PM’s address on the release of the digital version of Ramcharitmanas

Published By : Admin | August 31, 2015 | 17:18 IST
PM Narendra Modi launches digitised version of the Ramcharitmanas in New Delhi
Prime Minister Modi appreciates All India Radio's role in uniting the people and spreading awareness and information in India
Ramcharitmanas is a great epic. It contains the essence of India: PM Narendra Modi
The digital version of Ramcharitmanas will help people across the world: PM Modi

ये कार्यक्रम जहां हो रहा है, उस स्‍थान का नाम है पंचवटी और जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तब इस निवास स्‍थान में पंचवटी का निर्माण हुआ और नाम पंचवटी रखा गया था और शायद मैं मानता हूं आज का अवसर पंचवटी में होना अपने आप उसके कारण उसका एक कीर्तिमान बढ़ जाता है, क्‍योंकि रामचरितमानस की बात हो और पंचवटी न हो, तो फिर वो रामचरितमानस अधूरा लगता है और इसलिए ये अपने आप में एक सुफल संयोग है।

आज के इस अवसर को मैं अलग-अलग रूप में अनुभव करता हूं। कभी-कभी सरकार में लोग नौकरी करते-करते जीवन ऐसा बन जाता है, एक मशीनी गतिविधि बन जाती है और वही सुबह जाना, शाम को आना, वही फाइलें, वही बॉस, वहीं assistant, एक जिंदगी के बड़े महत्‍वपूर्ण 30-35 साल उसी में गुजर जाते है और ज्‍यादातर का मन बन जाता है कि चलो अब इस पाइपलाइन में घुसे है 30-35 साल के बाद उधर निकलेंगे। जिस रूप में निकलेंगे, निकलेंगे.. लेकिन यह अवसर देख करके ध्‍यान में आता है कि एक सरकार का मुलाजिम, जिसमें एक तड़प हो, कुछ करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, वो कितनी बड़ी विरासत छोड़ करके जाता है और इसलिए सबसे पहले मैं आकाशवाणी के उस एक सामान्‍य अधिकारी जिनके परिवारजन.. ये औरों के लिए भी प्रेरक बन सकता है। हमारी जिंदगी व्‍यर्थ नहीं जा रही है। हम जो फाइलों पर साइन करते है वो बेकार नहीं होती, कभी न कभी इतिहास को वो नया मोड़ देते है। ये आज की घटना उस बात का जीता-जागता सबूत है।

दूसरी बात, करीब-करीब 20-22 साल तक लगातार इसका रिकार्डिंग हुआ है। 22 साल तक उस team को बनाए रखना, उस rhythm को बनाए रखना और उसे उतना ही प्राणवान बनाए रखना, वरना तो यार बहुत हो गया अब कितने ऐपिसोड हो गए, अब तो लोगों को आदत हो गई, चलो निकाल दो। नहीं। इससे जुड़े हुए कलाकार शायद आज हिन्‍दुस्‍तान के बड़े कलाकारों की संख्‍या में उनका नाम नहीं होगा, लेकिन संगीत के साधक के रूप में। 22 साल करीब-करीब ये साधना कम नहीं होती जी, 14 लोगों ने team बन करके काम किया, 7 लोग हमारे बीच नहीं रहे, सबको आज सम्‍मानित करने का आज अवसर मिला और ये सिर्फ संगीत नहीं है। ये संगीत की भी साधना है, संस्‍कृति की भी साधना है और संस्‍कार की भी साधना है। और ये काम, देखिए हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव है, वैचारिक धरातल पर भी उतार-चढ़ाव आए हैं। आज अगर कोई ओम बोल दे तो हफ्तेभर विवाद चलता है कि ओम कैसे बोला जा सकता है। देश :::: सांम्‍प्रदायिक है। ऐसे देश में रामचरितमानस को किसी ने question नहीं किया, वो आज भी चल रहा है। हो सकता है आज के बाद किसी का ध्‍यान जाए और तूफान खड़ा कर दे, तो मैं नहीं जानता हूं। लेकिन कभी-कभार हम देखते है कि बहुत सालों से सुनते आए है, क्‍या बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी। जवाब खोजने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यही बात है कि जिसके कारण हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी, यही तो रामचरितमानस है, यही तो परम्‍परा है, यही संस्‍कार है।

हजारों साल से दुनिया में हमारी जो सबसे बड़ी विशेषता है जिसके लिए विश्‍व के किसी भी समाज को हमारे प्रति ईर्ष्‍या हो सकती है, वो है हमारी परिवार व्‍यवस्‍था और हम बचे हैं बने है उसका एक कारण.. जब तक हमारी परिवार व्‍यवस्‍था प्राणवान रही है, हम ताकतवर रहे है और उस परिवार व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई है तो रामचरितमानस और राम जी का परिवार जीवन है। मर्यादा पुरूषोत्‍तम राम.. मर्यादाओं में किसने कैसे जीना परिवार में। किसकी कैसे मर्यादा को पालन करना, कैसा व्‍यवहार करना, आचरण का उत्‍तम संस्‍कार का हमें दर्शन होता है। रामचरितमानस की क्‍या ताकत देखिए हजारों साल हो गए, पीढि़यां बीत गई लेकिन वहीं भाव, वही परम्‍परा, वही संस्‍कार, वही संदेश आज भी जीवित है। आज एक बात हम कहें, लिखित कहें लेकिन संदेश पहुंचते-पहुंचते सात दिन में उसका अर्थ अलग ही हो जाता है। ऐसा कौन सा सामर्थ्‍य होगा कि जिसमें आज भी अनेक व्‍याख्‍याएं होने के बाद भी मूल तत्‍व को कहीं पर भी खरोच नहीं आई है। ऐसी कृति मानव को इस धरती के साथ जोड़ने का इतना बड़ा काम है।

आज भी अगर हम मॉरिशस में जाए दुनिया के कई देशों में, जो लोग गुलामी के कालखंड में मजदूर के रूप में उनको उठा करके ले जाया गया, कुछ नहीं था, निर्धन थे। लेकिन तुलसीकृत रामायण साथ ले जाना नहीं भूले, हनुमान चालीसा ले जाना नहीं भूले और डेढ़ सौ साल अलग जीवन, भाषा भूल गए, पहनावा बदल गया, नाम में बदलाव आया, लेकिन एक अमानत उनके पास बची जिससे आज भी भारत के साथ उनका नाता जुड़ा रहा है और कैसे जुड़ता है मुझे बहुत साल पहले की घटना याद है। वेंस्‍टइंडिज की एक क्रिकेट टीम भारत में खेलने के लिए आई थी। बहुत साल पहले की बात कर रहा हूं और उसके मैनेजर का मेरे यहा फोन आया। अब आज से 30-35, 40 साल पहले मुझे कोई पहचानता नहीं था, न कोई नाम न कोई जान। उनका टेलीफोन आया मुझे आश्‍चर्य हुआ, कि बोले वेंस्‍टइंडिज के क्रिकेटर के मैनेजर आप से बात करना चाहते है, मिलना चाहते है। तो किसी ने नाम दिया होगा, कही परिचय निकला होगा। मैंने कहा वेंस्‍टइंडिज टीम से मेरा तो वैसे भी क्रिकेट के खेल से.. मैं कोई खिलाड़ी तो हूं नहीं, तो पता चला तो बोले रामरिखीनाम है इनका और वो अपनी पत्‍नी के साथ आए है। मूल भारतीय है, तो मैं उनको मिलने गया तो वहां एचआरडी मिनिस्‍ट्री में काम करते थे और टीम मैनेजर के रूप में आए थे। तो मैंने कहा ये ऋषि शब्‍द कहा से आया तो बोले ऋषि में से आया हुआ होगा, फिर उनकी पत्‍नी का नाम पूछा तो बोले सीता। वो भारत पहली बार आए थे। लेकिन उनको अपना और मैं जब गया तो specially वो भारतीय परिवेश पहन करके बैठे थे। यानी एक प्रकार से एक ग्रंथ डेढ़ सौ साल के बाद भी अपनेपन से जोड़ करके रखता है] इसका ये उत्‍तम अनुभव.. और इस अर्थ में रामचरितमानस आज digital form में ये सबके सामने जा रहा है।

आकाशवाणी की ताकत बहुत बड़ी है, कितनी ही चीजें क्‍यों न बदल जाए, लेकिन कुछ मूलभूत चीजें होती है, जो अपनी.. बुलंदी कभी खोती नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में आकाशवाणी की ये बहुत बड़ी ताकत है। लोगों को भले एहसास न होता, हो मुझे तो एहसास है। हम लोग भली-भांति समझते है आकाशवाणी की ताकत क्‍या है। ये मेरा एक ऐसा अनुभव है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। और मैं हिमाचल में काम करता था, तो एक दिन मैं अपने दौरे पर जा रहा था तो ऐसे ही पहाड़ों में एक ढाबे पर रूक करके चाय पीने की सोचा, तो गाड़ी को रोकी। जब मैं नीचे उतरा तो जो ढाबे वाला था, चाय वाला उसने मुझे लड्डू खिलाया। मैंने कहा भई मुझे चाय पीनी है। अरे बोले साहब लड्डू खाओ पहले, मौज करो। मैंने कहा क्‍या बात है। बोले अरे आज अटल जी ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा अटल जी ने बम फोड़ दिया। अरे बोले अभी-अभी रोडियो पर सुना है कि भारत ने बम फोड़ा है। न्‍यू‍क्लियर टेस्‍ट हुआ था। मुझे वो पहली खबर आकाशवाणी के माध्‍यम से एक चाय वाले, ढाबे वाले ने दी।

यानी हम जिन चीजों का कभी-कभी महत्‍व नहीं समझते, वो कितना बड़ा होता है ओर सिर्फ खबर नहीं, सिर्फ खबर नहीं। हिमायल की पहाडि़यों में दूर-सुदूर अकेला चाय के ढाबे वाला, इस समाचार से अपने आपको इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गरीब होने के बावजूद भी अपनी दुकान की मिठाई मुफ्त में बांट रहा है। संदेश की ताकत क्या है, देखिए और समय ज्‍यादा नहीं हुआ होगा, ये 5 बजे declare हुआ होगा शाम को और मैं करीब 6 सवा 6 बजे वहां से गुजर रहा हूं। कहने का तात्‍पर्य ये कि हमारे ये communication अपने आप में इतने बड़े देश में बहुत अनिवार्य है, बहुत आवश्‍यक है और आज के competition के युग में आकाशवाणी को स्‍पर्धा में फंसने की जरूरत नहीं है जी। उसने तो अपनी मूलभूत धाराओं को पकड़ करके जन-जन के दिलों तक जुड़े रहना ओर देश को जोड़ के रखना और भविष्‍य के साथ उनको उत्‍साहित करते रहना ये उसका काम है। और उस काम को हम कैसे निभाएं।

युग बदलता जाए वैसे बदलाव आवश्‍यक होता है कायाकल्प जरूरी होते है ओर जब कायाकल्प की बात करता हूं तब आत्‍मा वही रहता है, समयाकूल बदलाव आता है। ये डिजिटल रूप उसका एक सही कदम है। हम लोग, अब मुझे बताया गया आकाशवाणी के पास 9 लाख घंटों का recording material उपलब्‍ध है, 9 लाख घंटे। शायद दुनिया में किसी एक ईकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जी और उस समय आकाशवाणी का जो रूप-रंग था बाद में जो हमारे यहां जो चला माहौल, अलग बात है, मैं जरूर मानता हूं कि आ‍काशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल undiluted ये उसमें उपलब्ध होगा। ये 9 लाख घंटों का जब digital version तैयार होगा फिर उसमें भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं कितनी बड़ी सेवा होगी, कितना बड़ा खजाना ओर एक प्रकार से digital history का ये सबसे बड़ा resource material बन सकता है। जो शायद आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होगे उनके लिए एक बहुत अवसर बनेगा। और भारत का दूरदर्शन का काम तो ऐसा है कि हिन्‍दुस्तान की सभी यूनिवर्सिटी में एकाध-एकाध विद्यार्थी ने सिर्फ आकाशवाणी के योगदान पर पीएचडी करनी चाहिए, रिसर्च करनी चाहिए। हम लोगों के स्‍वभाव नहीं है। एक एकाध प्रेमचंद की कथा पर तो रिसर्च कर लेते है, लेकिन इतना बड़ा खजाना। आगे चल करके Human Resource Department के लोग, Culture Department के लोग सोचें कि हमारे नौजवान इस खजाने का research करके क्‍या दे सकते है दुनिया को। हम आगे के लिए क्‍या सोचे। विश्‍व के लोग भी अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया भारत को जानने-समझने के लिए आतुर है, तैयार है। वे अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने ये message दिया है कि भारत के पास कुछ है जो हमें जानना है, पाना है ये मूढ़ बना है तब हमारा कर्तव्‍य बनता है कि हम इसको कैसे पहुंचाए और ये अगर हम कर सकते है तो हम कितनी बढ़ी सेवा कर सकते है।

इनदिनों आकाशवाणी एक अच्‍छा काम भी किया है.. आकाशवाणी नहीं, रेडियों के कारण धीरे-धीरे जो आज एफएम चैनल वगैरह सब जो दुनिया चलती है। लोग कहते है भ्रष्‍टाचार के लिए क्‍या किया? हमारे यहां FM चैनल सारी पहले सरकारी खजाने में 80 सौ करोड़ रुपया देती थी। अभी आक्‍शन चल रहा है, आक्‍शन से देंगे ट्रांसपैरेंसी, परिणाम क्‍या आया मालूम है अब तक करीब-करीब साढ़े 11 सौ करोड़ की बोली बोल चुके है, अभी तो बोली चल रही है और उसके जो rules and regulations है उसके हिसाब से सरकार के खजाने में जो 80 सौ करोड़ आते थे एक स्थिति आएंगी 27 सौ-28 सौ करोड़ रुपए आएगे। व्‍यवस्‍थाओं को transparent करने से व्‍यवस्‍थाओं को आधुनिक टेक्‍नोलोजी से जोड़ करके भ्रष्‍टाचार से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है। कोई नया आर्थिक बोझ डाले बिना भी देश के विकास में धन कैसे उपलब्‍ध किया जो सकता है इसका एक बेहतरीन नमूना.. ये आकाशवाणी और रेडियो के संबंध में जो भारत सरकार ने अरुण जी के नेतृत्‍व में किया है, उसका ये परिणाम है।

तो हर दिशा में हम इस काम को आगे बढ़ा रहे है और मुझे आशा है कि ये digital version के कारण विश्‍व के लोग जो जानना चाहते है, समझना चाहते है उनके लिए उपकारक होगा। भोपाल केंद्र के लोगों ने गौरवपूर्ण काम किया है; आने वाले दिनों में भोपाल में एक विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन हो रहा है। आकाशवाणी सोचे विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में जो delegate आने वाले है भोपाल में ही हो रहा है तो ये उनको गिफ्ट के रूप में दिया जाए, ताकि एक souvenir..एक सच्चा souvenir ये बनेगा, जो विश्‍वभर से गरीब, काफी बड़ी तादात में लोग आ रहे है तो एक बहुत बड़ा अवसर बनेगा।

मैं फिर एक बार विभाग को, प्रसार भारती को, आकाशवाणी को ये बहुमूल्य चीजें संभाले रखने के लिए बधाई देता हूं। और देशवासियों को ये नजराना देते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं। मैं आभारी हूं डॉ. कर्ण सिंह जी का और मैंने देखा है कि हमारे कर्ण सिंह जी इन चीजों से ऐसे जुड़े हुए है, इसका इतना महामूल्‍य मानते है वो, कि उनको कोई राजकीय विचारधारा कभी बाधा नहीं बनती है और हमेशा ऐसी चीजों को वो आर्शीवाद देते रहें, प्रोत्‍साहन देते रहें। आज विशेषरूप आए इसलिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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भारत माता की… भारत माता की…

राम राम भाई सारे नै!

आज बुद्ध पूर्णिमा है। मैं समस्त देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मैं श्रद्धेय गुरु जयराम दास, चमन ऋषि और महान सेनानी राव तुलाराम जी को नमन करता हूं। मैं रेजांगला के शहीदों और अहीरवाल की इस भूमि को प्रणाम करता हूं। मैं अगर हरियाणा में आऊं तो पुरानी यादें ताजा ना हो जाए, ऐसा हो नहीं सकता। यहां भी वहां भी बहुत सारे परिचित चेहरे नजर आ रहे हैं। पुरानी-पुरानी यादें भी, क्योंकि हरियाणा तो वर्षों तक एक प्रकार से मेरा घर ही बन गया था। और मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं मुझे राजनीति की बहुत सारी शिक्षा हरियाणा और पंजाब से मिली। और यह मेरा सौभाग्य रहा इस मिट्टी ने भी मुझे गढ़ा है। वो 1995 का शायद कालखंड होगा जब मैं प्रभारी के रूप में यहां आया था। लेकिन आमतौर पर प्रभारी आते हैं दौरा करने के लिए। मैं यहां ‘मुकाब’ करने आ गया था। मैं यहीं पर रहता था और उस समय हमारे मनोहर लाल जी संगठन का काम देखते थे। उस समय हमारे रमेश जोशी जी अध्यक्ष हुआ करते थे। रमेश जी, मैं, मनोहर लाल जी ने हरियाणा की खूब खाक छानी थी। मैंने यहां माताओं-बहनों के हाथ का खाना भी खूब खाया है। और हमारे नारनौल के सुरजा हलवाई और महेंद्रगढ़ की मिठाई शायद इसी के कारण ये हमारा राबिला डायबिटिक हो गया। लेकिन अब भी उतनी ही अच्छी बनती है ना सब कुछ। गर्मी के सीजन में एक गिलास राबड़ी, मोटी रोटी और एक प्याज सारी भूख मिटा देता था। जिद सिदा सादा खाना वो मेरा हरियाणा।

साथियों,

हरियाणा के घी-मक्खन का जोर तो आज पूरी दुनिया देख रही है। सारी भारत-विरोधी ताक़तें लगी रहतीं हैं। लेकिन, मोदी इनके झुकाए नहीं झुकता है। अभी मोदी को आपका कर्ज चुकाने के लिए बहुत काम करना है। हमारे हरियाणा को नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। और इसके लिए जरूरी है- फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार।

साथियों,

ये चुनाव देश का प्रधानमंत्री चुनने का चुनाव है। आप प्रधानमंत्री ही नहीं चुनेंगे, देश का भविष्य भी चुनेंगे। एक ओर आपका जांचा-परखा सेवक मोदी है। दूसरी ओर कौन है? कोई अता-पता ही नहीं है। और हरियाणा के लिए तो मोदी मतलब, शायद यहां हरियाणा में आपको कम से कम 5000 लोग ऐसे मिल जाएंगे जो दूर से चिल्ला के कहेंगे, ऐ मोदी जी जरा रुक जाओ। ऐसे कहने वाले 5000 लोग मिल जाएंगे यानि हरियाणा के साथ मेरा जो अपनापन रहा है, हरियाणा ने मुझे जो प्यार दिया है और इसलिए हरियाणा का अधिकार भी मुझ पर बनता है। चलते-फिरते मुझे कह सकता है ऐ मोदी जी गलत कर रहे हो, ऐसा मत करो। इतना मेरा आपसे नाता रहा है। और पिछले 10 साल में आपने उस प्यार में कभी कमी नहीं आने दी इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। और ये इंडी अलायंस वालों का हाल तो ऐसा है कि गाय ने दूध दिया नहीं, लेकिन घी खाने के लिए इंडी वालों में झगड़ा शुरू हो गया। अब ये लोग कह रहे हैं हर साल एक आदमी भारत का प्रधानमंत्री होगा। पांच साल 5 पीएम। आप मुझे बताइए, ऐसे देश चलेगा क्या? चलेगा क्या? और हमारे हरियाणा के लोगों में तो ग्रामीण भाषा में चौपाल में बैठ कर के जो ठहाके लेने की ताकत है ना। मुझे पक्का विश्वास है कि 5 साल में पांच प्रधानमंत्री, 5000 चुटकुले हरियाणा वाले बना देंगे। साथियों ये लोग देश को फिर से गड्ढे में धकेलेंगे नहीं तो क्या करेंगे?

साथियों,

इंडी गठबंधन के लोग ये घोर सांप्रदायिक हैं, घोर जातिवादी हैं, घोर परिवारवादी लोग हैं। (अरे वो ताऊजी को परेशान मत कर भाई थोड़ा इधर-उधर हो जा रे) देश की जनता इंडी जमात के इरादे पहले ही भांप चुकी है। इसलिए, इनका ये हाल हुआ है, पांच चरणों में ही इंडी जमात का ढोल फट गया है और आपने देखा होगा तीसरे चरण के बाद इन्होंने रोना-धोना शुरू कर दिया। इलेक्शन कमीशन आंकड़े क्यों नहीं देता है? आंकड़े देर से क्यों देता है? इलेक्शन कमीशन ऐसा क्यों करता है? इलेक्शन कमीशन वैसा क्यों करता है? उधर ईवीएम बंद हो गया, उधर ईवीएम चलता नहीं है, उधर ईवीएम का ये...यानि उन्होंने ग्राउंड बनाना शुरू कर दिया है कि पराजय का ठीकरा किसके सिर पर फोड़ा जाए और इसलिए बराबर जमकर के इस बार ईवीएम को गालियां दे रहे हैं। हम सब जानते हैं भाई जिस भूमि में कोई पैदावर ना हो, कोई किसान उसमें एक भी बीज डालेगा क्या? जिसमें फसल ना हो ऐसी जमीन पर या ऐसे सीजन में कोई किसान एक भी बीज डालेगा क्या? जब पता है कि इनकी सरकार नहीं बनने वाली तो कोई उधर वोट डालेगा क्या? कोई डालेगा क्या? ये हरियाणा वालों को कहने की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि उनको मालूम है भाई इनकी सरकार सात जन्म में भी बनने वाली नहीं है। और कांग्रेस को दिया हर वोट बेकार ही होना है। इसलिए आपको सरकार बनाने के लिए वोट करना है। और सरकार किसकी बनने जा रही है? किसकी सरकार बनेगी? बच्चे-बच्चे को पता है किसकी सरकार बनेगी?

साथियों,

चौबीस के इस चुनाव में पूरा देश कांग्रेस की सच्चाई जान गया है। कांग्रेस औऱ इंडी वालों के लिए देश से भी बड़ा उसका अपना वोटबैंक है। इन लोगों ने वोटबैंक के लिए देश का विभाजन करवाया। एक भारत और दो-दो मुस्लिम राष्ट्र बनाए। अब इंडी वाले लोग कह रहे हैं कि बचे हुए भारत पर भी पहला अधिकार मुसलमानों का है। इन्होंने SC, ST, OBC इनको जो बाबा साहेब आंबेडकर ने आरक्षण दिया है, भारत के संविधान ने जो आरक्षण दिया है। इसको छीनकर के वे वोट जिहाद करने वाले लोगों को देना चाहते हैं। आपने कल अखबारों में देखा होगा, टीवी पर देखा होगा, सोशल मीडिया में देखा होगा। बंगाल की हाई कोर्ट का जजमेंट आया है और बंगाल में भी इंडी जमात का SC, ST, OBC के आरक्षण के खिलाफ उनका जो षड्यंत्र है, आरक्षण विरोधी उनकी जो मानसिकता है उसका भंडा फूट गया है। बंगाल में इन लोगों ने क्या किया। बंगाल में इन लोगों ने मुसलमानों को रातों रात ओबीसी का सर्टिफिकेट दे दिया था। जो आरक्षण ओबीसी को मिलना चाहिए वह सारा का सारा मुसलमानों को और वह भी घुसपैठियों में बांटा जा रहा था। हाई कोर्ट ने बंगाल में पिछले 10- 12 साल में मुसलमानों को दिए सारे ओबीसी सर्टिफिकेट रदद कर दिए। अब आप देखिए, कोर्ट ना होती तो क्या होता। ये पिछड़े समाज के लोग करते क्या, ये मेरे दलित भाई बहन क्या करते, ये मेरे आदिवासी भाई बहन क्या करते। लेकिन साथियों आप ये इंडी जमात वालों की मानसिकता देखिए। बंगाल की सीएम ने घोषणा कर दी है कि वो हाई कोर्ट का फैसला नहीं मानेगी। वो मुसलमानों को ओबीसी का आरक्षण देकर रहेगी। आप मुझे बताइए, कांग्रेस हो टीएमसी हो इंडी गठबंधन के सारे दल तो अपने वोट बैंक के साथ डटकर खड़े हो गए हैं। फिर आपके साथ, हरियाणा के साथ कौन खड़ा होगा? कौन खड़ा होगा? इसलिए मैं हरियाणा के हर SC, हर ST, हर OBC को भरोसा देने आया हूं जब तक मोदी जिंदा है। कोई माई का लाल दलित का, आदिवासी का, पिछड़ों का आरक्षण छीन नहीं सकता है। वंचितों का जो अधिकार है, मोदी उसका चौकीदार है। और भाइयों-बहनों ये चुनावी भाषण नहीं है, ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए इंडी गठबंधन वाले कुछ भी कर सकते हैं। हमारे यहां हरियाणा में हर कोई दिन में दो सौ-चार सौ बार राम-राम बोलता है। हर दस कदम पे वो राम-राम बोलेगा ही। राम-राम के बिना हरियाणा में कोई काम होता है क्या? लेकिन, कांग्रेस का बस चले तो हरियाणा में राम का नाम लेने वालों को ये गिरफ्तार कर ले। कांग्रेस पूरे देश से ही राम को हटाना चाहती है। कांग्रेस जब तक सत्ता में रही, उसने राममंदिर नहीं बनने दिया। कांग्रेस ने राममंदिर प्राणप्रतिष्ठा तक का बहिष्कार कर दिया है। और अब तो शहजादे के सलाहकार ने तो एक और बड़ा खुलासा किया है। कांग्रेस अब अगर सत्ता में आई तो राममंदिर पर ताला लगाने की फिराक में है। कांग्रेस चाहती है कि हरियाणा के लोग रामलला के दर्शन तक नहीं कर पाएं। वो राम लला को फिर से टेंट में भेजना चाहते हैं। क्या हरियाणा के लोग ऐसा होने देंगे क्या? राम लला को फिर से अपमानित करेंगे क्या, क्या ऐसे लोगों को मेरा हरियाणा जवाब देगा कि नहीं देगा? हर बूथ में चुन-चुन कर उनको साफ करेगा कि नहीं करेगा?

साथियों,

कांग्रेस हमारी आस्था का ही नहीं, हमारे तिरंगे का भी अपमान करती है। 370 के नाम पर कश्मीर को देश से अलग किसने रखा? 70 साल तक कश्मीर में तिरंगा किसने नहीं फहरने दिया? आज ये लोग कह रहे हैं, ये सत्ता में आए तो फिर से 370 वापस लाएंगे। क्या हम कश्मीर में हुए बलिदानों को बेकार जाने देंगे? कांग्रेस के मंसूबों को क्या हरियाणा कामयाब होने देगा क्या?

साथियों,

कांग्रेस ने देश के पूर्व फौजियों के साथ भी धोखा किया। उन्हें दशकों तक पूर्व फौजियों को वन रैंक, वन पेंशन नहीं मिलने दी। कांग्रेस झूठ बोलती थी कि OROP के 500 करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को देंगे। अब ये चुनाव जीतने के लिए पूर्व सैनिकों के साथ धोखा किया गया और कांग्रेस के जेहन में सेना के प्रति, सैनिकों के प्रति नफरत का भाव भरा पड़ा है और 1962 में पंडित नेहरू की जो औरा का गुब्बारा जो फूट गया। चाइना के हाथों जो हमारी पिटाई हुई, वो उसके लिए गुनहगार हमारी देश की सेना को मानते हैं। और आज भी वो परिवार उसी मिजाज में हमारी सेना का अपमान करने के मौके ढूंढती रहती है। और उसी बदले की भाव से उसने 500 करोड़ रुपये ऐसे ही फेंक दिया और कह दिया कि OROP हो जाएगा। OROP होने का मतलब क्या होता है वह मोदी ने आकर के बताया। मोदी ने आकर के जब OROP लागू किया वन रैंक वन पेंशन लागू किया। उन्होंने 500 करोड़ रुपये का खेल खेला था। आपकी आंखों में धूल झोंकने का पाप किया था। मोदी ने जब एक्चुअली OROP लगाया, सवा लाख करोड़ रुपया लगा। कितना? अरे जरा बताइए ना, सवा लाख करोड़ रुपया। अब कोई मुझे बताए कहां 500 करोड़ और कहां सवा लाख करोड़। ये सवा लाख करोड़ रुपया पूर्व सैनिकों के परिवारों के बैंक के खाते में जमा हो चुका है। जब सैनिकों का मान रखने का जज्बा होता है तो काम भी उसी जज्बे से होता है।

साथियों,

हमारे हरियाणा को भी लूटने में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। मैंने तो अपनी आंखो से देखा है कांग्रेस के समय में क्या हाल था हरियाणा का। जो मुख्यमंत्री बनता था, वो अपने जिले के बाहर नहीं देखता था। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जिसे लूटने का खुला खेल न चलता हो! आपको याद है न, नौकरी दिलवाने के नाम पर ये लोग ज़मीनें बिकवा देते थे। ट्रान्सफर पोस्टिंग की तो खुली इंडस्ट्री चलती थी। सड़कें गड्ढों में होती थीं। उद्योगों पर संकट आने लगा था। आप कल्पना करिए, अगर कांग्रेस कुछ दिन और रह जाती, तो हरियाणा का क्या हाल करती!

साथियों,

बीते 10 वर्षों में हमने कांग्रेस के पाप धोने में बहुत मेहनत की है। आज हरियाणा में आधुनिक हाइवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। अब न दिल्ली दूर है, न चंडीगढ़ दूर है। अब नारनौल वाले सुबह चंडीगढ़ जाते हैं, शाम को वापस घर! गुरुग्राम वालों का तो जीवन ही द्वारका एक्सप्रेसवे ने आसान कर दिया। इसीलिए, अब इस पूरे एरिया में नए नए उद्योग लग रहे हैं। रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

भाइयों बहनों,

मैं गुरुग्राम के युवाओं से भी कहना चाहता हूं। अगले 5 साल, ये देश में एक बड़ी क्रांति का समय होने वाला है। आप देखिए कैसे नए-नए सेक्टर हमारे नौजवानों का भाग्य बदलने वाले हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर, ड्रोन सेक्टर, स्टार्टअप सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन एनर्जी सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन फार्मा हब अनगिनत और इन सब में बहुत से ज्यादा काम मेरे देश के नौजवानों को मिलने वाला है। आपके हर सपने पूरे होंगे, क्योंकि आपका सपना ये मोदी का संकल्प हैं।

साथियों,

कांग्रेस के विश्वासघात का भुक्तभोगी तो हरियाणा का किसान भी रहा है। यहां उसने किसान को सिंचाई के पानी तक का इंतजाम नहीं किया। हम नहरों को जोड़कर यहां तक पानी पहुंचा रहे हैं। हमारी सरकार हरियाणा में 14 फसलों को MSP पर खरीद रही है। हमारे भिवानी का किसान बाजरा, और यहां जो बाजरे की खेती है और हमारा यहां का किसान जो बाजरा पैदा करता है मेरे प्रिय बाजरे में से वो है। और मुझे याद है यहां जब भी आया बाजरे की खिचड़ी खाई और मजा है कि जब बाजरे की खिचड़ी खाओ तो आधी खिचड़ी आधा घी, तब बोले खिचड़ी खाने का मजा होता है। अब मैं गुजराती आदमी इतना खा तो नहीं सकता था, लेकिन उनका प्यार हरियाणा के लोगों का, यहां का बाजरा आज भी वो मुझे याद हमेशा रहता है। लेकिन अब आपके बाजरे के श्री अन्न के प्रचार की जिम्मेदारी खुद मोदी ने ले रखी है। मैंने जितने मिलेट हैं, जितना मोटा अनाज है उसके लिए एक नाम दे दिया श्री अन्न। और मैं दुनियाभर में उसका एंबेसडर बन गया हूं, उसका सेल्समैन बन गया हूं। आपने देखा होगा हमारे देश में जी 20 की समिट हुई। दुनियाभर के बड़े-बड़े नेता यहां आए थे। दुनिया की सबसे बड़ी ताकत जिसको कहें वो सब जी 20 में थी और मोदी ने उनको क्या खिलाया। मोदी ने उनको बाजरा खिलाया। और बड़े-बड़े नेताओं को मैंने कहा ये सुपर फूड है। और उसका एक परिणाम ये आया कि मुझे अभी अमेरिका बुलाया था वाइट हाउस में भोजन था। वाइट हाउस में उस दिन काफी लोगों को उन्होंने खाने पर बुलाया था देश भर के लोगों को और सबको उन्होंने बाजरा खिलाया वाइट हाउस में अमेरिका में। साथियों इससे क्या मोदी का प्रचार हुआ क्या। इससे प्रचार हुआ हरियाणा का, हरियाणा के किसानों का, हरियाणा के बाजरे का।

साथियों,

इस क्षेत्र के विकास के लिए हमने चौधरी बंसीलाल के साथ मिलकर सरकार चलाई थी। चौधरी बंसीलाल भिवानी-महेंद्रगढ़ के विकास के लिए कटिबद्ध थे। और मुझे बड़ा मेरा सौभाग्य रहा चौधरी बंसीलाल जी से मेरी बड़ी निकटता रही और वो रात को देर तक जागने के आदी थे। तो कभी-कभी हमारी मीटिंग रात को एक बजे के बाद शुरू होती थी और कभी-कभी सुबह तक चलती थी। उनके पास अनुभव की इतनी बातें हुआ करती थी और मैं देखता था कि जब भी बातों में स्वामी दयानंद सरस्वती जी की बात आती थी, ऐसी एक मीटिंग नहीं होगी कि स्वामी दयानंद सरस्वती की बात निकली हो और चौधरी बंसीलाल जी की आंख से आंसू ना टपके हों और वह मुझे इतना प्यार करते थे क्योंकि मैं गुजरात का था, दयानंद सरस्वती जी का जन्म गुजरात में हुआ था, तो एक नाता ऐसा बन गया था और गवर्नेंस की दुनिया में भी साथ-साथ काम किया, वर्षों तक साथ में काम किया।

साथियों,

लेकिन यह जो महापुरुष है उन सबसे प्रेरणा लेते हुए आज मेरी भी गारंटी है कि हरियाणा का विकास हम रुकने नहीं देंगे। लेकिन इसके लिए 25 मई को भिवानी महेंद्रगढ़ से चौधरी धरमबीर सिंह जी, और गुरुग्राम से राव इंदरजीत सिंह जी मेरे इन दोनों साथियों को भारी बहुमत से विजयी बनाइए और आप जब उनको कमल के निशान पर वोट देंगे ना वो वोट सीधा सधा मोदी के खाते में जाएगा। तो आप पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ेंगे? मतदान ज्यादा से ज्यादा कराएंगे? हर पोलिंग बूथ में विजय प्राप्त करेंगे? अच्छा मेरा एक काम है करेंगे आप लोग। अरे क्या कमाल है भाई, ठंडे हो गए एकदम। मेरा पर्सनल काम है करेंगे। अरे मैं भी तो हरियाणा वाला हूं यार बोलो ना मेरा एक काम करेंगे। देखिए पहले तो मैं यहां गांव गांव जाता था हर इलाके में गया हूं हजारों परिवारों में गया हूं लेकिन अब समय की कठिनाई है जा नहीं पाता हूं। तो मुझे आपकी मदद चाहिए, करोगे मदद सब लोग करोगे। ऐसे ही नहीं बता रहे हो ना सही में करोगे ना। एक काम करना यहां से जाने के बाद ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाना, ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना और हर परिवार के लोगों को बिठा कर के कहना कि अपने मोदी जी आए थे, मोदी जी ने आपको राम राम कहा है। मेरा राम राम पहुंचा दो मुझे तसल्ली हो जाएगी। मुझे लगेगा कि चलो भाई इन सबके मुझे आशीर्वाद मिल जाएंगे। तो आप करेंगे, मेरा राम राम पहुंचाएंगे हर परिवार में, हर घर में पहुंचाएंगे।

बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

बहुत-बहुत धन्यवाद