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भाईयों और बहनों,

आप सबका स्‍वागत है। दो दिन बड़ी विस्‍तार से चर्चा होने वाली है। इस मंथन में से कई महत्‍वपूर्ण बाते उभरकर के आएगी जो आगे चलकर के नीति या नियम का रूप ले सकती है और इसलिए हम जितना ज्‍यादा एक लम्‍बे विजन के साथ इन चर्चाओं में अपना योगदान देंगे तो यह दो दिवसीय सम्‍मेलन अधिक सार्थक होगा। इस विषय में कुछ बातें बताने का आज मन करता है मेरा। Climate के संबंध में या Environment के संबंध में प्रारंभ से कुछ हमारी गलत अभिव्‍यक्ति रही है और हम ऐसे जैसे अपनी बात को दुनिया के आगे प्रस्‍तुत किया कि ऐसा लगने लगा कि जैसे हमें न Climate की परवाह है न Environment की परवाह है। और सारी दुनिया हमारी इस अभिव्‍यक्ति की गलती के कारण यह मानकार के बैठी कि विश्‍व तो Environment conscious हो रहा है। विश्‍व climate की चिंता कर रहा है कि यह देश है जो कोई अडंगे डाल रहा है और इसका मूल कारण यह नहीं है कि हमने environment को बिगाड़ने में कोई अहम भूमिका निभाई है। climate को बर्बाद करने में हमारी या हमारे पूर्वजों की कोई भूमिका रही है। हकीकत तो उल्‍टी है। हम उस परंपरा में पले है, उन नीति, नियम और बंधनों में पले-बढ़े लोग हैं, जहां प्रकृति को परमेश्‍वर के रूप माना गया है, जहां पर प्रकृति की पूजा को सार्थक माना गया है और जहां पर प्रकृति की रक्षा को मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ा गया है। लेकिन हम अपनी बात किसी न किसी कारण से, एक तो हम कई वर्षों से गुलाम रहे, सदियों से गुलाम रहने के कारण एक हमारी मानसिकता भी बनी हुई है कि अपनी बात दुनिया के सामने रखते हुए हम बहुत संकोच करते हैं। ऐसा लगता है कि यार कहीं यह आगे बढ़ा हुआ विश्‍व हम Third country के लोग। हमारी बात मजाक तो नहीं बन जाएगी। जब तक हमारे भीतर एक confidence नहीं आता है, शायद इस विषय पर हम ठीक से deal नहीं कर पाएंगे।

और मैं आज इस सभागृह में उपस्थित सभी महानुभावों से आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं हम जितने प्रकृति के विषय में संवेदनशील है। दुनिया हमारे लिए सवालिया निशान खड़ा नहीं कर सकती है। आज भी प्रति व्‍यक्ति अगर carbon emission में contribution किसी का होगा तो कम से कम contribution वालों में हम है। लेकिन उसके बाद भी आवश्‍यकता यह थी कि विश्‍व में जब climate विषय में एक चिंता शुरू हुई, भारत ने सबसे पहले इसका नेतृत्‍व करना चाहिए था। क्‍योंकि दुनिया में अधिकतम वर्ग यह है कि जो climate की चिंता औरों पर restriction की दिशा में करता रहता है, जबकि हम लोग सदियों से प्रकृति की रक्षा करते-करते जीवन विकास की यात्रा में आगे बढ़ने के पक्षकार रहे हैं। दुनिया जो आज climate के संकट से गुजर रही है, Global Warming के संकट से गुजर रही है, उसको अभी भी रास्‍ता नहीं मिल रहा है कि कैसे बचा जाए, क्‍योंकि वो बाहरी प्रयास कर रहे हैं। और मैंने कई बार कहा कि इन समस्‍या की जड़ में हम carbon emission को रोकने के लिए जो सारे नीति-नियम बना रहे हैं, विश्‍व के अंदर एक बंधनों की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हम कोई अपनी Life Style बदलने के लिए तैयार नहीं है। समस्‍या की जड़ में मानवजात जो कि उपभोग की तरफ आगे बढ़ती चली गई है और जहां ज्‍यादा उपभोग की परंपरा है, वहां सबसे ज्‍यादा प्रकृति का नुकसान होता है, जहां पर उपभोग की प्रवृति कम है, वहां प्रकृति का शोषण भी कम होता है और इसलिए हम जब तक अपने life style के संबंध में focus नहीं करेंगे और दुनिया में इस एक बात को केंद्र बिंदु में नहीं लाएंगे हम शायद बाकी सारे प्रयासों के बावजूद भी, लेकिन यह जो बहुत आगे बढ़ चुके देश है, उनके गले उतारना जरा कठिन है। वो माने न माने हम तो इन्‍हीं बातों में पले-बढ़े लोग हैं। हमें फिर से अगर वो चीजें भूला दी गई है, तो हमें उस पर सोचना चाहिए। मैं उदाहरण के तौर पर कहता हूं आजकल दुनिया में Recycle की बडी चर्चा है और माना जाता है कि यह दुनिया में कोई नया विज्ञान आया है, नई व्‍यवस्‍था आई है। जरा हमारे यहां देखों Recycle, reuse और कम से कम उपयोग करने की हमारी प्रकृति कैसी रही है। पुराना जमाना की जरा अपने घर में दादी मां उनके जीवन को देखिए। घर में कपड़े अगर पुराने हो गए होंगे, तो उसमें से रात को बिछाने के लिए गद्दी बना देंगे। वो अब उपयोगी नहीं रही तो उसमें से भी झाडू-पौचे के लिए उस जगह का उपयोग करेंगे। यानी एक चीज को recycle कैसे करना घर में हर चीज का वो हमारे यहां सहज परंपरा थी। सहज प्रकृति थी।

मैंने देखा है गुजरात के लोग आम खाते हैं, लेकिन आम को भी इतना Recycle करते हैं, Reuse करते हैं शायद कोई बाहर सोच नहीं सकता है। कहने का तात्‍पर्य है कि कोई बाहर से borrow की हुई चीज नहीं है। लेकिन हमने दुनिया समझे उस terminology में उन चीजों को आग्रहपूर्वक रखा नहीं। विश्‍व के सामने हम अपनी बातों को ढंग से रख नहीं पाए। हमारे यहां पौधे में परमात्‍मा है। जगदीश चंद्र बोस ने विज्ञान के माध्‍यम से जब Laboratory में जब सिद्ध किया कि पौधे में जीव होता है, उसके बाद ही हमने जीव है ऐसा मानना तय किया, ऐसा नहीं है। हम सहस्‍त्रों वर्ष से गीता का उल्‍लेख करे, महाभारत का उल्‍लेख करे हमें तभी से मानते हुए आए हैं कि पौधे में परमात्‍मा होता है। और इसलिए पौधे की पूजा, पौधे की रक्षा यह सारी चीजें हमें परंपराओं से सिखाई गई थी। लेकिन काल क्रम में हमने ही अपने आप को कुछ और तरीके से रास्‍ते खोजने के प्रयास किए। कभी-कभी मुझे लगता है.. यहां urban secretaries बहुत बड़ी संख्‍या में है हम परंपरागत रूप से चीजों को कैसे कर सकते हैं। मैं जानता हूं मैं जो बातें बताऊंगा, ये जो so called अंग्रेजीयत वाले लोग हैं, वो उसका मजाक उड़ाएंगे 48 घंटे तक। बड़ा मजाक उड़ाएंगे, आपको भी बड़ा मनोरंजन मिलेगा टीवी पर, क्‍योंकि एक अलग सोच के लोग हैं। जैसे मैं आपको एक बात बताऊं। आपको मालूम होगा यहां से जिनका गांव के साथ जीवन रहा होगा। गांव में एक परंपरा हुआ करती थी कि जब full moon होता था, तो दादी मां बच्‍चों को चांदनी की रोशनी में सुई के अंदर धागा पिरोने के लिए प्रयास करते थे, क्‍यों eye sight तो थी, लेकिन उस चांदनी की रोशनी की अनुभूति कराते थे।

आज शायद नई पीढ़ी को पूछा जाए कि आपने चांदनी की रोशनी देखी है क्‍या? क्‍या पूर्णिमा की रात को बाहर निकले हो क्‍या? अब हम प्रकृति से इतने कट गए हैं।

अगर हमारी urban body यह तय करे, लोगों को विश्‍वास में लेकर के करें कि भई हम पूर्णिमा की रात को street light नहीं जलाएंगे। इतना ही नहीं उस दिन festival मनाएंगे पूरे शहर में, सब मोहल्‍ले में लोग स्‍पर्धा करेंगे, सुई में धागा डालने की। एक community event हो जाएगा, एक आनंद उत्‍सव हो जाएगा और पर्यावरण की रक्षा भी होगी। चीज छोटी होती है। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि सभी Urban Body में महीने में एक बार इस चांदनी रात का उपयोग करते हुए अगर street light बंद की जाए तो कितनी ऊर्जा बचेगी? कितनी ऊर्जा बचेगी तो कितना emission हम कम करेंगे? लेकिन यही चीज इस carbon emission के हिसाब से रखोगे, तो यह जो so called अपने आप को पढ़ा-लिखा मानता हैं, वो कहे वाह नया idea है, लेकिन वही चींज हमारी गांव की दादी मां कहती वो सुई और धागे की कथा कहकर के कहेंगे, अरे क्‍या यह पुराने लोग हैं इनको कोई समझ नहीं है, देश बदल चुका है। क्‍या यह हम हमारे युवा को प्रेरित कर सकते हैं कि भई Sunday हो, Sunday on cycle मान लीजिए, हो सकता है कोई यह भी कह दें कि मोदी अब cycle कपंनियों के agent बन गया हैं। यह बड़ा दुर्भाग्‍य है देश का। पता नहीं कौन क्‍या हर चीज का अर्थ निकालता है। जरूरी नहीं कि हर कोई लोग cycle खरीदने जाए, तय करे कि भई मैं सप्‍ताह में एक दिन ऊर्जा से उपयोग में आने वाले साधनों का उपयोग में नहीं करूंगा। अपनी अनुकूलता है।

समाज मैं जो life style की बात करता हूं हम पर्यावरण की रक्षा में इतना बड़ा योगदान दें सकते हैं। सहज रूप से दे सकते हैं और थोड़ा सा प्रयास करना पड़ता है। एक शिक्षक के जीवन को मैं बराबर जानता हूं। मैं जब गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो उन पिछड़े इलाकों में चला जाता था, जून महीने में कि जहां पर girl child education बहुत कम हो। 40-44 डिग्री Temperature रहा करता था जून महीने में और मैं ऐसे गांव में जाकर तीन दिन रहता था। जब तक मैं मुख्‍यमंत्री रहा वो काम regularly करता था। एक बार मैं समुद्री तट के एक गांव में गया। एक भी पेड़ नहीं था, पूरे गावं में कहीं पर नहीं, लेकिन जो स्‍कूल था, वो घने जंगलों में जैसे कोई छोटी झोपड़ी वाली स्‍कूल हो, ऐसा माहौल था। तो मेरे लिए आश्‍चर्य था। मैंने कहा कि यार कहीं एक पेड़ नहीं दिखता, लेकिन स्‍कूल बड़ी green है, क्‍या कारण है। तो वहां एक teacher था, उस teacher का initiative इतना unique initiative था, उसने क्‍या किया – कहीं से भी bisleri की बोतल मिलती थी खाली, उठाकर ले आता था, पेट्रोल पम्‍प पर oil के जो टीन खाली होते थे वो उठाकर ले आता था और लाकर के students को एक-एक देता था, साफ करके खुद और उनको कहता था कि आपकी माताजी जो kitchen में बर्तन साफ करके kitchen का जो पानी होता है, वो पानी इस बोतल में भरकर के रोज जब स्‍कूल में आओगे तो साथ लेकर के आओ। और हमें भी हैरानी थी कि सारे बच्‍चे हाथ में यह गंदा दिखने वाला पानी भरकर के क्‍यों आते हैं। उसने हर बच्‍चे को पेड़ दे दिया था और कह दिया था कि इस बोतल से daily तुम्‍हें पानी डालना है। Fertilizer भी मिल जाता था। एक व्‍यक्ति के अभिरत प्रयास का परिणाम था कि वो पूरा स्‍कूल का campus एकदम से हरा-भरा था। कहना का तात्‍पर्य है कि इन चीजों के लिए समाज का जो सहज स्‍वभाव है, उन सहज स्‍वभाव को हम कितना ज्‍यादा प्रेरित कर सकते हैं, करना चाहिए।

मैं एक बार इस्राइल गया था, इस्राइल में रेगिस्‍तान में कम से कम बारिश, एक-एक बूंद पानी का कैसे उपयोग हो, पानी का recycle कैसे हो, समुद्री की पानी से कैसे sweet water बनाया जाए, इन सारे विषयों में काफी उन्‍होंने काम किया है। काफी प्रगति की है। इस्राइल तो इस समय एक अभी भी रेगिस्‍तान है जहां हरा-भरा होना बाकी है और एक है पूर्णतय: उन्‍होंने रेगिस्‍तान को हरा-भरा बना दिया है।

बेन गुरियन जो इस्राइल के राष्‍ट्रपिता के रूप में माने जाते हैं, तो मैं जब इस्राइल गया था तो मेरा मन कर गया कि उनका जो निवासा स्‍थान है वो मुझे देखना है, उनकी समाधि पर जाना है। तो मैंने वहां की सरकार को request की थी बहुत साल पहले की बात है। तो मैं गया, उनका घर उस रेगिस्‍तान वाले इलाके में ही था, वहीं रहते थे वो। और दो चीजें मेरे मन को छू गई – एक उनके bedroom में महात्‍मा गांधी की तस्‍वीर थी। वे सुबह उठते ही पहले उनको प्रणाम करते थे और दूसरी विशेषता यह थी कि उनकी जो समाधि थी, उन समाधि के पास एक टोकरी में पत्‍थर रखे हुए थे। सामान्‍य रूप से इतने बड़े महापुरूष के वहां जाएंगे तो मन करता है कि फूल रखें वहां, नमन करे। लेकिन चूंकि उनको green protection करना है, greenery की रक्षा करनी है। फूल-फल इसको नष्‍ट नहीं करना, यह संस्‍कार बढ़ाने के लिए बेन बुरियन की समाधि पर अगर आपको आदर करना है तो क्‍या करना होता था उस टोकरी में से एक पत्‍थर उठाना और पत्‍थर रखना और शाम को वो क्‍या करते थे सारे पत्‍थर इकट्ठे करके के फिर टोकरी में रख देते थे। अब देखिए environment की protection के लिए किस प्रकार की व्‍यवस्‍थाओं को लोग विकसित करते हैं। हम अपने आपसे बाकी सारी बातों के साथ-साथ हम अपने जीवन में इन चीजों को कैसे लाए उसके आधार पर हम इसको बढ़ावा दे सकते हैं। हमारे स्‍कूलों में, इन सब में किस प्रकार से एक माहौल बनाया जाए प्रकृति रक्षा, प्रकृति पूजा, प्रकृति संरक्षण यह सहज मानव प्रकृति का हिस्‍सा कैसे बने, उस दिशा में हमको जाना होगा। और हम वो लोग है जिनका व्‍येन तक्‍तेन मुंजिता। यही जिनके जीवन का आदर्श रहा है। जहां व्‍येन तक्‍तेन मुंजिता का आदर्श रहा हो, वहां पर हमें प्रकृति का शोषण करने का अधिकार नहीं है। हमें प्रकृति का दोहन करने से अधिक प्रकृति को उपयोग, दुरूपयोग करने का हक नहीं मिलता है। दुनिया में प्रकृत‍ि का शोषण ही प्रवृति है, भारत में प्रकृति को दोहन एक संस्‍कार है। शोषण ही हमारी प्रवृति नहीं है और इसलिए विश्‍व इस संकट से जो गुजर रहा है, मैं अभी भी मानता हूं कि दुनिया को इस क्षेत्र में बचाने के लिए नेतृत्‍व भारत ने करना चाहिए। और उस दिमाग से भारत ने अपनी योजनाएं बनानी चाहिए। दुनिया climate change के लिए हमें guide करे और हम दुनिया को follow करें। दुनिया parameter तय करे और हम दुनिया को follow करे, ऐसा नहीं है। सचमुच में इस विषय में हमारी हजारों साल से वो विरासत है, हम विश्‍व का नेतृत्‍व कर सकते हैं, हम विश्‍व का मार्गदर्शन कर सकते हैं और विश्‍व को इस संकट से बचाने के लिए भारत रास्‍ता प्रशस्‍त कर सकता है। इस विश्‍वास के साथ इस conference से हम निकल सकते हैं। हम दुनिया की बहुत बड़ी सेवा करेंगे। उस विजन के साथ हम अपनी व्‍यवस्‍थाओं के प्रति जो भी समयानुकूल हम बदलाव लाना है, हम बदलाव लाए। जैसे अभी अब यह तो हम नहीं कहेंगे..

अच्‍छा, कुछ लोगों ने मान लिया कि पर्यावरण की रक्षा और विकास दोनों कोई आमने-सामने है। यह सोच मूलभूत गलत है। दोनों को साथ-साथ चलाया जा सकता है। दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। कुछ do’s and don’ts होते हैं, इसका पालन होना चाहिए। अगर वो पालन होता है तो हम उसकी रखवाली भी करते हैं और उसके लिए कोई चीजें, जैसे अभी हमने कोयले की खदानें उसकी नीलामी की, लेकिन उसके साथ-साथ उनसे जो पहले राशि ली जाती थी environment protection के लिए वो चार गुना बढ़ा दी, क्‍योंकि वो एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। आवश्‍यक है तो वो भी बदलाव किया। हमारी यह कोशिश रहनी चाहिए कि हम इस प्रकार से बदलाव लाने की दिशा में कैसे प्रयास करे और अगर हम प्रयास करते तो परिणाम मिल सकता है। दूसरी बात है, ज्‍यादातर भ्रम हमारे यहां बहुत फैलाया जाता है। अभी Land Acquisition Bill की चर्चा हुई है। इस Land Acquisition Bill में कहीं पर भी एक भी शब्‍द वनवासियों की जमीन के संबंध में नहीं है, आदिवासियों की जमीन के संबंध में नहीं है, Forest Land के संबंध में नहीं है। वो जमीन, उसके मालिक, Land Acquisition bill के दायरे में आते ही नहीं है, लेकिन उसके बावजूद भी जिनको इन सारी चीजों की समझ नहीं है। वो चौबीसों घंटे चलाते रहते हैं। पता ही नहीं उनको कहीं उल्‍लेख तक नहीं है। उनको भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि समाज का गुमराह करने का इस प्रकार का प्रयास आपके लिए कोई छोटी बात होगी, आपके राजनीतिक उसूल होंगे लेकिन उसके कारण देश को कितना नुकसान होता है और कृपा करके ऐसे भ्रम फैलाना बंद होना चाहिए, सच्‍चाई की धरा पर पूरी debate होनी चाहिए। उसमें पक्ष विपक्ष हो सकता है, उसमें कुछ बुरा नहीं है, लोकतंत्र है। लेकिन आप जो सत्‍य कहना चाहते हो, उसमें दम नहीं है, इसलिए झूठ कहते रहो। इससे देश नहीं चलता है और इसलिए मैं विशेष रूप से वन विभाग से जुड़े हुए मंत्री और अधिकारी यहां उपस्थित हैं तो विशेष रूप से इस बात का उल्‍लेख करना चाहता हूं कि Land Acquisition Act के अंदर कहीं पर जंगल की जमीन, आदिवासियों की जमीन उसका कोई संबंध नहीं है। उस दायरे में वो आता नहीं है, हम सबको मालूम है कि उसका एक अलग कानून है, वो अलग कानूनों से protected है। इस कानून का उसके साथ कोई संबंध नहीं है, लेकिन झूठ फैलाया जा रहा है और इसलिए मैं चाहूंगा कि कम से कम और ऐसे मित्रों से प्रार्थना करूंगा कि देशहित में कम से कम ऐसे झूठ को बढ़ावा देने में आप शिकार न हो जाएं यह मेरा आग्रह रहेगा।

आज यह भी यहां बताया गया कि Tiger की संख्‍या बढ़ी है। करीब 40% वृद्धि हुई है। अच्‍छा लगता है सुनकर के वरना दुनिया में Tiger की संख्‍या कम होती जा रही है और दो-तिहाई संख्‍या हमारे पास ही है तो एक हमारा बहुत बड़ा गौरव है और यह गौरव मानवीय संस्‍कृति का भी द्योतक होता है। इन दोनों को जोड़कर हमें इस चीज का गौरव करना चाहिए। और विश्‍व को इस बात का परिचय होना चाहिए कि हम किस प्रकार की मानवीय संस्‍कृतियों को लेकर के जीते हैं कि जहां पर इतनी तेज गति से tiger की जनसंख्‍या का विकास हो रहा है। हमारे पूरब के इलाके में खासकर के हाथी को लेकर के रोज नई खबरें आती है। हा‍थी को लेकर के परेशानियां आती है। अभी मैं कोई एक science magazine पढ़ रहा था। बड़ी interesting चीज मैंने पहली बार पढ़ी, आप लोग तो शायद उसके जानकारी होगी। जब खेत में हाथियों का झुंड आ जाता है, तो बड़ी परेशानी रहती कैसे निकालना है, यह forest department के लोग भांति-भांति के सशत्र लेकर पहुंच जाते हैं और दो-दो दिन तक हो हल्‍ला हो जाता है। मैंने एक science magazine पढ़ा, कहीं पर लोगों ने प्रयोग किया है बड़ा ही Interesting प्रयोग लगा मुझे। वे अपने खेत के बाढ़ पर या पैड है उस पर Honey Bee को भी Developed करते हैं मधुमक्‍खी को रखते हैं और जब हाथी के झुंड आते हैं तो मधुमक्‍खी एक Special प्रकार की आवाज करती है और हाथी भाग जाता है। अब ये चीजे जो हैं कहीं न कहीं सफल हुई हैं आज भी शायद हमारे यहां हो सकता है कुछ इलाकों में करते भी होंगे। हमें इस प्रकार की व्‍यवस्‍थाओं को भी समझना होगा ताकि हमें हाथियों से संघर्ष करना पड़ सके। मानव और हाथी के बीच जो संघर्ष के जो समाचार आते हैं, उससे हम कैसे बचें। हम हाथी की भी देखभाल करें, अपने खेत की भी देखभाल कर सकें। अगर ऐसे सामान्‍य व्‍यवस्‍थाएं विकसित हो सकती है और अगर यह सत्‍य है तो मैंने कहीं पढ़ा था, लेकिन किसी प्रत्‍यक्ष मेरी किसान से बात हुई नहीं है लेकिन मैं कभी असम की तरफ जाऊंगा तो पूछूंगा सबसे बात करूंगा कि क्‍या है जानकारी लाने का प्रयास करूंगा मैं, लेकिन आपसे में उस दिशा में काम करने वाले जहां हाथी की जनसंख्‍या हैं और गांवों में कभी-कभी चली आती हैं तो उनके लिए शायद हो सकता है कि ये अगर इस प्रकार का प्रयोग हुआ हो तो यह काम आ सकता है। मेरा कहने का तात्‍पर्य यह है कि यह जगत सब समस्‍याओं से जुड़ा हुआ होगा हम ही पहली बार गुजर रहे हैं ऐसा थोड़ी है और हरेक ने अपने-अपने तरीके से उसके उपाय खोजे होंगे। उनको फिर से एक बार वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिक तराजू से देखा जाए कि हम इन चीजों को कैसे फिर से एक बार प्रयोग में ला सकते हैं। थोड़ा उसे Modify करके उसे प्रयोग में ला सकते हैं। इन दिनों जब पर्यावरण की रक्षा की बात आती है, तो ज्‍यादातर कारखानें और ऊर्जा उसके आस-पास चर्चा रहती है। भारत उस अर्थ में ईश्‍वर की कृपा वाला राष्‍ट्र रहा है कि जिसके पास Maximum solar Radiation वाली संभावना वाला देश है। इसका हमें Maximum उपयोग कैसे करना है और इसलिए सरकार ने Initiative लिया है कि हम Solar Energy हम Wind Energy Biomass Energy उस पर कितना ज्‍यादा बल दें ताकि हम जो विश्‍व की चिंता है उसमें हम मशरूफ हों। लेकिन मजा देखिए, जो दुनिया Climate के लिए Lead करती है, दुनिया को पाठ पढ़ाती है अगर हम उनको कहें कि हम Nuclear Energy में आगे जाना चाहते हैं कि Nuclear Energy Environment protection का एक अच्‍छा रास्‍ता है और हम उनको जब कहते हैं कि Nuclear Energy के लिए आवश्‍यक Fuel दो तो मना कर देते हैं यानी हम दुनिया की इतनी बड़ी सेवा करना चाहते हैं लेकिन आप सेवा करों यह नियम पालन करो व‍ह नियम पालन करो। मैं दुनिया के सभी उस देशवासियों से यह निवेदन करना चाहूंगा कि भारत जैसा देश जिस प्रकार से नेतृत्‍व करने के लिए तैयार है Environment protection के लिए Civil Nuclear की तरफ हमारा बल है। हम Nuclear Energy पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं, हम उसे करने के लिए तैयार हैं क्‍योंकि हमें पता है कि पर्यावरण की रक्षा में अच्‍छे सा अच्‍छा रास्‍तों में महत्‍वपूर्ण है। लेकिन वही लोग जो हमें Environment के लिए भाषण देते हैं वो Nuclear के लिए Fuel देने के लिए तैयार नहीं है। ये दो तराजू से दुनिया नहीं चल सकती है और इसलिए विश्‍व पर हमें भी यह दबाव पैदा करना पड़ेगा और मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में यह दबाव दिखने वाला है, लोग अनुभव करेंगे हम Solar Energy की तरफ जा रहे हैं। Biomass की तरफ जा रहे हैं। लेकिन मैं Urban Bodies को कहना चाहूंगा अगर हम स्‍वच्‍छ भारत की चर्चा करें तो भी और अगर हम Environment की चर्चा करें तो भी। Waste Water & Solid waste Management की दिशा में हम लोंगों को आग्रहपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। Public Private Partnership Model को लेकर आगे बढ़ना चाहिए। Solid Waste Management की ओर हमने पूरा ध्‍यान देना चाहिए। और आज Waste Wealth का एक सबसे बड़ा Business है। Waste में से Wealth create करना एक बहुत बड़ा Entrepreneurship शुरू हुआ है। हम अपने Urban Bodies में इसको कैसे जोड़े। Urban Bodies में Waste में से Wealth को create पैदा करने में स्‍पेशल फोकस करें। और आप देखिए कि बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। एक छोटा सा प्रयोग है मैं Urban Bodies से आग्रह करूंगा मान लीजिए हम हिंदुस्‍तान में पांच सौ शहर पकड़े, जहां एक लाख से ज्‍यादा आबादी है और वहां पर हम तय करें अब देखिए आज जो शहर का कूड़ा-कचरा फेंकने के लिए जो जगह जमीन की जो जरूरत है हजारों एकड़ भूमि की जरूरत पड़ेगी अगर ये कचरों के ढेर करने हैं तो अब गमिल लाओंगे कहां से और अब जमीन नहीं हैं तो क्‍या मतलब है कि कूड़ा-कचरा पड़ा रहेगा क्‍या और इसलिए हमारे लिए उस पर Process करना Recycle करना Waste Management करना यह अनिवार्य हो गया है। अब वैज्ञानिक के तरीके उपलब्‍ध हैं अगर हम Urban Body Waste Water Treatment करें और पानी को ठीक करके अगर किसानों को वापिस दे वरना एक समय ऐसा आएगा शहर और गांव के बीच संघर्ष होगा पानी के लिए। गांव कहेगा कि मैं शहर को पानी नहीं देने दूंगा और शहर बिना पानी मरेगा। लेकिन जो अगर शहर पानी प्रयोग करता है उसको Recycle करके गांव को वापस दे देता है खेतों में तो यह संघर्ष की नौबत नहीं आएगी और एक प्रकार से Treated Water होगा तो Fertilizer की दृष्टि से उपयोग इस प्रकार से पानी को इस प्रकार से बनाकर दिया जा सकता है। और Urban Body जो होता है उसके गांव जो होते हैं वो ज्‍यादातर सब्‍जी की खेती करते हैं और वही सब्‍जी उनके शहर के अंदर बिकने के लिए आती हैं रोजमर्रा की उनकी आजीविका उससे चलती है। हम इन्‍हीं को Solid Waste Management करके Solid Waste में से हम मानव Fertilizer बनाएं और वो Fertilizer हम उनको दें तो Organic सब्‍जी शहर में आएगी कि नहीं आएगी। इतनी बड़ी मात्रा में अगर हम Fertilizer देते हैं शहरों के कूड़े-कचरों से बनाया हुआ तो अच्‍छी Quality का विपुल मात्रा में सब्‍जी शहर में आएगी तो सस्‍ती सब्‍जी मिलेगी या नहीं मिलेगी? सस्‍ती सब्‍जी गरीब से गरीब व्‍यक्ति खाएगा तो Nutrition के Problem का Solution होगा कि नहीं होगा। Vegetable Sufficient खाएगा तो Health सेक्‍टर का बजट कम होगा कि नहीं होगा। एक प्रयास कितने ओर चीजों पर इफैक्‍ट कर सकता है इसका अगर हम एक Integrated approach करें तो हम हमारे गांवों को भी बचा सकते हैं हमारे शहरों को भी बचा सकते हैं। कभी-कभार अज्ञान का भी कारण होता है। हमारे यहां देखा है कि फसल होने के बाद अब जैसे Cotton है Cotton लेने के बाद बाकी जो है उसको जला देते हैं। लेकिन उसी को अगर टुकड़े कर करके खेत में डाल दें तो वहीं चीज Nutrition के रूप में काम आती है Fertilizer के रूप में काम आती है। मैंने एक प्रयोग देखा था केले की खेती हमारे यहां हो रही थी तब केला उतारे के बाद केला देने की क्षमता जब कम हो जाती है तो वो जो पेड़ का हिस्‍सा होता है उसके टुकड़े कर कर के उन्‍हें जमीन में डाले और मैंने अनुभव किया कि उसके अंदर इतना Water Content होता है केले के Waste Part में कि 90 दिन तक आपको फसल को पानी नहीं देना पड़ता है वो उसी में से फसल पानी ले लेती है। अब हम थोड़ा सा इनका प्रयोग चीजों को सीखें, समझें। इसको अगर Popular करें तो हम पानी को भी बचा सकते हैं, फसल को भी बचा सकते हैं। हम चीजों को किस प्रकार से और इसके लिए बहुत बड़ा आधुनिक से आधुनिक बड़ा विज्ञान की जरूरत होती है ऐसा नहीं है। सहज समझ का विषय होता है इनको हम जितना आगे बढ़ाएंगे हम इन चीजों को कर सकते हैं। Urban Body आग्रहपूर्वक Public Private Partnership Model उसमें Vibrating Gap funding का भी रास्‍ता निकल सकता है। आप जो इन Waste खेतों के किसानों को उसके कारण अगर Chemical Fertilizer का उपयोग कम होता है तो Chemical Fertilizer में से जो सब्सिडी बचेगी मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं वो सब्सिडी जो बचेगी वो Vibrating Gap Funding के लिए शहरों को दे देंगे, यानी आपके देश में से Wealth Create होगी और जो आप खाद्य तैयार करोगे वो खाद्य उपयोग करने के कारण Chemical Fertilizer की सब्सिडी बचेगी वो आपको मिलेगी। आप गैस पैदा करोगे, गैस दोगो तो जितनी मात्रा में गैसा पैदा करोगे जो गैस सिलेंडर की जो सब्सिडी है वो बचेगी तो वो सब्सिडी हम आपको Transfer करेंगे आपके Vibrating Gap Funding में काम आएगी। हम एक उसका Finance का Model कर सकते हैं, लेकिन भारत सरकार, राज्‍य सरकार और Local Self Government ये तीनों मिल करके हम Environment को Priority देते हुए हमारे नगरों को स्‍वच्‍छ रखते हुए, वहां के कूड़े-कचरे को Waste में Wealth Create करें और बहुत Entrepreneur मिले हैं। उनको हम कैसे प्रयोग में हम करें मैंने एक जगह देखा है जहां पर Waste में से ईंटे बना रहे हैं और इतनी बढि़या ईंटे मजबूत बन रही हैं कि बहुत काम आ रही है। आपने देखा होगा पहले जहां पर बिजली के थर्मल प्‍लांट हुआ करते थे वहां पर बाहर कोयले की Ash जो होता है उसके ढेर लगे रहते थे। आज Recycle और Chemical में से ईंटे बनने के कारण सीमेंट में उपयोग आने के कारण वो निकलते ही Contract हो जाता है और दो-दो साल का Contract और निकलते ही हम उठाएंगे यानी कि जो किसी पर्यावरण को बिगाड़ने के लिए संकट था वो ही आज Property में Convert हो गया है हम थोड़ा इस दिशा में प्रयास करें, initiative लें, हम इसमें काफी मदद कर सकते हैं और मेरा सबसे आग्रह है कि हम इन चीजों को बल मानते हुए आने वाले दिशों में दो दिन जब आप चर्चा करेंगे। गंगा की सफाई उसके साथ जुड़ा हुआ है गंगा के किनारे पर रहने वाले, गंगा किनारे के गांव और शहर मैं उन संबंधित राज्‍य सरकारों से आग्रह करूंगा इसमें कोई Comprise मत कीजिए। बैंकों से हम आग्रह करेंगे उनको हम कम दर से लोन दें। लेकिन Approved Plant उनमें वो लगाये जाएं Sewerage Treatment plant किये जाएं। एक बार हमने सफलतापूर्वक ढाई हजार किलोमीटर लम्‍बी गंगा के अंदर जाने वाले प्रदूषण को रोक लिया पूरे दुनिया के सामने और पूरे हिंदुस्‍तान के सामने एक नया विश्‍वास पैदा कर सकता है कि हम सामान्‍य अपने तौर तरीकों से पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं। यह विश्‍वास पैदा करने के लिए Model की तरह इस काम को खड़ा करना और ये एक बार काम खड़ा हो गया तो और काम अपने आप खड़े हो जाएंगे। एक विश्‍वास पैदा करने की आवश्‍यकता है और किया जा सकता है। एक बार हम किसी चीज को हाथ लगाएं पीछे लग जाएं परिणाम मिल सकता है और मैं चाहूंगा ज्‍यादातर इन पांच राज्‍यों से कि जो गंगा के किनारे की उनकी जिम्‍मेवारी है छह हजार के करीब गांव है, एक सौ 18000 किलोमीटर हैं कोई आठ सौ के करीब Industries हैं जो Pollution के लिए तैयार है इसको Target करते हुए एक बार गंगा के किनारे पर हम तय कर ले वहां से कोई भी दूषित पानी या कूड़ा-कचरा गंगा में जाने नहीं देंगे। आप देखिए अपने आप में बदलाव शुरू हो जाएगा। फिर तो गंगा की अपनी ताकत भी है खुद को साफ रखने की। और वो हमने आगे निकल जाएगी लेकिन हम तय करे कि हम गंदा नहीं करेंगे तो गंगा को साफ करने के लिए तो हमें गंदा नहीं करना पड़ेगा गंगा अपना खुद कर सकती है। लेकिन हम गंदा न करे इतना तो संकल्‍प करना पड़ेगा और उस काम को ले करके आप जब यहां पर बैठे है जो गंगा किनारे को जो इस विभाग के मंत्री हैं वो विशेष रूप से आधा-पौना घंटा बैठ करके उन चीजों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। विशेष रूप से चर्चा करें मेरा आग्रह रहेगा फिर एक बार मैं इस प्रयास का स्‍वागत करता हूं और मुझे विश्‍वास है कि इस सपने के साथ फिर एक बार मैं दोहराता हूं ये एक ऐसा विषय है जो हमारी बपौती है, हमारा डीएनए है। हमारे पूर्वजों ने इन मानव जाति की बहुत बड़ी सेवा की है। विश्‍व का नेतृत्‍व हमारे पास ही होना चाहिए Climate के मुद्दे पर ये मिजाज होना चाहिए। पूरे विश्‍व को हम दिखा सकते हैं कि यह हमारा विषय है। हमारी परंपरा है। दुनिया को हम सीखा सकते हैं इतनी ताकत के साथ हम यहां से निकले यही अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं धन्‍यवाद।

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Text of PM Modi's Speech at public meeting in Ballabhgarh, Haryana
October 14, 2019
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Today J&K and Ladakh is on the way to development, and the credit for this must go to the 130 crore Indian citizens: PM Modi
Why was the Valmiki community not allowed in J&K? It was because of Article 370. With one stroke, I have ended the decades of injustice on Valmiki community: PM
Cong shedding crocodile tears over Article 370, says PM Modi at Haryana rally
In Haryana, PM Modi says the country only wants development, and the BJP and its allies are honestly working towards it
Today Jammu, Kashmir and Ladakh have embarked on a new path of development and trust: PM Modi

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। 

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्री परिषद के मेरे साथी श्रीमान किशन पाल जी, हरियाणा सरकार के सभी मंत्रिगण, मंच पर उपस्थित हरियाणा के सभी नेतागण, इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सभी सम्माननीय उम्मीदवार, मंच पर उपस्थित अन्य सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनो। श्री राजा बलराम सिंह, राजा नाहर सिंह, ऐसे-ऐसे अनेक महापुरुषों की इस भूमि को मैं नमन करता हूं, वंदन करता हूं। यहां विराजित पथवारी माता को भी मैं सर झुका कर के प्रणाम करता हूं और यहां से वो जगह बहुत दूर नहीं है जहां पर आपातकाल के दौरान, इमरजेंसी के दौरान भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी भाई देसाई को गिरफ़्तार करके वहां 19 महीने बंद रखा गया था। भाइयो-बहनो जब मैं आपके बीच आता हूं हरियाणा आता हूं तो मुझे हमेशा लगता है कि मैं मेरे अपने घर में आया हूं। हरियाणा ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है इसलिए जब भी मैं यहां आता हूं तो एक अलग भावना मेरे भीतर उमड़ने लग जाती है, यहां का विकास यहां के लोगों के जीवन में बदलाव ये हमेशा-हमेशा मेरी प्राथमिकता रही है। भाइयो और बहनो, मुझे याद है 5 वर्ष पहले जब मैं हरियाणा में भाजपा सरकार बनाने की बात करता था तो हमारे सामने जो विरोधी दल खड़े थे उनके नेता थे वो मेरे मुंह में उंगली डाल-डाल कर पूछ रहे थे पिछले चुनाव में की तुम मोदी जी बताओ कि तुम वोट तो मांगने आए हो लेकिन तुम्हारा कैप्टन कौन है यह मुझे पूछते थे और तब मेरा जवाब होता था की हरियाणा की जनता का आशीर्वाद मिले तो हरियाणा को एक मजबूत, सक्षम कैप्टन भी मिलेगा और अकेला कैप्टन नहीं एक मजबूत टीम भी मिलेगी। आज 5 साल बाद कैप्टन भी पूरी बुलंदी के साथ आपके सामने है और मजबूत टीम भी अपने देखी है, यही टीम है जिसने विकास के मामले में हरियाणा को अग्रणी रखा है, अव्वल रखा है संयोग देखिए जो तब मुझसे कैप्टन को लेकर सवाल करते थे वो आज अपनी बिखरी टीम को ही समेटने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। वो ख़ुद को जितना समेटने की कोशिश कर रहे हैं वो उतना ही वो रोज़ बिखरते चले जा रहे हैं। आप मुझे बताइए अपने-अपने स्वार्थ की वजह से अपने-अपने अहंकार के कारण अपने-अपने कुनबे की हिफ़ाज़त के लिए, और इसी वजह से बिखरते हुए ये लोग क्या हरियाणा के विकास के बारे में सोच पाएंगे हरियाणा का भला कर पाएंगे हरियाणा का विकास कर पाएंगे कोई संभावना है? स्वार्थ और भ्रष्टाचार की राजनीति यह हरियाणा की जनता का संस्कार नहीं है यह धरती तो भारत मां की जय बोलते हुए हाथ में तिरंगा के लिए जीने मरने का प्रण लेकर के चले हुए सीमा पर दुश्मनों के होश उड़ा देन वाले ये वीरों की धरती है बलिदानियों की धरती है त्याग और तपस्वियों की धरती है और यह धरती खेल की दुनिया में छा जाने वाले हमारे वीर बेटे-बेटियों की धरती है ये इस धरती का यहां के लोगों का सहयोग और समर्थन है जिन्होंने मनोहर लाल जी और उनकी टीम को ताक़त दी है। आपका यही आशीर्वाद हमें लोक सभा के चुनाव के दौरान भी मिला है विशेष तौर पर हमारे युवा साथियों ने, किसान और श्रमिक साथियों ने, हमारी बहनों ने, नई उम्मीदों और नए सपनों के लिए कमल के निशान पर बटन दबाया। 

साथियो, तब मैंने कहा था कि हरियाणा ने जो मेरी परवरिश की है हरियाणा ने जो संस्कार मुझमें गढ़े हैं उनका मान और सम्मान मैं सर्वोच्च रखूंगा ये मैंने आपको वादा किया है। नई सरकार बने अभी बहुत समय नहीं बीता है लेकिन आपके सामने रखा हर संकल्प मैं तेज़ी से पूरा करने का प्रयास कर रहा हूं आपने मुझे 5 साल का वक़्त दिया है अभी 5 महीने भी नहीं हुए हैं और मैं एक के बाद एक क़दम उठाता चला जा रहा हूं। भाइयो और बहनो, आज आप देख रहे हैं कि कैसे पूरी दुनिया, दुनिया के बड़े-बड़े नेता भारत के साथ खड़े होने के लिए, भारत के साथ आने के लिए आज दुनिया में हर कोई आतुर नज़र आता है। आपने जो जनादेश दिया है उससे दुनिया में यह संदेश है और यह संदेश साफ़-साफ़ दिया है कि अब भारत का समाज बटा हुआ नहीं है बल्कि एक जुट होकर विकास और विश्वास की नीति के साथ खड़ा है आगे बढ़ रहा है तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। साथियो, आपके इसी विश्वास और उसके साथ जो ऊर्जा मिली है उस ऊर्जा का ही परिणाम है कि भारत आज वो फ़ैसले ले रहा है जिसकी पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। मैं किस फ़ैसले की बात कर रहा हूं, आपको पता है, कौन से वाले फ़ैसले की बात कर रहा हूं? देखिए यह जनता की आवाज़ देखिए और जनता तो ईश्वर का रूप होती है जब रूप बोल जाता है यह फ़ैसला है आर्टिकल 370 का। यह हरियाणा की, पूरे देश की भावना थी कि जम्मू-कश्मीर को अलगाव और हिंसा से निकाल कर सद्भाव और सशक्तिकरण की तरफ़ ले जाया जाए। आज जम्मू कश्मीर और लद्दाख विकास और विश्वास के एक नए रास्ते पर चल पढ़ा है और इसका श्रेय किसको जाता है किसको जाता है? मोदी को नहीं जाता है यह बल्लभगढ़ के लोग फ़ेल हो गए। इसका श्रेय आप 130 करोड़ देशवासियों को जाता है, हिंदुस्तान के मतदाताओं को जाता है की आपने कमल पर बटन दबाया और मुझे यह ताक़त मिली है आपके सपने को पूरे करने की। आज पूरा देश यह भी देख रहा है कि जिनके हितों पर इस फ़ैसले से चोट हुई है वो सदमे में हैं, तिलमिलाए हुए हैं। यह लोग इस फ़ैसले पर सवाल उठा रहे  हैं विदेशों में जाकर मदद मांग रहे हैं। मैं ज़रा जिनको नींद नहीं आती है, जिनके पेट में चूहे दौड़ रहे हैं अगर ऐसे लोगों को आर्टिकल 370 और 35ए से इतना ही लगाव है, इतना ही मोह है तो मैं आज उनको ज़रा आह्वान करता हूं, चैलेंज करता हूं। अगर इतना ही 370 आपको प्यारा लगता है तो हिम्मत के साथ हरियाणा के लोगों के बीच में जाओ और बताओ कि अगर आप चुनाव जीत कर के आएंगे 370 वापिस लाएंगे 35 ए वापिस लाएंगे, मोदी ने जो किया है उसको उलटा कर देंगे। लोकसभा के चुनाव आएं तब तक मैनिफ़ेस्टो में लिखो की हम अगर आए तो 370 वापिस लाएंगे क्या है किसी में ताक़त यह करने की तो ये घड़ियाली आंसू बहा रहे  हैं कि नहीं बहा रहे हैं, यह झूठी बातें बोल रहे हैं कि नहीं बोल रहे हैं उनको भी पता है आर्टिकल 370 को जनता जनार्दन का इतना प्यार, इतना उमंग और उत्साह मिला है की मोदी आर्टिकल 370 और 35 ए का निर्णय कर पाया है। आर्टिकल 370 के समर्थकों को मैं कहना चाहता हूं कि वो हरियाणा के गांव-गांव में जाकर इसके फ़ायदा जरा लोगों को समझाएं और मैं उनसे कहना चाहता हूं जिन माताओं ने अपने वीर खोए हैं कश्मीर की धरती पर, घर में जवान पत्नी,  छोटे-छोटे बच्चे उनसे विदाई लेकर के जो मेरा वीर जवान हरियाणा का नवजवान जम्मू कश्मीर की रक्षा कर रहा था वहां के निर्दोष नागरिकों की रक्षा कर रहा था, जिनको आतंकियों ने गोली से भून दिया और जो शरीर तिरंगे में लिपटकर वापिस लौटा था उन माताओं को पूछो कि तुम्हारा 370 के प्यार में कितने माताओं के बेटों को रौंद डाला है कितनी बहनों को विधवा कर दिया है। 

भाइयो और बहनो, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए अपनों को खोया है उनको कांग्रेस के नेता बताएं कि आर्टिकल 370 से उनको इतना मोह क्यों है। हरियाणा कि बेटियों को यहां के दलितों को भी ज़रा जा कर के बताना चाहिए की जम्मू कश्मीर में 370 ने वहां कैसे इन वर्गों का हित किया है। मैं ज़रा यहां के नेताओं से पूछना चाहता हूं आज वोट लेने के लिए वाल्मीकि के नाम पर वाल्मीकि जयंती के नाम पर भांति-भांति के झूठ फैला रहे हैं अरे आज़ादी के 70 साल हो गए, बनारस जहां से मैं लोक सभा का सदस्य जनता ने मुझे चुन कर के भेजा है बनारस की जनता ने मुझे प्यार दिया है संत रविदास की भूमि है इतने-इतने उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री बन कर के गए हर दल से नेता चुन कर आए क्या कारण था इतने बड़े महापुरुष संत रविदास उनके स्थान का भव्य निर्माण क्यों नहीं किया ये मोदी आया है आज बनारस में संत रविदास का ऐतिहासिक स्मारक बन रहा है, तीर्थ बन रहा है और यह मेरा सौभाग्य है कि वहां के समाज के नेताओं ने मुझे उसकी भूमि पूजन करने का सौभाग्य दिया था मैं ज़रा लोगों के आंख में धूल झोंकने वाले नेताओं से पूछना चाहता हूं दलितों को गुमराह करने वालों को पूछना चाहता हूँ वाल्मीकि समाज को उकसाने के लिए यह झूठ का सहारा  लेने वालों से मैं पूछना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर की धरती पे मेरे जो वाल्मीकि भाई-बहन रहते थे अगर उनका बेटा ग्रेजूएट हो जाए डबल ग्रेजूएट हो जाए इंजीनियर हो जाए लेकिन वाल्मीकि परिवार के बेटों को जम्मू कश्मीर सरकार में उसके हक़ की नौकरी भी नहीं दी जाती थी और कारण क्या था कारण 370 था 35ए था और उसके कारण जम्मू कश्मीर की धरती पर वाल्मीकि समाज की 4-4 पीढ़ी कितनी ही पढ़ाई क्यों ना की हो झाड़ू लगाना, टॉयलेट साफ़ करना इसके सिवाय वहां की सरकार ने कोई भी काम देने के लिए उन्हें योग्य नहीं माना। हर बार 370 का बहाना बताया, और ये बात दिल्ली में बैठी हुई सरकारों ने, उस सरकार का झंडा लेकर चलने वाले हरियाणा के उन नेताओं ने पाप किया था। भइयो-बहनो, ये मोदी है जिसने आर्टिकल 370 हटाकर के 4-4- पीढ़ी से मेरे उन भाइयो-बहनो पर जुल्म होते थे एक झटके से चार पीढ़ी का न्याय मैंने खत्म कर दिया है। साथियो, कांग्रेस और उसके जैसे दल ये नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये जो मगर के आंसू, घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं वो सिर्फ सतही हैं। ये वोट बैंक की राजनीति को जिंदा रखने का उनका विफल प्रयास है, सिर्फ विरोध के लिए विरोध इनकी आदत बन चुकी है, यही उनकी परंपरा है यही उनकी आदत है यही उनके तरीके हैं। आप याद कीजिए रफायल लड़ाकू विमान को लेकर इन्होंने लोकसभा के चुनाव के दौरान कैसी हाय-तौबा मचाई थी, छाती पीट रहे थे छाती, इन लोगों ने पूरा जोर लगा दिया था कि राफयल विमान से समझौता रद्द हो जाए, भारत में नया लड़ाकू विमान ना आने पाए लेकिन आज मुझे खुशी है कि इन लोगों की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत को पहला लड़ाकू विमान सौंपा जा चुका है भाइयो-बहनो। 

भाइयो और बहनो, ये कितना ही विरोध करें कितनी ही साजिशें करें राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सेना के सशक्तिकरण के लिए भारतीय जनता पार्टी प्रतिबद्ध है और हम उसे लगातार गति भी दे रहे हैं। मुझे कोई हक नहीं है कि हरियाणा का मेरा वीर जवान, हरियाणा की वीर माताओं का बेटा, हिंदुस्तान की वीर माताओं का बेटा जो देश की रक्षा के लिए लड़ रहा है वो बारूद और हथियार के बिना दुश्मनों के शिकार हो जाएं ये मोदी को मंजूर नहीं है दोस्तों। हमारे अपने तेजस लड़ाकू विमान को इन लोगों ने डिब्बे में बंद करने की तैयारी कर ली थी पता नहीं किसका दबाव था। हमारी सरकार ने सारी रुकावटें दूर करके तेजस विमान को पंख लगाए, आज तेजस भारतीय वायुसेना की शान बन रहा है। साथियो, आधुनिक विमानों और हेलिकॉप्टर से लेकर नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम तक, समंदर में नई ताकतों से लेकर अंतरिक्ष ने नई मिसाइलों तक, बुलेटप्रूफ जैकेट से लेकर गोला-बारूद तक हम हर स्तर पर काम कर रहे हैं। अपनी सेनाओं के साथ ही अपने वीर बेटे-बेटियों को हम मजबूत कर रहे हैं। देश के जिन वीर सपूतों के हाथ पहले की सरकारों ने बांध रखे थे उन्हें भाजपा सरकार ने खुली छूट दे दी है। आप के तो हर गांव में जवान हैं वो बताते होंगे, मोदी ने कह दिया है। आपको सर्जिकल स्ट्राइक याद है ना, अरे बालाकोट का याद कीजिए कैसे आतंकियों को घर में घुसकर मारा, याद है ना

भाइयो-बहनो, कांग्रेस और उसके जैसे दलों की करनी कैसे रही है इसका जीता जागता सुबूत रहा है वन रैंक वन पेंशन। ये लोग आपसे झूठ बोलते रहे लेकिन वन रैंक वन पेंशन लागू नहीं किया, आज ना ये सिर्फ सच्चाई है बल्कि हरियाणा के भी करीब-करीब दो लाख पूर्व फौजियों को इसका लाभ मिल चुका है। अब तक उन्हें अकेले हरियाणा में 9 सौ करोड़ से ज्यादा का एरियर उनके यहां जमा हो चुका है। भाइयो-बहनो, देश में हो रहे हर सुधार के सामने हर परिवर्तन के सामने कांग्रेस और उसके दल दीवार बन कर के खड़े हो जाते हैं। आपने देखा है कि कैसे तीन तलाक के खिलाफ कानून को इन्होंने हर बार रोका, हर तरह के बहाने बनाकर के रोका, मुस्लिम बहन-बेटियों को अधिकार मिले, उनके जीवन का एक बड़ा डर खत्म हो और वो भी खुलकर के जियें इन लोगों को, ये सारे दलों को इससे भी दिक्कत थी। ये लोग जमीन से इतना कट चुके हैं कि वास्तविक सच्चाई इन्हें नजर ही नहीं आ रही है। जब तीन तलाक की बात होती थी तो उनको लगता था कि इससे मुस्लिम बैंक की उनकी राजनीति चलेगी और उनको लगता था कि जो मुस्लिम पति हैं वे खुश हो जाएंगे तीन तलाक के मुद्दे पर हमारे विरोधियों का साथ देंगे लेकिन हमारे विरोधी दल को एक मंजिल ही काम करता है बाकी के मंजिलों में विचार ही नहीं आता है। ये भूल गए कि मुसलमान पति के नाते हो सकता है कि तीन तलाक उसको अच्छा लगे, वो भी सबको नहीं लगता था। एक-आध दो परसेंट लोगों को शायद अच्छा लग भी जाए लेकिन उस मुसलमान को भी विचार आता था कि मैं पति तो हूं लेकिन मैं पिता भी हूं, मेरी बेटी अगर कहीं से तीन तलाक के कारण वापस आई तो उस बेटी का क्या होगा। उस मुसलमान को ये भी पता था कि मैं किसी बहन का भाई भी हूं, अगर मेरी बहन तीन तलाक के कारण बीच जिंदगी में घर लौट आई तो मेरी बहन का क्या होगा और इसलिए पति मुसलमान था यही कांग्रेस वालों की सोच थी, तलाक के पक्ष में खड़े हुए लोगों की सोच थी लेकिन मुसलमान पुरुष भी सोचने लगा कि इसके हटने से उनकी बेटी भी सुरक्षित हो जाएगी, उनकी बहन भी सुरक्षित हो जाएगी और इसलिए इतना बड़ा फैसला हुआ हिंदुस्तान में कोई आवाज नहीं उठी भाइयो-बहनो। 

मैं आपको एक और उदाहरण देता हूं कुछ दिनों पहले इस सरकार ने पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। पलवल समेत पूरे हरियाणा में तो पशुधन गांव गरीब का बहुत बड़ा सहारा है। आप भली-भांति समझते हैं कि पशुओं में खुर और मुंह की बीमारियां जिसको लोग अंग्रेजी में फुट एंड माउथ डिसीज से कितना बड़ा नुकसान होता है। कहां तो इनको खुले मन से ये कहना चाहिए था कि देश के 50 करोड़ पशुओं के मुफ्त टीकाकरण का अभियान सफल रहे लेकिन ये लोग इस पर भी तरह-तरह की बाते फैला रहे हैं। भाइयो-बहनो, देश की राय साफ है अब सिर्फ विरोध और प्रतिरोध की राजनीति नहीं चलेगी, अब देश सिर्फ और सिर्फ विकास चाहता है और मैं ये संतोष के साथ कह सकता हूं कि भाजपा और उसके साथी इसके लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। 

साथियो, भाजपा के लिए उसका संकल्पपत्र, समर्पण का दस्तावेज होता है, हम हर संकल्प को पूरा करने का काम तेजी से कर रहे हैं। सरकार बनते ही शहीदों के बच्चों की स्कॉलरशिप बढ़ाने का फैसला लिया गया, इतना ही नहीं जो हमारे पुलिस के केंद्रिय बल के जवान नक्सलियों और आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो जाते थे उनके बच्चों को भी इसके दायरे में लाया गया और ये लाभ उनके बच्चों को देने का भी निर्णय कर लिया। हमारे किसान, हमारे व्यापारी, हमारे श्रमिक साथी, हमारी बहनें जो देश के विकास का मजबूत स्तंभ है, उनको मजबूत करने के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं। भाइयो-बहनो, लोकसभा चुनाव के दौरान हमने आपसे कहा था कि भाजपा की सरकार केंद्र में बनी तो हरियाणा के हर किसान परिवार को बैंक खाते में सीधी मदद मिलेगी। हमने कहा था कि छोटे किसानों, खेत मजदूरों को, छोटे व्यापारियों को, छोटे दुकानदारों को हर महीना पेंशन की सुविधा दी जाएगी। हमने ये भी कहा था कि देश के व्यापारियों, कारोबारियों के लिए राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन करेंगे। साथियों आज जब किसानों, पशुपालकों, श्रमिकों, कर्मचारियों, उद्यमियों की इस धरती पर आया हूं तब मैं कह सकता हूं कि इतने कम समय में ये सारे संकल्प सिद्ध हो चुके हैं। जो हमारा श्रमिक वर्ग है जो पसीना बहाता है उसके लिए भी पहली बार सार्थक कार्य हो रहा है। श्रमिक साथियों को जीवन के हर कदम पर जरूरी सुरक्षा मिले इस पर हमारा जोर है, 60 वर्ष की आयु के बाद तीन हजार की नियमित पेंशन इसी सुरक्षा चक्र का हिस्सा है, अभी तक देश के करीब 37 लाख श्रमिक साथी जुड़ चुके हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत अभियान और आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज, इस सुविधा का बड़ा लाभार्थी भी हमारा ये श्रमिक वर्ग है। 

साथियो, बाते पांच सालों में जितने भी प्रयास केंद्र में हुए है उनको हरियाणा में तेजी से साकार करने का काम मनोहर लाल जी और उनकी समर्पित टीम ने किया है। बीते पांच वर्षों में हरियाणा में करीब-करीब नौ लाख शौचालय बनाए गए हैं, आज हरियाणा का हर गांव खुले में शौंच से मुक्त है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 32 हजार से ज्यादा घर हमारे हरियाणा में बनाए गए हैं। साल 2022 तक हरियाणा और हिंदुस्तान के हर गरीब के पास अपना घर हो इसके लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की योजना के तहत तो हरियाणा ने कमाल कर दिया है, मैं हरियाणा को जितनी बधाई दूं, कम है। जिस तरह आप लोगों ने काम किया है वो देश के अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन रहा है। आयुष्मान भारत योजना का पहला लाभार्थी भी हरियाणा में ही था, अब राज्य के करीब 25 हजार गरीब इस योजना के तहत अपना मुफ्त इलाज करा चुके हैं। बीज से लेकर बाजार तक यहां की सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के खड़ी है। भावांतर योजना का भी बहुत बड़ा लाभ हमारे किसान भाइयो-बहनो को मिला है। सूरजमुखी, सरसों, बाजरे और अन्य फसलों को एमएसपी पर खरीदने पर भी किसानों को काफी मदद मिली है। भाइयो-बहनो, हरियाणा में सरकारी भर्ती का मतलब पहले होता था रिश्वतखोरी और युवाओं से लूट। नौकरी के लिए जितने तरह के खेल होते थे उन्होंने यहां के कई नेताओं को जेल तक पहुंचाया है, ये स्थिति अब बदल चुकी है। पांच साल पहले तक जो खर्ची और पर्ची, मुझे बराबर याद है मैं हरियाणा में काम करता था, खर्ची और पर्ची ये घर-घर की प्रथा थी। उस खर्ची और पर्ची से परेशान हरियाणा का हर घर था उसी कल्चर ने हरियाणा को बदनाम किया था। आज मैं मनोहर लाल जी को बधाई देता हूं। इतनी बड़ी बीमारी को ये मनोहर लाल जी की ईमानदारी ने आज ठीक करके रख दिया है। अब हरियाणा के युवा साथियों को सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए किसी के आगे-पीछे चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही हरियाणा सरकार ने किसान की कीमती जमीन और नवजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का गोरखघंघा भी बंद कर दिया है। 

भाइयो-बहनो, ईमानदारी और निष्ठा से हो रहा हरियाणा का विकास, यहां की सुधरती कनेक्टिविटी में भी दिखता है। पलवल हो, बल्लभगढ़ हो, फरीदाबाद हो यातायात की कनेक्टिविटी की एक से एक आधुनिक सुविधाएं यहां तैयार हो रही हैं। कुण्डली, मानेसर, पलवल एक्सप्रेस-वे का काम या फिर पृथला से सोनीपत तक की नई रेलवे लाइन, कुण्डली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस वे हो या फिर ग्रेटर नोएडा को जोड़ने के लिए मंजावली पुल का निर्माण हो, इस क्षेत्र की हर जरूरत को देखते हुए, समझते हुए हजारों करोड़ों की परियोजनाओं को पूरा किया जा रहा है। बेहतर होती इस कनेक्टिविटी का फायदा यहां के लोगों को यहां के उद्योगों को मिल रहा है। जिन परियोजनाओं पर अभी काम हो रहा है उनके पूरा होने के बाद तो फरीदाबाद ही नहीं हरियाणा की अर्थव्यवस्था भी बहुत तेजी से बदलने वाली है, बड़ा प्रभाव नजर आने वाला है। साथियो, आपकी हर आकांक्षा को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार दिन रात मेहनत करती रहेगी। 21 अक्टूबर को आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि हरियाणा के विकास का ये डबल इंजन और मजबूती से आगे बढ़े। एक दिल्ली में मोदी सरकार का डबल इंजन और दूसरा हरियाणा में मनोहर सरकार का इंजन, डबल इंजन की ताकत से बढ़ना है। 

आपको भारी संख्या में मतदान केंद्र पहुंचना है, लोकसभा चुनाव के दौरान हुई उस वोटिंग के उस रिकॉर्ड को भी तोड़ना है। हर पोलिंग बूथ तय करे, अगर पिछली बार 700 लोगों ने वोट किया था तो इस बार 700 लोगों से ज्यादा वोट करेंगे। पिछली बार 600 लोगों ने वोट किया था बूथ में, इस बार 600 लोगों से ज्यादा लोग वोट करने जाएंगे बूथ में। कमल के निशान पर बटन दबाएं और हरियाणा में फिर एक बार भाजपा सरकार, मनोहर सरकार की भावना को साकार करें। एक बार फिर आप सभी का आशीर्वाद हमें मिले और इतनी बड़ी तादाद में आ कर के आज आपने जो मुझे आशीर्वाद दिया है इसके लिए मैं हृदय से आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, बहुत-बहुत धन्यवाद।