Text of PM’s Parivartan Rally in Saharsa, Bihar

Published By : Admin | August 18, 2015 | 20:02 IST
PM Modi lists out achievements of Govt in Bihar #ParivartanRally
We are committed to find permanent solutions of all problems that Bihar faces today: PM #ParivartanRally
A special package of Rs. 1.65 lakh crores announced for developing Bihar, for transforming future of the state #ParivartanRally
Welfare of farmers is essential for agriculture to develop: PM Modi #ParivartanRally
We are dedicated to bring back the glory of Bihar; we will transform the lives of people of Bihar: PM Modi #ParivartanRally

मंच पर विराजमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी, हमारे सबके वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान गोपाल नारायण जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी जी चौधरी, हमारे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ जी, हमारे पूर्व सांसद श्री उदय सिंह जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी, हमारे सांसद श्रीमान कीर्ति आजाद जी, हमारे सांसद हुकुमदेव नारायण जी, पूर्व सांसद श्रीमान निखिल चौधरी जी, श्रीमान प्रदीप सिंह, श्रीमान नित्यानंद राय जी, श्रीमान विश्वमोहन चौधरी जी, श्रीमान एम. के. सिंह जी, डॉ. राम नरेश सिंह जी, श्रीमान वीरेन्द्र चौधरी जी, श्रीमान देवेन्द्र यादव जी, श्रीमान महबूब अली जी, श्रीमान आलोक रंजन जी, श्रीमान मदन मोहन चौधरी जी, श्रीमती नूतन सिंह जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

एहन पुण्य भूमि मिथिला में अबी हम गदगद छी, अहाँ सबके वेरी वेरी प्रणाम करै छी। मैं अभी आरा के कार्यक्रम से आ रहा हूँ। इसके पूर्व मुझे बिहार में दो रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। हवा का रूख साफ-साफ नजर आता है। इस चुनाव में माहौल कैसा है, मौसम कैसा है, उसका भली-भांति पता चल रहा है। और एनडीए की सरकार बनाने के लिए जो तेज आंधी आई है, तेज हवा चल रही है, बारिश भी उसको भिगो नहीं पा रही है। मैं जब आरा में था तो मुझे बताया गया कि यहाँ तो तेज बारिश चल रही है लेकिन ये कोसी अंचल के लोग हैं अगर एक बार ठान लेते हैं तो कितनी ही तेज आंधी क्यों न हो, वर्षा कितनी तेज क्यों न हो, न ये रुकते हैं, न ये थकते हैं, न ये झुकते हैं; ऐसे कोसी अंचल के लोगों को मैं बार-बार नमन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, आज से 7 साल पहले 18 अगस्त को कोसी में एक भयंकर बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यहाँ के नजदीक के 7-8 जिलों के 35 लाख परिवार तबाह हो गए थे। यहाँ के खेत बालू से भर गए थे। गाँव विनाश के कगार पर आकर खड़े हो गए थे। न धरती बची थी, न आसमान रूकने को तैयार था और यहाँ का जन-जन मुसीबतों से जूझ रहा था। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था। इस कोसी अंचल के अनेक परिवार मेरे यहाँ गुजरात में बसे हुए हैं और उसके कारण मुझे उनसे सारी जानकारियां मिलती थीं और तब हमें लगा था कि भले गुजरात कितना ही दूर क्यूँ न हो लेकिन कोसी अंचल के पीड़ा के समय कंधे से कंधा मिलाकर के उनके दुःख में साथ खड़े रहना चाहिए, उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मदद करनी चाहिए।

आप सबको याद होगा मेरे भाईयों-बहनों, देशभर से लोग उस संकट की घड़ी में आपके साथ खड़े हो गए थे लेकिन कभी कभी जनता-जनार्दन का दर्द, सामान्य मानव की पीड़ा... राजनेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होता है उस अहंकार के कारण न संवेदनाओं को समझ पाते हैं, न दर्द को अनुभव कर पाते हैं, न पीड़ा का पता चलता है और वे अपने अहंकार में डूबे रहते हैं। आज जब मैं इस कोसी अंचल में आया हूँ, कोसी नदी की सौगंध खाकर मैं कहना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति का अहंकार कितनी गहरी चोट पहुंचाता है... अगर मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई अपमानित करे, दुत्कार दे, अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल कर ले, मैं कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की हरकतों के संबंध में कभी कुछ बोलता नहीं हूँ, उसको सहने के लिए अपने आप को तैयार करता हूँ लेकिन जब अहंकार के कारण सामान्य मानव के दर्द और पीड़ा के साथ खिलवाड़ किया जाए तो जनता-जनार्दन के दर्द और पीड़ा के लिए मैं अपने आप को रोक नहीं सकता।

आज जब मैं कोसी अंचल में आया हूँ तो मैं कहना चाहता हूँ कि वो दिन था 18 अगस्त और आज का दिन भी है 18 अगस्त, यही दिन था। आज मैं कहना चाहता हूँ गुजरात के लोगों ने अपनी पसीने की कमाई से कोसी अंचल के लोगों की मदद के लिए 5 करोड़ रुपये का चेक भेजा था। उस 5 करोड़ रुपये में, इसी कोसी अंचल के लोग जो गुजरात में रहते हैं और जिन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाई है, 5-10 लाख रुपये इन लोगों का भी था। वे भी अपने वतन के पीड़ित परिवार के लिए कोई न कोई योगदान देना चाहते थे। लेकिन उनका अहंकार सातवें आसमान पर था; इतना अहंकार था कि आप दर्द झेलते रहें, आप पीड़ा झेलते रहें और उन्होंने 5 करोड़ रुपये का चेक गुजरात की जनता को वापिस भेज दिया।

आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या सार्वजनिक जीवन में ये आचरण उचित है क्या? पूरी ताकत से बताईये, उचित है क्या? ऐसा आचरण मंजूर है क्या? कोसी अंचल के लोग मरें तो मरें लेकिन मैं अपना अहंकार नहीं छोडूंगा, ये चल सकता है क्या? जो अपना अहंकार नहीं छोड़ सकते, हमें उन्हें छोड़ना चाहिए कि नहीं छोड़ना चाहिए? ऐसे लोगों को विदाई देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों, ऐसे ही अहंकार ने बिहार के सपनों को रौंद डाला है, बिहार के सपनों को चूर-चूर कर डाला है। उस अपमान को भी मैं पी गया था और फिर मैंने हमारे बिहार के भाई जो वहां रहते थे, उन्हीं को मैंने कुछ सामान देकर भेजा कि भाई कहीं मेरा नाम आएगा तो तूफ़ान खड़ा हो जाएगा, आप चुपचाप जाईये और यहाँ के गरीब परिवारों में बाँट कर के आ जाईये। लोग आये, यहाँ के लोगों की सेवा की और कहीं तक किसी को कोई आवाज तक नहीं आने दी।

सार्वजनिक जीवन में कुछ परंपराएँ होती है, कुछ नीतियां होती हैं, कुछ नियम होते हैं लेकिन ऐसे लोगों से मैं क्या अपेक्षा करूँ? आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, जयप्रकाश नारायण हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? पूरी ताकत से जवाब दीजिये, जयप्रकाश नारायण जी हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? हमारा गौरव है कि नहीं है? जयप्रकाश जी ने बिहार को गौरव दिलाया कि नहीं दिलाया? बिहार का मान-सम्मान बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया? आपको याद है, उन जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? आपातकाल में जब श्रीमती इंदिरा गाँधी का राज चलता था तो जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? कांग्रेस पार्टी ने, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने, जयप्रकाश नारायण जी को जेल में बंद कर दिया था और उनका यही गुनाह था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते थे। बिहार जयप्रकाश जी के नेतृत्व में, और बाद में पूरा हिन्दुस्तान जयप्रकाश जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आया था... भाईयों-बहनों, अब जगह नहीं है, कहाँ आओगे जी, अब भर गया है! इस मैदान में जगह हो न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

जयप्रकाश जी जेल से बीमार होकर बाहर निकले और यह देश बिहार के सपूत और मां भारती के लाल जयप्रकाश नारायण जी को नहीं बचा पाया, वो हमारे बीच से चले गए। जयप्रकाश नारायण जी के मृत्यु के लिए कौन जिम्मेवार है? यही कांग्रेस के लोग जिन्होंने जयप्रकाश नारायण जी के साथ ये खिलवाड़ किया था। मैं बिहार के भाईयों से पूछना चाहता हूँ... बिहार के लोगों ने मन में ऐसी ठान ली कि जयप्रकाश नारायण जी के साथ इस प्रकार का जुल्म करने वालों को बिहार की राजनीति से उखाड़ कर के फेंक दिया लेकिन आज जो लोग जयप्रकाश जी की जिंदगी के साथ खेल खेलने वाले लोगों के साथ चुनावी समझौता कर रहे हैं, कांग्रेस के पास सीटों का बंटवारा कर रहे हैं, मुझे बताईये ये जयप्रकाश नारायण जी की आत्मा को पीड़ा पहुंचाएगा कि नहीं पहुंचाएगा? ये जयप्रकाश नारायण के साथ धोखा और विश्वासघात है कि नहीं है? आप ऐसे लोगों के साथ भरोसा कर सकते हैं क्या जिन्होंने जयप्रकाश नारायण की जिंदगी को तबाह कर दिया? सत्ता पाने के लिए आप उनकी गोद में जाकर के बैठ रहे हो और इसलिए ये जो कारोबार चल रहा है.. अब बिहार की राजनीति बदलाव की ओर चल पड़ी है।

अब ये सरकार रहने वाली नहीं है यहाँ की जनता न इनको स्वीकार करने वाली है, न इनका साथ देने वाली है। भाईयों-बहनों, आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया। आप मुझे बताईये, मैं जनता-जनार्दन के बीच आकर के अपने काम का हिसाब दे रहा हूँ कि नहीं दे रहा हूँ? जनता के बीच जाने के लिए एक हिम्मत लगती है, हौसला लगता है, जनता के प्रति विश्वास लगता है, आस्था लगती है लेकिन जब जनता से नाता टूट जाता है, अहंकार सातवें आसमान पर होता है तब जनता के बीच जाने के बजाय एयर कंडीशन कमरे में पांच-पच्चीस पत्रकारों को बुलाकर के जहर उगलने के सिवाय कोई काम नहीं बचा रहता है। भाईयों-बहनों, हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं।

भाईयों-बहनों, बिहार को जंगलराज का डर सता रहा है। उसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मैं आज बिहार सरकार के उनके अपने पुलिस विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जो बातें रखी हैं, मैं बिहार की जनता के सामने बिहार सरकार के ही आंकड़ों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ, आपके सामने रखना चाहता हूँ। दबे पाँव मुसीबतें आनी शुरू हो गई हैं, संकट का सामना करने के दिन आने शुरू हो गए हैं। आप देखिये, बिहार सरकार के आंकड़े बताते हैं: जनवरी 2015, बिहार में अपराधों की संख्या थी – 13,808 गंभीर प्रकार के अपराधों की संख्या थी - 13,808; जून 2015 में यह आंकड़ा पहुँच गया 13 हजार से 18,500 पर गंभीर प्रकार के अपराधों में 34 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। मुझे बताईये, ये जंगलराज के आसार हैं कि नहीं हैं आपका जीवन मुश्किल होगा कि नहीं होगा? निर्दोष बहन-बेटियों की जिंदगी ख़तरे में पड़ेगी कि नहीं पड़ेगी? जनवरी में 217 हत्याएं हुई थी, जून में, इतने कम समय में ये आंकड़ा पहुँच गया 316 और अभी तो पिछले ढेढ़ महीने का मैंने हिसाब नहीं लिया है। 46 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है और अब आप मुझे बताईये कि हत्याओं का अगर यह दौर चलता रहा तो बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी का क्या हाल होगा।

भाईयों-बहनों, एक और बात पर मैं गंभीरता से ध्यान दिलाना चाहता हूँ। ये आंकड़े बिहार सरकार के हैं, मैं उन्हीं के आकड़ें बोल रहा हूँ। जनवरी महीने में दंगों की संख्या थी – 866, जून महीना आते-आते दंगों की संख्या हो गई – करीब-करीब 1500; Exact आंकड़ा है – 1497 यानि 1500 में तीन बाकी। जनवरी में करीब साढ़े आठ सौ और जून में 1500 दंगे, 72 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है। हर पैरामीटर को देखिये, बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। खतरे की घंटी बज चुकी है। मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ इस चुनाव में हत्याएं अगर बंद करवानी है, ये दंगे फ़साद बंद करवाने हैं, इन निर्दोष लोगों की जिंदगी को बचाना है तो आपको घर-घर जाकर के चौकीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ़ पटना में एक मजबूत सरकार बिठा दीजिए, आप हमारा साथ दे दीजिए, हम आपकी समस्याओं का समाधान कर देंगे।

कई दिनों से चर्चा चल रही थी... मैं एक और बात भी कहना भूल गया, उसे मैं जरा कह देना चाहता हूँ। मैंने कोसी का जिक्र किया लेकिन यहाँ के लोगों को याद होगा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में हमारी सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद फिर से एक बार कोसी पर संकट आया था। नेपाल में दुपाल चौक के पास कोसी नदी पर लैंडस्लाइड हुआ था। नदी का आना बंद हुआ था और वहां पानी जमा होना शुरू हो गया था। सेटॅलाइट से हमें पता चला कि अगर ये पानी जमा होता गया और बाढ़ में अगर ये मिट्टी ढह गई तो कोसी के पट पर बिहार के जितने गाँव हैं, आज से सात साल पहले जो तबाही आई थी, उससे भी सौ गुना ज्यादा तबाही आ जाएगी, कोई बच नहीं पाएगा। काम करने वाली सरकार कैसी होती है, जनता-जनार्दन के दुःख-दर्द को समझने वाली सरकार कैसी होती है, समस्याओं को पहले पहचान कर के रास्ते खोजने का प्रयास करने वाली सरकार कैसी होती है...

मेरे कोसी पट के भाईयों-बहनों, आपको याद होगा कि हमने तुरंत सेना को भेजा। नेपाल में उस नदी को फिर से खोलने के लिए; इतने बड़े लैंडस्लाइड में छोटे-छोटे hole करके पानी निकले, इसका अभियान चलाया। उसके बाद भी हमें भरोसा नहीं था। कहीं ये प्रयोग हमारा सफल नहीं हुआ और पानी जमा होता ही गया और अगर एक साथ मिट्टी ढह गई तो मेरे कोसी अंचल का कोई परिवार बचेगा नहीं। मैंने हमारे जवानों को यहाँ भेजा, बिहार सरकार को आग्रह किया, मेरे कार्यकर्ताओं को mobilize किया, दिल्ली में बैठकर इसको लगातार मॉनिटर किया, गाँव के गाँव खाली करवाए। यहाँ के किसान मेरे से नाराज हो गए कि पानी तो दिखता नहीं है, वर्षा नहीं है, और मोदी गाँव खाली करवा रहे हैं, पशुओं को भी ले जाने के लिए कहते हैं और वो भी 50-50 किलोमीटर दूरी... सबकी नाराजगी थी। उसके बाद भी मैंने कहा, No compromise. उनको पता नहीं है कि कितने बड़े आफ़त की संभावना है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आफ़त न आए लेकिन अगर आ जाए तो नुकसान कम से कम होना चाहिए। उसके लिए हम प्रबंध कर रहे हैं और आज कोसी अंचल के भाईयों-बहनों को हिसाब देते हुए मुझे गर्व होता है कि हम उस काम को करने में सफल हुए। कोसी अंचल को मुसीबत से बचा लिया था। इतना ही नहीं, अभी जब नेपाल में भूकंप आया तो यहाँ की सरकार को इस बात का आश्चर्य था और ये बात उन्होंने publicly कही भी कि भूकंप आने के कुछ ही मिनटों में भारत के प्रधानमंत्री का फ़ोन आ गया, उन जिलों तक फ़ोन पहुँच गया। इस इलाके के सांसदों से मैंने फ़ोन पर बात कर ली। हमने कहा, देखो भाई ये भूकंप भारी नुकसान कर सकता है।

अगर कोसी की इतनी चिंता होती... सबसे पहले भारत सरकार की जिम्मेवारी थी कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों को ठीक कर ले। आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कोसी के कारण कोई वर्ष ऐसा नहीं जाता है कि यहाँ के किसानों को, यहाँ की जनता को किसी मुसीबत का सामना न करना पड़ा हो। इस समस्या का समाधान नेपाल में है। जब तक नेपाल के साथ बैठकर पानी के बहाव के संबंध में उचित योजना नहीं बनती है, इस कोसी पट के किसानों को नहीं बचाया जा सकता। और इसलिए, नेपाल के साथ गहरे संबंध होना जरुरी है, नेपाल के सुख-दुःख का साथी बनना जरुरी है। 17 साल, अगर पटना से नेपाल जाना हो तो 70 मिनट नहीं लगता है लेकिन नेपाल जाने में प्रधानमंत्री को 17 साल लग गए। 17 साल तक देश का कोई प्रधानमंत्री गया नहीं, नेपाल से कोसी की बात नहीं की, कोसी पट के मेरे किसान भाईयों को बचाने की कोई बात नहीं की। हम गये, 17 साल के बाद गये और नेपाल सरकार के साथ आमने-सामने बैठकर के कोसी के लिए क्या कर सकते हैं, उसकी बातचीत प्रारंभ कर दी।

रास्ते खोजने पड़ते हैं, समस्याओं का समाधान निकालना पड़ता है तब जाकर के हमारे देश के गरीब किसान को हम बचा सकते हैं और उस काम को 2014 के अगस्त में हमने करके दिखाया, नेपाल जाकर करके दिखाया। भूकंप के बाद नेपाल के साथ हम खड़े रहे। आज एक भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर के हम उसकी सेवा में लगे हुए हैं और इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से भी समाधान खोजना होगा। हमने वो प्रयास प्रारंभ किया। हमारे यहाँ कृषि मंत्रालय तो है, कृषि की चिंता करने के लिए तो समय है लेकिन किसान की चिंता कौन करेगा। अगर हम किसान के कल्याण की चिंता नहीं करेंगे तो कृषि का भी कल्याण नहीं होगा और अगर हम कृषि का कल्याण नहीं करेंगे तो किसान का भी कल्याण नहीं होगा। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से हमने कहा कि जो मंत्रालय का नया नाम होगा – कृषि विकास और किसान कल्याण मंत्रालय। अब सरकार के डिपार्टमेंट में सिर्फ़ कृषि की नहीं किसान की भी चिंता करने की योजना बनेगी। ये बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हमने निर्णय किया है।

भाईयों-बहनों, मैं अभी-अभी आरा से आ रहा हूँ। आरा में सरकार का कार्यक्रम था और उस सरकार के कार्यक्रम में विकास की योजनाओं का प्रारंभ करना था। स्किल डेवलपमेंट हो, रास्तों का जाल गूंथना हो, अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया और चुनाव के पहले जब मैं आया था, तब मैंने कहा था कि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम 50,000 करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। बिहार को कहा था ना? और कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि मोदी बोलते हैं, करते नहीं हैं कुछ; मोदी ने चुनाव के पहले वादा किया था और जब पिछली बार आये तो फिर से टोने मारने शुरू कर दिये कि मोदी बोले क्यों नहीं। मैंने कहा था कि पार्लियामेंट चल रही है, पार्लियामेंट की कुछ गरिमा, उसके कुछ rules and regulations होते हैं, सरकार उस मर्यादा को तोड़ नहीं सकती और ये मैंने कहा था कि जबतक संसद चालू है, मैं बोल नहीं पाऊंगा। अभी चार दिन पहले संसद का सत्र पूर्ण हुआ है और आज आरा में मैंने घोषणा की है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए, नया बिहार बनाने के लिए। और मैंने पैकेज की घोषणा की है – सवा लाख करोड़ रूपया (1,25,000 करोड़)।

मैं बिहार की शक्ल सूरत बदल करके रख दूंगा। ये मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूँ और जब मैं ये कहूँगा तो मुझे मालूम है कि पत्रकारों को बुलाकर के कान में कहा जाएगा, ये तो पुराने वाला है, ये पहले वाला है। भाईयों-बहनों, मैं सच बता देना चाहता हूँ जब अटल जी की सरकार थी तब 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुआ था और न दिल्ली की सरकार न राज्य की सरकार। पूरे के पूरे 10,000 करोड़ रूपया खर्च नहीं कर पाई थी। उसका 1,000 करोड़ रूपया अभी खर्च करना बाकी बचा हुआ है। फिर जब बिहार में जब दो साल पहले राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हुआ, भाजपा के साथ धोखा किया गया, बिहार की जनता के साथ धोखा किया गया और बिहार के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ किया गया... और दिल्ली वाले पैकेज दो, हम आपका साथ देंगे, साथ तो देना ही था, उनका कुर्ता पकड़ करके बचने की कोशिश करनी ही थी और इसलिए पहुंचे और वहां से घोषणा की कि अब बिहार को 12,000 करोड़ का पैकेज मिलेगा और ये नाचने लगे। ये बिहार के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ था। 2013-14 में 12,000 करोड़ के पैकेज में से कुछ भी खर्च कर पाए। इतना ही नहीं, 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद उन 12,000 करोड़ में से करीब-करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च हमने आकर के किया और अभी भी 8,000 करोड़ उसका भी बाकी है। 1,000 करोड़ अटल जी वाला और 8,000 करोड़ मनमोहन सिंह की सरकार वाला।

भाईयों-बहनों, हम बिजली का एक कारखाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाने वाले हैं। वो 20,000 करोड़ रूपया और रोड के लिए और थोड़ा खर्चा, जिसकी रकम होती है करीब-करीब 12,000 करोड़ रूपया। ये रकम बनती है - 40,000 करोड़ और इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो मैं सवा लाख करोड़ कह रहा हूँ, ये चालीस हजार करोड़ उसमें नहीं है। चालीस हजार करोड़ अलग तो कुल पैकेज बन जाता है - 1,65,000 करोड़ रूपया का पैकेज; बिहार के विकास के लिए, बिहार की जनता के भलाई के लिए। इन पैसों से रास्ते बनेंगे; बिजली आएगी; किसान को खेतों में मदद मिलेगी; नौजवान के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे; बिहार के घर-घर में 24 घंटे बिजली मिले; बिहार के गाँव में जहाँ बिजली अभी पहुंची नहीं है, वहां बिजली पहुंचे; जिन घरों में पीने का पानी नहीं है, शौचालय नहीं है, उन घरों को पीने का पानी मिले, शौचालय मिले; फ़र्टिलाइज़र के कारखाने लगे; किसानों को यूरिया मिले; एक के बाद एक विकास की अनगिनत योजनाओं के द्वारा बिहार के जीवन को बदलना है।

भाईयों-बहनों, ये बातें करने वाले लोग... आज बिहार के लोगों को पढ़ने के लिए बाहर जाना क्यों पड़ता है? मां-बाप को लाखों रुपये का खर्चा क्यों करना पड़ता है? ये स्थिति मुझे बदलनी है और इसके लिए इतना बड़ा विशाल जनसमूह। मैं लोकसभा चुनाव में भी यहाँ आया था लेकिन ऐसा जनसागर मैंने देखा नहीं था। मैं यहाँ भी देख रहा हूँ, मंच के पीछे देख रहा हूँ, क्या जनसैलाब है! चुनाव के डेट जब भी आ जाएं, बिहार की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को जिताने का फैसला कर लिया है। और हमने वादा किया है कि हम आपकी भलाई के लिए, आपके कल्याण के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। नया बिहार बना के रहेंगे, बिहार का भाग्य बदल कर रहेंगे, बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे। इसी शुभकामना के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – भारत माता की जय – आवाज कोसी के कोने-कोने में पहुंचनी चाहिए।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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Text of PM’s address at the launch of various projects in Rajkot, Gujarat
February 25, 2024
Dedicates five AIIMS at Rajkot, Bathinda, Raebareli, Kalyani and Mangalagiri
Lays foundation stone and dedicates to nation more than 200 Health Care Infrastructure Projects worth more than Rs 11,500 crore across 23 States /UTs
Inaugurates National Institute of Naturopathy named ‘Nisarg Gram’ in Pune
Inaugurates and dedicates to nation 21 projects of the Employees’ State Insurance Corporation worth around Rs 2280 crores
Lays foundation stone for various renewable energy projects
Lays foundation stone for New Mundra-Panipat pipeline project worth over Rs 9000 crores
“We are taking the government out of Delhi and trend of holding important national events outside Delhi is on the rise”
“New India is finishing tasks at rapid pace”
“I can see that generations have changed but affection for Modi is beyond any age limit”
“With Darshan of the submerged Dwarka, my resolve for Vikas and Virasat has gained new strength; divine faith has been added to my goal of a Viksit Bharat”
“In 7 decades 7 AIIMS were approved, some of them never completed. In last 10 days, inauguration or foundation stone laying of 7 AIIMS have taken place”
“When Modi guarantees to make India the world’s third largest economic superpower, the goal is health for all and prosperity for all”

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

मंच पर उपस्थित गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी मनसुख मांडविया, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सी आर पाटिल, मंच पर विराजमान अन्य सभी वरिष्ठ महानुभाव, और राजकोट के मेरे भाइयों और बहनों, नमस्कार।

आज के इस कार्यक्रम से देश के अनेक राज्यों से बहुत बड़ी संख्या में अन्य लोग भी जुड़े हैं। कई राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय गवर्नर श्री, विधायकगण, सांसदगण, केंद्र के मंत्रीगण, ये सब इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हमारे साथ जुड़े हैं। मैं उन सभी का भी हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

एक समय था, जब देश के सारे प्रमुख कार्यक्रम दिल्ली में ही होकर रह जाते थे। मैंने भारत सरकार को दिल्ली से बाहर निकालकर देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है और आज राजकोट पहुंच गए। आज का ये कार्यक्रम भी इसी बात का गवाह है। आज इस एक कार्यक्रम से देश के अनेकों शहरों में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास होना, एक नई परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। कुछ दिन पहले ही मैं जम्मू कश्मीर में था। वहां से मैंने IIT भिलाई, IIT तिरुपति, ट्रिपल आईटी DM कुरनूल, IIM बोध गया, IIM जम्मू, IIM विशाखापट्टनम और IIS कानपुर के कैंपस का एक साथ जम्‍मू से लोकार्पण किया था। और अब आज यहां राजकोट से- एम्स राजकोट, एम्स रायबरेली, एम्स मंगलगिरी, एम्स भटिंडा, एम्स कल्याणी का लोकार्पण हुआ है। पांच एम्स, विकसित होता भारत, ऐसे ही तेज गति से काम कर रहा है, काम पूरे कर रहा है।

साथियों,

आज मैं राजकोट आया हूं, तो बहुत कुछ पुराना भी याद आ रहा है। मेरे जीवन का कल एक विशेष दिन था। मेरी चुनावी यात्रा की शुरुआत में राजकोट की बड़ी भूमिका है। 22 साल पहले 24 फरवरी को ही राजकोट ने मुझे पहली बार आशीर्वाद दिया था, अपना MLA चुना था। और आज 25 फरवरी के दिन मैंने पहली बार राजकोट के विधायक के तौर पर गांधीनगर विधानसभा में शपथ ली थी, जिंदगी में पहली बार। आपने तब मुझे अपने प्यार, अपने विश्वास का कर्जदार बना दिया था। लेकिन आज 22 साल बाद मैं राजकोट के एक-एक परिजन को गर्व के साथ कह सकता हूं कि मैंने आपके भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की है।

आज पूरा देश इतना प्यार दे रहा है, इतने आशीर्वाद दे रहा है, तो इसके यश का हकदार ये राजकोट भी है। आज जब पूरा देश, तीसरी बार-NDA सरकार को आशीर्वाद दे रहा है, आज जब पूरा देश, अबकी बार-400 पार का विश्वास, 400 पार का विश्वास कर रहा है। तब मैं पुन: राजकोट के एक-एक परिजन को सिर झुकाकर नमन करता हूं। मैं देख रहा हूं, पीढ़ियां बदल गई हैं, लेकिन मोदी के लिए स्नेह हर आयु सीमा से परे है। ये जो आपका कर्ज है, इसको मैं ब्याज के साथ, विकास करके चुकाने का प्रयास करता हूं।

साथियों,

मैं आप सबकी भी क्षमा चाहता हूं, और सभी अलग-अलग राज्यों में माननीय मुख्यमंत्री और वहां के जो नागरिक बैठे हैं, मैं उन सबसे भी क्षमा मांगता हूं क्योंकि मुझे आज आने में थोड़ा विलंब हो गया, आपको इंतजार करना पड़ा। लेकिन इसके पीछे कारण ये था कि आज मैं द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करके, उन्हें प्रणाम करके राजकोट आया हूं। द्वारका को बेट द्वारका से जोड़ने वाले सुदर्शन सेतु का लोकार्पण भी मैंने किया है। द्वारका की इस सेवा के साथ-साथ ही आज मुझे एक अद्भुत आध्यात्मिक साधना का लाभ भी मिला है। प्राचीन द्वारका, जिसके बारे में कहते हैं कि उसे खुद भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था, आज वो समुद्र में डूब गई है, आज मेरा सौभाग्य था कि मैं समुद्र के भीतर जाकर बहुत गहराई में चला गया और भीतर जाकर मुझे उस समुद्र में डूब चुकी श्रीकृष्‍ण वाली द्वारका, उसके दर्शन करने का और जो अवशेष हैं, उसे स्पर्श करके जीवन को धन्य बनाने का, पूजन करने का, वहां कुछ पल प्रभु श्रीकृष्ण का स्मरण करने का मुझे सौभाग्य मिला। मेरे मन में लंबे अर्से से ये इच्छा थी कि भगवान कृष्ण की बसाई उस द्वारका भले ही पानी के भीतर रही हो, कभी न कभी जाऊंगा, मत्था टेकुंगा और वो सौभाग्य आज मुझे मिला। प्राचीन ग्रंथों में द्वारका के बारे में पढ़ना, पुरातत्वविदों की खोजों को जानना, ये हमें आश्चर्य से भर देता है। आज समंदर के भीतर जाकर मैंने उसी दृश्य को अपनी आंखों से देखा, उस पवित्र भूमि को स्पर्श किया। मैंने पूजन के साथ ही वहां मोर पंख को भी अर्पित किया। उस अनुभव ने मुझे कितना भाव विभोर किया है, ये शब्दों में बताना मेरे लिए मुश्किल है। समंदर के गहरे पानी में मैं यही सोच रहा था कि हमारे भारत का वैभव, उसके विकास का स्तर कितना ऊंचा रहा है। मैं समुद्र से जब बाहर निकला, तो भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद के साथ-साथ मैं द्वारका की प्रेरणा भी अपने साथ लेकर लाया हूं। विकास और विरासत के मेरे संकल्पों को आज एक नई ताकत मिली है, नई ऊर्जा मिली है, विकसित भारत के मेरे लक्ष्य से आज दैवीय विश्वास उसके साथ जुड़ गया है।

साथियों,

आज भी यहां 48 हज़ार करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स आपको, पूरे देश को मिले हैं। आज न्यू मुंद्रा-पानीपत पाइपलाइन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे गुजरात से कच्चा तेल सीधे हरियाणा की रिफाइनरी तक पाइप से पहुंचेगा। आज राजकोट सहित पूरे सौराष्ट्र को रोड, उसके bridges, रेल लाइन के दोहरीकरण, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक सुविधाएं भी मिली हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद, अब एम्स भी राजकोट को समर्पित है और इसके लिए राजकोट को, पूरे सौराष्‍ट्र को, पूरे गुजरात को बहुत-बहुत बधाई! और देश में जिन-जिन स्‍थानों पर आज ये एम्स समर्पित हो रहा है, वहां के भी सब नागरिक भाई-बहनों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

साथियों,

आज का दिन सिर्फ राजकोट और गुजरात के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए भी ऐतिहासिक है। दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था का हेल्थ सेक्टर कैसा होना चाहिए? विकसित भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर कैसा होगा? इसकी एक झलक आज हम राजकोट में देख रहे हैं। आज़ादी के 50 सालों तक देश में सिर्फ एक एम्स था और भी दिल्ली में। आज़ादी के 7 दशकें में सिर्फ 7 एम्स को मंजूरी दी गई, लेकिन वो भी कभी पूरे नहीं बन पाए। और आज देखिए, बीते सिर्फ 10 दिन में, 10 दिन के भीतर-भीतर, 7 नए एम्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसलिए ही मैं कहता हूं कि जो 6-7 दशकों में नहीं हुआ, उससे कई गुना तेजी से हम देश का विकास करके, देश की जनता के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। आज 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 200 से अधिक हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इनमें मेडिकल कॉलेज हैं, बड़े अस्पतालों के सैटेलाइट सेंटर हैं, गंभीर बीमारियों के लिए इलाज से जुड़े बड़े अस्पताल हैं।

साथियों,

आज देश कह रहा है, मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। मोदी की गारंटी पर ये अटूट भरोसा क्यों है, इसका जवाब भी एम्स में मिलेगा। मैंने राजकोट को गुजरात के पहले एम्स की गारंटी दी थी। 3 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पंजाब को अपने एम्स की गारंटी दी थी, भटिंडा एम्स का शिलान्यास भी मैंने किया था और आज लोकार्पण भी मैं ही कर रहा हूं- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने यूपी के रायबरेली को एम्स की गारंटी दी थी। कांग्रेस के शाही परिवार ने रायबरेली में सिर्फ राजनीति की, काम मोदी ने किया। मैंने रायबरेली एम्स का 5 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया। आपके इस सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पश्चिम बंगाल को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज कल्याणी एम्स का लोकार्पण भी हुआ-आपके सेवक ने गारंटी पूरी कर दी। मैंने आंध्र प्रदेश को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज मंगलगिरी एम्स का लोकार्पण हुआ- आपके सेवक ने वो गारंटी भी पूरी कर दी। मैंने हरियाणा के रेवाड़ी को एम्स की गारंटी दी थी, कुछ दिन पहले ही, 16 फरवरी को उसकी आधारशिला रखी गई है। यानि आपके सेवक ने ये गारंटी भी पूरी की। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने 10 नए एम्स देश के अलग-अलग राज्यों में स्वीकृत किए हैं। कभी राज्यों के लोग केंद्र सरकार से एम्स की मांग करते-करते थक जाते थे। आज एक के बाद एक देश में एम्स जैसे आधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। तभी तो देश कहता है- जहां दूसरों से उम्मीद खत्म हो जाती है, मोदी की गारंटी वहीं से शुरू हो जाती है।

साथियों,

भारत ने कोरोना को कैसे हराया, इसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है। हम ये इसलिए कर पाए, क्योंकि बीते 10 वर्षों में भारत का हेल्थ केयर सिस्टम पूरी तरह से बदल गया है। बीते दशक में एम्स, मेडिकल कॉलेज और क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। हमने छोटी-छोटी बीमारियों के लिए गांव-गांव में डेढ़ लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए हैं, डेढ़ लाख से ज्यादा। 10 साल पहले देश में करीब-करीब 380-390 मेडिकल कॉलेज थे, आज 706 मेडिकल कॉलेज हैं। 10 साल पहले MBBS की सीटें लगभग 50 हज़ार थीं, आज 1 लाख से अधिक हैं। 10 साल पहले मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट सीटें करीब 30 हज़ार थीं, आज 70 हज़ार से अधिक हैं। आने वाले कुछ वर्षों में भारत में जितने युवा डॉक्टर बनने जा रहे हैं, उतने आजादी के बाद 70 साल में भी नहीं बने। आज देश में 64 हज़ार करोड़ रुपए का आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन चल रहा है। आज भी यहां अनेक मेडिकल कॉलेज, टीबी के इलाज से जुड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर, PGI के सैटेलाइट सेंटर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। आज ESIC के दर्जनों अस्पताल भी राज्यों को मिले हैं।

साथियों,

हमारी सरकार की प्राथमिकता, बीमारी से बचाव और बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाने की भी है। हमने पोषण पर बल दिया है, योग-आयुष और स्वच्छता पर बल दिया है, ताकि बीमारी से बचाव हो। हमने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति और आधुनिक चिकित्सा, दोनों को बढ़ावा दिया है। आज ही महाराष्ट्र और हरियाणा में योग और नेचुरोपैथी से जुड़े दो बड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन हुआ है। यहां गुजरात में ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ा WHO का वैश्विक सेंटर भी बन रहा है।

साथियों,

हमारी सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि गरीब हो या मध्यम वर्ग, उसको बेहतर इलाज भी मिले और उसकी बचत भी हो। आयुष्मान भारत योजना की वजह से गरीबों के एक लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। जन औषधि केंद्रों में 80 परसेंट डिस्काउंट पर दवा मिलने से गरीबों और मध्यम वर्ग के 30 हजार करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। यानि सरकार ने जीवन तो बचाया, इतना बोझ भी गरीब और मिडिल क्लास पर पड़ने से बचाया है। उज्ज्वला योजना से भी गरीब परिवारों को 70 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की बचत हो चुकी है। हमारी सरकार ने जो डेटा सस्ता किया है, उसकी वजह से हर मोबाइल इस्तेमाल करने वाले के करीब-करीब 4 हजार रुपए हर महीने बच रहे हैं। टैक्स से जुड़े जो रिफॉर्म्स हुए हैं, उसके कारण भी टैक्सपेयर्स को लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है।

साथियों,

अब हमारी सरकार एक और ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे आने वाले वर्षों में अनेक परिवारों की बचत और बढ़ेगी। हम बिजली का बिल ज़ीरो करने में जुटे हैं और बिजली से परिवारों को कमाई का भी इंतजाम कर रहे हैं। पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से हम देश के लोगों की बचत भी कराएंगे और कमाई भी कराएंगे। इस योजना से जुड़ने वाले लोगों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी और बाकी बिजली सरकार खरीदेगी, आपको पैसे देगी।

साथियों,

एक तरफ हम हर परिवार को सौर ऊर्जा का उत्पादक बना रहे हैं, तो वहीं सूर्य और पवन ऊर्जा के बड़े प्लांट भी लगा रहे हैं। आज ही कच्छ में दो बड़े सोलर प्रोजेक्ट और एक विंड एनर्जी प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में गुजरात की क्षमता का और विस्तार होगा।

साथियों,

हमारा राजकोट, उद्यमियों का, श्रमिकों, कारीगरों का शहर है। ये वो साथी हैं जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से अनेक साथी हैं, जिन्हें पहली बार मोदी ने पूछा है, मोदी ने पूजा है। हमारे विश्वकर्मा साथियों के लिए देश के इतिहास में पहली बार एक राष्ट्रव्यापी योजना बनी है। 13 हज़ार करोड़ रुपए की पीएम विश्वकर्मा योजना से अभी तक लाखों लोग जुड़ चुके हैं। इसके तहत उन्हें अपने हुनर को निखारने और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस योजना की मदद से गुजरात में 20 हजार से ज्यादा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से प्रत्येक विश्वकर्मा लाभार्थी को 15 हजार रुपए तक की मदद भी मिल चुकी है।

साथियों,

आप तो जानते हैं कि हमारे राजकोट में, हमारे यहाँ सोनार का काम कितना बड़ा काम है। इस विश्वकर्मा योजना का लाभ इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी मिला है।

साथियों,

हमारे लाखों रेहड़ी-ठेले वाले साथियों के लिए पहली बार पीएम स्वनिधि योजना बनी है। अभी तक इस योजना के तहत लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए की मदद इन साथियों को दी जा चुकी है। यहां गुजरात में भी रेहड़ी-पटरी-ठेले वाले भाइयों को करीब 800 करोड़ रुपए की मदद मिली है। आप कल्पना कर सकते हैं कि जिन रेहड़ी-पटरी वालों को पहले दुत्कार दिया जाता था, उन्हें भाजपा किस तरह सम्मानित कर रही है। यहां राजकोट में भी पीएम स्वनिधि योजना के तहत 30 हजार से ज्यादा लोन दिए गए हैं।

साथियों,

जब हमारे ये साथी सशक्त होते हैं, तो विकसित भारत का मिशन सशक्त होता है। जब मोदी भारत को तीसरे नंबर की आर्थिक महाशक्ति बनाने की गारंटी देता है, तो उसका लक्ष्य ही, सबका आरोग्य और सबकी समृद्धि है। आज जो ये प्रोजेक्ट देश को मिले हैं, ये हमारे इस संकल्प को पूरा करेंगे, इसी कामना के साथ आपने जो भव्‍य स्‍वागत किया, एयरपोर्ट से यहां तक आने में पूरे रास्ते पर और यहां भी बीच में आकर के आप के दर्शन करने का अवसर मिला। पुराने कई साथियों के चेहरे आज बहुत सालों के बाद देखे हैं, सबको नमस्ते किया, प्रणाम किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं बीजेपी के राजकोट के साथियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इतना बड़ा भव्य कार्यक्रम करने के लिए और फिर एक बार इन सारे विकास कामों के लिए और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हम सब मिलजुल करके आगे बढ़ें। आप सबको बहुत-बहुत बधाई। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश कहीं-कहीं पर गुजराती भाषा में भी है, जिसका यहाँ भावानुवाद किया गया है।