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Entire world is now discussing global warming and ways to mitigate it: PM Modi
Two landmark initiatives emerged in #COP21. India & France played key roles in those: PM
International Solar Alliance will impact generations in a big way: PM Modi
US, India, France took initiative of innovation; let is innovate and protect our environment: PM
India expressed keenness on solar alliance. France was very helpful, did everything possible to bring all nations together: PM
Solar alliance to ensure that the world gets more energy: PM Modi

मंच पर वि‍राजमान फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ श्रीमान ओलांद फ्रांस से आए हुए Senior Ministers हरि‍याणा के Governor श्री, मुख्‍यमंत्री श्री, श्रीमान पीयुष गोयल जी फ्रांस का Delegation और वि‍शाल संख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाइयों और बहनों!

पि‍छले एक वर्ष से सारी दुनि‍याँ में इस बात की चर्चा थी कि‍ Global Warming के सामने दुनि‍याँ कौन से कदम उठाए कि‍न बातों का संकल्‍प करे? और उसकी पूर्ति‍ के लिए कौन से रास्‍ते अपनाएं? पेरि‍स में होने वाली COP 21 के संबंध में पूरी दुनि‍याँ में एक उत्‍सुकता थी, संबधि‍त सारे लोग अपने-अपने तरीके से उस पर प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे थे, और करीब-करीब दो सप्‍ताह तक दुनि‍याँ के सभी देशों ने मि‍ल करके, इन वि‍षयों के जो जानकार लोग हैं वो वि‍श्‍व के सारे वहॉं इकट्ठे आए चर्चाएं की और इस बड़े संकट के सामने मानव जाति‍ की रक्षा कैसे करें, उसके लि‍ए संकल्‍पबद्ध हो करके आगे बढ़े।

COP 21 के नि‍र्णयों के संबंध में तो वि‍श्‍व में भली- भॉंति‍ बातें पहुँची हैं लेकि‍न पेरि‍स की धरती पर एक तरफ जब COP 21 की चर्चाएं चल रहीं थीं तब दो महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives लि‍ए गए। इन दोनों महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives में भारत और फ्रांस ने बहुत ही महत्‍त्‍वपूर्ण भमि‍का नि‍भाई है एक initiative एक तरफ तो Global Warming की चिन्‍ता है, मानवजाति‍ को पर्यावरण के संकटों से रक्षित करना है और दूसरी तरफ मानवजाति‍ के आवश्‍यकताओं की पूर्ति‍ भी करनी है। जो Developing Countries हैं उन्‍हें अभी वि‍कास की नई ऊँचाइयों को पार करना बाकी है और ऊर्जा के बि‍ना वि‍कास संभव नहीं होता है। एक प्रकार से ऊर्जा वि‍कास यात्रा का अहमपूर्ण अंग बन गयी है। लेकि‍न अगर fossil fuel से ऊर्जा पैदा करते हैं तो Global Warming की चिन्‍ता सताती है और अगर ऊर्जा पैदा नहीं करते हैं तो, न सि‍र्फ अंधेरा छा जाता है जि‍न्‍दगी अंधेरे में डूब जाती है। और ऐसी दुवि‍धा में से दुनियाँ को बचाने का क्‍या रास्‍ता हो सकता है? और तब जा करके अमेरि‍का, फ्रांस भारत तीनों ने मि‍लकरके एक initiative लि‍या है और वो initiative है innovation का। नई खोज हो, नए संसाधन नि‍र्माण हों, हमारे वैज्ञानि‍क, हमारे Technicians हमारे Engineers वो नई चीजें ले करके आएं जोकि‍ पर्यावरण पर प्रभाव पैदा न करती हों। Global Warming से दुनि‍याँ को बचाने का रास्‍ता दि‍खती हों और ऐसे साधनों को वि‍कसि‍त करें जो affordable हो sustainable हो और गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍ की पहुँच में हो। तो innovation के लि‍ए एक बहुत बड़ा अभि‍यान चलाने की दि‍शा में अमेरि‍का, फ्रांस और भारत दुनि‍याँ के ऐसी सभी व्‍यवस्‍थाओं को साथ ले करके आगे बढ़ने का बड़ा महत्‍तवपूर्ण निर्णय कि‍या उसको launch कि‍या गया। President Obama, President Hollande और मैं और UN General Secretary और Mr. Bill Gates , हम लोग उस समारोह में मौजूद थे और एक नया initiative प्रारंभ कि‍या। दूसरा एक महत्‍त्‍वपर्ण निर्णय हुआ है जि‍सका आने वाले दसकों तक मानव जीवन पर बड़ा ही प्रभाव रहने वाला है।

दुनि‍याँ में कई प्रकार के संगठन चल रहे हैं। OPEC countries का संगठन है G-20 है G-4 है, SAARC है, European Union है, ASEAN Countries हैं, कई प्रकार के संगठन दुनि‍याँ में बने हुए हैं। भारत ने एक वि‍चार रखा वि‍श्‍व के सामने कि‍ अगर Petroleum पैदावार करने वाले देश इकट्ठे हो सकते हैं, African countries एक हो सकते हैं, European Countries एक हो सकते हैं, क्‍यों न दुनि‍याँ में ऐसे देशों का संगठन खड़ा कि‍या जाए जि‍न देशों ने 300 दि‍वस से ज्‍यादा वर्ष में सूर्य का प्रकाश प्राप्‍त होता है।

ये सूर्य, ये बहुत बड़ी शक्‍ति‍ का स्रोत है सारे जीवन को चलाने में, सृष्‍टि‍ को चलाने में सूर्य की अहम् भूमि‍का है। क्‍यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्‍वीकार करके वि‍श्‍व कल्‍याण का रास्‍ता खोजें। 300 से अधि‍क दि‍वस, सूर्य का लाभ मि‍लता है ऐसे दुनि‍या में करीब-करीब 122 देश हैं। और इसलि‍ए वि‍चार आया क्‍यों न हम 122 देशों का जो कि‍ सूर्य शक्‍ति‍ से प्रभावि‍त हैं उनका एक संगठन गढ़ें। भारत ने इच्‍छा प्रकट की फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ जी ने मेरी पूरी मदद की, हम कंधे से कंधा मि‍लाकरके चले, दुनि‍याँ के देशों का संपर्क कि‍या और नवंबर महीने में पेरि‍स में जब conference चल रही थी, 30 नवंबर को दुनि‍याँ के सभी राष्‍ट्रों के मुखि‍या उस समारोह में मौजूद थे और एक International Solar Alliance इस नाम की संस्‍था का जन्‍म हुआ।

उसमें इस बात का भी निर्णय हुआ कि‍ इसका Global Secretariat ‍हि‍न्‍दुस्‍तान में रहेगा। ये International Solar Alliance इसका Headquarter गुड़गॉंव में बन रहा है। ये हरि‍याणा ‘कुरूक्षेत्र’ की धरती है, गीता का संदेश जहॉं से दि‍या, उस धरती से वि‍श्‍व कल्‍याण का एक नया संदेश इस Solar Alliance के रूप में हम पहुँचा रहे हैं।

बहुत कम लोगों को अंदाज होगा कि‍ आज ये जो घटना घट रही है उसका मानवजाति‍ पर कि‍तना बड़ा प्रभाव पैदा होने वाला है, इस बात को वही लोग समझ सकते हैं जो छोटे-छोटे Island पर बसते हैं, छोटे-छोटे Island Countries हैं और जि‍नके ऊपर ये भय सता रहा है कि‍ समुंदर के अगर पानी की ऊँचाई बढ़ती है तो पता नहीं कब उनका देश डूब जाएगा, पता नहीं वो इस सृष्‍टि‍ से समाप्‍त हो जाएंगे, दि‍न रात इन छोटे-छोटे देशों को चि‍न्‍ता हो रही है। जो देश समुद्र के कि‍नारे पर बसे हैं, उन देशों को चि‍न्‍ता हो रही है कि‍ अगर Global Warming के कारण समुद्र की सतह बढ़ रही है तो पता नहीं हमारे मुम्‍बई का क्‍या होगा, चेन्‍नई का क्‍या होगा? और दुनि‍याँ के ऐसे कई देश होंगे जि‍नके ऐसे बड़े-बड़े स्‍थान जो समु्द्र के कि‍नारे पर हैं उनके भाग्‍य का क्‍या होगा? सारा वि‍श्‍व चि‍न्‍ति‍त है। और मैं पि‍छले एक साल में, ये Island Countries हैं जो छोटे-छोटे उनके बहुत से नेताओं से मि‍ला हूँ, उनकी पीड़ा को मैंने भली-भॉंति‍ समझा है। क्‍या भारत इस कर्तव्‍य को नहीं नि‍भा सकता?

हमारे देश में जीवनदान एक बहुत बड़ा पुण्‍य माना जाता है। आज मैं कह सकता हूँ कि‍ International Solar Alliance उस जीवनदान का पुण्‍य काम करने वाला है, जो आने वाले दशकों के बाद दुनि‍याँ पर उसका प्रभाव पैदा करने वाला है। सारा वि‍श्‍व कहता है कि‍ Temperature कम होना चाहि‍ए, लेकि‍न Temperature कम करने का रास्‍ता भी सूर्य का Temperature ही है। एक ऊर्जा से दूसरी ऊर्जा का संकट मि‍टाया जा सकता है। और इसलि‍ए वि‍श्‍व को ऊर्जा के आवश्‍यकता की पूर्ति‍ भी हो, innovation का काम भी हो और सोलर को ले करके जीवन के क्षेत्र कैसे प्रभावि‍त हों उस दि‍शा में काम करने के लि‍ए बना है।

ये बात सही है कि‍ International Solar Alliance इसका Headquarters हि‍न्‍दुस्‍तान में हो रहा है, गुडगॉंव में हो रहा है, लेकि‍न ये Institution हि‍न्‍दुस्‍तान की Institution नहीं है ये Global Institution है, ये Independent Institution है। जैसे अमेरि‍का में United Nations है, लेकि‍न वो पूरा वि‍श्‍व का है। जैसे WHO है, पूरे वि‍श्‍व का है। वैसे ही ये International Solar Alliance का Headquarter ये पूरे वि‍श्‍व की धरोहर है और ये Independent चलेगा। अलग-अलग देश के लोग इसका नेतृत्‍व करेंगे, अलग-अलग देश के लोग इसकी जि‍म्‍मेदारी संभालेंगे, उसकी एक पद्धति‍ वि‍कसि‍त होगी लेकि‍न आज उसका Secretariat बन रहा है, उस Secretariat के माध्‍यम से इस बात को हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में परंपरागत प्राकृति‍क संसाधनों उपयोग करने का बीड़ा उठाया है। भारत ने जब ये कहा कि‍ हम 175Giga Watt, Renewable Energy की तरफ जाना चाहते हैं, तब दुनि‍याँ के लि‍ए बड़ा अचरज था। भारत में Giga Watt शब्‍द भी नया है, जब हम Mega Watt से आगे सोच भी नहीं पाते थे। हम आज Giga Watt पर सोच रहे हैं और 175 Giga Watt Solar Energy, Wind Energy, Nuclear Energy, Biomass से होने वाली Energy इन सारे स्रोतों को Hydro Energy ये हम उपलब्‍ध कराना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि‍ आज भारत 5000 MW से ज्‍यादा solar energy उसने install कर दी। ये इतने कम समय में जो काम हुआ है वो उस commitment का परिणाम है कि क्या भारत मानव जाति के कल्याण के लिए मानव जाति की रक्षा के लिए, प्रकृति की रक्षा के लिए, ये पूरी जो सृष्टि है उस पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए, भारत कोई अपना योगदान दे सकता है क्या? उस योगदान को देने के लिए ये बीड़ा उठाया है।

मैं फ्रांस के राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूँ कि इस चिंता के समय में global warming पर्यावरण के मुद्दे इसके समाधान के जो रास्ते है उनकी सोच भारत की सोच से बहुत मिलती जुलती है क्यों कि फ्रांस की values और भारत के values काफी समान है और इसलिए पिछले वर्ष April के महीने में हम दोनों मिले थे तो हमने तय किया था कि हम COP 21 के समय एक किताब निकालेंगे और विश्व के अंदर परंपरागत रूप से इन issues को कैसे देखा गया इस पर research करेंगे। और हम दोनों ने मिल कर के उस किताब की प्रस्तावना लिखी है और विश्व के सामने उन्ही के मूलभूत चिंतन क्या थे ये प्रस्तुत किया।

ये चीजें इसलिए हम कर रहे हैं कि मानव जाति को इस संकट से बचने के जो रस्ते खोजे जा रहे हैं, वो एक सामूहिक रूप से प्रयत्न हो, innovative रूप से प्रयत्न हो और परिणाम वो निकले जो मानव जाति की आवश्यकता है उसकी पूर्ति भी करे लेकिन प्रकृति को कोई नुकसान न हो। हम वो लोग हैं जिनके पूर्वजो ने, इस धरती से हमें प्यार करना सिखाया है। हमें कभी भी प्रकृति का शोषण करने के लिए नहीं सिखाया गया, हमें पौधे में भी परमात्मा होता है यह बचपन से सिखया गया। ये हमारी परंपरा है। अगर ये परंपरा है तो हमें विश्व को उसका लाभ पहुंचे उस दिशा में हमें कुछ कर दिखाना चाहिए और उसी के तहत आज international solar alliance का हम लोगों ने एक Secretariat का आरम्भ कर रहे हैं। और भविष्य में भव्य भवन के रूप में उसका निर्माण हो, एक स्वंत्रत इमारत तैयार हो, उसके लिए शिलन्यास भी कर रहे है और इस काम के लिए आप पधारे इसका मैं बहुत बहुत आभारी हूँ।

मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि solar alliance का निर्माण हो रहा हो आज हमें Delhi से यहाँ आना था हम by road भी आ सकते थे, helicopter से भी आ सकते थे, लकिन हम दोनों ने मिलकर तय किया कि अच्छा होगा की हम Metro से चले जाएँ और आज आप के बीच हमें Metro से आने का अवसर मिला।

मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूँ कि उन्होंने आज Metro में आने के लिए सहमति जताई और हम Metro का सफ़र करते करते आपके बीच पहुंचे क्योंकि वो भी एक सन्देश है क्योंकि global warming के सामने लड़ाई लड़ने के जो तरीके हैं उसमें ये भी एक तरीका है। मैं विश्वास करता हूँ कि ये प्रयास बहुत ही सुखद रहेगा। कल भारत प्रजासत्ता पर्व मनाने जा रहा है, इस प्रजसत्ता पर्व की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अधिकार और कर्तव्य इन दोनों को संतुलित करते हुए हम देश को आगे बढ़ाएंगे यही मेरी शुभकामना है।

बहुत बहुत धन्यवाद्।

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विविध क्षेत्रातील स्टार्टअप्स कंपन्यांच्या प्रतिनिधींसोबत संवाद साधताना पंतप्रधानांचे भाषण
January 15, 2022
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Startups makes presentations before PM on six themes
“It has been decided to celebrate January 16 as National Start-up Day to take the Startup culture to the far flung areas of the country”
“Three aspects of government efforts: first, to liberate entrepreneurship, innovation from the web of government processes, and bureaucratic silos, second, creating an institutional mechanism to promote innovation; third, handholding of young innovators and young enterprises”
“Our Start-ups are changing the rules of the game. That's why I believe Start-ups are going to be the backbone of new India.”
“Last year, 42 unicorns came up in the country. These companies worth thousands of crores of rupees are the hallmark of self-reliant and self-confident India”
“Today India is rapidly moving towards hitting the century of the unicorns. I believe the golden era of India's start-ups is starting now”
“Don't just keep your dreams local, make them global. Remember this mantra

नमस्कार,

केंद्रीय मंत्रिमंडळातील माझे सहकारी पीयूष गोयल जी, मनसुख मांडवीया जी, अश्विनी वैष्णव जी, सर्बानंद सोनोवाल जी, पुरुषोत्तम रुपाला जी, जी. किशन रेड्डी जी, पशुपती कुमार पारस जी, जितेंद्र सिंह जी, सोम प्रकाश जी, देशभारातून या कार्यक्रमात सहभागी झालेले स्टार्टअप जगतातील सर्व दिग्गज, आमचे तरुण मित्र, इतर मान्यवर, बंधू आणि भगिनींनो,

आपण सर्वांनीच भारतीय स्टार्टअप्सचं यश बघितलं आहे आणि काही या क्षेत्रातील काही लोकांनी केलेलं सादरीकरण देखील बघितलं. आपण सर्वच जण अतिशय उत्तम काम करत आहात. 2022 हे वर्ष भारतीय स्टार्ट अप जगतासाठी अनेक नव्या संधी घेऊन आलं आहे. स्वातंत्र्याच्या 75व्या वर्षात आयोजित हा स्टार्टअप इंडिया नवोन्मेष सप्ताह आणखीनच महत्त्वाचा आहे. जेव्हा भारत आपल्या स्वातंत्र्याची 100 वर्ष पूर्ण करेल, त्या भव्य भारताच्या उभारणीत तुमची फार मोठी भूमिका असणार आहे.

देशाच्या सर्व स्टार्ट अप्सचे, तसेच, स्टार्ट अप्सच्या जगात भारताचा झेंडा उंचावत आहेत अशा सर्व प्रयोगशील युवकांचे खूप खूप अभिनंदन करतो. स्टार्ट अप्सची ही संस्कृती देशाच्या कानाकोपऱ्यात पोहोचावी, यासाठी 16 जानेवारी हा दिवस आता ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप’ दिवस साजरा करण्याच्या निर्णय घेण्यात आला आहे.

मित्रांनो,

स्टार्ट अप इंडिया नवोन्मेष सप्ताह, गेल्या वर्षी मिळालेलं यश साजरं करण्यासाठी देखील आहे आणि भविष्यातील रणनीती ठरविण्यासाठी देखील. या दशकात भारताला टेक-हेड म्हणजेच तंत्रज्ञान क्षेत्रातील तज्ञ देश- म्हटलं जात आहे. या दशकात नवोन्मेष, उद्योजकता आणि स्टार्ट अप व्यवस्था सुदृढ करण्यासाठी सरकार जे मोठ्या प्रमाणावर बदल करत आहे, त्याचे तीन महत्वाचे पैलू आहेत -

पहिला, उद्योजकतेला, नवोन्मेषी प्रयोगांना सरकारी प्रक्रियांच्या जंजाळातून, प्रशासनाच्या विळख्यातून मुक्त करणे, दुसरा, नवोन्मेषी वृत्तीला प्रोत्साहन देण्यासाठी संस्थात्मक यंत्रणा निर्माण करणे आणि तिसरा, नवोन्मेषी युवकांना, युवा उद्योगपतींना मदतीचा हात देखील देणे. स्टार्ट अप इंडिया, स्टँड अप इंडिया सारखे कार्यक्रम अशाच प्रयत्नांचा भाग आहेत.

एंजल कराशी संबंधित समस्यांचं निराकरण आणि कर विवरण भरण्याची प्रक्रिया सुलभ करणे असो, सुलभ कर्ज उपलब्धता असो, हजारो कोटी रुपयांचे सरकारी अर्थसहाय्य उपलब्ध करणे असो, या सुविधा आमची कटीबद्धता दाखवतात. स्टार्ट अप इंडिया अंतर्गत स्टार्ट अप्सना 9 श्रम आणि 3 पर्यावरण कायद्यांच्या अनुपालनात स्वयं-प्रमाणन करण्याची सुविधा देण्यात आली आहे.

कागदपत्रांच्या स्वयं-प्रमाणीकरणामुळे सरकारी प्रक्रियांचे सुलभीकरण सुरु झाले होते, ते आज 25 हजारांहून जास्त अनुपालन रद्द करण्यापर्यंत येऊन पोहोचले आहेत. स्टार्ट अप्स, सरकारला आपली उत्पादनं आणि सेवा सुलभतेने देऊ शकतील यासाठी सरकारी ई-बाजारपेठ या प्लॅटफॉर्मवर निर्माण केलेला स्टार्ट अप रनवे देखील अतिशय उपयोगी पडत आहे.

मित्रांनो,

आपल्या युवकांच्या सामर्थ्यावर विश्वास, त्याच्या सर्जनशीलतेवर विश्वास कुठल्याही देशाच्या प्रगतीचा मुख्य आधार असतो. भारत आज आपल्या युवकांचे सामर्थ्य ओळखून धोरणं आखत आहे, निर्णय घेत आहे. भारतात एक हजारपेक्षा जास्त विद्यापीठे आहेत, 11 हजारपेक्षा जास्त एकल संस्था आहेत, 42 हजाराहून जास्त महाविद्यालये आहेत आणि लाखो शाळा आहेत. ही भारताची खूप मोठी ताकद आहे.

लहानपणापासूनच विद्यार्थ्यांमध्ये नवोन्मेषाविषयी आकर्षण निर्माण करणे, नवोन्मेषाचे संस्थात्मीकरण करणे हा आमचा प्रयत्न आहे. 9 हजारपेक्षा जास्त अटल टिंकरिंग लॅब, आज मुलांना शाळेत नवोन्मेष, नव्या कल्पनांवर काम करणे यासाठी नवनवे मंच मिळत आहेत. याशिवाय देशभरातील शाळा - महाविद्यालयातील हजारो प्रयोगशाळांचे जाळे, प्रत्येक क्षेत्रात नवोन्मेषाला प्रोत्साहन देत आहेत. देशासमोरील आव्हानांचा सामना करायला आपण नवोन्मेष आणि तंत्रज्ञान आधारित समस्या निवारणावर भर देत आहोत. आपण अनेक हॅकॅथॉन आयोजित करून, युवकांना आपल्याशी जोडले आहे, त्यांनी डिजिटल माध्यमातून तंत्रज्ञानाच्या मदतीने विक्रमी वेळात अनेक समस्यांचे निराकरण केले आहे.

सरकारचे विविध विभाग, विविध मंत्रालये कशाप्रकारे युवकांच्या, स्टार्टअप्सच्या संपर्कात असतात, त्याच्या नवीन कल्पनांना प्रोत्साहन देत असतात हे तुम्ही बघितलंच असेल. नवे ड्रोन नियम असोत, की मग नवे अवकाश धोरण, सरकारची प्राथमिकता, जास्तीत जास्त युवकांना नवोन्मेषाची संधी देणे ही आहे.

आमच्या सरकारने, IPR नोंदणीचे नियम देखील खूप सुलभ केले आहेत. केंद्र आणि राज्य सरकारे मिळून आज देशात शेकडो इंक्यूबेटर्सला मदत करत आहेत. आज देशात iCreate सारख्या संस्था नवोन्मेष व्यवस्था वाढविण्यात अतिशय महत्वपूर्ण भूमिका निभावत आहेत. iCreate म्हणजे International Centre for Entrepreneurship and Technology (उद्योजकता आणि तंत्रज्ञानासाठीचे आंतरराष्ट्रीय केंद्र). ही संस्था अनेक स्टार्ट अप्सना एक भक्कम सुरुवात करुन देत आहे, नवोन्मेषाला प्रोत्साहन देत आहे.

आणि मित्रांनो,

सरकारच्या या प्रयत्नांचे परिणाम देखील दिसून येत आहेत. वर्ष 2013-14 मध्ये जिथे 4 हजार पेटंटला मंजुरी मिळाली होती, तिथे मागच्या वर्षी 28 हजारपेक्षा जास्त पेटंट मंजूर करण्यात आले आहेत. वर्ष 2013-14 मध्ये जिथे जवळपास 70 हजार ट्रेडमार्कची नोंदणी झाली होती, तिथे 2021 मध्ये अडीच लाखाहून जास्त ट्रेडमार्क नोंदणी झाली आहे. वर्ष 2013-14 मध्ये जिथे फक्त 4 हजार कॉपीराईट मंजूर करण्यात आले होते, मागच्या वर्षी ही संख्या वाढून 16 हजारपेक्षा जास्त झाली आहे. भारतात जी नवोन्मेष मोहीम सुरु आहे, त्याचा परिणाम म्हणून जागतिक नवोन्मेष निर्देशांकात भारताची क्रमवारी फारच सुधारली आहे. वर्ष 2015 मध्ये या क्रमवारीत भारत 81व्या क्रमांकावर अडकून पडला होता. आज नवोन्मेष निर्देशांकांत भारत 46व्या क्रमांकावर आहे, 50 च्या खाली आला आहे.

मित्रांनो,

भारताची स्टार्ट अप व्यवस्था, आज जगभरात आपला झेंडा रोवत आहे. आपली गांभीर्याने काम करण्याची वृत्ती आणि प्रामाणिकपणा ही भारताच्या स्टार्टअप व्यवस्थेची खरी ताकद आहे. भारताच्या स्टार्टअप व्यवस्थेची ही शक्ती आहे, की ती सातत्याने स्वतःला विकसित करत आहे, स्वतःला सुधारत आहे, आपली ताकद वाढवत आहे. सातत्याने नवे काही शिकण्याची आपली मनोवृत्ती आहे, आपली स्टार्टअप व्यवस्था स्वतःला बदलत असते, नवनव्या परिस्थितीनुसार स्वतःला बदलत आहे. आज भारतातील स्टार्ट अप्स 55 वेगवेगळ्या उद्योगांत कार्यरत आहेत, हे बघून अभिमान वाटतो. पाच वर्षांपूर्वी देशात जिथे 500 देखील स्टार्ट अप्स नव्हते, आज त्यांची संख्या वाढून 60 हजार पर्यंत पोहोचली आहे. तुमच्याकडे नवोन्मेषाची शक्ती आहे, तुमच्याकडे नव्या कल्पना आहेत, तुम्ही उर्जावान नवयुवक आहात, आणि आपण व्यवसायाची पद्धतच बदलत आहात. आपले स्टार्ट अप्स खेळाचे नियमच बदलत आहेत. म्हणून मला असं वाटतं स्टार्ट अप्स नव्या भारताच्या पाठीचा कणा असणार आहेत.

मित्रांनो,

उद्योजकतेपासून सक्षमीकरण या भावनेतून आपल्याकडे विकास तर घडतो आहेच, त्याचसोबत प्रादेशिक आणि लैंगिक असमानता देखील दूर केली जात आहे. पूर्वी, जिथे मोठी शहरे, मेट्रो शहरातच व्यवसाय वाढत होते, आज देशात प्रत्येक राज्यात सव्वा सहाशेपेक्षा जास्त जिल्ह्यांत किमान एक स्टार्ट अप आहे. आज जवळजवळ अर्धे स्टार्ट अप्स  द्वितीय श्रेणी आणि  तृतीय श्रेणीच्या शहरांत आहेत. या स्टार्ट अप्सच्या माध्यमातून, सामान्य, गरीब कुटुंबातील युवकांच्या कल्पना व्यवसायात रूपांतरित होत आहेत. या स्टार्ट अप्समध्ये आज लाखो युवकांना नोकऱ्या मिळत आहेत.

मित्रांनो,

ज्या वेगाने आणि ज्या प्रमाणात आज भारताचे युवक स्टार्ट अप्स स्थापन करत आहेत, ते जागतिक महामारीच्या या काळात भारतीयांच्या प्रबळ इच्छाशक्ती आणि संकल्पशक्तीचे प्रतीक आहे. आधी अगदी अनुकूल वातावरणात देखील एखाद-दुसरी मोठी कंपनी तयार होऊ शकत होती. मात्र गेल्या वर्षी कोविडच्या संकटातही आपल्या देशात 42 युनिकॉर्न तयार झाले आहेत. हजारो कोटींच्या या कंपन्या आत्मनिर्भर होत असलेल्या, आत्मविश्वासपूर्ण भारताची ओळख आहेत. आज भारत वेगाने युनिकॉर्नचं शतक करण्याच्या दिशेने वाटचाल करत आहे. मला विश्वास आहे, भारताच्या स्टार्ट अप्सचा सुवर्ण काळ तर आता सुरु होत आहे. भारताची जी विविधता आहे, ती आपली मोठी शक्ती आहे. आमची ओळख, आमची जागतिक ओळख आहे.

आपले युनिकॉर्न आणि स्टार्टअप्स देखील याच विविधतेचा संदेश देत आहेत. साध्या घरपोच सेवेपासून पेमेंट करण्याची सोय आणि कॅब सेवेपर्यंत. आपला विस्तार खूप मोठा आहे. आपल्याकडे भारतातच वैविध्यपूर्ण बाजार, विविध संस्कृती आणि त्यात काम करण्याचा इतका मोठा अनुभव आहे. म्हणूनच, भारताच्या स्टार्ट अप्स सहजतेने जगातील इतर देशांत पाय ठेवू शकतात. म्हणूनच तुम्ही केवळ लोकल न राहता ग्लोबल बनायला पाहिजे. हा मंत्र नेहमी लक्षात ठेवा - आपण भारतासाठी नवोन्मेष करूया, भारतातून नवोन्मेष करूया.

मित्रांनो,

स्वातंत्र्याच्या अमृतकाळात सर्वांनी कामाला लागण्याची वेळ आहे. सगळ्यांनी एकत्रित प्रयत्न करून ध्येय गाठण्याची ही वेळ आहे. पंतप्रधान गतिशक्ती राष्ट्रीय बृहद आराखड्याच्या अंमलबजावणीवर काम करणाऱ्या एका समूहाने जेव्हा याविषयी महत्वाचा सल्ला दिला, त्याचा मला विशेष आनंद झाला. गतिशक्ती प्रकल्पांत जी जास्तीची जागा उरेल, त्याचा उपयोग ई व्ही चार्जिंग पायाभूत सुविधा निर्माण करण्यासाठी केला जाऊ शकतो. या बृहद आराखड्यात आज वाहतूक, उर्जा, दूरसंचार यासह संपूर्ण पायाभूत सुविधा एकाच व्यासपीठावर आणल्या जात आहेत. बहुआयामी आणि बहुउद्देशीय संपत्ती निर्मितीसाठी या अभियानात आपलाही सहभाग अतिशय गरजेचा आहे.

यामुळे आपल्या उत्पादन निर्मिती क्षेत्रात नवीन मोठ्या उद्योजकांच्या (चॅम्पियन्सच्या) निर्मितीला चालना मिळेल.  संरक्षण उत्पादन, चिप उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा आणि ड्रोन तंत्रज्ञानाशी संबंधित अनेक क्षेत्रांमध्ये देशाच्या महत्त्वाकांक्षी योजना तुमच्यासमोर आहेत. नजीकच्या काळात, नवीन ड्रोन धोरण लागू झाल्यानंतर, देशातील आणि जगातील अनेक गुंतवणूकदार ड्रोन स्टार्ट-अपमध्ये गुंतवणूक करत आहेत.  ड्रोन कंपन्यांना लष्कर, नौदल आणि हवाई दलाकडून सुमारे 500 कोटी रुपयांचे काम मिळाले आहे.  स्वामीत्व योजनेसाठी सरकार आज मोठ्या प्रमाणावर गावातील मालमत्तांच्या मोजमापासाठी ( मॅपिंग करण्यासाठी) ड्रोन वापरत आहे.  आता औषधांची घरपोच सेवा आणि शेतीमध्ये ड्रोनचा वापर करण्याची व्याप्ती वाढत आहे.  त्यामुळे त्यात भरपूर वाव आहे.

मित्रांनो,

आपले जलद होणारे शहरीकरण हे देखील एक मोठे लक्ष्यकेन्द्री क्षेत्र आहे. आपली सध्याची शहरे विकसित करण्यासाठी आणि नवीन शहरे वसवण्यासाठी आज खूप मोठ्या प्रमाणावर काम सुरू आहे.  शहरी नियोजन, या क्षेत्रातही खूप काम करायचे आहे.  यामध्येही आपल्याला अशा प्रकारच्या वॉक टू वर्क संकल्पना आणि एकात्मिक औद्योगिक वसाहती तयार कराव्या लागतील, जिथे श्रमिकांसाठी, कामगारांसाठी उत्तम व्यवस्था असेल.  शहरी नियोजनात नवीन शक्यता तुमची वाट पाहत आहेत. उदाहरणार्थ, येथे एका गटाने मोठ्या शहरांसाठी राष्ट्रीय सायकलिंग योजना आणि कारमुक्त क्षेत्राबद्दल सांगितले.  शहरांमध्ये शाश्वत जीवनशैलीला चालना देण्यासाठी हे खूप महत्त्वाचे आहे.  तुम्हाला माहिती असेल की जेव्हा मी कॉप-26 च्या परिषदेत गेलो होतो, तेव्हा मी मिशन लाइफबद्दल बोललो होतो आणि ही माझी जीवनाची संकल्पना आहे जी पर्यावरणासाठी जीवनशैली (एलआयएफई) आहे आणि मला विश्वास आहे की आम्ही त्या गोष्टी लोकांमध्ये विकसित केल्या आहेत. पी-3 चळवळीसारखी अनिवार्य असलेली गोष्ट घडवून आणण्यासाठी तंत्रज्ञानाचा वापर कसा करायचा हे आज अत्यावश्यक आहे.  प्रो-प्लॅनेट-पीपल, पी-3 चळवळ.  जोपर्यंत आपण सर्वसामान्य जनतेला पर्यावरणाविषयी जागरूक करत नाही तोपर्यंत आपण जागतिक तापमानवाढी विरुद्धच्या लढ्याचे सैनिक बनवू शकत नाही, आपण ही लढाई जिंकू शकत नाही आणि म्हणूनच भारत, मिशन लाइफ घेऊन अनेक देशांना आपल्यासोबत जोडण्यासाठी काम करत आहे.

 

मित्रांनो,

अभिनव संपर्कव्यवस्थेमुळे (स्मार्ट मोबिलिटीमुळे) शहरांचे जीवन सुसह्य होईल आणि कार्बन उत्सर्जनाचे आमचे लक्ष्य साध्य करण्यातही मदत होईल.

 

मित्रांनो,

जगातील सर्वात मोठी बाजारपेठ म्हणून भारत आपली ओळख आणखी सशक्त करत आहे.  ती आज त्यांच्या कुटुंबाची समृद्धी आणि राष्ट्राच्या आत्मनिर्भरतेचा आधारस्तंभ आहे.  ग्रामीण अर्थव्यवस्थेपासून ते उद्योग 4.0 पर्यंत, आपल्या गरजा आणि आपल्या क्षमता या दोन्ही अमर्याद आहेत.  भविष्यातील तंत्रज्ञानाशी संबंधित संशोधन आणि विकासावर गुंतवणूक करणे ही आज सरकारची प्राथमिकता आहे.  पण उद्योगानेही यात आपले योगदान, त्याची व्याप्ती वाढवली तर बरे होईल.

मित्रांनो,

एकविसाव्या शतकाच्या या दशकात आणखी एक गोष्ट तुम्ही लक्षात ठेवली पाहिजे.  देशातही मोठी बाजारपेठ खुली होत आहे, आपण आता डिजिटल जीवनशैलीत प्रवेश केला आहे.  सध्या आपली अर्धी लोकसंख्या ऑनलाइन आहे.  ज्या गतीने, ज्या प्रमाणात, ज्या किमतीत सरकार खेडोपाडी डिजिटल सुविधा गरीबातल्या गरिबांपर्यंत, उपलब्ध करून देण्याचे काम करत आहे, भारतात अगदी कमी कालावधीत सुमारे 100 कोटी इंटरनेट वापरकर्ते असतील. जसजसे दुर्गम भागात शेवटच्या टोकापर्यंत माल पोहचवण्याची व्यवस्था सक्षम होत आहे, तसतसे ग्रामीण बाजारपेठ आणि ग्रामीण प्रतिभेचा एक मोठा पूल देखील निर्माण होत आहे.  म्हणूनच मी भारतातील स्टार्ट अप्सना गावाकडे वळण्याची विनंती करतो.  ही एक संधी आणि आव्हानही आहे.  मोबाईल इंटरनेट असो, ब्रॉडबँड संपर्कव्यवस्था (कनेक्टिव्हिटी) असो किंवा भौतिक संपर्कव्यवस्था (कनेक्टिव्हिटी) असो, आज गावाच्या आकांक्षा वाढत आहेत.  ग्रामीण आणि निमशहरी भाग विस्ताराच्या नव्या लाटेची वाट पाहत आहेत. स्टार्ट-अप संस्कृतीने ज्या प्रकारे कल्पनेचे लोकशाहीकरण केले आहे, त्यामुळे महिला आणि स्थानिक व्यवसायांचे सक्षमीकरण झाले आहे.  लोणचे-पापडपासून हस्तकलेपर्यंत अनेक स्थानिक उत्पादनांची व्याप्ती आज मोठ्या प्रमाणावर विस्तारली आहे.  वाढत्या जागरूकतेमुळे लोक स्थानिकांसाठी आवाज बुलंद करत आहेत. आत्ताच आमचे जयपूरचे मित्र कार्तिक यांनी लोकल ते ग्लोबलबद्दल सांगितले आणि आभासी पर्यटनाचा उल्लेख केला.  मी तुमच्या सारख्या मित्रांना विनंती करेन की, स्वातंत्र्याची 75 वर्षे पूर्ण होत आहेत, तुम्ही देशातील शाळा-महाविद्यालयातील मुलांची एक स्पर्धा घेऊ शकता. त्यांच्या त्यांच्या जिल्ह्यात, त्यांच्या शहरात स्वातंत्र्याशी संबंधित कार्यक्रम आयोजित करावेत, जी स्मारके आहेत, इतिहासाची पाने आहेत  त्यासंदर्भात आभासी सर्जनशील कार्य करा आणि तुमच्या सारख्या स्टार्टअप्सनी ते संकलित केले पाहिजे आणि देशाला स्वातंत्र्याच्या 75 वर्षांसाठी आभासी सफरीसाठी आमंत्रित केले जावे.  स्वातंत्र्याच्या अमृतमहोत्सवामध्ये स्टार्टअप्स जगताचे मोठे योगदान असेल.  त्यामुळे तुमची कल्पना चांगली आहे, ती कल्पना कशी साकारायची, तुम्ही त्याची सुरुवात केली तर ती आपण पुढे नेऊ शकू याची मला खात्री आहे.

   

मित्रांनो,

कोविड टाळेबंदी दरम्यान, आपण पाहिले आहे की स्थानिक पातळीवरील छोट्या नाविन्यपूर्ण उपक्रमांनी लोकांचे जीवन कसे सोपे केले आहे.  स्टार्ट-अप्सना छोट्या स्थानिक व्यवसायांसोबत काम करण्याची मोठी संधी आहे.  स्टार्ट-अप हे स्थानिक व्यवसाय सक्षम बनवू शकतात. अधिक कार्यक्षम बनवू शकतात. लघुउद्योग हा देशाच्या विकासाचा कणा आहे आणि स्टार्ट अप्स हे नवीन बाजी पलटवणारे आहेत.  ही भागीदारी आपला समाज आणि अर्थव्यवस्था दोहोंमधे परिवर्तन घडवून आणू शकते.  विशेषत: महिलांच्या रोजगाराला यातून खूप बळ मिळू शकते.

 

मित्रांनो,

 

कृषी ते आरोग्य, शिक्षण, पर्यटन अशा प्रत्येक क्षेत्रात सरकार आणि स्टार्ट अप यांच्या भागीदारीबाबत अनेक सूचना येथे आल्या आहेत.  आमच्या इथे जे दुकानदार आहेत ते त्यांच्या क्षमतेपैकी जास्तीत जास्त 50-60% वापर करु शकतात. एक सूचना होती,  त्यांनी एक डिजिटल उपाय दिला होता की कोणते सामान संपले आहे आणि कोणते आणायचे हे त्यांना समजले पाहिजे, इत्यादी. मी तुम्हाला एक सूचना देऊ इच्छीतो, तुम्ही त्या दुकानदाराला त्याच्याकडे असलेल्या ग्राहकांशी देखील जोडू शकता.  त्यामुळे दुकानदार ग्राहकाला कळवू शकतो की तुमच्या या तीन वस्तू तीन दिवसांनी संपणार आहेत, तुमच्या घरातील या सात वस्तू पाच दिवसांनी संपणार आहेत.  त्यांना संदेश पाठवला तर घरातील सदस्यांनाही स्वयंपाकघरात काही साहित्य आहे की नाही, हे आहे की नाही, ते आहे की नाही यासाठी डब्बे धुंडाळत बसण्याची गरज नाही.  हा तुमचा दुकानदारच त्याला संदेश पाठवू शकते.  आणि तुम्ही ते एका मोठ्या मंचामधे रूपांतरित करू शकता.  केवळ दुकानासाठीच्या दूरदृष्टीनेच नव्हे, तर कुटुंबाच्या गरजेसाठीही त्यांना डोक्याला त्रास द्यावा लागणार नाही, महिनाभर हळद घेतली, ती तीन दिवसांनी संपणार आहे, असा तुमचाच संदेश जाईल. त्यामुळे तुम्ही खूप मोठे समन्वयक तुम्ही बनू शकता, तुम्ही खूप मोठा पूल बनू शकता.

 

 

मित्रांनो,

 

तरुणांच्या प्रत्येक सूचनेला, प्रत्येक कल्पनेला, प्रत्येक कल्पकतेला सरकारचा पूर्ण पाठिंबा मिळेल याची मी खात्री देतो.  देशाला स्वातंत्र्याच्या 100 व्या वर्षाच्या दिशेने घेऊन जाणारी ही 25 वर्षे खूप महत्वाची आहेत मित्रांनो आणि तुमच्यासाठी सर्वात महत्वाची आहेत.  हे नवोन्मेषाचे अर्थात नवकल्पना, उद्योग आणि गुंतवणुकीचे नवीन युग आहे.  तुमचे श्रम भारतासाठी आहेत.  तुमचा उद्योग भारतासाठी आहे.  तुमची संपत्ती निर्मिती भारतासाठी आहे, रोजगार निर्मिती भारतासाठी आहे. तुमच्या खांद्याला खांदा लावून तुम्हा तरुणांच्या ऊर्जेचे देशाच्या ऊर्जेत रूपांतर करण्यासाठी मी पूर्णपणे कटिबद्ध आहे.  तुमच्या सूचना, तुमच्या कल्पना... कारण आता नव्या पद्धतीने विचार करणारी नवी पिढी आहे.  व्यवस्था समजून घेणे आणि स्वीकारणे फार महत्वाचे झाले आहे.  आणि मला विश्वास आहे की सात दिवसांच्या विचारमंथनातून ज्या गोष्टी समोर आल्या आहेत, त्या सरकारचे सर्व विभाग अतिशय गांभीर्याने घेत आहेत. त्याचा सरकारमध्ये कसा उपयोग करायचा, त्याचा सरकारच्या धोरणांवर कसा परिणाम व्हायला हवा, धोरणे कशी आहेत. शासनाचा समाजजीवनावर परिणाम होणार आहे. त्याचा परिणाम झाला तर या सर्व विषयांचा फायदा होणार आहे.  या कार्यक्रमात सहभागी होण्यासाठी तुमचा अमुल्य वेळ दिलात, कारण तुम्ही नवकल्पनांच्या जगातील लोक आहात आणि म्हणूनच तुमचा वेळ नवकल्पनांमध्येच जातो आणि त्या कल्पनांची तुम्ही सर्वांसोबत देवाणघेवाण केली, हेही खूप मोठे काम आहे.

मी तुम्हाला खूप खूप शुभेच्छा देतो.  मकर संक्रांतीचा पवित्र सण. सध्या हवेत तोच माहौल आहे. या दरम्यान, कोरोनामध्ये स्वतःची काळजी घ्या.

खूप खूप धन्यवाद!