प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रामचरितमानस के डिजिटल संस्करण को जारी किया
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को एकजुट करने और भारत में जागरूकता और सूचनाओं के प्रसार में ऑल इंडिया रेडियो की भूमिका की सराहना की
रामचरितमानस एक महान महाकाव्य है जिसमें भारत का सार निहित है: प्रधानमंत्री मोदी
रामचरितमानस के डिजिटल संस्करण से दुनिया भर में लोगों को मदद मिलेगी: प्रधानमंत्री मोदी

ये कार्यक्रम जहां हो रहा है, उस स्‍थान का नाम है पंचवटी और जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तब इस निवास स्‍थान में पंचवटी का निर्माण हुआ और नाम पंचवटी रखा गया था और शायद मैं मानता हूं आज का अवसर पंचवटी में होना अपने आप उसके कारण उसका एक कीर्तिमान बढ़ जाता है, क्‍योंकि रामचरितमानस की बात हो और पंचवटी न हो, तो फिर वो रामचरितमानस अधूरा लगता है और इसलिए ये अपने आप में एक सुफल संयोग है।

आज के इस अवसर को मैं अलग-अलग रूप में अनुभव करता हूं। कभी-कभी सरकार में लोग नौकरी करते-करते जीवन ऐसा बन जाता है, एक मशीनी गतिविधि बन जाती है और वही सुबह जाना, शाम को आना, वही फाइलें, वही बॉस, वहीं assistant, एक जिंदगी के बड़े महत्‍वपूर्ण 30-35 साल उसी में गुजर जाते है और ज्‍यादातर का मन बन जाता है कि चलो अब इस पाइपलाइन में घुसे है 30-35 साल के बाद उधर निकलेंगे। जिस रूप में निकलेंगे, निकलेंगे.. लेकिन यह अवसर देख करके ध्‍यान में आता है कि एक सरकार का मुलाजिम, जिसमें एक तड़प हो, कुछ करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, वो कितनी बड़ी विरासत छोड़ करके जाता है और इसलिए सबसे पहले मैं आकाशवाणी के उस एक सामान्‍य अधिकारी जिनके परिवारजन.. ये औरों के लिए भी प्रेरक बन सकता है। हमारी जिंदगी व्‍यर्थ नहीं जा रही है। हम जो फाइलों पर साइन करते है वो बेकार नहीं होती, कभी न कभी इतिहास को वो नया मोड़ देते है। ये आज की घटना उस बात का जीता-जागता सबूत है।

दूसरी बात, करीब-करीब 20-22 साल तक लगातार इसका रिकार्डिंग हुआ है। 22 साल तक उस team को बनाए रखना, उस rhythm को बनाए रखना और उसे उतना ही प्राणवान बनाए रखना, वरना तो यार बहुत हो गया अब कितने ऐपिसोड हो गए, अब तो लोगों को आदत हो गई, चलो निकाल दो। नहीं। इससे जुड़े हुए कलाकार शायद आज हिन्‍दुस्‍तान के बड़े कलाकारों की संख्‍या में उनका नाम नहीं होगा, लेकिन संगीत के साधक के रूप में। 22 साल करीब-करीब ये साधना कम नहीं होती जी, 14 लोगों ने team बन करके काम किया, 7 लोग हमारे बीच नहीं रहे, सबको आज सम्‍मानित करने का आज अवसर मिला और ये सिर्फ संगीत नहीं है। ये संगीत की भी साधना है, संस्‍कृति की भी साधना है और संस्‍कार की भी साधना है। और ये काम, देखिए हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव है, वैचारिक धरातल पर भी उतार-चढ़ाव आए हैं। आज अगर कोई ओम बोल दे तो हफ्तेभर विवाद चलता है कि ओम कैसे बोला जा सकता है। देश :::: सांम्‍प्रदायिक है। ऐसे देश में रामचरितमानस को किसी ने question नहीं किया, वो आज भी चल रहा है। हो सकता है आज के बाद किसी का ध्‍यान जाए और तूफान खड़ा कर दे, तो मैं नहीं जानता हूं। लेकिन कभी-कभार हम देखते है कि बहुत सालों से सुनते आए है, क्‍या बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी। जवाब खोजने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यही बात है कि जिसके कारण हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी, यही तो रामचरितमानस है, यही तो परम्‍परा है, यही संस्‍कार है।

हजारों साल से दुनिया में हमारी जो सबसे बड़ी विशेषता है जिसके लिए विश्‍व के किसी भी समाज को हमारे प्रति ईर्ष्‍या हो सकती है, वो है हमारी परिवार व्‍यवस्‍था और हम बचे हैं बने है उसका एक कारण.. जब तक हमारी परिवार व्‍यवस्‍था प्राणवान रही है, हम ताकतवर रहे है और उस परिवार व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई है तो रामचरितमानस और राम जी का परिवार जीवन है। मर्यादा पुरूषोत्‍तम राम.. मर्यादाओं में किसने कैसे जीना परिवार में। किसकी कैसे मर्यादा को पालन करना, कैसा व्‍यवहार करना, आचरण का उत्‍तम संस्‍कार का हमें दर्शन होता है। रामचरितमानस की क्‍या ताकत देखिए हजारों साल हो गए, पीढि़यां बीत गई लेकिन वहीं भाव, वही परम्‍परा, वही संस्‍कार, वही संदेश आज भी जीवित है। आज एक बात हम कहें, लिखित कहें लेकिन संदेश पहुंचते-पहुंचते सात दिन में उसका अर्थ अलग ही हो जाता है। ऐसा कौन सा सामर्थ्‍य होगा कि जिसमें आज भी अनेक व्‍याख्‍याएं होने के बाद भी मूल तत्‍व को कहीं पर भी खरोच नहीं आई है। ऐसी कृति मानव को इस धरती के साथ जोड़ने का इतना बड़ा काम है।

आज भी अगर हम मॉरिशस में जाए दुनिया के कई देशों में, जो लोग गुलामी के कालखंड में मजदूर के रूप में उनको उठा करके ले जाया गया, कुछ नहीं था, निर्धन थे। लेकिन तुलसीकृत रामायण साथ ले जाना नहीं भूले, हनुमान चालीसा ले जाना नहीं भूले और डेढ़ सौ साल अलग जीवन, भाषा भूल गए, पहनावा बदल गया, नाम में बदलाव आया, लेकिन एक अमानत उनके पास बची जिससे आज भी भारत के साथ उनका नाता जुड़ा रहा है और कैसे जुड़ता है मुझे बहुत साल पहले की घटना याद है। वेंस्‍टइंडिज की एक क्रिकेट टीम भारत में खेलने के लिए आई थी। बहुत साल पहले की बात कर रहा हूं और उसके मैनेजर का मेरे यहा फोन आया। अब आज से 30-35, 40 साल पहले मुझे कोई पहचानता नहीं था, न कोई नाम न कोई जान। उनका टेलीफोन आया मुझे आश्‍चर्य हुआ, कि बोले वेंस्‍टइंडिज के क्रिकेटर के मैनेजर आप से बात करना चाहते है, मिलना चाहते है। तो किसी ने नाम दिया होगा, कही परिचय निकला होगा। मैंने कहा वेंस्‍टइंडिज टीम से मेरा तो वैसे भी क्रिकेट के खेल से.. मैं कोई खिलाड़ी तो हूं नहीं, तो पता चला तो बोले रामरिखीनाम है इनका और वो अपनी पत्‍नी के साथ आए है। मूल भारतीय है, तो मैं उनको मिलने गया तो वहां एचआरडी मिनिस्‍ट्री में काम करते थे और टीम मैनेजर के रूप में आए थे। तो मैंने कहा ये ऋषि शब्‍द कहा से आया तो बोले ऋषि में से आया हुआ होगा, फिर उनकी पत्‍नी का नाम पूछा तो बोले सीता। वो भारत पहली बार आए थे। लेकिन उनको अपना और मैं जब गया तो specially वो भारतीय परिवेश पहन करके बैठे थे। यानी एक प्रकार से एक ग्रंथ डेढ़ सौ साल के बाद भी अपनेपन से जोड़ करके रखता है] इसका ये उत्‍तम अनुभव.. और इस अर्थ में रामचरितमानस आज digital form में ये सबके सामने जा रहा है।

आकाशवाणी की ताकत बहुत बड़ी है, कितनी ही चीजें क्‍यों न बदल जाए, लेकिन कुछ मूलभूत चीजें होती है, जो अपनी.. बुलंदी कभी खोती नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में आकाशवाणी की ये बहुत बड़ी ताकत है। लोगों को भले एहसास न होता, हो मुझे तो एहसास है। हम लोग भली-भांति समझते है आकाशवाणी की ताकत क्‍या है। ये मेरा एक ऐसा अनुभव है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। और मैं हिमाचल में काम करता था, तो एक दिन मैं अपने दौरे पर जा रहा था तो ऐसे ही पहाड़ों में एक ढाबे पर रूक करके चाय पीने की सोचा, तो गाड़ी को रोकी। जब मैं नीचे उतरा तो जो ढाबे वाला था, चाय वाला उसने मुझे लड्डू खिलाया। मैंने कहा भई मुझे चाय पीनी है। अरे बोले साहब लड्डू खाओ पहले, मौज करो। मैंने कहा क्‍या बात है। बोले अरे आज अटल जी ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा अटल जी ने बम फोड़ दिया। अरे बोले अभी-अभी रोडियो पर सुना है कि भारत ने बम फोड़ा है। न्‍यू‍क्लियर टेस्‍ट हुआ था। मुझे वो पहली खबर आकाशवाणी के माध्‍यम से एक चाय वाले, ढाबे वाले ने दी।

यानी हम जिन चीजों का कभी-कभी महत्‍व नहीं समझते, वो कितना बड़ा होता है ओर सिर्फ खबर नहीं, सिर्फ खबर नहीं। हिमायल की पहाडि़यों में दूर-सुदूर अकेला चाय के ढाबे वाला, इस समाचार से अपने आपको इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गरीब होने के बावजूद भी अपनी दुकान की मिठाई मुफ्त में बांट रहा है। संदेश की ताकत क्या है, देखिए और समय ज्‍यादा नहीं हुआ होगा, ये 5 बजे declare हुआ होगा शाम को और मैं करीब 6 सवा 6 बजे वहां से गुजर रहा हूं। कहने का तात्‍पर्य ये कि हमारे ये communication अपने आप में इतने बड़े देश में बहुत अनिवार्य है, बहुत आवश्‍यक है और आज के competition के युग में आकाशवाणी को स्‍पर्धा में फंसने की जरूरत नहीं है जी। उसने तो अपनी मूलभूत धाराओं को पकड़ करके जन-जन के दिलों तक जुड़े रहना ओर देश को जोड़ के रखना और भविष्‍य के साथ उनको उत्‍साहित करते रहना ये उसका काम है। और उस काम को हम कैसे निभाएं।

युग बदलता जाए वैसे बदलाव आवश्‍यक होता है कायाकल्प जरूरी होते है ओर जब कायाकल्प की बात करता हूं तब आत्‍मा वही रहता है, समयाकूल बदलाव आता है। ये डिजिटल रूप उसका एक सही कदम है। हम लोग, अब मुझे बताया गया आकाशवाणी के पास 9 लाख घंटों का recording material उपलब्‍ध है, 9 लाख घंटे। शायद दुनिया में किसी एक ईकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जी और उस समय आकाशवाणी का जो रूप-रंग था बाद में जो हमारे यहां जो चला माहौल, अलग बात है, मैं जरूर मानता हूं कि आ‍काशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल undiluted ये उसमें उपलब्ध होगा। ये 9 लाख घंटों का जब digital version तैयार होगा फिर उसमें भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं कितनी बड़ी सेवा होगी, कितना बड़ा खजाना ओर एक प्रकार से digital history का ये सबसे बड़ा resource material बन सकता है। जो शायद आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होगे उनके लिए एक बहुत अवसर बनेगा। और भारत का दूरदर्शन का काम तो ऐसा है कि हिन्‍दुस्तान की सभी यूनिवर्सिटी में एकाध-एकाध विद्यार्थी ने सिर्फ आकाशवाणी के योगदान पर पीएचडी करनी चाहिए, रिसर्च करनी चाहिए। हम लोगों के स्‍वभाव नहीं है। एक एकाध प्रेमचंद की कथा पर तो रिसर्च कर लेते है, लेकिन इतना बड़ा खजाना। आगे चल करके Human Resource Department के लोग, Culture Department के लोग सोचें कि हमारे नौजवान इस खजाने का research करके क्‍या दे सकते है दुनिया को। हम आगे के लिए क्‍या सोचे। विश्‍व के लोग भी अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया भारत को जानने-समझने के लिए आतुर है, तैयार है। वे अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने ये message दिया है कि भारत के पास कुछ है जो हमें जानना है, पाना है ये मूढ़ बना है तब हमारा कर्तव्‍य बनता है कि हम इसको कैसे पहुंचाए और ये अगर हम कर सकते है तो हम कितनी बढ़ी सेवा कर सकते है।

इनदिनों आकाशवाणी एक अच्‍छा काम भी किया है.. आकाशवाणी नहीं, रेडियों के कारण धीरे-धीरे जो आज एफएम चैनल वगैरह सब जो दुनिया चलती है। लोग कहते है भ्रष्‍टाचार के लिए क्‍या किया? हमारे यहां FM चैनल सारी पहले सरकारी खजाने में 80 सौ करोड़ रुपया देती थी। अभी आक्‍शन चल रहा है, आक्‍शन से देंगे ट्रांसपैरेंसी, परिणाम क्‍या आया मालूम है अब तक करीब-करीब साढ़े 11 सौ करोड़ की बोली बोल चुके है, अभी तो बोली चल रही है और उसके जो rules and regulations है उसके हिसाब से सरकार के खजाने में जो 80 सौ करोड़ आते थे एक स्थिति आएंगी 27 सौ-28 सौ करोड़ रुपए आएगे। व्‍यवस्‍थाओं को transparent करने से व्‍यवस्‍थाओं को आधुनिक टेक्‍नोलोजी से जोड़ करके भ्रष्‍टाचार से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है। कोई नया आर्थिक बोझ डाले बिना भी देश के विकास में धन कैसे उपलब्‍ध किया जो सकता है इसका एक बेहतरीन नमूना.. ये आकाशवाणी और रेडियो के संबंध में जो भारत सरकार ने अरुण जी के नेतृत्‍व में किया है, उसका ये परिणाम है।

तो हर दिशा में हम इस काम को आगे बढ़ा रहे है और मुझे आशा है कि ये digital version के कारण विश्‍व के लोग जो जानना चाहते है, समझना चाहते है उनके लिए उपकारक होगा। भोपाल केंद्र के लोगों ने गौरवपूर्ण काम किया है; आने वाले दिनों में भोपाल में एक विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन हो रहा है। आकाशवाणी सोचे विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में जो delegate आने वाले है भोपाल में ही हो रहा है तो ये उनको गिफ्ट के रूप में दिया जाए, ताकि एक souvenir..एक सच्चा souvenir ये बनेगा, जो विश्‍वभर से गरीब, काफी बड़ी तादात में लोग आ रहे है तो एक बहुत बड़ा अवसर बनेगा।

मैं फिर एक बार विभाग को, प्रसार भारती को, आकाशवाणी को ये बहुमूल्य चीजें संभाले रखने के लिए बधाई देता हूं। और देशवासियों को ये नजराना देते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं। मैं आभारी हूं डॉ. कर्ण सिंह जी का और मैंने देखा है कि हमारे कर्ण सिंह जी इन चीजों से ऐसे जुड़े हुए है, इसका इतना महामूल्‍य मानते है वो, कि उनको कोई राजकीय विचारधारा कभी बाधा नहीं बनती है और हमेशा ऐसी चीजों को वो आर्शीवाद देते रहें, प्रोत्‍साहन देते रहें। आज विशेषरूप आए इसलिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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भाजपा ही ओडिशा को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी: कटक में पीएम मोदी
May 20, 2024
बीजेडी के भ्रष्टाचार के सबसे बड़े भुक्तभोगी, पलायन के लिए विवश ओडिशा के नौजवान हैं: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी
ओडिशा के साथ चल रही लूट को आपका एक वोट बंद करेगा: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी
ओडिशा को अब बीजेडी की स्लो रफ्तार सरकार पीछे छोड़कर, डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चुननी है: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय श्रीराम !

जय श्रीराम !

एठी उपस्थित समस्त मान्यगण व्यक्तिनंकू मोर नमस्कार! देवी मां चामुंडा, चंडी मंदिर, डमडमणी पीठ, मां भट्टारिका, प्रभु नीलमाधव की धरती पर आप जनता-जनार्दन के दर्शन करके मेरा जीवन धन्य हो गया। यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं, हमारे नौजवान जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं, वो तो उमंग से भरे हुए नजर आ रहे हैं। आपका उत्साह-आपका जोश ये दिखा रहा है कि 25 साल बाद ओडिशा नया इतिहास रचने जा रहा है। ओडिशा में 10 जून को भाजपा का पहला सीएम शपथ लेगा, ये तय है। और आपके आशीर्वाद से तीसरी बार मोदी सरकार दिल्ली में शपथ लेगी, ये भी तय है।

भाइयों और बहनों,

कटक, देश के सबसे पुराने शहरों में से एक है। यहां इतिहास भी है, विरासत भी है। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास, उत्कल केसरी हरेकृष्ण महताब ऐसे अनेक महानुभावों की प्रेरणा है। ये आधुनिक शिक्षा की नगरी है। ये विकसित भारत का सामर्थ्य बढ़ाने वाली धरती है।

साथियों,

जिस कटक का जिस ओडिशा का इतना बड़ा महत्व है उसे क्या कोई ऐसा व्यक्ति संभाल सकता है जिसको ओडिशा की संस्कृति की समझ न हो? जिसको यहां की मिट्टी की संवेदना की समझ न हो? BJD को आपने इस शताब्दी के 24-25 साल देकर देखे हैं और आपने देखा है कि परिणाम क्या निकला। अब अगले 25 वर्ष ओडिशा के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। (यहां बहुत सारे लोग अपने कुछ न कुछ चित्र पेंटिंग लेकर के आए हैं। जरा एसपीजी के लोग सारा कलेक्ट कर लीजिए, जो नौजवान और बच्चे कुछ लाए हैं पीछे अपना नाम पता लिख दें। मैं जरूर आपको चिट्ठी भेजूंगा। ये सुभाष बाबू बन के आया है नौजवान। बोलिए भारत माता की, भारत माता की। जिसको जो देना है अभी दे दो बाद में मुझे कोई रह जाए ऐसा ना हो जय श्री राम, जय श्री राम।) ओडिशा को अब BJD की Slow रफ्तार सरकार पीछे छोड़कर डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चुननी है। और मेरा आपसे आग्रह है अभी मीडिया वालों ने, कुछ लोगों ने शुरू कर दिया है कि यहां हंग असेंबली बनेगी, हंग असेंबली बनेगी। यह सरासर गपबाजी है, यहां भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने वाली है। और भाजपा ही अगले 25 वर्ष में उड़ीसा को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।

साथियों,

ओडिशा, BJD के भ्रष्टाचारी रैकेट से यहां के लोग तंग आ गए हैं। जो BJD, चिटफंड जैसे फर्ज़ीवाड़े से गरीब लोगों को धोखा देती है, BJD ने ओडिशा को क्या दिया? अगर BJD ने ओडिशा को दिया है तो Land mafia दिया है, sand mafia दिया है, coal mafia दिया है, mining mafia दिया है। BJD के विधायक और मंत्री 24X7 इसी में लगे हुए हैं। ऐसे में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास संभव है क्या? संभव है क्या? यहां इन्वेस्टमेंट आ सकता है क्या? यहां रोज़गार बन सकता है क्या? मैं तो हैरान हूं, मेरे यहां गुजरात में शायद उड़ीसा का कोई ऐसा ब्लॉक नहीं होगा, वहां के लोग गुजरात में आकर के रोजी रोटी ना कमाते हों। जो प्रदेश इतना समृद्ध है उस प्रदेश को ऐसे बर्बाद करने वाले लोगों को यह चुनाव तो सजा करने के लिए चुनाव है उन लोगों को।

भाइयों और बहनों,

BJD सरकार कैसे काम करती है, इसका कच्चा-चिट्ठा अब जनता के सामने आ रहा है। जबसे मोदी सरकार बनी है, तबसे ओडिशा के विकास के लिए मैंने रिकॉर्ड पैसा दिल्ली से यहां भेजा है, पहले टैक्स का जितना पैसा केंद्र सरकार से ओडिशा को आता था, मोदी ने उससे 3 गुना ज्यादा पैसा ओडिशा को दिया है। कांग्रेस की सरकार के दौरान जब पुरानी खनन नीति थी तब ओडिशा को करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए मिलते थे। मोदी ने नई खनन नीति बनाई। आज ओडिशा को खनन से ही लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए की आय हो रही है। अब आप सोचिए कांग्रेस के जमाने में 5000 करोड़, मोदी के जमाने में 50 हजार करोड़ रुपया यहां मिलता है इसके अतिरिक्त डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन के तहत भी ओडिशा को 26 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। यानि मोदी सरकार यहां पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा भेज रही है। लेकिन ओडिशा में BJD की भ्रष्ट सरकार इस पैसा का गोलमाल कर रही है। मैं ओडिशा के करीब-करीब हर जिले में जा चुका हूं। यहां सड़क, बिजली, पानी, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल हर चीज़ का अभाव है। तो ये पैसा किसकी जेब में गया? यहां कटक में ही देखिए, जलभराव का कितना बड़ा संकट हर साल रहता है? मैं यहां हाईवे के, रेलवे के इतने सारे प्रोजेक्ट्स भेजता हूं। लेकिन BJD के नेताओं को जब तक कट-कमीशन नहीं मिलता तब तक वो हर प्रोजेक्ट को लटकाए रखते हैं। BJD नेता, अपने करीबी ठेकेदारों को ही ठेके दिलवाकर, आपको हर तरफ से लूट रहे हैं। आप मुझे बताइए, ओडिशा के साथ ये लूट बंद होनी चाहिए या नहीं? ऐसा नहीं दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बताइए ये लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट कौन बंद करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? मोदी मोदी को मत करो, यह आपका एक वोट है ना वो ये लूट बंद करेगा। आपके वोट की ताकत है जो उड़ीसा का भाग्य बदल सकती है।

भाइयों और बहनों,

BJD के इस भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा नुकसान आप नौजवानों को ही हो रहा है। यहां से नौजवानों को पलायन करना पड़ता है। BJD सरकार यहां निवेश के लिए उचित माहौल नहीं बना पाई। एक माफिया है जो हर सेक्टर पर कब्ज़ा करके बैठा हुआ है, वो यहां कंपटीशन आने ही नहीं देता। 10 जून को हमारी सरकार आने दीजिए, भाजपा सरकार इस माफिया की कमर तोड़ने वाली है।

साथियों,

मोदी सरकार शिक्षा-कौशल विकास और आत्मनिर्भर भारत पर बल दे रही है। 10 साल में ओडिशा को IIM, आईजर ब्रह्मपुर… इंस्‍टीट्यूट ऑफ कैमिकल टैक्नॉलॉजी भुवनेश्वर, ऐसे अनेक संस्थान मिले। टेक्नॉलॉजी और टेक्सटाइल से लेकर इथेनॉल तक हर सेक्टर में मोदी सरकार ने बड़े लक्ष्य रखे हैं। इससे कटक में भी उद्योगों की संभावनाएं बढ़ेंगी। और अभी हमारे मित्र महताब जी मुझे बता रहे थे यहां पहले इतने उद्योग थे, एक के बाद एक सबको ताले लग गए। यहां का आर्थिक जीवन तबाह हो गया और इससे यहां के नौजवानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। और इसलिए साथियों, हमें यहां निवेश चाहिए, हमें उद्योग चाहिए, हमें पुराने उद्योगों का पुनर्जीवन चाहिए। साथियों और वह जब होगा और मैं आपको दिलाता हूं विश्वास, ये भाजपा में ताकत है वह कर सकती है। मैं उड़िया वासियों को वादा करता हूं, मेरे पास लंबे समय तक एक राज्य को चलाने का अनुभव है। भले मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री रहूंगा लेकिन उड़ीसा में जो बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा, उड़ीसा में जो बीजेपी की सरकार बनेगी उसको कभी भी कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा।

साथियों,

BJD सरकार को कटक के लोगों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है। कटक चारों तरफ नदियों से घिरा है। लेकिन यहां पीने के पानी की समस्या है। मोदी नल से जल देना चाहता है लेकिन ये रोड़े अटकाते हैं। मोदी ने देश के गांव और शहरों में गरीबों के 4 करोड़ पक्के घर बनाए हैं। आने वाले सालों में 3 करोड़ और नए घर बनाने की गारंटी दी है। ओडिशा में भी करीब 30 लाख गरीबों के घर बने हैं। लेकिन BJD आपके लिए नए घर बनाने में लगातार अड़चनें पैदा कर रही है। गरीब को पक्का घर मिलने से रोके, ऐसा काम आपका दुश्मन ही कर सकता है।

भाइयों और बहनों,

आप यहां डबल इंजन की भाजपा सरकार बनाइए तो आपका बिजली का बिल भी ज़ीरो होगा और बिजली से कमाई भी होगी। ये कमाल मोदी सरकार की, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से होगा। और उसकी रजिस्ट्री चल रही है आप अभी भी रजिस्ट्री करवा सकते हैं ऑनलाइन जाकर के। घर की छत पर सोलर पैनल के लिए मोदी सरकार आपको 75 हजार रुपये से ज्यादा देगी हर घर के ऊपर। और अतिरिक्त बिजली भाजपा सरकार यहां जो बनेगी वह आपसे खरीदेगी। अब मुझे बताइए आपको डबल मुनाफा हुआ कि नहीं हुआ। डबल फायदा हुआ कि नहीं हुआ। पैसे की बचत हुई कि नहीं हुई। वह पैसे आपके बच्चों के काम आएंगे कि नहीं आएंगे?

साथियों,

ओडिशा भाजपा ने माताओं-बहनों के लिए जो गारंटियां दी हैं, आज उनकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। सुभद्रा योजना से माताओं-बहनों को बहुत मदद मिलेगी। आप कल्पना कीजिए, 10 साल पहले तक माताओं-बहनों के बैंक खाते तक नहीं थे। अब ऐसी-ऐसी शानदार योजनाएं भाजपा माताओं-बहनों के नाम पर ला रही हैं। मोदी की एक और गारंटी, देश की 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का मेरा संकल्प है। तीन करोड़ लखपति दीदी बनेगी, आप कल्पना कर सकते हैं हमारी इकोनॉमी कितनी तेज चलेगी। लखपति दीदियों ने हर साल एक लाख रुपये से ज्यादा की आय और वो भी स्वाभिमान के साथ। आशा और आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों के लिए भी ओडिशा भाजपा ने बहुत बड़ी घोषणा की है। आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों को 12 हज़ार रुपए तक की सैलरी मिलेगी, ये ओडिशा भाजपा ने कहा है। इसके साथ-साथ जब यहां आयुष्मान योजना लागू होगी तो कटक के किसी भी परिवार को अपने बुजुर्गों के इलाज के लिए कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी। ये दिल्ली में जो बेटा बैठा है न वो करेगा। बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की गारंटी, ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

विकास और विरासत, ये भाजपा का एजेंडा है। आपने देखा कि दिल्ली में जो जी-20 का शिखर सम्मेलन हुआ, उसमें दुनियाभर के दिग्गज नेता आए थे और सबको मोदी ने कोणार्क के चक्र के सामने खड़ा किया। कोणार्क के चक्र के सामने फोटो निकाली और उनके घरों में आज कोणार्क का सूर्य चक्र पहुंच गया। इससे पूरी दुनिया में कोणार्क का गौरव बढ़ा है। लेकिन BJD सरकार को ओडिशा की धरोहर की कोई चिंता नहीं है। जगन्नाथ जी के श्री रत्न भंडार को लेकर जो कुछ हो रहा है, उससे पूरा ओडिशा बहुत गुस्से में है। अब लोग कहते हैं कि श्री रत्न भंडार की चाबी तमिलनाडु चली गई है। अभी किसने भेजी है भाई तलमलनाडु। ये तमिलनाडु कौन ले गया है। ऐसे लोगों को माफ करोगे क्या? जिस तरह श्री रत्न भंडार की चाबी खो गई और फिर जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया और इस मामले पर बहुत बड़े गंभीर सवाल उठते हैं। लेकिन मैं उड़ीसा के मेरे भाई बहनों को कहना चाहता हूं, साथियों ये मोदी है मैं सोमनाथ की धरती से आया हूं। जगन्नाथ की धरती की पूजा कर रहा हूं और मेरे लिए जितने भगवान सोमनाथ दादा के आशीर्वाद है इतने ही महाप्रभु जगन्नाथ जी के आशीर्वाद है। मुझ पर सोमनाथ दादा का भी कर्ज है मुझ पर महाप्रभु जगन्नाथ जी का भी कर्ज है। और इसलिए मैं उड़ीसा के एक-एक नागरिक को गारंटी देता हूं आप आश्वस्त रहिए यहां भाजपा सरकार बनते ही यह चाबी का राज खोला जाएगा। जांच रिपोर्ट आपके सामने आएगी और अगर किसी ने गड़बड़ की है तो मोदी किसी को छोड़ता नहीं है।

भाइयों और बहनों,

ये चुनाव ओडिशा के विकास और ओडिया गौरव को बचाने का है। इसलिए, ये जितने भी हमारे साथी MLA का चुनाव लड़ रहे हैं। उन सबको चुन करके हमें ओडिशा की सरकार, बीजेपी की सरकार बनानी है। सारे एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। यह चुनाव देश को एक मजबूत सरकार देने का भी है इसलिए कटक से मित्र भर्तृहरि महताब जी को इस बार बहुत बड़ी लीड से दिल्ली भेजना है और इनको मिला हर वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में आएगा। तो ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे, हर पोलिंग बूथ जीतेंगे।

बोलिए भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत-बहुत धन्यवाद