उपस्थित सभी महानुभाव और मेरे परिवार के सभी सदस्य, बंधु गण, मैंने ये कहा कि मेरे परिवार के! दो कारण से - एक तो मैं बनारस का हो गया हूं और दूसरा बचपन से एक ही याद रही है, वो है, रेल। इसलिए रेल से जुड़ा हर व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है और इस अर्थ में मैं परिवार जनों के बीच आज आया हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां दो महत्वपूर्ण प्रकल्प, एक तो 4,500 horse power capacity का डीज़ल इजिंन राष्ट्र को समर्पित हो रहा है और ये हमारी capability है। भारत को आगे बढ़ना है, तो इस बात पर बल देना होगा कि हम, हमारे आत्मबल पर, हमारी शक्ति के आधार पर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने का काम करें।

एक समय था, ये देश पेट भरने के लिए अन्न बाहर से लाता था। जब विदेशों से अन्न आता था, तब हमारा पेट भरता था। लेकिन इस देश में एक ऐसे महापुरूष हुए जिसने बेड़ा उठाया, देश के किसानों को ललकारा, आवाह्न किया, उनको प्रेरणा दी, जय जवान जय किसान का मंत्र दिया और देश के किसानों ने अन्न के भंडार भर दिए। आज हिंदुस्तान अन्न विदेशों में दे सके, ये ताकत आ गई है। वो काम किया था, इसी धरती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री ने। अगर हमारे किसान देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, अन्न के भंडार भर सकते हैं, तो देश की उस ताकत को पहचान करके हमने देश की उस युवा शक्ति का आवाह्न किया है - Make in India! हमारी जितनी आवश्यकताएं हैं, उसका निर्माण देश में क्यों नहीं होना चाहिए? क्या कमी है! जिस देश के पास होनहार नौजवान हों, 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के नौजवान हों, वो देश क्या नहीं कर सकता है?

इसलिए भाइयों, बहनों, लाल बहादुर शास्त्री का मंत्र था- जय जवान जय किसान और उन्होंने देश के अन्न के भंडार भर दिए। हम Make in India का मंत्र ले करके आए हैं इंडिजिनस! भारत की विधा से, भारत के संसाधनों से भारत अपनी चीज़ों को बनाए। आज, डिफेंस के क्षेत्र में हर चीज़ हम बाहर से लाते हैं। अश्रु गैस भी बाहर से आता है, बताईए! रोने के लिए भी बाहर से हमको साधन लाने पड़ते हैं। ये बदलना है मुझे और उसमें एक महत्वपूर्ण पहल आज आपके यहां से.. indigenous .. मुझे बताया गया, ये जो इंजिंन बना है, इसमें 96% कंपोनेंट यहीं पर बने हैं, आप ही लोगों ने बनाए हैं। मैंने कहा है कि वो 4% भी नहीं आना चाहिए। बताइए कैसे करोगे? उन्होंने कहा- हम बीड़ा उठाते हैं, हम करेंगे। डिफेंस..सब चीज़ें हम बाहर से ला रहे हैं, मोबाइल फोन बाहर से ला रहे हैं, बताईए! हमारे देश में हमें एक वायुमंडल बनाना है और इस पर हम कोशिश कर रहे हैं।

रेलवे! आप ने मुझे, जब से प्रधानमंत्री बना हूं, बार बार मेरे मुंह से रेलवे के बारे में सुना होगा। घूम फिर करके कहीं भी भाषण करता हूं तो रेलवे तो आ ही जाता है। एक तो बचपन से आदत है और दूसरा, मेरा स्पष्ट मानना है कि भारत में रेलवे देश को आगे ले जाने की इतनी बड़ी ताकत रखती है, लेकिन हमने उसकी उपेक्षा की है। मेरे लिए रेलवे एक बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप कल्पना कर सकते हो, इतना बड़ा infrastucture! इतनी बड़ी संख्या में manpower! इतना पुराना experience! और विश्व में सर्वाधिक लोगों को ले जाने लाने वाला ये इतना बड़ा organization हमारे पास हो। इसको अगर आधुनिक बनाया जाए, इसको अगर technology upgradation किया जाए, management perfection किया जाए। service oriented बनाया जाए तो क्या हिंदुस्तान की शक्ल सूरत बदलने में रेलवे काम नहीं आ सकती? भाइयों, बहनों मैं ये सपना देख करके काम कर रहा हूं। इसलिए रेलवे तो आगे बढ़ना ही है, लेकिन रेलवे के माध्यम से मुझे देश को आगे बढ़ाना है। और, अब तक क्या हुआ है, रेल मतलब- दो-पांच किलोमीटर नई पटरी डाल दो, एक आद दो नई ट्रेन चालू कर दो, इसी के आस-पास चला है। हम उसमें आमूल-चूल परिवर्तन चाहते हैं।

उसी प्रकार से human resource development. हम जानते हैं कि रेलवे में अभी भी बहुत लोगों को रोज़गार मिलने की संभावनाएं हैं। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे हिम्मत नहीं करते। अगर आर्थिक रूप से उनको मजबूत बनाया जाए तो हज़ारो नौजवान रेलवे अभी भी absorb कर सकता है, इतनी बड़ी ताकत है। इसलिए योग्य manpower के लिए हम चार युनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं, हिंदुस्तान के चार कोनों में। उस युनिवर्सिटी में जो आएंगे उन नौजवानों की शिक्षा दीक्षा होगी और उनको रेलवे के अंदर नौकरी मिलेगी। हमारे कई रेलवे के कर्मचारी हैं। उनकी संतानों को अगर वहां पर पढ़ने का अवसर मिलेगा तो अपने आप रेलवे में नौकरी करने के लिए उसकी सुविधा बढ़ जाएगी। उसको भटकना नहीं पड़ेगा। कुछ लोग अफवाहें फैलाते हैं। आप में से कई लोग होंगे जो 20 साल की उम्र के बाद, 22 साल की उम्र के बाद, पढ़ाई करने के बाद रेलवे से जुड़े होंगे। मैं जन्म से जुड़ा हुआ हूं। इसलिए आप लोगों से ज्यादा रेलवे के प्रति मेरा प्यार है, क्योंकि मेरा तो जीवन ही उसके कारण बना है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि रेलवे का privatization हो रहा है, वो सरासर गलत है। मुझ से ज्यादा इस रेलवे को कोई प्यार नहीं कर सकता और इसलिए ये जो गप्प चलाए जा रहे हैं, भाईयों, बहनों न ये हमारी इच्छा है, न इरादा है, न सोच है। हम इस दिशा में कभी जा नहीं सकते, आप चिंता मत कीजिए। हम क्या चाहते हैं - आज देश के गरीबों के लिए जो पैसा काम आना चाहिए, स्कूल बनाने के लिए, अस्पताल बनाने के लिए, रोड बनाने के लिए, गांव के अंदर गरीब आदमी की सुविधा के लिए, उन सरकारी खजाने के पैसे हर साल रेलवे में डालने पड़ते हैं। क्यों? रेलवे को जि़ंदा रखने के लिए। हम कितने साल तक हिंदुस्तान के गरीबों की तिजोरी से पैसे रेल में डालते रहेंगे? और अगर कहीं और से पैसा मिलता है, तो समझदारी इसमें है कि गरीबों के पैसे रेल में डालने के बजाए, जो धन्ना सेठ हैं, उनके पैसे रेल में डालने चाहिए। इसलिए कम ब्याज से आज दुनिया में पैसे मिलते हैं। हम उन पैसों को रेलवे के विकास के लिए लगाना चाहते हैं, जिसके कारण, आप जो रेलवे में काम कर रहे हैं, उनका भी भला होगा और हिंदुस्तान का भी भला होगा। रेलवे का privatization नहीं होने वाला है।

अब मुझे बताईए, ये युनियन वालों को मैं पूछना चाहता हूं कि रूपया रेलवे में आए, डालर आए, पाउंड आए, अरे आपको क्या फर्क पड़ता है भई! आपका तो पैसा आ रहा है। दूसरी बात, रेलवे के स्टेशन जितने हैं, हमारे.. अब मुझे बताइए, मुझे रेलवे युनिवर्सिटी बनानी है..अगर रेलवे युनिवर्सिटी में मुझे जापान से मदद मिलती है, चाइना से मदद मिलती है, टेक्नॉलोजी की मदद मिलती है, expertise की मदद मिलती है, तो लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? ज़रा बताईए, सच्चा बोलिए, दिल से बोलिए- लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? यही काम ये सरकार करना चाहती है भाईयों! और इतना ही नहीं इतना ही नहीं. आज हम देखें हमारे रेलवे स्टेशन कैसे हैं? रेलवे स्टेशन पर रेलवे में 12-12 घंटे प्लेटफार्म पर काम करने वाले रेलवे के कर्मचारी को बैठने के लिए जगह नहीं होती है। ये सच्चाई है कि नहीं है? उसको बेचारे को बैठ करके खाना खाना हो, उसके लिए जगह नहीं है। क्या हमारे रेलवे स्टेशन सुविधा वाले होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? रेलवे पर आने वाले लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने सर्वे किया कि बनारस स्टेशन पे जितने पैसेंजर आते हैं, उनको बैठने के लिए सीट है क्या? और मैं हैरान हो गया कि बहुत कम सीट हैं। ज्यादातर बेचारे बूढ़े पैसेंजर भी घंटों तक रेलवे के इंतज़ार में खड़े रहते हैं। क्या उनको बैठने की सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने क्या किया, मेरे MPLAD का जो फंड था, मैंने रेलवे वालों को कहा, सबसे ज्यादा, जितनी बैंच लगा सकते हो, प्लेटफार्म पर लगाओ ताकि यहां गरीब से गरीब व्यक्ति को रेलवे के इंतज़ार में बैठा है तो उसको बैठने की जगह मिले। और मैंने सभी एमपी को कहा है, हिंदुस्तान भर में सभी रेलवे स्टेशन पर वो अपने MPLAD फंड में से पैसे लगा करके वहां पर वहां पर बैंचें डलवाएं ताकि रेलवे स्टेशन पर आने वाले पैसेंजर की सुविधा बढ़े। मुझे बताईए, ये सुविधा बढ़ेगी तो आशीर्वाद आपको मिलेगा कि नहीं मिलेगा? सीधी सीधी बात है, सब आपके फायदे के लिए हो रहा है भई। आप मुझे बताईए आज रेलवे स्टेशन जो हैं बड़े बड़े, heart of the city हैं! दो दो चार किलोमीटर लंबे स्टेशन हैं। नीचे तो आपकी मालिकी मुझे मंज़ूर है लेकिन रेलवे में आसमान में कोई इमारत बना देता है और रेलवे के खजाने में हजार करोड़, दो हजार करोड़ आज जाते हैं तो रेलवे मजबूत बनेगी कि नहीं बनेगी? वो प्लेटफार्म के ऊपर, हवा में, आकाश में अपनी इमारत बनाता है, रेलवे के फायदे में जाएगी कि नहीं जाएगी? मालिकी रेलवे की रहेगी कि नहीं रहेगी? रेलवे के कर्मचारियों का भला होगा कि नहीं होगा? हम जो विकास की दिशा ले करके चल रहे हैं, ये चल रहे हैं, privatization की हमारी दिशा नहीं है। हमें दुनिया भर का धन लाना है, रेलवे में लगाना है। रेलवे को बढ़ाना है, रेलवे को आगे ले जाना है और रेल के माध्यम से देश को आगे ले जाना है। हमारे देश में रेलवे को केवल यातायात का साधन माना गया था, हम रेलवे को देश के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के रूप में देखना चाहते हैं।

इसलिए मेरे भाईयों, बहनों मैं देश भर के रेल कर्मचारियों को आज आग्रह करता हूं- आइए! हिंदुस्तान में सबसे उत्तम सेवा कहां की तो रेलवे की ये सपने को हम साकार करें। इन दिनों जो स्वच्छता का अभियान हमने चलाया है, कभी-कभार ट्विटर पर खबरें सुनने को मिलती हैं कि साहब मै पहले भी रेलवे में जाता था अब भी जाता हूं लेकिन अब जरा डिब्बे साफ-सुथरे नजर आते हैं, सफाई दिखती है देखिए लोगों को कितना संतोष मिलता है, आशीर्वाद मिलता है और ये कोई उपकार नहीं है, हमारी जिम्मेवारी का हिस्सा है। It is a part of our duty. धीरे-धीरे उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारा पूरा रेलवे व्यवस्था तंत्र साफ-सुथरा क्यों न हो उसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब लोगों को कैसे मिले, मैं तो देख रहा हूं. रेलवे Infrastructure का उपयोग देश के विकास में इतना हो सकता है जिसकी किसे ने कल्पना नहीं की थी। हमारे देश में पोस्ट ऑफिस का नेटवर्क और रेलवे का नेटवर्क इन दोनों का अगर बुद्धिपूर्वक उपयोग किया जाए तो हमारे देश के ग्रामीण विकास की वह धरोहर बन सकते हैं।

मैं उदाहरण देता हूं- रेलवे के पास बिजली होती है, कहीं पर भी जाइए रेलवे के पास बिजली का कनेक्शन है। हिंदुस्तान की हर जगह पर। रेलवे के पास Infrastructure है। छोटे-छोटे गांव पर भी, छोटे-छोटे स्टेशन बने हुए हैं, भले ही वहां पर एक ट्रेन आती हो तो भी कोई न कोई वहां बैठा है, कोई न कोई व्यवस्था है। बाकी 24 घंटे वो खाली पड़ा रहता है उसी प्रकार से पोस्ट ऑफिस गांव-गांव तक उसका नेटवर्क है लेकिन वो पुराने जमाने की चल रही है उसमें बदलाव लाना है ये मैंने तय किया है और बदलाव लाने वाला हूं। अब मुझे बताइए गांव के अंदर जो रेलवे के स्टेशन हैं वहां पर दिन में मुश्किल से एक ट्रेन आती है मेरे हिसाब से हजारों की तादाद में ऐसी जगहें हैं, जहां बिजली हो, जहां Infrastructure हो वहीं पर अगर एक-दो कमरे और बना दिए जाएं और उन कमरों में Skill Development की Classes शुरू की जाएं क्योंकि Skill Development करना है तो Machine tools चाहिए और Machine tools के लिए बिजली चाहिए लेकिन बिजली गांव में नहीं है लेकिन रेलवे स्टेशन पर है, गांव के बच्चे Daily रेलवे स्टेशन पर आएंगे और रेलवे स्टेशन पर जो दो कमरें बने हुए होंगे उनमें जो Tools लगे हुए होंगे। Turner, Fitter के Course चलेंगे। एक साथ हिंदुस्तान में Extra पैसे खर्च किए बिना रेलवे की मदद से देश में हजारों की तादाद में Skill Development Centres खड़े हो सकते हैं कि नहीं।

मेरे भाईयों-बहनों थोड़ा दिमाग का उपयोग करने की जरुरत है, आप देखिए चीजें बदलने वाली हैं। मैं रेलवे के मित्रों से कहना चाहता हूं ऐसे स्टेशनों को Identify कीजिए जहां पर बिजली की सुविधा है वहां पर सरकार अपने खर्चे सेदो-तीन कमरे और बना दे और वहां पर उस इलाके के जो 500-1000 बच्चे हो उनके लिए Skill Development के Institutions चलें। ट्रेन ट्रेन का और Institutions, Institutions का काम करें रेलवे को Income हो जाए और गांव के बच्चों का Skill Development हो जाए। एक साथ हम अनेक व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

आज एक तो सोलर प्लांट भी इसके साथ जुड़ रहा है। आधुनिक Loco shed का Expansion हो रहा है, करीब 300 करोड़ रुपए जब पूरा होगा। 300 करोड़ रुपए की लागत से यहां Expansion होने के कारण इस क्षेत्र के अनेक नौजवानों को रोजगार की नई संभावनाएं बढ़ने वाली हैं।

मैं फिर एक बार रेल विभाग को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। श्रीमान सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में बहुत तेज गति से रेल का विकास होगा। आजादी के बाद जितना विकास हुआ है उससे ज्यादा विकास मुझे आने वाले दिनों में करना है। रेलवे के बैठे सभी मेरे साथियों आप सभी मेरे परिवारजन हैं और इसलिए मेरा आप पर हक बनता है, रेलवे वालों पर मेरा सबसे ज्यादा हक बनता है कि हम सब मिलकर के रेल को सेवा का एक बहुत बड़ा माध्यम बनाएं, सुविधा का माध्यम बनाएं और राष्ट्र की आर्थिक गति को तेज करने का एक माध्यम बना दें। उस विश्वास के साथ आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद.

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India is becoming a global hub for MRO, green shipping and maritime services: PM Modi at the Norway-India Business and Research Summit
May 18, 2026

Your Royal Highness,

Your Excellency Prime Minister,

दोनों देशों के व्यापार जगत के साथियों,

Norway और India के business और research leaders के बीच बातचीत करने का आज अवसर मिला है। इस समिट के भव्य आयोजन के लिए मैं नॉर्वे के प्रधान मंत्री का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

आज नॉर्वे और भारत के बिजनस और रिसर्च कम्यूनिटी के बीच होना, मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। कुछ साथियों को मैंने सुना, यह सुनकर विश्वास होता है कि हमारी पार्ट्नर्शिप की नींव बहुत मजबूत है।

यह केवल संभावनाओं की ही नहीं, यह एक proven पार्ट्नर्शिप है। आज जब फूड, फ्यूएल और फर्टिलाइज़र सिक्युरिटी ग्लोबल चैलेंज बन गए है, तो भारत और नॉर्वे इनका मिलकर समाधान कर रहें हैं। चाहे वो ओर्क्ला का भारत के फूड सेक्टर में निवेश हो, इक्विनोर से भारत को LPG और LNG सप्लाइ की बात हो, या यारा का भारत के फर्टिलाइज़र क्षेत्र में योगदान।

मुझे बहुत खुशी है, कि आप में से कई CEO’s, भारत के वाइब्रन्ट गुजरात और अन्य इन्वेस्टर summits में भी बड़े उत्साह के साथ हमेशा भाग लेते रहें हैं। अब हमे इस पार्ट्नर्शिप की इन्टेन्सिटी बढ़ाकर, इसे न्यू frontiers की ओर ले जाना चाहिए।

और हमें अब एक एक कदम से चलने से कोई बात नहीं बनने वाली है। हमें गति भी बढ़ानी होगी, और लक्ष्य भी बहुत ऊंचे तय करने होंगे।

Friends,

आप में से जो सब साथी भारत से जुड़े हुए हैं , और यहाँ जो भारत के साथ आपसे बातचीत हुई ... में समझता हूँ कि इससे बढ़िया कोई समय नहीं हो सकता है। आज एक ऐसा समय है जिसका सही समय का सही उपयोग का एक अवसर है।

अकतूबर 2025 में हमने यूरोपियन फ्री ट्रैड एसोसिएशन के साथ, ट्रैड एण्ड इकनॉमिक पार्ट्नर्शिप अग्रीमन्ट, यानि "टेपा” लागू किया। यह यूनीक और स्पेशल अग्रीमन्ट, हमारे बीच, टैलेंट, टेक्नॉलजी और म्यूचूअल ट्रस्ट का अग्रीमन्ट है।

इस अग्रीमन्ट के माध्यम से एफ्टा कंट्रीस से भारत में, अगले पंद्रह वर्षों में one hundred बिलियन डॉलर इनवेस्टमेंट, और one मिलियन jobs क्रीऐट करने का लक्ष्य है। यह ambitious target है, लेकिन achievable भी है। और भारत में आपके इन्वेस्टमेंट को outcomes में बदलना, में आपको विश्वास से कहता हूँ, यह हमारी गारंटी है।

Friends,

मैं दो सेक्टर का उल्लेख करूँगा, जो आपके लिए उपयोगी हो सकते है। भारत की rapidly growing middle class, नूट्रिशन और हेल्थ sectors में मेजर डिमैन्ड create कर रही है। नॉर्वे की फूड, फिशेरीस और health-care कम्पनीस इस demand को पूरा करने में भारत के मजबूत partners बन सकती हैं।

इसी तरह, क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत की aspiration को विश्व मे कोई मैच नहीं कर सकता। 2030 तक हमने 500 गिगा वॅाट क्लीन एनर्जी, और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन produce करने का टार्गेट रखा है। क्लीन एनर्जी इन्वेस्टमेंट नॉर्वे वेल्थ फंड की भी प्राथमिकता है। मैं नॉर्वे को भारत के क्लीन एनर्जी फ्यूचर में एहम हिस्सेदार बनने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

Friends,

रिफॉर्म, perform और ट्रैन्स्फॉर्म, इस मंत्र को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, तब ... अगर पीछे की तरफ देखें तो पिछले 12 वर्षों में हमने भारत का इकनॉमिक DNA पूरी तरह चेंज कर दिया है।

हम Compliances लगातार कम कर रहें हैं, और Ease of Doing Business उसको बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से बहुत proactive कदम लिए जा रहे हैं।

हाल ही में हमने, टैक्सेशन, लेबर कोड, और गवर्नेंस जैसे विषयों में, नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स किए हैं। अब भारत में मैन्युफैक्चरिंग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, मैं समझता हूँ की उत्तम से उत्तम अवसर हम प्रदान कर रहे हैं। हम कई महत्वपूर्ण सेक्टर में incentives भी दे रहे हैं।

इसका एक उज्ज्वल उदाहरण, हमारी शिपबिल्डिंग सेक्टर है। हम इस सेक्टर को एक strategic manufacturing sector के रूप में बहुत तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हम शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित कर रहें हैं, और end-to-end एकोसिस्टम बना रहें हैं।

shipbuilding के साथ-साथ, भारत MRO, ग्रीन शिपिंग, और maritime services- सभी में एक ग्लोबल हब बन रहा है।

आज नॉर्वे के करीब 10 पर्सेन्ट शिप इंडिया में बनती है। क्या हम इसको, अगले 5 वर्ष में, 25 पर्सेन्ट तक ले जा सकते हैं? मैं मानता हूँ मुश्किल काम नहीं हैं। अब गति पकड़ ली हैं। हमें बड़े टारगेट के साथ बड़े कदम की ज़रुरत हैं।

मैँ आप सभी को भारत की पॉलिसी स्टेबिलिटी और incentives का लाभ उठाते हुए, इस क्षेत्र में मेजर पार्टनर बनने के लिए invite करता हूँ।

Friends,

आज, प्रधान मंत्री जी और मैंने, भारत-नॉर्वे संबंधों को, एक ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप के रूप में elevate किया है। इस स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप से नॉर्वे की कम्पनीस को, क्रिटिकल मिनरल्स, AI, cyber, स्पेस, और डिफेन्स जैसे क्षेत्रों में भी पूरा पूरा समर्थन मिलेगा। इन सभी क्षेत्रों में, मैं आपको भारत को एक इनोवैशन और मैन्युफैक्चरिंग base बनाने के लिए invite करता हूँ।

Friends,

आज हम भारत-नॉर्वे संबंधों को, लैब to लैब यूनिवर्सिटी to यूनिवर्सिटी और scientist to scientist पार्ट्नर्शिप भी बना रहें है। भारत की CSIR, स्टार्ट-अप फंड, और Norway की रिसर्च संस्थाएं, आपस में सहयोग बढ़ा रहीं हैं। इससे दोनों देशों के रिसर्च और स्टार्ट-अप एकोसिस्टम कनेक्ट होंगे।

Friends,

नॉर्वे के लिए हमने भारत के इन्वेस्ट इंडिया मे एक dedicated ट्रैड फेसिलिटेशन डेस्क खोला है, ताकि हम specially उसको address कर सके। यह desk भारत में आपकी इन्वेस्टमेंट यात्रा को और सुगम, तेज और effective बनाएगा।

इस प्रकार की एक डेडिकेटेड व्यवस्था के कारण बहुत सुविधा रहती हैं। even राज्यों के साथ coordination करना है तो उसमें भी आपको सुविधा रहती हैं। और आपको आवश्यकता हैं, जो कुछ भी … निर्णय प्रक्रिया में आपको बदलाव की जरूरत होती हैं। वोह भी बहुत तेज़ी से हो सकता हैं। और इसीलिये हमने एक special व्यवस्था की हैं।

अब मेरा आप सभी को मुख्य मैसेज यही है- आइए, भारत में अपना स्कोप और ऐम्बिशन दोनों को बढ़ाइए। मैं भारत में आने केलिए आपको निमंत्रण दे रहा हूँ।

इन सबकी अनुभव भी आपको जानने को मिलेंगे। मैंने भी आपको अपने तरफ से विश्वास दिया हैं। और एक प्रकार से the ball is in your court.

Thank you.