PM’s address on the release of the digital version of Ramcharitmanas

Published By : Admin | August 31, 2015 | 17:18 IST
PM Narendra Modi launches digitised version of the Ramcharitmanas in New Delhi
Prime Minister Modi appreciates All India Radio's role in uniting the people and spreading awareness and information in India
Ramcharitmanas is a great epic. It contains the essence of India: PM Narendra Modi
The digital version of Ramcharitmanas will help people across the world: PM Modi

ये कार्यक्रम जहां हो रहा है, उस स्‍थान का नाम है पंचवटी और जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तब इस निवास स्‍थान में पंचवटी का निर्माण हुआ और नाम पंचवटी रखा गया था और शायद मैं मानता हूं आज का अवसर पंचवटी में होना अपने आप उसके कारण उसका एक कीर्तिमान बढ़ जाता है, क्‍योंकि रामचरितमानस की बात हो और पंचवटी न हो, तो फिर वो रामचरितमानस अधूरा लगता है और इसलिए ये अपने आप में एक सुफल संयोग है।

आज के इस अवसर को मैं अलग-अलग रूप में अनुभव करता हूं। कभी-कभी सरकार में लोग नौकरी करते-करते जीवन ऐसा बन जाता है, एक मशीनी गतिविधि बन जाती है और वही सुबह जाना, शाम को आना, वही फाइलें, वही बॉस, वहीं assistant, एक जिंदगी के बड़े महत्‍वपूर्ण 30-35 साल उसी में गुजर जाते है और ज्‍यादातर का मन बन जाता है कि चलो अब इस पाइपलाइन में घुसे है 30-35 साल के बाद उधर निकलेंगे। जिस रूप में निकलेंगे, निकलेंगे.. लेकिन यह अवसर देख करके ध्‍यान में आता है कि एक सरकार का मुलाजिम, जिसमें एक तड़प हो, कुछ करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, वो कितनी बड़ी विरासत छोड़ करके जाता है और इसलिए सबसे पहले मैं आकाशवाणी के उस एक सामान्‍य अधिकारी जिनके परिवारजन.. ये औरों के लिए भी प्रेरक बन सकता है। हमारी जिंदगी व्‍यर्थ नहीं जा रही है। हम जो फाइलों पर साइन करते है वो बेकार नहीं होती, कभी न कभी इतिहास को वो नया मोड़ देते है। ये आज की घटना उस बात का जीता-जागता सबूत है।

दूसरी बात, करीब-करीब 20-22 साल तक लगातार इसका रिकार्डिंग हुआ है। 22 साल तक उस team को बनाए रखना, उस rhythm को बनाए रखना और उसे उतना ही प्राणवान बनाए रखना, वरना तो यार बहुत हो गया अब कितने ऐपिसोड हो गए, अब तो लोगों को आदत हो गई, चलो निकाल दो। नहीं। इससे जुड़े हुए कलाकार शायद आज हिन्‍दुस्‍तान के बड़े कलाकारों की संख्‍या में उनका नाम नहीं होगा, लेकिन संगीत के साधक के रूप में। 22 साल करीब-करीब ये साधना कम नहीं होती जी, 14 लोगों ने team बन करके काम किया, 7 लोग हमारे बीच नहीं रहे, सबको आज सम्‍मानित करने का आज अवसर मिला और ये सिर्फ संगीत नहीं है। ये संगीत की भी साधना है, संस्‍कृति की भी साधना है और संस्‍कार की भी साधना है। और ये काम, देखिए हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव है, वैचारिक धरातल पर भी उतार-चढ़ाव आए हैं। आज अगर कोई ओम बोल दे तो हफ्तेभर विवाद चलता है कि ओम कैसे बोला जा सकता है। देश :::: सांम्‍प्रदायिक है। ऐसे देश में रामचरितमानस को किसी ने question नहीं किया, वो आज भी चल रहा है। हो सकता है आज के बाद किसी का ध्‍यान जाए और तूफान खड़ा कर दे, तो मैं नहीं जानता हूं। लेकिन कभी-कभार हम देखते है कि बहुत सालों से सुनते आए है, क्‍या बात है कि हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी। जवाब खोजने के लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यही बात है कि जिसके कारण हस्‍ती मिटती नहीं है हमारी, यही तो रामचरितमानस है, यही तो परम्‍परा है, यही संस्‍कार है।

हजारों साल से दुनिया में हमारी जो सबसे बड़ी विशेषता है जिसके लिए विश्‍व के किसी भी समाज को हमारे प्रति ईर्ष्‍या हो सकती है, वो है हमारी परिवार व्‍यवस्‍था और हम बचे हैं बने है उसका एक कारण.. जब तक हमारी परिवार व्‍यवस्‍था प्राणवान रही है, हम ताकतवर रहे है और उस परिवार व्‍यवस्‍था को प्राणवान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई है तो रामचरितमानस और राम जी का परिवार जीवन है। मर्यादा पुरूषोत्‍तम राम.. मर्यादाओं में किसने कैसे जीना परिवार में। किसकी कैसे मर्यादा को पालन करना, कैसा व्‍यवहार करना, आचरण का उत्‍तम संस्‍कार का हमें दर्शन होता है। रामचरितमानस की क्‍या ताकत देखिए हजारों साल हो गए, पीढि़यां बीत गई लेकिन वहीं भाव, वही परम्‍परा, वही संस्‍कार, वही संदेश आज भी जीवित है। आज एक बात हम कहें, लिखित कहें लेकिन संदेश पहुंचते-पहुंचते सात दिन में उसका अर्थ अलग ही हो जाता है। ऐसा कौन सा सामर्थ्‍य होगा कि जिसमें आज भी अनेक व्‍याख्‍याएं होने के बाद भी मूल तत्‍व को कहीं पर भी खरोच नहीं आई है। ऐसी कृति मानव को इस धरती के साथ जोड़ने का इतना बड़ा काम है।

आज भी अगर हम मॉरिशस में जाए दुनिया के कई देशों में, जो लोग गुलामी के कालखंड में मजदूर के रूप में उनको उठा करके ले जाया गया, कुछ नहीं था, निर्धन थे। लेकिन तुलसीकृत रामायण साथ ले जाना नहीं भूले, हनुमान चालीसा ले जाना नहीं भूले और डेढ़ सौ साल अलग जीवन, भाषा भूल गए, पहनावा बदल गया, नाम में बदलाव आया, लेकिन एक अमानत उनके पास बची जिससे आज भी भारत के साथ उनका नाता जुड़ा रहा है और कैसे जुड़ता है मुझे बहुत साल पहले की घटना याद है। वेंस्‍टइंडिज की एक क्रिकेट टीम भारत में खेलने के लिए आई थी। बहुत साल पहले की बात कर रहा हूं और उसके मैनेजर का मेरे यहा फोन आया। अब आज से 30-35, 40 साल पहले मुझे कोई पहचानता नहीं था, न कोई नाम न कोई जान। उनका टेलीफोन आया मुझे आश्‍चर्य हुआ, कि बोले वेंस्‍टइंडिज के क्रिकेटर के मैनेजर आप से बात करना चाहते है, मिलना चाहते है। तो किसी ने नाम दिया होगा, कही परिचय निकला होगा। मैंने कहा वेंस्‍टइंडिज टीम से मेरा तो वैसे भी क्रिकेट के खेल से.. मैं कोई खिलाड़ी तो हूं नहीं, तो पता चला तो बोले रामरिखीनाम है इनका और वो अपनी पत्‍नी के साथ आए है। मूल भारतीय है, तो मैं उनको मिलने गया तो वहां एचआरडी मिनिस्‍ट्री में काम करते थे और टीम मैनेजर के रूप में आए थे। तो मैंने कहा ये ऋषि शब्‍द कहा से आया तो बोले ऋषि में से आया हुआ होगा, फिर उनकी पत्‍नी का नाम पूछा तो बोले सीता। वो भारत पहली बार आए थे। लेकिन उनको अपना और मैं जब गया तो specially वो भारतीय परिवेश पहन करके बैठे थे। यानी एक प्रकार से एक ग्रंथ डेढ़ सौ साल के बाद भी अपनेपन से जोड़ करके रखता है] इसका ये उत्‍तम अनुभव.. और इस अर्थ में रामचरितमानस आज digital form में ये सबके सामने जा रहा है।

आकाशवाणी की ताकत बहुत बड़ी है, कितनी ही चीजें क्‍यों न बदल जाए, लेकिन कुछ मूलभूत चीजें होती है, जो अपनी.. बुलंदी कभी खोती नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में आकाशवाणी की ये बहुत बड़ी ताकत है। लोगों को भले एहसास न होता, हो मुझे तो एहसास है। हम लोग भली-भांति समझते है आकाशवाणी की ताकत क्‍या है। ये मेरा एक ऐसा अनुभव है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। और मैं हिमाचल में काम करता था, तो एक दिन मैं अपने दौरे पर जा रहा था तो ऐसे ही पहाड़ों में एक ढाबे पर रूक करके चाय पीने की सोचा, तो गाड़ी को रोकी। जब मैं नीचे उतरा तो जो ढाबे वाला था, चाय वाला उसने मुझे लड्डू खिलाया। मैंने कहा भई मुझे चाय पीनी है। अरे बोले साहब लड्डू खाओ पहले, मौज करो। मैंने कहा क्‍या बात है। बोले अरे आज अटल जी ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा अटल जी ने बम फोड़ दिया। अरे बोले अभी-अभी रोडियो पर सुना है कि भारत ने बम फोड़ा है। न्‍यू‍क्लियर टेस्‍ट हुआ था। मुझे वो पहली खबर आकाशवाणी के माध्‍यम से एक चाय वाले, ढाबे वाले ने दी।

यानी हम जिन चीजों का कभी-कभी महत्‍व नहीं समझते, वो कितना बड़ा होता है ओर सिर्फ खबर नहीं, सिर्फ खबर नहीं। हिमायल की पहाडि़यों में दूर-सुदूर अकेला चाय के ढाबे वाला, इस समाचार से अपने आपको इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गरीब होने के बावजूद भी अपनी दुकान की मिठाई मुफ्त में बांट रहा है। संदेश की ताकत क्या है, देखिए और समय ज्‍यादा नहीं हुआ होगा, ये 5 बजे declare हुआ होगा शाम को और मैं करीब 6 सवा 6 बजे वहां से गुजर रहा हूं। कहने का तात्‍पर्य ये कि हमारे ये communication अपने आप में इतने बड़े देश में बहुत अनिवार्य है, बहुत आवश्‍यक है और आज के competition के युग में आकाशवाणी को स्‍पर्धा में फंसने की जरूरत नहीं है जी। उसने तो अपनी मूलभूत धाराओं को पकड़ करके जन-जन के दिलों तक जुड़े रहना ओर देश को जोड़ के रखना और भविष्‍य के साथ उनको उत्‍साहित करते रहना ये उसका काम है। और उस काम को हम कैसे निभाएं।

युग बदलता जाए वैसे बदलाव आवश्‍यक होता है कायाकल्प जरूरी होते है ओर जब कायाकल्प की बात करता हूं तब आत्‍मा वही रहता है, समयाकूल बदलाव आता है। ये डिजिटल रूप उसका एक सही कदम है। हम लोग, अब मुझे बताया गया आकाशवाणी के पास 9 लाख घंटों का recording material उपलब्‍ध है, 9 लाख घंटे। शायद दुनिया में किसी एक ईकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जी और उस समय आकाशवाणी का जो रूप-रंग था बाद में जो हमारे यहां जो चला माहौल, अलग बात है, मैं जरूर मानता हूं कि आ‍काशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल undiluted ये उसमें उपलब्ध होगा। ये 9 लाख घंटों का जब digital version तैयार होगा फिर उसमें भाषाओं का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं कितनी बड़ी सेवा होगी, कितना बड़ा खजाना ओर एक प्रकार से digital history का ये सबसे बड़ा resource material बन सकता है। जो शायद आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होगे उनके लिए एक बहुत अवसर बनेगा। और भारत का दूरदर्शन का काम तो ऐसा है कि हिन्‍दुस्तान की सभी यूनिवर्सिटी में एकाध-एकाध विद्यार्थी ने सिर्फ आकाशवाणी के योगदान पर पीएचडी करनी चाहिए, रिसर्च करनी चाहिए। हम लोगों के स्‍वभाव नहीं है। एक एकाध प्रेमचंद की कथा पर तो रिसर्च कर लेते है, लेकिन इतना बड़ा खजाना। आगे चल करके Human Resource Department के लोग, Culture Department के लोग सोचें कि हमारे नौजवान इस खजाने का research करके क्‍या दे सकते है दुनिया को। हम आगे के लिए क्‍या सोचे। विश्‍व के लोग भी अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया भारत को जानने-समझने के लिए आतुर है, तैयार है। वे अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस ने ये message दिया है कि भारत के पास कुछ है जो हमें जानना है, पाना है ये मूढ़ बना है तब हमारा कर्तव्‍य बनता है कि हम इसको कैसे पहुंचाए और ये अगर हम कर सकते है तो हम कितनी बढ़ी सेवा कर सकते है।

इनदिनों आकाशवाणी एक अच्‍छा काम भी किया है.. आकाशवाणी नहीं, रेडियों के कारण धीरे-धीरे जो आज एफएम चैनल वगैरह सब जो दुनिया चलती है। लोग कहते है भ्रष्‍टाचार के लिए क्‍या किया? हमारे यहां FM चैनल सारी पहले सरकारी खजाने में 80 सौ करोड़ रुपया देती थी। अभी आक्‍शन चल रहा है, आक्‍शन से देंगे ट्रांसपैरेंसी, परिणाम क्‍या आया मालूम है अब तक करीब-करीब साढ़े 11 सौ करोड़ की बोली बोल चुके है, अभी तो बोली चल रही है और उसके जो rules and regulations है उसके हिसाब से सरकार के खजाने में जो 80 सौ करोड़ आते थे एक स्थिति आएंगी 27 सौ-28 सौ करोड़ रुपए आएगे। व्‍यवस्‍थाओं को transparent करने से व्‍यवस्‍थाओं को आधुनिक टेक्‍नोलोजी से जोड़ करके भ्रष्‍टाचार से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है। कोई नया आर्थिक बोझ डाले बिना भी देश के विकास में धन कैसे उपलब्‍ध किया जो सकता है इसका एक बेहतरीन नमूना.. ये आकाशवाणी और रेडियो के संबंध में जो भारत सरकार ने अरुण जी के नेतृत्‍व में किया है, उसका ये परिणाम है।

तो हर दिशा में हम इस काम को आगे बढ़ा रहे है और मुझे आशा है कि ये digital version के कारण विश्‍व के लोग जो जानना चाहते है, समझना चाहते है उनके लिए उपकारक होगा। भोपाल केंद्र के लोगों ने गौरवपूर्ण काम किया है; आने वाले दिनों में भोपाल में एक विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन हो रहा है। आकाशवाणी सोचे विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में जो delegate आने वाले है भोपाल में ही हो रहा है तो ये उनको गिफ्ट के रूप में दिया जाए, ताकि एक souvenir..एक सच्चा souvenir ये बनेगा, जो विश्‍वभर से गरीब, काफी बड़ी तादात में लोग आ रहे है तो एक बहुत बड़ा अवसर बनेगा।

मैं फिर एक बार विभाग को, प्रसार भारती को, आकाशवाणी को ये बहुमूल्य चीजें संभाले रखने के लिए बधाई देता हूं। और देशवासियों को ये नजराना देते हुए मैं गर्व महसूस करता हूं। मैं आभारी हूं डॉ. कर्ण सिंह जी का और मैंने देखा है कि हमारे कर्ण सिंह जी इन चीजों से ऐसे जुड़े हुए है, इसका इतना महामूल्‍य मानते है वो, कि उनको कोई राजकीय विचारधारा कभी बाधा नहीं बनती है और हमेशा ऐसी चीजों को वो आर्शीवाद देते रहें, प्रोत्‍साहन देते रहें। आज विशेषरूप आए इसलिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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'नशा मुक्त युवा के लिए विकसित भारत संकल्प अभियाना'च्या शुभारंभाप्रसंगी पंतप्रधानांनी दुरदृश्य प्रणालीद्वारे केलेल्या संबोधनाचा मूळ मजकूर
August 02, 2026
I urge every citizen, especially our youth, to join this movement: PM
Today, as the nation has set the goal of a Viksit Bharat, it is imperative that the country's youth remain fit, brimming with self-confidence and permanently steer clear of drugs: PM
We must protect every youth from falling into the trap of addiction: PM
Society’ support, yoga and meditation give strength to our inner selves against addiction and today facilities like rehabilitation centers also help quit addiction: PM
Even if a youth has mistakenly fallen into the trap of addiction, it absolutely does not mean that all doors are closed for them: PM
We must always remember that if a child in the house falls victim to addiction, we must not hide it but seek medical help to free the child from addiction: PM
We should also create a culture of open communication with children in the family, so that you can hold their hand before they get caught in such a whirlpool: PM
I appeal to our professors to discuss the perils of drug abuse with their students and spearhead a movement against addiction on campuses to achieve significant results: PM

नमस्कार!

आज आपण सर्व देशवासी एका महान आणि महत्त्वपूर्ण संकल्पासाठी एकत्र आलो आहोत. या संकल्पाला घेऊन, या कार्यक्रमाशी जोडले गेलेले सर्व पूज्य संतजन, विविध राज्यांचे प्रतिनिधित्व करणारे राज्यपाल, सर्व मुख्यमंत्री, इतर सर्व लोकप्रतिनिधी, तसेच देशभरातील 28 हजार पेक्षा जास्त ठिकाणांवरून जोडले गेलेले 1 कोटीहून अधिक युवा मित्रांनो, मी आज या शुभप्रसंगी, पवित्र संकल्पासाठी कोट्यवधी युवकांचे मनःपूर्वक अभिनंदन करतो. आज आपण सर्व ज्या अभियानाचे साक्षीदार बनत आहोत, ते अभियान केवळ एका व्यक्तीसाठी नाही, तर कुटुंबासाठी आहे, समाजासाठीही आहे आणि सर्वात महत्त्वाचे म्हणजे, हे राष्ट्रासाठी आहे.

मित्रांनो,

‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ अंतर्गत ‘नशामुक्त युवा’ या अभियानाचे नावच त्यामागील संकल्प स्पष्ट करते. कारण आज देशाने विकसित भारताचे ध्येय निश्चित केले आहे. ते साध्य करण्यासाठी देशातील युवकाने शारीरिकदृष्ट्या निरोगी, मानसिकदृष्ट्या सक्षम, आत्मविश्वासाने परिपूर्ण आणि अमली पदार्थांसारख्या घातक व्यसनांपासून कायमस्वरूपी दूर राहणे आवश्यक आहे. हेच या अभियानाचे मुख्य उद्दिष्ट आहे. म्हणून आपण सर्वांनी हा संकल्प घ्यायचा आहे, आपल्या युवकांनी व्यसन आणि अमली पदार्थांचे दुष्परिणाम समजून घ्यावेत, त्याबाबत सर्वतोपरी जागरूक राहावे आणि त्यापासून दूर राहावे. या संकल्पाच्या पूर्ततेमध्ये ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियानाची मोठी भूमिका आहे.

मित्रांनो,

काशीचा खासदार असण्याच्या नात्याने मला आनंद आहे की, या अभियानाचा प्रायोगिक प्रकल्प गेल्या वर्षी काशीच्या पवित्र भूमीवरून सुरू झाला होता. त्यामुळे या अभियानात वैज्ञानिक दृष्टिकोनासोबतच आध्यात्मिक ऊर्जा, संतांचे आशीर्वाद आणि महान सांस्कृतिक वारसाही आहे. शतकानुशतके व्यसनाला नाकारत आलेल्या आपल्या संस्कृतीचे समर्पणही या अभियानामागे आहे. हेच कारण आहे, देशातील 125 पेक्षा जास्त आध्यात्मिक संघटना कोट्यवधी देशवासीयांच्या हितासाठी आज आपल्यासोबत जोडल्या गेल्या आहेत. सामाजिक संघटनांनी, स्वयंसेवी संघटनांनी या दिशेने संकल्प घेतला आहे. सर्वांनी मिळून ‘काशी डिक्लेरेशन’ च्या माध्यमातून या अभियानाचा कृती आराखडा तयार केला आहे. आज आपण पाहत आहोत की, काशीच्या भूमीतून सुरू झालेला हा लोककल्याणकारी विचार आता राष्ट्रीय अभियानाचे रूप धारण करून देशव्यापी उपक्रम बनला आहे. आजपासून देशभरात ‘नशामुक्त युवा’ अभियानाचा औपचारिक शुभारंभ होत आहे.

मित्रांनो,

काही कार्ये अशी असतात की एखादी व्यक्ती ती एकट्याने करण्याचा प्रयत्न करते, तेव्हा कधीकधी ती निराश होते, थकवा जाणवतो आणि दीर्घकाळ सातत्याने प्रयत्न करण्याची प्रेरणा कमी होते. परंतु जेव्हा तीच कार्ये सामूहिक अभियानाचे रूप धारण करतात आणि कोट्यवधी लोक खांद्याला खांदा लावून त्यात सहभागी होतात, तेव्हा एकट्याने काही करू न शकणाऱ्यांनाही नवी ऊर्जा मिळते. सामूहिक प्रयत्नांची स्वतःची एक मोठी ताकद असते आणि आज हीच ताकद घेऊन हे अभियान प्रत्येक युवा मनाला प्रेरणा देणार आहे. काही वेळापूर्वी देशातील लाखो तरुणांनी नशामुक्तीची शपथ घेतली आहे. तुम्ही तुमचे जीवन व्यसनांपासून दूर ठेवण्याचा संकल्प केला आहे. तसेच, तुमच्या शाळेत, महाविद्यालयात आणि समाजात नशामुक्तीचा संदेश पोहोचवण्याचाही संकल्प केला आहे.

मित्रांनो,

आज घेतलेला हा संकल्प येणाऱ्या 100 आठवड्यांपर्यंत सातत्याने असाच पुढे नेला जाईल. प्रत्येक रविवारी, कला, संस्कृती, क्रीडा, ध्यान, अध्यात्म आणि सेवेशी संबंधित विविध उपक्रम आयोजित केले जातील. नशा मुक्तीचा संदेश नवीन लोकांपर्यंत पोहोचेल. या माध्यमातून नशामुक्तीचा संदेश अधिकाधिक लोकांपर्यंत पोहोचविला जाईल. येणारे 100 रविवार हे नशामुक्त भारताच्या दिशेने उचललेली 100 भक्कम पावले ठरतील.

मित्रांनो,

आज देशभरातील हजारो शाळा, महाविद्यालये आणि विद्यापीठातील लाखो विद्यार्थी या कार्यक्रमाशी ऑनलाइन जोडले गेले आहेत. माय भारत चे लाखो स्वयंसेवकही आज या अभियानाशी जोडले गेले आहेत. माझे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) चे युवकही आज आपल्या सोबत आहेत. देशाच्या विविध भागांतून, विविध संस्थांतून आणि विविध पार्श्वभूमीतील एक कोटीहून अधिक युवक आज या अभियानासाठी एकत्र आले आहेत. माझी आपण सर्वांना विनंती आहे की, या व्यापक जनआंदोलनाचे नेतृत्व तुम्हीच करणार आहात. भारतातील युवक किती जागरूक, समंजस आणि आपल्या कर्तव्यांप्रती किती कटिबद्ध आहे, यावरील माझा विश्वास तुम्ही अधिक दृढ केला आहे. या अभियानासाठी मी आपण सर्वांना मनःपूर्वक शुभेच्छा देतो.

माझ्या युवा मित्रांनो,

तुम्ही भारताची अमृत पिढी आहात. तुम्ही पुढील 20 ते 25 वर्षांत केवळ तुमच्या स्वतःच्या जीवनाला दिशा देणार नाही, तर 2047 पर्यंत विकसित भारताचे ध्येय साकार करण्यामध्येही तुमचीच सर्वात महत्त्वाची भूमिका असेल. विकसित भारताच्या यशाचे शिखर गाठण्याचा आणि त्या यशाचे फळ उपभोगण्याचा मानही तुम्हालाच मिळणार आहे. देशाला तुमच्या ऊर्जेची, कल्पनाशक्तीची आणि प्रतिभेची गरज आहे. त्यामुळे देशाच्या भविष्यासाठी आणि तुमच्या स्वतःच्या आयुष्यासाठी व्यसनमुक्त राहणे अत्यंत आवश्यक आहे. व्यसनामुळे माणसाचे लक्ष भरकटते आणि हळूहळू तो स्वतःच्या स्वप्नांपासून दूर जातो. थोड्याच वेळापूर्वी आपल्या युवा मित्रांनी प्रभावी नाट्यप्रयोग सादर केला. त्यांनी व्यसनाची समस्या, त्यातून निर्माण होणारे संकट आणि त्यावर सामूहिक प्रयत्नांतून मात करण्याचा मार्ग कमी वेळेत अतिशय प्रभावीपणे दाखवून दिला. हा नाट्यप्रयोग लहान असला, तरी पण जसे त्यांनी सांगितले, चला आपण नाटक पाहूया! हे नाटक नव्हते, हा आम्हा लोकांसाठी एक खूप मोठा संदेश होता. आपल्याला जागे करत होता, आपल्याला संघर्ष करण्यासाठी प्रेरित करत होता.

मित्रांनो,

आज आपण पाहतो की, भारतातील युवा स्टार्टअप्सच्या क्षेत्रात आघाडीवर आहेत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्रात नेतृत्व करत आहेत, क्रीडा क्षेत्रात तिरंगा अभिमानाने फडकवत आहेत आणि अवकाशापासून विज्ञानापर्यंत नवनवे विक्रम प्रस्थापित करत आहेत. परंतु एखादा युवक जर अमली पदार्थांच्या व्यसनाच्या आहारी गेला, तर केवळ एक युवक हरवत नाही, तर एक स्वप्न अकाली संपते. एक संपूर्ण कुटुंब उद्ध्वस्त होते आणि समाजालाही त्याचे परिणाम भोगावे लागतात. व्यसन केवळ शरीराचे नुकसान करत नाही; ते एका आईच्या चेहऱ्यावरील हास्य हिरावून घेते. ते एका वडिलांच्या स्वप्नांचा चुराडा करते. बहिणीच्या राखीच्या अपेक्षांना धक्का देते. लहान भावाच्या आदर्श व्यक्तिमत्त्वालाच हरवून बसते. घरातील ज्येष्ठांना दररोज आपल्या लेकराला हळूहळू स्वतःचे अस्तित्व गमावताना पाहण्याचे दुःख सहन करावे लागते. जेव्हा एखादे कुटुंब आणि समाज अशा संकटाला सामोरे जातात, तेव्हा त्याचा परिणाम राष्ट्राच्या सामर्थ्यावरही होतो. म्हणूनच भारताचे शत्रू देशही कटकारस्थान रचून आपल्या युवकांना अमली पदार्थांच्या व्यसनाच्या विळख्यात ओढण्याचा प्रयत्न करतात. अमली पदार्थांचा पुरवठा करून पैसा कमावणे आणि भारतासारख्या देशाला कमकुवत करणे, हा त्यांच्या दहशतवादी कारवायांचाच एक भाग असतो. म्हणूनच प्रत्येक युवकाला व्यसनाच्या विळख्यात अडकण्यापासून वाचवणे, ही आपली सामूहिक जबाबदारी आहे.

मित्रांनो,

व्यसनमुक्त राहून तुम्हाला तुमच्या क्षमतांचे संरक्षण करायचे आहे. हे लक्षात ठेवा, अमली पदार्थ काही काळासाठी 'हाय' (High) असल्याची भावना देतात; पण ते तुमचे करिअर आणि कौटुंबिक आयुष्य 'लो' (Low) म्हणजेच अधोगतीकडे नेतात. त्यामुळे व्यसनाला कोणत्याही स्वरूपात स्वीकारता कामा नये.

मित्रांनो,

आपल्या समाजात व्यसनाकडे नेहमीच एक वाईट प्रवृत्ती म्हणून पाहिले गेले आहे. आपल्या संतांनी आणि गुरुजनांनी आपल्याला त्यापासून दूर राहण्याचा उपदेश केला आहे. श्री गुरु ग्रंथ साहिबमध्येही म्हटले आहे—"जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ।आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥" याचा अर्थ असा की, ज्या पदार्थाच्या सेवनामुळे बुद्धी आणि विवेक नष्ट होतो, माणूस आपले-परके यातील फरक विसरतो, असे व्यसन त्याला अधःपतनाच्या मार्गावर नेते.

मित्रांनो,

आपल्या संस्कृतीत व्यसनापासून दूर राहण्याचा इशाराही दिला गेला आहे आणि जर व्यसन जडलेच, तर त्यातून बाहेर पडण्याचे मार्गही सांगितले आहेत. समाजाचे सहकार्य, योग आणि ध्यान यांची शक्ती व्यसनाविरुद्ध लढण्यासाठी आपल्या अंतर्मनाला बळ देते. आज तर व्यसनमुक्तीसाठी पुनर्वसन केंद्रे यांसारख्या सुविधाही उपलब्ध आहेत. म्हणूनच, एखादा युवक चुकून व्यसनाच्या आहारी गेला, तर याचा अर्थ त्याच्यासाठी सर्व मार्ग बंद झाले असा अजिबात होत नाही. घरातील एखादे मूल व्यसनाधीन झाले असेल, तर सामाजिक प्रतिष्ठेच्या नावाखाली ही गोष्ट लपवू नका. आवश्यक असेल तेथे मदत मागा, त्याच्याशी मोकळेपणाने संवाद साधा, तज्ज्ञांचे मार्गदर्शन घ्या आणि वैद्यकीय उपचारांच्या मदतीने त्याला व्यसनमुक्त करण्याचा प्रयत्न करा. आपल्या कुटुंबात मुलांशी मोकळेपणाने संवाद साधण्याची संस्कृती विकसित झाली पाहिजे, जेणेकरून ते अशा विळख्यात अडकण्यापूर्वीच आपण त्यांचा हात धरू शकू. थोडे लक्ष दिल्यास बदल सहज लक्षात येतात—मुलाच्या वागण्यात अचानक बदल होणे, तो हरवलेला किंवा गप्पगप्प राहणे, चेहरा लपवणे, खोलीत स्वतःला बंद करून घेणे, उशिरापर्यंत घरी न येणे, वारंवार आणि अवाजवी पैसे मागणे—ही सर्व लक्षणे काहीतरी बिनसल्याची सूचना देतात. अशा संकेतांकडे दुर्लक्ष न करता वेळेवर योग्य पावले उचलणे अत्यंत आवश्यक आहे.

मित्रांनो,

मी आपल्या महाविद्यालये आणि विद्यापीठांतील प्राध्यापकांनाही एक आवाहन करू इच्छितो. अभ्यासक्रम शिकवण्याबरोबरच विद्यार्थ्यांशी अमली पदार्थांच्या दुष्परिणामांबाबत संवाद साधा. आपल्या परिसरात व्यसनमुक्तीची चळवळ उभी करा. तुमचे प्रयत्न मोठे आणि सकारात्मक परिणाम घडवू शकतात. आणि मित्रांनो, आणखी एक महत्त्वाची गोष्ट आपण लक्षात ठेवली पाहिजे. जे युवक व्यसनाशी लढून त्यातून बाहेर पडतात, ते कमकुवत नसतात. उलट, जो व्यसनावर मात करून त्यातून बाहेर पडतो, तो खरा योद्धा असतो. समाजाने अशा युवकांचा सन्मान करावा, त्यांना आपलेपणा द्यावा आणि आयुष्यात पुन्हा उभे राहण्याची दुसरी संधी द्यावी. कारण एखाद्याचा व्यसनाशी संबंधित भूतकाळ ही त्याची ओळख असू शकत नाही; त्याचे धैर्य आणि त्याने केलेला संघर्ष हीच त्याची खरी ओळख असते.

मित्रांनो,

अमली पदार्थांविरोधातील या लढ्यात सरकारही आज युवकांच्या खांद्याला खांदा लावून उभे आहे. देशभरात अमली पदार्थांच्या तस्करांविरुद्ध आणि अवैध व्यापार करणाऱ्यांविरुद्ध कठोर कारवाई केली जात आहे. पूर्वीच्या तुलनेत अनेकपटींनी अधिक अटक करण्यात आल्या आहेत आणि हजारो कोटी रुपयांचे अमली पदार्थ जप्त करण्यात आले आहेत. यावरून या समस्येविरुद्ध सरकार किती कठोर आणि कटिबद्ध आहे, हे स्पष्ट होते. मला विश्वास आहे की केंद्र सरकार, राज्य सरकारे आणि सर्व संबंधित यंत्रणा हे अभियान मिशन मोडमध्ये राबवतील. तसेच मला खात्री आहे की भारतातील युवक व्यसनमुक्त राहून केवळ आपल्या युवा शक्तीचे संरक्षण करणार नाहीत, तर विकसित भारताच्या संकल्पपूर्तीतही सक्रिय योगदान देतील. आज माझ्यासमोर उपस्थित असलेल्या अनेक पूज्य संतांना मी माझ्यासमोर पाहत आहे, त्यांना मी मनःपूर्वक प्रणाम करतो. देशभरात कार्यरत असलेल्या सर्व सामाजिक संस्था, आध्यात्मिक संस्था, पूज्य गुरुजन तुमचे देशाच्या कानाकोपऱ्यात संघटन आहे, तुमचे तरुण कार्यकर्ते देखील आहेत. माझी एक विनंती आहे. येत्या 100 आठवड्यांत प्रत्येक संस्था एक-एक आठवडा आपल्या जबाबदारीवर घेऊ शकते. त्या आठवड्यात संपूर्ण देशभर विविध उपक्रमांचे नेतृत्व करावे आणि रविवारी मोठ्या प्रमाणावर कार्यक्रम आयोजित करावेत. पुढील आठवड्यात दुसरी संस्था, त्यानंतर तिसरी संस्था अशा प्रकारे सर्वांनी पुढाकार घ्यावा. जर आपल्या देशातील सामाजिक, आध्यात्मिक आणि युवा संघटनांनी प्रत्येकी एक आठवडा जबाबदारी स्वीकारली आणि सर्वांनी मिळून प्रत्येक रविवारी मोठे जनजागृती अभियान राबवले, तर देशात किती व्यापक आणि प्रभावी जनआंदोलन उभे राहू शकते, याची आपण कल्पनाही करू शकत नाही. या पवित्र कार्यासाठी वेळ काढून आम्हाला आशीर्वाद दिल्याबद्दल मी सर्व संत, आचार्य आणि विविध संस्थांच्या पदाधिकाऱ्यांचे मनःपूर्वक आभार मानतो. या अभियानात सहभागी झालेल्या एक कोटीहून अधिक युवकांचे मी विशेष अभिनंदन करतो. तुम्ही अत्यंत महत्त्वाचे कार्य हाती घेतले आहे. माय भारतच्या स्वयंसेवकांचेही मी विशेष अभिनंदन करतो. त्यांनी जे ठरवले ते कृतीत उतरवण्याची त्यांची क्षमता आज पुन्हा सिद्ध झाली आहे. काही दिवसांपूर्वी मला माय भारतच्या स्वयंसेवकांना भेटण्याची संधी मिळाली होती. त्यांनी भारताच्या सीमावर्ती गावांमध्ये जाऊन एक-एक आठवडा मुक्काम केला. ज्यांना पूर्वी देशाचे शेवटचे गाव म्हटले जात होते, त्या गावांना आज आपण देशाचे पहिले गाव म्हणतो. तेथील त्यांचे अनुभव अत्यंत प्रेरणादायी होते. आज इतक्या मोठ्या प्रमाणावर हा कार्यक्रम यशस्वीपणे आयोजित करण्याची क्षमता माय भारतच्या स्वयंसेवकांनी दाखवून दिली आहे. हे त्यांच्या राष्ट्राप्रती असलेल्या जागरूकतेचे, समर्पणाचे आणि सेवाभावाचे प्रतीक आहे. मी त्यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन करतो. मला पूर्ण विश्वास आहे की आपल्या सर्वांच्या सामूहिक प्रयत्नांमुळे ही चळवळ घराघरांत पोहोचेल, प्रत्येक युवकाच्या मनापर्यंत पोहोचेल आणि अमली पदार्थांच्या अवैध व्यापार करणाऱ्यांसाठी मोठा धाक निर्माण करेल. चला, आपण सर्वजण मिळून हा संकल्प पुढे नेऊया. आपणा सर्वांना मनःपूर्वक शुभेच्छा!

खूप-खूप धन्यवाद !