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Entire world is now discussing global warming and ways to mitigate it: PM Modi
Two landmark initiatives emerged in #COP21. India & France played key roles in those: PM
International Solar Alliance will impact generations in a big way: PM Modi
US, India, France took initiative of innovation; let is innovate and protect our environment: PM
India expressed keenness on solar alliance. France was very helpful, did everything possible to bring all nations together: PM
Solar alliance to ensure that the world gets more energy: PM Modi

मंच पर वि‍राजमान फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ श्रीमान ओलांद फ्रांस से आए हुए Senior Ministers हरि‍याणा के Governor श्री, मुख्‍यमंत्री श्री, श्रीमान पीयुष गोयल जी फ्रांस का Delegation और वि‍शाल संख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाइयों और बहनों!

पि‍छले एक वर्ष से सारी दुनि‍याँ में इस बात की चर्चा थी कि‍ Global Warming के सामने दुनि‍याँ कौन से कदम उठाए कि‍न बातों का संकल्‍प करे? और उसकी पूर्ति‍ के लिए कौन से रास्‍ते अपनाएं? पेरि‍स में होने वाली COP 21 के संबंध में पूरी दुनि‍याँ में एक उत्‍सुकता थी, संबधि‍त सारे लोग अपने-अपने तरीके से उस पर प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे थे, और करीब-करीब दो सप्‍ताह तक दुनि‍याँ के सभी देशों ने मि‍ल करके, इन वि‍षयों के जो जानकार लोग हैं वो वि‍श्‍व के सारे वहॉं इकट्ठे आए चर्चाएं की और इस बड़े संकट के सामने मानव जाति‍ की रक्षा कैसे करें, उसके लि‍ए संकल्‍पबद्ध हो करके आगे बढ़े।

COP 21 के नि‍र्णयों के संबंध में तो वि‍श्‍व में भली- भॉंति‍ बातें पहुँची हैं लेकि‍न पेरि‍स की धरती पर एक तरफ जब COP 21 की चर्चाएं चल रहीं थीं तब दो महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives लि‍ए गए। इन दोनों महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives में भारत और फ्रांस ने बहुत ही महत्‍त्‍वपूर्ण भमि‍का नि‍भाई है एक initiative एक तरफ तो Global Warming की चिन्‍ता है, मानवजाति‍ को पर्यावरण के संकटों से रक्षित करना है और दूसरी तरफ मानवजाति‍ के आवश्‍यकताओं की पूर्ति‍ भी करनी है। जो Developing Countries हैं उन्‍हें अभी वि‍कास की नई ऊँचाइयों को पार करना बाकी है और ऊर्जा के बि‍ना वि‍कास संभव नहीं होता है। एक प्रकार से ऊर्जा वि‍कास यात्रा का अहमपूर्ण अंग बन गयी है। लेकि‍न अगर fossil fuel से ऊर्जा पैदा करते हैं तो Global Warming की चिन्‍ता सताती है और अगर ऊर्जा पैदा नहीं करते हैं तो, न सि‍र्फ अंधेरा छा जाता है जि‍न्‍दगी अंधेरे में डूब जाती है। और ऐसी दुवि‍धा में से दुनियाँ को बचाने का क्‍या रास्‍ता हो सकता है? और तब जा करके अमेरि‍का, फ्रांस भारत तीनों ने मि‍लकरके एक initiative लि‍या है और वो initiative है innovation का। नई खोज हो, नए संसाधन नि‍र्माण हों, हमारे वैज्ञानि‍क, हमारे Technicians हमारे Engineers वो नई चीजें ले करके आएं जोकि‍ पर्यावरण पर प्रभाव पैदा न करती हों। Global Warming से दुनि‍याँ को बचाने का रास्‍ता दि‍खती हों और ऐसे साधनों को वि‍कसि‍त करें जो affordable हो sustainable हो और गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍ की पहुँच में हो। तो innovation के लि‍ए एक बहुत बड़ा अभि‍यान चलाने की दि‍शा में अमेरि‍का, फ्रांस और भारत दुनि‍याँ के ऐसी सभी व्‍यवस्‍थाओं को साथ ले करके आगे बढ़ने का बड़ा महत्‍तवपूर्ण निर्णय कि‍या उसको launch कि‍या गया। President Obama, President Hollande और मैं और UN General Secretary और Mr. Bill Gates , हम लोग उस समारोह में मौजूद थे और एक नया initiative प्रारंभ कि‍या। दूसरा एक महत्‍त्‍वपर्ण निर्णय हुआ है जि‍सका आने वाले दसकों तक मानव जीवन पर बड़ा ही प्रभाव रहने वाला है।

दुनि‍याँ में कई प्रकार के संगठन चल रहे हैं। OPEC countries का संगठन है G-20 है G-4 है, SAARC है, European Union है, ASEAN Countries हैं, कई प्रकार के संगठन दुनि‍याँ में बने हुए हैं। भारत ने एक वि‍चार रखा वि‍श्‍व के सामने कि‍ अगर Petroleum पैदावार करने वाले देश इकट्ठे हो सकते हैं, African countries एक हो सकते हैं, European Countries एक हो सकते हैं, क्‍यों न दुनि‍याँ में ऐसे देशों का संगठन खड़ा कि‍या जाए जि‍न देशों ने 300 दि‍वस से ज्‍यादा वर्ष में सूर्य का प्रकाश प्राप्‍त होता है।

ये सूर्य, ये बहुत बड़ी शक्‍ति‍ का स्रोत है सारे जीवन को चलाने में, सृष्‍टि‍ को चलाने में सूर्य की अहम् भूमि‍का है। क्‍यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्‍वीकार करके वि‍श्‍व कल्‍याण का रास्‍ता खोजें। 300 से अधि‍क दि‍वस, सूर्य का लाभ मि‍लता है ऐसे दुनि‍या में करीब-करीब 122 देश हैं। और इसलि‍ए वि‍चार आया क्‍यों न हम 122 देशों का जो कि‍ सूर्य शक्‍ति‍ से प्रभावि‍त हैं उनका एक संगठन गढ़ें। भारत ने इच्‍छा प्रकट की फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ जी ने मेरी पूरी मदद की, हम कंधे से कंधा मि‍लाकरके चले, दुनि‍याँ के देशों का संपर्क कि‍या और नवंबर महीने में पेरि‍स में जब conference चल रही थी, 30 नवंबर को दुनि‍याँ के सभी राष्‍ट्रों के मुखि‍या उस समारोह में मौजूद थे और एक International Solar Alliance इस नाम की संस्‍था का जन्‍म हुआ।

उसमें इस बात का भी निर्णय हुआ कि‍ इसका Global Secretariat ‍हि‍न्‍दुस्‍तान में रहेगा। ये International Solar Alliance इसका Headquarter गुड़गॉंव में बन रहा है। ये हरि‍याणा ‘कुरूक्षेत्र’ की धरती है, गीता का संदेश जहॉं से दि‍या, उस धरती से वि‍श्‍व कल्‍याण का एक नया संदेश इस Solar Alliance के रूप में हम पहुँचा रहे हैं।

बहुत कम लोगों को अंदाज होगा कि‍ आज ये जो घटना घट रही है उसका मानवजाति‍ पर कि‍तना बड़ा प्रभाव पैदा होने वाला है, इस बात को वही लोग समझ सकते हैं जो छोटे-छोटे Island पर बसते हैं, छोटे-छोटे Island Countries हैं और जि‍नके ऊपर ये भय सता रहा है कि‍ समुंदर के अगर पानी की ऊँचाई बढ़ती है तो पता नहीं कब उनका देश डूब जाएगा, पता नहीं वो इस सृष्‍टि‍ से समाप्‍त हो जाएंगे, दि‍न रात इन छोटे-छोटे देशों को चि‍न्‍ता हो रही है। जो देश समुद्र के कि‍नारे पर बसे हैं, उन देशों को चि‍न्‍ता हो रही है कि‍ अगर Global Warming के कारण समुद्र की सतह बढ़ रही है तो पता नहीं हमारे मुम्‍बई का क्‍या होगा, चेन्‍नई का क्‍या होगा? और दुनि‍याँ के ऐसे कई देश होंगे जि‍नके ऐसे बड़े-बड़े स्‍थान जो समु्द्र के कि‍नारे पर हैं उनके भाग्‍य का क्‍या होगा? सारा वि‍श्‍व चि‍न्‍ति‍त है। और मैं पि‍छले एक साल में, ये Island Countries हैं जो छोटे-छोटे उनके बहुत से नेताओं से मि‍ला हूँ, उनकी पीड़ा को मैंने भली-भॉंति‍ समझा है। क्‍या भारत इस कर्तव्‍य को नहीं नि‍भा सकता?

हमारे देश में जीवनदान एक बहुत बड़ा पुण्‍य माना जाता है। आज मैं कह सकता हूँ कि‍ International Solar Alliance उस जीवनदान का पुण्‍य काम करने वाला है, जो आने वाले दशकों के बाद दुनि‍याँ पर उसका प्रभाव पैदा करने वाला है। सारा वि‍श्‍व कहता है कि‍ Temperature कम होना चाहि‍ए, लेकि‍न Temperature कम करने का रास्‍ता भी सूर्य का Temperature ही है। एक ऊर्जा से दूसरी ऊर्जा का संकट मि‍टाया जा सकता है। और इसलि‍ए वि‍श्‍व को ऊर्जा के आवश्‍यकता की पूर्ति‍ भी हो, innovation का काम भी हो और सोलर को ले करके जीवन के क्षेत्र कैसे प्रभावि‍त हों उस दि‍शा में काम करने के लि‍ए बना है।

ये बात सही है कि‍ International Solar Alliance इसका Headquarters हि‍न्‍दुस्‍तान में हो रहा है, गुडगॉंव में हो रहा है, लेकि‍न ये Institution हि‍न्‍दुस्‍तान की Institution नहीं है ये Global Institution है, ये Independent Institution है। जैसे अमेरि‍का में United Nations है, लेकि‍न वो पूरा वि‍श्‍व का है। जैसे WHO है, पूरे वि‍श्‍व का है। वैसे ही ये International Solar Alliance का Headquarter ये पूरे वि‍श्‍व की धरोहर है और ये Independent चलेगा। अलग-अलग देश के लोग इसका नेतृत्‍व करेंगे, अलग-अलग देश के लोग इसकी जि‍म्‍मेदारी संभालेंगे, उसकी एक पद्धति‍ वि‍कसि‍त होगी लेकि‍न आज उसका Secretariat बन रहा है, उस Secretariat के माध्‍यम से इस बात को हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में परंपरागत प्राकृति‍क संसाधनों उपयोग करने का बीड़ा उठाया है। भारत ने जब ये कहा कि‍ हम 175Giga Watt, Renewable Energy की तरफ जाना चाहते हैं, तब दुनि‍याँ के लि‍ए बड़ा अचरज था। भारत में Giga Watt शब्‍द भी नया है, जब हम Mega Watt से आगे सोच भी नहीं पाते थे। हम आज Giga Watt पर सोच रहे हैं और 175 Giga Watt Solar Energy, Wind Energy, Nuclear Energy, Biomass से होने वाली Energy इन सारे स्रोतों को Hydro Energy ये हम उपलब्‍ध कराना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि‍ आज भारत 5000 MW से ज्‍यादा solar energy उसने install कर दी। ये इतने कम समय में जो काम हुआ है वो उस commitment का परिणाम है कि क्या भारत मानव जाति के कल्याण के लिए मानव जाति की रक्षा के लिए, प्रकृति की रक्षा के लिए, ये पूरी जो सृष्टि है उस पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए, भारत कोई अपना योगदान दे सकता है क्या? उस योगदान को देने के लिए ये बीड़ा उठाया है।

मैं फ्रांस के राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूँ कि इस चिंता के समय में global warming पर्यावरण के मुद्दे इसके समाधान के जो रास्ते है उनकी सोच भारत की सोच से बहुत मिलती जुलती है क्यों कि फ्रांस की values और भारत के values काफी समान है और इसलिए पिछले वर्ष April के महीने में हम दोनों मिले थे तो हमने तय किया था कि हम COP 21 के समय एक किताब निकालेंगे और विश्व के अंदर परंपरागत रूप से इन issues को कैसे देखा गया इस पर research करेंगे। और हम दोनों ने मिल कर के उस किताब की प्रस्तावना लिखी है और विश्व के सामने उन्ही के मूलभूत चिंतन क्या थे ये प्रस्तुत किया।

ये चीजें इसलिए हम कर रहे हैं कि मानव जाति को इस संकट से बचने के जो रस्ते खोजे जा रहे हैं, वो एक सामूहिक रूप से प्रयत्न हो, innovative रूप से प्रयत्न हो और परिणाम वो निकले जो मानव जाति की आवश्यकता है उसकी पूर्ति भी करे लेकिन प्रकृति को कोई नुकसान न हो। हम वो लोग हैं जिनके पूर्वजो ने, इस धरती से हमें प्यार करना सिखाया है। हमें कभी भी प्रकृति का शोषण करने के लिए नहीं सिखाया गया, हमें पौधे में भी परमात्मा होता है यह बचपन से सिखया गया। ये हमारी परंपरा है। अगर ये परंपरा है तो हमें विश्व को उसका लाभ पहुंचे उस दिशा में हमें कुछ कर दिखाना चाहिए और उसी के तहत आज international solar alliance का हम लोगों ने एक Secretariat का आरम्भ कर रहे हैं। और भविष्य में भव्य भवन के रूप में उसका निर्माण हो, एक स्वंत्रत इमारत तैयार हो, उसके लिए शिलन्यास भी कर रहे है और इस काम के लिए आप पधारे इसका मैं बहुत बहुत आभारी हूँ।

मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि solar alliance का निर्माण हो रहा हो आज हमें Delhi से यहाँ आना था हम by road भी आ सकते थे, helicopter से भी आ सकते थे, लकिन हम दोनों ने मिलकर तय किया कि अच्छा होगा की हम Metro से चले जाएँ और आज आप के बीच हमें Metro से आने का अवसर मिला।

मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूँ कि उन्होंने आज Metro में आने के लिए सहमति जताई और हम Metro का सफ़र करते करते आपके बीच पहुंचे क्योंकि वो भी एक सन्देश है क्योंकि global warming के सामने लड़ाई लड़ने के जो तरीके हैं उसमें ये भी एक तरीका है। मैं विश्वास करता हूँ कि ये प्रयास बहुत ही सुखद रहेगा। कल भारत प्रजासत्ता पर्व मनाने जा रहा है, इस प्रजसत्ता पर्व की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अधिकार और कर्तव्य इन दोनों को संतुलित करते हुए हम देश को आगे बढ़ाएंगे यही मेरी शुभकामना है।

बहुत बहुत धन्यवाद्।

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উত্তরপ্রদেশের গোরক্ষপুরে বিবিধ উন্নয়নমূলক প্রকল্পের উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
December 07, 2021
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তিনি আইআইএমএস, সার কারখানা এবং আইসিএমআর-এর কেন্দ্রের উদ্বোধন করেছেন
যখন ডবল ইঞ্জিনের সরকার থাকে তখন উন্নয়নমূলক কাজের বাস্তবায়নের গতি দ্বিগুণ হয়: প্রধানমন্ত্রী
যখন এমন একটি সরকার থাকে যাঁরা দরিদ্র, নিপীড়িত এবং বঞ্চিতদের কথা চিন্তা করে, তখন তার সুফল প্রতিফলিত হয়
এদিনের অনুষ্ঠান প্রমাণ করে যে, নতুন ভারত যখন সংকল্পবদ্ধ, তখন কিছুই অসম্ভব নয়
প্রধানমন্ত্রী সাম্প্রতিক সময়ে আখ চাষিদের জন্য অভূতপূর্ব কাজে উত্তরপ্রদেশ সরকারের প্রশংসা করেন

ভারতমাতার জয়, ভারতমাতার জয়!

ধর্ম, অধ্যাত্ম আর বিপ্লবের নগরী গোরক্ষপুরের দেবতুল্য জনগণকে আমি প্রণাম জানাই। পরমহংস যোগানন্দ, মহাযোগী গোরক্ষনাথজি, পূজনীয় হনুমান প্রসাদ পোদ্দারজি আর মহাআত্মবলিদানকারী পণ্ডিত রামপ্রসাদ বিস্মিল-এর এই পবিত্র মাটিকে কোটি কোটি প্রণাম। আপনারা সবাই সার কারখানা আর এইমস মানের হাসপাতালের জন্য দীর্ঘকাল অপেক্ষা করেছেন। আজ সেই মুহূর্ত এসে গেছে, যখন আপনারা এগুলি পাচ্ছেন। আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা।

আমার সঙ্গে মঞ্চে উপস্থিত উত্তরপ্রদেশের রাজ্যপাল শ্রীমতী আনন্দিবেন প্যাটেলজি, উত্তরপ্রদেশের যশস্বী কর্মযোগী মুখ্যমন্ত্রী যোগী আদিত্যনাথজি, উত্তরপ্রদেশের উপ-মুখ্যমন্ত্রী কেশব প্রসাদ মৌর্যজি, ডঃ দীনেশ শর্মাজি, ভারতীয় জনতা পার্টির উত্তরপ্রদেশের অধ্যক্ষ শ্রী স্বতন্ত্র দেবসিং-জি, আপনা দল-এর জাতীয় অধ্যক্ষ এবং কেন্দ্রীয় মন্ত্রিসভায় আমাদের সঙ্গী ভগিনী অনুপ্রিয়া প্যাটেলজি, নিশাদ পার্টির অধ্যক্ষ ভাই সঞ্জয় নিশাদজি, রাম চৌহানজি, আনন্দস্বরূপ শুক্লাজি, আমার সাংসদ সঙ্গীগণ, উত্তরপ্রদেশ বিধানসভা এবং বিধান পরিষদের মাননীয় সদস্যগণ আর এখানে আমাকে আশীর্বাদ দেওয়ার জন্য বিপুল সংখ্যায় আগত আমার প্রিয় ভাই ও বোনেরা!

যখন আমি মঞ্চে উঠছিলাম তখন ভাবছিলাম, এত ভিড়, এখান থেকে সবাইকে দেখাও যাচ্ছে না। কিন্তু যখন ওদিকে তাকালাম, তখন অবাক হয়ে গেলাম। এত বড় সংখ্যক মানুষ! আর আমি জানি, আপনারা সবাই হয়তো আমাকে দেখতেই পাচ্ছেন না। হয়তো কেউ কেউ শুনতেও পাচ্ছেন না। এত দূর দূর থেকে মানুষ পতাকা ওড়াচ্ছেন। এটা আপনাদের ভালোবাসা, এটা আপনাদের আশীর্বাদ। এ থেকেই আমরা আপনাদের জন্য দিন-রাত কাজ করার প্রেরণা পাই, প্রাণশক্তি পাই, শক্তি পাই। পাঁচ বছর আগে আমি এখানে এইমস হাসপাতাল এবং সার কারখানার শিলান্যাস করতে এসেছিলাম। আজ আপনারা আমাকে এই দুটির শুভ উদ্বোধন করার সৌভাগ্য দিয়েছেন। আইসিএমআর-এর রিজিওনাল মেডিকেল রিসার্চ সেন্টারও আজ এখানে একটি নতুন ভবন পেয়েছে। আমি উত্তরপ্রদেশের জনগণকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা জানাই।

বন্ধুগণ,

গোরক্ষপুরে সার কারখানা শুরু হওয়া, এইমস মানের হাসপাতাল শুরু হওয়া অনেক বার্তা দিচ্ছে। যখনই ডবল ইঞ্জিনের সরকার হয়, তখন দ্বিগুণ গতিতে কাজও হয়। যখন সদিচ্ছা নিয়ে কাজ হয়, তখন কোনও প্রাকৃতিক বিপর্যয়ও অবরোধ সৃষ্টি করতে পারে না। যখন দেশে গরীব, শোষিত, বঞ্চিত মানুষের জন্য চিন্তা করার সরকার থাকে, তখন তারা পরিশ্রমও করে, পরিণামও এনে দেখায়। গোরক্ষপুরে আজ যে আয়োজন হয়েছে তা এর জলজ্যান্ত প্রমাণ যে নতুন ভারত যখন দৃঢ়প্রতিজ্ঞ হয়, তখন তার জন্য কোনকিছুই অসম্ভব নয়।

বন্ধুগণ,

২০১৪ সালে যখন আপনারা আমাকে প্রথমবার সেবা করার সুযোগ দিয়েছিলেন, সেই সময় দেশে সার উৎপাদন ক্ষেত্রে অনেক খারাপ অবস্থা ছিল। দেশের অনেক বড় বড় কারখানা অনেক বছর বন্ধ হয়ে পড়েছিল, আর বিদেশ থেকে সার আমদানি ক্রমাগত বৃদ্ধি পাচ্ছিল। আরও একটি বড় সমস্যা ছিল যে যতটা সার দেশের কাছে ছিল, তারও সম্পূর্ণ সদ্ব্যবহার হতো না। চাষের কাজ ছাড়া অন্য কাজের জন্যও লুকিয়ে গোপনে চলে যেত। সেজন্য সারা দেশে ইউরিয়ার অভাব তখন দেশের খবরের কাগজ ও বৈদ্যুতিন মাধ্যমে সংবাদ শিরোনামে থাকত। কৃষকদের সার সংগ্রহ করতে গিয়ে লাঠিপেটা খাওয়া, গুলি খাওয়া – এ ধরনের দিনও বারবার দেখতে হয়েছে। এমন পরিস্থিতি থেকে দেশকে বের করে আনার জন্য আমরা একটি নতুন সঙ্কল্প নিয়ে এগিয়ে গিয়েছি। আমরা তিনটি সূত্র অনুসারে একসঙ্গে কাজ করা শুরু করেছি। প্রথমটি হল, আমরা ইউরিয়ার ভুল ব্যবহার থামিয়েছি। ইউরিয়াকে ১০০ শতাংশ নিম আচ্ছাদিত করা সুনিশ্চিত করেছি। দ্বিতীয়ত, আমরা কোটি কোটি কৃষককে মৃত্তিকা স্বাস্থ্য কার্ড দিয়েছি যাতে তাঁরা বুঝতে পারেন যে তাঁদের চাষের খেতে কোন ধরনের সারের প্রয়োজন, আর তৃতীয়ত, আমরা ইউরিয়ার উৎপাদন বৃদ্ধিতে জোর দিয়েছি। বন্ধ হয়ে থাকা সার কারখানাগুলিকে আবার খোলার জন্য আমরা জোর দিয়েছি। এই অভিযানের মাধ্যমেই গোরক্ষপুরের এই সার কারখানাটি সহ দেশের আরও চারটি বড় সার কারখানা আমরা বেছে নিয়েছি। তার মধ্যে আজ একটি চালু হয়ে গেল। বাকি তিনটিও আগামী বছর চালু হয়ে যাবে।

বন্ধুগণ,

গোরক্ষপুর সার কারখানা চালু করার জন্য আরেকটি ভগীরথ-সম কাজ হয়েছে। যেভাবে পূরাণে আমরা পড়েছি যে ভগীরথজি গঙ্গাজিকে হিমালয় থেকে আহ্বান করে নিয়ে এসেছিলেন, তেমনই এই সার কারখানা পর্যন্ত গঙ্গার মাধ্যমে জ্বালানি পৌঁছে দেওয়া হয়েছে। ‘পিএম উর্জা গঙ্গা গ্যাস পাইপলাইন পরিযোজনা’র মাধ্যমে পশ্চিমবঙ্গের হলদিয়া থেকে উত্তরপ্রদেশের জগদীশপুর পর্যন্ত পাইপলাইন পাতা হয়েছে। এই পাইপলাইনের ফলে গোরক্ষপুর সার কারখানা তো শুরু হয়েছেই, পূর্ব ভারতের কয়েক ডজন জেলায় পাইপলাইনের মাধ্যমে সাধারণ মানুষ সস্তায় গ্যাসও পাচ্ছেন।

ভাই ও বোনেরা,

সার কারখানার শিলান্যাসের সময় আমি বলেছিলাম যে এই কারখানা চালু হলে গোরক্ষপুর এই গোটা এলাকার মধ্যে উন্নয়নের শিরদাড়া হয়ে উঠবে। আজ আমি এই সত্যকে বাস্তবায়িত হতে দেখছি। এই সার কারখানা রাজ্যের অনেক কৃষককে পর্যাপ্ত ইউরিয়া তো দেবেই, এর থেকে পূর্বাঞ্চলে রোজগার এবং স্বরোজগারের হাজার হাজার নতুন সুযোগ সৃষ্টি হবে। এখন এখানে আর্থিক উন্নয়নের একটি নতুন সম্ভাবনা আরেকবার সৃষ্টি হবে, অনেক নতুন ব্যবসা শুরু হবে। সার কারখানাগুলির সঙ্গে যুক্ত সহায়ক শিল্পোদ্যোগগুলির পাশাপাশি পরিবহণ এবং পরিষেবা ক্ষেত্রও এর থেকে উৎসাহিত হবে।

বন্ধুগণ,

দেশকে ইউরিয়া উৎপাদন ক্ষেত্রে আত্মনির্ভর করে গড়ে তুলতে গোরক্ষপুর সার কারখানার অনেক বড় ভূমিকা থাকবে। দেশের ভিন্ন ভিন্ন অংশে গড়ে ওঠা পাঁচটি সার কারখানা শুরু হওয়ার পর দেশ ৬০ লক্ষ টন অতিরিক্ত ইউরিয়া পাবে। অর্থাৎ, ভারতকে আর হাজার হাজার কোটি টাকা সার আমদানি খাতে বিদেশে পাঠাতে হবে না। ভারতের টাকা ভারতেরই কাজে লাগবে।

বন্ধুগণ,

সারের ক্ষেত্রে আত্মনির্ভরতা কেন চাই, এটা আমরা করোনার সঙ্কটকালেই বেশি করে অনুভব করেছি। করোনার ফলে সারা পৃথিবীতে লকডাউন শুরু হয়েছে। একটি দেশ থেকে অন্য দেশে আসা-যাওয়া থেমে গেছে। সরবরাহ শৃঙ্খল ভেঙে গেছে। এর ফলে আন্তর্জাতিক স্তরে সারের দাম অনেক বেশি বেড়ে গেছে। কিন্তু কৃষকদের জন্য সমর্পিত এবং সংবেদনশীল আমাদের সরকার এটা সুনিশ্চিত করেছে যে বিশ্বে সারের দাম যতই বাড়ুক,  ভারতে এই বোঝা আমরা কৃষকদের বহন করতে দেব না। কৃষকদের যাতে ন্যূনতম সমস্যা হয়, এটা দেখা আমাদের দায়িত্ব। আপনারা শুনলে অবাক হবেন, ভাই ও বোনেরা, এ বছরে এনপিকে সারের দাম সারা পৃথিবীতে বৃদ্ধির ফলে ৪৩ হাজার কোটি টাকারও বেশি অতিরিক্ত ছাড় আমরা কৃষকদের ভর্তুকির মাধ্যমে দিয়েছি। ইউরিয়ার জন্য ভর্তুকিও আমাদের সরকার ৩৩ হাজার কোটি টাকা বাড়িয়েছে যাতে আন্তর্জাতিক বাজারে দাম বাড়লে তার বোঝা আমাদের কৃষকদের না বইতে হয়। আন্তর্জাতিক বাজারে যেখানে ইউরিয়ার দাম প্রতি কেজি ৬০ থেকে ৬৫ টাকা, সেখানে ভারতে কৃষকদের ১০ থেকে ১২ গুণ সস্তায় ইউরিয়া দেওয়ার চেষ্টা করা হয়েছে।

ভাই ও বোনেরা,

আজ ভোজ্যতেল আমদানির জন্য ভারত থেকে প্রত্যেক বছর হাজার হাজার কোটি টাকা বিদেশে চলে যায়। এই পরিস্থিতি পরিবর্তনের জন্য দেশের মধ্যেই পর্যাপ্ত পরিমাণ ভোজ্যতেল উৎপাদনের লক্ষ্যে জাতীয় স্তরের অভিযান শুরু করা হয়েছে। পেট্রোল, ডিজেলের জন্য অপরিশোধিত তেলের ওপরও ভারত প্রতি বছর ৫ থেকে ৭ লক্ষ কোটি টাকা খরচ করে। এই আমদানি কমানোর জন্যও আমরা ইথানল এবং বায়ো-ফুয়েল উৎপাদনে জোর দিয়েছি। পূর্বাঞ্চলের এই এলাকাকে তো আখ চাষীদের দুর্গ বলে মানা হয়। ইথানল আখ চাষীদের জন্য চিনি ছাড়াও রোজগারের একটি বড় উপায় হয়ে উঠছে। উত্তরপ্রদেশেও বায়ো-ফুয়েল উৎপাদনের জন্য অনেক কারখানায় কাজ চলছে। আমাদের সরকার ক্ষমতায় আসার আগে উত্তরপ্রদেশ শুধু ২০ কোটি লিটার ইথানল, তেল কোম্পানিগুলিকে পাঠাত। আজ প্রায় ১০০ কোটি লিটার ইথানল শুধু উত্তরপ্রদেশের কৃষকরাই ভারতের তেল কোম্পানিগুলিতে পাঠাচ্ছেন। আগে মধ্যপ্রাচ্যের দেশগুলি থেকে তেল আসত। এখন এর পাশাপাশি আমাদের আখ খেতগুলি থেকেও তেল আসা শুরু হয়েছে। আমি আজ যোগীজির সরকারকে এজন্য অনেক প্রশংসা জানাতে চাই যে তাঁরা আখ চাষীদের জন্য গত বছরগুলিতে অভূতপূর্ব কাজ করেছেন। আখ চাষীদের জন্য সহায়ক মূল্য সম্প্রতি ৩৫০ টাকা পর্যন্ত বাড়ানো হয়েছে। আগেকার দুটি সরকার ১০ বছরে আখ চাষীদের যতটা ভর্তুকি দিয়েছে, প্রায় ততটাই যোগীজির সরকারও আপনাদের সারের ক্ষেত্রে এই চার বছরে দিয়েছে।

ভাই ও বোনেরা,

প্রকৃত উন্নয়ন সেটাই হয় যার লাভ সবার কাছে পৌঁছয়। যে উন্নয়ন ভারসাম্যযুক্ত হয়, তা সবার জন্য লাভদায়ক হয় আর একথা তাঁরাই বুঝতে পারেন যাঁরা সংবেদনশীল, যাঁদের মনে গরীবদের জন্য চিন্তা আছে। দীর্ঘকাল ধরে গোরক্ষপুর সহ এই বিরাট এলাকাকে মাত্র একটি মেডিকেল কলেজের ভরসায় চলতে হত। এখানকার গরীব এবং মধ্যবিত্ত পরিবারগুলির চিকিৎসার জন্য বেনারস কিংবা লক্ষ্ণৌ যেতে হত। পাঁচ বছর আগে পর্যন্ত মস্তিষ্কের জ্বর বা এনসেফেলাইটিস-এর চিকিৎসার জন্য এই এলাকায় কী অবস্থা ছিল, এটা আমার থেকে বেশি আপনারা সবাই জানেন। এখানে মেডিকেল কলেজের যে গবেষণাকেন্দ্র চালু ছিল তার জন্য নিজস্ব ভবন পর্যন্ত ছিল না।

ভাই ও বোনেরা,

আপনারা যখন আমাকে সেবা করার সুযোগ দিয়েছেন, তখন এখানে এইমস-ও এসেছে। আপনারা দেখলেন, কত দ্রুত এত বড় এইমস হাসপাতাল তৈরি হয়ে গেছে। শুধু তাই নয়, গবেষণাকেন্দ্রের জন্য নিজস্ব বাড়িও তৈরি হয়েছে। যখন আমি এইমস-এর শিলান্যাস করতে এসেছিলাম, তখনও আমি বলেছিলাম যে আমরা মস্তিষ্কের জ্বর থেকে এই অঞ্চলকে মুক্তি দেওয়ার জন্য সম্পূর্ণ পরিশ্রম করব। আমরা মস্তিষ্কের জ্বর ছড়িয়ে পড়ার কারণগুলিকে দূর করার ক্ষেত্রে যে কাজ করেছি, তার ফলস্বরূপ এই রোগের প্রাদুর্ভাব কমাতে পেরেছি। আজ সেই পরিশ্রম বাস্তবায়িত হতে দেখা যাচ্ছে। আজ গোরক্ষপুর এবং বস্তি ডিভিশনের সাতটি জেলায় মস্তিষ্কের জ্বর প্রায় ৯০ শতাংশ হ্রাস পেয়েছে। যে শিশুরা এখনও অসুস্থ হয়, তাদের অধিকাংশেরই জীবন বাঁচানোর ক্ষেত্রে আমরা সাফল্য পাচ্ছি। যোগী সরকার এক্ষেত্রে যে কাজ করেছে তার প্রশংসা এখন আন্তর্জাতিক স্তরেও হচ্ছে। এইমস এবং আইসিএমআর রিসার্চ সেন্টার তৈরি হওয়ার ফলে এখন এনসেফেলাইটিস থেকে মুক্তির অভিযান যেমন শক্তিশালী হবে, তেমনই অন্যান্য সংক্রামক রোগ ও মহামারী থেকে রক্ষার ক্ষেত্রেও উত্তরপ্রদেশের অনেক সুবিধা হবে।

ভাই ও বোনেরা,

যে কোনও দেশকে এগিয়ে নিয়ে যেতে তার স্বাস্থ্য পরিষেবা সুলভ করার প্রয়োজন রয়েছে। স্বাস্থ্য পরিষেবা যেন সবার জন্য সুলভ হয় এবং সকলের হাতের নাগালে থাকে; না হলে আমি দেখেছি, সাধারণ মানুষ চিকিৎসার জন্য এক শহর থেকে আর এক শহরে ঘুরে বেড়ান, নিজের জমি বন্ধক দেন, অন্যদের থেকে টাকা ধার করেন, আমি এরকম অনেক দেখেছি। আমি দেশের প্রত্যেক গরীব, দলিত, পীড়িত, শোষিত, বঞ্চিত, ধর্ম, বর্ণ, শ্রেণী নির্বিশেষে প্রত্যেককে এই পরিস্থিতি থেকে বের করে আনার জন্য প্রাণপনে পরিশ্রম করছি। আগে ভাবা হত যে এইমস-এর মতো বড় চিকিৎসাকেন্দ্র শুধু বড় বড় শহরগুলিতেই হয়। কিন্তু আমাদের সরকার অত্যাধুনিক সমস্ত চিকিৎসা পরিষেবাকে দেশের আপামর সাধারণ মানুষের কাছে পৌঁছে দেওয়ার জন্য বড় বড় হাসপাতালগুলিকে দেশের বিভিন্ন প্রান্তে পৌঁছে দিচ্ছে। আপনারা কল্পনা করতে পারেন, স্বাধীনতার পর থেকে এই শতাব্দীর সূত্রপাত পর্যন্ত দেশে মাত্র একটিই এইমস ছিল! মাত্র একটিই। অটলজি তাঁর শাসনকালে আরও ছয়টি এইমস-এর নির্মাণ প্রকল্প মঞ্জুর করেছিলেন। আর বিগত সাত বছর ধরে সারা দেশে ১৬টি নতুন এইমস গড়ে তোলার কাজ চলছে। আমাদের লক্ষ্য হল, দেশের প্রত্যেক জেলায় নিদেনপক্ষে একটি মেডিকেল কলেজ থাকতে হবে। আমি অত্যন্ত আনন্দিত যে এখানে উত্তরপ্রদেশের অনেক জেলায় ইতিমধ্যেই মেডিকেল নির্মাণের কাজ দ্রুতগতিতে এগিয়ে চলেছে। একটু আগেই রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী যোগীজি এর বিস্তারিত তথ্য তুলে ধরছিলেন যে কোথায় কোথায় মেডিকেল কলেজ গড়ে তোলার কাজ শুরু হয়েছে। সম্প্রতি উত্তরপ্রদেশে নয়টি মেডিকেল কলেজ একসঙ্গে উদ্বোধনের সৌভাগ্যও আপনারা আমাকে দিয়েছিলেন। স্বাস্থ্যকে যেভাবে সর্বোচ্চ অগ্রাধিকার দেওয়া হচ্ছে তার ফল হল, উত্তরপ্রদেশ একাই প্রায় ১৭ কোটিরও বেশি করোনার টিকার ডোজ দেওয়ার সাফল্যের কাছাকাছি পৌঁছে গিয়েছে।

ভাই ও বোনেরা,

আমাদের জন্য ১৩০ কোটিরও বেশি দেশবাসীর স্বাস্থ্য পরিষেবা ও অন্যান্য পরিষেবা এবং সমৃদ্ধি সর্বোপরি। বিশেষ করে, আমাদের মা ও বোনেদের, আমাদের মেয়েদের বিভিন্ন সুবিধা এবং স্বাস্থ্য নিয়ে দেশে গত সাত দশকে অনেক কম কাজ হয়েছে। কিন্তু বিগত কয়েক বছরে পাকা বাড়ি, শৌচালয়, যেগুলিকে আপনারা ‘ইজ্জত ঘর’ বলেন, সেগুলি তৈরির পাশাপাশি বিদ্যুৎ সংযোগ, রান্নার গ্যাস সংযোগ, নলের মাধ্যমে পানীয় জল, পুষ্টি অভিযান, টিকাকরণ অভিযান – এ ধরনের অনেক সুবিধা গরীব বোনেদের সুস্থ রাখার ক্ষেত্রে গুরুত্বপূর্ণ অবদান রেখেছে যার পরিণাম এখন দেখা যাচ্ছে। সম্প্রতি যে ফ্যামিলি হেলথ সার্ভিস রিপোর্ট এসেছে তার থেকে অনেক ইতিবাচক সঙ্কেত পাওয়া যায়। দেশে প্রথমবার মহিলাদের সংখ্যা পুরুষদের থেকে অধিক হয়েছে। এতে উন্নত স্বাস্থ্য পরিষেবার বড় ভূমিকা রয়েছে। বিগত ৫-৬ বছরে মহিলাদের জমি এবং বাড়ির মালিকানার অধিকার বৃদ্ধি পেয়েছে আর এতে উত্তরপ্রদেশের স্থান তালিকার ওপরের দিকে রয়েছে। এভাবে ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট খোলা এবং মোবাইল ফোনের ব্যবহারের ক্ষেত্রেও মহিলাদের সংখ্যা অভূতপূর্ব বৃদ্ধি পেয়েছে।

বন্ধুগণ,

আজ আপনাদের সঙ্গে কথা বলে আমার পূর্ববর্তী সরকারগুলির দ্বিচারিতা, জনগণের প্রতি তাদের উদাসীনতা বারবার মনে পড়ছিল। আমি এ বিষয়েও আপনাদের কিছু কথা অবশ্যই বলতে চাই। সবাই জানেন যে গোরক্ষপুরের সার কারখানা এই গোটা এলাকার কৃষকদের জন্য কতটা জরুরি। এই অঞ্চলের কর্মসংস্থান বৃদ্ধির জন্য কতটা জরুরি। কিন্তু পূর্ববর্তী সরকারগুলি এই কারখানা চালু করার ক্ষেত্রে কোনই আগ্রহ দেখায়নি। সবাই জানতেন যে গোরক্ষপুরে এইমস-এর দাবি বছরের পর বছর ধরে পূরণ করা হয়নি। আমার মনে আছে, যখন এসপার কিংবা ওসপার এরকম একটা বিষয় এসে দাঁড়ায়, তখন অত্যন্ত নিমরাজি হয়ে, অত্যন্ত বাধ্য হয়ে পূর্ববর্তী সরকার গোরক্ষপুর এইমস-এর জন্য জমি বন্টন করিয়েছিল।

বন্ধুগণ,

আজকের এই কর্মসূচি তাঁদের মুখের ওপর কড়া জবাব দিচ্ছে, যাঁরা টাইমিং নিয়ে বারবার প্রশ্ন তুলে মজা পান। যখন এ ধরনের প্রকল্প বাস্তবায়িত হয়, তখন তার পেছনে অনেক বছরের পরিশ্রম থাকে, দিন-রাতের পরিশ্রম থাকে। তাঁরা কখনও একথা বুঝবেন না যে করোনার এই সঙ্কটকালেও ডবল ইঞ্জিনের সরকার উন্নয়নের কাজে যুক্ত ছিল, তারা কোনও কাজকেই থামতে দেয়নি।

আমার প্রিয় ভাই ও বোনেরা,

লোহিয়াজি, জয়প্রকাশ নারায়ণজি যে আদর্শ নিয়ে কাজ করেছেন, এই মহাপুরুষদের অনুশাসনকে এরা অনেক আগেই ত্যাগ করেছে। আজ সমগ্র উত্তরপ্রদেশ খুব ভালোভাবেই জানে যে লাল টুপিওয়ালারা অনেক বছর শুধু লালবাতি নিয়েই ব্যস্ত ছিলেন। তাঁদের আপনাদের দুঃখ-দুর্দশা নিয়ে কোনও মাথাব্যথা ছিল না। এই লালটুপিওয়ালাদের শুধুই ক্ষমতা চাই নানা কেলেঙ্কারির জন্য, নিজেদের সিন্দুক ভরার জন্য, অবৈধ সম্পত্তি কবজা করার জন্য, মাফিয়াদের সম্পূর্ণ ছাড় দেওয়ার জন্য, লালটুপিওয়ালারা যে সরকার তৈরি করেন তা সন্ত্রাসবাদীদের ধন্যবাদ জ্ঞাপনের জন্য, সন্ত্রাসবাদীদের জেল থেকে ছাড়িয়ে আনার জন্য। সেজন্য মনে রাখবেন, লালটুপিওয়ালারা উত্তরপ্রদেশের জন্য রেড অ্যালার্ট। হ্যাঁ, রেড অ্যালার্ট! অর্থাৎ বিপদ ঘন্টা।

বন্ধুগণ,

উত্তরপ্রদেশের আখ চাষীরা কখনও ভুলতে পারবেন না যে যোগীজির আগে যে সরকারই থাকুক না কেন, তারা কিভাবে আখ চাষীদের ভর্তুকির টাকা দিতে কাঁদিয়ে ছেড়েছিল। কিস্তিতে টাকা পাওয়া যেত, তার মধ্যেও মাসের পর মাস পেরিয়ে যেত। উত্তরপ্রদেশে চিনি কারখানা নিয়ে কি ধরনের খেলা চলত, কি ধরনের দুর্নীতি ও কেলেঙ্কারি হত তার সঙ্গে পূর্বাঞ্চল ও গোটা উত্তরপ্রদেশের মানুষ খুব ভালোভাবেই পরিচিত।

বন্ধুগণ,

আমাদের ডবল ইঞ্জিনের সরকার আপনাদের সেবায় সমর্পিতপ্রাণ। আপনাদের জীবন সহজ করে তুলতে আপ্রাণ চেষ্টা করে যাচ্ছে। ভাই ও বোনেরা, আপনারা প্রজন্ম থেকে প্রজন্মান্তরে যে সমস্যাগুলির সম্মুখীন হয়ে আসছেন, আমরা চাই না যে সেই সমস্যাগুলি আপনারা পরবর্তী প্রজন্মেকেও উত্তরাধিকার সূত্রে দিয়ে যান। আমরা এর পরিবর্তন আনতে চাই। পূর্ববর্তী সরকারগুলির শাসনকালে দেশবাসী সেই দিনও দেখেছে যেখন দেশে শস্যের ভাণ্ডার থাকা সত্ত্বেও গরীবরা শস্য পেতেন না। আজ আমাদের সরকার সরকারি গুদামগুলি গরীবদের জন্য খুলে দিয়েছে আর যোগীজি সম্পূর্ণ শক্তি দিয়ে প্রত্যেক বাড়িতে অন্ন পৌঁছে দেওয়ার কাজ করে যাচ্ছেন। এর মাধ্যমে সমগ্র উত্তরপ্রদেশের প্রায় ১৫ কোটি মানুষ উপকৃত হচ্ছেন। সম্প্রতি পিএম গরীব কল্যাণ অন্ন যোজনার মেয়াদ আগামী হোলি উৎসব পর্যন্ত বাড়ানো হয়েছে।

বন্ধুগণ,

আগে বিদ্যুৎ সরবরাহের ক্ষেত্রে উত্তরপ্রদেশের কিছু জেলা ভিআইপি ছিল। বুঝলেন, ভিআইপি ছিল, আর আজ যোগীজি উত্তরপ্রদেশের প্রত্যেক জেলাকে ভিআইপি বানিয়ে বিদ্যুৎ পৌঁছে দেওয়ার কাজ করেছেন। আজ যোগী সরকারের উত্তরপ্রদেশের প্রত্যেক গ্রাম সমান এবং যথেষ্ট বিদ্যুৎ পাচ্ছে। পূর্ববর্তী সরকারগুলি অপরাধীদের প্রশ্রয় দিয়ে উত্তরপ্রদেশের নাম বদনাম করে দিয়েছিল। আজ মাফিয়ারা জেলে আছে আর বিনিয়োগকারীরা প্রাণ খুলে উত্তরপ্রদেশে বিনিয়োগ করছেন। এটাকেই বলে ডবল ইঞ্জিনের ডবল বিকাশ। সেজন্য উত্তরপ্রদেশের মানুষ এখন ডবল ইঞ্জিনের সরকারের ওপরই বেশি বিশ্বাস রাখছেন। আপনাদের এই আশীর্বাদ যেন আমাদের ওপর এভাবেই থাকে এই প্রত্যাশা নিয়ে আর একবার আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক শুভকামনা জানাই। আমার সঙ্গে সমস্ত জোর দিয়ে বলুন,

ভারতমাতার জয়!

ভারতমাতার জয়!

ভারতমাতার জয়!

অনেক অনেক ধন্যবাদ।