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Jungleraaj govt. had built an industry of kidnapping and extortion in Bihar: PM
They were railway ministers so long but has the demands of Munger been met: PM
We plan to do lot of work for Bihar and we need your help, you need to remove this disruptive govt: PM
Mahaswarthbandhan has looted Bihar for 60 years; we must not give them another chance: PM
Jungleraaj is at its peak in Bihar, there had been 4000 kidnappings between January to July this year: PM

भारत माता की जय

मंच पर विराजमान बिहार के हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य श्रीमान कुशवाहा जी, हम पार्टी के अध्यक्ष और तारापुर से उम्मीदवार श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह, श्री पाटिल, पूर्व सांसद श्री सूरजभान सिंह, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के महासचिव श्रीमान शिवराज सिंह जी, मुंगेर की सांसद श्रीमती वीणा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान रणधीर सिंह, मुंगेर नगर निगम की मेयर श्रीमती कुमकुम देवी, मुंगेर नगर निगम की डिप्टी मेयर सुश्री बेबी चंकी, सूर्यगढ़ से उम्मीदवार श्री प्रेम रंजन जी, भाजपा से लखीसराय के विधानसभा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा जी, भाजपा मुंगेर से उम्मीदवार श्री प्रणव यादव जी, लोजपा से जमालपुर से उम्मीदवार श्री मानसुख कुंवर जी, सुभाष चन्द्र बोस जी, बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।

सभी को इस विराट जन समुदाय का आशीर्वाद मिला है और यह इस बात का सबूत है कि अब बिहार में क्या होने वाला है। एक सच बता दूँ, मैं गुजरात में कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहा और गुजरात में लम्बे अरसे तक लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने का अवसर दिया लेकिन कभी सुबह 10-11 बजे ऐसी रैली करनी हो तो हम नहीं कर पाएंगे। हम शाम के समय का इंतज़ार करते हैं। मैं हैरान हूँ कि आप लोग सोते हो कि नहीं सोते हो। ये दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत है कि हवा का रुख़ किस तरफ़ चल रहा है। देश के पोलिटिकल पंडितों को इस बार अपने सारे राजनीतिक समीक्षा के आधार बदलने के लिए बिहार ने मज़बूर कर दिया। लम्बे अरसे तक बिहार की राजनीति की चर्चा या तो कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द रहती थी या कुछ जातियों के इर्द-गिर्द रहती थी; पहली बार बिहार का चुनाव युवाओं के जोश के आस-पास केन्द्रित हुआ है, पहली बार चुनाव विकास के विचार पर केन्द्रित हुआ है। मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक पंडितों को इस बात पर मुहर लगाने के दिन आ गए हैं।

आज 8 अक्टूबर है। मुझे मुंगेर की उस धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जहाँ योग को आधुनिक रूप दिया गया। पूरे विश्व को मुंगेर ने आकर्षित किया और यही मुंगेर जैसी कई योगपीठ है देश में जिसने दुनिया के 190 से ज्यादा देशों को योग मनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 8 अक्टूबर को याद इसलिए किया क्योंकि 1979 में इसी दिन हमने हमारे प्राणप्रिय नेता आदरणीय जयप्रकाश नारायण को खो दिया था। जयप्रकाश नारायण जी में मौत से भी मुकाबला करने की ताक़त थी। उन्होंने अंग्रेज़ों के नाकों में दम कर दिया था। आजादी के बाद वे सुशासन के लिए लड़ते रहे, भ्रष्टाचार से लड़ते रहे, देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया और संपूर्ण क्रांति का मंत्र लेकर के देश के नौजवानों में एक नई चेतना भर दी थी लेकिन जयप्रकाश बाबू, कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि हमारे बीच से चले गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस देश में आपातकाल लगाया था। हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया था और जयप्रकाश नारायण जी को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था और यहीं उनकी बीमारी आई और उन्हें ले गई। दुर्भाग्य देखिये कि को कभी जयप्रकाश नारायण जी का गीत गाते थे, यही लोग उस कांग्रेस के साथ बैठे हैं जिस कांग्रेस ने जयप्रकाश बाबू को जेल के अन्दर बंद कर दिया था। ये स्वार्थ की राजनीति नहीं है तो क्या है; ये जयप्रकाश नारायण जी के साथ धोखा नहीं है तो क्या है। राम मनोहर लोहिया जीवनभर गैर-कांग्रेसी विचारों के लिए जूझते रहे। उसी राम मनोहर लोहिया का नाम लेने वाले लोग आज कांग्रेस द्वारा पिलाये गए पानी को पीकर के हमें कोसते हैं। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और मेरा यह विश्वास है कि बिहार के ये नौजवान बिहार की तक़दीर भी बदलेंगे, बिहार की तस्वीर भी बदलेंगे।

मैं आज मुंगेर की इस धरती पर आया हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मुझे नंदलाल बोस जी को स्मरण करना चाहिए। यहाँ बहुत कम लोगों को उनके विषय में सुनने का अवसर मिला होगा। तारापुर में जन्मे नंदलाल बोस, जिस प्रकार बाबा अम्बेदकर ने भारत को संविधान दिया, उस संविधान को नया रूप-रंग देने का काम मुंगेर के लाल नंदलाल बोस ने किया। अलग-अलग खण्डों में 22 चित्र, जो आज भी हमारे संविधान का मूल तत्त्व है, वे 22 चित्र, उसकी सजावट, उसका रंग-रोगन इसी मुंगेर की धरती के बेटे नंदलाल बोस ने किया था। मैं आज उनको आदरपूर्वक नमन करता हूँ। कला, संस्कृति, ये बिहार के रग-रग में हैं और जब भी मौका मिला, इसने अपना असली रूप दिखाया है इसलिए पूरा देश बिहार का गौरवगान करता है, बिहार का आदर और सम्मान करता है।

भाईयों-बहनों, जब मैं जयप्रकाश जी को याद करता हूँ तो स्वाभाविक... पुराना मुंगेर जिला था; अब तो उसके हिस्से हो गए। सिमरिया में राष्ट्रकवि दिनकर का जन्म हुआ था और उनकी वह कविता जिसने पूरे देश के नौजवानों को प्रेरित किया था, “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”, इसी को लेकर के इतिहास का नौजवान चल पड़ा था। इस बार इस चुनाव में बिहार के भाग्य को बदलने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।

मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ है। ये वो धरती है जहाँ चरखाधारी मोहन महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। ये वो धरती है जहाँ के चक्रधारी द्वारकाधीश भगवन श्रीकृष्ण थे। और देखिये आज भी इस धरती पर द्वारकाधीश की परंपरा कैसी चल रही है। श्रीकृष्ण के संस्कारों की छाया उस धरती को कितनी प्रेरणा देती है, यही तो कारण है कि वहां हमारे यहाँ जो यदुवंशी लोग हैं जिन्होंने देश को श्वेत क्रांति दी और आज दूध के क्षेत्र में अमूल जैसी कई डेयरियाँ गुजरात की प्रसिद्ध है। भारत में श्वेत क्रांति का केंद्र बिंदु गुजरात बन गया था। श्रीकृष्ण की परंपरा को उन्होंने गौ-पालन करके निभाया।

लेकिन यहाँ के एक नेता क्या-क्या खा गए और उन्होंने यदुवंशियों का अपमान किया है। लालू जी चुनाव आते हैं, जाते हैं लेकिन आप ये मत भूलिये कि यही यदुवंश के लोग थे जो आपके साथ खड़े रहे थे और तब जाकर आपको सत्ता के सिंहासन तक जाने का अवसर मिला था। आज यदुवंश के लोग अगर आपको सवाल करते हैं तो आप उन पर क्या-क्या आरोप लगते हो। इतना गंभीर आरोप उन्होंने लगाया है कि यदुवंशी क्या खाते हैं। ये यदुवंश का अपमान है कि नहीं? ये बिहार का अपमान है कि नहीं? और जब यदुवंश का गुस्सा भड़क गया तो वो कह रहे हैं कि मेरे भीतर शैतान प्रवेश कर गया। मेरे मन में एक सवाल उठता है कि शैतान को यही ठिकाना मिला क्या, पूरे हिन्दुस्तान में, पूरे विश्व में कोई ठिकाना नहीं मिला; मिला तो सिर्फ़ लालू जी का ठिकाना मिला। मुझे बताईये, आपके घर, आपके गाँव, आपके मोहल्ले आया आपके शरीर में शैतान आने की हिम्मत कर सकता है? जैसे रिश्तेदार आता है और हम पहचान लेते हैं; उन्होंने शैतान को पहचान भी लिया। अब मुझे बताईये कि जहाँ शैतान रहने की हिम्मत कर सकता है, जहाँ शैतान को रहने के लिए अच्छी खातिरदारी मिल सकती है, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह हो सकती है क्या? इसलिए शैतान ने जिसका पता ढूंढ लिया है, उस पते पर कभी हम देखेंगे भी नहीं।

अब तो बिहार को बचाना है, इसे आगे बढ़ाना है। अब तक तो हम सोचते थे कि हमारी लड़ाई इंसानों से है, पहली बार पता चला कि इंसानों के अन्दर शैतान पहुँच जाता है और वो हमारे पीछे पड़ा हुआ है। आप कल्पना कीजिये, बिहार में आजादी के बाद राज किसने किया? 35 साल तक राज किया कांग्रेस ने, और 25 साल तक राज किया इन बड़े-छोटे भाईयों ने। जिन्होंने ये 60 साल बिहार को लूटा है, अब वो आकर के स्वार्थबंधन बना रहे हैं और छोटा नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को और अधिक बर्बाद होने देना है? बिहार को तबाही से मुक्त कराना है? 60 साल तक जिन्होंने बिहार के भविष्य को रौंद डाला है, क्या ऐसे ‘महास्वार्थबंधन’ को अब बिहार में जगह देनी चाहिए? हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति होनी चाहिए कि नहीं?

इस कांग्रेस पार्टी की जब सामने से आने की ताकत ख़त्म हो गई है तो पिछले दरवाजे से आ गए हैं। आज कांग्रेस के नेता अपने किसी नेता का गुणगान गाने की ताकत खो चुके हैं। कांग्रेस का ऐसा हाल कभी देश ने देखा नहीं था और उसका कारण हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में छोटा या बड़ा राजनेता हो; किसी कस्बे या विचारधारा का हो; सार्वजनिक जीवन में अहंकार कितना विनाश करता है, उसका उदाहरण कांग्रेस पार्टी है। ये जनता है, चुप रहती लेकिन समय आने पर चुन-चुन कर हिसाब चुकता करती है। लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के अहंकार का क्या हुआ, ये सब जानते हैं इस बार बिहार के चुनाव में अहंकार कैसे पराजित होने वाला है, ये बिहार के नौजवान करके दिखाने वाले हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ये चुनाव सीधा-सीधा दो बातों पर है; निर्णय आपको करना है। एक तरफ जंगलराज है और एक तरफ विकासराज है। जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि जंगलराज फिर से आने देना चाहिए? अभी भनक आ गई है। बिहार सरकार के खुद के आंकड़े, जनवरी से जुलाई के आंकड़े कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज का जो सबसे बड़ा उद्योग लगा था वह था - अपहरण करो, फ़िरौती लो। जनवरी से जुलाई के आंकड़े जो बिहार सरकार ने घोषित किये हैं, उसके हिसाब से 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं?

आपको याद है आने वाले दिनों में त्यौहार का मौसम है, दुर्गापूजा की धूम होगी, विजयादशमी का महोत्सव आएगा, रामलीला चलेगी; आपमें से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा या बहुत बचपन के दिन होंगे; दुर्गा मंडप में जाना हो और मां शाम को रोकती थी और कहती थी कि अब सूरज ढालने वाला है और बाहर नहीं जा सकते; मां को यहीं से नमन कर लो; ये दिन थे कि नहीं थे? रामलीला हुआ करती थी लेकिन शाम के समय में लोग जाने से डरते थे। त्यौहार के दिनों में कोई अगर नई गाड़ी खरीद ले तो बेचारे तो चिंता रहती थी कि यहाँ के किसी नेता को पता चल गया तो उसके चेले-चपाटे यहाँ से आकर के गाड़ी उठाकर ले जाएंगे। गाड़ी भी जाएगी, पैसे भी जाएंगे और मांगने गए तो जान भी चली जाएगी। ये दिन बिहार ने देखे हैं कि नहीं देखें हैं? इसलिए मैं कहता हूँ कि बिहार में चुनाव विकासराज के लिए होना चाहिए न कि जंगलराज के लिए।

भाईयों-बहनों, बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ कुछ इलाकों में इतना पानी है, जिस पानी के लिए हिन्दुस्तान के बहुत सारे इलाके तरसते हैं और बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ नौजवान भरे पड़े हैं। यहाँ किसी को कुछ भी न आए और सिर्फ़ यहाँ के पानी और जवानी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया जाए तो बिहार का जीवन बदल जाएगा। यहाँ ऐसी सरकारें आई हैं जब बिहार का पानी भी बर्बाद हुआ और यहाँ की जवानी भी पलायन कर गई। मुझे बिहार का पानी और यहाँ की जवानी, इन दोनों पर मेरा भरोसा है जो न सिर्फ़ बिहार को बल्कि पूरे हिन्दुस्तान को बदलेंगे। मैं यह विश्वास लेकर यहाँ आया हूँ।

पानी का सही प्रबंध हो और जवानी को सही अवसर मिले; देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा लेकिन पानी गया तो गया और हम तो जानते हैं कि बिहार में एक और उद्योग चल पड़ा है, रेत की चोरी करने का सारी नदियों का कितना बुरा हाल है। नदी के किनारे पर रहने वाले लोग बालू चोरों के कारण कितने परेशान हैं, वो यहाँ के लोग भली-भांति जानते हैं। पानी तो नहीं बचा, बालू तक नहीं बचने दिया इन लोगों ने और यह बिहार की बर्बादी का कारण बना। ये आवश्यक है कि हमें बिहार के विकास की ओर ध्यान केन्द्रित करना है। मैं जरा पूछना चाहता हूँ इन नेताओं से कि मोदी-मोदी की माला जपते रहते हैं। आपका प्यार अलग है; आप मोदी-मोदी बोलते हो तो उनकी नींद खराब होती है।

भाईयों-बहनों, बिहार के ये दोनों महाशय रेल मंत्री थे कि नहीं? इतने साल रेल मंत्री रहे कि नहीं रहे? कोई मुझे बताये कि मुंगेर के रेल पुल का काम कर पाए? ये पूरा होना चाहिए कि नहीं? उन्होंने किया? वो तो बिहार के थे, रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर का पुल नहीं बना; पटना का पुल लटका पड़ा है। ये इनके इरादे हैं और इसलिए मैं ये कहने आया हूँ कि हमें विकास की गाड़ी को तेज़ चलाना है। मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ। 11वीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना, क्या हुआ? यहां के मुख्यमंत्री जी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था। 2010 के चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में नहीं आऊंगा, वोट नहीं मांगूंगा; ये कहा था? उन्होंने वचन का पालन किया? आपके साथ धोखा किया कि नहीं? बिजली तो छोड़ो, उन्होंने कैसी सरकार चलाई है; मैं बता रहा हूँ।

11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना, बिहार को गाँवों में बिजली के लिए 8215 करोड़ रुपये दिल्ली से मिले लेकिन ये लोग बिहार में ऐसी सरकार चला रहे हैं, 8000 करोड़ में से सिर्फ़ 1300 करोड़ का खर्च कर पाए। खर्च करने की भी ताकत नहीं है; न ताकत है और न इरादा है और जब तक उनका बंटवारा तय नहीं होता बात आगे चलती नहीं और इसलिए काम आगे रुकी पड़ी है। मैंने सपना देखा है कि 2022 में जब आज़ादी के 75 साल होंगे, मैं हिन्दुस्तान के हर गाँव में 24 घंटे बिजली पहुँचाना चाहता हूँ। मैं जहाँ जाता हूँ, बिजली की बात को आगे बढ़ा रहा हूँ और एक बार बिजली आती है तो सिर्फ़ दीया जलता है, ऐसा नहीं है; पूरी ज़िन्दगी रौशन हो जाती है, पीढ़ी रौशन हो जाती है; रोजगार मिलते हैं; शिक्षा मिलती है; कारखाने लगने लगते हैं; किसान को अपने उत्पाद में मूल्य वृद्धि का अवसर मिलता है और इसलिए बिजली को आगे बढ़ाना, बिजली से जीवन में सुधार लाना, एक बहुत बड़े काम का बीड़ा हमने उठाया है और काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 30 सालों में जितनी बिजली का उत्पादन नहीं हुआ, उतनी बिजली का उत्पादन हमने एक साल में करके दिखाया है। अगर काम करने वाली सरकार हो तो काम कैसे होता है, ये हमने करके दिखाया है।

मैं जंगलराज का उदाहरण देना चाहता हूँ। मैं आपको याद कराना चाहता हूँ। जनवरी 2014, याद कीजिये, सुकराबाद पुलिस स्टेशन; 70 साल के एक बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को पुलिस उठाकर ले गई क्योंकि बिजली को बिल झूठा आया था (बिजली आई नहीं लेकिन बिजली को बिल जरूर आया)। सुकराबाद पुलिस स्टेशन में 70 साल के बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। भाईयों-बहनों, पुलिस थाने में बुलाकर निर्दोष लोगों को मरने का कारोबार चला लेकिन इन नेताओं को कोई चिंता नहीं थी। एक ऐसी सरकार जो यहाँ के समाज और जीवन को तबाह कर रही है, इससे बिहार को बचाना है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज बिहार के विकास के लिए दिया। उनको इससे भी बुरा लग गया। अब वे यह कोशिश करने लग गए कि ये पैकेज बिहार को न मिले। अब बिहार की जनता उन्हें पैकेज रोकने का अवसर नहीं देने वाली क्योंकि बिहार को अब विकास चाहिए। और हमने जो पैकेज कहा है, उसमें एक-एक चीज़ लिख-लिख कर कहा है, ज़िम्मेवारी के साथ कहा है। मुंगेर में पुल बनाना, 2300 करोड़ रूपया; नेशनल हाईवे – 80 मुंगेर सेक्शन को चार लेन करना, 1200 करोड़ रूपया; क्यूल-गया रेलवे लाइन 123 किमी, 1300 करोड़ रूपया; क्यूल-तिलैया रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, 87 किमी, 85 करोड़ रूपया; तीन पहाड़ राजमहल सहित अम्मापाली हाट, क्यूल रेलवे लाइन का विद्युतीकरण आदि, 247 किमी और करीब-करीब 280 करोड़ रूपया। पैकेज में मुंगेर को क्या मिलेगा, इसका पूरा खांका बनाकर घोषित किया है और दिल्ली सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें मौका दीजिए। बिहार में मुझे रोड बनाना है, शिक्षा पर काम करना है, आरोग्य का काम करना है, बिजली का काम करना है, नदियों का काम करना है, किसानों के कल्याण का काम करना है। आप बस एक काम कर दीजिये, ये जो रूकावट करने वाली सरकार है, उसे हटा दीजिये और बिहार में यहाँ आकर शैतान बैठना नहीं चाहिए। अब शैतान को बिहार में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में कहीं पर भी ठिकाना नहीं मिलना चाहिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि भारी संख्या में मतदान कीजिये, एनडीए के सभी साथी दलों के साथ भाजपा को विजयी बनाईये। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बांधकर पूरी ताक़त से बोलिये-

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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સાત નવી સંરક્ષણ કંપનીઓ રાષ્ટ્રને સમર્પિત કરવા યોજાયેલા સમારંભમાં પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
October 15, 2021
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“7 નવી કંપનીઓના સર્જનથી ભારતને મજબૂત બનાવવાના ડૉ. કલામના સપનાંને વધુ શક્તિ મળશે”
“આ 7 નવી કંપનીઓ આવનારા સમયમાં દેશમાં સૈન્યની તાકાતનો વધુ મજબૂત પાયો બનાવશે”
“રૂપિયા 65,000 કરોડ કરતાં વધુની ઓર્ડર બુક આ કંપનીઓમાં દેશનો વધી રહેલો વિશ્વાસ પ્રતિબિંબિત કરે છે”
“આજે, સંરક્ષણ ક્ષેત્ર અભૂતપૂર્વ પારદર્શિતા, વિશ્વાસ અને ટેકનોલોજી દ્વારા ચલિત અભિગમનું સાક્ષી બની રહ્યું છે”
“છેલ્લા પાંચ વર્ષમાં આપણી સંરક્ષણ નિકાસમાં 325 ટકાનો વધારો થયો છે”
“સ્પર્ધાત્મક કિંમતો આપણી શક્તિ છે તો સાથે સાથે ગુણવત્તા અને વિશ્વસનીયતા આપણી ઓળખ હોવી જોઇએ”

નમસ્કાર!

રાષ્ટ્રની સુરક્ષા સાથે જોડાયેલા એક મહત્વના કાર્યક્રમમાં આપણી સાથે જોડાયેલા સંરક્ષણ મંત્રી શ્રીમાન રાજનાથ સિંહજી, રાજયકક્ષાના સંરક્ષણ મંત્રી શ્રીમાન અજય ભટ્ટજી, રક્ષા મંત્રાલયના તમામ અધિકારીગણ અને સમગ્ર દેશમાંથી જોડાયલા સાથીઓ.

હમણાં બે દિવસ પહેલાં જ, નવરાત્રિના પવિત્ર પ્રસંગ દરમિયાન અષ્ટમીના દિવસે ખૂબ જ ઘનિષ્ઠ આયોજન ધરાવતા એક ગતિ શક્તિ કાર્યક્રમનો પ્રારંભ કરવાની મને તક મળી હતી અને આજે વિજયાદશમીના પવિત્ર પ્રસંગે રાષ્ટ્રને સશક્ત બનાવવા માટે, રાષ્ટ્રને અજેય બનાવવા માટે જે લોકો દિવસ - રાત બલિદાન આપતા રહે છે તેનું સામર્થ્યમાં વધુ આધુનિકતા લાવવા માટે એક નવી દિશા તરફ આગળ ધપવાની તક અને તે પણ વિજયા દશમીના પવિત્ર તહેવારના દિવસે, તે સ્વયં એક શુભ સંકેત લઈને આવે છે. આ કાર્યક્રમની શરૂઆત ભારતની મહાન પરંપરાને અનુસરીને શસ્ત્ર પૂજન સાથે કરવામાં આવી છે. આપણે શક્તિને સર્જનનું માધ્યમ માનીએ છીએ અને તેવી જ ભાવના સાથે આજે દેશ તેનું સામર્થ્ય વધારી રહયો અને આપ સૌ દેશના એ સંકલ્પોના સારથી પણ છો. આ પ્રસંગે હું આપ સૌને તથા સમગ્ર દેશને ફરીથી વિજયા દશમીની શુભેચ્છાઓ પાઠવુ છું.

સાથીઓ,

આજના દિવસે પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિ, ભારત રત્ન, ડો. એ.પી. જે. અબ્દુલ કલામજીની જયંતિ પણ છે. કલામ સાહેબે જે રીતે પોતાનું જીવન શક્તિશાળી ભારતના નિર્માણ માટે સમર્પિત કરી દીધુ, તે આપણાં સૌ માટે પ્રેરણારૂપ છે. સંરક્ષણ ક્ષેત્રમાં આજે જે નવી કંપનીઓ પ્રવેશી કરી રહી છે તે સમર્થ રાષ્ટ્રના સંકલ્પને વધુ મજબૂત બનાવશે.

સાથીઓ,

આ વર્ષે ભારતે તેની આઝાદીના 75મા વર્ષમાં પ્રવેશ કર્યો છે. આઝાદીના આ અમૃત કાળમાં દેશ એક નવા ભવિષ્યના નિર્માણ માટે નવા સંકલ્પ લેવા તરફ આગળ વધી રહયો છે. અને જે કામ દાયકાઓથી અટકેલાં પડયાં હતાં તેને પૂરાં પણ કરી રહ્યો છે. 41 ઓર્ડિનન્સ ફેકટરીઓને નવા સ્વરૂપે પરિવર્તિત કરવાનો આ નિર્ણય 7 નવી કંપનીઓની શરૂઆત એ દેશની સંકલ્પ યાત્રાનો હિસ્સો છે. આ નિર્ણય છેલ્લા 15થી 20 વર્ષથી અટવાઈ પડયો હતો. મને સંપૂર્ણ ખાત્રી છે કે આ તમામ 7 કંપનીઓ આવનારા સમયમાં ભારતના સૈન્યની તાકાતનો ખૂબ મોટો આધાર બની રહેશે.

સાથીઓ,

આપણી ઓર્ડિનન્સ ફેકટરીઓનો કયારેક દુનિયાની શક્તિશાળી ફેકટરીઓમાં સમાવેશ થતો હતો. આ ફેકટરીઓ પાસે 100થી 150 વર્ષનો અનુભવ છે. વિશ્વયુધ્ધના સમયમાં ભારતની આ ફેકટરીઓનો પ્રભાવ દુનિયાએ જોયો છે. આપણી પાસે બહેતર સાધનો હતાં, વિશ્વસ્તરનું કૌશલ્ય હતું. આઝાદી પછી આપણે આ ફેકટરીઓને અપગ્રેડ કરવાની જરૂર હતી. નવા યુગની ટેકનોલોજીને અપનાવવા બાબતે પણ ખાસ ધ્યાન આપવામાં આવ્યું ન હતું. સમયની સાથે સાથે ભારત પોતાની વ્યૂહાત્મક જરૂરિયાતો માટે વિદેશ ઉપર નિર્ભર બનતો ગયો. આ સ્થિતિમાં પરિવર્તન લાવવામાં નવી ફેકટરીઓએ મોટી ભૂમિકા બજાવશે.

સાથીઓ,

આત્મનિર્ભર ભારત અભિયાન હેઠળ દેશનું લક્ષ્ય ભારતને પોતાના બળથી દુનિયાની મોટી સૈન્ય તાકાત બનાવવાનું છે. ભારતમાં આધુનિક સૈન્ય ઉદ્યોગ વિકસાવવાનું છે. વિતેલાં સાત વર્ષમાં દેશે 'મેક ઈન ઈન્ડીયા' ના મંત્ર સાથે પોતાનો આ સંકલ્પ આગળ ધપાવવાનું કામ કર્યુ છે. સંરક્ષણ ક્ષેત્રમાં આજે દેશમાં જેટલી પારદર્શકતા છે, વિશ્વાસ છે અને ટેકનોલોજી આધારિત અભિગમ છે તેટલો અગાઉ ક્યારેય પણ ન હતો. આઝાદી પછી પહેલીવાર આપણા સંરક્ષણ ક્ષેત્રમાં આટલા મોટા સુધારા થઈ રહયા છે તેટલા સુધારા અગાઉ ક્યારેય પણ થયા નથી. અટકાવવાવાળી અને લકટાવવાવાળી નીતિઓના બદલે સિંગલ વીન્ડો પધ્ધતિની વ્યવસ્થા કરવામાં આવી છે. તેનાથી આપણા ઉદ્યોગોનો આત્મવિશ્વાસ વધ્યો છે. આપણી પોતાની ભારતની કંપનીઓએ પણ પોતાના માટે સંરક્ષણ ક્ષેત્રમાં પણ શકયતાઓ શોધવાનું શરૂ કરી દીધુ છે અને હવે ખાનગી ક્ષેત્ર અને સરકાર એક સાથે મળીને રાષ્ટ્રની સુરક્ષાના ધ્યેયને આગળ ધપાવી રહયાં છે.   

ઉત્તર પ્રદેશ અને તામિલનાડુમાં સંરક્ષણ કોરિડોરનું ઉદાહરણ આપણી સામે છે. આટલા ઓછા સમયમાં મોટી મોટી કંપનીઓએ 'મેક ઈન ઈન્ડીયા' માં પોતાની રૂચિ દર્શાવી છે. તેનાથી દેશના યુવાનો માટે પણ નવી તકો ઉભી થઈ રહી છે અને સપ્લાય ચેઈન તરીકે અનેક એમએસએમઈ માટે નવી શકયતાઓ ઉભી થઈ રહી છે. દેશમાં જે નવુ નીતિલક્ષી પરિવર્તન કરવામાં આવ્યું છે તેનું પરિણામ એ આવ્યું છે કે વિતેલા 5 વર્ષમાં આપણા સંરક્ષણ ક્ષેત્રની નિકાસ પણ સવા ત્રણસો ટકા કરતાં વધુ વધી છે.

સાથીઓ,

હજુ થોડા સમય પહેલાં જ સંરક્ષણ મંત્રાલયે એવાં 100થી વધુ એવાં વ્યૂહાત્મક ઉપકરણોની યાદી તૈયાર કરી છે કે જેની હવે બહારથી આયાત નહીં કરવી પડે. આ નવી કંપનીઓ માટે પણ દેશે હમણાં રૂ. 65 હજાર કરોડના ઓર્ડર મૂકયા છે, તે આપણાં સંરક્ષણ ઉદ્યોગમાં દેશનો વિશ્વાસ બતાવે છે અને વધતો જતો વિશ્વાસ જોવા મળી રહ્યો છે. એક કંપની શસ્ત્રો અને વિસ્ફોટકોની જરૂરિયાત પૂરી કરશે. તો બીજી કંપની લશ્કર માટે વાહનોનું ઉત્પાદન કરશે. આ રીતે અતિ આધુનિક શસ્ત્રો અને ઉપકરણો હોય સંરક્ષણ દળોને સુગમતા થાય તેવી ચીજો હોય, ઓપ્ટિકલ ઈલેકટ્રોનિક્સ હોય કે પછી પેરાશૂટસ હોય, આપણું લક્ષ્ય એ છે કે ભારતની આ કંપનીઓ આ ક્ષેત્રોમા પોતાની નિપુણતા હાંસલ કરવાની સાથે સાથે એક વૈશ્વિક બ્રાન્ડ પણ બની રહે. સ્પર્ધાત્મક ખર્ચ આપણી તાકાત છે. ગુણવત્તા અને ભરોંસાપાત્રતા આપણી ઓળખ હોવી જોઈએ.

સાથીઓ,

મને વિશ્વાસ છે કે આ નવી વ્યવસ્થાથી, આપણે ત્યાં ઓર્ડિનન્સ ફેકટરીઓમાં જે પ્રતિભાઓ છે. જે કોઈ લોકો કશુંક નવુ કરવા માંગે છે તે લોકોને પોતાની પ્રતિભા દર્શાવવાની સંપૂર્ણ સ્વતંત્રતા મળી રહેશે. જ્યારે આ પ્રકારની નિપુણતાને ઈનોવેશનની તક મળશે ત્યારે તે કમાલ કરી બતાવે છે. તમે તમારી નિપુણતા વડે જે પ્રોડકટસ બનાવીને દેખાડશો તે ભારતના સંરક્ષણ ક્ષેત્રની ક્ષમતામાં વધારો કરશે જ પણ સાથે સાથે આઝાદી પછી જે એક ખાલીપો આવી ગયો હતો તેને પણ દૂર કરશે.

સાથીઓ,

21મી સદીમાં કોઈ એક દેશ હોય કે કંપની તેની વૃધ્ધિ અને બ્રાન્ડ વેલ્યુ તેના સંશોધન અને ઈનોવેશનથી નક્કી થતી હોય છે. સોફટવેરથી માંડીને અંતરિક્ષ ક્ષેત્ર સુધી, ભારતની વૃધ્ધિ, ભારતની ઓળખનું એ સૌથી મોટુ ઉદાહરણ છે. એટલા માટે મારો આ તમામ 7 કંપનીઓને ખાસ આગ્રહ છે કે, સંશોધન અને ઈનોવેશન તમારી કાર્ય સંસ્કૃતિનો હિસ્સો બનવો જોઈએ. તેને અગ્રતા મળવી જોઈએ. તમારે દુનિયાની મોટી કંપનીઓની માત્ર બરાબરી જ કરવાની નથી પણ, ભવિષ્યની ટેકનોલોજીની પણ આગેવાની લેવાની છે. એટલા માટે એ જરૂરી છે કે તમે નવી વિચાર પધ્ધતિ, સંશોધનલક્ષી યુવાનોને વધુને વધુ તક પૂરી પાડો, તેમને વિચારવાનો પૂરતો અવકાશ આપો. હું દેશનાં સ્ટાર્ટ-અપ્સને પણ કહીશ કે આ 7 કંપનીઓના માધ્યમથી આજે દેશે જે નવી શરૂઆત કરી છે, તેનો તમે હિસ્સો બનો. તમારા સંશોધન, તમારી પ્રોડક્ટસ કેવી રીતે આ કંપનીઓ સાથે મળીને એકબીજાની ક્ષમતાઓને લાભ પૂરો પાડી શકે તે અંગે તમારે વિચારવું જોઈએ.

સાથીઓ,

સરકારે તમામ કંપનીઓને ઉત્પાદન માટે બહેતર વાતાવરણ પૂરૂ પાડવાની સાથે સાથે કામ કરવાની પણ સ્વાયત્તતા આપી છે. તેની સાથે સાથે એ બાબતની પણ ખાત્રી રાખવામાં આવી છે કે આ ફેક્ટરીઓના કર્મચારીઓના હિતની સંપૂર્ણ સુરક્ષા થાય. મને વિશ્વાસ છે કે દેશને તમારી નિપુણતાનો ખૂબ મોટો લાભ મળશે અને આપણે સૌ સાથે મળીને આત્મનિર્ભર ભારતનો આપણો સંકલ્પ સાકાર કરીશું.

આવી ભાવના સાથે, ફરી એકવાર આપ સૌને વિજયા દશમીની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ પાઠવું છું. આપ સૌને ખૂબ ખૂબ ધન્યવાદ!