Text of PM’s Parivartan Rally in Saharsa, Bihar

Published By : Admin | August 18, 2015 | 20:02 IST
PM Modi lists out achievements of Govt in Bihar #ParivartanRally
We are committed to find permanent solutions of all problems that Bihar faces today: PM #ParivartanRally
A special package of Rs. 1.65 lakh crores announced for developing Bihar, for transforming future of the state #ParivartanRally
Welfare of farmers is essential for agriculture to develop: PM Modi #ParivartanRally
We are dedicated to bring back the glory of Bihar; we will transform the lives of people of Bihar: PM Modi #ParivartanRally

मंच पर विराजमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी, हमारे सबके वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान गोपाल नारायण जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी जी चौधरी, हमारे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ जी, हमारे पूर्व सांसद श्री उदय सिंह जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी, हमारे सांसद श्रीमान कीर्ति आजाद जी, हमारे सांसद हुकुमदेव नारायण जी, पूर्व सांसद श्रीमान निखिल चौधरी जी, श्रीमान प्रदीप सिंह, श्रीमान नित्यानंद राय जी, श्रीमान विश्वमोहन चौधरी जी, श्रीमान एम. के. सिंह जी, डॉ. राम नरेश सिंह जी, श्रीमान वीरेन्द्र चौधरी जी, श्रीमान देवेन्द्र यादव जी, श्रीमान महबूब अली जी, श्रीमान आलोक रंजन जी, श्रीमान मदन मोहन चौधरी जी, श्रीमती नूतन सिंह जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

एहन पुण्य भूमि मिथिला में अबी हम गदगद छी, अहाँ सबके वेरी वेरी प्रणाम करै छी। मैं अभी आरा के कार्यक्रम से आ रहा हूँ। इसके पूर्व मुझे बिहार में दो रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। हवा का रूख साफ-साफ नजर आता है। इस चुनाव में माहौल कैसा है, मौसम कैसा है, उसका भली-भांति पता चल रहा है। और एनडीए की सरकार बनाने के लिए जो तेज आंधी आई है, तेज हवा चल रही है, बारिश भी उसको भिगो नहीं पा रही है। मैं जब आरा में था तो मुझे बताया गया कि यहाँ तो तेज बारिश चल रही है लेकिन ये कोसी अंचल के लोग हैं अगर एक बार ठान लेते हैं तो कितनी ही तेज आंधी क्यों न हो, वर्षा कितनी तेज क्यों न हो, न ये रुकते हैं, न ये थकते हैं, न ये झुकते हैं; ऐसे कोसी अंचल के लोगों को मैं बार-बार नमन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, आज से 7 साल पहले 18 अगस्त को कोसी में एक भयंकर बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यहाँ के नजदीक के 7-8 जिलों के 35 लाख परिवार तबाह हो गए थे। यहाँ के खेत बालू से भर गए थे। गाँव विनाश के कगार पर आकर खड़े हो गए थे। न धरती बची थी, न आसमान रूकने को तैयार था और यहाँ का जन-जन मुसीबतों से जूझ रहा था। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था। इस कोसी अंचल के अनेक परिवार मेरे यहाँ गुजरात में बसे हुए हैं और उसके कारण मुझे उनसे सारी जानकारियां मिलती थीं और तब हमें लगा था कि भले गुजरात कितना ही दूर क्यूँ न हो लेकिन कोसी अंचल के पीड़ा के समय कंधे से कंधा मिलाकर के उनके दुःख में साथ खड़े रहना चाहिए, उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मदद करनी चाहिए।

आप सबको याद होगा मेरे भाईयों-बहनों, देशभर से लोग उस संकट की घड़ी में आपके साथ खड़े हो गए थे लेकिन कभी कभी जनता-जनार्दन का दर्द, सामान्य मानव की पीड़ा... राजनेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होता है उस अहंकार के कारण न संवेदनाओं को समझ पाते हैं, न दर्द को अनुभव कर पाते हैं, न पीड़ा का पता चलता है और वे अपने अहंकार में डूबे रहते हैं। आज जब मैं इस कोसी अंचल में आया हूँ, कोसी नदी की सौगंध खाकर मैं कहना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति का अहंकार कितनी गहरी चोट पहुंचाता है... अगर मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई अपमानित करे, दुत्कार दे, अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल कर ले, मैं कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की हरकतों के संबंध में कभी कुछ बोलता नहीं हूँ, उसको सहने के लिए अपने आप को तैयार करता हूँ लेकिन जब अहंकार के कारण सामान्य मानव के दर्द और पीड़ा के साथ खिलवाड़ किया जाए तो जनता-जनार्दन के दर्द और पीड़ा के लिए मैं अपने आप को रोक नहीं सकता।

आज जब मैं कोसी अंचल में आया हूँ तो मैं कहना चाहता हूँ कि वो दिन था 18 अगस्त और आज का दिन भी है 18 अगस्त, यही दिन था। आज मैं कहना चाहता हूँ गुजरात के लोगों ने अपनी पसीने की कमाई से कोसी अंचल के लोगों की मदद के लिए 5 करोड़ रुपये का चेक भेजा था। उस 5 करोड़ रुपये में, इसी कोसी अंचल के लोग जो गुजरात में रहते हैं और जिन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाई है, 5-10 लाख रुपये इन लोगों का भी था। वे भी अपने वतन के पीड़ित परिवार के लिए कोई न कोई योगदान देना चाहते थे। लेकिन उनका अहंकार सातवें आसमान पर था; इतना अहंकार था कि आप दर्द झेलते रहें, आप पीड़ा झेलते रहें और उन्होंने 5 करोड़ रुपये का चेक गुजरात की जनता को वापिस भेज दिया।

आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या सार्वजनिक जीवन में ये आचरण उचित है क्या? पूरी ताकत से बताईये, उचित है क्या? ऐसा आचरण मंजूर है क्या? कोसी अंचल के लोग मरें तो मरें लेकिन मैं अपना अहंकार नहीं छोडूंगा, ये चल सकता है क्या? जो अपना अहंकार नहीं छोड़ सकते, हमें उन्हें छोड़ना चाहिए कि नहीं छोड़ना चाहिए? ऐसे लोगों को विदाई देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों, ऐसे ही अहंकार ने बिहार के सपनों को रौंद डाला है, बिहार के सपनों को चूर-चूर कर डाला है। उस अपमान को भी मैं पी गया था और फिर मैंने हमारे बिहार के भाई जो वहां रहते थे, उन्हीं को मैंने कुछ सामान देकर भेजा कि भाई कहीं मेरा नाम आएगा तो तूफ़ान खड़ा हो जाएगा, आप चुपचाप जाईये और यहाँ के गरीब परिवारों में बाँट कर के आ जाईये। लोग आये, यहाँ के लोगों की सेवा की और कहीं तक किसी को कोई आवाज तक नहीं आने दी।

सार्वजनिक जीवन में कुछ परंपराएँ होती है, कुछ नीतियां होती हैं, कुछ नियम होते हैं लेकिन ऐसे लोगों से मैं क्या अपेक्षा करूँ? आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, जयप्रकाश नारायण हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? पूरी ताकत से जवाब दीजिये, जयप्रकाश नारायण जी हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? हमारा गौरव है कि नहीं है? जयप्रकाश जी ने बिहार को गौरव दिलाया कि नहीं दिलाया? बिहार का मान-सम्मान बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया? आपको याद है, उन जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? आपातकाल में जब श्रीमती इंदिरा गाँधी का राज चलता था तो जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? कांग्रेस पार्टी ने, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने, जयप्रकाश नारायण जी को जेल में बंद कर दिया था और उनका यही गुनाह था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते थे। बिहार जयप्रकाश जी के नेतृत्व में, और बाद में पूरा हिन्दुस्तान जयप्रकाश जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आया था... भाईयों-बहनों, अब जगह नहीं है, कहाँ आओगे जी, अब भर गया है! इस मैदान में जगह हो न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

जयप्रकाश जी जेल से बीमार होकर बाहर निकले और यह देश बिहार के सपूत और मां भारती के लाल जयप्रकाश नारायण जी को नहीं बचा पाया, वो हमारे बीच से चले गए। जयप्रकाश नारायण जी के मृत्यु के लिए कौन जिम्मेवार है? यही कांग्रेस के लोग जिन्होंने जयप्रकाश नारायण जी के साथ ये खिलवाड़ किया था। मैं बिहार के भाईयों से पूछना चाहता हूँ... बिहार के लोगों ने मन में ऐसी ठान ली कि जयप्रकाश नारायण जी के साथ इस प्रकार का जुल्म करने वालों को बिहार की राजनीति से उखाड़ कर के फेंक दिया लेकिन आज जो लोग जयप्रकाश जी की जिंदगी के साथ खेल खेलने वाले लोगों के साथ चुनावी समझौता कर रहे हैं, कांग्रेस के पास सीटों का बंटवारा कर रहे हैं, मुझे बताईये ये जयप्रकाश नारायण जी की आत्मा को पीड़ा पहुंचाएगा कि नहीं पहुंचाएगा? ये जयप्रकाश नारायण के साथ धोखा और विश्वासघात है कि नहीं है? आप ऐसे लोगों के साथ भरोसा कर सकते हैं क्या जिन्होंने जयप्रकाश नारायण की जिंदगी को तबाह कर दिया? सत्ता पाने के लिए आप उनकी गोद में जाकर के बैठ रहे हो और इसलिए ये जो कारोबार चल रहा है.. अब बिहार की राजनीति बदलाव की ओर चल पड़ी है।

अब ये सरकार रहने वाली नहीं है यहाँ की जनता न इनको स्वीकार करने वाली है, न इनका साथ देने वाली है। भाईयों-बहनों, आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया। आप मुझे बताईये, मैं जनता-जनार्दन के बीच आकर के अपने काम का हिसाब दे रहा हूँ कि नहीं दे रहा हूँ? जनता के बीच जाने के लिए एक हिम्मत लगती है, हौसला लगता है, जनता के प्रति विश्वास लगता है, आस्था लगती है लेकिन जब जनता से नाता टूट जाता है, अहंकार सातवें आसमान पर होता है तब जनता के बीच जाने के बजाय एयर कंडीशन कमरे में पांच-पच्चीस पत्रकारों को बुलाकर के जहर उगलने के सिवाय कोई काम नहीं बचा रहता है। भाईयों-बहनों, हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं।

भाईयों-बहनों, बिहार को जंगलराज का डर सता रहा है। उसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मैं आज बिहार सरकार के उनके अपने पुलिस विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जो बातें रखी हैं, मैं बिहार की जनता के सामने बिहार सरकार के ही आंकड़ों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ, आपके सामने रखना चाहता हूँ। दबे पाँव मुसीबतें आनी शुरू हो गई हैं, संकट का सामना करने के दिन आने शुरू हो गए हैं। आप देखिये, बिहार सरकार के आंकड़े बताते हैं: जनवरी 2015, बिहार में अपराधों की संख्या थी – 13,808 गंभीर प्रकार के अपराधों की संख्या थी - 13,808; जून 2015 में यह आंकड़ा पहुँच गया 13 हजार से 18,500 पर गंभीर प्रकार के अपराधों में 34 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। मुझे बताईये, ये जंगलराज के आसार हैं कि नहीं हैं आपका जीवन मुश्किल होगा कि नहीं होगा? निर्दोष बहन-बेटियों की जिंदगी ख़तरे में पड़ेगी कि नहीं पड़ेगी? जनवरी में 217 हत्याएं हुई थी, जून में, इतने कम समय में ये आंकड़ा पहुँच गया 316 और अभी तो पिछले ढेढ़ महीने का मैंने हिसाब नहीं लिया है। 46 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है और अब आप मुझे बताईये कि हत्याओं का अगर यह दौर चलता रहा तो बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी का क्या हाल होगा।

भाईयों-बहनों, एक और बात पर मैं गंभीरता से ध्यान दिलाना चाहता हूँ। ये आंकड़े बिहार सरकार के हैं, मैं उन्हीं के आकड़ें बोल रहा हूँ। जनवरी महीने में दंगों की संख्या थी – 866, जून महीना आते-आते दंगों की संख्या हो गई – करीब-करीब 1500; Exact आंकड़ा है – 1497 यानि 1500 में तीन बाकी। जनवरी में करीब साढ़े आठ सौ और जून में 1500 दंगे, 72 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है। हर पैरामीटर को देखिये, बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। खतरे की घंटी बज चुकी है। मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ इस चुनाव में हत्याएं अगर बंद करवानी है, ये दंगे फ़साद बंद करवाने हैं, इन निर्दोष लोगों की जिंदगी को बचाना है तो आपको घर-घर जाकर के चौकीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ़ पटना में एक मजबूत सरकार बिठा दीजिए, आप हमारा साथ दे दीजिए, हम आपकी समस्याओं का समाधान कर देंगे।

कई दिनों से चर्चा चल रही थी... मैं एक और बात भी कहना भूल गया, उसे मैं जरा कह देना चाहता हूँ। मैंने कोसी का जिक्र किया लेकिन यहाँ के लोगों को याद होगा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में हमारी सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद फिर से एक बार कोसी पर संकट आया था। नेपाल में दुपाल चौक के पास कोसी नदी पर लैंडस्लाइड हुआ था। नदी का आना बंद हुआ था और वहां पानी जमा होना शुरू हो गया था। सेटॅलाइट से हमें पता चला कि अगर ये पानी जमा होता गया और बाढ़ में अगर ये मिट्टी ढह गई तो कोसी के पट पर बिहार के जितने गाँव हैं, आज से सात साल पहले जो तबाही आई थी, उससे भी सौ गुना ज्यादा तबाही आ जाएगी, कोई बच नहीं पाएगा। काम करने वाली सरकार कैसी होती है, जनता-जनार्दन के दुःख-दर्द को समझने वाली सरकार कैसी होती है, समस्याओं को पहले पहचान कर के रास्ते खोजने का प्रयास करने वाली सरकार कैसी होती है...

मेरे कोसी पट के भाईयों-बहनों, आपको याद होगा कि हमने तुरंत सेना को भेजा। नेपाल में उस नदी को फिर से खोलने के लिए; इतने बड़े लैंडस्लाइड में छोटे-छोटे hole करके पानी निकले, इसका अभियान चलाया। उसके बाद भी हमें भरोसा नहीं था। कहीं ये प्रयोग हमारा सफल नहीं हुआ और पानी जमा होता ही गया और अगर एक साथ मिट्टी ढह गई तो मेरे कोसी अंचल का कोई परिवार बचेगा नहीं। मैंने हमारे जवानों को यहाँ भेजा, बिहार सरकार को आग्रह किया, मेरे कार्यकर्ताओं को mobilize किया, दिल्ली में बैठकर इसको लगातार मॉनिटर किया, गाँव के गाँव खाली करवाए। यहाँ के किसान मेरे से नाराज हो गए कि पानी तो दिखता नहीं है, वर्षा नहीं है, और मोदी गाँव खाली करवा रहे हैं, पशुओं को भी ले जाने के लिए कहते हैं और वो भी 50-50 किलोमीटर दूरी... सबकी नाराजगी थी। उसके बाद भी मैंने कहा, No compromise. उनको पता नहीं है कि कितने बड़े आफ़त की संभावना है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आफ़त न आए लेकिन अगर आ जाए तो नुकसान कम से कम होना चाहिए। उसके लिए हम प्रबंध कर रहे हैं और आज कोसी अंचल के भाईयों-बहनों को हिसाब देते हुए मुझे गर्व होता है कि हम उस काम को करने में सफल हुए। कोसी अंचल को मुसीबत से बचा लिया था। इतना ही नहीं, अभी जब नेपाल में भूकंप आया तो यहाँ की सरकार को इस बात का आश्चर्य था और ये बात उन्होंने publicly कही भी कि भूकंप आने के कुछ ही मिनटों में भारत के प्रधानमंत्री का फ़ोन आ गया, उन जिलों तक फ़ोन पहुँच गया। इस इलाके के सांसदों से मैंने फ़ोन पर बात कर ली। हमने कहा, देखो भाई ये भूकंप भारी नुकसान कर सकता है।

अगर कोसी की इतनी चिंता होती... सबसे पहले भारत सरकार की जिम्मेवारी थी कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों को ठीक कर ले। आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कोसी के कारण कोई वर्ष ऐसा नहीं जाता है कि यहाँ के किसानों को, यहाँ की जनता को किसी मुसीबत का सामना न करना पड़ा हो। इस समस्या का समाधान नेपाल में है। जब तक नेपाल के साथ बैठकर पानी के बहाव के संबंध में उचित योजना नहीं बनती है, इस कोसी पट के किसानों को नहीं बचाया जा सकता। और इसलिए, नेपाल के साथ गहरे संबंध होना जरुरी है, नेपाल के सुख-दुःख का साथी बनना जरुरी है। 17 साल, अगर पटना से नेपाल जाना हो तो 70 मिनट नहीं लगता है लेकिन नेपाल जाने में प्रधानमंत्री को 17 साल लग गए। 17 साल तक देश का कोई प्रधानमंत्री गया नहीं, नेपाल से कोसी की बात नहीं की, कोसी पट के मेरे किसान भाईयों को बचाने की कोई बात नहीं की। हम गये, 17 साल के बाद गये और नेपाल सरकार के साथ आमने-सामने बैठकर के कोसी के लिए क्या कर सकते हैं, उसकी बातचीत प्रारंभ कर दी।

रास्ते खोजने पड़ते हैं, समस्याओं का समाधान निकालना पड़ता है तब जाकर के हमारे देश के गरीब किसान को हम बचा सकते हैं और उस काम को 2014 के अगस्त में हमने करके दिखाया, नेपाल जाकर करके दिखाया। भूकंप के बाद नेपाल के साथ हम खड़े रहे। आज एक भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर के हम उसकी सेवा में लगे हुए हैं और इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से भी समाधान खोजना होगा। हमने वो प्रयास प्रारंभ किया। हमारे यहाँ कृषि मंत्रालय तो है, कृषि की चिंता करने के लिए तो समय है लेकिन किसान की चिंता कौन करेगा। अगर हम किसान के कल्याण की चिंता नहीं करेंगे तो कृषि का भी कल्याण नहीं होगा और अगर हम कृषि का कल्याण नहीं करेंगे तो किसान का भी कल्याण नहीं होगा। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से हमने कहा कि जो मंत्रालय का नया नाम होगा – कृषि विकास और किसान कल्याण मंत्रालय। अब सरकार के डिपार्टमेंट में सिर्फ़ कृषि की नहीं किसान की भी चिंता करने की योजना बनेगी। ये बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हमने निर्णय किया है।

भाईयों-बहनों, मैं अभी-अभी आरा से आ रहा हूँ। आरा में सरकार का कार्यक्रम था और उस सरकार के कार्यक्रम में विकास की योजनाओं का प्रारंभ करना था। स्किल डेवलपमेंट हो, रास्तों का जाल गूंथना हो, अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया और चुनाव के पहले जब मैं आया था, तब मैंने कहा था कि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम 50,000 करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। बिहार को कहा था ना? और कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि मोदी बोलते हैं, करते नहीं हैं कुछ; मोदी ने चुनाव के पहले वादा किया था और जब पिछली बार आये तो फिर से टोने मारने शुरू कर दिये कि मोदी बोले क्यों नहीं। मैंने कहा था कि पार्लियामेंट चल रही है, पार्लियामेंट की कुछ गरिमा, उसके कुछ rules and regulations होते हैं, सरकार उस मर्यादा को तोड़ नहीं सकती और ये मैंने कहा था कि जबतक संसद चालू है, मैं बोल नहीं पाऊंगा। अभी चार दिन पहले संसद का सत्र पूर्ण हुआ है और आज आरा में मैंने घोषणा की है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए, नया बिहार बनाने के लिए। और मैंने पैकेज की घोषणा की है – सवा लाख करोड़ रूपया (1,25,000 करोड़)।

मैं बिहार की शक्ल सूरत बदल करके रख दूंगा। ये मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूँ और जब मैं ये कहूँगा तो मुझे मालूम है कि पत्रकारों को बुलाकर के कान में कहा जाएगा, ये तो पुराने वाला है, ये पहले वाला है। भाईयों-बहनों, मैं सच बता देना चाहता हूँ जब अटल जी की सरकार थी तब 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुआ था और न दिल्ली की सरकार न राज्य की सरकार। पूरे के पूरे 10,000 करोड़ रूपया खर्च नहीं कर पाई थी। उसका 1,000 करोड़ रूपया अभी खर्च करना बाकी बचा हुआ है। फिर जब बिहार में जब दो साल पहले राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हुआ, भाजपा के साथ धोखा किया गया, बिहार की जनता के साथ धोखा किया गया और बिहार के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ किया गया... और दिल्ली वाले पैकेज दो, हम आपका साथ देंगे, साथ तो देना ही था, उनका कुर्ता पकड़ करके बचने की कोशिश करनी ही थी और इसलिए पहुंचे और वहां से घोषणा की कि अब बिहार को 12,000 करोड़ का पैकेज मिलेगा और ये नाचने लगे। ये बिहार के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ था। 2013-14 में 12,000 करोड़ के पैकेज में से कुछ भी खर्च कर पाए। इतना ही नहीं, 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद उन 12,000 करोड़ में से करीब-करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च हमने आकर के किया और अभी भी 8,000 करोड़ उसका भी बाकी है। 1,000 करोड़ अटल जी वाला और 8,000 करोड़ मनमोहन सिंह की सरकार वाला।

भाईयों-बहनों, हम बिजली का एक कारखाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाने वाले हैं। वो 20,000 करोड़ रूपया और रोड के लिए और थोड़ा खर्चा, जिसकी रकम होती है करीब-करीब 12,000 करोड़ रूपया। ये रकम बनती है - 40,000 करोड़ और इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो मैं सवा लाख करोड़ कह रहा हूँ, ये चालीस हजार करोड़ उसमें नहीं है। चालीस हजार करोड़ अलग तो कुल पैकेज बन जाता है - 1,65,000 करोड़ रूपया का पैकेज; बिहार के विकास के लिए, बिहार की जनता के भलाई के लिए। इन पैसों से रास्ते बनेंगे; बिजली आएगी; किसान को खेतों में मदद मिलेगी; नौजवान के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे; बिहार के घर-घर में 24 घंटे बिजली मिले; बिहार के गाँव में जहाँ बिजली अभी पहुंची नहीं है, वहां बिजली पहुंचे; जिन घरों में पीने का पानी नहीं है, शौचालय नहीं है, उन घरों को पीने का पानी मिले, शौचालय मिले; फ़र्टिलाइज़र के कारखाने लगे; किसानों को यूरिया मिले; एक के बाद एक विकास की अनगिनत योजनाओं के द्वारा बिहार के जीवन को बदलना है।

भाईयों-बहनों, ये बातें करने वाले लोग... आज बिहार के लोगों को पढ़ने के लिए बाहर जाना क्यों पड़ता है? मां-बाप को लाखों रुपये का खर्चा क्यों करना पड़ता है? ये स्थिति मुझे बदलनी है और इसके लिए इतना बड़ा विशाल जनसमूह। मैं लोकसभा चुनाव में भी यहाँ आया था लेकिन ऐसा जनसागर मैंने देखा नहीं था। मैं यहाँ भी देख रहा हूँ, मंच के पीछे देख रहा हूँ, क्या जनसैलाब है! चुनाव के डेट जब भी आ जाएं, बिहार की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को जिताने का फैसला कर लिया है। और हमने वादा किया है कि हम आपकी भलाई के लिए, आपके कल्याण के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। नया बिहार बना के रहेंगे, बिहार का भाग्य बदल कर रहेंगे, बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे। इसी शुभकामना के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – भारत माता की जय – आवाज कोसी के कोने-कोने में पहुंचनी चाहिए।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಆಡಳಿತಾಧಿಕಾರಿ ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್, ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಕಲಾಬೆನ್ ದೇಲ್ಕರ್, ದಮನ್ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ದೀಪಿಕಾ ತಂಡೇಲ್ ಜೀ, ದಮನ್ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಧರ್ಮ ಬಾಬು ಪಟೇಲ್, ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಸೋಮನಾಥ್ ದೇವ್ರೆ ಜೀ, ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ನಿಶಾ ಭಾವ್ಸರ್ ಜೀ, ದಿಯು ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಹರೀಶ್ ಕಪಾಡಿಯಾ ಜೀ, ದಿಯು ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ಕೋಟಿಯಾ ರಂಜಿತಾಬೆನ್ ಮತ್ತು ಇಲ್ಲಿ ಇಷ್ಟೊಂದು ಬೃಹತ್ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವ ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ನೀವು ಇಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವಂತೆಯೇ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಜನರು ವೀಡಿಯೊ ಮೂಲಕ ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹೊಸ ಆರಂಭ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಜನರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಕ್ರಾಂತಿಕಾರಿ ಬದಲಾವಣೆಯನ್ನು ತರುವ ಹೊಸ ಯೋಜನೆ, ಉದ್ಘಾಟನೆಗೊಂಡಿದೆ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಯೋಜನೆಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಕೆಲವು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ, ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಬಳಿಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಮ್ಮ ದಮನ್ ವೇಗವಾಗಿ ಮಿನಿ ಇಂಡಿಯಾ ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದ್ದೆ, ಮತ್ತು ಇಂದು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ, ಎಡಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಬಂಗಾಳ ಮತ್ತು ಬಲಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಅಸ್ಸಾಂ ಇದೆ. ದಮನ್ ಮಿನಿ ಭಾರತದ ಜೀವಂತ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವಾಸಿಸುವ ವಿವಿಧ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಜನರು, ನಿಮ್ಮಲ್ಲಿರುವ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯು ಇಡೀ ಭಾರತದ ಸುಂದರ ನೋಟವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ನೀವೆಲ್ಲರೂ ನಮ್ಮನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಲು ಇಷ್ಟು ದೊಡ್ಡ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಬಂದಿದ್ದೀರಿ, ಇದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ದಮನ್ ಮತ್ತು ದಿಯುಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುವ ಅವಕಾಶ ನನಗೆ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ನಾನು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಗೆ ಕೂಡಾ ಭೇಟಿ ನೀಡುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತೇನೆ, ಮತ್ತು ನಾನು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಅಥವಾ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗಿಲ್ಲದಿದ್ದಾಗ, ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುತ್ತಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಈಗ ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದು ಉತ್ತಮ ಆಡಳಿತ, ಆಡಳಿತ ಮಾದರಿಯನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ, ಅದು ತುಂಬಾ ಚೆನ್ನಾಗಿದೆ ಎಂಬ ಭಾವನೆ ತರುತ್ತದೆ. ಕಳೆದ ಬಾರಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿದಾಗ  ಈ ಬಾರಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಮೈಲುಗಳಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಸಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದವು. ಹಿಂದೆ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದ ತಲೆಮಾರುಗಳ ಜನರು ನಿಧನರಾದರು. ಆದರೆ ಇಂದು ಇಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆ ತಮ್ಮ ಹೆತ್ತವರು ಮತ್ತು ಅಜ್ಜಿಯರು ಕಂಡ ಕನಸುಗಳು ಈಗ ತಮ್ಮ ಕಣ್ಣ ಮುಂದೆಯೇ ನನಸಾಗುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇಂದು, ಸಂಪರ್ಕ, ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಮತ್ತು ನಗರ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನೇಕ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳು ದಮನ್ ಮತ್ತು ಇಡೀ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಜೀವನವನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ. ಅವು ಯುವಜನರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ. ಈ ಕೆಲಸಗಳ ಹಿಂದೆ, ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್ ಅವರ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡದ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ನಾನು ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಇಡೀ ತಂಡವನ್ನು ಸಹ ಶ್ಲಾಘಿಸುತ್ತೇನೆ. ಲಕ್ಷದ್ವೀಪ ಮತ್ತು ದಾದ್ರಾ-ನಗರ ಹವೇಲಿಯ ಜನರಿಗೆ ನಾನು ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು ಮತ್ತು ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ನಾನು ನಿಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದಿರುವಂತೆಯೇ, ಒಂದು ಒಳ್ಳೆಯ ಸುದ್ದಿ ಬಂದಿದೆ. ನಾನು ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ದೆಹಲಿಯಿಂದ ಹೊರಟಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಇದೀಗ ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು, ಬಂದಿರುವ ಸುದ್ದಿಗಳು ನಿಜಕ್ಕೂ ಸಂತೋಷಕರವಾಗಿವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಈ ಸಂತೋಷವನ್ನು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಇಂದು ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಅಡಿಪಾಯ ಎಷ್ಟು ಪ್ರಬಲವಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ತೋರಿಸುತ್ತವೆ. 2025-26ನೇ ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಅಂದರೆ, ಇದೀಗ ಕೊನೆಗೊಂಡಿರುವ ಹಣಕಾಸು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಭಾರತವು ಶೇಕಡಾ 7.7, 7.7 ರ ಬೆಳವಣಿಗೆಯ ದರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಚ್ 31 ರಂದು ಕೊನೆಗೊಂಡ ಕೊನೆಯ ತ್ರೈಮಾಸಿಕವು ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಶೇಕಡಾ 7.8, 7.8 ರಷ್ಟು ಎಂದು ದಾಖಲಿಸಿದೆ. ಮತ್ತು ಇದು ವಿಶ್ವದಲ್ಲೇ ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನೂ ಹೆಮ್ಮೆಪಡಬೇಕು, ಇದು ಅದರ ವೇಗ. ಇಂದು ದೇಶವು ಸುಧಾರಣಾ ಎಕ್ಸ್‌ಪ್ರೆಸ್‌ನಲ್ಲಿ ಓಡುತ್ತಿದೆ, ಇಂದು ದೇಶವು ಅಂತಹ ಬೃಹತ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯನ್ನು ವೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದೆ, ಬಡವರ ಕಲ್ಯಾಣಕ್ಕಾಗಿ ಅಂತಹ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಮಾಣದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಫಲಿತಾಂಶವೆಂದರೆ ಇಂದು ದೇಶವು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ. ಮತ್ತು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ, ಜಗತ್ತು ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳಲ್ಲಿ ಮುಳುಗಿದೆ, ಇಡೀ ಪ್ರಪಂಚದ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಳು ಪ್ರಶ್ನಾರ್ಥಕ ಚಿಹ್ನೆಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಹೂತುಹೋಗಿವೆ, ಆದರೆ ಜಾಗತಿಕ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟಿನ ಈ ಕೆಟ್ಟ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, 1.4 ಶತಕೋಟಿ ದೇಶವಾಸಿಗಳ ಸಾಮೂಹಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ, ಭಾರತವು ತನ್ನನ್ನು ತಾನು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ ಮುಂದೆ ಬರುವಲ್ಲಿಯೂ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದೆ. ಆರ್ಥಿಕ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಈ ಹೊಸ ಎತ್ತರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಪಂಚದಾದ್ಯಂತ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುವ ಈ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸುವಾಗ, ದೇಶವು ದೃಢ ಸಂಕಲ್ಪದೊಂದಿಗೆ, ಸುಧಾರಣೆ, ಕಾರ್ಯಕ್ಷಮತೆ ಮತ್ತು ಪರಿವರ್ತನೆಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ವೇಗವಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಇದು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ನನ್ನ ಭರವಸೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯ ಮತ್ತು  ನಮ್ಮ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮಾದರಿ ಸುಸ್ಥಿರವಾಗಿರುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೂ ಅಷ್ಟೇ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ. ಇಂದು, ವಿಶ್ವ ಪರಿಸರ ದಿನದಂದು, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಈ ನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ಒಂದೆಡೆ, ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ಮೌಲ್ಯದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಅದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ತಾಯಿಯ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಸುಮಾರು ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಒಂದು ಗಿಡಗಳು, ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಸಸಿಗಳನ್ನು ಸಹ ಇಲ್ಲಿ ನೆಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಕಾರಿ ಕಟ್ಟಡಗಳಲ್ಲಿ ಸೌರಶಕ್ತಿಯ 100 ಪ್ರತಿಶತ ಬಳಕೆಯ ಸಾಧನೆಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿರುವ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶ ಇದಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಇದೆ. ಇಂದು, ದಿಯುನಲ್ಲಿ, ಸಂಪೂರ್ಣ ಹಗಲಿನ ವಿದ್ಯುತ್ ಬೇಡಿಕೆಯನ್ನು ಸೌರಶಕ್ತಿಯಿಂದಲೇ ಪೂರೈಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ನಾವು ಇದನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಸೌರಶಕ್ತಿಯ ಮೂಲಕ ಮನೆಗಳಲ್ಲಿಯೂ ವಿದ್ಯುತ್ ಲಭ್ಯವಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ, ಕುಟುಂಬಗಳು ಹೆಚ್ಚುವರಿ ವಿದ್ಯುತ್‌ನಿಂದ ಆದಾಯವನ್ನು ಗಳಿಸಬೇಕು. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಮೇಲ್ಛಾವಣಿಯ ಸೌರ ಸ್ಥಾವರಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮವು ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿದೆ. ಈ ಸಾಧನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇದರೊಂದಿಗೆ, ದಮನ್‌ನ ಜನರು ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನನಗೆ ತಿಳಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇದು ಸ್ವಚ್ಛತೆ ಹೇಗೆ ದಮನ್‌ನ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಜೀವನದ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯ ಭಾಗವಾಗಿ ಮಾರ್ಪಟ್ಟಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಈ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯು ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಲ್ಲಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಭಾಗವಹಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ದಮನ್ ಜನರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವಾಗಿರುವುದರಿಂದ ಭಾರತದ ಗುರುತು ಮತ್ತು ಪರಂಪರೆಯೂ ಆಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ಅದರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ನಮ್ಮ ಗುರಿಗಳು ಸಾಮಾನ್ಯವಲ್ಲ. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ನಾನು ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಾನು ನಿಮಗೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಉದಾಹರಣೆಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದೇನೆ ಎಂದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಸಿಂಗಾಪುರವು ಒಂದು ಸಣ್ಣ ಮೀನುಗಾರಿಕಾ ಹಳ್ಳಿಯಾಗಿತ್ತು ಎಂದು ನಾನು ಹೇಳಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಜನರು ಕನಸು ಕಂಡರು, ಅವರು ದೊಡ್ಡ ಗುರಿಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಇಂದು ಅದೇ ಸಿಂಗಾಪುರವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ವ್ಯಾಪಾರ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿದೆ. ಇಂದು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೂಡ ಅದೇ ಕನಸನ್ನು ಕಾಣುತ್ತಿವೆ. ನಮೋ ವಿಮಾನ ನಿಲ್ದಾಣ, ದಮನಗಂಗಾ ನದಿಗೆ ಕಟ್ಟಲಿರುವ ಐಕಾನಿಕ್ ಸೇತುವೆ, 'ಬೀಚ್ ಫ್ರಂಟ್' ನಲ್ಲಿ ಕಟ್ಟಲಾಗುವ ಸಮಾವೇಶ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು, ಇಂತಹ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಮೂಲಕ ನಾವು ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ದೊಡ್ಡ ನಿರ್ಣಯಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಯೋಜನೆಗಳ ಮೂಲಕ, ನಿಮ್ಮ ಚಲನೆ ಸುಲಭವಾಗುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕೆ ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತವೆ. ದಮನ್ ನ ಎರಡೂ ಬದಿಗಳಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ವೇಗವು ಹೆಚ್ಚುತ್ತದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಲ್ಲಿ ಆತಿಥ್ಯ ಆರ್ಥಿಕತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅವಕಾಶಗಳು ಹೆಚ್ಚಾಗುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ಅದರೊಂದಿಗೆ, ಸಾರಿಗೆ ನಗರದಂತಹ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ವ್ಯಾಪಾರ ಮತ್ತು ಲಾಜಿಸ್ಟಿಕ್ಸ್‌ಗೆ ಹೊಸ ವೇಗವನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಈ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಾಗಿ ನಾವು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿರುವ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಹೈಟೆಕ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯದ ಬಲದ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಸಾಕಾರಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಕಲ್ಪೇನಿ ಮತ್ತು ಕಡ್ಮತ್ ದ್ವೀಪಗಳಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಬಂದರುಗಳ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಲ್ಲಿ ದೇಶದ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಹೇಳಿದಂತೆ, ಇವು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮಗಳಾಗಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಬಿಜೆಪಿ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಎನ್‌ಡಿಎ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಮೊದಲ ಮಾನದಂಡವೆಂದರೆ - ಬಡವರು, ವಂಚಿತರು, ಬುಡಕಟ್ಟು ಜನಾಂಗದವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಬದಲಾವಣೆ! ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರವು ನಮ್ಮ ದೊಡ್ಡ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಕಳೆದ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ದೇಶವು ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಸಮಗ್ರ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿದೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕಳವಳವನ್ನು ನಾವು ಪರಿಹರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇಂದು ಬಡವರಿಗೂ ಸಹ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅವರಿಗೆ 5 ಲಕ್ಷ ರೂಪಾಯಿಗಳವರೆಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯ ಭರವಸೆ ಇದೆ. ರೋಗಗಳ ಸಕಾಲಿಕ ರೋಗನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು, ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಆರೋಗ್ಯ ಮಂದಿರಗಳ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಇದೆ. ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳ ಮೂಲಕವೂ ಕೈಗೆಟುಕುವ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಈ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ಇನ್ನಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮತ್ತು ಆಧುನಿಕವಾಗಿಸಲು, ಇಂದು ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಗಳನ್ನು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ಮಿಷನ್ ಮೂಲಕ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳಿಂದಾಗಿ, ಬಡವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರು ಸುಮಾರು 2.25 ಲಕ್ಷ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಗಳನ್ನು ಖರ್ಚು ಮಾಡದಂತೆ ಉಳಿಸಿದ್ದಾರೆ.

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರದ ನೀತಿಗಳು ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯಗಳ ಕೊರತೆ ಇತ್ತು. ಇಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಕೂಡ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಈಗ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಇದೆ, ಮತ್ತು ಸ್ನಾತಕೋತ್ತರ ಅಧ್ಯಯನಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಸಿಲ್ವಾಸಾದ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆ ಕಳೆದ ವರ್ಷದಿಂದ ಸಾವಿರಾರು ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯನ್ನು ಸಹ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರು ಈಗ ಇನ್ನೂ ಉತ್ತಮ ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಯ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಹೇಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕುಟುಂಬ ಆರೋಗ್ಯ ಸಮೀಕ್ಷೆಯ ಫಲಿತಾಂಶಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿನ ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಇಂದು, ದೇಶದಲ್ಲಿ ಶೇ. 90 ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ, ಇದು ತಾಯಂದಿರ ಮರಣ ಮತ್ತು ಶಿಶು ಮರಣವನ್ನು ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದೆ. ಮಿಷನ್ ಇಂದ್ರಧನುಷ್ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ಭಾರತವು ಮಕ್ಕಳ ಲಸಿಕೆ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ಉತ್ತಮ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಕೇವಲ ಶೇ. 60 ರಷ್ಟು ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂದು ಈ ಅಂಕಿ ಅಂಶವು ಸುಮಾರು ಶೇ. 90 ಕ್ಕೆ ಏರಿದೆ. ಆರೋಗ್ಯ ಭದ್ರತಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ದೊಡ್ಡ ಬದಲಾವಣೆಯಾಗಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಶೇ. 30 ಕ್ಕಿಂತ ಕಡಿಮೆ ಕುಟುಂಬಗಳು ಆರೋಗ್ಯ ವಿಮಾ ಯೋಜನೆಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದವು. ಇಂದು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಆ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳನ್ನು ಸಹ ಬದಲಾಯಿಸಿದೆ. ಈಗ ಶೇ. 60 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕುಟುಂಬಗಳು ಈ ರಕ್ಷಣೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸರ್ಕಾರದ ಈ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ ಯಾರಾದರೂ ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದ್ದರೆ, ಅದು ನನ್ನ ದೇಶದ ಮಹಿಳಾ ಶಕ್ತಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಹಿಂದೆ ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಯುವಜನರು ಉನ್ನತ ಶಿಕ್ಷಣಕ್ಕಾಗಿ ಹೊರಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಆದರೆ ಇಂದು, ಒಂದಲ್ಲ, ಹಲವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸ್ಥಾಪನೆಯಾಗಿವೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಶಾಲಾ ಕಟ್ಟಡಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ, ಶಾಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ಮಾರ್ಟ್ ತರಗತಿ ಕೊಠಡಿಗಳನ್ನು ಸಹ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. 40 ಸಾವಿರಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ಅವುಗಳ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಕ್ರಮೇಣ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಸ್ವಾಮಿ ವಿವೇಕಾನಂದ ಶಿಕ್ಷಣ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಅನೇಕ ನಿರ್ಮಾಣಗಳು ಇಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

 

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಈ ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ರಾಂತಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳು ಹಿಂದುಳಿಯಬಾರದು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಸಂಕಲ್ಪ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ಅನೇಕ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಸ್ವತಿ ಸೈಕಲ್ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಸರಸ್ವತಿ ವಿದ್ಯಾ ಯೋಜನೆಯಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು ಇಲ್ಲಿನ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಭಾರತವು ದೇಶದ ಯುವಜನರು ಪದವಿಯ ಜೊತೆಗೆ ಸರಿಯಾದ ಸ್ಥಾನಮಾನಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಬೇಕೆಂದು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದೆ. ಸ್ಥಳೀಯ ಪ್ರತಿಭೆಗಳನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸುವಂತಹ ಮಾನ್ಯತೆಯನ್ನು ಅವರು ಪಡೆಯಬೇಕು. ವಿನ್ಯಾಸ, ಕಾನೂನು, ಎಂಜಿನಿಯರಿಂಗ್, ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣ, ಐಟಿ, ಡ್ರೋನ್ ಮತ್ತು ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಇಂಧನದಂತಹ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಸ್ತುತ ಸಿದ್ಧತೆಯು ಭಾರತದ ಕಾರ್ಯಪಡೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ವೃತ್ತಿಪರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳ ವಿಸ್ತರಣೆ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಎನ್.ಐ.ಎಫ್.ಟಿ. (NIFT)  ಯ ಹದಿನೆಂಟನೇ ಕ್ಯಾಂಪಸ್‌ಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಸಂಸ್ಥೆಯು ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಮಾನ್ಯತೆಯೊಂದಿಗೆ ಜೋಡಿಸುತ್ತದೆ. ಐಟಿಐ ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ಡ್ರೋನ್ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಹೊಸ ಕೋರ್ಸ್‌ಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಪಿಎಂ ವಿಶ್ವಕರ್ಮ ಮತ್ತು ಪಿಎಂ ಸೂರ್ಯ ಘರ್ ಉಚಿತ ವಿದ್ಯುತ್ ಯೋಜನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ತರಬೇತಿ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳು ಸಹ ಯುವಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದೇಶದಲ್ಲಿ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಹೊಸ ಚಿಂತನೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿವೆ. ನಮ್ಮ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳು ಅಥವಾ ದೊಡ್ಡ ಕ್ರೀಡಾಂಗಣಗಳಿಗೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿರಲಾರವು. ಖೇಲೋ ಇಂಡಿಯಾದಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಯುವಜನರಿಗೆ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಯನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲು ಹೊಸ ವೇದಿಕೆಯನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಈ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ ಕ್ರೀಡಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ, ಸಣ್ಣ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಮಕ್ಕಳು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಮತ್ತು ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಸಹ ಅದರಿಂದ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದೆ. ಡಿಯು ಇಂದು ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡೆಗಳ ದೊಡ್ಡ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮಿದೆ. ಘೋಘ್ಲಾ ಬೀಚ್‌ನಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡಾಕೂಟವು ಈ ಪ್ರದೇಶದತ್ತ ದೇಶದ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದೆ. ಇಂದು ಇಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಕ್ರೀಡಾ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯವನ್ನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಖಾನ್ವೆಲ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ಫುಟ್‌ಬಾಲ್ ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ವಾಲಿಬಾಲ್ ತರಬೇತಿ ಕೇಂದ್ರವು ಇಲ್ಲಿನ ಕ್ರೀಡಾ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತಿವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ದೇಶದ ಆದ್ಯ ಗಮನ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದ ಮೇಲೂ ಇದೆ. ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಸ್ಥಳೀಯ ಕಲೆ ಮತ್ತು ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸಬೇಕು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನ. ಸಣ್ಣ ಸ್ಥಳಗಳನ್ನು ಸಹ ದೊಡ್ಡ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಬೇಕು. 'ದೇಖೋ ಅಪ್ನಾ ದೇಶ್' ನಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ದೇಶದ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿವೆ. ಇಂದು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಪರಂಪರೆ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಬೀಚ್ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಪರಿಸರ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಸಾಹಸ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಗಳು ಹೊಸ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಅಪಾರ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ವಲಯವಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ನೈಸರ್ಗಿಕ ಸೌಂದರ್ಯದಿಂದ ಆಶೀರ್ವದಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ದೇಶವು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ ನೀತಿಗಳು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. 2021 ರಲ್ಲಿ, ಸುಮಾರು 6 ಲಕ್ಷ ಪ್ರವಾಸಿಗರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದರು. 2025 ರಲ್ಲಿ, ಈ ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು 50 ಲಕ್ಷಕ್ಕೆ ಏರಿತು. ಅಂದರೆ ಕೆಲವೇ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸಿಗಳ  ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು ಹತ್ತು ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಉತ್ತಮ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ, ಉತ್ತಮ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಮತ್ತು ಸ್ವಚ್ಛ ಕಡಲತೀರಗಳಿಂದಾಗಿ ಇದು ಸಾಧ್ಯವಾಗಿದೆ. ದಮನ್ ರಾತ್ರಿ ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ರಾಮಸೇತು ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಮೋಪಥ ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಾನಿ ದಮನ್ ಕೋಟೆ, ಗಂಗೇಶ್ವರ ದೇವಾಲಯ ಸಂಕೀರ್ಣ, ಇಂತಹ ಹಲವಾರು ಸ್ಥಳಗಳು ಇಂದು ಈ ಇಡೀ ಪ್ರದೇಶದ ಹೊಸ ಗುರುತಾಗುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು, ನಾವು ಇಲ್ಲಿ ಕೈಗಾರಿಕಾ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಈ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ತನ್ನ ವಿಶಿಷ್ಟ ಗುರುತನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಎಂಬುದು ಹೆಮ್ಮೆಯ ವಿಷಯ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಯನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ರಾಜಧಾನಿ ಎಂದು ಗುರುತಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ರಫ್ತಿನಲ್ಲಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಪ್ರಗತಿ ಸಾಧಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ( MSME)  ಗಳನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ನಿರಂತರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ಗಳು ಮತ್ತು ಇತರ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಕೋಟ್ಯಂತರ ರೂಪಾಯಿಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಆರ್ಥಿಕ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗಿದೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಗುಡಿ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳು ತೆರೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿವೆ. ಮುಂಬರುವ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಉತ್ಪಾದನಾ ಕೇಂದ್ರವಾಗಲಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಆಡಳಿತವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸಲ್ಪಟ್ಟಾಗ, ರೂಪಾಂತರವು ವೇಗವಾಗಿ ವಾಸ್ತವವಾಗಿ ರೂಪುಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಪರಿಣಾಮವನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ ತೃಪ್ತಿ ಸಿಗುತ್ತದೆ. ಈ ನೆಲದ ಜನರ ಮೇಲೆ ನನಗೆ ಸಂಪೂರ್ಣ ನಂಬಿಕೆ ಇದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರು, ಇಲ್ಲಿನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು, ರೈತರು, ಕುಶಲಕರ್ಮಿಗಳು, ಕಾರ್ಮಿಕರು ಮತ್ತು ಉದ್ಯಮಿಗಳು ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಕೊಂಡೊಯ್ಯುತ್ತಾರೆ. ನಿಮ್ಮ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹೆಗಲಿಗೆ ಹೆಗಲು ಕೊಟ್ಟು ನಿಲ್ಲುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ನಿಮಗೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಈ ನಂಬಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನಿಮಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ. ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಹೇಳಿ, ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ತುಂಬಾ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.