PM’s address on the release of the digital version of Ramcharitmanas

Published By : Admin | August 31, 2015 | 17:18 IST
PM Narendra Modi launches digitised version of the Ramcharitmanas in New Delhi
Prime Minister Modi appreciates All India Radio's role in uniting the people and spreading awareness and information in India
Ramcharitmanas is a great epic. It contains the essence of India: PM Narendra Modi
The digital version of Ramcharitmanas will help people across the world: PM Modi

ये कार्यक्रम जहां हो रहा है, उस स्‍थान का नाम है पंचवटी और जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तब इस निवास स्‍थान में पंचवटी का निर्माण हुआ और नाम पंचवटी रखा गया था और शायद मैं मानता हूं आज का अवसर पंचवटी में होना अपने आप उसके कारण उसका एक कीर्तिमान बढ़ जाता है, क्‍योंकि रामचरितमानस की बात हो और पंचवटी न हो, तो फिर वो रामचरितमानस अधूरा लगता है और इसलिए ये अपने आप में एक सुफल संयोग है।

आज के इस अवसर को मैं अलग-अलग रूप में अनुभव करता हूं। कभी-कभी सरकार में लोग नौकरी करते-करते जीवन ऐसा बन जाता है, एक मशीनी गतिविधि बन जाती है और वही सुबह जाना, शाम को आना, वही फाइलें, वही बॉस, वहीं assistant, एक जिंदगी के बड़े महत्‍वपूर्ण 30-35 साल उसी में गुजर जाते है और ज्‍यादातर का मन बन जाता है कि चलो अब इस पाइपलाइन में घुसे है 30-35 साल के बाद उधर निकलेंगे। जिस रूप में निकलेंगे, निकलेंगे.. लेकिन यह अवसर देख करके ध्‍यान में आता है कि एक सरकार का मुलाजिम, जिसमें एक तड़प हो, कुछ करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, वो कितनी बड़ी विरासत छोड़ करके जाता है और इसलिए सबसे पहले मैं आकाशवाणी के उस एक सामान्‍य अधिकारी जिनके परिवारजन.. ये औरों के लिए भी प्रेरक बन सकता है। हमारी जिंदगी व्‍यर्थ नहीं जा रही है। हम जो फाइलों पर साइन करते है वो बेकार नहीं होती, कभी न कभी इतिहास को वो नया मोड़ देते है। ये आज की घटना उस बात का जीता-जागता सबूत है।

दूसरी बात, करीब-करीब 20-22 साल तक लगातार इसका रिकार्डिंग हुआ है। 22 साल तक उस team को बनाए रखना, उस rhythm को बनाए रखना और उसे उतना ही प्राणवान बनाए रखना, वरना तो यार बहुत हो गया अब कितने ऐपिसोड हो गए, अब तो लोगों को आदत हो गई, चलो निकाल दो। नहीं। इससे जुड़े हुए कलाकार शायद आज हिन्‍दुस्‍तान के बड़े कलाकारों की संख्‍या में उनका नाम नहीं होगा, लेकिन संगीत के साधक के रूप में। 22 साल करीब-करीब ये साधना कम नहीं होती जी, 14 लोगों ने team बन करके काम किया, 7 लोग हमारे बीच नहीं रहे, सबको आज सम्‍मानित करने का आज अवसर मिला और ये सिर्फ संगीत नहीं है। ये संगीत की भी साधना है, संस्‍कृति की भी साधना है और संस्‍कार की भी साधना है। और ये काम, देखिए हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव है, वैचारिक धरातल पर भी उतार-चढ़ाव आए हैं। आज अगर कोई ओम बोल दे तो हफ्तेभर विवाद चलता है कि ओम कैसे बोला जा सकता है। देश :::: सांम्‍प्रदायिक है। ऐसे देश में रामचरितमानस को किसी ने question नहीं किया, वो आज भी चल रहा है। हो सकता है आज के बाद किसी का ध्‍यान जाए और तूफान खड़ा कर दे, तो मैं नहीं जानता हूं। लेकिन कभी-कभार हम देखते है कि बहुत सालों से सुनते आए है, क्‍या बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी। जवाब खोजने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यही बात है कि जिसके कारण हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी, यही तो रामचरितमानस है, यही तो परम्‍परा है, यही संस्‍कार है।

हजारों साल से दुनिया में हमारी जो सबसे बड़ी विशेषता है जिसके लिए विश्‍व के किसी भी समाज को हमारे प्रति ईर्ष्‍या हो सकती है, वो है हमारी परिवार व्‍यवस्‍था और हम बचे हैं बने है उसका एक कारण.. जब तक हमारी परिवार व्‍यवस्‍था प्राणवान रही है, हम ताकतवर रहे है और उस परिवार व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई है तो रामचरितमानस और राम जी का परिवार जीवन है। मर्यादा पुरूषोत्‍तम राम.. मर्यादाओं में किसने कैसे जीना परिवार में। किसकी कैसे मर्यादा को पालन करना, कैसा व्‍यवहार करना, आचरण का उत्‍तम संस्‍कार का हमें दर्शन होता है। रामचरितमानस की क्‍या ताकत देखिए हजारों साल हो गए, पीढि़यां बीत गई लेकिन वहीं भाव, वही परम्‍परा, वही संस्‍कार, वही संदेश आज भी जीवित है। आज एक बात हम कहें, लिखित कहें लेकिन संदेश पहुंचते-पहुंचते सात दिन में उसका अर्थ अलग ही हो जाता है। ऐसा कौन सा सामर्थ्‍य होगा कि जिसमें आज भी अनेक व्‍याख्‍याएं होने के बाद भी मूल तत्‍व को कहीं पर भी खरोच नहीं आई है। ऐसी कृति मानव को इस धरती के साथ जोड़ने का इतना बड़ा काम है।

आज भी अगर हम मॉरिशस में जाए दुनिया के कई देशों में, जो लोग गुलामी के कालखंड में मजदूर के रूप में उनको उठा करके ले जाया गया, कुछ नहीं था, निर्धन थे। लेकिन तुलसीकृत रामायण साथ ले जाना नहीं भूले, हनुमान चालीसा ले जाना नहीं भूले और डेढ़ सौ साल अलग जीवन, भाषा भूल गए, पहनावा बदल गया, नाम में बदलाव आया, लेकिन एक अमानत उनके पास बची जिससे आज भी भारत के साथ उनका नाता जुड़ा रहा है और कैसे जुड़ता है मुझे बहुत साल पहले की घटना याद है। वेंस्‍टइंडिज की एक क्रिकेट टीम भारत में खेलने के लिए आई थी। बहुत साल पहले की बात कर रहा हूं और उसके मैनेजर का मेरे यहा फोन आया। अब आज से 30-35, 40 साल पहले मुझे कोई पहचानता नहीं था, न कोई नाम न कोई जान। उनका टेलीफोन आया मुझे आश्‍चर्य हुआ, कि बोले वेंस्‍टइंडिज के क्रिकेटर के मैनेजर आप से बात करना चाहते है, मिलना चाहते है। तो किसी ने नाम दिया होगा, कही परिचय निकला होगा। मैंने कहा वेंस्‍टइंडिज टीम से मेरा तो वैसे भी क्रिकेट के खेल से.. मैं कोई खिलाड़ी तो हूं नहीं, तो पता चला तो बोले रामरिखीनाम है इनका और वो अपनी पत्‍नी के साथ आए है। मूल भारतीय है, तो मैं उनको मिलने गया तो वहां एचआरडी मिनिस्‍ट्री में काम करते थे और टीम मैनेजर के रूप में आए थे। तो मैंने कहा ये ऋषि शब्‍द कहा से आया तो बोले ऋषि में से आया हुआ होगा, फिर उनकी पत्‍नी का नाम पूछा तो बोले सीता। वो भारत पहली बार आए थे। लेकिन उनको अपना और मैं जब गया तो specially वो भारतीय परिवेश पहन करके बैठे थे। यानी एक प्रकार से एक ग्रंथ डेढ़ सौ साल के बाद भी अपनेपन से जोड़ करके रखता है] इसका ये उत्‍तम अनुभव.. और इस अर्थ में रामचरितमानस आज digital form में ये सबके सामने जा रहा है।

आकाशवाणी की ताकत बहुत बड़ी है, कितनी ही चीजें क्‍यों न बदल जाए, लेकिन कुछ मूलभूत चीजें होती है, जो अपनी.. बुलंदी कभी खोती नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में आकाशवाणी की ये बहुत बड़ी ताकत है। लोगों को भले एहसास न होता, हो मुझे तो एहसास है। हम लोग भली-भांति समझते है आकाशवाणी की ताकत क्‍या है। ये मेरा एक ऐसा अनुभव है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। और मैं हिमाचल में काम करता था, तो एक दिन मैं अपने दौरे पर जा रहा था तो ऐसे ही पहाड़ों में एक ढाबे पर रूक करके चाय पीने की सोचा, तो गाड़ी को रोकी। जब मैं नीचे उतरा तो जो ढाबे वाला था, चाय वाला उसने मुझे लड्डू खिलाया। मैंने कहा भई मुझे चाय पीनी है। अरे बोले साहब लड्डू खाओ पहले, मौज करो। मैंने कहा क्‍या बात है। बोले अरे आज अटल जी ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा अटल जी ने बम फोड़ दिया। अरे बोले अभी-अभी रोडियो पर सुना है कि भारत ने बम फोड़ा है। न्‍यू‍क्लियर टेस्‍ट हुआ था। मुझे वो पहली खबर आकाशवाणी के माध्‍यम से एक चाय वाले, ढाबे वाले ने दी।

यानी हम जिन चीजों का कभी-कभी महत्‍व नहीं समझते, वो कितना बड़ा होता है ओर सिर्फ खबर नहीं, सिर्फ खबर नहीं। हिमायल की पहाडि़यों में दूर-सुदूर अकेला चाय के ढाबे वाला, इस समाचार से अपने आपको इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गरीब होने के बावजूद भी अपनी दुकान की मिठाई मुफ्त में बांट रहा है। संदेश की ताकत क्या है, देखिए और समय ज्‍यादा नहीं हुआ होगा, ये 5 बजे declare हुआ होगा शाम को और मैं करीब 6 सवा 6 बजे वहां से गुजर रहा हूं। कहने का तात्‍पर्य ये कि हमारे ये communication अपने आप में इतने बड़े देश में बहुत अनिवार्य है, बहुत आवश्‍यक है और आज के competition के युग में आकाशवाणी को स्‍पर्धा में फंसने की जरूरत नहीं है जी। उसने तो अपनी मूलभूत धाराओं को पकड़ करके जन-जन के दिलों तक जुड़े रहना ओर देश को जोड़ के रखना और भविष्‍य के साथ उनको उत्‍साहित करते रहना ये उसका काम है। और उस काम को हम कैसे निभाएं।

युग बदलता जाए वैसे बदलाव आवश्‍यक होता है कायाकल्प जरूरी होते है ओर जब कायाकल्प की बात करता हूं तब आत्‍मा वही रहता है, समयाकूल बदलाव आता है। ये डिजिटल रूप उसका एक सही कदम है। हम लोग, अब मुझे बताया गया आकाशवाणी के पास 9 लाख घंटों का recording material उपलब्‍ध है, 9 लाख घंटे। शायद दुनिया में किसी एक ईकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जी और उस समय आकाशवाणी का जो रूप-रंग था बाद में जो हमारे यहां जो चला माहौल, अलग बात है, मैं जरूर मानता हूं कि आ‍काशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल undiluted ये उसमें उपलब्ध होगा। ये 9 लाख घंटों का जब digital version तैयार होगा फिर उसमें भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं कितनी बड़ी सेवा होगी, कितना बड़ा खजाना ओर एक प्रकार से digital history का ये सबसे बड़ा resource material बन सकता है। जो शायद आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होगे उनके लिए एक बहुत अवसर बनेगा। और भारत का दूरदर्शन का काम तो ऐसा है कि हिन्‍दुस्तान की सभी यूनिवर्सिटी में एकाध-एकाध विद्यार्थी ने सिर्फ आकाशवाणी के योगदान पर पीएचडी करनी चाहिए, रिसर्च करनी चाहिए। हम लोगों के स्‍वभाव नहीं है। एक एकाध प्रेमचंद की कथा पर तो रिसर्च कर लेते है, लेकिन इतना बड़ा खजाना। आगे चल करके Human Resource Department के लोग, Culture Department के लोग सोचें कि हमारे नौजवान इस खजाने का research करके क्‍या दे सकते है दुनिया को। हम आगे के लिए क्‍या सोचे। विश्‍व के लोग भी अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया भारत को जानने-समझने के लिए आतुर है, तैयार है। वे अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने ये message दिया है कि भारत के पास कुछ है जो हमें जानना है, पाना है ये मूढ़ बना है तब हमारा कर्तव्‍य बनता है कि हम इसको कैसे पहुंचाए और ये अगर हम कर सकते है तो हम कितनी बढ़ी सेवा कर सकते है।

इनदिनों आकाशवाणी एक अच्‍छा काम भी किया है.. आकाशवाणी नहीं, रेडियों के कारण धीरे-धीरे जो आज एफएम चैनल वगैरह सब जो दुनिया चलती है। लोग कहते है भ्रष्‍टाचार के लिए क्‍या किया? हमारे यहां FM चैनल सारी पहले सरकारी खजाने में 80 सौ करोड़ रुपया देती थी। अभी आक्‍शन चल रहा है, आक्‍शन से देंगे ट्रांसपैरेंसी, परिणाम क्‍या आया मालूम है अब तक करीब-करीब साढ़े 11 सौ करोड़ की बोली बोल चुके है, अभी तो बोली चल रही है और उसके जो rules and regulations है उसके हिसाब से सरकार के खजाने में जो 80 सौ करोड़ आते थे एक स्थिति आएंगी 27 सौ-28 सौ करोड़ रुपए आएगे। व्‍यवस्‍थाओं को transparent करने से व्‍यवस्‍थाओं को आधुनिक टेक्‍नोलोजी से जोड़ करके भ्रष्‍टाचार से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है। कोई नया आर्थिक बोझ डाले बिना भी देश के विकास में धन कैसे उपलब्‍ध किया जो सकता है इसका एक बेहतरीन नमूना.. ये आकाशवाणी और रेडियो के संबंध में जो भारत सरकार ने अरुण जी के नेतृत्‍व में किया है, उसका ये परिणाम है।

तो हर दिशा में हम इस काम को आगे बढ़ा रहे है और मुझे आशा है कि ये digital version के कारण विश्‍व के लोग जो जानना चाहते है, समझना चाहते है उनके लिए उपकारक होगा। भोपाल केंद्र के लोगों ने गौरवपूर्ण काम किया है; आने वाले दिनों में भोपाल में एक विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन हो रहा है। आकाशवाणी सोचे विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में जो delegate आने वाले है भोपाल में ही हो रहा है तो ये उनको गिफ्ट के रूप में दिया जाए, ताकि एक souvenir..एक सच्चा souvenir ये बनेगा, जो विश्‍वभर से गरीब, काफी बड़ी तादात में लोग आ रहे है तो एक बहुत बड़ा अवसर बनेगा।

मैं फिर एक बार विभाग को, प्रसार भारती को, आकाशवाणी को ये बहुमूल्य चीजें संभाले रखने के लिए बधाई देता हूं। और देशवासियों को ये नजराना देते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं। मैं आभारी हूं डॉ. कर्ण सिंह जी का और मैंने देखा है कि हमारे कर्ण सिंह जी इन चीजों से ऐसे जुड़े हुए है, इसका इतना महामूल्‍य मानते है वो, कि उनको कोई राजकीय विचारधारा कभी बाधा नहीं बनती है और हमेशा ऐसी चीजों को वो आर्शीवाद देते रहें, प्रोत्‍साहन देते रहें। आज विशेषरूप आए इसलिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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भारत माता की,

भारत माता की

भारत माता की।

मेरी एक रिक्वेस्ट है, जो हमारे होनहार नौजवान हैं, जो बड़े साहसिक नौजवान हैं। देश को इन नौजवानों की बहुत जरूरत है। मेरी उन नौजवानों को हाथ जोड़ कर के प्रार्थना है कि जहां ऊपर है वहां से नीचे आइए। नीचे उतरिए आप लोग। देखिए कोई भी गिरेगा तो मेरे लिए व बहुत दुखद होगा। आप नीचे उतरिए। जो एकदम पीछे भी अकेले अकेले बैठ गए हैं सब नीचे आ जाइए। देखिए सारा तामझाम बड़ा टेंपररी होता है भाई। अगर ये गिरा तो यहां के लोग भी परेशान होंगे आपकी भी हालत खराब होगी। पहले नीचे उतरिए उसके बाद मैं भाषण आगे करूंगा। मेरे लिए मेरे भाषण से आपकी जिंदगी ज्यादा मूल्यवान है। वो जो लास्ट में दो लोग खंबे पे हैं नीचे आओ भाई। जरा पीछे एकदम आखिर में नीचे आओ, ये सब नीचे आइए भाई। जरा सिक्योरिटी के जो लोग हैं जरा चिंता करें। आपको नीचे आना पड़ेगा भाई। आपको नीचे आना पड़ेगा, आपकी जिंदगी को कुछ भी हो जाए यह मेरे लिए बर्दाश्त नहीं होगा भाई। आप मेरे अपने हैं मैं आपको कैसे परेशान देख सकता हूं। अब आपने मुझे देख लिया है अब सुनना है तो नीचे आएंगे तो अच्छा सुनाई देगा। देखिए जगह छोटी पड़ गई है, मैं देख रहा हूं बाहर भी लाखों की तादाद में लोग खड़े हैं वे शायद सुन भी नहीं पाते होंगे। लेकिन ये नहीं करने दूंगा मैं आइए नीचे। शाबाश! बहुत समझदार हैं सब नौजवान। हां शाबाश, अभी एक रह गया उधर। आ जाइए भाई जल्दी जरा उनको नीचे लाइए अब वो चढ़ तो गए लेकिन परेशान है कैसे उतरें। हां शाबाश नीचे आ जाओ भाई, नीचे आ जाइए आइए। जिन नौजवानों को मैंने नीचे उतारा है अगर उनको उनके सम्मान को अगर कोई चोट पहुंची है तो मैं उनकी क्षमा मांगता हूं, लेकिन आप सब आप सब मेरे परिवार के सदस्य हैं और इसलिए इतने प्यार से परिवार के सदस्य को कहने का मेरा भी तो हक बनता है ना।

भारत माता की।

भारत माता की।

बाबा हंस नाथ की जय!

बाबा महेंद्रनाथ की जय !

ई पवित्र धरती पर हम रउआ लोगन के वंदन अभिनंदन करतानी ! महाराजगंज ने, सीवान ने अपने जोश से पूरे भारत में संदेश दे दिया है फिर एक बार मोदी सरकार। मैं आज इतना खुश हूं खास करके इतनी बड़ी तादाद में माताओं-बहनों को मैं देख रहा हूं। माताओं-बहनों का ये आशीर्वाद ये मेरी बहुत बड़ी ऊर्जा है। और यह समय तो घर में काम का होता है उसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आशीर्वाद देने आई हैं। जीवन में इससे बड़ा सौभाग्य क्या होता है भाई। साथियों मेरा ये बहुत सौभाग्य है कि इन दिनों मुझे देश के कोने-कोने में देशवासियों के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। पूरे देश में मैं मातृ शक्ति का जो जज्बा देख रहा हूं माताओं-बहनों का जो प्यार देख रहा हूं, हमारे नौजवानों का जो उत्साह देख रहा हूं गांव हो गरीब हो किसान हो एक प्रकार से सारा देश के उज्जवल भविष्य के लिए संकल्प बद्ध हो चुका है और मैं भी आपको गारंटी देता हूं मैं आपके लिए दिन रात मेहनत करूंगा पहले से ज्यादा मेहनत करूंगा, क्योंकि मुझे आपके लिए विकसित बिहार, विकसित भारत बनाना है।

भाइयों-बहनों,

गरीब से गरीब मां-बाप भी हमेशा चाहता है कि जाने के बाद बच्चों को कोई विरासत में देकर के जाए। हर एक के मन में रहता है कि कोई विरासत छोड़ के जाए। भाइयों-बहनों मोदी एक ऐसा इंसान है जिसे अपनी कोई विरासत नहीं है। मेरे लिए तो आप ही मेरी विरासत हैं, आप ही मेरे वारिस हैं, मेरा और कोई वारिस नहीं है और इसलिए मुझे आपका और आपके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए खपा देना है। मैं नहीं चाहता कि अपने जीवन में आपने जो कष्ट भोगे उसका रत्ती भर भी आपकी आने वाली पीढ़ियों परेशानियों में जीने के लिए मजबूर होना पड़े। इसलिए गरीब कल्याण के बड़े फैसलों के लिए आज मैं आपके गांव आया हूं, आपके बीच आया हूं, आपके आशीर्वाद मांगने के लिए आया हूं। (भाई वहां कोशिश मत करो भैया प्लीज, वहां कोई जगह ही नहीं कहां जाओगे। अब आप मुझे देख नहीं पाओगे। सुन सकते हो जी ये स्क्रीन पर कुछ दिखाई दे तो देखिए। मैं जानता हूं संख्या बहुत ज्यादा है आपको तकलीफ होती होगी। मैं आपकी तकलीफ के लिए मैं खुद क्षमा मांगता हूं लेकिन आप जहां हैं वहीं रहिए, आगे आने की कोशिश मत कीजिए भैया। मेरा तो सौभाग्य है कि इतना कष्ट उठा करके आप हमें आशीर्वाद देने आए हैं।) भाइयों-बहनों आपके उज्जवल भविष्य के लिए देश को केंद्र में फिर एक बार मजबूत सरकार चाहिए।

भाइयों और बहनों,

जैसे-जैसे 4 जून पास आ रहा है, मोदी के लिए इंडी वालों की गालियों और बद्दुवाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा कि मोदी को देश की जनता अगले 5 साल के लिए फिर चुनने जा रही है। जिन्होंने बिहार को जंगलराज दिया, नौजवानों को पलायन दिया, परिवारों को गरीबी दी, जिन्होंने बिहार के लोगों को मारा-तड़पाया, माताओं-बहनों का जीवन बर्बाद किया, जो लोग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं, जिन्हें अदालत ने घोटाले का दोषी साबित किया है, इन लोगों की आंखों में मोदी चौबीसों घंटे खटकता है। लेकिन इनकी लाख कोशिशों के बाद भी मैं आपकी सेवा में डटा रहूंगा। मैं दिल से जनता की सेवा करता हूं इसलिए देश की जनता से मेरा दिल का रिश्ता है। और इसलिए हर दिल में मोदी है! तभी तो पूरा देश कहता है....फिर एक बार...मोदी सरकार !

साथियों,

ये भूमि, मेधा की भूमि है। राष्ट्रभक्ति की अविरल गंगा यहां बहती है। राजेंद्र बाबू जैसे अनेक सपूत इस धरती ने देश को दिए हैं। ऐसी समृद्ध प्रतिभा वाली धरती की पहचान कांग्रेस और RJD वालों ने रंगदारी टैक्स के लिए बना दी थी। इंडी वालों ने पहले तो यहां से उद्योग-व्यापार का पलायन करवाया और अब ये लोग बिहार के परिश्रमी साथियों का अपमान करने में जुटे हैं। पंजाब में कांग्रेस के एक नेता हैं, दिल्ली में कांग्रेस के शाही परिवार के खासमखास हैं। कांग्रेस के ये नेता कहते हैं कि बिहार के लोगों का बहिष्कार करना चाहिए। ये कांग्रेस के नेता बोल रहे हैं और RJD वाले इनके साथ यहां आपसे वोट मांग रहे हैं। वो कहते हैं कि बिहार के लोगों को ना पंजाब में घर खरीदने देना चाहिए, न ही पंजाब में बिहारियों को कोई अधिकार देना चाहिए। बिहार के लोगों के लिए इतनी नफरत इन लोगों के दिल-दिमाग में भरी पड़ी है। क्या आपने कांग्रेस के शाही परिवार से सुना कि भाई इनका मंत्री बोल रहा है, गलत बोल रहा है। उनका नेता बोल रहा, गलत बोल रहा, ऐसा नहीं बोलना चाहिए। नहीं बोल रहे हैं। यहां RJD के लोगों ने तो कान में रुई ठूंस ली है। बिहार की मान मर्यादा, बिहारियों का सम्मान इंडी गठबंधन वालों के लिए कोई मायने नहीं रखता। साहब मैं गुजरात में था, वहां का मुख्यमंत्री था लेकिन बिहार जब अपने 100 साल मना रहा था मैंने बिहार से अनेक महानुभावों को गुजरात में बुला कर के उनका सम्मान किया था। जब DMK के लोगों ने बिहारियों को गाली दी, जब तेलंगाना के कांग्रेस के नेता ने गालियां दीं, तब भी ये शाही परिवार अपने होठों पर ताले लगा कर के बैठ गया था। क्या जिन्होंने बिहार का अपमान किया, जो दिन रात बिहारियों का अपमान करते हैं, क्या ऐसे कांग्रेस और उनके साथियों को, आरजेडी और उनके साथियों को, आपका एक वोट भी मिलना चाहिए क्या? पूरी ताकत से बताइए, एक वोट भी मिलना चाहिए क्या? एक वोट भी मिलना चाहिए क्या? अरे वोट तो छोड़ो इनको सजा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? इस बार चुनाव में एनडीए के पार्टियों का बटन दबाकर ऐसी सजा दो, ऐसी सजा दो सब पोलिंग बूथ में साफ हो जाएं, करेंगे?

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस का शाही परिवार, टुकड़े-टुकड़े गैंग को पाल-पोस रहा है। कांग्रेस, उत्तर और पूर्वी भारत से बदला ले रही है। आपने कांग्रेस को यहां से साफ कर दिया, इसलिए ये आपसे बदला ले रहे हैं। ये भारत को एक करने वाले भगवान राम का विरोध करते हैं। अयोध्या में राम मंदिर बना, आपका गौरव बढ़ा कि नहीं बढ़ा। आपका माथा ऊंचा हुआ कि नहीं हुआ। आपको संतोष हुआ कि नहीं हुआ। रामलला को अपना घर मिल गया आप खुश हुए कि नहीं हुए। ये आरजेडी-कांग्रेस वाले दुखी हैं बताओ। जिस कांग्रेस-आरजेडी की राजनीति भारत के टुकड़े टुकड़े करने वाली है उसको साफ करने की जिम्मेदारी महाराजगंज की भी है और सीवान की भी है।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस-RJD और उसके साथियों ने हमेशा इस देश को पीछे ले जाने का खेल खेला है। ये खुद लाखों करोड़ के मालिक हो गए और जनता रोटी, कपड़ा, मकान के लिए जूझती है। इंडी गठबंधन का मंच, राजनीतिक मंच नहीं लाखों करोड़ों के घोटालेबाज़ों का सम्मेलन है। भ्रष्टाचार का अता-पता उसका नाम है इंडी गठबंधन। इनके मंच पर क़रीब 20 लाख करोड़ रुपये के घोटालेबाज़ एक साथ बैठते हैं। जब ये इकट्ठा होते हैं तो इनमें तीन बुराइयां एकदम साफ नजर आती हैं। कोई अपवाद नहीं है, ये तीन बुराइयां ये इंडी गठबंधन के सबमें समान है। ये तीन बुराइयां क्या हैं, ये इंडी अलायंस वाले घोर कम्यूनल हैं, शत प्रतिशत सांप्रदायिक हैं। दूसरा- ये इंडी अलायंस वाले घोर जातिवादी हैं, शत-प्रतिशत जातिवादी। तीसरा- ये इंडी अलायंस वाले घोर परिवारवादी हैं, शत-प्रतिशत परिवारवादी। अपने बेटे-बेटी के सिवा कुछ करना ही नहीं। ये वो लोग हैं जिनकी सरकारों में देश सांप्रदायिकता की आग में जले। ये वो लोग हैं जिन्होंने सालों तक देश को जातिवाद में बांटकर पिछड़ों का हक़ मारा है। ऐसे लोग बस देश बांट सकते है, ऐसे लोग देश का ख़ज़ाने ख़ाली कर सकते हैं, लेकिन देश को आगे नहीं ले जा सकते।

साथियों,

मोदी ने अपने 10 साल में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। आखिर इंडी गठबंधन वाले अपने 60 साल में ऐसा क्यों नहीं कर पाए? इन लोगों ने गरीब को गरीब रखा ताकि उसके शाही परिवार की जयजयकार होती रहे। कांग्रेस ने देश के कानूनों को ऐसा बनाया, जिससे गरीब असहाय हो। उसे किसी दूसरे की मदद लेनी पड़े।

साथियों,

हमारे यहां आज भी जो पुलिस की व्यवस्था है, वो अंग्रेज़ों की बनाई हुई है। पहली बार मोदी ने उसको बदलने का साहस किया है। पुरानी व्यवस्था के कारण गरीब सालों-साल जेल में सड़ता रहता था। लेकिन आंतकवादी, अपराधी, भ्रष्टाचारी, लुटेरे बड़े-बड़े वकील करके जैसे-तैसे छूट जाते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब मोदी दंड संहिता की जगह, न्याय संहिता लेकर आया है। इससे सामान्य जन को तेज़ी से न्याय मिलेगा। अब आतंकियों का, आपको लूटने वालों का बचना और मुश्किल हो जाएगा।

साथियों,

यहां इतनी बड़ी संख्या में हमारे साथी खेती से जुड़े हैं, किसान हैं। 10 साल पहले तक एक भी रुपया किसानों को कांग्रेस सरकार से मिलता था क्या? पीएम किसान सम्मान निधि से सीवान के किसानों को अबतक करीब 1200 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। सारण के भी किसानों को 1500 करोड़ रुपए मिले हैं। सिर्फ 5 साल में ही इतना पैसा मिला है, वो भी सीधे खाते में।

भाइयों और बहनों,

गरीब का ये बेटा आज आपके जीवन को आसान बनाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। आज करोड़ों गरीबों को मुफ्त अनाज मिल रहा है। आज घर-घर नल पहुंचा है, बिजली पहुंची है, टॉयलेट हुआ है। मोदी ने सस्ता सिलेंडर बहनों तक पहुंचाया है। मुझे बहनें बताती हैं कि मुफ्त इलाज की योजना से उनको बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

पक्का घर तो गरीब का सबसे बड़ा सपना होता है। अभी तक बिहार में करीब 40 लाख पक्के घर गरीबों को मिल चुके हैं। और मेरा एक काम करोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताओ मेरा काम करोगे? ढीला ढाला नहीं, पूरी ताकत से बताओ करोगे? अच्छा अभी आप गांव गांव जाते होंगे, हर मोहल्ले में जाते होंगे, लोगों से मिलते होंगे, अगर आपको गांव में अभी भी कोई झुग्गी-झोपड़ी में रहता है, कोई मिट्टी की छोटी सी खोली बना कर के रहता है उसको मिलकर के कह देना कि हम मोदी जी की तरफ से आए हैं। उनको कह देना हम मोदी जी की तरफ से आए हैं और 4 जून के बाद तीसरी बार जब मोदी की सरकार बनेगी तो जिनका घर अभी कच्चा है मोदी उसको पक्का घर देगा। मेरी तरफ से बता दोगे? मेरे लिए तो आप ही मोदी हैं आप बता देंगे ना काम हो जाएगा। साथियों, मोदी ने 3 करोड़ नए घर बनाने की गारंटी दी है, इसलिए आप बता दीजिए। उसको कहिए जो 3 करोड़ बनेंगे न, उसमें उस परिवार का भी घर होगा। और आप ये भी जान लीजिए, ये जो आपको घर मिलेगा,उसमें घर की रजिस्ट्री घर की महिला के नाम पर होगी, मकान की मालकिन महिला होंगी।

भाइयों और बहनों,

यहां हमारी बहुत सारी बहनें सखी मंडलों से, दीदियों के समूहों से भी जुड़ी हैं। महिलाओं के ऐसे सभी समूहों के लिए आने वाले 5 साल समृद्धि लेकर आने वाले हैं। बहनें ड्रोन पायलट बनेंगी और ड्रोन से खेती करके कमाई करें, ये योजना मोदी ने बनाई है। मोदी की गारंटी- 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की है। जब माताओं-बहनों की आय बढ़ेगी, तो परिवार की, गांव की खरीद शक्ति बढ़ेगी। यही तो विकसित भारत का रास्ता है।

साथियों,

आपका वोट, सिर्फ MP चुनने के लिए नहीं है। आपका वोट, एक मज़बूत भारत के लिए मज़बूत PM चुनने का भी है। इसलिए, महाराजगंज से जनार्दन सिंह सिगरीवाल जी, सीवान से बहन विजय लक्ष्मी जी को और गोपालगंज से आलोक कुमार सुमन जी को ज्यादा से ज्यादा वोटों से जिताना है। जिताएंगे? घर घर जाएंगे? ज्यादा मतदान कराएंगे? अच्छा मेरा एक काम करेंगे? मेरा एक काम करेंगे? क्यों ठंडे पड़ गए भाई। इनके लिए तो बड़े उत्साह से बोल रहे हो इनके लिए बोला तो हाथ ऊपर कर दिया मेरे लिए बोला तो हाथ नीचे हो गया। मेरा एक काम करोगे, पक्का करोगे। यहां से ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना, ज्यादा से ज्यादा परिवारों में मिलना और सबको जाके कहना कि अपने मोदी जी आए थे। मोदी जी ने आपको जय श्री राम कहा है। मेरा जय श्रीराम हर घर में पहुंचा दोगे, हर परिवार में पहुंचा दोगे?

बोलिए भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत-बहुत धन्यवाद