Entire world is now discussing global warming and ways to mitigate it: PM Modi
Two landmark initiatives emerged in #COP21. India & France played key roles in those: PM
International Solar Alliance will impact generations in a big way: PM Modi
US, India, France took initiative of innovation; let is innovate and protect our environment: PM
India expressed keenness on solar alliance. France was very helpful, did everything possible to bring all nations together: PM
Solar alliance to ensure that the world gets more energy: PM Modi

मंच पर वि‍राजमान फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ श्रीमान ओलांद फ्रांस से आए हुए Senior Ministers हरि‍याणा के Governor श्री, मुख्‍यमंत्री श्री, श्रीमान पीयुष गोयल जी फ्रांस का Delegation और वि‍शाल संख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाइयों और बहनों!

पि‍छले एक वर्ष से सारी दुनि‍याँ में इस बात की चर्चा थी कि‍ Global Warming के सामने दुनि‍याँ कौन से कदम उठाए कि‍न बातों का संकल्‍प करे? और उसकी पूर्ति‍ के लिए कौन से रास्‍ते अपनाएं? पेरि‍स में होने वाली COP 21 के संबंध में पूरी दुनि‍याँ में एक उत्‍सुकता थी, संबधि‍त सारे लोग अपने-अपने तरीके से उस पर प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे थे, और करीब-करीब दो सप्‍ताह तक दुनि‍याँ के सभी देशों ने मि‍ल करके, इन वि‍षयों के जो जानकार लोग हैं वो वि‍श्‍व के सारे वहॉं इकट्ठे आए चर्चाएं की और इस बड़े संकट के सामने मानव जाति‍ की रक्षा कैसे करें, उसके लि‍ए संकल्‍पबद्ध हो करके आगे बढ़े।

COP 21 के नि‍र्णयों के संबंध में तो वि‍श्‍व में भली- भॉंति‍ बातें पहुँची हैं लेकि‍न पेरि‍स की धरती पर एक तरफ जब COP 21 की चर्चाएं चल रहीं थीं तब दो महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives लि‍ए गए। इन दोनों महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives में भारत और फ्रांस ने बहुत ही महत्‍त्‍वपूर्ण भमि‍का नि‍भाई है एक initiative एक तरफ तो Global Warming की चिन्‍ता है, मानवजाति‍ को पर्यावरण के संकटों से रक्षित करना है और दूसरी तरफ मानवजाति‍ के आवश्‍यकताओं की पूर्ति‍ भी करनी है। जो Developing Countries हैं उन्‍हें अभी वि‍कास की नई ऊँचाइयों को पार करना बाकी है और ऊर्जा के बि‍ना वि‍कास संभव नहीं होता है। एक प्रकार से ऊर्जा वि‍कास यात्रा का अहमपूर्ण अंग बन गयी है। लेकि‍न अगर fossil fuel से ऊर्जा पैदा करते हैं तो Global Warming की चिन्‍ता सताती है और अगर ऊर्जा पैदा नहीं करते हैं तो, न सि‍र्फ अंधेरा छा जाता है जि‍न्‍दगी अंधेरे में डूब जाती है। और ऐसी दुवि‍धा में से दुनियाँ को बचाने का क्‍या रास्‍ता हो सकता है? और तब जा करके अमेरि‍का, फ्रांस भारत तीनों ने मि‍लकरके एक initiative लि‍या है और वो initiative है innovation का। नई खोज हो, नए संसाधन नि‍र्माण हों, हमारे वैज्ञानि‍क, हमारे Technicians हमारे Engineers वो नई चीजें ले करके आएं जोकि‍ पर्यावरण पर प्रभाव पैदा न करती हों। Global Warming से दुनि‍याँ को बचाने का रास्‍ता दि‍खती हों और ऐसे साधनों को वि‍कसि‍त करें जो affordable हो sustainable हो और गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍ की पहुँच में हो। तो innovation के लि‍ए एक बहुत बड़ा अभि‍यान चलाने की दि‍शा में अमेरि‍का, फ्रांस और भारत दुनि‍याँ के ऐसी सभी व्‍यवस्‍थाओं को साथ ले करके आगे बढ़ने का बड़ा महत्‍तवपूर्ण निर्णय कि‍या उसको launch कि‍या गया। President Obama, President Hollande और मैं और UN General Secretary और Mr. Bill Gates , हम लोग उस समारोह में मौजूद थे और एक नया initiative प्रारंभ कि‍या। दूसरा एक महत्‍त्‍वपर्ण निर्णय हुआ है जि‍सका आने वाले दसकों तक मानव जीवन पर बड़ा ही प्रभाव रहने वाला है।

दुनि‍याँ में कई प्रकार के संगठन चल रहे हैं। OPEC countries का संगठन है G-20 है G-4 है, SAARC है, European Union है, ASEAN Countries हैं, कई प्रकार के संगठन दुनि‍याँ में बने हुए हैं। भारत ने एक वि‍चार रखा वि‍श्‍व के सामने कि‍ अगर Petroleum पैदावार करने वाले देश इकट्ठे हो सकते हैं, African countries एक हो सकते हैं, European Countries एक हो सकते हैं, क्‍यों न दुनि‍याँ में ऐसे देशों का संगठन खड़ा कि‍या जाए जि‍न देशों ने 300 दि‍वस से ज्‍यादा वर्ष में सूर्य का प्रकाश प्राप्‍त होता है।

ये सूर्य, ये बहुत बड़ी शक्‍ति‍ का स्रोत है सारे जीवन को चलाने में, सृष्‍टि‍ को चलाने में सूर्य की अहम् भूमि‍का है। क्‍यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्‍वीकार करके वि‍श्‍व कल्‍याण का रास्‍ता खोजें। 300 से अधि‍क दि‍वस, सूर्य का लाभ मि‍लता है ऐसे दुनि‍या में करीब-करीब 122 देश हैं। और इसलि‍ए वि‍चार आया क्‍यों न हम 122 देशों का जो कि‍ सूर्य शक्‍ति‍ से प्रभावि‍त हैं उनका एक संगठन गढ़ें। भारत ने इच्‍छा प्रकट की फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ जी ने मेरी पूरी मदद की, हम कंधे से कंधा मि‍लाकरके चले, दुनि‍याँ के देशों का संपर्क कि‍या और नवंबर महीने में पेरि‍स में जब conference चल रही थी, 30 नवंबर को दुनि‍याँ के सभी राष्‍ट्रों के मुखि‍या उस समारोह में मौजूद थे और एक International Solar Alliance इस नाम की संस्‍था का जन्‍म हुआ।

उसमें इस बात का भी निर्णय हुआ कि‍ इसका Global Secretariat ‍हि‍न्‍दुस्‍तान में रहेगा। ये International Solar Alliance इसका Headquarter गुड़गॉंव में बन रहा है। ये हरि‍याणा ‘कुरूक्षेत्र’ की धरती है, गीता का संदेश जहॉं से दि‍या, उस धरती से वि‍श्‍व कल्‍याण का एक नया संदेश इस Solar Alliance के रूप में हम पहुँचा रहे हैं।

बहुत कम लोगों को अंदाज होगा कि‍ आज ये जो घटना घट रही है उसका मानवजाति‍ पर कि‍तना बड़ा प्रभाव पैदा होने वाला है, इस बात को वही लोग समझ सकते हैं जो छोटे-छोटे Island पर बसते हैं, छोटे-छोटे Island Countries हैं और जि‍नके ऊपर ये भय सता रहा है कि‍ समुंदर के अगर पानी की ऊँचाई बढ़ती है तो पता नहीं कब उनका देश डूब जाएगा, पता नहीं वो इस सृष्‍टि‍ से समाप्‍त हो जाएंगे, दि‍न रात इन छोटे-छोटे देशों को चि‍न्‍ता हो रही है। जो देश समुद्र के कि‍नारे पर बसे हैं, उन देशों को चि‍न्‍ता हो रही है कि‍ अगर Global Warming के कारण समुद्र की सतह बढ़ रही है तो पता नहीं हमारे मुम्‍बई का क्‍या होगा, चेन्‍नई का क्‍या होगा? और दुनि‍याँ के ऐसे कई देश होंगे जि‍नके ऐसे बड़े-बड़े स्‍थान जो समु्द्र के कि‍नारे पर हैं उनके भाग्‍य का क्‍या होगा? सारा वि‍श्‍व चि‍न्‍ति‍त है। और मैं पि‍छले एक साल में, ये Island Countries हैं जो छोटे-छोटे उनके बहुत से नेताओं से मि‍ला हूँ, उनकी पीड़ा को मैंने भली-भॉंति‍ समझा है। क्‍या भारत इस कर्तव्‍य को नहीं नि‍भा सकता?

हमारे देश में जीवनदान एक बहुत बड़ा पुण्‍य माना जाता है। आज मैं कह सकता हूँ कि‍ International Solar Alliance उस जीवनदान का पुण्‍य काम करने वाला है, जो आने वाले दशकों के बाद दुनि‍याँ पर उसका प्रभाव पैदा करने वाला है। सारा वि‍श्‍व कहता है कि‍ Temperature कम होना चाहि‍ए, लेकि‍न Temperature कम करने का रास्‍ता भी सूर्य का Temperature ही है। एक ऊर्जा से दूसरी ऊर्जा का संकट मि‍टाया जा सकता है। और इसलि‍ए वि‍श्‍व को ऊर्जा के आवश्‍यकता की पूर्ति‍ भी हो, innovation का काम भी हो और सोलर को ले करके जीवन के क्षेत्र कैसे प्रभावि‍त हों उस दि‍शा में काम करने के लि‍ए बना है।

ये बात सही है कि‍ International Solar Alliance इसका Headquarters हि‍न्‍दुस्‍तान में हो रहा है, गुडगॉंव में हो रहा है, लेकि‍न ये Institution हि‍न्‍दुस्‍तान की Institution नहीं है ये Global Institution है, ये Independent Institution है। जैसे अमेरि‍का में United Nations है, लेकि‍न वो पूरा वि‍श्‍व का है। जैसे WHO है, पूरे वि‍श्‍व का है। वैसे ही ये International Solar Alliance का Headquarter ये पूरे वि‍श्‍व की धरोहर है और ये Independent चलेगा। अलग-अलग देश के लोग इसका नेतृत्‍व करेंगे, अलग-अलग देश के लोग इसकी जि‍म्‍मेदारी संभालेंगे, उसकी एक पद्धति‍ वि‍कसि‍त होगी लेकि‍न आज उसका Secretariat बन रहा है, उस Secretariat के माध्‍यम से इस बात को हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में परंपरागत प्राकृति‍क संसाधनों उपयोग करने का बीड़ा उठाया है। भारत ने जब ये कहा कि‍ हम 175Giga Watt, Renewable Energy की तरफ जाना चाहते हैं, तब दुनि‍याँ के लि‍ए बड़ा अचरज था। भारत में Giga Watt शब्‍द भी नया है, जब हम Mega Watt से आगे सोच भी नहीं पाते थे। हम आज Giga Watt पर सोच रहे हैं और 175 Giga Watt Solar Energy, Wind Energy, Nuclear Energy, Biomass से होने वाली Energy इन सारे स्रोतों को Hydro Energy ये हम उपलब्‍ध कराना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि‍ आज भारत 5000 MW से ज्‍यादा solar energy उसने install कर दी। ये इतने कम समय में जो काम हुआ है वो उस commitment का परिणाम है कि क्या भारत मानव जाति के कल्याण के लिए मानव जाति की रक्षा के लिए, प्रकृति की रक्षा के लिए, ये पूरी जो सृष्टि है उस पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए, भारत कोई अपना योगदान दे सकता है क्या? उस योगदान को देने के लिए ये बीड़ा उठाया है।

मैं फ्रांस के राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूँ कि इस चिंता के समय में global warming पर्यावरण के मुद्दे इसके समाधान के जो रास्ते है उनकी सोच भारत की सोच से बहुत मिलती जुलती है क्यों कि फ्रांस की values और भारत के values काफी समान है और इसलिए पिछले वर्ष April के महीने में हम दोनों मिले थे तो हमने तय किया था कि हम COP 21 के समय एक किताब निकालेंगे और विश्व के अंदर परंपरागत रूप से इन issues को कैसे देखा गया इस पर research करेंगे। और हम दोनों ने मिल कर के उस किताब की प्रस्तावना लिखी है और विश्व के सामने उन्ही के मूलभूत चिंतन क्या थे ये प्रस्तुत किया।

ये चीजें इसलिए हम कर रहे हैं कि मानव जाति को इस संकट से बचने के जो रस्ते खोजे जा रहे हैं, वो एक सामूहिक रूप से प्रयत्न हो, innovative रूप से प्रयत्न हो और परिणाम वो निकले जो मानव जाति की आवश्यकता है उसकी पूर्ति भी करे लेकिन प्रकृति को कोई नुकसान न हो। हम वो लोग हैं जिनके पूर्वजो ने, इस धरती से हमें प्यार करना सिखाया है। हमें कभी भी प्रकृति का शोषण करने के लिए नहीं सिखाया गया, हमें पौधे में भी परमात्मा होता है यह बचपन से सिखया गया। ये हमारी परंपरा है। अगर ये परंपरा है तो हमें विश्व को उसका लाभ पहुंचे उस दिशा में हमें कुछ कर दिखाना चाहिए और उसी के तहत आज international solar alliance का हम लोगों ने एक Secretariat का आरम्भ कर रहे हैं। और भविष्य में भव्य भवन के रूप में उसका निर्माण हो, एक स्वंत्रत इमारत तैयार हो, उसके लिए शिलन्यास भी कर रहे है और इस काम के लिए आप पधारे इसका मैं बहुत बहुत आभारी हूँ।

मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि solar alliance का निर्माण हो रहा हो आज हमें Delhi से यहाँ आना था हम by road भी आ सकते थे, helicopter से भी आ सकते थे, लकिन हम दोनों ने मिलकर तय किया कि अच्छा होगा की हम Metro से चले जाएँ और आज आप के बीच हमें Metro से आने का अवसर मिला।

मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूँ कि उन्होंने आज Metro में आने के लिए सहमति जताई और हम Metro का सफ़र करते करते आपके बीच पहुंचे क्योंकि वो भी एक सन्देश है क्योंकि global warming के सामने लड़ाई लड़ने के जो तरीके हैं उसमें ये भी एक तरीका है। मैं विश्वास करता हूँ कि ये प्रयास बहुत ही सुखद रहेगा। कल भारत प्रजासत्ता पर्व मनाने जा रहा है, इस प्रजसत्ता पर्व की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अधिकार और कर्तव्य इन दोनों को संतुलित करते हुए हम देश को आगे बढ़ाएंगे यही मेरी शुभकामना है।

बहुत बहुत धन्यवाद्।

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Your Excellency, My Friend, Mister President,
दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार !

ताशकेंट में मेरे और मेरे delegation के जिस आत्मीयता से स्वागत हुआ, जिस गर्मजोशी से स्वागत हुआ इसके लिए मैं राष्ट्रपति जी और उज़्बेकिस्तान के जनता का ह्रदय से बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।

उज़्बेकिस्तान की यह मेरी चौथी यात्रा है। यह हमारे संबंधों की निकटता, करीबी समन्वय और हमारी गहरी मित्रता को दर्शाता है।

पिछले लगभग एक दशक से मुझे राष्ट्रपति जी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है। इस दौरान मैं उन्हें दस से ज्यादा बार मिल चुका हूँ, मुझे मिलने का अवसर मिला है।

उनकी सकारात्मक और दूरदर्शी सोच, और निरंतर सीखते रहने की भावना वाकई बहुत ही प्रेरणादायक है। भारत के प्रति उनकी गहरी मित्रता और अटूट प्रतिबद्धता के लिए मैं उनका हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

Friends,

Uzbekistan is at the heart of Central Asia, and at the heart of India’s engagement with the region.

भारत और उज़्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानता है। “Yangi Uzbekistan” और “विकसित भारत 2047”, दोनों के केंद्र में youth, innovation, inclusive growth और modern technology हैं। इस साझा vision पर चलते हुए हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।

इस वर्ष हमारी Strategic Partnership के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस विशेष अवसर पर हमने संबंधों को Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा देने का निर्णय लिया है। आज हमने हमारी साझेदारी के इस नए स्वरूप में तेज़ गति और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ने का ambitious agenda तैयार किया है।

हमारा द्विपक्षीय व्यापार एक बिलियन डॉलर पार कर चुका है। अब हमने 2030 तक पाँच बिलियन डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हम market access, connectivity, banking और payment से जुड़े विषयों पर व्यवस्थागत रूप से आगे बढ़ेंगे।

Infrastructure development में win-win सहयोग बढ़ाने के लिए हम मिलकर काम करेंगे। Digital Public Infrastructure, AI, critical minerals, clean energy, स्पेस और नूक्लीअर एनर्जी में सहयोग हमारे संबंधों को future-ready बना रहा है।

दोस्तों,

कृषि और स्वास्थ्य में हमारी ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं। उज़्बेकिस्तान के horticulture अनुभव और भारत की आधुनिक agricultural practices को जोड़कर हम दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा में योगदान देंगे।

उज़्बेकिस्तान की medicinal herbs और भारत की आयुर्वेद एक्स्पर्टीज़ भी एक natural combination हैं। आज Traditional Medicine पर हुए समझौते से हमारे साझा प्रयासों को बल मिलेगा।

हमारा प्रयास है कि हमारी साझेदारी केवल दो राजधानियों तक सीमित न रहे। इसलिए हम अपने cities और states के बीच partnerships स्थापित करने जा रहे हैं। इन partnerships से urban management, industry, education, tourism और culture में direct connections निरंतर बढ़ते रहेंगे।

दोनों देशों के बीच करीबी रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। आने वाले समय में हम दोनों देशों की defence industries के बीच direct linkages, co-production और co-development को बढ़ावा देंगे।

हमारा मानना है कि terrorism, extremism और separatism पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती हैं। इनके विरुद्ध zero tolerance हमारा साझा संकल्प रहा है, और आगे भी रहेगा।

दोस्तों,

हमारे संबंधों की सबसे गहरी जड़ें हमारी साझा विरासत में हैं। आज हमने इन्हें और मज़बूत बनाने पर विशेष बल दिया।

उज़्बेकिस्तान की Buddhist heritage sites के संरक्षण के लिए हम मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों के युवाओं, विशेषकर students और professionals के बीच exchanges को बढ़ावा देना हमारी उच्च प्राथमिकता है। दोनों देशों के बीच टुरिज़म बढ़ाने के लिए आज Program of Cooperation पर सहमति बनी है। मुझे खुशी है कि उज़्बेकिस्तान में हिन्दी भाषा को promote करने के लिए आज हम Scholarships की घोषणा करने जा रहे हैं।

Sports भी हमारे सहयोग के महत्वपूर्ण आयाम के रूप में उभर रहा है। पिछले वर्ष गोवा में बीस वर्षीय Uzbek Grandmaster सिंदारोव ने FIDE World Cup जीता। अब नवंबर में उनका मुकाबला भारत के बीस वर्षीय chess champion गुकेश के साथ होने वाला है। एक बिसात पर जब ये दो युवा सितारे आमने-सामने होंगे, तो ज़ाहिर है- इस मुकाबले पर पूरी दुनिया की नज़र होगी। अगले महीने समरकन्द में होने जा रहे Chess Olympiad के लिए भी मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। आने वाले समय में कुराश और कबड्डी जैसे traditional games भी हमारी स्पोर्ट्स साझेदारी को नई ऊर्जा देंगे।

आज की चर्चा ने हमारे संबंधों के भविष्य की एक स्पष्ट दिशा तय की है।

A stronger India-Uzbekistan partnership will be a powerful force for peace, progress and prosperity in Central Asia.

Excellency,

आपकी मित्रता और आज की सार्थक चर्चा के लिए एक बार फिर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

दो दिन बाद उज़्बेकिस्तान अपनी स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ मनाएगा। मैं 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आपको और सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।