PM Modi speaks at the 10th Annual Convention of the Central Information Commission
RTI is not only about the right to know but also the right to question. This will increase faith in democracy: PM
Govt's 'Digital India' is complimentary to RTI, putting information online brings transparency, which in turn, builds trust: PM
More openness in government will help citizens. In this day and age there is no need for secrecy: PM
Aim of RTI must be to bring about a positive change in governance: PM
The voice of people is supreme in a democracy: PM Narendra Modi

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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ಘನತೆವೆತ್ತ ಗೌರವಾನ್ವಿತ  ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಯ ಸ್ಪೀಕರ್ ಮಿಸೆಸ್ ಅಜಾರೆಲ್ ಅರ್ನೆಸ್ಟಾ,

ಸರ್ಕಾರಿ ಕಲಾಪ ನಾಯಕರಾದ ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಮಿಸೆಸ್ ಸಿಲ್ವಾನ್ ಲೆಮಿಯೆಲ್,

ವಿರೋಧ ಪಕ್ಷದ ನಾಯಕ ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಮಿಸ್ಟರ್ ಬ್ಯಾನೋ ಜಾರ್ಜ್

ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಯ ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಮತ್ತು ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರ ಸಹೋದರಿಯರೇ,
ನಮಸ್ಕಾರ!

ಬಾನ್ ಅಪ್ರೀಮಿಡಿ!

ಈ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಯನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿರುವ ಮೊದಲ ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ನಿಮ್ಮ ಮುಂದೆ ನಿಂತಿರುವುದಕ್ಕೆ ವಿಶೇಷ ಗೌರವ ಮೂಡುತ್ತಿದೆ. ಮೇಡಂ ಸ್ಪೀಕರ್, ನಿಮ್ಮ ಆತ್ಮೀಯ ಮಾತುಗಳಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.

ಇಂದು ಮೊದಲು ನನಗೆ "ಗಾರ್ಡಿಯನ್ ಆಫ್ ದಿ ಬ್ಲೂ ಹಾರಿಜಾನ್" ಪ್ರಶಸ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡಿ ಗೌರವಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷ  ಪ್ಯಾಟ್ರಿಕ್ ಹರ್ಮಿನಿ ಮತ್ತು ಸೆಷಲ್ಸ್ ಜನತೆಗೆ ನಾನು ಧನ್ಯವಾದ ಹೇಳುತ್ತೇನೆ. ಪರಿಸರ ಸಂರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ನಿರಂತರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಇದು ಪ್ರೋತ್ಸಾಹ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಭಾರತದ 1.4 ಬಿಲಿಯನ್ ಜನರ ಆತ್ಮೀಯ ಶುಭಾಶಯಗಳು ಮತ್ತು ಶುಭ ಹಾರೈಕೆಗಳನ್ನು  ನಾನು ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ತಂದಿದ್ದೇನೆ.

ನಾನು ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ 2015ರಲ್ಲಿ ಭೇಟಿ ನೀಡಿದ ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರ ಪ್ರದೇಶದ ಮೊದಲ ದೇಶ  ಸೆಷಲ್ಸ್ ಅಗಿತ್ತು. ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗಿ ಆಫ್ರಿಕಾಕ್ಕೆ ಇದು ನನ್ನ ಮೊದಲ ಭೇಟಿಯೂ ಆಗಿತ್ತು. ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರದ ಬಗ್ಗೆ ಭಾರತದ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯಲ್ಲಿ ಸೆಷಲ್ಸ್ ವಿಶೇಷ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಹೊಂದಿದೆ ಎಂದು ನಾನು ನಂಬಿದ್ದರಿಂದ ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದಿದ್ದೇನೆ.  ಒಂದು ದಶಕದ ನಂತರ ನಾನು ಇಂದು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಮತ್ತೆ ವಾಪಸ್ದಾಗಿದ್ದು, ಆ ದೃಢಸಂಕಲ್ಪವು ಮೊದಲಿಗಿಂತಲೂ ಹೆಚ್ಚು ಸದೃಢವಾಗಿದೆ.

ಮತ್ತು ನಿಮ್ಮ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯದ ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಆಚರಿಸುತ್ತಿರುವಾಗ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸೇರಲು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ವಿಶೇಷ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ನಿಮಗೆ ಮತ್ತು ಸೆಷಲ್ಸ್ ಜನರಿಗೆ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಈ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಯನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡುವುದು ಅಪರೂಪದ ಹೆಮ್ಮೆಯ ವಿಚಾರ. ಈ ವಿಶೇಷ ಗೌರವಕ್ಕೆ ಧನ್ಯವಾದಗಳು. ಈ ಎಂಟನೇ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಗೆ ಹೊಸದಾಗಿ ಆಯ್ಕೆಯಾದ ಸದಸ್ಯರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸಲು ನಾನು ಈ ಅವಕಾಶವನ್ನು ಬಳಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ. ಈ ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದನದ ಮೊದಲ ಮಹಿಳಾ ಸ್ಪೀಕರ್ ಆಗಿ ಆಯ್ಕೆಯಾದ ಮೇಡಂ ಸ್ಪೀಕರ್ ಅವರೇ ನಿಮಗೆ ನನ್ನ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ.

 

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ನಮ್ಮ ಸ್ನೇಹವು ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ ನಮ್ಮ ರಾಜತಾಂತ್ರಿಕ ಸಂಬಂಧಗಳ ಸ್ಥಾಪನೆಯೊಂದಿಗೆ ಆರಂಭವಾಗಲಿಲ್ಲ ಎಂಬುದನ್ನು ಇಂದು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಮುಖ್ಯ. ಏಕೆಂದರೆ ಉಭಯ ದೇಶಗಳ ನಡುವಿನ ಸಂಬಂಧ ಅದಕ್ಕೂ ಬಹಳ ಹಿಂದೆಯೇ ಆರಂಭವಾಯಿತು. 1770 ರ ಆಗಸ್ಟ್ ನಲ್ಲಿ ಸೇಂಟ್ ಆನ್ ದ್ವೀಪದಲ್ಲಿ ಥೆಲೆಮಾಕ್ ಹಡಗಿನಲ್ಲಿ ಬಂದವರಲ್ಲಿ ಐದು ಭಾರತೀಯರಿದ್ದರು. ಆ ಪ್ರಯಾಣವು ಅನುಸರಿಸುವ ಇನ್ನೂ ಅನೇಕರಿಗೆ ದಾರಿ ತೋರಿಸಿತು. ಕಾಲಾನಂತರದಲ್ಲಿ ಅವರ ಕಥೆಗಳು ಆಧುನಿಕ ಸೆಷಲ್ಸ್ ಕಥೆಯ ಭಾಗವಾಗಿದೆ.

ನಮ್ಮ ನಡುವಿನ ಸಂಬಂಧಗಳು ಸರ್ಕಾರಗಳಿಂದ ರಚಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿಲ್ಲ ಎಂಬುದನ್ನು ನಮಗೆ ನೆನಪಿಸುತ್ತದೆ. ಅವುಗಳು ಜನರಿಂದ ಏರ್ಪಟ್ಟಿದ್ದು, ಕುಟುಂಬಗಳಿಂದ ಪೋಷಿಸಲ್ಟಿವೆ ಮತ್ತು ತಲೆಮಾರುಗಳಿಂದ ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳಲಾಗಿದೆ. ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರವು ಇದನ್ನು ಸಾಧ್ಯವಾಗಿಸಿತು. ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರವು ಭಾರತ ಮತ್ತು ಸೆಷೆಲ್ಸ್ ಅನ್ನು ಬೇರ್ಪಡಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಅದು ನಮ್ಮನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸುತ್ತದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ನಾವು ಅಪರಿಚಿತರಂತೆ ಭೇಟಿಯಾಗುವುದಿಲ್ಲ. ನಾವು ಹಳೆಯ ಸ್ನೇಹಿತರಂತೆ ಭೇಟಿಯಾಗುತ್ತೇವೆ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಸೆಷಲ್ಸ್‌ನ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿ ಅದರ ಜನರು. ತಲೆಮಾರುಗಳಿಂದ ಪ್ರಪಂಚದ ಎಲ್ಲಾ ಭಾಗಗಳಿಂದ ಜನರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದರು. ಅವರು ತಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ವಿವಿಧ ಭಾಷೆಗಳು, ಪದ್ಧತಿಗಳು, ನಂಬಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಸಂಪ್ರದಾಯಗಳನ್ನು ತಂದರು. ಮತ್ತು ಒಟ್ಟಾಗಿ ಅವರು ಹೆಮ್ಮೆಯಿಂದ ಸೆಷೆಲ್ಲೊಯಿಸ್ ಎಂಬ ಹಂಚಿಕೆಯ ಗುರುತನ್ನು ಹಂಚಿಕೊಂಡರು.

ಈ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಸೆಂಬ್ಲಿಯ ಧ್ಯೇಯವಾಕ್ಯವು ಹೇಳುವಂತೆ - ವೈವಿಧ್ಯತೆಯಲ್ಲಿ ಏಕತೆ. ಇದನ್ನು ಕ್ರಿಯೋಲ್ ಸಂಗೀತದ ಮಧುರಗಳಲ್ಲಿ ಕೇಳಬಹುದು. ಇದನ್ನು ಮೌತ್ಯ ನೃತ್ಯದ ಲಯದಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಇದನ್ನು ಫೆಸ್ಟಿವಲ್ ಕ್ರಿಯೋಲ್ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಅನುಭವಿಸಬಹುದು.

ರಾಷ್ಟ್ರವು ತನ್ನ ಪರಂಪರೆಯ ಶ್ರೀಮಂತಿಕೆಯನ್ನು ಆಚರಿಸಿದಾಗ, ನಮ್ಮ ಸಂಸ್ಕೃತಿಗಳ ನಡುವಿನ ಸಂಪರ್ಕಗಳು ದೈನಂದಿನ ಜೀವನದಲ್ಲಿಯೂ ಗೋಚರಿಸುತ್ತವೆ. ಅವುಗಳನ್ನು ಕರಿ ಕೊಕೊ, ಸಮೋಸಾ ಮತ್ತು ಚಟ್ನಿಯ ಸುವಾಸನೆಗಳಲ್ಲಿ ಅನುಭವಿಸಬಹುದು. ದೀಪಾವಳಿ, ಥಾಯ್ ಪೊಂಗಲ್ ಮತ್ತು ನವರಾತ್ರಿಯ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಗರ್ಬಾ ನೃತ್ಯದ ಆಚರಣೆಗಳಲ್ಲಿ ಅವುಗಳನ್ನು ಕಾಣಬಹುದು. ಇದು ನಮ್ಮ ಸ್ನೇಹದ ಭವಿಷ್ಯದಲ್ಲಿ ನಮಗೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ವಿಶ್ವಾಸವನ್ನು ನೀಡುವ ಕ್ರಿಯೋಲ್ ಮನೋಭಾವವಾಗಿದೆ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಸಾಗರದ ನೆರೆಹೊರೆಯವರಾಗಿ, ಒಬ್ಬರ ಭದ್ರತೆಯು ಇನ್ನೊಬ್ಬರ ಭದ್ರತೆಗೆ ಪೂರಕವಾಗಿದೆ ಎಂದು ನಾವು ಗುರುತಿಸುತ್ತೇವೆ. ಒಬ್ಬರ ಸಮೃದ್ಧಿಯು ಇನ್ನೊಬ್ಬರ ಸಮೃದ್ಧಿಗೆ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಮತ್ತು ಪ್ರದೇಶದ ಸ್ಥಿರತೆಯು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ.

 

ಈ ವರ್ಷ ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯ ಆಳದ ಪ್ರಬಲ ಜ್ಞಾಪನೆಯನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ ನಿಮ್ಮ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯದ ಉದಯದಲ್ಲಿ ಭಾರತೀಯ ನೌಕಾ ಹಡಗು ಐಎನ್ ಎಸ್ ನೀಲಗಿರಿ, ಸ್ನೇಹ ಮತ್ತು ಒಗ್ಗಟ್ಟಿನ ಸಂಕೇತವಾಗಿ ಪೋರ್ಟ್ ವಿಕ್ಟೋರಿಯಾದಲ್ಲಿತ್ತು. ಮತ್ತು ಇಂದು ಐಎನ್ ಎಸ್ ತರ್ಕಶ್ ಮತ್ತು ಐಎನ್ ಎಸಚ್ ಇಕ್ಷಾಕ್ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸುವರ್ಣ ಮಹೋತ್ಸವವನ್ನು ಆಚರಿಸಲು ಪೋರ್ಟ್ ವಿಕ್ಟೋರಿಯಾಕ್ಕೆ ತಂದು ನಿಲುಗಡೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ.

ಕಳೆದ ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಹಲವು ವಿಷಯಗಳಲ್ಲಿ ಸಾಕಷ್ಟು ಬದಲಾವಣೆಗಳಾಗಿವೆ. ಆದರೆ ಅದು ಪರಸ್ಪರ ನಮ್ಮ ಬದ್ಧತೆಯನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸಿಲ್ಲ. ದಶಕಗಳಿಂದ ನಮ್ಮ ರಕ್ಷಣಾ ಪಡೆಗಳು, ಕರಾವಳಿ ಕಾವಲುಗಾರರು ಮತ್ತು ಸಾಗರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ತರಬೇತಿ ನೀಡಿವೆ ಮತ್ತು ನಿಕಟವಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿವೆ. ಸೆಷೆಲ್ಸ್ ರಕ್ಷಣಾ ಪಡೆಗಳು ಮತ್ತುಸೆಷೆಲ್ಸ್ ಕೋಸ್ಟ್ ಗಾರ್ಡ್‌ನ ವೃತ್ತಿಪರತೆ ಮತ್ತು ಬದ್ಧತೆಯನ್ನು ಭಾರತವು ಆಳವಾಗಿ ಗೌರವಿಸುತ್ತದೆ. ಅವರು ನಿಮ್ಮ ಸ್ವಂತ ವಿಶಾಲವಾದ ಕಡಲ ಕ್ಷೇತ್ರವನ್ನು ಹಾಗೂ ವಿಶಾಲವಾದ ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರ ಪ್ರದೇಶವನ್ನು ರಕ್ಷಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತಾರೆ. ಸಾಗರ ಭದ್ರತೆ, ಸಾಮರ್ಥ್ಯ ವೃದ್ಧಿ, ಹೈಡ್ರೋಗ್ರಫಿ ಮತ್ತು ಕಡಲ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಅರಿವಿನಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಸಹಕಾರವು ಸುರಕ್ಷಿತ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚು ಸುರಕ್ಷಿತ ಪ್ರದೇಶಕ್ಕೆ ನಮ್ಮ ಹಂಚಿಕೆಯ ಬದ್ಧತೆ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ.

ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ನಾನು ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಹರ್ಮಿನಿ - ಟನ್ ಪ್ಯಾಟ್ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗಿ ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯಲ್ಲಿ ಸಾಧಿಸಿದ ಗಮನಾರ್ಹ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಪರಿಶೀಲಿಸಿದೆ. ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ನಮ್ಮ ಹಂಚಿಕೆಯ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯ ಬಗ್ಗೆಯೂ ನಾವು ಚರ್ಚಿಸಿದ್ದೇವೆ. ನಮ್ಮ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯು ಮಹಾಸಾಗರ - ಪ್ರದೇಶಗಳಾದ್ಯಂತ ಭದ್ರತೆ ಮತ್ತು ಬೆಳವಣಿಗೆಗೆ ಪರಸ್ಪರ ಮತ್ತು ಸಮಗ್ರ ಪ್ರಗತಿಯ ಕಲ್ಪನೆಯಲ್ಲಿ ಬೆಸೆಯಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ.

ಈ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯು ನಮ್ಮ ಭವಿಷ್ಯಗಳು ಪರಸ್ಪರ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿವೆ ಮತ್ತು ಪರಸ್ಪರ ಅವಲಂಬಿತವಾಗಿವೆ ಎಂದು ಗುರುತಿಸುತ್ತದೆ. ಮತ್ತು, ಸುರಕ್ಷಿತ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚು ಸುರಕ್ಷಿತ ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರ ಪ್ರದೇಶಕ್ಕಾಗಿ ನಾವು ಒಗ್ಗೂಡಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸುತ್ತೇವೆ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಜನರು ನಕ್ಷೆಯನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ, ಅವರು ಸೆಷೆಲ್ಸ್ ಅನ್ನು ಹಿಂದೂ ಮಹಾಸಾಗರದ ದ್ವೀಪಗಳ ಗುಂಪಾಗಿ ನೋಡಬಹುದು. ಆದರೆ ನಾವು ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನದನ್ನು ನೋಡುತ್ತೇವೆ. ಅದರ ತೀರಗಳನ್ನು ಮೀರಿದ ದಿಗಂತಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ನಾವು ನೋಡುತ್ತೇವೆ. ನಿಮ್ಮ ಕಡಲ ವಲಯವು ಸುಮಾರು 1.4 ಮಿಲಿಯನ್ ಚದರ ಕಿಲೋಮೀಟರ್‌ಗಳಷ್ಟು ವಿಸ್ತರಿಸುತ್ತದೆ.

 

ಸೆಷೆಲ್ಸ್ ಸಣ್ಣ ದ್ವೀಪ ರಾಜ್ಯವಲ್ಲ - ಆದರೆ ದೊಡ್ಡ ಸಾಗರ ದೇಶವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಯು ಜಾಗತಿಕ ಚರ್ಚೆಗಳ ಭಾಗವಾಗುವುದಕ್ಕೆ ಬಹಳ ಹಿಂದೆಯೇ ಸೆಷೆಲ್ಸ್ ಈಗಾಗಲೇ ಮುನ್ನಡೆ ಸಾಧಿಸಿತ್ತು. ಸಾಗರ ಪೂರಕ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗಳನ್ನು ರಕ್ಷಿಸುವಲ್ಲಿ ಅಥವಾ ಬ್ಲೂ ಬಾಂಡ್‌ಗಳಂತಹ ನಾವೀನ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಮುನ್ನಡೆಸುವಲ್ಲಿ, ನಿಮ್ಮ ದೇಶವು ಪ್ರಮುಖ ಜಾಗತಿಕ ಸಮಾಲೋಚನೆಗಳನ್ನು ರೂಪಿಸಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡಿದೆ. ಒಟ್ಟಾರೆ, ನಾವು ಮೀನುಗಾರಿಕೆ, ಸಮುದ್ರ ವಿಜ್ಞಾನ, ಕರಾವಳಿ ನಿರ್ವಹಣೆ, ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಶಕ್ತಿ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದಲ್ಲಿ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳನ್ನು ರೂಪಿಸಿಕೊಳ್ಳಬಹುದು.

ನಿನ್ನೆ, ಐಕಾನಿಕ್ ಕೊಕೊ ಡಿ ಮೆರ್ ಮರದ ಸಸಿಯನ್ನು ನೆಟ್ಟ ಗೌರವ ನನಗೆ ದೊರಕಿತು. ಸೆಷಲ್ಸ್‌ನಂತೆಯೇ - ಇದು ವಿಶಿಷ್ಟ, ಅಮೂಲ್ಯ ಮತ್ತು ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ವಿಶೇಷ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಪಡೆದುಕೊಂಡಿದೆ. ಈ ನೈಸರ್ಗಿಕ ಅದ್ಭುತವನ್ನು ಉಳಿಸಲು ಮತ್ತು ಸಂರಕ್ಷಿಸಲು ನೀವು ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು - ಮಾನವೀಯತೆಯು ಪ್ರಕೃತಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಾಮರಸ್ಯದಿಂದ ಬದುಕಬೇಕೆಂಬ ದೊಡ್ಡ ತತ್ವಶಾಸ್ತ್ರವನ್ನು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತವೆ.

ಈ ಭಾವನೆ ಭಾರತದಲ್ಲಿಯೂ ಆಳವಾಗಿ ಪ್ರತಿಧ್ವನಿಸುತ್ತದೆ. ನಾವು ಇಂದು ಆನಂದಿಸುವ ಸಾಗರಗಳಿಗಿಂತ ಆರೋಗ್ಯಕರ, ಸುರಕ್ಷಿತ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚು ಹೇರಳವಾಗಿರುವ ಸಾಗರಗಳನ್ನು ಭವಿಷ್ಯದ ಪೀಳಿಗೆಗಳು ಆನುವಂಶಿಕವಾಗಿ ಪಡೆಯುವುದನ್ನು ಖಾತ್ರಿಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ನಾವೆಲ್ಲರೂ ಒಗ್ಗೂಡಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸೋಣ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಜಾಗತಿಕ ದಕ್ಷಿಣ ಮತ್ತು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ದ್ವೀಪ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳು ಹವಾಮಾನ ಬದಲಾವಣೆಯಿಂದ ಹೆಚ್ಚು ಪರಿಣಾಮಗಳನ್ನು ಅನುಭವಿಸುತ್ತಿವೆ. ಅದರ ಪರಿಣಾಮಗಳು ಈಗಾಗಲೇ ನಮ್ಮ ಕರಾವಳಿಗಳು, ಸಮುದ್ರ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗಳು, ಹವಾಮಾನ ಮಾದರಿಗಳು ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಸಮುದಾಯಗಳಲ್ಲಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತಿವೆ. ಹವಾಮಾನ ಬದಲಾವಣೆಗೆ ಕನಿಷ್ಠ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡಿದವರು ಅದರ ಪರಿಣಾಮಗಳ ದೊಡ್ಡ ಹೊರೆಯನ್ನು ಹೊರಬಾರದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವಿಬ್ಬರೂ ದೃಢವಾಗಿ ನಂಬುತ್ತೇವೆ.

ಹವಾಮಾನ ಕ್ರಿಯೆಯನ್ನು ನ್ಯಾಯ, ಜವಾಬ್ದಾರಿ ಮತ್ತು ಸಮಾನತೆಯಿಂದ ನಿರ್ದೇಶಿಸಬೇಕು. ಇದು ಹವಾಮಾನ ನ್ಯಾಯದ ಸಾರ.

ಭಾರತವು ದೊಡ್ಡ ಮಾದರಿ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿ ಮುನ್ನಡೆಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದೆ. ಕಳೆದೊಂದು ದಶಕದಲ್ಲಿ ನಾವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಶಕ್ತಿಯ ವಿಸ್ತರಣೆಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದನ್ನು ಕೈಗೊಂಡಿದ್ದೇವೆ. ಮಿಷನ್ ಲೈಫ್ - ಪರಿಸರಕ್ಕಾಗಿ ಜೀವನಶೈಲಿಯ ಮೂಲಕ ನಾವು ಸುಸ್ಥಿರ ಜೀವನಶೈಲಿಯನ್ನು ಪ್ರತಿಪಾದಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸೌರ ಒಕ್ಕೂಟ, ವಿಪತ್ತು ಸ್ಥಿತಿಸ್ಥಾಪಕ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ಒಕ್ಕೂಟ, ಜಾಗತಿಕ ಜೈವಿಕ ಇಂಧನ ಒಕ್ಕೂಟ ಮತ್ತು ತಾಯಿ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಒಂದು ಗಿಡ ನೆಡಿ (ಏಕ್ ಪೆಡ್ ಮಾ ಕೆ ನಾಮ್ ) ಮುಂತಾದ ನಮ್ಮ ಉಪಕ್ರಮಗಳ ಮೂಲಕ ನಾವು ಹಸಿರು ಪರಿವರ್ತನೆಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಲು ಪಾಲುದಾರ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳೊಂದಿಗೆ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ.

 

ಮತ್ತು ಸಣ್ಣ ದ್ವೀಪ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಶೀಲ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಕಾಳಜಿಗಳು ಅರ್ಹವಾದ ಗಮನವನ್ನು ಪಡೆಯುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಭಾರತವು ಸೆಷೆಲ್ಸ್‌ನೊಂದಿಗೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಲು ಬದ್ಧವಾಗಿದೆ

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಸೆಷಲ್ಸ್ ಮತ್ತು ಭಾರತ ಎರಡೂ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೆಚ್ಚು ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಒಳಗೊಂಡ ಜಗತ್ತನ್ನು ಬಯಸುತ್ತವೆ. ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಸಮಕಾಲೀನ ವಾಸ್ತವಗಳನ್ನು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುವ ಜಗತ್ತನ್ನು ನಾವಿಬ್ಬರೂ ಬಯಸುತ್ತೇವೆ. ನಮ್ಮ ಹಂಚಿಕೆಯ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಸಾಮೂಹಿಕವಾಗಿ, ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಒಳಗೊಂಡಂತೆ ಮತ್ತು ನ್ಯಾಯಯುತವಾಗಿ ರೂಪಿಸಬೇಕು ಎಂದು ನಾವು ನಂಬುತ್ತೇವೆ.

ಈ ನಂಬಿಕೆಯು ನಮ್ಮ ಜಿ 20 ಅಧ್ಯಕ್ಷತೆಯಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗೆ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ನೀಡಿತು. ಈ ಉತ್ಸಾಹದಲ್ಲಿಯೇ ನಾವು ಜಾಗತಿಕ ದಕ್ಷಿಣದ ಆದ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಚರ್ಚೆಗಳ ಪ್ರಮುಖ ಸ್ಥಾನದಲ್ಲಿರಿಸುವ ಕಾರ್ಯ ನಿರ್ವಹಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಮತ್ತು ಈ ಉತ್ಸಾಹದಲ್ಲಿಯೇ ನಾವು ಆಫ್ರಿಕನ್ ಒಕ್ಕೂಟವನ್ನು ಜಿ 20 ರ ಕಾಯಂ ಸದಸ್ಯರಾಗಿ ಸ್ವಾಗತಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇದು ಜಾಗತಿಕ ದಕ್ಷಿಣವನ್ನು ಒಗ್ಗೂಡಿಸುವ ಮನೋಭಾವವಾಗಿದೆ. ಮತ್ತು ಭಾರತ ಮತ್ತು ಸೇಷಲ್ಸ್ ಒಟ್ಟಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತವೆ ಎಂಬ ದೂರದೃಷ್ಟಿ ಇದಾಗಿದೆ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಕಳೆದ ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳ ಸಾಧನೆಗಳನ್ನು ಆಚರಿಸುವಾಗ ನಾವು ಮುಂದಿನದನ್ನು ನೋಡಬೇಕು. ಸೆಷೆಲ್ಸ್‌ನ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಅದರ ಯುವಕರು ರೂಪಿಸುತ್ತಾರೆ. ಸೆಷೆಲ್ಸ್‌ನ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು, ವೃತ್ತಿಪರರು, ಅಧಿಕಾರಿಗಳು ಮತ್ತು ಭದ್ರತಾ ಪಡೆಗಳು ದಶಕಗಳಿಂದ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ತರಬೇತಿ ಮತ್ತು ಅಧ್ಯಯನ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನಾವು ಹೆಮ್ಮೆಪಡುತ್ತೇವೆ.

ವಾಸ್ತವವಾಗಿ ಸೆಷೆಲ್ಸ್‌ನ ಪ್ರತಿ ಐವತ್ತು ಜನರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬರು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಸ್ವಲ್ಪ ತರಬೇತಿಯನ್ನು ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ಹೇಳಲಾಗುತ್ತದೆ. ಅವರು ಕೌಶಲ್ಯ, ಸ್ನೇಹ ಮತ್ತು ಅನುಭವಗಳೊಂದಿಗೆ ಮನೆಗೆ ಮರಳಿದ್ದಾರೆ, ಅದು ಇಂದು ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತಿದೆ.

ಯುವಜನರಿಗೆ ಇಂಟರ್ನ್‌ಶಿಪ್‌ಗಳನ್ನು ಒದಗಿಸುವ ನಿಮ್ಮ ಐಜಿಎನ್ ಐಟಿಇ (IGNITE) ಉಪಕ್ರಮದ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿದು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಯಿತು. ಇದು ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಚೌಕಟ್ಟಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರಕ್ಕಾಗಿ ನಾವು ಹೊಸ ಮಾರ್ಗಗಳನ್ನು ಅನ್ವೇಷಿಸಬಹುದು

ಅಂತಹ ಸಹಕಾರಕ್ಕೆ ಪ್ರಮುಖ ಗಮನ ನೀಡುವ ಕ್ಷೇತ್ರವೆಂದರೆ ಡಿಜಿಟಲ್ ನಾವೀನ್ಯತೆ. ಭಾರತದ ಡಿಜಿಟಲ್ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ (ಡಿಪಿಐ) ತಂತ್ರಜ್ಞಾನವು ಅವಕಾಶವನ್ನು ಹೇಗೆ ವಿಸ್ತರಿಸಬಹುದು, ಆಡಳಿತವನ್ನು ಸುಧಾರಿಸಬಹುದು, ಆರ್ಥಿಕ ಸೇರ್ಪಡೆಯನ್ನು ವೃದ್ಧಿಸಬಹುದು ಮತ್ತು ನೂರಾರು ಮಿಲಿಯನ್ ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆಗಳನ್ನು ಹೇಗೆ ತಲುಪಿಸಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸಿಕೊಟ್ಟಿದೆ.

ನೀವು ನಿಮ್ಮ ಸ್ವಂತ ಡಿಜಿಟಲ್ ಪರಿವರ್ತನೆಯನ್ನು ಅನುಸರಿಸುತ್ತಿರುವಾಗ ನಮ್ಮ ಅನುಭವಗಳು ಮತ್ತು ಪರಿಣತಿಯನ್ನು ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಲು ನಾವು ಸಂತೋಷಪಡುತ್ತೇವೆ. ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯದ ಮೊದಲ ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳ ಕಾಲ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ನೀಡಿದ ಅದೇ ದೃಢಸಂಕಲ್ಪದಿಂದ ಸೆಷೆಲ್ಸ್‌ನ ಯುವಜನರು ಈ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುತ್ತಾರೆ ಎಂದು ನನಗೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿದೆ.

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಸದಸ್ಯರೇ,

ಇಂದು ಈ ಐತಿಹಾಸಿಕ ಸುವರ್ಣ ಮಹೋತ್ಸವ ವರ್ಷದಲ್ಲಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಮುಂದೆ ನಿಂತಿರುವಾಗ, ನಮ್ಮ ಎರಡೂ ದೇಶಗಳ ಜನರು ಎರಡೂವರೆ ಶತಮಾನಗಳಿಗೂ ಅಧಿಕ ಹಳೆಯ ಸ್ನೇಹವನ್ನು ಆಚರಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೆಲವು ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಅಂತಹ ದೃಢವಾದ ಅಡಿಪಾಯಗಳ ಮೇಲೆ ನಿರ್ಮಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿವೆ. ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಅಂತಹ ಆತ್ಮೀಯತೆ, ವಿಶ್ವಾಸ ಮತ್ತು ಸದ್ಭಾವನೆಯೊಂದಿಗೆ ಬೆಳೆದಿವೆ.

ನಾವು ಮುಂದಿನ ಭವಿಷ್ಯದತ್ತ ಸಾಗುತ್ತಿರುವಾಗ  ಈ ಭದ್ರ ಬುನಾದಿಗಳ ಮೇಲೆ ನಿರ್ಮಿಸುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸೋಣ. ಭಾರತವು ನಿಮ್ಮ ವಿಶ್ವಾಸಾರ್ಹ ಪಾಲುದಾರರಾಗಿ ಉಳಿಯುತ್ತದೆ. ನಾವು ನಿಮ್ಮ ಸಾಧನೆಗಳನ್ನು ಸಂಭ್ರಮಿಸುತ್ತೇವೆ. ನಾವು ನಿಮ್ಮ ಆಕಾಂಕ್ಷೆಗಳನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸುತ್ತೇವೆ. ಮತ್ತು ನಾವು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸ್ನೇಹಿತರಾಗಿ ನಿಲ್ಲುತ್ತೇವೆ.

ಕಳೆದ ಐವತ್ತು ವರ್ಷಗಳು ಗಮನಾರ್ಹವಾಗಿವೆ. ಆದರೆ ಸೆಷಲ್ಸ್ ಕಥೆಯ ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಅಧ್ಯಾಯಗಳು ಇನ್ನೂ ಬರೆಯಬೇಕಾಗಿದೆ ಎಂದು ನಾನು ದೃಢವಾಗಿ ನಂಬುತ್ತೇನೆ. ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಸ್ನೇಹದ ಅತ್ಯುತ್ತಮವಾದವುಗಳು ಇನ್ನೂ ಬೆಳವಣಿಗೆಯಾಗಬೇಕಿದೆ.