मेरे अटल जी

Published By : Admin | August 17, 2018 | 09:09 IST
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अटल जी अब नहीं रहे। मन नहीं मानता। अटल जी, मेरी आंखों के सामने हैं, स्थिर हैं। जो हाथ मेरी पीठ पर धौल जमाते थे, जो स्नेह से, मुस्कराते हुए मुझे अंकवार में भर लेते थे, वे स्थिर हैं। अटल जी की ये स्थिरता मुझे झकझोर रही है, अस्थिर कर रही है। एक जलन सी है आंखों में, कुछ कहना है, बहुत कुछ कहना है लेकिन कह नहीं पा रहा। मैं खुद को बार-बार यकीन दिला रहा हूं कि अटल जी अब नहीं हैं, लेकिन ये विचार आते ही खुद को इस विचार से दूर कर रहा हूं। क्या अटल जी वाकई नहीं हैं? नहीं। मैं उनकी आवाज अपने भीतर गूंजते हुए महसूस कर रहा हूं, कैसे कह दूं, कैसे मान लूं, वे अब नहीं हैं।

वे पंचतत्व हैं। वे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, सबमें व्याप्त हैं, वेअटल हैं, वे अब भी हैं। जब उनसे पहली बार मिला था, उसकी स्मृति ऐसी है जैसे कल की ही बात हो। इतने बड़े नेता, इतने बड़े विद्वान। लगता था जैसे शीशे के उस पार की दुनिया से निकलकर कोई सामने आ गया है। जिसका इतना नाम सुना था, जिसको इतना पढ़ा था, जिससे बिना मिले, इतना कुछ सीखा था, वो मेरे सामने था। जब पहली बार उनके मुंह से मेरा नाम निकला तो लगा, पाने के लिए बस इतना ही बहुत है। बहुत दिनों तक मेरा नाम लेती हुई उनकी वह आवाज मेरे कानों से टकराती रही। मैं कैसे मान लूं कि वह आवाज अब चली गई है। 

कभी सोचा नहीं था, कि अटल जी के बारे में ऐसा लिखने के लिए कलम उठानी पड़ेगी। देश और दुनिया अटल जी को एक स्टेट्समैन, धारा प्रवाह वक्ता, संवेदनशील कवि, विचारवान लेखक, धारदार पत्रकार और विजनरी जननेता के तौर पर जानती है। लेकिन मेरे लिए उनका स्थान इससे भी ऊपर का था। सिर्फ इसलिए नहीं कि मुझे उनके साथ बरसों तक काम करने का अवसर मिला, बल्कि मेरे जीवन, मेरी सोच, मेरे आदर्शों-मूल्यों पर जो छाप उन्होंने छोड़ी, जो विश्वास उन्होंने मुझ पर किया, उसने मुझे गढ़ा है, हर स्थिति में अटल रहना सिखाया है।

हमारे देश में अनेक ऋषि, मुनि, संत आत्माओं ने जन्म लिया है। देश की आज़ादी से लेकर आज तक की विकास यात्रा के लिए भी असंख्य लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की रक्षा और 21वीं सदी के सशक्त, सुरक्षित भारत के लिए अटल जी ने जो किया, वह अभूतपूर्व है।

उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था -बाकी सब का कोई महत्त्व नहीं। इंडिया फर्स्ट –भारत प्रथम, ये मंत्र वाक्य उनका जीवन ध्येय था। पोखरण देश के लिए जरूरी था तो चिंता नहीं की प्रतिबंधों और आलोचनाओं की, क्योंकि देश प्रथम था।सुपर कंप्यूटर नहीं मिले, क्रायोजेनिक इंजन नहीं मिले तो परवाह नहीं, हम खुद बनाएंगे, हम खुद अपने दम पर अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक कुशलता के बल पर असंभव दिखने वाले कार्य संभव कर दिखाएंगे। और ऐसा किया भी।दुनिया को चकित किया। सिर्फ एक ताकत उनके भीतर काम करती थी- देश प्रथम की जिद।   

काल के कपाल पर लिखने और मिटाने की ताकत, हिम्मत और चुनौतियों के बादलों में विजय का सूरज उगाने का चमत्कार उनके सीने में था तो इसलिए क्योंकि वह सीना देश प्रथम के लिए धड़कता था। इसलिए हार और जीत उनके मन पर असर नहीं करती थी। सरकार बनी तो भी, सरकार एक वोट से गिरा दी गयी तो भी, उनके स्वरों में पराजय को भी विजय के ऐसे गगन भेदी विश्वास में बदलने की ताकत थी कि जीतने वाला ही हार मान बैठे।  

अटल जी कभी लीक पर नहीं चले। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नए रास्ते बनाए और तय किए। आंधियों में भी दीये जलाने की क्षमता उनमें थी। पूरी बेबाकी से वे जो कुछ भी बोलते थे, सीधा जनमानस के हृदय में उतर जाता था। अपनी बात को कैसे रखना है, कितना कहना है और कितना अनकहा छोड़ देना है, इसमें उन्हें महारत हासिल थी।

राष्ट्र की जो उन्होंने सेवा की, विश्व में मां भारती के मान सम्मान को उन्होंने जो बुलंदी दी, इसके लिए उन्हें अनेक सम्मान भी मिले। देशवासियों ने उन्हें भारत रत्न देकर अपना मान भी बढ़ाया। लेकिन वे किसी भी विशेषण, किसी भी सम्मान से ऊपर थे।

जीवन कैसे जीया जाए, राष्ट्र के काम कैसे आया जाए, यह उन्होंने अपने जीवन से दूसरों को सिखाया। वे कहते थे, “हम केवल अपने लिए ना जीएं, औरों के लिए भी जीएं...हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें। अगर भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं हो सकता। किंतु यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी” 

देश के गरीब, वंचित, शोषित के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए वे जीवनभर प्रयास करते रहे। वेकहते थे गरीबी, दरिद्रता गरिमा का विषय नहीं है, बल्कि यह विवशता है, मजबूरी हैऔर विवशता का नाम संतोष नहीं हो सकता”। करोड़ों देशवासियों को इस विवशता से बाहर निकालने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किए। गरीब को अधिकार दिलाने के लिए देश में आधार जैसी व्यवस्था, प्रक्रियाओं का ज्यादा से ज्यादा सरलीकरण, हर गांव तक सड़क, स्वर्णिम चतुर्भुज, देश में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्पों से जुड़ा था।

आज भारत जिस टेक्नोलॉजी के शिखर पर खड़ा है उसकी आधारशिला अटल जी ने ही रखी थी। वे अपने समय से बहुत दूर तक देख सकते थे - स्वप्न दृष्टा थे लेकिन कर्म वीर भी थे।कवि हृदय, भावुक मन के थे तो पराक्रमी सैनिक मन वाले भी थे। उन्होंने विदेश की यात्राएं कीं। जहाँ-जहाँ भी गए, स्थाई मित्र बनाये और भारत के हितों की स्थाई आधारशिला रखते गए। वे भारत की विजय और विकास के स्वर थे।

अटल जी का प्रखर राष्ट्रवाद और राष्ट्र के लिए समर्पण करोड़ों देशवासियों को हमेशा से प्रेरित करता रहा है। राष्ट्रवाद उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं था बल्कि जीवन शैली थी। वे देश को सिर्फ एक भूखंड, ज़मीन का टुकड़ा भर नहीं मानते थे, बल्कि एक जीवंत, संवेदनशील इकाई के रूप में देखते थे। “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष हैयह सिर्फ भाव नहीं, बल्कि उनका संकल्प था, जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया। दशकों का सार्वजनिक जीवन उन्होंने अपनी इसी सोच को जीने में, धरातल पर उतारने में लगा दिया। आपातकाल ने हमारे लोकतंत्र पर जो दाग लगाया था उसको मिटाने के लिए अटल जी के प्रयास को देश हमेशा याद रखेगा।

 

राष्ट्रभक्ति की भावना, जनसेवा की प्रेरणा उनके नाम के ही अनुकूल अटल रही। भारत उनके मन में रहा, भारतीयता तन में। उन्होंने देश की जनता को ही अपना आराध्य माना। भारत के कण-कण, कंकर-कंकर, भारत की बूंद-बूंद को, पवित्र और पूजनीय माना।

जितना सम्मान, जितनी ऊंचाई अटल जी को मिली उतना ही अधिक वह ज़मीन से जुड़ते गए। अपनी सफलता को कभी भी उन्होंने अपने मस्तिष्क पर प्रभावी नहीं होने दिया। प्रभु से यश, कीर्ति की कामना अनेक व्यक्ति करते हैं, लेकिन ये अटल जी ही थे जिन्होंने कहा,

हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना।

गैरों को गले ना लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना

अपने देशवासियों से इतनी सहजता औरसरलता से जुड़े रहने की यह कामना ही उनको सामाजिक जीवन के एक अलग पायदान पर खड़ा करती है।

वेपीड़ा सहते थे, वेदना को चुपचाप अपने भीतर समाये रहते थे, पर सबको अमृत देते रहे- जीवन भर। जब उन्हें कष्ट हुआ तो कहने लगे- “देह धरण को दंड है, सब काहू को होये, ज्ञानी भुगते ज्ञान से मूरख भुगते रोए। उन्होंने ज्ञान मार्ग से अत्यंत गहरी वेदनाएं भी सहन कीं और वीतरागी भाव से विदा ले गए।  

यदि भारत उनके रोम रोम में था तो विश्व की वेदना उनके मर्म को भेदती थी। इसी वजह से हिरोशिमा जैसी कविताओं का जन्म हुआ। वे विश्व नायक थे। मां भारतीके सच्चे वैश्विक नायक। भारत की सीमाओं के परे भारत की कीर्ति और करुणा का संदेश स्थापित करने वाले आधुनिक बुद्ध। 

कुछ वर्ष पहले लोकसभा में जब उन्हें वर्ष के सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से सम्मानित किया गया था तब उन्होंने कहा था, “यह देश बड़ा अद्भुत है, अनूठा है। किसी भी पत्थर को सिंदूर लगाकर अभिवादन किया जा रहा है, अभिनंदन किया जा सकता है।”

अपने पुरुषार्थ को, अपनी कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र के लिए समर्पित करना उनके व्यक्तित्व की महानता को प्रतिबिंबित करता है। यही सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए उनका सबसे बड़ा और प्रखर संदेश है। देश के साधनों, संसाधनों पर पूरा भरोसा करते हुए, हमें अब अटल जी के सपनों को पूरा करना है, उनके सपनों का भारत बनाना है।

नए भारत का यही संकल्प, यही भावलिए मैं अपनी तरफ से और सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उन्हें नमन करता हूं।

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ഇന്ത്യയിലെ 100 കോടി കോവിഡ് വാക്സിൻ ഡോസുകൾ ജനകീയ പങ്കാളിത്തത്തിലൂടെ എന്തെല്ലാം നേടാൻ കഴിയുമെന്നതിന്റെ തെളിവാണ് (നരേന്ദ്ര മോദി)
October 22, 2021
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ന്യൂഡൽഹി ∙ കോവിഡ് വാക്സിനേഷൻ 100 കോടിയെന്ന ചരിത്ര മുഹൂർത്തം കഠിനവും അസാധാരണവുമായ നേട്ടമെന്നു പ്രധാനമന്ത്രി നരേന്ദ്ര മോദി. രാജ്യത്തെ അഭിസംബോധന ചെയ്യുമ്പോഴാണ് മോദി വാക്സിനേഷൻ നേട്ടത്തെക്കുറിച്ചു സംസാരിച്ചത്. ഓരോ ഇന്ത്യക്കാരന്റെയും നേട്ടമാണിത്. ഇന്ത്യയുടെ വാക്സിനേഷന്‍ യജ്ഞത്തില്‍ പലര്‍ക്കും സംശയമുണ്ടായിരുന്നു. അവരുടെ ചോദ്യങ്ങള്‍ക്ക് ഇതാ ഉത്തരമായെന്നും പ്രധാനമന്ത്രി പറഞ്ഞു.

ഒക്ടോബർ 21ന് ഇന്ത്യ 100 കോടി വാക്സിനേഷൻ നടപ്പാക്കി ചരിത്രം രചിച്ചു. ഇതാണ് പുതിയ ഇന്ത്യ. നൂറു കോടി വാക്സീൻ എന്നത് വെറും അക്കം മാത്രമല്ല. ഇത് ചരിത്രത്തിന്റെ ഭാഗം കൂടിയാണ്. ഏതു കഠിനമായ ലക്ഷ്യവും രാജ്യത്തിനു വിജയകരമായി കൈവരിക്കാമെന്നതിന്റെ ഉദാഹരണമാണിത്. ലക്ഷ്യങ്ങൾ നേടിയെടുക്കുന്നതിൽ രാജ്യം പ്രയത്നിക്കുമെന്നതിന്റെ ഉദാഹരണം. രാജ്യത്തെ ഓരോ പൗരന്മാരെയും ഈ നേട്ടം കൈവരിച്ചതിൽ അഭിനന്ദിക്കുന്നു. ഇന്ത്യയെങ്ങനെ മഹാമാരിയെ നേരിടും, ഇന്ത്യയ്ക്ക് വാക്സീൻ ലഭിക്കുമോ എന്നൊക്കെ മുൻപ് ചോദ്യങ്ങൾ ഉയർന്നിരുന്നു. 100 കോടി വാക്സീൻ എന്നത് ഇതിനെല്ലാം മറുപടി നൽകുന്നു. വാക്സിനേഷൻ യജ്ഞത്തിൽ വിഐപി സംസ്കാരം കടന്നുവരാതിരിക്കാൻ ശ്രമമുണ്ടായി. എല്ലാവരെയും ഒരു പോലെയാണ് ഇതിൽ പരിഗണിച്ചതെന്നും മോദി പറഞ്ഞു.

ശാസ്ത്രീയ മാർഗങ്ങളിൽ, ശാസ്ത്രത്താൽ നയിച്ച വാക്സിനേഷൻ യജ്ഞമാണ് നടപ്പായതെന്നതിൽ നമുക്ക് അഭിമാനിക്കാം. ശാസ്ത്രീയ രീതികൾ അടിസ്ഥാനമാക്കിയാണ് ഇത് മുന്നോട്ടുപോകുന്നതും. എല്ലായിടത്തും ഇപ്പോൾ ശുഭാപ്തി വിശ്വാസമാണ് പരക്കുന്നത്. മെയ്ഡ് ഇൻ ഇന്ത്യ എന്ന സംസാരമാണ് ഇന്ന് എവിടെയുമുള്ളത്. ഇന്ത്യയിലും പുറത്തുമുള്ള വിദഗ്ധർ ഇന്ത്യയുെട സാമ്പത്തികരംഗത്തെക്കുറിച്ച് ശുഭപ്രതീക്ഷയിലാണ്. ഇന്ത്യൻ കമ്പനികളിലേക്ക് റെക്കോർഡ് നിക്ഷേപം ഉണ്ടാകുന്നതിനൊപ്പം യുവാക്കൾക്ക് പുതിയ തൊഴിലവസരങ്ങളും സൃഷ്ടിക്കപ്പെടുന്നു. കോവിഡിൽനിന്ന് ഇന്ത്യ കൂടുതൽ സുരക്ഷിതമാണെന്ന് ലോകം വീക്ഷിക്കും. ഒരു ഫാർമ ഹബ് എന്ന നിലയിൽ ഇന്ത്യയ്ക്ക് കൂടുതൽ സ്ഥാനം കൈവരും.

തദ്ദേശീയ ഉല്‍പനങ്ങള്‍ വാങ്ങുന്നത് ശീലമാക്കണം. കയ്യടിച്ചാലും വിളക്ക് കത്തിച്ചാലും കോവിഡ് പോകുമോ എന്ന് പരിഹസിച്ചവരുണ്ട്. അതെല്ലാം ഐക്യത്തിനുള്ള യജ്ഞമായിരുന്നുവെന്നും പ്രധാനമന്ത്രി പറഞ്ഞു. ചൈനയ്ക്കു പിന്നാലെയാണ് ഇന്ത്യയും 100 കോടി വാക്സിനേഷൻ എന്ന റെക്കോർഡ് കുറിച്ചത്.

പ്രധാനമന്ത്രിയുടെ പ്രസംഗത്തിൽനിന്ന്

∙ 100 കോടി പേർക്ക് ഇന്ത്യ വാക്സീൻ നൽകിയത് സൗജന്യമായാണ് എന്നതു പ്രത്യേകതയാണ്
∙ മരുന്നുൽപാദന ഹബ് എന്ന നിലയിൽ ലോകത്ത് ഇന്ത്യയ്ക്ക് കൂടുതൽ സ്വീകാര്യത കിട്ടും.
∙ സർക്കാരും ജനങ്ങളും ഒത്തുപിടിച്ചാൽ അസാധ്യമായത് ഒന്നുമില്ലെന്നതിനു തെളിവാണ് ഈ നേട്ടം.
∙ ശാസ്ത്രത്തോടും പുതിയ കണ്ടുപിടിത്തങ്ങളോടും സാങ്കേതികവിദ്യയോടും ഇന്ത്യക്കാർ കാണിച്ച വിശ്വാസ്യതയാണ് റെക്കോർഡ് വാക്സിനേഷനു സഹായിച്ചത്.
∙ വാക്സീൻ വിമുഖതയാണ് പല രാജ്യങ്ങളും നേരിടുന്ന പ്രതിസന്ധി. എന്നാൽ ജനങ്ങളുടെ പങ്കാളിത്തത്തോടെയാണ് ഇന്ത്യ കോവിഡ് പ്രതിരോധം മികച്ചതാക്കിയത്. ഇതു കൂട്ടായ്മയുടെ വിജയമാണ്.
∙ കടുത്ത കോവിഡ് നിയന്ത്രണങ്ങൾ കൊണ്ടുവന്നപ്പോൾ എല്ലാവരും ചോദിച്ചു, ഇതെങ്ങനെ നടപ്പാക്കുമെന്ന്. പക്ഷേ നമ്മുടേത് ജനാധിപത്യ രാജ്യമാണ്. ഈ നിയന്ത്രണങ്ങൾ എല്ലാവർക്കും വേണ്ടിയാണെന്നു ജനം തിരിച്ചറിഞ്ഞു, അനുസരിച്ചു.
∙ പലതരം സമ്മർദങ്ങളുണ്ടായിട്ടും, സർക്കാരിന്റെ മുൻ പദ്ധതികളെപ്പോലെ വാക്സിനേഷനിലും വിഐപി സംസ്കാരം നടപ്പാക്കിയില്ല.
∙ 100 കോടി എന്നതു വെറുമൊരു സംഖ്യയല്ല. പുതിയ ഇന്ത്യയുടെ, പുതിയ അധ്യായത്തിന്റെ തുടക്കമാണ്.
∙ പുതിയ ഇന്ത്യയുടെ പ്രതിഫലനമാണ് ഈ നേട്ടം. മഹത്തായ നേട്ടമാണിത്.
∙ നമ്മുടെ രാജ്യം അതിന്റെ കടമ നിർവഹിച്ചു. ലോകം ഇന്ത്യയുടെ ഉദ്യമത്തിനു കയ്യടിക്കുകയാണ്.