नमोश्कार! खुलुम्बाई!
मा खोबोर? माघ बिहु आरु माघ दोमाशीर हुभेच्छा आरु मरोम जोनाइशु।
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्र में मेरे सहयोगी सर्बानंद सोनोवाल जी, पवित्रा मार्गरीटा जी, असम विधानसभा के अध्यक्ष बिश्वोजीत दोईमारी जी, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के चीफ एक्जिक्यूटिव मेंबर हाग्रामा मोहीलारी जी, राज्य सरकार के मंत्रीगण, सभी गणमान्य नागरिक बंधु बगिनी और असम के मेरे भाईयों और बहनों।
मेरा सौभाग्य है कि मुझे असम की संस्कृति, यहां की बोडो परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिलता रहा है। प्रधानमंत्री के तौर पर जितना मैं असम आया हूं, पहले कोई पीएम नहीं आया है। मेरी हमेशा इच्छा रहती है, असम की कला और संस्कृति को बड़ा मंच मिले। भव्य आयोजनों के जरिए इसकी पहचान देश और दुनिया में बने। इसके लिए पहले भी लगातार प्रयास होते रहे हैं। बड़े स्तर पर बिहू से जुड़े आयोजन हो, झुमोइर बिनोन्दिनी की अभिव्यक्ति हो, दिल्ली में सवा साल पहले हुआ भव्य बोडोलैंड महोत्सव हो, या दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम हों, असम की कला सांस्कृति में जो अद्धभुत आनंद है, वो पाने का मैं कोई भी मौका नहीं छोड़ता हूं। आज एक बार फिर बागुरुम्बा का ये आयोजन होने जा रहा है। ये आयोजन बोडो पहचान का जीवंत उत्सव है। ये बोडो समाज का, असम की विरासत का सम्मान भी है। मैं आयोजन से जुड़े सभी लोगों, और विशेष रूप से सभी कलाकारों को शुभकामनाएं देता हूं, बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
‘बागुरुम्बा दहोउ’ ये केवल एक उत्सव नहीं है। ये एक माध्यम है- हमारी महान बोडो परंपरा को सम्मान देने का, ये एक माध्यम है - बोडो समाज की महान विभूतियों को याद करने का, बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा, गुरुदेव कालीचरण ब्रह्मा, रूपनाथ ब्रह्मा, सतीश चंद्र बसुमतारी, मोरादम ब्रह्मा, कनकेश्वर नरजरी, ऐसे अनेक महान व्यक्तित्व रहे हैं, जिन्होंने सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राजनीतिक चेतना को मजबूती दी है। इस अवसर पर, मैं बोडो समाज के सभी महान व्यक्तित्वों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।

साथियों,
भाजपा, असम की संस्कृति को पूरे भारत का गौरव मानती है। असम के अतीत, असम के इतिहास से ही भारत का इतिहास पूरा होता है। और इसीलिए, भाजपा सरकार में बागुरुम्बा दहोउ जैसे इतने बड़े भव्य उत्सव होते हैं, बीहू को राष्ट्रीय पहचान दी जाती है, हमारे प्रयासों से शोराइदेउ मोइदाम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलता है, असमिया भाषा को क्लासिकल भाषा का दर्जा दिया जाता है।
भाइयों बहनों,
हमने बोडो भाषा को भी असम की associate official language का दर्जा दिया है। बोडो भाषा में शिक्षा को मजबूत करने के लिए अलग निदेशालय की स्थापना भी की है। हमारे इसी कमिटमेंट के कारण, बाथोऊ धर्मो को पूरे सम्मान के साथ मान्यता मिली है, बाथोऊ पूजा पर स्टेट हॉलीडे घोषित किया गया है। ये भाजपा ही है जिसकी सरकार में एक ओर महायोद्धा लसित बोरफुकन की भव्य प्रतिमा स्थापित होती है, तो साथ ही, बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा की प्रतिमा का भी अनावरण होता है। इसी तरह, श्रीमंत शंकरदेव की भक्ति और सामाजिक समरसता की परंपरा, ज्योति प्रसाद अग्रवाला जी की कला और चेतना, भाजपा सरकार असम की हर विरासत, हर गौरव का सम्मान, अपना सौभाग्य समझती है। संयोग से आज ज्योति प्रसाद अग्रवाला जी की पुण्य तिथि भी है। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
साथियों,
आज जब मैं यहां आया हूं तो मेरे मन में कितना कुछ चल रहा है! मैं ये सोचकर भावुक भी हो रहा हूं कि, मेरा असम कितना आगे बढ़ रहा है। एक समय जहां आए दिन रक्तपात होता था, आज वहीं संस्कृति के अद्भुत रंग सज रहे हैं! एक समय जहां गोलियों की गूंज थी, आज वहाँ खाम और सिफ़ुन्ग की मधुर ध्वनि है। पहले जहां कर्फ़्यू का सन्नाटा होता था, आज वहाँ संगीत के सुर गूंज रहे हैं। पहले जहां अशांति और अस्थिरता थी, आज वहाँ बागुरुम्बा की ऐसी आकर्षक प्रस्तुतियाँ होने जा रही हैं। ऐसा भव्य आयोजन, ये केवल असम की उपलब्धि नहीं है। ये उपलब्धि पूरे भारत की है। असम के इस बदलाव पर हर देशवासी को गर्व है।

साथियों,
मुझे संतोष है कि मेरे असमिया लोगों ने, मेरे बोडो भाई-बहनों ने, इसके लिए मुझ पर भरोसा जताया। आपने डबल इंजन सरकार को शांति और विकास की जो ज़िम्मेदारी दी, आपके आशीर्वाद से हमने उसे पूरा करके दिखाया। 2020 के बोडो शांति समझौते ने वर्षों से चले आ रहे संघर्ष पर विराम लगाया। इस समझौते के बाद भरोसा लौटा और हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा को अपना लिया। समझौते के बाद बोडो क्षेत्र में शिक्षा और विकास के नए अवसर तैयार हुए, शांति केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनी, और इसमें आपके प्रयासों की सबसे बड़ी भूमिका रही।
साथियों,
असम की शांति, असम का विकास, और असम का गौरव, इन सबके केंद्र में अगर कोई है, तो वो असम का युवा है। असम के युवाओं ने शांति स्थापना के लिए जो राह चुनी है, उसे मैं और हमें सबने उज्ज्वल भविष्य तक लेकर जाना है। शांति समझौते के बाद से ही हमारी सरकार, बोडोलैंड के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार ने पुनर्वास की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ाई है, हजारों युवाओं को करोड़ों रुपए की आर्थिक सहायता दी गई, ताकि, वो एक नई शुरुआत कर सकें!
साथियों,
भाजपा सरकार के प्रयासों का नतीजा आज हम सभी के सामने है। मेरे प्रतिभाशाली बोडो युवा आज असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं। खेल के क्षेत्र में भी बोडो समाज के बेटे-बेटियां नाम रोशन कर रहे हैं। वो आज नए विश्वास के साथ खुलकर नए सपने देख रहे हैं, अपने सपनों को पूरा कर रहे है, और असम के विकास को भी गति दे रहे हैं।

साथियों,
जब हम असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान करते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें तकलीफ हो जाती है। आप सब जानते हैं, असम का सम्मान किस पार्टी के लोगों को अच्छा नहीं लगता? जवाब एक ही है- काँग्रेस पार्टी! वो कौन सी पार्टी है, जिसने भूपेन हजारिका जी को भारत रत्न देने का विरोध किया था? काँग्रेस पार्टी! असम में सेमीकंडक्टर यूनिट का विरोध किस पार्टी ने किया था? खुद काँग्रेस की कर्नाटका सरकार के एक मंत्री ने, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे भी हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर यूनिट का, असम में क्यों लग रही है, इसका विरोध किया।
साथियों,
आज भी मैं जब असम की संस्कृति से जुड़ी कोई चीज पहनता हूं, अगर गमोछा, अगर गमोछा मेरे साथ होता है, तो कौन सी पार्टी असम का मजाक उड़ाती है? कांग्रेस पार्टी।
भाइयों बहनों,
असम और बोडोलैंड क्षेत्र इतने दशकों तक मुख्यधारा से कटा रहा, इसकी जिम्मेदार केवल और केवल काँग्रेस ही है। काँग्रेस ने अपने सियासी फायदे के लिए असम में अस्थिरता पैदा की, काँग्रेस ने असम को हिंसा की आग में धकेला, आजादी के बाद असम के सामने भी अपनी चुनौतियाँ थीं! लेकिन, काँग्रेस ने क्या किया? कांग्रेस ने उन समस्याओं के समाधान खोजने की जगह, उन पर सियासी रोटियाँ सेंकीं। जरूरत विश्वास की थी लेकिन, काँग्रेस ने विभाजन को बढ़ाया। जरूरत संवाद की थी, लेकिन, काँग्रेस ने उपेक्षा की, बातचीत के रास्ते बंद किए! खासकर, बोडोलैंड क्षेत्र, बोडोलैंड के लोगों की आवाज़ कभी ठीक से सुनी ही नहीं गई। जब जरूरत अपने लोगों के जख्म भरने की थी, जब जरूरत असम के लोगों की सेवा करने की थी, काँग्रेस तब घुसपैठियों के लिए असम के दरवाजे खोलकर, उनकी आवभगत में लगी रही।

साथियों,
काँग्रेस असम के लोगों को अपना नहीं मानती हैं। काँग्रेस के लोगों को विदेशी घुसपैठिये ज्यादा पसंद हैं। क्योंकि वो यहां आकर कांग्रेस का कट्टर वोटबैंक बन जाते हैं। इसीलिए कांग्रेस के राज में, विदेशी घुसपैठिये आते रहे, असम की लाखों बीघा जमीन पर कब्जा करते रहे, और, काँग्रेस सरकार उनकी मदद करती रही। मुझे खुशी है कि आज हेमंता जी की सरकार, असम के लोगों के हक की लाखों बीघा जमीन को, घुसपैठियों से मुक्त करवा रही है।
साथियों,
कांग्रेस ने हमेशा असम और पूरे पूर्वोत्तर को उपेक्षा की नज़र से देखा है। जो काँग्रेस के लोग पूर्वोत्तर के ही विकास को जरूरी नहीं मानते थे, उनका ध्यान आखिर, असम के विकास पर कैसे जाता? बोडो क्षेत्र की आशाओं-अपेक्षाओं के बारे में उनको सोचने की फुर्सत कहां होती? इसीलिए, कॉंग्रेस सरकारों ने जानबूझकर इस क्षेत्र को मुसीबतों में धकेला।
भाइयों बहनों,
काँग्रेस के उन पापों को साफ करने का काम भी, हमारी डबल इंजन सरकार कर रही है। आज यहाँ जिस रफ्तार से विकास हो रहा है, वो आपके सामने है। आप देखिए, हमने बोडो-कचारी वेलफेयर ऑटोनॉमस काउंसिल का गठन किया। बोडोलैंड क्षेत्र में बेहतर विकास के लिए 1500 करोड़ रुपए का विशेष विकास पैकेज दिया गया। कोकराझार में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की शुरुआत हुई। तमुलपुर में भी मेडिकल कॉलेज के निर्माण को गति मिली। नर्सिंग कॉलेज और पैरा-मेडिकल संस्थानों के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर बनाए गए। गोबरधना, पारबतझोरा और होरिसिंगा जैसे क्षेत्रों में पॉलीटेक्निक और ट्रेनिंग संस्थान भी बनाए गए।

साथियों,
बोडोलैंड के लिए अलग वेलफेयर डिपार्टमेंट और बोडोलैंड एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज की स्थापना भी की गई। इससे बोडो समुदाय के कल्याण के लिए और बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिल रही है।
साथियों,
भाजपा की सरकार ने दिलों की दूरियाँ मिटाई हैं, असम और दिल्ली की दूरी खत्म की है, और, बेहतर इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए, असम में एक इलाके से दूसरे इलाके की दूरियाँ भी कम कर रही है। जिन इलाकों में पहले पहुँचना मुश्किल होता था, आज वहाँ हाइवेज बन रहे हैं। ऐसी सड़कें बनाई जा रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में नए अवसर खुलें। कोकराझार को भूटान सीमा से जोड़ने वाली बिशमुरी-सरालपारा सड़क परियोजना के लिए, करोड़ों रुपए की व्यवस्था की गई है। कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक प्रस्तावित रेल परियोजना भी एक और महत्वपूर्ण कदम है। हमने इसे विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया है। हमने इसे एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा बनाया है। इसके तैयार होने के बाद व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
साथियों,
जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, जब संवाद और भरोसा मजबूत होता है, और जब समान अवसर हर वर्ग तक पहुंचते हैं, तब सकारात्मक बदलाव दिखाई देते हैं। असम और बोडोलैंड की यात्रा उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। असम का आत्मविश्वास, असम का सामर्थ्य और असम की प्रगति से, भारत की ग्रोथ स्टोरी को नई शक्ति मिल रही है। आज असम तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में, अपनी पहचान बना रहा है। असम की अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है। इस विकास में, इस बदलाव में, बोडोलैंड, यहां के लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं। मैं एक बार फिर आज के आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।


