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अटल जी अब नहीं रहे। मन नहीं मानता। अटल जी, मेरी आंखों के सामने हैं, स्थिर हैं। जो हाथ मेरी पीठ पर धौल जमाते थे, जो स्नेह से, मुस्कराते हुए मुझे अंकवार में भर लेते थे, वे स्थिर हैं। अटल जी की ये स्थिरता मुझे झकझोर रही है, अस्थिर कर रही है। एक जलन सी है आंखों में, कुछ कहना है, बहुत कुछ कहना है लेकिन कह नहीं पा रहा। मैं खुद को बार-बार यकीन दिला रहा हूं कि अटल जी अब नहीं हैं, लेकिन ये विचार आते ही खुद को इस विचार से दूर कर रहा हूं। क्या अटल जी वाकई नहीं हैं? नहीं। मैं उनकी आवाज अपने भीतर गूंजते हुए महसूस कर रहा हूं, कैसे कह दूं, कैसे मान लूं, वे अब नहीं हैं।

वे पंचतत्व हैं। वे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, सबमें व्याप्त हैं, वेअटल हैं, वे अब भी हैं। जब उनसे पहली बार मिला था, उसकी स्मृति ऐसी है जैसे कल की ही बात हो। इतने बड़े नेता, इतने बड़े विद्वान। लगता था जैसे शीशे के उस पार की दुनिया से निकलकर कोई सामने आ गया है। जिसका इतना नाम सुना था, जिसको इतना पढ़ा था, जिससे बिना मिले, इतना कुछ सीखा था, वो मेरे सामने था। जब पहली बार उनके मुंह से मेरा नाम निकला तो लगा, पाने के लिए बस इतना ही बहुत है। बहुत दिनों तक मेरा नाम लेती हुई उनकी वह आवाज मेरे कानों से टकराती रही। मैं कैसे मान लूं कि वह आवाज अब चली गई है। 

कभी सोचा नहीं था, कि अटल जी के बारे में ऐसा लिखने के लिए कलम उठानी पड़ेगी। देश और दुनिया अटल जी को एक स्टेट्समैन, धारा प्रवाह वक्ता, संवेदनशील कवि, विचारवान लेखक, धारदार पत्रकार और विजनरी जननेता के तौर पर जानती है। लेकिन मेरे लिए उनका स्थान इससे भी ऊपर का था। सिर्फ इसलिए नहीं कि मुझे उनके साथ बरसों तक काम करने का अवसर मिला, बल्कि मेरे जीवन, मेरी सोच, मेरे आदर्शों-मूल्यों पर जो छाप उन्होंने छोड़ी, जो विश्वास उन्होंने मुझ पर किया, उसने मुझे गढ़ा है, हर स्थिति में अटल रहना सिखाया है।

हमारे देश में अनेक ऋषि, मुनि, संत आत्माओं ने जन्म लिया है। देश की आज़ादी से लेकर आज तक की विकास यात्रा के लिए भी असंख्य लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की रक्षा और 21वीं सदी के सशक्त, सुरक्षित भारत के लिए अटल जी ने जो किया, वह अभूतपूर्व है।

उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था -बाकी सब का कोई महत्त्व नहीं। इंडिया फर्स्ट –भारत प्रथम, ये मंत्र वाक्य उनका जीवन ध्येय था। पोखरण देश के लिए जरूरी था तो चिंता नहीं की प्रतिबंधों और आलोचनाओं की, क्योंकि देश प्रथम था।सुपर कंप्यूटर नहीं मिले, क्रायोजेनिक इंजन नहीं मिले तो परवाह नहीं, हम खुद बनाएंगे, हम खुद अपने दम पर अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक कुशलता के बल पर असंभव दिखने वाले कार्य संभव कर दिखाएंगे। और ऐसा किया भी।दुनिया को चकित किया। सिर्फ एक ताकत उनके भीतर काम करती थी- देश प्रथम की जिद।   

काल के कपाल पर लिखने और मिटाने की ताकत, हिम्मत और चुनौतियों के बादलों में विजय का सूरज उगाने का चमत्कार उनके सीने में था तो इसलिए क्योंकि वह सीना देश प्रथम के लिए धड़कता था। इसलिए हार और जीत उनके मन पर असर नहीं करती थी। सरकार बनी तो भी, सरकार एक वोट से गिरा दी गयी तो भी, उनके स्वरों में पराजय को भी विजय के ऐसे गगन भेदी विश्वास में बदलने की ताकत थी कि जीतने वाला ही हार मान बैठे।  

अटल जी कभी लीक पर नहीं चले। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नए रास्ते बनाए और तय किए। आंधियों में भी दीये जलाने की क्षमता उनमें थी। पूरी बेबाकी से वे जो कुछ भी बोलते थे, सीधा जनमानस के हृदय में उतर जाता था। अपनी बात को कैसे रखना है, कितना कहना है और कितना अनकहा छोड़ देना है, इसमें उन्हें महारत हासिल थी।

राष्ट्र की जो उन्होंने सेवा की, विश्व में मां भारती के मान सम्मान को उन्होंने जो बुलंदी दी, इसके लिए उन्हें अनेक सम्मान भी मिले। देशवासियों ने उन्हें भारत रत्न देकर अपना मान भी बढ़ाया। लेकिन वे किसी भी विशेषण, किसी भी सम्मान से ऊपर थे।

जीवन कैसे जीया जाए, राष्ट्र के काम कैसे आया जाए, यह उन्होंने अपने जीवन से दूसरों को सिखाया। वे कहते थे, “हम केवल अपने लिए ना जीएं, औरों के लिए भी जीएं...हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें। अगर भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं हो सकता। किंतु यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी” 

देश के गरीब, वंचित, शोषित के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए वे जीवनभर प्रयास करते रहे। वेकहते थे गरीबी, दरिद्रता गरिमा का विषय नहीं है, बल्कि यह विवशता है, मजबूरी हैऔर विवशता का नाम संतोष नहीं हो सकता”। करोड़ों देशवासियों को इस विवशता से बाहर निकालने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किए। गरीब को अधिकार दिलाने के लिए देश में आधार जैसी व्यवस्था, प्रक्रियाओं का ज्यादा से ज्यादा सरलीकरण, हर गांव तक सड़क, स्वर्णिम चतुर्भुज, देश में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्पों से जुड़ा था।

आज भारत जिस टेक्नोलॉजी के शिखर पर खड़ा है उसकी आधारशिला अटल जी ने ही रखी थी। वे अपने समय से बहुत दूर तक देख सकते थे - स्वप्न दृष्टा थे लेकिन कर्म वीर भी थे।कवि हृदय, भावुक मन के थे तो पराक्रमी सैनिक मन वाले भी थे। उन्होंने विदेश की यात्राएं कीं। जहाँ-जहाँ भी गए, स्थाई मित्र बनाये और भारत के हितों की स्थाई आधारशिला रखते गए। वे भारत की विजय और विकास के स्वर थे।

अटल जी का प्रखर राष्ट्रवाद और राष्ट्र के लिए समर्पण करोड़ों देशवासियों को हमेशा से प्रेरित करता रहा है। राष्ट्रवाद उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं था बल्कि जीवन शैली थी। वे देश को सिर्फ एक भूखंड, ज़मीन का टुकड़ा भर नहीं मानते थे, बल्कि एक जीवंत, संवेदनशील इकाई के रूप में देखते थे। “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष हैयह सिर्फ भाव नहीं, बल्कि उनका संकल्प था, जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया। दशकों का सार्वजनिक जीवन उन्होंने अपनी इसी सोच को जीने में, धरातल पर उतारने में लगा दिया। आपातकाल ने हमारे लोकतंत्र पर जो दाग लगाया था उसको मिटाने के लिए अटल जी के प्रयास को देश हमेशा याद रखेगा।

 

राष्ट्रभक्ति की भावना, जनसेवा की प्रेरणा उनके नाम के ही अनुकूल अटल रही। भारत उनके मन में रहा, भारतीयता तन में। उन्होंने देश की जनता को ही अपना आराध्य माना। भारत के कण-कण, कंकर-कंकर, भारत की बूंद-बूंद को, पवित्र और पूजनीय माना।

जितना सम्मान, जितनी ऊंचाई अटल जी को मिली उतना ही अधिक वह ज़मीन से जुड़ते गए। अपनी सफलता को कभी भी उन्होंने अपने मस्तिष्क पर प्रभावी नहीं होने दिया। प्रभु से यश, कीर्ति की कामना अनेक व्यक्ति करते हैं, लेकिन ये अटल जी ही थे जिन्होंने कहा,

हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना।

गैरों को गले ना लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना

अपने देशवासियों से इतनी सहजता औरसरलता से जुड़े रहने की यह कामना ही उनको सामाजिक जीवन के एक अलग पायदान पर खड़ा करती है।

वेपीड़ा सहते थे, वेदना को चुपचाप अपने भीतर समाये रहते थे, पर सबको अमृत देते रहे- जीवन भर। जब उन्हें कष्ट हुआ तो कहने लगे- “देह धरण को दंड है, सब काहू को होये, ज्ञानी भुगते ज्ञान से मूरख भुगते रोए। उन्होंने ज्ञान मार्ग से अत्यंत गहरी वेदनाएं भी सहन कीं और वीतरागी भाव से विदा ले गए।  

यदि भारत उनके रोम रोम में था तो विश्व की वेदना उनके मर्म को भेदती थी। इसी वजह से हिरोशिमा जैसी कविताओं का जन्म हुआ। वे विश्व नायक थे। मां भारतीके सच्चे वैश्विक नायक। भारत की सीमाओं के परे भारत की कीर्ति और करुणा का संदेश स्थापित करने वाले आधुनिक बुद्ध। 

कुछ वर्ष पहले लोकसभा में जब उन्हें वर्ष के सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से सम्मानित किया गया था तब उन्होंने कहा था, “यह देश बड़ा अद्भुत है, अनूठा है। किसी भी पत्थर को सिंदूर लगाकर अभिवादन किया जा रहा है, अभिनंदन किया जा सकता है।”

अपने पुरुषार्थ को, अपनी कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र के लिए समर्पित करना उनके व्यक्तित्व की महानता को प्रतिबिंबित करता है। यही सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए उनका सबसे बड़ा और प्रखर संदेश है। देश के साधनों, संसाधनों पर पूरा भरोसा करते हुए, हमें अब अटल जी के सपनों को पूरा करना है, उनके सपनों का भारत बनाना है।

नए भारत का यही संकल्प, यही भावलिए मैं अपनी तरफ से और सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उन्हें नमन करता हूं।

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October 22, 2021
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ভাৰতে টিকাকৰণ আৰম্ভ হোৱাৰ পৰা মাত্ৰ ৯ মাহত অৰ্থাৎ যোৱা ২১ অক্টোবৰত ১০০ কোটি খোৰাকৰ  টিকাকৰণ সম্পূৰ্ণ কৰিলে  ২০২০ চনৰ আৰম্ভণিতে ঘটনাবোৰ যিদৰে সংঘটিত হৈছিল সেয়া যদি আমি সোঁৱৰণ কৰো তেতিয়া দেখিম যে কভিড-১৯-ৰ সৈতে মোকাবিলা কৰাৰ ক্ষেত্ৰত ই যেন এক অদ্ভুত যাত্ৰা আছিল ৷ ১০০ বছৰৰ পিছত মানৱতাই এনে এক মহামাৰীৰ সৈতে মোকাবিলা কৰি আছিল যত সকলোৱে এই ভাইৰাছটোৰ বিষয়ে অজ্ঞাত আছিল আমাৰ মনত আছে যে পৰিস্থিতি কিমান অপ্ৰত্যাশিত হৈ পৰিছিলকিয়নো আমি এক অজ্ঞাত আৰু অদৃশ্য শত্ৰুৰ  সন্মুখীন হৈছিলো

 উদ্বেগৰ পৰা আশ্বাসলৈ যাত্ৰা আৰম্ভ হৈছে আৰু বিশ্বৰ সৰ্ববৃহৎ টিকাকৰণ অভিযানে আমাৰ দেশক অধিক শক্তিশালী কৰি তুলিছে

 এয়া প্ৰকৃততেই এক অনন্য প্ৰচেষ্টা যত সমাজৰ বিভিন্ন শ্ৰেণীক সামৰি লোৱা হৈছে পৰিমাপৰ অনুমান কৰিবলৈধৰি লওক যে প্ৰতিটো টিকাকৰণত এজন স্বাস্থ্য কৰ্মীৰ বাবে মাত্ৰ ২ মিনিট সময়ৰ প্ৰয়োজন হয়  এই হাৰত এই মাইলৰ খুঁটিত উপনীত হ'বলৈ প্ৰায় ৪১ লাখ মানৱ দিন বা প্ৰায় ১১,০০০ মানৱ বছৰৰ প্ৰয়োজন হয়

 গতি আৰু পৰিমাপ বৰ্তাই ৰখাৰ যিকোনো প্ৰচেষ্টাৰ বাবে সকলো অংশীদাৰীৰ আত্মবিশ্বাস অতিশয় গুৰুত্বপূৰ্ণ অভিযানটোৰ সফলতাৰ এটা কাৰণ আছিল যে এই প্ৰতিষেধকৰ প্ৰতি মানুহৰ বিশ্বাস আছিল আৰু অবিশ্বাস আৰু আতংক সৃষ্টি কৰাৰ বিভিন্ন অপপ্ৰচেষ্টা স্বত্বেও প্ৰক্ৰিয়াটো ক্ৰমবৰ্ধমান হৈছিল ৷

 আমাৰ মাজত এনে কিছুমান লোক আছে যিয়ে কেৱল দৈনন্দিন প্ৰয়োজনীয়তাৰ বাবেও বিদেশী ব্ৰেণ্ডৰ ওপৰত নিৰ্ভৰ কৰে কিন্তু কভিড-১৯ৰ প্ৰতিষেধকৰ দৰে গুৰুত্বপূৰ্ণ বিষয়ত ভাৰতৰ জনসাধাৰণে   'মেড ইন ইণ্ডিয়াপ্ৰতিষেধকৰ ওপৰত বিশ্বাস কৰিছিল এইটো এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ দৃষ্টান্তমূলক পৰিৱৰ্তন

 ভাৰতৰ প্ৰতিষেধক অভিযান হৈছে নাগৰিক আৰু চৰকাৰে জনসাধাৰণৰ অংশগ্ৰহণৰ ভাৱনাৰে এক উমৈহতীয়া লক্ষ্যৰ দ্বাৰা ভাৰতে কি অৰ্জন কৰিব পাৰে তাৰে এক উদাহৰণ ৷ যেতিয়া ভাৰতে টিকাকৰণ কাৰ্যসূচী আৰম্ভ কৰিছিলতেতিয়া বহুতে ১৩০ কোটি ভাৰতীয়ৰ সামৰ্থ্যৰ ওপৰত সন্দেহ কৰিছিল কিছুমানে কৈছিল যে ভাৰতক ইয়াৰ বাবে ৩-৪ বছৰ সময়ৰ প্ৰয়োজন হব আন কিছুমানে কৈছিল যে মানুহে টিকাকৰণৰ বাবে আগবাঢ়ি নাহে কিছুমান মানুহে কৈছিল যে টিকাকৰণ প্ৰক্ৰিয়াত ব্যাপক অব্যৱস্থা আৰু বিশৃংখলতা থাকিব কিছুমানে আনকি ইয়াকো কৈছিল যে ভাৰতে যোগান শৃংখলাটো পৰিচালনা কৰিবলৈ সক্ষম নহ' কিন্তু জনতা কাৰ্ফিউ আৰু ক্ৰমানুসাৰ লকডাউনৰ সৈতে সহযোগিতা কৰি ভাৰতৰ জনসাধাৰণে দেখুৱাই দিছিল যে যদি তেওঁলোকক বিশ্বাসযোগ্য অংশীদাৰ হিচাপে বিবেচনা কৰা হয় তেন্তে ফলাফল কিমান চমৎকাৰ হ'ব পাৰে

 যেতিয়া সকলোৱে একেলগে আগবাঢ়ে  তেতিয়া অসম্ভৱ একো নহয় আমাৰ স্বাস্থ্য কৰ্মীসকলে জনসাধাৰণক প্ৰতিষেধক প্ৰদান কৰিবলৈ পাহাৰ অতিক্ৰম কৰিছে আৰু বিশাল নদীও পাৰ হৈছে আমাৰ যুৱসমাজসমাজকৰ্মীস্বাস্থ্য কৰ্মীসামাজিক তথা ধৰ্মীয় নেতা সকলোৱে এই কথাৰ বাবে কৃতিত্বৰ যোগ্য যে ভাৰতে উন্নত দেশবোৰৰ তুলনাত খুব কমেইহে প্ৰতিষেধক দ্বিধাৰ সন্মুখীন হৈছে

 টিকাকৰণত বিভিন্ন গোটক বিশেষ অগ্ৰাধিকাৰ দিয়াৰ বাবে যথেষ্ট চাপ আহিছিল যদিও চৰকাৰে এয়া নিশ্চিত কৰিছিল যে আমাৰ অন্যান্য আঁচনিৰ দৰেটিকাকৰণ অভিযানতো কোনো ভিআইপি সংস্কৃতি নাই

 ২০২০ চনৰ আৰম্ভণিতে যেতিয়া সমগ্ৰ বিশ্বত কভিড-১৯ৰ প্ৰাদুৰ্ভাৱ আছিলআমাৰ বাবে এইটো স্পষ্ট হৈ আছিল যে এই মহামাৰীটোৰ বিৰুদ্ধে প্ৰতিষেধকৰ সহায়েৰেহে যুঁজিব লাগিব আমি সোনকালে প্ৰস্তুতি আৰম্ভ কৰিলো আমি বিশেষজ্ঞ গোট গঠন কৰিছিলো আৰু এপ্ৰিল ২০২০ ৰ পৰা এটা ৰোডমেপ প্ৰস্তুত কৰিবলৈ আৰম্ভ কৰিছিলো

যিখন দেশত চৰকাৰক উন্নয়নৰ বাধা হিচাপে জনা গৈছিল সেইখন দেশত আমাৰ চৰকাৰ প্ৰগতিৰ সাধক হৈ আহিছে চৰকাৰে প্ৰথম দিনৰ পৰাই প্ৰতিষেধক নিৰ্মাতাসকলৰ সৈতে অংশীদাৰীত্ব স্থাপন কৰিছিল আৰু তেওঁলোকক প্ৰতিষ্ঠানগত সমৰ্থনবৈজ্ঞানিক গৱেষণাপুঁজিলগতে ত্বৰান্বিত নিয়ামক প্ৰক্ৰিয়া হিচাপে সমৰ্থন প্ৰদান কৰিছিল চৰকাৰৰ সকলো মন্ত্ৰালয় প্ৰতিষেধক নিৰ্মাতাসকলৰ সুবিধাৰ বাবে ঐক্যৱদ্ধ হৈছিল আৰু আমাৰ 'সমগ্ৰ চৰকাৰদৃষ্টিভংগীৰ ফলস্বৰূপে যিকোনো বাধা আঁতৰ হৈছিল

 

ভাৰতৰ দৰে এখন দেশত পৰিমাপক হিচাপত কেৱল উৎপাদন কৰাই যথেষ্ট নহয় শেষৰজন লোকলৈ ইয়াৰ বিতৰণ আৰু সুদৃঢ় লজিষ্টিকৰ ওপৰতো গুৰুত্ব দিয়া উচিত বিদ্যমান প্ৰত্যাহ্বানবোৰ বুজিবলৈপ্ৰতিষেধকৰ এটা বটলৰ যাত্ৰাটো কল্পনা কৰক বটলটো পুণে বা হায়দৰাবাদৰ প্ৰকল্পৰ পৰা যিকোনো ৰাজ্যৰ কেন্দ্ৰলৈ প্ৰেৰণ কৰা হয় য'ৰ পৰা ইয়াক জিলা কেন্দ্ৰলৈ পৰিবহণ কৰা হয় তাৰ পৰা ই টিকাকৰণ কেন্দ্ৰত উপস্থিত হয় এই যাত্ৰাত বিমান আৰু ৰেলৰ হাজাৰ হাজাৰ ভ্ৰমণ অন্তৰ্ভুক্ত আছে এই সমগ্ৰ যাত্ৰাৰ সময়ততাপমাত্ৰা এক নিৰ্দিষ্ট পৰিসৰত বজাই ৰাখিব লাগিব যাক কেন্দ্ৰীয়ভাৱে নিৰীক্ষণ কৰা হয় এই উদ্দেশ্যৰ বাবে ১ লাখতকৈও অধিক শীতল শৃংখলা সঁজুলি ব্যৱহাৰ কৰা হৈছিল ৰাজ্যসমূহক প্ৰতিষেধকৰ বিতৰণ কাৰ্যসূচীৰ আগতীয়াকৈ জাননী দিয়া হৈছিল যাতে তেওঁলোকে তেওঁলোকৰ অভিযানটোৰ এক সুন্দৰ পৰিকল্পনা কৰিব পাৰে আৰু প্ৰতিষেধকবোৰ যাতে পূৰ্ব নিৰ্ধাৰিত দিনৰ ভিতৰত তেওঁলোকৰ ওচৰলৈ উপস্থিত হয় স্বাধীন ভাৰতৰ ইতিহাসত এইটো এক অভূতপূৰ্ব প্ৰচেষ্টা

 

এই সমগ্ৰ প্ৰয়াসত কো-উইনৰ এক শক্তিশালী কাৰিকৰী মঞ্চই সহায় কৰিছিল ই নিশ্চিত কৰিছিল যে প্ৰতিষেধকৰ অভিযানটো ন্যায়সংগতপৰিমাপযোগ্যঅনুসৰণযোগ্য আৰু স্বচ্ছ হোৱাটো এইটোৱে নিশ্চিত কৰিছিল যে ইয়াত পক্ষপাতিত্ব বা শাৰীৰ মাজৰ পৰা থপিয়াই অনাৰ কোনো অৱকাশ নাছিল ই লগতে নিশ্চিত কৰিছিল যে এজন দৰিদ্ৰ শ্ৰমিকে প্ৰয়োজনীয় সময়ৰ ব্যৱধানৰ অন্তত তেওঁৰ গাঁৱত প্ৰথম পালি আৰু তেওঁ কাম কৰা চহৰত একেটা প্ৰতিষেধকৰ দ্বিতীয় পালি যাতে গ্ৰহণ কৰিব পাৰে স্বচ্ছতা বৃদ্ধি কৰাৰ বাবে বাস্তৱিক-সময়ৰ ডেশ্বব'ৰ্ডৰ উপৰিওকিউআৰ-কোডযুক্ত প্ৰমাণপত্ৰই প্ৰমাণীকৰণ নিশ্চিত কৰিছে কেৱল ভাৰততে নহয় বিশ্বতো এনে ধৰণৰ প্ৰচেষ্টাৰ আন কোনো উদাহৰণ নাই

 

২০১৫ চনত স্বাধীনতা দিৱসৰ সময়ত মোৰ ভাষণত মই কৈছিলো যে 'টীম ইণ্ডিয়া'ৰ বাবে আমাৰ দেশ আগবাঢ়িব ধৰিছে আৰু এই 'টীম ইণ্ডিয়াআমাৰ ১৩০ কোটি জনতাৰ এক বৃহৎ দল জনসাধাৰণৰ অংশগ্ৰহণ হৈছে গণতন্ত্ৰৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ শক্তি যদি আমি ১৩০ কোটি ভাৰতীয়ৰ অংশগ্ৰহণেৰে দেশখন পৰিচালনা কৰো তেন্তে আমাৰ দেশে প্ৰতি মুহূৰ্ততে ১৩০ কোটি খোজ আগুৱাব পাৰিব আমাৰ টিকাকৰণ অভিযানে আকৌ এবাৰ এই 'টীম ইণ্ডিয়া'ৰ শক্তি প্ৰদৰ্শন কৰিছে টিকাকৰণ অভিযানত ভাৰতৰ সফলতাই সমগ্ৰ বিশ্বক দেখুৱাইছে যে 'গণতন্ত্ৰই ৰক্ষা কৰিব পাৰে'

 

মই আশা কৰোঁ যে বিশ্বৰ সৰ্ববৃহৎ টিকাকৰণ অভিযানত অৰ্জন কৰা সফলতাই আমাৰ যুৱসমাজআমাৰ উদ্ভাৱক আৰু সকলো পৰ্যায়ৰ চৰকাৰক লোকসেৱা প্ৰদানৰ নতুন মানদণ্ড নিৰ্ধাৰণ কৰিবলৈ অনুপ্ৰাণিত কৰিব যি কেৱল আমাৰ দেশৰ বাবেই নহয়বিশ্বৰ বাবেও এক আৰ্হি হ'