Text of PM’s Parivartan Rally in Saharsa, Bihar

Published By : Admin | August 18, 2015 | 20:02 IST
PM Modi lists out achievements of Govt in Bihar #ParivartanRally
We are committed to find permanent solutions of all problems that Bihar faces today: PM #ParivartanRally
A special package of Rs. 1.65 lakh crores announced for developing Bihar, for transforming future of the state #ParivartanRally
Welfare of farmers is essential for agriculture to develop: PM Modi #ParivartanRally
We are dedicated to bring back the glory of Bihar; we will transform the lives of people of Bihar: PM Modi #ParivartanRally

मंच पर विराजमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी, हमारे सबके वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान गोपाल नारायण जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी जी चौधरी, हमारे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ जी, हमारे पूर्व सांसद श्री उदय सिंह जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी, हमारे सांसद श्रीमान कीर्ति आजाद जी, हमारे सांसद हुकुमदेव नारायण जी, पूर्व सांसद श्रीमान निखिल चौधरी जी, श्रीमान प्रदीप सिंह, श्रीमान नित्यानंद राय जी, श्रीमान विश्वमोहन चौधरी जी, श्रीमान एम. के. सिंह जी, डॉ. राम नरेश सिंह जी, श्रीमान वीरेन्द्र चौधरी जी, श्रीमान देवेन्द्र यादव जी, श्रीमान महबूब अली जी, श्रीमान आलोक रंजन जी, श्रीमान मदन मोहन चौधरी जी, श्रीमती नूतन सिंह जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

एहन पुण्य भूमि मिथिला में अबी हम गदगद छी, अहाँ सबके वेरी वेरी प्रणाम करै छी। मैं अभी आरा के कार्यक्रम से आ रहा हूँ। इसके पूर्व मुझे बिहार में दो रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। हवा का रूख साफ-साफ नजर आता है। इस चुनाव में माहौल कैसा है, मौसम कैसा है, उसका भली-भांति पता चल रहा है। और एनडीए की सरकार बनाने के लिए जो तेज आंधी आई है, तेज हवा चल रही है, बारिश भी उसको भिगो नहीं पा रही है। मैं जब आरा में था तो मुझे बताया गया कि यहाँ तो तेज बारिश चल रही है लेकिन ये कोसी अंचल के लोग हैं अगर एक बार ठान लेते हैं तो कितनी ही तेज आंधी क्यों न हो, वर्षा कितनी तेज क्यों न हो, न ये रुकते हैं, न ये थकते हैं, न ये झुकते हैं; ऐसे कोसी अंचल के लोगों को मैं बार-बार नमन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, आज से 7 साल पहले 18 अगस्त को कोसी में एक भयंकर बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यहाँ के नजदीक के 7-8 जिलों के 35 लाख परिवार तबाह हो गए थे। यहाँ के खेत बालू से भर गए थे। गाँव विनाश के कगार पर आकर खड़े हो गए थे। न धरती बची थी, न आसमान रूकने को तैयार था और यहाँ का जन-जन मुसीबतों से जूझ रहा था। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था। इस कोसी अंचल के अनेक परिवार मेरे यहाँ गुजरात में बसे हुए हैं और उसके कारण मुझे उनसे सारी जानकारियां मिलती थीं और तब हमें लगा था कि भले गुजरात कितना ही दूर क्यूँ न हो लेकिन कोसी अंचल के पीड़ा के समय कंधे से कंधा मिलाकर के उनके दुःख में साथ खड़े रहना चाहिए, उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मदद करनी चाहिए।

आप सबको याद होगा मेरे भाईयों-बहनों, देशभर से लोग उस संकट की घड़ी में आपके साथ खड़े हो गए थे लेकिन कभी कभी जनता-जनार्दन का दर्द, सामान्य मानव की पीड़ा... राजनेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होता है उस अहंकार के कारण न संवेदनाओं को समझ पाते हैं, न दर्द को अनुभव कर पाते हैं, न पीड़ा का पता चलता है और वे अपने अहंकार में डूबे रहते हैं। आज जब मैं इस कोसी अंचल में आया हूँ, कोसी नदी की सौगंध खाकर मैं कहना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति का अहंकार कितनी गहरी चोट पहुंचाता है... अगर मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई अपमानित करे, दुत्कार दे, अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल कर ले, मैं कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की हरकतों के संबंध में कभी कुछ बोलता नहीं हूँ, उसको सहने के लिए अपने आप को तैयार करता हूँ लेकिन जब अहंकार के कारण सामान्य मानव के दर्द और पीड़ा के साथ खिलवाड़ किया जाए तो जनता-जनार्दन के दर्द और पीड़ा के लिए मैं अपने आप को रोक नहीं सकता।

आज जब मैं कोसी अंचल में आया हूँ तो मैं कहना चाहता हूँ कि वो दिन था 18 अगस्त और आज का दिन भी है 18 अगस्त, यही दिन था। आज मैं कहना चाहता हूँ गुजरात के लोगों ने अपनी पसीने की कमाई से कोसी अंचल के लोगों की मदद के लिए 5 करोड़ रुपये का चेक भेजा था। उस 5 करोड़ रुपये में, इसी कोसी अंचल के लोग जो गुजरात में रहते हैं और जिन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाई है, 5-10 लाख रुपये इन लोगों का भी था। वे भी अपने वतन के पीड़ित परिवार के लिए कोई न कोई योगदान देना चाहते थे। लेकिन उनका अहंकार सातवें आसमान पर था; इतना अहंकार था कि आप दर्द झेलते रहें, आप पीड़ा झेलते रहें और उन्होंने 5 करोड़ रुपये का चेक गुजरात की जनता को वापिस भेज दिया।

आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या सार्वजनिक जीवन में ये आचरण उचित है क्या? पूरी ताकत से बताईये, उचित है क्या? ऐसा आचरण मंजूर है क्या? कोसी अंचल के लोग मरें तो मरें लेकिन मैं अपना अहंकार नहीं छोडूंगा, ये चल सकता है क्या? जो अपना अहंकार नहीं छोड़ सकते, हमें उन्हें छोड़ना चाहिए कि नहीं छोड़ना चाहिए? ऐसे लोगों को विदाई देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों, ऐसे ही अहंकार ने बिहार के सपनों को रौंद डाला है, बिहार के सपनों को चूर-चूर कर डाला है। उस अपमान को भी मैं पी गया था और फिर मैंने हमारे बिहार के भाई जो वहां रहते थे, उन्हीं को मैंने कुछ सामान देकर भेजा कि भाई कहीं मेरा नाम आएगा तो तूफ़ान खड़ा हो जाएगा, आप चुपचाप जाईये और यहाँ के गरीब परिवारों में बाँट कर के आ जाईये। लोग आये, यहाँ के लोगों की सेवा की और कहीं तक किसी को कोई आवाज तक नहीं आने दी।

सार्वजनिक जीवन में कुछ परंपराएँ होती है, कुछ नीतियां होती हैं, कुछ नियम होते हैं लेकिन ऐसे लोगों से मैं क्या अपेक्षा करूँ? आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, जयप्रकाश नारायण हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? पूरी ताकत से जवाब दीजिये, जयप्रकाश नारायण जी हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? हमारा गौरव है कि नहीं है? जयप्रकाश जी ने बिहार को गौरव दिलाया कि नहीं दिलाया? बिहार का मान-सम्मान बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया? आपको याद है, उन जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? आपातकाल में जब श्रीमती इंदिरा गाँधी का राज चलता था तो जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? कांग्रेस पार्टी ने, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने, जयप्रकाश नारायण जी को जेल में बंद कर दिया था और उनका यही गुनाह था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते थे। बिहार जयप्रकाश जी के नेतृत्व में, और बाद में पूरा हिन्दुस्तान जयप्रकाश जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आया था... भाईयों-बहनों, अब जगह नहीं है, कहाँ आओगे जी, अब भर गया है! इस मैदान में जगह हो न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

जयप्रकाश जी जेल से बीमार होकर बाहर निकले और यह देश बिहार के सपूत और मां भारती के लाल जयप्रकाश नारायण जी को नहीं बचा पाया, वो हमारे बीच से चले गए। जयप्रकाश नारायण जी के मृत्यु के लिए कौन जिम्मेवार है? यही कांग्रेस के लोग जिन्होंने जयप्रकाश नारायण जी के साथ ये खिलवाड़ किया था। मैं बिहार के भाईयों से पूछना चाहता हूँ... बिहार के लोगों ने मन में ऐसी ठान ली कि जयप्रकाश नारायण जी के साथ इस प्रकार का जुल्म करने वालों को बिहार की राजनीति से उखाड़ कर के फेंक दिया लेकिन आज जो लोग जयप्रकाश जी की जिंदगी के साथ खेल खेलने वाले लोगों के साथ चुनावी समझौता कर रहे हैं, कांग्रेस के पास सीटों का बंटवारा कर रहे हैं, मुझे बताईये ये जयप्रकाश नारायण जी की आत्मा को पीड़ा पहुंचाएगा कि नहीं पहुंचाएगा? ये जयप्रकाश नारायण के साथ धोखा और विश्वासघात है कि नहीं है? आप ऐसे लोगों के साथ भरोसा कर सकते हैं क्या जिन्होंने जयप्रकाश नारायण की जिंदगी को तबाह कर दिया? सत्ता पाने के लिए आप उनकी गोद में जाकर के बैठ रहे हो और इसलिए ये जो कारोबार चल रहा है.. अब बिहार की राजनीति बदलाव की ओर चल पड़ी है।

अब ये सरकार रहने वाली नहीं है यहाँ की जनता न इनको स्वीकार करने वाली है, न इनका साथ देने वाली है। भाईयों-बहनों, आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया। आप मुझे बताईये, मैं जनता-जनार्दन के बीच आकर के अपने काम का हिसाब दे रहा हूँ कि नहीं दे रहा हूँ? जनता के बीच जाने के लिए एक हिम्मत लगती है, हौसला लगता है, जनता के प्रति विश्वास लगता है, आस्था लगती है लेकिन जब जनता से नाता टूट जाता है, अहंकार सातवें आसमान पर होता है तब जनता के बीच जाने के बजाय एयर कंडीशन कमरे में पांच-पच्चीस पत्रकारों को बुलाकर के जहर उगलने के सिवाय कोई काम नहीं बचा रहता है। भाईयों-बहनों, हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं।

भाईयों-बहनों, बिहार को जंगलराज का डर सता रहा है। उसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मैं आज बिहार सरकार के उनके अपने पुलिस विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जो बातें रखी हैं, मैं बिहार की जनता के सामने बिहार सरकार के ही आंकड़ों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ, आपके सामने रखना चाहता हूँ। दबे पाँव मुसीबतें आनी शुरू हो गई हैं, संकट का सामना करने के दिन आने शुरू हो गए हैं। आप देखिये, बिहार सरकार के आंकड़े बताते हैं: जनवरी 2015, बिहार में अपराधों की संख्या थी – 13,808 गंभीर प्रकार के अपराधों की संख्या थी - 13,808; जून 2015 में यह आंकड़ा पहुँच गया 13 हजार से 18,500 पर गंभीर प्रकार के अपराधों में 34 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। मुझे बताईये, ये जंगलराज के आसार हैं कि नहीं हैं आपका जीवन मुश्किल होगा कि नहीं होगा? निर्दोष बहन-बेटियों की जिंदगी ख़तरे में पड़ेगी कि नहीं पड़ेगी? जनवरी में 217 हत्याएं हुई थी, जून में, इतने कम समय में ये आंकड़ा पहुँच गया 316 और अभी तो पिछले ढेढ़ महीने का मैंने हिसाब नहीं लिया है। 46 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है और अब आप मुझे बताईये कि हत्याओं का अगर यह दौर चलता रहा तो बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी का क्या हाल होगा।

भाईयों-बहनों, एक और बात पर मैं गंभीरता से ध्यान दिलाना चाहता हूँ। ये आंकड़े बिहार सरकार के हैं, मैं उन्हीं के आकड़ें बोल रहा हूँ। जनवरी महीने में दंगों की संख्या थी – 866, जून महीना आते-आते दंगों की संख्या हो गई – करीब-करीब 1500; Exact आंकड़ा है – 1497 यानि 1500 में तीन बाकी। जनवरी में करीब साढ़े आठ सौ और जून में 1500 दंगे, 72 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है। हर पैरामीटर को देखिये, बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। खतरे की घंटी बज चुकी है। मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ इस चुनाव में हत्याएं अगर बंद करवानी है, ये दंगे फ़साद बंद करवाने हैं, इन निर्दोष लोगों की जिंदगी को बचाना है तो आपको घर-घर जाकर के चौकीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ़ पटना में एक मजबूत सरकार बिठा दीजिए, आप हमारा साथ दे दीजिए, हम आपकी समस्याओं का समाधान कर देंगे।

कई दिनों से चर्चा चल रही थी... मैं एक और बात भी कहना भूल गया, उसे मैं जरा कह देना चाहता हूँ। मैंने कोसी का जिक्र किया लेकिन यहाँ के लोगों को याद होगा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में हमारी सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद फिर से एक बार कोसी पर संकट आया था। नेपाल में दुपाल चौक के पास कोसी नदी पर लैंडस्लाइड हुआ था। नदी का आना बंद हुआ था और वहां पानी जमा होना शुरू हो गया था। सेटॅलाइट से हमें पता चला कि अगर ये पानी जमा होता गया और बाढ़ में अगर ये मिट्टी ढह गई तो कोसी के पट पर बिहार के जितने गाँव हैं, आज से सात साल पहले जो तबाही आई थी, उससे भी सौ गुना ज्यादा तबाही आ जाएगी, कोई बच नहीं पाएगा। काम करने वाली सरकार कैसी होती है, जनता-जनार्दन के दुःख-दर्द को समझने वाली सरकार कैसी होती है, समस्याओं को पहले पहचान कर के रास्ते खोजने का प्रयास करने वाली सरकार कैसी होती है...

मेरे कोसी पट के भाईयों-बहनों, आपको याद होगा कि हमने तुरंत सेना को भेजा। नेपाल में उस नदी को फिर से खोलने के लिए; इतने बड़े लैंडस्लाइड में छोटे-छोटे hole करके पानी निकले, इसका अभियान चलाया। उसके बाद भी हमें भरोसा नहीं था। कहीं ये प्रयोग हमारा सफल नहीं हुआ और पानी जमा होता ही गया और अगर एक साथ मिट्टी ढह गई तो मेरे कोसी अंचल का कोई परिवार बचेगा नहीं। मैंने हमारे जवानों को यहाँ भेजा, बिहार सरकार को आग्रह किया, मेरे कार्यकर्ताओं को mobilize किया, दिल्ली में बैठकर इसको लगातार मॉनिटर किया, गाँव के गाँव खाली करवाए। यहाँ के किसान मेरे से नाराज हो गए कि पानी तो दिखता नहीं है, वर्षा नहीं है, और मोदी गाँव खाली करवा रहे हैं, पशुओं को भी ले जाने के लिए कहते हैं और वो भी 50-50 किलोमीटर दूरी... सबकी नाराजगी थी। उसके बाद भी मैंने कहा, No compromise. उनको पता नहीं है कि कितने बड़े आफ़त की संभावना है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आफ़त न आए लेकिन अगर आ जाए तो नुकसान कम से कम होना चाहिए। उसके लिए हम प्रबंध कर रहे हैं और आज कोसी अंचल के भाईयों-बहनों को हिसाब देते हुए मुझे गर्व होता है कि हम उस काम को करने में सफल हुए। कोसी अंचल को मुसीबत से बचा लिया था। इतना ही नहीं, अभी जब नेपाल में भूकंप आया तो यहाँ की सरकार को इस बात का आश्चर्य था और ये बात उन्होंने publicly कही भी कि भूकंप आने के कुछ ही मिनटों में भारत के प्रधानमंत्री का फ़ोन आ गया, उन जिलों तक फ़ोन पहुँच गया। इस इलाके के सांसदों से मैंने फ़ोन पर बात कर ली। हमने कहा, देखो भाई ये भूकंप भारी नुकसान कर सकता है।

अगर कोसी की इतनी चिंता होती... सबसे पहले भारत सरकार की जिम्मेवारी थी कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों को ठीक कर ले। आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कोसी के कारण कोई वर्ष ऐसा नहीं जाता है कि यहाँ के किसानों को, यहाँ की जनता को किसी मुसीबत का सामना न करना पड़ा हो। इस समस्या का समाधान नेपाल में है। जब तक नेपाल के साथ बैठकर पानी के बहाव के संबंध में उचित योजना नहीं बनती है, इस कोसी पट के किसानों को नहीं बचाया जा सकता। और इसलिए, नेपाल के साथ गहरे संबंध होना जरुरी है, नेपाल के सुख-दुःख का साथी बनना जरुरी है। 17 साल, अगर पटना से नेपाल जाना हो तो 70 मिनट नहीं लगता है लेकिन नेपाल जाने में प्रधानमंत्री को 17 साल लग गए। 17 साल तक देश का कोई प्रधानमंत्री गया नहीं, नेपाल से कोसी की बात नहीं की, कोसी पट के मेरे किसान भाईयों को बचाने की कोई बात नहीं की। हम गये, 17 साल के बाद गये और नेपाल सरकार के साथ आमने-सामने बैठकर के कोसी के लिए क्या कर सकते हैं, उसकी बातचीत प्रारंभ कर दी।

रास्ते खोजने पड़ते हैं, समस्याओं का समाधान निकालना पड़ता है तब जाकर के हमारे देश के गरीब किसान को हम बचा सकते हैं और उस काम को 2014 के अगस्त में हमने करके दिखाया, नेपाल जाकर करके दिखाया। भूकंप के बाद नेपाल के साथ हम खड़े रहे। आज एक भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर के हम उसकी सेवा में लगे हुए हैं और इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से भी समाधान खोजना होगा। हमने वो प्रयास प्रारंभ किया। हमारे यहाँ कृषि मंत्रालय तो है, कृषि की चिंता करने के लिए तो समय है लेकिन किसान की चिंता कौन करेगा। अगर हम किसान के कल्याण की चिंता नहीं करेंगे तो कृषि का भी कल्याण नहीं होगा और अगर हम कृषि का कल्याण नहीं करेंगे तो किसान का भी कल्याण नहीं होगा। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से हमने कहा कि जो मंत्रालय का नया नाम होगा – कृषि विकास और किसान कल्याण मंत्रालय। अब सरकार के डिपार्टमेंट में सिर्फ़ कृषि की नहीं किसान की भी चिंता करने की योजना बनेगी। ये बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हमने निर्णय किया है।

भाईयों-बहनों, मैं अभी-अभी आरा से आ रहा हूँ। आरा में सरकार का कार्यक्रम था और उस सरकार के कार्यक्रम में विकास की योजनाओं का प्रारंभ करना था। स्किल डेवलपमेंट हो, रास्तों का जाल गूंथना हो, अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया और चुनाव के पहले जब मैं आया था, तब मैंने कहा था कि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम 50,000 करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। बिहार को कहा था ना? और कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि मोदी बोलते हैं, करते नहीं हैं कुछ; मोदी ने चुनाव के पहले वादा किया था और जब पिछली बार आये तो फिर से टोने मारने शुरू कर दिये कि मोदी बोले क्यों नहीं। मैंने कहा था कि पार्लियामेंट चल रही है, पार्लियामेंट की कुछ गरिमा, उसके कुछ rules and regulations होते हैं, सरकार उस मर्यादा को तोड़ नहीं सकती और ये मैंने कहा था कि जबतक संसद चालू है, मैं बोल नहीं पाऊंगा। अभी चार दिन पहले संसद का सत्र पूर्ण हुआ है और आज आरा में मैंने घोषणा की है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए, नया बिहार बनाने के लिए। और मैंने पैकेज की घोषणा की है – सवा लाख करोड़ रूपया (1,25,000 करोड़)।

मैं बिहार की शक्ल सूरत बदल करके रख दूंगा। ये मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूँ और जब मैं ये कहूँगा तो मुझे मालूम है कि पत्रकारों को बुलाकर के कान में कहा जाएगा, ये तो पुराने वाला है, ये पहले वाला है। भाईयों-बहनों, मैं सच बता देना चाहता हूँ जब अटल जी की सरकार थी तब 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुआ था और न दिल्ली की सरकार न राज्य की सरकार। पूरे के पूरे 10,000 करोड़ रूपया खर्च नहीं कर पाई थी। उसका 1,000 करोड़ रूपया अभी खर्च करना बाकी बचा हुआ है। फिर जब बिहार में जब दो साल पहले राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हुआ, भाजपा के साथ धोखा किया गया, बिहार की जनता के साथ धोखा किया गया और बिहार के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ किया गया... और दिल्ली वाले पैकेज दो, हम आपका साथ देंगे, साथ तो देना ही था, उनका कुर्ता पकड़ करके बचने की कोशिश करनी ही थी और इसलिए पहुंचे और वहां से घोषणा की कि अब बिहार को 12,000 करोड़ का पैकेज मिलेगा और ये नाचने लगे। ये बिहार के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ था। 2013-14 में 12,000 करोड़ के पैकेज में से कुछ भी खर्च कर पाए। इतना ही नहीं, 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद उन 12,000 करोड़ में से करीब-करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च हमने आकर के किया और अभी भी 8,000 करोड़ उसका भी बाकी है। 1,000 करोड़ अटल जी वाला और 8,000 करोड़ मनमोहन सिंह की सरकार वाला।

भाईयों-बहनों, हम बिजली का एक कारखाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाने वाले हैं। वो 20,000 करोड़ रूपया और रोड के लिए और थोड़ा खर्चा, जिसकी रकम होती है करीब-करीब 12,000 करोड़ रूपया। ये रकम बनती है - 40,000 करोड़ और इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो मैं सवा लाख करोड़ कह रहा हूँ, ये चालीस हजार करोड़ उसमें नहीं है। चालीस हजार करोड़ अलग तो कुल पैकेज बन जाता है - 1,65,000 करोड़ रूपया का पैकेज; बिहार के विकास के लिए, बिहार की जनता के भलाई के लिए। इन पैसों से रास्ते बनेंगे; बिजली आएगी; किसान को खेतों में मदद मिलेगी; नौजवान के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे; बिहार के घर-घर में 24 घंटे बिजली मिले; बिहार के गाँव में जहाँ बिजली अभी पहुंची नहीं है, वहां बिजली पहुंचे; जिन घरों में पीने का पानी नहीं है, शौचालय नहीं है, उन घरों को पीने का पानी मिले, शौचालय मिले; फ़र्टिलाइज़र के कारखाने लगे; किसानों को यूरिया मिले; एक के बाद एक विकास की अनगिनत योजनाओं के द्वारा बिहार के जीवन को बदलना है।

भाईयों-बहनों, ये बातें करने वाले लोग... आज बिहार के लोगों को पढ़ने के लिए बाहर जाना क्यों पड़ता है? मां-बाप को लाखों रुपये का खर्चा क्यों करना पड़ता है? ये स्थिति मुझे बदलनी है और इसके लिए इतना बड़ा विशाल जनसमूह। मैं लोकसभा चुनाव में भी यहाँ आया था लेकिन ऐसा जनसागर मैंने देखा नहीं था। मैं यहाँ भी देख रहा हूँ, मंच के पीछे देख रहा हूँ, क्या जनसैलाब है! चुनाव के डेट जब भी आ जाएं, बिहार की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को जिताने का फैसला कर लिया है। और हमने वादा किया है कि हम आपकी भलाई के लिए, आपके कल्याण के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। नया बिहार बना के रहेंगे, बिहार का भाग्य बदल कर रहेंगे, बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे। इसी शुभकामना के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – भारत माता की जय – आवाज कोसी के कोने-कोने में पहुंचनी चाहिए।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Explore More
શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ

લોકપ્રિય ભાષણો

શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
India’s Agricultural Transformation: How India’s Agri sector transformed over the last decade

Media Coverage

India’s Agricultural Transformation: How India’s Agri sector transformed over the last decade
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
દમણ, ગુજરાતમાં વિવિધ વિકાસ કાર્યોના શિલાન્યાસ/લોકાર્પણ પ્રસંગે પ્રધાનમંત્રીજીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવના એડમિનિસ્ટ્રેટર પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલ, સંસદમાં મારા સહયોગી કલાબેન ડેલકર, દમણ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના પ્રમુખ દીપિકા ટંડેલ જી, દમણ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ ધર્મ બાબુ પટેલ, સિલવાસા મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ સોમનાથ દેવરેજી, દાદરા નગર હવેલી જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ નિશા ભાવસાર જી, દીવ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ હરીશ કપાયાજી, દીવ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ કોટિયા રંજીતાબેન અને અહીં વિશાળ સંખ્યામાં પધારેલા મારા વહાલા ભાઈઓ-બહેનો,

તમે જેમ અહીં એકઠા થયા છો, તેવી જ રીતે લક્ષદ્વીપમાં પણ બહુ મોટી સંખ્યામાં લોકો વીડિયોના માધ્યમથી અમારી સાથે જોડાયેલા છે, કારણ કે આજે લક્ષદ્વીપના વિકાસની પણ એક નવી શરૂઆત, એક નવો પ્રકલ્પ, જે આખા લક્ષદ્વીપના જીવનમાં એક ક્રાંતિકારી કામ કરવાનો છે, તેના માટે પણ કેટલીક યોજનાઓનું શિલાન્યાસ અને લોકાર્પણ થયું છે.

સાથીઓ,

કેટલાક વર્ષો પહેલાં, જ્યારે હું તમારી વચ્ચે આવ્યો હતો, તો મેં કહ્યું હતું આ આપણું દમણ ઝડપથી મિની ઇન્ડિયા બની રહ્યું છે અને આજે હું જોઈ રહ્યો છું, ડાબી બાજુ આખું બંગાળ છે અને જમણી બાજુ આખું અસામ છે. દમણ મિની ઇન્ડિયાનું જીવતું-જાગતું ઉદાહરણ બની ચૂક્યું છે. અહીંની વિવિધતા, અલગ-અલગ ક્ષેત્રોના લોકોનું અહીં નિવાસ કરવું, આખા ભારતની સુંદર ઝલક તમારી વચ્ચે આવીને મળી જાય છે. તમે બધા આટલી મોટી સંખ્યામાં અમને આશીર્વાદ આપવા આવ્યા, હું આના માટે આપ સૌનો ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ કરું છું.

 

ભાઈઓ-બહેનો,

મને કેટલીય વાર દમણ અને દીવ આવવાનો અવસર મળ્યો છે. દાદરા અને નગર હવેલી પણ આવતો રહું છું અને જ્યારે હું મુખ્યમંત્રી કે પ્રધાનમંત્રી નહોતો, ત્યારે તો બહુ વાર આવતો હતો. પરંતુ હવે જ્યારે હું અહીં આવું છું અને અહીંના સુશાસનને જોઈને, ગવર્નન્સ મોડલને જોઈને બહુ સારું લાગે છે. દર વખતે મને લાગે છે કે ગત વખતની સરખામણીમાં આ ક્ષેત્ર વિકાસની રાહ પર માઈલો આગળ વધી ગયું છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવએ દાયકાઓથી વિકાસના સપના જોયા હતા. જે સપના પહેલાં જોયા, એ પેઢીઓ તો ચાલી ગઈ. પરંતુ આજે જે પેઢી છે, તે પોતાની આંખોની સામે જોઈ રહી છે કે તેમના માતા-પિતા, દાદા-દાદી જે સપના જોતા હતા, એ આજે સપના પૂરા થતા તમે પોતાની આંખોથી જોઈ રહ્યા છો. આજે પણ અહીં કનેક્ટિવિટી, હેલ્થ, એજ્યુકેશન, ટુરિઝમ અને અર્બન ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર આનાથી જોડાયેલી અનેક પરિયોજનાઓનું ઉદ્ઘાટન અને શિલાન્યાસ થયું છે. વિકાસના આ કામ દમણ અને આખી યુનિયન ટેરિટરી માટે અહીંના લોકોના જીવનને સરળ બનાવશે. આનાથી યુવાનો માટે નવા અવસરો તૈયાર થશે. આ કામોની પાછળ પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલની દ્રષ્ટિ, તેમની અને તેમની ટીમની મહેનત સાફ-સાફ નજરે પડે છે. હું આના માટે પણ પ્રફુલ્લ ભાઈ અને તેમની આખી ટીમની સરાહના કરું છું. હું બધાને લક્ષદ્વીપના લોકોને, દાદરા-નગર હવેલીના લોકોને અનેક-અનેક શુભકામનાઓ આપું છું, આપ સૌને વધામણી આપું છું.

સાથીઓ,

આજે તમારી વચ્ચે આવ્યો છું, તો એક સુખદ સમાચાર આવ્યા છે. હું તો આજે સવારે દિલ્હીથી નીકળી ચૂક્યો હતો, પરંતુ અત્યારે જે આંકડા સામે આવ્યા છે, જે સમાચાર આવ્યા છે, તે ખરેખર પ્રસન્નતા આપનારા છે અને હું પણ ઈચ્છું છું, આ ખુશી તમારી સાથે પણ વહેંચું. આજે જે આંકડા આવ્યા છે, એ આંકડાઓથી સાફ છે કે ભારતની અર્થવ્યવસ્થાનો પાયો કેટલો મજબૂત છે. વર્ષ 2025-26 માં એટલે કે જે ફાઇનાન્સિયલ યર પાછલું પૂરું થયું, વર્ષ 2025-26 માં ભારતે 7.7 પર્સન્ટનો ગ્રોથ રેટ હાસલ કર્યો છે, 7.7 અને પાછલો ક્વાર્ટર જે 31 માર્ચે ખતમ થયો, તેમાં પણ ભારતનો ગ્રોથ 7.8 પર્સન્ટ રહ્યો છે, 7.8 અને આ દુનિયામાં તેજ ગતિથી આગળ વધનારી મોટી ઇકોનોમી છે. દરેક ભારતીયને ગર્વ થાય, આ છે તેની ગતિ. આજે દેશ જે રિફોર્મ એક્સપ્રેસ પર ચાલી રહ્યો છે, આજે દેશમાં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનો જે આટલો વિકાસ થઈ રહ્યો છે, ગરીબ કલ્યાણને લઈને આટલા મોટા સ્તરે જે કામ ચાલી રહ્યું છે, આ બધા પ્રયાસોનું પરિણામ છે કે આજે દેશ મોટી ઇકોનોમીમાં સૌથી તેજ ગતિથી આગળ વધી રહ્યો છે અને આપણે બધા જાણીએ છીએ, દુનિયા સંકટોમાં ઘેરાયેલી છે, આખી દુનિયાની અર્થવ્યવસ્થા સવાલોના નિશાનો નીચે દબાયેલી પડી છે, વૈશ્વિક સંકટના આ ખરાબમાં ખરાબ દોરમાં પણ 140 કરોડ દેશવાસીઓના સામૂહિક પ્રયાસોથી ભારત પોતાની જાતને સંભાળી તો રાખી જ રહ્યું છે, પરંતુ સાથે-સાથે સૌથી આગળ રહેવામાં પણ તેના પ્રયાસો સફળ થતા જઈ રહ્યા છે. હું દેશવાસીઓને આર્થિક ક્ષેત્રની આ નવી ઊંચાઈને પ્રાપ્ત કરવા માટે ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું અને હું દેશને ફરી આશ્વસ્ત કરું છું કે દેશ દુનિયાભરમાં ચાલી રહેલા આ સંકટોનો સામનો કરતા Reform, Perform અને Transform ના રસ્તા પર આવી જ રીતે દ્રઢ સંકલ્પની સાથે, તેજ ગતિથી આગળ વધતો જ રહેશે, આ મારી દેશવાસીઓને ગેરંટી છે.

સાથીઓ,

આજે આપણા માટે વિકાસ જેટલો જરૂરી છે, એટલું જ મહત્વનું છે કે આપણું વિકાસનું મોડલ સસ્ટેનેબલ હોય. આજે વર્લ્ડ એન્વાયરમેન્ટ ડેના દિવસે આપણા અહીં યુનિયન ટેરિટરી સ્ટેટ આ સંકલ્પને સાકાર કરી રહ્યું છે. આજે એક તરફ અહીં હજારો કરોડની વિકાસ પરિયોજનાઓનું લોકાર્પણ અને શિલાન્યાસ થયું છે. સાથે જ અહીં આશરે એક લાખ એક વૃક્ષ માતાના નામે, એક લાખ છોડ પણ વાવવામાં આવી રહ્યા છે. મને ગર્વ છે કે એક એવો કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ છે, જેણે સરકારી ઈમારતોમાં શત પ્રતિશત, 100 પર્સન્ટ સૌર ઊર્જાના ઉપયોગની ઉપલબ્ધિ હાંસલ કરી છે. આજે દીવમાં દિવસમાં જેટલી વીજળીની ડિમાન્ડ હોય છે, તે સોલર પાવરથી જ પૂરી થઈ રહી છે અને આપણે તો આને હજુ આગળ લઈને જવાનું છે. ઘરોમાં પણ સોલર ઊર્જાથી વીજળી મળે, એટલું જ નહીં વધારાની વીજળીથી પરિવારની આવક પણ થાય, તેના માટે રૂફટોપ સોલર પ્લાન્ટ્સ લગાવવાની પહેલ શરૂ થઈ છે. હું આ ઉપલબ્ધિઓ માટે પણ આપ સૌની સરાહના કરું છું.

 

સાથીઓ,

સાથે-સાથે મને એ પણ જણાવવામાં આવ્યું છે, દમણના લોકો આ દિવસોમાં અહીં સ્વચ્છતા અભિયાન પણ ચલાવી રહ્યા છે. આ દર્શાવે છે કે સ્વચ્છતા કઈ રીતે દમણના જનજીવનમાં સંસ્કાર બની ચૂકી છે અને આ સંસ્કાર સ્વચ્છતામાં નજરે પડી રહ્યા છે. હું આ જનભાગીદારીના તમારા પ્રયાસો માટે દમણના લોકોનું અભિનંદન કરું છું.

સાથીઓ,

દાદરા નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આ સંઘ શાસિત પ્રદેશ હોવાની સાથે જ ભારતની ઓળખ અને વિરાસત પણ છે. એટલા માટે, આના વિકાસ માટે અમારા લક્ષ્ય પણ સાધારણ નથી. મને યાદ છે, જ્યારે હું ગયા વર્ષે સિલવાસા આવ્યો હતો, ત્યારે મેં તમને સિંગાપોરનું ઉદાહરણ આપ્યું હતું. મેં કહ્યું હતું કે એક સમયે સિંગાપોર માછીમારોનું નાનું એવું ગામ હતું. પરંતુ, સિંગાપોરના લોકોએ એક સપનું જોયું, ત્યાંના લોકોએ મોટું લક્ષ્ય નક્કી કર્યું અને આજે એ જ સિંગાપોર દુનિયાનું સૌથી મોટું બિઝનેસ હબ બની ચૂક્યું છે. આજે દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ પણ એ જ સપનું જોઈ રહ્યા છે. આ નમો એરપોર્ટ, દમણગંગા નદી પર બનનારો આઇકોનિક બ્રિજ, ‘બીચ ફ્રન્ટ’ તેના પર બનનારો કન્વેન્શન સેન્ટર, આવા બધા ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર દ્વારા આપણે ભવિષ્યના મોટા સંકલ્પોનો પાયો નાખી રહ્યા છીએ. આ પ્રોજેક્ટ્સ દ્વારા લોકોની અવરજવર સરળ થશે. અહીં બિઝનેસ માટે નવી સંભાવનાઓ બનશે. દમણના બંને કિનારા પર વિકાસની ગતિ હજુ વધુ તેજ થશે.

સાથીઓ,

અહીં સગવડતાના અર્થતંત્રથી જોડાયેલા અવસરો વધશે અને સાથે જ ટ્રાન્સપોર્ટ નગર જેવી સુવિધાથી વ્યાપાર, લોજિસ્ટિક્સને પણ નવી ગતિ મળશે.

 

સાથીઓ,

આ ક્ષેત્રમાં બ્લુ ઇકોનોમી માટે અમે જે વિઝન તૈયાર કર્યું છે, તે વિઝન પણ હાઇટેક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરની તાકાતથી જ સાકાર થશે. એટલા માટે જ, લક્ષદ્વીપના કલપેની અને કદમત દ્વીપોમાં પણ આજે જ આધુનિક પોર્ટ્સની આધારશિલા રાખવામાં આવી રહી છે. આ તમામ પ્રયાસો બ્લુ ઇકોનોમીમાં દેશની તાકાતને વધારશે અને જેવું મેં કહ્યું આ લક્ષદ્વીપનું ભાગ્ય બદલનારા પગલાં છે.

સાથીઓ,

ભાજપની સરકારમાં, એનડીએની અમારી સરકારમાં અમારા માટે વિકાસની પહેલી કસોટી છે- ગરીબ, વંચિત, આદિવાસી અને મિડલ ક્લાસના જીવનમાં બદલાવ! આના માટે, હેલ્થ સેક્ટર અમારી બહુ મોટી પ્રાથમિકતા છે. વિતેલા વર્ષોમાં દેશ હેલ્થ કેર માટે હોલિસ્ટિક વિઝન લઈને આગળ વધ્યો. અમે ઈલાજથી જોડાયેલી દરેક ચિંતાનું સમાધાન કર્યું છે. આજે ગરીબમાં ગરીબ પાસે પણ આયુષ્માન કાર્ડની સુવિધા છે. તેમની પાસે 5 લાખ રૂપિયા સુધીના મફત ઈલાજનો ભરોસો છે. બીમારીની સમયસર તપાસ થઈ શકે, તેના માટે, પ્રધાનમંત્રી આયુષ્માન આરોગ્ય મંદિરોની વ્યવસ્થા છે. જન ઔષધિ કેન્દ્રો દ્વારા સસ્તી દવાઓ પણ મળી રહી છે. આ સુવિધાઓ હજુ બહેતર થાય, હજુ આધુનિક થાય, તેના માટે આયુષ્માન ભારત ડિજિટલ મિશન દ્વારા આજે સ્વાસ્થ્ય સેવાઓને ટેકનોલોજીથી જોડવામાં આવી રહી છે.

સાથીઓ,

આયુષ્માન કાર્ડ અને જન ઔષધિ કેન્દ્રોથી જ ગરીબ અને મધ્યમ વર્ગના આશરે સવા બે લાખ કરોડ રૂપિયા ખર્ચ થતા બચ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

કેન્દ્ર સરકારની નીતિઓનો બહુ લાભ આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ થયો છે. એક સમયે અહીં ઈલાજની સારી સુવિધાઓનો પણ અભાવ હતો. અહીં મેડિકલ કોલેજ સુધી નહોતી. પરંતુ, હવે મેડિકલ કોલેજ પણ છે અને તેમાં પોસ્ટ ગ્રેજ્યુએશનનું ભણતર પણ શરૂ થઈ ગયું છે. સિલવાસાની નમો હોસ્પિટલ ગયા વર્ષથી હજારો લોકોની સેવા કરી રહી છે. આજે દમણમાં પણ નમો હોસ્પિટલનું લોકાર્પણ થયું છે. આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ હવે હજુ બહેતર હેલ્થ કેરનો લાભ મળશે.

 

સાથીઓ,

અમારી સરકાર કેવી રીતે સ્વાસ્થ્યને પ્રાથમિકતા આપતા ચાલી રહી છે, આનું એક પ્રમાણ નેશનલ ફેમિલી હેલ્થ સર્વેના પરિણામોમાં પણ મળે છે. એક સમયે ભારતમાં મોટાભાગના બાળકોની ડિલિવરી હોસ્પિટલમાં નહોતી થતી. આજે દેશમાં 90 ટકાથી વધુ ડિલિવરી હોસ્પિટલોમાં થઈ રહી છે, જેના કારણે માતા મૃત્યુ કે નવજાતની મૃત્યુમાં બહુ મોટી અટકાવ આવી છે. મિશન ઇન્દ્રધનુષના કારણે બાળકોના રસીકરણના ક્ષેત્રમાં પણ ભારતે સારી પ્રગતિ કરી છે. 2014 પહેલાં માત્ર 60 ટકા બાળકોનું પૂર્ણ રસીકરણ થઈ શકતું હતું. આજે આ આંકડો વધીને આશરે 90 ટકા સુધી પહોંચી ગયો છે. સ્વાસ્થ્ય સુરક્ષાના ક્ષેત્રમાં પણ મોટો બદલાવ આવ્યો છે. 2014 પહેલાં 30 ટકાથી પણ ઓછા પરિવારો સ્વાસ્થ્ય વીમા યોજનાથી જોડાયેલા હતા. આજે આયુષ્માન ભારતે, એ આંકડાઓને પણ બદલી દીધા છે. હવે 60 ટકાથી વધુ પરિવારોને આ સુરક્ષા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

સ્વાસ્થ્યના ક્ષેત્રમાં સરકારના આ પ્રયાસોનો લાભ જો કોઈને સૌથી વધારે મળ્યો છે, તો તે મારા દેશની નારી શક્તિ છે.

સાથીઓ,

પહેલાં આ ક્ષેત્રના યુવાનોને હાયર એજ્યુકેશન માટે પણ બહાર જવું પડતું હતું. પરંતુ, આજે અહીં નેશનલ લેવલની, એક નહીં કેટલીય ઇન્સ્ટિટ્યૂટ બની ચૂકી છે. પાછલા વર્ષોમાં અહીં શાળાઓની નવી બિલ્ડિંગ્સ બની છે, શાળાઓમાં સ્માર્ટ ક્લાસરૂમ પણ બન્યા છે. 40 હજારથી વધુ વિદ્યાર્થીઓને આનો લાભ મળી રહ્યો છે. મને ખુશી છે કે કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ ધીમે-ધીમે એજ્યુકેશનના ક્ષેત્રમાં આગળ આવી રહ્યો છે. સ્વામી વિવેકાનંદ એજ્યુકેશન હબ જેવા કેટલાય નિર્માણ અહીં થઈ રહ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આ શિક્ષણ ક્રાંતિમાં આપણી દીકરીઓ પાછળ ન રહે, આ પણ મારો સંકલ્પ છે. આના માટે કેટલાય મોટા પ્રયાસો કરવામાં આવી રહ્યા છે. સરસ્વતી સાયકલ સ્કીમ, સરસ્વતી વિદ્યા યોજના, અહીંની દીકરીઓને બહુ મદદ કરી રહી છે.

 

સાથીઓ,

આજે ભારતની કોશિશ છે કે દેશના યુવાનોને ડિગ્રીની સાથે જ સાચી દિશા પણ મળે. તેમને એવો એક્સપોઝર મળે, જે લોકલ ટેલેન્ટને ગ્લોબલ અવસરોથી જોડે. ડિઝાઇન, લો, એન્જિનિયરિંગ, મેડિકલ એજ્યુકેશન, આઈટી, ડ્રોન અને રિન્યુએબલ એનર્જી જેવા ક્ષેત્રોમાં આપણી આજની તૈયારી ભારતની વર્કફોર્સને મજબૂત બનાવશે. એટલા માટે પ્રોફેશનલ સંસ્થાઓનો વિસ્તાર બહુ મહત્વપૂર્ણ છે.

સાથીઓ,

આજે NIFT ના અઢારમાં કેમ્પસની આધારશિલા રાખવામાં આવી છે. આ સંસ્થાન અહીંના યુવાનોને ગ્લોબલ એક્સપોઝરથી જોડશે. આઈ.ટી.આઈ. દમણમાં ડ્રોન ટેકનિશિયન જેવા નવા કોર્સીસ પણ શરૂ થયા છે. પીએમ વિશ્વકર્મા અને પીએમ સૂર્ય ઘર મફત વીજળી યોજના, આનાથી જોડાયેલા ટ્રેનિંગ પ્રોગ્રામ્સનો લાભ પણ યુવાનોને મળી રહ્યો છે.

સાથીઓ,

દેશમાં રમતગમતને પણ નવી વિચાકધારા સાથે આગળ વધારવામાં આવી. આપણી રમતો હવે માત્ર મોટા શહેરો કે મોટા સ્ટેડિયમો સુધી સીમિત નથી. ખેલો ઇન્ડિયા જેવા પ્રયાસોએ યુવાનોને પોતાની પ્રતિભા દેખાડવાનો નવો મંચ આપ્યો છે. આનાથી નાના-નાના ક્ષેત્રોમાં નેશનલ લેવલ પર રમત જગતમાં આપણા બાળકો આગળ આવી રહ્યા છે અને આનો પણ લાભ આ ક્ષેત્રને થયો છે. દીવ આજે બીચ સ્પોર્ટ્સનું એક મોટું કેન્દ્ર બનીને ઉભર્યું છે. ઘોઘલા બીચ પર થયેલી બીચ ગેમ્સે પણ દેશનું ધ્યાન આ ક્ષેત્ર તરફ ખેંચ્યું છે. આજે અહીં આધુનિક સ્પોર્ટ્સ ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર સતત કામ થઈ રહ્યું છે. ખાનવેલમાં ફૂટબોલ સેન્ટર અને દમણમાં વોલીબોલ ટ્રેનિંગ સેન્ટર અહીં રમત સંસ્કૃતિને મજબૂત કરી રહ્યા છે.

સાથીઓ,

આજે દેશનું બહુ મોટું ફોકસ ટુરિઝમ પર પણ છે. અમારો પ્રયાસ છે કે ટુરિઝમથી સ્થાનિક કલા અને સંસ્કૃતિને પ્રોત્સાહન મળે. નાના-નાના સ્થાનોને પણ મોટા-મોટા અવસરોથી જોડી શકાય. ‘દેખો અપના દેશ’ જેવા પ્રયાસે લોકોને દેશની વિવિધતા વિશે જાણવા માટે પ્રેરિત કર્યા છે. આજે ભારતમાં હેરિટેજ ટુરિઝમ, ‘બીચ ટુરિઝમ’, ઇકો-ટુરિઝમ, એડવેન્ચર ટુરિઝમ, આ સેક્ટર્સને નવી ઊર્જા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં તો પર્યટન પણ એટલી અસીમ સંભાવનાઓવાળું એક ક્ષેત્ર છે. આ ક્ષેત્રને પ્રાકૃતિક સુંદરતાનું અદ્ભુત વરદાન મળ્યું છે. એટલા માટે જ પર્યટનને લઈને દેશે જે નીતિઓ પર કામ કર્યું છે, દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવને તેનો મોટો લાભ મળી રહ્યો છે. 2021 માં અહીં આશરે 6 લાખ ટૂરિસ્ટ આવ્યા હતા. 2025 માં આ સંખ્યા વધીને લગભગ 50 લાખ સુધી પહોંચી ગઈ છે. એટલે કે કેટલાક જ વર્ષોમાં ટુરિઝમ ફૂટફોલમાં આશરે 10 ગણો વધારો થયો છે. આ સારૂં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, સારી સુવિધાઓ, સાફ-સુથરા ‘બીચ’ ના કારણે સંભવ થયું છે. દમણ નાઇટ માર્કેટ, રામસેતુ સી-ફ્રન્ટ, નમોપથ સી-ફ્રન્ટ, નાની દમણ ફોર્ટ, ગંગેશ્વર ટેમ્પલ કોમ્પ્લેક્સ, આવા અનેક સ્થાનો આજે આખા ક્ષેત્રની નવી ઓળખ બનાવી રહ્યા છે.

 

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આના સપનાઓને પૂરા કરવા માટે આપણે અહીંની ઔદ્યોગિક તાકાતને પણ વધારવાની છે. આ પણ ગર્વની વાત છે કે આ યુનિયન ટેરિટરીએ મેન મેડ ફાઈબર ના ક્ષેત્રમાં પોતાની અલગ ઓળખ બનાવી છે. દાદરા અને નગર હવેલીને નેશનલ મેન મેડ ફાઈબર કેપિટલના રૂપમાં ઓળખવામાં આવે છે. પ્લાસ્ટિક એક્સપોર્ટમાં પણ આ ક્ષેત્ર સતત આગળ વધી રહ્યું છે. સરકારે અહીં ઇન્ડસ્ટ્રીઝ અને MSMEs ને સપોર્ટ આપવા માટે પણ સતત પ્રયાસો કર્યા છે. અહીં MSMEs અને અન્ય ઇન્ડસ્ટ્રીઝને કરોડો રૂપિયાથી વધુની આર્થિક સહાયતા આપવામાં આવી છે. કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશના લઘુ ઉદ્યોગો અને કુટીર ઉદ્યોગો માટે નવા અવસરો ખુલી રહ્યા છે. મને વિશ્વાસ છે, આવનારા સમયમાં આ ક્ષેત્ર મેન્યુફેક્ચરિંગનું મોટું હબ બનશે.

સાથીઓ,

જ્યારે વિકાસના વિઝનની સાથે સંવેદનશીલ ગવર્નન્સ જોડાય છે, તો પરિવર્તન તેજ ગતિથી જમીન પર ઉતરે છે. દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં આપણા આ પ્રયાસોનો પ્રભાવ જોઈને સંતોષ થાય છે. મને આ ધરતીના લોકો પર પૂરો વિશ્વાસ છે. અહીંના યુવાનો, અહીંની માતાઓ-બહેનો, અહીંના ખેડૂતો, કારીગરો, શ્રમિકો અને ઉદ્યમીઓ, આવનારા વર્ષોમાં આ વિકાસ યાત્રાને હજુ આગળ લઈ જશે. હું તમને ભરોસો અપાવું છું, તમારા સપનાઓને પૂરા કરવા માટે કેન્દ્ર સરકાર ખભેથી ખભો મિલાવીને ઊભી રહેશે. આ જ વિશ્વાસની સાથે, હું એકવાર ફરી વિકાસ પરિયોજનાઓ માટે તમને ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું. મારી સાથે બોલો ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ.