Jungleraaj govt. had built an industry of kidnapping and extortion in Bihar: PM
They were railway ministers so long but has the demands of Munger been met: PM
We plan to do lot of work for Bihar and we need your help, you need to remove this disruptive govt: PM
Mahaswarthbandhan has looted Bihar for 60 years; we must not give them another chance: PM
Jungleraaj is at its peak in Bihar, there had been 4000 kidnappings between January to July this year: PM

भारत माता की जय

मंच पर विराजमान बिहार के हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य श्रीमान कुशवाहा जी, हम पार्टी के अध्यक्ष और तारापुर से उम्मीदवार श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह, श्री पाटिल, पूर्व सांसद श्री सूरजभान सिंह, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के महासचिव श्रीमान शिवराज सिंह जी, मुंगेर की सांसद श्रीमती वीणा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान रणधीर सिंह, मुंगेर नगर निगम की मेयर श्रीमती कुमकुम देवी, मुंगेर नगर निगम की डिप्टी मेयर सुश्री बेबी चंकी, सूर्यगढ़ से उम्मीदवार श्री प्रेम रंजन जी, भाजपा से लखीसराय के विधानसभा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा जी, भाजपा मुंगेर से उम्मीदवार श्री प्रणव यादव जी, लोजपा से जमालपुर से उम्मीदवार श्री मानसुख कुंवर जी, सुभाष चन्द्र बोस जी, बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।

सभी को इस विराट जन समुदाय का आशीर्वाद मिला है और यह इस बात का सबूत है कि अब बिहार में क्या होने वाला है। एक सच बता दूँ, मैं गुजरात में कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहा और गुजरात में लम्बे अरसे तक लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने का अवसर दिया लेकिन कभी सुबह 10-11 बजे ऐसी रैली करनी हो तो हम नहीं कर पाएंगे। हम शाम के समय का इंतज़ार करते हैं। मैं हैरान हूँ कि आप लोग सोते हो कि नहीं सोते हो। ये दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत है कि हवा का रुख़ किस तरफ़ चल रहा है। देश के पोलिटिकल पंडितों को इस बार अपने सारे राजनीतिक समीक्षा के आधार बदलने के लिए बिहार ने मज़बूर कर दिया। लम्बे अरसे तक बिहार की राजनीति की चर्चा या तो कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द रहती थी या कुछ जातियों के इर्द-गिर्द रहती थी; पहली बार बिहार का चुनाव युवाओं के जोश के आस-पास केन्द्रित हुआ है, पहली बार चुनाव विकास के विचार पर केन्द्रित हुआ है। मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक पंडितों को इस बात पर मुहर लगाने के दिन आ गए हैं।

आज 8 अक्टूबर है। मुझे मुंगेर की उस धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जहाँ योग को आधुनिक रूप दिया गया। पूरे विश्व को मुंगेर ने आकर्षित किया और यही मुंगेर जैसी कई योगपीठ है देश में जिसने दुनिया के 190 से ज्यादा देशों को योग मनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 8 अक्टूबर को याद इसलिए किया क्योंकि 1979 में इसी दिन हमने हमारे प्राणप्रिय नेता आदरणीय जयप्रकाश नारायण को खो दिया था। जयप्रकाश नारायण जी में मौत से भी मुकाबला करने की ताक़त थी। उन्होंने अंग्रेज़ों के नाकों में दम कर दिया था। आजादी के बाद वे सुशासन के लिए लड़ते रहे, भ्रष्टाचार से लड़ते रहे, देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया और संपूर्ण क्रांति का मंत्र लेकर के देश के नौजवानों में एक नई चेतना भर दी थी लेकिन जयप्रकाश बाबू, कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि हमारे बीच से चले गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस देश में आपातकाल लगाया था। हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया था और जयप्रकाश नारायण जी को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था और यहीं उनकी बीमारी आई और उन्हें ले गई। दुर्भाग्य देखिये कि को कभी जयप्रकाश नारायण जी का गीत गाते थे, यही लोग उस कांग्रेस के साथ बैठे हैं जिस कांग्रेस ने जयप्रकाश बाबू को जेल के अन्दर बंद कर दिया था। ये स्वार्थ की राजनीति नहीं है तो क्या है; ये जयप्रकाश नारायण जी के साथ धोखा नहीं है तो क्या है। राम मनोहर लोहिया जीवनभर गैर-कांग्रेसी विचारों के लिए जूझते रहे। उसी राम मनोहर लोहिया का नाम लेने वाले लोग आज कांग्रेस द्वारा पिलाये गए पानी को पीकर के हमें कोसते हैं। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और मेरा यह विश्वास है कि बिहार के ये नौजवान बिहार की तक़दीर भी बदलेंगे, बिहार की तस्वीर भी बदलेंगे।

मैं आज मुंगेर की इस धरती पर आया हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मुझे नंदलाल बोस जी को स्मरण करना चाहिए। यहाँ बहुत कम लोगों को उनके विषय में सुनने का अवसर मिला होगा। तारापुर में जन्मे नंदलाल बोस, जिस प्रकार बाबा अम्बेदकर ने भारत को संविधान दिया, उस संविधान को नया रूप-रंग देने का काम मुंगेर के लाल नंदलाल बोस ने किया। अलग-अलग खण्डों में 22 चित्र, जो आज भी हमारे संविधान का मूल तत्त्व है, वे 22 चित्र, उसकी सजावट, उसका रंग-रोगन इसी मुंगेर की धरती के बेटे नंदलाल बोस ने किया था। मैं आज उनको आदरपूर्वक नमन करता हूँ। कला, संस्कृति, ये बिहार के रग-रग में हैं और जब भी मौका मिला, इसने अपना असली रूप दिखाया है इसलिए पूरा देश बिहार का गौरवगान करता है, बिहार का आदर और सम्मान करता है।

भाईयों-बहनों, जब मैं जयप्रकाश जी को याद करता हूँ तो स्वाभाविक... पुराना मुंगेर जिला था; अब तो उसके हिस्से हो गए। सिमरिया में राष्ट्रकवि दिनकर का जन्म हुआ था और उनकी वह कविता जिसने पूरे देश के नौजवानों को प्रेरित किया था, “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”, इसी को लेकर के इतिहास का नौजवान चल पड़ा था। इस बार इस चुनाव में बिहार के भाग्य को बदलने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।

मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ है। ये वो धरती है जहाँ चरखाधारी मोहन महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। ये वो धरती है जहाँ के चक्रधारी द्वारकाधीश भगवन श्रीकृष्ण थे। और देखिये आज भी इस धरती पर द्वारकाधीश की परंपरा कैसी चल रही है। श्रीकृष्ण के संस्कारों की छाया उस धरती को कितनी प्रेरणा देती है, यही तो कारण है कि वहां हमारे यहाँ जो यदुवंशी लोग हैं जिन्होंने देश को श्वेत क्रांति दी और आज दूध के क्षेत्र में अमूल जैसी कई डेयरियाँ गुजरात की प्रसिद्ध है। भारत में श्वेत क्रांति का केंद्र बिंदु गुजरात बन गया था। श्रीकृष्ण की परंपरा को उन्होंने गौ-पालन करके निभाया।

लेकिन यहाँ के एक नेता क्या-क्या खा गए और उन्होंने यदुवंशियों का अपमान किया है। लालू जी चुनाव आते हैं, जाते हैं लेकिन आप ये मत भूलिये कि यही यदुवंश के लोग थे जो आपके साथ खड़े रहे थे और तब जाकर आपको सत्ता के सिंहासन तक जाने का अवसर मिला था। आज यदुवंश के लोग अगर आपको सवाल करते हैं तो आप उन पर क्या-क्या आरोप लगते हो। इतना गंभीर आरोप उन्होंने लगाया है कि यदुवंशी क्या खाते हैं। ये यदुवंश का अपमान है कि नहीं? ये बिहार का अपमान है कि नहीं? और जब यदुवंश का गुस्सा भड़क गया तो वो कह रहे हैं कि मेरे भीतर शैतान प्रवेश कर गया। मेरे मन में एक सवाल उठता है कि शैतान को यही ठिकाना मिला क्या, पूरे हिन्दुस्तान में, पूरे विश्व में कोई ठिकाना नहीं मिला; मिला तो सिर्फ़ लालू जी का ठिकाना मिला। मुझे बताईये, आपके घर, आपके गाँव, आपके मोहल्ले आया आपके शरीर में शैतान आने की हिम्मत कर सकता है? जैसे रिश्तेदार आता है और हम पहचान लेते हैं; उन्होंने शैतान को पहचान भी लिया। अब मुझे बताईये कि जहाँ शैतान रहने की हिम्मत कर सकता है, जहाँ शैतान को रहने के लिए अच्छी खातिरदारी मिल सकती है, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह हो सकती है क्या? इसलिए शैतान ने जिसका पता ढूंढ लिया है, उस पते पर कभी हम देखेंगे भी नहीं।

अब तो बिहार को बचाना है, इसे आगे बढ़ाना है। अब तक तो हम सोचते थे कि हमारी लड़ाई इंसानों से है, पहली बार पता चला कि इंसानों के अन्दर शैतान पहुँच जाता है और वो हमारे पीछे पड़ा हुआ है। आप कल्पना कीजिये, बिहार में आजादी के बाद राज किसने किया? 35 साल तक राज किया कांग्रेस ने, और 25 साल तक राज किया इन बड़े-छोटे भाईयों ने। जिन्होंने ये 60 साल बिहार को लूटा है, अब वो आकर के स्वार्थबंधन बना रहे हैं और छोटा नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को और अधिक बर्बाद होने देना है? बिहार को तबाही से मुक्त कराना है? 60 साल तक जिन्होंने बिहार के भविष्य को रौंद डाला है, क्या ऐसे ‘महास्वार्थबंधन’ को अब बिहार में जगह देनी चाहिए? हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति होनी चाहिए कि नहीं?

इस कांग्रेस पार्टी की जब सामने से आने की ताकत ख़त्म हो गई है तो पिछले दरवाजे से आ गए हैं। आज कांग्रेस के नेता अपने किसी नेता का गुणगान गाने की ताकत खो चुके हैं। कांग्रेस का ऐसा हाल कभी देश ने देखा नहीं था और उसका कारण हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में छोटा या बड़ा राजनेता हो; किसी कस्बे या विचारधारा का हो; सार्वजनिक जीवन में अहंकार कितना विनाश करता है, उसका उदाहरण कांग्रेस पार्टी है। ये जनता है, चुप रहती लेकिन समय आने पर चुन-चुन कर हिसाब चुकता करती है। लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के अहंकार का क्या हुआ, ये सब जानते हैं इस बार बिहार के चुनाव में अहंकार कैसे पराजित होने वाला है, ये बिहार के नौजवान करके दिखाने वाले हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ये चुनाव सीधा-सीधा दो बातों पर है; निर्णय आपको करना है। एक तरफ जंगलराज है और एक तरफ विकासराज है। जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि जंगलराज फिर से आने देना चाहिए? अभी भनक आ गई है। बिहार सरकार के खुद के आंकड़े, जनवरी से जुलाई के आंकड़े कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज का जो सबसे बड़ा उद्योग लगा था वह था - अपहरण करो, फ़िरौती लो। जनवरी से जुलाई के आंकड़े जो बिहार सरकार ने घोषित किये हैं, उसके हिसाब से 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं?

आपको याद है आने वाले दिनों में त्यौहार का मौसम है, दुर्गापूजा की धूम होगी, विजयादशमी का महोत्सव आएगा, रामलीला चलेगी; आपमें से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा या बहुत बचपन के दिन होंगे; दुर्गा मंडप में जाना हो और मां शाम को रोकती थी और कहती थी कि अब सूरज ढालने वाला है और बाहर नहीं जा सकते; मां को यहीं से नमन कर लो; ये दिन थे कि नहीं थे? रामलीला हुआ करती थी लेकिन शाम के समय में लोग जाने से डरते थे। त्यौहार के दिनों में कोई अगर नई गाड़ी खरीद ले तो बेचारे तो चिंता रहती थी कि यहाँ के किसी नेता को पता चल गया तो उसके चेले-चपाटे यहाँ से आकर के गाड़ी उठाकर ले जाएंगे। गाड़ी भी जाएगी, पैसे भी जाएंगे और मांगने गए तो जान भी चली जाएगी। ये दिन बिहार ने देखे हैं कि नहीं देखें हैं? इसलिए मैं कहता हूँ कि बिहार में चुनाव विकासराज के लिए होना चाहिए न कि जंगलराज के लिए।

भाईयों-बहनों, बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ कुछ इलाकों में इतना पानी है, जिस पानी के लिए हिन्दुस्तान के बहुत सारे इलाके तरसते हैं और बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ नौजवान भरे पड़े हैं। यहाँ किसी को कुछ भी न आए और सिर्फ़ यहाँ के पानी और जवानी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया जाए तो बिहार का जीवन बदल जाएगा। यहाँ ऐसी सरकारें आई हैं जब बिहार का पानी भी बर्बाद हुआ और यहाँ की जवानी भी पलायन कर गई। मुझे बिहार का पानी और यहाँ की जवानी, इन दोनों पर मेरा भरोसा है जो न सिर्फ़ बिहार को बल्कि पूरे हिन्दुस्तान को बदलेंगे। मैं यह विश्वास लेकर यहाँ आया हूँ।

पानी का सही प्रबंध हो और जवानी को सही अवसर मिले; देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा लेकिन पानी गया तो गया और हम तो जानते हैं कि बिहार में एक और उद्योग चल पड़ा है, रेत की चोरी करने का सारी नदियों का कितना बुरा हाल है। नदी के किनारे पर रहने वाले लोग बालू चोरों के कारण कितने परेशान हैं, वो यहाँ के लोग भली-भांति जानते हैं। पानी तो नहीं बचा, बालू तक नहीं बचने दिया इन लोगों ने और यह बिहार की बर्बादी का कारण बना। ये आवश्यक है कि हमें बिहार के विकास की ओर ध्यान केन्द्रित करना है। मैं जरा पूछना चाहता हूँ इन नेताओं से कि मोदी-मोदी की माला जपते रहते हैं। आपका प्यार अलग है; आप मोदी-मोदी बोलते हो तो उनकी नींद खराब होती है।

भाईयों-बहनों, बिहार के ये दोनों महाशय रेल मंत्री थे कि नहीं? इतने साल रेल मंत्री रहे कि नहीं रहे? कोई मुझे बताये कि मुंगेर के रेल पुल का काम कर पाए? ये पूरा होना चाहिए कि नहीं? उन्होंने किया? वो तो बिहार के थे, रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर का पुल नहीं बना; पटना का पुल लटका पड़ा है। ये इनके इरादे हैं और इसलिए मैं ये कहने आया हूँ कि हमें विकास की गाड़ी को तेज़ चलाना है। मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ। 11वीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना, क्या हुआ? यहां के मुख्यमंत्री जी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था। 2010 के चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में नहीं आऊंगा, वोट नहीं मांगूंगा; ये कहा था? उन्होंने वचन का पालन किया? आपके साथ धोखा किया कि नहीं? बिजली तो छोड़ो, उन्होंने कैसी सरकार चलाई है; मैं बता रहा हूँ।

11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना, बिहार को गाँवों में बिजली के लिए 8215 करोड़ रुपये दिल्ली से मिले लेकिन ये लोग बिहार में ऐसी सरकार चला रहे हैं, 8000 करोड़ में से सिर्फ़ 1300 करोड़ का खर्च कर पाए। खर्च करने की भी ताकत नहीं है; न ताकत है और न इरादा है और जब तक उनका बंटवारा तय नहीं होता बात आगे चलती नहीं और इसलिए काम आगे रुकी पड़ी है। मैंने सपना देखा है कि 2022 में जब आज़ादी के 75 साल होंगे, मैं हिन्दुस्तान के हर गाँव में 24 घंटे बिजली पहुँचाना चाहता हूँ। मैं जहाँ जाता हूँ, बिजली की बात को आगे बढ़ा रहा हूँ और एक बार बिजली आती है तो सिर्फ़ दीया जलता है, ऐसा नहीं है; पूरी ज़िन्दगी रौशन हो जाती है, पीढ़ी रौशन हो जाती है; रोजगार मिलते हैं; शिक्षा मिलती है; कारखाने लगने लगते हैं; किसान को अपने उत्पाद में मूल्य वृद्धि का अवसर मिलता है और इसलिए बिजली को आगे बढ़ाना, बिजली से जीवन में सुधार लाना, एक बहुत बड़े काम का बीड़ा हमने उठाया है और काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 30 सालों में जितनी बिजली का उत्पादन नहीं हुआ, उतनी बिजली का उत्पादन हमने एक साल में करके दिखाया है। अगर काम करने वाली सरकार हो तो काम कैसे होता है, ये हमने करके दिखाया है।

मैं जंगलराज का उदाहरण देना चाहता हूँ। मैं आपको याद कराना चाहता हूँ। जनवरी 2014, याद कीजिये, सुकराबाद पुलिस स्टेशन; 70 साल के एक बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को पुलिस उठाकर ले गई क्योंकि बिजली को बिल झूठा आया था (बिजली आई नहीं लेकिन बिजली को बिल जरूर आया)। सुकराबाद पुलिस स्टेशन में 70 साल के बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। भाईयों-बहनों, पुलिस थाने में बुलाकर निर्दोष लोगों को मरने का कारोबार चला लेकिन इन नेताओं को कोई चिंता नहीं थी। एक ऐसी सरकार जो यहाँ के समाज और जीवन को तबाह कर रही है, इससे बिहार को बचाना है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज बिहार के विकास के लिए दिया। उनको इससे भी बुरा लग गया। अब वे यह कोशिश करने लग गए कि ये पैकेज बिहार को न मिले। अब बिहार की जनता उन्हें पैकेज रोकने का अवसर नहीं देने वाली क्योंकि बिहार को अब विकास चाहिए। और हमने जो पैकेज कहा है, उसमें एक-एक चीज़ लिख-लिख कर कहा है, ज़िम्मेवारी के साथ कहा है। मुंगेर में पुल बनाना, 2300 करोड़ रूपया; नेशनल हाईवे – 80 मुंगेर सेक्शन को चार लेन करना, 1200 करोड़ रूपया; क्यूल-गया रेलवे लाइन 123 किमी, 1300 करोड़ रूपया; क्यूल-तिलैया रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, 87 किमी, 85 करोड़ रूपया; तीन पहाड़ राजमहल सहित अम्मापाली हाट, क्यूल रेलवे लाइन का विद्युतीकरण आदि, 247 किमी और करीब-करीब 280 करोड़ रूपया। पैकेज में मुंगेर को क्या मिलेगा, इसका पूरा खांका बनाकर घोषित किया है और दिल्ली सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें मौका दीजिए। बिहार में मुझे रोड बनाना है, शिक्षा पर काम करना है, आरोग्य का काम करना है, बिजली का काम करना है, नदियों का काम करना है, किसानों के कल्याण का काम करना है। आप बस एक काम कर दीजिये, ये जो रूकावट करने वाली सरकार है, उसे हटा दीजिये और बिहार में यहाँ आकर शैतान बैठना नहीं चाहिए। अब शैतान को बिहार में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में कहीं पर भी ठिकाना नहीं मिलना चाहिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि भारी संख्या में मतदान कीजिये, एनडीए के सभी साथी दलों के साथ भाजपा को विजयी बनाईये। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बांधकर पूरी ताक़त से बोलिये-

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ

લોકપ્રિય ભાષણો

શ્રી રામ જન્મભૂમિ મંદિર ધ્વજારોહણ ઉત્સવ દરમિયાન પ્રધાનમંત્રીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
India’s Agricultural Transformation: How India’s Agri sector transformed over the last decade

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દમણ, ગુજરાતમાં વિવિધ વિકાસ કાર્યોના શિલાન્યાસ/લોકાર્પણ પ્રસંગે પ્રધાનમંત્રીજીના સંબોધનનો મૂળપાઠ
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવના એડમિનિસ્ટ્રેટર પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલ, સંસદમાં મારા સહયોગી કલાબેન ડેલકર, દમણ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના પ્રમુખ દીપિકા ટંડેલ જી, દમણ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ ધર્મ બાબુ પટેલ, સિલવાસા મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ સોમનાથ દેવરેજી, દાદરા નગર હવેલી જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ નિશા ભાવસાર જી, દીવ મ્યુનિસિપલ કાઉન્સિલના અધ્યક્ષ હરીશ કપાયાજી, દીવ જિલ્લા પંચાયતના અધ્યક્ષ કોટિયા રંજીતાબેન અને અહીં વિશાળ સંખ્યામાં પધારેલા મારા વહાલા ભાઈઓ-બહેનો,

તમે જેમ અહીં એકઠા થયા છો, તેવી જ રીતે લક્ષદ્વીપમાં પણ બહુ મોટી સંખ્યામાં લોકો વીડિયોના માધ્યમથી અમારી સાથે જોડાયેલા છે, કારણ કે આજે લક્ષદ્વીપના વિકાસની પણ એક નવી શરૂઆત, એક નવો પ્રકલ્પ, જે આખા લક્ષદ્વીપના જીવનમાં એક ક્રાંતિકારી કામ કરવાનો છે, તેના માટે પણ કેટલીક યોજનાઓનું શિલાન્યાસ અને લોકાર્પણ થયું છે.

સાથીઓ,

કેટલાક વર્ષો પહેલાં, જ્યારે હું તમારી વચ્ચે આવ્યો હતો, તો મેં કહ્યું હતું આ આપણું દમણ ઝડપથી મિની ઇન્ડિયા બની રહ્યું છે અને આજે હું જોઈ રહ્યો છું, ડાબી બાજુ આખું બંગાળ છે અને જમણી બાજુ આખું અસામ છે. દમણ મિની ઇન્ડિયાનું જીવતું-જાગતું ઉદાહરણ બની ચૂક્યું છે. અહીંની વિવિધતા, અલગ-અલગ ક્ષેત્રોના લોકોનું અહીં નિવાસ કરવું, આખા ભારતની સુંદર ઝલક તમારી વચ્ચે આવીને મળી જાય છે. તમે બધા આટલી મોટી સંખ્યામાં અમને આશીર્વાદ આપવા આવ્યા, હું આના માટે આપ સૌનો ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ કરું છું.

 

ભાઈઓ-બહેનો,

મને કેટલીય વાર દમણ અને દીવ આવવાનો અવસર મળ્યો છે. દાદરા અને નગર હવેલી પણ આવતો રહું છું અને જ્યારે હું મુખ્યમંત્રી કે પ્રધાનમંત્રી નહોતો, ત્યારે તો બહુ વાર આવતો હતો. પરંતુ હવે જ્યારે હું અહીં આવું છું અને અહીંના સુશાસનને જોઈને, ગવર્નન્સ મોડલને જોઈને બહુ સારું લાગે છે. દર વખતે મને લાગે છે કે ગત વખતની સરખામણીમાં આ ક્ષેત્ર વિકાસની રાહ પર માઈલો આગળ વધી ગયું છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવએ દાયકાઓથી વિકાસના સપના જોયા હતા. જે સપના પહેલાં જોયા, એ પેઢીઓ તો ચાલી ગઈ. પરંતુ આજે જે પેઢી છે, તે પોતાની આંખોની સામે જોઈ રહી છે કે તેમના માતા-પિતા, દાદા-દાદી જે સપના જોતા હતા, એ આજે સપના પૂરા થતા તમે પોતાની આંખોથી જોઈ રહ્યા છો. આજે પણ અહીં કનેક્ટિવિટી, હેલ્થ, એજ્યુકેશન, ટુરિઝમ અને અર્બન ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર આનાથી જોડાયેલી અનેક પરિયોજનાઓનું ઉદ્ઘાટન અને શિલાન્યાસ થયું છે. વિકાસના આ કામ દમણ અને આખી યુનિયન ટેરિટરી માટે અહીંના લોકોના જીવનને સરળ બનાવશે. આનાથી યુવાનો માટે નવા અવસરો તૈયાર થશે. આ કામોની પાછળ પ્રફુલ્લ ભાઈ પટેલની દ્રષ્ટિ, તેમની અને તેમની ટીમની મહેનત સાફ-સાફ નજરે પડે છે. હું આના માટે પણ પ્રફુલ્લ ભાઈ અને તેમની આખી ટીમની સરાહના કરું છું. હું બધાને લક્ષદ્વીપના લોકોને, દાદરા-નગર હવેલીના લોકોને અનેક-અનેક શુભકામનાઓ આપું છું, આપ સૌને વધામણી આપું છું.

સાથીઓ,

આજે તમારી વચ્ચે આવ્યો છું, તો એક સુખદ સમાચાર આવ્યા છે. હું તો આજે સવારે દિલ્હીથી નીકળી ચૂક્યો હતો, પરંતુ અત્યારે જે આંકડા સામે આવ્યા છે, જે સમાચાર આવ્યા છે, તે ખરેખર પ્રસન્નતા આપનારા છે અને હું પણ ઈચ્છું છું, આ ખુશી તમારી સાથે પણ વહેંચું. આજે જે આંકડા આવ્યા છે, એ આંકડાઓથી સાફ છે કે ભારતની અર્થવ્યવસ્થાનો પાયો કેટલો મજબૂત છે. વર્ષ 2025-26 માં એટલે કે જે ફાઇનાન્સિયલ યર પાછલું પૂરું થયું, વર્ષ 2025-26 માં ભારતે 7.7 પર્સન્ટનો ગ્રોથ રેટ હાસલ કર્યો છે, 7.7 અને પાછલો ક્વાર્ટર જે 31 માર્ચે ખતમ થયો, તેમાં પણ ભારતનો ગ્રોથ 7.8 પર્સન્ટ રહ્યો છે, 7.8 અને આ દુનિયામાં તેજ ગતિથી આગળ વધનારી મોટી ઇકોનોમી છે. દરેક ભારતીયને ગર્વ થાય, આ છે તેની ગતિ. આજે દેશ જે રિફોર્મ એક્સપ્રેસ પર ચાલી રહ્યો છે, આજે દેશમાં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરનો જે આટલો વિકાસ થઈ રહ્યો છે, ગરીબ કલ્યાણને લઈને આટલા મોટા સ્તરે જે કામ ચાલી રહ્યું છે, આ બધા પ્રયાસોનું પરિણામ છે કે આજે દેશ મોટી ઇકોનોમીમાં સૌથી તેજ ગતિથી આગળ વધી રહ્યો છે અને આપણે બધા જાણીએ છીએ, દુનિયા સંકટોમાં ઘેરાયેલી છે, આખી દુનિયાની અર્થવ્યવસ્થા સવાલોના નિશાનો નીચે દબાયેલી પડી છે, વૈશ્વિક સંકટના આ ખરાબમાં ખરાબ દોરમાં પણ 140 કરોડ દેશવાસીઓના સામૂહિક પ્રયાસોથી ભારત પોતાની જાતને સંભાળી તો રાખી જ રહ્યું છે, પરંતુ સાથે-સાથે સૌથી આગળ રહેવામાં પણ તેના પ્રયાસો સફળ થતા જઈ રહ્યા છે. હું દેશવાસીઓને આર્થિક ક્ષેત્રની આ નવી ઊંચાઈને પ્રાપ્ત કરવા માટે ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું અને હું દેશને ફરી આશ્વસ્ત કરું છું કે દેશ દુનિયાભરમાં ચાલી રહેલા આ સંકટોનો સામનો કરતા Reform, Perform અને Transform ના રસ્તા પર આવી જ રીતે દ્રઢ સંકલ્પની સાથે, તેજ ગતિથી આગળ વધતો જ રહેશે, આ મારી દેશવાસીઓને ગેરંટી છે.

સાથીઓ,

આજે આપણા માટે વિકાસ જેટલો જરૂરી છે, એટલું જ મહત્વનું છે કે આપણું વિકાસનું મોડલ સસ્ટેનેબલ હોય. આજે વર્લ્ડ એન્વાયરમેન્ટ ડેના દિવસે આપણા અહીં યુનિયન ટેરિટરી સ્ટેટ આ સંકલ્પને સાકાર કરી રહ્યું છે. આજે એક તરફ અહીં હજારો કરોડની વિકાસ પરિયોજનાઓનું લોકાર્પણ અને શિલાન્યાસ થયું છે. સાથે જ અહીં આશરે એક લાખ એક વૃક્ષ માતાના નામે, એક લાખ છોડ પણ વાવવામાં આવી રહ્યા છે. મને ગર્વ છે કે એક એવો કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ છે, જેણે સરકારી ઈમારતોમાં શત પ્રતિશત, 100 પર્સન્ટ સૌર ઊર્જાના ઉપયોગની ઉપલબ્ધિ હાંસલ કરી છે. આજે દીવમાં દિવસમાં જેટલી વીજળીની ડિમાન્ડ હોય છે, તે સોલર પાવરથી જ પૂરી થઈ રહી છે અને આપણે તો આને હજુ આગળ લઈને જવાનું છે. ઘરોમાં પણ સોલર ઊર્જાથી વીજળી મળે, એટલું જ નહીં વધારાની વીજળીથી પરિવારની આવક પણ થાય, તેના માટે રૂફટોપ સોલર પ્લાન્ટ્સ લગાવવાની પહેલ શરૂ થઈ છે. હું આ ઉપલબ્ધિઓ માટે પણ આપ સૌની સરાહના કરું છું.

 

સાથીઓ,

સાથે-સાથે મને એ પણ જણાવવામાં આવ્યું છે, દમણના લોકો આ દિવસોમાં અહીં સ્વચ્છતા અભિયાન પણ ચલાવી રહ્યા છે. આ દર્શાવે છે કે સ્વચ્છતા કઈ રીતે દમણના જનજીવનમાં સંસ્કાર બની ચૂકી છે અને આ સંસ્કાર સ્વચ્છતામાં નજરે પડી રહ્યા છે. હું આ જનભાગીદારીના તમારા પ્રયાસો માટે દમણના લોકોનું અભિનંદન કરું છું.

સાથીઓ,

દાદરા નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આ સંઘ શાસિત પ્રદેશ હોવાની સાથે જ ભારતની ઓળખ અને વિરાસત પણ છે. એટલા માટે, આના વિકાસ માટે અમારા લક્ષ્ય પણ સાધારણ નથી. મને યાદ છે, જ્યારે હું ગયા વર્ષે સિલવાસા આવ્યો હતો, ત્યારે મેં તમને સિંગાપોરનું ઉદાહરણ આપ્યું હતું. મેં કહ્યું હતું કે એક સમયે સિંગાપોર માછીમારોનું નાનું એવું ગામ હતું. પરંતુ, સિંગાપોરના લોકોએ એક સપનું જોયું, ત્યાંના લોકોએ મોટું લક્ષ્ય નક્કી કર્યું અને આજે એ જ સિંગાપોર દુનિયાનું સૌથી મોટું બિઝનેસ હબ બની ચૂક્યું છે. આજે દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ પણ એ જ સપનું જોઈ રહ્યા છે. આ નમો એરપોર્ટ, દમણગંગા નદી પર બનનારો આઇકોનિક બ્રિજ, ‘બીચ ફ્રન્ટ’ તેના પર બનનારો કન્વેન્શન સેન્ટર, આવા બધા ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર દ્વારા આપણે ભવિષ્યના મોટા સંકલ્પોનો પાયો નાખી રહ્યા છીએ. આ પ્રોજેક્ટ્સ દ્વારા લોકોની અવરજવર સરળ થશે. અહીં બિઝનેસ માટે નવી સંભાવનાઓ બનશે. દમણના બંને કિનારા પર વિકાસની ગતિ હજુ વધુ તેજ થશે.

સાથીઓ,

અહીં સગવડતાના અર્થતંત્રથી જોડાયેલા અવસરો વધશે અને સાથે જ ટ્રાન્સપોર્ટ નગર જેવી સુવિધાથી વ્યાપાર, લોજિસ્ટિક્સને પણ નવી ગતિ મળશે.

 

સાથીઓ,

આ ક્ષેત્રમાં બ્લુ ઇકોનોમી માટે અમે જે વિઝન તૈયાર કર્યું છે, તે વિઝન પણ હાઇટેક ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચરની તાકાતથી જ સાકાર થશે. એટલા માટે જ, લક્ષદ્વીપના કલપેની અને કદમત દ્વીપોમાં પણ આજે જ આધુનિક પોર્ટ્સની આધારશિલા રાખવામાં આવી રહી છે. આ તમામ પ્રયાસો બ્લુ ઇકોનોમીમાં દેશની તાકાતને વધારશે અને જેવું મેં કહ્યું આ લક્ષદ્વીપનું ભાગ્ય બદલનારા પગલાં છે.

સાથીઓ,

ભાજપની સરકારમાં, એનડીએની અમારી સરકારમાં અમારા માટે વિકાસની પહેલી કસોટી છે- ગરીબ, વંચિત, આદિવાસી અને મિડલ ક્લાસના જીવનમાં બદલાવ! આના માટે, હેલ્થ સેક્ટર અમારી બહુ મોટી પ્રાથમિકતા છે. વિતેલા વર્ષોમાં દેશ હેલ્થ કેર માટે હોલિસ્ટિક વિઝન લઈને આગળ વધ્યો. અમે ઈલાજથી જોડાયેલી દરેક ચિંતાનું સમાધાન કર્યું છે. આજે ગરીબમાં ગરીબ પાસે પણ આયુષ્માન કાર્ડની સુવિધા છે. તેમની પાસે 5 લાખ રૂપિયા સુધીના મફત ઈલાજનો ભરોસો છે. બીમારીની સમયસર તપાસ થઈ શકે, તેના માટે, પ્રધાનમંત્રી આયુષ્માન આરોગ્ય મંદિરોની વ્યવસ્થા છે. જન ઔષધિ કેન્દ્રો દ્વારા સસ્તી દવાઓ પણ મળી રહી છે. આ સુવિધાઓ હજુ બહેતર થાય, હજુ આધુનિક થાય, તેના માટે આયુષ્માન ભારત ડિજિટલ મિશન દ્વારા આજે સ્વાસ્થ્ય સેવાઓને ટેકનોલોજીથી જોડવામાં આવી રહી છે.

સાથીઓ,

આયુષ્માન કાર્ડ અને જન ઔષધિ કેન્દ્રોથી જ ગરીબ અને મધ્યમ વર્ગના આશરે સવા બે લાખ કરોડ રૂપિયા ખર્ચ થતા બચ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

કેન્દ્ર સરકારની નીતિઓનો બહુ લાભ આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ થયો છે. એક સમયે અહીં ઈલાજની સારી સુવિધાઓનો પણ અભાવ હતો. અહીં મેડિકલ કોલેજ સુધી નહોતી. પરંતુ, હવે મેડિકલ કોલેજ પણ છે અને તેમાં પોસ્ટ ગ્રેજ્યુએશનનું ભણતર પણ શરૂ થઈ ગયું છે. સિલવાસાની નમો હોસ્પિટલ ગયા વર્ષથી હજારો લોકોની સેવા કરી રહી છે. આજે દમણમાં પણ નમો હોસ્પિટલનું લોકાર્પણ થયું છે. આ ક્ષેત્રના લોકોને પણ હવે હજુ બહેતર હેલ્થ કેરનો લાભ મળશે.

 

સાથીઓ,

અમારી સરકાર કેવી રીતે સ્વાસ્થ્યને પ્રાથમિકતા આપતા ચાલી રહી છે, આનું એક પ્રમાણ નેશનલ ફેમિલી હેલ્થ સર્વેના પરિણામોમાં પણ મળે છે. એક સમયે ભારતમાં મોટાભાગના બાળકોની ડિલિવરી હોસ્પિટલમાં નહોતી થતી. આજે દેશમાં 90 ટકાથી વધુ ડિલિવરી હોસ્પિટલોમાં થઈ રહી છે, જેના કારણે માતા મૃત્યુ કે નવજાતની મૃત્યુમાં બહુ મોટી અટકાવ આવી છે. મિશન ઇન્દ્રધનુષના કારણે બાળકોના રસીકરણના ક્ષેત્રમાં પણ ભારતે સારી પ્રગતિ કરી છે. 2014 પહેલાં માત્ર 60 ટકા બાળકોનું પૂર્ણ રસીકરણ થઈ શકતું હતું. આજે આ આંકડો વધીને આશરે 90 ટકા સુધી પહોંચી ગયો છે. સ્વાસ્થ્ય સુરક્ષાના ક્ષેત્રમાં પણ મોટો બદલાવ આવ્યો છે. 2014 પહેલાં 30 ટકાથી પણ ઓછા પરિવારો સ્વાસ્થ્ય વીમા યોજનાથી જોડાયેલા હતા. આજે આયુષ્માન ભારતે, એ આંકડાઓને પણ બદલી દીધા છે. હવે 60 ટકાથી વધુ પરિવારોને આ સુરક્ષા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

સ્વાસ્થ્યના ક્ષેત્રમાં સરકારના આ પ્રયાસોનો લાભ જો કોઈને સૌથી વધારે મળ્યો છે, તો તે મારા દેશની નારી શક્તિ છે.

સાથીઓ,

પહેલાં આ ક્ષેત્રના યુવાનોને હાયર એજ્યુકેશન માટે પણ બહાર જવું પડતું હતું. પરંતુ, આજે અહીં નેશનલ લેવલની, એક નહીં કેટલીય ઇન્સ્ટિટ્યૂટ બની ચૂકી છે. પાછલા વર્ષોમાં અહીં શાળાઓની નવી બિલ્ડિંગ્સ બની છે, શાળાઓમાં સ્માર્ટ ક્લાસરૂમ પણ બન્યા છે. 40 હજારથી વધુ વિદ્યાર્થીઓને આનો લાભ મળી રહ્યો છે. મને ખુશી છે કે કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ ધીમે-ધીમે એજ્યુકેશનના ક્ષેત્રમાં આગળ આવી રહ્યો છે. સ્વામી વિવેકાનંદ એજ્યુકેશન હબ જેવા કેટલાય નિર્માણ અહીં થઈ રહ્યા છે.

ભાઈઓ-બહેનો,

આ શિક્ષણ ક્રાંતિમાં આપણી દીકરીઓ પાછળ ન રહે, આ પણ મારો સંકલ્પ છે. આના માટે કેટલાય મોટા પ્રયાસો કરવામાં આવી રહ્યા છે. સરસ્વતી સાયકલ સ્કીમ, સરસ્વતી વિદ્યા યોજના, અહીંની દીકરીઓને બહુ મદદ કરી રહી છે.

 

સાથીઓ,

આજે ભારતની કોશિશ છે કે દેશના યુવાનોને ડિગ્રીની સાથે જ સાચી દિશા પણ મળે. તેમને એવો એક્સપોઝર મળે, જે લોકલ ટેલેન્ટને ગ્લોબલ અવસરોથી જોડે. ડિઝાઇન, લો, એન્જિનિયરિંગ, મેડિકલ એજ્યુકેશન, આઈટી, ડ્રોન અને રિન્યુએબલ એનર્જી જેવા ક્ષેત્રોમાં આપણી આજની તૈયારી ભારતની વર્કફોર્સને મજબૂત બનાવશે. એટલા માટે પ્રોફેશનલ સંસ્થાઓનો વિસ્તાર બહુ મહત્વપૂર્ણ છે.

સાથીઓ,

આજે NIFT ના અઢારમાં કેમ્પસની આધારશિલા રાખવામાં આવી છે. આ સંસ્થાન અહીંના યુવાનોને ગ્લોબલ એક્સપોઝરથી જોડશે. આઈ.ટી.આઈ. દમણમાં ડ્રોન ટેકનિશિયન જેવા નવા કોર્સીસ પણ શરૂ થયા છે. પીએમ વિશ્વકર્મા અને પીએમ સૂર્ય ઘર મફત વીજળી યોજના, આનાથી જોડાયેલા ટ્રેનિંગ પ્રોગ્રામ્સનો લાભ પણ યુવાનોને મળી રહ્યો છે.

સાથીઓ,

દેશમાં રમતગમતને પણ નવી વિચાકધારા સાથે આગળ વધારવામાં આવી. આપણી રમતો હવે માત્ર મોટા શહેરો કે મોટા સ્ટેડિયમો સુધી સીમિત નથી. ખેલો ઇન્ડિયા જેવા પ્રયાસોએ યુવાનોને પોતાની પ્રતિભા દેખાડવાનો નવો મંચ આપ્યો છે. આનાથી નાના-નાના ક્ષેત્રોમાં નેશનલ લેવલ પર રમત જગતમાં આપણા બાળકો આગળ આવી રહ્યા છે અને આનો પણ લાભ આ ક્ષેત્રને થયો છે. દીવ આજે બીચ સ્પોર્ટ્સનું એક મોટું કેન્દ્ર બનીને ઉભર્યું છે. ઘોઘલા બીચ પર થયેલી બીચ ગેમ્સે પણ દેશનું ધ્યાન આ ક્ષેત્ર તરફ ખેંચ્યું છે. આજે અહીં આધુનિક સ્પોર્ટ્સ ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર પર સતત કામ થઈ રહ્યું છે. ખાનવેલમાં ફૂટબોલ સેન્ટર અને દમણમાં વોલીબોલ ટ્રેનિંગ સેન્ટર અહીં રમત સંસ્કૃતિને મજબૂત કરી રહ્યા છે.

સાથીઓ,

આજે દેશનું બહુ મોટું ફોકસ ટુરિઝમ પર પણ છે. અમારો પ્રયાસ છે કે ટુરિઝમથી સ્થાનિક કલા અને સંસ્કૃતિને પ્રોત્સાહન મળે. નાના-નાના સ્થાનોને પણ મોટા-મોટા અવસરોથી જોડી શકાય. ‘દેખો અપના દેશ’ જેવા પ્રયાસે લોકોને દેશની વિવિધતા વિશે જાણવા માટે પ્રેરિત કર્યા છે. આજે ભારતમાં હેરિટેજ ટુરિઝમ, ‘બીચ ટુરિઝમ’, ઇકો-ટુરિઝમ, એડવેન્ચર ટુરિઝમ, આ સેક્ટર્સને નવી ઊર્જા મળી રહી છે.

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં તો પર્યટન પણ એટલી અસીમ સંભાવનાઓવાળું એક ક્ષેત્ર છે. આ ક્ષેત્રને પ્રાકૃતિક સુંદરતાનું અદ્ભુત વરદાન મળ્યું છે. એટલા માટે જ પર્યટનને લઈને દેશે જે નીતિઓ પર કામ કર્યું છે, દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવને તેનો મોટો લાભ મળી રહ્યો છે. 2021 માં અહીં આશરે 6 લાખ ટૂરિસ્ટ આવ્યા હતા. 2025 માં આ સંખ્યા વધીને લગભગ 50 લાખ સુધી પહોંચી ગઈ છે. એટલે કે કેટલાક જ વર્ષોમાં ટુરિઝમ ફૂટફોલમાં આશરે 10 ગણો વધારો થયો છે. આ સારૂં ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, સારી સુવિધાઓ, સાફ-સુથરા ‘બીચ’ ના કારણે સંભવ થયું છે. દમણ નાઇટ માર્કેટ, રામસેતુ સી-ફ્રન્ટ, નમોપથ સી-ફ્રન્ટ, નાની દમણ ફોર્ટ, ગંગેશ્વર ટેમ્પલ કોમ્પ્લેક્સ, આવા અનેક સ્થાનો આજે આખા ક્ષેત્રની નવી ઓળખ બનાવી રહ્યા છે.

 

સાથીઓ,

દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવ, આના સપનાઓને પૂરા કરવા માટે આપણે અહીંની ઔદ્યોગિક તાકાતને પણ વધારવાની છે. આ પણ ગર્વની વાત છે કે આ યુનિયન ટેરિટરીએ મેન મેડ ફાઈબર ના ક્ષેત્રમાં પોતાની અલગ ઓળખ બનાવી છે. દાદરા અને નગર હવેલીને નેશનલ મેન મેડ ફાઈબર કેપિટલના રૂપમાં ઓળખવામાં આવે છે. પ્લાસ્ટિક એક્સપોર્ટમાં પણ આ ક્ષેત્ર સતત આગળ વધી રહ્યું છે. સરકારે અહીં ઇન્ડસ્ટ્રીઝ અને MSMEs ને સપોર્ટ આપવા માટે પણ સતત પ્રયાસો કર્યા છે. અહીં MSMEs અને અન્ય ઇન્ડસ્ટ્રીઝને કરોડો રૂપિયાથી વધુની આર્થિક સહાયતા આપવામાં આવી છે. કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશના લઘુ ઉદ્યોગો અને કુટીર ઉદ્યોગો માટે નવા અવસરો ખુલી રહ્યા છે. મને વિશ્વાસ છે, આવનારા સમયમાં આ ક્ષેત્ર મેન્યુફેક્ચરિંગનું મોટું હબ બનશે.

સાથીઓ,

જ્યારે વિકાસના વિઝનની સાથે સંવેદનશીલ ગવર્નન્સ જોડાય છે, તો પરિવર્તન તેજ ગતિથી જમીન પર ઉતરે છે. દાદરા અને નગર હવેલી, દમણ અને દીવમાં આપણા આ પ્રયાસોનો પ્રભાવ જોઈને સંતોષ થાય છે. મને આ ધરતીના લોકો પર પૂરો વિશ્વાસ છે. અહીંના યુવાનો, અહીંની માતાઓ-બહેનો, અહીંના ખેડૂતો, કારીગરો, શ્રમિકો અને ઉદ્યમીઓ, આવનારા વર્ષોમાં આ વિકાસ યાત્રાને હજુ આગળ લઈ જશે. હું તમને ભરોસો અપાવું છું, તમારા સપનાઓને પૂરા કરવા માટે કેન્દ્ર સરકાર ખભેથી ખભો મિલાવીને ઊભી રહેશે. આ જ વિશ્વાસની સાથે, હું એકવાર ફરી વિકાસ પરિયોજનાઓ માટે તમને ખૂબ-ખૂબ વધામણી આપું છું. મારી સાથે બોલો ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય! ભારત માતા કી જય!

ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ.