उपस्थित सभी महानुभाव और मेरे परिवार के सभी सदस्य, बंधु गण, मैंने ये कहा कि मेरे परिवार के! दो कारण से - एक तो मैं बनारस का हो गया हूं और दूसरा बचपन से एक ही याद रही है, वो है, रेल। इसलिए रेल से जुड़ा हर व्यक्ति मेरे परिवार का सदस्य है और इस अर्थ में मैं परिवार जनों के बीच आज आया हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां दो महत्वपूर्ण प्रकल्प, एक तो 4,500 horse power capacity का डीज़ल इजिंन राष्ट्र को समर्पित हो रहा है और ये हमारी capability है। भारत को आगे बढ़ना है, तो इस बात पर बल देना होगा कि हम, हमारे आत्मबल पर, हमारी शक्ति के आधार पर हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने का काम करें।

एक समय था, ये देश पेट भरने के लिए अन्न बाहर से लाता था। जब विदेशों से अन्न आता था, तब हमारा पेट भरता था। लेकिन इस देश में एक ऐसे महापुरूष हुए जिसने बेड़ा उठाया, देश के किसानों को ललकारा, आवाह्न किया, उनको प्रेरणा दी, जय जवान जय किसान का मंत्र दिया और देश के किसानों ने अन्न के भंडार भर दिए। आज हिंदुस्तान अन्न विदेशों में दे सके, ये ताकत आ गई है। वो काम किया था, इसी धरती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री ने। अगर हमारे किसान देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, अन्न के भंडार भर सकते हैं, तो देश की उस ताकत को पहचान करके हमने देश की उस युवा शक्ति का आवाह्न किया है - Make in India! हमारी जितनी आवश्यकताएं हैं, उसका निर्माण देश में क्यों नहीं होना चाहिए? क्या कमी है! जिस देश के पास होनहार नौजवान हों, 65 प्रतिशत 35 साल से कम उम्र के नौजवान हों, वो देश क्या नहीं कर सकता है?

इसलिए भाइयों, बहनों, लाल बहादुर शास्त्री का मंत्र था- जय जवान जय किसान और उन्होंने देश के अन्न के भंडार भर दिए। हम Make in India का मंत्र ले करके आए हैं इंडिजिनस! भारत की विधा से, भारत के संसाधनों से भारत अपनी चीज़ों को बनाए। आज, डिफेंस के क्षेत्र में हर चीज़ हम बाहर से लाते हैं। अश्रु गैस भी बाहर से आता है, बताईए! रोने के लिए भी बाहर से हमको साधन लाने पड़ते हैं। ये बदलना है मुझे और उसमें एक महत्वपूर्ण पहल आज आपके यहां से.. indigenous .. मुझे बताया गया, ये जो इंजिंन बना है, इसमें 96% कंपोनेंट यहीं पर बने हैं, आप ही लोगों ने बनाए हैं। मैंने कहा है कि वो 4% भी नहीं आना चाहिए। बताइए कैसे करोगे? उन्होंने कहा- हम बीड़ा उठाते हैं, हम करेंगे। डिफेंस..सब चीज़ें हम बाहर से ला रहे हैं, मोबाइल फोन बाहर से ला रहे हैं, बताईए! हमारे देश में हमें एक वायुमंडल बनाना है और इस पर हम कोशिश कर रहे हैं।

रेलवे! आप ने मुझे, जब से प्रधानमंत्री बना हूं, बार बार मेरे मुंह से रेलवे के बारे में सुना होगा। घूम फिर करके कहीं भी भाषण करता हूं तो रेलवे तो आ ही जाता है। एक तो बचपन से आदत है और दूसरा, मेरा स्पष्ट मानना है कि भारत में रेलवे देश को आगे ले जाने की इतनी बड़ी ताकत रखती है, लेकिन हमने उसकी उपेक्षा की है। मेरे लिए रेलवे एक बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप कल्पना कर सकते हो, इतना बड़ा infrastucture! इतनी बड़ी संख्या में manpower! इतना पुराना experience! और विश्व में सर्वाधिक लोगों को ले जाने लाने वाला ये इतना बड़ा organization हमारे पास हो। इसको अगर आधुनिक बनाया जाए, इसको अगर technology upgradation किया जाए, management perfection किया जाए। service oriented बनाया जाए तो क्या हिंदुस्तान की शक्ल सूरत बदलने में रेलवे काम नहीं आ सकती? भाइयों, बहनों मैं ये सपना देख करके काम कर रहा हूं। इसलिए रेलवे तो आगे बढ़ना ही है, लेकिन रेलवे के माध्यम से मुझे देश को आगे बढ़ाना है। और, अब तक क्या हुआ है, रेल मतलब- दो-पांच किलोमीटर नई पटरी डाल दो, एक आद दो नई ट्रेन चालू कर दो, इसी के आस-पास चला है। हम उसमें आमूल-चूल परिवर्तन चाहते हैं।

उसी प्रकार से human resource development. हम जानते हैं कि रेलवे में अभी भी बहुत लोगों को रोज़गार मिलने की संभावनाएं हैं। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे हिम्मत नहीं करते। अगर आर्थिक रूप से उनको मजबूत बनाया जाए तो हज़ारो नौजवान रेलवे अभी भी absorb कर सकता है, इतनी बड़ी ताकत है। इसलिए योग्य manpower के लिए हम चार युनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं, हिंदुस्तान के चार कोनों में। उस युनिवर्सिटी में जो आएंगे उन नौजवानों की शिक्षा दीक्षा होगी और उनको रेलवे के अंदर नौकरी मिलेगी। हमारे कई रेलवे के कर्मचारी हैं। उनकी संतानों को अगर वहां पर पढ़ने का अवसर मिलेगा तो अपने आप रेलवे में नौकरी करने के लिए उसकी सुविधा बढ़ जाएगी। उसको भटकना नहीं पड़ेगा। कुछ लोग अफवाहें फैलाते हैं। आप में से कई लोग होंगे जो 20 साल की उम्र के बाद, 22 साल की उम्र के बाद, पढ़ाई करने के बाद रेलवे से जुड़े होंगे। मैं जन्म से जुड़ा हुआ हूं। इसलिए आप लोगों से ज्यादा रेलवे के प्रति मेरा प्यार है, क्योंकि मेरा तो जीवन ही उसके कारण बना है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि रेलवे का privatization हो रहा है, वो सरासर गलत है। मुझ से ज्यादा इस रेलवे को कोई प्यार नहीं कर सकता और इसलिए ये जो गप्प चलाए जा रहे हैं, भाईयों, बहनों न ये हमारी इच्छा है, न इरादा है, न सोच है। हम इस दिशा में कभी जा नहीं सकते, आप चिंता मत कीजिए। हम क्या चाहते हैं - आज देश के गरीबों के लिए जो पैसा काम आना चाहिए, स्कूल बनाने के लिए, अस्पताल बनाने के लिए, रोड बनाने के लिए, गांव के अंदर गरीब आदमी की सुविधा के लिए, उन सरकारी खजाने के पैसे हर साल रेलवे में डालने पड़ते हैं। क्यों? रेलवे को जि़ंदा रखने के लिए। हम कितने साल तक हिंदुस्तान के गरीबों की तिजोरी से पैसे रेल में डालते रहेंगे? और अगर कहीं और से पैसा मिलता है, तो समझदारी इसमें है कि गरीबों के पैसे रेल में डालने के बजाए, जो धन्ना सेठ हैं, उनके पैसे रेल में डालने चाहिए। इसलिए कम ब्याज से आज दुनिया में पैसे मिलते हैं। हम उन पैसों को रेलवे के विकास के लिए लगाना चाहते हैं, जिसके कारण, आप जो रेलवे में काम कर रहे हैं, उनका भी भला होगा और हिंदुस्तान का भी भला होगा। रेलवे का privatization नहीं होने वाला है।

अब मुझे बताईए, ये युनियन वालों को मैं पूछना चाहता हूं कि रूपया रेलवे में आए, डालर आए, पाउंड आए, अरे आपको क्या फर्क पड़ता है भई! आपका तो पैसा आ रहा है। दूसरी बात, रेलवे के स्टेशन जितने हैं, हमारे.. अब मुझे बताइए, मुझे रेलवे युनिवर्सिटी बनानी है..अगर रेलवे युनिवर्सिटी में मुझे जापान से मदद मिलती है, चाइना से मदद मिलती है, टेक्नॉलोजी की मदद मिलती है, expertise की मदद मिलती है, तो लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? ज़रा बताईए, सच्चा बोलिए, दिल से बोलिए- लेनी चाहिए कि नहीं लेनी चाहिए? यही काम ये सरकार करना चाहती है भाईयों! और इतना ही नहीं इतना ही नहीं. आज हम देखें हमारे रेलवे स्टेशन कैसे हैं? रेलवे स्टेशन पर रेलवे में 12-12 घंटे प्लेटफार्म पर काम करने वाले रेलवे के कर्मचारी को बैठने के लिए जगह नहीं होती है। ये सच्चाई है कि नहीं है? उसको बेचारे को बैठ करके खाना खाना हो, उसके लिए जगह नहीं है। क्या हमारे रेलवे स्टेशन सुविधा वाले होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? रेलवे पर आने वाले लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने सर्वे किया कि बनारस स्टेशन पे जितने पैसेंजर आते हैं, उनको बैठने के लिए सीट है क्या? और मैं हैरान हो गया कि बहुत कम सीट हैं। ज्यादातर बेचारे बूढ़े पैसेंजर भी घंटों तक रेलवे के इंतज़ार में खड़े रहते हैं। क्या उनको बैठने की सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? मैंने क्या किया, मेरे MPLAD का जो फंड था, मैंने रेलवे वालों को कहा, सबसे ज्यादा, जितनी बैंच लगा सकते हो, प्लेटफार्म पर लगाओ ताकि यहां गरीब से गरीब व्यक्ति को रेलवे के इंतज़ार में बैठा है तो उसको बैठने की जगह मिले। और मैंने सभी एमपी को कहा है, हिंदुस्तान भर में सभी रेलवे स्टेशन पर वो अपने MPLAD फंड में से पैसे लगा करके वहां पर वहां पर बैंचें डलवाएं ताकि रेलवे स्टेशन पर आने वाले पैसेंजर की सुविधा बढ़े। मुझे बताईए, ये सुविधा बढ़ेगी तो आशीर्वाद आपको मिलेगा कि नहीं मिलेगा? सीधी सीधी बात है, सब आपके फायदे के लिए हो रहा है भई। आप मुझे बताईए आज रेलवे स्टेशन जो हैं बड़े बड़े, heart of the city हैं! दो दो चार किलोमीटर लंबे स्टेशन हैं। नीचे तो आपकी मालिकी मुझे मंज़ूर है लेकिन रेलवे में आसमान में कोई इमारत बना देता है और रेलवे के खजाने में हजार करोड़, दो हजार करोड़ आज जाते हैं तो रेलवे मजबूत बनेगी कि नहीं बनेगी? वो प्लेटफार्म के ऊपर, हवा में, आकाश में अपनी इमारत बनाता है, रेलवे के फायदे में जाएगी कि नहीं जाएगी? मालिकी रेलवे की रहेगी कि नहीं रहेगी? रेलवे के कर्मचारियों का भला होगा कि नहीं होगा? हम जो विकास की दिशा ले करके चल रहे हैं, ये चल रहे हैं, privatization की हमारी दिशा नहीं है। हमें दुनिया भर का धन लाना है, रेलवे में लगाना है। रेलवे को बढ़ाना है, रेलवे को आगे ले जाना है और रेल के माध्यम से देश को आगे ले जाना है। हमारे देश में रेलवे को केवल यातायात का साधन माना गया था, हम रेलवे को देश के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के रूप में देखना चाहते हैं।

इसलिए मेरे भाईयों, बहनों मैं देश भर के रेल कर्मचारियों को आज आग्रह करता हूं- आइए! हिंदुस्तान में सबसे उत्तम सेवा कहां की तो रेलवे की ये सपने को हम साकार करें। इन दिनों जो स्वच्छता का अभियान हमने चलाया है, कभी-कभार ट्विटर पर खबरें सुनने को मिलती हैं कि साहब मै पहले भी रेलवे में जाता था अब भी जाता हूं लेकिन अब जरा डिब्बे साफ-सुथरे नजर आते हैं, सफाई दिखती है देखिए लोगों को कितना संतोष मिलता है, आशीर्वाद मिलता है और ये कोई उपकार नहीं है, हमारी जिम्मेवारी का हिस्सा है। It is a part of our duty. धीरे-धीरे उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारा पूरा रेलवे व्यवस्था तंत्र साफ-सुथरा क्यों न हो उसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब लोगों को कैसे मिले, मैं तो देख रहा हूं. रेलवे Infrastructure का उपयोग देश के विकास में इतना हो सकता है जिसकी किसे ने कल्पना नहीं की थी। हमारे देश में पोस्ट ऑफिस का नेटवर्क और रेलवे का नेटवर्क इन दोनों का अगर बुद्धिपूर्वक उपयोग किया जाए तो हमारे देश के ग्रामीण विकास की वह धरोहर बन सकते हैं।

मैं उदाहरण देता हूं- रेलवे के पास बिजली होती है, कहीं पर भी जाइए रेलवे के पास बिजली का कनेक्शन है। हिंदुस्तान की हर जगह पर। रेलवे के पास Infrastructure है। छोटे-छोटे गांव पर भी, छोटे-छोटे स्टेशन बने हुए हैं, भले ही वहां पर एक ट्रेन आती हो तो भी कोई न कोई वहां बैठा है, कोई न कोई व्यवस्था है। बाकी 24 घंटे वो खाली पड़ा रहता है उसी प्रकार से पोस्ट ऑफिस गांव-गांव तक उसका नेटवर्क है लेकिन वो पुराने जमाने की चल रही है उसमें बदलाव लाना है ये मैंने तय किया है और बदलाव लाने वाला हूं। अब मुझे बताइए गांव के अंदर जो रेलवे के स्टेशन हैं वहां पर दिन में मुश्किल से एक ट्रेन आती है मेरे हिसाब से हजारों की तादाद में ऐसी जगहें हैं, जहां बिजली हो, जहां Infrastructure हो वहीं पर अगर एक-दो कमरे और बना दिए जाएं और उन कमरों में Skill Development की Classes शुरू की जाएं क्योंकि Skill Development करना है तो Machine tools चाहिए और Machine tools के लिए बिजली चाहिए लेकिन बिजली गांव में नहीं है लेकिन रेलवे स्टेशन पर है, गांव के बच्चे Daily रेलवे स्टेशन पर आएंगे और रेलवे स्टेशन पर जो दो कमरें बने हुए होंगे उनमें जो Tools लगे हुए होंगे। Turner, Fitter के Course चलेंगे। एक साथ हिंदुस्तान में Extra पैसे खर्च किए बिना रेलवे की मदद से देश में हजारों की तादाद में Skill Development Centres खड़े हो सकते हैं कि नहीं।

मेरे भाईयों-बहनों थोड़ा दिमाग का उपयोग करने की जरुरत है, आप देखिए चीजें बदलने वाली हैं। मैं रेलवे के मित्रों से कहना चाहता हूं ऐसे स्टेशनों को Identify कीजिए जहां पर बिजली की सुविधा है वहां पर सरकार अपने खर्चे सेदो-तीन कमरे और बना दे और वहां पर उस इलाके के जो 500-1000 बच्चे हो उनके लिए Skill Development के Institutions चलें। ट्रेन ट्रेन का और Institutions, Institutions का काम करें रेलवे को Income हो जाए और गांव के बच्चों का Skill Development हो जाए। एक साथ हम अनेक व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

आज एक तो सोलर प्लांट भी इसके साथ जुड़ रहा है। आधुनिक Loco shed का Expansion हो रहा है, करीब 300 करोड़ रुपए जब पूरा होगा। 300 करोड़ रुपए की लागत से यहां Expansion होने के कारण इस क्षेत्र के अनेक नौजवानों को रोजगार की नई संभावनाएं बढ़ने वाली हैं।

मैं फिर एक बार रेल विभाग को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। श्रीमान सुरेश प्रभु जी के नेतृत्व में बहुत तेज गति से रेल का विकास होगा। आजादी के बाद जितना विकास हुआ है उससे ज्यादा विकास मुझे आने वाले दिनों में करना है। रेलवे के बैठे सभी मेरे साथियों आप सभी मेरे परिवारजन हैं और इसलिए मेरा आप पर हक बनता है, रेलवे वालों पर मेरा सबसे ज्यादा हक बनता है कि हम सब मिलकर के रेल को सेवा का एक बहुत बड़ा माध्यम बनाएं, सुविधा का माध्यम बनाएं और राष्ट्र की आर्थिक गति को तेज करने का एक माध्यम बना दें। उस विश्वास के साथ आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद.

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શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ

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સંસદના ચોમાસુ સત્ર 2026ના પ્રારંભમાં પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
July 20, 2026
May this session witness productive discussions that strengthen India's development journey: PM
We pray that the monsoon remains proactive and the Monsoon Session remains productive, contributing to the welfare of the nation: PM
Over the past month, the country has achieved several milestones at the national, international and space levels that have filled every Indian with pride: PM
Despite the challenges in West Asia, India continued to grow as the fastest-growing major economy in the world, reflecting its strength and determination: PM
Smooth functioning of Parliament, meaningful discussions and a collective resolve to take the country forward are the need of the hour: PM

ભાઈઓ, આપ સૌનું સ્વાગત છે.

ચોમાસાના કેટલાક ફાયદા જોવા મળી રહ્યા છે અને ચોમાસું સત્ર પણ શરૂ થઈ રહ્યું છે. ચોમાસું હોય કે ચોમાસું સત્ર, જો બંને પ્રોએક્ટિવ હોય, તો તે ખૂબ જ પ્રોડક્ટિવ હોય છે. અને જ્યારે બંને પ્રોડક્ટિવ હોય છે, ત્યારે દેશ અને તમામ જીવોનું કલ્યાણ થાય છે. તેથી, અમે પ્રાર્થના કરીએ છીએ કે ચોમાસા પ્રોએક્ટિવ રહે અને ચોમાસા સત્ર પણ પ્રોડક્ટિવ રહે.

મિત્રો,

છેલ્લા મહિનામાં, દેશે ઘણી સિદ્ધિઓ હાંસલ કરી છે અને દેશના નાગરિકો ગર્વથી ભરેલા છે. સિદ્ધિઓનો આ હારમાળા ચાલુ જ છે. રાષ્ટ્રીય, આંતરરાષ્ટ્રીય અને હવે અવકાશમાં પણ. એક રીતે, આ ભારત માટે ગર્વની ક્ષણો રહી છે. ગયા વર્ષે, ચોમાસા સત્ર પહેલા એક ભારતીય નાગરિક આંતરરાષ્ટ્રીય અવકાશ મથક પર ઉતર્યો હતો, અને ગઈકાલના એક દિવસ પહેલા, એક યુવાન ભારતીય સ્ટાર્ટઅપે નોંધપાત્ર સિદ્ધિ હાંસલ કરી હતી. વિશ્વના બહુ ઓછા દેશોએ આવી ખાનગી હિંમત દર્શાવી છે અને ભારતીય યુવાનોએ અવકાશમાં નવી ઉડાન ભરી છે. આ એક મોટી સફળતા છે. અને મને કહેવામાં આવ્યું છે કે સ્કાયરૂટ સ્ટાર્ટઅપની સમગ્ર ટીમની સરેરાશ ઉંમર ફક્ત 28 વર્ષ છે. આ યુવાનોએ આ સિદ્ધિ હાંસલ કરી છે. હું કોઈ 56 વર્ષના વૃદ્ધ વિશે વાત નથી કરી રહ્યો; હું આ સ્ટાર્ટઅપ્સ વિશે વાત કરી રહ્યો છું, જ્યાં સરેરાશ 28 વર્ષની ઉંમરના યુવાનોએ અવકાશમાં ભારતનો ધ્વજ ફરકાવ્યો છે. તેમને અભિનંદન, પરંતુ આ એવી વાતો છે, જે ભારતને આત્મવિશ્વાસથી ભરી દે છે. વિશ્વમાં ભારતની છબી સાર્વત્રિક રીતે સ્વીકૃત થઈ રહી છે.

 

મિત્રો,

આ કોઈ સંયોગ નથી; તે એક સંદેશ છે અને એક શક્તિશાળી સંદેશ છે કે આપણા દેશના યુવાનોની ક્ષમતા અને આકાંક્ષાઓ અવકાશ જેટલી અમર્યાદિત છે. આનાથી મોટો કોઈ સંદેશ દેશને પ્રેરણા આપી શકે નહીં.

મિત્રો,

આજે દેશે જે સુધારાની શરૂઆત કરી છે તે એ હકીકતનું પરિણામ છે કે ભારતના યુવાનો આવા સાહસિક પગલાં લઈ શકે છે અને સફળતા પણ મેળવી રહ્યા છે.

 

મિત્રો,

તાજેતરમાં, રાજસ્થાનમાં એક મોટી તેલ રિફાઇનરી રાષ્ટ્રને સમર્પિત કરવામાં આવી હતી. થોડા અઠવાડિયા પહેલાં દેશને ત્રીજો સેમિકન્ડક્ટર પ્લાન્ટ પણ સમર્પિત કરવામાં આવ્યો હતો. થોડા દિવસો પહેલા, ગ્રીન હાઇડ્રોજનથી ચાલતી ટ્રેન શરૂ કરવામાં આવી હતી અને વિશ્વના બહુ ઓછા દેશોમાં આ સુવિધા છે. પરંતુ ભારતે તેના નાગરિકોને સમર્પિત કરેલી હાઇડ્રોજન ટ્રેનમાં સૌથી શક્તિશાળી એન્જિન છે અને તે સૌથી લાંબી છે. આ, પોતે જ, ભારતના વૈજ્ઞાનિકો, ઇજનેરો, નવીનતાઓ, ઉદ્યોગસાહસિકો અને શ્રમિકોનું પરિણામ છે, જેઓ એક જ હેતુ સાથે દેશ માટે જીવે છે અને કામ કરે છે.

 

મિત્રો,

આપણે સારી રીતે જાણીએ છીએ અને આખી દુનિયા ચિંતિત છે કે ક્યાંકને ક્યાંક યુદ્ધ જેવી પરિસ્થિતિઓ સતત વિકસી રહી છે. પશ્ચિમ એશિયામાં યુદ્ધે ભારત જેવા દેશો માટે એક મહત્વપૂર્ણ કટોકટી ઉભી કરી છે, જે ઊર્જા માટે અન્ય દેશો પર નિર્ભર છે. પેટ્રોલ, ડીઝલ, એલપીજી, ખાતર, રસાયણો - દરેક ક્ષેત્રે - અસંખ્ય અવરોધો અને કટોકટીનો સામનો કરવો પડ્યો છે. આ છતાં, 7.7 ટકાના વિકાસ દર સાથે, ભારત વિશ્વની મુખ્ય અર્થવ્યવસ્થાઓમાં સૌથી ઝડપથી વિકસતો દેશ રહ્યો. આ ભારતની ક્ષમતાનો પુરાવો છે. આ એક ઝલક આપે છે કે ભારત કેવી રીતે ઉત્સાહ અને ઉમંગ સાથે નવી ઊંચાઈઓ સુધી પહોંચવાની ઇચ્છા રાખે છે. જેમ જેમ આ ચોમાસુ સત્ર શરૂ થાય છે, દેશે ગતિ પકડી છે અને સંસદની ભાવના તે ગતિમાં નવી ઊર્જા દાખલ કરી શકે છે. રાષ્ટ્રીય લક્ષ્યો પ્રાપ્ત કરવા માટે સકારાત્મક ભાવના આવશ્યક છે. આપણા ગૃહમાં ઘણા અનુભવી સાંસદો પણ છે, ભલે તેઓ કોઈ પણ પક્ષ સાથે જોડાયેલા હોય, પરંતુ તેમની પાસે બહોળો અનુભવ છે. આવા સમયે, સંસદ અને દેશને તેમના અનુભવ અને જ્ઞાનની જરૂર છે. અને આ માટે, હું માનું છું કે સંસદનું કાર્ય, અર્થપૂર્ણ ચર્ચાઓ અને દેશને આગળ લઈ જવાનો સામૂહિક સંકલ્પ, સમયની જરૂરિયાત છે. આ દેશના મહત્વાકાંક્ષી યુવાનો માંગ કરે છે કે આપણે આગળ વધીએ. સમયની માંગ એ છે કે રાષ્ટ્રીય વફાદારીથી ભરેલા, દેશભક્તિ માટે જીવતા લોકોને આ ગૃહમાં યોગ્ય પ્લેટફોર્મ મળતું રહે. તેઓ પોતાનો અવાજ ઉઠાવી શકે અને દેશને દિશા આપી શકે. અને તેથી, હું આશા રાખું છું, અને હું દ્રઢપણે માનું છું કે, જ્યાં તથ્યો અને દલીલો હોય, ત્યાં તોફાન માટે કોઈ જગ્યા નથી. જો દલીલો મજબૂત હોય અને તથ્યો શક્તિશાળી હોય, તો શાંત મનથી પણ વ્યક્તિ પોતાનો અવાજ મજબૂત બનાવી શકે છે. મને આશા છે કે આ ગૃહમાં ચર્ચાઓ તર્ક અને તથ્યોથી સમૃદ્ધ થશે. દરેક અવાજને તક આપવી જોઈએ, દરેક વિચારનું સન્માન કરવું જોઈએ; સંસદમાં આ આપણી ભૂમિકા છે. હું બધા સાંસદોને આ ગૃહમાં ઉત્સાહપૂર્વક ભાગ લેવા આમંત્રણ આપું છું. આજે સવારે, સ્પીકરે સોશિયલ મીડિયા દ્વારા દેશના સંસદસભ્યોનો પણ આભાર વ્યક્ત કર્યો. હું આમાં મારા સ્વરને જોડું છું. આપ સૌનો ખૂબ ખૂબ આભાર.

નમસ્તે.