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डॉ अविनाश जी, डॉ मालकोंडैया जी और उपस्थित सभी महानुभाव, आज उपस्थित सभी जिन महानुभावों को सम्‍मानित करने का मुझे सौभाग्‍य मिला है, उन सब का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, बधाई देता हूं। उनका क्षेत्र ऐसा है कि वे न तो प्रेस कॉन्‍फ्रेस कर सकते हैं, और न ही दुनिया को यह बता सकते हैं कि वे क्‍या रिसर्च कर रहे हैं और रिसर्च पूरी हो जाने के बाद भी, उन्‍हें दुनिया के सामने अपनी बात खुले रूप से रखने का अधिकार नहीं होता। यह अपने आप में बड़ा कठिन काम है। लेकिन यह तब संभव होता है, जब कोई ऋषि मन से इस कार्य से जूझता है। हमारे देश में हजारों सालों पहले वेदों की रचना हुई और यह आज भी मानव जाति को प्रेरणा देते हैं। लेकिन किसको पता है कि वेदों की रचना किसने की? वे ऋषि भी तो वैज्ञानिक थे, वैज्ञानिक तरीके से समाज जीवन का दर्शन करते थे, दिशा देते थे। वैज्ञानिकों का भी वैसा ही योगदान है। वे एक लेबोरेटरी में तपस्‍या करते हैं। अपने परिवार तक की देखभाल भूल कर, अपने आप को समर्पित कर देते हैं। और तब जाकर मानव कल्‍याण के लिए कुछ चीज दुनिया के सामने प्रस्‍तुत होती है। ऐसी तपस्‍या करने वाले और देश की ताकत को बढ़ावा देने वाले, मानव की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्‍प रखने वाले ये सभी वैज्ञानिक अभिनंदन के बहुत-बहुत अधिकारी हैं।

बहुत तेजी से दुनिया बदल रही है। युद्ध के रूप-रंग बदल चुके हैं, रक्षा और संहार के सभी पैरामीटर बदल चुके हैं। टेकनोलॉजी जैसे जीवन के हर क्षेत्र को प्री-डोमिनंट्ली ड्राइव कर रही है , पूरी तरह जीवन के हर क्षेत्र में बदल रही है, वैसे ही सुरक्षा के क्षेत्र में भी है और गति इतनी तेज है कि हम एक विषय पर काँसेपचुलाइज़ करते हैं, तो उससे पहले ही दो-कदम आगे कोई प्रॉडक्ट निकल आता है और हम पीछे-के-पीछे रह जाते हैं। इसलिए भारत के सामने सबसे बड़ा चैलेंज जो मैं देख रहा हूं, वो यह है कि हम समय से पहले काम कैसे करे? अगर दुनिया 2020 में इन आयुद्धों को लेकर आने वाली है, तो क्‍या हम 2018 में उसके लिए पूरा प्रबंध करके मैदान में आ सकते हैं? विश्‍व में हमारी स्‍वीकृति, हमारी मांग, ‘किसी ने किया, इसलिए हम करेंगे’ उस में नहीं है| हम विज़ुलाइज़ करें कि जगत ऐसे जाने वाला है और हम इस प्रकार से चलें, तो हो सकता है कि हम लीडर बन जाए और डीआरडीओ को स्थिति को रेस्पोंड करना होगा, डीआरडीओ ने प्रो-एक्टिव होकर एजेंडा सेट करना है। हमें ग्‍लोबल कम्‍युनिटी के लिए एजेंडा सेट करना है। ऐसा नहीं है कि हमारे पास टेलेंट नहीं है, या हमारे पास रिसोर्स नहीं है। लेकिन हमने इस पर ध्‍यान नहीं दिया है क्योंकि हमारे स्वभाव में ‘अरे चलो चलता है क्या तकलीफ़ है’, ये एटीटियूड है ।

दूसरा जो मुझे लगता है, डीआरडीओ का कंट्रीब्‍यूशन कम नहीं है। इसका कंट्रीब्‍यूशन बहुत महत्‍वपूर्ण है और इसे जितनी बधाई दी जाए, वह कम है। आज इस क्षेत्र में लगे हुए छोटे-मोटे हर व्‍यक्ति अभिनंदन के अधिकारी है। लेकिन कभी उन्‍हें वैज्ञानिक तरीके से भी सोचने की आवश्‍यकता है। अभी मैं अविनाश जी से चर्चा कर रहा था। डीआरडीओ और डीआरडीओ से जुड़े हुए प्राइवेट इंडिविजुअल और कंपनीज़, इनको तो हम अवॉर्ड दे रहे हैं और अच्छा भी है,लेकिन भविष्य के लिए मुझे लगता है आवश्यकता है कि डीआरडीओ एक दूसरी कैटेगिरी के अवार्ड की व्‍यवस्‍था करे, जिसका डीआरडीओ से कोई लेना देना नहीं होगा। जिसने डीआरडीओ के साथ कभी कोई काम नहीं किया है, लेकिन इस फील्‍ड में रिसर्च करने में उन्‍होंने कोई दूसरा कॉन्‍ट्रीब्‍यूशन किया है, किसी प्रोफेसर के रूप में, आईटी के क्षेत्र में। ऐसे लोगों को भी खोजा जाए, परखा जाए तो हमें एक टेलेंट जो आउट ऑफ डीआरडीओ है उनका भी पूल बनाने की हमें संभावना खोजनी चाहिए और इसलिए हमें उस दिशा में सोचना चाहिए।

तीसरा मेरा एक आग्रह है कि हम कितने ही रिसर्च क्‍यों न करें, लेकिन आखिरकार चाहे जल सेना हो, थल सेना हो, या नौसेना हो सबसे पहले नाता सैनिक का है, क्‍योंकि उसी से उसका गुजारा होता है और ऑपरेट भी उसी को करना है। लेकिन सेना के जवान और अफसर जो रोजमर्रा की उस जिंदगी को जीते हैं, काम करते वक्‍त उसके मन में भी बड़े इनोवेटिव आइडियाज आते हैं। जब वो किसी चीज को उपयोग करता है तो उसे लगता है कि इसकी बजाय ऐसा होता तो अच्‍छा होता। उसको लगता है कि लेफ्ट साइड दरवाजा खुलता है तो राइट साइड होता तो और अच्‍छा होता। यह कोई बहुत बड़ा रॉकेट साइंस नहीं होगा। क्‍या हम कभी हमारे तीनों बलों को, जल सेना, थल सेना और नौसेना उनमें से भी जो आज सेवा में रत है, उनको कहा जाए कि आप में कोई इनोवेटिव आइडियाज होंगे तो उनको भी शामिल किया जाएगा। आप जैसे अपना काम करते हैं। जैसे एजुकेशन में बदलाव कैसे आ रहा है। एक टीचर जो अच्‍छे प्रयोगकर्ता है, उनके आगे चलकर आइडियाज, इंस्‍टीट्यूशन में बदल कर आने वाली पीढि़यों के लिए काम आता है। वैसे ही सेना में काम करने वाले टेकनिकल पर्सन और सेवा में रत लोग हैं। हो सकता है पहाड़ में चलने वाली गाड़ी रेगिस्‍तान में न चले तो उसके कुछ आइडियाज होंगे। हमें इसको प्रमोट करना चाहिए और एक एक्‍सटेंशन ऑफ डीआरडीओ टाइप, हमें इवोल्‍व करना चाहिए। अगर यह हम इवोल्‍व करते हैं तो हमारे तीनों क्षेत्रों में काम करने वाले इस प्रकार के टेलेंट वाले जो फौजी है, अफसर है मैं मानता हूं, वे हमें ज्‍यादा प्रेक्टिकल सोल्‍यूशन दे सकते हैं या हमें वो स्‍पेसिफिक रिसर्च करने के लिए वो आइडिया दे सकते हैं कि इस समस्‍या का समाधान डीआरडीओ कर सकता है। उस पर हमें सोचना चाहिए।

चौथा, जो मुझे लगता है - कि हम डीआरडीओ के माध्‍यम से समाज में किस प्रकार से देशभर में इस क्षेत्र में रूचि रखने वाली अच्छे विश्‍वविद्यालयों की पहचान करें, और एक साल के लिए विशेष रूप से इन साइंटिस्‍टों को उन विश्‍वविद्यालयों के साथ अटैच करें? उन विश्‍वविद्यालयों के छात्रों के साथ डायलॉग हों, मिलना-जुलना हो, साल में आठ-दस सिटिंग हों। तो वहाँ जो हमारे नौजवान हैं उनके लिए साइंटिस्‍ट एक बहुत बड़ी इंस्पिरेशन बन जाएगा। जो सोचता था कि मैं अपना करियर यह बनाऊंगा, वो सोचता है कि इन्होने अपना जीवन खपा दिया, चलो मैं भी अपने कैरियर के सपने छोड़ दूँ और इसमे अपना जीवन खपा दूँ तो, हो सकता है वो देश को कुछ देकर जाए।

यही हमारा काम है संस्‍कार-संक्रमण का कि एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन, हमारे इस सामर्थ को कैसे परकोलेट भी करे और डिवेल्प भी करें और जब तक हम मैकेनिज्‍म नहीं बनाएंगे ये संभव नहीं है। यूनिवर्सिटी में हम कन्‍वोकेशन में किसी साइंटिस्‍ट को बुला लें वो एक बात है, लेकिन हम उनके टेलेंट, उनकी तपस्या और उनके योगदान को किस प्रकार से उनके साथ जोड़ें वो आपके बहुत काम आएगा।

क्‍या इन साइंटिस्टों को सेना के लोगों के साथ इन्‍टरेक्‍शन करने का मौका मिलता है ? क्‍योंकि इन्होंने इतनी बड़ी रिसर्च की है। सेना के जवान को मिलने से रक्षा का विश्‍वास पैदा होता है। क्‍या कभी सेना के जवान ने उस ऋषि को देखा है, जिसने उसकी रक्षा के लिए 15 साल लेबोरिटी में जिदंगी गुजारी है। जिस दिन सेना में काम करने वाला व्‍यक्ति उस ऋषि को और उस साइंटिस्‍ट को देखेगा, आप कल्पना कर सकतें हैं उस ऑनर का फल कैसा होगा और इसलिए हमारी पूरी व्‍यवस्‍था एक दायरे से बाहर निकाल करके जिस में ह्यूमन टच हो, एक इंस्पिरेशन हो, उस दिशा में उसको कैसे ले जा सके। मैं मानता हूं कि अभी जिन लोगों का सम्‍मान हुआ, उनसे इंटरेक्‍ट करके देंखे, आपको अनुभव होगा कि इस फंक्‍शन से उनका भी इंस्पिरेशन हाई हो जाएगा कि वो काम करने वाले को भी प्रेरणा देगा और जिसने उनके लिए काम किया है उन जवानो का भी इंस्पिरेशन हाई हो जाएगा कि अच्छा हमारे लिए इतना काम होता है । उसी प्रकार से डीआरडीओ को कुछ लेयर बनाने चाहिए ऐसा मुझे लगता है हालाँकि इसमें मेरा ज्‍यादा अध्‍ययन नहीं है पर एक तो है हाईटेक की तरफ जाना और बहुत बड़ा नया इनोवेशन करना है लेकिन एट द सेम टाइम रोजमर्रा की जिदंगी जीने वाला जो हमारा फौजी है, उसकी लाइफ में कम्‍फर्ट आए। ऐसे साधनों की खोज, उसका निर्माण यह एक ऐसा अवसर है। आज उसका वाटर बैग जो तीन सौ ग्राम का है तो उतना ही अच्छा बैग डेढ सौ ग्राम का कैसे बने, ताकि उसको वजन कम धोना पड़े । आज उसके जूते कितने वेट के हैं, पहाड़ों में एक तकलीफ रहती है, तो रेगिस्‍तान में दूसरी तकलीफ होती है, इसमें भी बहुत रिसर्च करना है। क्या इस दिशा में कभी रिसर्च होता ? क्‍या कभी जूते बनाने वाली कंपनी और डीआरडीओ के साथ इनका इन्‍टरफेस होता है। क्‍या ये रिसर्च करके देते हैं। ये लोग डीआरडीओ को एक लैब से बाहर निकल करके और जो उनकी रोजमर्रा की जिदंगी है। अब देखिए हम इतने इनोवेशन के साथ लोग आएंगे, इतनी नई चीजें देंगे। जो हमारी समय की सेना के जवानों के लिए बहुत ही कम्‍फर्टेबल व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध करा सकते हैं, बहुत लाभ कर सकता है। इस दिशा में क्‍या कुछ सोचा जा सकता है।

एक और विषय मेरे मन में आता है - आज डीआरडीओ के साथ करीब 50 लेबो‍रेट्री भिन्‍न- भिन्‍न क्षेत्रों में काम कर रही हैं क्‍या हम तय कर सकते हैं कि मल्‍टी-टैलेंट का उपयोग करने वाली पांच लैब हम ढूंढे 50 में से और हम एक फ़ैसला करेंगें कि 5 लैब ऐसी होंगी, जिसमें नीचे से ऊपर एक भी व्‍यक्ति 35 साल से ऊपर की उम्र का नहीं होगा। सब के सब विलो 35 होंगे। अल्‍टीमेट डिसिजन लेने वाले भी 35 साल से नीचे के होंगे। एक बार हिम्‍मत के साथ हिन्‍दुस्तान की यंगेस्‍ट टीम को हम अवसर दें, और उन्हें बतायें कि दुनिया आगे बढ़ रही है, आप बताओ। मैं विश्‍वास के साथ कहता हूं कि इस देश के टेलेंट में दम है, वो हमें बहुत कुछ नई चीजें दे सकता है।

अब आजकल साईबर सिक्‍योरिटी की बहुत बड़ी लड़ाई हैं। मैं मानता हूं कि वो 20-25 साल का नौजवान बहुत अच्छे ढंग से यह करके दे देगा हमें। क्‍योंकि उसका विकास इस दिशा में हुआ है, क्‍योंकि ये चीजें तुरंत उसके ध्‍यान में आतीं हैं। क्या हम पांच लैब टोटली डेडीकेटड टू 35 ईयर्स बना सकते हैं? डिसिजन मैकिंग प्रोसेस आखिर तक 35 से नीचे के लोगों के हाथों में दे दी जाए। हम रिस्‍क ले लेंगे। हमने बहुत रिस्‍क लिए हैं। एक रिस्‍क और ले लेंगे। आप देखिए एक नई हवा की जरूरत है। एक फ्रेश एयर की जरूरत है। और फ्रेश एयर आएगी। हमें लाभ होगा।

डिफेंस सिक्‍योरिटी को लेकर हमे हमारे सामान्‍य स्‍टुडेंट्स को भी तैयार करना चाहिए। क्‍या कभी हमने सरकार के द्वारा, स्‍कूलों के द्वारा किए गये साइन्स फेयर में कहा है, कि यह साइंस फेयर 2015 विल बी टोटली डेडीकेटड टू डिफेंस रिलेटिड इश्यूस? सब नौजवान खोजेगे, टीचर इन्‍ट्रेस्‍ट लेंगें, स्‍टडीज होंगीं, प्रोजैक्‍ट रिपोर्ट बनेंगे। लाखों की तादात में हमारे स्‍टूडेंस की इन्वाल्वमेंट, डिफेन्स टेक्‍नोलॉजी एक बहुत बड़ा काम हैं, डिफेंस रिसर्च बहुत बड़ा काम है, यह सोचने की खिड़की खुल जाएगी। हो सकता है दो-चार लोग ऐसे भी निकल आएं जिनको मन कर जाए की चलो इसको हम करियर बनायें अपना। हमने देखा है कि आजकल टेक्निकल यूनि‍वर्सिटीज की एक ग्‍लोबल रॉबोट ओलंपिक होता है। राष्ट्र स्तर का भी होता है। क्‍या हम उसको स्‍पेशली डीआरडीओ से लिंक करके रोबोट कॅंपिटिशन टोटली डेडीकेटड टू डिफेन्स बना सकते हैं?

अब देखिए ये जो नौजवान रॉबोर्ट के द्वारा फुटबाल खेलते हैं, रॉबोर्ट के द्वारा क्रिकेट खेलते हैं, वो सब उसमें मज़ा भी लेते हैं, और उसका कॉम्पीटिशन भी होता है। लेकिन उसको 2-3 स्टेप आगे हम सोच सकते हैं। एक नये तरीके से, नयी सोच के साथ, और सभी लोगों को जोड़ कर के हम इस पूरी व्यवस्था को विकसित करें और साथ साथ, समय की माँग है, दुनिया हमारा इंतज़ार नहीं करेगी। हमें ही समय से पहले दौड़ना पड़ेगा और इसलिए, हम जो भी सोचें, जो भी करें, जी- जान से जुट कर के समय से पहले करने का संकल्प करें। वरना कोई प्रॉजेक्ट कन्सीव हुआ 1992 में, और 2014 में "हा, अभी थोड़े दिन लगेंगे" की हालत में होगा, तो ये दुनिया बहुत आगे बढ़ जाएगी। इसलिए, आज डीआरडीओ से संबंधित सभी प्रमुख लोगों से मिलने का मुझे अवसर मिला है, जो इतना उत्तम काम करते हैं, और जिनमें पोटेन्षियल है। लोग कहते हैं कि मोदी जी आपकी सरकार से लोगों को बहुत अपेक्षायें हैं। जो करेगा उसी से तो अपेक्षा होती है, जो नहीं करेगा उस से कौन अपेक्षा करेगा? तो डीआरडीओ से भी मेरी अपेक्षा क्यों है? मेरी अपेक्षा इसलिए है, क्योंकि डीआरडीओ में करने का सामर्थ्य है, ये मैं भली-भाँति अनुभव करता हूँ। आपके अंदर वो सामर्थ्य है और आपने कर के दिखाया है और इसलिए मुझे विश्वास है कि आप लोग यह कर सकते हैं ।

फिर एक बार सभी वैज्ञानिक महोदयो को देश की सेवा करने के लिए उत्तम योगदान करने के लिए, बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूँ, बहुत बधाई देता हूँ। धन्यवाद।

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On May 2 Didi will get certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state: PM Modi
April 17, 2021
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People from all corners of India are seen in Asansol. But the misgovernance of Bengal governments affected Asansol: PM Modi
PM Modi says on May 2, which is the day of assembly election results, Didi will be given the certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state
In Asansol, PM Modi says Mamata Banerjee has skipped several meetings called by the Centre to discuss many key issues
PM Modi promises to implement all the welfare schemes of the central government in West Bengal if BJP is elected to power in the state

 

नमोष्कार !

मां कल्याणेश्वरी और घाघर बूढ़ी चंडी...आज मेरे लिए अवसर है इस पवित्र धरती को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करने का। बांग्ला नव वर्ष शुरू होने के बाद आज बंगाल में मेरी ये पहली सभा है। नव वर्ष में बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन की सरकार बनने जा रही है।

चार दोफार मोतोदान, टीएमसी होलो खान-खान !

(चार दौर का मतदान, टीएमसी खंड-खंड हो गई)। 

बाकी चार दोफार मोतोदान, दीदी-भाइपो टिकिट कटान ! 

(बाकी चार बार का मतदान, दीदी भाइपो का पत्ता साफ)।

पांचवें चरण के मतदान में भी कमल के फूल पर बटन दबा करके भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज सुबह से बहुत बड़ी तादाद में लोग निकले हैं। बहुत भारी मतदान हो रहा है। मैं अब तक मतदान करने वाले सभी मतदाताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और उनका धन्यवाद करता हूं।  

साथियो

आसनसोल हो, दुर्गापुर हो, इस पूरे क्षेत्र में बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता बहुत पहले से है हमेशा से है। द्वारकानाथ टैगोर जी, राजेन मुखर्जी, बीरेंद्रनाथ मुखर्जी जैसे अनेक व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र की संपदा को देश की आत्मनिर्भरता के संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया।

साइकिल से लेकर रेल तक, पेपर से लेकर स्टील तक, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक, ऐसे अनेक कारखानों में, यहां की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए पूरे देश से लोग यहां आते हैं। आसनसोल एक प्रकार से लघु भारत है, हिन्दुस्तान का हर व्यक्ति यहां मिल जाएगा। लेकिन बंगाल में जो सरकारें रहीं, उनके कुशासन ने आसनसोल को कहां से कहां पहुंचा दिया। जहां लोग चाकरी के लिए आते थे, आज यहां से पलायन कर रहे हैं। मां-माटी-मानुष की बात करने वाली दीदी ने, यहां हर तरफ माफिया राज फैला दिया है। आसनसोल की प्राकृतिक संपदा को लूटने के लिए कोयला माफिया, नदियों की बालू को लूटने के लिए अवैध खनन माफिया, सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए भू-माफिया।

साथियो

यहां सालनपुर, बाराबनी, जमुरिया रानीगंज, उखड़ा, बल्लालपुर से लेकर बांकुड़ा बॉर्डर तक अवैध कोयला खनन का साम्राज्य फैला हुआ है। यहां के कोयला, रेत और दूसरे खनिजों का काला माल कहां तक पहुंचता है, किस-किस तक पहुंचता है, ये हर कोई जानता है। बंगाल के ट्रक वालों को, ट्रांसपोर्ट से जुड़े साथियों को, यहां के उद्यमियों को जो भाइपो टैक्स देना पड़ता है, वो भी बंगाल के लोग भली-भांति जानते हैं। 

साथियो

इस चुनाव में आपका एक वोट सिर्फ टीएमसी को साफ करेगा, इतना ही नहीं है बल्कि आपका एक वोट यहां से माफिया राज को भी साफ करेगा। आपको पता है आपके वोट की ताकत क्या है? आपका एक वोट पूरे माफिया राज को यहां साफ कर देगा। ये ताकत है आपके वोट की।  

भाइयो-बहनो 

आज आपसे शिकायत करना चाहता हूं...करूं ?...आपके खिलाफ है शिकायत...करूं ?...बुरा तो नहीं मानोंगे न...लेकिन मेरी शिकायत जरा देखिए…मैं यहां दोबार आया हूं.... लोकसभा के चुनाव में....जब मुझे प्रधानमंत्री बनना था और आप से वोट मांगने आया था। बाबुल जी के लिए वोट मांगने आया था। लेकिन पहले जब आया, तब तो मेरे लिए वोट मांगा था, फिर भी एक चौथाई भी लोग नहीं थे सभा में। लेकिन आज चारों तरफ...मैंने ऐसी सभा पहली बार देखी है। अब बताइए, मेरी शिकायत मिठी है कि कड़वी है। आज आपने ऐसा दम दिखा दिया है। ऐसी ताकत दिखा दिए...मैं जहां देख सकता हूं...मुझे लोग ही लोग दिखते हैं...बाकी कुछ दिखता ही नहीं है। क्या कमाल कर दिया है आप लोगों ने। लेकिन आगे का काम बहुत महत्वपूर्ण है। और वो है वोट देने के लिए जाना, वोट देने के लिए औरों को ले जाना। करोंगे...पक्का करोंगे...सब लोग करोंगे...देखिए तभी यहां से ये माफिया राज समाप्त होगा। ये माफियाशाही तभी समाप्त होगी।

और भाइयो-बहनो

मैं बंगाल जहां भी गया हूं यही माहौल है। और उधर क्या है?

दीदी, ओ दीदी, 

देखिए दीदी...ओ दीदी...2 मई में अब सिर्फ आधा महीना बचा है। आधा चुनाव हो चुका है। सिर्फ कुछ दिन और। कोयला धुले, मोयला जाय ना !

भाइयो और बहनो, 

सोनार बांग्ला के संकल्प के साथ बीजेपी सरकार यहां आपकी हर मुश्किल कम करने के लिए काम करेगी। बंगाल में कानून व्यवस्था का राज स्थापित किया जाएगा। कानून के राज में यहां नए उद्योग लगेंगे, बंगाल में निवेश बढ़ेगा। बीजेपी सरकार में हर कोई अपना काम करेगा। आपके जीवन में टीएमसी के तोलाबाजों की जो घुसपैठ हुई है, उसे जीरो किया जाएगा, उसे दूर किया जाएगा। पुलिस अपनी जिम्मेवारी निभाएगी, अपना काम करेगी, राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग अपने जनसेवा का दायित्व निभाएंगे, अपना काम पूरा करेंगेप्रशासन अपनी जिम्मेवारियों को निभाते हुए जनता जनार्दन की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात काम करेगा। और सरकार अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने के लिए काम करेगी। और बीजेपी कार्यकर्ता...मैं आपको विश्वास दिलाता हूं आपकी सेवा में हरदम खड़ा रहेगा। और इसमें जो भी खेला करने की कोशिश करेगा, उस पर कानून के तहत उतनी ही सख्त कार्रवाई भी होगी।

भाइयो और बहनो,

दीदी ने बीते दस सालों में विकास के नाम पर आपके साथ विश्वासघात किया है। विकास के हर काम में, हर काम के आगे दीदी दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की सुविधा दी, तो दीदी दीवार बन गईं। केंद्र सरकार ने शरणार्थियों की मदद के लिए कानून बनाया, तो दीदी इसका भी विरोध करने लगीं। केंद्र सरकार ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति के लिए कानून बनाया, तो दीदी फिर आगबबूला हो गईं। केंद्र सरकार ने किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने वाले कानून बनाए, तो दीदी विरोध में उतर आईं। केंद्र सरकार ने किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने शुरू किए, तो दीदी ने इससे भी किसानों को वंचित रख दिया। 

साथियो

बंगाल को विकास रोकने वाली नहीं, डबल इंजन की सरकार चाहिए। बंगाल की बीजेपी सरकार, आपका लाभ कराने वाली हर उस योजना को लागू करेगी, जिन्हें दीदी की सरकार ने रोका हुआ है। पहली ही कैबिनेट में पीएम किसान सम्मान निधि पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। बंगाल के हर किसान के खाते में 18 हजार रुपए सीधे ट्रांसफर हो, जिसको दीदी ने रोकने की कोशिश की। 2 मई के बाद नई सरकार बनने के बाद दीदी नहीं रोक पाएंगी। क्योंकि सरकार आपने बनाई है...आपके लिए बनाई है...और वो आपके लिए काम करेगी।

भाइयो और बहनो

आप मुझे बताइए... दीदी को अगर आप लोगों के दु:ख-दर्द की परवाह होती, तो क्या वो आपकी भलाई के...आपके हित वाले कामों को रोकने का काम कभी करती क्या ? ये रुकावटे डालती क्या ? दीवार बनती क्या ? दीदी को अगर आपकी तकलीफ की चिंता होती, तो क्या वो तोलाबाजी होने देतीं क्या ? जरा इधर से जवाब दीजिए तोलाबाजी होने देतीं क्या ?  सिंडिकेट को आगे बढ़ाती क्या ? कटमनी वसूलने देतीं क्या ?

साथियो

दीदी, अपने अहंकार में दीदी इतनी बड़ी हो गई हैं कि हर कोई उन्हें अपने आगे छोटा दिखता है। केंद्र सरकार ने अनेक बार अनेक विषयों पर बात करने के लिए बैठकें बुलाई हैं, लेकिन दीदी कोई न कोई कारण बताकर इन बैठकों में नहीं आतीं। जैसे कोरोना पर पिछली दो बैठकों में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। मां गंगा की सफाई के लिए देश में इतना बड़ा अभियान शुरू हुआ, लेकिन दीदी उससे जुड़ी जो बैठक होती है, उसमें भी नहीं आईं। एक-दो बार न आने का तो समझ में आता है साथियों, लेकिन दीदी ने यही तरीका बना लिया है। दीदी बंगाल के लोगों के लिए कुछ देर का समय नहीं निकाल पातीं। ये उन्हें समय की बर्बादी लगता है। और जब दीदी के तोलाबाज, कोरोना के दौरान भेजे गए राशन को लूटते हैं, तो वो उन्हें खुली छूट देती हैं। 

केंद्रीय टीमें चाहे सहयोग के लिए आएं या फिर करप्शन की जांच के लिए, दीदी उनको रोकने के लिए पूरे संसाधन लगा देती हैं। दीदी केंद्रीय वाहिनी ही नहीं, सेना तक को बदनाम करती हैं, राजनीति के लिए झूठे आरोप लगाती हैं। दीदी, खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं। दीदी चोखे ओहोन्कारेर पोरदा। (दीदी की आंखों पर अहंकार का पर्दा चढ़ा हुआ है।)

भाइयो और बहनो,

दीदी की राजनीति सिर्फ विरोध और गतिरोध तक सीमित नहीं है। बल्कि दीदी की राजनीति, प्रतिशोध की खतरनाक सीमा को भी पार कर गई है। बीते 10 साल में बीजेपी के अनेकों कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। अभी मेरी... यहां ऊपर आने से पहले... कई पीड़ित परिवारों से बात हुई है। दीदी की वजह से न जाने कितनी माताओं ने अपने बेटों को खोया है, न जाने कितनी बहनें आज भी अपने भाई का इंतजार कर रही हैं। दीदी की निर्ममता, उनकी असंवेदनशीलता हमें कुछ दिन पहले ही फिर एकबार दिखाई दी है, सुनाई दी है।

साथियो

कूचबिहार में जो हुआ, उस पर कल एक ऑडियो टेप आपने सुना होगा। ऑडियो टेप सुना क्या आपने ? 5 लोगों की दुखद मृत्यु के बाद दीदी किस तरह राजनीति कर रही हैं, ये इस ऑडियो टेप के अंदर साफ-साफ खुल गया है, सामने आता है। इस ऑडियो टेप में कूचबिहार के टीएमसी नेता को कहा जा रहा है कि मारे गए लोगों के शवों के साथ रैली निकालो। दीदी, वोटबैंक के लिए कहां तक जाएंगी आप ? सच्चाई ये है कि दीदी ने कूचबिहार में मारे गए लोगों की मृत्यु से भी अपना सियासी फायदा करने की सोची। शवों पर राजनीति करने की दीदी को बहुत पुरानी आदत है।

साथियो

दीदी ने बंगाल में ये हाल बना दिया है। जनता ने भी जब उनके विरोध की कोशिश की, तो उसको कुचल दिया गया है। बंगाल की जनता के अधिकार, दीदी के लिए कोई मायने नहीं रखते। 2018 के पंचायत चुनाव पश्चिम बंगाल कभी नहीं भूल सकता। बर्धमान से लेकर बांकुरा, बीरभूमि, मुर्शीदाबाद के लोगों को आज भी याद है कैसे उनके अधिकारों को छीना गया।

आप सोचिए

बंगाल में 20 हजार से ज्यादा पंचायतों में सीधे दीदी के तोलाबाजों को निर्वाचित कर दिया गया। दीदी ने इतना आतंक फैलाया कि एक तिहाई से भी ज्यादा पंचायतों में कैंडिडेट पर्चा तक नहीं भर पाए। हमले के डर से WhatsApp तक पर नॉमिनेशन फाइल करने पड़े। जीत के बाद भी जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी। लोकतंत्र के इस अपमान से, लोकतंत्र को इस तरह कमजोर किए जाने से सुप्रीम कोर्ट तक ने नाराजगी जताई। लेकिन दीदी ने लोकतंत्र का सम्मान नहीं किया, लोकतंत्र की परवाह नहीं की।

साथियो

बंगाल और भारत के लिए रोबी ठाकुर का आदर्श है - चित्तो जेथा, भॉय- शुन्नो। हृदय जहां भय मुक्त रहे। लेकिन दीदी का प्रयास रहता है- चित्तो जेथा भॉया-क्रांतो। हृदय जहां भयाक्रांत रहे। दीदी को इस बार के चुनाव में छप्पा वोट नहीं करने दिया जा रहा, तो वो और बौखला गई हैं। दीदी को गुंडागिरी-मस्तानगिरी का खैला नहीं करने दिया जा रहा है, तो दीदी बौखला गई हैं। दीदी द्वारा हर पैंतरा आजमाया जा रहा है ताकि बंगाल के लोगों को वोट देने से रोका जाए। टीएमसी द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा रहा है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक दीदी ने मोदी के खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया है।

दीदी, ओ दीदी, ओ आदरणीय दीदी

आप जितनी चाहे साजिशें कर लीजिए, जितनी चाहे कोशिशें कर लीजिए। इस बार आपकी साजिश बंगाल के लोग खुद ही नाकाम कर रहे हैं। इस बार बंगाल के लोगों ने ही आपके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बंगाल के लोगों ने आप पर अभूतपूर्व विश्वास किया था। अब वो आपको हमेशा-हमेशा के लिए एक ऐसा सॉर्टिफिकेट देने वाली है बंगाल की जनता इस चुनाव में, जो आप जीवन भर घर में लटका कर रख सकती हो। कौन सा सॉर्टिफेकट जनता देने वाली है, जो 2 मई को आने वाला है ? वो सॉर्टिफिकेट आने वाला है भूतपूर्व मुख्यमंत्री। यानि दीदी, ये बंगाल की जनता आपको आजीवन एक सॉर्टिफिकेट देने वाली है भूतपूर्व मुख्यमंत्री...लेकर घुमते रहना। 

भाइयो-बहनो

बंगाल के लोग, बंगाल के लोगों से आपकी नफरत भी महसूस कर रहे हैं। दीदी के करीबी, शिड्यूल्ड कास्ट के मेरे भाइयों और बहनों को भिखारी कहते हैं, दीदी चुप रहती हैं। दीदी के करीबी बीजेपी को वोट देने वालों को बंगाल से बाहर फेंकने की धमकी देते हैं, दीदी चुप रहती हैं। किसी की दुखद मृत्यु पर दीदी की संवेदना भी वोटबैंक का फिल्टर लगाकर ही प्रकट होती है।

दीदी

पश्चिम बंगाल आपकी दुर्नीति से परेशान है, इतना ही नहीं है, बल्कि बंगाल को आपकी नीयत पर भी शक है। इसलिए पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है-   

कीच्छू नेइ तृनोमूल, एबार भोट पॉद्दोफूले। (कुछ नहीं अब तृणमूल में, इस बार वोट कमल-फूल में।)

भाइयो और बहनो,

10 साल तक दीदी ने बंगाल को भेदभाव और पक्षपात वाली सरकार दी है। हालात तो ये है कि स्पोर्ट्स क्लबों, खिलाड़ियों तक की मदद में भी दीदी ने भेदभाव किया। जो स्पोर्ट्स क्लब दीदी का गुणगान करे, उनके गीत गाए, उन्हें पैसा। जो खेल पर अपना ध्यान दे, बंगाल का नाम रोशन करे, वो स्पोर्ट्स क्लब यहां पैसे के लिए तरसते हैं। दीदी की इसी दुर्नीति की वजह से बुज़ुर्गों को मिलने वाला ‘भाता’ तक सभी लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। गांव की सड़क को भी दीदी की सरकार ने राजनीति का शिकार बना दिया। मनरेगा की मज़दूरी हो या फिर आपदा की राहत हो, दीदी की सरकार ने सबमें भेदभाव किया, पक्षपात किया। आपको तीन साल पहले की रामनवमी याद है? आसनसोल-रानीगंज के दंगे कौन भूल सकता है! इन दंगों में सैकड़ों लोगों की जीवन भर की मेहनत राख हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का हुआ, पटरी पर दुकान लगाने वाले और छोटे व्यापारियों का हुआ। 

दंगाइयों का साथ किसने दिया? - दीदी ने।

तुष्टिकरण की नीति किसने पनपाई? – दीदी ने।

किसके कारण पुलिस दंगाइयों के पक्ष में खड़ी रही? –  दीदी के।

एक ही जवाब है न...एक ही जवाब है न...हर कोई कह रहा है दीदी के कारण...दीदी के कारण...।

भाइयो और बहनो,

जो विकास पर विरोध को, विश्वास पर प्रतिशोध को, सुशासन पर राजनीति को, प्राथमिकता देती है, ऐसी सरकार पश्चिम बंगाल का भला नहीं कर सकती। इसलिए बंगाल को आशोल पोरिबोरतोन चाहिए। आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में सबका साथसबका विकाससबका विश्वास के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल के युवाओं को रोजगार के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में कानून के राज के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल की भलाई के लिए।

साथियो

दीदी के राज में महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ है, उसकी चर्चा तक दीदी ने नहीं होने दी है। राज्य सरकार के आंकड़े छिपाकर, महिलाओं पर अत्याचार की खबरों को दबाकर दीदी ने सबसे बड़ा खेला, बंगाल की महिलाओं के साथ ही किया है। मैं आज विशेष रूप से बंगाल की बहन-बेटियों को एक बात के लिए आश्वस्त करता हूं। बीजेपी की सरकार हर वर्ग, हर मत-मज़हब को उसकी बेटी की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करेगी। दीदी की सरकार ने यहां रेप जैसे संगीन अपराध के दोषियों को जल्द से जल्द सजा सुनाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अड़ंगा डाला, उसको रोक दिया। देश भर में ऐसी एक हजार अदालतें खोली जा रही हैं लेकिन दीदी ने बेटियों को न्याय दिलाने वाली ऐसी एक भी अदालत खोलने नहीं दी। बीजेपी सरकार में फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी तेजी से निर्माण किया जाएगा। गरीब, दलित, आदिवासी बेटियों को यहां से दूसरे राज्यों में भेजने का जो अवैध काम किया जाता है, उस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

साथियो,

सोनार बांग्ला का यही संकल्प बंगाल बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में रखा है। बंगाल में Ease of Living, Ease of Doing Business का माहौल बनाया जाएगा। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर, रोड, रेल, एयर, इंटरनेट, हर प्रकार की कनेक्टिविटी को डबल इंजन सरकार, डबल स्पीड के साथ आधुनिक बनाएगी। इस क्षेत्र को आर्सेनिक युक्त ज़हरीले पानी से मुक्ति मिले, इसके लिए पाइप से हर घर जल के प्रकल्प को तेज़ी से यहां लागू किया जाएगा। दीदी ने जो कुछ भी लाभ आप तक पहुंचने से रोका है, वो तेज़ी से मिलेगा। डबल इंजन की सरकार में डबल बेनिफिट और डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा। 

एबार शोंघात नॉय, शॉहोजोगिता होबे!

एबार बिरोध नॉय, बिकाश होबे!

एबार मोने भय नॉय, पेटे भात होबे!

एबार शिक्खा होबे, शिल्पो होबे, कोर्मो-शोंस्थान होबे! 

आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए...मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए 

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद !