Jungleraaj govt. had built an industry of kidnapping and extortion in Bihar: PM
They were railway ministers so long but has the demands of Munger been met: PM
We plan to do lot of work for Bihar and we need your help, you need to remove this disruptive govt: PM
Mahaswarthbandhan has looted Bihar for 60 years; we must not give them another chance: PM
Jungleraaj is at its peak in Bihar, there had been 4000 kidnappings between January to July this year: PM

भारत माता की जय

मंच पर विराजमान बिहार के हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य श्रीमान कुशवाहा जी, हम पार्टी के अध्यक्ष और तारापुर से उम्मीदवार श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह, श्री पाटिल, पूर्व सांसद श्री सूरजभान सिंह, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के महासचिव श्रीमान शिवराज सिंह जी, मुंगेर की सांसद श्रीमती वीणा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान रणधीर सिंह, मुंगेर नगर निगम की मेयर श्रीमती कुमकुम देवी, मुंगेर नगर निगम की डिप्टी मेयर सुश्री बेबी चंकी, सूर्यगढ़ से उम्मीदवार श्री प्रेम रंजन जी, भाजपा से लखीसराय के विधानसभा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा जी, भाजपा मुंगेर से उम्मीदवार श्री प्रणव यादव जी, लोजपा से जमालपुर से उम्मीदवार श्री मानसुख कुंवर जी, सुभाष चन्द्र बोस जी, बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।

सभी को इस विराट जन समुदाय का आशीर्वाद मिला है और यह इस बात का सबूत है कि अब बिहार में क्या होने वाला है। एक सच बता दूँ, मैं गुजरात में कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहा और गुजरात में लम्बे अरसे तक लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने का अवसर दिया लेकिन कभी सुबह 10-11 बजे ऐसी रैली करनी हो तो हम नहीं कर पाएंगे। हम शाम के समय का इंतज़ार करते हैं। मैं हैरान हूँ कि आप लोग सोते हो कि नहीं सोते हो। ये दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत है कि हवा का रुख़ किस तरफ़ चल रहा है। देश के पोलिटिकल पंडितों को इस बार अपने सारे राजनीतिक समीक्षा के आधार बदलने के लिए बिहार ने मज़बूर कर दिया। लम्बे अरसे तक बिहार की राजनीति की चर्चा या तो कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द रहती थी या कुछ जातियों के इर्द-गिर्द रहती थी; पहली बार बिहार का चुनाव युवाओं के जोश के आस-पास केन्द्रित हुआ है, पहली बार चुनाव विकास के विचार पर केन्द्रित हुआ है। मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक पंडितों को इस बात पर मुहर लगाने के दिन आ गए हैं।

आज 8 अक्टूबर है। मुझे मुंगेर की उस धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जहाँ योग को आधुनिक रूप दिया गया। पूरे विश्व को मुंगेर ने आकर्षित किया और यही मुंगेर जैसी कई योगपीठ है देश में जिसने दुनिया के 190 से ज्यादा देशों को योग मनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 8 अक्टूबर को याद इसलिए किया क्योंकि 1979 में इसी दिन हमने हमारे प्राणप्रिय नेता आदरणीय जयप्रकाश नारायण को खो दिया था। जयप्रकाश नारायण जी में मौत से भी मुकाबला करने की ताक़त थी। उन्होंने अंग्रेज़ों के नाकों में दम कर दिया था। आजादी के बाद वे सुशासन के लिए लड़ते रहे, भ्रष्टाचार से लड़ते रहे, देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया और संपूर्ण क्रांति का मंत्र लेकर के देश के नौजवानों में एक नई चेतना भर दी थी लेकिन जयप्रकाश बाबू, कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि हमारे बीच से चले गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस देश में आपातकाल लगाया था। हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया था और जयप्रकाश नारायण जी को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था और यहीं उनकी बीमारी आई और उन्हें ले गई। दुर्भाग्य देखिये कि को कभी जयप्रकाश नारायण जी का गीत गाते थे, यही लोग उस कांग्रेस के साथ बैठे हैं जिस कांग्रेस ने जयप्रकाश बाबू को जेल के अन्दर बंद कर दिया था। ये स्वार्थ की राजनीति नहीं है तो क्या है; ये जयप्रकाश नारायण जी के साथ धोखा नहीं है तो क्या है। राम मनोहर लोहिया जीवनभर गैर-कांग्रेसी विचारों के लिए जूझते रहे। उसी राम मनोहर लोहिया का नाम लेने वाले लोग आज कांग्रेस द्वारा पिलाये गए पानी को पीकर के हमें कोसते हैं। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और मेरा यह विश्वास है कि बिहार के ये नौजवान बिहार की तक़दीर भी बदलेंगे, बिहार की तस्वीर भी बदलेंगे।

मैं आज मुंगेर की इस धरती पर आया हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मुझे नंदलाल बोस जी को स्मरण करना चाहिए। यहाँ बहुत कम लोगों को उनके विषय में सुनने का अवसर मिला होगा। तारापुर में जन्मे नंदलाल बोस, जिस प्रकार बाबा अम्बेदकर ने भारत को संविधान दिया, उस संविधान को नया रूप-रंग देने का काम मुंगेर के लाल नंदलाल बोस ने किया। अलग-अलग खण्डों में 22 चित्र, जो आज भी हमारे संविधान का मूल तत्त्व है, वे 22 चित्र, उसकी सजावट, उसका रंग-रोगन इसी मुंगेर की धरती के बेटे नंदलाल बोस ने किया था। मैं आज उनको आदरपूर्वक नमन करता हूँ। कला, संस्कृति, ये बिहार के रग-रग में हैं और जब भी मौका मिला, इसने अपना असली रूप दिखाया है इसलिए पूरा देश बिहार का गौरवगान करता है, बिहार का आदर और सम्मान करता है।

भाईयों-बहनों, जब मैं जयप्रकाश जी को याद करता हूँ तो स्वाभाविक... पुराना मुंगेर जिला था; अब तो उसके हिस्से हो गए। सिमरिया में राष्ट्रकवि दिनकर का जन्म हुआ था और उनकी वह कविता जिसने पूरे देश के नौजवानों को प्रेरित किया था, “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”, इसी को लेकर के इतिहास का नौजवान चल पड़ा था। इस बार इस चुनाव में बिहार के भाग्य को बदलने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।

मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ है। ये वो धरती है जहाँ चरखाधारी मोहन महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। ये वो धरती है जहाँ के चक्रधारी द्वारकाधीश भगवन श्रीकृष्ण थे। और देखिये आज भी इस धरती पर द्वारकाधीश की परंपरा कैसी चल रही है। श्रीकृष्ण के संस्कारों की छाया उस धरती को कितनी प्रेरणा देती है, यही तो कारण है कि वहां हमारे यहाँ जो यदुवंशी लोग हैं जिन्होंने देश को श्वेत क्रांति दी और आज दूध के क्षेत्र में अमूल जैसी कई डेयरियाँ गुजरात की प्रसिद्ध है। भारत में श्वेत क्रांति का केंद्र बिंदु गुजरात बन गया था। श्रीकृष्ण की परंपरा को उन्होंने गौ-पालन करके निभाया।

लेकिन यहाँ के एक नेता क्या-क्या खा गए और उन्होंने यदुवंशियों का अपमान किया है। लालू जी चुनाव आते हैं, जाते हैं लेकिन आप ये मत भूलिये कि यही यदुवंश के लोग थे जो आपके साथ खड़े रहे थे और तब जाकर आपको सत्ता के सिंहासन तक जाने का अवसर मिला था। आज यदुवंश के लोग अगर आपको सवाल करते हैं तो आप उन पर क्या-क्या आरोप लगते हो। इतना गंभीर आरोप उन्होंने लगाया है कि यदुवंशी क्या खाते हैं। ये यदुवंश का अपमान है कि नहीं? ये बिहार का अपमान है कि नहीं? और जब यदुवंश का गुस्सा भड़क गया तो वो कह रहे हैं कि मेरे भीतर शैतान प्रवेश कर गया। मेरे मन में एक सवाल उठता है कि शैतान को यही ठिकाना मिला क्या, पूरे हिन्दुस्तान में, पूरे विश्व में कोई ठिकाना नहीं मिला; मिला तो सिर्फ़ लालू जी का ठिकाना मिला। मुझे बताईये, आपके घर, आपके गाँव, आपके मोहल्ले आया आपके शरीर में शैतान आने की हिम्मत कर सकता है? जैसे रिश्तेदार आता है और हम पहचान लेते हैं; उन्होंने शैतान को पहचान भी लिया। अब मुझे बताईये कि जहाँ शैतान रहने की हिम्मत कर सकता है, जहाँ शैतान को रहने के लिए अच्छी खातिरदारी मिल सकती है, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह हो सकती है क्या? इसलिए शैतान ने जिसका पता ढूंढ लिया है, उस पते पर कभी हम देखेंगे भी नहीं।

अब तो बिहार को बचाना है, इसे आगे बढ़ाना है। अब तक तो हम सोचते थे कि हमारी लड़ाई इंसानों से है, पहली बार पता चला कि इंसानों के अन्दर शैतान पहुँच जाता है और वो हमारे पीछे पड़ा हुआ है। आप कल्पना कीजिये, बिहार में आजादी के बाद राज किसने किया? 35 साल तक राज किया कांग्रेस ने, और 25 साल तक राज किया इन बड़े-छोटे भाईयों ने। जिन्होंने ये 60 साल बिहार को लूटा है, अब वो आकर के स्वार्थबंधन बना रहे हैं और छोटा नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को और अधिक बर्बाद होने देना है? बिहार को तबाही से मुक्त कराना है? 60 साल तक जिन्होंने बिहार के भविष्य को रौंद डाला है, क्या ऐसे ‘महास्वार्थबंधन’ को अब बिहार में जगह देनी चाहिए? हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति होनी चाहिए कि नहीं?

इस कांग्रेस पार्टी की जब सामने से आने की ताकत ख़त्म हो गई है तो पिछले दरवाजे से आ गए हैं। आज कांग्रेस के नेता अपने किसी नेता का गुणगान गाने की ताकत खो चुके हैं। कांग्रेस का ऐसा हाल कभी देश ने देखा नहीं था और उसका कारण हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में छोटा या बड़ा राजनेता हो; किसी कस्बे या विचारधारा का हो; सार्वजनिक जीवन में अहंकार कितना विनाश करता है, उसका उदाहरण कांग्रेस पार्टी है। ये जनता है, चुप रहती लेकिन समय आने पर चुन-चुन कर हिसाब चुकता करती है। लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के अहंकार का क्या हुआ, ये सब जानते हैं इस बार बिहार के चुनाव में अहंकार कैसे पराजित होने वाला है, ये बिहार के नौजवान करके दिखाने वाले हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ये चुनाव सीधा-सीधा दो बातों पर है; निर्णय आपको करना है। एक तरफ जंगलराज है और एक तरफ विकासराज है। जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि जंगलराज फिर से आने देना चाहिए? अभी भनक आ गई है। बिहार सरकार के खुद के आंकड़े, जनवरी से जुलाई के आंकड़े कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज का जो सबसे बड़ा उद्योग लगा था वह था - अपहरण करो, फ़िरौती लो। जनवरी से जुलाई के आंकड़े जो बिहार सरकार ने घोषित किये हैं, उसके हिसाब से 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं?

आपको याद है आने वाले दिनों में त्यौहार का मौसम है, दुर्गापूजा की धूम होगी, विजयादशमी का महोत्सव आएगा, रामलीला चलेगी; आपमें से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा या बहुत बचपन के दिन होंगे; दुर्गा मंडप में जाना हो और मां शाम को रोकती थी और कहती थी कि अब सूरज ढालने वाला है और बाहर नहीं जा सकते; मां को यहीं से नमन कर लो; ये दिन थे कि नहीं थे? रामलीला हुआ करती थी लेकिन शाम के समय में लोग जाने से डरते थे। त्यौहार के दिनों में कोई अगर नई गाड़ी खरीद ले तो बेचारे तो चिंता रहती थी कि यहाँ के किसी नेता को पता चल गया तो उसके चेले-चपाटे यहाँ से आकर के गाड़ी उठाकर ले जाएंगे। गाड़ी भी जाएगी, पैसे भी जाएंगे और मांगने गए तो जान भी चली जाएगी। ये दिन बिहार ने देखे हैं कि नहीं देखें हैं? इसलिए मैं कहता हूँ कि बिहार में चुनाव विकासराज के लिए होना चाहिए न कि जंगलराज के लिए।

भाईयों-बहनों, बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ कुछ इलाकों में इतना पानी है, जिस पानी के लिए हिन्दुस्तान के बहुत सारे इलाके तरसते हैं और बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ नौजवान भरे पड़े हैं। यहाँ किसी को कुछ भी न आए और सिर्फ़ यहाँ के पानी और जवानी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया जाए तो बिहार का जीवन बदल जाएगा। यहाँ ऐसी सरकारें आई हैं जब बिहार का पानी भी बर्बाद हुआ और यहाँ की जवानी भी पलायन कर गई। मुझे बिहार का पानी और यहाँ की जवानी, इन दोनों पर मेरा भरोसा है जो न सिर्फ़ बिहार को बल्कि पूरे हिन्दुस्तान को बदलेंगे। मैं यह विश्वास लेकर यहाँ आया हूँ।

पानी का सही प्रबंध हो और जवानी को सही अवसर मिले; देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा लेकिन पानी गया तो गया और हम तो जानते हैं कि बिहार में एक और उद्योग चल पड़ा है, रेत की चोरी करने का सारी नदियों का कितना बुरा हाल है। नदी के किनारे पर रहने वाले लोग बालू चोरों के कारण कितने परेशान हैं, वो यहाँ के लोग भली-भांति जानते हैं। पानी तो नहीं बचा, बालू तक नहीं बचने दिया इन लोगों ने और यह बिहार की बर्बादी का कारण बना। ये आवश्यक है कि हमें बिहार के विकास की ओर ध्यान केन्द्रित करना है। मैं जरा पूछना चाहता हूँ इन नेताओं से कि मोदी-मोदी की माला जपते रहते हैं। आपका प्यार अलग है; आप मोदी-मोदी बोलते हो तो उनकी नींद खराब होती है।

भाईयों-बहनों, बिहार के ये दोनों महाशय रेल मंत्री थे कि नहीं? इतने साल रेल मंत्री रहे कि नहीं रहे? कोई मुझे बताये कि मुंगेर के रेल पुल का काम कर पाए? ये पूरा होना चाहिए कि नहीं? उन्होंने किया? वो तो बिहार के थे, रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर का पुल नहीं बना; पटना का पुल लटका पड़ा है। ये इनके इरादे हैं और इसलिए मैं ये कहने आया हूँ कि हमें विकास की गाड़ी को तेज़ चलाना है। मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ। 11वीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना, क्या हुआ? यहां के मुख्यमंत्री जी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था। 2010 के चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में नहीं आऊंगा, वोट नहीं मांगूंगा; ये कहा था? उन्होंने वचन का पालन किया? आपके साथ धोखा किया कि नहीं? बिजली तो छोड़ो, उन्होंने कैसी सरकार चलाई है; मैं बता रहा हूँ।

11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना, बिहार को गाँवों में बिजली के लिए 8215 करोड़ रुपये दिल्ली से मिले लेकिन ये लोग बिहार में ऐसी सरकार चला रहे हैं, 8000 करोड़ में से सिर्फ़ 1300 करोड़ का खर्च कर पाए। खर्च करने की भी ताकत नहीं है; न ताकत है और न इरादा है और जब तक उनका बंटवारा तय नहीं होता बात आगे चलती नहीं और इसलिए काम आगे रुकी पड़ी है। मैंने सपना देखा है कि 2022 में जब आज़ादी के 75 साल होंगे, मैं हिन्दुस्तान के हर गाँव में 24 घंटे बिजली पहुँचाना चाहता हूँ। मैं जहाँ जाता हूँ, बिजली की बात को आगे बढ़ा रहा हूँ और एक बार बिजली आती है तो सिर्फ़ दीया जलता है, ऐसा नहीं है; पूरी ज़िन्दगी रौशन हो जाती है, पीढ़ी रौशन हो जाती है; रोजगार मिलते हैं; शिक्षा मिलती है; कारखाने लगने लगते हैं; किसान को अपने उत्पाद में मूल्य वृद्धि का अवसर मिलता है और इसलिए बिजली को आगे बढ़ाना, बिजली से जीवन में सुधार लाना, एक बहुत बड़े काम का बीड़ा हमने उठाया है और काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 30 सालों में जितनी बिजली का उत्पादन नहीं हुआ, उतनी बिजली का उत्पादन हमने एक साल में करके दिखाया है। अगर काम करने वाली सरकार हो तो काम कैसे होता है, ये हमने करके दिखाया है।

मैं जंगलराज का उदाहरण देना चाहता हूँ। मैं आपको याद कराना चाहता हूँ। जनवरी 2014, याद कीजिये, सुकराबाद पुलिस स्टेशन; 70 साल के एक बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को पुलिस उठाकर ले गई क्योंकि बिजली को बिल झूठा आया था (बिजली आई नहीं लेकिन बिजली को बिल जरूर आया)। सुकराबाद पुलिस स्टेशन में 70 साल के बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। भाईयों-बहनों, पुलिस थाने में बुलाकर निर्दोष लोगों को मरने का कारोबार चला लेकिन इन नेताओं को कोई चिंता नहीं थी। एक ऐसी सरकार जो यहाँ के समाज और जीवन को तबाह कर रही है, इससे बिहार को बचाना है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज बिहार के विकास के लिए दिया। उनको इससे भी बुरा लग गया। अब वे यह कोशिश करने लग गए कि ये पैकेज बिहार को न मिले। अब बिहार की जनता उन्हें पैकेज रोकने का अवसर नहीं देने वाली क्योंकि बिहार को अब विकास चाहिए। और हमने जो पैकेज कहा है, उसमें एक-एक चीज़ लिख-लिख कर कहा है, ज़िम्मेवारी के साथ कहा है। मुंगेर में पुल बनाना, 2300 करोड़ रूपया; नेशनल हाईवे – 80 मुंगेर सेक्शन को चार लेन करना, 1200 करोड़ रूपया; क्यूल-गया रेलवे लाइन 123 किमी, 1300 करोड़ रूपया; क्यूल-तिलैया रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, 87 किमी, 85 करोड़ रूपया; तीन पहाड़ राजमहल सहित अम्मापाली हाट, क्यूल रेलवे लाइन का विद्युतीकरण आदि, 247 किमी और करीब-करीब 280 करोड़ रूपया। पैकेज में मुंगेर को क्या मिलेगा, इसका पूरा खांका बनाकर घोषित किया है और दिल्ली सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें मौका दीजिए। बिहार में मुझे रोड बनाना है, शिक्षा पर काम करना है, आरोग्य का काम करना है, बिजली का काम करना है, नदियों का काम करना है, किसानों के कल्याण का काम करना है। आप बस एक काम कर दीजिये, ये जो रूकावट करने वाली सरकार है, उसे हटा दीजिये और बिहार में यहाँ आकर शैतान बैठना नहीं चाहिए। अब शैतान को बिहार में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में कहीं पर भी ठिकाना नहीं मिलना चाहिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि भारी संख्या में मतदान कीजिये, एनडीए के सभी साथी दलों के साथ भाजपा को विजयी बनाईये। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बांधकर पूरी ताक़त से बोलिये-

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ମନ୍ଦିର ଧ୍ଵଜାରୋହଣ ସମାରୋହରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ

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ସଂସଦର ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ୨୦୨୬ର ଆରମ୍ଭରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ବକ୍ତବ୍ୟ
July 20, 2026
May this session witness productive discussions that strengthen India's development journey: PM
We pray that the monsoon remains proactive and the Monsoon Session remains productive, contributing to the welfare of the nation: PM
Over the past month, the country has achieved several milestones at the national, international and space levels that have filled every Indian with pride: PM
Despite the challenges in West Asia, India continued to grow as the fastest-growing major economy in the world, reflecting its strength and determination: PM
Smooth functioning of Parliament, meaningful discussions and a collective resolve to take the country forward are the need of the hour: PM

ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ସ୍ୱାଗତ।

 

ମୌସୁମୀ ବର୍ଷା ଏବେ ତାହାର ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ଦେଖାଇବା ଆରମ୍ଭ କରିଛି ଏବଂ ସଂସଦର ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହେଉଛି। ମୌସୁମୀ ବର୍ଷା ହେଉ କିମ୍ବା ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଉଭୟ ଯେତେବେଳେ ସକ୍ରିୟ ହୁଅନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ସେମାନେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଫଳପ୍ରଦ ହୋଇଉଠନ୍ତି। ଆଉ ଯେତେବେଳେ ଉଭୟ ଫଳପ୍ରଦ ହୁଅନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଦେଶର କଲ୍ୟାଣ ହେବା ସହିତ ସମସ୍ତ ଜୀବଜଗତର କଲ୍ୟାଣ ସୁନିଶ୍ଚିତ ହୋଇଥାଏ। ଏହି ଆଶା ଓ ପ୍ରାର୍ଥନା ସହିତ ଆମେ କାମନା କରୁଛୁ ଯେ, ମୌସୁମୀ ସକ୍ରିୟ ରହୁ ଏବଂ ସଂସଦର ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ମଧ୍ୟ ସମାନ ଭାବରେ ଫଳପ୍ରଦ ହେଉ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଗତ ଏକ ମାସ ମଧ୍ୟରେ ଦେଶ ଅନେକ ଐତିହାସିକ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଛି। ଏହି ସଫଳତା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଗର୍ବିତ କରିଛି। ଏହି ସଫଳତାଗୁଡ଼ିକ ଜାତୀୟ, ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ଏବଂ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପରିବ୍ୟାପ୍ତ। ଭାରତ ପାଇଁ ଏଗୁଡ଼ିକ ଗୌରବର ମୁହୂର୍ତ୍ତ। ଗତ ବର୍ଷ ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଆରମ୍ଭ ହେବାର ଠିକ୍ ପୂର୍ବରୁ ଜଣେ ଭାରତୀୟ ନାଗରିକ ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ମହାକାଶ କେନ୍ଦ୍ରରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲେ। ଗତକାଲି, ଗୋଟିଏ ଦିନ ପୂର୍ବରୁ, ଭାରତର ଏକ ଯୁବ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଏକ ଅସାଧାରଣ କୃତିତ୍ୱ ହାସଲ କରିଛନ୍ତି। ବିଶ୍ୱର ଖୁବ୍ କମ୍ ଦେଶରେ ଏଭଳି ବେସରକାରୀ ସାହସିକ ପଦକ୍ଷେପ ଦେଖିବାକୁ ମିଳେ। ଆମର ଯୁବ ଉଦ୍ଭାବକମାନେ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଭାରତର ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ନୂତନ ଉଚ୍ଚତାକୁ ନେଇଯାଇଛନ୍ତି ଏବଂ ଏହା ପ୍ରକୃତରେ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଉଲ୍ଲେଖନୀୟ ସଫଳତା। ମୋତେ କୁହାଯାଇଛି ଯେ, ‘ସ୍କାଏରୁଟ୍’ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ରେ କାମ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ସଦସ୍ୟମାନଙ୍କର ହାରାହାରି ବୟସ ମାତ୍ର ୨୮ ବର୍ଷ। ଏଭଳି ଯୁବକମାନେ ଏହି ଅସାଧାରଣ କାର୍ଯ୍ୟ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ମୁଁ କୌଣସି ୫୬ ବର୍ଷର ‘ଯୁବକ’ଙ୍କ କଥା କହୁନାହିଁ; ମୁଁ ଆମ ଦେଶର ସେହି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ର କଥା କହୁଛି, ଯେଉଁଠି ହାରାହାରି ୨୮ ବର୍ଷ ବୟସର ଯୁବକମାନେ ଅନ୍ତରୀକ୍ଷରେ ଭାରତର ପତାକା ଉଡ଼ାଇଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କୁ ମୋର ଅନେକ ଅନେକ ଅଭିନନ୍ଦନ। ଏଭଳି ସଫଳତା ଭାରତକୁ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ କରେ। ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ ଭାରତର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଏବଂ ପରିଚୟ ସର୍ବମାନ୍ୟ ଓ ସର୍ବସ୍ୱୀକୃତ ହୋଇ ଚାଲିଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଏହା କେବଳ ଏକ ସଂଯୋଗ ନୁହେଁ, ବରଂ ଏକ ସଶକ୍ତ ବାର୍ତ୍ତା। ଏହା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ ଏହି ସନ୍ଦେଶ ପ୍ରଦାନ କରୁଛି ଯେ, ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ଆକାଂକ୍ଷା ମହାକାଶ ପରି ଅସୀମ। ଦେଶ ପାଇଁ ଏହାଠାରୁ ବଡ଼ ପ୍ରେରଣାଦାୟକ ବାର୍ତ୍ତା ଆଉ କିଛି ହୋଇପାରିବ ନାହିଁ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ଦେଶ ଯେଉଁ 'ସଂସ୍କାର ଏକ୍ସପ୍ରେସ'ର ଦ୍ରୁତଗାମୀ ପଥରେ ଆଗେଇ ଚାଲିଛି, ତାହାର ଫଳସ୍ୱରୂପ ଆମ ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ଏଭଳି ବଡ଼ ସାହସିକ ପଦକ୍ଷେପ ନେବାର କ୍ଷମତା ହାସଲ କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିରେ ସଫଳତା ମଧ୍ୟ ଅର୍ଜନ କରୁଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିକଟ ଅତୀତରେ ରାଜସ୍ଥାନରେ ଏକ ବୃହତ୍ ତୈଳ ବିଶୋଧନାଗାର ଦେଶକୁ ସମର୍ପଣ କରାଯାଇଛି। ଏହାର କିଛି ସପ୍ତାହ ପୂର୍ବରୁ, ଦେଶର ତୃତୀୟ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର କାରଖାନାକୁ ମଧ୍ୟ ରାଷ୍ଟ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଉତ୍ସର୍ଗ କରାଯାଇଥିଲା। କିଛି ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ସବୁଜ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଇନ୍ଧନ ଚାଳିତ ଟ୍ରେନ୍‌କୁ ମଧ୍ୟ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସମର୍ପଣ କରାଯାଇଥିଲା। ବିଶ୍ୱରେ ଏଭଳି ସୁବିଧା ଥିବା ଦେଶର ସଂଖ୍ୟା ଖୁବ୍ କମ୍। କିନ୍ତୁ ଭାରତ ଯେଉଁ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଟ୍ରେନ୍‌ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସମର୍ପଣ କରିଛି, ତାହା ବିଶ୍ୱର ସବୁଠାରୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଇଞ୍ଜିନ୍‌ ବିଶିଷ୍ଟ ଏବଂ ସବୁଠାରୁ ଲମ୍ବା ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଟ୍ରେନ୍‌। ଏହା ଆମ ଦେଶର ବୈଜ୍ଞାନିକ, ଇଞ୍ଜିନିୟର, ଉଦ୍ଭାବକ, ଉଦ୍ୟୋଗୀ ଓ ଶ୍ରମିକମାନଙ୍କର ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ଫଳାଫଳ । ସେମାନେ ଗୋଟିଏ ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ସାମ୍ନାରେ ରଖି ଦେଶ ପାଇଁ ବଞ୍ଚୁଛନ୍ତି, ଦେଶ ପାଇଁ କାମ କରୁଛନ୍ତି, ଏବଂ ସେହି ସମର୍ପଣର ଫଳସ୍ୱରୂପ ଆଜି ଏଭଳି ସଫଳତା ସମ୍ଭବ ହୋଇପାରିଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମେ ସମସ୍ତେ ଭଲଭାବେ ଜାଣୁଛୁ ଏବଂ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ଚିନ୍ତିତ ଯେ, ବିଭିନ୍ନ ସ୍ଥାନରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଯୁଦ୍ଧ ପରିସ୍ଥିତି ସୃଷ୍ଟି ହେଉଛି। ଭାରତ ପରି ଶକ୍ତି ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ଦେଶ ଉପରେ ନିର୍ଭରଶୀଳ ଦେଶମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ପଶ୍ଚିମ ଏସିଆରେ ଚାଲିଥିବା ଯୁଦ୍ଧ ଏକ ବଡ଼ ସଙ୍କଟର କାରଣ ପାଲଟିଛି। ପେଟ୍ରୋଲ, ଡିଜେଲ, ଏଲ୍‌ପିଜି, ସାର, ରସାୟନ ସମେତ ପ୍ରାୟ ସମସ୍ତ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅନେକ ବାଧା ଓ ସଙ୍କଟ ଦେଖାଦେଇଛି। ଏସବୁ ପ୍ରତିକୂଳତା ପରିସ୍ଥିତି ସତ୍ତ୍ୱେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ୭.୭ ପ୍ରତିଶତ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ହାର ସହ ବିଶ୍ୱର ପ୍ରମୁଖ ଅର୍ଥନୀତିଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ସବୁଠାରୁ ଦ୍ରୁତ ଅଗ୍ରଗତି କରୁଥିବା ଦେଶ ଭାବେ ନିଜ ସ୍ଥାନ ବଜାୟ ରଖିଛି। ଏହା ଭାରତର ସାମର୍ଥ୍ୟର ପରିଚାୟକ। ଏହା ପ୍ରମାଣ କରୁଛି ଯେ, ଭାରତ କିପରି ଉତ୍ସାହ ଓ ଉଦ୍ଦୀପନା ସହ ନୂତନ ଉଚ୍ଚତା ଛୁଇଁବାକୁ ଚାହୁଛି। ଏଭଳି ସମୟରେ ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଆରମ୍ଭ ହେଉଛି। ଦେଶ ବିକାଶର ଗତି ଧରି ସାରିଛି ଏବଂ ସଂସଦର ସକାରାତ୍ମକ ଚେତନା ସେହି ଗତିରେ ନୂତନ ଶକ୍ତି ସଞ୍ଚାର କରିପାରିବ। ରାଷ୍ଟ୍ରର ଲକ୍ଷ୍ୟ ପୂରଣ ପାଇଁ ସକାରାତ୍ମକ ମନୋଭାବ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଆବଶ୍ୟକ। ଆମ ସଂସଦରେ ଅନେକ ଅଭିଜ୍ଞ ସାଂସଦ ଅଛନ୍ତି। ସେମାନେ ଯେକୌଣସି ଦଳର ହୁଅନ୍ତୁ ନା କାହିଁକି, ସେମାନଙ୍କର ଗଭୀର ଅଭିଜ୍ଞତା ରହିଛି। ଏଭଳି ସମୟରେ ସେମାନଙ୍କର ଅନୁଭବ ଓ ଜ୍ଞାନର ଆବଶ୍ୟକତା ସଂସଦକୁ ଅଛି ଏବଂ ଦେଶକୁ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ସେଥିପାଇଁ ସଂସଦ ସୁଚାରୁରୂପେ ଚାଲିବା, ଫଳପ୍ରଦ ଆଲୋଚନା ହେବା ଏବଂ ମିଳିମିଶି ଦେଶକୁ ଆଗକୁ ନେବା ପାଇଁ ସଂକଳ୍ପ ନେବା-ଏହା ସମୟର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଆବଶ୍ୟକତା ବୋଲି ମୁଁ ମନେ କରେ। ଆକାଂକ୍ଷାରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ଚାହୁଛନ୍ତି ଯେ, ଆମେ ଆହୁରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା। ଆଜି ସମୟର ଆହ୍ୱାନ ହେଉଛି ଯେ, ରାଷ୍ଟ୍ରନିଷ୍ଠା ଓ ଦେଶପ୍ରେମରେ ସମର୍ପିତ ସ୍ୱରଗୁଡ଼ିକୁ ସଂସଦରେ ଉପଯୁକ୍ତ ମଞ୍ଚ ମିଳୁ, ସେମାନେ ନିଜର ସ୍ୱରକୁ ସଶକ୍ତ ଭାବେ ଉପସ୍ଥାପନ କରନ୍ତୁ ଏବଂ ଦେଶକୁ ଦିଗଦର୍ଶନ ଦିଅନ୍ତୁ। ସେଥିପାଇଁ ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଏବଂ ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଯେଉଁଠାରେ ତଥ୍ୟ ଓ ତର୍କ ରହେ, ସେଠାରେ ଝଡ଼ ସୃଷ୍ଟି କରିବା ପାଇଁ ସ୍ଥାନ ନଥାଏ। ଯଦି ତର୍କ ଦୃଢ଼ ଓ ତଥ୍ୟ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଥାଏ, ତେବେ ଶାନ୍ତ ଚିତ୍ତରେ ମଧ୍ୟ ନିଜର କଥାକୁ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଭାବରେ ରଖାଯାଇପାରେ। ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଯେ, ତର୍କ ଓ ତଥ୍ୟ ଆଧାରରେ ସଦନର ଆଲୋଚନାକୁ ସମୃଦ୍ଧ କରାଯିବ। ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ୱରକୁ ସୁଯୋଗ ମିଳୁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ସମ୍ମାନ ମିଳୁ - ଏହା ହିଁ ଆମ ସଂସଦର ମୂଳ ଭୂମିକା। ମୁଁ ସମସ୍ତ ସାଂସଦଙ୍କୁ ଏହି ସଦନର କାର୍ଯ୍ୟକଳାପରେ ସକ୍ରିୟ ଓ ଉତ୍ସାହର ସହ ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିବା ପାଇଁ ଆହ୍ୱାନ ଜଣାଉଛି। ଆଜି ସକାଳେ ମାନ୍ୟବର ଲୋକସଭା ବାଚସ୍ପତି ମହୋଦୟ ମଧ୍ୟ ସୋସିଆଲ ମିଡିଆ ମାଧ୍ୟମରେ ଦେଶର ସାଂସଦମାନଙ୍କୁ ସ୍ୱାଗତ ଜଣାଇ ନିଜର ଭାବନା ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି। ମୁଁ ମଧ୍ୟ ସେହି ସ୍ୱାଗତରେ ମୋର ସ୍ୱର ମିଶାଉଛି।

 

ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଧନ୍ୟବାଦ।

 

ନମସ୍କାର।