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उपस्थित सभी महानुभाव और मेरे परिवार के सभी सदस्य, बंधु गण, मैंने ये कहा कि मेरे परिवार के! दो कारण से - एक तो मैं बनारस का हो गया हूं और दूसरा बचपन से एक ही याद रही है, वो है, रेल। इसलिए रेल से जुड़ा हर व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है और इस अर्थ में मैं परिवार जनों के बीच आज आया हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां दो महत्वपूर्ण प्रकल्प, एक तो 4,500 horse power capacity का डीज़ल इजिंन राष्ट्र को समर्पित हो रहा है और ये हमारी capability है। भारत को आगे बढ़ना है, तो इस बात पर बल देना होगा कि हम, हमारे आत्मबल पर, हमारी शक्ति के आधार पर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने का काम करें।

एक समय था, ये देश पेट भरने के लिए अन्न बाहर से लाता था। जब विदेशों से अन्न आता था, तब हमारा पेट भरता था। लेकिन इस देश में एक ऐसे महापुरूष हुए जिसने बेड़ा उठाया, देश के किसानों को ललकारा, आवाह्न किया, उनको प्रेरणा दी, जय जवान जय किसान का मंत्र दिया और देश के किसानों ने अन्न के भंडार भर दिए। आज हिंदुस्तान अन्न विदेशों में दे सके, ये ताकत आ गई है। वो काम किया था, इसी धरती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री ने। अगर हमारे किसान देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, अन्न के भंडार भर सकते हैं, तो देश की उस ताकत को पहचान करके हमने देश की उस युवा शक्ति का आवाह्न किया है - Make in India! हमारी जितनी आवश्यकताएं हैं, उसका निर्माण देश में क्यों नहीं होना चाहिए? क्या कमी है! जिस देश के पास होनहार नौजवान हों, 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के नौजवान हों, वो देश क्या नहीं कर सकता है?

इसलिए भाइयों, बहनों, लाल बहादुर शास्त्री का मंत्र था- जय जवान जय किसान और उन्होंने देश के अन्न के भंडार भर दिए। हम Make in India का मंत्र ले करके आए हैं इंडिजिनस! भारत की विधा से, भारत के संसाधनों से भारत अपनी चीज़ों को बनाए। आज, डिफेंस के क्षेत्र में हर चीज़ हम बाहर से लाते हैं। अश्रु गैस भी बाहर से आता है, बताईए! रोने के लिए भी बाहर से हमको साधन लाने पड़ते हैं। ये बदलना है मुझे और उसमें एक महत्वपूर्ण पहल आज आपके यहां से.. indigenous .. मुझे बताया गया, ये जो इंजिंन बना है, इसमें 96% कंपोनेंट यहीं पर बने हैं, आप ही लोगों ने बनाए हैं। मैंने कहा है कि वो 4% भी नहीं आना चाहिए। बताइए कैसे करोगे? उन्होंने कहा- हम बीड़ा उठाते हैं, हम करेंगे। डिफेंस..सब चीज़ें हम बाहर से ला रहे हैं, मोबाइल फोन बाहर से ला रहे हैं, बताईए! हमारे देश में हमें एक वायुमंडल बनाना है और इस पर हम कोशिश कर रहे हैं।

रेलवे! आप ने मुझे, जब से प्रधानमंत्री बना हूं, बार बार मेरे मुंह से रेलवे के बारे में सुना होगा। घूम फिर करके कहीं भी भाषण करता हूं तो रेलवे तो आ ही जाता है। एक तो बचपन से आदत है और दूसरा, मेरा स्पष्ट मानना है कि भारत में रेलवे देश को आगे ले जाने की इतनी बड़ी ताकत रखती है, लेकिन हमने उसकी उपेक्षा की है। मेरे लिए रेलवे एक बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप कल्पना कर सकते हो, इतना बड़ा infrastucture! इतनी बड़ी संख्या में manpower! इतना पुराना experience! और विश्व में सर्वाधिक लोगों को ले जाने लाने वाला ये इतना बड़ा organization हमारे पास हो। इसको अगर आधुनिक बनाया जाए, इसको अगर technology upgradation किया जाए, management perfection किया जाए। service oriented बनाया जाए तो क्या हिंदुस्तान की शक्ल सूरत बदलने में रेलवे काम नहीं आ सकती? भाइयों, बहनों मैं ये सपना देख करके काम कर रहा हूं। इसलिए रेलवे तो आगे बढ़ना ही है, लेकिन रेलवे के माध्यम से मुझे देश को आगे बढ़ाना है। और, अब तक क्या हुआ है, रेल मतलब- दो-पांच किलोमीटर नई पटरी डाल दो, एक आद दो नई ट्रेन चालू कर दो, इसी के आस-पास चला है। हम उसमें आमूल-चूल परिवर्तन चाहते हैं।

उसी प्रकार से human resource development. हम जानते हैं कि रेलवे में अभी भी बहुत लोगों को रोज़गार मिलने की संभावनाएं हैं। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे हिम्मत नहीं करते। अगर आर्थिक रूप से उनको मजबूत बनाया जाए तो हज़ारो नौजवान रेलवे अभी भी absorb कर सकता है, इतनी बड़ी ताकत है। इसलिए योग्य manpower के लिए हम चार युनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं, हिंदुस्तान के चार कोनों में। उस युनिवर्सिटी में जो आएंगे उन नौजवानों की शिक्षा दीक्षा होगी और उनको रेलवे के अंदर नौकरी मिलेगी। हमारे कई रेलवे के कर्मचारी हैं। उनकी संतानों को अगर वहां पर पढ़ने का अवसर मिलेगा तो अपने आप रेलवे में नौकरी करने के लिए उसकी सुविधा बढ़ जाएगी। उसको भटकना नहीं पड़ेगा। कुछ लोग अफवाहें फैलाते हैं। आप में से कई लोग होंगे जो 20 साल की उम्र के बाद, 22 साल की उम्र के बाद, पढ़ाई करने के बाद रेलवे से जुड़े होंगे। मैं जन्म से जुड़ा हुआ हूं। इसलिए आप लोगों से ज्यादा रेलवे के प्रति मेरा प्यार है, क्योंकि मेरा तो जीवन ही उसके कारण बना है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि रेलवे का privatization हो रहा है, वो सरासर गलत है। मुझ से ज्यादा इस रेलवे को कोई प्यार नहीं कर सकता और इसलिए ये जो गप्प चलाए जा रहे हैं, भाईयों, बहनों न ये हमारी इच्छा है, न इरादा है, न सोच है। हम इस दिशा में कभी जा नहीं सकते, आप चिंता मत कीजिए। हम क्या चाहते हैं - आज देश के गरीबों के लिए जो पैसा काम आना चाहिए, स्कूल बनाने के लिए, अस्पताल बनाने के लिए, रोड बनाने के लिए, गांव के अंदर गरीब आदमी की सुविधा के लिए, उन सरकारी खजाने के पैसे हर साल रेलवे में डालने पड़ते हैं। क्यों? रेलवे को जि़ंदा रखने के लिए। हम कितने साल तक हिंदुस्तान के गरीबों की तिजोरी से पैसे रेल में डालते रहेंगे? और अगर कहीं और से पैसा मिलता है, तो समझदारी इसमें है कि गरीबों के पैसे रेल में डालने के बजाए, जो धन्ना सेठ हैं, उनके पैसे रेल में डालने चाहिए। इसलिए कम ब्याज से आज दुनिया में पैसे मिलते हैं। हम उन पैसों को रेलवे के विकास के लिए लगाना चाहते हैं, जिसके कारण, आप जो रेलवे में काम कर रहे हैं, उनका भी भला होगा और हिंदुस्तान का भी भला होगा। रेलवे का privatization नहीं होने वाला है।

अब मुझे बताईए, ये युनियन वालों को मैं पूछना चाहता हूं कि रूपया रेलवे में आए, डालर आए, पाउंड आए, अरे आपको क्या फर्क पड़ता है भई! आपका तो पैसा आ रहा है। दूसरी बात, रेलवे के स्टेशन जितने हैं, हमारे.. अब मुझे बताइए, मुझे रेलवे युनिवर्सिटी बनानी है..अगर रेलवे युनिवर्सिटी में मुझे जापान से मदद मिलती है, चाइना से मदद मिलती है, टेक्नॉलोजी की मदद मिलती है, expertise की मदद मिलती है, तो लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? ज़रा बताईए, सच्चा बोलिए, दिल से बोलिए- लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? यही काम ये सरकार करना चाहती है भाईयों! और इतना ही नहीं इतना ही नहीं. आज हम देखें हमारे रेलवे स्टेशन कैसे हैं? रेलवे स्टेशन पर रेलवे में 12-12 घंटे प्लेटफार्म पर काम करने वाले रेलवे के कर्मचारी को बैठने के लिए जगह नहीं होती है। ये सच्चाई है कि नहीं है? उसको बेचारे को बैठ करके खाना खाना हो, उसके लिए जगह नहीं है। क्या हमारे रेलवे स्टेशन सुविधा वाले होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? रेलवे पर आने वाले लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने सर्वे किया कि बनारस स्टेशन पे जितने पैसेंजर आते हैं, उनको बैठने के लिए सीट है क्या? और मैं हैरान हो गया कि बहुत कम सीट हैं। ज्यादातर बेचारे बूढ़े पैसेंजर भी घंटों तक रेलवे के इंतज़ार में खड़े रहते हैं। क्या उनको बैठने की सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने क्या किया, मेरे MPLAD का जो फंड था, मैंने रेलवे वालों को कहा, सबसे ज्यादा, जितनी बैंच लगा सकते हो, प्लेटफार्म पर लगाओ ताकि यहां गरीब से गरीब व्यक्ति को रेलवे के इंतज़ार में बैठा है तो उसको बैठने की जगह मिले। और मैंने सभी एमपी को कहा है, हिंदुस्तान भर में सभी रेलवे स्टेशन पर वो अपने MPLAD फंड में से पैसे लगा करके वहां पर वहां पर बैंचें डलवाएं ताकि रेलवे स्टेशन पर आने वाले पैसेंजर की सुविधा बढ़े। मुझे बताईए, ये सुविधा बढ़ेगी तो आशीर्वाद आपको मिलेगा कि नहीं मिलेगा? सीधी सीधी बात है, सब आपके फायदे के लिए हो रहा है भई। आप मुझे बताईए आज रेलवे स्टेशन जो हैं बड़े बड़े, heart of the city हैं! दो दो चार किलोमीटर लंबे स्टेशन हैं। नीचे तो आपकी मालिकी मुझे मंज़ूर है लेकिन रेलवे में आसमान में कोई इमारत बना देता है और रेलवे के खजाने में हजार करोड़, दो हजार करोड़ आज जाते हैं तो रेलवे मजबूत बनेगी कि नहीं बनेगी? वो प्लेटफार्म के ऊपर, हवा में, आकाश में अपनी इमारत बनाता है, रेलवे के फायदे में जाएगी कि नहीं जाएगी? मालिकी रेलवे की रहेगी कि नहीं रहेगी? रेलवे के कर्मचारियों का भला होगा कि नहीं होगा? हम जो विकास की दिशा ले करके चल रहे हैं, ये चल रहे हैं, privatization की हमारी दिशा नहीं है। हमें दुनिया भर का धन लाना है, रेलवे में लगाना है। रेलवे को बढ़ाना है, रेलवे को आगे ले जाना है और रेल के माध्यम से देश को आगे ले जाना है। हमारे देश में रेलवे को केवल यातायात का साधन माना गया था, हम रेलवे को देश के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के रूप में देखना चाहते हैं।

इसलिए मेरे भाईयों, बहनों मैं देश भर के रेल कर्मचारियों को आज आग्रह करता हूं- आइए! हिंदुस्तान में सबसे उत्तम सेवा कहां की तो रेलवे की ये सपने को हम साकार करें। इन दिनों जो स्वच्छता का अभियान हमने चलाया है, कभी-कभार ट्विटर पर खबरें सुनने को मिलती हैं कि साहब मै पहले भी रेलवे में जाता था अब भी जाता हूं लेकिन अब जरा डिब्बे साफ-सुथरे नजर आते हैं, सफाई दिखती है देखिए लोगों को कितना संतोष मिलता है, आशीर्वाद मिलता है और ये कोई उपकार नहीं है, हमारी जिम्मेवारी का हिस्सा है। It is a part of our duty. धीरे-धीरे उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारा पूरा रेलवे व्यवस्था तंत्र साफ-सुथरा क्यों न हो उसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब लोगों को कैसे मिले, मैं तो देख रहा हूं. रेलवे Infrastructure का उपयोग देश के विकास में इतना हो सकता है जिसकी किसे ने कल्पना नहीं की थी। हमारे देश में पोस्ट ऑफिस का नेटवर्क और रेलवे का नेटवर्क इन दोनों का अगर बुद्धिपूर्वक उपयोग किया जाए तो हमारे देश के ग्रामीण विकास की वह धरोहर बन सकते हैं।

मैं उदाहरण देता हूं- रेलवे के पास बिजली होती है, कहीं पर भी जाइए रेलवे के पास बिजली का कनेक्शन है। हिंदुस्तान की हर जगह पर। रेलवे के पास Infrastructure है। छोटे-छोटे गांव पर भी, छोटे-छोटे स्टेशन बने हुए हैं, भले ही वहां पर एक ट्रेन आती हो तो भी कोई न कोई वहां बैठा है, कोई न कोई व्यवस्था है। बाकी 24 घंटे वो खाली पड़ा रहता है उसी प्रकार से पोस्ट ऑफिस गांव-गांव तक उसका नेटवर्क है लेकिन वो पुराने जमाने की चल रही है उसमें बदलाव लाना है ये मैंने तय किया है और बदलाव लाने वाला हूं। अब मुझे बताइए गांव के अंदर जो रेलवे के स्टेशन हैं वहां पर दिन में मुश्किल से एक ट्रेन आती है मेरे हिसाब से हजारों की तादाद में ऐसी जगहें हैं, जहां बिजली हो, जहां Infrastructure हो वहीं पर अगर एक-दो कमरे और बना दिए जाएं और उन कमरों में Skill Development की Classes शुरू की जाएं क्योंकि Skill Development करना है तो Machine tools चाहिए और Machine tools के लिए बिजली चाहिए लेकिन बिजली गांव में नहीं है लेकिन रेलवे स्टेशन पर है, गांव के बच्चे Daily रेलवे स्टेशन पर आएंगे और रेलवे स्टेशन पर जो दो कमरें बने हुए होंगे उनमें जो Tools लगे हुए होंगे। Turner, Fitter के Course चलेंगे। एक साथ हिंदुस्तान में Extra पैसे खर्च किए बिना रेलवे की मदद से देश में हजारों की तादाद में Skill Development Centres खड़े हो सकते हैं कि नहीं।

मेरे भाईयों-बहनों थोड़ा दिमाग का उपयोग करने की जरुरत है, आप देखिए चीजें बदलने वाली हैं। मैं रेलवे के मित्रों से कहना चाहता हूं ऐसे स्टेशनों को Identify कीजिए जहां पर बिजली की सुविधा है वहां पर सरकार अपने खर्चे सेदो-तीन कमरे और बना दे और वहां पर उस इलाके के जो 500-1000 बच्चे हो उनके लिए Skill Development के Institutions चलें। ट्रेन ट्रेन का और Institutions, Institutions का काम करें रेलवे को Income हो जाए और गांव के बच्चों का Skill Development हो जाए। एक साथ हम अनेक व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

आज एक तो सोलर प्लांट भी इसके साथ जुड़ रहा है। आधुनिक Loco shed का Expansion हो रहा है, करीब 300 करोड़ रुपए जब पूरा होगा। 300 करोड़ रुपए की लागत से यहां Expansion होने के कारण इस क्षेत्र के अनेक नौजवानों को रोजगार की नई संभावनाएं बढ़ने वाली हैं।

मैं फिर एक बार रेल विभाग को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। श्रीमान सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में बहुत तेज गति से रेल का विकास होगा। आजादी के बाद जितना विकास हुआ है उससे ज्यादा विकास मुझे आने वाले दिनों में करना है। रेलवे के बैठे सभी मेरे साथियों आप सभी मेरे परिवारजन हैं और इसलिए मेरा आप पर हक बनता है, रेलवे वालों पर मेरा सबसे ज्यादा हक बनता है कि हम सब मिलकर के रेल को सेवा का एक बहुत बड़ा माध्यम बनाएं, सुविधा का माध्यम बनाएं और राष्ट्र की आर्थिक गति को तेज करने का एक माध्यम बना दें। उस विश्वास के साथ आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद.

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জাতীয় শিক্ষানীতি - ২০২০র প্রথম বার্ষিকী উদযাপন অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
July 29, 2021
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এই উপলক্ষে তিনি একাধিক গুরুত্বপূর্ণ উদ্যোগের সূচনা করেছেন
জাতীয় উন্নয়নের ‘মহাযজ্ঞে’ জাতীয় শিক্ষানীতি একটি বড় বিষয় : প্রধানমন্ত্রী
সমগ্র দেশ আমাদের যুব সম্প্রদায়ের পাশে থেকে প্রত্যাশা পূরণে অঙ্গীকারবদ্ধ – জাতীয় শিক্ষানীতি এই আশ্বাস দেয় : প্রধানমন্ত্রী
সরলতা এবং চাপমুক্ত পরিবেশ জাতীয় শিক্ষানীতির গুরুত্বপূর্ণ বৈশিষ্ট্য : প্রধানমন্ত্রী
আটটি রাজ্যের ১৪টি ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজ পাঁচটি ভারতীয় ভাষায় পঠনপাঠন শুরু করেছে : প্রধানমন্ত্রী
শিক্ষাদানের মাধ্যম হিসেবে মাতৃভাষা দরিদ্র, গ্রামীণ ও আদিবাসী এলাকা থেকে উঠে আসা ছাত্রছাত্রীদের মনে আস্থার সঞ্চার করবে : প্রধানমন্ত্রী

নমস্কার !
আজ এই অনুষ্ঠানে আমার সঙ্গে কেন্দ্রিয় মন্ত্রিসভার যে সমস্ত সহযোগী যুক্ত হয়েছেন, বিভিন্ন রাজ্যের মাননীয় রাজ্যপাল, সকল সম্মানিত মুখ্যমন্ত্রী, উপমুখ্যমন্ত্রী, বিভিন্ন রাজ্য সরকারের মন্ত্রীগণ, উপস্থিত বিশিষ্ট শিক্ষাবিদগন, অধ্যাপকগন, সমস্ত অভিভাবক এবং আমার প্রিয় যুব বন্ধুরা !
নতুন জাতীয় শিক্ষানীতির এক বছর পূর্তি উপলক্ষ্যে সকল দেশবাসী এবং বিশেষ করে সকল ছাত্রছাত্রীদের অনেক অনেক শুভ কামনা। বিগত ১ বছরে দেশে আপনাদের মতো সমস্ত মান্য গণ্য ব্যক্তিগণ, শিক্ষক – শিক্ষিকাগণ, প্রধান শিক্ষক – শিক্ষিকাগণ, নীতি প্রণয়নকারীগণ এই জাতীয় শিক্ষানীতিকে বাস্তবায়িত করার জন্য অনেক পরিশ্রম করেছেন। করোনার এই সঙ্কটকালেও লক্ষ লক্ষ নাগরিকদের থেকে শিক্ষক – শিক্ষিকাদের থেকে, বিভিন্ন রাজ্য সরকার ও স্বায়ত্তশাসিত সংস্থাগুলি থেকে পরামর্শ নিয়ে টাস্কফোর্স গঠন করে নতুন শিক্ষানীতিকে পর্যায়ক্রমিকভাবে প্রয়োগ করা হচ্ছে। বিগত এক বছরে জাতীয় শিক্ষানীতিকে ভিত্তি করে অনেক বড় বড় সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে। এই ক্রমেই আজ আমার অনেক নতুন প্রকল্প এবং নতুন উদ্যোগের শুভ সূচনা করার সৌভাগ্য হয়েছে।
বন্ধুগণ,
এই গুরুত্বপূর্ণ সুযোগ এমন সময় এসেছে, যখন দেশ স্বাধীনতার ৭৫তম বর্ষপূর্তি উপলক্ষ্যে অমৃত মহোৎসব পালন করতে শুরু করেছে। আজ থেকে কয়েক দিন পর ১৫ই আগস্টে আমরা স্বাধীনতার ৭৫তম বর্ষে প্রবেশ করতে চলেছি। এক ভাবে, এই নতুন জাতীয় শিক্ষানীতির প্রয়োগ, স্বাধীনতার অমৃত মহোৎসবের প্রধান অংশ হয়ে উঠেছে। এত বড় মহা পর্বের মাঝে জাতীয় শিক্ষানীতির মাধ্যমে আজ শুরু হওয়া প্রকল্পগুলি নতুন ভারত নির্মাণে অনেক বড় ভূমিকা পালন করবে। ভারতের যে সোনালী ভবিষ্যতের সংকল্প নিয়ে আজ আমরা স্বাধীনতার অমৃত মহোৎসব পালন করছি, সেই ভবিষ্যতের পথে আজকের নতুন প্রজন্মই আমাদের নিয়ে যাবে। ভবিষ্যতে আমরা কতটা এগিয়ে যাবো, কতটা উচ্চতা অর্জন করবো, এই সমস্ত বিষয়টি নির্ভর করবে নবীন প্রজন্মের ওপর। আমরা আমাদের নবীন প্রজন্মকে বর্তমানে, অর্থাৎ আজ কী রকম শিক্ষা দিচ্ছি, কী রকম পথ নির্দেশ দিচ্ছি। সেজন্য আমি মনে করি ভারতের নতুন জাতীয় শিক্ষানীতি দেশ গঠনের মহাযজ্ঞে বড় উপাদানগুলির মধ্যে অন্যতম। আর সেজন্য দেশ এই শিক্ষানীতিকে এতটা আধুনিক করে তুলেছে, এতটা ভবিষ্যতের জন্য প্রস্তুত করে রেখেছে, আজ এই অনুষ্ঠানের সঙ্গে যারা যুক্ত হয়েছেন, অধিকাংশ গণ্যমান্য ব্যক্তিগণ নতুন জাতীয় শিক্ষানীতির খুঁটিনাটি সম্পর্কে পরিচিত। কিন্তু এটা কত বড় মিশন, তার অনুভব আমাদের বার বার মনে করতেই হবে।
বন্ধুগণ,
সারা দেশ থেকে আমাদের অনেক ছাত্রছাত্রী যুব বন্ধুরাও এই অনুষ্ঠানে আমাদের সঙ্গে রয়েছেন। যদি এই বন্ধুদের সঙ্গে আমরা তাদের আকাঙ্খা সম্পর্কে, স্বপ্নগুলি সম্পর্কে জিজ্ঞেস করি, তাহলে আপনারা দেখবেন, যে প্রত্যেক যুবকের মনে একটি নতুনত্ব আছে, এই নতুন প্রাণশক্তি আছে। আমাদের যুব শক্তি পরিবর্তনের জন্য সম্পূর্ণ রূপে প্রস্তুত। তাঁরা আর অপেক্ষা করতে চান না। আমরা সকলে দেখেছি, করোনাকালে কিভাবে আমাদের শিক্ষা ব্যবস্থার সামনে এতো বড় সমস্যার এসে দাঁড়িয়েছে। ছাত্রছাত্রীদের পড়াশোনার, জীবনশৈলী বদলে গেছে। কিন্তু দেশের ছাত্রছাত্রীরা দ্রুত গতিতে এই পরিবর্তনকে আপন করে নিয়েছে। অনলাইন শিক্ষা এখন একটি সহজ চলনে পরিণত হতে চলেছে। শিক্ষা মন্ত্রকও এর জন্য অনেক চেষ্টা করেছে। মন্ত্রক একটি দীক্ষা প্ল্যাটফর্ম চালু করেছে। নিজেরাই এই পোর্টালে পাঠ্যক্রম চালু করেছেন, আর আমাদের ছাত্রছাত্রীরা পূর্ণ উদ্যোমে এর অংশ হয়ে উঠেছেন। আমাকে বলা হয়েছে, যে দীক্ষা পোর্টালে বিগত এক বছরে ২৩০০ কোটিরও বেশি হিট হওয়া এটা প্রমাণ করে, যে এই উদ্যোগ কতটা উপযোগী হয়ে উঠেছে। আজও এতে প্রত্যেক দিন প্রায় ৫ কোটি হিট হচ্ছে।
বন্ধুগণ,
একবিংশ শতাব্দীর আজকের যুব সম্প্রদায় নিজেদের ব্যবস্থা, নিজেদের বিশ্ব নিজেরাই নিজেদের হিসেবে গড়ে তুলতে চায়। সেজন্য তাদের “এক্সপ্রোজার চাই”, তাদের পুরোনো বন্ধনগুলি থেকে, খাঁচাগুলি থেকে মুক্তি চাই। আপনারা দেখুন, আজ ছোট ছোট গ্রাম থেকে, ছোট জনপথ থেকে উঠে আসা যুবক – যুবতীরা কত অসাধারণ কাজ করছেন। এতো দূর দুরান্তের এবং সাধারণ পরিবার থেকে উঠে আসা যুবক – যুবতীরা আজ টোকিও অলিম্পিক্সে দেশের পতাকাকে উচ্চে তুলে ধরছেন, ভারতকে নতুন পরিচয় দিচ্ছেন। তেমনি কোটি কোটি যুবক – যুবতী আজ ভিন্ন ভিন্ন ক্ষেত্রে অসাধারণ কাজ করছেন। অসাধারণ লক্ষ্যের ভিত্তি স্থাপন করছেন। কেউ কলা ও সংস্কৃতির ক্ষেত্রে পুরাতন এবং আধুনিক ফিউশনের মাধ্যমে নতুন নতুন ধারার জন্ম দিচ্ছেন। আবার কেউ রোবটিক্সের ক্ষেত্রে কখন যাকে সাইফাই মনে করা হতো, সেরকম কল্পনাগুলিকে বাস্তবে রূপ দিচ্ছেন। কেউ কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তার ক্ষেত্রে মানবিক ক্ষমতাগুলিকে নতুন উচ্চতা প্রদান করছেন। আবার কেউ মেশিন লার্নিং এর ক্ষেত্রে নতুন মাইল ফলক স্থাপন করছেন। অর্থাৎ প্রতিটি ক্ষেত্রে ভারতের যুব সম্প্রদায় নিজেদের বিজয় পতাকা নিয়ে এগিয়ে চলেছেন। এই যুব সম্প্রদায়ই ভারতের ‘স্টার্ট-আপ ইকো সিস্টেম’এ বৈপ্লবিক পরিবর্তন আনছেন। ইন্ড্রাস্টি ৪.০ –তে ভারতকে নেতৃত্ব প্রদানের জন্য প্রস্তুত করছেন। আর ডিজিটাল ইন্ডিয়াকে নতুন গতি দিচ্ছেন। আপনারা কল্পনা করুন, এই যুব সম্প্রদায় যখন তাদের স্বপ্নের অনুরূপ আবহ পাবে, তখন এদের শক্তি বেশি বেড়ে যাবে। আর সে জন্য, নতুন জাতীয় শিক্ষানীতি যুব সস্প্রদায়কে এই বিশ্বাস এনে দিয়েছে যে, দেশ এখন সম্পূর্ণ রূপে তাদের সঙ্গে রয়েছে, তাদেরকে সাহস যোগাচ্ছে। একটু আগেই যে কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তার প্রোগ্রাম উদ্বোধন করা হল, তাও আমাদের যুব শক্তিকে ভবিষ্যৎ মুখি করে তুলবে, কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা পরিচালিত অর্থনীতির অনেক পথ খুলবে। শিক্ষায় এই ডিজিটাল বিপ্লব, গোটা দেশে একসঙ্গে এসেছে। গ্রাম, শহর সর্বত্র মানুষ যাতে সমানরূপে ডিজিটাল লার্নিংএর সাথে যাতে যুক্ত হতে পারে, সেদিকেও বিশেষ লক্ষ্য রাখা হয়েছে।‘ ন্যাশনাল ডিজিটাল এডুকেশন আর্কিটেকচার’ অর্থাৎ এনডিপিএআর ‘ন্যাশনাল এডুকেশন টেকনোলজি ফোরাম’ বা এনইটিএফ এই লক্ষ্যে গোটা দেশে ডিজিটাল এবং প্রযুক্তিগত ফ্রেমওয়ার্ক গড়ে তোলার ক্ষেত্রে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবে। যুবমন যে দিশাতেই ভাবনা চিন্তা করতে চায়, খোলা আকাশে যেভাবে উড়তে চায়, দেশের নতুন শিক্ষা ব্যবস্থা তাদের জন্য তেমনি সুযোগ প্রদান করবে।

 

বন্ধুগণ,
বিগত এক বছরে আপনারাও এটা অনুভব করেছেন, যে জাতীয় শিক্ষানীতিকে কোনো রকম চাপ থেকে মুক্ত রাখা হয়েছে। যে উন্মুক্ততা নীতি নির্ধারণের পর্যায়ে রয়েছে, সেই উন্মুক্ততা ছাত্রদের পাওয়া বিকল্পের মধ্যেও রয়েছে। এখন ছাত্রছাত্রীরা কতটা পড়াশুনা করবে, কতটা সময় ধরে পড়বে, এটা শুধুই সংশ্লিষ্ট বোর্ড এবং বিশ্ববিদ্যালয় ঠিক করবে না। এই সিদ্ধান্ত গ্রহণে ছাত্রছাত্রীদেরও ভূমিকা থাকবে। “মাল্টিপল এন্ট্রি অ্যান্ড এক্সিট” –এর যে ব্যবস্থা আজ শুরু হয়েছে, এটি ছাত্রছাত্রীদের একই ক্লাস এবং একই কোর্সে বাধা পড়ে থাকার ও কোনও রকম বাধ্যবাধকতা থেকে মুক্ত করে দিয়েছে। আধুনিক প্রযুক্তি নির্ভর “অ্যাকাডেমিক ব্যাঙ্ক অফ ক্রেডিট” এই ব্যবস্থা থেকে এই লক্ষ্যে ছাত্রছাত্রীদের জন্য বৈপ্লবিক পরিবর্তন নিয়ে আসবে। এখন প্রত্যেক যুবক যুবতী নিজেদের রুচি অনুসারে, নিজেদের সুবিধা অনুসারে যে কোনো সময় একটি স্ট্রিম বেছে নিতে পারে, আবার ছাড়তেও পারে। এখন অনেক কোর্স নির্বাচন করার সময় এই ভয় থাকবে না, যে যদি আমাদের সিদ্ধান্ত ভুল হয়, তাহলে কী হবে? এভাবে “স্ট্র্যাকচার অ্যাসেসমেন্ট ফর অ্যানালাইজিং লার্নিং লেভেলস” অর্থাৎ সফল হওয়ার মাধ্যমে ছাত্রছাত্রীদের যোগ্যতা মান নির্ধারণেও বৈজ্ঞানিক ব্যবস্থা শুরু হয়েছে। এই ব্যবস্থা আগামী সময়ে ছাত্রছাত্রীদের পরীক্ষার ভয় থেকে মুক্তি এনে দেবে। ছাত্রছাত্রীরা যখন এই ভয় মন থেকে বের করে দিতে পারবে, তখন ওরা নতুন নতুন দক্ষতা অর্জনের সাহস ও নতুন নতুন উদ্ভাবনের প্রতিযোগিতা শুরু হবে। সম্ভাবনাগুলির অসীম বিস্তার ঘটবে। সেজন্য আমি আবার চাইবো, যে নতুন জাতীয় শিক্ষানীতির মাধ্যমে যে নতুন কর্মসূচি শুরু হয়েছে, তা ভারতের ভাগ্য পরিবর্তনে সামর্থ্য রাখে।
বন্ধুগণ,
আমরা পূর্ববর্তী দশকগুলিতে এই আবহ দেখেছি, যখন মনে করা হতো, ভালো পড়াশোনা করার জন্য বিদেশে যেতেই হয়। কিন্তু উন্নত পড়াশোনার জন্য বিদেশ থেকে ছাত্রছাত্রীরা ভারতে এলে বিদেশের শ্রেষ্ঠ প্রতিষ্ঠানগুলি যাতে ভারতে আসে, সেটা এখন আমরা দেখবো। এই তথ্য অনেক উৎসাহবর্ধক। দেশের ১৫০ –এরও বেশি বিশ্ববিদ্যালয়ে অফিস অফ ইন্টারন্যাশনাল অ্যাফেয়ার্স স্থাপন করা হয়েছে। ভারতের উচ্চশিক্ষা প্রতিষ্ঠানগুলি যাতে আন্তর্জাতিক স্তরে গবেষণা এবং শিক্ষাক্ষেত্রে এগিয়ে যেতে পারে তা সুনিশ্চিত করতে আজ নতুন গাইডলাইন্সও জারি করা হয়েছে।
বন্ধুগণ,
আজ যে সব নতুন সম্ভাবনা জন্ম নিচ্ছে, সেগুলিকে বাস্তবায়িত করতে আমাদের যুব সম্প্রদায়কে বিশ্ব থেকে অবশ্যই এক কদম এগিয়ে থাকতে হবে। এক পা এগিয়ে যাওয়ার কথা ভাবতে হবে। স্বাস্থ্য হোক কিংবা প্রতিরক্ষা, পরিকাঠামো থেকে শুরু করে প্রযুক্তি পর্যন্ত দেশকে প্রত্যেক দিশায় সমর্থ ও আত্মনির্ভর করে তুলতে হবে। আত্মনির্ভর ভারতের পথ দক্ষতা উন্নয়ন ও প্রযুক্তির মাধ্যমেই এগোয়। যে ক্ষেত্রে এনইপি –তে বিশেষ লক্ষ্য রাখা হয়েছে। আমি অত্যন্ত আনন্দিত যে বিশ্বে বিগত একমাসে ১২০০রও বেশি উচ্চশিক্ষা প্রতিষ্ঠানে দক্ষতা উন্নয়নের সঙ্গে যুক্ত কয়েকশো নতুন কোর্সকে মঞ্জুর করা হয়েছে।
বন্ধুগণ,
শিক্ষার বিষয়ে পূজনীয় বাপু মহাত্মা গান্ধীজি বলতেন, জাতীয় শিক্ষার প্রকৃত অর্থ জাতীয় হওয়ার জন্য জাতীয় পরিস্থিতিগুলিকে প্রতিফলিত করা উচিত। বাপুর এই দূরদৃষ্টি সম্পন্ন ভাবনাকে বাস্তবায়িত করতে স্থানীয় ভাষাগুলিতে মাতৃভাষায় শিক্ষার ভাবনা এনইপি –তে রাখা হয়েছে। এখন উচ্চশিক্ষায় ‘মিডিয়াম অফ ইনস্ট্রাকশন’ এর জন্য স্থানীয় ভাষাতেও একটি বিকল্প থাকবে। আমি অত্যন্ত আনন্দিত যে, ৮টি রাজ্যের ১৪টি ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজ ৫টি ভারতীয় ভাষায় – হিন্দি, তামিল, তেলুগু, মারাঠী এবং বাংলায় ইঞ্জিনিয়ারিং এর পাঠ্যক্রম শুরু করতে চলেছে। ইঞ্জিনিয়ারিং পাঠ্যক্রমকে ১১টি ভারতীয় ভাষায় অনুবাদের জন্য একটি টুলও ডেভলপ করা হয়েছে। আঞ্চলিক ভাষাগুলিতে নিজেদের পড়াশোনা শুরু করতে চলেছেন যে ছাত্রছাত্রীরা, তাদেরকে আমি বিশেষ অভিনন্দন জানাতে চাই। এর সব থেকে বড় লাভ দেশের গরীব জনসাধারণ পাবেন। গ্রাম ও জনপদগুলিতে বসবাসকারী মধ্যবিত্ত ছাত্রছাত্রীরা দলিত, পিছিয়ে পড়া এবং আদিবাসী ভাই – বোনেরা এর দ্বারা উপকৃত হবেন। এই পরিবারগুলি থেকে উঠে আসা ছেলে মেয়েরা সব থেকে বেশি ভাষা বিভাজনের সম্মুখীন হয়। সব থেকে বেশি ক্ষতি এই পরিবারগুলির মেধাবী ছাত্রছাত্রীদের কাঁধে তুলে নিতে হয়। মাতৃভাষায় পড়াশোনার ফলে গরীব ছেলে মেয়েদের আত্মবিশ্বাস বাড়বে, তাদের সামর্থ্য এবং প্রতিভার সঙ্গে ন্যায় হবে।
বন্ধুগণ,
প্রারম্ভিক শিক্ষার ক্ষেত্রেও মাতৃভাষাকে উৎসাহ যোগানোর কাজ শুরু হয়েছে। যে ‘বিদ্যা প্রবেশ’ প্রোগ্রাম আজ উদ্বোধন করা হল, সেটিরও এখানে অনেক বড় ভূমিকা রয়েছে। প্লে স্কুলের যে বড় ধারণা এখন পর্যন্ত বড় শহরগুলিতেই সীমাবদ্ধ রয়েছে, বিদ্যা প্রবেশের মাধ্যমে তা এখন দূর দুরান্তের বিদ্যালয়গুলিতেও ছড়িয়ে পড়বে, গ্রামে গ্রামে এর প্রয়োগ হবে। এই অনুষ্ঠান আগামী দিনে ‘ইউনিভার্সাল’ প্রোগ্রাম রূপে চালু হবে। রাজ্যগুলিও নিজেদের প্রয়োজন অনুসারে একে প্রয়োগ করবে। অর্থাৎ দেশের যে কোনো অংশের শিশুরা তা সে গরীব ঘরের হোক কিংবা ধনী ঘরের, তার পড়াশোনা, খেলা এবং হাসির মাধ্যমেই শুরু হবে, সহজভাবে হবে, এই লক্ষ্যে, এই প্রচেষ্টা জারি থাকবে।
বন্ধুগণ,
আজ আর একটি কাজ হল যা আমার হৃদয়ের খুব কাছের, অত্যন্ত সংবেদনশীল। আজ দেশে ৩ লক্ষেরও বেশি শিশু এমন রয়েছেন, যাদের শিক্ষার জন্য সাংকেতিক ভাষার প্রয়োজন পড়ে। এটা মাথায় রেখে ভারতীয় সাইন ল্যাঙ্গুয়েজগুলিকে প্রথমবার একটি ভাষা বিষয় অর্থাৎ একটি সাবজেক্টের মর্যাদা দেওয়া হয়েছে। এখন ছাত্রছাত্রীরা একে একটি ভাষারূপে পড়তে পারবেন। সেজন্যে ভারতীয় সাইন ল্যাঙ্গুয়েজ অনেক উৎসাহ পাবে। আমাদের দিব্যাঙ্গ বন্ধুদেরও অনেক সুবিধা হবে।
বন্ধুগণ,
আপনারাও জানেন যে, কেন ছাত্র কিংবা ছাত্রীদের সম্পূর্ণ পড়াশোনায়, তাদের জীবনে বড় প্রেরণা হন অধ্যাপকরা। আমাদের দেশে বলা হয়,
‘গুরৌ ন প্রাপ্যতে ইয়দ তৎ,
না অন্য অত্রাপি লভ্যতে’।
অর্থাৎ যিনি গুরু থেকে কিছু পান না, তিনি কোথাও থেকে কিছু পাবেন না। অর্থাৎ এমন কিছু নেই, যা একজন ভালো গুরু ভালো শিক্ষক পাওয়ার পর দুর্লভ হয়ে উঠবে। সেজন্য জাতীয় শিক্ষানীতির পরিকল্পনা, খসড়া তৈরি থেকে শুরু করে বাস্তবায়ন পর্যন্ত প্রত্যেক পর্যায়ে আমাদের শিক্ষক শিক্ষিকাদেরকেই সক্রিয়ভাবে এই অভিযানের অংশ করে তোলা হয়েছে। আজ উদ্বোধিত ‘নিষ্ঠা ২.০’ প্রোগ্রামও এই লক্ষ্যে একটি গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবে। এই কর্মসূচীর মাধ্যমে দেশের শিক্ষকদের আধুনিক প্রয়োজনের হিসেবে প্রশিক্ষণও দেওয়া হবে। আর তাঁরা বিভাগগুলিকেও নিজেদের পরামর্শ দিতে পারবেন। আপনাদের মতো প্রত্যেক শিক্ষক ও শিক্ষাবিদের প্রতি আমার অনুরোধ, এই প্রচেষ্টাগুলিতে আপনারা যত বেশি জন সম্ভব অংশগ্রহণ করুন এবং অধিক থেকে অধিকতর অবদান রাখুন। আপনাদের প্রত্যেকেরই শিক্ষা ক্ষেত্রে এতো অভিজ্ঞতা রয়েছে, আপনারা ব্যাপক অনুভবের ধারক; সেজন্য যখন আপনারা প্রচেষ্টা করবেন, তখন এই প্রচেষ্টা দেশকে অনেক এগিয়ে নিয়ে যাবে। আমি মনে করি এই কালখন্ডে আমরা যে ভূমিকাই পালন করি না কেন, আমাদের এত বড় পরিবর্তনের সাক্ষী হয়ে ওঠার মতো সৌভাগ্য হয়েছে। এই পরিবর্তনে আমরা সক্রিয় ভূমিকা পালন করছি। আপনাদের জীবনে এই সোনালী সুযোগ এসেছে, যে আপনারা দেশ এবং ভবিষ্যতের নির্মাণ করবেন, দেশের ভবিষ্যতের রূপরেখা নিজেদের হাতেই রচনা করবেন, লিখবেন। আমার দৃঢ় বিশ্বাস আগামী দিনে যেভাবে নতুন জাতীয় শিক্ষানীতির ভিন্ন ভিন্ন উপাদান বাস্তবে রূপান্তরিত হবে, আমরা দেশের একটি নতুন যুগের সম্মুখীন হবো। যেভাবে আমরা আমাদের নবীন প্রজন্মকে একটি আধুনিক এবং জাতীয় শিক্ষা ব্যবস্থার সঙ্গে যুক্ত করে যাবো, দেশ স্বাধীনতার অমৃত সংকল্পগুলিকে বাস্তবায়িত করতে থাকবে। এই শুভকামনাগুলির সঙ্গে আমি নিজের বক্তব্য শেষ করছি। আপনারা সবাই সুস্থ থাকুন। আর নতুন প্রাণশক্তি নিয়ে এগিয়ে যেতে থাকুন। অনেক অনেক ধন্যবাদ।