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PM Modi lists out achievements of Govt in Bihar #ParivartanRally
We are committed to find permanent solutions of all problems that Bihar faces today: PM #ParivartanRally
A special package of Rs. 1.65 lakh crores announced for developing Bihar, for transforming future of the state #ParivartanRally
Welfare of farmers is essential for agriculture to develop: PM Modi #ParivartanRally
We are dedicated to bring back the glory of Bihar; we will transform the lives of people of Bihar: PM Modi #ParivartanRally

मंच पर विराजमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी, हमारे सबके वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान गोपाल नारायण जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी जी चौधरी, हमारे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ जी, हमारे पूर्व सांसद श्री उदय सिंह जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी, हमारे सांसद श्रीमान कीर्ति आजाद जी, हमारे सांसद हुकुमदेव नारायण जी, पूर्व सांसद श्रीमान निखिल चौधरी जी, श्रीमान प्रदीप सिंह, श्रीमान नित्यानंद राय जी, श्रीमान विश्वमोहन चौधरी जी, श्रीमान एम. के. सिंह जी, डॉ. राम नरेश सिंह जी, श्रीमान वीरेन्द्र चौधरी जी, श्रीमान देवेन्द्र यादव जी, श्रीमान महबूब अली जी, श्रीमान आलोक रंजन जी, श्रीमान मदन मोहन चौधरी जी, श्रीमती नूतन सिंह जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

एहन पुण्य भूमि मिथिला में अबी हम गदगद छी, अहाँ सबके वेरी वेरी प्रणाम करै छी। मैं अभी आरा के कार्यक्रम से आ रहा हूँ। इसके पूर्व मुझे बिहार में दो रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। हवा का रूख साफ-साफ नजर आता है। इस चुनाव में माहौल कैसा है, मौसम कैसा है, उसका भली-भांति पता चल रहा है। और एनडीए की सरकार बनाने के लिए जो तेज आंधी आई है, तेज हवा चल रही है, बारिश भी उसको भिगो नहीं पा रही है। मैं जब आरा में था तो मुझे बताया गया कि यहाँ तो तेज बारिश चल रही है लेकिन ये कोसी अंचल के लोग हैं अगर एक बार ठान लेते हैं तो कितनी ही तेज आंधी क्यों न हो, वर्षा कितनी तेज क्यों न हो, न ये रुकते हैं, न ये थकते हैं, न ये झुकते हैं; ऐसे कोसी अंचल के लोगों को मैं बार-बार नमन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, आज से 7 साल पहले 18 अगस्त को कोसी में एक भयंकर बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यहाँ के नजदीक के 7-8 जिलों के 35 लाख परिवार तबाह हो गए थे। यहाँ के खेत बालू से भर गए थे। गाँव विनाश के कगार पर आकर खड़े हो गए थे। न धरती बची थी, न आसमान रूकने को तैयार था और यहाँ का जन-जन मुसीबतों से जूझ रहा था। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था। इस कोसी अंचल के अनेक परिवार मेरे यहाँ गुजरात में बसे हुए हैं और उसके कारण मुझे उनसे सारी जानकारियां मिलती थीं और तब हमें लगा था कि भले गुजरात कितना ही दूर क्यूँ न हो लेकिन कोसी अंचल के पीड़ा के समय कंधे से कंधा मिलाकर के उनके दुःख में साथ खड़े रहना चाहिए, उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मदद करनी चाहिए।

आप सबको याद होगा मेरे भाईयों-बहनों, देशभर से लोग उस संकट की घड़ी में आपके साथ खड़े हो गए थे लेकिन कभी कभी जनता-जनार्दन का दर्द, सामान्य मानव की पीड़ा... राजनेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होता है उस अहंकार के कारण न संवेदनाओं को समझ पाते हैं, न दर्द को अनुभव कर पाते हैं, न पीड़ा का पता चलता है और वे अपने अहंकार में डूबे रहते हैं। आज जब मैं इस कोसी अंचल में आया हूँ, कोसी नदी की सौगंध खाकर मैं कहना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति का अहंकार कितनी गहरी चोट पहुंचाता है... अगर मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई अपमानित करे, दुत्कार दे, अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल कर ले, मैं कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की हरकतों के संबंध में कभी कुछ बोलता नहीं हूँ, उसको सहने के लिए अपने आप को तैयार करता हूँ लेकिन जब अहंकार के कारण सामान्य मानव के दर्द और पीड़ा के साथ खिलवाड़ किया जाए तो जनता-जनार्दन के दर्द और पीड़ा के लिए मैं अपने आप को रोक नहीं सकता।

आज जब मैं कोसी अंचल में आया हूँ तो मैं कहना चाहता हूँ कि वो दिन था 18 अगस्त और आज का दिन भी है 18 अगस्त, यही दिन था। आज मैं कहना चाहता हूँ गुजरात के लोगों ने अपनी पसीने की कमाई से कोसी अंचल के लोगों की मदद के लिए 5 करोड़ रुपये का चेक भेजा था। उस 5 करोड़ रुपये में, इसी कोसी अंचल के लोग जो गुजरात में रहते हैं और जिन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाई है, 5-10 लाख रुपये इन लोगों का भी था। वे भी अपने वतन के पीड़ित परिवार के लिए कोई न कोई योगदान देना चाहते थे। लेकिन उनका अहंकार सातवें आसमान पर था; इतना अहंकार था कि आप दर्द झेलते रहें, आप पीड़ा झेलते रहें और उन्होंने 5 करोड़ रुपये का चेक गुजरात की जनता को वापिस भेज दिया।

आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या सार्वजनिक जीवन में ये आचरण उचित है क्या? पूरी ताकत से बताईये, उचित है क्या? ऐसा आचरण मंजूर है क्या? कोसी अंचल के लोग मरें तो मरें लेकिन मैं अपना अहंकार नहीं छोडूंगा, ये चल सकता है क्या? जो अपना अहंकार नहीं छोड़ सकते, हमें उन्हें छोड़ना चाहिए कि नहीं छोड़ना चाहिए? ऐसे लोगों को विदाई देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों, ऐसे ही अहंकार ने बिहार के सपनों को रौंद डाला है, बिहार के सपनों को चूर-चूर कर डाला है। उस अपमान को भी मैं पी गया था और फिर मैंने हमारे बिहार के भाई जो वहां रहते थे, उन्हीं को मैंने कुछ सामान देकर भेजा कि भाई कहीं मेरा नाम आएगा तो तूफ़ान खड़ा हो जाएगा, आप चुपचाप जाईये और यहाँ के गरीब परिवारों में बाँट कर के आ जाईये। लोग आये, यहाँ के लोगों की सेवा की और कहीं तक किसी को कोई आवाज तक नहीं आने दी।

सार्वजनिक जीवन में कुछ परंपराएँ होती है, कुछ नीतियां होती हैं, कुछ नियम होते हैं लेकिन ऐसे लोगों से मैं क्या अपेक्षा करूँ? आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, जयप्रकाश नारायण हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? पूरी ताकत से जवाब दीजिये, जयप्रकाश नारायण जी हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? हमारा गौरव है कि नहीं है? जयप्रकाश जी ने बिहार को गौरव दिलाया कि नहीं दिलाया? बिहार का मान-सम्मान बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया? आपको याद है, उन जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? आपातकाल में जब श्रीमती इंदिरा गाँधी का राज चलता था तो जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? कांग्रेस पार्टी ने, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने, जयप्रकाश नारायण जी को जेल में बंद कर दिया था और उनका यही गुनाह था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते थे। बिहार जयप्रकाश जी के नेतृत्व में, और बाद में पूरा हिन्दुस्तान जयप्रकाश जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आया था... भाईयों-बहनों, अब जगह नहीं है, कहाँ आओगे जी, अब भर गया है! इस मैदान में जगह हो न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

जयप्रकाश जी जेल से बीमार होकर बाहर निकले और यह देश बिहार के सपूत और मां भारती के लाल जयप्रकाश नारायण जी को नहीं बचा पाया, वो हमारे बीच से चले गए। जयप्रकाश नारायण जी के मृत्यु के लिए कौन जिम्मेवार है? यही कांग्रेस के लोग जिन्होंने जयप्रकाश नारायण जी के साथ ये खिलवाड़ किया था। मैं बिहार के भाईयों से पूछना चाहता हूँ... बिहार के लोगों ने मन में ऐसी ठान ली कि जयप्रकाश नारायण जी के साथ इस प्रकार का जुल्म करने वालों को बिहार की राजनीति से उखाड़ कर के फेंक दिया लेकिन आज जो लोग जयप्रकाश जी की जिंदगी के साथ खेल खेलने वाले लोगों के साथ चुनावी समझौता कर रहे हैं, कांग्रेस के पास सीटों का बंटवारा कर रहे हैं, मुझे बताईये ये जयप्रकाश नारायण जी की आत्मा को पीड़ा पहुंचाएगा कि नहीं पहुंचाएगा? ये जयप्रकाश नारायण के साथ धोखा और विश्वासघात है कि नहीं है? आप ऐसे लोगों के साथ भरोसा कर सकते हैं क्या जिन्होंने जयप्रकाश नारायण की जिंदगी को तबाह कर दिया? सत्ता पाने के लिए आप उनकी गोद में जाकर के बैठ रहे हो और इसलिए ये जो कारोबार चल रहा है.. अब बिहार की राजनीति बदलाव की ओर चल पड़ी है।

अब ये सरकार रहने वाली नहीं है यहाँ की जनता न इनको स्वीकार करने वाली है, न इनका साथ देने वाली है। भाईयों-बहनों, आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया। आप मुझे बताईये, मैं जनता-जनार्दन के बीच आकर के अपने काम का हिसाब दे रहा हूँ कि नहीं दे रहा हूँ? जनता के बीच जाने के लिए एक हिम्मत लगती है, हौसला लगता है, जनता के प्रति विश्वास लगता है, आस्था लगती है लेकिन जब जनता से नाता टूट जाता है, अहंकार सातवें आसमान पर होता है तब जनता के बीच जाने के बजाय एयर कंडीशन कमरे में पांच-पच्चीस पत्रकारों को बुलाकर के जहर उगलने के सिवाय कोई काम नहीं बचा रहता है। भाईयों-बहनों, हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं।

भाईयों-बहनों, बिहार को जंगलराज का डर सता रहा है। उसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मैं आज बिहार सरकार के उनके अपने पुलिस विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जो बातें रखी हैं, मैं बिहार की जनता के सामने बिहार सरकार के ही आंकड़ों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ, आपके सामने रखना चाहता हूँ। दबे पाँव मुसीबतें आनी शुरू हो गई हैं, संकट का सामना करने के दिन आने शुरू हो गए हैं। आप देखिये, बिहार सरकार के आंकड़े बताते हैं: जनवरी 2015, बिहार में अपराधों की संख्या थी – 13,808 गंभीर प्रकार के अपराधों की संख्या थी - 13,808; जून 2015 में यह आंकड़ा पहुँच गया 13 हजार से 18,500 पर गंभीर प्रकार के अपराधों में 34 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। मुझे बताईये, ये जंगलराज के आसार हैं कि नहीं हैं आपका जीवन मुश्किल होगा कि नहीं होगा? निर्दोष बहन-बेटियों की जिंदगी ख़तरे में पड़ेगी कि नहीं पड़ेगी? जनवरी में 217 हत्याएं हुई थी, जून में, इतने कम समय में ये आंकड़ा पहुँच गया 316 और अभी तो पिछले ढेढ़ महीने का मैंने हिसाब नहीं लिया है। 46 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है और अब आप मुझे बताईये कि हत्याओं का अगर यह दौर चलता रहा तो बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी का क्या हाल होगा।

भाईयों-बहनों, एक और बात पर मैं गंभीरता से ध्यान दिलाना चाहता हूँ। ये आंकड़े बिहार सरकार के हैं, मैं उन्हीं के आकड़ें बोल रहा हूँ। जनवरी महीने में दंगों की संख्या थी – 866, जून महीना आते-आते दंगों की संख्या हो गई – करीब-करीब 1500; Exact आंकड़ा है – 1497 यानि 1500 में तीन बाकी। जनवरी में करीब साढ़े आठ सौ और जून में 1500 दंगे, 72 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है। हर पैरामीटर को देखिये, बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। खतरे की घंटी बज चुकी है। मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ इस चुनाव में हत्याएं अगर बंद करवानी है, ये दंगे फ़साद बंद करवाने हैं, इन निर्दोष लोगों की जिंदगी को बचाना है तो आपको घर-घर जाकर के चौकीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ़ पटना में एक मजबूत सरकार बिठा दीजिए, आप हमारा साथ दे दीजिए, हम आपकी समस्याओं का समाधान कर देंगे।

कई दिनों से चर्चा चल रही थी... मैं एक और बात भी कहना भूल गया, उसे मैं जरा कह देना चाहता हूँ। मैंने कोसी का जिक्र किया लेकिन यहाँ के लोगों को याद होगा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में हमारी सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद फिर से एक बार कोसी पर संकट आया था। नेपाल में दुपाल चौक के पास कोसी नदी पर लैंडस्लाइड हुआ था। नदी का आना बंद हुआ था और वहां पानी जमा होना शुरू हो गया था। सेटॅलाइट से हमें पता चला कि अगर ये पानी जमा होता गया और बाढ़ में अगर ये मिट्टी ढह गई तो कोसी के पट पर बिहार के जितने गाँव हैं, आज से सात साल पहले जो तबाही आई थी, उससे भी सौ गुना ज्यादा तबाही आ जाएगी, कोई बच नहीं पाएगा। काम करने वाली सरकार कैसी होती है, जनता-जनार्दन के दुःख-दर्द को समझने वाली सरकार कैसी होती है, समस्याओं को पहले पहचान कर के रास्ते खोजने का प्रयास करने वाली सरकार कैसी होती है...

मेरे कोसी पट के भाईयों-बहनों, आपको याद होगा कि हमने तुरंत सेना को भेजा। नेपाल में उस नदी को फिर से खोलने के लिए; इतने बड़े लैंडस्लाइड में छोटे-छोटे hole करके पानी निकले, इसका अभियान चलाया। उसके बाद भी हमें भरोसा नहीं था। कहीं ये प्रयोग हमारा सफल नहीं हुआ और पानी जमा होता ही गया और अगर एक साथ मिट्टी ढह गई तो मेरे कोसी अंचल का कोई परिवार बचेगा नहीं। मैंने हमारे जवानों को यहाँ भेजा, बिहार सरकार को आग्रह किया, मेरे कार्यकर्ताओं को mobilize किया, दिल्ली में बैठकर इसको लगातार मॉनिटर किया, गाँव के गाँव खाली करवाए। यहाँ के किसान मेरे से नाराज हो गए कि पानी तो दिखता नहीं है, वर्षा नहीं है, और मोदी गाँव खाली करवा रहे हैं, पशुओं को भी ले जाने के लिए कहते हैं और वो भी 50-50 किलोमीटर दूरी... सबकी नाराजगी थी। उसके बाद भी मैंने कहा, No compromise. उनको पता नहीं है कि कितने बड़े आफ़त की संभावना है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आफ़त न आए लेकिन अगर आ जाए तो नुकसान कम से कम होना चाहिए। उसके लिए हम प्रबंध कर रहे हैं और आज कोसी अंचल के भाईयों-बहनों को हिसाब देते हुए मुझे गर्व होता है कि हम उस काम को करने में सफल हुए। कोसी अंचल को मुसीबत से बचा लिया था। इतना ही नहीं, अभी जब नेपाल में भूकंप आया तो यहाँ की सरकार को इस बात का आश्चर्य था और ये बात उन्होंने publicly कही भी कि भूकंप आने के कुछ ही मिनटों में भारत के प्रधानमंत्री का फ़ोन आ गया, उन जिलों तक फ़ोन पहुँच गया। इस इलाके के सांसदों से मैंने फ़ोन पर बात कर ली। हमने कहा, देखो भाई ये भूकंप भारी नुकसान कर सकता है।

अगर कोसी की इतनी चिंता होती... सबसे पहले भारत सरकार की जिम्मेवारी थी कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों को ठीक कर ले। आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कोसी के कारण कोई वर्ष ऐसा नहीं जाता है कि यहाँ के किसानों को, यहाँ की जनता को किसी मुसीबत का सामना न करना पड़ा हो। इस समस्या का समाधान नेपाल में है। जब तक नेपाल के साथ बैठकर पानी के बहाव के संबंध में उचित योजना नहीं बनती है, इस कोसी पट के किसानों को नहीं बचाया जा सकता। और इसलिए, नेपाल के साथ गहरे संबंध होना जरुरी है, नेपाल के सुख-दुःख का साथी बनना जरुरी है। 17 साल, अगर पटना से नेपाल जाना हो तो 70 मिनट नहीं लगता है लेकिन नेपाल जाने में प्रधानमंत्री को 17 साल लग गए। 17 साल तक देश का कोई प्रधानमंत्री गया नहीं, नेपाल से कोसी की बात नहीं की, कोसी पट के मेरे किसान भाईयों को बचाने की कोई बात नहीं की। हम गये, 17 साल के बाद गये और नेपाल सरकार के साथ आमने-सामने बैठकर के कोसी के लिए क्या कर सकते हैं, उसकी बातचीत प्रारंभ कर दी।

रास्ते खोजने पड़ते हैं, समस्याओं का समाधान निकालना पड़ता है तब जाकर के हमारे देश के गरीब किसान को हम बचा सकते हैं और उस काम को 2014 के अगस्त में हमने करके दिखाया, नेपाल जाकर करके दिखाया। भूकंप के बाद नेपाल के साथ हम खड़े रहे। आज एक भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर के हम उसकी सेवा में लगे हुए हैं और इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से भी समाधान खोजना होगा। हमने वो प्रयास प्रारंभ किया। हमारे यहाँ कृषि मंत्रालय तो है, कृषि की चिंता करने के लिए तो समय है लेकिन किसान की चिंता कौन करेगा। अगर हम किसान के कल्याण की चिंता नहीं करेंगे तो कृषि का भी कल्याण नहीं होगा और अगर हम कृषि का कल्याण नहीं करेंगे तो किसान का भी कल्याण नहीं होगा। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से हमने कहा कि जो मंत्रालय का नया नाम होगा – कृषि विकास और किसान कल्याण मंत्रालय। अब सरकार के डिपार्टमेंट में सिर्फ़ कृषि की नहीं किसान की भी चिंता करने की योजना बनेगी। ये बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हमने निर्णय किया है।

भाईयों-बहनों, मैं अभी-अभी आरा से आ रहा हूँ। आरा में सरकार का कार्यक्रम था और उस सरकार के कार्यक्रम में विकास की योजनाओं का प्रारंभ करना था। स्किल डेवलपमेंट हो, रास्तों का जाल गूंथना हो, अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया और चुनाव के पहले जब मैं आया था, तब मैंने कहा था कि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम 50,000 करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। बिहार को कहा था ना? और कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि मोदी बोलते हैं, करते नहीं हैं कुछ; मोदी ने चुनाव के पहले वादा किया था और जब पिछली बार आये तो फिर से टोने मारने शुरू कर दिये कि मोदी बोले क्यों नहीं। मैंने कहा था कि पार्लियामेंट चल रही है, पार्लियामेंट की कुछ गरिमा, उसके कुछ rules and regulations होते हैं, सरकार उस मर्यादा को तोड़ नहीं सकती और ये मैंने कहा था कि जबतक संसद चालू है, मैं बोल नहीं पाऊंगा। अभी चार दिन पहले संसद का सत्र पूर्ण हुआ है और आज आरा में मैंने घोषणा की है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए, नया बिहार बनाने के लिए। और मैंने पैकेज की घोषणा की है – सवा लाख करोड़ रूपया (1,25,000 करोड़)।

मैं बिहार की शक्ल सूरत बदल करके रख दूंगा। ये मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूँ और जब मैं ये कहूँगा तो मुझे मालूम है कि पत्रकारों को बुलाकर के कान में कहा जाएगा, ये तो पुराने वाला है, ये पहले वाला है। भाईयों-बहनों, मैं सच बता देना चाहता हूँ जब अटल जी की सरकार थी तब 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुआ था और न दिल्ली की सरकार न राज्य की सरकार। पूरे के पूरे 10,000 करोड़ रूपया खर्च नहीं कर पाई थी। उसका 1,000 करोड़ रूपया अभी खर्च करना बाकी बचा हुआ है। फिर जब बिहार में जब दो साल पहले राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हुआ, भाजपा के साथ धोखा किया गया, बिहार की जनता के साथ धोखा किया गया और बिहार के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ किया गया... और दिल्ली वाले पैकेज दो, हम आपका साथ देंगे, साथ तो देना ही था, उनका कुर्ता पकड़ करके बचने की कोशिश करनी ही थी और इसलिए पहुंचे और वहां से घोषणा की कि अब बिहार को 12,000 करोड़ का पैकेज मिलेगा और ये नाचने लगे। ये बिहार के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ था। 2013-14 में 12,000 करोड़ के पैकेज में से कुछ भी खर्च कर पाए। इतना ही नहीं, 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद उन 12,000 करोड़ में से करीब-करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च हमने आकर के किया और अभी भी 8,000 करोड़ उसका भी बाकी है। 1,000 करोड़ अटल जी वाला और 8,000 करोड़ मनमोहन सिंह की सरकार वाला।

भाईयों-बहनों, हम बिजली का एक कारखाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाने वाले हैं। वो 20,000 करोड़ रूपया और रोड के लिए और थोड़ा खर्चा, जिसकी रकम होती है करीब-करीब 12,000 करोड़ रूपया। ये रकम बनती है - 40,000 करोड़ और इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो मैं सवा लाख करोड़ कह रहा हूँ, ये चालीस हजार करोड़ उसमें नहीं है। चालीस हजार करोड़ अलग तो कुल पैकेज बन जाता है - 1,65,000 करोड़ रूपया का पैकेज; बिहार के विकास के लिए, बिहार की जनता के भलाई के लिए। इन पैसों से रास्ते बनेंगे; बिजली आएगी; किसान को खेतों में मदद मिलेगी; नौजवान के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे; बिहार के घर-घर में 24 घंटे बिजली मिले; बिहार के गाँव में जहाँ बिजली अभी पहुंची नहीं है, वहां बिजली पहुंचे; जिन घरों में पीने का पानी नहीं है, शौचालय नहीं है, उन घरों को पीने का पानी मिले, शौचालय मिले; फ़र्टिलाइज़र के कारखाने लगे; किसानों को यूरिया मिले; एक के बाद एक विकास की अनगिनत योजनाओं के द्वारा बिहार के जीवन को बदलना है।

भाईयों-बहनों, ये बातें करने वाले लोग... आज बिहार के लोगों को पढ़ने के लिए बाहर जाना क्यों पड़ता है? मां-बाप को लाखों रुपये का खर्चा क्यों करना पड़ता है? ये स्थिति मुझे बदलनी है और इसके लिए इतना बड़ा विशाल जनसमूह। मैं लोकसभा चुनाव में भी यहाँ आया था लेकिन ऐसा जनसागर मैंने देखा नहीं था। मैं यहाँ भी देख रहा हूँ, मंच के पीछे देख रहा हूँ, क्या जनसैलाब है! चुनाव के डेट जब भी आ जाएं, बिहार की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को जिताने का फैसला कर लिया है। और हमने वादा किया है कि हम आपकी भलाई के लिए, आपके कल्याण के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। नया बिहार बना के रहेंगे, बिहार का भाग्य बदल कर रहेंगे, बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे। इसी शुभकामना के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – भारत माता की जय – आवाज कोसी के कोने-कोने में पहुंचनी चाहिए।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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ଭିଭାଟେକ୍‌ର ପଞ୍ଚମ ସଂସ୍କରଣରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ମୂଳ ଭାଷଣର ବିଷୟବସ୍ତୁ
June 16, 2021
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ଭବିଷ୍ୟତର ଯେକୌଣସି ମହାମାରୀରୁ ବିଶ୍ୱକୁ ସୁରକ୍ଷା କବଚ ପ୍ରଦାନ କରିବାର ଆବଶ୍ୟକତା ଉପରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଗୁରୁତ୍ୱାରୋପ
କରୋନା ମହାମାରୀ ସମୟରେ ଡିଜିଟାଲ ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଲୋକମାନଙ୍କୁ ସହ୍ୟ କରିବା, ଅନ୍ୟ ସଂହିତ ସଂଯୋଗ ସ୍ଥାପନ କରିବା ଏବଂ ପରସ୍ପରଙ୍କୁ ସମବେଦନା ଜଣାଇବାରେ ବିଶେଷ ସହାୟକ ହୋଇଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ବିଚ୍ୟୁତିକୁ ଦୁର୍ଯୋଗ ବୋଲି ଭାବିବା ଅନୁଚିତ, ଆମକୁ ମରାମତି ଓ ପ୍ରସ୍ତୁତି ଭଳି ଦୁଇଟି ଭିତ୍ତିଭୂମି ଉପରେ ଦୃଷ୍ଟି ଦେବାକୁ ପଡ଼ିବ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଆମ ବିଶ୍ୱ ଏବେ ସମ୍ମୁଖୀନ ହେଉଥିବା ଚାଲେଞ୍ଜଗୁଡ଼ିକୁ ସାମୂହିକ ମନୋଭାବ ଏବଂ ମାନବ କୈନ୍ଦ୍ରିକ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଜରିଆରେ ମୁକାବିଲା କରାଯାଇପାରିବ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
କରୋନା ମହାମାରୀ କେବଳ ଆମର ସହନଶୀଳତାର ଏକ ପରୀକ୍ଷା ନୁହେଁ, ଅପରନ୍ତୁ ଆମର ଚିନ୍ତନର ମଧ୍ୟ ଏହା ଏକ ମହା ପରୀକ୍ଷା ଯଦ୍ୱାରା ଆମେ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ କେତେ ସମାବେଶୀ, ଯତ୍ନଶୀୟ ଓ ପୋଷଣୀୟ ବିକାଶ କରିପାରିବା :ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଭାରତ ହେଉଛି ବିଶ୍ୱର ସର୍ବାଧିକ ଷ୍ଟାର୍ଟ ଅପ୍‍ ଇକୋ ସିଷ୍ଟମର ଭୂମି, ଅଭିନବତ୍ୱ ସୃଷ୍ଟିକାରୀ ଏବଂ ନିବେଶକମାନେ ଯାହା ଚାହାନ୍ତି ସେସବୁ ଭାରତରେ ମହଜୁଦ ରହିଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଭାରତରେ ପାଞ୍ଚଟି ପ୍ରମୁଖ ଖୁଣ୍ଟ - ପ୍ରଜ୍ଞା, ବଜାର, ପୁଂଜି, ଅନୁକୂଳ ବାତାବରଣ ଏବଂ ଉନ୍ମୁକ୍ତତାର ସଂସ୍କୃତି ଆଧାରରେ ନିବେଶ କରିବା ସକାଶେ ମୁଁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ଆହ
ଭିଭା ଟେକ୍‍ର ପଞ୍ଚମ ସଂସ୍କରଣରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ

ମହାମହିମ, ମୋର ଉତ୍ତମ ବନ୍ଧୁ, ରାଷ୍ଟ୍ରପତି ମାକ୍ରନ । 

ମିଷ୍ଟର ମଭରିସ୍ ଲେଭି, ପବ୍ଲିସିସ୍ ଗ୍ରୁପର ଚେୟାରମ୍ୟାନ ।

ବିଶ୍ୱର ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରାନ୍ତରୁ ଆସିଥିବା ଅଂଶଗ୍ରହଣକାରୀ ଗଣ ।

ନମସ୍ତେ, 

ଏହି ଜଟିଳ ସମୟରେ ଭିଭାଟେକ୍‌ର ସଫଳ ଆୟୋଜନ କରିଥିବାରୁ ଆୟୋଜକମାନଙ୍କୁ ଅଭିନନ୍ଦନ । 

ଏହି ମଞ୍ଚ ଫ୍ରାନ୍ସର ବୈଷୟିକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରୁଛି । ଭାରତ ଓ ଫ୍ରାନ୍ସ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମିଳିତଭାବେ କାମ କରିଆସୁଛନ୍ତି । ସେଥିମଧ୍ୟରୁ ଟେକ୍‌ନୋଲୋଜି ଓ ଡିଜିଟାଲ ଦୁଇଟି କ୍ଷେତ୍ର ଯାହା ଦୁଇଦେଶକୁ ମିଳିତଭାବେ କାମ କରିବାର ନୂଆ ସୁଯୋଗ ଦେଇଛି । ଏହି ସହଯୋଗ ଆହୁରୀ ଦୃଢୀଭୂତ ହୋଇ ଆଗକୁ ବଢୁ ଏହା ସମୟର ଆହ୍ୱାନ । ଏହା କେବଳ ଆମ ଦୁଇଦେଶ ନୁହେଁ, ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ ।

ଅନେକ ଯୁବ କ୍ରୀଡାପ୍ରେମୀ ‘ଫ୍ରେଞ୍ଚ ଓପନ’ ବେଶ୍ ଉତ୍ସାହର ସହିତ ଦେଖିଲେ । ଏହି ଟୁର୍ଣ୍ଣାମେଣ୍ଟ ପାଇଁ ଭାରତର ଅନ୍ୟତମ ଟେକ୍ କମ୍ପାନୀ ଇନ୍‌ଫୋସିସ୍ ବୈଷୟିକ ସହାୟତା ଯୋଗାଇ ଦେଇଥିଲା । ସେହିଭଳି ଫରାସୀ କମ୍ପାନୀ ଆଟସ୍ ଭାରତରେ ସବୁଠାରୁ ଦ୍ରୁତଗ୍ରାମୀ ସୁପର କମ୍ପ୍ୟୁଟର ନିର୍ମାଣ ପ୍ରକଳ୍ପରେ ସମ୍ପୃକ୍ତ । ଏହା ଫ୍ରାନ୍ସର କ୍ୟାପଜେମିନ୍ ହେଉ କିମ୍ବା ଭାରତର ଟିସିଏସ୍ ଓ ୱିପ୍ରୋ, ଆମର ଆଇଟି ପ୍ରତିଭା ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱର ନାଗରିକ ଓ କମ୍ପାନୀଗୁଡିକୁ ସେବା ଯୋଗାଉଛନ୍ତି ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, 

ମୋ ବିଚାରରେ ଯେଉଁଠି ପାରମ୍ପରିକତା ବିଫଳ ହୁଏ, ସେଠାରେ ନବସୃଜନ ସହାୟତା ଯୋଗାଏ । କରୋନା ବୈଶ୍ୱିକ ମହାମାରୀ କାଳରେ ଏହା ପ୍ରମାଣିତ ହୋଇଛି । ଏହି ମହାମାରୀ ଆମ ସମୟର ସବୁଠୁ ବଡ ବିଘଟନ ଓ ଅଘଟଣ । 

ସବୁ ଦେଶ ଏହା ଦ୍ୱାରା କ୍ଷତିଗ୍ରସ୍ତ ହୋଇଛନ୍ତି ଏବଂ ଭବିଷ୍ୟତ ଘେନି ଉଦ୍‌ବିଗ୍ନ । କରୋନା ମହାମାରୀ ଆମର ଅନେକ ପାରମ୍ପରିକ ପ୍ରଣାଳୀକୁ ଚରମ ପରୀକ୍ଷାର ସମ୍ମୁଖୀନ କରାଇଛି । ତେବେ ସେ ଯା’ ହେଉ ନବସୃଜନ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ଏ ବିପଦରୁ ଅନେକାଂଶରେ ରକ୍ଷା ପାଇଛୁ । ଏହି ନବସୃଜନର ଅର୍ଥ ମୁଁ ଦୁଇପ୍ରକାର ସ୍ଥିତିରେ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଗୋଟିଏ ମହାମାରୀ ପୂର୍ବର ଓ ଅନ୍ୟଟି ମହାମାରୀ କାଳର ।

ମହାମାରୀ ପୂର୍ବର ନବସୃଜନ କହିଲେ ମୁଁ ଆମେ ହାସଲ କରିସାରିଥିବା ପ୍ରଗତି ଓ ବ୍ୟବସ୍ଥା କଥା କହୁଛି, ଯାହା ଆମକୁ ମହାମାରୀ କାଳରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିଛି । ଡିଜିଟାଲ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ସେଥିରୁ ଗୋଟିଏ ଯାହା କରୋନା କାଳରେ ଆମକୁ ପରିସ୍ଥିତି ସହିତ ଖାପ ଖୁଆଇବା, ସଂଯୋଗ ସ୍ଥାପନ କରିବା, ପରସ୍ପରକୁ ଆଶ୍ୱାସନା ଓ ସାନ୍ତ୍ୱନା ଦେବାର ସହାୟକ ହୋଇଛି । ଡିଜିଟାଲ ମିଡିଆ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ କାମ କରିପାରିଲୁ, ଆମର ନିକଟ ସମ୍ପର୍କୀୟ ଓ ପ୍ରିୟଜନମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ ପାରିଲୁ ଓ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ସାହାଯ୍ୟ ଯୋଗାଇଦେବାରେ ସମର୍ଥ ହେଲୁ । ଭାରତର ସାର୍ବଜନୀନ ଓ ଅଦ୍ୱିତୀୟ ବାୟୋ-ମେଟ୍ରିକ ଡିଜିଟାଲ ଆଡେଣ୍ଟିଟି ବ୍ୟବସ୍ଥା-ଆଧାର, ଆମକୁ ଠିକ ସମୟରେ ଗରିବଙ୍କୁ ଆର୍ଥିକ ସହାୟତା ପଠାଇବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କଲା । ଆମେ ୮୦କୋଟି ଲୋକଙ୍କ ପାଖକୁ ମାଗଣା ଖାଦ୍ୟ ଓ ଅନେକ ପରିବାରକୁ ରନ୍ଧନ ଇନ୍ଧନ ବାବଦ ରିହାତି ଅର୍ଥ ଯୋଗାଇ ପାରିଲୁ । ଆମେ ଭାରତରେ ସ୍ୱୟମ୍ ଓ ଦୀକ୍ଷା ନାମରେ ଦୁଇଟି ସର୍ବସାଧାରଣ ଡିଜିଟାଲ ଶିକ୍ଷା କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମକୁ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଛୁ । ଖୁବ୍ କମ୍ ସମୟରେ ଆମେ ଏହି ଚେଷ୍ଟାକୁ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ଷମ କରି ପିଲାଙ୍କୁ ପାଠପଢାରେ ସାହାଯ୍ୟ ସହଯୋଗ କରିପାରୁଛୁ । 

ଦ୍ୱିତୀୟ ଭାଗଟି ହେଲା-ମହାମାରୀ ପାଇଁ ନବସୃଜନ । ଏହାର ଅର୍ଥ, ମାନବ ସମାଜ କିପରି ପରିସ୍ଥିତିର ମୁକାବିଲା କଲା ଏବଂ ମହାମାରୀ ବିରୋଧରେ ଲଢେଇକୁ ସଫଳ ଏବଂ ଯଥାର୍ଥ କରିପାରିଲା । ଏଥିରେ ଆମ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ କ୍ଷେତ୍ରର ଭୂମିକା ସର୍ବାଗ୍ରେ ରହିଛି । ଭାରତର ଉଦାହରଣ ଦେଉଛି । ଭାରତକୁ ଯେତେବେଳେ ମହାମାରୀ ଛୁଇଁଲା, ଆମ ପାଖରେ ଯଥେଷ୍ଟ ଟେଷ୍ଟିଂ ସୁବିଧା ଏବଂ ଆବଶ୍ୟକ ମାସ୍କ, ପିପିଇ, ଭେଣ୍ଟିଲେଟର ଓ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଦରକାରୀ ଉପକରଣ ନ ଥିଲା । ଏହି ଅଭାବ ଦୂର କରିବାରେ ଆମ ଘରୋଇ ଉଦ୍ୟୋଗ ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିଥିଲା । 

ଫଳରେ ଏସବୁ ଦରକାରୀ ସାମଗ୍ରୀର ଅଭାବ ଶୀଘ୍ର ଦୂର ହେଇଥିଲା । ଆମର ଚିକିତ୍ସକମାନେ ଟେଲି ମେଡିସିନ ବ୍ୟବସ୍ଥାର ଉପଯୋଗ ବ୍ୟାପକ ଆକାରରେ କରି ଉଭୟ କୋଭିଡ ଓ ଅଣକୋଭିଡ ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ସମାଧାନ ଆଭାସୀ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ କରିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଥିଲେ । ଭାରତରେ ଏବେ ଦୁଇଟି କରୋନା ଟିକା ତିଆରି ହେଉଛି ଏବଂ ଆଉ କେତେକ ବିକାଶ ବା ପରୀକ୍ଷଣ ପର୍ଯ୍ୟାୟରେ ରହିଛି । ସରକାରୀ ପାଶ୍ୱର୍ରେ ଆମର ଦେଶୀ ଆଇଟି ଫ୍ଲାର୍ଟଫର୍ମ, ଆରୋଗ୍ୟ ସେତୁ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ସଫଳତାର ସହ କଣ୍ଟ୍ରାକ୍ଟ ଟ୍ରେସିଂ କରିପାରିଲୁ । ଆମ କ୍ୱୋ-ୱିନ ଡିଜିଟାଲ ପ୍ଲାଟଫର୍ମ, ଇତିମଧ୍ୟରେ କୋଟି କୋଟି ଲୋକଙ୍କୁ କରୋନା ଟିକା ପ୍ରଦାନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିର୍ଣ୍ଣାୟକ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିପାରିଛି । ଆମର ଯଦି ନବସୃଜନ ଓ ନୂଆ ନୂଆ କଥା ବାହାର କରିବାର ପ୍ରଚେଷ୍ଟା ନ ଥା’ନ୍ତା, ଆମେ ଏହି ଲଢେଇରେ ଯଥେଷ୍ଟ ଦୁର୍ବଳ ସାବ୍ୟସ୍ତ ହୋଇଥାଆନ୍ତୁ । ଆମର ଏହି ନବସୃଜନ ଉତ୍ସାହକୁ ପରିହାର କରିବା ଠିକ୍ ହେବ ନାହିଁ । ଏହା ଜାରି ରହିଲେ ଆମକୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ଆହ୍ନାନର ମୁକାବିଲା କରିବା ସହଜ ହେବ । 

 

 

ବନ୍ଧୁଗଣ, 

 ଟେକ ଓ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଦୁନିଆରେ ଭାରତର ପ୍ରଗତି ଓ ପ୍ରୟାସ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଜଣା । ଭାରତ ବିଶ୍ୱର ଏକ ଅନ୍ୟତମ ବୃହତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ ପରିତନ୍ତ୍ର ଭାବେ ପରିଗଣିତ । ନିକଟ ଅତୀତରେ ଅନେକ ୟୁନିକର୍ଣ୍ଣ ଏଠାରେ ମୁଣ୍ଡ ଟେକିଛି । ଇନୋଭେଟର ଓ ବିଶେଷକ ଯାହା ଲୋଡୁଛନ୍ତି, ଭାରତ ତାହା ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି । ଭାରତରେ ପୁଞ୍ଜିନିବେଶ କରିବାକୁ ମୁଁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱକୁ ନିମନ୍ତ୍ରଣ କରୁଛି । ଏଥିପାଇଁ ୫ଟି ଖମ୍ବ ରହିଛି ଓ ସେଗୁଡିକ ହେଲା ପ୍ରତିଭା ବା ମେଧା, ବଜାର, ପୁଞ୍ଜି, ଇକୋସିଷ୍ଟମ, ସଂସ୍କୃତି ଓ ଉନ୍ମୁକ୍ତତା । ଭାରତୀୟ ପ୍ରତିଭା ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ଆଦୃତ ଓ ଖ୍ୟାତ । ବିଶ୍ୱରେ କେତେକ ଅତି ଜଟିଳ ସମସ୍ୟାର ବୈଷୟିକ ସମାଧାନ ଭାରତୀୟ ବୈଷୟିକ ପ୍ରତିଭାଧରମାନେ କହିଛନ୍ତି । ଏବେ ଭାରତରେ ମୋବାଇଲ ବ୍ୟବହାରକାରୀଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ୧. ୧୮ବିଲିୟନ । ଇଣ୍ଟରନେଟ ବ୍ୟବହାରକାରୀ ସଂଖ୍ୟା ୭୫ନିୟୁତ । ଏହି ସଂଖ୍ୟା ଅନେକ ଦେଶର ଜନସଂଖ୍ୟା ଠାରୁ ଅଧିକ । ଭାରତରେ ଡାଟା କନ୍‌ଜପସନ (ବ୍ୟବହାର) ‌ବିଶ୍ୱରେ ସର୍ବାଧିକ ଓ ସବୁଠୁ ଶସ୍ତା । ଭାରତରେ ସର୍ବାଧିକ ସୋସିଆଲ ମିଡିଆ ବ୍ୟବହାରକାରୀ ଅଛନ୍ତି । ଅତଏବ ଭାରତର ଏକ ବିବିଧ ଓ ବ୍ୟାପକ ବଜାର ଆପଣଙ୍କୁ ଅପେକ୍ଷା କରିଛି ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ପବ୍ଲିକ ଡିଜିଟାଲ ପ୍ଲାଟଫର୍ମ ସୃଷ୍ଟି କରି ଭାରତରେ ଡିଜିଟାଲ ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରାଯାଉଛି । ମୋଟ ୫୨୩ହଜାର କିଲୋମିଟର ଲମ୍ବର ଫାଇବର ଅପଟିକ୍ସ ନେଟୱାର୍କ ଦ୍ୱାରା ୧୫୬ହଜାର ଗ୍ରାମପରିଷଦ ସଂଯୁକ୍ତ ହୋଇଛି । ଏହି ପ୍ରକ୍ରିୟା ଅବ୍ୟାହତ ଚାଲିଛି । ଦେଶରେ ବିଭିନ୍ନ ସ୍ଥାନରେ ପବ୍ଲିକ ୱାଇ-ଫାଇ ନେଟୱାର୍କ ସୁବିଧା ଯୋଗାଇ ଦିଆଯାଉଛି । ଭାରତରେ ମଧ୍ୟ ନବସୃଜନର ଏକ ସଂସ୍କୃତି ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି । ଦେଶର ୭ହଜାର ୫ଶହ ସ୍କୁଲରେ ଅଟଳ ଇନୋଭେସନ ମିଶନ ଯୋଜନାରେ ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ଲ୍ୟାବ୍‌ମାନ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରାଯାଇଛି । ଆମ ବିଦ୍ୟାର୍ଥମାନେ ବିଭିନ୍ନ ହାକାଥନରେ ଦେଶବିଦେଶର ପିଲାଙ୍କ ସହିତ ଭାଗ ନେଉଛନ୍ତି । ଏହା ସେମାନଙ୍କୁ ବୈଶ୍ୱିକ ପ୍ରତିଭା ଓ ସର୍ବଶ୍ରେଷ୍ଠ ନୀତି / ପ୍ରଣାଳୀ ସହ ପରିଚିତ କରାଉଛି । 

ବନ୍ଧୁଗଣ, 

ଗତବର୍ଷ ଆମେ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅନେକ ବ୍ୟାଘାତ ଓ ବାଧାର ସମ୍ମୁଖୀନ ହୋଇଥିଲୁ । ଏବେ ସେ ସ୍ଥିତିରେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସୁଧାର ଆସିନାହିଁ । ଏହି ଅସୁବିଧା ଓ ବିଘ୍ନକୁ ନେଇ ହତାଶ ହେବା ଅନୁଚିତ । ଆମକୁ ସେ କ୍ଷତି ଭରସା କରିବାକୁ ପଡିବ ଏବଂ ରିପ୍ୟାର ଆଣ୍ଡ ରିପେୟାର ନୀତି ଅବଲମ୍ବନ କରିବାକୁ ହେବ । ଗତବର୍ଷ ଏହି ସମୟରେ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଟିକା ପାଇଁ ବ୍ୟାକୁଳ ହେଉଥିଲା । ଏବେ ସେଥିମଧ୍ୟରୁ କେତେକ ଟିକା ବାହାରି କାମରେ ଲାଗିଲାଣି। ଆମ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଓ ଅର୍ଥନୀତିକୁ ସଜାଡିବାକୁ ପଡିବ । ଆମେ ଭାରତରେ ମହାକାଶ, ଖଣି, ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍କ, ଆଣବିକ ଶକ୍ତି ଆଦି ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ବ୍ୟାପକ ସଂସ୍କାର ଆରମ୍ଭ କରିଛୁ । ଏହା ଦର୍ଶାଉଛି ଯେ, ମହାମାରୀ ସମୟରେ ଭାରତ ଆବଶ୍ୟକ ପରିବର୍ତ୍ତନ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆଣି ପରିସ୍ଥିତି ସହ ଖାପ ଖାଇବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରୁଛି । ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ପ୍ରିପେୟାର (ପ୍ରସ୍ତୁତି)କଥା କହୁଛି, ତାହାର ଅର୍ଥ ଆମ ପୃଥିବୀକୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ମହାମାରୀରୁ ସୁରକ୍ଷିତ କରିବାକୁ ଉଦ୍ୟମ କରିବାକୁ ହେବ । ଜୀବନଜୀବିକାକୁ ସୁରକ୍ଷିତ ଓ ନିରନ୍ତର କରିବା ପାଇଁ ଆମକୁ ପରିବେଶର ଅବକ୍ଷୟ ରୋକିବା ସହିତ ନବସୃଜନ ଓ ନୂଆ ପ୍ରସ୍ତୁତିରେ ସହଯୋଗ ଭିତ୍ତିରେ କାମ କରିବାକୁ ପଡିବ ।

ବନ୍ଧୁଗଣ, 

ଆମ ପୃଥିବୀ ଯେଉଁ ଆହ୍ୱାନର ସମ୍ମୁଖୀନ, ତାଙ୍କୁ ମିଳିତ ପ୍ରୟାସ, ଆଗ୍ରହ ଓ ମାନବ କେନ୍ଦ୍ରିକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ଦ୍ୱାରା ମୁକାବିଲା କରିହେବ । ଏଥିପାଇଁ ଆମ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ ସମୁଦାୟ ନେତୃତ୍ୱ ନେବାକୁ ଆହ୍ୱାନ ଜଣାଉଛି । ଏହି କ୍ଷେତ୍ର ଯୁବବର୍ଗ ଦ୍ୱାରା ଅଧୁଷିତ । ସେମାନେ ଅତୀତର ଜଞ୍ଜାଳ ଓ ବୋଝରୁ ମୁକ୍ତ । ସେମାନେ ବୈଶ୍ୱିକ ପରିବର୍ତ୍ତନକୁ ଶକ୍ତିଦେବାକୁ ସୁବିଧାଜନକ ସ୍ଥିତିରେ ଅଛନ୍ତି । ଆମ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପମାନେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟସେବା, ପରିବେଶ ଅନୁକୂଳ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି, ଆବର୍ଜନା ପ୍ରକ୍ରିୟାକରଣ, କୃଷି ଓ ନବଯୁଗର ସାଧକ ନିର୍ମାଣ ଆଦି କ୍ଷେତ୍ରରେ ନୂଆ ସମ୍ଭାବନା ସୃଷ୍ଟି କରିବାର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି । 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଏକ ମୁକ୍ତ ସମାଜ ଓ ଅର୍ଥନୀତିର ଦେଶଭାବେ ଭାରତ ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଓ ଅଂଶୀଦାରୀ ପ୍ରତି ଅଙ୍ଗୀକୃତ । ଫ୍ରାନ୍ସ ଓ ୟୁରୋପ ଆମର ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶୀଦାର । ମେ’ ମାସେରେ ପୋର୍ଟୋରେ ଅନୁଷ୍ଠିତ ୟୁରୋପୀୟ ଶିଖର ସମ୍ମିଳନୀରେ ରାଷ୍ଟ୍ରପ୍ରତି ମାକ୍ରେନଙ୍କ ସହ ମୋର ଆଲୋଚନା ଡିଜିଟାଲ କ୍ଷେତ୍ର, ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଓ କ୍ୱାଂଣ୍ଟମ୍ କମ୍ପ୍ୟୁଟିଙ୍ଗ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଭାଗିଦାରୀ ଘେନି ହୋଇଥିଲା । ୟୁରୋପୀୟ ସଂଘର ଦେଶମାନଙ୍କ ସହ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅଂଶୀଦାର ନିର୍ମାଣ ଉପରେ କଥାବାର୍ତ୍ତା କରିଥିଲି । ଇତିହାସ ପ୍ରମାଣିତ କରିଛି ଯେ, ନୂଆ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିର ନେତୃତ୍ୱ ଅର୍ଥନୈତିକ ସାମର୍ଥ୍ୟ, ନିଯୁକ୍ତି ଓ ସମୃଦ୍ଧିକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରେ । ଆମ ଅଂଶୀଦାରୀ ମଧ୍ୟ ମାନବ ସମାଜର ସେବା ଭଳି ବୃହତର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ପୂରଣ ପାଇଁ ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ । ଏହି ମହାମାରୀ ଆମ ସ୍ଥିତି ସ୍ଥାପତ୍ୱର ପରୀକ୍ଷା କେବଳ ନେଉନାହିଁ, ଆମ କଳ୍ପନା ଓ ବିଚାରକୁ ପରଖୁଛି । ଏହି ଅଧିକ ସମାବେଶୀ, ଯତ୍ନଶୀଳ ଓ ସମୃଦ୍ଧ ଭବିଷ୍ୟତ ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ମହାମାରୀ ଏକ ସୁଯୋଗ ଦେଇଛି । ରାଷ୍ଟ୍ରପତି ମାକ୍ରନଙ୍କ ଭଳି ମୋର ମଧ୍ୟ ବିଜ୍ଞାନର ଶକ୍ତି ଓ ନବସୃଜନର ସମ୍ଭାବନା ଉପରେ ଗଭୀର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଛି, ଯାହା ଆମକୁ ଭବିଷ୍ୟତକୁ ସୁରକ୍ଷିତ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିପାରିବ । 

 

ଧନ୍ୟବାଦ