PM’s address on the release of the digital version of Ramcharitmanas

Published By : Admin | August 31, 2015 | 17:18 IST
PM Narendra Modi launches digitised version of the Ramcharitmanas in New Delhi
Prime Minister Modi appreciates All India Radio's role in uniting the people and spreading awareness and information in India
Ramcharitmanas is a great epic. It contains the essence of India: PM Narendra Modi
The digital version of Ramcharitmanas will help people across the world: PM Modi

ये कार्यक्रम जहां हो रहा है, उस स्‍थान का नाम है पंचवटी और जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तब इस निवास स्‍थान में पंचवटी का निर्माण हुआ और नाम पंचवटी रखा गया था और शायद मैं मानता हूं आज का अवसर पंचवटी में होना अपने आप उसके कारण उसका एक कीर्तिमान बढ़ जाता है, क्‍योंकि रामचरितमानस की बात हो और पंचवटी न हो, तो फिर वो रामचरितमानस अधूरा लगता है और इसलिए ये अपने आप में एक सुफल संयोग है।

आज के इस अवसर को मैं अलग-अलग रूप में अनुभव करता हूं। कभी-कभी सरकार में लोग नौकरी करते-करते जीवन ऐसा बन जाता है, एक मशीनी गतिविधि बन जाती है और वही सुबह जाना, शाम को आना, वही फाइलें, वही बॉस, वहीं assistant, एक जिंदगी के बड़े महत्‍वपूर्ण 30-35 साल उसी में गुजर जाते है और ज्‍यादातर का मन बन जाता है कि चलो अब इस पाइपलाइन में घुसे है 30-35 साल के बाद उधर निकलेंगे। जिस रूप में निकलेंगे, निकलेंगे.. लेकिन यह अवसर देख करके ध्‍यान में आता है कि एक सरकार का मुलाजिम, जिसमें एक तड़प हो, कुछ करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, वो कितनी बड़ी विरासत छोड़ करके जाता है और इसलिए सबसे पहले मैं आकाशवाणी के उस एक सामान्‍य अधिकारी जिनके परिवारजन.. ये औरों के लिए भी प्रेरक बन सकता है। हमारी जिंदगी व्‍यर्थ नहीं जा रही है। हम जो फाइलों पर साइन करते है वो बेकार नहीं होती, कभी न कभी इतिहास को वो नया मोड़ देते है। ये आज की घटना उस बात का जीता-जागता सबूत है।

दूसरी बात, करीब-करीब 20-22 साल तक लगातार इसका रिकार्डिंग हुआ है। 22 साल तक उस team को बनाए रखना, उस rhythm को बनाए रखना और उसे उतना ही प्राणवान बनाए रखना, वरना तो यार बहुत हो गया अब कितने ऐपिसोड हो गए, अब तो लोगों को आदत हो गई, चलो निकाल दो। नहीं। इससे जुड़े हुए कलाकार शायद आज हिन्‍दुस्‍तान के बड़े कलाकारों की संख्‍या में उनका नाम नहीं होगा, लेकिन संगीत के साधक के रूप में। 22 साल करीब-करीब ये साधना कम नहीं होती जी, 14 लोगों ने team बन करके काम किया, 7 लोग हमारे बीच नहीं रहे, सबको आज सम्‍मानित करने का आज अवसर मिला और ये सिर्फ संगीत नहीं है। ये संगीत की भी साधना है, संस्‍कृति की भी साधना है और संस्‍कार की भी साधना है। और ये काम, देखिए हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव है, वैचारिक धरातल पर भी उतार-चढ़ाव आए हैं। आज अगर कोई ओम बोल दे तो हफ्तेभर विवाद चलता है कि ओम कैसे बोला जा सकता है। देश :::: सांम्‍प्रदायिक है। ऐसे देश में रामचरितमानस को किसी ने question नहीं किया, वो आज भी चल रहा है। हो सकता है आज के बाद किसी का ध्‍यान जाए और तूफान खड़ा कर दे, तो मैं नहीं जानता हूं। लेकिन कभी-कभार हम देखते है कि बहुत सालों से सुनते आए है, क्‍या बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी। जवाब खोजने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यही बात है कि जिसके कारण हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी, यही तो रामचरितमानस है, यही तो परम्‍परा है, यही संस्‍कार है।

हजारों साल से दुनिया में हमारी जो सबसे बड़ी विशेषता है जिसके लिए विश्‍व के किसी भी समाज को हमारे प्रति ईर्ष्‍या हो सकती है, वो है हमारी परिवार व्‍यवस्‍था और हम बचे हैं बने है उसका एक कारण.. जब तक हमारी परिवार व्‍यवस्‍था प्राणवान रही है, हम ताकतवर रहे है और उस परिवार व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई है तो रामचरितमानस और राम जी का परिवार जीवन है। मर्यादा पुरूषोत्‍तम राम.. मर्यादाओं में किसने कैसे जीना परिवार में। किसकी कैसे मर्यादा को पालन करना, कैसा व्‍यवहार करना, आचरण का उत्‍तम संस्‍कार का हमें दर्शन होता है। रामचरितमानस की क्‍या ताकत देखिए हजारों साल हो गए, पीढि़यां बीत गई लेकिन वहीं भाव, वही परम्‍परा, वही संस्‍कार, वही संदेश आज भी जीवित है। आज एक बात हम कहें, लिखित कहें लेकिन संदेश पहुंचते-पहुंचते सात दिन में उसका अर्थ अलग ही हो जाता है। ऐसा कौन सा सामर्थ्‍य होगा कि जिसमें आज भी अनेक व्‍याख्‍याएं होने के बाद भी मूल तत्‍व को कहीं पर भी खरोच नहीं आई है। ऐसी कृति मानव को इस धरती के साथ जोड़ने का इतना बड़ा काम है।

आज भी अगर हम मॉरिशस में जाए दुनिया के कई देशों में, जो लोग गुलामी के कालखंड में मजदूर के रूप में उनको उठा करके ले जाया गया, कुछ नहीं था, निर्धन थे। लेकिन तुलसीकृत रामायण साथ ले जाना नहीं भूले, हनुमान चालीसा ले जाना नहीं भूले और डेढ़ सौ साल अलग जीवन, भाषा भूल गए, पहनावा बदल गया, नाम में बदलाव आया, लेकिन एक अमानत उनके पास बची जिससे आज भी भारत के साथ उनका नाता जुड़ा रहा है और कैसे जुड़ता है मुझे बहुत साल पहले की घटना याद है। वेंस्‍टइंडिज की एक क्रिकेट टीम भारत में खेलने के लिए आई थी। बहुत साल पहले की बात कर रहा हूं और उसके मैनेजर का मेरे यहा फोन आया। अब आज से 30-35, 40 साल पहले मुझे कोई पहचानता नहीं था, न कोई नाम न कोई जान। उनका टेलीफोन आया मुझे आश्‍चर्य हुआ, कि बोले वेंस्‍टइंडिज के क्रिकेटर के मैनेजर आप से बात करना चाहते है, मिलना चाहते है। तो किसी ने नाम दिया होगा, कही परिचय निकला होगा। मैंने कहा वेंस्‍टइंडिज टीम से मेरा तो वैसे भी क्रिकेट के खेल से.. मैं कोई खिलाड़ी तो हूं नहीं, तो पता चला तो बोले रामरिखीनाम है इनका और वो अपनी पत्‍नी के साथ आए है। मूल भारतीय है, तो मैं उनको मिलने गया तो वहां एचआरडी मिनिस्‍ट्री में काम करते थे और टीम मैनेजर के रूप में आए थे। तो मैंने कहा ये ऋषि शब्‍द कहा से आया तो बोले ऋषि में से आया हुआ होगा, फिर उनकी पत्‍नी का नाम पूछा तो बोले सीता। वो भारत पहली बार आए थे। लेकिन उनको अपना और मैं जब गया तो specially वो भारतीय परिवेश पहन करके बैठे थे। यानी एक प्रकार से एक ग्रंथ डेढ़ सौ साल के बाद भी अपनेपन से जोड़ करके रखता है] इसका ये उत्‍तम अनुभव.. और इस अर्थ में रामचरितमानस आज digital form में ये सबके सामने जा रहा है।

आकाशवाणी की ताकत बहुत बड़ी है, कितनी ही चीजें क्‍यों न बदल जाए, लेकिन कुछ मूलभूत चीजें होती है, जो अपनी.. बुलंदी कभी खोती नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में आकाशवाणी की ये बहुत बड़ी ताकत है। लोगों को भले एहसास न होता, हो मुझे तो एहसास है। हम लोग भली-भांति समझते है आकाशवाणी की ताकत क्‍या है। ये मेरा एक ऐसा अनुभव है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। और मैं हिमाचल में काम करता था, तो एक दिन मैं अपने दौरे पर जा रहा था तो ऐसे ही पहाड़ों में एक ढाबे पर रूक करके चाय पीने की सोचा, तो गाड़ी को रोकी। जब मैं नीचे उतरा तो जो ढाबे वाला था, चाय वाला उसने मुझे लड्डू खिलाया। मैंने कहा भई मुझे चाय पीनी है। अरे बोले साहब लड्डू खाओ पहले, मौज करो। मैंने कहा क्‍या बात है। बोले अरे आज अटल जी ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा अटल जी ने बम फोड़ दिया। अरे बोले अभी-अभी रोडियो पर सुना है कि भारत ने बम फोड़ा है। न्‍यू‍क्लियर टेस्‍ट हुआ था। मुझे वो पहली खबर आकाशवाणी के माध्‍यम से एक चाय वाले, ढाबे वाले ने दी।

यानी हम जिन चीजों का कभी-कभी महत्‍व नहीं समझते, वो कितना बड़ा होता है ओर सिर्फ खबर नहीं, सिर्फ खबर नहीं। हिमायल की पहाडि़यों में दूर-सुदूर अकेला चाय के ढाबे वाला, इस समाचार से अपने आपको इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गरीब होने के बावजूद भी अपनी दुकान की मिठाई मुफ्त में बांट रहा है। संदेश की ताकत क्या है, देखिए और समय ज्‍यादा नहीं हुआ होगा, ये 5 बजे declare हुआ होगा शाम को और मैं करीब 6 सवा 6 बजे वहां से गुजर रहा हूं। कहने का तात्‍पर्य ये कि हमारे ये communication अपने आप में इतने बड़े देश में बहुत अनिवार्य है, बहुत आवश्‍यक है और आज के competition के युग में आकाशवाणी को स्‍पर्धा में फंसने की जरूरत नहीं है जी। उसने तो अपनी मूलभूत धाराओं को पकड़ करके जन-जन के दिलों तक जुड़े रहना ओर देश को जोड़ के रखना और भविष्‍य के साथ उनको उत्‍साहित करते रहना ये उसका काम है। और उस काम को हम कैसे निभाएं।

युग बदलता जाए वैसे बदलाव आवश्‍यक होता है कायाकल्प जरूरी होते है ओर जब कायाकल्प की बात करता हूं तब आत्‍मा वही रहता है, समयाकूल बदलाव आता है। ये डिजिटल रूप उसका एक सही कदम है। हम लोग, अब मुझे बताया गया आकाशवाणी के पास 9 लाख घंटों का recording material उपलब्‍ध है, 9 लाख घंटे। शायद दुनिया में किसी एक ईकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जी और उस समय आकाशवाणी का जो रूप-रंग था बाद में जो हमारे यहां जो चला माहौल, अलग बात है, मैं जरूर मानता हूं कि आ‍काशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल undiluted ये उसमें उपलब्ध होगा। ये 9 लाख घंटों का जब digital version तैयार होगा फिर उसमें भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं कितनी बड़ी सेवा होगी, कितना बड़ा खजाना ओर एक प्रकार से digital history का ये सबसे बड़ा resource material बन सकता है। जो शायद आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होगे उनके लिए एक बहुत अवसर बनेगा। और भारत का दूरदर्शन का काम तो ऐसा है कि हिन्‍दुस्तान की सभी यूनिवर्सिटी में एकाध-एकाध विद्यार्थी ने सिर्फ आकाशवाणी के योगदान पर पीएचडी करनी चाहिए, रिसर्च करनी चाहिए। हम लोगों के स्‍वभाव नहीं है। एक एकाध प्रेमचंद की कथा पर तो रिसर्च कर लेते है, लेकिन इतना बड़ा खजाना। आगे चल करके Human Resource Department के लोग, Culture Department के लोग सोचें कि हमारे नौजवान इस खजाने का research करके क्‍या दे सकते है दुनिया को। हम आगे के लिए क्‍या सोचे। विश्‍व के लोग भी अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया भारत को जानने-समझने के लिए आतुर है, तैयार है। वे अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने ये message दिया है कि भारत के पास कुछ है जो हमें जानना है, पाना है ये मूढ़ बना है तब हमारा कर्तव्‍य बनता है कि हम इसको कैसे पहुंचाए और ये अगर हम कर सकते है तो हम कितनी बढ़ी सेवा कर सकते है।

इनदिनों आकाशवाणी एक अच्‍छा काम भी किया है.. आकाशवाणी नहीं, रेडियों के कारण धीरे-धीरे जो आज एफएम चैनल वगैरह सब जो दुनिया चलती है। लोग कहते है भ्रष्‍टाचार के लिए क्‍या किया? हमारे यहां FM चैनल सारी पहले सरकारी खजाने में 80 सौ करोड़ रुपया देती थी। अभी आक्‍शन चल रहा है, आक्‍शन से देंगे ट्रांसपैरेंसी, परिणाम क्‍या आया मालूम है अब तक करीब-करीब साढ़े 11 सौ करोड़ की बोली बोल चुके है, अभी तो बोली चल रही है और उसके जो rules and regulations है उसके हिसाब से सरकार के खजाने में जो 80 सौ करोड़ आते थे एक स्थिति आएंगी 27 सौ-28 सौ करोड़ रुपए आएगे। व्‍यवस्‍थाओं को transparent करने से व्‍यवस्‍थाओं को आधुनिक टेक्‍नोलोजी से जोड़ करके भ्रष्‍टाचार से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है। कोई नया आर्थिक बोझ डाले बिना भी देश के विकास में धन कैसे उपलब्‍ध किया जो सकता है इसका एक बेहतरीन नमूना.. ये आकाशवाणी और रेडियो के संबंध में जो भारत सरकार ने अरुण जी के नेतृत्‍व में किया है, उसका ये परिणाम है।

तो हर दिशा में हम इस काम को आगे बढ़ा रहे है और मुझे आशा है कि ये digital version के कारण विश्‍व के लोग जो जानना चाहते है, समझना चाहते है उनके लिए उपकारक होगा। भोपाल केंद्र के लोगों ने गौरवपूर्ण काम किया है; आने वाले दिनों में भोपाल में एक विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन हो रहा है। आकाशवाणी सोचे विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में जो delegate आने वाले है भोपाल में ही हो रहा है तो ये उनको गिफ्ट के रूप में दिया जाए, ताकि एक souvenir..एक सच्चा souvenir ये बनेगा, जो विश्‍वभर से गरीब, काफी बड़ी तादात में लोग आ रहे है तो एक बहुत बड़ा अवसर बनेगा।

मैं फिर एक बार विभाग को, प्रसार भारती को, आकाशवाणी को ये बहुमूल्य चीजें संभाले रखने के लिए बधाई देता हूं। और देशवासियों को ये नजराना देते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं। मैं आभारी हूं डॉ. कर्ण सिंह जी का और मैंने देखा है कि हमारे कर्ण सिंह जी इन चीजों से ऐसे जुड़े हुए है, इसका इतना महामूल्‍य मानते है वो, कि उनको कोई राजकीय विचारधारा कभी बाधा नहीं बनती है और हमेशा ऐसी चीजों को वो आर्शीवाद देते रहें, प्रोत्‍साहन देते रहें। आज विशेषरूप आए इसलिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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भारत माता की… भारत माता की… भारत माता की…
एन इनिया तमिळ् सगोदर सगोदरिगले, वणक्कम

तिरुनेलवेली की इस पावन धरती पर मैं नेल्लईअप्पर् और कांतिमती अम्मा के चरणों में नमस्कार करता हूं। आपका ये उत्साह, आपका ये जनसमर्थन, ये DMK और इंडी अलायंस की नींद उड़ा रहा है। आज पूरा तमिलनाडु कह रहा है- फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार!

साथियों,
कल ही ‘तमिल पुत्ताण्डु’ का पवित्र अवसर भी था। बीजेपी ने ‘तमिळ् पुत्ताण्डु’ के ही दिन, नए वर्ष में नए भारत के संकल्प के लिए अपना संकल्प-पत्र जारी किया है। बीजेपी के मेनिफेस्टो को लोग मोदी का गारंटी कार्ड बोल रहे हैं। इसमें 70 की आयु से अधिक के हर सीनियर सिटिज़न को फ्री इलाज देने की गारंटी है। मोदी के इस गारंटी कार्ड किसान मसृद्धि केंद्र की संख्या बढ़ाने भारत को फुड प्रोसेसिंग का हब बनाने का विजन भी है। बीजेपी ने फिशरीज सेक्टर के लिए नए प्रोडक्शन और प्रोसेसिंग क्लस्टर बनाने का ऐलान किया है। बीजेपी के मेनिफेस्टो में फिशरमेन साथियों को सी-वीड की खेती और मोती की खेती के लिए भी प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। यानि विकसित तमिलनाडु और विकसित भारत का मोदी का संकल्प इस चुनाव का मिशन बन चुका है। बीते Ten Years में NDA सरकार ने तमिलनाडु के विकास के लिए दिन-रात मेहनत की है। मोदी ने तिरुनेलवेली-चेन्नई के बीच वंदेभारत एक्सप्रेस चलाई, ताकि इस क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिले, यहां विकास की गति बढ़े। अब बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में घोषणा की है कि साउथ में भी बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी।

साथियों,
आज तमिलनाडु में सारे लोग कह रहे हैं, सारे सर्वे कह रहे हैं, कि तमिलनाडु की माताएं-बहनें, मोदी को खूब आशीर्वाद दे रही हैं। कई पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स को ये समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों है। इन लोगों को पता नहीं है कि पिछले 10 साल में मोदी ने माताओं-बहनों की सेवा की है, उनके आशीर्वाद लिए हैं, उनका दिल जीता है। अगर मैं सिर्फ तमिलनाडु की बात करूं तो...One crore twenty five lakhs घरों को नल से जल का कनेक्शन दिया गया। यहां Twelve Lakhs पक्के घर बनाए गए। Forty Lakhs से ज्यादा गैस कनेक्शन दिए गए। Fifty Seven Lakhs से ज्यादा शौचालय बनवाए गए। गर्भवती महिलाओं को Eight Hundred Crore Rupees से ज्यादा की धनराशि दी गई है। मुद्रा योजना के तहत तमिलनाडु के लोगों को करीब-करीब Three Lakh Crore Rupees की मदद दी गई है। अब बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में जो घोषणाएं की हैं उसका बड़ा लाभ हमारी तमिलनाडु की माताओं-बहनों-बेटियों को मिलेगा।

साथियों,
देखिए ये गुड़िया भारत माता बनके आई है। वाह। साथियों जो तमिल भाषा के प्रेम करता है, जो तमिल संस्कृति से प्रेम करता है, आज उसकी पहली पसंद बीजेपी बन गई है। अब बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में हमारी तमिल भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने की गारंटी दी है। बीजेपी, तमिलनाडु की हेरिटेज साइट्स को ग्लोबल टूरिस्ट मैप पर लाने के लिए भी दिन रात मेहनत करेगी। बीजेपी ने पूरी दुनिया में तिरुवल्लुवर कल्चरल सेंटर्स के निर्माण का भी संकल्प लिया है। लेकिन DMK और कांग्रेस की विचारधारा तमिल संस्कृति के प्रति भीतर तक घृणा से भरी हुई है। ये लोग तमिल पहचान को, तमिल विरासत को खत्म करना चाहते हैं। सेंगोल हो, जल्लीकट्टू हो, आप सभी ने देखा है कि कैसे DMK और कांग्रेस ने इसका विरोध किया।

साथियों,
दक्षिण तमिलनाडु का ये पूरा क्षेत्र वीरता और राष्ट्रवाद की धरती कहा जाता है। मरदु ब्रदर्स हों या वीरा पांडिया कट्टाबोम्मन या वीरमंगई वेलू नाचियार जी हों, इन शूरवीरों ने पूरे जीवन विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इसी तरह स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में भी मुत्तु-रामलिंग तेवर जी से प्रभावित होकर, बहुत से नौजवान यहां नेताजी सुभाष के आंदोलन से जुड़े थे। देश के लिए लड़ने वाले इन लोगों का सपना क्या था? वो चाहते थे कि भारत एक ऐसा सशक्त और समृद्ध देश बने, जिसका सम्मान पूरे विश्व में हो। आज जब हम भारत के दुश्मनों को उनकी ही भाषा में जवाब देते हैं, तो इन्हीं का सपना पूरा होता है। आज हर वो व्यक्ति जो देश से प्रेम करता है- उसकी पहली पसंद बीजेपी है।

साथियों,
बीजेपी तमिलनाडु का विकास करती है, क्योंकि बीजेपी तमिलनाडु की विरासत का सम्मान करती है, उससे प्रेरणा लेती है। हमारे प्रेरणास्रोत महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीओ चिदम्बरम पिल्लई हैं, जिन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा था। इसीलिए, आज हम डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के लिए तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडॉर बना रहे हैं। हमारे आदर्श के. कामराज जी जैसे देशभक्त और ईमानदार नेता हैं। इसीलिए, बीजेपी तमिलनाडु में ईमानदार राजनीति की वकालत करती है, बीजेपी तमिलनाडु के युवाओं को आगे बढ़ाती है। लेकिन, कांग्रेस औऱ DMK जैसी Family Run पार्टियों ने के.कामराज जी का अपमान करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। बीजेपी तमिलनाडु में MGR जैसे नेताओं के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। DMK ने हमेशा MGR की विरासत का भी अपमान किया है। DMK ने जयललिता जी के साथ भी कैसा-कैसा व्यवहार किया था, उन्हें सदन में अपमानित किया था, ये भी तमिलनाडु के लोग भूले नहीं हैं। यहां 'देवेंद्र कुल वेलालर कम्यूनिटी की बहुत पुरानी डिमांड जो पूरा करने का भी NDA सरकार ने ही किया है। और नरेंद्र, देवेंद्र से बहुत अलग नहीं है। DMK और कांग्रेस की मिलिभगत कैसे देशविरोधी है, ये सच्चाई अब पूरा देश जान गया है। इन्हीं लोगों ने हमारा कच्चातीवू आइलैंड तमिलनाडु से काटकर दूसरे देश को दे दिया। आज भी हमारे फिशरमेन भाइयों DMK और कांग्रेस के इस पाप की सजा मिलती है। उनका ये पाप 4 दशक से छिपा हुआ था। अब बीजेपी इसे तमिलनाडु की जनता के सामने ले आई है, तो उनकी बोलती बंद है।

साथियों,
हमारा तमिलनाडु इस समय Family Run Parties के करप्शन और स्कैम की बहुत बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है। इतना ही नहीं ये लोग आपके बच्चों को ड्रग्स के नर्क में धकेल रहे हैं। आज तमिलनाडु में जगह-जगह ड्रग्स का जहर फैल चुका है। इन ड्रग्स माफियाओं को किसका संरक्षण हासिल है, ये सब जानते हैं। मां-बाप अपने बच्चों का जीवन बर्बाद होते देख रहे हैं, लेकिन इन ताकतवर लोगों के आगे लाचार हैं। मैं आपको ये भरोसा दिलाने आया हूं, आपके आशीर्वाद से मोदी इन भ्रष्टाचारियों के साथ-साथ इन ड्रग्स माफियाओं से भी लड़ेगा। मोदी तमिलनाडु की युवा पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने देगा। इसलिए, आज जो अपने बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं- वो बीजेपी को वोट दे रहे हैं। आज जो विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं- वो बीजेपी को वोट दे रहे हैं।

साथियों,
इस बार के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में ये मेरा आखिरी कार्यक्रम है। मैं पूरे विश्वास से ये कह सकता हूं कि तमिलनाडु एक नया इतिहास बनाने जा रहा है। तमिलनाडु के लोग इस बार NDA गठबंधन को निर्णायक बढ़त देने वाले हैं, क्योंकि लोग बीजेपी का गवर्नेंस और डवलपमेंट मॉडल देख रहे हैं। सालों तक, DMK और कांग्रेस के लोग कहते थे कि तमिलनाडु में बीजेपी और एनडीए का कोई अस्तित्व नहीं है। लेकिन इस बार का चुनाव, DMK और कांग्रेस के इस भ्रम को तोड़ने वाला होगा। DMK और कांग्रेस के पास वोट मांगने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। इनके पास एक पुराना टेप रिकॉर्डर है, एक घिसा पिटा नेगेटिव एजेंडा है। तमिलनाडु के लोग भी जान गए हैं कि ये लोग ना अपने वादे पूरा कर सकते हैं, ना तमिलनाडु की संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। मैं आज विशेष रूप से तमिलनाडु के फर्स्ट टाइम वोटर्स से अपील करता हूं- आप ने कई बार विपक्षी दलों को मौका दिया है। एक बार NDA को अपना वोट दीजिए और हम पूरी शक्ति से आपके विकास के लिए काम करेंगे। आपके सपने ये मेरा संकल्प है। मेरा पल-पल आपके नाम है, मेरा पल-पल देश के नाम है। ट्वेंटी फॉर बाय सेवन फॉर 2047.

साथियों,
आपका ये प्यार, आपके ये आशीर्वाद, ऐसा लग रहा है ये चुनाव सभा नहीं, विजय सभा हो गई है। आने वाली 19 अप्रैल को देश के विकास के साथ-साथ तमिलनाडु के विकास के लिए भी NDA को वोट देना है। मैं जानता हूं, यहां DMK सरकार NDA के समर्थन में चल रही लहर से डर गई है। वो BJP-NDA के कार्यकर्ताओं को कैंपेन नहीं करने दे रही, रुकावटें पैदा कर रही है। लेकिन मैं BJP-NDA के हर कार्यकर्ता को कहूंगा, तमिलनाडु के लोग आपके साथ हैं, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं। मैं आपके साथ हूं। 19 अप्रैल को हर बूथ पर आपको ज्यादा से ज्यादा मतदान कराना है।

साथियों,
NDA ने तिरुनेलवेली श्री नयनार नागेंद्रन को, कन्याकुमारी से श्री पोन राधाकृष्णन को, तेनकाशी से श्री जॉन पैंडियन को, और तुत्तूकोड़ी से एस.डी.आर. विजयासीलन को, और विरुदुनगर से श्रीमती राधिका शरथकुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। ये सब लोग दिल्ली में आपकी आवाज़ बनेंगे। मैं देश के विकास के साथ तमिलनाडु का बहुत विकास करना चाहता हूं। ये मेरे साथी मेरे उस काम को आगे बढ़ाने के लिए मुझे इनकी दिल्ली में जरूरत है। आपको मेरे अनुरोध के साथ-साथ मेरा आपसे आग्रह भी है तमिलनाडु के हर परिवार में जाइए और जाके कहना मोदी जी ने आपको वणक्कम कहा है। हर परिवार तक मेरा वणक्कम पहुंचाना। ये उत्साह, उमंग बहुत लोगों को दिखता नहीं होगा। इसलिए मेरा आग्रह है कि आप आपना मोबाइल निकालिए और फ्लैश लाइट चालू कीजिए। जो दिल्ली में बैठकर जो राजनीति के प्लस-माइनस करते रहते हैं। उनको ये रोशनी तमिलनाडु की ताकत देखने में काम आएगी। मेरे साथ बोलिए... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...
बहुत बहुत धन्यवाद॥