିରେ ହିଁ କିଛି ଲୋକଙ୍କୁ ଆନନ୍ଦ ମିଳିଥାଏ। ଭ୍ୟାକ୍ସିନ ମିଳିବ ନାହିଁ । କୋଭିଡରେ ଲୋକେ ବଞ୍ଚିବେ ନାହିଁ । କିଛି ବି ହେବ ନାହିଁ, ପଶ୍ଚିମ ଏସିଆର ସଙ୍କଟ ଆସିଲା। ପେଟ୍ରୋଲ ପମ୍ପରେ ପେଟ୍ରୋଲ ମିଳିବନି, ଗ୍ୟାସ ମିଳିବନି, ଡିଜେଲ ମିଳିବନି, ଫର୍ଟିଲାଇଜର ମଧ୍ୟ ମିଳିବନି । ସାରା ଦୁନିଆର ଏମିତି ଅନେକ ଗୁଜବ ବ୍ୟାପିଥିଲା, ଯାହା ଭାରତର ଲୋକଙ୍କୁ ଭୟଭୀତ କରିବା ଏବଂ ଡରାଇବା ପାଇଁ ହିଁ ଥିଲା । ଚିନ୍ତା ଭିତରକୁ ଠେଲି ଦେବାରେ କିଛି ଲୋକଙ୍କୁ ବହୁତ ଆନନ୍ଦ ମିଳୁଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଦେଶ ଦେଖିଛି ଯେ ଗତ ୧୦-୧୨ ବର୍ଷର ସୁଚିନ୍ତିତ ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକ ଏବେ ସଫଳ ହେବାରେ ଲାଗିଛି। ଏତେ ବଡ଼ ସଙ୍କଟ ସତ୍ତ୍ୱେ 'ନାଗରିକ ଦେବୋ ଭବ' ମନ୍ତ୍ରକୁ ପାଥେୟ କରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିଥିବା ଭାରତ ସଫଳ ହୋଇଛି। ଆମେ କେବେ ଭାବି ନଥିଲୁ ଯେ ଏଭଳି ସଙ୍କଟ ଆସିବ, କିନ୍ତୁ ସେହି ସମୟରେ ଏହି ସବୁ ଜିନିଷ କାମରେ ଆସିଲା। ଆଜି ଦେଶରେ ଗ୍ୟାସ ଅଛି, ପେଟ୍ରୋଲ ଅଛି ଏବଂ ୟୁରିଆ ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ଅଛି। ଆମେ ଆମର ନିଜ ଶକ୍ତି ବଳରେ ଆଜି ଛିଡ଼ା ହେଉଛୁ ଏବଂ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ଦେଖାଦେଇଥିବା ସଙ୍କଟର ପ୍ରଭାବ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କ ଉପରେ ପଡ଼ିଛି । ଆମେ ମଧ୍ୟ ଏଥିରୁ ବାଦ୍ ପଡ଼ିନାହୁଁ । ବିଶ୍ୱ ବଜାରରେ ୟୁରିଆର ମୂଲ୍ୟ ବସ୍ତା ପିଛା ୩ ହଜାର ଟଙ୍କାରେ ପହଞ୍ଚିଛି । ତଥାପି, ଆମେ ଦେଶର କୃଷକମାନଙ୍କୁ ସେହି ବୋଝ ସହିବା ପାଇଁ ବାଧ୍ୟ କରୁନାହୁଁ, ବରଂ ସରକାର ନିଜ କାନ୍ଧରେ ସେ ବୋଝ ଉଠାଉଛନ୍ତି । ବିଶ୍ୱ ବଜାରରୁ ଯେଉଁ ୟୁରିଆ ବସ୍ତା ଆମକୁ ୩ ହଜାର ଟଙ୍କାରେ ମିଳୁଛି, ତାହା କୃଷକମାନଙ୍କୁ ମାତ୍ର ୩ ଶହ ଟଙ୍କାରେ ଆମେ ଯୋଗାଇ ଦେଇପାରୁଛୁ। କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ଡିଏପି ଆଜି ବିଶ୍ୱ ବଜାରରେ ୫ ହଜାର ଟଙ୍କାରେ ପହଞ୍ଚି ସାରିଛି । କିନ୍ତୁ ମୋ ଦେଶର କୃଷକମାନଙ୍କୁ ଯେପରି କୌଣସି ଅସୁବିଧା ନହୁଏ, ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ଆଜି ସେମାନଙ୍କୁ ୧୩୫୦ ଟଙ୍କାରେ ଡିଏପି ଯୋଗାଇଦେଇଛୁ। ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ, ଏମିତି ଏକ ସମୟ ଥିଲା ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳତା ବିଷୟରେ କହିଲେ, ଏୟାର କଣ୍ଡିସନ ଚାମ୍ବରରେ ବସି ଚିନ୍ତା କରୁଥିବା ଲୋକ ଆମକୁ ପଚାରୁଥିଲେ, ଗ୍ଲୋବାଲାଇଜେସନର କ’ଣ ହେବ? କିନ୍ତୁ ଦୁନିଆ ଦେଖୁଛି - ବିଗତ ଏକ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ଏମିତି ଲାଗୁଛି ଯେପରି ବିଶ୍ୱ, ଗ୍ଲୋବାଲାଇଜେସନ ଶବ୍ଦଟି କହିବା ହିଁ ବନ୍ଦ କରିଦେଇଛି । ଯେଉଁଠାରୁ ଗ୍ଲୋବାଲାଇଜେସନର ସ୍ୱର ଶୁଣାଯାଉଥିଲା, ସେଠାରୁ ଆଉ କିଛି ଶୁଣାଯାଉ ନାହିଁ। ଦୁନିଆର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶ ନିଜ ନିଜର ପ୍ରଶ୍ନ ଓ ମନୋଭାବରେ ମଜ୍ଜି ରହିଛନ୍ତି । ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟବଶତଃ ଏହି ସଙ୍କଟ ସମୟରେ କିଛି ଲୋକ ନିଜର ପ୍ରଭାବ ଦେଖାଇବା ପାଇଁ ସମ୍ବଳଗୁଡ଼ିକର ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣର ଖେଳ ଖେଳିଛନ୍ତି । ଦୁନିଆ ନିଜ ପାଖରେ ଯାହା କିଛି ବି ଅଛି, ତାକୁ ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣ କରିବାରେ ଲାଗିଛି। ସମ୍ବଳଗୁଡ଼ିକର ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣ, ସମ୍ପଦର ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣ କରାଯାଉଛି । ପେଟ୍ରୋଲ, ଡିଜେଲ, ଫର୍ଟିଲାଇଜର, ଔଷଧ, ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ଚିପ୍ସ, କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ଏପରିକି ଭୂଭାଗକୁ ମଧ୍ୟ ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣ କରାଯାଉଛି । ଆଉ ଏଭଳି ସମୟରେ ଯଦି ଆମେ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳତାର ମନ୍ତ୍ରକୁ ନେଇ ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ହେବ ସଠିକ୍ ଦିଗରେ ଚାଲି ନଥାନ୍ତୁ, ତେବେ ଏଭଳି ଆହ୍ୱାନଗୁଡ଼ିକର ଦୃଢ଼ତାର ସହ କିଭଳି ମୁକାବିଲା କରିଥାନ୍ତୁ ତାହା କଳ୍ପନା କରିବା ମଧ୍ୟ ଅସମ୍ଭବ । ଏବେ ଆମର ପ୍ରସ୍ତୁତି ମଧ୍ୟ ନିରନ୍ତର ବଢ଼ିବାରେ ଲାଗିଛି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

Aଅନ୍ୟପକ୍ଷରେ ଆଜି ଭାରତର ପ୍ରୋଫାଇଲ୍ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି । ଆଜି ଭାରତ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱୀକୃତିପ୍ରାପ୍ତ ଏବଂ ସମ୍ମାନନୀୟ ଦେଶ ଭାବରେ ଉଭା ହୋଇଛି । ଭାରତ ପାଖରେ ସ୍ଥିର ରାଜନୈତିକ ଜନାଦେଶ ଅଛି, ସ୍ଥିର ସରକାର ଅଛି। ଭାରତରେ ଏକ ସକ୍ରିୟ ଗଣତନ୍ତ୍ର ଅଛି । ଭାରତର ନ୍ୟାୟିକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ମଜଭୁତ ରହିଛି । ଆଉ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମାର୍ଗଦର୍ଶନ ଦେଉଛି ଭାରତର ସମ୍ବିଧାନ । ଏବେ ଦୁନିଆ ଆମର ଏହି ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଚିହ୍ନିବାକୁ ଆରମ୍ଭ କଲାଣି । ସେଥିପାଇଁ ୨୦୧୪ ପରଠାରୁ ବିଶ୍ୱର ପ୍ରାୟ ୪୦ଟି ଦେଶ ସହିତ ଆମର ଏଫଟିଏ ଏଗ୍ରିମେଣ୍ଟ ହେଉଛି । ଏବେ ଦେଖନ୍ତୁ, କେତେ ବଡ଼ ସୁଯୋଗ ଆସିଛି । ମୁଁ ଭାବୁଛି ଏହି ଯେଉଁ ବାଣିଜ୍ୟ ରାଜିନାମା ସବୁ ହୋଇଛି, ଏହା ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସୁଯୋଗ ଆଣିଛି । ଏଥିପାଇଁ ବିଶେଷ କରି ମୁଁ ମୋର ଏମଏସଏମଇ ଗୁଡ଼ିକୁ କହିବାକୁ ଚାହିଁବି ଯେ ଆମକୁ ଏହି ସୁଯୋଗ ହାତଛଡ଼ା କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ । ଆମକୁ ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ପହଞ୍ଚିବାକୁ ହେବ । ଭାରତର ଉତ୍ପାଦିତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଜିନିଷ ବିଶ୍ୱ ବଜାରରେ ପହଞ୍ଚେଇବାକୁ ପଡିବ । ବୟନ ହେଉ, ଯନ୍ତ୍ରାଂଶ ହେଉ କିମ୍ବା ଔଷଧ ହେଉ, ଆମକୁ ସୁଯୋଗ ଛାଡ଼ିବାକୁ ହେବ ନାହିଁ । କିନ୍ତୁ ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଯେଉଁ ସବୁ ମାପଦଣ୍ଡ ରହିଛି, ଆମକୁ ସେହି ମାପଦଣ୍ଡଗୁଡ଼ିକୁ ଅତିକ୍ରମ କରିବାକୁ ହେବ । ଆମେ ଦୁନିଆକୁ ଯାହା କିଛି ବି ଦେଉଛୁ, ତାହା ଶ୍ରେଷ୍ଠ ହେବା ଜରୁରୀ ଏବଂ ଦୁନିଆରେ ଯାହା କିଛି ଉପଲବ୍ଧ ହେଉଛି, ତାହା ଆମକୁ ଶସ୍ତାରେ ଯୋଗାଇବାକୁ ପଡ଼ିବ । ପଞ୍ଜାବର ଲୁଧିଆନାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ତାମିଲନାଡୁର ତିରୁପୁର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆମର ବୟନ କ୍ଷେତ୍ର ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ପହଞ୍ଚିପାରିବ । କେବଳ ସେତିକି ନୁହେଁ, କେରଳରୁ ଗୁଜରାଟ ଏବଂ ତାମିଲନାଡୁରୁ ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବ୍ୟାପିଥିବା ଆମର ସମୁଦ୍ର ଉପକୂଳ ଏବଂ ଆମର ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀ ଭାଇଭଉଣୀଙ୍କ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଅନେକ ସମ୍ଭାବନା ରହିଛି । ଆଜି ଏହି ଏଫଟିଏ କାରଣରୁ ଆମର ଚିଙ୍ଗୁଡ଼ି ଏବଂ ସି ଫୁଡ୍‌ ରପ୍ତାନି ପାଇଁ ଅନେକ ସୁଯୋଗ ଓ ସମ୍ଭାବନା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଛି । ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ନିଜର ପହଞ୍ଚ ସୃଷ୍ଟି କରିବାର ଏକ ବଡ଼ ସମ୍ଭାବନା ରହିଛି। ଆଉ ମୁଁ ଚାହିଁବି ଯେ, ଆମେ ଏହି ପରିସ୍ଥିତିର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଫାଇଦା ଉଠାଇବା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରିବା।

ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ଆଗରେ ଯେଉଁ ଭୂମିକା ଉପସ୍ଥାପନ କରିଛି, ତାହା ପଛରେ ୨୦୪୭ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଛି । ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ଏକ ମଜଭୁତ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଉପରେ ହିଁ ଠିଆ ହୋଇଛି । ୨୦୪୭ର ବିକଶିତ ଭାରତ ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି ଗତ ୧୦-୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମ ଦେଶବାସୀ ଯେଉଁ ସାମର୍ଥ୍ୟ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଛନ୍ତି, ସେହି ସାମର୍ଥ୍ୟର ହିଁ ଏକ ଅଂଶ।

ସେଥିପାଇଁ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଏ ଶତାବ୍ଦୀର ଏକ ଚତୁର୍ଥାଂଶ ସମୟ ଅତିକ୍ରମ କରିସାରିଛି ଏବଂ ପରବର୍ତ୍ତୀ ଏକ ଚତୁର୍ଥାଂଶ ସମୟ ଆମ ପାଇଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ । ଏବେ ଅଟକିବା ଆମ ପାଇଁ ସମ୍ଭବ ନୁହେଁ । ଆମ ଗତି ମଧ୍ୟ ରୋକି ପାରିବା ନାହିଁ । ଆମ ମାର୍ଗ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ହୋଇସାରିଛି । ଆମକୁ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ହାସଲ କରିବାକୁ ହିଁ ହେବ । ଆମକୁ ନିଜର ୱର୍କ କଲଚର୍ ବଦଳାଇବାକୁ ପଡ଼ିବ । ୱର୍କ କଲଚର୍ ବଦଳାଇବା ସହିତ ଆମକୁ ନିଜ ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ମଧ୍ୟ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବାକୁ ହେବ। ଆମକୁ ନିଜ କାମର ଗତିକୁ ମଧ୍ୟ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବାକୁ ହେବ । ଯେଉଁ କାମ ଗତ ପାଞ୍ଚ-ସାତ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ହୋଇପାରିନାହିଁ, ସେହି କାମ ଆମକୁ ଆସନ୍ତା ପାଞ୍ଚ-ସାତ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ କରି ଦେଖାଇବାକୁ ହେବ । ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଛି, ମୋ ଦେଶର ଯୁବ ଶକ୍ତିଙ୍କ ଉପରେ, ମୋ ଦେଶର ମାଆ ଓ ଭଉଣୀମାନଙ୍କ ଉପରେ, ମୋ ଦେଶର କୃଷକମାନଙ୍କ ଉପରେ ଏବଂ ମୋ ଦେଶର ଶ୍ରମିକମାନଙ୍କ ଉପରେ... ଆମେ ସମସ୍ତେ ମିଶି ଏହି ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସାକାର କରିପାରିବା... ଏଥିପାଇଁ ଆମକୁ ସଂସ୍କାରର ଗତିକୁ ମଧ୍ୟ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବାକୁ ହେବ । ଆଉ ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ସଂସ୍କାର ବିଷୟରେ କହୁଛି, ସଂସ୍କାର ଆମ ପାଇଁ କେବଳ କୌଣସି ବିକଳ୍ପ ନୁହେଁ, ବରଂ ଏହା ଆମ ପାଇଁ ଏକ ଜରୁରୀ ଆବଶ୍ୟକତା। ଆମ ପାଇଁ ସଂସ୍କାର ହେଉଛି ଏକ ଦୃଢ଼ ସଂକଳ୍ପ । ଆମେ ନିଜର ଏହି ଦୃଢ଼ ସଂକଳ୍ପ ଯୋଗୁଁ ହିଁ ରିଫର୍ମ ଏକ୍ସପ୍ରେସରେ ଯାତ୍ରା ଆରମ୍ଭ କରିସାରିଛୁ ଏବଂ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ମଧ୍ୟ, ଆମେ ନେକ୍ସଟ ଲେଭଲ ରିଫର୍ମ ଆଡ଼କୁ ଅଗ୍ରସର ହେବାକୁ ଯାଉଛୁ । ସେଥିପାଇଁ ସରକାର, ସମାଜ, ଉଦ୍ୟୋଗ, ଉତ୍ପାଦକ, କୃଷକ, ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କୁ ନିଜର ପାରମ୍ପରିକ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ସଂସ୍କାର ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ିବ । ନିଜର ଚିନ୍ତାଧାରାରେ ସଂସ୍କାର କରିବାକୁ ହେବ, ନିଜର ଲକ୍ଷ୍ୟଗୁଡ଼ିକରେ ସଂସ୍କାର ଆଣିବାକୁ ହେବ ।

ଆଉ ସେଥିପାଇଁ ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆମକୁ ଏକ ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ। ମୁଁ ଆଜି ସେହି ଯୁଗକୁ ମଧ୍ୟ ମନେ ପକାଇବାକୁ ଚାହିଁବି, ଯେତେବେଳେ ଭାରତର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଆମେ ସପ୍ତ ସିନ୍ଧୁ ଭାବରେ ଜାଣିଥିଲେ, ବୁଝିଥିଲେ ଏବଂ ଶୁଣିଥିଲେ । ଏବେ ବିକଶିତ ଭାରତ ଗଠନ କରିବା ପାଇଁ ଆମକୁ ନୂତନ ଧାରା ଆବଶ୍ୟକ । ଆଜି ଲାଲକିଲ୍ଲାର ପ୍ରାଚୀରରୁ ମୁଁ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଆଗରେ ଶକ୍ତିର ସପ୍ତଧାରାକୁ ଆହ୍ୱାନ ଦେଉଛି, ଆଗାମୀ ପାଞ୍ଚ-ସାତ ବର୍ଷରେ, ଯାହା ଗତ ପାଞ୍ଚ-ସାତ ଦଶନ୍ଧିରେ ହୋଇପାରିନାହିଁ, ସେ କାମକୁ ସପ୍ତଧାରାର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଓ ଶକ୍ତି ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ସମ୍ପନ୍ନ କରିବା। ଆମେ ଦେଶକୁ ଏକ ନୂଆ ଉଚ୍ଚତା ଓ ନୂଆ ଗତି ପ୍ରଦାନ କରିବା ଏବଂ ନୂତନ ଲକ୍ଷ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ହାସଲ କରିବା ଭଳି ସାମର୍ଥ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରିବା । ଏଥିସହିତ ଦେଶର ଯୁବ ଶକ୍ତିର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ରାଷ୍ଟ୍ର ନିର୍ମାଣରେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ବିନିଯୋଗ କରାଯିବ, ସେମାନଙ୍କ ଶକ୍ତିକୁ ଏଥିରେ ଯୋଡ଼ାଯିବ । ଆଗାମୀ ଦିନରେ ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ସପ୍ତ ଧାରା ବିଷୟରେ କହୁଛି, ସେତେବେଳେ ଏହି ସପ୍ତ ଧାରାର ପ୍ରଥମ ଶକ୍ତି ହେଉଛି ମ୍ୟାନୁଫ୍ୟାକ୍ଚରିଂର ଶକ୍ତି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆମକୁ ଉତ୍ପାଦନ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବାକୁ ହେବ। ଉତ୍ପାଦନ ବଢ଼ାଇବା ସହିତ ଆମକୁ ଛୋଟ ଛୋଟ ଉତ୍ପାଦନ ମଧ୍ୟ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ଏବଂ ବଡ଼ ବଡ଼ ଉତ୍ପାଦ ମଧ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ହେବ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ମୂଲ୍ୟ ଶୃଙ୍ଖଳ, ଆମର ହେବା ଉଚିତ, ଏବଂ ଏହାକୁ ନେଇ ଆମକୁ କମ୍ପୋନେଣ୍ଟ ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ । କମ୍ପ୍ଲିଟ୍‌ ପ୍ରଡକ୍ଟ ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ। ଡିଜାଇନ ଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଉତ୍ପାଦନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଭାରତକୁ ଗ୍ଲୋବାଲ୍‌ ସପ୍ଲାଇ ଚେନ୍‌ ର ଏକ ଭରସାଯୋଗ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ର ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ତିନୋଟି ଜିନିଷ ଉପରେ ବିଶେଷ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଉତ୍ପାଦନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଯେଉଁ ମୋର ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ ଅଛନ୍ତି, ଏହା ହେଉଛି ସୁବର୍ଣ୍ଣ ସୁଯୋଗ । ଏହି ସୁଯୋଗକୁ ହାତଛଡ଼ା କରନ୍ତୁ ନାହିଁ ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ ଆମକୁ ମୂଲ୍ୟ, ଗୁଣବତ୍ତା ଏବଂ ବ୍ୟାପକତା, ଏ ବିଷୟରେ ବିଶ୍ୱ ମାନଦଣ୍ଡକୁ ଆପଣାଇବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଆମର ଫ୍ୟାକ୍ଟ୍ରିଗୁଡ଼ିକ ପ୍ରତିଯୋଗିତା ମୂଳକ ହେଉ, ଆମ ପ୍ରଡକ୍ଟଗୁଡ଼ିକ ୟୁଜର ଫ୍ରେଣ୍ଡଲି ହେଉ ଏବଂ ଆମ ପ୍ୟାକେଜିଂ ଦୁନିଆର ଲୋକଙ୍କୁ ଆକର୍ଷିତ କଲା ଭଳି ହେଉ । ଆମର ଜିରୋ ଡିଫେକ୍ଟ ଏବଂ ପ୍ରିସିଜନ ମ୍ୟାନୁଫ୍ୟାକ୍ଚରିଂ, ଆମର ପରିଚୟ ହେବା ଉଚିତ । ପ୍ରତ୍ୟେକ ଉତ୍ପାଦକ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଉଦ୍ୟୋଗୀ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଏମଏସଇ ଏବଂ ଏମଏସଏମଇମାନଙ୍କୁ ମୁଁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ, ବିଶ୍ୱ ବଜାରରେ ଆମର ପରିଚୟ ବିଶ୍ୱସନୀୟତା ଏବଂ ଗୁଣବତ୍ତା ଆଧାରିତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ । ଗୁଣବତ୍ତା କ୍ଷେତ୍ରରେ କୌଣସି ପ୍ରକାରର ସାଲିସ କରାଯିବ ନାହିଁ । ସେଥିପାଇଁ ଆମର ମନ୍ତ୍ର ଗୁଣବତ୍ତା, ଗୁଣବତ୍ତା ଏବଂ ଗୁଣବତ୍ତା ହିଁ ହେବା ଉଚିତ । ଏହା ହିଁ ଆମର ଗ୍ଲୋବାଲ ବ୍ରାଣ୍ଡ ଭାଲ୍ୟୁ ହେବ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଏହି ସପ୍ତଧାରାର ଦ୍ୱିତୀୟ ଶକ୍ତି ହେଉଛି କୃଷି ଏବଂ ଖାଦ୍ୟ ଉତ୍ପାଦନ । ବହୁ ପରିମାଣରେ ଖାଦ୍ୟ ପ୍ରକ୍ରିୟାକରଣ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ । ଆମର ଚାଷୀଙ୍କ ପାଇଁ ଏବେ ଦୁନିଆର ବଜାର ଖୋଲି ସାରିଛି। ଏଫପିଓ କାରଣରୁ ଆମକୁ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ମାର୍କେଟ ମିଳୁଛି । ଆମକୁ ସେଠାରେ ପହଞ୍ଚିବାକୁ ହେବ । ଆମକୁ ସେହି ସ୍ଥାନରେ ହାତ ଲଗାଇବାକୁ ହେବ । ଆମକୁ କ୍ଷେତରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ରପ୍ତାନି ବଜାର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଯିବାକୁ ହେବ । ଆମର ପାରମ୍ପରିକ ଖାଦ୍ୟପେୟ ହେଉ, ଆମର ମିଲେଟ୍ସ ହେଉ, ଆମର ମସଲା ହେଉ, ଆମର ଫଳ କିମ୍ବା ଫୁଲ ହେଉ । ଆମ ପାଖରେ କ’ଣ ନାହିଁ? ସେଗୁଡ଼ିକ ଗ୍ଲୋବାଲ ବ୍ରାଣ୍ଡ ହେବା ଉଚିତ, ଆମର ଚାଷୀମାନେ ରାସାୟନିକ ମୁକ୍ତ ଚାଷ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେବେ । ଦୁନିଆରେ ଏସବୁର ଚାହିଦା ଆହୁରି ବଢ଼ିବାକୁ ଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ଆମର କୃଷି ଉତ୍ପାଦ ବିଶ୍ୱ ମାପଦଣ୍ଡ ମଧ୍ୟରେ ସବୁ ଦିଗରୁ ସିଦ୍ଧ ହେବ, ସେତେବେଳେ ଆମେ ସହଜରେ ବିଶ୍ୱ ବଜାରରେ ପହଞ୍ଚିପାରିବା। ମୋର ସପ୍ତ ଧାରାର ତୃତୀୟ ଶକ୍ତି ହେଉଛି, ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଏବଂ ନବସୃଜନ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ, ଆଜିର ସମୟ ହେଉଛି ଏଆଇର, କ୍ୱାଣ୍ଟମ୍‌ର, ସ୍ପେସର, ରୋବୋଟିକ୍ସର ଏବଂ ଡାଟା ସେଣ୍ଟର୍ସର। ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ରୂପେ ଏକ ନୂଆ କ୍ଷେତ୍ର ଉନ୍ମୁକ୍ତ ହୋଇସାରିଛି ଏବଂ ଏହି ଇମର୍ଜିଙ୍ଗ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ମଧ୍ୟ ପ୍ରତି ମୁହୂର୍ତ୍ତରେ ଆମକୁ ଚ୍ୟାଲେଞ୍ଜ ଦେଉଛି । ସେଥିପାଇଁ ଆମ ଦେଶକୁ କେବଳ ଦୁନିଆ ପାଇଁ ଏକ ବଜାର କରିବାକୁ ଦେବା ନାହିଁ । ଆମକୁ ଇନୋଭେସନର ଏକ ହବ୍ ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଆମେ ୟୁପିଆଇ ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ ପବ୍ଲିକ ଇନଫ୍ରାଷ୍ଟ୍ରକଚରରେ ନିଜର ପରାକାଷ୍ଠା ପ୍ରମାଣିତ କରିଛୁ । ଆମ ଶକ୍ତିର ପରିଚୟ ଦେଇସାରିଛୁ। ଏବେ ଡିଜିଟାଲ ପବ୍ଲିକ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିକୁ ମଧ୍ୟ ଦୁନିଆର କୋଣ ଅନୁକୋଣରେ ପହଞ୍ଚାଇବାକୁ ହେବ । ଭାରତକୁ ପରବର୍ତ୍ତି ପିଢ଼ିର କମ୍ୟୁନିକେସନ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିରେ ଅଗ୍ରଣୀ ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ। ମେଡ୍ ଇନ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ସିକ୍ସ ଜି, ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣରେ ପହଞ୍ଚିବା ଉଚିତ । ଏହା ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେବା ଉଚିତ ଏବଂ ଆମକୁ ଏଥିରେ କ୍ଷୀପ୍ରତା ଆଣିବାକୁ ହେବ । ଏଥିପାଇଁ ଆମର ପ୍ରଚେଷ୍ଟା କମ୍ ହେବା ଉଚିତ ନୁହେଁ । ସପ୍ତଧାରାର ଚତୁର୍ଥ ଶକ୍ତି ହେଉଛି ଗତିଶକ୍ତି । ଏହି ଗତିଶକ୍ତି ମାଧ୍ୟମରେ ଦେଶ ଭିତରେ ବାଧାମୁକ୍ତ ଦ୍ରୁତ ଯୋଗାଯୋଗ ଉପରେ ଆମକୁ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେବାକୁ ପଡ଼ିବ । ସହରଗୁଡ଼ିକୁ ହାଇ ସ୍ପିଡ୍ ରେଳ ଦ୍ୱାରା ଆମକୁ ଯୋଡ଼ିବାକୁ ହେବ । ଆଧୁନିକ ରାଜପଥ, ଅନ୍ତର୍ଦେଶୀୟ ଜଳମାର୍ଗ, ଏବଂ ବିମାନ ବନ୍ଦର ଆବଶ୍ୟକ । ମଲ୍ଟିମୋଡାଲ ଲଜିଷ୍ଟିକ୍ସ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଆବଶ୍ୟକ। ଆମ ବନ୍ଦରଗୁଡ଼ିକ କେବଳ ମାଲ୍ ଅନଲୋଡ୍ କିମ୍ବା ଲୋଡ୍ କରିବାର ସ୍ଥାନ ନୁହେଁ, କେବଳ ଦୁନିଆର ଜାହାଜଗୁଡ଼ିକ ଆସି ସେଠାରେ ଲଙ୍ଗର ପକାଇବା ଯଥେଷ୍ଟ ନୁହେଁ । ଆମକୁ ଆମ ବନ୍ଦରଗୁଡ଼ିକୁ ବନ୍ଦର ଆଧାରିତ ବିକାଶ ଦିଗରେ ଆଗେଇ ନେବାକୁ ହେବ । ସପ୍ତଧାରାର ପଞ୍ଚମ ଶକ୍ତି ହେଉଛି ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଶକ୍ତି। ଆଉ ଏହି ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଶକ୍ତିର ଗୁରୁତ୍ୱ ସବୁ ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଅଧିକ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବା କେତେ ଜରୁରୀ ତାହା ଏବେ ଭାରତ ଅନୁଭବ କରିସାରିଛି ଏବଂ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ମଧ୍ୟ ଏହା ଅନୁଭବ କରିସାରିଛି। ଆଜି ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ କେବଳ ନିଜ କଥା ଚିନ୍ତା କରୁଥିବା ବେଳେ ଭାରତ କେବଳ ଏକ ବଜାର ହୋଇ ରହିପାରିବ ନାହିଁ। ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ। ପରବର୍ତ୍ତୀ ପିଢ଼ିର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ପ୍ରଯୁକ୍ତି ବିକଶିତ କରି ଗ୍ଲୋବାଲ ସପ୍ଲାୟର ହେବା ଦିଗରେ ଆଗେଇବାକୁ ହେବ। ଆମକୁ ଡ୍ରୋନ ଏବଂ କାଉଣ୍ଟର ଡ୍ରୋନ ସିଷ୍ଟମ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରିବାକୁ ହେବ। ହାଇପରସୋନିକ ଡିଫେନ୍ସ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆମକୁ ନେତୃତ୍ୱ ନେବାକୁ ହେବ । ସାଇବର ସୁରକ୍ଷା ମଧ୍ୟ ଆଜି ପ୍ରତିଟି ଘର ପାଇଁ ଏକ ସମସ୍ୟା ପାଲଟିଛି । ଏହା ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ର। ଯେଉଁଠି ଆମ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କର ଯେଉଁ ସାମର୍ଥ୍ୟ ରହିଛି । ସେହି ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଆମେ ଦେଶ ଏବଂ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଉପଯୋଗ କରିପାରିବା। ଆମ ସପ୍ତ ଧାରାର ଷଷ୍ଠ ଶକ୍ତି ହେଉଛି ସବୁଜ ଓ ନୀଳ ଅର୍ଥବ୍ୟବସ୍ଥା, ଯାହା ସବୁଜ ନିଯୁକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରିଥାଏ । ଆମକୁ ଗ୍ରୀନ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ, ଅକ୍ଷୟ ଶକ୍ତି, ଏନର୍ଜି ଷ୍ଟୋରେଜ, ଗ୍ରୀନ ମୋବିଲିଟି ଏବଂ ଗ୍ରୀନ ମାନୁଫାକ୍ଚରିଂରେ ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ ସଫଳତା ହାସଲ କରିବାକୁ ହିଁ ହେବ । ଯେତେବେଳେ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଗ୍ଲୋବାଲ ୱାର୍ମିଂ ବିଷୟରେ ଆଲୋଚନା କରୁଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଆମେ ତାହାର ସମାଧାନର ପନ୍ଥା ଖୋଜୁଥାଉ । ଆମେ ସମସ୍ୟାର ସମାଧାନ ଦେଉଛୁ । ଭାରତ ଏକ ସବୁଜ ଆନ୍ଦୋଳନର ବହୁତ ବଡ଼ ସାମର୍ଥ୍ୟ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଛି। ଭାରତ ପାଖରେ ନୀଳ ଅର୍ଥବ୍ୟବସ୍ଥା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ବଡ଼ ସୁଯୋଗ ରହିଛି, ଆମର ଏକ ବିଶାଳ ଉପକୂଳ ରହିଛି। ନୀଳ ଅର୍ଥବ୍ୟବସ୍ଥା ପାଇଁ ଅନେକ ବଡ଼ ସୁଯୋଗ ରହିଛି । ମତ୍ସ୍ୟପାଳନ ଅଛି, ଉପକୂଳ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଅଛି, ଓସନ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ଅଛି । ଏହିଭଳି ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ର ରହିଛି ଯେଉଁଥିରେ ଆମେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିପାରିବା।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଭାରତ ସପ୍ତଧାରାକୁ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ସମୟରେ, ଆମର ସପ୍ତମ ଧାରାର ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ମହତ୍ତ୍ୱ ମଧ୍ୟ ରହିଛି । ଆଉ ସେଇଟି ହେଉଛି ଭାରତର ସଫ୍ଟ ପାୱାର । ଭାରତର ସଫ୍ଟ ପାୱାରର ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଶକ୍ତି ରହିଛି । ଆଜି ଯୋଗ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ଭାରତ ସହିତ ଯୋଡ଼ିଛି । ଯୋଗ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ଶକ୍ତି ପାଲଟିବାରେ ଲାଗିଛି ଏବଂ ଏହା ଭାରତ ପାଇଁ ବିଶ୍ୱାସର ଏକ ବଡ଼ କାରଣ ମଧ୍ୟ ହୋଇଛି । ଯେଉଁ ଭାରତ ପାଖରେ ଆସ୍ଥାର କେନ୍ଦ୍ର ରହିଛି, ଯେଉଁ ଭାରତ ପାଖରେ ଆୟୁର୍ବେଦ ଅଛି ଏବଂ ଯେଉଁଭଳି ଭାବରେ ଭାରତ ପାଖରେ ହୋଲିଷ୍ଟିକ ହେଲ୍ଥକେୟାରର ବ୍ୟବସ୍ଥା ରହିଛି, ତାହା ସହିତ ହିଲ୍ ଇନ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ମୁଭମେଣ୍ଟ ମଧ୍ୟ ଅଛି । ଆମେ ବିଶ୍ୱ ଦରବାରରେ ଆମର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିପାରିବା । ହସ୍ତଶିଳ୍ପ ହେଉ, ସଂସ୍କୃତି ହେଉ, ଆମର ଫିଲ୍ମ ହେଉ, ଆମର କ୍ରିଏଟିଭ ୱାର୍ଲ୍ଡ, ଭିଏଫଏକ୍ସ, ଏନିମେସନ, ଗେମିଂ କିମ୍ବା ଡିଜିଟାଲ କଣ୍ଟେଣ୍ଟ ହେଉ, ଏହି ସୃଜନଶୀଳ ଦୁନିଆରେଭାରତ ନିଜର ଆଧିପତ୍ୟ ଦେଖାଇପାରିବ। ଆମେ ଏହାକୁ ଏକ ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ସାମର୍ଥ୍ୟ ରୂପରେ ବିକଶିତ କରିବା ଉଚିତ୍‌ ଆଜି ଭାରତ ୱେଭ୍ସ ସମିଟକୁ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିଛି । ଭାରତର ୱାର୍ଲ୍ଡ ଅଡିଓ ଭିଜୁଆଲ ଆଣ୍ଡ ଏଣ୍ଟରଟେନମେଣ୍ଟ ସମିଟ୍ କୁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଅପେକ୍ଷା କରୁଛି । ଏହା ଭାରତର ସଫ୍ଟ ପାୱାର ଏବଂ ଭାରତର କ୍ରିଏଟିଭ ଦୁନିଆକୁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ସହିତ ପରିଚିତ କରାଇବ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଭାରତ ପାଖରେ ବିଶାଳ ବନ୍ୟ ସମ୍ପଦ ରହିଛି । ଆମ ପାଖରେ ଶହେ ରୁ ଅଧିକ ନେସନାଲ ପାର୍କ ରହିଛି । ଆମର ବହୁତ କ୍ଷମତା ଅଛି, କିନ୍ତୁ ବିଦେଶୀ ପର୍ଯ୍ୟଟକଙ୍କୁ ଆକର୍ଷିତ କରିବାରେ ଆମେ ପଛରେ ପଡ଼ିଯାଇଛୁ । ସଫ୍ଟ ପାୱାର ମାଧ୍ୟମରେ ପର୍ଯ୍ୟଟକଙ୍କୁ ଆକର୍ଷିତ କରିବାର ସୁଯୋଗ ରହିଛି, ନିଜ ସାମର୍ଥ୍ୟ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ଦେଖାଇବାକୁ ହେବ । ଆମେ ଏହା କରିବାକୁ ସକ୍ଷମ ଏବଂ ଖୁବ୍ ଶୀଘ୍ର ଏହା କରିବାକୁ ପଡିବ । ଆଜି ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱର କ୍ରୀଡ଼ା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଭାରତ ଆକର୍ଷଣର କେନ୍ଦ୍ର ପାଲଟିପାରେ । ତେଣୁ ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ସ୍ପୋର୍ଟସ ଇଭେଣ୍ଟ ଗୁଡ଼ିକ ଭାରତରେ କାହିଁକି ଆୟୋଜିତ ନ ହେବ? କଣ୍ଟେଣ୍ଟ ଇକୋନୋମି ମଧ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବଢ଼ୁଛି, ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କର ବହୁତ ଆକର୍ଷଣ ରହିଛି । ବିଶ୍ୱର ପ୍ରତ୍ୟେକ କଳାକାର ଚାହାଁନ୍ତି ଯେ ସେ କେବେ ନା କେବେ ଭାରତ ମାଟିରେ ନିଜର କନସର୍ଟ କରନ୍ତୁ । ଏହା ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସୁଯୋଗ ଏବଂ ଆମକୁ ଏହାକୁ ମୋବିଲାଇଜ୍ କରିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବସ୍ଥା ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ହେବ ।

ସାଥୀଗଣ,

ସପ୍ତଧାରାର ଏହି ସାତ ଶକ୍ତି, ସପ୍ତ ଶକ୍ତିର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କେବଳ ଗୋଟିଏ କ୍ଷେତ୍ରରେ ପ୍ରଗତି କରିବା ନୁହେଁ, ବରଂ ଏକ ହୋଲିଷ୍ଟିକ ଆପ୍ରୋଚ ସହିତ ଆମ ରାଷ୍ଟ୍ର ପାଇଁ ଯେଉଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ, ଯେଉଁ ଆମ୍ବିସନ ନେଇ ଚାଲୁଛୁ, ସେହି ସ୍କେଲ୍‌କୁ ଅତିକ୍ରମ କରିବା ଦିଗରେ ଆମକୁ କାମ କରିବାକୁ ହେବ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ କିଛି ବିଷୟ କହିଛି । କିନ୍ତୁ ମୁଁ ଏହାଠାରୁ ଆହୁରି ଅଧିକ କିଛି ଭାବୁଛି । ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ଦେଶକୁ ଜାଗ୍ରତ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ସେତେବେଳେ ମୁଁ ଦେଶର ଶକ୍ତିକୁ ମଧ୍ୟ ଜାଗ୍ରତ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଦେଶ ଚାଲିବାର ଅର୍ଥ କେବଳ ସରକାର ନୁହେଁ । ଏଥିରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକ ଯୋଡ଼ି ହୁଅନ୍ତି । ଆମେ ଫର୍ଚୁନ ଫାଇଭ୍‌ ହଣ୍ଡ୍ରେଡ୍‌ ବିଷୟରେ ତ ବହୁତ ଶୁଣୁଛୁ, ତେବେ ଆଗାମୀ ଏକ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ଏହି ଫର୍ଚୁନ ଫାଇଭ୍‌ ହଣ୍ଡ୍ରେଡ୍‌ ତାଲିକାରେ ଭାରତର ପଚାଶଟି କମ୍ପାନୀ କାହିଁକି ରହିବ ନାହିଁ? ଏହା ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ କାହିଁକି ହେବା ଉଚିତ ନୁହେଁ? ଆଜି ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ ସେକ୍ଟର ବହୁତ ଉନ୍ନତି କରୁଛି । ବିଶ୍ୱର ଶୀର୍ଷ ବ୍ୟାଙ୍କଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଭାରତୀୟ ବ୍ୟାଙ୍କର ବାନା କାହିଁକି ଉଡ଼ିବ ନାହିଁ? ବିଶ୍ୱର ଶ୍ରେଷ୍ଠ ପାଞ୍ଚଟି ବ୍ୟାଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଭାରତର ମଧ୍ୟ ଏକ ବ୍ୟାଙ୍କ ରହିବା ଉଚିତ । ଭାରତର ଫାର୍ମା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆମେ ବହୁତ କାମ କରିଛୁ । କିନ୍ତୁ ଏବେ ସମୟର ଆବଶ୍ୟକତା ହେଉଛି ଯେ ବିଶ୍ୱର ବଡ଼ ବଡ଼ ଫାର୍ମା କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଭାରତର ମଧ୍ୟ ଗୋଟିଏ କିମ୍ବା ଦୁଇଟି ଫାର୍ମା କମ୍ପାନୀର ନାମ ରହିବା ଉଚିତ । ଭାରତ ସେଥିରେ ନିଜର ସ୍ଥାନ ସୃଷ୍ଟି କରିବା ଉଚିତ । ଅନେକ ଲ’ ଫାର୍ମ ରହିଛି, ରେଟିଂ ଏଜେନ୍ସି ରହିଛି, ତେବେ ଗ୍ଲୋବାଲ ଲିଡରସିପ୍ ଏବେ ଆମ ହାତରେ ରହିବା ଦରକାର ନୁହେଁ କି? ଆମ ପାଖରେ ଟ୍ୟାଲେଣ୍ଟ ଅଛି, ସାମର୍ଥ୍ୟ ଅଛି । ଆମର ଏକ ସୁଦୀର୍ଘ ଇତିହାସ ମଧ୍ୟ ରହିଛି ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ଭାଷା ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଆମର ଆଧିପତ୍ୟ ରହିଛି । ଆମକୁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ପହଞ୍ଚିବାକୁ ହେବ, ଆମର କନସଲଟିଂ ଫାର୍ମ ଏବଂ ଆକାଉଣ୍ଟିଂ ଫାର୍ମଗୁଡ଼ିକ ବିଶ୍ୱର ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଫାର୍ମଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ କାହିଁକି ରହିବ ନାହିଁ? ଭାରତର ଟେକ୍ନୋଲୋଜି କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକ ବିଶ୍ୱରେ ଶୀର୍ଷରେ ରୁହନ୍ତୁ, ଏହା ହିଁ ଆମ ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେବା ଉଚିତ । ଆମର ଏପରି ବ୍ରାଣ୍ଡ ହେବା ଦରକାର ଯାହା ଦ୍ୱାରା ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଆକର୍ଷିତ ହେବ, ଆମର ବ୍ରାଣ୍ଡ ଆମ ଦେଶର ପରିଚୟ ହେବା ଉଚିତ ଏବଂ ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ପ୍ରମୁଖ ଡେଷ୍ଟିନେସନ ହେବା ଉଚିତ, ସେହି ଦିଗରେ ଆମକୁ କାମ କରିବାକୁ ହେବ । ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ମୁଁ ସ୍ଥାନୀୟ ସ୍ୱାୟତ୍ତ ଅନୁଷ୍ଠାନଗୁଡ଼ିକୁ ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଏବଂ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କର ମଧ୍ୟ ଏହି ଦାୟିତ୍ୱ ରହିଛି ଯେ ଆମକୁ ଆମର ସଂସ୍କାର ଗତି ବଢ଼ାଇବାକୁ ହେବ। ଆମକୁ ୨୦୪୭ ଲକ୍ଷ୍ୟ ଅନୁଯାୟୀ ଆମର ବ୍ୟବସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ବିକଶିତ କରିବାକୁ ହେବ । ଆମେ ଅତୀତର ନୀତି ନିୟମ ଅନୁସାରେ ଚାଲିପାରିବା ନାହିଁ, ଆମକୁ ଆଗାମୀ ସ୍ୱପ୍ନ ଅନୁସାରେ ନୂତନ ନୀତି ନିୟମ ଗଢ଼ିବାକୁ ହେବ ଏବଂ ଯଦି ଆମେ ଏହାକୁ ଗଢ଼ିବା, ତେବେ ମୋର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଅଛି ଯେ ଆମେ ସଫଳ ହେବା। ମୁଁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଭରସା ଦେଉଛି କି ଏହି ପଥରେ ଚାଲି, କଠିନ ପରିଶ୍ରମରେ କୌଣସି ଅଭାବ ନ ରଖି ଆମେ ବିକଶିତ ଭାରତର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ପୂରଣ କରିବା। ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମିଳିମିଶି ଚାଲିବାକୁ ହେବ । କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର, ରାଜ୍ୟ ସରକାର କିମ୍ବା ଶିଳ୍ପ ଜଗତ ହେଉ, ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମିଳିମିଶି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ପଡ଼ିବ । ଆମକୁ ନିରନ୍ତର ସଂସ୍କାର କରିଚାଲିବାକୁ ହେବ, ସଂସ୍କାରକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବାକୁ ହେବ । ମୁଁ ପୂର୍ବରୁ ମଧ୍ୟ କହିଥିଲି ଯେ ଆମେ କୌଣସି ବାଧ୍ୟବାଧକତାରେ ନୁହେଁ ବରଂ ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ସଂସ୍କାର କରୁଛୁ ଏବଂ ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ଏହା କରୁଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ ବିକଶିତ ଭାରତ କଥା କହିବା ବେଳେ ମୁଁ ଦେଶକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଆଗକୁ ନେବା କଥା କହୁଛି । ଏହାର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ହିତାଧିକାରୀ କିଏ? ଏହି ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ସାଧକ କିଏ? ଯଦି କେହି ସାଧକ ଅଛନ୍ତି, ତେବେ ସେ ହେଉଛି ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି, ମୋ ଦେଶର ଯୁବ ଶକ୍ତି। ବିକଶିତ ଭାରତର ଯାତ୍ରାରେ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିଛି । କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ବିକଶିତ ଭାରତର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ହିତାଧିକାରୀ ମଧ୍ୟ ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ଅଟନ୍ତି । ସେଥିପାଇଁ ଆମକୁ ବିକଶିତ ଭାରତର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ । ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଆମର ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା ଭାବେ ଗ୍ରହଣ କରି ଆମକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ । ଏହା ସହିତ ଗତ ୧୦-୧୨ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ସେହି ଦିଗରେ ବହୁତ କିଛି ପଦକ୍ଷେପ ନିଆଯାଇଛି। ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ଅଭିଯାନରେ ଆଜି ସାରା ଦେଶରେ ଅଢ଼େଇ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ପଞ୍ଜୀକୃତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଗଠିତ ହୋଇଛି। ଦେଶର ଯୁବବର୍ଗ ନିଜେ କାମ କରିବା ସହିତ ଅନେକଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ମଧ୍ୟ ଦେଉଛନ୍ତି। ଭାରତ ସରକାର ଏକ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାର ଇନୋଭେସନ ଫଣ୍ଡ ଘୋଷଣା କରିଛନ୍ତି। ମୁଁ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ, ଆପଣ ନିଜର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସାଙ୍ଗରେ ନେଇ ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ସମ୍ପଦର ଅଭାବ ହେବାକୁ ଦେବୁ ନାହିଁ। ଆପଣଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ମଜଭୁତ କରିବା ପାଇଁ ଆମେ, ଏକ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରିଦେଇଛୁ। ରିସର୍ଚ୍ଚ ପାଇଁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ମିଳିଛି। ଡିଜିଟାଲ୍ ଇଣ୍ଡିଆର ଶସ୍ତା ଡାଟା ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିଛି। ବିଶ୍ୱରେ ଯଦି କେଉଁଠି ଶସ୍ତା ଡାଟା ଉପଲବ୍ଧ ଅଛି, ତେବେ ତାହା ଭାରତର ମାଟିରେ। ଏହା ଦେଶର ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଏକ ନୂଆ ଶକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିଛି। ଆମେ ସ୍କିଲ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ନାମରେ ଜାତୀୟ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛୁ। ସ୍ପେସ୍ ସେକ୍ଟରକୁ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଉନ୍ମୁକ୍ତ କରିଦେଇଛୁ। ଆମେ ନେସନାଲ ଡ୍ରୋନ୍ ପଲିସି ପ୍ରଣୟନ କରିଛୁ ଏବଂ ଖେଲୋ ଇଣ୍ଡିଆ ପଲିସି ମଧ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛୁ। ପଇଁତିରିଶ ବର୍ଷ ଧରି ଦେଶରେ କୌଣସି ଏଜୁକେସନ ପଲିସି ନଥିଲା, ଆମେ ଏକ ନୂତନ ଏଜୁକେସନ ପଲିସି ନେଇ ଆସିଛୁ। ଏହାର ଲାଭ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ପରିବାରକୁ ହୋଇଛି ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, ୨୦୦୪ରୁ ୧୪ ମସିହା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତର ଏକ ଆକଳନ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଦେଉଛି । ୨୦୦୪ରୁ ୧୪ ମସିହା ମଧ୍ୟରେ ଆମ ଦେଶରେ ୩୫୦ରୁ ମଧ୍ୟ କମ୍ ୟୁନିଭର୍ସିଟି ଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଆଜି ଏହି ଦଶ-ବାର ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ପାଖାପାଖି ୬୫୦ ନୂଆ ୟୁନିଭର୍ସିଟି ଯୋଡ଼ି ହୋଇସାରିଛି । ଆମେ ପ୍ରାୟ ୧ହଜାରର ସଂଖ୍ୟା ନିକଟରେ ପହଞ୍ଚୁଛୁ । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ମେଡିକାଲରେ ମାତ୍ର ଚାରିଶହ ସିଟ୍ ରହିଥିଲା, କିନ୍ତୁ ଆଜି - ପାଖାପାଖି ୮୫୦ ମେଡିକାଲ ସିଟ୍ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ବିଦେଶୀ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ମାଟିକୁ ଆସୁଛନ୍ତି। ଭାରତରେ ହିଁ ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଯେପରି ବିଦେଶୀ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟର ଡିଗ୍ରୀ ମିଳିପାରିବ, ସେଥିପାଇଁ ମଧ୍ୟ ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇଛି। ଆମ ଦେଶର ଯୁବ-ମନ ପିଲାଦିନରୁ କେମିତି ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ପ୍ରତି ଆକର୍ଷିତ ହେବେ, ସେ ଦିଗରେ ଆମେ କାମ କରୁଛୁ ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ପ୍ରାୟ ୧୦ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଅଟଳ ଟିଙ୍କରିଂ ଲ୍ୟାବ୍ ଛୋଟ ଛୋଟ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ହସ୍ତାନ୍ତର କରିଛୁ, ଏହାଦ୍ୱାରା ଇନୋଭେସନ ଏବଂ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି କ୍ଷେତ୍ରରେ ସେମାନଙ୍କର ରୁଚି ବଢ଼ିପାରିବ। ୧୨ ବର୍ଷରେ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଆମେ ଅନେକ ନୂତନ ରାସ୍ତା ଖୋଲିଛୁ। ଆମେ ଅନେକ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଆରମ୍ଭ କରିଛୁ, ଯାହା ଆପଣମାନେ ଦେଖିଥିବେ। ଭାରତର ପ୍ରାଇଭେଟ୍ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କ୍ଷେତ୍ରରେ ହାରାହାରି ୨୮ ବର୍ଷ ବୟସର ପିଲାମାନେ ତଥା ଯୁବକମାନେ, ବିଶ୍ୱରେ ନିଜର ପ୍ରଥମ ପ୍ରୟାସରେ ହିଁ ନିଜର ଉପଗ୍ରହ ଉତକ୍ଷେପଣ କରିବା ସହ ନିଜସ୍ୱ ରକେଟ୍ ମଧ୍ୟ ଲଞ୍ଚ କରିଛନ୍ତି। ସେମାନେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ କାମ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଦେଶରେ ପ୍ରାୟ ଅଢ଼େଇ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ପଞ୍ଜୀକୃତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ରହିଛି। ଏହି କିଛି ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ଆମେ ଏଆଇ ଇମ୍ପ୍ୟାକ୍ଟ ସମିଟ୍ ମଧ୍ୟ ଆୟୋଜନ କରିଥିଲୁ । ଏଆଇର ବିସ୍ତାର ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବଢ଼ିବାରେ ଲାଗିଛି । ଲାଲ୍ କିଲ୍ଲାରୁ ମୁଁ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଘୋଷଣା କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଆମେ ସ୍ଥିର କରିଛୁ ଯେ, ଆଗାମୀ ୧ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ୧ କୋଟି ଯୁବକଙ୍କୁ ଏଆଇ ସ୍କିଲ୍ ପାଇଁ ଟ୍ରେନିଂ ଦେବା ପାଇଁ ଆମେ କାମ କରିବୁ । ଯେପରି ଆମ ଦେଶର ଯୁବବର୍ଗ, ଏଆଇ ଦୁନିଆରେ ମଧ୍ୟ ନେତୃତ୍ୱ ନେବାର ସାମର୍ଥ୍ୟ ରଖିପାରିବେ,

ମୋର ସାଥୀଗଣ,

ବାୟୋ ଇକୋନୋମି ଏକ ନୂତନ କ୍ଷେତ୍ର । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଏକ ସମୟ ଥିଲା, ଯେତେବେଳେ ବାୟୋ ଇକୋନୋମି କ୍ଷେତ୍ରରେ ମାତ୍ର ୬୦ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର କାମ ହେଉଥିଲା। ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି, କିଭଳି କମାଲ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି ଦେଖନ୍ତୁ । ନୀତି ଠିକ୍ ଥିଲେ ଏବଂ ଲକ୍ଷ୍ୟ ସ୍ପଷ୍ଟ ଥିଲେ ମୋ ଦେଶର ଯୁବଶକ୍ତି କିପରି ଭାବେ ବାୟୋ ଇକୋନୋମି କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଥା’ନ୍ତି, ତାହା ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଛି । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଯେଉଁ କାରବାର ୬୦ ହଜାର କୋଟି ଥିଲା, ବାୟୋ ଇକୋନୋମିର ସେହି କାରବାର ଆଜି ୨୦ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରେ ପହଞ୍ଚି ସାରିଛି ବନ୍ଧୁଗଣ । ୨୦୦୯-୧୦ ସମୟରେ ଆମ ଦେଶରେ ମାତ୍ର ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ ଇଲେକ୍ଟ୍ରିକ୍ ବାହନ ବିକ୍ରି ହୋଇଥିଲା। କେବଳ ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ। ମାତ୍ର ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ ଇଲେକ୍ଟ୍ରିକ୍ ଗାଡ଼ି ବିକ୍ରି ହୋଇଥିଲା ! ୨୦୦୯ ଦଶର ମସିହାରେ । ୨୦୨୫-୨୬ରେ ପଚିଶ ଲକ୍ଷ ଇଲେକ୍ଟ୍ରିକ୍ ଭେହିକିଲ୍ ବିକ୍ରି ହୋଇସାରିଛି।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଏଭିଏସନ ସେକ୍ଟର ମଧ୍ୟ ମୋର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି। ନୂଆ ବିମାନବନ୍ଦର ଏବଂ ନୂଆ ମାର୍ଗ ଗୁଡ଼ିକ ରୋଜଗାରର ଅନେକ ନୂଆ ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛନ୍ତି। ମେଣ୍ଟେନାନ୍ସ ଏବଂ ଓଭରହଲିଂ କାରଣରୁ ମଧ୍ୟ ଦେଶରେ ବହୁ ପରିମାଣର ଦକ୍ଷ ଶ୍ରମଶକ୍ତି କାମ ମିଳୁଛି । ମେଡ୍ ଇନ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ବିମାନ ନିର୍ମାଣ ଦିଗରେ ଆମେ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଛୁ। ମେଡ୍ ଇନ୍ ଇଣ୍ଡିଆ ଡିଫେନ୍ସ ଟ୍ରାନ୍ସପୋର୍ଟ ଏୟାରକ୍ରାଫ୍ଟ ସି-ଟୁ ନାଇଣ୍ଟି ଫାଇଭ୍‌, ନିଜର ପ୍ରଥମ ଉଡ଼ାଣ ଭରି ସାରିଛି। ଏହା ସଫଳତାର ସହ ଉଡ଼ାଣ ଭରିଛି । ବନ୍ଧୁଗଣ, ଏହା ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ବଡ଼ ସଫଳତା। ଡ୍ରୋନ୍ କ୍ଷେତ୍ର ମଧ୍ୟ ଆଜି ବହୁତ ବଡ଼ କାମ କରି ଦେଖାଇଛି। ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳରେ ଡ୍ରୋନ୍ ସହାୟତାରେ ସ୍ୱାମୀତ୍ୱ ଯୋଜନା ସଫଳ ହେଉଛି। ପ୍ରାୟ ସାଢ଼େ ତିନି କୋଟି ପରିବାର ସ୍ୱାମୀତ୍ୱ ଯୋଜନାର ଲାଭ ପାଇଛନ୍ତି। ଏହି କାରଣରୁ ଶହେଚାଳିଶ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାର ସମ୍ପତ୍ତି ଅନ୍‌ ଲକ୍ ହୋଇପାରିଛି - ଫଳରେ ବ୍ୟାଙ୍କରୁ ଲୋନ୍ ମିଳିପାରୁଛି, ଲୋକମାନେ ନିଜର ବ୍ୟବସାୟ ମଧ୍ୟ କରିପାରୁଛନ୍ତି।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ପରିବାରଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ବୋଝ ଦେଖା ଦେଇଛି। କୋଚିଂ କ୍ଲାସର ଏହି ପ୍ରତିଯୋଗିତା ମଧ୍ୟରେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ବାପା-ମା'ଙ୍କୁ ଲାଗୁଛି ଯେ ଯଦି ସେମାନେ ନିଜ ପିଲାକୁ କୋଚିଂ କ୍ଲାସକୁ ନ ପଠାନ୍ତି, ତେବେ ସେମାନେ ଆଉ ସମ୍ମାନଜନକ ପରିବାର ହୋଇ ରହିବେ ନାହିଁ । ଏହି ଗରିବ ଓ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ପରିବାର ପାଇଁ ଆମେ ଚିନ୍ତା କରିବା ସହ, ସେମାନଙ୍କୁ ଖର୍ଚ୍ଚରୁ ମଧ୍ୟ ମୁକ୍ତି ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛୁ। ଯେପରି ସେମାନଙ୍କ ପିଲାମାନେ ନିଜ ପାଖରେ ରହିପାରିବେ, ସେମାନଙ୍କ ଉଚିତ୍ ଯତ୍ନ ନିଆଯାଇପାରିବ ଏବଂ ପରିବାର ଉପରେ କୌଣସି ପ୍ରକାର ଆର୍ଥିକ ବୋଝ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ। ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ଯୁବବର୍ଗଙ୍କୁ ବିଭିନ୍ନ ପରୀକ୍ଷା ନିମନ୍ତେ ମାଗଣା ଅନଲାଇନ୍ କୋଚିଂ ବ୍ୟବସ୍ଥା କରିବାକୁ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଛୁ। ଆଜି ଆମ ପାଖରେ ଡିଜିଟାଲ୍ ପବ୍ଲିକ୍ ଇନଫ୍ରାଷ୍ଟ୍ରକ୍ଚର ଅଛି, ଉତ୍ତମ ପ୍ରତିଭା ଏବଂ ଦକ୍ଷ ଶିକ୍ଷକ ମଧ୍ୟ ଅଛନ୍ତି। ସେହି ସମ୍ବଳଗୁଡ଼ିକୁ ଏକାଠି କରି ଆମେ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ଲାଗି ମାଗଣା କୋଚିଂ ନେଟୱାର୍କ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ଯାଉଛୁ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ମୁଁ ସର୍ବଦା କହି ଆସିଛି ଯେ, ଯିଏ ଖେଳିବ ସେ ହିଁ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ । ମୁଁ ବିଭିନ୍ନ କ୍ରୀଡ଼ା ବିଷୟରେ କହିବା ବେଳେ ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ, ଆଜି ଭାରତ କ୍ରୀଡ଼ା ଜଗତରେ ନିଜର ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ପରିଚୟ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛି। ବର୍ତ୍ତମାନ ଖେଳର ପୋଡିୟମରେ ଭାରତର ଜାତୀୟ ସଙ୍ଗୀତ ଶୁଣିବାକୁ ମିଳୁଛି, ଭାରତର ରାଷ୍ଟ୍ରଗାନ ଶୁଣିବାକୁ ମିଳୁଛି । ଆଜି ଭାରତର ତ୍ରିରଙ୍ଗା ପତାକା ଚାରିଆଡ଼େ ଉଡ଼ୁଛି। ଟପ୍ସ ଯୋଜନା ବହୁତ ବଡ଼ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଛି। ଖେଲୋ ଇଣ୍ଡିଆ ଗେମ୍ସ, ୟୁନିଭରସିଟି ଗେମ୍ସ, ୱିଣ୍ଟର ଗେମ୍ସ, ବିଚ୍ ଗେମ୍ସ, କ୍ରୀଡ଼ା ଭିତ୍ତିଭୂମି, ଖେଳ ପାଇଁ କୋଚିଂ ଏବଂ ସ୍ପୋର୍ଟସ ମେଡିସିନ ଭଳି କ୍ଷେତ୍ର ହେଉ, କିମ୍ବା ସ୍ପୋର୍ଟସ ପାଇଁ ନ୍ୟୁଟ୍ରିସନ, ଏହି ସବୁ ବିଷୟରେ ଭାରତ ଏବେ ଦକ୍ଷତା ହାସଲ କରିବା ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି। ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ନୂତନ କ୍ଷେତ୍ର ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଛି, ଯଦି କେହି ଖେଳାଳି ହୋଇ ନ ପାରନ୍ତି, ତେବେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ସ୍ପୋର୍ଟସ ସପୋର୍ଟ ସିଷ୍ଟମରେ ମଧ୍ୟ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ କ୍ଷେତ୍ର ଉନ୍ମୁକ୍ତ ହେଉଛି। କ୍ରୀଡ଼ା ଦୁନିଆରେ ଭାରତର ପ୍ରଦର୍ଶନ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଉନ୍ନତ ହେଉଛି ଏବଂ ଆମେ ୨୦୩୬ ଅଲିମ୍ପିକ୍ସ ଆୟୋଜନ ପାଇଁ ଜଣେ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଦାବିଦାର ଭାବରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ । ସେହିପରି ୨୦୩୦ରେ ରାଜ୍ୟଗୋଷ୍ଠୀ କ୍ରୀଡ଼ା ଭାରତ ଆୟୋଜନ କରିବାକୁ ଯାଉଛି।

ମୋର ବନ୍ଧୁଗଣ,

ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ଯେଉଁ ଅଲିମ୍ପିକ୍ସ ଖେଳ ହୋଇଥାଏ, ସେଥିରେ ପ୍ରାୟ ୪୦ ପ୍ରକାରର ଖେଳ ରହିଥାଏ ଏବଂ ପ୍ରାୟ ୩୨୫-୩୫୦ ପ୍ରତିଯୋଗିତା ଏହି ଅଲିମ୍ପିକ୍ସରେ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହୋଇଥାଏ। ମୋର ଦେଶବାସୀ, ଏହା ଜାଣି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଦୁଃଖ ଲାଗିବ, ମୋର ଯୁବବନ୍ଧୁମାନେ, ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଏକ ଆହ୍ୱାନ ଦେଉଛି, ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆମନ୍ତ୍ରଣ କରୁଛି। ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ସାହାଯ୍ୟ ଚାହୁଁଛି। ସେହିସବୁ ପ୍ରତିଯୋଗିତା ମଧ୍ୟରୁ ପ୍ରାୟ ଦୁଇ-ତୃତୀୟାଂଶ ଖେଳରେ ଭାରତ କେଉଁଠି ନାହିଁ । ସେଠାରେ ଆମର ଉପସ୍ଥିତି ହିଁ ନାହିଁ ଏବଂ ଆମେ ସେଥିପାଇଁ ଯୋଗ୍ୟତା ଅର୍ଜନ ମଧ୍ୟ କରିପାରୁ ନାହୁଁ। ତେଣୁ ଆମେ ସ୍ଥିର କରିଛୁ ଯେ ୨୦୩୬ରେ ଯେଉଁ ଅଲିମ୍ପିକ୍ସ ହେବ, ଆମେ ଚାହୁଁଛୁ ଯେ ତାହା ଭାରତରେ ହିଁ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହେଉ, କିନ୍ତୁ ୨୦୩୬ ମସିହାରେ ଯେଉଁ କ୍ରୀଡ଼ା ବିଭାଗରେ ଆଜି ଭାରତ ଖେଳୁନାହିଁ, କ୍ୱାଲିଫାଏ କରିପାରୁ ନାହିଁ କିମ୍ବା ଯେଉଁ ପ୍ରତିଯୋଗିତାଗୁଡ଼ିକୁ ଭାରତ ଏପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଇନାହିଁ, ସେଭଳି ପ୍ରାୟ ତିନି-ଚତୁର୍ଥାଂଶ କ୍ଷେତ୍ର ଆଜି ଆମକୁ ଅପେକ୍ଷା କରି ରହିଛି । ଭାରତ ଏବେ ସେହି ସବୁ ଦିଗ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେବ । ଏଥିପାଇଁ ଆମେ 'ଟ୍ୟାଲେଣ୍ଟ ହଣ୍ଟ'ର ଏକ ଅଭିଯାନ ମଧ୍ୟ ଚଲାଇବାକୁ ଚାହୁଁଛୁ । ଯଦି ଆମକୁ ୨୦୩୬ ପାଇଁ ପ୍ରତିଭାବାନ ଖେଳାଳି ଦରକାର, ତେବେ ଆଜିର ପାଞ୍ଚ, ଦଶ କିମ୍ବା ପନ୍ଦର ବର୍ଷର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ଉପରେ ବିଶେଷ ଧ୍ୟାନ ଦେବାକୁ ହେବ । ସେଥିପାଇଁ ପାଞ୍ଚରୁ ପନ୍ଦର ବର୍ଷ ବୟସର ପିଲାଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଲୁକ୍କାୟିତ ଥିବା କ୍ରୀଡ଼ା ପ୍ରତିଭାକୁ ଖୋଜି ବାହାର କରିବା ପାଇଁ ଆମେ ଗାଁ ଓ ସହର ର ପ୍ରତିଟି ସ୍କୁଲରେ ଏକ ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ କରିବୁ। ଏହି 'ଟ୍ୟାଲେଣ୍ଟ ହଣ୍ଟ' ଅଭିଯାନରେ ପିଲାମାନଙ୍କର ପ୍ରତିଭାକୁ ଚିହ୍ନଟ କରାଯିବ ଏବଂ ତା'ପରେ ସେମାନଙ୍କୁ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଟ୍ରେନିଂ ଦେଇ ଦେଶ ପାଇଁ ଖେଳୁଥିବା ଦକ୍ଷ ଖେଳାଳି ଭାବେ ଗଢ଼ି ତୋଳାଯିବ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଯୁବବନ୍ଧୁମାନେ, ଆଜି ଦେଶ ତଥା ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ ନିଶା ଏକ ବଡ଼ ସଙ୍କଟ ପାଲଟିଛି। ତେଣୁ ନିଶା ମୁକ୍ତ ଭାରତ ଗଠନ କରିବା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର ଏକ ମିଳିତ ଦାୟିତ୍ୱ ହେବା ଉଚିତ। ଆମ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଯୁବପିଢ଼ି ଶକ୍ତିଶାଳୀ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ଆମର ଯୁବ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଯେପରି ଆମ ଦେଶର କାମରେ ଆସିପାରିବ, ସେଥିପାଇଁ ନିଶା ମୁକ୍ତ ଭାରତ ଅଭିଯାନ ନିମନ୍ତେ 'ମାଇଁ ଭାରତ'ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀମାନେ ଅନେକ ପଦକ୍ଷେପ ନେଇଛନ୍ତି । ଦେଶର ଏନଜିଓ ଗୁଡ଼ିକ, ଦେଶର ସାମାଜିକ ସାଂସ୍କୃତିକ ସଂଗଠନ ଏବଂ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଗୁରୁମାନେ ମିଶି ନିଶାମୁକ୍ତ ଭାରତ ଗଠନ ପାଇଁ ୧୦୦ ସପ୍ତାହର ଏକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସ୍ଥିର କରିଛନ୍ତି । ଏହି ଅଭିଯାନ ଆଗାମୀ ଶହେ ସପ୍ତାହ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାଲିବ । ମୁଁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାରକୁ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି ଯେ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଏହି ଅଭିଯାନରେ ସାମିଲ ହୁଅନ୍ତୁ, ଏହା ସହିତ ନିଜକୁ ଯୋଡ଼ନ୍ତୁ ଏବଂ ନିଶାମୁକ୍ତ ଭାରତର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସାକାର କରିବା ପାଇଁ ଆଗକୁ ଆସନ୍ତୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ରହିଥିବା ପୁରୁଣା ଆହ୍ୱାନଗୁଡ଼ିକୁ ସମାପ୍ତ କରିବା ଅତି ଆବଶ୍ୟକ । ନକ୍ସଲବାଦ ଓ ମାଓବାଦ, ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଯୁବବର୍ଗଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତକୁ ଛାରଖାର କରିଦେଇଛି । ଅନେକ ମା'ଙ୍କର କର୍ମଠ ସନ୍ତାନମାନଙ୍କୁ ଛଡ଼ାଇ ନେଇ ବର୍ବାଦ କରିଦେଇଛି ଏବଂ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପିତାମାତାଙ୍କ ସ୍ୱପ୍ନକୁ ଚୂରମାର କରିଦେଇଛି। ଏହି ନକ୍ସଲବାଦ ପ୍ରାୟ ଚାରି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନର ଏକ ବଡ଼ ଅଂଶକୁ ଏବଂ ଏକ ବିଶାଳ ଜନସଂଖ୍ୟାକୁ ନିଜ କବଜାରେ ରଖିଥିଲା। ସେମାନଙ୍କୁ ବନ୍ଧୁକ ମୁନରେ ଦବାଇ ରଖାଯାଇଥିଲା, ସମ୍ବିଧାନର ନିୟମକୁ ଉଲ୍ଲଂଘନ କରାଯାଇଥିଲା ଏବଂ ଦେଶର ସାଧାରଣ ନାଗରିକଙ୍କ ସୁରକ୍ଷାକୁ ବିପଦରେ ପକାଇଥିଲା । ସାଢ଼େ ତିନି ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଆମ ପୁଲିସର ସୁରକ୍ଷା ବଳର ଯବାନ ସହିଦ ହେଲେ। ଯୁଦ୍ଧରେ ଯେତେ ସୈନିକ ମୃତ୍ୟୁବରଣ କରନ୍ତି, ତା’ଠାରୁ ଅଧିକ ଆମ ପୁଲିସ ଯବାନଙ୍କୁ ନିଜ ଜୀବନକୁ ବାଜି ଲଗାଇବାକୁ ପଡ଼ିଥିଲା। ସେମାନେ ଦେଶର ସାଧାରଣ ଲୋକଙ୍କୁ ସୁରକ୍ଷା ଦେଇଥିଲେ। ଏହି ନକ୍ସଲବାଦ ମାଟିକୁ ରକ୍ତରଞ୍ଜିତ କରିଦେଇଥିଲା। ୨୦୧୪ରେ ଆପଣମାନେ ଯେତେବେଳେ ଆମକୁ ସୁଯୋଗ ଦେଲେ, ସେହି ଦିନ ହିଁ ଆମେ ସଂକଳ୍ପ ନେଇଥିଲୁ ଯେ ଆମେ ଦେଶକୁ ନକ୍ସଲବାଦରୁ ମୁକ୍ତ କରିବୁ। ଆଉ ଆଜି ମୁଁ ଖୁସି ଯେ ନକ୍ସଲୀ, ମାଓବାଦୀ ହିଂସା ପାଖରେ ବୋଧହୁଏ ଏବେ ଶେଷ ନିଶ୍ୱାସ ବଞ୍ଚାଇ ରଖିବାର ମଧ୍ୟ ଆଉ ଶକ୍ତି ନାହିଁ। ଏହାକୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ରୂପେ ଶେଷ କରିବା ଦିଗରେ ପ୍ରୟାସ ହୋଇଛି। ଯେଉଁଠି କେବେ ନକ୍ସଲବାଦୀଙ୍କ ଗୁଳି ଚାଲୁଥିଲା, ଧରଣୀ ରକ୍ତରଞ୍ଜିତ ହୋଇ ରହୁଥିଲା, ଆଜି ସେହି ନକ୍ସଲ ପ୍ରଭାବିତ କ୍ଷେତ୍ରଗୁଡ଼ିକ, ନକ୍ସଲ ମୁକ୍ତ ହେବା କାରଣରୁ ସେଠାରେ ବିକାଶ, ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ପ୍ରୟାସର ତ୍ରିରଙ୍ଗା ଉଡ଼ୁଛି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

କିନ୍ତୁ ଏହି ଆହ୍ୱାନକୁ ଆମେ ଆଦୌ ହାଲୁକା ଭାବେ ଗ୍ରହଣ କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଆମକୁ ଆହୁରି ସତର୍କ ରହିବାର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି। ବର୍ଷ ବର୍ଷ ଧରି ଦେଶର ଶାସନ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ମାଓବାଦୀ ଚିନ୍ତାଧାରାର ଲୋକମାନେ ନିଜର ସ୍ଥାନ ଜମାଇ ବସିଥିଲେ, ଏପରିକି ସରକାରୀ କମିଟିଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ ପରାମର୍ଶଦାତା ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିଲେ। ଏହି ମାଓବାଦୀ ଚିନ୍ତାଧାରା ଦେଶର ନୀତି ନିର୍ଦ୍ଧାରଣକୁ ବହୁଳଭାବେ ପ୍ରଭାବିତ କରିଥିଲା।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ,

ଜଙ୍ଗଲ ମଧ୍ୟରେ ସକ୍ରିୟ ଥିବା ସଶସ୍ତ୍ର ନକ୍ସଲବାଦୀଙ୍କୁ ନିପାତ କରିବା ସହ ସେହି ସଙ୍କଟରୁ ଦେଶକୁ ମୁକ୍ତ କରିବାରେ ଆମକୁ ବଡ଼ ସଫଳତା ମିଳିଛି। କିନ୍ତୁ ସଶସ୍ତ୍ର ନକ୍ସଲମାନେ ତ ଚାଲିଗଲେ, ହେଲେ ଏହି ବୌଦ୍ଧିକ ନକ୍ସଲ, ଏହି ବୌଦ୍ଧିକ ନକ୍ସଲମାନେ ଏବେ ମଧ୍ୟ ସୁଯୋଗ ଅପେକ୍ଷାରେ ଅଛନ୍ତି। ସେମାନେ ହିଂସା ଏବଂ ଅରାଜକତାର ନୂଆ ନୂଆ ରାସ୍ତା ଖୋଜୁଛନ୍ତି ଏବଂ ସମାଜକୁ ଭୁଲ ପଥକୁ ଟାଣି ନେବା ପାଇଁ ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାରର କୌଶଳ ପ୍ରୟୋଗ କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ବୌଦ୍ଧିକ ନକ୍ସଲମାନଙ୍କୁ ଚିହ୍ନଟ କରିବାକୁ ହେବ, ଏହି ବୌଦ୍ଧିକ ନକ୍ସଲମାନଙ୍କୁ ଆଇସୋଲେଟ କରିବାକୁ ହେବ ଏବଂ ଦେଶକୁ ଏକ ବିକଶିତ ରାଷ୍ଟ୍ର ଗଠନ କରିବାର ମୁଖ୍ୟ ସ୍ରୋତକୁ ଆଣିବାକୁ ହେବ। ଦେଶର ଯୁବ ପିଢ଼ିକୁ ଏହା ସହିତ ଯୋଡ଼ିବାକୁ ହେବ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଏକ ସୁରକ୍ଷିତ ଭାରତ ଗଠନ କରିବା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ। ଆହ୍ୱାନ ସୀମା ଭିତରେ ହେଉ କିମ୍ବା ସୀମା ବାହାରେ, ଭାରତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିସ୍ଥିତି ପାଇଁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଅଛି। ଆଜି ଯୁଦ୍ଧର ସ୍ୱରୂପ ବଦଳୁଛି। ଏବେ ଯୁଦ୍ଧ କେବଳ ସୀମାରେ ହିଁ ହେବ, ତାହାର କୌଣସି ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ନାହିଁ। ଯୁଦ୍ଧ ସୀମା ଭିତରେ କେଉଁଠି ରିଫାଇନାରୀକୁ ଯାଇ ତ’ କେଉଁଠି ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ କ୍ଷେତ୍ର ଯାଇ ମଧ୍ୟ ହୋଇପାରେ । ଆହୁରି ଡାଟା ସେଣ୍ଟରରେ ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରକାର ଯୁଦ୍ଧର ନୂଆ ରୂପ ଦେଖିବାକୁ ମିଳୁଛି, ଭିତ୍ତିଭୂମିଗୁଡ଼ିକୁ ଭଙ୍ଗା ଯାଉଛି, ଫ୍ୟାକ୍ଟ୍ରି ଗୁଡ଼ିକୁ ମଧ୍ୟ ନଷ୍ଟ କରାଯାଉଛି। ଆମେ ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ମିଶନ ସୁଦର୍ଶନ ଚକ୍ରର ଘୋଷଣା କରିଥିଲୁ। ସେଥିରେ ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାମ ଚାଲିଛି। ଆଜି ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ରପ୍ତାନି ପ୍ରାୟ ପଚାଶ ଗୁଣ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି। ପାଖାପାଖି ଶହେଟି ଦେଶକୁ ଆମର ଅସ୍ତ୍ରଶସ୍ତ୍ର ପଠାଯାଉଛି। ବିଶ୍ୱ ଦରବାରରେ ଭାରତର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଧୀରେ ଧୀରେ ବଢ଼ିବାରେ ଲାଗିଛି। ପରିବର୍ତ୍ତିତ ସମୟରେ ଆମକୁ ଅସ୍ତ୍ରଶସ୍ତ୍ର କ୍ଷେତ୍ରରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ହେବ। ସୈନ୍ୟ ବଳର ସାମର୍ଥ୍ୟ ବଢ଼ାଇବାକୁ ହେବ, କିନ୍ତୁ ତାହା ସହିତ ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ। ବିଗତ ଶତାବ୍ଦୀର ଯୁଦ୍ଧ ଅନୁଯାୟୀ ଯେଉଁ ସିଭିଲ ଡିଫେନ୍ସ ବ୍ୟବସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ଆମ ଦେଶରେ ବିକଶିତ ହୋଇଛି, ତାହା ଏବେ ପୁରୁଣା ହୋଇଗଲାଣି, ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ମୁଁ ଲାଲ୍ କିଲ୍ଲାରୁ ଘୋଷଣା କରୁଛି ଯେ ଆମେ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ସିଭିଲ୍‌ ଡିଫେନ୍ସର ଏକ ସକ୍ରିୟ ନେଟୱର୍କ ଛିଡ଼ା କରିବୁ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କୁ ଆଧୁନିକ ବ୍ୟବସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ପରିଚିତ କରାଇବୁ । ଆଧୁନିକ ସଙ୍କଟରୁ ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ରକ୍ଷା କରିବା ପାଇଁ କି ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇପାରିବ? ସିଭିଲ୍‌ ଡିଫେନ୍ସର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀ ବାହିନୀ, ଯାହା ଆଧୁନିକ ଆହ୍ୱାନଗୁଡ଼ିକୁ ପାର କରିବାକୁ ସକ୍ଷମ ହେବ, ସେଭଳି ଏକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଆମେ ଗଠନ କରିବାକୁ ଯାଉଛୁ ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ରାଷ୍ଟ୍ର ଗଠନରେ ଆଜି ଆମ ଝିଅମାନଙ୍କର ଅବଦାନ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ, ଏବଂ ଏହା ଆମ ପାଇଁ ପ୍ରେରଣାର ଉତ୍ସ ହୋଇ ରହିଛି । ଫାଇଟର୍‌ ଜେଟ୍‌ ହେଉ ବା ବେସାମରିକ ବିମାନ ଚଳାଚଳ କ୍ଷେତ୍ର, ଆମ ଝିଅମାନେ ସବୁଠୁ ଆଗରେ ରହିଛନ୍ତି। ଖେଳ ପଡ଼ିଆ ହେଉ, ଆମ ଝିଅମାନେ ଆଗରେ ରହୁଛନ୍ତି, ଏପରିକି ଷ୍ଟେମ୍‌ ଶିକ୍ଷା ରେ ନାମ ଲେଖାଇବା ପ୍ରକ୍ରିୟାରେ ମଧ୍ୟ ଆମ ଝିଅମାନେ ହିଁ ସର୍ବାଗ୍ରେ ରହିଛନ୍ତି ଏବଂ ଆଜି ସେନାବାହିନୀରେ ମଧ୍ୟ ସେମାନେ ନିଜର ପରାକାଷ୍ଠା ଦେଖାଉଛନ୍ତି। ଏନଡିଏରୁ ଯେଉଁ ଝିଅମାନେ ବାହାରିଛନ୍ତି, ସେମାନେ ବହୁତ ଗର୍ବ ଓ ଗୌରବର ସହିତ ଦେଶର ସେନାକୁ ନେତୃତ୍ୱ ଦେବାର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଦେଖାଇବାରେ ଲାଗିଛନ୍ତି। ମୋ ଝିଅମାନଙ୍କର ଶକ୍ତି କିଭଳି? ମୁଁ ଗତ କିଛି ଦିନ ତଳେ ସାଣନ୍ଦଠାରେ ଏକ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର ପ୍ଲାଣ୍ଟକୁ ଯାଇଥିଲି। ସେଠାରେ ଦେଶର ବିଭିନ୍ନ କୋଣରୁ ଆସିଥିବା ଆଦିବାସୀ ଝିଅମାନେ କାମ କରୁଥିଲେ। ସେମାନେ ଏଭଳି ଗାଁରୁ ଆସିଥିଲେ ଯେଉଁଠି ପାସପୋର୍ଟ କ’ଣ ହୋଇଥାଏ ସେ ବିଷୟରେ କାହାକୁ ଜଣା ସୁଦ୍ଧା ନଥିଲା। ସେହି ଝିଅମାନେ ବିଦେଶକୁ ଗଲେ, ଟ୍ରେନିଂ ନେଇ ଫେରିଲେ ଏବଂ ଆଜି ଚିପ୍ ନିର୍ମାଣ କାମ କରୁଛନ୍ତି । ମୁଁ ସେମାନଙ୍କ ଭିତରେ ଯେଉଁ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ଦେଖିଲି, ମୁଁ ସତରେ ବହୁତ ପ୍ରଭାବିତ ହୋଇଥିଲି । ଆଉ ତିନି ଲକ୍ଷ ନୁହେଁ, ତିନି କୋଟି, ଆମେ ତିନିକୋଟି ଭଉଣୀଙ୍କୁ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି କରିବାର ଯେଉଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ଧାର୍ଯ୍ୟ କରିଥିଲୁ, ତାହା ଆମେ ଅତିକ୍ରମ କରିସାରିଛୁ। ଏବେ ଆମେ ଛଅ କୋଟି ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ତିଆରି କରିବାର ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛୁ। ତିନି କୋଟି ନୂଆ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ସୃଷ୍ଟିର ଅର୍ଥ ହେଉଛି, ଆମ ମାତୃଶକ୍ତିଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଗ୍ରାମୀଣ ଅର୍ଥବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଆସିବାକୁ ଯାଉଛି।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀ,

ଆଜି ପଞ୍ଚାୟତରେ, ପୌରପାଳିକାରେ ଏବଂ ମହାନଗର ନିଗମରେ ବହୁ ସଂଖ୍ୟାରେ ମହିଳାମାନେ ଜନପ୍ରତିନିଧି ହୋଇ ଦେଶକୁ ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରୁଛନ୍ତି । ସେମାନେ ସମସ୍ୟାଗୁଡ଼ିକର ସମାଧାନ କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ବହୁତ ଦକ୍ଷ ନେତୃତ୍ୱ ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି । ଏହାକୁ ହିଁ ଧ୍ୟାନରେ ରଖି ଆମେ ସଂସଦରେ 'ନାରୀ ଶକ୍ତି ବନ୍ଦନ ଅଧିନିୟମ' ଗୃହୀତ କରିଥିଲୁ । କିନ୍ତୁ କୌଣସି ନା କୌଣସି କାରଣରୁ ରାଜନୀତିର ଆଖଡ଼ାରେ ବିଗତ ୪୦ ବର୍ଷ ଧରି ଏହି ସ୍ୱପ୍ନ ସବୁବେଳେ ରାଜନୈତିକ ଆଖଡ଼ାର ଶିକାର ହୋଇ ଚାଲିଥିଲା । ଆଜି ଲାଲ୍ କିଲ୍ଲାର ପ୍ରାଚୀରରୁ, ତ୍ରିରଙ୍ଗା ପତାକାର ଛାୟା ତଳେ ଛିଡ଼ା ହୋଇ, ମୁଁ ଦେଶର ସମସ୍ତ ରାଜନୈତିକ ଦଳକୁ ପ୍ରାର୍ଥନା କରୁଛି, ଅନୁରୋଧ କରୁଛି । ଆସନ୍ତୁ, ସେହି ମହିଳାମାନଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟର ପୂଜାରୀ ହେବା। ସେହି ମହିଳାଙ୍କ ସମ୍ମାନ ପାଇଁ ଆଗେଇବା। ଯଥାଶୀଘ୍ର ଆମର ମାଆ ଓ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ବିଧାନସଭା ଏବଂ ଲୋକସଭାରେ ତେତିଶ ପ୍ରତିଶତ ପ୍ରତିନିଧିତ୍ୱ ମିଳୁ, ଯେପରି ସେମାନେ ଭାରତର ନୀତି ନିର୍ମାଣରେ ନିଜର ଅବଦାନ ଦେଇପାରିବେ । ଏହା ସମୟର ଆବଶ୍ୟକତା, ମୁଁ ସବୁ ରାଜନୈତିକ ଦଳକୁ ପୁଣିଥରେ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି, ଆସନ୍ତୁ । ମହିଳା ସଂରକ୍ଷଣ ଲାଗୁ କରି ମହିଳା ସମ୍ମାନରେ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଯୋଗ ଦିଅନ୍ତୁ, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଏହାର ଯଶ ନିଅନ୍ତୁ, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଏହାର କ୍ରେଡିଟ୍‌ ନିଅନ୍ତୁ, କିନ୍ତୁ ମୋର ମାଆ ଓ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କର ଅଧିକାର ଦିଅନ୍ତୁ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ,

ବିକଶିତ ଭାରତର ସଂକଳ୍ପ ସେତେବେଳେ ହିଁ ପୂରଣ ହେବ ଯେତେବେଳେ ବିକାଶ ଶେଷ ବ୍ୟକ୍ତି ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଞ୍ଚିବ । ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ କେବଳ ୨୫ କୋଟି ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷା ଲାଭ ଥିଲା। କେବଳ ୨୫ କୋଟି ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ବିଗତ ୫-୭ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ କେବଳ ୨୫ କୋଟି ଲୋକଙ୍କୁ ଏହି ସୁବିଧା ମିଳିଥିଲା, କିନ୍ତୁ ଆମେ ଗୋଟିଏ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ୧୦୦ କୋଟି ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷାର କବଚ ପ୍ରଦାନ କରିଛୁ । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ୭୦ ବର୍ଷ ବୟସର ବୃଦ୍ଧବୃଦ୍ଧାମାନଙ୍କ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଆଜି ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଔଷଧର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଉଛି । ଏହାଦ୍ୱାରା କୋଟି କୋଟି ପରିବାରକୁ ବହୁତ ବଡ଼ ସୁବିଧା ମିଳିଛି । ଏହି ଆୟୁଷ୍ମାନ କାର୍ଡ କାରଣରୁ, ୨ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାର ସଞ୍ଚୟ ହୋଇପାରିଛି । ଯେଉଁ ଅର୍ଥ ଔଷଧ ଏବଂ ଅପରେସନ ପଛରେ ଖର୍ଚ୍ଚ ହେବାର ଥିଲା, ତାହା ହେଉଛି ମୋ ପରିବାର ଲୋକଙ୍କର ସଞ୍ଚୟ ହୋଇଛି । ତାହା ହେଉଛି ଗରିବ ପରିବାରର। ତାହା ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ପରିବାରର ସଞ୍ଚୟ। ସେମାନଙ୍କୁ ଏତେ ବଡ଼ ସୁବିଧା ମିଳିଛି ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଦେଶବାସୀଗଣ,

ଆଜି ଗୋଟିଏ କାମ ପାଇଁ ମୋତେ ଆପଣମାନଙ୍କ ସାହାଯ୍ୟ ଦରକାର। ମୁଁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ନିକଟରୁ ଏକ ସାହାଯ୍ୟ ମାଗୁଛି। ମୁଁ ଚାହୁଁଛି ଯେ ସମସ୍ତ ଯୁବପିଢ଼ି ଏହାର ନେତୃତ୍ୱ ନିଅନ୍ତୁ। ଆପଣଙ୍କର ଏକ କିମ୍ବା ଦୁଇ ଘଣ୍ଟା ଦେଶକୁ ବହୁତ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିବାକୁ ଯାଉଛି। ଆପଣଙ୍କୁ ଲାଗୁଥିବ ଯେ ଏହି ଗୋଟିଏ-ଦୁଇ ଘଣ୍ଟାରେ ମୁଁ ଦେଶକୁ କି ଶକ୍ତି ଦେଇପାରିବି, ସେକଥା ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ କହୁଛି । ଆପଣମାନେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ପ୍ରତିଟି ଘରେ ଏକ ଅନୁକୂଳ ବାତାବରଣ ସୃଷ୍ଟି ହେବା ଉଚିତ। ଆଜିକାଲି ଦେଶରେ ଜନଗଣନାର କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲିଛି। ଏହି ଗଣତି କେବଳ ପରିସଂଖ୍ୟାନ ବା ସଂଖ୍ୟାରେ ସୀମିତ ନୁହେଁ, ବରଂ ଏହାର ସୂକ୍ଷ୍ମ ତଥ୍ୟ ଆଧାରରେ ନୀତି ନିର୍ଦ୍ଧାରଣ କରାଯାଏ, ଯୋଜନାମାନ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଏ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ଦେଶ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ପାଇଁ, ନିଜର ରୂପରେଖ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଥାଏ । ସେଥିପାଇଁ ସଠିକ ତଥ୍ୟ ମିଳିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଆବଶ୍ୟକ। କେବେ କେବେ ସରକାରଙ୍କ ପକ୍ଷରୁ ଯେଉଁ ପ୍ରତିନିଧିମାନେ ଆସନ୍ତି, ସେମାନେ ଏତେ ତରବରରେ ଥାଆନ୍ତି ଯେ, କେବେ ବନାନ ଭୁଲ୍‌ ଲେଖିଦିଅନ୍ତି ତ ପୁଣି କେବେ ଆଉ କିଛି ଅଲଗା ଲେଖିଦିଅନ୍ତି । ଏହି କାରଣରୁ ଆମକୁ ସଠିକ ଅନ୍ତିମ ପରିଣାମ ପାଇବାରେ ଅସୁବିଧା ହୁଏ। ଏବେ ଯେତେବେଳେ ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଉପଲବ୍ଧ ଅଛି, ସେତେବେଳେ ଏଥର ଏକ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନିଆଯାଇଛି ଯେ, ଆପଣ ନିଜେ ମଧ୍ୟ ଜନଗଣନାରେ ନିଜର ତଥ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ନିଜ ମୋବାଇଲ୍ ଫୋନ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ଭରି ପାରିବେ। ପରେ କୌଣସି ଅଧିକାରୀ, କୌଣସି ପ୍ରତିନିଧି ଆସିଲେ ଆପଣଙ୍କ ସହ ଆଲୋଚନା କରିବେ। କିନ୍ତୁ ଆପଣ ପରିବାରର ସମସ୍ତ ସଦସ୍ୟ ଏକାଠି ବସି ଯଦି ଡିଜିଟାଲ ମାଧ୍ୟମରେ ନିଜର ପଞ୍ଜିକରଣ କରିଦେଲେ, ତେବେ ସମସ୍ତ ତଥ୍ୟ ଏବଂ ବନାନ ମଧ୍ୟ କୌଣସି ଭୁଲ ହେବ ନାହିଁ। କୌଣସି ବି ତଥ୍ୟ ଯେପରି ଭୁଲ ନ ହେଉ। ଆପଣ ଯେତେ ସଠିକ ତଥ୍ୟ ଦେବେ, ଦେଶକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାରେ ସେତେ ଅଧିକ ସାହାଯ୍ୟ ମିଳିବ। ସେଥିପାଇଁ ମୁଁ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ କହୁଛି ଯେ, ଆପଣ ନିଜ ପରିବାରର ଲୋକଙ୍କୁ ସାଙ୍ଗରେ ବସାଇ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଫର୍ମକୁ ଭଲ ଭାବେ ବୁଝନ୍ତୁ। ପ୍ରଥମେ କାଗଜରେ ଫର୍ମକୁ ଭରି ଦିଅନ୍ତୁ, ଯଦି କିଛି ଭୁଲ ଥାଏ ତେବେ ତାକୁ ସଂଶୋଧନ କରି ନିଅନ୍ତୁ ଏବଂ ତା’ପରେ ପ୍ରଯୁକ୍ତି ମାଧ୍ୟମରେ ତା’କୁ ଡିଜିଟାଲ ମାଧ୍ୟମରେ ଅପଲୋଡ୍‌ କରି ଦିଅନ୍ତୁ। ଆପଣ ଦେଖିବେ, ଦେଶ ଏତେ ବଡ଼ ଗୋଟିଏ କାମ କରିନେବ ଏବଂ ଏହାଦ୍ୱାରା ଦେଶର ସମୟ ଓ ଶକ୍ତି ମଧ୍ୟ ବଞ୍ଚିବ। ସଠିକ କ୍ରମରେ ତଥ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ହେବା ଦ୍ଵାରା ଏହା ବିଶେଷ ଭାବରେ କାମରେ ଆସିବ । ସେଥିପାଇଁ ମୁଁ ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଜନଗଣନାର ଏହି କାର୍ଯ୍ୟରେ ସକ୍ରିୟ ଭାବେ ଜଡ଼ିତ ହେବା ପାଇଁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି ।

ମୋ ଦେଶର ପ୍ରିୟ ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ,

ମୁଁ ଲାଲକିଲ୍ଲାରୁ ପଞ୍ଚ ପ୍ରାଣ ବିଷୟରେ କହିଥିଲି। ଏହି ପଞ୍ଚ ପ୍ରାଣ ଦେଶକୁ ନିଜର ଆତ୍ମଗୌରବ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ନେଇଯିବା, ନିଜର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ସାମର୍ଥ୍ୟର ସହ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ପାଇଁ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସମ୍ବଳ ପ୍ରଦାନ କରିଛି। ଆମକୁ ପ୍ରତି ମୁହୂର୍ତ୍ତରେ ଦାସତ୍ୱର ମାନସିକତାକୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ବିଲୋପ କରିବାକୁ ହେବ। ଯେଉଁ ଭାରତର ସ୍ୱପ୍ନ ନେତାଜୀ ସୁଭାଷ ଚନ୍ଦ୍ର ବୋଷ ଦେଖିଥିଲେ, ବାବା ସାହେବ ଆମ୍ବେଦକର ଦେଖିଥିଲେ, ପଣ୍ଡିତ ନେହରୁ ଦେଖିଥିଲେ, ସର୍ଦ୍ଦାର ପଟେଲ, ଭଗତ୍‌ ସିଂ, ସୁଖଦେବ ଏବଂ ରାଜଗୁରୁ ଦେଖିଥିଲେ । ଡକ୍ଟର ଶ୍ୟାମା ପ୍ରସାଦ ମୁଖାର୍ଜୀ ଦେଖିଥିଲେ, ଭଗବାନ ବିର୍ସା ମୁଣ୍ଡା ଦେଖିଥିଲେ, ଜ୍ୟୋତିବା ଫୁଲେ ଦେଖିଥିଲେ, ସେ ସମସ୍ତଙ୍କ ଠାରୁ ପ୍ରେରଣା ନେଇ ଆମେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଛୁ। ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ଏହି ସଂକଳ୍ପକୁ ପୁଣିଥରେ ଦୋହରାଇବା, ନିଜ ଠାରୁ ଊର୍ଦ୍ଧ୍ୱରେ ରାଷ୍ଟ୍ରର ହିତକୁ ରଖିବା, ଏବଂ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ହିଁ ଆମର ପରିଚୟ ହେବ । ମୁଁ ସବୁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ କହିବି ଯେ, ଏହା ହେଉଛି ଆମର ସମୟ । ମୁଁ ସବୁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ କହିବି ଯେ, ଏହା ଆମର ସମୟ, ଆମର ସୁଯୋଗ ଏବଂ ସଂକଳ୍ପ ମଧ୍ୟ ଆମର। ଆସନ୍ତୁ, ନିଜ ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସଂକଳ୍ପରେ ପରିଣତ କରିବା, ସଂକଳ୍ପକୁ ସାମର୍ଥ୍ୟରେ ଏବଂ ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ସଫଳତାରେ ପରିଣତ କରି ଦେଖାଇବା। ଆସନ୍ତୁ, ପ୍ରତିଟି ପାଦକୁ ବିକାଶ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା। ପାଦରେ ପାଦ ମିଳାଇ ଚାଲିବା, ମନ ସହ ମନ ମିଳାଇବା, ଲକ୍ଷ୍ୟ ସହିତ ସର୍ବଦା ଜଡ଼ିତ ରହିବା ଏବଂ ଏହିପରି ଭାବେ ଗୋଟିଏ ଦୀପରୁ ହଜାର ହଜାର ଦୀପ ଜଳିଉଠିବ । ଆସନ୍ତୁ, ସମସ୍ତେ ମିଶି ବିକଶିତ ଭାରତ ଗଢ଼ିବା। ଏହି ଭାବନା ସହିତ ଏ ଶୁଭ ଅବସରରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭେଚ୍ଛା।

ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ,

ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ!

ବନ୍ଦେ ମାତରମ୍‌!

ବନ୍ଦେ ମାତରମ୍‌!

ବନ୍ଦେ ମାତରମ୍‌!

ବହୁତ-ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!