PM Modi speaks at the 10th Annual Convention of the Central Information Commission
RTI is not only about the right to know but also the right to question. This will increase faith in democracy: PM
Govt's 'Digital India' is complimentary to RTI, putting information online brings transparency, which in turn, builds trust: PM
More openness in government will help citizens. In this day and age there is no need for secrecy: PM
Aim of RTI must be to bring about a positive change in governance: PM
The voice of people is supreme in a democracy: PM Narendra Modi

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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ദേശീയ അസംബ്ലിയുടെ സ്പീക്കർ ബഹുമാനപ്പെട്ട അസാറെൽ ഏണസ്റ്റാ,
 
ലീഡർ ഓഫ് ഗവൺമെന്റ് ബിസിനസ്സ് ബഹുമാനപ്പെട്ട സിൽവാൻ ലെമിയേൽ,

പ്രതിപക്ഷ നേതാവ് ബഹുമാനപ്പെട്ട ബൈനാ ജോർജ്ജ്,

ദേശീയ അസംബ്ലിയിലെ ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

എന്റെ പ്രിയപ്പെട്ട സഹോദരീസഹോദരന്മാരേ,

നമസ്കാരം!

ബോൺ അപ്രെമിഡി! (ശുഭ മധ്യാഹ്നം!)

ഈ ദേശീയ അസംബ്ലിയെ അഭിസംബോധന ചെയ്യുന്ന ആദ്യത്തെ ഇന്ത്യൻ പ്രധാനമന്ത്രിയായി നിങ്ങളുടെ മുന്നിൽ നിൽക്കാൻ കഴിഞ്ഞത് എനിക്ക് ലഭിച്ച സവിശേഷമായ ഒരു ബഹുമതിയാണ്. ബഹുമാനപ്പെട്ട മാഡം സ്പീക്കർ, അങ്ങയുടെ ഊഷ്മളമായ വാക്കുകൾക്ക് ഞാൻ നന്ദി രേഖപ്പെടുത്തുന്നു.

ഇന്ന് രാവിലെ എനിക്ക് ഗാർഡിയൻ ഓഫ് ദി  ബ്ലൂ ഹൊറൈസൺ പുരസ്കാരം നൽകി ആദരിച്ചതിന് പ്രസിഡന്റ് ഏർമിനിയോടും സെയ്ഷെൽസിലെ ജനങ്ങളോടും ഞാൻ നന്ദി പറയുന്നു. പരിസ്ഥിതി സംരക്ഷണത്തിനായി നിരന്തരം പ്രയത്നിക്കുന്ന ഏവർക്കും ഈ പുരസ്കാരം വലിയൊരു പ്രോത്സാഹനമായിരിക്കും. ഭാരതത്തിലെ 140 കോടി ജനങ്ങളുടെ ഹൃദയം നിറഞ്ഞ ആശംസകളും പ്രാർത്ഥനകളുമായാണ് ഞാൻ ഇവിടേക്ക് എത്തിയിരിക്കുന്നത്.

 

പ്രധാനമന്ത്രിയെന്ന നിലയിൽ ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗര മേഖലയിൽ ഞാൻ സന്ദർശിച്ച ആദ്യ രാജ്യം 2015-ൽ സെയ്ഷെൽസ് ആയിരുന്നു. പ്രധാനമന്ത്രി എന്ന നിലയിലുള്ള എന്റെ ആദ്യ ആഫ്രിക്കൻ സന്ദർശനവും ഇതായിരുന്നു. ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗരത്തെക്കുറിച്ചുള്ള ഇന്ത്യയുടെ ദീർഘവീക്ഷണത്തിൽ സെയ്ഷെൽസിന് സവിശേഷമായ ഒരു സ്ഥാനമുണ്ടെന്ന് ഞാൻ വിശ്വസിച്ചതുകൊണ്ടാണ് അന്ന് ഞാൻ ഇവിടേക്ക് വന്നത്. ഒരു പതിറ്റാണ്ടിന് ശേഷം ഇന്ന് ഞാൻ ഇവിടെ വീണ്ടുമെത്തുമ്പോൾ ആ വിശ്വാസം എന്നത്തേക്കാളും ശക്തമാണ്.

നിങ്ങളുടെ സ്വാതന്ത്ര്യത്തിന്റെ അമ്പതാം വാർഷികാഘോഷങ്ങളിൽ പങ്കുചേരാൻ കഴിഞ്ഞതിൽ എനിക്ക് ഏറെ സന്തോഷമുണ്ട്. ഈ സവിശേഷ വേളയിൽ നിങ്ങൾക്കേവർക്കും ഒപ്പം സെയ്ഷെൽസിലെ ജനങ്ങൾക്കും എന്റെ ഹൃദയം നിറഞ്ഞ അഭിനന്ദനങ്ങൾ.

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

ഈ ദേശീയ അസംബ്ലിയെ അഭിസംബോധന ചെയ്യാൻ കഴിയുക എന്നത് അപൂർവ്വമായൊരു ഭാഗ്യമാണ്. ഈ സവിശേഷമായ ആദരവിന് നന്ദി. പുതുതായി തിരഞ്ഞെടുക്കപ്പെട്ട ഈ എട്ടാമത് ദേശീയ അസംബ്ലിയിലെ അംഗങ്ങളെ അഭിനന്ദിക്കാൻ ഞാൻ ഈ അവസരം വിനിയോഗിക്കുന്നു. ഒപ്പം ഈ ഉന്നത സഭയുടെ ആദ്യ വനിതാ സ്പീക്കറായി ചുമതലയേറ്റ ബഹുമാനപ്പെട്ട മാഡം സ്പീക്കർ അങ്ങയെയും ഞാൻ എന്റെ ഹൃദയം നിറഞ്ഞ അഭിനന്ദനങ്ങൾ അറിയിക്കുന്നു.

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

നമ്മുടെ നയതന്ത്രബന്ധം സ്ഥാപിതമായ അമ്പത് വർഷങ്ങൾക്ക് മുമ്പല്ല നമ്മുടെ സൗഹൃദം ആരംഭിച്ചതെന്ന് ഇന്ന് നാം ഓർക്കേണ്ടതുണ്ട്. അതിനും എത്രയോ മുമ്പ് അത് തുടങ്ങിയിരുന്നു. 1770 ഓഗസ്റ്റിൽ സെന്റ് ആനി ദ്വീപിൽ എത്തിയ 'തെലിമാക്ക്' കപ്പലിലുണ്ടായിരുന്നവരിൽ അഞ്ച് ഇന്ത്യക്കാരുമുണ്ടായിരുന്നു. ആ യാത്ര പിന്നീട് ഇങ്ങോട്ട് വന്ന ഒട്ടനവധി ആളുകൾക്ക് വഴിവിളക്കായി മാറി. കാലക്രമേണ, അവരുടെ കഥകൾ ആധുനിക സെയ്ഷെൽസിന്റെ ചരിത്രത്തിന്റെ ഭാഗമായി മാറി.

നമ്മൾ തമ്മിലുള്ള ഈ ദൃഢബന്ധം രൂപപ്പെടുത്തിയത് ഗവൺമെന്റുകളല്ല എന്ന് ഇത് നമ്മെ ഓർമ്മിപ്പിക്കുന്നു. അവ മനുഷ്യരാൽ നിർമ്മിക്കപ്പെട്ടതും കുടുംബങ്ങളാൽ പോറ്റിവളർത്തപ്പെട്ടതും തലമുറകളിലൂടെ നിലനിർത്തപ്പെട്ടതുമാണ്. ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗരമാണ് ഇത് സാധ്യമാക്കിയത്. ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗരം ഇന്ത്യയെയും സെയ്ഷെൽസിനെയും വേർപെടുത്തുകയല്ല ചെയ്യുന്നത്, മറിച്ച് നമ്മെ തമ്മിൽ ബന്ധിപ്പിക്കുകയാണ് ചെയ്യുന്നത്. അതുകൊണ്ടാണ് നാം അപരിചിതരെപ്പോലെയല്ല, മറിച്ച് പഴയ സുഹൃത്തുക്കളെപ്പോലെ പരസ്പരം കണ്ടുമുട്ടുന്നത്.

 

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

സെയ്ഷെൽസിന്റെ ഏറ്റവും വലിയ കരുത്ത് ഇവിടുത്തെ ജനങ്ങളാണ്. തലമുറകളായി ലോകത്തിന്റെ വിവിധ കോണുകളിൽ നിന്നുള്ള മനുഷ്യർ ഇവിടെയെത്തി. അവർ വ്യത്യസ്ത ഭാഷകളും ആചാരങ്ങളും വിശ്വാസങ്ങളും പാരമ്പര്യങ്ങളും തങ്ങളോടൊപ്പം കൊണ്ടുവന്നു. ഒടുവിൽ അവരെല്ലാവരും ഒത്തുചേർന്ന്, ഇന്ന് ഏറെ അഭിമാനത്തോടെ 'സെയ്ഷെലോവ' എന്ന് വിളിക്കുന്ന ഒരു പൊതുവായ അസ്തിത്വം കെട്ടിപ്പടുത്തു.

ഈ ദേശീയ അസംബ്ലിയുടെ ആപ്തവാക്യം പറയുന്നതുപോലെ - 'വൈവിധ്യത്തിൽ ഏകത്വം'. അത് ക്രയോൾ (Creole) സംഗീതത്തിന്റെ ഈണങ്ങളിൽ കേൾക്കാം. 'മൗത്യ' (Moutya) നൃത്തത്തിന്റെ താളങ്ങളിൽ അത് കാണാം. 'ഫെസ്റ്റിവൽ ക്രയോൾ' (Festival Kreol) ആഘോഷ വേളകളിൽ അത് അനുഭവിച്ചറിയാം.

ഈ രാജ്യം അതിന്റെ സമ്പന്നമായ പൈതൃകം ആഘോഷിക്കുമ്പോൾ, നമ്മുടെ സംസ്കാരങ്ങൾ തമ്മിലുള്ള ആഴത്തിലുള്ള ബന്ധം ദൈനംദിന ജീവിതത്തിലും പ്രകടമാകാറുണ്ട്. 'കരി കോകോ' (Kari Koko), സമോസ, ചട്ണി എന്നിവയുടെ രുചികളിൽ അത് തൊട്ടറിയാം. ദീപാവലി, തൈപ്പൊങ്കൽ ആഘോഷങ്ങളിലും നവരാത്രി കാലത്തെ ഗാർബ നൃത്തച്ചുവടുകളിലും അത് കണ്ടെത്താനാകും. നമ്മുടെ സൗഹൃദത്തിന്റെ ഭാവിയെക്കുറിച്ച് നമുക്ക് വലിയ ആത്മവിശ്വാസം നൽകുന്നതും ഈ ഒരു ക്രയോൾ സംസ്കാരം  തന്നെയാണ്.

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

സമുദ്രതീരങ്ങൾ പങ്കിടുന്ന അയൽരാജ്യങ്ങൾ എന്ന നിലയിൽ, ഒരാളുടെ സുരക്ഷ മറ്റൊരാളുടെ സുരക്ഷയ്ക്ക് കരുത്ത് പകരുന്നതാണെന്ന് നാം തിരിച്ചറിയുന്നു. ഒരാളുടെ സമൃദ്ധി മറ്റൊരാളുടെ പുരോഗതിക്ക് വഴിതുറക്കുന്നു. ഈ മേഖലയിലെ സ്ഥിരത നമുക്കെല്ലാവർക്കും ഒരുപോലെ പ്രയോജനകരവുമാണ്.

നമ്മുടെ പങ്കാളിത്തത്തിന്റെ ആഴം എത്രത്തോളമുണ്ടെന്ന് ശക്തമായി ഓർമ്മിപ്പിക്കുന്ന ഒന്നാണ് ഈ വർഷം. അൻപത് വർഷങ്ങൾക്ക് മുമ്പ്, നിങ്ങളുടെ സ്വാതന്ത്ര്യത്തിന്റെ പുലരിയിൽ, സൗഹൃദത്തിന്റെയും ഐക്യദാർഢ്യത്തിന്റെയും പ്രതീകമായി ഐ.എൻ.എസ് നീലഗിരി എന്ന ഇന്ത്യൻ നാവികസേനാ കപ്പൽ വിക്ടോറിയ തുറമുഖത്ത് ഉണ്ടായിരുന്നു. ഇന്ന്, നിങ്ങളുടെ സ്വാതന്ത്ര്യത്തിന്റെ സുവർണ്ണ ജൂബിലി ആഘോഷങ്ങളിൽ പങ്കുചേരാൻ ഐ.എൻ.എസ് തർകാഷ്, ഐ.എൻ.എസ് ഇക്ഷക് എന്നീ കപ്പലുകൾ വിക്ടോറിയ തുറമുഖത്ത് എത്തിച്ചേർന്നിട്ടുണ്ട്.

 

കഴിഞ്ഞ അമ്പത് വർഷങ്ങൾ പലതിലും മാറ്റം വരുത്തിയിട്ടുണ്ടാകാം. എന്നാൽ പരസ്പരമുള്ള നമ്മുടെ പ്രതിബദ്ധതയ്ക്ക് ഒട്ടും മാറ്റം വന്നിട്ടില്ല. പതിറ്റാണ്ടുകളായി നമ്മുടെ പ്രതിരോധ സേനകളും, കോസ്റ്റ് ഗാർഡും, സമുദ്ര സുരക്ഷാ ഏജൻസികളും പരസ്പരം കൈകോർത്ത് പ്രവർത്തിക്കുകയും സംയുക്ത പരിശീലനങ്ങളിൽ ഏർപ്പെടുകയും ചെയ്യുന്നു. സെയ്ഷെൽസ് പ്രതിരോധ സേനയുടെയും സെയ്ഷെൽസ് കോസ്റ്റ് ഗാർഡിന്റെയും പ്രൊഫഷണലിസത്തെയും സമർപ്പണത്തെയും ഇന്ത്യ ഏറെ വിലമതിക്കുന്നു. നിങ്ങളുടെ വിശാലമായ സമുദ്രമേഖലയുടെയും അതോടൊപ്പം ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗര മേഖലയുടെയും സുരക്ഷ ഉറപ്പാക്കുന്നതിൽ അവർ നിർണ്ണായക പങ്കാണ് വഹിക്കുന്നത്. സമുദ്ര സുരക്ഷ, ശേഷി വികസനം , ഹൈഡ്രോഗ്രഫി, സമുദ്രമേഖലയെക്കുറിച്ചുള്ള ജാഗ്രത  എന്നിവയിലെ നമ്മുടെ സഹകരണം കൂടുതൽ സുരക്ഷിതമായ ഒരു മേഖലയ്ക്കായുള്ള നമ്മുടെ പങ്കുവെക്കപ്പെട്ട പ്രതിബദ്ധതയെയാണ് കാണിക്കുന്നത്.

ഇന്ന് രാവിലെ ഞാൻ പ്രസിഡന്റ് ഏർമിനിയെ — നമ്മുടെ സ്വന്തം 'ടോൺ പാറ്റിനെ' — കാണുകയും നമ്മുടെ പങ്കാളിത്തത്തിൽ കൈവരിച്ച ശ്രദ്ധേയമായ പുരോഗതി വിലയിരുത്തുകയും ചെയ്തു. ഭാവിയെക്കുറിച്ചുള്ള നമ്മുടെ സംയുക്ത വീക്ഷണത്തെക്കുറിച്ചും ഞങ്ങൾ ചർച്ച ചെയ്യുകയുണ്ടായി. നമ്മുടെ ഈ കാഴ്ചപ്പാട് മഹാസാഗർ എന്ന ആശയത്തിൽ ഉൾക്കൊണ്ടിരിക്കുന്നു.

നമ്മുടെ ഭാവിയും പുരോഗതിയും പരസ്പരം ബന്ധപ്പെട്ടിരിക്കുന്നതാണെന്നും ഒന്നിനൊന്ന് ആശ്രയിച്ചിരിക്കുന്നതാണെന്നും ഈ ദീർഘവീക്ഷണം തിരിച്ചറിയുന്നു. കൂടുതൽ സുരക്ഷിതവും ഭദ്രവുമായ ഒരു ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗര മേഖലയ്ക്കായി നമ്മൾ ഒന്നിച്ച് പ്രവർത്തനം തുടരുക തന്നെ ചെയ്യും.

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

ആളുകൾ ഒരു ഭൂപടം നോക്കുമ്പോൾ സെയ്ഷെൽസിനെ ഇന്ത്യൻ മഹാസാഗരത്തിലെ ഒരു കൂട്ടം ദ്വീപുകളായി മാത്രമായിരിക്കാം കാണുന്നത്. എന്നാൽ ഞങ്ങൾ അതിനേക്കാൾ വലിയ ഒന്നിനെയാണ് അവിടെ കാണുന്നത്. തീരങ്ങൾക്കുമപ്പുറത്തേക്ക് തങ്ങളുടെ ദീർഘവീക്ഷണം വ്യാപിപ്പിച്ച ഒരു രാജ്യത്തെയാണ് ഞങ്ങൾ അവിടെ ദർശിക്കുന്നത്. നിങ്ങളുടെ സമുദ്രമേഖല ഏതാണ്ട് 14 ലക്ഷം ചതുരശ്ര കിലോമീറ്ററുകളോളം പരന്നുകിടക്കുന്നു.

ഇത് സെയ്ഷെൽസിനെ ഒരു ചെറിയ ദ്വീപ് രാജ്യമല്ലാതാക്കുന്നു — പകരം ഒരു 'വിശാല സമുദ്ര രാജ്യമാക്കുന്നു' . 'ബ്ലൂ ഇക്കോണമി' (സമുദ്രവിഭവങ്ങളുടെ സുസ്ഥിരമായ ഉപയോഗം) ആഗോളതലത്തിൽ ചർച്ചയാകുന്നതിനും എത്രയോ മുമ്പ് തന്നെ സീഷെൽസ് ആ മേഖലയിൽ വഴികാട്ടിയായിരുന്നു. സമുദ്ര ആവാസവ്യവസ്ഥയെ സംരക്ഷിക്കുന്നതിലാകട്ടെ, 'ബ്ലൂ ബോണ്ടുകൾ' പോലുള്ള നൂതന ആശയങ്ങൾ മുന്നോട്ട് വെക്കുന്നതിലാകട്ടെ, സുപ്രധാനമായ ആഗോള ചർച്ചകൾക്ക് രൂപം നൽകാൻ നിങ്ങളുടെ രാജ്യം സഹായിച്ചിട്ടുണ്ട്. മത്സ്യബന്ധനം, മറൈൻ സയൻസ്, തീരദേശ പരിപാലനം, പുനരുപയോഗ ഊർജ്ജം, സുസ്ഥിര ടൂറിസം എന്നിവയിൽ കൈകോർത്ത് പ്രവർത്തിക്കാൻ നമുക്ക് സാധിക്കും.

ഇവിടുത്തെ സവിശേഷ പ്രതീകമായ 'കോക്കോ ഡി മെർ' (Coco de Mer) വൃക്ഷത്തിന്റെ ഒരു തൈ നടാൻ ഇന്നലെ എനിക്ക് ഭാഗ്യം ലഭിക്കുകയുണ്ടായി. സെയ്ഷെൽസിനെപ്പോലെ തന്നെ അതും അദ്വിതീയവും വിലപ്പെട്ടതുമാണ്; ലോകത്തിൽ അതിനൊരു പ്രത്യേക സ്ഥാനവുമുണ്ട്. ഈ പ്രകൃതിവിസ്മയത്തെ സംരക്ഷിക്കാനും നിലനിർത്താനും നിങ്ങൾ നടത്തുന്ന ശ്രമങ്ങൾ വലിയൊരു ദർശനത്തെയാണ് പ്രതിഫലിപ്പിക്കുന്നത് — മനുഷ്യരാശി പ്രകൃതിയോട് ഇണങ്ങി ജീവിക്കണമെന്ന ദർശനം.

 

ഈ ചിന്താഗതി ഇന്ത്യയിലും വളരെ ആഴത്തിൽ വേരോടിയ ഒന്നാണ്. ഇന്ന് നാം ആസ്വദിക്കുന്നതിനേക്കാൾ ആരോഗ്യമുള്ളതും, സുരക്ഷിതവും, വിഭവസമൃദ്ധവുമായ മഹാസാഗരങ്ങളാണ് വരുംതലമുറകൾക്ക് പൈതൃകമായി ലഭിക്കുന്നതെന്ന് ഉറപ്പാക്കാൻ നമുക്ക് ഒന്നിച്ച് പ്രവർത്തിക്കാം.

ബഹുമാനപ്പെട്ട  അംഗങ്ങളേ,

ഗ്ലോബൽ സൗത്ത്  മേഖലയെയും, പ്രത്യേകിച്ച് ദ്വീപ് രാജ്യങ്ങളെയുമാണ് കാലാവസ്ഥാ വ്യതിയാനം ഏറ്റവും കൂടുതൽ ബാധിക്കുന്നത്. അതിന്റെ ആഘാതങ്ങൾ നമ്മുടെ തീരപ്രദേശങ്ങളിലും, സമുദ്ര ആവാസവ്യവസ്ഥകളിലും, കാലാവസ്ഥാ വ്യതിയാനങ്ങളിലും, നമ്മുടെ സമൂഹങ്ങളിലും ഇതിനകം തന്നെ പ്രകടമാണ്. കാലാവസ്ഥാ വ്യതിയാനത്തിന് ഏറ്റവും കുറഞ്ഞ വിഹിതം മാത്രം സംഭാവന ചെയ്തവർ അതിന്റെ പ്രത്യാഘാതങ്ങളുടെ വലിയ ഭാരം ചുമക്കേണ്ടതില്ലെന്ന് നമ്മൾ ഇരുരാജ്യങ്ങളും ദൃഢമായി വിശ്വസിക്കുന്നു.

കാലാവസ്ഥാ പ്രവർത്തനങ്ങൾ എപ്പോഴും നീതിയിലും ഉത്തരവാദിത്തത്തിലും സമത്വത്തിലും അധിഷ്ഠിതമായിരിക്കണം. ഇതാണ് കാലാവസ്ഥാ നീതിയുടെ  കാതൽ.

ഇക്കാര്യത്തിൽ മാതൃകയായി മുന്നിൽ നടക്കാനാണ് ഇന്ത്യ എപ്പോഴും ശ്രമിച്ചിട്ടുള്ളത്. കഴിഞ്ഞ ഒരു പതിറ്റാണ്ടിനിടെ, പുനരുപയോഗ ഊർജ്ജ മേഖലയിൽ ലോകത്തിലെ തന്നെ ഏറ്റവും വലിയ വിപുലീകരണ പ്രവർത്തനങ്ങളിലൊന്നിനാണ് നമ്മൾ തുടക്കം കുറിച്ചത്. 'മിഷൻ ലൈഫ്' എന്ന പദ്ധതിയിലൂടെ സുസ്ഥിരമായ ജീവിതശൈലികളെ നമ്മൾ പ്രോത്സാഹിപ്പിച്ചു. ഇന്റർനാഷണൽ സോളാർ അലയൻസ് , കോയലിഷൻ ഫോർ ഡിസാസ്റ്റർ റസിലിയന്റ് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ (CDRI), ഗ്ലോബൽ ബയോഫ്യുവൽസ് അലയൻസ്, 'ഏക് പേഡ് മാ കേ നാം' (അമ്മയ്ക്കായി ഒരു മരം) തുടങ്ങിയ നമ്മുടെ പദ്ധതികളിലൂടെ ഹരിത ഊർജ്ജത്തിലേക്കുള്ള മാറ്റം വേഗത്തിലാക്കാൻ പങ്കാളിത്ത രാജ്യങ്ങളുമായി ചേർന്ന് ഞങ്ങൾ  പ്രവർത്തിച്ചിട്ടുണ്ട്.

ചെറിയ ദ്വീപ് വികസ്വര രാജ്യങ്ങളുടെ ആശങ്കകൾക്ക് അർഹമായ ശ്രദ്ധ ലഭിക്കുന്നുണ്ടെന്ന് ഉറപ്പാക്കാൻ സെയ്ഷെൽസുമായി ചേർന്ന് പ്രവർത്തിക്കാൻ ഇന്ത്യ എന്നും പ്രതിജ്ഞാബദ്ധമാണ്.

ബഹുമാനപ്പെട്ട  അംഗങ്ങളേ,

വികസനം, കൂടുതൽ പേരെ ഉൾക്കൊള്ളാനാകുന്ന ഒന്നായി മാറുന്ന ഒരു ലോകമാണ് സെയ്ഷെൽസും ഇന്ത്യയും ആഗ്രഹിക്കുന്നത്. അന്താരാഷ്ട്ര പ്രസ്ഥാനങ്ങളും സ്ഥാപനങ്ങളും സമകാലിക യാഥാർത്ഥ്യങ്ങളെ പ്രതിഫലിപ്പിക്കുന്ന ഒന്നായിരിക്കണമെന്ന് നമ്മൾ ഇരുരാജ്യങ്ങളും ആഗ്രഹിക്കുന്നു. നമ്മുടെ പങ്കുവെക്കപ്പെട്ട ഭാവി കൂട്ടായും, എല്ലാവരെയും ഉൾക്കൊള്ളുന്ന രീതിയിലും, നീതിയുക്തമായും രൂപപ്പെടുത്തേണ്ടതാണെന്ന് ഞങ്ങൾ വിശ്വസിക്കുന്നു.

ഞങ്ങളുടെ ജി20 അധ്യക്ഷപദവിയുടെ കാലയളവിൽ ഇന്ത്യയുടെ ശ്രമങ്ങൾക്ക് വഴികാട്ടിയത് ഈയൊരു വിശ്വാസമായിരുന്നു. ഗ്ലോബൽ സൗത്ത് മേഖലയുടെ  മുൻഗണനകളെ അന്താരാഷ്ട്ര ചർച്ചകളുടെ കേന്ദ്രബിന്ദുവാക്കാൻ ഞങ്ങൾ ശ്രമിച്ചതും ജി20-യിലേക്ക് ആഫ്രിക്കൻ യൂണിയനെ  ഒരു സ്ഥിരം അംഗമായി സ്വാഗതം ചെയ്തതും ഇതേ ചിന്താഗതിയോടെയാണ്. ഇതാണ് ഗ്ലോബൽ സൗത്തിനെ ഒന്നിപ്പിക്കുന്ന വികാരം. ഇന്ത്യയും സെയ്ഷെൽസും ഒരുമിച്ച് മുന്നോട്ട് കൊണ്ടുപോകുന്ന ദീർഘവീക്ഷണവും ഇതുതന്നെയാണ്.

ബഹുമാനപ്പെട്ട  അംഗങ്ങളേ,

കഴിഞ്ഞ അമ്പത് വർഷത്തെ നേട്ടങ്ങൾ നാം ആഘോഷിക്കുമ്പോൾ തന്നെ, നാളെയുടെ ഭാവിയെക്കുറിച്ചും നാം ചിന്തിക്കേണ്ടതുണ്ട്. സീഷെൽസിന്റെ ഭാവി രൂപപ്പെടുത്തുന്നത് ഇവിടുത്തെ യുവജനങ്ങളാണ്. സെയ്ഷെൽസിലെ വിദ്യാർത്ഥികളും പ്രൊഫഷണലുകളും ഉദ്യോഗസ്ഥരും സുരക്ഷാ സേനയും പതിറ്റാണ്ടുകളായി ഇന്ത്യയിൽ പരിശീലനം നേടുകയും പഠിക്കുകയും ചെയ്യുന്നുണ്ട് എന്നതിൽ ഞങ്ങൾക്ക് ഏറെ അഭിമാനമുണ്ട്.

യഥാർത്ഥത്തിൽ സെയ്ഷെൽസിലെ അമ്പതിൽ ഒരാൾ വീതം ഇന്ത്യയിൽ നിന്ന് ഏതെങ്കിലും തരത്തിലുള്ള പരിശീലനം നേടിയിട്ടുണ്ടെന്നാണ് പറയപ്പെടുന്നത്. ഇന്ന് നമ്മുടെ പങ്കാളിത്തത്തെ കൂടുതൽ ശക്തമാക്കുന്ന പ്രാവീണ്യവും സൗഹൃദങ്ങളും അനുഭവങ്ങളുമായാണ് അവർ സ്വന്തം നാട്ടിലേക്ക് മടങ്ങിയത്.

യുവാക്കൾക്ക് ഇന്റേൺഷിപ്പ് ലഭ്യമാക്കുന്നതിനായുള്ള നിങ്ങളുടെ 'ഇഗ്നൈറ്റ്' (IGNITE) പദ്ധതിയെക്കുറിച്ച് അറിഞ്ഞതിൽ എനിക്ക് ഏറെ സന്തോഷമുണ്ട്. ഇത് വളരെ മികച്ചൊരു മാതൃകയാണ്; ഈ മേഖലയിൽ സഹകരണത്തിനായുള്ള പുതിയ വഴികൾ നമുക്ക് കണ്ടെത്താനാകും.

ഡിജിറ്റൽ നവീകരണമാണ് ഇത്തരം സഹകരണങ്ങളിൽ ഏറ്റവും പ്രധാനമായി ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിക്കാൻ കഴിയുന്ന ഒരു മേഖല. സാങ്കേതികവിദ്യയ്ക്ക് എങ്ങനെ അവസരങ്ങൾ വർദ്ധിപ്പിക്കാമെന്നും ഭരണം മെച്ചപ്പെടുത്താമെന്നും സാമ്പത്തിക പങ്കാളിത്തം ഉറപ്പാക്കാമെന്നും കോടിക്കണക്കിന് ആളുകളിലേക്ക് സേവനങ്ങൾ എത്തിക്കാമെന്നും ഇന്ത്യയുടെ ഡിജിറ്റൽ പൊതു അടിസ്ഥാന സൗകര്യ വികസനം (DPI) തെളിയിച്ചിട്ടുണ്ട്.

നിങ്ങളുടെ ഡിജിറ്റൽ പരിവർത്തനത്തിന്റെ  യാത്രയിൽ ഞങ്ങളുടെ അനുഭവങ്ങളും വൈദഗ്ധ്യവും നിങ്ങളുമായി പങ്കിടുന്നതിൽ ഞങ്ങൾക്ക് സന്തോഷമേയുള്ളൂ. സ്വാതന്ത്ര്യത്തിന്റെ ആദ്യ അൻപത് വർഷങ്ങളിൽ നിങ്ങളെ നയിച്ച അതേ നിശ്ചയദാർഢ്യത്തോടെ സെയ്ഷെൽസിലെ യുവജനങ്ങൾ ഈ അവസരങ്ങളെ നെഞ്ചേറ്റുമെന്ന് എനിക്ക് പൂർണ്ണ വിശ്വാസമുണ്ട്.

ബഹുമാനപ്പെട്ട അംഗങ്ങളേ,

ചരിത്രപ്രസിദ്ധമായ ഈ സുവർണ്ണ ജൂബിലി വർഷത്തിൽ ഇന്ന് ഞാൻ നിങ്ങളുടെ മുന്നിൽ നിൽക്കുമ്പോൾ, രണ്ട് നൂറ്റാണ്ടിലധികം പഴക്കമുള്ള ഒരു സൗഹൃദമാണ് നമ്മുടെ ജനങ്ങൾ ഒത്തുചേർന്ന് ആഘോഷിക്കുന്നത്. ഇത്രയും ആഴമേറിയ അടിത്തറയിൽ പടുത്തുയർത്തപ്പെട്ട പങ്കാളിത്തങ്ങൾ ലോകത്ത് വളരെ കുറവായിരിക്കും. ഇത്രയേറെ ഊഷ്മളതയോടും വിശ്വാസത്തോടും സന്മനസ്സോടും കൂടി വളർന്നുവന്ന ബന്ധങ്ങളും അപൂർവ്വമാണ്.

നാം ഭാവിയെ ഉറ്റുനോക്കുമ്പോൾ, ഈ ദൃഢമായ അടിത്തറയ്ക്ക് മുകളിൽ നമുക്ക് പുതിയ ചരിത്രങ്ങൾ കെട്ടിപ്പടുക്കാം. ഇന്ത്യ എന്നും നിങ്ങളുടെ വിശ്വസ്ത പങ്കാളിയായി തുടരും. നിങ്ങളുടെ നേട്ടങ്ങളിൽ ഞങ്ങൾ പങ്കുചേരും. നിങ്ങളുടെ ആഗ്രഹങ്ങൾക്ക് ഞങ്ങൾ പിന്തുണയേകും. എക്കാലവും ഒരു നല്ല സുഹൃത്തായി ഞങ്ങൾ നിങ്ങളുടെ ഒപ്പമുണ്ടാകും.

കഴിഞ്ഞ അമ്പത് വർഷങ്ങൾ ഏറെ ശ്രദ്ധേയമായിരുന്നു. എന്നാൽ 
സെയ്ഷെൽസിന്റെ ചരിത്രത്തിലെ ഏറ്റവും മനോഹരമായ അധ്യായങ്ങൾ ഇനി എഴുതപ്പെടാനിരിക്കുന്നതേയുള്ളൂവെന്ന് ഞാൻ ദൃഢമായി വിശ്വസിക്കുന്നു. നമ്മുടെ സൗഹൃദത്തിന്റെ ഏറ്റവും നല്ല നാളുകളും ഇനി വരാനിരിക്കുന്നതേയുള്ളൂ.