उपस्थित सभी महानुभाव और मेरे परिवार के सभी सदस्य, बंधु गण, मैंने ये कहा कि मेरे परिवार के! दो कारण से - एक तो मैं बनारस का हो गया हूं और दूसरा बचपन से एक ही याद रही है, वो है, रेल। इसलिए रेल से जुड़ा हर व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है और इस अर्थ में मैं परिवार जनों के बीच आज आया हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां दो महत्वपूर्ण प्रकल्प, एक तो 4,500 horse power capacity का डीज़ल इजिंन राष्ट्र को समर्पित हो रहा है और ये हमारी capability है। भारत को आगे बढ़ना है, तो इस बात पर बल देना होगा कि हम, हमारे आत्मबल पर, हमारी शक्ति के आधार पर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने का काम करें।

एक समय था, ये देश पेट भरने के लिए अन्न बाहर से लाता था। जब विदेशों से अन्न आता था, तब हमारा पेट भरता था। लेकिन इस देश में एक ऐसे महापुरूष हुए जिसने बेड़ा उठाया, देश के किसानों को ललकारा, आवाह्न किया, उनको प्रेरणा दी, जय जवान जय किसान का मंत्र दिया और देश के किसानों ने अन्न के भंडार भर दिए। आज हिंदुस्तान अन्न विदेशों में दे सके, ये ताकत आ गई है। वो काम किया था, इसी धरती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री ने। अगर हमारे किसान देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, अन्न के भंडार भर सकते हैं, तो देश की उस ताकत को पहचान करके हमने देश की उस युवा शक्ति का आवाह्न किया है - Make in India! हमारी जितनी आवश्यकताएं हैं, उसका निर्माण देश में क्यों नहीं होना चाहिए? क्या कमी है! जिस देश के पास होनहार नौजवान हों, 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के नौजवान हों, वो देश क्या नहीं कर सकता है?

इसलिए भाइयों, बहनों, लाल बहादुर शास्त्री का मंत्र था- जय जवान जय किसान और उन्होंने देश के अन्न के भंडार भर दिए। हम Make in India का मंत्र ले करके आए हैं इंडिजिनस! भारत की विधा से, भारत के संसाधनों से भारत अपनी चीज़ों को बनाए। आज, डिफेंस के क्षेत्र में हर चीज़ हम बाहर से लाते हैं। अश्रु गैस भी बाहर से आता है, बताईए! रोने के लिए भी बाहर से हमको साधन लाने पड़ते हैं। ये बदलना है मुझे और उसमें एक महत्वपूर्ण पहल आज आपके यहां से.. indigenous .. मुझे बताया गया, ये जो इंजिंन बना है, इसमें 96% कंपोनेंट यहीं पर बने हैं, आप ही लोगों ने बनाए हैं। मैंने कहा है कि वो 4% भी नहीं आना चाहिए। बताइए कैसे करोगे? उन्होंने कहा- हम बीड़ा उठाते हैं, हम करेंगे। डिफेंस..सब चीज़ें हम बाहर से ला रहे हैं, मोबाइल फोन बाहर से ला रहे हैं, बताईए! हमारे देश में हमें एक वायुमंडल बनाना है और इस पर हम कोशिश कर रहे हैं।

रेलवे! आप ने मुझे, जब से प्रधानमंत्री बना हूं, बार बार मेरे मुंह से रेलवे के बारे में सुना होगा। घूम फिर करके कहीं भी भाषण करता हूं तो रेलवे तो आ ही जाता है। एक तो बचपन से आदत है और दूसरा, मेरा स्पष्ट मानना है कि भारत में रेलवे देश को आगे ले जाने की इतनी बड़ी ताकत रखती है, लेकिन हमने उसकी उपेक्षा की है। मेरे लिए रेलवे एक बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप कल्पना कर सकते हो, इतना बड़ा infrastucture! इतनी बड़ी संख्या में manpower! इतना पुराना experience! और विश्व में सर्वाधिक लोगों को ले जाने लाने वाला ये इतना बड़ा organization हमारे पास हो। इसको अगर आधुनिक बनाया जाए, इसको अगर technology upgradation किया जाए, management perfection किया जाए। service oriented बनाया जाए तो क्या हिंदुस्तान की शक्ल सूरत बदलने में रेलवे काम नहीं आ सकती? भाइयों, बहनों मैं ये सपना देख करके काम कर रहा हूं। इसलिए रेलवे तो आगे बढ़ना ही है, लेकिन रेलवे के माध्यम से मुझे देश को आगे बढ़ाना है। और, अब तक क्या हुआ है, रेल मतलब- दो-पांच किलोमीटर नई पटरी डाल दो, एक आद दो नई ट्रेन चालू कर दो, इसी के आस-पास चला है। हम उसमें आमूल-चूल परिवर्तन चाहते हैं।

उसी प्रकार से human resource development. हम जानते हैं कि रेलवे में अभी भी बहुत लोगों को रोज़गार मिलने की संभावनाएं हैं। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे हिम्मत नहीं करते। अगर आर्थिक रूप से उनको मजबूत बनाया जाए तो हज़ारो नौजवान रेलवे अभी भी absorb कर सकता है, इतनी बड़ी ताकत है। इसलिए योग्य manpower के लिए हम चार युनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं, हिंदुस्तान के चार कोनों में। उस युनिवर्सिटी में जो आएंगे उन नौजवानों की शिक्षा दीक्षा होगी और उनको रेलवे के अंदर नौकरी मिलेगी। हमारे कई रेलवे के कर्मचारी हैं। उनकी संतानों को अगर वहां पर पढ़ने का अवसर मिलेगा तो अपने आप रेलवे में नौकरी करने के लिए उसकी सुविधा बढ़ जाएगी। उसको भटकना नहीं पड़ेगा। कुछ लोग अफवाहें फैलाते हैं। आप में से कई लोग होंगे जो 20 साल की उम्र के बाद, 22 साल की उम्र के बाद, पढ़ाई करने के बाद रेलवे से जुड़े होंगे। मैं जन्म से जुड़ा हुआ हूं। इसलिए आप लोगों से ज्यादा रेलवे के प्रति मेरा प्यार है, क्योंकि मेरा तो जीवन ही उसके कारण बना है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि रेलवे का privatization हो रहा है, वो सरासर गलत है। मुझ से ज्यादा इस रेलवे को कोई प्यार नहीं कर सकता और इसलिए ये जो गप्प चलाए जा रहे हैं, भाईयों, बहनों न ये हमारी इच्छा है, न इरादा है, न सोच है। हम इस दिशा में कभी जा नहीं सकते, आप चिंता मत कीजिए। हम क्या चाहते हैं - आज देश के गरीबों के लिए जो पैसा काम आना चाहिए, स्कूल बनाने के लिए, अस्पताल बनाने के लिए, रोड बनाने के लिए, गांव के अंदर गरीब आदमी की सुविधा के लिए, उन सरकारी खजाने के पैसे हर साल रेलवे में डालने पड़ते हैं। क्यों? रेलवे को जि़ंदा रखने के लिए। हम कितने साल तक हिंदुस्तान के गरीबों की तिजोरी से पैसे रेल में डालते रहेंगे? और अगर कहीं और से पैसा मिलता है, तो समझदारी इसमें है कि गरीबों के पैसे रेल में डालने के बजाए, जो धन्ना सेठ हैं, उनके पैसे रेल में डालने चाहिए। इसलिए कम ब्याज से आज दुनिया में पैसे मिलते हैं। हम उन पैसों को रेलवे के विकास के लिए लगाना चाहते हैं, जिसके कारण, आप जो रेलवे में काम कर रहे हैं, उनका भी भला होगा और हिंदुस्तान का भी भला होगा। रेलवे का privatization नहीं होने वाला है।

अब मुझे बताईए, ये युनियन वालों को मैं पूछना चाहता हूं कि रूपया रेलवे में आए, डालर आए, पाउंड आए, अरे आपको क्या फर्क पड़ता है भई! आपका तो पैसा आ रहा है। दूसरी बात, रेलवे के स्टेशन जितने हैं, हमारे.. अब मुझे बताइए, मुझे रेलवे युनिवर्सिटी बनानी है..अगर रेलवे युनिवर्सिटी में मुझे जापान से मदद मिलती है, चाइना से मदद मिलती है, टेक्नॉलोजी की मदद मिलती है, expertise की मदद मिलती है, तो लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? ज़रा बताईए, सच्चा बोलिए, दिल से बोलिए- लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? यही काम ये सरकार करना चाहती है भाईयों! और इतना ही नहीं इतना ही नहीं. आज हम देखें हमारे रेलवे स्टेशन कैसे हैं? रेलवे स्टेशन पर रेलवे में 12-12 घंटे प्लेटफार्म पर काम करने वाले रेलवे के कर्मचारी को बैठने के लिए जगह नहीं होती है। ये सच्चाई है कि नहीं है? उसको बेचारे को बैठ करके खाना खाना हो, उसके लिए जगह नहीं है। क्या हमारे रेलवे स्टेशन सुविधा वाले होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? रेलवे पर आने वाले लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने सर्वे किया कि बनारस स्टेशन पे जितने पैसेंजर आते हैं, उनको बैठने के लिए सीट है क्या? और मैं हैरान हो गया कि बहुत कम सीट हैं। ज्यादातर बेचारे बूढ़े पैसेंजर भी घंटों तक रेलवे के इंतज़ार में खड़े रहते हैं। क्या उनको बैठने की सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने क्या किया, मेरे MPLAD का जो फंड था, मैंने रेलवे वालों को कहा, सबसे ज्यादा, जितनी बैंच लगा सकते हो, प्लेटफार्म पर लगाओ ताकि यहां गरीब से गरीब व्यक्ति को रेलवे के इंतज़ार में बैठा है तो उसको बैठने की जगह मिले। और मैंने सभी एमपी को कहा है, हिंदुस्तान भर में सभी रेलवे स्टेशन पर वो अपने MPLAD फंड में से पैसे लगा करके वहां पर वहां पर बैंचें डलवाएं ताकि रेलवे स्टेशन पर आने वाले पैसेंजर की सुविधा बढ़े। मुझे बताईए, ये सुविधा बढ़ेगी तो आशीर्वाद आपको मिलेगा कि नहीं मिलेगा? सीधी सीधी बात है, सब आपके फायदे के लिए हो रहा है भई। आप मुझे बताईए आज रेलवे स्टेशन जो हैं बड़े बड़े, heart of the city हैं! दो दो चार किलोमीटर लंबे स्टेशन हैं। नीचे तो आपकी मालिकी मुझे मंज़ूर है लेकिन रेलवे में आसमान में कोई इमारत बना देता है और रेलवे के खजाने में हजार करोड़, दो हजार करोड़ आज जाते हैं तो रेलवे मजबूत बनेगी कि नहीं बनेगी? वो प्लेटफार्म के ऊपर, हवा में, आकाश में अपनी इमारत बनाता है, रेलवे के फायदे में जाएगी कि नहीं जाएगी? मालिकी रेलवे की रहेगी कि नहीं रहेगी? रेलवे के कर्मचारियों का भला होगा कि नहीं होगा? हम जो विकास की दिशा ले करके चल रहे हैं, ये चल रहे हैं, privatization की हमारी दिशा नहीं है। हमें दुनिया भर का धन लाना है, रेलवे में लगाना है। रेलवे को बढ़ाना है, रेलवे को आगे ले जाना है और रेल के माध्यम से देश को आगे ले जाना है। हमारे देश में रेलवे को केवल यातायात का साधन माना गया था, हम रेलवे को देश के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के रूप में देखना चाहते हैं।

इसलिए मेरे भाईयों, बहनों मैं देश भर के रेल कर्मचारियों को आज आग्रह करता हूं- आइए! हिंदुस्तान में सबसे उत्तम सेवा कहां की तो रेलवे की ये सपने को हम साकार करें। इन दिनों जो स्वच्छता का अभियान हमने चलाया है, कभी-कभार ट्विटर पर खबरें सुनने को मिलती हैं कि साहब मै पहले भी रेलवे में जाता था अब भी जाता हूं लेकिन अब जरा डिब्बे साफ-सुथरे नजर आते हैं, सफाई दिखती है देखिए लोगों को कितना संतोष मिलता है, आशीर्वाद मिलता है और ये कोई उपकार नहीं है, हमारी जिम्मेवारी का हिस्सा है। It is a part of our duty. धीरे-धीरे उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारा पूरा रेलवे व्यवस्था तंत्र साफ-सुथरा क्यों न हो उसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब लोगों को कैसे मिले, मैं तो देख रहा हूं. रेलवे Infrastructure का उपयोग देश के विकास में इतना हो सकता है जिसकी किसे ने कल्पना नहीं की थी। हमारे देश में पोस्ट ऑफिस का नेटवर्क और रेलवे का नेटवर्क इन दोनों का अगर बुद्धिपूर्वक उपयोग किया जाए तो हमारे देश के ग्रामीण विकास की वह धरोहर बन सकते हैं।

मैं उदाहरण देता हूं- रेलवे के पास बिजली होती है, कहीं पर भी जाइए रेलवे के पास बिजली का कनेक्शन है। हिंदुस्तान की हर जगह पर। रेलवे के पास Infrastructure है। छोटे-छोटे गांव पर भी, छोटे-छोटे स्टेशन बने हुए हैं, भले ही वहां पर एक ट्रेन आती हो तो भी कोई न कोई वहां बैठा है, कोई न कोई व्यवस्था है। बाकी 24 घंटे वो खाली पड़ा रहता है उसी प्रकार से पोस्ट ऑफिस गांव-गांव तक उसका नेटवर्क है लेकिन वो पुराने जमाने की चल रही है उसमें बदलाव लाना है ये मैंने तय किया है और बदलाव लाने वाला हूं। अब मुझे बताइए गांव के अंदर जो रेलवे के स्टेशन हैं वहां पर दिन में मुश्किल से एक ट्रेन आती है मेरे हिसाब से हजारों की तादाद में ऐसी जगहें हैं, जहां बिजली हो, जहां Infrastructure हो वहीं पर अगर एक-दो कमरे और बना दिए जाएं और उन कमरों में Skill Development की Classes शुरू की जाएं क्योंकि Skill Development करना है तो Machine tools चाहिए और Machine tools के लिए बिजली चाहिए लेकिन बिजली गांव में नहीं है लेकिन रेलवे स्टेशन पर है, गांव के बच्चे Daily रेलवे स्टेशन पर आएंगे और रेलवे स्टेशन पर जो दो कमरें बने हुए होंगे उनमें जो Tools लगे हुए होंगे। Turner, Fitter के Course चलेंगे। एक साथ हिंदुस्तान में Extra पैसे खर्च किए बिना रेलवे की मदद से देश में हजारों की तादाद में Skill Development Centres खड़े हो सकते हैं कि नहीं।

मेरे भाईयों-बहनों थोड़ा दिमाग का उपयोग करने की जरुरत है, आप देखिए चीजें बदलने वाली हैं। मैं रेलवे के मित्रों से कहना चाहता हूं ऐसे स्टेशनों को Identify कीजिए जहां पर बिजली की सुविधा है वहां पर सरकार अपने खर्चे सेदो-तीन कमरे और बना दे और वहां पर उस इलाके के जो 500-1000 बच्चे हो उनके लिए Skill Development के Institutions चलें। ट्रेन ट्रेन का और Institutions, Institutions का काम करें रेलवे को Income हो जाए और गांव के बच्चों का Skill Development हो जाए। एक साथ हम अनेक व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

आज एक तो सोलर प्लांट भी इसके साथ जुड़ रहा है। आधुनिक Loco shed का Expansion हो रहा है, करीब 300 करोड़ रुपए जब पूरा होगा। 300 करोड़ रुपए की लागत से यहां Expansion होने के कारण इस क्षेत्र के अनेक नौजवानों को रोजगार की नई संभावनाएं बढ़ने वाली हैं।

मैं फिर एक बार रेल विभाग को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। श्रीमान सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में बहुत तेज गति से रेल का विकास होगा। आजादी के बाद जितना विकास हुआ है उससे ज्यादा विकास मुझे आने वाले दिनों में करना है। रेलवे के बैठे सभी मेरे साथियों आप सभी मेरे परिवारजन हैं और इसलिए मेरा आप पर हक बनता है, रेलवे वालों पर मेरा सबसे ज्यादा हक बनता है कि हम सब मिलकर के रेल को सेवा का एक बहुत बड़ा माध्यम बनाएं, सुविधा का माध्यम बनाएं और राष्ट्र की आर्थिक गति को तेज करने का एक माध्यम बना दें। उस विश्वास के साथ आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद.

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लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना इस बजट का मूल उद्देश्य एवं इस सरकार का संकल्प है: पीएम मोदी
March 09, 2026
भारत आज निवारक और समग्र स्वास्थ्य के विजन से काम कर रहा हैः प्रधानमंत्री
हाल के वर्षों में देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है। सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं और आयुष्मान भारत व आरोग्य मंदिरों के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं हर गांव तक पहुंच रही हैं: पीएम
हमारा योग और आयुर्वेद पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैः प्रधानमंत्री
हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को वास्तविक अर्थव्यवस्था से तेजी से जोड़ना होगा और एआई, ऑटोमेशन, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा डिजाइन आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर ज्यादा ध्यान देना होगा: पीएम
भारत नवोन्मेषण-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा हैः प्रधानमंत्री
आज जब हम भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि अवसरों की कमी के कारण कोई भी बेटी वंचित न रह जाएः प्रधानमंत्री
हाल के वर्षों में खेल को राष्ट्रीय विकास के एक अहम स्तंभ के रूप में देखा जाने लगा है। खेलो इंडिया जैसी पहलों ने खेल जगत में नई ऊर्जा भरी है और देशभर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है: पीएम

साथियों,

बजट के बाद वेबिनार की इस सिरीज़ में आज ये चौथा और अहम वेबिनार है। Fulfilling aspirations of people, यानी जन आकांक्षाओं की पूर्ति, ये केवल एक चर्चा का विषय नहीं है, ये इस बजट का मूल ध्येय है और इस सरकार का संकल्प भी है। इन जन आकांक्षाओं की पूर्ति का बहुत बड़ा माध्यम Education, Skill, Health, Tourism, Sports, Culture ऐसे मूलभूत सेक्टर्स हैं। इसलिए इस वेबिनार में हम इन महत्वपूर्ण आयामों पर चर्चा कर रहे हैं। बजट घोषणाओं की implementation के लिए इन विषयों से जुड़े सभी Experts, Policymakers और Scholars, Entrepreneurs और मेरे युवा साथी आप सभी के विचार और सुझाव बहुत अहम हैं। मैं आप सभी का, इस चौथे बजट वेबिनार के इस सत्र में स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

भारत आज Preventive और Holistic health के लिए एक विशाल विज़न पर काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है, सैकड़ों जिलों में नए-नए मेडिकल कॉलेज खुल गए हैं। आयुष्मान भारत योजना, आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ाई गई है। हमारे योग और आयुर्वेद पूरी दुनिया में popular हो रहे हैं। आप सभी इसके विभिन्न पहलुओं पर आप संवाद अवश्य करेंगे, लेकिन एक अहम विषय, जिसका मैं जिक्र करना चाहूंगा, वो है केयर इकॉनमी। आने वाले दशक में देश में सीनियर सिटीजन्स की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, आज वर्तमान में, दुनिया के कई देशों में केयरगिवर्स की भारी मांग है। इसलिए, अब हेल्थ सेक्टर में लाखों युवाओं के लिए, नई स्किल आधारित रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। मैं इस वेबिनार में उपस्थित, हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स से आग्रह करूंगा, वो नए Training models और Partnerships विकसित करने पर सुझाव दें, ताकि देश में ट्रेनिंग इकोसिस्टम और ज्यादा मजबूत हो सके।

साथियों,

इसी से जुड़ा दूसरा विषय टेली-मेडिसीन का है। आज बड़ी संख्या में दूर-दराज के क्षेत्र के लोग भी इसका लाभ उठा रहे हैं ओर विश्वास बढ़ता चला जा रहा है। लेकिन मैं समझता हूं, इसमें अब भी जागरूरकता और सहजता बढ़ाए जाने की बहुत जरूरत है।

साथियों,

पिछले एक दशक में देश के माइंडसेट में एक बड़ा परिवर्तन आया है। आज गाँव, कस्बा, शहर की सीमाओं से परे, भारत का हर युवा कुछ नया करना चाहता है, उसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा है। नई पीढ़ी का ये नया माइंडसेट, देश की सबसे बड़ी ताकत है, उज्जवल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। इसे Capitalize करने के लिए हमें अपने एजुकेशन सिस्टम को निरंतर आधुनिक बनाए रखना है, अपग्रेड करते ही रहना है। नई एजुकेशन पॉलिसी ने इसके लिए जरूरी बेस तैयार कर दिया है। अब बहुत आवश्यक है कि हमारे करिकुलम मार्केट की जरूरतों के हिसाब से updated रहें! हमें हमारे एजुकेशन सिस्टम को Real World Economy से जोड़ने की प्रक्रिया और तेज करनी होगी, AI और Automation, Digital Economy और Design Driven Manufacturing, ऐसे विषयों पर हमें फोकस और बढ़ाना होगा।

साथियों,

देश में एजुकेशन को Employment और Enterprise से जोड़ने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। University Townships जैसे नए मॉडल्स में हमारे इसी अप्रोच का प्रतिबिंब है। आज भारत A.V.G.C. sector, यानी Animation, Visual Effects, Gaming और Comics को बढ़ावा दे रहा है। भारत इनोवेशन driven economy की ओर बढ़ रहा है। आज इस वेबिनार में देश के अनेक शिक्षाविद और एकेडमिक इंस्टिट्यूशन्स जुड़े हैं। मैं आपसे आग्रह करूंगा, इस वेबिनार में, अपने कैंपस को इंडस्ट्री कोलैबोरेशन और रिसर्च ड्रिवन लर्निंग, उसको केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जरूर मंथन हो। इससे स्टूडेंट्स को रियल वर्ल्ड एक्सपोजर मिलेगा और स्किल इकोसिस्टम मजबूत होगा।

साथियों,

एक बहुत अहम विषय है STEM, यानी Science, Technology, Engineering और Mathematics. इस क्षेत्र में, ये बहुत गर्व का विषय है, ये हमारे देश में STEM के विषयों पर रूचि रखने में बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज जब हम Futuristic Technologies के लिए तैयार हो रहे हैं, तो बहुत जरूरी है कि कोई भी बेटी, अवसरों के अभाव में रुक न जाए। वेबिनार में आप इस दिशा में जरूर चर्चा करें, हमें महिलाओं के Participation को बढ़ाने पर और ज़ोर देना होगा। हमें ऐसा रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना होगा, जहां यंग रिसर्चर्स को एक्सपेरिमेंट करने और नए आइडियाज पर काम करने का पूरा अवसर मिले।

साथियों,

युवा शक्ति तभी राष्ट्रीय शक्ति बनती है, जब वह स्वस्थ भी हो, अनुशासित भी हो और आत्मविश्वास से भरी हो। इसीलिए पिछले कुछ वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा गया है। खेलो इंडिया जैसी पहलों ने देश में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को नई ऊर्जा दी है। देशभर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। इस वेबिनार में आप सभी कुछ सवालों पर जरूर मंथन करें। जैसे, छोटी – छोटी जगहों से भी प्रतिभाओं की पहचान को और सटीक कैसे किया जाए, हजारों खिलाड़ियों को Structured Financial Support में सुधार कैसे हों, और तीसरी अहम बात, हमारी स्पोर्ट्स बॉडीज को और ज्यादा प्रोफेशनल कैसे बनाया जाए? अगले कुछ वर्षों में देश में कॉमनवेल्थ गेम्स होने जा रहे हैं, देश ओलंपिक आयोजन के प्रयास में जुटा है, ऐसे में हमें आज कम आयु के खिलाड़ियों को पहचान कर उन्हें तराशना होगा, तभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहरा पाएगा।

साथियों,

टूरिज्म और कल्चर, रोजगार के नए अवसर बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब किसी स्थान पर टूरिज्म बढ़ता है तो उस स्थान या उस शहर की ब्रैंडिंग भी बढ़ जाती है। इससे उस शहर का ओवरऑल डवलपमेंट भी बहुत तेज होता है। भारत में ऐसे ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। लेकिन लंबे समय तक टूरिज्म कुछ चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह गया। अब हमें देश के कोने-कोने में टूरिस्ट डेस्टिनेशंस को नए सिरे से डेवलप करने पर फोकस कर रहे हैं।

साथियों,

आप सभी, इस वेबिनार में, भारत के Tourism Ecosystem को मजबूत करने के लिए, होलिस्टिक अप्रोच पर जरूर चर्चा करें। Trained Guides, Hospitality skills, Digital connectivity, Community participation, स्वच्छता, टूरिज्म और इनसे जुड़े विषयों पर आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

जब Institutions, Industry, Academia मिलकर काम करते हैं, तो परिवर्तन की गति तेज हो जाती है। बजट के बाद वेबिनार की जो ये सिरीज हुई है, मुझे विश्वास है उससे आने वाले समय के लिए ठोस दिशा मिलेगी। ऐसे ही प्रयासों से विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी, और साथियों से बड़ा सुखद अनुभव है कि वेबिनार की परंपरा के कारण पोस्ट बजट और खासकर के implementation कर, मुझे जो बताया गया है कि इस वर्ष लाखों की तादाद में लोग, जो इन इन विषयों से जुड़े हुए हैं, एक्सपर्ट भी हैं, उसके लाभार्थी भी हैं, उसकी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं, यानी एक प्रकार से जो-जो लोग driving force हैं, वे सभी लोग बड़ी सक्रियता के साथ वेबिनार में जुड़े। हमारे अफसर मुझे बता रहे थे कि बहुत उत्तम सुझाव आ रहे हैं, बहुत प्रैक्टिकल सुझाव आ रहे हैं, यानी एक प्रकार से समस्याओं का समाधान ही नहीं, नई ऊर्जा, नई गति के साथ आगे बढ़ने का हौसला भी देखने को मिलता है। मैं कहता हूं कि ये वेबिनार का बहुत ही सुखद अनुभव है, इसमें हिस्सा लेने वाले सभी वेबिनार में जिन जिन लोगों ने हिस्सा लिया है, सब अभिनंदन के अधिकारी हैं, धन्यवाद के पात्र हैं। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।