PM Modi unveils the statue of Swami Vivekananda in Kuala Lumpur
It was Swami Vivekananda who first gave the concept of One Asia: PM
South East Asia Summit speaking of One Asia; a concept given by Swami Vivekananda: PM.
From the Vedas to Vivekananda, India's culture is rich: PM
Swami Vivekananda neither a person nor a system, it is the identity of the soul of ancient India: PM
Vivekananda is not just a name. He personifies the thousands year old Indian culture and civilization: PM
It is a great fortune for me to dedicate the statue of Swami Vivekananda on Malaysian soil: PM
Pursuit of truth got Ramakrishna Paramhans & Swami Vivekananda together. They were not looking for a teacher or a disciple: PM
Swami Vivekananda was in pursuit of the truth: PM

भाइयो और बहनों।

अभी सुप्रियान जी कह रहे थे कि हमने इस परिसर में तो विवेकानंद जी की प्रतिमा की स्था्पना की, पर हम हमारे मन-मंदिर में, हमारे हृदय में विवेकानंद जी को प्रतिस्था पित करें और मैं ये बात आपको कहूं और आप कर लेंगे।

मैं नहीं मानता हूं कि मेरे कहने से हमारे भीतर विवेकानंद प्रवेश कर सकते है और न ही किसी के प्रवचन से विवेकानंद जी हमारे भीतर प्रवेश कर सकते है। विवेकानंद, ये न किसी व्यक्ति का नाम है, विवेकानंद न किसी व्यवस्था की पहचान है, एक प्रकार से विवेकानंद सहस्त्र साल पुरानी भारत की आत्मा की पहचान है।

वेद से विवेकानंद तक हमारी एक सांस्कृतिक लंबी विरासत है और उपनिषद से ले कर के उपग्रह तक हमने हमारी आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक विकास यात्रा को भी सामर्थ्य दिया है। 

उपनिषद से शुरू किया होगा, उपग्रह तक हम पहुंचे होंगे लेकिन हमारा जो मूल Pin है जो हमारी आत्मा है और सच्चे अर्थ में जो हमारी पहचान है, उसको अगर हम बरकरार रखते है तो उसका अर्थ ये हुआ कि मैं मेरे भीतर स्वामी विवेकानंद जी को जीवित रखने की कोशिश कर रहा हूं।

रामकृष्ण परमहंस और नरेन्द्र । ये दोनों के बीच की दुनिया को अगर हम समझ लें तो शायद विवेकानंद जी को समझने में सुविधा बन जाती है।

नरेन्द्र कभी गुरू की खोज में नहीं निकले थे, न ही उसे गुरू की तलाश थी, नरेन्द्र सत्य् की तलाश कर रहा था। ईश्वर है कि नहीं! उसके मन में एक आशंका थी कि परमात्मा नाम की कोई चीज नहीं हो सकती है। ईश्ववर नाम का कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और वो उस सत्य को जानने के लिए जूझ रहे थे।

और न ही रामकृष्ण परमहंस किसी शिष्य की तलाश में थे। मैं गुरू परम्परा की भावना , मेरे बाल कुछ शिष्यों की परंपरा अगर है। और मैं जो आश्रम प्रतिस्थापित करूं और उसको कोई चलाता रहे, रामकृष्ण देव के मन में भी ऐसे किसी शिष्या की तलाश नहीं थी ऐसी कोई मनीषा नहीं थी।

एक गुरू जिसको शिष्यो की खोज नहीं थी, एक शिष्य जिसको गुरू की खोज नहीं थी, लेकिन कमाल देखिए, एक सत्य को समर्पित था और दूसरा सत्य को खोजना चाहता था और उसी सत्य की तलाश में दोनों को जोड़ के रख दिया।

और ये अगर हम समझ लें तो फिर सत्य की तलाश क्या हो सकती है, सत्य के रास्ते पे चलना कितना कठिन हो सकता है और उसमें भी कैसे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है, वो विवेकानंद जी के जीवन से हम जान सकते है।

हम विवेकानंद जी के उस कालखंड का विचार करें जहां पर धर्म का प्रभाव, पूजा पद्धति की विधि का प्रभाव, rituals का माहात्मय । धर्म गुरुओं का माहात्मय, धर्मग्रथों का माहात्मय। ये चरम सीमा पर था। उस समय एक नौजवान उन सारी परम्पराओं से भाग जाने की बात करे, इसकी आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है।

एक बहुत बड़ा वर्ग ये मानता था कि भगवान के पास घंटो तक बैठे रहे, पूजा-पाठ करते रहे, आरती-धूप करते रहे, फूल चढ़ाते रहे, नए-नए प्रसाद चढ़ाते रहे तो जीवन के पाप धूल जाते है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक चरम सीमा का आनंद प्राप्त, करने का अवसर मिल जाता है। ये सोच बनी पड़ी हुई थी और उस समय विवेकानंद डंके की चोट पर कहते थे कि जन सेवा ये प्रभु सेवा। सामान्य मानवी जो आपके सामने जिंदा है, जो दुख और दर्द से पीड़ित है, उसकी सेवा करो, ईश्वर अपने आप प्राप्त हो जाएगा।

उन्होंने जब कलकत्ते की धरती पर नौजवानों से पूछा कि ईश्वर प्राप्ति का रास्ता क्या होता है, हमें क्या करना चाहिए तब उन्होंने कहा ये सब छोड़ो, जाओ फुटबॉल खेलो, मस्ती से फुटबॉल खेलो पूरी तरह से अपने आप को झोंक दो, हो सकता है तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। उस समय हम गुलामी के कालखंड में जी रहे थे, कोई सोच भी नहीं सकता था भारत कभी आजाद हो सकता है लेकिन स्वामी विवेकानंद एक दीर्घ दृष्टा थे और वो कहते थे, अपने जीवन के काल में कहा था कि मैं, मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं, मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत मां उठ खड़ी हुई है, वो जगत गुरू के स्थान पर विराजमान मैं देख रहा हूं, मैं एक दिनमान भारत माता मैं देख रहा हूं और वो दिन बहुत निकट होगा । ये भाव जगत स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन काल में अपनी आंखों से देखा था और वो हिंदुस्तान को प्रेरित करने का प्रयास करते थे।

वो एक कालखंड था जब आध्यात्म प्रधान जीवन था और वो सिर्फ भारत में नहीं एशिया के सभी देशों में समाहित था और दूसरी तरफ वो पश्चिम का विचार था, जहां अर्थ प्रधान था। आध्यात्म प्रधान जीवन और अर्थ प्रधान जीवन के बीच एक शताब्दियों का टकराव चल रहा था। अर्थ प्रधान जीवन ने आध्यात्म प्रधान जीवन को किनारे कर दिया था। अर्थ प्रधान जीवन जन सामान्य की आशा, आकांक्षाओं का केंद्र बिंदु बन गया था और ऐसे कालखंड में स्वामी विवेकानंद ने हिम्मत के साथ और 30-32 साल की आयु में पश्चिम की दुनिया में जाकर के, उस धरती पर जाकर के विश्व को आध्यत्मिकता का संदेश देने का एक सामर्थ्यवान काम किया था। जिस महापुरुष ने एशिया की आध्यात्मिक ताकत को दुनिया को पहचान कराया था और पहली बार विश्व को एशिया की अपनी धरती की एक अलग चिंतनधारा है, यहां के संस्कार अलग हैं और विश्व को देने के लिए उसके पास बहुत कुछ है। ये बात डंके की चोट पर कहने का साहस स्वामी विवेकानंद ने किया था। कल मैं यहां आसियान समिट में था आज यहां मैं South East Asia Summit में था और एक बात वहां उभरकर के सामने आती थी और वो एक आती थी कि One Asia .

One Asia का विचार लेकिन आज जो आवाज गूंज रही है उसमें आर्थिक व्यवस्था है, राजनीतिक व्यवस्था है, सरकारों के मेलजोल की व्यवस्था का चिंतन है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि One Asia का concept आध्यात्मिक धरातल पर सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित किया था। मैं एक पुरानी घटना आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं। ..

After Swami Vivekananda introduced the East and Asia to the West, Scholars and philosophers like Okakura, Karinzo from Japan, Rabindranath Tagore, Mahrishi Aurbindo, Anand Kumar Swami and Vinoy Sarkar were inspired by Swami Vivekananda. OkaKura invited Swami Vivekananda to Japan and also sent him a cheque of Rs 300. He came to Calcutta and met Swami Vivekananda on 1st February 1902 and both went to Bodh Gaya together. OkaKura is the symbol of Asianism. In his book, ‘Ideals of the East’ by Okakura, the manuscripts were edited by Sister Nivedita, the foremost western disciple of Swami Vivekananda. The very first sentence, this is one important thing I want to tell you. The very first sentence is “Asia is one.” The idea of Asian unity is clearly Swami Vivekananda’s concept. In his next book, Okakura began by saying “Brothers and sisters of Asia”, echoing Swami Vivekananda’s speech at Parliament of Religions.

मैं ये इसलिए कह रहा था कि जो उस समय इस प्रकार के Philosopher विवेकानंद जी के प्रभाव में थे, उन्होंने जो विवेकानंद जी से मंत्र पाया था वो Asia is One ये मंत्र पाया था। आज 100 साल के बाद आर्थिक, राजनीतिक कारणों से One Asia की चर्चा हो रही है लेकिन उस समय आध्यात्मिक एकात्मता के आधार पर विवेकानंद जी ये देख पाते थे कि ये भूमि है जो विश्व को संकटों से बाहर निकाल सकती है और आज दुनिया जिन दो संकटों से जूझ रही है अगर उन दो संकटों के समाधान का रास्ता कोई दे सकता है तो एशिया की धरती से ही निकल सकता है।

और इसलिए आज विश्व कह रहा है Climate change और Global warming की बात, आज विश्व कह रहा है Terrorism की चर्चा, यही तो धरती है जहां भगवान बुद्ध का संदेश मिला, यही तो धरती है जहां हिंदुत्व का संदेश मिला और इसी धरती से ये बातें उभर करके आ गई हैं जहां पर ये कहा गया एकम सत, विपरा बहुधा विधंति, Truth is One, Wise call it in different ways ये जो मूल मंत्र हैं वो सबको एक रखना, जोड़ने की ताकत देता है और इसलिए जब Terrorism की बात आती है तो उसका समाधान इसमें holier than thou की कल्पना ही नहीं है, हर सत्य को स्वीकार किया जाता है और जब हर सत्य को स्वीकार किया जाता है तब conflict के लिए अवकाश नहीं होता है और जब conflict के लिए अवकाश नहीं है तो संघर्ष की संभावना नहीं है और जहां संघर्ष नहीं है वहां Terrorism के रास्ते पर जाना का कोई कारण नहीं बनता है। 


आज विश्व Global Warming की चर्चा करता है। हम वो लोग हैं जिसने पौधे में परमात्मा देखा था, हम जितने भी ईश्वर की कल्पना की है हर ईश्वर के साथ कोई न कोई प्राकृतिक जीवन जुड़ा हुआ है। किसी न किसी वृक्ष के साथ उन्होंने साधना की है, किसी न किसी पशु-पक्षी को उन्होंने पालन किया है। ये सहज संदेश हमारी परंपरा में रहा हुआ है। हम प्रकृति के शोषण का पक्षकार नहीं रहे हैं, हम nature के साथ मित्रतापूर्ण गुजारा करने की सबक ले करके चले हुए लोग है। वही संस्कृति है जो ग्लोबल वार्मिंग से मानवजाति को बचा सकती है।

मुझे लगता है कि स्वा्मी विवेकानंद जी ने हमें ये जो रास्तेे दिखाएं है। उन रास्तों को अगर हम परिपूर्ण करते है तो हमें हमारे भीतर कोई नए विवेकानंद को प्रतिस्थापित करने की जरूरत नहीं है। उनकी कही हुई एक बात को ले करके भी हम चल पाते है मैं समझता हूं हम आने वाली शताब्दियों तक मानवजात की सेवा करने के लिए कुछ न कुछ योगदान करके जा सकते है।

आज मुझे यहां एक योग की पुस्तक का भी लोकापर्ण करने का अवसर मिला है और वो भी हमारे सरकार के साथ ही श्रीमान शाहू ने यहां की भाषा में योग की पुस्तक की रचना की है। वे स्वयं सरकारी अधिकारी है लेकिन योग के प्रति उनका समर्पण है। मुझे खुशी हुई उनकी उस किताब का लोकापर्ण करते हुए। आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है। हर कोई तनाव मुक्त जीवन का रास्ता खोज रहा है और उसको लगता है उसकी खिड़की योग से खुलती है और इसलिए हर कोई उस खिड़की में झांकने की कोशिश करता है।

यूनाइटेड नेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून को स्वीकार किया। दुनिया के 177 देशों ने उसको को-स्पोंसर किया और दुनिया के सभी देशों ने 21 जून को योग का दिवस मनाया। मानवजात जो कि अपने मानसिक समाधान का रास्ता तलाश रही है। Holistic health care की तरफ आगे बढ़ रही है। तब उसको लगता है कि योग एक ऐसी सरल विद्या है जिसको अगर हम दिन के आधा-पौना घंटा भी लगा ले तो हम अपने मन, बुद्धि, शरीर को एक दिशा में चला सकते है। आज हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि हम दुनिया को समझाएं कि योग क्या है, हमारे सामने चुनौती ये है कि सारा विश्व अच्छे योग टीचरों की मांग कर रहा है। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि हम Perfect योग teacher को कैसे दें ताकि इस विद्या का सही स्वरूप आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे और जो भी इसका लाभ उठाएं, उसको सचमुच में, उसका जो मकसद हो, मकसद पूरा करने में काम हो और इसलिए जितना अधिक आधुनिक भाषा में हम योग को प्रचारित करें, जितनी अधिक योग को आधुनिक भाषा में प्रतिपादित करें और खुद योग के जीवन को जीकर के दुनिया के सामने प्रस्तुत करें और अधिकतम योग के teacher तैयार करें, hobby के रूप में तैयार करें भले profession के रूप में न तैयार कर सकें। दिन में हम 50 काम करते हैं, एक घंटे योगा के लिए जो भी सीखने आएगा, हम सिखाएंगे।

ये पूरा हम एशिया के वायुमंडल में लाते हैं तो विश्व की जो अपेक्षा है, उस अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए उत्तम योग teacher हम दुनिया को दे सकते हैं। मैं स्वामी सूपरयानंद जी का बहुत आभारी हूं कि आज मुझे इस पवित्र स्थान पर आने का अवसर मिला, विवेकानंद जी की प्रतिमा का लोकापर्ण करने का अवसर मिला और मुझे विश्वास है कि इस धरती पर आने वाले विश्व के सभी लोगों को यहां से कोई प्रेरणा मिलती रहेगी। इसी एक शुभकामना के साथ आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत माता की जय !!!

भारत माता की जय !!!

भारत माता की जय !!!

जो लोग मुझे देख नहीं पाते हैं, उनसे मेरी प्रार्थना है कि आप जहां हैं, वहीं से सुन लीजिए। किसी को आगे-पीछे करने के चक्कर में मत पड़िए।

भारत माता की जय !!!

भारत माता की जय !!!

आज का ये दिन ऐतिहासिक है...अभूतपूर्व है। जब वर्षों की साधना...सिद्धि में बदलती है...तो चेहरे पर जो खुशी होती है...वो खुशी आज मैं देशभर के भाजपा के कार्यकर्ता के चेहरे पर देख रहा हूं। आप वो तस्वीर नीचे रखिए। पीछे लोगों को परेशानी हो रही है। नीचे रखिए। नीचे रखिए। एक कार्यकर्ता होने के नाते...मैं भाजपा के हर कार्यकर्ता की खुशी में शामिल हूं।

साथियों,

आज का ये दिवस कई मायनों में खास है, विशेष है। ये देश के उज्ज्वल भविष्य की उद्घोषणा का दिन है। ये भरोसे का दिन है। भरोसा...भारत के महान लोकतंत्र पर...भरोसा...परफॉर्मेंस की पॉलिटिक्स पर। भरोसा...स्थिरता के संकल्प पर... भरोसा...एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना पर।

साथियों,

मैं बंगाल की जनता का...असम की जनता का...पुडुचेरी की जनता का… तमिलनाडु और केरलम् की जनता का आज आदरपूर्वक नमन करता हूं। मैं उन सबको वंदन करता हूं। मैं आज बीजेपी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का भी हृदय से अभिनंदन करता हूं...भाजपा के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता ने एक बार फिर से, कमाल कर दिया है। कमल खिला दिया है। आपने नया इतिहास रच दिया है।

साथियों,

भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष श्री नितिन नबीन जी द्वारा अध्यक्ष पद संभालने के बाद..ये पहले विधानसभा चुनाव थे। इन चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं को हर कार्यकर्ता को मिला उनका मार्गदर्शन है, वो मार्गदर्शन इस विजय में बहुमूल्य रहा है।

साथियों,

आज विभिन्न उपचुनावों के परिणाम भी अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में जो उप चुनाव हुए, उसमें हमारे उम्मीदवारों को जनता-जनार्दन ने आशीर्वाद दिया और इन राज्यों में भी जीत गए। एनडीए की नेता, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार जी ने भी बड़ी जीत दर्ज की है। मैं इन सभी राज्यों की जनता का उनके समर्थन के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।


साथियों,

जय-पराजय, लोकतंत्र और चुनावी राजनीति का एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन पांच प्रदेशों की जनता ने पूरे विश्व को दिखाया है...कि ये हमारा भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी क्यों है? लोकतंत्र...डेमोक्रेसी...हमारे लिए सिर्फ एक तंत्र नहीं है... ये हमारी रगों में दौड़ता हुआ संस्कार है, हमारे रगों की संस्कार सरिता है। और आज सिर्फ भारत का लोकतंत्र ही नहीं जीता है... और आज सिर्फ भारत का लोकतंत्र ही नहीं जीता है, आज भारत का संविधान भी जीता है...हमारी संवैधानिक संस्थाएं जीती हैं...हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जीती हैं।

पश्चिम बंगाल में करीब 93 परसेंट मतदान होना अपने आप में ऐतिहासिक रहा है। असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरलम् में भी मतदान के नए रिकॉर्ड बने हैं। इसमें भी महिलाओं की भागीदारी अधिक रही है। ये भारतीय लोकतंत्र की सबसे उजली तस्वीर बन रही है।

साथियों,

मैं आज चुनाव आयोग को, चुनाव आयोग के सभी कर्मचारी भाई-बहनों को, जो भी मतदान से जुड़े प्रक्रिया के सारे कर्मी थे... साथ-साथ विशेषतौर पर सुरक्षाबलों का भी...मैं आज बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। भारत के लोकतंत्र की गरिमाओं को बनाए रखने में आप सबका योगदान इतिहास हमेशा-हमेशा याद रखेगा।


साथियों,

पिछले साल...14 नवंबर को जब बिहार चुनाव के नतीजे आए थे...तब मैंने यहीं, इसी जगह से बीजेपी मुख्यालय से आप सबको कहा था...गंगा जी बिहार से आगे बहते हुए गंगासागर तक जाती हैं। और आज बंगाल की जीत के साथ...गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक...कमल ही कमल खिला हुआ है... उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अब पश्चिम बंगाल... आज मां गंगा के इर्द-गिर्द बसे इन राज्यों में बीजेपी-NDA सरकार है।

साथियों,

2013 में जब भारतीय जनता पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में भी काम दिया। और जब में काशी में अपना नामांकन भरने गया और पत्रकारों ने मुझे घेर लिया। तो स्वाभाविक रूप से मेरे हृदय से एक ध्वनि निकली थी और मैंने कहा था- ना मैं आया हूं, ना मुझे किसी ने भेजा है, मां गंगा ने मुझे बुलाया है। और आज मैं हर पल अनुभव कर रहा हूं कि मां गंगा के आशीर्वाद निरंतर हम सब पर अपनी कृपा बरसा रहे हैं।

साथियों,

गंगा जी के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र का भी हम पर बहुत आशीर्वाद रहा है। मां कामाख्या का आशीर्वाद रहा है। असम की जनता ने लगातार तीसरी बार, बीजेपी-NDA पर भरोसा किया है, हैट्रिक तीसरी बार। ये असम के इतिहास की बहुत बड़ी घटना है। असम के टी-गार्डन्स वाले क्षेत्रों में भी बीजेपी को अभूतपूर्व समर्थन मिला है। श्रीमंत शंकरदेव जी...महायोद्धा लसित बोरफूकन जी...बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा जी...भूपेन हजारिका जी...ऐसे अनेक महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेते हुए असम अपने विकास की रफ्तार अब और बढ़ाएगा।

साथियों,

साल 2021 में हमने पुडुचेरी की जनता के सामने BEST Puducherry का विजन रखा था। पुडुचेरी की जनता ने उस विजन पर विश्वास जताया, हमें अपना आशीर्वाद दिया था। पिछले पांच वर्षों में हमारी एनडीए सरकार ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस विजन को गति देने का काम किया। और आज…एक बार फिर पुडुचेरी की जनता ने एनडीए पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। मैं पुडुचेरी के युवाओं को, मेहनती फिशरमेन साथियों को भी विश्वास दिलाता हूं…एनडीए सरकार आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर काम करती रहेगी। पुडुचेरी के हर परिवार की समृद्धि…यही हमारा संकल्प है।

साथियों,

आज देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकारें हैं। हमारा मंत्र है- नागरिक देवो भव...हम जनता की सेवा में जुटे हुए हैं। और इसलिए जनता भाजपा पर ज्यादा से ज्यादा भरोसा कर रही है। जनता साफ देख रही है- जहां भाजपा वहां गुड गवर्नेंस...जहां भाजपा वहां विकास। आप बीते 2 साल के ट्रेंड को देखिए...हरियाणा में लगातार तीसरी बार बीजेपी सरकार बनी...महाराष्ट्र में बीजेपी की जोरदार विजय हुई। दिल्ली में अभूतपूर्व जीत हासिल हुई...बिहार में भी हमें पहले से बड़ी विजय मिली। और ये सफलता सिर्फ राज्यों के चुनाव में ही नहीं दिखी...ये सफलता लोकल गवर्नेंस के चुनाव में भी दिख रही है।

साथियों,

अभी दस दिन पहले गुजरात के स्थानीय निकायों के परिणाम आए हैं। वहां बीजेपी, ढाई-तीन दशक से जनता की सेवा निरंतर कर रही है। और हर चुनाव में जनता...बीजेपी को आशीर्वाद के नए रिकॉर्ड बना रही है। गुजरात में इस बार बीजेपी को अब तक का highest वोट शेयर मिला है। ये भाजपा की गुड गवर्नेंस नीतियों की सफलता का बहुत बड़ा उदाहरण है।


साथियों,

आज भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में...मेरे मन में बार-बार एक और बात आ रही है...और वो बात ये है कि डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को आज कितनी शांति मिली होगी। उन्होंने 1951 में उन्होंने जनसंघ की स्थापना करके...प्रत्येक कार्यकर्ता को ये संदेश दिया था कि देश के लिए जीना है और देश के लिए ही मरना है। उन्होंने अपने जीवन से साबित किया कि राष्ट्र सर्वोपरि का मंत्र लेकर चलने वाले...अपना जीवन देने में एक पल का भी संकोच नहीं करते।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए, एक बड़ी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने जिस सशक्त और समृद्ध बंगाल का सपना देखा था...वो सपना कई दशकों से पूरा होने का इंतजार कर रहा था। आज 4 मई, 2026 को...बंगाल की जनता ने हम भाजपा कार्यकर्ताओं को वो अवसर दिया है।

साथियों,

बंगाल के भाग्य में आज से एक नया अध्याय जुड़ गया है। आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है...विकास के भरोसे से युक्त हुआ है। बांग्लाय पोरिबोर्तोन होए गेछे...

साथियों,

इस जीत के साथ-साथ...वंदे मातरम् के डेढ़ सौवें वर्ष में भारत माता को... और ऋषि बंकिम जी को...बंगाल के लोगों ने अपना सादर नमन प्रेषित किया है। योगिराज श्री अरबिन्दो को भी मतदाताओं ने ऐतिहासिक श्रद्धांजलि दी है।

साथियों,

बंगाल में हमारे कितने ही कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन इस जीत के लिए समर्पित किया है...भाजपा की कितनी ही महिला कार्यकर्ताओं को तमाम अत्याचार सहने पड़े हैं...आप कल्पना नहीं कर सकते कि केरलम और बंगाल में भाजपा के हर कार्यकर्ता को कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ी हैं, उन पर कितने जुल्म हुए हैं, कितने अत्याचार हुए हैं। मैं आज बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सफलता का श्रेय ऐसे सभी कार्यकर्ताओं को...उनके परिवारों को देता हूं। मैं ये जीत...बंगाल की जनता को समर्पित करता हूं।

साथियों,

अभी 4 मई की यह शाम भले ही ढल रही हो..लेकिन बंगाल की पावन धरा पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है...एक ऐसा सवेरा, एक ऐसा सवेरा जिसका इंतजार पीढ़ियों ने किया है..भाजपा ने जितनी सीटें जीतीं...वो महज एक चुनावी आंकड़ा नहीं है। ये उस अडिग विश्वास की हुंकार है...जिसने डर, तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंका है।

साथियों,

आज से बंगाल के भविष्य की एक ऐसी यात्रा शुरू हो रही है...जहां विकास, अटूट विश्वास और नई उम्मीदें...कदम से कदम मिलाकर चलेंगी...। मैं आज हर बंगाल वासी को, हर बंगालवासी को भरोसा देता हूं..बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए भाजपा दिन-रात एक कर देगी। बंगाल में अब महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिलेगा...युवाओं को रोजगार मिलेगा...पलायन रुकेगा... पहली कैबिनेट में आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दिखाई जाएगी। और, और घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।

साथियों,

इस महाविजय की दहलीज पर खड़े होकर हम गुरुदेव टैगोर को भी याद कर रहे हैं। पोच्चीसो बैइशाख...9 मई का दिन दूर नहीं है। हमारा संकल्प भी वही होना चाहिए, जो उनका स्वप्न था.. एक ऐसा परिवेश जहां मन भयमुक्त हो और सिर ऊंचा हो। और बीजेपी... बंगाल में ऐसा भयमुक्त वातावरण बनाकर दिखाएगी...ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

बंगाल के ये चुनाव एक और वजह से बहुत खास रहे हैं। आप याद कीजिए बंगाल चुनाव के समय कैसी खबरें आती थीं? हिंसा… डर… और निर्दोष लोगों की मौतें। लेकिन इस बार पूरे देश ने एक नई खबर सुनी…पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ! पहली बार ऐसा हुआ कि चुनावी हिंसा में... एक भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में बंदूक की आवाज नहीं... जनता-जनार्दन की आवाज गूँजी। पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता है।

साथियों,

आज जब बंगाल ने परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश किया है...तो मैं बंगाल के हर राजनीतिक दल से एक आग्रह भी करना चाहता हूं। बंगाल में बीते दशकों में राजनीतिक हिंसा की वजह से न जाने कितनी ज़िंदगियाँ बर्बाद हो चुकी हैं।
मेरा स्पष्ट मानना है कि...आज से बंगाल की इस चुनावी जो आदतें फैली हुई हैं, उसमें बदलाव आना चाहिए। आज जब भाजपा जीती है, आज जब भाजपा जीती है तो...“बदला” नहीं, “बदलाव” की बात होनी चाहिए। भय नहीं भविष्य की बात होनी चाहिए। मेरी सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील है...आइए, हिंसा के इस अंतहीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म करें। किसने किसे वोट दिया...किसे नहीं दिया...उससे ऊपर उठकर बंगाल की सेवा के लिए काम करें।


साथियों,

इन राज्यों में चुनाव और उसके नतीजों की...राजनीतिक एक्सपर्ट अपने-अपने तरीके से समीक्षा कर रहे हैं...लेकिन इन नतीजों की एक और बहुत अहम बात है...इनकी टाइमिंग। आप देख रहे हैं कि जब इन राज्यों में जनता वोट डाल रही थी...तो इसी दौरान विश्व में क्या कुछ नहीं चल रहा था। जगह-जगह युद्ध के सायरन बज रहे थे...अस्थिरता और अराजकता का माहौल रहा...वैश्विक अर्थ-व्यवस्थाएं संकट में दिखीं...और उस दौरान..भारत का जन-जन स्थिरता के लिए वोट दे रहा था।

साथियों,

आज पश्चिमी एशिया में चल रहे संकट का पूरे विश्व पर बुरा असर पड़ा है। लेकिन भारत, पूरे सामर्थ्य से इस संकट का सामना कर रहा है। इस चुनाव परिणाम ने भी दिखाया है कि भारत इस चुनौती में भी एकजुट है, एकमत है, एक लक्ष्य से संकल्पित है। और वो लक्ष्य है, विकसित भारत। विकसित भारत का लक्ष्य लेकर के हम निकले हैं।

साथियों,

विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में...पूर्वोद्य का बहुत बड़ा महत्व है। जब भारत समृद्ध था... आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सामर्थ्य के चरम पर था...तब उसके तीन मजबूत स्तंभ थे। ये स्तंभ थे...अंग यानि आज का बिहार... बंग यानि आज का बंगाल...और कलिंग...यानि आज का ओडिशा...कलिंग उस समय हिंद महासागर के समुद्री व्यापार का एकछत्र सम्राट था। कलिंग के बंदरगाह...पूरे एशिया तक भारत के उत्पादों को पहुँचाते थे। वहीं...अंग... सूत, रेशम और अन्य व्यापार के साथ-साथ...नालंदा और विक्रमशिला जैसे एजुकेशन सेंटर्स का भी हब था। और बंग...वो सांस्कृतिक धरती थी जहाँ से भारत की आत्मा की आवाज उठती थी।

साथियों,

गुलामी के कालखंड में जैसे-जैसे, समृद्ध भारत के ये मजबूत पिलर कमजोर होते गए...भारत का सामर्थ्य भी क्षीण होता गया। इसलिए, विकसित भारत के निर्माण के लिए इन तीनों स्तंभों का फिर से मजबूत होना बहुत आवश्यक है। और मुझे बहुत गर्व है...कि अंग, बंग और कलिंग ने इस महाअभियान के लिए बीजेपी को चुन लिया है, NDA पर भरोसा किया है।

साथियों,

विकसित भारत के निर्माण का एक और महत्वपूर्ण पिलर...भारत की नारीशक्ति है। नारीशक्ति अब विकसित भारत के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन नारीशक्ति की इस रफ्तार को कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने कुछ दिन पहले रोकने का काम किया है। इन नारी विरोधी दलों ने संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन को पास नहीं होने दिया। और इसलिए मैंने कुछ दिन पहले कहा भी था...कि महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने वाले ऐसे दलों को महिलाओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा। आज कांग्रेस, टीएमसी और DMK को...बहनों-बेटियों ने सजा दी है। केरलम में लेफ्ट के 10 सालों के कुशासन का फायदा कांग्रेस को जरूर मिला है...लेकिन मुझे विश्वास है...केरलम् की बहनें भी अगले चुनावों में कांग्रेस को जरूर सबक सिखाएंगी।

साथियों,

जिस समाजवादी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण को रोका है...उसे भी यूपी की महिलाओं का आक्रोश सहना पड़ेगा। महिला विरोधी समाजवादी पार्टी कुछ भी करके अपने पाप को कभी धुल नहीं पाएगी।

साथियों,

आज हम भारत की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देख रहे हैं। आज पूरे देश में एक भी राज्य ऐसा नहीं है जहां कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार हो। एक भी नहीं है। ये सिर्फ, ये सिर्फ सियासत का बदलाव नहीं है, ये सोच का बदलाव है। ये बताता है कि विकसित होता हुआ भारत...किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। आज का भारत अवसर चाहता है, विकास चाहता है, विश्वास चाहता है। आज का भारत प्रगति चाहता है, स्थिरता चाहता है। और आज का भारत ऐसी राजनीति चाहता है जो देश को आगे बढ़ाए।

लेकिन साथियों,

दुर्भाग्य से आज की कांग्रेस...बिल्कुल विपरीत दिशा में चल पड़ी है। ऐसे समय में, जब पूरा देश कम्युनिज़्म से किनारा कर चुका है...कांग्रेस, उसी विचारधारा को अपनाने में लगी है जिसे देश ने ठुकरा दिया है। जो माओवाद जंगलों में समाप्त हो रहा है...वो अब कांग्रेस में अपनी जड़ें मजबूत कर चुका है। इसलिए कांग्रेस...अर्बन नक्सलियों का गिरोह बनती जा रही है। कांग्रेस को एक बात नहीं भूलनी चाहिए..जिस विचार को जनता ने ठुकराया...उसे जो अपनाएगा…जनता उसे भी ठुकराएगी।

साथियों,

आज देश का हर राज्य भी एक दूसरे से लड़कर नहीं....एक दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है। इन चुनावों ने इस संदेश को भी बहुत स्पष्ट किया है। बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में जिन तीन सरकारों को जनता ने सत्ता से बाहर किया...उनकी एक समान पहचान थी...विभाजन की राजनीति। यही उनकी पहचान थी। उनकी राजनीति जोड़ने की नहीं, तोड़ने की थी। कभी भाषा के नाम पर विवाद खड़ा किया गया, कभी खाने-पीने की आदतों को लेकर समाज को बाँटने की कोशिश हुई, और कभी अपने ही देश के लोगों को “बाहरी” तक कहा गया। लेकिन भारत की जनता ने इस राजनीति को साफ जवाब दिया है। देश ने बता दिया है कि उसे विवाद नहीं, विकास चाहिए…विभाजन नहीं, विश्वास चाहिए…।

साथियों,

आजादी के बाद कांग्रेस ने देश के करीब-करीब हर राज्य में सरकारें बनाईं। ये आजादी के आंदोलन का जो इमोशन था, उसका उनको लाभ मिला था, उसमें से उपजा जनादेश था। लेकिन जैसे-जैसे आजादी के आंदोलन का इमोशन से आगे निकलकर के देश... धरातल के काम पर लौटा... वैसे-वैसे कांग्रेस जनता का भरोसा खोती चली गई। बीते दशकों में... देश ने युवाओं की अनेक पीढ़ियां जोड़ी हैं। लेकिन कांग्रेस घटती ही चली गई है। कांग्रेस देश की संस्कृति को नहीं समझ पाई, देश की संवेदनाओं को समझ नहीं पाई। कांग्रेस एस्पिरेशन्स की राजनीति जानती ही नहीं है।

साथियों,

बीजेपी के लिए भारत और भारतीयता के भाव से बड़ा और कुछ भी नहीं है। हमारे लिए भारत सब कुछ है। भारतीयता सब कुछ है। और बीजेपी, सिर्फ नेशनल पार्टी है, इतना ही नहीं है...ये रीजनल एस्पिरेशन्स से नेशनल एंबिशन्स को पूरा करने वाली पार्टी है। इसलिए...बीजेपी, अपने विचार, विजन और विकास के विश्वास पर खरा उतरकर देश की पसंद बन रही है। जनता जनार्दन के आशीर्वाद प्राप्त कर रही है। भाजपा, परिवार की नहीं, ज़मीन से जुड़ी राजनीति करती है। इसलिए, आज नॉर्थ ईस्ट भाजपा से जुड़ता है। इसलिए, आज पूरा आदिवासी अंचल बीजेपी को इतना प्रचंड जनादेश दे रहा है। इसलिए, देश के मछुआरों का अभूतपूर्व समर्थन बीजेपी के साथ है। इसलिए, देश के किसानों की पसंद बीजेपी है।

साथियों,

लोकतंत्र में जनता की आकांक्षा सर्वोपरि है। तमिननाडु की जनता ने एक नया प्रयोग किया है। मैं यूडीएफ को भी बधाई देता हूं। मैं तमिलनाडु और केरलम की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि भारत सरकार इन राज्यों के विकास के लिए भी कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।

साथियों,

हम बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता की हर उम्मीद, हर अपेक्षा को अपनी सेवा से पूरा करेंगे। इसी विश्वास के साथ बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी-एनडीए को विजयी बनाने के लिए, लोकतंत्र को विजयी बनाने के लिए मैं सभी नागरिकों का, सभी मतदाताओं का और सभी देशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं और सिर झुका करके उनका ऋण स्वीकार करता हूं। मेरे साथ बोलिए

भारत माता की जय!!

भारत माता की जय!!

भारत माता की जय!!

वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।