प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय सूचना आयोग के 10वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया 
आरटीआई सिर्फ़ जानने का ही नहीं बल्कि सवाल करने का भी अधिकार है। इससे लोकतंत्र में विश्वास विश्वास बढ़ेगा: प्रधानमंत्री
सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ योजना आरटीआई की पूरक है क्योंकि सूचनाएँ ऑनलाइन होने से पारदर्शिता आती है और विश्वास बढ़ता है: प्रधानमंत्री
सरकारी व्यवस्था में स्पष्टता नागरिकों के लिए सहायक होगी। आज के इस युग में गोपनीयता की आवश्यकता नहीं है: प्रधानमंत्री
आरटीआई का उद्देश्य शासन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए: प्रधानमंत्री
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि है: प्रधानमंत्री मोदी

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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मलेशिया में बसे भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु: पीएम मोदी
February 07, 2026
कुआलालंपुर में भारतीय प्रवासियों के स्नेह के लिए अत्यंत आभारी हूँ, हमारा प्रवासी समुदाय भारत और मलेशिया के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में निरंतर कार्य करता रहेगा: प्रधानमंत्री
मलेशिया में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय निवास करता है, भारत और मलेशिया के दिलों को जोड़ने वाले कई गहरे सूत्र हैं: प्रधानमंत्री
मैंने 'मन की बात' कार्यक्रम में आपके बारे में बात की थी, जहाँ मैंने 140 करोड़ भारतीयों को बताया था कि मलेशिया में 500 से अधिक स्कूल बच्चों को भारतीय भाषाओं में शिक्षा देते हैं: प्रधानमंत्री
मलेशिया में रहने वाला तमिल समुदाय विभिन्न क्षेत्रों में समाज की सेवा कर रहा हैं और तमिल समुदाय यहाँ कई सदियों से मौजूद हैं: प्रधानमंत्री
हमें यह बताते हुए गर्व है कि हमने मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना की है। अब हम तिरुवल्लुवर सेंटर भी स्थापित करेंगे, ताकि हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत किया जा सके: प्रधानमंत्री
भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है, यह एशिया की सफलता भी है। इसी कारण मैं कहता हूँ कि हमारे संबंधों का मार्गदर्शक शब्द ‘IMPACT’ है: प्रधानमंत्री
मैं आप सभी को, साथ ही आपके मलय मित्रों को, भारत की यात्रा करने और अतुल्य भारत का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ, क्योंकि लोगों के बीच संपर्क हमारी मित्रता का मूल आधार है: प्रधानमंत्री
भारत को विकास के लिए एक भरोसेमंद साझेदार माना जाता है, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान, ईयू और अमेरिका जैसे देशों ने भारत के साथ ट्रेड डील की हैं: प्रधानमंत्री

महामहिम प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम,

मेरे प्रिय मित्रों, भाइयों और बहनों,

सलामत पतांग!

वणक्कम्!

सुखमाणो?

सत श्री अकाल!

बागुन्नारा?

केम-छो?

आपके अभिवादन की गर्मजोशी हमारी साझा संस्कृति की सुन्दर विविधता को प्रतिबिंबित करती है।

सबसे पहले, मैं अपने प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को इस सामुदायिक उत्सव में भाग लेने के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं उनको इस बात के लिए भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने अभी अपने भाषण में भारत-मलेशिया मित्रता की व्यापकता और भविष्य की संभावनाओं को इतने सुंदर शब्दों में व्यक्त किया।

इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री मुझे स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर आए और वे मुझे अपनी कार में लेकर आये। केवल अपने कार में ही नहीं, बल्कि अपनी सीट पर भी। यह विशेष स्वागत उनका भारत और आप सभी के प्रति प्रेम और सम्मान को प्रतिबिंबित करता है।

मैं आपके गर्मजोशी से भरे शब्दों, आतिथ्य और मित्रता के प्रति आभारी हूं।

मित्रों,

हमने अभी-अभी एक रिकॉर्ड बनाने के स्तर का एक सांस्कृतिक प्रदर्शन देखा। 800 से अधिक नर्तक एकदम सामंजस्य में। हमारे लोग आने वाले कई वर्षों तक इस प्रदर्शन को याद रखेंगे। मैं आपको बधाई देता हूँ। मैं सभी कलाकारों को बधाई देता हूँ।

मित्रों,

प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मैं उनके प्रधानमंत्री बनने के पहले से ही मित्र रहे हैं। मैं उनके सुधारों पर ध्यान, उनकी महान बुद्धिमत्ता और 2025 में आसियान की सक्षम अध्यक्षता की सराहना करता हूँ।

पिछले साल, मैं आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मलेशिया नहीं आ सका। लेकिन मैंने अपने मित्र से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊँगा। और वादे के अनुसार, मैं यहाँ हूँ।

यह मेरी 2026 की पहली विदेश यात्रा है। इन उत्सवों के समय आपके साथ रहकर मुझे खुशी हो रही है। मुझे उम्मीद है कि सभी ने संक्रांति, पोंगल और तइ-पूसम् बड़े उत्साह के साथ मनाया होगा। जल्द ही, शिवरात्रि का पर्व आने वाला है। कुछ ही दिनों में रमजान शुरू होगा और फिर हरि राया बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। मेरी कामना है कि सभी को खुशी और अच्छा स्वास्थ्य मिले।

दोस्तों,

मलेशिया में भारतीय मूल की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। भारतीय और मलेशियाई दिलों को जोड़ने वाली इतनी बहुत सी चीजें हैं। जो प्रदर्शनी प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम और मैंने थोड़ी देर पहले देखी, वह इन संबंधों को खूबसूरती से दर्शाती है। आप एक जीवंत पुल हैं, जो हमें जोड़ता है।

आपने रोटी चनाई को मलाबार परोट्टा से जोड़ा है।

नारियल, मसाले और बेशक तेह तारिक…

स्वाद इतने परिचित लगते हैं, चाहे व्यक्ति कुआलालंपुर में हो या कोच्चि में। हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यह शायद हमारे भाषाओं और मलय भाषा में साझा शब्दों की बड़ी संख्या होने की वजह से है।

मैंने सुना है कि भारतीय फिल्में और संगीत मलेशिया में लोकप्रिय हैं। आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम बहुत अच्छा गाते हैं। लेकिन भारत में बहुत से देशवासियों यह नहीं पता था। उनकी पिछली यात्रा के दौरान, लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ था। भारत में एक पुराने हिंदी गाने को गाते हुए उनका वीडियो वायरल हो गया! यह अद्भुत है कि उन्हें महान एमजीआर के तमिल गाने भी पसंद हैं।

मित्रों, 

मुझे पता है कि भारत की आपके दिलों में एक खास जगह है। मुझे 2001 की एक घटना बहुत स्पष्ट रूप से याद है। जब मेरे गृह राज्य गुजरात में भूकंप आया था, तब आप में से कई लोग मदद के लिए आगे आए। मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ।

और उससे भी बहुत पहले, भारत को स्वतंत्र देश बनाने के लिए, आपके हजारों पूर्वजों ने महान बलिदान दिए। इनमें से कई ने कभी भारत नहीं देखा था। लेकिन वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल होने वालों में पहले थे।

उनके सम्मान में हमने मलेशिया में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस सांस्कृतिक केंद्र रख दिया। मैं इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सेवा केंद्र और नेताजी कल्याण फाउंडेशन के प्रयासों को भी सलाम करता हूँ।

दोस्तों,

यह वास्तव में अद्भुत है कि आपने सदियों से परंपराओं को संरक्षित रखा है। हाल ही में, मैंने अपने मासिक रेडियो संवाद 'मन की बात' में आप सभी के बारे में बात की थी। मैंने 1.4 अरब भारतीयों के साथ साझा किया कि मलेशिया में 500 से अधिक स्कूलों में बच्चों को भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाता है।

तिरुवळ्ळुवर और स्वामी विवेकानंद जैसे महान संतों का प्रभाव भी यहाँ महसूस किया जा सकता है। पिछले सप्ताह बतु गुफाओं में हुए तइ-पूसम् इतने दिव्य थे कि वे पळनि में होने वाले उत्सवों जैसे प्रतीत हो रहे थे। श्री वेंकटेश्वरा मंदिर, बागान दातोह में सांस्कृतिक उत्सव भी समान रूप से भव्य हैं।

मुझे बताया गया है कि यहाँ गरबा बहुत लोकप्रिय है। हम उन सिख भाइयों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी गहरे दिल में संजोते हैं जो यहाँ रहते हैं। आपने नाम जपो, किरत करो, वंड छको को बढ़ावा देकर श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आज भी जीवित रखा है।

 

दोस्तों,

यहां भारत के सभी हिस्सों के लोग मौजूद हैं। सांस्कृतिक एकता के सूत्र हमें मजबूती से बांधते हैं। हमारी ताकत यह है कि हम विविधता में एकता को समझते हैं।

दोस्तों,

तमिल दुनिया को भारत का एक उपहार है। तमिल साहित्य शाश्वत है और तमिल संस्कृति वैश्विक है। इसी तरह, तमिल लोगों ने भी अपनी प्रतिभाओं से मानवता की सेवा की है। और मैं गर्व के साथ कहता हूँ, भारत के उपराष्ट्रपति, श्री सीपी राधाकृष्णन जी, हमारे विदेश मंत्री श्री जयशंकर जी, जो आज हमारे साथ हैं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी, जिन्होंने नौ बार हमारा बजट प्रस्तुत किया है और हमारे सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री, डॉ. मुरुगन, सभी तमिलनाडु के हैं।

इसी तरह, मलेशिया में तमिल प्रवासी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कर रहे हैं। वास्तव में, तमिल प्रवासी समाज यहाँ कई शताब्दियों से मौजूद है। इस इतिहास से प्रेरित होकर, हमें मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवळ्ळुवर चेयर स्थापित करने पर गर्व है। अब हम अपने साझा विरासत को और मजबूत करने के लिए एक तिरुवळ्ळुवर केंद्र स्थापित करेंगे।

दोस्तों,

मलेशिया के साथ हमारा संबंध हर साल नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। 2024 में, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की नई दिल्ली यात्रा के दौरान, हमने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया।

आज, हम प्रगति और समृद्धि की दिशा में साझेदारों के रूप में हाथ में हाथ डाले आगे बढ़ रहे हैं। हम एक-दूसरे की सफलता का जश्न उसी तरह मनाते हैं, जैसे अपनी खुद की। मुझे प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता पर शुभकामनाओं से बहुत खुशी हुई। मैं आपसे सहमत हूं, मेरे प्रिय मित्र। भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है, यह एशिया की सफलता है।

इसीलिए, मैं कहता हूं कि हमारे संबंधों का मार्गदर्शक शब्द है, इम्पैक्ट। इम्पैक्ट का मतलब है सामूहिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए भारत-मलेशिया साझेदारी।

हमारे संबंधों की गति पर इम्पैक्ट

हमारी महत्वाकांक्षाओं के पैमाने पर इम्पैक्ट

हमारे लोगों के लाभ के लिए इम्पैक्ट

साथ मिलकर, हम पूरी मानवता को लाभ पहुंचा सकते हैं!

दोस्तों,

भारतीय कंपनियां मलेशिया के साथ काम करने की हमेशा इच्छुक रही हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमने मलेशिया की पहली और एशिया की सबसे बड़ी इंसुलिन निर्माण सुविधा बनाने में हिस्सा लिया।

100 से अधिक भारतीय आईटी कंपनियां मलेशिया में काम कर रही हैं, जिससे हजारों नौकरियों का सृजन हुआ है। मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद् हमारे डिजिटल सहयोग के लिए नए मार्ग बना रही है। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत की यूपीआई जल्द ही मलेशिया में भी आ जायेगी।

दोस्तों,

हम सभी एक ही हिन्द महासागर के नीले पानी को साझा करते हैं। महासागर के पार, हमें एक-दूसरे से मिलने का बहुत शौक है। मैं आप सभी को भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने के लिए आमंत्रित करता हूं।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने अवसंरचना और परोवाहन-संपर्क में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। एक दशक में हमारे हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है। राजमार्गों का निर्माण रिकॉर्ड गति से हो रहा है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों को अंतर्राष्ट्रीय सराहना मिल रही है। मैं आप में से अधिक से अधिक लोगों को यात्रा करने और अद्भुत भारत का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।

आपको अपने मलय दोस्तों को भी अपने साथ लाना चाहिए। अकेले मत आइए। क्योंकि लोगों के बीच आपसी-संपर्क हमारी मित्रता का आधार है।

 

दोस्तों,

जब हम 2015 में मिले थे, मैंने आपसे भारत की संभावना के बारे में बात की थी। अब, मैं आपसे भारत के प्रदर्शन के बारे में बात कर रहा हूँ। एक दशक में, भारत ने बड़ा बदलाव देखा है।

तब, हम दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे। अब, हम शीर्ष 3 के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। हम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी हैं।

तब, 'मेक इन इंडिया' एक छोटा पौधा था, जिसे अभी-अभी रोपा गया था। अब, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है। हमारा रक्षा निर्यात 2014 की तुलना में लगभग 30 गुना बढ़ गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब भी बन गया है।

हमने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और दुनिया के सबसे बड़े फिनटेक इकोसिस्टम का निर्माण किया है। हमारे यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म के कारण, दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं।

तेज़ बढ़ोतरी के साथ-साथ, हमने यह भी सुनिश्चित किया कि हमारी वृद्धि स्वच्छ और हरित हो। उदाहरण के लिए, एक दशक में हमारी सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 40 गुनी बढ़ गई है।

मित्रों,

पहले, भारत को केवल एक विशाल बाजार के रूप में देखा जाता था। अब, हम निवेश और व्यापार के लिए एक हब हैं। भारत को विकास के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखा जाता है। चाहे यूके हो, यूएई हो, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ओमान, ईयू या यूएसए हो, देशों ने भारत के साथ व्यापारिक समझौते किए हैं। विश्वास भारत की सबसे मजबूत मुद्रा बन गया है।

मित्रों,

भारत हमेशा आपको खुले दिल से स्वीकार करेगा। यही कारण है कि हमने कुछ महीने पहले एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। हमने भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिकों के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता 6वीं पीढ़ी तक बढ़ा दी।

हम भारतीय छात्रवृत्ति ट्रस्ट फंड का समर्थन कर रहे हैं। अब, हम तिरुवळ्ळुवर छात्रवृत्तियाँ भी देने जा रहे हैं, ताकि छात्र भारत में पढ़ाई कर सकें। और हम आपको ‘भारत को जानें’ कार्यक्रम ('नो इंडिया प्रोग्राम') में देखने के लिए उत्सुक हैं।

आपको जानकर खुशी होगी कि हम जल्द ही मलेशिया में भारत का एक नया वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) खोलने जा रहे हैं। यह हमें और भी करीब लाएगा।

मित्रों,

1.4 अरब भारतीय 2047 तक एक विकसित भारत बनाना चाहते हैं।

विकसित भारत बनाना है ना?

विकसित भारत बनाके रहेंगे कि नहीं रहेंगे?

हम अपने सपनों को साकार करेंगे कि नहीं करेंगे?

हम सपनों को संकल्प में बदलेंगे कि नहीं बदलेंगे?

हम संकल्प को सिद्ध करके रहेंगे कि नहीं रहेंगे?

इस यात्रा में, हमारे प्रवासी भारतीय, भारतीय प्रवासी समुदाय, एक मूल्यवान भागीदार हैं। चाहे आपका जन्म कुआलालंपुर में हुआ हो या कोलकाता में, भारत आपके दिलों में बसता है। आप मलेशिया और भारत की प्रगति का सक्रिय हिस्सा हैं। आप समृद्ध मलेशिया और विकसित भारत के विज़न को साकार करने में मदद करेंगे।

जय हिंद!

जुम्पा लागी

मिक्का नण्ड्री!