Published By : Admin |
January 25, 2016 | 20:05 IST
Share
अभी पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग और इसे कम करने के तरीकों पर चर्चा कर रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
सीओपी-21 में दो ऐतिहासिक पहल की गई। भारत और फ्रांस ने उन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: प्रधानमंत्री
अंतर्राष्ट्रीय सौर एलायंस से भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को काफ़ी लाभ मिलेगा: प्रधानमंत्री मोदी
भारत, अमेरिका और फ्रांस ने यह नवीन पहल की थी; आईए, कुछ नया करें और अपने पर्यावरण को बचाएं: प्रधानमंत्री
भारत ने सौर एलायंस की इच्छा व्यक्त की। फ्रांस ने इसमें काफ़ी मदद की और सभी देशों को एक साथ लाने के लिए हरसंभव प्रयास किया: प्रधानमंत्री
सौर एलायंस यह सुनिश्चित करता है कि विश्व को अधिक से अधिक ऊर्जा मिले: प्रधानमंत्री मोदी
मंच पर विराजमान फ्रांस के राष्ट्रपति श्रीमान ओलांद फ्रांस से आए हुए Senior Ministers हरियाणा के Governor श्री, मुख्यमंत्री श्री, श्रीमान पीयुष गोयल जी फ्रांस का Delegation और विशाल संख्या में आए हुए प्यारे भाइयों और बहनों!
पिछले एक वर्ष से सारी दुनियाँ में इस बात की चर्चा थी कि Global Warming के सामने दुनियाँ कौन से कदम उठाए किन बातों का संकल्प करे? और उसकी पूर्ति के लिए कौन से रास्ते अपनाएं? पेरिस में होने वाली COP 21 के संबंध में पूरी दुनियाँ में एक उत्सुकता थी, संबधित सारे लोग अपने-अपने तरीके से उस पर प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे थे, और करीब-करीब दो सप्ताह तक दुनियाँ के सभी देशों ने मिल करके, इन विषयों के जो जानकार लोग हैं वो विश्व के सारे वहॉं इकट्ठे आए चर्चाएं की और इस बड़े संकट के सामने मानव जाति की रक्षा कैसे करें, उसके लिए संकल्पबद्ध हो करके आगे बढ़े।
COP 21 के निर्णयों के संबंध में तो विश्व में भली- भॉंति बातें पहुँची हैं लेकिन पेरिस की धरती पर एक तरफ जब COP 21 की चर्चाएं चल रहीं थीं तब दो महत्त्वपूर्ण initiatives लिए गए। इन दोनों महत्त्वपूर्ण initiatives में भारत और फ्रांस ने बहुत ही महत्त्वपूर्ण भमिका निभाई है एक initiative एक तरफ तो Global Warming की चिन्ता है, मानवजाति को पर्यावरण के संकटों से रक्षित करना है और दूसरी तरफ मानवजाति के आवश्यकताओं की पूर्ति भी करनी है। जो Developing Countries हैं उन्हें अभी विकास की नई ऊँचाइयों को पार करना बाकी है और ऊर्जा के बिना विकास संभव नहीं होता है। एक प्रकार से ऊर्जा विकास यात्रा का अहमपूर्ण अंग बन गयी है। लेकिन अगर fossil fuel से ऊर्जा पैदा करते हैं तो Global Warming की चिन्ता सताती है और अगर ऊर्जा पैदा नहीं करते हैं तो, न सिर्फ अंधेरा छा जाता है जिन्दगी अंधेरे में डूब जाती है। और ऐसी दुविधा में से दुनियाँ को बचाने का क्या रास्ता हो सकता है? और तब जा करके अमेरिका, फ्रांस भारत तीनों ने मिलकरके एक initiative लिया है और वो initiative है innovation का। नई खोज हो, नए संसाधन निर्माण हों, हमारे वैज्ञानिक, हमारे Technicians हमारे Engineers वो नई चीजें ले करके आएं जोकि पर्यावरण पर प्रभाव पैदा न करती हों। Global Warming से दुनियाँ को बचाने का रास्ता दिखती हों और ऐसे साधनों को विकसित करें जो affordable हो sustainable हो और गरीब से गरीब व्यक्ति की पहुँच में हो। तो innovation के लिए एक बहुत बड़ा अभियान चलाने की दिशा में अमेरिका, फ्रांस और भारत दुनियाँ के ऐसी सभी व्यवस्थाओं को साथ ले करके आगे बढ़ने का बड़ा महत्तवपूर्ण निर्णय किया उसको launch किया गया। President Obama, President Hollande और मैं और UN General Secretary और Mr. Bill Gates , हम लोग उस समारोह में मौजूद थे और एक नया initiative प्रारंभ किया। दूसरा एक महत्त्वपर्ण निर्णय हुआ है जिसका आने वाले दसकों तक मानव जीवन पर बड़ा ही प्रभाव रहने वाला है।
दुनियाँ में कई प्रकार के संगठन चल रहे हैं। OPEC countries का संगठन है G-20 है G-4 है, SAARC है, European Union है, ASEAN Countries हैं, कई प्रकार के संगठन दुनियाँ में बने हुए हैं। भारत ने एक विचार रखा विश्व के सामने कि अगर Petroleum पैदावार करने वाले देश इकट्ठे हो सकते हैं, African countries एक हो सकते हैं, European Countries एक हो सकते हैं, क्यों न दुनियाँ में ऐसे देशों का संगठन खड़ा किया जाए जिन देशों ने 300 दिवस से ज्यादा वर्ष में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है।
ये सूर्य, ये बहुत बड़ी शक्ति का स्रोत है सारे जीवन को चलाने में, सृष्टि को चलाने में सूर्य की अहम् भूमिका है। क्यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्वीकार करके विश्व कल्याण का रास्ता खोजें। 300 से अधिक दिवस, सूर्य का लाभ मिलता है ऐसे दुनिया में करीब-करीब 122 देश हैं। और इसलिए विचार आया क्यों न हम 122 देशों का जो कि सूर्य शक्ति से प्रभावित हैं उनका एक संगठन गढ़ें। भारत ने इच्छा प्रकट की फ्रांस के राष्ट्रपति जी ने मेरी पूरी मदद की, हम कंधे से कंधा मिलाकरके चले, दुनियाँ के देशों का संपर्क किया और नवंबर महीने में पेरिस में जब conference चल रही थी, 30 नवंबर को दुनियाँ के सभी राष्ट्रों के मुखिया उस समारोह में मौजूद थे और एक International Solar Alliance इस नाम की संस्था का जन्म हुआ।
उसमें इस बात का भी निर्णय हुआ कि इसका Global Secretariat हिन्दुस्तान में रहेगा। ये International Solar Alliance इसका Headquarter गुड़गॉंव में बन रहा है। ये हरियाणा ‘कुरूक्षेत्र’ की धरती है, गीता का संदेश जहॉं से दिया, उस धरती से विश्व कल्याण का एक नया संदेश इस Solar Alliance के रूप में हम पहुँचा रहे हैं।
बहुत कम लोगों को अंदाज होगा कि आज ये जो घटना घट रही है उसका मानवजाति पर कितना बड़ा प्रभाव पैदा होने वाला है, इस बात को वही लोग समझ सकते हैं जो छोटे-छोटे Island पर बसते हैं, छोटे-छोटे Island Countries हैं और जिनके ऊपर ये भय सता रहा है कि समुंदर के अगर पानी की ऊँचाई बढ़ती है तो पता नहीं कब उनका देश डूब जाएगा, पता नहीं वो इस सृष्टि से समाप्त हो जाएंगे, दिन रात इन छोटे-छोटे देशों को चिन्ता हो रही है। जो देश समुद्र के किनारे पर बसे हैं, उन देशों को चिन्ता हो रही है कि अगर Global Warming के कारण समुद्र की सतह बढ़ रही है तो पता नहीं हमारे मुम्बई का क्या होगा, चेन्नई का क्या होगा? और दुनियाँ के ऐसे कई देश होंगे जिनके ऐसे बड़े-बड़े स्थान जो समु्द्र के किनारे पर हैं उनके भाग्य का क्या होगा? सारा विश्व चिन्तित है। और मैं पिछले एक साल में, ये Island Countries हैं जो छोटे-छोटे उनके बहुत से नेताओं से मिला हूँ, उनकी पीड़ा को मैंने भली-भॉंति समझा है। क्या भारत इस कर्तव्य को नहीं निभा सकता?
हमारे देश में जीवनदान एक बहुत बड़ा पुण्य माना जाता है। आज मैं कह सकता हूँ कि International Solar Alliance उस जीवनदान का पुण्य काम करने वाला है, जो आने वाले दशकों के बाद दुनियाँ पर उसका प्रभाव पैदा करने वाला है। सारा विश्व कहता है कि Temperature कम होना चाहिए, लेकिन Temperature कम करने का रास्ता भी सूर्य का Temperature ही है। एक ऊर्जा से दूसरी ऊर्जा का संकट मिटाया जा सकता है। और इसलिए विश्व को ऊर्जा के आवश्यकता की पूर्ति भी हो, innovation का काम भी हो और सोलर को ले करके जीवन के क्षेत्र कैसे प्रभावित हों उस दिशा में काम करने के लिए बना है।
ये बात सही है कि International Solar Alliance इसका Headquarters हिन्दुस्तान में हो रहा है, गुडगॉंव में हो रहा है, लेकिन ये Institution हिन्दुस्तान की Institution नहीं है ये Global Institution है, ये Independent Institution है। जैसे अमेरिका में United Nations है, लेकिन वो पूरा विश्व का है। जैसे WHO है, पूरे विश्व का है। वैसे ही ये International Solar Alliance का Headquarter ये पूरे विश्व की धरोहर है और ये Independent चलेगा। अलग-अलग देश के लोग इसका नेतृत्व करेंगे, अलग-अलग देश के लोग इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे, उसकी एक पद्धति विकसित होगी लेकिन आज उसका Secretariat बन रहा है, उस Secretariat के माध्यम से इस बात को हम आगे बढ़ना चाहते हैं।
भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में परंपरागत प्राकृतिक संसाधनों उपयोग करने का बीड़ा उठाया है। भारत ने जब ये कहा कि हम 175Giga Watt, Renewable Energy की तरफ जाना चाहते हैं, तब दुनियाँ के लिए बड़ा अचरज था। भारत में Giga Watt शब्द भी नया है, जब हम Mega Watt से आगे सोच भी नहीं पाते थे। हम आज Giga Watt पर सोच रहे हैं और 175 Giga Watt Solar Energy, Wind Energy, Nuclear Energy, Biomass से होने वाली Energy इन सारे स्रोतों को Hydro Energy ये हम उपलब्ध कराना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि आज भारत 5000 MW से ज्यादा solar energy उसने install कर दी। ये इतने कम समय में जो काम हुआ है वो उस commitment का परिणाम है कि क्या भारत मानव जाति के कल्याण के लिए मानव जाति की रक्षा के लिए, प्रकृति की रक्षा के लिए, ये पूरी जो सृष्टि है उस पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए, भारत कोई अपना योगदान दे सकता है क्या? उस योगदान को देने के लिए ये बीड़ा उठाया है।
मैं फ्रांस के राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूँ कि इस चिंता के समय में global warming पर्यावरण के मुद्दे इसके समाधान के जो रास्ते है उनकी सोच भारत की सोच से बहुत मिलती जुलती है क्यों कि फ्रांस की values और भारत के values काफी समान है और इसलिए पिछले वर्ष April के महीने में हम दोनों मिले थे तो हमने तय किया था कि हम COP 21 के समय एक किताब निकालेंगे और विश्व के अंदर परंपरागत रूप से इन issues को कैसे देखा गया इस पर research करेंगे। और हम दोनों ने मिल कर के उस किताब की प्रस्तावना लिखी है और विश्व के सामने उन्ही के मूलभूत चिंतन क्या थे ये प्रस्तुत किया।
ये चीजें इसलिए हम कर रहे हैं कि मानव जाति को इस संकट से बचने के जो रस्ते खोजे जा रहे हैं, वो एक सामूहिक रूप से प्रयत्न हो, innovative रूप से प्रयत्न हो और परिणाम वो निकले जो मानव जाति की आवश्यकता है उसकी पूर्ति भी करे लेकिन प्रकृति को कोई नुकसान न हो। हम वो लोग हैं जिनके पूर्वजो ने, इस धरती से हमें प्यार करना सिखाया है। हमें कभी भी प्रकृति का शोषण करने के लिए नहीं सिखाया गया, हमें पौधे में भी परमात्मा होता है यह बचपन से सिखया गया। ये हमारी परंपरा है। अगर ये परंपरा है तो हमें विश्व को उसका लाभ पहुंचे उस दिशा में हमें कुछ कर दिखाना चाहिए और उसी के तहत आज international solar alliance का हम लोगों ने एक Secretariat का आरम्भ कर रहे हैं। और भविष्य में भव्य भवन के रूप में उसका निर्माण हो, एक स्वंत्रत इमारत तैयार हो, उसके लिए शिलन्यास भी कर रहे है और इस काम के लिए आप पधारे इसका मैं बहुत बहुत आभारी हूँ।
मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि solar alliance का निर्माण हो रहा हो आज हमें Delhi से यहाँ आना था हम by road भी आ सकते थे, helicopter से भी आ सकते थे, लकिन हम दोनों ने मिलकर तय किया कि अच्छा होगा की हम Metro से चले जाएँ और आज आप के बीच हमें Metro से आने का अवसर मिला।
मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूँ कि उन्होंने आज Metro में आने के लिए सहमति जताई और हम Metro का सफ़र करते करते आपके बीच पहुंचे क्योंकि वो भी एक सन्देश है क्योंकि global warming के सामने लड़ाई लड़ने के जो तरीके हैं उसमें ये भी एक तरीका है। मैं विश्वास करता हूँ कि ये प्रयास बहुत ही सुखद रहेगा। कल भारत प्रजासत्ता पर्व मनाने जा रहा है, इस प्रजसत्ता पर्व की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अधिकार और कर्तव्य इन दोनों को संतुलित करते हुए हम देश को आगे बढ़ाएंगे यही मेरी शुभकामना है।
झारखंड के रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में चार अलग-अलग स्पर्धाओं में चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे: पीएम मोदी
मेरे प्यारे देशवासियो, इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच ऐसे मौसम में अपना विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है: पीएम मोदी
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत बेहद शानदार पेय है। यह पेट भी भरता है और भरपूर ताकत भी देता है: पीएम मोदी
सेवा के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, इसके लिए अच्छी नीयत और लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है: पीएम मोदी
नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोलकालीन प्राचीन ताम्रपट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं: पीएम मोदी
हमारे देश में खगोल विज्ञान ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है। इसने एक्सप्लोरेशन के लिए प्रेरित किया है। आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा है: पीएम मोदी
डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस को एक मोबाइल हॉस्पिटल की तरह डिजाइन किया गया है। इसमें डॉल्फिन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है: पीएम मोदी
साथियो, जब हम गंगा डॉल्फिन को बचाते हैं, तो हम सिर्फ एक प्रजाति को नहीं बचाते, बल्कि गंगा की बायोडायवर्सिटी को भी सुरक्षित करते हैं: पीएम मोदी
गिरिजा अम्मा जी की देशभक्ति की भावना हर भारतीय को प्रेरित करती है। 'मन की बात' से प्रेरित होकर उन्होंने देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान देने का संकल्प लिया: पीएम मोदी
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ में एक बार फिर आपसे जुड़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है | देश के अलग-अलग हिस्सों में हमारे देश के लोग देशहित में, समाजहित में, ऐसी अद्भुत चीजें कर रहे हैं और जब उनके विषय में सुनते हैं तो हमें एक नई प्रेरणा मिलती है | आज कार्यक्रम की शुरुआत, मैं athletics में देश की ऐसी ही उपलब्धि से करूंगा | कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में National Senior Athletics Federation Competition हुआ | इसमें करीब 800 athletes ने हिस्सा लिया - देशभर से आए थे | इस दौरान चार अलग-अलग event में चार national record टूटे | गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार | इन साथियों ने अलग-अलग category में नए record बनाए | मैं सबसे पहले तो इन सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ |
साथियो, एक event जिसकी देशभर में बहुत चर्चा हो रही है, वह है – 100 meter Race, सौ meter की दौड़ | महज दो दिनों के भीतर Men’s 100 meter Race में national record तीन बार टूटा | जिन दो athletes ने ये कमाल दिखाया है वे हैं - गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर | मैंने सोचा इस बार ‘मन की बात’ में इन दोनों खिलाड़ियों से बात की जाए |
प्रधानमंत्री: अनिमेष जी नमस्कार | गुरिन्दर वीर आपको भी नमस्कार, सतश्री अकाल |
अनिमेष, गुरिन्दरवीर : नमस्कार सर, नमस्कार सर |
प्रधानमंत्री : अच्छा भैया आपने तो बहुत बड़ा achievement किया है | आपकी जोड़ी ने भी बड़ा कमाल किया है | हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में अब जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले | फिर तीसरी बार कर ले | बड़ा interesting विषय रहा है आपका | मैं चाहता हूँ कि ‘मन की बात’ के श्रोताओं को पता चले कि आप लोग के विषय में उनको जानकारी हो | आपने जो पराक्रम किया है उसका पता चले |
अनिमेष जी : नमस्ते सर, मेरा नाम अनिमेष कुजूर |मैं 200 मीटर और 400 मीटर का National record holder हूँ and मैं छत्तीसगढ़ से belong करता हूँ सर | And अभी मैं उड़ीसा से खेलता हूँ | मैं last year Asian Medal और World University Games Medal लेकर आया and मैं athletics 2021 से चालू किया जब मैं school से pass out हुआ | मैं सैनिक school अम्बिकापुर से pass out हूँ, and मैं पहले football खेला करता था, and मेरे parents covid के समय मुझे थोड़ी बहुत छूट देते थे कि तू जाके बाहर दौड़ ले या खेल ले तो जब covid खत्म होने लगा तो मेरे football के जो friends थे उन्होंने मुझे बोला कि state meet होने वाला है जाके तू participate कर and मैं participate किया and मुझे पता नहीं था कि वहाँ से National level का Selection है | मैं वहाँ से National में select हुआ and आज मैं India को represent कर रहा हूँ Internationally |
प्रधानमंत्री : और गुरिन्दरवीर जी क्या है ?
गुरिन्दरवीर: नमस्ते सर, मेरा नाम गुरिन्दरवीर है और मैं Indian Navy में Patty Officer हूँ और मैं India का सबसे तेज sprinter हूँ अभी मैंने 100 मीटर में 10.09 का national record बनाया है | और मैं पहला Indian हूँ जो 10.1 के barrier के नीचे भागा है, और मैं कोशिश कर रहा हूँ कि मैं track और वर्दी में भी अपने देश की सेवा करूँ | मेरे father और grandfather दोनों sports करते थे तो हमारे India का culture है जब भी कोई त्योहार होता है जैसे दिवाली, जैसे नया साल तो हम अपने घर की सफाई करते हैं | तो मैं अपने father की Trophies और Medals की सफाई करता था तो मेरे को वो बहुत अच्छा लगता था, मैं बहुत खुश होता था | तब जब मैं कोई trophy साफ करता था तो मैं पूछता था कि भई ये trophy कहाँ जीती, ये Medal कहाँ जीता, ये photo कब की है, तो फिर मेरे को वो अपनी कहानी सुनाते थे ,कि भई मैं यहां खेलने गया, मैंने ये National Medal जीता, मैंने अपनी team को इसमें जिताया | तो फिर मैं भी उनको बोलता था कि भई मैं भी कोई sports करनी है | वो running करने जाते थे morning में, तो मैं उनको बोलने लगा भई मेरे को भी लेकर जाया करो अपने साथ | तो मेरे को लेकर जाने लगे तो उन्होंने जो अपनी game sports में सीखा था तो मेरे को सिखाने लगे | तो मेरा interest बनने लगा | मैंने Usain Bolt का world record टूटता हुआ देखा | तो एक story है ऐसे funny | मैं अभी TV देख रहा था तो मम्मी ने मेरी TV बंद कर दिया कि अभी बेटा पढ़ने का time हो गया, आप पढ़ो | तो मैं कहा भई ठीक है आप मेरे को TV नहीं देखने देते, एक दिन ऐसा आएगा आप मेरे को TV में ढूँढोगे कि देखो वो गुरिन्दर दौड़ रहा है | तो मेरे को भी खुशी होती जब मेरी माँ मेरे को TV पे दौड़ता हुआ देखती है |
प्रधानमंत्री : वाह वाह वाह | बड़ी शानदार बात है भई आपकी तो |
गुरिन्दर वीर: हाँ जी | Middle Class Family है सर, फिर मेरे father वो भी volleyball खेलते थे | घर की problems की वजह से उन्होंने अपनी sports छोड़ दी | उनका जो सपना पूरा करने वाला रह गया | तो उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा भई मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे, मैं उनको बोलता था मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा | तो बोलते सपना पूरा ऐसे नहीं होता, उसके लिए बहुत hard work करना पड़ता है | मेहनत करनी पड़ती है | मिल्खा सिंह जी खून की उल्टियाँ करते थे, धूप में भागते थे | सारा-सारा दिन training करते थे तो वो चीजें मेरे को inspire करती थीं | मेरे father मेरे को inspire करते थे, कि मैं भागूँगा तो अपने देश के लिए, देश के लिए Medal लाऊँ, जीतूँ | और ये भी था कि भई जब मैंने event choose किया 100 मीटर तो सभी मेरे को बोलते थे कि भई 100 मत करो, 100 Indians का event नहीं है | Indians की body 100 मीटर के लिए बनी ही नहीं है | तो मैं और मेरे father हमेशा बोलते थे कि अभी गुरिन्दर हमने ये choose किया है, हम इससे पीछे नहीं हटेंगे | जो हमें बोलते हैं कि भई हम नहीं कर सकते हम उसको कर के दिखाएंगे | और तू करके दिखाएगा, मुझे तेरे पे भरोसा है | तो वो भरोसा जब मेरे को मेरे father ने मेरे पर किया तो मैं उस भरोसे को अपनी हिम्मत बनाके मैं चला और मैं आज हर Indian बोलता कि भई Indian Sprint कर |
प्रधानमंत्री : देखिए आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है, और सिर्फ दो दिनों के भीतर आप दोनों ने तीन बार National Record तोड़ा है | 100 मीटर race में दौड़ना, जैसा गुरिन्दरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं | इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूँगा, और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है ?
गुरिन्दरवीर: जी सर, मैं गुरिन्दर, मैं जब starting में सर बहुत struggle था, बहुत बार doubt भी आया कि मैं सही कर रहा हूँ, मैं सही choose किया क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हो | जब मैं हारता था, जब मैं सही performance नहीं आती थी, कोई injury आ जाती थी तो मेरे घरवाले मेरे को support करते थे कि भई कोई नहीं एक दिन बुरा चला गया, एक साल बुरा चला गया तो इससे जिंदगी खराब नहीं होती | सपने देखना नहीं छोड़ते | तो मेरे coach ने भी मेरे को ये सिखाया कि अगर तू नहीं करेगा तो कोई और नहीं कर पाएगा | तो ऐसे जब हमारी community हमारे आसपास लोग हमें उत्साहित करते हैं तो हमारा कभी वो motivation नहीं टूटता |
प्रधानमंत्री : अनिमेष जी…
अनिमेष : सर, मुझे तो सारे लोग बोलते थे कि जब मैं 2021 में चालू किया athletics तो मुझे बोलते थे कि देख ये नया field है, तू कर पाएगा की नहीं, तो मैं बोला कि अब मैं इस field में घुसा हूँ तो करूंगा ही | मेरे पापा भी हमेशा मुझे बोलते थे कि तू इस field में घुसा है तो कभी पीछे मुड़के देखना मत क्योंकि सोचते तो सभी है की ये करना है, वो करना है but करके बहुत कम ही दिखाते है | तू बस इस field में घुसा है तो इस पे अमल रहना, इस पे आगे बढ़ना है | तेरे को सारी facilities, सब चीज हम support करेंगे, family support, financial support, सब चीज हम लोग करेंगे बस तू मेहनत कर और India को दिखा कि Indians भी भाग सकते हैं क्योंकि ये मुझे भी लोग बोलते थे कि Indians के genes ऐसे नहीं है कि वो Sub 10 या Sub 10.1 के अंदर भाग सकते है या कोई वो sprint कर सकता है but अभी हम दोनों ने ऐसा prove कि Indians भी कर सकते हैं | ऐसा कोई hard नहीं है हमारे लिए, हम भी सब कुछ कर सकते हैं | तो सर ये सारी चीजें मुझे बहुत motivate करती हैं and जैसे-जैसे हम training कर रहे हैं हम और timing तोड़ रहे हैं अपना and बाकी Indians को भी ये चीज दिख रहा है कि Indians भी कर सकते हैं and हम और करेंगे सर अभी, and अभी हम दोनों का selection commonwealth games के लिए भी हुआ है तो वहाँ upcoming competition में हम और अच्छा परफॉर्म करेंगे।
प्रधानमंत्री: अच्छा देखिये मेरे मन में भी एक कोतूहल है | और लोगो को भी होगा मैंने सुना है कि आप दोनों अच्छे दोस्त भी है आप दोनों ने कुछ ठान रखा था क्या कि तुमने मेरा record तोड़ा तो मैं तेरा record तोड़ दूँ क्या पहले अनिमेष बता दे |
अनिमेष : सर जी पहले record 10.18 का था जो की मेरा ही था and then उसको गुरिंदरवीर भईया ने semi-final में तोड़ दिया 10.17 करके and मैंने फिर से उसको semi-final 2 में 10.15 करके तोड़ दिया तो उस समय जब मेरा semi-final हुआ तो हम दोनों ही खुश थे कि हां चलो ठीक है, आज record टूटा and चलो हम दोनों ने तोड़ा ऐसा, क्योंकि उस समय competition में rivalry रहती है but हम दोनों ठान के रखे थे पहले से ही उससे पहले हमलोग Saudi Arabia भी गए थे competition करने के लिए तो वहाँ भी हम दोनों roommates थे तो हम दोनों वहाँ भी बात करते थे कि India के sprinting को आगे लेकर जाना है and हमारे ही हाथों में है वो चीज हम जो करेंगे वही बाकियों को motivate करेगा ।
प्रधानमंत्री : गुरिंदरवीर क्या कहना चाहेंगे ?
गुरिंदरवीर : हम दोनों ने decide किया था हम दोनों अच्छा भागेंगे | तो कभी भी सर एक-दूसरे को जरूरत होती है तो एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं जैसे अभी record करने से पहले जब मैंने record किया फिर अनिमेश ने किया | तो जब हम warm-up कर रहे थे तो मैं अनिमेष को बता रहा था, अभी अनिमेष वो block सही है उस पे जाके बैठ वहाँ पे stride कर ले हम warm-up यहाँ पे करेंगे, यहाँ पर warm-up सही होगा तो एक दूसरे की help करते है, एक-दूसरे की help करते है तो दूसरा भी improve करता है, हम भी improve करते है | तो दोस्ती भी चाहिए but सर हम ground के बाहर है, competition के बाहर है तो हम दोस्त हैं, जब हम ground में चले जाते है तो एक-दूसरे के competitor हो जाते है | तो यह होता है कि मैं इससे fast भागूंगा, मैं इससे fast भागूंगा |
प्रधानमंत्री : देखिये आप लोगों ने जो स्पर्धा की है न वो देश का मान बढ़ाने के लिए की है, देश को भविष्य में इस जगह पर पहुँचाने के लिए की है और एक positive spirit से की है और मैं मानता हूँ कि आपका ये जो sportsman spirit है, खेलना भी है, एक-दूसरे को चुनौती भी देना है और फिर आगे निकलने के लिए प्रयास करना है और फिर आगे जाने के लिए एक-दूसरे की मदद करना है ये अद्भुत काम किया है आप लोगों ने मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें और आप देश का नाम भी रोशन करेंगे मुझे पूरा विश्वास है आप ऐसे ही मेहनत करते रहिये बहुत प्रगति होगी, बहुत-बहुत शुभकामनाएँ मेरी |
गुरिंदरवीर /अनिमेष : शुक्रिया सर, शुक्रिया आपका |
प्रधानमंत्री : बहुत बहुत धन्यवाद।
मेरे प्यारे देशवासियो, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है | तेज धूप, गर्म हवाएँ, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है | पानी पीते रहिए | धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें | इस दिशा में सरकार की भिन्न-भिन्न departments ने जो guidelines जारी की है वो भी भूलियेगा नहीं |
साथियो, हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है | आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है | कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं - और फिर शुरू होता है देसी पेय का दौर | देसी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएँगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद, और गर्मी से राहत भी | पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी, बड़े गिलास वाली लस्सी | राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है | और बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है - पेट भी भरे, ताकत भी दे | कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी | दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है | और इसमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना की झलक भी मिलती है | और एक बात जरूर ध्यान रखियेगा, इनमें से ज्यादातर चीजें हमारी अपनी रसोई से निकली हैं, हमारे खेत खलिहान से निकली हैं | कोई बड़ी branding नहीं है| लेकिन पीढ़ियों का अनुभव उनमें समाया हुआ है | आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए |
साथियो, गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरू हो जाती है और वो है आम | आम, आम चर्चा का विषय होता है, भारत में शायद ही कोई घर होगा जहाँ गर्मियों में आम की बात न होती हो | हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू | महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, alphonso, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है , उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा | वैसे, लंगड़ा आम की एक खास बात होती है - पकने के बाद भी उसका रंग कई बार हरा ही रहता है | बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए | चौसा, मालदा - हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं | दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा | यानी, जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है | और साथियो आम की ये यात्रा, अब गाँव से, global market तक भी पहुँच रही है | आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा | आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं | ऐसे ही छाए रहिए |
साथियो, गर्मी के इन दिनों में, ऐसे तो स्कूलों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन, मैं एक ऐसी class की बात करूंगा, जिसमें आपका admission करने का मन कर जाएगा । साथियो, एक स्थिति की कल्पना कीजिए, एक ऐसा school जहाँ बच्चे भी आते हों, युवा भी और बुजुर्ग भी, जहाँ कोई fees ना हो, कोई बड़ी building ना हो, कोई classroom भी ना हो और सबसे रोचक बात, वहाँ class नदी में लगती हो ।
साथियो, ये कोई कहानी नहीं है। ये एक सच्चा प्रयास है। केरलम के आलुवा में, साजी वलाशेरिल जी ऐसा ही एक swimming club चला रहे हैं । अब तक 15 हजार से ज्यादा लोग यहाँ तैरना सीख चुके हैं । साजी जी ने दिव्यांग बच्चों को भी swimming सिखाई है । इस प्रयास के पीछे, एक पीड़ा भी छिपी है । कुछ वर्ष पहले, एक नौका हादसे में कई छात्रों की मृत्यु हो गई थी । उस घटना ने साजी जी को भीतर तक झकझोर दिया । उन्होंने सोचा, अगर बच्चों को तैरना आता होता, तो शायद कई जानें बच जातीं - बस यहीं से शुरू हुआ उनका ये अभियान।
साथियो, साजी वलाशेरिल जी का जीवन, हमें एक बहुत बड़ी सीख देता है। सेवा करने के लिए बहुत बड़े साधन जरूरी नहीं होते - जरूरी होता है, एक अच्छा इरादा और लगातार किया गया प्रयास। इन्हीं के दम पर, हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है ।
मेरे प्यारे देशवासियो, बीते दिनों मुझे Europe के Netherlands जाने का अवसर मिला | वहां मैं कई meeting में शामिल हुआ | इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया | Netherlands में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई | उस कार्यक्रम में Netherlands के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे | इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं | लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं | दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है |
साथियो, इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है | इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं | इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं | ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं | इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है | इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है | इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी | दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है |
चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है | साथियो, हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है | इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है | यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं | ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं | विशेषज्ञ मानते हैं कि ये inscriptions छठी-सातवीं सदी के हैं यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं | इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है |
साथियो, हम भारतीयों में खगोल विज्ञान यानी astronomy को लेकर हमेशा विशेष आकर्षण रहा है | हमारे देश में आज भी सदियों पुरानी observatories मौजूद हैं | यहां अद्भुत mathematical discoveries हुई हैं | Navigation हो, पंचांग हो, या हमारे पर्व-त्योहार, इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है | हमारे यहां astronomy ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है | उसे exploration के लिए प्रेरित किया है और आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है | आजकल आप भी देखते होंगे, देशभर में astronomy Clubs तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं | बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, स्कूलों से लेकर पार्कों तक इनकी गतिविधियां दिखाई देती हैं | मुझे Bangalore Astronomical Society के बारे में जानकारी मिली | यहां observational sessions आयोजित किए जाते हैं | इस संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में astronomy को लोकप्रिय बनाने का mission भी शुरू किया है | ‘खगोल मण्डल’ नाम की एक टीम ने 30 घंटे का एक बहुत innovative course शुरू किया है |
साथियो, रात में तारों को निहारना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है | Astro Kerala नाम की एक संस्था Night Observation Camps और workshops आयोजित करती है | यहां युवा साथी Telescope बनाना और star maps का इस्तेमाल करना सीखते हैं | राजकोट के Big Bang Astronomy Club ने गिर के जंगलों से लेकर कच्छ के रण तक अनेक astronomy events आयोजित किए हैं | ‘ज्योतिर्विद्या परिसंस्था’ भी astronomy के सबसे पुराने संस्थानों में से एक है | यहां observational facilities के साथ-साथ books, library और telescope library की सुविधा भी है | मैं ISAAC (आईसैक) का भी जिक्र करना चाहूंगा | यह एक student-led nationwide network है, जो, astronomy और astrophysics clubs को आपस में जोड़ता है |
साथियो, अपनी hobby के लिए समय निकालना और लगातार कुछ नया सीखते रहना बहुत जरूरी है | मैं युवाओं से आग्रह करूंगा कि वे किसी astronomy club से जरूर जुड़ें, और इन छुट्टियों में किसी planetarium को भी जरूर देखने जाएं |
साथियो, ‘मन की बात’ कार्यक्रम को जो लोग टीवी पर देख रहे हैं, मैं उनसे कहूँगा – एक video जरूर देखिएगा | ये video पिछले दिनों बहुत चर्चा में रहा | इसमें कुछ लोग बहुत धैर्य से, बहुत सावधानी से एक गंगा Dolphin को बचाने की कोशिश कर रहे हैं | आपको ये जानकर आश्चर्य होगा, इस पूरे प्रयास में करीब 13 घंटे लगे, और आखिरकार वो dolphin बच गई |
साथियो, इसमें बहुत बड़ी भूमिका रही – भारत की पहली गंगा dolphin rescue ambulance की | ये घटना उत्तर प्रदेश की है | वहाँ एक गंगा dolphin नहर में फंस गई थी | ऐसे समय में ‘नमामि गंगे अभियान’ के तहत बनी ये ambulance उसके लिए उम्मीद बनकर पहुंची | फिर बहुत सावधानी से उसे बाहर निकाला गया | उसकी जांच की गई, उसका इलाज किया गया और उसके बाद उसे सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया | एक तरह से कहें, तो एक जीवन, फिर अपने घर लौट गया |
साथियो, ये dolphin rescue ambulance बहुत खास है | इसे एक चलते–फिरते अस्पताल की तरह तैयार किया गया है | इसमें Dolphin को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है | Oxygen की सुविधा है, विशेष stretcher हैं, बचाव के उपकरण हैं, यानि अगर कोई Dolphin, घायल हो जाए, नहर में फंस जाए या नदी से कट जाए, तो तुरंत उसकी मदद की जा सकती है |
साथियो, जब हम गंगा dolphin को बचाते हैं, तो हम सिर्फ एक प्रजाति को नहीं बचाते, हम गंगा की जैव विविधता को बचाते हैं | नदी के पूरे जीवन तंत्र को बचाते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की एक अमूल्य धरोहर भी बचाते हैं |
मेरे प्यारे देशवासियो, आप में से बहुत लोगों की नदी, तालाब या कुएं के पानी से जुड़ी यादें जरूर होंगी | किसी को तालाब में तैरना याद होगा, किसी को दोस्तों के साथ तालाब किनारे खेलना, किसी को उस मिट्टी की खुशबू याद होगी | बचपन की ऐसी यादें जीवन-भर मन में बसी रहती हैं |
साथियो, ऐसी ही यादों को बचाने की एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है | बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गाँव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे | क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था | समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था | गंदगी बढ़ती चली जा रही थी | श्रीमान आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे | शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया | उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया | सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प | ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे | प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे | कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया | धीरे- धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा | आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया | लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी |
साथियो, ऐसी ही एक प्रेरक कहानी गोवा से भी सामने आई है | गोवा के बालकृष्ण अइया जी retired teacher हैं | लेकिन समाज के लिए काम करने का उनका उत्साह आज भी वैसा ही है | उन्हें मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की समस्या बहुत परेशान करती थी | उन्होंने भी समाधान के लिए काम शुरू किया | बालकृष्ण जी ने pipeline बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इससे कई घरों तक पानी पहुंचा | जिन परिवारों को पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बनी |
साथियो, पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ | इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है | इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूँ | तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई | करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था | मैं बात कर रहा हूँ, गिरिजा अम्मा जी की | इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा students भी उनके साथ थे |
साथियो, गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं | इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है | उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है | उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया | इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के students को प्रेरित किया | उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें | यानी एक साल में हर student की ओर से 365 रुपये जमा हुए | इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए | गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा | उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि माँ भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है | पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिन्दू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं | देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस School network की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है | मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और उन students की भी विशेष सराहना करता हूँ, जिन्होंने, अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया |
साथियो, भारत के हर गाँव में, हर शहर में, कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है | कई बार, इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है, कि देश, अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है | मेरा आपसे आग्रह है, अपने आसपास ऐसे प्रयासों को जरूर देखिए | जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहें हैं, उन्हें पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए, और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए | अगले महीने ‘मन की बात’ में कुछ और प्रेरक गाथाओं के साथ मैं फिर आपसे जुड़ूँगा | बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |
Just a few days ago, at the National Senior Athletics Federation Competition in Ranchi, four national records were broken across different events.
One achievement that caught the nation's attention was the Men's 100-metre race, where the national record was broken three times in… pic.twitter.com/TrBsr855U1
The Netherlands has returned ancient Chola-era copper plates that chronicle the achievements, maritime strength and global connections of the Chola empire.#MannKiBaatpic.twitter.com/ehHvuwKpl7
Under the Gyan Bharatam Abhiyan, rare copper plates dating back nearly 1,400 to 1,500 years have been discovered in Chhattisgarh. #MannKiBaatpic.twitter.com/S0wKVWrPbd
Astronomy has fascinated generations of Indians, sparking curiosity and a spirit of exploration. Today, that same enthusiasm is inspiring a new generation.#MannKiBaatpic.twitter.com/CdtHx38Xn7
A remarkable rescue operation in Uttar Pradesh saw a Gangetic dolphin saved after hours of patient effort. The Ganga dolphin rescue ambulance played a crucial role.#MannKiBaatpic.twitter.com/MWjKU2pOP7
Small acts of patriotism and collective effort can inspire a deep sense of service and nation-building among the younger generation. Here is one such example from Tamil Nadu...#MannKiBaatpic.twitter.com/NChjgo0V5W