Entire world is now discussing global warming and ways to mitigate it: PM Modi
Two landmark initiatives emerged in #COP21. India & France played key roles in those: PM
International Solar Alliance will impact generations in a big way: PM Modi
US, India, France took initiative of innovation; let is innovate and protect our environment: PM
India expressed keenness on solar alliance. France was very helpful, did everything possible to bring all nations together: PM
Solar alliance to ensure that the world gets more energy: PM Modi

मंच पर वि‍राजमान फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ श्रीमान ओलांद फ्रांस से आए हुए Senior Ministers हरि‍याणा के Governor श्री, मुख्‍यमंत्री श्री, श्रीमान पीयुष गोयल जी फ्रांस का Delegation और वि‍शाल संख्‍या में आए हुए प्‍यारे भाइयों और बहनों!

पि‍छले एक वर्ष से सारी दुनि‍याँ में इस बात की चर्चा थी कि‍ Global Warming के सामने दुनि‍याँ कौन से कदम उठाए कि‍न बातों का संकल्‍प करे? और उसकी पूर्ति‍ के लिए कौन से रास्‍ते अपनाएं? पेरि‍स में होने वाली COP 21 के संबंध में पूरी दुनि‍याँ में एक उत्‍सुकता थी, संबधि‍त सारे लोग अपने-अपने तरीके से उस पर प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे थे, और करीब-करीब दो सप्‍ताह तक दुनि‍याँ के सभी देशों ने मि‍ल करके, इन वि‍षयों के जो जानकार लोग हैं वो वि‍श्‍व के सारे वहॉं इकट्ठे आए चर्चाएं की और इस बड़े संकट के सामने मानव जाति‍ की रक्षा कैसे करें, उसके लि‍ए संकल्‍पबद्ध हो करके आगे बढ़े।

COP 21 के नि‍र्णयों के संबंध में तो वि‍श्‍व में भली- भॉंति‍ बातें पहुँची हैं लेकि‍न पेरि‍स की धरती पर एक तरफ जब COP 21 की चर्चाएं चल रहीं थीं तब दो महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives लि‍ए गए। इन दोनों महत्‍त्‍वपूर्ण initiatives में भारत और फ्रांस ने बहुत ही महत्‍त्‍वपूर्ण भमि‍का नि‍भाई है एक initiative एक तरफ तो Global Warming की चिन्‍ता है, मानवजाति‍ को पर्यावरण के संकटों से रक्षित करना है और दूसरी तरफ मानवजाति‍ के आवश्‍यकताओं की पूर्ति‍ भी करनी है। जो Developing Countries हैं उन्‍हें अभी वि‍कास की नई ऊँचाइयों को पार करना बाकी है और ऊर्जा के बि‍ना वि‍कास संभव नहीं होता है। एक प्रकार से ऊर्जा वि‍कास यात्रा का अहमपूर्ण अंग बन गयी है। लेकि‍न अगर fossil fuel से ऊर्जा पैदा करते हैं तो Global Warming की चिन्‍ता सताती है और अगर ऊर्जा पैदा नहीं करते हैं तो, न सि‍र्फ अंधेरा छा जाता है जि‍न्‍दगी अंधेरे में डूब जाती है। और ऐसी दुवि‍धा में से दुनियाँ को बचाने का क्‍या रास्‍ता हो सकता है? और तब जा करके अमेरि‍का, फ्रांस भारत तीनों ने मि‍लकरके एक initiative लि‍या है और वो initiative है innovation का। नई खोज हो, नए संसाधन नि‍र्माण हों, हमारे वैज्ञानि‍क, हमारे Technicians हमारे Engineers वो नई चीजें ले करके आएं जोकि‍ पर्यावरण पर प्रभाव पैदा न करती हों। Global Warming से दुनि‍याँ को बचाने का रास्‍ता दि‍खती हों और ऐसे साधनों को वि‍कसि‍त करें जो affordable हो sustainable हो और गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति‍ की पहुँच में हो। तो innovation के लि‍ए एक बहुत बड़ा अभि‍यान चलाने की दि‍शा में अमेरि‍का, फ्रांस और भारत दुनि‍याँ के ऐसी सभी व्‍यवस्‍थाओं को साथ ले करके आगे बढ़ने का बड़ा महत्‍तवपूर्ण निर्णय कि‍या उसको launch कि‍या गया। President Obama, President Hollande और मैं और UN General Secretary और Mr. Bill Gates , हम लोग उस समारोह में मौजूद थे और एक नया initiative प्रारंभ कि‍या। दूसरा एक महत्‍त्‍वपर्ण निर्णय हुआ है जि‍सका आने वाले दसकों तक मानव जीवन पर बड़ा ही प्रभाव रहने वाला है।

दुनि‍याँ में कई प्रकार के संगठन चल रहे हैं। OPEC countries का संगठन है G-20 है G-4 है, SAARC है, European Union है, ASEAN Countries हैं, कई प्रकार के संगठन दुनि‍याँ में बने हुए हैं। भारत ने एक वि‍चार रखा वि‍श्‍व के सामने कि‍ अगर Petroleum पैदावार करने वाले देश इकट्ठे हो सकते हैं, African countries एक हो सकते हैं, European Countries एक हो सकते हैं, क्‍यों न दुनि‍याँ में ऐसे देशों का संगठन खड़ा कि‍या जाए जि‍न देशों ने 300 दि‍वस से ज्‍यादा वर्ष में सूर्य का प्रकाश प्राप्‍त होता है।

ये सूर्य, ये बहुत बड़ी शक्‍ति‍ का स्रोत है सारे जीवन को चलाने में, सृष्‍टि‍ को चलाने में सूर्य की अहम् भूमि‍का है। क्‍यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्‍वीकार करके वि‍श्‍व कल्‍याण का रास्‍ता खोजें। 300 से अधि‍क दि‍वस, सूर्य का लाभ मि‍लता है ऐसे दुनि‍या में करीब-करीब 122 देश हैं। और इसलि‍ए वि‍चार आया क्‍यों न हम 122 देशों का जो कि‍ सूर्य शक्‍ति‍ से प्रभावि‍त हैं उनका एक संगठन गढ़ें। भारत ने इच्‍छा प्रकट की फ्रांस के राष्‍ट्रपति‍ जी ने मेरी पूरी मदद की, हम कंधे से कंधा मि‍लाकरके चले, दुनि‍याँ के देशों का संपर्क कि‍या और नवंबर महीने में पेरि‍स में जब conference चल रही थी, 30 नवंबर को दुनि‍याँ के सभी राष्‍ट्रों के मुखि‍या उस समारोह में मौजूद थे और एक International Solar Alliance इस नाम की संस्‍था का जन्‍म हुआ।

उसमें इस बात का भी निर्णय हुआ कि‍ इसका Global Secretariat ‍हि‍न्‍दुस्‍तान में रहेगा। ये International Solar Alliance इसका Headquarter गुड़गॉंव में बन रहा है। ये हरि‍याणा ‘कुरूक्षेत्र’ की धरती है, गीता का संदेश जहॉं से दि‍या, उस धरती से वि‍श्‍व कल्‍याण का एक नया संदेश इस Solar Alliance के रूप में हम पहुँचा रहे हैं।

बहुत कम लोगों को अंदाज होगा कि‍ आज ये जो घटना घट रही है उसका मानवजाति‍ पर कि‍तना बड़ा प्रभाव पैदा होने वाला है, इस बात को वही लोग समझ सकते हैं जो छोटे-छोटे Island पर बसते हैं, छोटे-छोटे Island Countries हैं और जि‍नके ऊपर ये भय सता रहा है कि‍ समुंदर के अगर पानी की ऊँचाई बढ़ती है तो पता नहीं कब उनका देश डूब जाएगा, पता नहीं वो इस सृष्‍टि‍ से समाप्‍त हो जाएंगे, दि‍न रात इन छोटे-छोटे देशों को चि‍न्‍ता हो रही है। जो देश समुद्र के कि‍नारे पर बसे हैं, उन देशों को चि‍न्‍ता हो रही है कि‍ अगर Global Warming के कारण समुद्र की सतह बढ़ रही है तो पता नहीं हमारे मुम्‍बई का क्‍या होगा, चेन्‍नई का क्‍या होगा? और दुनि‍याँ के ऐसे कई देश होंगे जि‍नके ऐसे बड़े-बड़े स्‍थान जो समु्द्र के कि‍नारे पर हैं उनके भाग्‍य का क्‍या होगा? सारा वि‍श्‍व चि‍न्‍ति‍त है। और मैं पि‍छले एक साल में, ये Island Countries हैं जो छोटे-छोटे उनके बहुत से नेताओं से मि‍ला हूँ, उनकी पीड़ा को मैंने भली-भॉंति‍ समझा है। क्‍या भारत इस कर्तव्‍य को नहीं नि‍भा सकता?

हमारे देश में जीवनदान एक बहुत बड़ा पुण्‍य माना जाता है। आज मैं कह सकता हूँ कि‍ International Solar Alliance उस जीवनदान का पुण्‍य काम करने वाला है, जो आने वाले दशकों के बाद दुनि‍याँ पर उसका प्रभाव पैदा करने वाला है। सारा वि‍श्‍व कहता है कि‍ Temperature कम होना चाहि‍ए, लेकि‍न Temperature कम करने का रास्‍ता भी सूर्य का Temperature ही है। एक ऊर्जा से दूसरी ऊर्जा का संकट मि‍टाया जा सकता है। और इसलि‍ए वि‍श्‍व को ऊर्जा के आवश्‍यकता की पूर्ति‍ भी हो, innovation का काम भी हो और सोलर को ले करके जीवन के क्षेत्र कैसे प्रभावि‍त हों उस दि‍शा में काम करने के लि‍ए बना है।

ये बात सही है कि‍ International Solar Alliance इसका Headquarters हि‍न्‍दुस्‍तान में हो रहा है, गुडगॉंव में हो रहा है, लेकि‍न ये Institution हि‍न्‍दुस्‍तान की Institution नहीं है ये Global Institution है, ये Independent Institution है। जैसे अमेरि‍का में United Nations है, लेकि‍न वो पूरा वि‍श्‍व का है। जैसे WHO है, पूरे वि‍श्‍व का है। वैसे ही ये International Solar Alliance का Headquarter ये पूरे वि‍श्‍व की धरोहर है और ये Independent चलेगा। अलग-अलग देश के लोग इसका नेतृत्‍व करेंगे, अलग-अलग देश के लोग इसकी जि‍म्‍मेदारी संभालेंगे, उसकी एक पद्धति‍ वि‍कसि‍त होगी लेकि‍न आज उसका Secretariat बन रहा है, उस Secretariat के माध्‍यम से इस बात को हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में परंपरागत प्राकृति‍क संसाधनों उपयोग करने का बीड़ा उठाया है। भारत ने जब ये कहा कि‍ हम 175Giga Watt, Renewable Energy की तरफ जाना चाहते हैं, तब दुनि‍याँ के लि‍ए बड़ा अचरज था। भारत में Giga Watt शब्‍द भी नया है, जब हम Mega Watt से आगे सोच भी नहीं पाते थे। हम आज Giga Watt पर सोच रहे हैं और 175 Giga Watt Solar Energy, Wind Energy, Nuclear Energy, Biomass से होने वाली Energy इन सारे स्रोतों को Hydro Energy ये हम उपलब्‍ध कराना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि‍ आज भारत 5000 MW से ज्‍यादा solar energy उसने install कर दी। ये इतने कम समय में जो काम हुआ है वो उस commitment का परिणाम है कि क्या भारत मानव जाति के कल्याण के लिए मानव जाति की रक्षा के लिए, प्रकृति की रक्षा के लिए, ये पूरी जो सृष्टि है उस पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए, भारत कोई अपना योगदान दे सकता है क्या? उस योगदान को देने के लिए ये बीड़ा उठाया है।

मैं फ्रांस के राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूँ कि इस चिंता के समय में global warming पर्यावरण के मुद्दे इसके समाधान के जो रास्ते है उनकी सोच भारत की सोच से बहुत मिलती जुलती है क्यों कि फ्रांस की values और भारत के values काफी समान है और इसलिए पिछले वर्ष April के महीने में हम दोनों मिले थे तो हमने तय किया था कि हम COP 21 के समय एक किताब निकालेंगे और विश्व के अंदर परंपरागत रूप से इन issues को कैसे देखा गया इस पर research करेंगे। और हम दोनों ने मिल कर के उस किताब की प्रस्तावना लिखी है और विश्व के सामने उन्ही के मूलभूत चिंतन क्या थे ये प्रस्तुत किया।

ये चीजें इसलिए हम कर रहे हैं कि मानव जाति को इस संकट से बचने के जो रस्ते खोजे जा रहे हैं, वो एक सामूहिक रूप से प्रयत्न हो, innovative रूप से प्रयत्न हो और परिणाम वो निकले जो मानव जाति की आवश्यकता है उसकी पूर्ति भी करे लेकिन प्रकृति को कोई नुकसान न हो। हम वो लोग हैं जिनके पूर्वजो ने, इस धरती से हमें प्यार करना सिखाया है। हमें कभी भी प्रकृति का शोषण करने के लिए नहीं सिखाया गया, हमें पौधे में भी परमात्मा होता है यह बचपन से सिखया गया। ये हमारी परंपरा है। अगर ये परंपरा है तो हमें विश्व को उसका लाभ पहुंचे उस दिशा में हमें कुछ कर दिखाना चाहिए और उसी के तहत आज international solar alliance का हम लोगों ने एक Secretariat का आरम्भ कर रहे हैं। और भविष्य में भव्य भवन के रूप में उसका निर्माण हो, एक स्वंत्रत इमारत तैयार हो, उसके लिए शिलन्यास भी कर रहे है और इस काम के लिए आप पधारे इसका मैं बहुत बहुत आभारी हूँ।

मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि solar alliance का निर्माण हो रहा हो आज हमें Delhi से यहाँ आना था हम by road भी आ सकते थे, helicopter से भी आ सकते थे, लकिन हम दोनों ने मिलकर तय किया कि अच्छा होगा की हम Metro से चले जाएँ और आज आप के बीच हमें Metro से आने का अवसर मिला।

मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूँ कि उन्होंने आज Metro में आने के लिए सहमति जताई और हम Metro का सफ़र करते करते आपके बीच पहुंचे क्योंकि वो भी एक सन्देश है क्योंकि global warming के सामने लड़ाई लड़ने के जो तरीके हैं उसमें ये भी एक तरीका है। मैं विश्वास करता हूँ कि ये प्रयास बहुत ही सुखद रहेगा। कल भारत प्रजासत्ता पर्व मनाने जा रहा है, इस प्रजसत्ता पर्व की पूर्व संध्या पर मैं देशवासियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अधिकार और कर्तव्य इन दोनों को संतुलित करते हुए हम देश को आगे बढ़ाएंगे यही मेरी शुभकामना है।

बहुत बहुत धन्यवाद्।

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August 08, 2026
Those who have the courage to find new solutions to challenges, for them, the challenges will become opportunities: PM
Keep your curiosity alive in life, keep your learning instinct : PM
Question things that are accepted without a thought, but don't just stop at questioning; have the courage to also find their solutions: PM
Today, India is working towards self-reliance in economic, technological and industrial sectors, forming a strong foundation for Viksit Bharat: PM
Today, new sectors are emerging in the country for our youth: PM

 শিক্ষামন্ত্ৰী প্ৰলহাদ যোশী জী, মোৰ বন্ধু হৰিশ ছালভে জী, অধ্যাপক অভয় কাৰণ্ডিকৰ, আই আই টি দিল্লীৰ সঞ্চালক অধ্যাপক ৰংগন বেনাৰ্জী, সকলো অধ্যাপক, অন্যান্য বিশিষ্ট ব্যক্তি আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকল।

আজিৰে পৰা আপোনালোক সকলো প্ৰতিভাৱান যুৱক-যুৱতীৰ জীৱনত আৰম্ভ হৈছে এক নতুন যাত্ৰা। বৰ্তমান আপোনালোকে আপোনালোকৰ জীৱনৰ এটা স্মৰণীয় মুহূৰ্তৰ মাজেৰে পাৰ কৰি আছে। উৎসাহ, উদ্যম, সপোন আৰু আবেগেৰে উপচি পৰা—এই মুহূৰ্তৰ অংশ হোৱা, এই আই আই টি দিল্লী কেম্পাছ ভ্ৰমণ কৰা আৰু আপোনালোকৰ সৈতে এই অভিজ্ঞতা ভাগ কৰাটো মোৰ বাবেও অতি বিশেষ। শেষবাৰৰ বাবে সমাৱৰ্তন অনুষ্ঠানত অংশ লোৱাৰ সময়ত সমগ্ৰ দেশখনে ক’ভিডকালৰ মাজেৰে পাৰ কৰিছিল। তেতিয়া মই ভাৰ্চুৱেলভাবে যোগদান কৰিছিলো, কিন্তু আজি মই ইয়াত আপোনালোকৰ মাজত সোঁশৰীৰে উপস্থিত আছো। আৰু সেইবাবেই মই পৰম সন্তুষ্টি অনুভৱ কৰিছো।

ন্ধুসকল,

আজি আপোনালোকৰ পৰিয়ালৰ সদস্যসকলে যেনেকৈ গৌৰৱ অনুভৱ কৰিছে, ময়ো আপোনালোক সকলোৰে বাবে গৌৰৱ অনুভৱ কৰিছো। কাৰণ আপোনালোকে কেৱল ডিগ্ৰী লাভ কৰা নাই; আপোনালোকে দেশৰ বাবে ডাঙৰ ডাঙৰ কাম কৰাৰ সপোন লৈ ওলাই আহিছে। আজি বহু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে নিজৰ সাফল্যৰ বাবে পদক লাভ কৰিছে। ইয়াৰ বাবে আপোনালোক সকলোকে আন্তৰিক অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিলোঁ। অৱশ্যে তেওঁলোকৰ মাজত এগৰাকী বা দুগৰাকীমান কন্যা থাকিলে আৰু ভাল হ’লহেঁতেন—ক্ষমা কৰিব, মাত্ৰ এগৰাকী বা দুগৰাকীমান কিয়? আৰু বেছি থাকিব লাগিছিল। আজি আই আই টি দিল্লীতো এআই সম্পৰ্কীয় কিছু নতুন পদক্ষেপ আৰম্ভ কৰা হৈছে; ইয়াৰ বাবে আপোনালোক সকলোকে মোৰ শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিছো।

বন্ধুসকল,

আজি এই অনুষ্ঠানত আপোনালোক সকলো ছাত্ৰ-ছাত্ৰী উপস্থিত আছে, তথাপিও আপোনালোকৰ মনত হয়তো আন কিবা এটা কথাই ক্ৰিয়া কৰি আছে —মই হয়তো বাবা বাগেশ্বৰ নহওঁ, কিন্তু তথাপি কওঁ নিশ্চয় আপোনালোকৰ চিন্তাত কিবা এটা চলি আছে। প্ৰতিগৰাকী ছাত্ৰ-ছাত্ৰীৰ ভৱিষ্যতৰ প্ৰতি নিজৰ নিজৰ দৃষ্টিভংগী থাকে বুলিয়েই ক’ব পাৰি। বহু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে হয়তো প্ৰথম দৰমহাৰ বাবে অপেক্ষা কৰি আছে। কোনোবাই হয়তো নতুন চহৰ এখনত নতুনকৈ কাম আৰম্ভ কৰাৰ বাবে প্ৰস্তুতি চলাইছে। বহু বন্ধুৱে হয়তো প্ৰথম ষ্টাৰ্টআপৰ সপোন দেখিছে। কোনোবাই হয়তো আগন্তুক প্ৰতিযোগিতামূলক পৰীক্ষাৰ ওপৰত নিজৰ দৃষ্টি নিবদ্ধ ৰাখিছে। সকলোৰে পথ বেলেগ বেলেগ আৰু সকলোৰে সপোন অনন্য; তথাপিও আপোনালোক সকলোৰে মাজত এটা বিশেষ অনুভৱ আছে। আই আই টি দিল্লীৰ প্ৰথম দিনটোৰ কথা মনত পেলাওক আৰু আজিৰ লগত সেয়া তুলনা কৰক। এনে লাগিব যেন কালিহে অৰিয়েণ্টেচন হৈছিল, আৰু এতিয়া সমাৱৰ্তনৰ সময় আহি পৰিছে; অৰিয়েণ্টেচনৰ পৰা সমাৱৰ্তনলৈকে এই যাত্ৰা সন্দৰ্ভত আপোনালোকে গভীৰ সন্তুষ্টি অনুভৱ কৰিব লাগিব। একে সময়তে জীৱনৰ নতুন অধ্যায় এটা আৰম্ভ কৰাৰ বাবে আপোনালোকৰ মন নিশ্চয় উত্তেজনাৰে ভৰি পৰিব। গতিকে, মই কেৱল ক’ম: এই মুহূৰ্তটোক সম্পূৰ্ণৰূপে সজীৱ কৰি ৰাখক । ভৱিষ্যতে যেতিয়া আপোনালোকে ডাঙৰ ডাঙৰ দায়িত্ব কান্ধ পাতি ল'ব তেতিয়া এই ঠাইখনৰ স্মৃতিয়ে আপোনালোকক নিশ্চয় সেই পুৰণি দিনবোৰলৈ লৈ যাব আৰু আপোনালোকক শক্তিশালী কৰিব। যোৱাৰ আগতে সকলো কথা মনত পেলাবলৈ অলপ সময় উলিয়াওক— আপোনালোকৰ হোষ্টেলৰ লগত জড়িত স্মৃতিবোৰ কুমাওন, আৰাৱলী, কাৰাকোৰাম, বিন্ধ্যাচল, নীলগিৰি, কৈলাশ, হিমাদ্ৰী - আন্তঃহোষ্টেলৰ প্ৰতিযোগিতা, পুৰণি কাজিয়াবোৰ, ইমানবোৰ কথা যে যোৱাৰ আগতে আৰু এবাৰ নিশ্চয় মনত পেলাব পাৰি।

বন্ধুসকল,

কেৱল শৈক্ষিক দিশৰ কথাই নহয়; সম্ভৱ যে জিয়া চৰাইৰ পোহাই আপোনালোকৰ মাজৰে কিছুমানক এতিয়া ৰিঙিয়াই মাতিছে। সেই সময়খিনিৰ কথা যেতিয়া আপোনালোকে হয়তো সাতপুৰা মেছৰ পৰা অহা পৰঠাৰ বাবে হাহাকাৰ কৰিছিল। আপোনালোকৰ বহুতেই হয়তো ‘উইণ্ড টি’ত আৰু কেইটামান মুহূৰ্ত কটাব বিচাৰিব—আৰু যদি আপোনালোক তালৈ যায়, তেন্তে মোকো মনত পেলাব। কিছুমানে হয়তো শেষবাৰৰ বাবে নিজৰ বিভাগটোলৈ যাব বিচাৰিব। আন কিছুমানে হয়তো নিজৰ প্ৰিয় আড্ডাস্থলীত অলপ বেছি সময় বহিব বিচাৰিব।

বন্ধুসকল,

এই আবেগিক মুহূৰ্তবোৰত মই আপোনালোকৰ লগত এটা কথা ভাগ-বাটোৱাৰা কৰিব লাগিব: যেতিয়াই জীৱনে আপোনালোকক পিছলৈ ঘূৰি চোৱাৰ সুযোগ দিব, তেতিয়াই আপোনালোকে এই কেম্পাছৰ জীৱনটোলৈ এবাৰ মনত পেলাব— আপোনালোকৰ পৰিয়ালৰ দৰে হৈ পৰা আপোনালোকৰ বন্ধু, শিক্ষক, গুৰু আৰু সহায়ক কৰ্মচাৰী; আপোনালোকৰ দৰে প্ৰতিভাক গঢ় দিয়াৰ দায়িত্ব লোৱা আপোনালোকৰ অধ্যাপকসকল; আৰু আপোনালোকৰ এই 'প্ৰতিষ্ঠান', যি ক্ৰমান্বয়ে আপোনালোকৰ নিজৰ ঘৰলৈ পৰিণত হৈছিল। আপোনালোকে লাভ কৰা প্ৰতিটো সফলতাতে সহায় কৰা সকলোকে মনত ৰাখিব আৰু তেওঁলোকৰ প্ৰতি কৃতজ্ঞতা অনুভৱ কৰিব। গতিকে, যোৱাৰ সময়ত এই অমূল্য সম্পত্তিটো লগত লৈ যাবলৈ নাপাহৰিব; এৰি নাযাব— লগত লৈ যাব। মোৰ পৰামৰ্শ হ’ল যে আপোনালোকে যোৱাৰ আগতে ইয়াৰ প্ৰতিজন সদস্যক লগ পাব আৰু আপোনালোক য’তেই নাথাকক কিয়, এই বন্ধনক চিৰদিনৰ বাবে সতেজ তথা সজীৱ কৰি ৰাখিবলৈ চেষ্টা কৰিব ।

বন্ধুসকল,

যি সময়ত পৃথিৱীখন দ্ৰুতগতিত সলনি হৈছে, সেই সময়ত আপোনালোকে এই প্ৰতিষ্ঠান এৰিছে। বিশ্বজুৰি কৌশলগত সমীকৰণসমূহ দ্ৰুতগতিত সলনি হৈছে, আৰু বিশ্বজুৰি এই মুহূৰ্তত শক্তিৰ ভাৰসাম্যতাৰ বিকাশ ঘটিছে । ইয়াৰ চালিকা শক্তি হৈছে প্ৰযুক্তিৰ গতি। আজি কোনেও নিশ্চিতভাৱে ক’ব নোৱাৰে যে আগন্তুক ২০-৩০ বছৰত পৃথিৱীখন কেনে হ’ব।

বন্ধুসকল,

যেতিয়াই পৰিৱৰ্তনৰ যুগ আহি পৰে তেতিয়াই ই প্ৰত্যাহ্বান আৰু নতুন সুযোগ দুয়োটাকে কঢ়িয়াই আনে। পৃথিৱীখন সলনি হ’ব; প্ৰযুক্তি, উদ্যোগ আৰু বৃত্তি সকলোবোৰৰ বিকাশ হ’ব। তথাপিও এই সকলোবোৰৰ মাজত মোৰ এই কথা মনত ৰাখিব: যিসকলে শিকি থাকিব তেওঁলোকে জয়ী হ’ব। যিসকলৰ নতুন প্ৰত্যাহ্বানৰ নতুন সমাধান বিচাৰি উলিওৱাৰ সাহস আছে, তেওঁলোকৰ বাবে সেই প্ৰত্যাহ্বানসমূহেই সুযোগলৈ ৰূপান্তৰিত হ’ব। আৰু ঠিক সেইটোৱেই আপোনালোকে ইয়াত, আই আই টি দিল্লীত শিকিছে। আপোনালোকৰ ডিগ্ৰীয়ে আচলতে কি বুজায়? আপোনালোক পৰীক্ষাত উত্তীৰ্ণ হোৱাৰ, উচ্চ চিজিপিএ লাভ কৰা, বা ভাল প্লেচমেণ্ট লাভ কৰাৰ এয়া প্ৰমাণ নেকি? এইবোৰে নিশ্চিতভাৱে নিজৰ নিজৰ গুৰুত্ব বহন কৰিলেও মোৰ বিশ্বাস আপোনালোকৰ ডিগ্ৰীয়ে বিশ্বক কৈছে যে জটিল সমস্যা সমাধানৰ ক্ষমতা আপোনালোকৰ হাতত আছে। আই আই টি দিল্লীত আপোনালোকৰ যাত্ৰাৰ কথা চিন্তা কৰক; এই পৰ্যায়ত উপনীত হোৱাটো বা ইয়াৰ শৈক্ষিক কঠোৰতাৰ সৈতে মিলি যোৱাটো সহজ নাছিল। তথাপিও আপোনালোকে হাৰ নামানিলে। এই ডিগ্ৰীটো এদিনতে লাভ কৰা নাই ; সৰু সৰু, বৃদ্ধি পোৱা পদক্ষেপৰ শিখৰত উপনীত হোৱাটোৱেই হৈছে ইয়াৰ ফল—ব্যক্তিগত বিষয়, প্ৰকল্প, মাজভাগৰ ছেমিষ্টাৰ আৰু শেষৰ ছেমিষ্টাৰৰ পৰীক্ষা—যিবোৰে আপোনালোকক ইয়ালৈ এই প্ৰাপ্তি দিছে। জীৱনটো একোটা নীতিৰে চলি থাকে। যেতিয়াই কোনো প্ৰত্যাহ্বানে আৱৰি ধৰা যেন লাগে, তেতিয়াই ভয় খাব নালাগে; ইয়াৰ পৰিৱৰ্তে ইয়াক সৰু সৰু, পৰিচালনাযোগ্য অংশত ভাঙি লওক। আপোনালোকে এইটো লেবত প্ৰত্যক্ষভাৱে প্ৰত্যক্ষ কৰিছে, য'ত এটা সমস্যাই শেষ মুহূৰ্তত খুন্দা মৰা যেন লাগিব পাৰে, বা য'ত চিমুলেচনৰ জৰিয়তে সমাধান বিচাৰি উলিওৱাৰ বাবে ঘণ্টা বা আনকি দিনটোও খৰচ কৰিবলগীয়া হৈছিল। তথাপিও আপোনালোকৰ অধ্যৱসায়ে সমস্যাটো সমাধান কৰাত সহায় কৰিলে আৰু নতুন উদ্ভাৱন কৰিলে। সেইদৰে জীৱনতো অসুবিধাৰ সন্মুখীন হ’ব পাৰে; কিন্তু প্ৰতিকূলতাৰ প্ৰকৃতি এনেকুৱা যে ই বিচ্ছিন্নভাৱে খুব কমেইহে উপস্থিত হয়—প্ৰত্যাহ্বানবোৰেও প্ৰায়ে নিজৰ লগতে সুযোগো কঢ়িয়াই আনে। আপোনালোক কেৱল সতৰ্ক আৰু সজাগ হৈ থাকিব লাগিব আৰু এই প্ৰতিষ্ঠানটোৱে আপোনালোকক শিকোৱা পাঠবোৰ অহৰহ মনত ৰাখিব লাগিব।

বন্ধুসকল,

জীৱনৰ বিষয়ে কিছু ব্যৱহাৰিক অন্তৰ্দৃষ্টিও আপোনালোকৰ লগত ভাগ-বাটোৱাৰা কৰিব বিচাৰিছো। কেম্পাছৰ জীৱন আৰু কেম্পাছৰ বাহিৰৰ জীৱনৰ মাজত বৃহৎ পাৰ্থক্য আছে। আই আই টি পৰীক্ষাৰ এটা নিৰ্দিষ্ট পাঠ্যক্ৰম থাকে, আনহাতে জীৱনৰ পৰীক্ষাত প্ৰায়ে এনে প্ৰশ্ন উত্থাপন হয় যিবোৰ সম্পূৰ্ণৰূপে "পাঠ্যক্ৰমৰ বাহিৰত"। মনত পেলাওক, কেম্পাছৰ জীৱনত কেনেকৈ সকলোবোৰ স্পষ্টভাৱে লোৱা হৈছিল— কি পঢ়িব লাগে, কোনবোৰ এচাইনমেণ্ট সম্পূৰ্ণ কৰিব লাগে আৰু কোনবোৰ পৰীক্ষা দিব লাগে; ইয়াৰ সকলোবোৰ পূৰ্বনিৰ্ধাৰিত আছিল। কিন্তু জীৱনটো বেলেগ ধৰণেৰে চলি থাকে; কোনো নিৰ্দিষ্ট পাঠ্যক্ৰম নাই, কোনো মানক প্ৰশ্নকাকতো নাই। প্ৰায়ে, আচল প্ৰশ্নটো কি সেই কথাও কোনেও নাজানে; প্ৰশ্নটো নিজেই চিনাক্ত কৰিব লাগিব। আই আই টিৰ বহু প্ৰাক্তন ছাত্ৰ-ছাত্ৰীৰ যাত্ৰা পৰ্যবেক্ষণ কৰিছো। তেওঁলোকৰ সফলতা কেৱল শুদ্ধ উত্তৰ দিয়াৰ পৰাই নহয়, পৃথিৱীয়ে প্ৰশ্ন হিচাপে চোৱা বন্ধ কৰি দিয়া প্ৰশ্নবোৰ চিনাক্ত কৰাৰ পৰাই উদ্ভৱ হৈছিল। আনে ফঁহিয়াই নোচোৱা সমস্যাবোৰৰ সমাধান বিচাৰি পাইছিল। সেয়েহে জীৱনত নিজৰ কৌতুহল বজাই ৰাখক; শিক্ষণৰ প্ৰবৃত্তিক জীয়াই ৰাখক আৰু বৌদ্ধিকভাৱে সজাগ হৈ থাকক। প্ৰায়ে চিন্তা নকৰাকৈয়ে গ্ৰহণ কৰা কথাবোৰ ভালদৰে পৰীক্ষা কৰি প্ৰশ্ন কৰক। তথাপিও কেৱল প্ৰশ্ন কৰাতে ৰৈ নাথাকিব—সমাধানো বিচাৰিবলৈ সাহস ৰাখক। এই মানসিকতাই আপোনালোকৰ এক অনন্য পৰিচয় খোদিত কৰিব।

বন্ধুসকল,

আপোনালোকে জানে যে প্ৰতিটো প্ৰজন্মই নিজৰ সময়ৰ নিৰ্দিষ্ট প্ৰত্যাহ্বানৰ সন্মুখীন হয় আৰু নিজস্ব জাতীয় দায়িত্ব বহন কৰে। আমাৰ দেশখনে যেতিয়া বশ্যতাৰ যুগৰ সাক্ষী হৈছিল, তেতিয়া সেই সময়ৰ প্ৰজন্মৰ এটাই লক্ষ্য আছিল: ভাৰতৰ স্বাধীনতা। তেওঁলোকে ত্যাগ স্বীকাৰ কৰি তাৰ বাবে দীৰ্ঘদিনীয়া সংগ্ৰাম চলাইছিল। আজি স্বাধীন ভাৰতত আমি মুক্তভাৱে উশাহ লোৱাৰ সুবিধা পাইছো সেই প্ৰজন্মৰ তপস্যা আৰু ত্যাগৰ বাবে।

বন্ধুসকল,

আজিৰ যুগত আমাৰ সন্মুখত থকা প্ৰত্যাহ্বানবোৰ বেলেগ, ফলস্বৰূপে আমাৰ দায়িত্বও বেলেগ বেলেগ। আপোনালোকে আপোনালোকৰ জীৱনৰ আগন্তুক ৩০ৰ পৰা ৩৫ বছৰত যিয়েই নকৰক কিয়, সেই কামে উন্নত ভাৰতৰ দিশত আমাৰ যাত্ৰাক প্ৰভাৱান্বিত কৰিব। গতিকে আপোনালোকে লোৱা প্ৰতিটো সিদ্ধান্তত ইয়াৰ দ্বাৰা দেশৰ লাভ কেনেকৈ হয় আৰু ই কোনটো জাতীয় প্ৰয়োজন পূৰণ কৰে সেই বিষয়ে বিবেচনা কৰাটো অন্তৰ্ভুক্ত হ’ব লাগে। আজি ভাৰতে অৰ্থনীতি, প্ৰযুক্তি, উদ্যোগ আদি বিভিন্ন খণ্ডত আত্মনিৰ্ভৰশীলতা লাভৰ দিশত কাম কৰি আছে। ই এক উন্নত ভাৰতৰ ভেটি হিচাপে কাম কৰিছে। এই শক্তিশালী ভেটিৰ ওপৰত আপোনালোকে গঢ়ি তুলিব লাগিব এখন অনন্য আৰু সুন্দৰ উন্নত ভাৰত।

বন্ধুসকল,

উন্নত ভাৰতৰ এই যাত্ৰাত আপোনালোকে গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰিছে। দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকল যিমানেই শক্তিশালী হৈ উঠে সিমানেই দেশখন নিজেই শক্তিশালী হৈ উঠে। এই দৃষ্টিভংগীৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি আমি এনে খণ্ড মুকলি কৰিছো য’ত পূৰ্বতে যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে প্ৰৱেশ কাৰ্যতঃ বন্ধ আছিল। চৰকাৰৰ আধুনিক নীতিৰ ফলত সমগ্ৰ দেশতে যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে নতুন নতুন খণ্ডৰ উন্মেষ ঘটিছে।

বন্ধুসকল,

শেষবাৰৰ বাবে আপোনালোকৰ জ্যেষ্ঠসকলৰ সমাৱৰ্তন অনুষ্ঠানত ভাৰ্চুৱেলভাবে যোগদান কৰাৰ সুযোগ পোৱাৰ সময়ত মই যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে মহাকাশ খণ্ডত চলি থকা সংস্কাৰৰ কথা কৈছিলো। তেতিয়ালৈকে এই খণ্ডৰ প্ৰায় সকলো কাম-কাজ চৰকাৰে চম্ভালিছিল। কিন্তু আজি সেই মহাকাশ খণ্ডটোৱেই হৈছে হাজাৰ হাজাৰ যুৱক-যুৱতীৰ বাবে নতুন সুযোগৰ এক বিশাল দিগন্ত। আজি আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলে নিজাকৈ উৎক্ষেপণ বাহন নিৰ্মাণ কৰি, ৰকেট নিক্ষেপ কৰি এনে মাইলৰ খুঁটিত উপনীত হৈছে ,যিবোৰ কৃতিত্ব বিশ্বৰ মুষ্টিমেয় দেশেহে লাভ কৰিবলৈ সক্ষম হৈছে। মোৰ বিশ্বাস যে আজি ক'ৰবাত দেশৰ এজন যুৱ অভিযন্তাই গৌৰৱেৰে কৈছে, "প্ৰথম মোৰ তেজত ৰকেট নিৰ্মাণ কৰাৰ প্ৰৱণতা আছে।" আমাৰ সন্মুখত অৰ্ধপৰিবাহী খণ্ডৰ উদাহৰণো আছে। আমি যেতিয়া এই দিশত পদক্ষেপ লৈছিলো, তেতিয়া কিছুমানে প্ৰশ্ন উত্থাপন কৰিছিল; কোৱা হৈছিল যে ভাৰতে এয়া কৰিব নোৱাৰিব। তথাপিও আজি ইতিমধ্যে প্ৰথম অৰ্ধপৰিবাহী ইউনিটত উৎপাদন আৰম্ভ হৈছে। মোৰ দৃঢ় বিশ্বাস যে সকলো—চিপৰ পৰা আৰম্ভ কৰি জাহাজলৈকে—ঠিক ইয়াতেই, আপোনাৰ হাতেৰে নিৰ্মাণ কৰা হ’ব। আৰু ক'ৰবাত এজন যুৱকে সম্পূৰ্ণ আত্মবিশ্বাসেৰে কৈছে, "প্ৰথমবাৰৰ বাবে মোৰ তেজত ভাৰতত চিপ প্ৰস্তুতৰ প্ৰৱণতা জাগিছে।"

বন্ধুসকল,

আজি আমাৰ ড্ৰ’ন খণ্ডলৈ চাওক; যুৱক-যুৱতীসকলে ইয়াৰ ভিতৰত নতুন সম্ভাৱনাৰ সৃষ্টি কৰিছে। কৃষিকাৰ্য , ঔষধ ডেলিভাৰী, ৰাষ্ট্ৰীয় প্ৰতিৰক্ষা আৰু নিৰাপত্তাত সহায়ৰ বাবে ড্ৰ’ন ব্যৱহাৰ কৰা হৈছে। আৰু আজি ক'ৰবাত এজন যুৱকে কৈছে, "মোৰ তেজত প্ৰথমে ড্ৰ'ন প্ৰস্তুতৰ প্ৰৱণতা জাগিছে।"

বন্ধুসকল,

এই প্ৰজন্মই—আপোনালোকৰ দৰে যুৱক-যুৱতীসকলেই ভাৰতৰ ষ্টাৰ্টআপ বিপ্লৱক গঢ় দিছে আৰু শক্তিশালী কৰিছে। ষ্টাৰ্টআপ বহু প্ৰতিষ্ঠাপক এই প্ৰতিষ্ঠানটোৰ পৰাই ওলাই আহিছে। যদি কোনো এটা প্ৰতিষ্ঠানে ইমানখিনি সাধন কৰিব পাৰে, তেন্তে সমগ্ৰ দেশতে কিমান অপৰিসীম শক্তি প্ৰবাহিত হৈছে সেয়া কল্পনা কৰক। ইউনিকৰ্ণ, ডিজিটেল পেমেণ্ট আৰু ফিনটেক বিপ্লৱে লাখ লাখ ভাৰতীয় যুৱকক প্ৰথমবাৰৰ বাবে উদ্ভাৱন তথা নতুন কিবা এটা কৰাৰ সুযোগ দিছে।

বন্ধুসকল,

এতিয়াও বহু খণ্ডত ভাৰতে নতুন যাত্ৰাত নামিছে, আৰু দেশখনে আপোনালোকৰ দৰে যুৱক-যুৱতীসকলৰ প্ৰতি অতি আশাৰে বাট চাইছে। আপোনালোকে উল্লেখযোগ্য দায়িত্ব কান্ধত বহন কৰিব বুলি সকলোৱে আশাৰে চাই আছে। কৃত্ৰিম বুদ্ধিমত্তা, ডাটা চেণ্টাৰ, গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ পদাৰ্থ, গভীৰ সাগৰৰ অন্বেষণ, বেটাৰী, শক্তি সংৰক্ষণ, শক্তি সুৰক্ষা, বৈদ্যুতিক গতিশীলতা আৰু কোৱাণ্টাম কম্পিউটিং—এনে বহু খণ্ডই আপোনালোকৰ প্ৰতিভা, উদ্ভাৱন আৰু নেতৃত্বৰ বাবে অপেক্ষা কৰি আছে; আৰু ময়ো একে আশাৰেই ৰৈ আছো।

বন্ধুসকল,

আন এটা ডাঙৰ সম্ভাৱনা আপোনালোকৰ সন্মুখত আছে, আৰু সেই নতুন সুযোগটো হ’ল—গৱেষণা। আজি দেশত সজীৱ গৱেষণাৰ অতি প্ৰয়োজন আৰু আমি এই বিষয়ত যথেষ্ট গুৰুত্ব দিছো। প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ গৱেষণা ফেল’শ্বিপে আমাৰ প্ৰতিভাৱান যুৱক-যুৱতীসকলক গৱেষণা কৰাৰ সুযোগ প্ৰদান কৰিছে। ধাৰণাসমূহে যাতে প্ৰাণ পাই উঠাৰ সুযোগ লাভ কৰে তাৰ বাবে ‘গৱেষণা, উন্নয়ন, আৰু উদ্ভাৱন আঁচনি’ আৰম্ভ কৰা হৈছে। দেশৰ বিজ্ঞান আৰু গৱেষণাক নতুন গতি প্ৰদানৰ বাবে ৰাষ্ট্ৰীয় গৱেষণা ন্যাসো স্থাপন কৰা হৈছে। গৱেষণা খণ্ডৰ বাবে এক লাখ কোটি টকা পৰ্যন্ত পুঁজিৰ ব্যৱস্থা কৰা হৈছে— এক লাখ কোটি টকা। এই সংখ্যাটো মই বিশেষভাৱে আপোনালোকৰ বাবে উল্লেখ কৰিছো।

বন্ধুসকল

শৈক্ষিক সম্পদৰ সুবিধাও সহজ কৰি তোলা হৈছে। ‘ৱান নেচন ৱান চাবস্ক্ৰিপচন’ পদক্ষেপৰ জৰিয়তে এতিয়া দেশৰ সৰু সৰু চহৰবোৰতো বিশ্বৰ প্ৰতিষ্ঠিত গৱেষণা জাৰ্নাল সমূহ উপলব্ধ হৈছে।

বন্ধুসকল,

মই জ্ঞাত যে এই ক্ষেত্ৰত আমাৰ এতিয়াও যাবলগীয়া বহু দূৰ বাকী আছে আৰু সেয়া আপোনালোকৰ গৱেষণাৰ প্ৰতি থকা দায়বদ্ধতাৰ জৰিয়তেহে সম্ভৱ হ’ব। দেশে আপোনালোকৰ পৰা আশা কৰিছে আৰু তাতোকৈ ডাঙৰ কথাটো হ’ল দেশে আপোনালোকৰ ওপৰত আস্থা ৰাখিছে।

বন্ধুসকল,

এতিয়া, মই এটা সম্ভাৱ্য বিক্ষিপ্ততাৰ বিষয়ে চমুকৈ ক’ব বিচাৰিছো। যেতিয়া আমি ডাঙৰ লক্ষ্যত উপনীত হ’বলৈ ওলাইছো, তেতিয়া আমি প্ৰায়ে এটা উল্লেখযোগ্য বিক্ষিপ্ততাৰ সন্মুখীন হওঁ: নিজকে আনৰ সৈতে তুলনা কৰাৰ প্ৰৱণতা—কোনে কি দৰমহাৰ পেকেজ পাইছে, কোন কোম্পানীত কোনে যোগদান কৰিছে, কোনে চহৰ বা কোন দেশলৈ গৈছে, বা কোনে নতুন উদ্যোগ আৰম্ভ কৰিছে আদি। ছ’চিয়েল মিডিয়াৰ এই যুগত এনে তুলনা কেতিয়াও শেষ হোৱা বিষয় নহয়। কিন্তু মনত ৰাখিব জীৱনটো কোনো লিডাৰবৰ্ড নহয়; আপোনালোকৰ প্ৰতিযোগিতা আনৰ সৈতে নহয়, নিজৰ সৈতেহে। কালিৰ তুলনাত ভাল হ’বলৈ চেষ্টা কৰক। একে সময়তে নিজৰ শাৰীৰিক আৰু মানসিক স্বাস্থ্যৰো যত্ন লওক।

বন্ধুসকল,

সকলো ছাত্ৰ-ছাত্ৰীলৈ পুনৰ এবাৰ আন্তৰিক অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিলোঁ। আপোনালোকৰ পিতৃ-মাতৃ আৰু পৰিয়ালৰ সদস্যলৈ বিশেষ অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিছো, লগতে আপোনালোকৰ শিক্ষক তথা এই যাত্ৰাৰ প্ৰতিটো খোজতে আপোনালোকৰ কাষত থিয় দিয়া সকলোকে মোৰ শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিছো। আপোনালোক সকলোৰে ভৱিষ্যত উজ্জ্বল হওক আৰু নতুন উচ্চতাৰ দিশে আগুৱাই যাওক; এই শুভকামনাৰে আপোনালোক সকলোকে ধন্যবাদ জনাইছো।

নমস্কাৰ!