डॉ अविनाश जी, डॉ मालकोंडैया जी और उपस्थित सभी महानुभाव, आज उपस्थित सभी जिन महानुभावों को सम्‍मानित करने का मुझे सौभाग्‍य मिला है, उन सब का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, बधाई देता हूं। उनका क्षेत्र ऐसा है कि वे न तो प्रेस कॉन्‍फ्रेस कर सकते हैं, और न ही दुनिया को यह बता सकते हैं कि वे क्‍या रिसर्च कर रहे हैं और रिसर्च पूरी हो जाने के बाद भी, उन्‍हें दुनिया के सामने अपनी बात खुले रूप से रखने का अधिकार नहीं होता। यह अपने आप में बड़ा कठिन काम है। लेकिन यह तब संभव होता है, जब कोई ऋषि मन से इस कार्य से जूझता है। हमारे देश में हजारों सालों पहले वेदों की रचना हुई और यह आज भी मानव जाति को प्रेरणा देते हैं। लेकिन किसको पता है कि वेदों की रचना किसने की? वे ऋषि भी तो वैज्ञानिक थे, वैज्ञानिक तरीके से समाज जीवन का दर्शन करते थे, दिशा देते थे। वैज्ञानिकों का भी वैसा ही योगदान है। वे एक लेबोरेटरी में तपस्‍या करते हैं। अपने परिवार तक की देखभाल भूल कर, अपने आप को समर्पित कर देते हैं। और तब जाकर मानव कल्‍याण के लिए कुछ चीज दुनिया के सामने प्रस्‍तुत होती है। ऐसी तपस्‍या करने वाले और देश की ताकत को बढ़ावा देने वाले, मानव की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्‍प रखने वाले ये सभी वैज्ञानिक अभिनंदन के बहुत-बहुत अधिकारी हैं।

बहुत तेजी से दुनिया बदल रही है। युद्ध के रूप-रंग बदल चुके हैं, रक्षा और संहार के सभी पैरामीटर बदल चुके हैं। टेकनोलॉजी जैसे जीवन के हर क्षेत्र को प्री-डोमिनंट्ली ड्राइव कर रही है , पूरी तरह जीवन के हर क्षेत्र में बदल रही है, वैसे ही सुरक्षा के क्षेत्र में भी है और गति इतनी तेज है कि हम एक विषय पर काँसेपचुलाइज़ करते हैं, तो उससे पहले ही दो-कदम आगे कोई प्रॉडक्ट निकल आता है और हम पीछे-के-पीछे रह जाते हैं। इसलिए भारत के सामने सबसे बड़ा चैलेंज जो मैं देख रहा हूं, वो यह है कि हम समय से पहले काम कैसे करे? अगर दुनिया 2020 में इन आयुद्धों को लेकर आने वाली है, तो क्‍या हम 2018 में उसके लिए पूरा प्रबंध करके मैदान में आ सकते हैं? विश्‍व में हमारी स्‍वीकृति, हमारी मांग, ‘किसी ने किया, इसलिए हम करेंगे’ उस में नहीं है| हम विज़ुलाइज़ करें कि जगत ऐसे जाने वाला है और हम इस प्रकार से चलें, तो हो सकता है कि हम लीडर बन जाए और डीआरडीओ को स्थिति को रेस्पोंड करना होगा, डीआरडीओ ने प्रो-एक्टिव होकर एजेंडा सेट करना है। हमें ग्‍लोबल कम्‍युनिटी के लिए एजेंडा सेट करना है। ऐसा नहीं है कि हमारे पास टेलेंट नहीं है, या हमारे पास रिसोर्स नहीं है। लेकिन हमने इस पर ध्‍यान नहीं दिया है क्योंकि हमारे स्वभाव में ‘अरे चलो चलता है क्या तकलीफ़ है’, ये एटीटियूड है ।

दूसरा जो मुझे लगता है, डीआरडीओ का कंट्रीब्‍यूशन कम नहीं है। इसका कंट्रीब्‍यूशन बहुत महत्‍वपूर्ण है और इसे जितनी बधाई दी जाए, वह कम है। आज इस क्षेत्र में लगे हुए छोटे-मोटे हर व्‍यक्ति अभिनंदन के अधिकारी है। लेकिन कभी उन्‍हें वैज्ञानिक तरीके से भी सोचने की आवश्‍यकता है। अभी मैं अविनाश जी से चर्चा कर रहा था। डीआरडीओ और डीआरडीओ से जुड़े हुए प्राइवेट इंडिविजुअल और कंपनीज़, इनको तो हम अवॉर्ड दे रहे हैं और अच्छा भी है,लेकिन भविष्य के लिए मुझे लगता है आवश्यकता है कि डीआरडीओ एक दूसरी कैटेगिरी के अवार्ड की व्‍यवस्‍था करे, जिसका डीआरडीओ से कोई लेना देना नहीं होगा। जिसने डीआरडीओ के साथ कभी कोई काम नहीं किया है, लेकिन इस फील्‍ड में रिसर्च करने में उन्‍होंने कोई दूसरा कॉन्‍ट्रीब्‍यूशन किया है, किसी प्रोफेसर के रूप में, आईटी के क्षेत्र में। ऐसे लोगों को भी खोजा जाए, परखा जाए तो हमें एक टेलेंट जो आउट ऑफ डीआरडीओ है उनका भी पूल बनाने की हमें संभावना खोजनी चाहिए और इसलिए हमें उस दिशा में सोचना चाहिए।

तीसरा मेरा एक आग्रह है कि हम कितने ही रिसर्च क्‍यों न करें, लेकिन आखिरकार चाहे जल सेना हो, थल सेना हो, या नौसेना हो सबसे पहले नाता सैनिक का है, क्‍योंकि उसी से उसका गुजारा होता है और ऑपरेट भी उसी को करना है। लेकिन सेना के जवान और अफसर जो रोजमर्रा की उस जिंदगी को जीते हैं, काम करते वक्‍त उसके मन में भी बड़े इनोवेटिव आइडियाज आते हैं। जब वो किसी चीज को उपयोग करता है तो उसे लगता है कि इसकी बजाय ऐसा होता तो अच्‍छा होता। उसको लगता है कि लेफ्ट साइड दरवाजा खुलता है तो राइट साइड होता तो और अच्‍छा होता। यह कोई बहुत बड़ा रॉकेट साइंस नहीं होगा। क्‍या हम कभी हमारे तीनों बलों को, जल सेना, थल सेना और नौसेना उनमें से भी जो आज सेवा में रत है, उनको कहा जाए कि आप में कोई इनोवेटिव आइडियाज होंगे तो उनको भी शामिल किया जाएगा। आप जैसे अपना काम करते हैं। जैसे एजुकेशन में बदलाव कैसे आ रहा है। एक टीचर जो अच्‍छे प्रयोगकर्ता है, उनके आगे चलकर आइडियाज, इंस्‍टीट्यूशन में बदल कर आने वाली पीढि़यों के लिए काम आता है। वैसे ही सेना में काम करने वाले टेकनिकल पर्सन और सेवा में रत लोग हैं। हो सकता है पहाड़ में चलने वाली गाड़ी रेगिस्‍तान में न चले तो उसके कुछ आइडियाज होंगे। हमें इसको प्रमोट करना चाहिए और एक एक्‍सटेंशन ऑफ डीआरडीओ टाइप, हमें इवोल्‍व करना चाहिए। अगर यह हम इवोल्‍व करते हैं तो हमारे तीनों क्षेत्रों में काम करने वाले इस प्रकार के टेलेंट वाले जो फौजी है, अफसर है मैं मानता हूं, वे हमें ज्‍यादा प्रेक्टिकल सोल्‍यूशन दे सकते हैं या हमें वो स्‍पेसिफिक रिसर्च करने के लिए वो आइडिया दे सकते हैं कि इस समस्‍या का समाधान डीआरडीओ कर सकता है। उस पर हमें सोचना चाहिए।

चौथा, जो मुझे लगता है - कि हम डीआरडीओ के माध्‍यम से समाज में किस प्रकार से देशभर में इस क्षेत्र में रूचि रखने वाली अच्छे विश्‍वविद्यालयों की पहचान करें, और एक साल के लिए विशेष रूप से इन साइंटिस्‍टों को उन विश्‍वविद्यालयों के साथ अटैच करें? उन विश्‍वविद्यालयों के छात्रों के साथ डायलॉग हों, मिलना-जुलना हो, साल में आठ-दस सिटिंग हों। तो वहाँ जो हमारे नौजवान हैं उनके लिए साइंटिस्‍ट एक बहुत बड़ी इंस्पिरेशन बन जाएगा। जो सोचता था कि मैं अपना करियर यह बनाऊंगा, वो सोचता है कि इन्होने अपना जीवन खपा दिया, चलो मैं भी अपने कैरियर के सपने छोड़ दूँ और इसमे अपना जीवन खपा दूँ तो, हो सकता है वो देश को कुछ देकर जाए।

यही हमारा काम है संस्‍कार-संक्रमण का कि एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन, हमारे इस सामर्थ को कैसे परकोलेट भी करे और डिवेल्प भी करें और जब तक हम मैकेनिज्‍म नहीं बनाएंगे ये संभव नहीं है। यूनिवर्सिटी में हम कन्‍वोकेशन में किसी साइंटिस्‍ट को बुला लें वो एक बात है, लेकिन हम उनके टेलेंट, उनकी तपस्या और उनके योगदान को किस प्रकार से उनके साथ जोड़ें वो आपके बहुत काम आएगा।

क्‍या इन साइंटिस्टों को सेना के लोगों के साथ इन्‍टरेक्‍शन करने का मौका मिलता है ? क्‍योंकि इन्होंने इतनी बड़ी रिसर्च की है। सेना के जवान को मिलने से रक्षा का विश्‍वास पैदा होता है। क्‍या कभी सेना के जवान ने उस ऋषि को देखा है, जिसने उसकी रक्षा के लिए 15 साल लेबोरिटी में जिदंगी गुजारी है। जिस दिन सेना में काम करने वाला व्‍यक्ति उस ऋषि को और उस साइंटिस्‍ट को देखेगा, आप कल्पना कर सकतें हैं उस ऑनर का फल कैसा होगा और इसलिए हमारी पूरी व्‍यवस्‍था एक दायरे से बाहर निकाल करके जिस में ह्यूमन टच हो, एक इंस्पिरेशन हो, उस दिशा में उसको कैसे ले जा सके। मैं मानता हूं कि अभी जिन लोगों का सम्‍मान हुआ, उनसे इंटरेक्‍ट करके देंखे, आपको अनुभव होगा कि इस फंक्‍शन से उनका भी इंस्पिरेशन हाई हो जाएगा कि वो काम करने वाले को भी प्रेरणा देगा और जिसने उनके लिए काम किया है उन जवानो का भी इंस्पिरेशन हाई हो जाएगा कि अच्छा हमारे लिए इतना काम होता है । उसी प्रकार से डीआरडीओ को कुछ लेयर बनाने चाहिए ऐसा मुझे लगता है हालाँकि इसमें मेरा ज्‍यादा अध्‍ययन नहीं है पर एक तो है हाईटेक की तरफ जाना और बहुत बड़ा नया इनोवेशन करना है लेकिन एट द सेम टाइम रोजमर्रा की जिदंगी जीने वाला जो हमारा फौजी है, उसकी लाइफ में कम्‍फर्ट आए। ऐसे साधनों की खोज, उसका निर्माण यह एक ऐसा अवसर है। आज उसका वाटर बैग जो तीन सौ ग्राम का है तो उतना ही अच्छा बैग डेढ सौ ग्राम का कैसे बने, ताकि उसको वजन कम धोना पड़े । आज उसके जूते कितने वेट के हैं, पहाड़ों में एक तकलीफ रहती है, तो रेगिस्‍तान में दूसरी तकलीफ होती है, इसमें भी बहुत रिसर्च करना है। क्या इस दिशा में कभी रिसर्च होता ? क्‍या कभी जूते बनाने वाली कंपनी और डीआरडीओ के साथ इनका इन्‍टरफेस होता है। क्‍या ये रिसर्च करके देते हैं। ये लोग डीआरडीओ को एक लैब से बाहर निकल करके और जो उनकी रोजमर्रा की जिदंगी है। अब देखिए हम इतने इनोवेशन के साथ लोग आएंगे, इतनी नई चीजें देंगे। जो हमारी समय की सेना के जवानों के लिए बहुत ही कम्‍फर्टेबल व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध करा सकते हैं, बहुत लाभ कर सकता है। इस दिशा में क्‍या कुछ सोचा जा सकता है।

एक और विषय मेरे मन में आता है - आज डीआरडीओ के साथ करीब 50 लेबो‍रेट्री भिन्‍न- भिन्‍न क्षेत्रों में काम कर रही हैं क्‍या हम तय कर सकते हैं कि मल्‍टी-टैलेंट का उपयोग करने वाली पांच लैब हम ढूंढे 50 में से और हम एक फ़ैसला करेंगें कि 5 लैब ऐसी होंगी, जिसमें नीचे से ऊपर एक भी व्‍यक्ति 35 साल से ऊपर की उम्र का नहीं होगा। सब के सब विलो 35 होंगे। अल्‍टीमेट डिसिजन लेने वाले भी 35 साल से नीचे के होंगे। एक बार हिम्‍मत के साथ हिन्‍दुस्तान की यंगेस्‍ट टीम को हम अवसर दें, और उन्हें बतायें कि दुनिया आगे बढ़ रही है, आप बताओ। मैं विश्‍वास के साथ कहता हूं कि इस देश के टेलेंट में दम है, वो हमें बहुत कुछ नई चीजें दे सकता है।

अब आजकल साईबर सिक्‍योरिटी की बहुत बड़ी लड़ाई हैं। मैं मानता हूं कि वो 20-25 साल का नौजवान बहुत अच्छे ढंग से यह करके दे देगा हमें। क्‍योंकि उसका विकास इस दिशा में हुआ है, क्‍योंकि ये चीजें तुरंत उसके ध्‍यान में आतीं हैं। क्या हम पांच लैब टोटली डेडीकेटड टू 35 ईयर्स बना सकते हैं? डिसिजन मैकिंग प्रोसेस आखिर तक 35 से नीचे के लोगों के हाथों में दे दी जाए। हम रिस्‍क ले लेंगे। हमने बहुत रिस्‍क लिए हैं। एक रिस्‍क और ले लेंगे। आप देखिए एक नई हवा की जरूरत है। एक फ्रेश एयर की जरूरत है। और फ्रेश एयर आएगी। हमें लाभ होगा।

डिफेंस सिक्‍योरिटी को लेकर हमे हमारे सामान्‍य स्‍टुडेंट्स को भी तैयार करना चाहिए। क्‍या कभी हमने सरकार के द्वारा, स्‍कूलों के द्वारा किए गये साइन्स फेयर में कहा है, कि यह साइंस फेयर 2015 विल बी टोटली डेडीकेटड टू डिफेंस रिलेटिड इश्यूस? सब नौजवान खोजेगे, टीचर इन्‍ट्रेस्‍ट लेंगें, स्‍टडीज होंगीं, प्रोजैक्‍ट रिपोर्ट बनेंगे। लाखों की तादात में हमारे स्‍टूडेंस की इन्वाल्वमेंट, डिफेन्स टेक्‍नोलॉजी एक बहुत बड़ा काम हैं, डिफेंस रिसर्च बहुत बड़ा काम है, यह सोचने की खिड़की खुल जाएगी। हो सकता है दो-चार लोग ऐसे भी निकल आएं जिनको मन कर जाए की चलो इसको हम करियर बनायें अपना। हमने देखा है कि आजकल टेक्निकल यूनि‍वर्सिटीज की एक ग्‍लोबल रॉबोट ओलंपिक होता है। राष्ट्र स्तर का भी होता है। क्‍या हम उसको स्‍पेशली डीआरडीओ से लिंक करके रोबोट कॅंपिटिशन टोटली डेडीकेटड टू डिफेन्स बना सकते हैं?

अब देखिए ये जो नौजवान रॉबोर्ट के द्वारा फुटबाल खेलते हैं, रॉबोर्ट के द्वारा क्रिकेट खेलते हैं, वो सब उसमें मज़ा भी लेते हैं, और उसका कॉम्पीटिशन भी होता है। लेकिन उसको 2-3 स्टेप आगे हम सोच सकते हैं। एक नये तरीके से, नयी सोच के साथ, और सभी लोगों को जोड़ कर के हम इस पूरी व्यवस्था को विकसित करें और साथ साथ, समय की माँग है, दुनिया हमारा इंतज़ार नहीं करेगी। हमें ही समय से पहले दौड़ना पड़ेगा और इसलिए, हम जो भी सोचें, जो भी करें, जी- जान से जुट कर के समय से पहले करने का संकल्प करें। वरना कोई प्रॉजेक्ट कन्सीव हुआ 1992 में, और 2014 में "हा, अभी थोड़े दिन लगेंगे" की हालत में होगा, तो ये दुनिया बहुत आगे बढ़ जाएगी। इसलिए, आज डीआरडीओ से संबंधित सभी प्रमुख लोगों से मिलने का मुझे अवसर मिला है, जो इतना उत्तम काम करते हैं, और जिनमें पोटेन्षियल है। लोग कहते हैं कि मोदी जी आपकी सरकार से लोगों को बहुत अपेक्षायें हैं। जो करेगा उसी से तो अपेक्षा होती है, जो नहीं करेगा उस से कौन अपेक्षा करेगा? तो डीआरडीओ से भी मेरी अपेक्षा क्यों है? मेरी अपेक्षा इसलिए है, क्योंकि डीआरडीओ में करने का सामर्थ्य है, ये मैं भली-भाँति अनुभव करता हूँ। आपके अंदर वो सामर्थ्य है और आपने कर के दिखाया है और इसलिए मुझे विश्वास है कि आप लोग यह कर सकते हैं ।

फिर एक बार सभी वैज्ञानिक महोदयो को देश की सेवा करने के लिए उत्तम योगदान करने के लिए, बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूँ, बहुत बधाई देता हूँ। धन्यवाद।

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भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

मैं मेरा भाषण प्रारंभ करूं... उसके पहले मैं देख रहा हूं... बहुत सारे मेरे बाल मित्र, मेरे कलाकार मित्र, हमारी बेटियां बढ़िया-बढ़िया पेंटिंग बनाकर के ले आए हैं। कुछ लोगों ने मेरी मां का भी चित्र बनाया है। मैं आप सबसे प्रार्थना करता हूं कि आप मेरे एसपीजी के लो इन्हें कलेक्ट कर लेंगे.. आप उनको दे दीजिए ये मुझे पहुंच जाएगा और अगर पीछे आपने अपना नाम पता लिका है एड्रेस लिखा है तो मैं जरूर आपको धन्यवाद की चिट्ठी भेजूंगा। और मैं एसपीजी के लोगों को भी कहूगा.. सारे कलेक्ट कर लीजिए... जल्दवाजी मत कीजिए.. भारत माता की... भारत माता की ... भारत माता की... जो इस चुनाव में उम्मीदवार है उनसे मेरा आग्रह है जो कैंडिडेट हैं वो जरा आगे आ जाएं.. जो उम्मीदवार हैं इस चुनाव में.. ऐसेंबली का चुनाव जो लड़ रहे हैं... मैं जरा हमारे उन उम्मीदवारों को मिलकर के आता हूं... बोलिए भारत माता की...

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

हरे कृष्णा...कृष्णा-कृष्णा हरे-हरे...हरे रामा...रामा-रामा हरे-हरे...

जय गौरांग महाप्रभु! आमार शोकल बांगाली भाई ओ बोनेदेर…

आमार ओन्तोरिक शुभेच्छा!

साथियों,

आज पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग चल रही है। आज तमिलनाडु में भी मतदान हो रहा है...मैं सभी मतदाता साथियों का अभिनंदन करता हूं। मेरा सभी मतदाताओं से आग्रह है कि इस बार मतदान के नए रिक़ॉर्ड बनने चाहिए। लोकतंत्र का ये उत्सव...हमें पूरे जोश से मनाना है। और मैं देख रहा हूं... मैं जब से राजनीति में आया हूं, मैं शायद कह सकता हूं ये पहला ऐसा चुनाव है पिछले 50 साल में। पिछले 50 साल में पहला चुनाव ऐसा है, जिसमें हिंसा कम से कम हुई है। वरना हर हफ्ता किसी को फांसी पर लटका देते थे और बोलते थे आत्महत्या कर ली। यानि एक प्रकार से गुंडाराज चलता था। मैं एलेक्शन कमीशन का हृदय से अभिनंदन करता हूं, उन्होंने लोकतंत्र की फिर से एक बार बंगाल की धरती पर प्रतिष्टा की है। शांतिपूर्ण मतदान करवाने में इलेक्शन कमीशन की सफलता ये बहुत बड़ी सिद्धी है। मैं यहां के सरकारी कर्मचारियों का भी अभिनंदन करता हूं कि वे भी इस बार शांतिपूर्ण मतदान कराने में बहुत जिम्मेवारी पूर्वक अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं। और अब तक जो मुझे जानकारी मिली है मतदान भी पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

साथियों,

नादिया, भक्ति की धरती है...शक्ति, क्रांति और संस्कृति की धरती है। और आज इस धरती पर...मैं पोरिबोर्तन की आंधी देख रहा हूं। ये परिबोर्तन की आंधी है। कृष्णानगर में आज, भॉय पर भरोसे की विजय का विश्वास दिख रहा है। ये उत्साह, ये उमंग... ये जोश भरोसे का है। भय जा रहा है भरोसा आगे बढ़ रहा है। बरसों से जिनकी आवाज़ को दबाकर रखा गया था...वो अब एक सुर में बोल रहे हैं... गांव-गांव बोल रहे है... गली-गली बोल रहे हैं.... स्त्री-पुरुष सब बोल रहे हैं...युवा-बुजुर्ग सब बोल रहे हैं... एक ही आवाज... पालटानो दोरकार… पालटानो दोरकार… पालटानो दोरकार… पालटानो दोरकार… पालटानो दोरकार…

साथियों,

कुछ दिनों पहले असम, केरलम और पुडुचेरी में भी मतदान संपन्न हुआ है। वहां भी रिकॉर्ड मतदान हुआ है। पहले भी हमने देखा है...देश में जहां-जहां भारी मतदान हुआ है...वहां बीजेपी को प्रचंड विजय मिली है। प्रचंड विजय मिली है… बेटे गिर जाओगे... बैठो बेटा… परमात्मा आपको सुखी रखे… बैठो बेटा गिर जाओगे... आपके हाथ में जो कमल वो खिलने वाला है… बैठो बेटा... ऐसा है आप बैठिए अपनी जगह पर, कहीं चोट लग जाएगी.. साथियों जहां-जहां ये स्थिति बनी विजय प्राप्त हुआ। इसलिए बीजेपी-NDA की विजय का परचम पूरी शक्ति से लहराना है, ये लहराने वाला है। कमल खिलना तय है। 4 मई को बंगाल में भी बीजेपी की विजय का जश्न होगा...मिठाई भी बंटेगी....और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी...वैसे मैंने सुना है...झालमुरी ने भी कुछ लोगों को झन्नाटेदार झटका दिया है। झालमुरी मैंने खाई..लेकिन झाल टीएमसी को लगी है !

साथियों,

यहां तो टीएमसी के विधायकों, मंत्रियों...लोकल नेताओं और इनके सिंडिकेट के खिलाफ इतना गुस्सा है...इतना गुस्सा है...कि कई जिलों में टीएमसी का खाता तक नहीं खुलेगा। मैं बिल्कुल विश्वास से कहता हूं। मैंने इस बार बंगाल में बहुत दौरा किया है और जो उत्साह देखा है, माताओं-बहनों में जो जुनून देखा है और इसलिए… तृणमूलेर जावा निश्चितो !

साथियों,

15 साल पहले वाम के विरुद्ध जनता ने बिगुल फूंका था। आज तृणमूल के जंगलराज के विरुद्ध...बंगाल की जनता हर गली-मोहल्ले में शंख फूंक रही है, जनता-जनार्दन मैदान में है। मैं देख रहा हूं ये चुनाव हमलोग नहीं लड़ रहे हैं। ना मोदी लड़ रहा है ना मेरे साथी लड़ रहे हैं। इस बार बंगाल का चुनाव बंगाल की जनता-जनार्दन लड़ रही है। चुनाव का नेतृत्व बंगाल की जनता-जनार्दन के हाथ में है। मैं जहां भी जा रहा हूं, लोग एक ही बात कहते हैं...कि अब बहुत हो गया.. एनफ इज एनफ
आर नॉय... अनेक होलो… आर नॉय ! 15 साल बाद ये साफ-साफ दिख रहा है...बंगाल के किसान, खेत से लेकर मंडी तक, हर भॉय से मुक्ति के लिए वोट दे रहे हैं। बंगाल के सरकारी कर्मचारी, TMC के भॉय से बाहर निकलने के लिए वोट दे रहे हैं। बंगाल के डॉक्टर भॉय से मुक्त होकर, एक बेहतर सिस्टम के लिए वोट दे रहा है। यहां के वकील, सच्चा न्याय दिलाने के लिए वोट दे रहे हैं। शिक्षक, भॉयमुक्त स्कूल-कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए मतदान कर रहे हैं। दुकानदार, रिक्शा वाले -टैक्सी वाले...TMC के सिंडिकेट से मुक्ति के लिए वोट कर रहे हैं। और बंगाल की पुलिस भी...गुंड़ों से आदेश लेने के बजाय जनता की की सेवा के लिए वोट डाल रहे है। यानि बंगाल में हर क्षेत्र, हर वर्ग...अब BJP के भरोसे को, एक मौका देना चाहता है। हर कोई कह रहा है... भॉय OUT…भोरशा-IN… भरोसा... भरोसा.. बीजेपी को भोट दीन !

साथियों,

TMC की निर्मम सरकार की पहचान है- झूठ बोलो, झांसा दो। 15 साल के इनके हर वादे...आधे-अधूरे हैं... आप इनके महाझूठ देख लीजिए... इन्होंने हर ब्लॉक में मॉडल रेजीडेंशियल स्कूल बनाने की घोषणा की थी। लेकिन हुआ क्या? बंगाल में सैकड़ों स्कूल बंद हो गए।

साथियों,

TMC ने घर-घर पाइप से पानी पहुंचाने का वायदा किया था। हर घर नल तो नहीं पहुंचा...लेकिन जल-भराव का गंदा पानी आपके घर-द्वार तक ज़रूर आ गया। साथियों,TMC ने 10 लाख MSMEs और हज़ारों बड़े उद्योग लगाने का वायदा किया था। लेकिन बीते सालों में यहां हज़ारों फैक्ट्रियां बंद हो गईं... जूट मिलों में ताले लगा दिए गए।

साथियों,

यहां आप सभी को अस्पताल से जुड़ी कितनी सारी परेशानियां हैं। TMC की दुर्नीति ऐसी है...कि इन्होंने कल्याणी एम्स के लिए भी कदम-कदम पर रुकावटें डालीं। लेकिन बीजेपी सरकार ने इसके बावजूद एम्स पूरा किया... और आज ये एम्स आपको अपनी सेवाएं दे रहा है। लेकिन साथियों, तृणमूल ने धुबुलिया के टीबी अस्पताल के साथ क्या किया... ये आप सभी जानते हैं। हर चुनाव में इस अस्पताल को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन आज तक वो वादे पूरे नहीं हुए।

साथियों,

TMC का लूट का मॉडल, यहां की नगरपालिका में सबने देखा है। ये शहर बेहाल है...सड़कें, ड्रैनेज, नदी से होने वाला कटाव...यानि चारों तरफ परेशानियां ही परेशानियां हैं। लेकिन TMC के लोग, सिर्फ लूटने में ही बिज़ी हैं।

साथियों,

कृष्णानगर की पहचान यहां की नदियों से है। जलंगी नदी, जिसे हम प्यार से 'खोरे' कहते हैं...आज बहुत बुरी स्थिति में पहुंच गई है। अंजना नदी को तो 'लैंड माफिया' ने चुरा ही लिया है! निर्मम सरकार में नदियाँ भी सुरक्षित नहीं हैं। साथियों, टीएमसी का ये महा-जंगलराज... अब नहीं चलेगा...‘एई शब.. चलबे ना’! एई शब... एई शब... एई शब....कानून, अत्याचारियों और भ्रष्टाचारियों का पूरा हिसाब करेगा। जिसने आपको लूटा है...उसको लौटाना पड़ेगा।

साथियों,

आप सभी जानते हैं... मोदी का मंत्र है- 'सबका साथ, सबका विकास', और 'निर्मम सरकार कहती है… करती है… 'घुसपैठियों का साथ, घुसपैठियो का विकास। तृणमूल के लोग...घुसपैठियों को फर्ज़ी डॉक्यूमेंट्स बनाने की दुकानें चलाते हैं...घुसपैठ कराते हैं...यहां उनको झुग्गियों में बसाते हैं। TMC की ऐसी हर दुकान को बंद करना ज़रूरी है। सीमा तभी सुरक्षित रहती है...जब पुलिस, सेना, BSF और नागरिक...ये सभी मिलकर काम करते हैं। 4 मई के बाद... बगाल में भी सुरक्षा की नई गारंटी शुरू होने वाली है।

साथियों,

मैं श्री हरीचांद ठाकुर, श्री गुरुचांद ठाकुर और बॉरो माँ को प्रणाम करते हुए...एक भरोसा देने यहां आया हूं। हमारे किसी भी मतुआ परिवार, नामशूद्र परिवार, शरणार्थी परिवार को...तृणमूल से भयभीत होने की ज़रूरत नहीं है। आपको कोई हाथ भी नहीं लगा सकता है। जो भी शरणार्थी है... जो भी धर्म के आधार पर हुई प्रताड़ना के कारण… मुसीबतों के कारण… अपने धर्म के प्रति स्वाभिमान के कारण भारत आए हैं...मोदी उनके साथ खड़ा है। बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही... CAA के तहत नागरिकता देने का काम और तेज़ होगा।आपको हर वो कागज़ मिलेगा...हर उस योजना का लाभ मिलेगा... जो किसी भी भारतीय को मिलता है। ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC के महा-जंगलराज का बहुत बड़ा नुकसान...हमारी बहनों-बेटियों को उठाना पड़ा है। हंसखाली में एक नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या...ये TMC के भय वाले मॉडल का ही उदाहरण है। यहां बेटियों की तस्करी की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। इस भय से बंगाल की बेटियों को मुक्ति चाहिए।

साथियों,

टीएमसी बंगाल की बहनों का सच्चा सशक्तिकरण कभी भी नहीं कर सकती... इसका उदाहरण आपने पिछले हफ्ते संसद में भी देखा है। बीजेपी, संसद और विधानसभा में... महिलाओं के लिए तैंतीस परसेंट आरक्षण को लागू करना चाहती है। संसद में इस पर चर्चा हुई। लेकिन टीएमसी नहीं चाहती थी कि बंगाल की बहनों को ज्यादा सीटें मिलें। इसलिए इन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर... संसद में कानून को रोक दिया। बंगाल की हर महिला, TMC को इस अपराध की सज़ा जरूर देगी।

साथियों,

कुछ दिन पहले...मैंने बंगाल के लोगों को 6 गारंटी दी थी। आज मैं बंगाल की बहनों को 10 गारंटी देता हूं।

पहली गारंटी- बंगाल में बहन-बेटियों पर अत्याचार करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। हर ब्लॉक में महिला थाने बनेंगे... और सड़क पर सुरक्षा के लिए विशेष दस्ते बनाए जाएंगे।

दूसरी गारंटी- बंगाल पुलिस में बेटियों की बड़े पैमाने पर भर्ती की जाएगी...

तीसरी गारंटी- बंगाल बीजेपी के, मातृशक्ति भोरशा कार्ड से...एक साल में 36 हजार रुपये सीधे महिलाओं के बैंक खाते में भेजे जाएंगे।

चौथी गारंटी- बंगाल बीजेपी सरकार, बेटियों को ग्रेजुएशन के लिए 50 हजार रुपये की मदद देगी।

पांचवीं गारंटी- बंगाल बीजेपी सरकार, गर्भवती माताओं को, 21 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देगी।

छठी गारंटी- बंगाल बीजेपी सरकार...शिशुओं के बेहतर पोषण के लिए 36 हजार रुपए अतिरिक्त देने वाली है।

सातवीं गारंटी- सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा। किसी भी योजना में जितना ब्याज नहीं मिलता है, इतना ब्याज इस सुकन्या योजना में मिलेगा।

आठवीं गारंटी...-महिलाओं को स्वरोजगार के लिए...20 लाख रुपए तक का मुद्रा लोन दिया जाएगा। और उसकी गारंटी मोदी देगा। साथ ही, लाखों बहनों को लखपति दीदी बनाने के लिए भी मदद दी जाएगी।

नौवीं गारंटी- बंगाल की करोड़ों बहनों-बेटियों को आयुष्मान योजना के तहत... 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। सर्वाइकल कैंसर का मुफ्त टीका और सिकल सेल की मुफ्त जांच भी बेटियों को मिलेगी।

दसवीं गारंटी- पीएम आवास योजना के तहत...बंगाल के गरीब परिवारों की बहनों के नाम पर घर की रजिस्ट्री होगी...मालकिन का हक बहनों को मिलेगा घर बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपए सीधे बैंक खाते में जमा किए जाएंगे। और साथियों…ये मोदी की दस गारंटी और मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

यहां कृष्णानगर के घूर्णी के कलाकार का दर्द किसी से छिपा नहीं है।

जिनकी कला की पूरी दुनिया कायल है...जो अपनी कला से मिट्टी में प्राण फूंक देते हैं...उनके बनाए मिट्टी के पुतले आज आंसू बहा रहे हैं... रो रहे हैं। और यहाँ की 'निर्मम सरकार' ने उन्हें क्या दिया? टीएमसी सरकार ने उनके जीवन को बेजान बना दिया है।अपने ऐसे ही भाई-बहनों के लिए हमने पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू करके उन्हें आर्थिक मदद देने का अभियान चलाया है। लेकिन यहां की सरकार, विश्वकर्मा योजना को बंगाल में लागू नहीं होने दे रही।

साथियों,

मोदी ‘One District One Product’ के जरिए लोकल को वोकल और वोकल को ग्लोबल बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं निर्मम सरकार ने पूरे बंगाल में एक ही काम किया है, 15 साल में एक ही काम ‘One District One Syndicate’ ये सिंडिकेट बनाने का उद्योग और सिंडिकेट के द्वारा बंगाल को लूटने का कारोबार।

साथियों,

इस धरती के बारे में कहा जाता है....धोनो धन्नो पुष्पे भोरा अमादेर ई बोशुंधरा... ये सिर्फ गीत के बोल नहीं हैं...ये बीजेपी का संकल्प है। बीजेपी, सही मायने में बंगाल को समृद्धि का प्रदेश बनाना चाहती है। हमारे आलू किसान, हमारे धान किसान... और हमारे जूट किसान, जूट श्रमिक...मैं सभी को भरोसा देता हूं...कि आपकी हर समस्या का ईमानदारी से समाधान किया जाएगा।

साथियों,

कृष्णानगर में ही 'फेडी साहब' की वो कोठियाँ थीं, जहाँ हमारे किसान भाइयों को नील की खेती के लिए जंजीरों से बांधकर कोड़े मारे जाते थे। और मैं आज कृष्णानगर में देख रहा हूं...जैसे हमारे पूर्वजों ने गुलामी की जंजीरें तोड़ी थीं.. वैसे ही बंगाल की जनता निर्मम सरकार की बनाई भय की बेड़ियों को तोड़कर फेंकने जा रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं...डबल इंजन सरकार, डबल तेजी से बंगाल का विकास करेगी. इसके लिए, इन सभी साथियों को हर बूथ पर विजयी बनाना होगा। बनाएंगे... हर बूथ पर जाएंगे... एक-एक मतदाता को समझाएंगे... मतदान कराएंगे... बूथ को जीतेंगे... मैं एक बार फिर इतनी विशाल संख्या में आने के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ बोलिए... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... बहुत-बहुत धन्यवाद