NDA's 6 sutras for development of Bihar-for people: Education, Employment, Medical facilities; for state: Power, Water, Roads: PM
If hitting out at Modi develops Bihar, then I'm ready to take all allegations: PM Modi
For NDA biggest of the grounds seem minute while for 'Mahaswarthbandhan' even a small pandal becomes huge: PM Modi
People of Bihar do not spare the one's who betrays the state. Nitish Kumar would be wiped off in the elections: PM
Lies spread by Nitish & Lalu are unveiling the truth of reservation: PM Modi
People of Bihar would press the button of development. They would vote for the NDA: PM
The term 'Darbhanga Module' was used after blasts in Mumbai & Pune, innocent policewoman had to face consequences: PM

मंच पर विराजमान यहाँ के सभी वरिष्ठ नेतागण। चुनाव में कुशेश्वर स्थान से लोजपा के उम्मीदवार धनंजय कुमार, लोजपा के उम्मीदवार विनोद साहनी, बेनीपुर से भाजपा के उम्मीदवार गोपाल जी ठाकुर, अलीनगर से भाजपा के उम्मीदवार लाल जी यादव, दरभंगा ग्रामीण से हम पार्टी के उम्मीदवार नौशाद आलम जी, दरभंगा नगर से भाजपा के उम्मीदवार संजय जी, हयागढ़ से लोजपा के उम्मीदवार आर। के। चौधरी जी, बहादूरपुर से भाजपा के उम्मीदवार हरीश साहनी, और केवटी से भाजपा के उम्मीदवार अशोक यादव, झाले से भाजपा के उम्मीदवार द्विवेश कुमार मिश्रा, विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

दरभंगा के ई पावन मिथिला भूमि के नमन करै छी। बाबा कुशेश्वर के ई पावन धरती पर आई के गौरवान्वित महसूस काय रहल छी। दरभंगा की जो पहचान है – पग-पग पोखर पान मखान, सरस बोल मुस्की मुस्कान; विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, ललित नगर मिथिला ठीक। आप सबके दिल से अभिनंदन करै छी।

आज मैं सबसे पहले अपने प्रिय मित्र कीर्ति आज़ाद के खिलाफ़ शिकायत करना चाहता हूँ। मेरी शिकायत ये है कि जब कीर्ति स्वयं चुनाव लड़ रहे थे, मैं लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था, तब तो आधी भीड़ भी नहीं थी और आज क्या कमाल कर दिया आप लोगों ने। जहाँ भी मेरी नज़र पहुँचती है, लोग ही लोग नज़र आते हैं। दरभंगा का मैदान भी छोटा पड़ गया है, ये चुनाव ऐसा है कि एनडीए वालों के लिए मैदान छोटा पड़ता है और महास्वार्थबंधन वालों के लिए पंडाल भी बड़ा हो जाता है।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव अभियान का ये मेरा आखिरी कार्यक्रम है। पिछली बार मैं जब दरभंगा आया था, समय-सीमा के कारण 12-15 मिनट ही बोल पाया था, मेरे मन में भी कसक थी कि जिस मिथिला की भूमि को अटल जी इतना प्यार करते थे, वहां इतनी कम देर लेकिन आज मैं आपसे जी भर कर मिलने आया हूँ। मुझे बिहार के हर कोने में जाने और एक से बढ़कर एक रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। इसे क्या कहें, चुनाव सभा, जन सभा, रैली, रैला कहें, मुझे तो लगता है कि ये मेला है, परिवर्तन का मेला है।

दिल्ली में बैठकर पॉलिटिकल पंडित हिसाब लगाते हैं कि 2% इधर जाएगा तो ये होगा, 2% उधर जाएगा तो ये होगा। पंडित जी, अपने पुराने हिसाब-किताब बंद कर दो, बिहार नया इतिहास लिखने जा रहा है। ये पुराने समीकरण और नई गिनतियाँ अब नहीं चलेंगी। बिहार की जनता ने बिहार की तो सेवा की है, इस चुनाव के माध्यम से देश की बहुत बड़ी सेवा की है। जातिवाद और संप्रदायवाद का ज़हर हमारे लोकतंत्र में खरोच पैदा कर रहा है लेकिन इस चुनाव में बिहार का नौजवान नेतृत्व कर विकास के मुद्दे पर लड़ रहा है। इस चुनाव के बाद हिन्दुस्तान की सभी पॉलिटिकल पार्टियों को विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसका क्रेडिट बिहार के लोगों को जाता है। इस चुनाव में बिहार का माहौल देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

मैं आज सार्वजनिक रूप से प्रधान देवक के रूप में बिहार के नागरिकों का सर झुका कर अभिनंदन करता हूँ। मैं जहाँ-जहाँ गया, एनडीए के लोग जहाँ-जहाँ गए, बिहार की जनता ने पलकें बिछाकर हम सभी का स्वागत किया, इसलिए मैं आप सभी को सर झुका कर धन्यवाद करता हूँ। दूसरी बात कि पहले के मतदान के सारे रिकॉर्ड बिहार के चार चरणों ने तोड़ दिए, भारी मतदान किया, माओवादियों के बम-बंदूक की धमकी के बावजूद अभूतपूर्व मतदान किया। इससे लोकतंत्र में जो विश्वास बढ़ा है, इसके लिए मैं बिहार की जनता को नमन करता हूँ। तीसरी बात, पहले बिहार में जब भी चुनाव होता था तो ये ख़बर आती थी कि इतने पोलिंग बूथ लूटे गए, इतनी गोलीबारी हुई, इतनी हत्याएं हुईं लेकिन इस बार के शांतिपूर्ण चुनाव के लिए बिहार के मतदाताओं का ह्रदय से अभिनंदन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव में हम विकास का मुद्दा लेकर पहले दिन से चले, लोकसभा के चुनाव में भी हमारा मुद्दा विकास था लेकिन हम आशा करते थे कि जिन्होंने यहाँ 60 साल राज किया, मैडम सोनिया जी ने 35 साल राज किया, 15 साल तक लालू जी और 10 साल तक नीतीश जी ने राज किया; ये हमारे साथ विकास के मुद्दों पर चर्चा करते, बिहार की बर्बादी के कारण और बिहार से नौजवानों के पलायन का जवाब देते लेकिन अभी भी वे 1990 के कालखंड में जी रहे हैं। उन्हें पता नहीं है कि ये 21वीं सदी चल रही है और 1990 में पैदा हुआ बच्चा आज बिहार का भाग्य बदलने को लालायित है।

दो महीने से चुनाव का अभियान चल रहा है लेकिन लालू जी हो या नीतीश जी या मैडम सोनिया जी, ये लोग बिहार के विकास पर कुछ भी नहीं बोलते। बिहार के भविष्य की किसी योजना के बारे में बात नहीं करते। 25 साल इन्होंने सरकार चलाई, ये कोई कम समय नहीं होता। एक बालक में भी 25 साल के बाद अपने माँ-बाप का पेट भरने की ताक़त आ जाती है। आप मुझे बताईये, 25 साल की इनकी सरकार में किसी का भी कोई भला हुआ? मेरी सरकार को अभी 25 महीने नहीं हुए हैं और ये लोग मेरा हिसाब मांग रहे हैं। ख़ुद का 25 साल का हिसाब देने का तैयार नहीं हैं; और हमसे हिसाब मांग रहे हैं।

चुनाव लोकतंत्र का पर्व होता है और यह पर्व लोकतंत्र को ताक़तवर बनाता है। सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात और अपनी नीतियां बतानी होती हैं और जो सरकार में हैं उन्हें अपना हिसाब देना होता है। 2019 में जब मैं लोकसभा चुनाव के लिए आपसे वोट मांगने आऊंगा, तो मेरा फ़र्ज बनता है कि मैं आपको अपने 5 सालों का हिसाब दूँ और आपका हक़ बनता है कि आप मुझसे हिसाब मांगें। लेकिन इन लोगों को देखो, इन्हें मोदी पर कीचड़ उछालने के सिवा और कोई काम ही नहीं है। रोज नए-नए आरोप और गालियां गढ़ी जाती है, क्या इससे बिहार का भला होगा क्या? लालू जी, नीतीश जी, अगर मोदी पर आरोप लगाने से या कीचड़ उछालने से बिहार का भला होता है तो मैं मौजूद हूँ, आपको जो कहना है कहिये। बिहार का भला हो तो मैं ये झेलने के लिए तैयार हूँ।

मेरा जीवन बिहार के काम आए, इससे बड़ा भाग्य मेरा क्या हो सकता है। लालू जी, नीतीश जी, कान खोलकर सुन लीजिये, अहंकार ने आपके आँखों पर ऐसी पट्टी बांध दी है कि आप देख नहीं पाओगे, आप जितना कीचड़ उछालोगे, कमाल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और एक बात जो बाहर नहीं आई है, मुझे भी आश्चर्य लगा कि हर चरण के बाद 12-15 पोलिंग बूथ ऐसे थे जहाँ मतदान के बाद लालू जी और नीतीश जी के कार्यकर्ताओं के बीच झगड़े हुए, कहीं हाथापाई हुई, धमकियाँ हुई; मतदान पूरा होने के बाद अगर ये तुरंत लड़ना शुरू कर देते हैं तो आगे क्या होगा, आप समझ सकते हैं।

पिछले दो महीनों से चुनाव अभियान चल रहा है लेकिन क्या आपने लालू जी, नीतीश जी और राहुल जी को एक साथ मंच पर देखा, पत्रकार परिषद् में देखा, कार्यकर्ता की मीटिंग में देखा? आप उनसे सवाल पूछिये, उनके दरबारी तो पूछेंगे नहीं। जो तीन लोग चुनावी अभियान में एकसाथ नहीं आए, वो बाद में क्या साथ आएंगे और साथ में चलेंगे। जिन्हें ख़ुद पर विश्वास नहीं है, वो आपका भला नहीं कर सकते।

मुझे अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला, उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने उनसे पूछा कि क्या हमारा मुख्यमंत्री नहीं बन सकता है, क्या आपका बेटा नहीं बन सकता है, लालू जी के मुंह में पानी आ गया, उनको ख़ुशी होने लगी कि हाँ, संभावना दिखती है; दूसरे ने पूछा कि अगर चुनाव हार जाते हैं तो विपक्ष का नेता कौन बनेगा; इस पर लालू जी ने जवाब दिया कि मैंने तो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर समर्थन देने का वाद किया है न कि विपक्ष के नेता बनने का वादा। लालू जी ने कहा कि चुनाव हारने पर तो विपक्ष का नेता हमारा बेटा बनेगा। मैं सार्वजनिक रूप से मैं लालू जी से पूछना चाहता हूँ कि आप बिहार की जनता को बताओ कि विपक्ष का नेता कौन होगा, लालू जी का बेटा होगा या नीतीश बाबू होंगे, क्योंकि आपका चुनाव हारना तय है। ये मेरी मांग है आपसे।

मैं आपको एक पुरानी घटना याद कराना चाहता हूँ। जब मुंबई में बम धमाके हुए तो हमारे देश में आतंकी दुनिया के लिए एक शब्द चल पड़ा था - दरभंगा मॉड्युल, और कारण ये थे कि कुछ लोग यहाँ बैठ कर हिन्दुस्तान में आतंकवाद फ़ैलाने का षड़यंत्र रच रहे हैं। यहाँ पर एक जाबांज पुलिस अधिकारी महिला थी, दलित कन्या थी, उसने हिन्दुस्तान के निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकवादी गतिविधि करने वाले लोगों की कार ढूंढने की कोशिश की। इस महास्वार्थबंधन के निकट के नेता के घर तक आतंकवाद के तार जाने लगे थे, तब सरकार में बैठे लोगों ने आतंकवाद से जुड़े नेताओं पर कदम नहीं उठाया लेकिन उस पुलिस अफसर को यहाँ से जाने और बिहार छोड़ने के लिए मज़बूर कर दिया। आप देश की रक्षा के साथ समझौता करने वाले और आतंकवादियों पर कृपा करने वाले लोगों को पटना में सरकार में बिठाएंगे क्या?

बिहार का भाग्य बदलने के लिए भाजपा, एनडीए का आप समर्थन करें, इसके लिए मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। भाईयों-बहनों, मेरे पास एक जानकारी है, सही है या गलत पता नहीं क्योंकि समय के अभाव के कारण मैं वेरीफाई नहीं कर पाया, 1990 में लालू जी की सरकार ने बिहार के लोक सेवा आयोग से मैथिलि भाषा को निकाल दिया था, लालू जी ने मैथिलि भाषा का अपमान किया लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में एनडीए की सरकार बनने के तुरंत बाद 2002 में संविधान की 8वीं सूची में इसे स्थान दिया गया। हम अपमानित करना नहीं बल्कि सम्मानित करना जानते हैं।  

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था जिसकी न कोई फाइल थी, न बजट था लेकिन बिहार के प्रति मेरा यह प्यार है, बिहार के लिए हमें कुछ करना है, हमने निर्णय लिया इसे देने का। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने और यहाँ के लोगों का जीवन बदलने की ताकत रखता है। विकास के बिना बिहार की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। बिहार एक ज़माने में हिन्दुस्तान का सिरमौर हुआ करता था लेकिन 25 साल में जंगलराज और जंतर-मंतर ने बिहार को बर्बाद कर दिया। इन दोनों की जुगलबंदी वो भी बर्बाद कर देगी जो कुछ बिहार में अब बचा हुआ है।

कोई स्कूटर अगर छोटे से गड्ढ़े में फंस जाए तो 3-4 लोग निकालें तो निकल जाता है लेकिन अगर स्कूटर कुएं में गिरा हो तो उसको निकालने के लिए ट्रेक्टर की ज़रुरत होती है। 25 साल की इनकी सरकार ने बिहार को ऐसे गड्ढ़े में डाल दिया है जिसे निकालने के लिए दो-दो इंजन की जरुरत है। पटना और दिल्ली के दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा। एक इंजन बिहार में जो नई सरकार बनेगी वो और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार जो आपने बनाई है।

भाईयों-बहनों, हम चुनाव के मैदान में विकास के मुद्दे को लेकर आए थे। लालू जी और नीतीश जी के पास विकास का ‘व’ बोलने की कोई जगह नहीं है और इसलिए उन्होंने चुनाव को जातिवाद के रंग में रंगने का नाटक किया। आरक्षण को लेकर महीने भर चीखते-चिल्लाते रहे, दिल्ली में उनके दरबारी भी इसी बात को बढ़ाते रहे। इन्होंने एक काल्पनिक भय पैदा किया और आरक्षण के नाम पर हौवा खड़ा किया। उनकी हर बात में बस आरक्षण था। जब एक दिन मुझे लगा कि इनका गुब्बारा बहुत बड़ा हो गया है तो मैंने एक छोटी सी सुई लगा दी और उनका पूरा गुब्बारा नीचे आ गया। उनकी सारी पोल खुल गई है।

यही लालू जी और नीतीश जी ने आरक्षण पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उन्हें चिंता अपनी कुर्सी की थी और जब मैंने उनका वीडियो निकाल दिया तो पिछले एक हफ़्ते से आरक्षण का नाम लेना भूल गए। बिजली की तो वो कोई बात ही नहीं करते क्योंकि उन्हें डर है कि अगर बोल दिया तो लोग उनसे हिसाब मांगेंगे क्योंकि 2010 में नीतीश जी ने कहा था कि अगर घर-घर बिजली नहीं पहुंचाऊंगा तो 2015 में अगले चुनाव में वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली नहीं तो वोट नहीं, ऐसे उन्होंने कहा था कि नहीं? उन्होंने अपना वादा तोड़ा है, आपसे धोखा किया है। जो जनता से धोखा कर सकते हैं, जनता उन्हें कभी स्वीकार नहीं करती।

बिहार की जनता जब देती है तो छप्पर फाड़ कर देती है; कांग्रेस को 35 साल तक दिया और जब लेती है तो चुन-चुन कर साफ़ कर देती है। जब लालू जी को दिया तो जी भर दिया लेकिन जब लालू जी पर गुस्सा आया तो फ़िर किसी को बचने नहीं दिया। अब बारी आई अहंकार की, बिहार अहंकार को बर्दाश्त नहीं कर सकता और अब अहंकार की विदाई की बारी है। नीतीश बाबू ने कहा था कि अगर किसी का भ्रष्टाचार पकड़ा गया तो उसकी मिल्कियत जब्त कर ली जाएगी और उसके घर में स्कूल खोला जाएगा। नीतीश जी रोज इस बात का ढोल पीटते थे। लोगों को क्यों मूर्ख बना रहे हैं? जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए। ये अभी से ऐसा काम कर रहे हैं तो चुनाव के बाद क्या करेंगे। बिहार बेचने का एडवांस लिया जा रहा है। अब नीतीश बाबू बताएं कि उनका घर कब्ज़े में किया क्या, उनके घर में स्कूल खोला?

भाईयों-बहनों, बिहार में आप लोगों के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – पढ़ाई, कमाई और दवाई। बिहार के गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी एवं सस्ती शिक्षा मिलनी चाहिए। हर मां अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है, लेकिन बिहार में पढ़ाई की इतनी हालत खराब है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए माँ-बाप को अपनी ज़मीन गिरवी रखनी पड़ती है। ये हमें शोभा देता है क्या? इसलिए मेरा संकल्प है, बिहार के बच्चों को सस्ती एवं अच्छी पढ़ाई। मेरा दूसरा सपना है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में नौजवान को अपना राज्य और अपने माँ-बाप को छोड़ना पड़ता है। बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए और ये पलायन बंद होना चाहिए। इसलिए मेरा दूसरा संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए कमाई। मेरा तीसरा सपना है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, दवाखाना और डॉक्टर होना चाहिए।

बिहार राज्य के लिए तीन कार्यक्रम है - बिजली, पानी एवं सड़क। बिजली आएगी तो कारखाने लगेंगे, और इससे रोजगार मिलेगा। बिजली के लिए अकेले दरभंगा को मैंने पौने 400 करोड़ आवंटित कर दिये हैं। बिहार को जो सौभाग्य मिला है, वो किसी और राज्य को नहीं मिला है; बिहार की दो ताक़त है - बिहार का पानी और बिहार की जवानी। ये दोनों पूरे हिन्दुस्तान का भाग्य बदल सकती हैं। किसान को अगर पानी मिल जाए तो वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। हमारा दूसरा संकल्प है - खेतों में पानी, उद्योगों को पानी और पीने का पानी पहुँचाना। तीसरा मेरा संकल्प है – सड़क; बिहार में सडकों का जाल हो। गाँव ज़िले से, ज़िला राज्य से, राज्य दिल्ली से जुड़ जाए, ऐसा नेटवर्क बनाना है ताकि बिहार का सीधा मार्ग विकास की ओर चल पड़े, इन कामों को लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।

विकास ही एक मंत्र है, विकास के लिए मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। मैं आपसे वोट विकास के लिए मांगता हूँ। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और अब पांचवे चरण में आप सारे रिकॉर्ड तोड़ दोगे न? आप सब दस-दस परिवारों से वोट कराओ, भाजपा, एनडीए को वोट कराओ।  मेरे साथ बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!        

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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ശ്രീരാമജന്മഭൂമി ക്ഷേത്രത്തിലെ പതാക ഉയർത്തൽ ഉത്സവത്തിനിടെ പ്രധാനമന്ത്രി നടത്തിയ പ്രസം​ഗം

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First multilingual Indian speech recognition model trained on 65 languages and dialects released

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മുൻ രാഷ്ട്രപതി ശ്രീ രാംനാഥ് കോവിന്ദിന്റെ ആത്മകഥയുടെ പ്രകാശന ചടങ്ങിൽ പ്രധാനമന്ത്രി നടത്തിയ അഭിസംബോധനയുടെ മലയാളം പരിഭാഷ
August 12, 2026
ഇന്ന് ശ്രീ രാം നാഥ് കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥ പ്രകാശനം ചെയ്യാൻ നമുക്ക് അവസരം ലഭിച്ചു; ഈ പരിപാടിയുടെ ഭാഗമാകാൻ കഴിഞ്ഞതിൽ എനിക്ക് സന്തോഷമുണ്ട്: പ്രധാനമന്ത്രി
പൊതുസേവനത്തിനും നമ്മുടെ രാജ്യത്തിന്റെ പുരോഗതിക്കുമായി അർപ്പിച്ച ഒരു ജീവിതത്തെ അദ്ദേഹത്തിൻ്റെ യാത്ര പ്രതിഫലിപ്പിക്കുന്നു: പ്രധാനമന്ത്രി
കോവിന്ദ് ജിയുമായുള്ള എന്റെ ദീർഘകാല ബന്ധവും എന്നോടുള്ള അദ്ദേഹത്തിന്റെ പ്രത്യേക സ്നേഹവാത്സല്യവും ഊഷ്മളതയും എന്റെ ഏറ്റവും വലിയ സമ്പത്താണ്: പ്രധാനമന്ത്രി
ഏറ്റവും പാവപ്പെട്ടവർക്കും പാർശ്വവൽക്കരിക്കപ്പെട്ടവർക്കും ഏറ്റവും ഉയർന്ന നിലയിലെത്താൻ അവസരം ലഭിക്കുന്ന ഒരു പുതിയ ഇന്ത്യ കെട്ടിപ്പടുക്കാനാണ് മഹാത്മാഗാന്ധി, ബാബാസാഹേബ് അംബേദ്കർ, ജ്യോതിബ ഫൂലെ, സാവിത്രിബായ് ഫൂലെ എന്നിവർ സ്വപ്നം കണ്ടത്: പ്രധാനമന്ത്രി
കോവിന്ദ് ജിയെപ്പോലുള്ള വ്യക്തികൾ തങ്ങളുടെ കഠിനാധ്വാനത്തിലൂടെയും പ്രാപ്തിയിലൂടെയും സ്വന്തം ജീവിതം മാറ്റിയെഴുതുക മാത്രമല്ല ചെയ്തത്, നൂറ്റാണ്ടുകൾ പഴക്കമുള്ള ആ സ്വപ്നവും ദർശനവും സാക്ഷാത്കരിക്കുന്നതിൽ പ്രധാന പങ്ക് വഹിക്കുകയും ചെയ്തിട്ടുണ്ട്: പ്രധാനമന്ത്രി
രാഷ്ട്രപതി സ്ഥാനത്തുനിന്ന് വിരമിച്ച ശേഷവും അദ്ദേഹം 'ഒരു രാജ്യം, ഒരു തിരഞ്ഞെടുപ്പ്' എന്ന വിഷയത്തിൽ പ്രവർത്തിക്കുകയാണ്; ഇതിന്റെ പ്രമേയത്തിന് ജനാധിപത്യത്തിൽ ഒരു പുതിയ അധ്യായം കുറിക്കാൻ കഴിയും: പ്രധാനമന്ത്രി

നമ്മുടെ മുൻ രാഷ്ട്രപതി ശ്രീ രാംനാഥ് കോവിന്ദ് ജി, ലോക്‌സഭാ സ്പീക്കർ ശ്രീ ഓം ബിർള ജി, ശ്രീമതി സവിതാ കോവിന്ദ് ജി, സദസ്സിലിരിക്കുന്ന എല്ലാ മുതിർന്ന വ്യക്തിത്വങ്ങളേ - എല്ലാവരുടെയും പേരുകൾ എടുത്തുപറയാൻ കഴിഞ്ഞെന്നു വരില്ല, എങ്കിലും ഇതൊരു കുടുംബ സംഗമം പോലെ തോന്നുന്നതിൽ എനിക്ക് വലിയ സന്തോഷമുണ്ട്.

സഹോദരീസഹോദരന്മാരേ,

ഇന്ന് ശ്രീ രാംനാഥ് കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥ പ്രകാശനം ചെയ്യുന്നതിനായി നാം ഒത്തുചേർന്ന സന്ദർഭമാണ്. ഈ ചടങ്ങിൽ പങ്കാളിയാകാനുള്ള ഭാഗ്യം എനിക്കും ലഭിച്ചതിൽ സന്തോഷമുണ്ട്. കോവിന്ദ് ജിയുമായി എനിക്ക് ദീർഘകാലത്തെ ബന്ധമുണ്ട്; അദ്ദേഹത്തെ അടുത്തറിയാനും രാഷ്ട്രപതി എന്ന നിലയിൽ അദ്ദേഹത്തിന്റെ മാർഗ്ഗനിർദ്ദേശം സ്വീകരിക്കാനും ഇതോടൊപ്പം അദ്ദേഹത്തിന്റെ പ്രത്യേക സ്നേഹത്തിനും വാത്സല്യത്തിനും പാത്രമാകാനും എനിക്ക് അവസരം ലഭിച്ചു - ഇത് എൻ്റെ ജീവിതത്തിലെ വലിയൊരു നിധിയാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതത്തെക്കുറിച്ച് ഞാൻ മനസ്സിലാക്കിയതിൽ നിന്നും അദ്ദേഹത്തിന്റെ കഴിവുകളെക്കുറിച്ച് ഞാൻ കണ്ടതിൽ നിന്നും ശ്രീ രാംനാഥ് കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥ ഇന്ത്യൻ ജനാധിപത്യത്തിനും ഇന്ത്യൻ സമൂഹത്തിനും ഒരു പൈതൃകമായി മാറുമെന്ന് എനിക്ക് പൂർണ്ണ ആത്മവിശ്വാസത്തോടെ പറയാൻ കഴിയും. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതയാത്ര, സമൂഹത്തിനും രാജ്യത്തിനും നൽകിയ സംഭാവനകൾ - ഇതേക്കുറിച്ച് സംസാരിക്കാൻ ഒരുപാട് കാര്യങ്ങളുണ്ട്, എന്നാൽ ഒരു പുസ്തക പ്രകാശന ചടങ്ങിൽ ഒരു "കർട്ടൻ റൈസർ" മാത്രമേ നൽകാവൂ. പുസ്തകത്തിന്റെ പൂർണ്ണമായ പ്രയോജനം ലഭിക്കുന്നതിന് നിങ്ങൾ അത് മുഴുവനായും വായിക്കണം.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

കോവിന്ദ് ജിയുടെ ജീവിതയാത്ര അദ്ദേഹത്തിന്റെ തന്നെ വാക്കുകളിൽ അറിയാനും അദ്ദേഹത്തിന്റെ എഴുത്തുകളും അനുഭവങ്ങളും വായിക്കാനും സാധിക്കുന്നത് പുതിയ തലമുറയ്ക്ക് ഒരുപാട് കാര്യങ്ങൾ പഠിക്കാൻ അവസരമൊരുക്കും. ഈ ആത്മകഥയുടെ പേരിൽ ശ്രീ രാംനാഥ് കോവിന്ദ് ജിയെ ഞാൻ ഹൃദയപൂർവ്വം അഭിനന്ദിക്കുന്നു.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

കോവിന്ദ് ജി തന്റെ പുസ്തകത്തിന് വളരെ അനുയോജ്യമായ ഒരു തലക്കെട്ടാണ് നൽകിയിരിക്കുന്നത് - "ട്രയംഫ് ഓഫ് ദി ഇന്ത്യൻ റിപ്പബ്ലിക്: മൈ ലൈഫ്, മൈ സ്ട്രഗിൾസ്" (ഇന്ത്യൻ റിപ്പബ്ലിക്കിന്റെ വിജയം: എന്റെ ജീവിതം, എന്റെ പോരാട്ടങ്ങൾ). ജീവിതവും അതിലെ പോരാട്ടങ്ങളും വ്യക്തിപരമാണ്, എന്നാൽ ആ പോരാട്ടങ്ങളിൽ നിന്നുണ്ടായ വിജയങ്ങൾ ഇന്ത്യൻ റിപ്പബ്ലിക്കിനും ഇന്ത്യൻ ജനാധിപത്യത്തിനും അവകാശപ്പെട്ടതാണ് എന്നതാണ് ഇതിന്റെ അർത്ഥം.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

മനുഷ്യസഹജമായ ഒരു രീതി നമ്മൾ പലപ്പോഴും കാണാറുണ്ട്; വിജയങ്ങളുടെ ക്രെഡിറ്റ് ആളുകൾ സ്വന്തമായി എടുക്കുകയും ബുദ്ധിമുട്ടുകൾക്ക് സമൂഹത്തെ കുറ്റപ്പെടുത്തുകയും ചെയ്യും. എന്നാൽ ഹൃദയം ഉദാരമായിരിക്കുമ്പോൾ ഭാരതീയ മൂല്യങ്ങൾ ഉള്ളിലുണ്ടാകുമ്പോൾ ഒരാൾ സമൂഹത്തിൽ കുറ്റങ്ങൾ കണ്ടെത്തുന്നതിനായി സമയം കളയില്ല. അവൻ നല്ല വശങ്ങളിൽ ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിക്കുകയും തന്റെ വിജയത്തിൽ സമൂഹത്തെയും തുല്യ പങ്കാളിയാക്കുകയും ചെയ്യുന്നു. കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥയും അതിന്റെ തലക്കെട്ടും ഇതിന് ഉദാഹരണങ്ങളാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതം നോക്കൂ - കാൺപൂർ ദെഹാതിലെ വളരെ സാധാരണമായ ഒരു കുടുംബത്തിൽ ജനിച്ചു. ഒരു വേനൽക്കാലത്ത് തന്റെ വീട്ടിൽ തീപിടുത്തമുണ്ടായതിനെക്കുറിച്ച് അദ്ദേഹം പുസ്തകത്തിൽ വിവരിക്കുകയും എഴുതുകയും ചെയ്തിട്ടുണ്ട്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ അമ്മ, സ്വന്തം സുരക്ഷ പോലും മറന്ന്, വീട്ടുസാധനങ്ങൾ സംരക്ഷിക്കാൻ ശ്രമിച്ചു. ഒരു സാധാരണ കുടുംബത്തിലെ അമ്മയെ സംബന്ധിച്ചിടത്തോളം ഓരോ സാധനങ്ങളും തന്റെ മക്കളെ വളർത്താനുള്ള മാർഗ്ഗമാണ്. ആ ശ്രമത്തിനിടയിൽ, അവർ തീയിൽ പെട്ടുപോകുകയും മരണപ്പെടുകയും ചെയ്തു. സങ്കൽപ്പിച്ചു നോക്കൂ - അത്രയും ചെറുപ്പത്തിൽ തന്നെ അമ്മയെ ഈ രീതിയിൽ നഷ്ടപ്പെടുന്നത് എത്രത്തോളം വേദനാജനകമായിരുന്നിരിക്കും. എൻ്റെ അമ്മയ്ക്ക് 100 വയസ്സിലധികം ജീവിക്കാനും എന്നെ അനുഗ്രഹിക്കാനും കഴിഞ്ഞത് എൻ്റെ ഭാഗ്യമാണ്. എങ്കിൽപ്പോലും അവരുടെ അസാന്നിധ്യം എനിക്ക് ഇപ്പോഴും അനുഭവപ്പെടുന്നുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

വേദനാജനകമായ ഈ സംഭവം ആരെയും തളർത്തിക്കളയുമായിരുന്നു, എന്നാൽ ഇത് കോവിന്ദ് ജിയെ കൂടുതൽ ശക്തനാക്കുകയാണ് ചെയ്തത്. അയൽപക്കത്തെ ഒരു അമ്മയാണ് അദ്ദേഹത്തെ വളർത്താൻ സഹായിച്ചത്. ഇതിൽ നിന്ന് സാമൂഹിക ഐക്യത്തിന്റെയും സൗഹാർദ്ദത്തിന്റെയും ശക്തി അദ്ദേഹം മനസ്സിലാക്കി. ഈ സംഭവത്തിനു ശേഷം, അദ്ദേഹത്തിന്റെ പിതാവിന്റെ പങ്ക് കൂടുതൽ വലുതായി. പിതാവ് കുടുംബത്തെ നയിച്ച രീതി, മക്കൾക്ക് നൽകിയ മൂല്യങ്ങൾ - അതുകൊണ്ടാണ് കോവിന്ദ് ജി തന്റെ പിതാവിനെ സ്വന്തം നായകനായി കാണുന്നത്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

കുട്ടിക്കാലത്തെ ഈ പോരാട്ടങ്ങൾക്കിടയിലും കോവിന്ദ് ജി വിദ്യാഭാസത്തെ തന്നെത്തന്നെ ശക്തനാക്കാനുള്ള വഴിയാക്കി മാറ്റി. അദ്ദേഹം കഠിനാധ്വാനം ചെയ്തു, വിഭവങ്ങളുടെ ലഭ്യതക്കുറവിനെ ഒരു ബലഹീനതയാകാൻ അനുവദിച്ചില്ല. അങ്ങനെ അന്ന് ആളുകൾക്ക് സങ്കൽപ്പിക്കാൻ പോലും കഴിയാതിരുന്ന ഒരു ഉയരത്തിലേക്ക് അദ്ദേഹം എത്തിച്ചേർന്നു - ഇന്ത്യയെപ്പോലുള്ള ഒരു വലിയ രാജ്യത്തിന്റെ രാഷ്ട്രപതിയായി അദ്ദേഹം മാറി.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

അത്രയും ഉയർന്ന പദവിയിൽ എത്തിച്ചേർന്നിട്ടും, കോവിന്ദ് ജിയുടെ വിനയം നിറഞ്ഞ വ്യക്തിത്വത്തിനും ലാളിത്യത്തിനും ഒരു മാറ്റവും വന്നില്ല. ഞാൻ ഓർക്കുന്നു, പ്രധാനമന്ത്രി എന്ന നിലയിൽ ഞാൻ രാഷ്ട്രപതി ഭവനിൽ അദ്ദേഹത്തെ കാണാൻ പോകുമ്പോൾ, അദ്ദേഹം പ്രോട്ടോക്കോളിനും അപ്പുറത്തുള്ള കാര്യങ്ങൾ ചെയ്യുമായിരുന്നു. പ്രധാനമന്ത്രിയെ യാത്രയാക്കാൻ അദ്ദേഹം കാറിന്റെ വാതിൽക്കൽ വരെ എത്തുമായിരുന്നു. അങ്ങനെ ചെയ്യരുതെന്ന് ഞാൻ അദ്ദേഹത്തോട് അപേക്ഷിക്കാറുണ്ടായിരുന്നു, എങ്കിലും അവസാനം വരെ അദ്ദേഹം തന്റെ എളിമ ഉപേക്ഷിച്ചില്ല. രാഷ്ട്രപതിയായ ശേഷം, തന്റെ ഗ്രാമമായ പരൗൻഖിൽ പോയപ്പോൾ അദ്ദേഹം തന്റെ അധ്യാപകരുടെ പാദങ്ങളിൽ തൊട്ട് വന്ദിക്കുകയും ആദരവ് പ്രകടിപ്പിക്കുകയും ചെയ്തു. അദ്ദേഹം ഗ്രാമത്തിലെ മണ്ണിൽ തൊട്ടു വന്ദിക്കുകയും അവിടുത്തെ സാധാരണക്കാരോട് നന്ദി പറയുകയും ചെയ്തു. ആ വൈകാരിക രംഗം രാജ്യമാകെ കണ്ടതാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ പെരുമാറ്റം ഓരോ ഇന്ത്യക്കാരനും അഭിമാനം തോന്നുന്ന ഭാരതീയ മൂല്യങ്ങളുടെ ചിത്രമാണ് ലോകത്തിനു മുന്നിൽ അവതരിപ്പിച്ചത്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

നൂറ്റാണ്ടുകൾ നീണ്ട അടിമത്തത്തിൽ, നമ്മുടെ രാജ്യത്തിന് സാമ്പത്തികമായും സാമൂഹികമായും ഒരുപാട് കാര്യങ്ങൾ നഷ്ടപ്പെട്ടു. നമ്മുടെ പൂർവ്വികർ നൂറ്റാണ്ടുകളോളം പോരാടി. മഹാത്മാഗാന്ധി, ബാബാസാഹെബ് അംബേദ്കർ, ജ്യോതിബ ഫൂലെ, സാവിത്രിബായി ഫൂലെ - തുടങ്ങി അനേകം മഹദ്‌വ്യക്തികൾ ഏറ്റവും നിർധനരായവർക്കും പാർശ്വവൽക്കരിക്കപ്പെട്ടവർക്കും പോലും പരമോന്നത പദവിയിൽ എത്താൻ കഴിയുന്ന ഒരു പുതിയ ഇന്ത്യയെക്കുറിച്ച് സ്വപ്നം കണ്ടു. കോവിന്ദ് ജിയെപ്പോലുള്ള വ്യക്തിത്വങ്ങൾ, തങ്ങളുടെ അധ്വാനത്തിലൂടെയും കഴിവിലൂടെയും സ്വന്തം ജീവിതം മാറ്റുക മാത്രമല്ല ചെയ്തത്, നൂറ്റാണ്ടുകൾ പഴക്കമുള്ള ആ സ്വപ്നവും ദർശനവും സാക്ഷാത്കരിക്കുന്നതിൽ പ്രധാന പങ്കുവഹിക്കുകയും ചെയ്തു. ഈ ദിശയിലുള്ള നമ്മുടെ ശ്രമങ്ങൾ തുടരുകയാണ്. ഭാവിയിൽ പ്രതിസന്ധികളിൽ തളരാത്ത, ബുദ്ധിമുട്ടുകൾക്ക് മുന്നിൽ നിരാശരാകാത്ത, മറിച്ച് കഠിനാധ്വാനത്തിലൂടെ ഏതൊരു ലക്ഷ്യവും എളുപ്പമാക്കാനുള്ള ധൈര്യമുള്ള കോവിന്ദ് ജിയെപ്പോലുള്ള നിരവധി യുവാക്കളെ നമുക്ക് ആവശ്യമുണ്ട്. ഈ മാറ്റം ശക്തമായ ഒരു ഇന്ത്യ കെട്ടിപ്പടുക്കുക എന്ന സങ്കല്പത്തെ പൂർത്തീകരിക്കും. ഇവിടെ നിന്നായിരിക്കും സ്വാശ്രയവും വികസിതവുമായ ഭാരതത്തിലേക്കുള്ള പാത ഉയർന്നുവരുന്നത്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

ഇത്തരമൊരു യുവശക്തിയെ കെട്ടിപ്പടുക്കുന്നതിന് കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥ വലിയൊരു പ്രചോദന സ്രോതസ്സായി മാറും.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

തന്റെ ആത്മകഥയിൽ, മൊറാർജി ദേശായിയുമായുള്ള തന്റെ അനുഭവങ്ങളെക്കുറിച്ചും കോവിന്ദ് ജി വിശദമായി വിവരിച്ചിട്ടുണ്ട്. അദ്ദേഹത്തിനുള്ളിലുണ്ടായിരുന്ന രാജ്യസേവന മനോഭാവവും മൊറാർജി ഭായിക്കൊപ്പം പ്രവർത്തിച്ചതിലൂടെ അദ്ദേഹത്തിന് ലഭിച്ച പാഠങ്ങളും പാതയും - കോവിന്ദ് ജി രാഷ്ട്രീയത്തെയും സാമൂഹിക സേവനത്തെയും തന്റെ മാർ​ഗമാക്കി മാറ്റി. അദ്ദേഹം തന്റെ കർത്തവ്യങ്ങളിൽ പ്രതിജ്ഞാബദ്ധനായി നിലകൊണ്ടു. സേവനത്തെ അദ്ദേഹം തന്റെ ലക്ഷ്യമാക്കി. പാർലമെന്റിലെ അദ്ദേഹത്തിന്റെ കാലാവധി ഇതിന് തെളിവാണ്. ഗവർണർ എന്ന നിലയിലും അദ്ദേഹം മാതൃക കാട്ടി. രാഷ്ട്രപതി എന്ന നിലയിലും ഇതേ സമർപ്പണബോധം നമ്മൾ കണ്ടതാണ്. രാഷ്ട്രപതി എന്ന പരമോന്നത പദവിയിൽ നിന്ന് വിരമിച്ച ശേഷവും അദ്ദേഹം വിശ്രമിച്ചിട്ടില്ല. 'ഒരു രാജ്യം, ഒരു തിരഞ്ഞെടുപ്പ്' എന്ന പ്രധാന വിഷയത്തിൽ അദ്ദേഹം ഇപ്പോഴും പ്രവർത്തിച്ചുവരികയാണ്. അദ്ദേഹം രാജ്യത്തെ ഉണർത്തുകയാണ്. ഇതിനൊരു പരിഹാരമുണ്ടാകുന്നത് ഇന്ത്യൻ ജനാധിപത്യത്തിൽ പുതിയൊരു അധ്യായത്തിന് തുടക്കം കുറിക്കാൻ കഴിയുന്ന ഒരു വിഷയമാണിത്. കോവിന്ദ് ജിയുടെ സമർപ്പണബോധത്തിൽ നിന്നും സേവനമനോഭാവത്തിൽ നിന്നും രാജ്യത്തെ ജനങ്ങൾക്ക് ഒരുപാട് കാര്യങ്ങൾ പഠിക്കാനുണ്ടെന്ന് ഞാൻ വിശ്വസിക്കുന്നു.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

സാമൂഹിക ജീവിതത്തിൽ സജീവമായിരിക്കുമ്പോൾ തന്നെ ഒരു ആത്മകഥയ്ക്കായി സമയം കണ്ടെത്തുക എന്നത് വളരെ ബുദ്ധിമുട്ടുള്ള കാര്യമാണ്. കോവിന്ദ് ജി നമുക്കെല്ലാവർക്കും വേണ്ടി ഈ പ്രവൃത്തി ചെയ്തിരിക്കുകയാണ്; കാരണം, പാവപ്പെട്ടവരും പാർശ്വവൽക്കരിക്കപ്പെട്ടവരുമായ ആളുകൾക്ക് സ്വന്തം ജീവിതത്തിന്റെ പ്രതിഫലനങ്ങൾ കാണാൻ കഴിയുന്ന ഒരുപാട് കാര്യങ്ങൾ അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതത്തിലുണ്ട്. പ്രയാസകരമായ സാഹചര്യങ്ങളിൽ പോലും ഒരു സാധാരണ കുടുംബം ജീവിതത്തിന്റെ വിശുദ്ധിയോടും സത്യസന്ധതയോടും എങ്ങനെ ഒത്തുതീർപ്പുണ്ടാക്കുന്നില്ല എന്നത്; ആ ആദർശങ്ങൾ എങ്ങനെ പിന്നീട് നമ്മുടെ ജീവിതത്തിന്റെ അടിത്തറയായി മാറുന്നു എന്നത്; കഷ്ടപ്പാടുകളുടെ കാലത്തെ മൂല്യങ്ങൾ ജീവിതത്തിലുടനീളം നമുക്ക് എങ്ങനെ വെളിച്ചം തരുന്നു എന്നത്; ഈ വിശുദ്ധി ദേശസേവനത്തിന് നമുക്ക് എങ്ങനെ കരുത്ത് നൽകുന്നു എന്നത് - വ്യത്യസ്ത പദവികളിൽ ഉത്തരവാദിത്തങ്ങൾ നിർവ്വഹിക്കുമ്പോഴും, കോവിന്ദ് ജി തുടർച്ചയായി ഈ പ്രചോദനമാണ് സമൂഹത്തിന് നൽകിയിട്ടുള്ളത്.

സുഹൃത്തുക്കളേ,

കോവിന്ദ് ജിയുടെ ആത്മകഥ അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതത്തിലെ ഓർമ്മകൾ മാത്രമല്ല, നമ്മുടെ ജനാധിപത്യത്തിന്റെ സുപ്രധാനമായ ഓർമ്മകളെക്കൂടി കാത്തുസൂക്ഷിക്കുമെന്ന് എനിക്ക് ഉറപ്പുണ്ട്. ഒരിക്കൽക്കൂടി, അദ്ദേഹത്തിന്റെ ആത്മകഥയ്ക്ക് ഞാൻ എൻ്റെ എല്ലാവിധ ആശംസകളും നേരുന്നു. കൂടാതെ പ്രധാനമായും പുതിയ തലമുറയോട് എനിക്ക് പറയാനുള്ളത് - ഇത് റീലുകളുടെ കാലമാണ്, സമൂഹമാധ്യമ ഇൻഫ്ലുവൻസർമാർ നിങ്ങളെ പല വഴികളിലേക്ക് വലിച്ചിഴയ്ക്കുന്നു. കുറുക്കുവഴികളുടെ ഈ യുഗത്തിൽ ഒരു കാര്യം ഓർക്കുക. റെയിൽവേ സ്റ്റേഷനുകളിൽ എഴുതിവെച്ചിരിക്കുന്നത് കാണാം - ചില ആളുകൾ മേൽപ്പാലം ഉപയോഗിക്കുന്നതിന് പകരം റെയിൽവേ ട്രാക്കുകളിലൂടെ ചാടിക്കടക്കാറുണ്ട്. അവിടെ ഇങ്ങനെ എഴുതിവെച്ചിട്ടുണ്ട്: "കുറുക്കുവഴി നിങ്ങളുടെ ജീവിതത്തെത്തന്നെ ചെറുതാക്കിക്കളയും". നിങ്ങൾ കുറുക്കുവഴികളിലൂടെ പോകാൻ ആഗ്രഹിക്കുന്നവരാണെങ്കിൽപ്പോലും, യുവാക്കളോട് എനിക്ക് അഭ്യർത്ഥിക്കാനുള്ളത് - നിങ്ങൾ ആരാധിക്കുന്ന വ്യക്തികളുടെ ആത്മകഥകൾ വായിക്കുക. ചരിത്ര സംഭവങ്ങളെ വേറൊരു രീതിയിൽ മനസ്സിലാക്കാനുള്ള അവസരം ആത്മകഥകൾ നൽകുന്നു. അവ ചരിത്രത്തോട് ചേർന്നുനിൽക്കുന്നവയാണ്. അതുകൊണ്ടാണ് കോവിന്ദ് ജിയുടെ ഈ ശ്രമം ഭാവി തലമുറയ്ക്ക്, പ്രത്യേകിച്ച് യുവാക്കൾക്ക്, പ്രയോജനപ്പെടണമെന്ന് ഞാൻ ആഗ്രഹിക്കുന്നത്. ഏവർക്കും എൻ്റെ അഭിനന്ദനങ്ങൾ. വളരെ നന്ദി.