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प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय सूचना आयोग के 10वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया 
आरटीआई सिर्फ़ जानने का ही नहीं बल्कि सवाल करने का भी अधिकार है। इससे लोकतंत्र में विश्वास विश्वास बढ़ेगा: प्रधानमंत्री
सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ योजना आरटीआई की पूरक है क्योंकि सूचनाएँ ऑनलाइन होने से पारदर्शिता आती है और विश्वास बढ़ता है: प्रधानमंत्री
सरकारी व्यवस्था में स्पष्टता नागरिकों के लिए सहायक होगी। आज के इस युग में गोपनीयता की आवश्यकता नहीं है: प्रधानमंत्री
आरटीआई का उद्देश्य शासन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए: प्रधानमंत्री
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि है: प्रधानमंत्री मोदी

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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वैक्सीन हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है। ‘दवाई भी- कड़ाई भी’: प्रधानमंत्री मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज आपसे ‘मन की बात’, एक ऐसे समय कर रहा हूँ जब कोरोना, हम सभी के धैर्य, हम सभी के दुःख बर्दाश्त करने की सीमा की परीक्षा ले रहा है | बहुत से अपने, हमें, असमय, छोड़ कर चले गए हैं | कोरोना की पहली वेव का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के बाद देश हौंसले से भरा हुआ था, आत्मविश्वास से भरा हुआ था, लेकिन इस तूफ़ान ने देश को झकझोर दिया है |

साथियो, बीते दिनों इस संकट से निपटने के लिए, मेरी, अलग-अलग sectors के expert के साथ, विशेषज्ञों के साथ लम्बी चर्चा हुई है | हमारी farma- industry के लोग हों, vaccine manufacturers हों oxygen के production से जुड़े लोग हों या फिर medical field के जानकार, उन्होंने, अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार को दिए हैं | इस समय, हमें इस लड़ाई को जीतने के लिए, experts और वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता देनी है | राज्य सरकार के प्रयत्नों को आगे बढ़ाने में भारत सरकार पूरी शक्ति से जुटी हुई है | राज्य सरकारें भी अपना दायित्व निभाने की पूरी कोशिश कर रही हैं |

साथियो, कोरोना के खिलाफ इस समय बहुत बड़ी लड़ाई देश के डॉक्टर और health workers लड़ रहे हैं | पिछले एक साल में उन्हें इस बीमारी को लेकर हर तरह के अनुभव भी हुए हैं | हमारे साथ, इस समय, मुम्बई से प्रसिद्द डॉक्टर शशांक जोशी जी जुड़ रहे हैं |

डॉक्टर शशांक जी को कोरोना के इलाज और इससे जुड़ी research का बहुत जमीनी अनुभव है, वो, Indian College of Physicians के Dean भी रह चुके हैं | आइए बात करते हैं डॉक्टर शशांक से :-

मोदी जी - नमस्कार डॉ० शशांक जी

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

मोदी जी - अभी कुछ दिन पहले ही आपसे बात करने का अवसर मिला था | आपके विचारों की स्पष्टता मुझे बहुत अच्छी लगी थी | मुझे लगा देश के सभी नागरिको को आपके विचार जानने चाहिए | जो बातें सुनने में आती उसकी को मैं एक सवाल के रूप में आपके सामने प्रस्तुत हूँ | डॉ० शशांक – आप लोग इस समय दिन रात जीवन रक्षा के काम में लगे हुए हैं, सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि आप second wave के बारे में लोगों को बताएं | medically ये कैसे अलग है और क्या-क्या सावधानी जरूरी है |

डॉ० शशांक – धन्यवाद सर, ये जो दूसरी बाढ़ (wave) आई है | ये तेजी से आई है, तो जितनी पहली बाढ़ (wave) थी उससे ये virus ज्यादा तेज चल रहा है, लेकिन अच्छी बात ये है कि उससे ज्यादा रफ़्तार से recovery भी है और मृत्यु दर काफी कम हैं | इसमें दो- तीन फर्क है, पहली तो ये युवाओं में और बच्चो में भी थोड़ा दिखाई दे रहा है | उसके जो लक्षण है, पहले जैसे लक्षण थे साँस चढ़ना, सूखा खाँसी आना, बुखार आना ये तो सब है ही और उसके साथ थोड़ा गंध जाना, स्वाद चला जाना ये भी है | और लोग थोड़े भयभीत हुए हैं | भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है | 80-90 प्रतिशत लोगों में इसमें कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, ये mutation-Mutation जो बोलते हैं, घबराने की बात नहीं है | ये mutation होते रहते हैं जैसे हम कपड़े बदलते हैं वैसे virus भी अपना रंग बदल रहा है और इसलिए बिलकुल डरने की बात नहीं है और ये wave को हम पार कर देंगे | wave आती जाती है, और ये virus आते जाते रहता है तो यही अलग-अलग लक्षण है और medically हमको सतर्क रहना चाहिए | एक 14 से 21 दिन का ये covid का time table है इसमें वैद्य (डॉक्टर) की सलाह लेना चाहिये |

मोदी जी - डॉ० शशांक मेरे लिए भी आपने जो analysis बताया, बड़ा interesting है, मुझे कई चिट्ठियाँ मिली हैं, जिसमें treatment के बारे में भी लोगों की बहुत सी आशंकाए हैं, कुछ दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है, इसलिए मैं चाहता हूँ कि covid के treatment के बारे में भी आप लोगों को जरुर बताएँ |

डॉ० शशांक – हां सर, clinical treatment लोग बहुत देरी से चालू करते हैं और अपने आप बीमारी से दब जायेंगी, ये भरोसे पर रहते हैं, और, मोबाईल पर आने वाली बातों पर भरोसा रखते हैं, और, अगर सरकारी दी गयी सूचना का पालन करें तो ये कठनाई का सामना नहीं आता है | तो covid में clinic treatment protocol है उसमें तीन प्रकार की तीव्रता है हल्का या mild covid, मध्यम या moderate covid और तीव्र covid जो severe covid बोलते हैं, इसके लिए है | तो जो हल्का covid है उसके लिए तो हम oxygen का monitoring करते हैं, pulse का monitoring करते है, बुखार का monitoring करते हैं, बुखार बढ़ जाता है तो कभी-कभी Paracetamol जैसी दवाई का इस्तेमाल करते हैं और अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये जो moderate covid होता है, मध्यम covid होता है या तीव्र covid होता है तो वैद्य के अपने डॉक्टर के साथ सम्पर्क करना बहुत जरूरी है | सही और सस्ती दवाईया available है | इसमें steroids जो है, ये, जान बचा सकती है, जो inhalers दे सकते हैं, tablet हम और दे सकते हैं हम, और, उसके साथ ही प्राण-वायु जो oxygen है वो देना पड़ता है और इसके लिए छोटे-छोटे इलाज़ है लेकिन अक्सर क्या हो रहा है कि एक नई experimental दवाई है, जिसका नाम है Remdesivir. ये दवाई से एक चीज़ जरुर होती है कि अस्पताल में दो–तीन दिन कम रहना पड़ता है और clinical recovery में थोड़ी सी उसकी aid होती है | ये भी दवाई कब काम करती है, जब, पहले 9-10 दिन में दी जाती है और ये पाँच ही दिन देनी पड़ती है, तो ये लोग जो दौड़ रहे हैं Remdesivir के पीछे ये बिलकुल दौड़ना नहीं चाहिए | ये दवाई का थोडा काम है, जिनको oxygen लगता है, प्राण वायु oxygen लगता है, जो अस्पताल में भर्ती होते हैं और डॉक्टर जब बताते हैं तभी लेना चाहिए | तो ये बहुत जरूरी है सब लोगों को समझना | हम प्राणायाम करेंगे, हमारे शरीर के जो lungs हैं उसको थोड़ा expand करेंगें और जो हमारी खून पतला करने वाली जो injection आती है जिसको हम heparin बोलते हैं | ये छोटी-छोटी दवाईया देंगे तो 98% लोग ठीक हो जाते हैं तो positive रहना बहुत जरूरी है | treatment protocol वैद्य की सलाह से लेना बहुत जरूरी है | और ये जो महंगी-महंगी दवाई है, उसके पीछे दौड़ने की कोई जरूरत नहीं है sir, अपने पास अच्छे इलाज चालू है प्राण-वायु oxygen है, ventilator की भी सुविधा है, सब-कुछ है सर, और, कभी-कभी ये दवाई यदि मिल जाती है तो योग्य लोगो में ही देनी चाहिए तो इसके लिए बहुत भ्रम फैला हुआ है और इसलिए ये स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ sir कि अपने पास world की सबसे Best treatment available है आप देखेंगे कि भारत में सबसे अच्छा recovery rate है | आप यदि compare करेंगे यूरोप के लिए, अमेरिका वही से हमारे यहाँ के treatment protocol से मरीज ठीक हो रहे है सर |

मोदी जी - डॉ० शशांक आपका बहुत बहुत धन्यवाद | डॉक्टर शशांक ने जो जानकारियाँ हमें दीं, वो बहुत जरुरी हैं और हम सबके काम आएँगी |

साथियो, मैं आप सबसे आग्रह करता हूँ, आपको अगर कोई भी जानकारी चाहिए हो, कोई और आशंका हो, तो सही source से ही जानकारी लें | आपके जो family doctor हों, आस-पास के जो डॉक्टर्स हों, आप उनसे फ़ोन से संपर्क करके सलाह लीजिये | मैं देख रहा हूँ कि हमारे बहुत से डॉक्टर खुद भी ये जिम्मेदारी उठा रहे हैं | कई Doctors social media के जरिए लोगों को जानकारी दे रहे हैं | फ़ोन पर, whatsapp पर भी counseling कर रहे हैं | कई हॉस्पिटल की वेबसाइटें हैं, जहां जानकारियाँ भी उपलब्ध हैं, और वहां आप डॉक्टर्स से, परामर्श भी ले सकते हैं | ये बहुत सराहनीय है |

मेरे साथ श्रीनगर से डॉक्टर नावीद नजीर शाह जुड़ रहे हैं | डॉक्टर नावीद श्रीनगर के एक Government medical College में प्रोफेसर हैं | नावीद जी अपनी देखरेख में अनेकों कोरोना patients को ठीक कर चुके हैं और रमजान के इस पवित्र माह में डॉ नावीद अपना कार्य भी निभा रहे हैं, और, उन्होंने हमसे बातचीत के लिए समय भी निकाला है | आइये उन्हीं से बात करते हैं |

मोदी जी – नावीद जी नमस्कार |

डॉ० नावीद – नमस्कार सर |
डॉक्टर नावीद ‘मन की बात’ के हमारे श्रोताओं ने इस मुश्किल समय में panic management का सवाल उठाया है | आप अपने अनुभव से उन्हें क्या जवाब देंगें ?

डॉ० नावीद- देखिए जब कोरोना शुरू हुआ तो कश्मीर में जो सबसे पहला hospital designate हुआ As Covid hospital वो हमारा city hospital था | जो medical college के under में आता है तो उस टाइम एक खौफ़ का माहौल था | लोगो में तो था ही वो समझते थे शायद covid का infection अगर किसी को हो जाता है तो death sentence माना जायेगा ये, और ऐसे में हमारे हस्पताल में डॉक्टर साहिबान या para-medical staff काम करते थे, उनमें भी एक खौफ़ का माहौल था कि हम इन patient को कैसे face करेंगे हमें infection होने का ख़तरा तो नहीं है | लेकिन जो टाइम गुजरा हमने भी देखा कि अगर पूरी तरीके से हम जो protective gear पहने एतिहादी तदवीर जो है, उन पर अमल करें तो हम भी safe रह सकते हैं और हमारा जो बाकी staff है वो भी safe रह सकता है और आगे-आगे हम देखते गये मरीज या कुछ लोग बीमार थे जो asymptomatic, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे | हमने देखा करीब करीब 90-95% से ज्यादा जो मरीज हैं वो without in medication भी ठीक हो जाते हैं तो वक्त जैसे गुजरता गया लोगों में जो कोरोना का एक डर था वो बहुत कम हो गया | आज की बात जो ये second wave जो इस टाइम हमारी आयी है इस कोरोना में इस टाइम भी हमें panic होने की जरूरत नहीं है | इस मौके पर भी जो protective measures है, जो SOPs है अगर उन पर हम अमल करेंगें जैसे मास्क पहनना, hand sanitizer का use करना, उसके अलावा physical distance maintain करना या social gathering avoid करे तो हम अपना रोजमर्रा का काम भी बखूबी निभा सकते हैं और इस बीमारी से protection भी पा सकते हैं |

मोदी जी - डॉ० नावीद vaccine को लेकर भी लोगो के कई सारे सवाल है, जैसे कि vaccine से कितनी सुरक्षा मिलेगी, vaccine के बाद कितना आश्वस्त रह सकते हैं ? आप कुछ बात इसमें बतायें श्रोताओं को बहुत लाभ होगा |

डॉ० नावीद – जब हम कोरोना का infection सामने आया तब से आज तक हमारे पास covid 19 के लिए कोई effective treatment available नहीं है, तो हम इस बीमारी को fight, दो ही चीजों से कर सकते हैं एक तो protective major और हम पहले से ही कह रहे थे कि अगर कोई effective vaccine हमारे पास आए तो वो हमें इस बीमारी से निजाद दिला सकता है और हमारे मुल्क में दो vaccine इस टाइम available है, Covaxin and Covishield है जो यहीं पर बना हुआ vaccine है | और companies भी जो अपनी trials की है तो उसमे भी देखा गया है कि इसकी efficacy जो है वो 60% से ज्यादा है, और अगर हम, जम्मू कश्मीर की बात करें तो हमारी UT में अभी तक 15 से 16 लाख तक लोगों ने अभी ये vaccine लगाया है | हां social media में काफी इसके जो misconception या myths हैं, इसमें आये थे कि ये-ये side effect हैं, अभी तक हमारे जो भी यहाँ पर vaccine लगे हैं कोई side effect उनमें नहीं पाया गया है | सिर्फ, जो, आम हर किसी vaccine के साथ, associated होता है, किसी को बुखार आना, पूरे बदन में दर्द या local site जहाँ पर injection लगता है वहा पर pain होना ऐसे ही side effects हमने हर मरीज में देखे हैं जो कोई gross हमने कोई adverse effect हमने नहीं देखा है | और हां दूसरी बात लोगो में ये भी आशंका थी कि कुछ लोग after vaccination यानि vaccine टीकाकरण के बाद positive हो गये इसमें companies से ही guidelines है कि उसमें अगर किसी को टीका लगा है | उसके बाद उसमें infection हो सकता है वो positive हो सकता है | लेकिन जो बीमारी की severity है, यानि बीमारी की सिद्दत्त जो है, उन मरीज में, उतनी नहीं होगी यानि की वो positive हो सकते हैं लेकिन जो बीमारी है वो एक जानलेवा बीमारी उनमें साबित नहीं हो सकती, इसलिए जो भी ये misconception हैं vaccine के बारे में वो हमें दिमाग से निकालने चाहिए और जिस-जिस की बारी आयी क्योंकि 1 मई से हमारे पूरे मुल्क में जो भी 18 साल से ज्यादा की उम्र है उनको vaccine लगाने का कार्यक्रम शुरू होगा तो लोगों से अपील यही करेंगे आप आए vaccine लगवाए और अपने आप को भी protect करें और overall हमारी society और हमारी community इससे protect हो जायगी Covid 19 के infection से |

मोदी जी - डॉ० नावीद आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, और आपको रमजान के पवित्र महीने की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

डॉ० नावीद – बहुत-बहुत शुक्रिया |

मोदी जी : साथियो, कोरोना के इस संकट काल में Vaccine की अहमियत सभी को पता चल रही है, इसलिए, मेरा आग्रह है कि Vaccine को लेकर किसी भी अफ़वाह में न आयें | आप सभी को मालूम भी होगा कि भारत सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को free vaccine भेजी गई है जिसका लाभ 45 साल की उम्र के ऊपर के लोग ले सकते हैं | अब तो 1 मई से देश में 18 साल के ऊपर के हर व्यक्ति के लिए Vaccine उपलब्ध होने वाली है | अब देश का Corporate Sector, कम्पनियाँ भी अपने कर्मचारियों को Vaccine लगाने के अभियान में भागीदारी निभा पायेगी | मुझे ये भी कहना है कि भारत सरकार की तरफ से मुफ़्त Vaccine का जो कार्यक्रम अभी चल रहा है, वो, आगे भी चलता रहेगा | मेरा राज्यों से भी आग्रह है, कि, वो भारत सरकार के इस मुफ़्त Vaccine अभियान का लाभ अपने राज्य के ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ |

साथियो, हम सब जानते हैं कि बीमारी में हमारे लिए अपनी, अपने परिवार की देखभाल करना, मानसिक तौर पर कितना मुश्किल होता है, लेकिन, हमारे अस्पतालों के Nursing Staff को तो, यही काम, लगातार, कितने ही मरीजों के लिए एक साथ करना होता है| ये सेवा-भाव हमारे समाज की बहुत बड़ी ताकत है | Nursing Staff द्वारा की जा रही सेवा, और परिश्रम के बारे में, सबसे अच्छे से तो कोई Nurse ही बता सकती है | इसलिए मैंने रायपुर के डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अपनी सेवाएँ दे रहीं sister भावना ध्रुव जी को ‘मन की बात’ में आमंत्रित किया है, वो, अनेकों कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं | आइये ! उन्हीं से बात करते हैं –

मोदी जी:- नमस्कार भावना जी !

भावना:- आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी:- भावना जी...

भावना:- Yes sir

मोदी जी:- ‘मन की बात’ सुनने वालों को आप जरुर ये बताइए कि आपके परिवार में इतनी सारी जिम्मेवारियाँ इतने सारे यानी multitask और उसके बाद भी आप कोरोना के मरीजों के साथ काम कर रही हैं | कोरोना के मरीजों के साथ आपका जो अनुभव रहा, वो जरुर देशवासी सुनना चाहेंगे क्योंकि sister जो होती है, nurses जो होती हैं patient के सबसे निकट होती हैं और सबसे लम्बे समय तक होती हैं तो वो हर चीज़ को बड़ी बारीकी से समझ सकती हैं जी बताइए |

भावना:- जी सर, मेरा total experience COVID में सर, 2 month का है सर | हम 14 days duty करते हैं और 14 days के बाद हमें rest दिया जाता है | फिर 2 महीने बाद हमारी ये COVID duties repeat होता है सर | जब सबसे पहले मेरी COVID duty लगी तो सबसे पहले मैं अपने family members को ये COVID duty की बात share करी | ये मई की बात है और मैं, ये, जैसे ही मैंने share किया सब के सब डर गए, घबरा गए मुझसे, कहने लगे कि बेटा ठीक से काम करना, एक emotional situation था सर | बीच में जब, मेरी बेटी मुझसे पूछी, mumma आप COVID duty जा रहे हो तो उस समय बहुत ही ज्यादा मेरे लिए emotional moment था, लेकिन, जब मैं COVID patient के पास गयी तो मैं एक जिम्मेदारी घर में छोड़ कर गई और जब मैं COVID patient से मिली सर, तो वो उनसे और ज्यादा घबराये हुए थे, COVID के नाम से सारे patient इतना डरे हुए थे सर, कि, उनको समझ में ही नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है, हम आगे क्या करेंगे | हम उनके डर को दूर करने के लिए उनसे बहुत अच्छे से healthy environment दिए सर उन्हें | हमें जब ये COVID duty करने को कहा गया तो सर सबसे पहले हमको PPE Kit पहनने के लिए कहा गया सर, जो कि बहुत ही कठिन है, PPE Kit को पहन करके duty करना | सर ये बहुत tough था हमारे लिए, मैंने 2 month की duty में हर जगह 14-14 दिन duty की ward में, ICU में, Isolation में सर |

मोदी:- यानी कुल मिला कर तो आप एक साल से इसी काम को कर रही हैं |

भावना:- Yes sir, वहाँ जाने से पहले मुझे नहीं पता था कि मेरे colleagues कौन है | हम एक team member की तरह काम किये सर, उनका जो भी problem थे, उनको share किये, हम जाने patient के बारे में और उनका stigma दूर किये सर, कई लोग ऐसे थे सर कि जो COVID के नाम से ही डरते थे | वो सारे symptoms उनमें आते थे जब हम history लेते थे उनसे, लेकिन वो डर के कारण, वो अपना टेस्ट नहीं करवा पाते थे, तो हम उनको समझाते थे, और सर, जब severity बढ़ जाती थी तब उनका lungs already infected हो चुका रहता था तब उनको ICU की जरुरत रहती थी तब वो आते थे और साथ में उनकी पूरी family आती थी | तो ऐसा 1-2 case हमनें देखा सर और ऐसा भी नहीं कि हर एक age group के साथ काम किया सर हमने | जिसमें छोटे बच्चे थे, महिला, पुरुष, बुजुर्ग, सारे तरह के patient थे सर | उन सबसे हमने बात करी तो सब ने कहा कि हम डर की वजह से नहीं आ पाए, सबका यही हमें answer मिला सर | तो हम उनको समझाए सर, कि, डर कुछ नहीं होता है आप हमारा साथ दीजिये हम आपका साथ देंगे बस आप जो भी protocols है उसे follow कीजिये बस हम इतना उनसे कर पाए सर |

मोदी जी:- भावना जी, मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात कर करके, आपने काफी अच्छी जानकारियाँ दी हैं | अपने स्वयं के अनुभव से दी हैं, तो जरुर देशवासियों को, इससे एक, positivity का message जाएगा | आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भावना जी !

भावना:- Thank you so much sir... Thank you so much... जय हिन्द सर |

मोदी जी:- जय हिन्द !

भावना जी और Nursing Staff के आप जैसे हजारों-लाखों भाई-बहन बखूबी अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं | ये हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है | आप अपने स्वास्थ्य पर भी खूब ध्यान दीजिये | अपने परिवार का भी ध्यान रखिये |
साथियो, हमारे साथ, इस समय बेंगलुरु से Sister सुरेखा जी भी जुड़ी हुई हैं | सुरेखा जी K.C. General Hospital में Senior Nursing Officer हैं | आइये ! उनके अनुभव भी जानते हैं –

मोदी जी:- नमस्ते सुरेखा जी !

सुरेखा:- I am really proud and honoured sir to speak to Prime Minister of our country.

Modi ji:-Surekha ji, you along with all fellow nurses and hospital staff are doing excellent work. India is thankful to you all. What is your message for the citizens in this fight against COVID-19.

Surekha:- Yes sir... Being a responsible citizen I would really like to tell something like please be humble to your neighbors and early testing and proper tracking help us to reduce the mortality rate and moreover please if you find any symptoms isolate yourself and consult nearby doctors and get treated as early as possible. So, community need to know awareness about this disease and be positive, don’t be panic and don’t be stressed out. It worsens the condition of the patient. We are thankful to our Government proud to have a vaccine also and I am already vaccinated with my own experience I wanted to tell the citizens of India, no vaccine provides 100% protection immediately. It takes time to build immunity. Please don’t be scared to get vaccinated. Please vaccinate yourself; there is a minimal side effects and I want to deliver the message like, stay at home, stay healthy, avoid contact with the people who are sick and avoid touching the nose, eyes and mouth unnecessarily. Please practice physically distancing, wear mask properly, wash your hands regularly and home remedies you can practice in the house. Please drink Ayurvedic Kadha (आयुर्वेदिक काढ़ा), take steam inhalation and mouth gargling everyday and breathing exercise also you can do it. And one more thing last and not the least please have a sympathy towards frontline workers and professionals. We need your support and co-operation. We will fight together. We will get through with the pandemic. This is what my message to the people sir.

Modi ji:- Thank you Surekha ji.

Surekha:- Thank you sir.

सुरेखा जी, वाकई, आप बहुत कठिन समय में मोर्चा संभाले हुए हैं | आप अपना ध्यान रखिये ! आपके परिवार को भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें हैं | मैं, देश के लोगों से भी आग्रह करूँगा कि जैसा भावना जी, सुरेखा जी ने, अपने अनुभव से बताया है | कोरोना से लड़ने के लिए Positive Spirit बहुत ज्यादा जरुरी है और देशवासियों को इसे बनाए रखना है |

साथियो, Doctors और Nursing Staff के साथ-साथ इस समय Lab-Technicians और Ambulance Drivers जैसे Frontline Workers भी भगवान की तरह ही काम कर रहे हैं | जब कोई Ambulance किसी मरीज तक पहुँचती हैं तो उन्हें Ambulance Driver देवदूत जैसा ही लगता है | इन सबकी सेवाओं के बारे में, इनके अनुभव के बारे में, देश को जरुर जानना चाहिए | मेरे साथ अभी ऐसे ही एक सज्जन हैं – श्रीमान प्रेम वर्मा जी, जो कि एक Ambulance Driver हैं, जैसा कि इनके नाम से ही पता चलता है | प्रेम वर्मा जी अपने काम को, अपने कर्तव्य को, पूरे प्रेम और लगन से करते हैं | आइये ! उनसे बात करते हैं –

मोदी जी – नमस्ते प्रेम जी |

प्रेम जी – नमस्ते सर जी |

मोदी जी – भाई ! प्रेम |

प्रेम जी – हाँ जी सर |

मोदी जी – आप अपने कार्य के बारे में |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – जरा विस्तार से बताइये | आपका जो अनुभव है, वो भी बताइये |

प्रेम जी – मैं CATS Ambulance में driver की post पर हूँ और जैसे ही Control हमें एक tab पर call देता है | 102 से जो call आती है हम move करते हैं patient के पास | हम patient को जाते हैं, उनके पास, तो दो साल से हम continue कर रहे हैं ये काम | अपना kit पहन कर, अपने gloves, mask पहन कर patient को, जहाँ वो drop करने के लिए कहते हैं, जो भी hospital में, हम जल्दी से जल्दी उनको drop करते हैं |

मोदी जी – आपको तो vaccine की दोनों dose लग गई होंगी |
प्रेम जी – बिल्कुल सर |

मोदी जी – तो दूसरे लोगों को vaccine लगवायें | इसके लिए आपका क्या सन्देश है ?

प्रेम जी – सर बिल्कुल | सभी को ये dose लगवाना चाहिए और अच्छी ही है family के लिए भी | अब मुझे मेरी mummy कहती हैं ये नौकरी छोड़ दो | मैंने बोला, मम्मी, अगर मैं भी नौकरी छोड़ कर बैठ जाऊंगा तो सब और patient को कैसे कौन छोड़ने जाएगा ? क्योंकि सब इस कोरोना काल में सब भाग रहे हैं | सब नौकरी छोड़-छोड़ कर जा रहे हैं | mummy भी मुझे बोलती हैं कि बेटा वो नौकरी छोड़ दे | मैंने बोला नहीं mummy मैं नौकरी नहीं छोडूंगा |

मोदी जी – प्रेम जी माँ को दुखी मत करना | माँ को समझाना |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – लेकिन ये जो आपने माँ वाली बात बताई न

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – ये बहुत ही छूने वाली है |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – आपकी माता जी को भी |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – मेरा प्रणाम कहियेगा |

प्रेम जी – बिलकुल

मोदी जी – हाँ

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और प्रेम जी मैं आपके माध्यम से

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – ये ambulance चलाने वाले हमारे driver भी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – कितना बड़ा risk लेकर के काम कर रहे हैं |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और हर एक की माँ क्या सोचती है ?

प्रेम जी – बिलकुल सर

मोदी जी – ये बात जब श्रोताओं तक पहुचेगी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – मैं जरुर मानता हूँ कि उनको भी दिल को छू जाएगी |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – प्रेम जी बहुत-बहुत धन्यवाद | आप एक प्रकार से प्रेम की गंगा बहा रहे हैं |

प्रेम जी – धन्यवाद सर जी

मोदी जी – धन्यवाद भैया

प्रेम जी – धन्यवाद |

साथियो, प्रेम वर्मा जी और इन जैसे हजारों लोग, आज अपना जीवन दाव पर लगाकर, लोगों की सेवा कर रहे हैं | कोरोना के खिलाफ़ इस लड़ाई में जितने भी जीवन बच रहे हैं उसमें Ambulance Drivers का भी बहुत बड़ा योगदान है | प्रेम जी आपको और देशभर में आपके सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ | आप समय पर पहुँचते रहिये, जीवन बचाते रहिये |

मेरे प्यारे देशवासियो, ये सही है कि, कोरोना से बहुत लोग संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन, कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा है | गुरुग्राम की प्रीती चतुर्वेदी जी ने भी हाल ही में कोरोना को हराया है| प्रीती जी ‘मन की बात’ में हमारे साथ जुड़ रही हैं| उनके अनुभव हम सब के काफ़ी काम आयेंगें |

मोदी जी – प्रीति जी नमस्ते

प्रीति – नमस्ते सर | कैसे है आप ?

मोदी जी – मैं ठीक हूँ जी | सबसे पहले तो मैं आपकी covid-19 से

प्रीति – जी

मोदी जी – सफलतापूर्वक लड़ने के लिए

प्रीति – जी

मोदी जी – सराहना करूँगा

प्रीति – Thank you so much sir

मोदी जी – मेरी कामना है आपका स्वास्थ्य और तेजी से बेहतर हो |

प्रीति – जी शुक्रिया सर

मोदी जी – प्रीति जी

प्रीति –हाँ जी सर

मोदी जी – ये सिर्फ आपके पूरे wave में आप ही का नंबर लगा है कि परिवार के और सदस्य भी इसमें फंस गए है |

प्रीति – नहीं-नहीं सर मैं अकेली ही हुई थी |

मोदी जी – चलिये भगवान की कृपा रही | अच्छा मैं चाहूँगा

प्रीति – हाँजी सर |

मोदी जी – कि आप अपने इस पीड़ा की अवस्था के कुछ अनुभव अगर सांझा करें तो शायद जो श्रोता है उनको भी ऐसे समय कैसे अपने आप को संभालना चाहिए इसका मार्गदर्शन मिलेगा |

प्रीति – जी सर, जरूर | सर initially stage में मेरे को बहुत ज्यादा lethargy, मतलब बहुत सुस्ती-सुस्ती आया और उसके बाद ना मेरे गले में थोड़ी सी खराश होने लगी | तो उसके बाद ना मेरा थोड़ा सा मुझे लगा कि ये symptoms है तो मैंने test कराने के लिए test कराया | दूसरे दिन report आते ही जैसे ही मुझे positive हुआ, मैंने अपने आप को quarantine कर लिया | एक Room में isolate करके doctors के साथ consult करा, मैंने, उनसे | उनकी medication start कर दी |

मोदी जी – तो आपका परिवार बच गया आपके quick action के कारण |

प्रीति – जी सर | वो बाकी सबका भी बाद में कराया था | बाकी सब negative थे | मैं ही positive थी | उससे पहले मैंने अपने आप को isolate कर लिया था एक room के अन्दर | अपनी जरुरत का सारा सामान रख कर उसको मैं अपने आप अन्दर कमरे में बंद हो गई थी | और उसके साथ-साथ मैंने फिर doctor के साथ medication start कर दी | सर मैंने medication के साथ-साथ ना मैंने, योगा, आयुर्वेदिक, और, मैं ये सब start किया और साथ में ना, मैंने, काढ़ा भी लेना शुरू कर दिया था | Immunity boost करने के लिए और सर मैं दिन में मतलब जब भी अपना भोजन लेती थी उसमे मैंने healthy food जो कि protein rich diet थी, वो लिया मैंने | मैंने बहुत सारा fluid लिया मैंने steam लिया gargle किया और hot water लिया | मैंने दिन भर में इन सब चीज़ों को ही अपने जीवन में लेती आई daily | और सर इन दिनों में ना, सबसे बड़ी बात में बोलना चाहूंगी घबराना तो बिलकुल नहीं है | बहुत mentally strong करना है जिसके लिए मुझे योगा ने बहुत ज्यादा, breathing exercise करती थी अच्छा लगता था उसको करने से मुझे |

मोदी जी – हाँ | अच्छा प्रीति जी जब अब आपका process पूरा हो गया | आप संकट से बाहर निकल आई |

प्रीति – हाँ जी

मोदी जी – अब आपका test भी negative आ गया है |

प्रीति – हाँ जी सर

मोदी जी – तो फिर आप अपने स्वास्थ्य के लिए इसकी देखभाल के लिए अभी क्या कर रही हैं ?

प्रीति – सर मैंने एक तो योग बंद नहीं किया है |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – ठीक है मैंने काढ़ा अभी भी ले रही हूँ और अपनी immunity boost रखने के लिए मैं अच्छा healthy food खा रही हूँ अभी |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – जो कि मैं बहुत अपने आप को neglect कर लेती थी उस पर बहुत ध्यान दे रही हूँ मैं |

मोदी जी – धन्यवाद प्रीति जी |

प्रीति – Thank you so much sir. 

मोदी जी - आपने जो जानकारी दी मुझे लगता है ये बहुत सारे लोगों के काम आयेगी | आप स्वस्थ रहें, आपके परिवार के लोग स्वस्थ रहें, मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें |

मेरे प्यारे देशवासियो, जैसे आज हमारे Medical Field के लोग, Frontline Workers दिन-रात सेवा कार्यों में लगे हैं | वैसे ही समाज के अन्य लोग भी, इस समय, पीछे नहीं हैं | देश एक बार फिर एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है | इन दिनों मैं देख रहा हूँ कोई Quarantine में रह रहे परिवारों के लिए दवा पहुँचा रहा है, कोई, सब्जियाँ, दूध, फल आदि पहुँचा रहा है | कोई Ambulance की मुफ़्त सेवाएँ मरीजों को दे रहा है | देश के अलग-अलग कोने में इस चुनौतीपूर्ण समय में भी स्वयं सेवी संगठन आगे आकर दूसरों की मदद के लिए जो भी कर सकते हैं वो करने का प्रयास कर रहे हैं | इस बार, गाँवों में भी नई जागरूकता देखी जा रही है | कोविड नियमों का सख्ती से पालन करते हुए लोग अपने गाँव की कोरोना से रक्षा कर रहे हैं, जो लोग, बाहर से आ रहे हैं उनके लिए सही व्यवस्थायें भी बनाई जा रही हैं | शहरों में भी कई नौजवान सामने आये हैं, जो अपने क्षेत्र में, कोरोना के case न बढ़े, इसके लिए, स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, यानि एक तरफ देश, दिन-रात अस्पतालों, Ventilators और दवाईयों के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी ओर, देशवासी भी, जी-जान से कोरोना की चुनौती का मुकाबला कर रहें हैं | ये भावना हमें कितनी ताकत देती है, कितना विश्वास देती है | ये जो भी प्रयास हो रहे हैं, समाज की बहुत बड़ी सेवा है | ये समाज की शक्ति बढ़ाते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ की पूरी चर्चा को हमने कोरोना महामारी पर ही रखा, क्योंकि, आज, हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इस बीमारी को हराना | आज भगवान महावीर जयंती भी है | इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ | भगवान महावीर के सन्देश, हमें, तप और आत्म संयम की प्रेरणा देते हैं | अभी रमजान का पवित्र महीना भी चल रहा है | आगे बुद्ध पूर्णिमा भी है | गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है | एक महत्वपूर्ण दिन पोचिशे बोइशाक - टैगोर जयंती का है | ये सभी हमें प्रेरणा देते हैं अपने कर्तव्यों को निभाने की | एक नागरिक के तौर पर हम अपने जीवन में जितनी कुशलता से अपने कर्तव्यों को निभायेंगे | संकट से मुक्त होकर भविष्य के रास्ते पर उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेंगे | इसी कामना के साथ मैं आप सभी से एक बार फिर आग्रह करता हूँ कि Vaccine हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है | ‘दवाई भी - कड़ाई भी’ | इस मंत्र को कभी भी नहीं भूलना है | हम जल्द ही साथ मिलकर इस आपदा से बाहर आयेंगे | इसी विश्वास के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |