प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय सूचना आयोग के 10वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया 
आरटीआई सिर्फ़ जानने का ही नहीं बल्कि सवाल करने का भी अधिकार है। इससे लोकतंत्र में विश्वास विश्वास बढ़ेगा: प्रधानमंत्री
सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ योजना आरटीआई की पूरक है क्योंकि सूचनाएँ ऑनलाइन होने से पारदर्शिता आती है और विश्वास बढ़ता है: प्रधानमंत्री
सरकारी व्यवस्था में स्पष्टता नागरिकों के लिए सहायक होगी। आज के इस युग में गोपनीयता की आवश्यकता नहीं है: प्रधानमंत्री
आरटीआई का उद्देश्य शासन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए: प्रधानमंत्री
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि है: प्रधानमंत्री मोदी

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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भाजपा ही ओडिशा को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी: कटक में पीएम मोदी
May 20, 2024
बीजेडी के भ्रष्टाचार के सबसे बड़े भुक्तभोगी, पलायन के लिए विवश ओडिशा के नौजवान हैं: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी
ओडिशा के साथ चल रही लूट को आपका एक वोट बंद करेगा: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी
ओडिशा को अब बीजेडी की स्लो रफ्तार सरकार पीछे छोड़कर, डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चुननी है: कटक, ओडिशा में पीएम मोदी

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय श्रीराम !

जय श्रीराम !

एठी उपस्थित समस्त मान्यगण व्यक्तिनंकू मोर नमस्कार! देवी मां चामुंडा, चंडी मंदिर, डमडमणी पीठ, मां भट्टारिका, प्रभु नीलमाधव की धरती पर आप जनता-जनार्दन के दर्शन करके मेरा जीवन धन्य हो गया। यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं, हमारे नौजवान जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं, वो तो उमंग से भरे हुए नजर आ रहे हैं। आपका उत्साह-आपका जोश ये दिखा रहा है कि 25 साल बाद ओडिशा नया इतिहास रचने जा रहा है। ओडिशा में 10 जून को भाजपा का पहला सीएम शपथ लेगा, ये तय है। और आपके आशीर्वाद से तीसरी बार मोदी सरकार दिल्ली में शपथ लेगी, ये भी तय है।

भाइयों और बहनों,

कटक, देश के सबसे पुराने शहरों में से एक है। यहां इतिहास भी है, विरासत भी है। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास, उत्कल केसरी हरेकृष्ण महताब ऐसे अनेक महानुभावों की प्रेरणा है। ये आधुनिक शिक्षा की नगरी है। ये विकसित भारत का सामर्थ्य बढ़ाने वाली धरती है।

साथियों,

जिस कटक का जिस ओडिशा का इतना बड़ा महत्व है उसे क्या कोई ऐसा व्यक्ति संभाल सकता है जिसको ओडिशा की संस्कृति की समझ न हो? जिसको यहां की मिट्टी की संवेदना की समझ न हो? BJD को आपने इस शताब्दी के 24-25 साल देकर देखे हैं और आपने देखा है कि परिणाम क्या निकला। अब अगले 25 वर्ष ओडिशा के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। (यहां बहुत सारे लोग अपने कुछ न कुछ चित्र पेंटिंग लेकर के आए हैं। जरा एसपीजी के लोग सारा कलेक्ट कर लीजिए, जो नौजवान और बच्चे कुछ लाए हैं पीछे अपना नाम पता लिख दें। मैं जरूर आपको चिट्ठी भेजूंगा। ये सुभाष बाबू बन के आया है नौजवान। बोलिए भारत माता की, भारत माता की। जिसको जो देना है अभी दे दो बाद में मुझे कोई रह जाए ऐसा ना हो जय श्री राम, जय श्री राम।) ओडिशा को अब BJD की Slow रफ्तार सरकार पीछे छोड़कर डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चुननी है। और मेरा आपसे आग्रह है अभी मीडिया वालों ने, कुछ लोगों ने शुरू कर दिया है कि यहां हंग असेंबली बनेगी, हंग असेंबली बनेगी। यह सरासर गपबाजी है, यहां भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने वाली है। और भाजपा ही अगले 25 वर्ष में उड़ीसा को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।

साथियों,

ओडिशा, BJD के भ्रष्टाचारी रैकेट से यहां के लोग तंग आ गए हैं। जो BJD, चिटफंड जैसे फर्ज़ीवाड़े से गरीब लोगों को धोखा देती है, BJD ने ओडिशा को क्या दिया? अगर BJD ने ओडिशा को दिया है तो Land mafia दिया है, sand mafia दिया है, coal mafia दिया है, mining mafia दिया है। BJD के विधायक और मंत्री 24X7 इसी में लगे हुए हैं। ऐसे में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास संभव है क्या? संभव है क्या? यहां इन्वेस्टमेंट आ सकता है क्या? यहां रोज़गार बन सकता है क्या? मैं तो हैरान हूं, मेरे यहां गुजरात में शायद उड़ीसा का कोई ऐसा ब्लॉक नहीं होगा, वहां के लोग गुजरात में आकर के रोजी रोटी ना कमाते हों। जो प्रदेश इतना समृद्ध है उस प्रदेश को ऐसे बर्बाद करने वाले लोगों को यह चुनाव तो सजा करने के लिए चुनाव है उन लोगों को।

भाइयों और बहनों,

BJD सरकार कैसे काम करती है, इसका कच्चा-चिट्ठा अब जनता के सामने आ रहा है। जबसे मोदी सरकार बनी है, तबसे ओडिशा के विकास के लिए मैंने रिकॉर्ड पैसा दिल्ली से यहां भेजा है, पहले टैक्स का जितना पैसा केंद्र सरकार से ओडिशा को आता था, मोदी ने उससे 3 गुना ज्यादा पैसा ओडिशा को दिया है। कांग्रेस की सरकार के दौरान जब पुरानी खनन नीति थी तब ओडिशा को करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए मिलते थे। मोदी ने नई खनन नीति बनाई। आज ओडिशा को खनन से ही लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए की आय हो रही है। अब आप सोचिए कांग्रेस के जमाने में 5000 करोड़, मोदी के जमाने में 50 हजार करोड़ रुपया यहां मिलता है इसके अतिरिक्त डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन के तहत भी ओडिशा को 26 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। यानि मोदी सरकार यहां पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा भेज रही है। लेकिन ओडिशा में BJD की भ्रष्ट सरकार इस पैसा का गोलमाल कर रही है। मैं ओडिशा के करीब-करीब हर जिले में जा चुका हूं। यहां सड़क, बिजली, पानी, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल हर चीज़ का अभाव है। तो ये पैसा किसकी जेब में गया? यहां कटक में ही देखिए, जलभराव का कितना बड़ा संकट हर साल रहता है? मैं यहां हाईवे के, रेलवे के इतने सारे प्रोजेक्ट्स भेजता हूं। लेकिन BJD के नेताओं को जब तक कट-कमीशन नहीं मिलता तब तक वो हर प्रोजेक्ट को लटकाए रखते हैं। BJD नेता, अपने करीबी ठेकेदारों को ही ठेके दिलवाकर, आपको हर तरफ से लूट रहे हैं। आप मुझे बताइए, ओडिशा के साथ ये लूट बंद होनी चाहिए या नहीं? ऐसा नहीं दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बताइए ये लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट कौन बंद करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? मोदी मोदी को मत करो, यह आपका एक वोट है ना वो ये लूट बंद करेगा। आपके वोट की ताकत है जो उड़ीसा का भाग्य बदल सकती है।

भाइयों और बहनों,

BJD के इस भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा नुकसान आप नौजवानों को ही हो रहा है। यहां से नौजवानों को पलायन करना पड़ता है। BJD सरकार यहां निवेश के लिए उचित माहौल नहीं बना पाई। एक माफिया है जो हर सेक्टर पर कब्ज़ा करके बैठा हुआ है, वो यहां कंपटीशन आने ही नहीं देता। 10 जून को हमारी सरकार आने दीजिए, भाजपा सरकार इस माफिया की कमर तोड़ने वाली है।

साथियों,

मोदी सरकार शिक्षा-कौशल विकास और आत्मनिर्भर भारत पर बल दे रही है। 10 साल में ओडिशा को IIM, आईजर ब्रह्मपुर… इंस्‍टीट्यूट ऑफ कैमिकल टैक्नॉलॉजी भुवनेश्वर, ऐसे अनेक संस्थान मिले। टेक्नॉलॉजी और टेक्सटाइल से लेकर इथेनॉल तक हर सेक्टर में मोदी सरकार ने बड़े लक्ष्य रखे हैं। इससे कटक में भी उद्योगों की संभावनाएं बढ़ेंगी। और अभी हमारे मित्र महताब जी मुझे बता रहे थे यहां पहले इतने उद्योग थे, एक के बाद एक सबको ताले लग गए। यहां का आर्थिक जीवन तबाह हो गया और इससे यहां के नौजवानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। और इसलिए साथियों, हमें यहां निवेश चाहिए, हमें उद्योग चाहिए, हमें पुराने उद्योगों का पुनर्जीवन चाहिए। साथियों और वह जब होगा और मैं आपको दिलाता हूं विश्वास, ये भाजपा में ताकत है वह कर सकती है। मैं उड़िया वासियों को वादा करता हूं, मेरे पास लंबे समय तक एक राज्य को चलाने का अनुभव है। भले मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री रहूंगा लेकिन उड़ीसा में जो बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा, उड़ीसा में जो बीजेपी की सरकार बनेगी उसको कभी भी कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा।

साथियों,

BJD सरकार को कटक के लोगों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है। कटक चारों तरफ नदियों से घिरा है। लेकिन यहां पीने के पानी की समस्या है। मोदी नल से जल देना चाहता है लेकिन ये रोड़े अटकाते हैं। मोदी ने देश के गांव और शहरों में गरीबों के 4 करोड़ पक्के घर बनाए हैं। आने वाले सालों में 3 करोड़ और नए घर बनाने की गारंटी दी है। ओडिशा में भी करीब 30 लाख गरीबों के घर बने हैं। लेकिन BJD आपके लिए नए घर बनाने में लगातार अड़चनें पैदा कर रही है। गरीब को पक्का घर मिलने से रोके, ऐसा काम आपका दुश्मन ही कर सकता है।

भाइयों और बहनों,

आप यहां डबल इंजन की भाजपा सरकार बनाइए तो आपका बिजली का बिल भी ज़ीरो होगा और बिजली से कमाई भी होगी। ये कमाल मोदी सरकार की, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से होगा। और उसकी रजिस्ट्री चल रही है आप अभी भी रजिस्ट्री करवा सकते हैं ऑनलाइन जाकर के। घर की छत पर सोलर पैनल के लिए मोदी सरकार आपको 75 हजार रुपये से ज्यादा देगी हर घर के ऊपर। और अतिरिक्त बिजली भाजपा सरकार यहां जो बनेगी वह आपसे खरीदेगी। अब मुझे बताइए आपको डबल मुनाफा हुआ कि नहीं हुआ। डबल फायदा हुआ कि नहीं हुआ। पैसे की बचत हुई कि नहीं हुई। वह पैसे आपके बच्चों के काम आएंगे कि नहीं आएंगे?

साथियों,

ओडिशा भाजपा ने माताओं-बहनों के लिए जो गारंटियां दी हैं, आज उनकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। सुभद्रा योजना से माताओं-बहनों को बहुत मदद मिलेगी। आप कल्पना कीजिए, 10 साल पहले तक माताओं-बहनों के बैंक खाते तक नहीं थे। अब ऐसी-ऐसी शानदार योजनाएं भाजपा माताओं-बहनों के नाम पर ला रही हैं। मोदी की एक और गारंटी, देश की 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का मेरा संकल्प है। तीन करोड़ लखपति दीदी बनेगी, आप कल्पना कर सकते हैं हमारी इकोनॉमी कितनी तेज चलेगी। लखपति दीदियों ने हर साल एक लाख रुपये से ज्यादा की आय और वो भी स्वाभिमान के साथ। आशा और आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों के लिए भी ओडिशा भाजपा ने बहुत बड़ी घोषणा की है। आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों को 12 हज़ार रुपए तक की सैलरी मिलेगी, ये ओडिशा भाजपा ने कहा है। इसके साथ-साथ जब यहां आयुष्मान योजना लागू होगी तो कटक के किसी भी परिवार को अपने बुजुर्गों के इलाज के लिए कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी। ये दिल्ली में जो बेटा बैठा है न वो करेगा। बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की गारंटी, ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

विकास और विरासत, ये भाजपा का एजेंडा है। आपने देखा कि दिल्ली में जो जी-20 का शिखर सम्मेलन हुआ, उसमें दुनियाभर के दिग्गज नेता आए थे और सबको मोदी ने कोणार्क के चक्र के सामने खड़ा किया। कोणार्क के चक्र के सामने फोटो निकाली और उनके घरों में आज कोणार्क का सूर्य चक्र पहुंच गया। इससे पूरी दुनिया में कोणार्क का गौरव बढ़ा है। लेकिन BJD सरकार को ओडिशा की धरोहर की कोई चिंता नहीं है। जगन्नाथ जी के श्री रत्न भंडार को लेकर जो कुछ हो रहा है, उससे पूरा ओडिशा बहुत गुस्से में है। अब लोग कहते हैं कि श्री रत्न भंडार की चाबी तमिलनाडु चली गई है। अभी किसने भेजी है भाई तलमलनाडु। ये तमिलनाडु कौन ले गया है। ऐसे लोगों को माफ करोगे क्या? जिस तरह श्री रत्न भंडार की चाबी खो गई और फिर जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया और इस मामले पर बहुत बड़े गंभीर सवाल उठते हैं। लेकिन मैं उड़ीसा के मेरे भाई बहनों को कहना चाहता हूं, साथियों ये मोदी है मैं सोमनाथ की धरती से आया हूं। जगन्नाथ की धरती की पूजा कर रहा हूं और मेरे लिए जितने भगवान सोमनाथ दादा के आशीर्वाद है इतने ही महाप्रभु जगन्नाथ जी के आशीर्वाद है। मुझ पर सोमनाथ दादा का भी कर्ज है मुझ पर महाप्रभु जगन्नाथ जी का भी कर्ज है। और इसलिए मैं उड़ीसा के एक-एक नागरिक को गारंटी देता हूं आप आश्वस्त रहिए यहां भाजपा सरकार बनते ही यह चाबी का राज खोला जाएगा। जांच रिपोर्ट आपके सामने आएगी और अगर किसी ने गड़बड़ की है तो मोदी किसी को छोड़ता नहीं है।

भाइयों और बहनों,

ये चुनाव ओडिशा के विकास और ओडिया गौरव को बचाने का है। इसलिए, ये जितने भी हमारे साथी MLA का चुनाव लड़ रहे हैं। उन सबको चुन करके हमें ओडिशा की सरकार, बीजेपी की सरकार बनानी है। सारे एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। यह चुनाव देश को एक मजबूत सरकार देने का भी है इसलिए कटक से मित्र भर्तृहरि महताब जी को इस बार बहुत बड़ी लीड से दिल्ली भेजना है और इनको मिला हर वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में आएगा। तो ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे, हर पोलिंग बूथ जीतेंगे।

बोलिए भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत-बहुत धन्यवाद