PM Modi speaks at the 10th Annual Convention of the Central Information Commission
RTI is not only about the right to know but also the right to question. This will increase faith in democracy: PM
Govt's 'Digital India' is complimentary to RTI, putting information online brings transparency, which in turn, builds trust: PM
More openness in government will help citizens. In this day and age there is no need for secrecy: PM
Aim of RTI must be to bring about a positive change in governance: PM
The voice of people is supreme in a democracy: PM Narendra Modi

उपस्थित सभी महानुभव,

आज हम सूचना के अधिकार के संबंध में आज 10 वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था में विश्‍वास पैदा करने के लिए इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबको मैं धन्‍यवाद करता हूं और बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

यह बात सही है कि सूचना के अधिकार से सबसे पहली बात सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को जानने का अधिकार हो, लेकिन वहां सीमित न हो। उसे सत्‍ता को question करने का भी अधिकार हो। और यही लोकतंत्र की बुनियाद है। और हम उस दिशा में जितनी तेज गति से काम करेंगे, उतना लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्‍वास और बढ़ेगा। लोगों की जागरूकता, एक प्रकार से शासन को भी ताकत देती है और न सिर्फ शासन को राष्‍ट्र की भी एक बहुत बड़ी अमानत बनती, है जागरूक समाज का होना। ऐसी कुछ व्‍यवस्‍था होती है, जो इन व्‍यवस्‍थाओं को पनपाती है, पुरस्‍कृत करती है, प्रोत्‍साहित करती है और परिणाम तक पहुंचाती है।

जो जानकारी मिलती है उस हिसाब से कहते हैं कि 1766 में सबसे पहले स्‍वीडन में इसका प्रारंभ हुआ। लिखित रूप में प्रारंभ हुआ। informally तो शायद कई व्‍यवस्‍थाओं में यह चलता होगा। लेकिन यही व्‍यवस्‍था अमेरिका में आते-आते 1966 हो गया। दो सौ साल लगे। कुछ देशों ने कानून पारित किए। लेकिन पारित करने के लागू करने के बीच दो साल का फासला रखा, ताकि लोगों को educate कर पाएं। शासन व्‍यवस्‍था को aware कर सके। और एक mature way में व्‍यवस्‍था विकसित हो। हमारे देश का अनुभव अलग है। हम लोगों ने निर्णय किया और काम करते-करते उसको सुधारते गए, ठीक करते गए और empower करते गए। और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी तभी जा करके institution और अधिक strengthen होती है और आने वाले दिनों में इसके लिए निरंतर प्रयास होता है।

एक बात निश्‍चित है कि जो Digital India का सपना है वो एक प्रकार से आरटीआई की जो भावना है उसके साथ पूरक है। क्‍योंकि जब चीजें online होने लगती है, तो अपने आप transparency आती है। और शासन और जनता के बीच trust होना चाहिए और trust through transparency होता है। अगर transparency है तो trust आता ही है। और इसलिए Digital India का जो सपना है, वो चीजों को जितना online करते जाएंगे, जितना open करते जाएंगे, सवालिया निशान कम होते जाएंगे। अब अभी पिछले दिनों coal का auction हुआ।

अब हमें मालूम है कि पहले कोयले को ले करके कितना बड़ा तूफान मच गया। कितने बड़े सवाल खड़े हुए। सुप्रीम कोर्ट तक को उसमें involve होना पड़ा। RTI से जुड़े हुए लोग भी इसमें काफी मेहनत करते रहे। अभी इस सरकार के सामने विषय आया, तो हमने सारी चीजें online की, online की इतना ही नहीं, एक बड़े screen पर, एक public place पर जहां कोई भी आसकता है देख सकता है, सारी process देख रहा था। हर शाम को कहां पहुंच इसका पता करता था। मीडिया के लोग भी आ करके बैठते थे। अब इस व्‍यवस्‍था में मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी किसी को RTI की जरूरत पड़ेगी, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि जो RTI से मिलने वाला था वो पहले उसके सामने था। अभी हमने FM Radio का Auction किया, वो भी उसी प्रकार से online किया। spectrum का auction किया वो भी उसी प्रकार से किया। और जब auction चल रहा था, online सब लोग आते थे। हफ्ते, दस दिन तक चलता था। मीडिया के लोग भी बैठते थे। और भी लोग बैठते थे। कोई भी व्‍यक्ति उसको कर सकता था।

क्‍यों न हम transparency proactively क्‍यों न करे। किसी को जानने के लिए प्रयास करना पड़े कि किसी को जानकारी सहज रूप से मिले। शासन लोकतंत्र में उसका प्रयास हो रहना चाहिए कि सहज रूप से उसको जानकारी मिलनी चाहिए। हमारे यहां कुछ चीजें तो ऐसी पुरानी घर कर गई थी। धीरे-धीरे उसको बदलने में समय लगता है। अब जैसे आपको कहीं apply करना है और अपने certificate का Xerox देते हैं तो वो मंजूर नहीं होता है। किसी gestated officer या किसी political leader से जब तक ठप्‍पा नहीं मरवाते हो उसको मान्‍यता नहीं मिलती है। अब यह सालों से चल रहा था। हमने आ करके निर्णय किया कि भई नागरिक पर हम भरोसा करे। वो एक बार कहता तो सच मान ले और जब final उसका होगा, तब original certificate ले करके आ जाएगा, देख लेना। और आज वो व्‍यवस्‍था लागू हो गई। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिक पर भरोसा करके व्‍यवस्‍थाओं को चलाए। नागरिकों पर शक करके हम चीजों को चलाएंगे, तो फिर हम भी अपने आप को कहीं न कहीं छुपाने की कोशिश करते रहेंगे। एक openness, governance में जितना openness आएगा, उतना परिणाम सामान्‍य नागरिक को भी ताकतवर बनाता है।

सरकार का और भी स्‍वभाव बना हुआ है। साइलो में भी काम करना और इतना ही नहीं एक ही कमरे में चार अफसर बैठे हो, बड़ी कोशिश करता है कि बगल वाला फाइल देखें नहीं। अब यह जो secrecy की मानसिकता किसी जमाने में रही होगी, उस समय के कुछ कारण होंगे, लेकिन आज मैं यह नहीं मानता हूं कि इस प्रकार की अवस्‍था रहेगी। अगर खुलापन है, खुली बात है, भई यह चार काम करने है, चर्चा करके करने है। तो मैं समझता हूं कि उसके कारण एक सरलता भी आती है और speed भी आती है। एक-आध चीज की कमी रहती है, तो अपना साथी बताता है कि अरे भई तुम देखो यह पहलू जरा देख लो। तो एकदम से काम में.. कोई जरूर नहीं कि वो फाइल पर लिख करके कहता है, ऐसे बातों में कहता है कि देखो भई यह पहलू देखना पड़ेगा। तो अपने आप सुधार हो जाता है। तो सुधार करने के लिए हमारे मूलभूत स्‍वभाव में भी शासन थे। यह बहुत अपेक्षा रहती है कि उसमें यह बदलाव लाना चाहिए और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि यह प्रयास परिणामकारी होगा।

आज मैं समझता हूं कि RTI की एक सीमा है। वो सीमा यह है कि जिसको जानकारी चाहिए, जानकारी तो मिलती है। कुछ बातें मीडिया को काम आ जाती है। कुछ बातें किसी को न्‍याय तक सीमित रह जाती है। process का पता चलता है। लेकिन अभी भी product का पता नहीं चलता। मैं इस रूप में कह रहा हूं कि मान लीजिए एक Bridge का contract दिया गया, तो RTI वाला पूछेगा तो उसको पता चलेगा फाइल कैसे शुरू हुई, tendering कैसे हुआ, noting क्‍या था, साइट कैसे select हुआ, यह सब चीजें मिलेगी। लेकिन वो Bridge कैसे बना, ठीक बना कि नहीं बना। उसमें कमियां है कि ठीक हुआ, समय पर हुआ कि नहीं हुआ। इन चीजों की तरफ अब ध्‍यान देने का समय आया है। तो हम process पर जितना ध्‍यान देते हैं RTI के द्वारा एक समय वो भी चाहिए कि जब product पर भी उतना ही transparency लाए, तब जा करके बदलाव आता है। वरना वो जानकारियां सिर्फ एक संतोष के लिए होती है। आखिरकर RTI का उपयोग Governance में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले होना चाहिए।

और इसलिए जब विजय जी मुझे मिले थे, तो मैंने बातों-बातों में उनको कहा था कि जो लोग हमें सवाल पूछते हैं क्‍या हमने उसका Analysis किया है कि भई रेलवे के संबंध में कितने सवाल आते हैं? Home के संबंध में कितने सवाल आते हैं। फलाने विषय में कितने सवाल आते हैं। Analysis वो department है जहां हजारों की तादाद में सवाल आते हैं। यह department जहां सौ से ज्‍यादा नहीं आते हैं। फिर हमने उसका analysis करना चाहिए यह जो सवाल आते हैं, उसके मूल में कोई policy paralyses तो नहीं है। हम identify कर सकते हैं। अगर हम इस RTI को सिर्फ जवाब देने तक सीमित रखे तो शासन व्‍यवस्‍था को लाभ नहीं होता है। उस नागरिक ने सवाल पूछा है मतलब शासन व्‍यवस्‍था में कहीं न कहीं कोई बात है, जो पूछने की जरूरत पड़ी है। अगर व्‍यवस्‍था इतनी sensitive होती है। और जो सवाल आए उनका हम analysis करते हैं, तो हमें पता चलेगा कि policy matter के कारण यह समस्‍या बार-बार उठ रही है, लोग सवाल पूछ रहे हैं। तो Government को High level पर सोचना चाहिए कि policy matter में क्‍या फर्क लाना चाहिए। एक RTI क्‍या छोटा सा सवाल भी आपको policy बदलने के लिए मजबूर कर सकता है और कभी-कभार वो इतना सटीक बात पूछता है कि ध्‍यान में आता है कि यह तरफ हमारा ध्‍यान नहीं गया। इसलिए Good Governance के लिए RTI कैसे उपयोग में आए, सिर्फ जवाब देने से RTI Good Governance नहीं ला सकता है। वो सिर्फ विवादों के लिए काम आ सकता है। परिस्थिति पलटने के लिए नहीं काम आ सकता है।

दूसरा मैंने सुझाव दिया कि एक तो part यह होता है कि भई policy के कारण, दूसरा होता है person के कारण, कि भई जो व्‍यक्ति वहां बैठा है उसके nature में ही है। इसलिए ऐसी स्थिति पैदा होती है वो जवाब नहीं देता है, ढीलापन रखता है, ऐसे ही चलता है। तो फिर person पर सोचने का सवाल आएगा भई। एक ही person से संबंधित इतने सारे issue क्‍यों खड़े होते हैं, तो कहीं न कहीं कोई कमी होगी, उसको ठीक कैसे किया जाए? उस पर सोचना चाहिए। कहीं पर ऐसा होगा कि जिसे पता चलेगा कि भई लोगों ने सवाल पूछे है लेकिन finance के resource crunch के कारण वो नहीं हो पा रहा है। या कोई काम ऐसा होगा कि जिसके कारण लोकल कोई न कोई व्‍यवस्‍था होगी, जो रूकावटें डाल रही है। जब हम इन सवालों का perfect analysis करें और उसमें से सरकार की कमियां ढूंढे नागरिकों के सवालों में से ही सरकार की कमियां उजागर हो सकती है, व्‍यवस्‍था की कमियां उजागर हो सकती है, process की कमियां उजागर हो सकती है। और उसको ठीक करने के लिए उसमें से हमें एक रास्‍ता भी मिल सकता है। और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप जब इस पर डिबेट करने वाले हैं हम RTI को एक Good Governance की ओर जाने का एक साधन के रूप में कैसे इस्‍तेमाल करें? और यह हो सकता है।

मैं इन दिनों एक कार्यक्रम करता हूं भारत सरकार में आने के बाद – प्रगति। एक साथ सभी chief secretaries और सभी secretaries भारत सरकार के और मैं 12-15 issue लेता हूं। और उससे ध्‍यान में आता है। सवाल तो मैं वो लेता हूं किसी नागरिक की चिट्ठी के आधार पर पकड़ता हूं। किसी ने मुझे लिखा कि भई फौजियों को pension में problem है। तो मैंने उस विषय को उठाया। सबको बुलाया, बिठाया, सब वीडियो पर होते हैं मीटिंग नहीं करते हैं। मैं तो एक छोटे कमरे में बैठता हूं। लेकिन उसका कारण बनता है, परिस्थिति आती है तुरंत ध्‍यान में आता है कि भई इस विषय को हैंडल करना पड़ेगा। किसी ने मुझे लिखा भी था post office में 15 दिन बीत गए, 20 दिन बीत गए टपाल नहीं आई थी। मैंने प्रगति में ले लिया, तुरंत पता चला क्‍या कारण था उनका। कहां पर यह slow process चल रहा था।

कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम नागरिकों की आवाज को अगर हम महत्‍व दें। जब मैं गुजरात में था तो मैंने एक प‍द्धति बनाई थी। जो MLA सवाल पूछते हैं, मेरा अनुभव है कि MLA यानी जनप्रतिनिधि किसी भी दल का क्‍यों न हो, लेकिन उसकी हर बात को तव्‍वजू देनी चाहिए, महत्‍व देना चाहिए। किसी भी दल का क्‍यों न हो। क्‍योंकि वो अपने क्षेत्र के संबंध में कोई बात बताता है मतलब वो जनहित के लिए ही बताता है, मान करके चलना चाहिए। लेकिन जब House के अंदर जवाब देते हैं, तो by and large मीडिया centric process चलता है। एक प्रकार से House में, कल मीडिया में क्‍या छपेगा, टीवी पर क्‍या दिखेगा, वही dominate करने लग गया है। और इसलिए House में तो हर कोई अपना score settle करने वाला जवाब देता है। अब क्‍या करे मजबूरी हो गई है राजनीति की कि भई दूसरे दिन मीडिया में खबर खराब न आए। तो वो अपना.... और वो कर भी लेता और जीत भी जाता है। वो बात अलग है। लेकिन मैंने एक process शुरू किया था। Assembly सत्र पूरा होने के बाद जितने भी question आते थे। हर department को कहता था हर question का Analysis करो और मुझे action taken रिपोर्ट दो। भले किसी का भी सवाल हो, House में आपने जो भी जवाब दिया ठीक है। अगर उसने कहा है कि भई वहां road नहीं बना है मुझे result चाहिए। और उसके कारण शासन में electives के प्रति एक sensitivity पैदा हुई थी। मैं मानता हूं ऐसी sensitivity RTI के सवालों के साथ हमको जोड़ती है। अगर यह पूरे देश में शासकीय व्‍यवस्‍था में प्रगति में बहुत कुछ कर सकते हैं। और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

एक यह भी बात है कि जब हम RTI की बात करते हैं तो यह मत है कि यह सारा communication जो है, information access करने की जो प्रक्रिया है। वो एक तो transparent होनी चाहिए, Timely होनी चाहिए and Trouble fee होनी चाहिए। यह हम जितना.. क्‍योंकि समय बीतने के बाद अगर हम जानकारी देते हैं तो न वो शासन को सुधारती है और न शासन को accountable बनाती है। फिर स्थिति कि अब क्‍या करे भई, वहां तो भवन बन गया अब वो भवन कैसे तोड़ सकते हैं। क्‍या करे भई वहां तो लोग रहने के लिए आए गए। उनको कैसे निकाल सकते हैं। अगर Timely information देते तो हो सकता है कि गलत निर्णय रूक जाता, तुरंत हम ध्‍यान में आते। और इसलिए transparency भी हो, Timely भी हो, Trouble free भी हो। यह हम बल देंगे, तो हम इस कानून बनाए लेकिन उस कानून का ज्‍यादा अच्‍छे से उपयोग कर सकते। ज्‍यादा अच्‍छा परिणाम ला सकते हैं।

आज मैंने देखा है कि गांव के अंदर.. यह ठीक है हर बात में कुछ मात्रा में कोई न कोई शंका को अशंका का कारण रहता होगा लेकिन larger interest में यह बहुत उपकारक है, बहुत उपयोगी है। मैंने राज्‍य का शासन चलाया इसलिए मुझे मालूम है कि गरीब व्‍यक्ति RTI का कैसे उपयोग करता है। अगर गांव के अंदर किसी ने गलत encroachment कर दिया है और वो बड़ा दबदबा वाला इंसान है तो शासन कुछ कर नहीं पाता है। और एक गरीब आदमी RTI को एक सवाल पूछ देता है, आ जाता है, तो शासन को मजबूर हो करके encroachment हटाना पड़ता है। और जनता की या शासन की जो जमीन है वो खुली करवानी पड़ती है। ऐसे कई उदाहरण मैंने देखे हैं। गांव का भी एक छोटा व्‍यक्ति.. ।

हम जब गुजरात में थे तो एक प्रयोग किया था। और वो गुजरात मॉडल के रूप में जाना जाता था tribal के लिए। हम tribal को सीधे पैसा दे देते थे। और tribal को कहते थे तुम अपनी requirement के अनुसार एक कमिटी योजना बनाए और वो अपना काम हो, क्‍योंकि सरकार योजना बनाती गांधी नगर में बैठके। वो चाहती कि कुंआ खोदेंगे। गांवा वाला कहता है कि मुझे कुंआ नहीं चाहिए, मुझे स्‍कूल चाहिए और हम कुंए के लिए पैसा देते हैं, उसे स्‍कूल चाहिए उसके बजाय हमने गांव वालों को दिया। लेकिन गांव में ग्राम सभा के अंदर उनको सारा ब्‍यौरा देना पड़ता था और बोर्ड पर लिखकर रखना पड़ता था कि हमने इस काम के लिए इतना पैसा लगाया। गांव का सामान्‍य व्‍यक्ति भी पूछ लेता था पंच के प्रधान को कि भई तुम कह रहे हो दो सौ रुपया यहां लगाया, वो चीज तो दिखती नहीं, बताओ। और Transparency आती थी। हम जितना openness लाते हैं, उतनी Transparency की गारंटी बनती है। और इसलिए RTI एक माध्‍यम है Transparency की ओर जाने का, लेकिन At the same time RTI से सीख करके हमने शासन व्‍यवस्‍था में Transparency लाने की आवश्‍यकता है। और मुझे विश्‍वास है कि अगर गलत इरादे से कोई काम नहीं है तो कभी कोइे तकलीफ नहीं होती है, कोई दिक्‍कत नहीं होती है। सही काम सही परिणाम भी देते हैं। और जैसा मैंने कहा सिर्फ process नहीं। हमें आने वाले दिनों में product की quality पर भी ध्‍यान देना पड़ेगा। उसको भी हम किस प्रकार से सोंचे। ताकि हर चीज का हिसाब-किताब देना पड़े। क्‍योंकि जनता के पैसा से चलती है सरकार। सारे निर्माण कार्य होते हैं जनता के पैसों से होते हैं। और जनता सर्वपरि होती है लोकतंत्र में। उसके हितों की चिंता और उस व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में हम प्रयास करते रहेंगे। तो मैं समझता हूं कि बहुत ही उपकारक होगा।

आज पूरा दिनभर आप लोग बैठने वाले हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस बंधन में राज्‍य के भी सभी अधिकारी यहां पर आए हुए हैं। तो उस मंथन में से जो भी अच्‍छे सुझाव आएंगे वो सरकार के ध्‍यान में आएंगे। उसमें से कितना अच्‍छा कर सकते हैं प्रयास जरूर रहेगा, लेकिन हम चाहेंगे कि जनता जितनी ताकतवर बनती है, नागरिक जितना ताकतवर बनता है वो ताकत सचमुच में देश की ही ताकत होती है। उसी को हम बल दें। इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद।

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महामहिम , आदरणीय मिसेस अझारेल अर्नेस्टा,

नॅशनल असेंब्लीच्या अध्यक्ष, आदरणीय मिसेस सिल्वान  लेमियेल,

सभागृह नेते,

विरोधी पक्षनेते, आदरणीय मिस्टर बॅनॉ जॉर्ज,

नॅशनल असेंब्लीचे आदरणीय सदस्य,

आणि माझ्या प्रिय बंधू आणि भगिनींनो,

नमस्कार!

बॉन अप्रेमिदी!

या नॅशनल असेंब्लीला  संबोधित करणारे पहिले भारतीय पंतप्रधान म्हणून तुमच्यासमोर उभे राहणे हा माझ्यासाठी एक विशेष बहुमान आहे. आदरणीय अध्यक्ष महोदया, आपण व्यक्त केलेल्या आपुलकीच्या शब्दांबद्दल मी आपले मनापासून आभार मानतो.

आजच मला सेशेल्सचे अध्यक्ष एर्मिनी आणि येथील जनतेच्या वतीने ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होरायझन’  या सर्वोच्च सन्मानाने गौरवण्यात आले, त्याबद्दलही मी कृतज्ञता व्यक्त करतो. हा सन्मान पर्यावरण संवर्धनासाठी सातत्याने प्रयत्न करणाऱ्या जगभरातील सर्वांना नक्कीच प्रेरणा देईल. मी माझ्यासोबत भारताच्या 140 कोटी जनतेच्या सदिच्छा आणि हार्दिक शुभेच्छा घेऊन आलो आहे.

पंतप्रधान म्हणून मी हिंदी महासागर क्षेत्रातील ज्या देशाला 2015 मध्ये सर्वप्रथम भेट दिली होती, तो देश म्हणजे 'सेशेल्स' होता. माझी ती पहिली आफ्रिका भेटही होती. मी इथे आलो कारण माझा हा दृढ विश्वास होता की, हिंदी महासागराबाबतच्या भारताच्या दृष्टिकोनात सेशेल्सला एक अतिशय विशेष स्थान आहे. आज, एका दशकानंतर जेव्हा मी इथे पुन्हा आलो आहे, तेव्हा माझा हा विश्वास पूर्वीपेक्षा अधिक दृढ झाला आहे.

 

तुमच्या स्वातंत्र्याची 50 वर्षे म्हणजेच सुवर्णमहोत्सव साजरा होत असताना या ऐतिहासिक क्षणी तुमच्यात सामील होताना मला अत्यंत आनंद होत आहे. या विशेष प्रसंगी मी तुमचे आणि सेशेल्सच्या जनतेचे मनःपूर्वक अभिनंदन करतो.

आदरणीय सदस्यहो,

या नॅशनल असेंब्लीला संबोधित करणे हा एक दुर्मिळ आणि बहुमोल अधिकार आहे. या विशेष सन्मानाबद्दल मी आपले आभार मानतो. या निमित्ताने मी या आठव्या नॅशनल असेंब्लीच्या नवनिर्वाचित सदस्यांचेही अभिनंदन करतो. तसेच, आदरणीय अध्यक्ष महोदया, या पवित्र सभागृहाच्या पहिल्या महिला अध्यक्ष होण्याचा मान मिळाल्याबद्दल मी आपले विशेष कौतुक करतो.

आदरणीय सदस्यहो,

आपली मैत्री केवळ पन्नास वर्षांपूर्वी आपल्या राजनैतिक संबंधांच्या स्थापनेने सुरू झालेली नाही, तर तिची मुळे इतिहासात खूप खोलवर रुजलेली आहेत, याचे आज स्मरण करणे महत्त्वाचे आहे. ऑगस्ट 1770 मध्ये 'थॅलेमॅक' या जहाजावरून सेंट ॲन बेटावर पोहोचलेल्या लोकांमध्ये पाच भारतीय देखील सामील होते. त्या पहिल्या सफरीने त्यानंतर येणाऱ्या अनेकांसाठी मैत्रीचा मार्ग खुला केला. काळाच्या ओघात, त्यांच्या संघर्षाच्या आणि कर्तृत्वाच्या कथा आधुनिक सेशेल्सच्या गौरवशाली इतिहासाचा अविभाज्य भाग बनल्या.

ही गोष्ट मला याची आठवण करून देते की, आपल्यातील नाते सरकारांनी निर्माण केलेले नाही. ते लोकांनी निर्माण केले, कुटुंबांनी जोपासले आणि अनेक पिढ्यांनी ते जपले. हे हिंदी महासागरामुळे शक्य झाले. हिंदी महासागर भारत आणि सेशेल्सला विलग करणारा नाही, तर तो आपल्याला जोडणारा आहे. म्हणूनच आपण एकमेकांना अपरिचित असल्याप्रमाणे नाही, तर जुने मित्र असल्यासारखेे भेटतो.

आदरणीय सदस्यहो,

सेशेल्सची सर्वात मोठी ताकद म्हणजे येथील जनता. पिढ्यानपिढ्या जगाच्या कानाकोपऱ्यातून लोक येथे आले. ते आपल्यासोबत विविध भाषा, रीतिरिवाज, श्रद्धा आणि परंपरा घेऊन आले. आणि सर्वांनी मिळून 'सेशेल्सवासी' अशी अभिमानास्पद सामायिक ओळख निर्माण केली.

हे या नॅशनल असेंब्लीच्या – 'विविधतेत एकता' या ब्रीदवाक्यानुसारच आहे. हे ब्रीदवाक्य क्रेओल संगीताच्या सुरावटीमधूनही प्रत्ययास येते, 'मौत्या' नृत्याच्या लयीत पाहायला मिळते तसेच 'फेस्टिव्हल क्रेओल' मध्ये ते अनुभवता येते.

जेव्हा राष्ट्र आपल्या समृद्ध वारशाचा गौरव करते, तेव्हा आपल्या संस्कृतींदरम्यान असलेला संबंध दैनंदिन जीवनातही दिसून येतो. 'कारी कोको', समोसा आणि चटणी यांच्या स्वादांमधून या संबंधांची जाणीव होते. दिवाळी, 'थाई पोंगल' आणि नवरात्रीतील गरबा नृत्य यांसारख्या उत्सवांमध्येही या संबंधांचे दर्शन होते. ही तीच 'क्रिओल' भावना आहे, जी आपल्या मैत्रीच्या भविष्याबद्दल आपल्याला आश्वासकतेची भावना देते.

 

आदरणीय  सदस्यहो,

सागरी शेजारी म्हणून, आपण एकमेकांच्या सुरक्षेत भर घालू शकतो. एकाची भरभराट दुसऱ्याच्या भरभराटीस पूरक ठरते. आणि या क्षेत्रात स्थिरता असणे आपल्या सर्वांसाठीच फायदेशीर असल्याचे आपण ओळखले आहे.

हे वर्ष आपल्यातील भागीदारी किती खोलवर पोहोचलेली आहे याची ठळकपणे आठवण करून देते. पन्नास वर्षांपूर्वी, तुमच्या स्वातंत्र्याच्या सुरुवातीच्या काळात, मैत्री आणि एकजुटीचे प्रतीक म्हणून भारतीय नौदलाची  'आयएनएस निलगिरी' ही नौका 'पोर्ट व्हिक्टोरिया' येथे उपस्थित होती. आणि आज, तुमच्यासोबत स्वातंत्र्याचा सुवर्णमहोत्सव साजरा करण्यासाठी 'आयएनएस तारकश' आणि 'आयएनएस इक्षक' या नौका 'पोर्ट व्हिक्टोरिया' बंदरात दाखल झाल्या आहेत.

गेल्या 50 वर्षात अनेक गोष्टी बदलल्या. मात्र, आपली एकमेकांप्रती असलेली वचनबद्धता मात्र बदलली नाही. गेली अनेक दशके आपली सशस्त्र दले, तटरक्षक दल आणि सागरी संस्था यांनी एकत्र प्रशिक्षण घेतले आहे आणि एकत्रित काम केले आहे. सेशेल्सचे संरक्षण दल आणि सेशेल्स तटरक्षक दलाची व्यावसायिकता  आणि समर्पण वृत्ती, याचा भारताला मनापासून अभिमान आहे. आपल्या देशाच्या विशाल सागरी क्षेत्राच्या सुरक्षा सोबतच संपूर्ण हिंदी महासागर प्रदेशाच्या सुरक्षिततेही त्यांची महत्त्वाची भूमिका आहे. सागरी सुरक्षा, क्षमता विकास, हायड्रोग्राफी आणि सागरी क्षेत्राबाबत जागरूकता यांमधील आपले सहकार्य अधिक सुरक्षित आणि संरक्षित क्षेत्र घडवण्याच्या आपल्या सामायिक वचनबद्धतेचे प्रतीक आहे.

आज सकाळी मी राष्ट्राध्यक्ष हर्मिनी - टॉन पॅट - यांची भेट घेतली आणि या भेटीत आपल्या भागीदारीत झालेल्या उल्लेखनीय प्रगतीचा आढावा घेतला. भविष्यासाठीच्या आमच्या सामायिक दृष्टिकोनावरही आम्ही चर्चा केली. आमचा हा दृष्टिकोन 'महासागर' (एमएएचएएसएजीएआर) या संकल्पनेत सामावलेला आहे. महासागर म्हणजेच - विविध प्रदेशांमध्ये सुरक्षा आणि विकासासाठी परस्पर आणि सर्वांगीण प्रगती.

हा दृष्टिकोन हे सांगतो की आपले भविष्य एकमेकांशी जोडलेले आणि परस्परावलंबी आहे. आणि, एका अधिक सुरक्षित आणि संरक्षित हिंद महासागर क्षेत्रासाठी आम्ही एकत्र काम करत राहू.

माननीय सदस्यहो,

जेव्हा लोक नकाशा पाहतात, तेव्हा त्यांना सेशेल्स हा देश हिंदी महासागरातील बेटांच्या समूहाच्या रुपात दिसू शकतो. पण आम्हाला त्याहूनही खूप मोठे चित्र दिसते. आम्हाला एक असे राष्ट्र दिसते, ज्याची क्षितिजे त्याच्या किनाऱ्यांच्या पलीकडे दूरवर पसरलेली आहेत. तुमचे सागरी क्षेत्र सुमारे 14 लाख चौरस किलोमीटर क्षेत्रात विस्तारलेले आहे.

यामुळे सेशेल्स हे एक लहान बेटांचे राष्ट्र नसून, एक विशाल सागरी राष्ट्र ठरते. नील अर्थव्यवस्था (ब्लू इकॉनॉमी)' हा मुद्दा जागतिक चर्चेचा भाग बनण्यापूर्वीच सेशेल्सने यात पुढाकार घेतला होता. सागरी परिसंस्थांचे संरक्षण असो किंवा 'ब्लू बॉण्ड्स'सारख्या नाविन्यपूर्ण उपक्रमांना चालना देणे असो, सेशल्स या देशाने महत्त्वाच्या जागतिक संवादांना दिशा देण्यास मदत केली आहे. आपण एकत्र मिळून मत्स्यव्यवसाय, सागरी विज्ञान, किनारी क्षेत्र व्यवस्थापन, अक्षय ऊर्जा आणि शाश्वत पर्यटन या क्षेत्रांमध्ये भक्कम भागीदारी निर्माण करू शकतो.

 

काल, मला प्रतिष्ठित 'कोको द मेर' वृक्षाचे रोप लावण्याचा सन्मान मिळाला. सेशेल्सप्रमाणेच, हे झाड अद्वितीय, मौल्यवान असून जगात त्याचे एक विशेष स्थान आहे. या नैसर्गिक आश्चर्याचे संरक्षण आणि संवर्धन करण्यासाठी तुम्ही करत असलेले प्रयत्न, एका व्यापक तत्त्वज्ञानाचे प्रतिबिंब आहेत - ते तत्वज्ञान म्हणजे मानवाने निसर्गाशी सुसंवाद साधून जगले पाहिजे.

भारतात देखील ही भावना खोलवर रुजली आहे. चला, आपण एकत्र मिळून काम करताना, भावी पिढ्यांना आपल्याला मिळालेल्या महासागरापेक्षा अधिक निरोगी, सुरक्षित आणि अधिक समृद्ध महासागराचा वारसा प्राप्त होवो हे सुनिश्चित करू या.

सन्माननीय सदस्यहो,

ग्लोबल साऊथ आणि विशेषतः द्वीपकल्पीय राष्ट्रे हवामान बदलामुळे अधिक प्रभावित झाली आहेत. त्याचे परिणाम आपल्या किनारपट्ट्यांवर, सागरी परिसंस्थेवर, हवामान पद्धतींमध्ये आणि आपल्या समाजांतही आधीपासून दिसून येत आहेत. आम्हा दोघांनाही विश्वास वाटतो की, हवामान बदलामध्ये सर्वांत कमी योगदान दिलेल्या राष्ट्रांनी त्याच्या परिणामांचा मोठा भार पेलू नये.

हवामान कृती ही निष्पक्षता, जबाबदारी आणि समानतेच्या तत्वांवर आधारलेली असली पाहिजे. तेच हवामान विषयक न्यायाचे सार आहे.

भारताने याविषयीचे उदाहरण घालून देत प्रयत्न केला आहे. गेल्या दशकभरात आम्ही अक्षय उर्जा क्षेत्रात जगातील सर्वांत मोठ्या विस्ताराचे काम केले आहे. मिशन लाईफ- पर्यावरणासाठी जीवनशैली द्वारे शाश्वत जीवनशैलीचा पुरस्कार आम्ही केला आहे. आंतरराष्ट्रीय सौर सहकार्य, आपत्तीत टिकून राहू शकेल अशा पायाभूत सुविधांच्या उभारणीसाठीचे सहकार्य, जागतिक जैवइंधन आघाडी आणि एक पेड मां के नाम यांसारख्या उपक्रमांद्वारे हरित परिवर्तनाला चालना देण्यासाठी आम्ही भागीदार राष्ट्रांसमवेत काम केले आहे.

आणि विकसित देशांचे राष्ट्र असलेल्या लहान बेटांच्या समस्येकडे लक्ष वेधण्यासाठी सेशेल्ससमवेत काम करत राहण्यास भारत कटिबद्ध आहे.

सन्माननीय सदस्य,

सेशेल्स आणि भारत दोन्ही देशांना अधिक प्रमाणात सर्वसमावेशक विकास घडवणारे जग हवे आहे. आंतरराष्ट्रीय संस्थांमध्ये समकालीन वास्तवाचे प्रतिबिंब उमटणाऱ्या जगाची आम्हाला अपेक्षा आहे. आम्हाला विश्वास वाटतो की, आपले सामायिक भविष्य सामूहिक, सर्वसमावेशक आणि न्याय्य पद्धतीने घडवले पाहिजे.

आमच्या जी 20 अध्यक्षपदाच्या काळात भारताच्या प्रयत्नांना याच विचारांनी दिशा दिली होती. आम्ही ग्लोबल साऊथच्या प्राधान्यक्रमांना त्याच भावनेतून आंतरराष्ट्रीय चर्चेच्या केंद्रस्थानी आणण्याचे काम केले. त्याच भावनेतून आम्ही अफ्रिकन महासंघाचे जी 20 चे कायमस्वरूपी सदस्य म्हणून स्वागत केले. ग्लोबल साऊथ या भावनेतून एकत्र येतो. आणि भारत आणि सेशेल्स एकत्रितपणे हीच दूरदृष्टी पुढे नेण्याचे काम करत राहतील.

 

माननीय सदस्य,

गेल्या पन्नास वर्षांतील यशाचा उत्सव साजरा करत असताना, आपण भविष्याकडेही पाहिले पाहिजे. सेशेल्सचे भविष्य येथील युवा पिढी घडवणार आहे. गेल्या अनेक दशकांपासून सेशेल्समधील विद्यार्थी, व्यावसायिक, अधिकारी आणि सुरक्षा दलातील कर्मचारी भारतात शिक्षण व प्रशिक्षण घेत असल्याचा आम्हाला अभिमान आहे.

खरे तर, असे म्हटले जाते की सेशेल्समधील प्रत्येक 50 व्यक्तींमागे एका व्यक्तीने भारतात प्रशिक्षण घेतले आहे. भारताकडून कौशल्ये, मैत्री आणि अनुभव घेऊन ते आपल्या देशात परत गेले आहेत आणि याच गोष्टी आजही आपल्या भागीदारीला अधिक बळकट करत आहेत.

युवकांना इंटर्नशिप उपलब्ध करून देण्यासाठी सुरू करण्यात आलेल्या तुमच्या आयजीएनआयटीई  उपक्रमाबद्दल जाणून मला आनंद झाला. ही एक उत्कृष्ट संकल्पना आहे आणि या क्षेत्रात सहकार्याच्या नव्या संधी आपण शोधू शकतो.

अशा सहकार्यासाठी एक महत्त्वाचे क्षेत्र म्हणजे डिजिटल नवोन्मेष. भारताच्या डिजिटल सार्वजनिक पायाभूत सुविधांनी (डीपीआय) तंत्रज्ञानाच्या माध्यमातून संधी कशा वाढू शकतात, प्रशासन कसे सुधारू शकते, आर्थिक समावेशनाला कशी चालना मिळू शकते आणि कोट्यवधी लोकांपर्यंत सेवा कशा पोहोचू शकतात, हे सिद्ध करून दाखवले आहे.

सेशेल्स स्वतः डिजिटल परिवर्तनाच्या दिशेने वाटचाल करत असताना, त्यांच्याशी आमचे अनुभव आणि कौशल्य सामाईक करण्यात आम्हाला आनंद होईल. स्वातंत्र्याच्या पहिल्या पन्नास वर्षांना दिशा देणाऱ्या निर्धारानेच सेशेल्समधील तरुण या संधींचा स्वीकार करतील, असा मला विश्वास आहे.

माननीय सदस्यहो,

आज, या ऐतिहासिक सुवर्णमहोत्सवी वर्षात तुमच्यासमोर उभा असताना, आपले नागरिक अडीचशे वर्षांहून अधिक काळ टिकलेल्या मैत्रीचा उत्सव साजरा करत आहेत. इतक्या भक्कम पायावर उभ्या असलेल्या भागीदाऱ्या फारच कमी आहेत. आणि इतका स्नेह, विश्वास आणि सद्भावनेने विकसित झालेल्या भागीदाऱ्या तर त्याहूनही कमी आहेत.

आता पुढे पाहताना, या भक्कम पायावर आपण अधिक मजबूत बांधणी करूया. भारत तुमचा विश्वासू भागीदार राहील. तुमच्या यशाचा आम्ही आनंद साजरा करू. तुमच्या आकांक्षांना आम्ही पाठिंबा देऊ. आणि मित्र म्हणून सदैव तुमच्या पाठीशी उभे राहू.

गेल्या पन्नास वर्षांचा प्रवास उल्लेखनीय राहिला आहे. परंतु सेशेल्सच्या इतिहासातील सर्वोत्तम अध्याय अजून लिहिले जाणे बाकी आहेत, असा माझा ठाम विश्वास आहे. आणि आपल्या मैत्रीतील सर्वोत्तम क्षणही अजून यायचे आहेत.