NDA's 6 sutras for development of Bihar-for people: Education, Employment, Medical facilities; for state: Power, Water, Roads: PM
If hitting out at Modi develops Bihar, then I'm ready to take all allegations: PM Modi
For NDA biggest of the grounds seem minute while for 'Mahaswarthbandhan' even a small pandal becomes huge: PM Modi
People of Bihar do not spare the one's who betrays the state. Nitish Kumar would be wiped off in the elections: PM
Lies spread by Nitish & Lalu are unveiling the truth of reservation: PM Modi
People of Bihar would press the button of development. They would vote for the NDA: PM
The term 'Darbhanga Module' was used after blasts in Mumbai & Pune, innocent policewoman had to face consequences: PM

मंच पर विराजमान यहाँ के सभी वरिष्ठ नेतागण। चुनाव में कुशेश्वर स्थान से लोजपा के उम्मीदवार धनंजय कुमार, लोजपा के उम्मीदवार विनोद साहनी, बेनीपुर से भाजपा के उम्मीदवार गोपाल जी ठाकुर, अलीनगर से भाजपा के उम्मीदवार लाल जी यादव, दरभंगा ग्रामीण से हम पार्टी के उम्मीदवार नौशाद आलम जी, दरभंगा नगर से भाजपा के उम्मीदवार संजय जी, हयागढ़ से लोजपा के उम्मीदवार आर। के। चौधरी जी, बहादूरपुर से भाजपा के उम्मीदवार हरीश साहनी, और केवटी से भाजपा के उम्मीदवार अशोक यादव, झाले से भाजपा के उम्मीदवार द्विवेश कुमार मिश्रा, विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

दरभंगा के ई पावन मिथिला भूमि के नमन करै छी। बाबा कुशेश्वर के ई पावन धरती पर आई के गौरवान्वित महसूस काय रहल छी। दरभंगा की जो पहचान है – पग-पग पोखर पान मखान, सरस बोल मुस्की मुस्कान; विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, ललित नगर मिथिला ठीक। आप सबके दिल से अभिनंदन करै छी।

आज मैं सबसे पहले अपने प्रिय मित्र कीर्ति आज़ाद के खिलाफ़ शिकायत करना चाहता हूँ। मेरी शिकायत ये है कि जब कीर्ति स्वयं चुनाव लड़ रहे थे, मैं लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था, तब तो आधी भीड़ भी नहीं थी और आज क्या कमाल कर दिया आप लोगों ने। जहाँ भी मेरी नज़र पहुँचती है, लोग ही लोग नज़र आते हैं। दरभंगा का मैदान भी छोटा पड़ गया है, ये चुनाव ऐसा है कि एनडीए वालों के लिए मैदान छोटा पड़ता है और महास्वार्थबंधन वालों के लिए पंडाल भी बड़ा हो जाता है।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव अभियान का ये मेरा आखिरी कार्यक्रम है। पिछली बार मैं जब दरभंगा आया था, समय-सीमा के कारण 12-15 मिनट ही बोल पाया था, मेरे मन में भी कसक थी कि जिस मिथिला की भूमि को अटल जी इतना प्यार करते थे, वहां इतनी कम देर लेकिन आज मैं आपसे जी भर कर मिलने आया हूँ। मुझे बिहार के हर कोने में जाने और एक से बढ़कर एक रैलियों को संबोधित करने का अवसर मिला। इसे क्या कहें, चुनाव सभा, जन सभा, रैली, रैला कहें, मुझे तो लगता है कि ये मेला है, परिवर्तन का मेला है।

दिल्ली में बैठकर पॉलिटिकल पंडित हिसाब लगाते हैं कि 2% इधर जाएगा तो ये होगा, 2% उधर जाएगा तो ये होगा। पंडित जी, अपने पुराने हिसाब-किताब बंद कर दो, बिहार नया इतिहास लिखने जा रहा है। ये पुराने समीकरण और नई गिनतियाँ अब नहीं चलेंगी। बिहार की जनता ने बिहार की तो सेवा की है, इस चुनाव के माध्यम से देश की बहुत बड़ी सेवा की है। जातिवाद और संप्रदायवाद का ज़हर हमारे लोकतंत्र में खरोच पैदा कर रहा है लेकिन इस चुनाव में बिहार का नौजवान नेतृत्व कर विकास के मुद्दे पर लड़ रहा है। इस चुनाव के बाद हिन्दुस्तान की सभी पॉलिटिकल पार्टियों को विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसका क्रेडिट बिहार के लोगों को जाता है। इस चुनाव में बिहार का माहौल देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

मैं आज सार्वजनिक रूप से प्रधान देवक के रूप में बिहार के नागरिकों का सर झुका कर अभिनंदन करता हूँ। मैं जहाँ-जहाँ गया, एनडीए के लोग जहाँ-जहाँ गए, बिहार की जनता ने पलकें बिछाकर हम सभी का स्वागत किया, इसलिए मैं आप सभी को सर झुका कर धन्यवाद करता हूँ। दूसरी बात कि पहले के मतदान के सारे रिकॉर्ड बिहार के चार चरणों ने तोड़ दिए, भारी मतदान किया, माओवादियों के बम-बंदूक की धमकी के बावजूद अभूतपूर्व मतदान किया। इससे लोकतंत्र में जो विश्वास बढ़ा है, इसके लिए मैं बिहार की जनता को नमन करता हूँ। तीसरी बात, पहले बिहार में जब भी चुनाव होता था तो ये ख़बर आती थी कि इतने पोलिंग बूथ लूटे गए, इतनी गोलीबारी हुई, इतनी हत्याएं हुईं लेकिन इस बार के शांतिपूर्ण चुनाव के लिए बिहार के मतदाताओं का ह्रदय से अभिनंदन करता हूँ।

भाईयों-बहनों, इस चुनाव में हम विकास का मुद्दा लेकर पहले दिन से चले, लोकसभा के चुनाव में भी हमारा मुद्दा विकास था लेकिन हम आशा करते थे कि जिन्होंने यहाँ 60 साल राज किया, मैडम सोनिया जी ने 35 साल राज किया, 15 साल तक लालू जी और 10 साल तक नीतीश जी ने राज किया; ये हमारे साथ विकास के मुद्दों पर चर्चा करते, बिहार की बर्बादी के कारण और बिहार से नौजवानों के पलायन का जवाब देते लेकिन अभी भी वे 1990 के कालखंड में जी रहे हैं। उन्हें पता नहीं है कि ये 21वीं सदी चल रही है और 1990 में पैदा हुआ बच्चा आज बिहार का भाग्य बदलने को लालायित है।

दो महीने से चुनाव का अभियान चल रहा है लेकिन लालू जी हो या नीतीश जी या मैडम सोनिया जी, ये लोग बिहार के विकास पर कुछ भी नहीं बोलते। बिहार के भविष्य की किसी योजना के बारे में बात नहीं करते। 25 साल इन्होंने सरकार चलाई, ये कोई कम समय नहीं होता। एक बालक में भी 25 साल के बाद अपने माँ-बाप का पेट भरने की ताक़त आ जाती है। आप मुझे बताईये, 25 साल की इनकी सरकार में किसी का भी कोई भला हुआ? मेरी सरकार को अभी 25 महीने नहीं हुए हैं और ये लोग मेरा हिसाब मांग रहे हैं। ख़ुद का 25 साल का हिसाब देने का तैयार नहीं हैं; और हमसे हिसाब मांग रहे हैं।

चुनाव लोकतंत्र का पर्व होता है और यह पर्व लोकतंत्र को ताक़तवर बनाता है। सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात और अपनी नीतियां बतानी होती हैं और जो सरकार में हैं उन्हें अपना हिसाब देना होता है। 2019 में जब मैं लोकसभा चुनाव के लिए आपसे वोट मांगने आऊंगा, तो मेरा फ़र्ज बनता है कि मैं आपको अपने 5 सालों का हिसाब दूँ और आपका हक़ बनता है कि आप मुझसे हिसाब मांगें। लेकिन इन लोगों को देखो, इन्हें मोदी पर कीचड़ उछालने के सिवा और कोई काम ही नहीं है। रोज नए-नए आरोप और गालियां गढ़ी जाती है, क्या इससे बिहार का भला होगा क्या? लालू जी, नीतीश जी, अगर मोदी पर आरोप लगाने से या कीचड़ उछालने से बिहार का भला होता है तो मैं मौजूद हूँ, आपको जो कहना है कहिये। बिहार का भला हो तो मैं ये झेलने के लिए तैयार हूँ।

मेरा जीवन बिहार के काम आए, इससे बड़ा भाग्य मेरा क्या हो सकता है। लालू जी, नीतीश जी, कान खोलकर सुन लीजिये, अहंकार ने आपके आँखों पर ऐसी पट्टी बांध दी है कि आप देख नहीं पाओगे, आप जितना कीचड़ उछालोगे, कमाल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और एक बात जो बाहर नहीं आई है, मुझे भी आश्चर्य लगा कि हर चरण के बाद 12-15 पोलिंग बूथ ऐसे थे जहाँ मतदान के बाद लालू जी और नीतीश जी के कार्यकर्ताओं के बीच झगड़े हुए, कहीं हाथापाई हुई, धमकियाँ हुई; मतदान पूरा होने के बाद अगर ये तुरंत लड़ना शुरू कर देते हैं तो आगे क्या होगा, आप समझ सकते हैं।

पिछले दो महीनों से चुनाव अभियान चल रहा है लेकिन क्या आपने लालू जी, नीतीश जी और राहुल जी को एक साथ मंच पर देखा, पत्रकार परिषद् में देखा, कार्यकर्ता की मीटिंग में देखा? आप उनसे सवाल पूछिये, उनके दरबारी तो पूछेंगे नहीं। जो तीन लोग चुनावी अभियान में एकसाथ नहीं आए, वो बाद में क्या साथ आएंगे और साथ में चलेंगे। जिन्हें ख़ुद पर विश्वास नहीं है, वो आपका भला नहीं कर सकते।

मुझे अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला, उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने उनसे पूछा कि क्या हमारा मुख्यमंत्री नहीं बन सकता है, क्या आपका बेटा नहीं बन सकता है, लालू जी के मुंह में पानी आ गया, उनको ख़ुशी होने लगी कि हाँ, संभावना दिखती है; दूसरे ने पूछा कि अगर चुनाव हार जाते हैं तो विपक्ष का नेता कौन बनेगा; इस पर लालू जी ने जवाब दिया कि मैंने तो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर समर्थन देने का वाद किया है न कि विपक्ष के नेता बनने का वादा। लालू जी ने कहा कि चुनाव हारने पर तो विपक्ष का नेता हमारा बेटा बनेगा। मैं सार्वजनिक रूप से मैं लालू जी से पूछना चाहता हूँ कि आप बिहार की जनता को बताओ कि विपक्ष का नेता कौन होगा, लालू जी का बेटा होगा या नीतीश बाबू होंगे, क्योंकि आपका चुनाव हारना तय है। ये मेरी मांग है आपसे।

मैं आपको एक पुरानी घटना याद कराना चाहता हूँ। जब मुंबई में बम धमाके हुए तो हमारे देश में आतंकी दुनिया के लिए एक शब्द चल पड़ा था - दरभंगा मॉड्युल, और कारण ये थे कि कुछ लोग यहाँ बैठ कर हिन्दुस्तान में आतंकवाद फ़ैलाने का षड़यंत्र रच रहे हैं। यहाँ पर एक जाबांज पुलिस अधिकारी महिला थी, दलित कन्या थी, उसने हिन्दुस्तान के निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकवादी गतिविधि करने वाले लोगों की कार ढूंढने की कोशिश की। इस महास्वार्थबंधन के निकट के नेता के घर तक आतंकवाद के तार जाने लगे थे, तब सरकार में बैठे लोगों ने आतंकवाद से जुड़े नेताओं पर कदम नहीं उठाया लेकिन उस पुलिस अफसर को यहाँ से जाने और बिहार छोड़ने के लिए मज़बूर कर दिया। आप देश की रक्षा के साथ समझौता करने वाले और आतंकवादियों पर कृपा करने वाले लोगों को पटना में सरकार में बिठाएंगे क्या?

बिहार का भाग्य बदलने के लिए भाजपा, एनडीए का आप समर्थन करें, इसके लिए मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। भाईयों-बहनों, मेरे पास एक जानकारी है, सही है या गलत पता नहीं क्योंकि समय के अभाव के कारण मैं वेरीफाई नहीं कर पाया, 1990 में लालू जी की सरकार ने बिहार के लोक सेवा आयोग से मैथिलि भाषा को निकाल दिया था, लालू जी ने मैथिलि भाषा का अपमान किया लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में एनडीए की सरकार बनने के तुरंत बाद 2002 में संविधान की 8वीं सूची में इसे स्थान दिया गया। हम अपमानित करना नहीं बल्कि सम्मानित करना जानते हैं।  

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था जिसकी न कोई फाइल थी, न बजट था लेकिन बिहार के प्रति मेरा यह प्यार है, बिहार के लिए हमें कुछ करना है, हमने निर्णय लिया इसे देने का। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने और यहाँ के लोगों का जीवन बदलने की ताकत रखता है। विकास के बिना बिहार की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। बिहार एक ज़माने में हिन्दुस्तान का सिरमौर हुआ करता था लेकिन 25 साल में जंगलराज और जंतर-मंतर ने बिहार को बर्बाद कर दिया। इन दोनों की जुगलबंदी वो भी बर्बाद कर देगी जो कुछ बिहार में अब बचा हुआ है।

कोई स्कूटर अगर छोटे से गड्ढ़े में फंस जाए तो 3-4 लोग निकालें तो निकल जाता है लेकिन अगर स्कूटर कुएं में गिरा हो तो उसको निकालने के लिए ट्रेक्टर की ज़रुरत होती है। 25 साल की इनकी सरकार ने बिहार को ऐसे गड्ढ़े में डाल दिया है जिसे निकालने के लिए दो-दो इंजन की जरुरत है। पटना और दिल्ली के दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा। एक इंजन बिहार में जो नई सरकार बनेगी वो और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार जो आपने बनाई है।

भाईयों-बहनों, हम चुनाव के मैदान में विकास के मुद्दे को लेकर आए थे। लालू जी और नीतीश जी के पास विकास का ‘व’ बोलने की कोई जगह नहीं है और इसलिए उन्होंने चुनाव को जातिवाद के रंग में रंगने का नाटक किया। आरक्षण को लेकर महीने भर चीखते-चिल्लाते रहे, दिल्ली में उनके दरबारी भी इसी बात को बढ़ाते रहे। इन्होंने एक काल्पनिक भय पैदा किया और आरक्षण के नाम पर हौवा खड़ा किया। उनकी हर बात में बस आरक्षण था। जब एक दिन मुझे लगा कि इनका गुब्बारा बहुत बड़ा हो गया है तो मैंने एक छोटी सी सुई लगा दी और उनका पूरा गुब्बारा नीचे आ गया। उनकी सारी पोल खुल गई है।

यही लालू जी और नीतीश जी ने आरक्षण पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उन्हें चिंता अपनी कुर्सी की थी और जब मैंने उनका वीडियो निकाल दिया तो पिछले एक हफ़्ते से आरक्षण का नाम लेना भूल गए। बिजली की तो वो कोई बात ही नहीं करते क्योंकि उन्हें डर है कि अगर बोल दिया तो लोग उनसे हिसाब मांगेंगे क्योंकि 2010 में नीतीश जी ने कहा था कि अगर घर-घर बिजली नहीं पहुंचाऊंगा तो 2015 में अगले चुनाव में वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली नहीं तो वोट नहीं, ऐसे उन्होंने कहा था कि नहीं? उन्होंने अपना वादा तोड़ा है, आपसे धोखा किया है। जो जनता से धोखा कर सकते हैं, जनता उन्हें कभी स्वीकार नहीं करती।

बिहार की जनता जब देती है तो छप्पर फाड़ कर देती है; कांग्रेस को 35 साल तक दिया और जब लेती है तो चुन-चुन कर साफ़ कर देती है। जब लालू जी को दिया तो जी भर दिया लेकिन जब लालू जी पर गुस्सा आया तो फ़िर किसी को बचने नहीं दिया। अब बारी आई अहंकार की, बिहार अहंकार को बर्दाश्त नहीं कर सकता और अब अहंकार की विदाई की बारी है। नीतीश बाबू ने कहा था कि अगर किसी का भ्रष्टाचार पकड़ा गया तो उसकी मिल्कियत जब्त कर ली जाएगी और उसके घर में स्कूल खोला जाएगा। नीतीश जी रोज इस बात का ढोल पीटते थे। लोगों को क्यों मूर्ख बना रहे हैं? जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए। ये अभी से ऐसा काम कर रहे हैं तो चुनाव के बाद क्या करेंगे। बिहार बेचने का एडवांस लिया जा रहा है। अब नीतीश बाबू बताएं कि उनका घर कब्ज़े में किया क्या, उनके घर में स्कूल खोला?

भाईयों-बहनों, बिहार में आप लोगों के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – पढ़ाई, कमाई और दवाई। बिहार के गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी एवं सस्ती शिक्षा मिलनी चाहिए। हर मां अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है, लेकिन बिहार में पढ़ाई की इतनी हालत खराब है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए माँ-बाप को अपनी ज़मीन गिरवी रखनी पड़ती है। ये हमें शोभा देता है क्या? इसलिए मेरा संकल्प है, बिहार के बच्चों को सस्ती एवं अच्छी पढ़ाई। मेरा दूसरा सपना है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में नौजवान को अपना राज्य और अपने माँ-बाप को छोड़ना पड़ता है। बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए और ये पलायन बंद होना चाहिए। इसलिए मेरा दूसरा संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए कमाई। मेरा तीसरा सपना है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, दवाखाना और डॉक्टर होना चाहिए।

बिहार राज्य के लिए तीन कार्यक्रम है - बिजली, पानी एवं सड़क। बिजली आएगी तो कारखाने लगेंगे, और इससे रोजगार मिलेगा। बिजली के लिए अकेले दरभंगा को मैंने पौने 400 करोड़ आवंटित कर दिये हैं। बिहार को जो सौभाग्य मिला है, वो किसी और राज्य को नहीं मिला है; बिहार की दो ताक़त है - बिहार का पानी और बिहार की जवानी। ये दोनों पूरे हिन्दुस्तान का भाग्य बदल सकती हैं। किसान को अगर पानी मिल जाए तो वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। हमारा दूसरा संकल्प है - खेतों में पानी, उद्योगों को पानी और पीने का पानी पहुँचाना। तीसरा मेरा संकल्प है – सड़क; बिहार में सडकों का जाल हो। गाँव ज़िले से, ज़िला राज्य से, राज्य दिल्ली से जुड़ जाए, ऐसा नेटवर्क बनाना है ताकि बिहार का सीधा मार्ग विकास की ओर चल पड़े, इन कामों को लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।

विकास ही एक मंत्र है, विकास के लिए मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। मैं आपसे वोट विकास के लिए मांगता हूँ। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और अब पांचवे चरण में आप सारे रिकॉर्ड तोड़ दोगे न? आप सब दस-दस परिवारों से वोट कराओ, भाजपा, एनडीए को वोट कराओ।  मेरे साथ बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!        

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಬಿಡುಗಡೆ ಸಮಾರಂಭ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ
August 12, 2026
ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್‌ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಅವಕಾಶ ನಮಗೆ ದೊರೆತಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗಲು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ರಾಷ್ಟ್ರದ ಪ್ರಗತಿಗೆ ಮುಡಿಪಾಗಿಟ್ಟ ಜೀವನವನ್ನು ಕೋವಿಂದ್‌ ಅವರ ಪ್ರಯಾಣವು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ನನ್ನ ಸುದೀರ್ಘ ಪರಿಚಯ ಮತ್ತು ನನ್ನ ಬಗ್ಗೆ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ಆತ್ಮೀಯತೆ ನನ್ನ ದೊಡ್ಡ ಆಸ್ತಿಯಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕಡುಬಡವರು ಮತ್ತು ಅವಕಾಶ ವಂಚಿತರು ಉನ್ನತ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ತಲುಪುವ ಅವಕಾಶ ಪಡೆಯಬಲ್ಲ ನವ ಭಾರತವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುವ ಕನಸನ್ನು ಮಹಾತ್ಮಾ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾ ಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ ಮತ್ತು ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ ಅವರು ಕಂಡಿದ್ದರು: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರದ್ಧೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದಿಂದ ಕೇವಲ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸಿಕೊಂಡಿರುವುದಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಕನಸು ಮತ್ತು ಆಶಯವನ್ನು ನನಸು ಮಾಡುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ; ಅವರು 'ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆ' ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದರ ನಿರ್ಣಯವು ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಲಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ

ನಮ್ಮ ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಲೋಕಸಭೆ ಸ್ಪೀಕರ್ ಓಂ ಬಿರ್ಲಾ ಜಿ, ಶ್ರೀಮತಿ ಸವಿತಾ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಸಮಾರಂಭದಲ್ಲಿ ಉಪಸ್ಥಿತರಿರುವ ಎಲ್ಲಾ ಹಿರಿಯ ಗಣ್ಯರೆ - ನಾನು ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಉಲ್ಲೇಖಿಸಲು ಸಾಧ್ಯವಾಗದಿರಬಹುದು, ಆದರೆ ಇದು ಒಂದು ಕುಟುಂಬದ ಸಮಾರಂಭದಂತೆ ಭಾಸವಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ನನಗೆ ತುಂಬಾ ಸಂತೋಷ ನೀಡುತ್ತಿದೆ.

ಸಹೋದರ ಸಹೋದರಿಯರೆ,

ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಸಂದರ್ಭ ನಮಗಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗುವ ಅದೃಷ್ಟ ನನಗೂ ಸಿಕ್ಕಿದೆ ಎಂಬುದರಿಂದ ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗೆ ನನಗೆ ದೀರ್ಘ ಒಡನಾಟ, ಅವರನ್ನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶ, ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ಅವರ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಪಡೆಯುವ ಅವಕಾಶ, ಇದೆಲ್ಲದರ ಜತೆಗೆ, ನನ್ನ ಮೇಲಿನ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ವಾತ್ಸಲ್ಯ - ಇದು ನನ್ನ ಜೀವನದ ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ನಿಧಿಯಾಗಿದೆ. ಅವರ ಜೀವನದ ಬಗ್ಗೆ ನಾನು ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಂಡಂತೆ, ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಗಳನ್ನು ನಾನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದರಿಂದ, ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆ ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವ ಮತ್ತು ಭಾರತೀಯ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಪರಂಪರೆಯಾಗುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ಪೂರ್ಣ ವಿಶ್ವಾಸದಿಂದ ಹೇಳಬಲ್ಲೆ. ಅವರ ಜೀವನ ಪಯಣ, ಸಮಾಜ ಮತ್ತು ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಅವರ ಕೊಡುಗೆ - ನಾನು ಮಾತನಾಡಲು ತುಂಬಾ ಇದೆ, ಆದರೆ ಪುಸ್ತಕ ಬಿಡುಗಡೆಯಲ್ಲಿ "ಮುನ್ನುಡಿ"ಯನ್ನು ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕು. ಅದರ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲು ನೀವು ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಓದಬೇಕು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನ ಪಯಣವನ್ನು ಅವರ ಸ್ವಂತ ಮಾತುಗಳಲ್ಲೇ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು, ಅವರ ಬರವಣಿಗೆ, ಅವರ ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಓದಲು - ಇದು ಹೊಸ ಪೀಳಿಗೆಗೆ ಕಲಿಯಲು ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯು ಬಹಳಷ್ಟು ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ನಾನು ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರನ್ನು ಹೃತ್ಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕಕ್ಕೆ "ಭಾರತೀಯ ಗಣರಾಜ್ಯದ ವಿಜಯೋತ್ಸವ: ನನ್ನ ಜೀವನ, ನನ್ನ ಹೋರಾಟಗಳು" ಎಂಬ ಅತ್ಯಂತ ಸೂಕ್ತವಾದ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಇದರ ಅರ್ಥವೇನೆಂದರೆ ಜೀವನ ಮತ್ತು ಅದರ ಹೋರಾಟಗಳು ವೈಯಕ್ತಿಕ, ಆದರೆ ಆ ಹೋರಾಟಗಳಿಂದ ಬಂದ ವಿಜಯಗಳು ಭಾರತ ಗಣರಾಜ್ಯಕ್ಕೆ, ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವಕ್ಕೆ ಸೇರಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಜನರು ಯಶಸ್ಸು ಬಂದಾಗ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವೇ ಹೊಗಳಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ, ಕಷ್ಟಗಳು ಬಂದಾಗ ಸಮಾಜವನ್ನು ದೂಷಿಸುತ್ತಾರೆ, ಇದು ಮಾನವ ಸ್ವಭಾವ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ನೋಡುತ್ತೇವೆ. ಆದರೆ ಹೃದಯವು ಉದಾರವಾಗಿದ್ದಾಗ, ಅಲ್ಲಿ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಇದ್ದಾಗ, ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿಯು ಸಮಾಜದಲ್ಲಿ ದೋಷಗಳನ್ನು ಹುಡುಕಲು ಸಮಯ ವ್ಯರ್ಥ ಮಾಡುವುದಿಲ್ಲ. ಅವರು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಹಾದಿಯತ್ತ ಗಮನ ಹರಿಸುತ್ತಾರೆ, ಸಮಾಜವು ತಮ್ಮ ಯಶಸ್ಸಿನ ಸಮಾನ ಪಾಲುದಾರ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆ ಮತ್ತು ಅದರ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ಇದಕ್ಕೆ ಸ್ಪಷ್ಟ ಉದಾಹರಣೆಗಳಾಗಿವೆ. ಕಾನ್ಪುರದ ದೇಹತ್‌ನಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದಲ್ಲಿ ಜನಿಸಿದ ಅವರ ಜೀವನವನ್ನು ನೋಡಿ. ಬೇಸಿಗೆಯ ದಿನದಲ್ಲಿ ಅವರ ಮನೆಗೆ ಬೆಂಕಿ ಹೇಗೆ ಹೊತ್ತಿಕೊಂಡಿತು ಎಂಬುದನ್ನು ಅವರು ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕದಲ್ಲಿ ವಿವರಿಸಿ ಬರೆದಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ತಾಯಿ, ತನ್ನ ಸ್ವಂತ ಸುರಕ್ಷತೆಯನ್ನು ಮರೆತು, ಮನೆಯ ವಸ್ತುಗಳನ್ನು ಉಳಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದರು. ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದ ಆ ತಾಯಿಗೆ, ಪ್ರತಿಯೊಂದು ವಸ್ತುವು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳನ್ನು ಬೆಳೆಸುವ ಸಾಧನವಾಗಿದೆ. ಆ ಪ್ರಯತ್ನದಲ್ಲಿ ಅವರು ಬೆಂಕಿಯ ಜ್ವಾಲೆಗೆ ಸಿಲುಕಿ ನಿಧನರಾದರು. ಊಹಿಸಿ - ಇಷ್ಟು ಚಿಕ್ಕ ವಯಸ್ಸಿನಲ್ಲಿ, ಒಬ್ಬರು ತಾಯಿಯನ್ನು ಈ ರೀತಿ ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುವುದು ಎಷ್ಟು ನೋವಿನಿಂದ ಕೂಡಿರಬೇಕು. ನನ್ನ ತಾಯಿ 100 ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಮೀರಿ ಬದುಕಿ ನನ್ನನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಿದ್ದು ನನ್ನ ಅದೃಷ್ಟ. ಹಾಗಿದ್ದರೂ, ನಾನು ಇನ್ನೂ ಅವರ ಅನುಪಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಅನುಭವಿಸುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ನೋವಿನ ಘಟನೆ ಯಾರನ್ನಾದರೂ ಬೀಳಿಸಬಹುದಿತ್ತು, ಆದರೆ ಅದು ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರನ್ನು ಬಲಶಾಲಿಯನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿತು. ನೆರೆಮನೆಯ ತಾಯಿ ಅವರ ಪಾಲನೆಗೆ ಮುಂದಾದರು. ಇದರಿಂದ ಅವರಿಗೆ ಸಾಮಾಜಿಕ ಏಕತೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರಸ್ಯದ ಬಲ ಅರ್ಥವಾಯಿತು. ಈ ಘಟನೆಯ ನಂತರ, ಅವರ ತಂದೆಯ ಪಾತ್ರ ಇನ್ನಷ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಯಿತು. ಅವರ ತಂದೆ ಕುಟುಂಬವನ್ನು ನಿರ್ವಹಿಸಿದ ರೀತಿ, ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮೌಲ್ಯಗಳನ್ನು ನೀಡುವ ರೀತಿ - ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತನ್ನ ತಂದೆಯನ್ನು ತನ್ನ ನಾಯಕ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಬಾಲ್ಯದ ಹೋರಾಟಗಳ ನಡುವೆ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಮೇಲೇರಲು ಶಿಕ್ಷಣವನ್ನು ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ಕಷ್ಟಪಟ್ಟು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದರು, ಸಂಪನ್ಮೂಲಗಳ ಕೊರತೆಯನ್ನು ದೌರ್ಬಲ್ಯವಾಗಲು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ಜನರು ಆಗ ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಾಗದ ಎತ್ತರವನ್ನು ಅವರು ತಲುಪಿದರು - ಅವರು ಭಾರತದಂತಹ ವಿಶಾಲ ದೇಶದ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದರು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಷ್ಟು ಉನ್ನತ ಹುದ್ದೆ ಏರಿದ ನಂತರವೂ, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ವಿನಮ್ರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವ ಮತ್ತು ಸರಳತೆ ಹಾಗೆಯೇ ಉಳಿಯಿತು. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ನಾನು ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಭವನದಲ್ಲಿ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಲು ಹೋದಾಗ, ಅವರು ಶಿಷ್ಟಾಚಾರ ದಾಟಿ ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರು ಎಂಬುದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯನ್ನು ಬೀಳ್ಕೊಡಲು ಅವರು ಕಾರಿನ ಬಾಗಿಲಿಗೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದರು. ನಾನು ಅವರನ್ನು ಹೀಗೆ ಮಾಡಬೇಡಿ ಎಂದು ವಿನಂತಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಅವರು ಕೊನೆಯವರೆಗೂ ತಮ್ಮ ವಿನಮ್ರತೆಯನ್ನು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದ ನಂತರ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಗ್ರಾಮವಾದ ಪರೌಂಖ್‌ಗೆ ಹೋದಾಗ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಶಿಕ್ಷಕರ ಪಾದಗಳನ್ನು ಮುಟ್ಟಿ ಗೌರವ ಸಲ್ಲಿಸಿದರು. ಅವರು ಹಳ್ಳಿಯ ಮಣ್ಣಿಗೆ ನಮಸ್ಕರಿಸಿ ಸಾಮಾನ್ಯ ಜನರಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದ ಅರ್ಪಿಸಿದರು. ಇಡೀ ದೇಶವು ಆ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ದೃಶ್ಯವನ್ನು ಕಂಡಿತು. ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಯು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನು ಹೆಮ್ಮೆಪಡುವ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ಜಗತ್ತಿಗೆ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಿತು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲದ ಗುಲಾಮಗಿರಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ದೇಶವು ಆರ್ಥಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬಹಳಷ್ಟು ಕಳೆದುಕೊಂಡಿತು. ನಮ್ಮ ಪೂರ್ವಜರು ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲ ಹೋರಾಡಿದರು. ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ, ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ - ಬಡವರು ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ನಿರ್ಲಕ್ಷಿತರು ಸಹ ಶಿಖರವನ್ನು ತಲುಪಬಹುದಾದ ನವ ಭಾರತ ಕಟ್ಟುವ ಕನಸು ಕಂಡ ಅನೇಕ ಮಹಾನ್ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರಮ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದ ಮೂಲಕ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಆ ಕನಸು ಮತ್ತು ದೃಷ್ಟಿಕೋನವನ್ನು ನನಸಾಗಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಈ ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿವೆ. ಭವಿಷ್ಯದಲ್ಲಿ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ಅನೇಕ ಯುವಕರು ನಮಗೆ ಬೇಕಾಗಿದ್ದಾರೆ, ಅವರು ತೊಂದರೆಗಳಿಂದ ಸೋಲುವುದಿಲ್ಲ, ಕಷ್ಟಗಳ ಮುಂದೆ ಹತಾಶರಾಗುವುದಿಲ್ಲ, ಆದರೆ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ಮೂಲಕ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಗುರಿಯನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುವ ಧೈರ್ಯ ಹೊಂದಿರುತ್ತಾರೆ. ಈ ಬದಲಾವಣೆಯು ಬಲಿಷ್ಠ ಭಾರತ ನಿರ್ಮಿಸುವ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಪೂರೈಸುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿಂದ ಸ್ವಾವಲಂಬಿ ಮತ್ತು ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ದಾರಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಅಂತಹ ಯುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲು, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯ ಪ್ರಮುಖ ಸೆಲೆಯಾಗಬಹುದು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ತಮ್ಮ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ಮೊರಾರ್ಜಿ ದೇಸಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ತಮ್ಮ ಒಡನಾಟ, ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಸುವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ವಿವರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಅವರೊಳಗಿನ ಮನೋಭಾವ, ಮೊರಾರ್ಜಿ ಭಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವ ಮೂಲಕ ಅವರು ಪಡೆದ ಕಲಿಕೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಗ - ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ರಾಜಕೀಯ ಮತ್ತು ಸಮಾಜ ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯಗಳಿಗೆ ಸಮರ್ಪಿತರಾಗಿದ್ದರು. ಅವರು ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಗುರಿಯಾಗಿಸಿಕೊಂಡರು. ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಅವರ ಅವಧಿ ಇದಕ್ಕೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗಿದೆ. ರಾಜ್ಯಪಾಲರಾಗಿಯೂ ಅವರು ಒಂದು ಉದಾಹರಣೆ ನೀಡಿದರು. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿಯೂ ನಾವು ಅವರ ಅದೇ ಸಮರ್ಪಣೆಯನ್ನು ಕಂಡಿದ್ದೇವೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಗಳ ಅತ್ಯುನ್ನತ ಹುದ್ದೆಯಿಂದ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ ಅವರು ವಿಶ್ರಾಂತಿ ಪಡೆಯಲಿಲ್ಲ. ಅವರು ಇನ್ನೂ ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆಯಂತಹ ಪ್ರಮುಖ ವಿಷಯಗಳ ಮೇಲೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅವರು ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ಜಾಗೃತಗೊಳಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದು ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಆರಂಭಿಸಬಹುದಾದ ವಿಷಯವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಸಮರ್ಪಣೆ ಮತ್ತು ಸೇವಾ ಮನೋಭಾವದಿಂದ ದೇಶದ ಜನರು ಬಹಳಷ್ಟು ಕಲಿಯಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ನಂಬುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಸಾಮಾಜಿಕ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವುದು, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ಸಮಯವನ್ನು ಕಂಡುಕೊಳ್ಳುವುದು ತುಂಬಾ ಕಷ್ಟ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಈ ಕೆಲಸವನ್ನು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗಾಗಿ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಅವರ ಜೀವನವು ಬಡ ಮತ್ತು ಸೌಲಭ್ಯವಂಚಿತ ಹಿನ್ನೆಲೆಯ ಜನರು ತಮ್ಮ ಸ್ವಂತ ಜೀವನದ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಗಳನ್ನು ನೋಡಬಹುದಾದ ಬಹಳಷ್ಟು ವಿಷಯಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿದೆ. ಕಠಿಣ ಸಂದರ್ಭಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬವು ಜೀವನದ ಶುದ್ಧತೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆಯೊಂದಿಗೆ ಹೇಗೆ ರಾಜಿ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದಿಲ್ಲ. ಆ ಆದರ್ಶಗಳು ನಂತರ ನಮ್ಮ ಜೀವನದ ಅಡಿಪಾಯವಾಗುತ್ತವೆ. ಕಠಿಣ ಸಮಯದ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಜೀವನದುದ್ದಕ್ಕೂ ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ಬೆಳಕನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ. ಈ ಪರಿಶುದ್ಧತೆಯು ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ದೇಶ ಸೇವೆಗೆ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ವಿವಿಧ ಸ್ಥಾನಗಳಲ್ಲಿ ಜವಾಬ್ದಾರಿಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸುವಾಗ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಈ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯು ಅವರ ಜೀವನದ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದ ಪ್ರಮುಖ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಸಹ ಸಂರಕ್ಷಿಸುತ್ತದೆ ಎಂಬ ವಿಶ್ವಾಸ ನನಗಿದೆ. ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಹೊರತಂದ ಅವರಿಗೆ ನನ್ನ ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ನಾನು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಪೀಳಿಗೆಯನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ಇದು ರೀಲ್‌ಗಳ ಯುಗ, ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳ ಪ್ರಭಾವಿಗಳು ನಿಮ್ಮನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ಅಲ್ಲಿಗೆ ಎಳೆಯುತ್ತಾರೆ. ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಈ ಯುಗದಲ್ಲಿ ಒಂದು ವಿಷಯವನ್ನು ನೆನಪಿಡಿ. ರೈಲ್ವೆ ನಿಲ್ದಾಣಗಳಲ್ಲಿ ಇದನ್ನು ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ - ಕೆಲವು ಜನರು ಸೇತುವೆ ಬಳಸುವ ಬದಲು ಹಳಿಗಳ ಮೇಲೆ ಹಾರುತ್ತಾರೆ. ಅಲ್ಲಿ ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ: ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್ ನಿಮ್ಮ ದೂರವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ನೀವು ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಹೋಗಲು ಬಯಸಿದ್ದರೂ ಸಹ, ನಾನು ಯುವಕರನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ನೀವೇ ಮೆಚ್ಚುವವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳನ್ನು ಓದಿ. ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳು ಇತಿಹಾಸದ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವಿಭಿನ್ನ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶವನ್ನು ನಿಮಗೆ ನೀಡುತ್ತವೆ. ಅವು ಇತಿಹಾಸಕ್ಕೆ ಹತ್ತಿರದಲ್ಲಿವೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರ ಪ್ರಯತ್ನವು ಭವಿಷ್ಯದ ಪೀಳಿಗೆಗೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವಾಗಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು. ತುಂಬು ಧನ್ಯವಾದಗಳು.