हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं: प्रधानमंत्री मोदी #ParivartanRally
हमें राज्य की समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से समाधान खोजने की जरुरत: प्रधानमंत्री #ParivartanRally
बिहार का भाग्य बदलने और नया बिहार बनाने के लिए 1,25,000 करोड़ पैकेज की घोषणा #ParivartanRally
सरकार के विभागों में सिर्फ़ कृषि की नहीं बल्कि किसानों की भी चिंता करने की योजना बनेगी: श्री मोदी #ParivartanRally
आपकी भलाई के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे: प्रधानमंत्री

मंच पर विराजमान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी, हमारे सबके वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान गोपाल नारायण जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी जी चौधरी, हमारे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ जी, हमारे पूर्व सांसद श्री उदय सिंह जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी, हमारे सांसद श्रीमान कीर्ति आजाद जी, हमारे सांसद हुकुमदेव नारायण जी, पूर्व सांसद श्रीमान निखिल चौधरी जी, श्रीमान प्रदीप सिंह, श्रीमान नित्यानंद राय जी, श्रीमान विश्वमोहन चौधरी जी, श्रीमान एम. के. सिंह जी, डॉ. राम नरेश सिंह जी, श्रीमान वीरेन्द्र चौधरी जी, श्रीमान देवेन्द्र यादव जी, श्रीमान महबूब अली जी, श्रीमान आलोक रंजन जी, श्रीमान मदन मोहन चौधरी जी, श्रीमती नूतन सिंह जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

एहन पुण्य भूमि मिथिला में अबी हम गदगद छी, अहाँ सबके वेरी वेरी प्रणाम करै छी। मैं अभी आरा के कार्यक्रम से आ रहा हूँ। इसके पूर्व मुझे बिहार में दो रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। हवा का रूख साफ-साफ नजर आता है। इस चुनाव में माहौल कैसा है, मौसम कैसा है, उसका भली-भांति पता चल रहा है। और एनडीए की सरकार बनाने के लिए जो तेज आंधी आई है, तेज हवा चल रही है, बारिश भी उसको भिगो नहीं पा रही है। मैं जब आरा में था तो मुझे बताया गया कि यहाँ तो तेज बारिश चल रही है लेकिन ये कोसी अंचल के लोग हैं अगर एक बार ठान लेते हैं तो कितनी ही तेज आंधी क्यों न हो, वर्षा कितनी तेज क्यों न हो, न ये रुकते हैं, न ये थकते हैं, न ये झुकते हैं; ऐसे कोसी अंचल के लोगों को मैं बार-बार नमन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, आज से 7 साल पहले 18 अगस्त को कोसी में एक भयंकर बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यहाँ के नजदीक के 7-8 जिलों के 35 लाख परिवार तबाह हो गए थे। यहाँ के खेत बालू से भर गए थे। गाँव विनाश के कगार पर आकर खड़े हो गए थे। न धरती बची थी, न आसमान रूकने को तैयार था और यहाँ का जन-जन मुसीबतों से जूझ रहा था। उस समय मैं गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था। इस कोसी अंचल के अनेक परिवार मेरे यहाँ गुजरात में बसे हुए हैं और उसके कारण मुझे उनसे सारी जानकारियां मिलती थीं और तब हमें लगा था कि भले गुजरात कितना ही दूर क्यूँ न हो लेकिन कोसी अंचल के पीड़ा के समय कंधे से कंधा मिलाकर के उनके दुःख में साथ खड़े रहना चाहिए, उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए मदद करनी चाहिए।

आप सबको याद होगा मेरे भाईयों-बहनों, देशभर से लोग उस संकट की घड़ी में आपके साथ खड़े हो गए थे लेकिन कभी कभी जनता-जनार्दन का दर्द, सामान्य मानव की पीड़ा... राजनेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होता है उस अहंकार के कारण न संवेदनाओं को समझ पाते हैं, न दर्द को अनुभव कर पाते हैं, न पीड़ा का पता चलता है और वे अपने अहंकार में डूबे रहते हैं। आज जब मैं इस कोसी अंचल में आया हूँ, कोसी नदी की सौगंध खाकर मैं कहना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति का अहंकार कितनी गहरी चोट पहुंचाता है... अगर मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई अपमानित करे, दुत्कार दे, अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल कर ले, मैं कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की हरकतों के संबंध में कभी कुछ बोलता नहीं हूँ, उसको सहने के लिए अपने आप को तैयार करता हूँ लेकिन जब अहंकार के कारण सामान्य मानव के दर्द और पीड़ा के साथ खिलवाड़ किया जाए तो जनता-जनार्दन के दर्द और पीड़ा के लिए मैं अपने आप को रोक नहीं सकता।

आज जब मैं कोसी अंचल में आया हूँ तो मैं कहना चाहता हूँ कि वो दिन था 18 अगस्त और आज का दिन भी है 18 अगस्त, यही दिन था। आज मैं कहना चाहता हूँ गुजरात के लोगों ने अपनी पसीने की कमाई से कोसी अंचल के लोगों की मदद के लिए 5 करोड़ रुपये का चेक भेजा था। उस 5 करोड़ रुपये में, इसी कोसी अंचल के लोग जो गुजरात में रहते हैं और जिन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाई है, 5-10 लाख रुपये इन लोगों का भी था। वे भी अपने वतन के पीड़ित परिवार के लिए कोई न कोई योगदान देना चाहते थे। लेकिन उनका अहंकार सातवें आसमान पर था; इतना अहंकार था कि आप दर्द झेलते रहें, आप पीड़ा झेलते रहें और उन्होंने 5 करोड़ रुपये का चेक गुजरात की जनता को वापिस भेज दिया।

आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, क्या सार्वजनिक जीवन में ये आचरण उचित है क्या? पूरी ताकत से बताईये, उचित है क्या? ऐसा आचरण मंजूर है क्या? कोसी अंचल के लोग मरें तो मरें लेकिन मैं अपना अहंकार नहीं छोडूंगा, ये चल सकता है क्या? जो अपना अहंकार नहीं छोड़ सकते, हमें उन्हें छोड़ना चाहिए कि नहीं छोड़ना चाहिए? ऐसे लोगों को विदाई देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों, ऐसे ही अहंकार ने बिहार के सपनों को रौंद डाला है, बिहार के सपनों को चूर-चूर कर डाला है। उस अपमान को भी मैं पी गया था और फिर मैंने हमारे बिहार के भाई जो वहां रहते थे, उन्हीं को मैंने कुछ सामान देकर भेजा कि भाई कहीं मेरा नाम आएगा तो तूफ़ान खड़ा हो जाएगा, आप चुपचाप जाईये और यहाँ के गरीब परिवारों में बाँट कर के आ जाईये। लोग आये, यहाँ के लोगों की सेवा की और कहीं तक किसी को कोई आवाज तक नहीं आने दी।

सार्वजनिक जीवन में कुछ परंपराएँ होती है, कुछ नीतियां होती हैं, कुछ नियम होते हैं लेकिन ऐसे लोगों से मैं क्या अपेक्षा करूँ? आप मुझे बताईये मेरे भाईयों-बहनों, जयप्रकाश नारायण हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? पूरी ताकत से जवाब दीजिये, जयप्रकाश नारायण जी हमारे देश की शान हैं कि नहीं हैं? हमारा गौरव है कि नहीं है? जयप्रकाश जी ने बिहार को गौरव दिलाया कि नहीं दिलाया? बिहार का मान-सम्मान बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया? आपको याद है, उन जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? आपातकाल में जब श्रीमती इंदिरा गाँधी का राज चलता था तो जयप्रकाश नारायण जी को जेल में किसने बंद किया था? कांग्रेस पार्टी ने, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने, जयप्रकाश नारायण जी को जेल में बंद कर दिया था और उनका यही गुनाह था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते थे। बिहार जयप्रकाश जी के नेतृत्व में, और बाद में पूरा हिन्दुस्तान जयप्रकाश जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आया था... भाईयों-बहनों, अब जगह नहीं है, कहाँ आओगे जी, अब भर गया है! इस मैदान में जगह हो न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

जयप्रकाश जी जेल से बीमार होकर बाहर निकले और यह देश बिहार के सपूत और मां भारती के लाल जयप्रकाश नारायण जी को नहीं बचा पाया, वो हमारे बीच से चले गए। जयप्रकाश नारायण जी के मृत्यु के लिए कौन जिम्मेवार है? यही कांग्रेस के लोग जिन्होंने जयप्रकाश नारायण जी के साथ ये खिलवाड़ किया था। मैं बिहार के भाईयों से पूछना चाहता हूँ... बिहार के लोगों ने मन में ऐसी ठान ली कि जयप्रकाश नारायण जी के साथ इस प्रकार का जुल्म करने वालों को बिहार की राजनीति से उखाड़ कर के फेंक दिया लेकिन आज जो लोग जयप्रकाश जी की जिंदगी के साथ खेल खेलने वाले लोगों के साथ चुनावी समझौता कर रहे हैं, कांग्रेस के पास सीटों का बंटवारा कर रहे हैं, मुझे बताईये ये जयप्रकाश नारायण जी की आत्मा को पीड़ा पहुंचाएगा कि नहीं पहुंचाएगा? ये जयप्रकाश नारायण के साथ धोखा और विश्वासघात है कि नहीं है? आप ऐसे लोगों के साथ भरोसा कर सकते हैं क्या जिन्होंने जयप्रकाश नारायण की जिंदगी को तबाह कर दिया? सत्ता पाने के लिए आप उनकी गोद में जाकर के बैठ रहे हो और इसलिए ये जो कारोबार चल रहा है.. अब बिहार की राजनीति बदलाव की ओर चल पड़ी है।

अब ये सरकार रहने वाली नहीं है यहाँ की जनता न इनको स्वीकार करने वाली है, न इनका साथ देने वाली है। भाईयों-बहनों, आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका दिया। आप मुझे बताईये, मैं जनता-जनार्दन के बीच आकर के अपने काम का हिसाब दे रहा हूँ कि नहीं दे रहा हूँ? जनता के बीच जाने के लिए एक हिम्मत लगती है, हौसला लगता है, जनता के प्रति विश्वास लगता है, आस्था लगती है लेकिन जब जनता से नाता टूट जाता है, अहंकार सातवें आसमान पर होता है तब जनता के बीच जाने के बजाय एयर कंडीशन कमरे में पांच-पच्चीस पत्रकारों को बुलाकर के जहर उगलने के सिवाय कोई काम नहीं बचा रहता है। भाईयों-बहनों, हम तो जनता के हैं, जनता के बीच जाते हैं, जनता के बीच आकर के अपना हिसाब देते हैं।

भाईयों-बहनों, बिहार को जंगलराज का डर सता रहा है। उसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मैं आज बिहार सरकार के उनके अपने पुलिस विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जो बातें रखी हैं, मैं बिहार की जनता के सामने बिहार सरकार के ही आंकड़ों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ, आपके सामने रखना चाहता हूँ। दबे पाँव मुसीबतें आनी शुरू हो गई हैं, संकट का सामना करने के दिन आने शुरू हो गए हैं। आप देखिये, बिहार सरकार के आंकड़े बताते हैं: जनवरी 2015, बिहार में अपराधों की संख्या थी – 13,808 गंभीर प्रकार के अपराधों की संख्या थी - 13,808; जून 2015 में यह आंकड़ा पहुँच गया 13 हजार से 18,500 पर गंभीर प्रकार के अपराधों में 34 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। मुझे बताईये, ये जंगलराज के आसार हैं कि नहीं हैं आपका जीवन मुश्किल होगा कि नहीं होगा? निर्दोष बहन-बेटियों की जिंदगी ख़तरे में पड़ेगी कि नहीं पड़ेगी? जनवरी में 217 हत्याएं हुई थी, जून में, इतने कम समय में ये आंकड़ा पहुँच गया 316 और अभी तो पिछले ढेढ़ महीने का मैंने हिसाब नहीं लिया है। 46 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है और अब आप मुझे बताईये कि हत्याओं का अगर यह दौर चलता रहा तो बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी का क्या हाल होगा।

भाईयों-बहनों, एक और बात पर मैं गंभीरता से ध्यान दिलाना चाहता हूँ। ये आंकड़े बिहार सरकार के हैं, मैं उन्हीं के आकड़ें बोल रहा हूँ। जनवरी महीने में दंगों की संख्या थी – 866, जून महीना आते-आते दंगों की संख्या हो गई – करीब-करीब 1500; Exact आंकड़ा है – 1497 यानि 1500 में तीन बाकी। जनवरी में करीब साढ़े आठ सौ और जून में 1500 दंगे, 72 प्रतिशत इजाफ़ा हुआ है। हर पैरामीटर को देखिये, बिहार के सामान्य मानव की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। खतरे की घंटी बज चुकी है। मैं आपसे अनुरोध करने आया हूँ इस चुनाव में हत्याएं अगर बंद करवानी है, ये दंगे फ़साद बंद करवाने हैं, इन निर्दोष लोगों की जिंदगी को बचाना है तो आपको घर-घर जाकर के चौकीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, आप सिर्फ़ पटना में एक मजबूत सरकार बिठा दीजिए, आप हमारा साथ दे दीजिए, हम आपकी समस्याओं का समाधान कर देंगे।

कई दिनों से चर्चा चल रही थी... मैं एक और बात भी कहना भूल गया, उसे मैं जरा कह देना चाहता हूँ। मैंने कोसी का जिक्र किया लेकिन यहाँ के लोगों को याद होगा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में हमारी सरकार बनने के थोड़े दिन के बाद फिर से एक बार कोसी पर संकट आया था। नेपाल में दुपाल चौक के पास कोसी नदी पर लैंडस्लाइड हुआ था। नदी का आना बंद हुआ था और वहां पानी जमा होना शुरू हो गया था। सेटॅलाइट से हमें पता चला कि अगर ये पानी जमा होता गया और बाढ़ में अगर ये मिट्टी ढह गई तो कोसी के पट पर बिहार के जितने गाँव हैं, आज से सात साल पहले जो तबाही आई थी, उससे भी सौ गुना ज्यादा तबाही आ जाएगी, कोई बच नहीं पाएगा। काम करने वाली सरकार कैसी होती है, जनता-जनार्दन के दुःख-दर्द को समझने वाली सरकार कैसी होती है, समस्याओं को पहले पहचान कर के रास्ते खोजने का प्रयास करने वाली सरकार कैसी होती है...

मेरे कोसी पट के भाईयों-बहनों, आपको याद होगा कि हमने तुरंत सेना को भेजा। नेपाल में उस नदी को फिर से खोलने के लिए; इतने बड़े लैंडस्लाइड में छोटे-छोटे hole करके पानी निकले, इसका अभियान चलाया। उसके बाद भी हमें भरोसा नहीं था। कहीं ये प्रयोग हमारा सफल नहीं हुआ और पानी जमा होता ही गया और अगर एक साथ मिट्टी ढह गई तो मेरे कोसी अंचल का कोई परिवार बचेगा नहीं। मैंने हमारे जवानों को यहाँ भेजा, बिहार सरकार को आग्रह किया, मेरे कार्यकर्ताओं को mobilize किया, दिल्ली में बैठकर इसको लगातार मॉनिटर किया, गाँव के गाँव खाली करवाए। यहाँ के किसान मेरे से नाराज हो गए कि पानी तो दिखता नहीं है, वर्षा नहीं है, और मोदी गाँव खाली करवा रहे हैं, पशुओं को भी ले जाने के लिए कहते हैं और वो भी 50-50 किलोमीटर दूरी... सबकी नाराजगी थी। उसके बाद भी मैंने कहा, No compromise. उनको पता नहीं है कि कितने बड़े आफ़त की संभावना है। हम कोशिश कर रहे हैं कि आफ़त न आए लेकिन अगर आ जाए तो नुकसान कम से कम होना चाहिए। उसके लिए हम प्रबंध कर रहे हैं और आज कोसी अंचल के भाईयों-बहनों को हिसाब देते हुए मुझे गर्व होता है कि हम उस काम को करने में सफल हुए। कोसी अंचल को मुसीबत से बचा लिया था। इतना ही नहीं, अभी जब नेपाल में भूकंप आया तो यहाँ की सरकार को इस बात का आश्चर्य था और ये बात उन्होंने publicly कही भी कि भूकंप आने के कुछ ही मिनटों में भारत के प्रधानमंत्री का फ़ोन आ गया, उन जिलों तक फ़ोन पहुँच गया। इस इलाके के सांसदों से मैंने फ़ोन पर बात कर ली। हमने कहा, देखो भाई ये भूकंप भारी नुकसान कर सकता है।

अगर कोसी की इतनी चिंता होती... सबसे पहले भारत सरकार की जिम्मेवारी थी कि नेपाल के साथ हमारे संबंधों को ठीक कर ले। आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कोसी के कारण कोई वर्ष ऐसा नहीं जाता है कि यहाँ के किसानों को, यहाँ की जनता को किसी मुसीबत का सामना न करना पड़ा हो। इस समस्या का समाधान नेपाल में है। जब तक नेपाल के साथ बैठकर पानी के बहाव के संबंध में उचित योजना नहीं बनती है, इस कोसी पट के किसानों को नहीं बचाया जा सकता। और इसलिए, नेपाल के साथ गहरे संबंध होना जरुरी है, नेपाल के सुख-दुःख का साथी बनना जरुरी है। 17 साल, अगर पटना से नेपाल जाना हो तो 70 मिनट नहीं लगता है लेकिन नेपाल जाने में प्रधानमंत्री को 17 साल लग गए। 17 साल तक देश का कोई प्रधानमंत्री गया नहीं, नेपाल से कोसी की बात नहीं की, कोसी पट के मेरे किसान भाईयों को बचाने की कोई बात नहीं की। हम गये, 17 साल के बाद गये और नेपाल सरकार के साथ आमने-सामने बैठकर के कोसी के लिए क्या कर सकते हैं, उसकी बातचीत प्रारंभ कर दी।

रास्ते खोजने पड़ते हैं, समस्याओं का समाधान निकालना पड़ता है तब जाकर के हमारे देश के गरीब किसान को हम बचा सकते हैं और उस काम को 2014 के अगस्त में हमने करके दिखाया, नेपाल जाकर करके दिखाया। भूकंप के बाद नेपाल के साथ हम खड़े रहे। आज एक भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर के हम उसकी सेवा में लगे हुए हैं और इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें समस्याओं का दीर्घकालीन दृष्टि से भी समाधान खोजना होगा। हमने वो प्रयास प्रारंभ किया। हमारे यहाँ कृषि मंत्रालय तो है, कृषि की चिंता करने के लिए तो समय है लेकिन किसान की चिंता कौन करेगा। अगर हम किसान के कल्याण की चिंता नहीं करेंगे तो कृषि का भी कल्याण नहीं होगा और अगर हम कृषि का कल्याण नहीं करेंगे तो किसान का भी कल्याण नहीं होगा। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से हमने कहा कि जो मंत्रालय का नया नाम होगा – कृषि विकास और किसान कल्याण मंत्रालय। अब सरकार के डिपार्टमेंट में सिर्फ़ कृषि की नहीं किसान की भी चिंता करने की योजना बनेगी। ये बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हमने निर्णय किया है।

भाईयों-बहनों, मैं अभी-अभी आरा से आ रहा हूँ। आरा में सरकार का कार्यक्रम था और उस सरकार के कार्यक्रम में विकास की योजनाओं का प्रारंभ करना था। स्किल डेवलपमेंट हो, रास्तों का जाल गूंथना हो, अनेक योजनाओं को प्रारंभ किया और चुनाव के पहले जब मैं आया था, तब मैंने कहा था कि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम 50,000 करोड़ रुपये का पैकेज देंगे। बिहार को कहा था ना? और कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि मोदी बोलते हैं, करते नहीं हैं कुछ; मोदी ने चुनाव के पहले वादा किया था और जब पिछली बार आये तो फिर से टोने मारने शुरू कर दिये कि मोदी बोले क्यों नहीं। मैंने कहा था कि पार्लियामेंट चल रही है, पार्लियामेंट की कुछ गरिमा, उसके कुछ rules and regulations होते हैं, सरकार उस मर्यादा को तोड़ नहीं सकती और ये मैंने कहा था कि जबतक संसद चालू है, मैं बोल नहीं पाऊंगा। अभी चार दिन पहले संसद का सत्र पूर्ण हुआ है और आज आरा में मैंने घोषणा की है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए, नया बिहार बनाने के लिए। और मैंने पैकेज की घोषणा की है – सवा लाख करोड़ रूपया (1,25,000 करोड़)।

मैं बिहार की शक्ल सूरत बदल करके रख दूंगा। ये मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूँ और जब मैं ये कहूँगा तो मुझे मालूम है कि पत्रकारों को बुलाकर के कान में कहा जाएगा, ये तो पुराने वाला है, ये पहले वाला है। भाईयों-बहनों, मैं सच बता देना चाहता हूँ जब अटल जी की सरकार थी तब 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुआ था और न दिल्ली की सरकार न राज्य की सरकार। पूरे के पूरे 10,000 करोड़ रूपया खर्च नहीं कर पाई थी। उसका 1,000 करोड़ रूपया अभी खर्च करना बाकी बचा हुआ है। फिर जब बिहार में जब दो साल पहले राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हुआ, भाजपा के साथ धोखा किया गया, बिहार की जनता के साथ धोखा किया गया और बिहार के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ किया गया... और दिल्ली वाले पैकेज दो, हम आपका साथ देंगे, साथ तो देना ही था, उनका कुर्ता पकड़ करके बचने की कोशिश करनी ही थी और इसलिए पहुंचे और वहां से घोषणा की कि अब बिहार को 12,000 करोड़ का पैकेज मिलेगा और ये नाचने लगे। ये बिहार के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ था। 2013-14 में 12,000 करोड़ के पैकेज में से कुछ भी खर्च कर पाए। इतना ही नहीं, 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद उन 12,000 करोड़ में से करीब-करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च हमने आकर के किया और अभी भी 8,000 करोड़ उसका भी बाकी है। 1,000 करोड़ अटल जी वाला और 8,000 करोड़ मनमोहन सिंह की सरकार वाला।

भाईयों-बहनों, हम बिजली का एक कारखाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाने वाले हैं। वो 20,000 करोड़ रूपया और रोड के लिए और थोड़ा खर्चा, जिसकी रकम होती है करीब-करीब 12,000 करोड़ रूपया। ये रकम बनती है - 40,000 करोड़ और इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो मैं सवा लाख करोड़ कह रहा हूँ, ये चालीस हजार करोड़ उसमें नहीं है। चालीस हजार करोड़ अलग तो कुल पैकेज बन जाता है - 1,65,000 करोड़ रूपया का पैकेज; बिहार के विकास के लिए, बिहार की जनता के भलाई के लिए। इन पैसों से रास्ते बनेंगे; बिजली आएगी; किसान को खेतों में मदद मिलेगी; नौजवान के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे; बिहार के घर-घर में 24 घंटे बिजली मिले; बिहार के गाँव में जहाँ बिजली अभी पहुंची नहीं है, वहां बिजली पहुंचे; जिन घरों में पीने का पानी नहीं है, शौचालय नहीं है, उन घरों को पीने का पानी मिले, शौचालय मिले; फ़र्टिलाइज़र के कारखाने लगे; किसानों को यूरिया मिले; एक के बाद एक विकास की अनगिनत योजनाओं के द्वारा बिहार के जीवन को बदलना है।

भाईयों-बहनों, ये बातें करने वाले लोग... आज बिहार के लोगों को पढ़ने के लिए बाहर जाना क्यों पड़ता है? मां-बाप को लाखों रुपये का खर्चा क्यों करना पड़ता है? ये स्थिति मुझे बदलनी है और इसके लिए इतना बड़ा विशाल जनसमूह। मैं लोकसभा चुनाव में भी यहाँ आया था लेकिन ऐसा जनसागर मैंने देखा नहीं था। मैं यहाँ भी देख रहा हूँ, मंच के पीछे देख रहा हूँ, क्या जनसैलाब है! चुनाव के डेट जब भी आ जाएं, बिहार की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को जिताने का फैसला कर लिया है। और हमने वादा किया है कि हम आपकी भलाई के लिए, आपके कल्याण के लिए बिहार के उस सामर्थ्य को फिर से वापस लाने के लिए जी-जान से जुटे रहेंगे। नया बिहार बना के रहेंगे, बिहार का भाग्य बदल कर रहेंगे, बिहार की जनता का भाग्य बदल कर रहेंगे। इसी शुभकामना के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – भारत माता की जय – आवाज कोसी के कोने-कोने में पहुंचनी चाहिए।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार: पीएम मोदी
August 02, 2026
मैं प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवाओं से, इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्री
आज जब देश ने 'विकसित भारत' का लक्ष्य तय किया है, तो यह बहुत जरूरी है कि देश के युवा फिट रहें, उनमें भरपूर आत्मविश्वास हो और वे नशीले पदार्थों से हमेशा दूर रहें: पीएम मोदी
हमें हर युवा को नशे के जाल में फंसने से बचाना होगा: प्रधानमंत्री
समाज का सहयोग, योग और ध्यान हमें नशे की लत से लड़ने के लिए अंदर से मजबूत बनाते हैं और आज नशा-मुक्ति केंद्र जैसी सुविधाएँ भी लत छोड़ने में मदद करती हैं: पीएम मोदी
यदि कोई युवा अनजाने में नशे के जाल में फंस भी गया है, तो इसका बिल्कुल भी यह अर्थ नहीं है कि उसके लिए सभी दरवाजे बंद हो गए हैं: प्रधानमंत्री
हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर घर का कोई बच्चा नशे की लत का शिकार हो जाता है, तो हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि उसे लत से मुक्त कराने के लिए डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए: पीएम मोदी
हमें परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने की संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए, ताकि आप उन्हें इस तरह के दुष्चक्र में फंसने से पहले ही सहारा दे सकें: प्रधानमंत्री
मैं अपने प्रोफेसरों से अपील करता हूँ कि वे अपने छात्रों के साथ नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों पर चर्चा करें और अच्छे नतीजे पाने के लिए कैंपस में नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएँ: पीएम मोदी


नमस्‍कार!

आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं। इस संकल्प को लेकर, इसक कार्यक्रम से जुड़े सभी पूज्य संतजन, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे सभी राज्यपाल, सभी मुख्यमंत्री, अन्‍य सभी जनप्रतिनिधिगण, 28 हजार से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से युवा साथी, मैं आज इस शुभ घड़ी पर, शुभ संकल्प के लिए करोड़ों-करोड़ों नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आज हम सभी जिस अभियान के साक्षी बन रहे हैं, वह अभियान व्यक्ति के लिए हैं, परिवार के लिए हैं, समाज के लिए भी है और सबसे बड़ी बात है, यह राष्‍ट्र के लिए है।

साथियों,

विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है, क्योंकि आज जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए आवश्यक है, देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्‍मविश्‍वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा-हमेशा दूर ही रहे, दूर हो। यही इस अभियान का उद्देश्य है। इसलिए हम सबको यह संकल्प लेना है, हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझे, हर तरह से जागरूक रहे और उससे दूर रहें और इस संकल्प में अब ‘राष्‍ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियान की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

काशी का सांसद होने के नाते मुझे खुशी है कि यह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पिछले साल काशी की पवित्र धरती से शुरू हुआ था। इसलिए वैज्ञानिक स्‍पष्‍टता के साथ-साथ इसमें आध्यात्मिक ऊर्जा भी है, संतों के आशीर्वाद भी हैं और महान सांस्कृतिक विरासत भी हैं। इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है, जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है। यही वजह है, देश के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने, NGOs ने इस दिशा में संकल्प लिया है। सबने मिलकर ‘काशी डिक्लेरेशन’ के जरिए रोडमैप तैयार किया है और आज हम देख रहे हैं, काशी से उठा वो कल्याणकारी विचार अब यह एक नेशनल प्रोजेक्ट्स बन गया है। आज से देशभर में ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान आरंभ हो रहा है।

साथियों,

कुछ काम ऐसे होते हैं, जो व्यक्तिगत रूप से कोई प्रयास करे, तो कभी-कभी निराश हो जाता है, थकान महसूस करता है, लंबी दूरी चलने में मन तैयार नहीं होता है, लेकिन जब सामूहिक अभियान बन जाता है, कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोग चल पड़ते हैं, तो ऐसे सभी जो व्यक्तिगत रूप से अपने आप कुछ नहीं कर पाते हैं, उनको भी एक नई ऊर्जा मिल जाती है। सामूहिकता की एक ताकत होती है और आज उस ताकत को लेकर के यह अभियान हर युवा मन को छूने वाला है। थोड़ी देर पहले देश के लाखों युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली है। आपने अपने जीवन को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया है। आपने अपने स्कूल, अपने कॉलेज और अपने समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है।

साथियों,

आज लिया गया यह संकल्प आने वाले 100 सप्ताह तक लगातार ऐसे ही आगे बढ़ेगा। हर रविवार, कला, संस्‍कृति, स्पोर्ट्स, मेडिटेशन, आध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां होंगी। नशा मुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा। आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे, हंड्रेड मजबूत स्‍टेप्‍स।

साथियों,

आज हजारों स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लाखों विद्यार्थी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े हैं। माई भारत के वॉलंटियर्स भी लाखों की तादाद में आज इससे जुड़े हैं। मेरे एनएसएस के नौजवान भी आज हमारे साथ शामिल हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से, अलग-अलग संस्‍थानों से, अलग-अलग बैकग्राउंड के एक करोड़ से अधिक युवा आज एक साथ हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है, आप सब इस बड़े मोवमेंट के लीडर हैं। आपने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत का युवा कितना जागरूक है, कितना समझदार है और अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर है। मैं आप सभी को इस अभियान के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे युवा साथियों,

आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है। इसलिए, देश के लिए और अपने जीवन के लिए, खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है। नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है। अभी जिन नौजवानों ने नाट्य मंचन किया, बहुत कम समय में, बहुत अच्छे तरीके से नाट्य मंचन में उन्होंने समस्या भी बताई, समस्या के कारण पैदा हुए संकट भी बताए और बाहर निकलने के सामूहिक प्रयत्न का रास्ता भी दिखाया। नाट्य मंचन छोटा था, लेकिन जैसा उन्होंने कहा, आओ हम नाटक देखें! यह नाटक नहीं था, यह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था। हमें जगा रहा था, हमें जूझने के लिए प्रेरित कर रहा था।

साथियों,

आजकल हम देखते हैं, आज के युवा स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया में छाए हैं, AI को लीड कर रहे हैं, Sports में तिरंगा लहरा रहे हैं, स्‍पेस से लेकर Science तक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। लेकिन साथियों, जब कोई युवा, अगर ड्रग्स के एडिक्‍शन में फंस जाए, तो केवल एक युवा नहीं हारता, एक सपना हार जाता है, एक सपने की बाल मृत्यु हो जाती है, एक परिवार हार जाता है, पूरा का पूरा परिवार टूट जाता है, समाज से भी नफरत का शिकार बन जाता है। नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक माँ की मुस्कान छीन लेता है। नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है। एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है। एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है। घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।

साथियों,

नशा मुक्त रहकर आपको अपने पोटेंशियल को प्रोटेक्ट करना है! आपको ध्यान रखना है, ड्रग्स कुछ समय के लिए 'High' देता है। लेकिन आपके करियर और फैमिली लाइफ को 'Low' कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।

साथियों,

हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी कहा गया है- "जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ। आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥'' अर्थात, जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दें, इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए, ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है।

साथियों,

हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गईं है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत, यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए rehabilitation center जैसी सुविधाएं भी हैं। इसलिए, अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है, तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है, घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग मांगे, मन खोलकर के उससे बात करें, जो एक्सपर्ट्स हैं, उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए, ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी, थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा, उसमें बदलाव आ रहा है, वो खोया-खोया लग रहा है, वो मुँह छुपा रहा है, कमरे में बंद हो जा रहा है, देर रात आ रहा है, पैसे अनाब-शनाब मांग रहा है, यह सारी चीजों से पता चल जाता है, भनक आ जाती है, कुछ मामला गड़बड़ है।

साथियों,

एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स साथियों से भी करना चाहता हूँ, आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों, हमें एक और बात ध्यान रखनी है, जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वह कमजोर नहीं होते, जो नशे को परास्‍त करके निकला है न, वह असली योद्धा होता है, समाज को उनका सम्मान करना चाहिए, अपनापन देना चाहिए, उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता, उसका साहस उसकी पहचान होता है।

साथियों,

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों पर सख्ती के साथ कार्रवाई हो रही है। पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स भी जब्त की गई है। यह दिखाता है कि, ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है। मुझे विश्वास है, केन्‍द्र सरकार, राज्य सरकार, हर कोई इसे मिशन मोड में करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे देश का युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी युवा ऊर्जा को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों को भी आगे बढ़ाएगा। और जब मैं आज अनेक महान संतों को मेरे सामने देख रहा हूं, दूर से मैं मन से उनको प्रणाम करता हूं। मैं इन सभी सामाजिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक गुरुजन, आपका देश के कोने-कोने में संगठन है, आपके युवा साथी डिवोटीज हैं। आने वाले 100 दिन में हर एक संगठन, एक सप्ताह अपने जिम्मे ले सकता है, पूरा सप्ताह पूरे देश में वह संगठन नेतृत्व करे, बाकी सब शक्तियां उसके साथ जुड़े और रविवार को बहुत बड़ा कार्यक्रम करें। दूसरे सप्ताह, दूसरा संगठन, दूसरी शक्ति, सप्ताह भर प्रयोग करें, कार्यक्रम करे और रविवार को बड़ा कार्यक्रम करे। अगर 100 सप्ताह हमारे देश के ऐसे आध्यात्मिक, सामाजिक संगठन, युवा संगठन एक-एक सप्ताह अपने जिम्मे ले लें और बाकी सारी शक्तियां वह जुड़े और रविवार सब मिलकर के करें, आप कल्पना कर सकते हैं, देश में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। मैं एक बार फिर आप सबने समय निकाला, इस पवित्र कार्य में हम सबको आशीर्वाद दिए, इसके लिए संतों का, आचार्यो का, संगठन के महारथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इन एक करोड़ से ज्यादा जुटे नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, आपने यह बहुत बड़ा काम किया है। मैं माई भारत के वॉलंटियर्स की बधाई करता हूं, वो जो भी ठान लेते हैं, आजकल करके दिखाते हैं। अभी पिछले दिनों मुझे माई भारत के वॉलंटियर्स को मिलने का मौका मिला, वह हिन्‍दुस्‍तान के सीमावर्ती गांवों में जाकर के एक-एक सप्ताह रूक करके आए हैं। जिसे कभी देश का आखिरी गांव कहा जाता है, जाता था जिसको आज हम देश का पहला गांव कहते हैं, वहां जाकर के आए। उनके अनुभव बड़े प्रेरक थे और आज इतना बड़ा कार्यक्रम माई भारत के वॉलंटियर्स कर पाते हैं, यह अपने आप में उनकी राष्‍ट्र के प्रति जागरूक समर्पित भावना का प्रतीक है, मैं उनकी बधाई देता हूं, उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सामूहिक प्रयत्नों से यह हमारी मोवमेंट घर-घर पहुंचेगी, हर युवा के दिन में पहुंचेगी और यह ड्रग्स के कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा खौफ भी बन जाएगी। आइए, हम सब मिलकर के आगे चलें, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!