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Jungleraaj govt. had built an industry of kidnapping and extortion in Bihar: PM
They were railway ministers so long but has the demands of Munger been met: PM
We plan to do lot of work for Bihar and we need your help, you need to remove this disruptive govt: PM
Mahaswarthbandhan has looted Bihar for 60 years; we must not give them another chance: PM
Jungleraaj is at its peak in Bihar, there had been 4000 kidnappings between January to July this year: PM

भारत माता की जय

मंच पर विराजमान बिहार के हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य श्रीमान कुशवाहा जी, हम पार्टी के अध्यक्ष और तारापुर से उम्मीदवार श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह, श्री पाटिल, पूर्व सांसद श्री सूरजभान सिंह, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के महासचिव श्रीमान शिवराज सिंह जी, मुंगेर की सांसद श्रीमती वीणा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान रणधीर सिंह, मुंगेर नगर निगम की मेयर श्रीमती कुमकुम देवी, मुंगेर नगर निगम की डिप्टी मेयर सुश्री बेबी चंकी, सूर्यगढ़ से उम्मीदवार श्री प्रेम रंजन जी, भाजपा से लखीसराय के विधानसभा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा जी, भाजपा मुंगेर से उम्मीदवार श्री प्रणव यादव जी, लोजपा से जमालपुर से उम्मीदवार श्री मानसुख कुंवर जी, सुभाष चन्द्र बोस जी, बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।

सभी को इस विराट जन समुदाय का आशीर्वाद मिला है और यह इस बात का सबूत है कि अब बिहार में क्या होने वाला है। एक सच बता दूँ, मैं गुजरात में कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहा और गुजरात में लम्बे अरसे तक लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने का अवसर दिया लेकिन कभी सुबह 10-11 बजे ऐसी रैली करनी हो तो हम नहीं कर पाएंगे। हम शाम के समय का इंतज़ार करते हैं। मैं हैरान हूँ कि आप लोग सोते हो कि नहीं सोते हो। ये दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत है कि हवा का रुख़ किस तरफ़ चल रहा है। देश के पोलिटिकल पंडितों को इस बार अपने सारे राजनीतिक समीक्षा के आधार बदलने के लिए बिहार ने मज़बूर कर दिया। लम्बे अरसे तक बिहार की राजनीति की चर्चा या तो कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द रहती थी या कुछ जातियों के इर्द-गिर्द रहती थी; पहली बार बिहार का चुनाव युवाओं के जोश के आस-पास केन्द्रित हुआ है, पहली बार चुनाव विकास के विचार पर केन्द्रित हुआ है। मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक पंडितों को इस बात पर मुहर लगाने के दिन आ गए हैं।

आज 8 अक्टूबर है। मुझे मुंगेर की उस धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जहाँ योग को आधुनिक रूप दिया गया। पूरे विश्व को मुंगेर ने आकर्षित किया और यही मुंगेर जैसी कई योगपीठ है देश में जिसने दुनिया के 190 से ज्यादा देशों को योग मनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 8 अक्टूबर को याद इसलिए किया क्योंकि 1979 में इसी दिन हमने हमारे प्राणप्रिय नेता आदरणीय जयप्रकाश नारायण को खो दिया था। जयप्रकाश नारायण जी में मौत से भी मुकाबला करने की ताक़त थी। उन्होंने अंग्रेज़ों के नाकों में दम कर दिया था। आजादी के बाद वे सुशासन के लिए लड़ते रहे, भ्रष्टाचार से लड़ते रहे, देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया और संपूर्ण क्रांति का मंत्र लेकर के देश के नौजवानों में एक नई चेतना भर दी थी लेकिन जयप्रकाश बाबू, कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि हमारे बीच से चले गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस देश में आपातकाल लगाया था। हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया था और जयप्रकाश नारायण जी को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था और यहीं उनकी बीमारी आई और उन्हें ले गई। दुर्भाग्य देखिये कि को कभी जयप्रकाश नारायण जी का गीत गाते थे, यही लोग उस कांग्रेस के साथ बैठे हैं जिस कांग्रेस ने जयप्रकाश बाबू को जेल के अन्दर बंद कर दिया था। ये स्वार्थ की राजनीति नहीं है तो क्या है; ये जयप्रकाश नारायण जी के साथ धोखा नहीं है तो क्या है। राम मनोहर लोहिया जीवनभर गैर-कांग्रेसी विचारों के लिए जूझते रहे। उसी राम मनोहर लोहिया का नाम लेने वाले लोग आज कांग्रेस द्वारा पिलाये गए पानी को पीकर के हमें कोसते हैं। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और मेरा यह विश्वास है कि बिहार के ये नौजवान बिहार की तक़दीर भी बदलेंगे, बिहार की तस्वीर भी बदलेंगे।

मैं आज मुंगेर की इस धरती पर आया हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मुझे नंदलाल बोस जी को स्मरण करना चाहिए। यहाँ बहुत कम लोगों को उनके विषय में सुनने का अवसर मिला होगा। तारापुर में जन्मे नंदलाल बोस, जिस प्रकार बाबा अम्बेदकर ने भारत को संविधान दिया, उस संविधान को नया रूप-रंग देने का काम मुंगेर के लाल नंदलाल बोस ने किया। अलग-अलग खण्डों में 22 चित्र, जो आज भी हमारे संविधान का मूल तत्त्व है, वे 22 चित्र, उसकी सजावट, उसका रंग-रोगन इसी मुंगेर की धरती के बेटे नंदलाल बोस ने किया था। मैं आज उनको आदरपूर्वक नमन करता हूँ। कला, संस्कृति, ये बिहार के रग-रग में हैं और जब भी मौका मिला, इसने अपना असली रूप दिखाया है इसलिए पूरा देश बिहार का गौरवगान करता है, बिहार का आदर और सम्मान करता है।

भाईयों-बहनों, जब मैं जयप्रकाश जी को याद करता हूँ तो स्वाभाविक... पुराना मुंगेर जिला था; अब तो उसके हिस्से हो गए। सिमरिया में राष्ट्रकवि दिनकर का जन्म हुआ था और उनकी वह कविता जिसने पूरे देश के नौजवानों को प्रेरित किया था, “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”, इसी को लेकर के इतिहास का नौजवान चल पड़ा था। इस बार इस चुनाव में बिहार के भाग्य को बदलने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।

मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ है। ये वो धरती है जहाँ चरखाधारी मोहन महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। ये वो धरती है जहाँ के चक्रधारी द्वारकाधीश भगवन श्रीकृष्ण थे। और देखिये आज भी इस धरती पर द्वारकाधीश की परंपरा कैसी चल रही है। श्रीकृष्ण के संस्कारों की छाया उस धरती को कितनी प्रेरणा देती है, यही तो कारण है कि वहां हमारे यहाँ जो यदुवंशी लोग हैं जिन्होंने देश को श्वेत क्रांति दी और आज दूध के क्षेत्र में अमूल जैसी कई डेयरियाँ गुजरात की प्रसिद्ध है। भारत में श्वेत क्रांति का केंद्र बिंदु गुजरात बन गया था। श्रीकृष्ण की परंपरा को उन्होंने गौ-पालन करके निभाया।

लेकिन यहाँ के एक नेता क्या-क्या खा गए और उन्होंने यदुवंशियों का अपमान किया है। लालू जी चुनाव आते हैं, जाते हैं लेकिन आप ये मत भूलिये कि यही यदुवंश के लोग थे जो आपके साथ खड़े रहे थे और तब जाकर आपको सत्ता के सिंहासन तक जाने का अवसर मिला था। आज यदुवंश के लोग अगर आपको सवाल करते हैं तो आप उन पर क्या-क्या आरोप लगते हो। इतना गंभीर आरोप उन्होंने लगाया है कि यदुवंशी क्या खाते हैं। ये यदुवंश का अपमान है कि नहीं? ये बिहार का अपमान है कि नहीं? और जब यदुवंश का गुस्सा भड़क गया तो वो कह रहे हैं कि मेरे भीतर शैतान प्रवेश कर गया। मेरे मन में एक सवाल उठता है कि शैतान को यही ठिकाना मिला क्या, पूरे हिन्दुस्तान में, पूरे विश्व में कोई ठिकाना नहीं मिला; मिला तो सिर्फ़ लालू जी का ठिकाना मिला। मुझे बताईये, आपके घर, आपके गाँव, आपके मोहल्ले आया आपके शरीर में शैतान आने की हिम्मत कर सकता है? जैसे रिश्तेदार आता है और हम पहचान लेते हैं; उन्होंने शैतान को पहचान भी लिया। अब मुझे बताईये कि जहाँ शैतान रहने की हिम्मत कर सकता है, जहाँ शैतान को रहने के लिए अच्छी खातिरदारी मिल सकती है, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह हो सकती है क्या? इसलिए शैतान ने जिसका पता ढूंढ लिया है, उस पते पर कभी हम देखेंगे भी नहीं।

अब तो बिहार को बचाना है, इसे आगे बढ़ाना है। अब तक तो हम सोचते थे कि हमारी लड़ाई इंसानों से है, पहली बार पता चला कि इंसानों के अन्दर शैतान पहुँच जाता है और वो हमारे पीछे पड़ा हुआ है। आप कल्पना कीजिये, बिहार में आजादी के बाद राज किसने किया? 35 साल तक राज किया कांग्रेस ने, और 25 साल तक राज किया इन बड़े-छोटे भाईयों ने। जिन्होंने ये 60 साल बिहार को लूटा है, अब वो आकर के स्वार्थबंधन बना रहे हैं और छोटा नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को और अधिक बर्बाद होने देना है? बिहार को तबाही से मुक्त कराना है? 60 साल तक जिन्होंने बिहार के भविष्य को रौंद डाला है, क्या ऐसे ‘महास्वार्थबंधन’ को अब बिहार में जगह देनी चाहिए? हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति होनी चाहिए कि नहीं?

इस कांग्रेस पार्टी की जब सामने से आने की ताकत ख़त्म हो गई है तो पिछले दरवाजे से आ गए हैं। आज कांग्रेस के नेता अपने किसी नेता का गुणगान गाने की ताकत खो चुके हैं। कांग्रेस का ऐसा हाल कभी देश ने देखा नहीं था और उसका कारण हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में छोटा या बड़ा राजनेता हो; किसी कस्बे या विचारधारा का हो; सार्वजनिक जीवन में अहंकार कितना विनाश करता है, उसका उदाहरण कांग्रेस पार्टी है। ये जनता है, चुप रहती लेकिन समय आने पर चुन-चुन कर हिसाब चुकता करती है। लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के अहंकार का क्या हुआ, ये सब जानते हैं इस बार बिहार के चुनाव में अहंकार कैसे पराजित होने वाला है, ये बिहार के नौजवान करके दिखाने वाले हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ये चुनाव सीधा-सीधा दो बातों पर है; निर्णय आपको करना है। एक तरफ जंगलराज है और एक तरफ विकासराज है। जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि जंगलराज फिर से आने देना चाहिए? अभी भनक आ गई है। बिहार सरकार के खुद के आंकड़े, जनवरी से जुलाई के आंकड़े कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज का जो सबसे बड़ा उद्योग लगा था वह था - अपहरण करो, फ़िरौती लो। जनवरी से जुलाई के आंकड़े जो बिहार सरकार ने घोषित किये हैं, उसके हिसाब से 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं?

आपको याद है आने वाले दिनों में त्यौहार का मौसम है, दुर्गापूजा की धूम होगी, विजयादशमी का महोत्सव आएगा, रामलीला चलेगी; आपमें से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा या बहुत बचपन के दिन होंगे; दुर्गा मंडप में जाना हो और मां शाम को रोकती थी और कहती थी कि अब सूरज ढालने वाला है और बाहर नहीं जा सकते; मां को यहीं से नमन कर लो; ये दिन थे कि नहीं थे? रामलीला हुआ करती थी लेकिन शाम के समय में लोग जाने से डरते थे। त्यौहार के दिनों में कोई अगर नई गाड़ी खरीद ले तो बेचारे तो चिंता रहती थी कि यहाँ के किसी नेता को पता चल गया तो उसके चेले-चपाटे यहाँ से आकर के गाड़ी उठाकर ले जाएंगे। गाड़ी भी जाएगी, पैसे भी जाएंगे और मांगने गए तो जान भी चली जाएगी। ये दिन बिहार ने देखे हैं कि नहीं देखें हैं? इसलिए मैं कहता हूँ कि बिहार में चुनाव विकासराज के लिए होना चाहिए न कि जंगलराज के लिए।

भाईयों-बहनों, बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ कुछ इलाकों में इतना पानी है, जिस पानी के लिए हिन्दुस्तान के बहुत सारे इलाके तरसते हैं और बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ नौजवान भरे पड़े हैं। यहाँ किसी को कुछ भी न आए और सिर्फ़ यहाँ के पानी और जवानी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया जाए तो बिहार का जीवन बदल जाएगा। यहाँ ऐसी सरकारें आई हैं जब बिहार का पानी भी बर्बाद हुआ और यहाँ की जवानी भी पलायन कर गई। मुझे बिहार का पानी और यहाँ की जवानी, इन दोनों पर मेरा भरोसा है जो न सिर्फ़ बिहार को बल्कि पूरे हिन्दुस्तान को बदलेंगे। मैं यह विश्वास लेकर यहाँ आया हूँ।

पानी का सही प्रबंध हो और जवानी को सही अवसर मिले; देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा लेकिन पानी गया तो गया और हम तो जानते हैं कि बिहार में एक और उद्योग चल पड़ा है, रेत की चोरी करने का सारी नदियों का कितना बुरा हाल है। नदी के किनारे पर रहने वाले लोग बालू चोरों के कारण कितने परेशान हैं, वो यहाँ के लोग भली-भांति जानते हैं। पानी तो नहीं बचा, बालू तक नहीं बचने दिया इन लोगों ने और यह बिहार की बर्बादी का कारण बना। ये आवश्यक है कि हमें बिहार के विकास की ओर ध्यान केन्द्रित करना है। मैं जरा पूछना चाहता हूँ इन नेताओं से कि मोदी-मोदी की माला जपते रहते हैं। आपका प्यार अलग है; आप मोदी-मोदी बोलते हो तो उनकी नींद खराब होती है।

भाईयों-बहनों, बिहार के ये दोनों महाशय रेल मंत्री थे कि नहीं? इतने साल रेल मंत्री रहे कि नहीं रहे? कोई मुझे बताये कि मुंगेर के रेल पुल का काम कर पाए? ये पूरा होना चाहिए कि नहीं? उन्होंने किया? वो तो बिहार के थे, रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर का पुल नहीं बना; पटना का पुल लटका पड़ा है। ये इनके इरादे हैं और इसलिए मैं ये कहने आया हूँ कि हमें विकास की गाड़ी को तेज़ चलाना है। मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ। 11वीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना, क्या हुआ? यहां के मुख्यमंत्री जी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था। 2010 के चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में नहीं आऊंगा, वोट नहीं मांगूंगा; ये कहा था? उन्होंने वचन का पालन किया? आपके साथ धोखा किया कि नहीं? बिजली तो छोड़ो, उन्होंने कैसी सरकार चलाई है; मैं बता रहा हूँ।

11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना, बिहार को गाँवों में बिजली के लिए 8215 करोड़ रुपये दिल्ली से मिले लेकिन ये लोग बिहार में ऐसी सरकार चला रहे हैं, 8000 करोड़ में से सिर्फ़ 1300 करोड़ का खर्च कर पाए। खर्च करने की भी ताकत नहीं है; न ताकत है और न इरादा है और जब तक उनका बंटवारा तय नहीं होता बात आगे चलती नहीं और इसलिए काम आगे रुकी पड़ी है। मैंने सपना देखा है कि 2022 में जब आज़ादी के 75 साल होंगे, मैं हिन्दुस्तान के हर गाँव में 24 घंटे बिजली पहुँचाना चाहता हूँ। मैं जहाँ जाता हूँ, बिजली की बात को आगे बढ़ा रहा हूँ और एक बार बिजली आती है तो सिर्फ़ दीया जलता है, ऐसा नहीं है; पूरी ज़िन्दगी रौशन हो जाती है, पीढ़ी रौशन हो जाती है; रोजगार मिलते हैं; शिक्षा मिलती है; कारखाने लगने लगते हैं; किसान को अपने उत्पाद में मूल्य वृद्धि का अवसर मिलता है और इसलिए बिजली को आगे बढ़ाना, बिजली से जीवन में सुधार लाना, एक बहुत बड़े काम का बीड़ा हमने उठाया है और काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 30 सालों में जितनी बिजली का उत्पादन नहीं हुआ, उतनी बिजली का उत्पादन हमने एक साल में करके दिखाया है। अगर काम करने वाली सरकार हो तो काम कैसे होता है, ये हमने करके दिखाया है।

मैं जंगलराज का उदाहरण देना चाहता हूँ। मैं आपको याद कराना चाहता हूँ। जनवरी 2014, याद कीजिये, सुकराबाद पुलिस स्टेशन; 70 साल के एक बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को पुलिस उठाकर ले गई क्योंकि बिजली को बिल झूठा आया था (बिजली आई नहीं लेकिन बिजली को बिल जरूर आया)। सुकराबाद पुलिस स्टेशन में 70 साल के बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। भाईयों-बहनों, पुलिस थाने में बुलाकर निर्दोष लोगों को मरने का कारोबार चला लेकिन इन नेताओं को कोई चिंता नहीं थी। एक ऐसी सरकार जो यहाँ के समाज और जीवन को तबाह कर रही है, इससे बिहार को बचाना है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज बिहार के विकास के लिए दिया। उनको इससे भी बुरा लग गया। अब वे यह कोशिश करने लग गए कि ये पैकेज बिहार को न मिले। अब बिहार की जनता उन्हें पैकेज रोकने का अवसर नहीं देने वाली क्योंकि बिहार को अब विकास चाहिए। और हमने जो पैकेज कहा है, उसमें एक-एक चीज़ लिख-लिख कर कहा है, ज़िम्मेवारी के साथ कहा है। मुंगेर में पुल बनाना, 2300 करोड़ रूपया; नेशनल हाईवे – 80 मुंगेर सेक्शन को चार लेन करना, 1200 करोड़ रूपया; क्यूल-गया रेलवे लाइन 123 किमी, 1300 करोड़ रूपया; क्यूल-तिलैया रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, 87 किमी, 85 करोड़ रूपया; तीन पहाड़ राजमहल सहित अम्मापाली हाट, क्यूल रेलवे लाइन का विद्युतीकरण आदि, 247 किमी और करीब-करीब 280 करोड़ रूपया। पैकेज में मुंगेर को क्या मिलेगा, इसका पूरा खांका बनाकर घोषित किया है और दिल्ली सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें मौका दीजिए। बिहार में मुझे रोड बनाना है, शिक्षा पर काम करना है, आरोग्य का काम करना है, बिजली का काम करना है, नदियों का काम करना है, किसानों के कल्याण का काम करना है। आप बस एक काम कर दीजिये, ये जो रूकावट करने वाली सरकार है, उसे हटा दीजिये और बिहार में यहाँ आकर शैतान बैठना नहीं चाहिए। अब शैतान को बिहार में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में कहीं पर भी ठिकाना नहीं मिलना चाहिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि भारी संख्या में मतदान कीजिये, एनडीए के सभी साथी दलों के साथ भाजपा को विजयी बनाईये। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बांधकर पूरी ताक़त से बोलिये-

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀଙ୍କ 'ମନ କି ବାତ' ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ବିଚାର ଏବଂ ଅନ୍ତର୍ଦୃଷ୍ଟି ପଠାନ୍ତୁ !
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ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

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Why Narendra Modi is a radical departure in Indian thinking about the world

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ରାଷ୍ଟ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ସାତଟି ନୂତନ ପ୍ରତିରକ୍ଷା କମ୍ପାନୀକୁ ଉତ୍ସର୍ଗ କରିବା ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
October 15, 2021
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୭ ଟି କମ୍ପାନୀର ସୃଷ୍ଟି ଡକ୍ଟର କାଲାମଙ୍କ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଭାରତର ସ୍ପପ୍ନକୁ ଶକ୍ତି ଦେବ ବୋଲି ସେ କହିଛନ୍ତି
ଏହି ୭ ଟି ନୂତନ କମ୍ପାନୀ ଦେଶର ସାମରିକ ଶକ୍ତି ପାଇଁ ଏକ ଦୃଢ ଆଧାର ଗଠନ କରିବେ ବୋଲି ସେ କହିଛନ୍ତି
୬୫,୦୦୦ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ମୂଲ୍ୟର ବରାଦ ମିଳିବା ଏହି କମ୍ପାନୀଗୁଡିକରେ ଦେଶର ବଢୁଥିବା ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରୁଛି
ଆଜି ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ର ଅଦ୍ଭୂତପୂର୍ବ ପାରଦର୍ଶିତା, ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଦ୍ୱାରା ପରିଚାଳିତ ଆଭିମୁଖ୍ୟର ସାକ୍ଷୀ ହୋଇଛି
ଗତ ପାଞ୍ଚ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ରପ୍ତାନି ୩୨୫ ପ୍ରତିଶତ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି ବୋଲି ସେ କହିଛନ୍ତି
ପ୍ରତିଯୋଗିତାମୂଳକ ମୂଲ୍ୟ ଆମର ଶକ୍ତି ହୋଇଥିବାବେଳେ ଗୁଣବତ୍ତା ଏବଂ ବିଶ୍ୱସନୀୟତା ଆମର ପରିଚୟ ହେବା ଉଚିତ ବୋଲି ସେ କହିଛନ୍ତି

ନମମସ୍କାର!

ଦେଶର ସୁରକ୍ଷା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଏହି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ଆମ ସହିତ ସାମିଲ ହୋଇଥିବା ଦେଶର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ରାଜନାଥ ସିଂହ ମହାଶୟ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା ରାଷ୍ଟ୍ରମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ଅଜୟ ଭଟ୍ଟ ମହାଶୟ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟର ସମସ୍ତ ଅଧିକାରୀଗଣ, ଏବଂ ସାରା ଦେଶରୁ ସାମିଲ ହୋଇଥିବା ସମସ୍ତ ସାଥୀଗଣ!

ଏବେ ଦୁଇ ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ହିଁ ନବରାତ୍ରୀ ପର୍ବ ଅବସରରେ ଅଷ୍ଟମୀ ଦିନ ମୋତେ ଦେଶକୁ ଏକ ବହୁତ ବ୍ୟାପକ ଯୋଜନାକୁ ନେଇ ଗତିଶକ୍ତି ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା ଆଉ ଆଜି ବିଜୟାଦଶମୀର ପବିତ୍ର ପର୍ବରେ ଦେଶକୁ ସଶକ୍ତ କରିବା ପାଇଁ, ରାଷ୍ଟ୍ରକୁ ଅଜେୟ କରିବା ପାଇଁ ଯେଉଁ ଲୋକ ଦିନ-ରାତି  ନିୟୋଜିତ କରିଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କ ସାମର୍ଥ୍ୟରେ ଆହୁରି ଅଧିକ ଆଧୁନିକତା ଆଣିବା ପାଇଁ ଏକ ନୂତନ ଦିଗରେ ଅଗ୍ରସର ହେବାର ସୁଯୋଗ ଆଉ ତାହା ମଧ୍ୟ ବିଜୟାଦଶମୀର ପବିତ୍ର ପର୍ବରେ, ଏହା ନିଜକୁ ନିଜ ମଧ୍ୟରେ ହିଁ ଶୁଭ ସଙ୍କେତ ନେଇ କରି ଆସିଛି। ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଶୁଭାରମ୍ଭ ଭାରତର ମହାନ ପରମ୍ପରା ସହିତ ଶସ୍ତ୍ର ପୂଜନ ସହିତ କରାଯାଇଛି। ଆମେ ଶକ୍ତିକୁ ସୃଜନର ମାଧ୍ୟମ ଭାବେ ଗ୍ରହଣ କରିଥାଉ। ଏହି ଭାବନାର ସହିତ, ଆଜି ଦେଶ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ବୃଦ୍ଧି କରୁଛି, ଆଉ ଆପଣ ସମସ୍ତେ ହେଉଛନ୍ତି ଦେଶର ଏହି ସଂକଳ୍ପର ସାରଥୀ । ମୁଁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ, ଏବଂ ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ଏହି ଅବସରରେ ପୁଣିଥରେ ବିଜୟା ଦଶମୀର ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ହିଁ ହେଉଛି ପୂର୍ବତନ ରାଷ୍ଟ୍ରପତି, ଭାରତରତ୍ନ, ଡକ୍ଟର ଏ.ପି.ଜେ. ଅବଦୁଲ କଲାମ ମହାଶୟଙ୍କର ଜୟନ୍ତୀ। କଲାମ ସାହାବ ଯେଉଁଭଳି ଭାବେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଭାରତର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ସମର୍ପିତ କରିଥିଲେ, ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ହେଉଛି ପ୍ରେରଣାଦାୟୀ। ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆଜି ଯେଉଁ 7ଟି ନୂତନ କମ୍ପାନୀ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ଷମ ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି, ସେହି ସାମର୍ଥ୍ୟ ରାଷ୍ଟ୍ରକୁ ଅନେକ ସଂକଳ୍ପ ଏବଂ ଦୃଢ଼ତା ପ୍ରଦାନ କରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଚଳିତ ବର୍ଷ ଭାରତ ନିଜ ସ୍ୱାଧୀନତାର 75 ବର୍ଷରେ ପ୍ରବେଶ କରିଛି। ସ୍ୱାଧୀନତାର ଏହି ଅମୃତ କାଳରେ ଦେଶ ଏକ ନୂତନ ଭବିଷ୍ୟତର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ନୂତନ ସଂକଳ୍ପ ନେଉଛି। ଆଉ ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ ଦଶକ- ଦଶକ ଧରି ଅଟକି ରହିଥିଲା, ତାହାକୁ ମଧ୍ୟ ପୂରଣ କରୁଛି। 41ଟି ଗୋଳାବାରୁଦ କାରଖାନା (ଅର୍ଡିନାନ୍ସ ଫ୍ୟାକ୍ଟ୍ରି)କୁ ନୂତନ ସ୍ୱରୂପ କରାଯିବାର ନିଷ୍ପତି, 7ଟି ନୂତନ କମ୍ପାନୀର ଶୁଭାରମ୍ଭ, ଦେଶର ଏହି ସଂକଳ୍ପ ଯାତ୍ରାର ହେଉଛି ଅଂଶ। ଏହି ନିଷ୍ପତି ବିଗତ 15-20 ବର୍ଷ ଧରି ଅଟକି ରହିଥିଲା । ମୋର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଏହି ସମସ୍ତ ସାତୋଟି ଯାକ କମ୍ପାନୀ ଆଗାମୀ ସମୟରେ ଭାରତର ସୈନ୍ୟ ଶକ୍ତିର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଆଧାର ପାଲଟିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆମର ଗୋଳାବାରୁଦ କାରଖାନାଗୁଡ଼ିକୁ କେବେ ବିଶ୍ୱର ଶକ୍ତିଶାଳୀ ସଂସ୍ଥା ଭାବେ ଗଣନା କରାଯାଉଥିଲା। ଏହି କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକ ପାଖରେ ଶହେ- ଦେଢ଼ଶହ ବର୍ଷରୁ ଅଧିକ ଅନୁଭବ ରହିଛି। ବିଶ୍ୱଯୁଦ୍ଧ ସମୟରେ ଭାରତର ଗୋଳାବାରୁଦ କାରଖାନାର ଶକ୍ତି ଓ ପ୍ରଦର୍ଶନ ବିଶ୍ୱ ଦେଖିଛି। ଆମ ପାଖରେ ଉନ୍ନତ ସଂସାଧନ ସବୁ ଥିଲା, ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଦକ୍ଷତା ଥିଲା। ସ୍ୱାଧୀନତା ପରେ ଏହି କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକୁ ଉନ୍ନତ କରିବାର ଆବଶ୍ୟକତା ଥିଲା, ନୂତନ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିକୁ ଗ୍ରହଣ କରିବାର ଥିଲା! କିନ୍ତୁ ଏହା ଉପରେ ଅଧିକ ଧ୍ୟାନ ଦିଆଗଲା ନାହିଁ। ସମୟ ସହିତ, ଭାରତ ନିଜର ସାମରିକ ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ ବିଦେଶ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରି ଚାଲିଲା। ଏହି ସ୍ଥିତିରେ ପରିବର୍ତନ ଆଣିବା ପାଇଁ 7ଟି ନୂତନ ପ୍ରତିରକ୍ଷା କମ୍ପାନୀ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତ ଅଭିଯାନ ଅଧୀନରେ ଦେଶର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି ଭାରତକୁ ନିଜ ଶକ୍ତି ଅନୁସାରେ ଭାରତୀୟ ସୈନ୍ୟକୁ ବିଶ୍ୱର ବଡ଼ ଶକ୍ତି ଭାବେ ଗଢ଼ି ତୋଳିବା, ଭାରତରେ ଆଧୁନିକ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଶିଳ୍ପର ବିକାଶ ହେଉ। ବିଗତ ସାତ ବର୍ଷରେ ଦେଶ ‘ମେକ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ’ର ମନ୍ତ୍ର ସହିତ ନିଜର ଏହି ସଂକଳ୍ପକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛି। ଆଜି ଦେଶର ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଯେତିକି ପାରଦର୍ଶିତା ଆସିଛି, ବିଶ୍ୱାସ ଆସିଛି ଏବଂ ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ପରିଚାଳିତ ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି ଆସିଛି, ଏହା ପୂର୍ବରୁ କେବେ ନ ଥିଲା। ସ୍ୱାଧୀନତା ପରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଏତେ ବଡ଼ ସଂସ୍କାର ହେବାକୁ ଯାଉଛି, ଅଟକାଇ ରଖିବା, ଝୁଲାଇ ରଖିବା ଭଳି ନୀତି ବଦଳରେ ଏକକ ବାତାୟାନ ବା ସିଙ୍ଗଲ ୱିଣ୍ଡୋର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇଛି। ଏହାଦ୍ୱାରା ଆମର ଉଦ୍ୟୋଗର ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି। ଆମର ନିଜସ୍ୱ ଭାରତୀୟ କମ୍ପାନୀ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଉଦ୍ୟୋଗରେ ମଧ୍ୟ ନିଜ ପାଇଁ ସମ୍ଭାବନା ଖୋଜିବା ଆରମ୍ଭ କରିଛନ୍ତି, ଆଉ ଏବେ ଘରୋଇ କ୍ଷେତ୍ର ଏବଂ ସରକାର, ଏକାଠି ମିଳିମିଶି ରାଷ୍ଟ୍ରର ସୁରକ୍ଷା ମିଶନରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛନ୍ତି।

ୟୁପି ଏବଂ ତମିଲନାଡ଼ୁରେ ପ୍ରତିରକ୍ଷା କରିଡରର ଉଦାହରଣ ଆମ ସାମ୍ନାରେ ରହିଛି। ଏତେ କମ ସମୟରେ ବଡ଼- ବଡ଼ କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକ ‘ମେକ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ’ରେ ନିଜର ଆଗ୍ରହ ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି। ଏହାଦ୍ୱାରା ଦେଶରେ ଯୁବକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ମଧ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହେଉଛି, ଆଉ ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳ ରୂପରେ ଅନେକ ଏମଏସଏମଇଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ନୂତନ ସମ୍ଭାବନା ସୃଷ୍ଟି ହେଉଛି। ଦେଶରେ ଯେଉଁ ନୀତିଗତ ପରିବର୍ତନ କରାଯାଉଛି, ତାହାର ପରିଣାମ ସ୍ୱରୂପ ଏହା ହେଉଛି ଯେ ବିଗତ 5 ବର୍ଷରେ ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ରପ୍ତାନୀ ତିନି ଶହ ପଚିଶ ପ୍ରତିଶତରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବେ ହିଁ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଏଭଳି 100ରୁ ଅଧିକ ସାମରିକ ଉପକରଣର ସୂଚୀ ଜାରି କରିଥିଲା, ଯାହାକୁ ଏବେ ଆଉ ବାହାରୁ ଆମଦାନୀ କରାଯିବ ନାହିଁ। ଏହି ନୂତନ କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଦେଶ ଏବେଠାରୁ ହିଁ 65 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ଉପକରଣ କିଣିବା ପାଇଁ ବରାଦ କରିଛି। ଏହା ଆମ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଉଦ୍ୟୋଗ ଉପରେ ଦେଶର ବିଶ୍ୱାସକୁ ପ୍ରତିପାଦିତ କରୁଛି। ବୃଦ୍ଧି ପାଉଥିବା ବିକାଶ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହେଉଛି। ଗୋଟିଏ କମ୍ପାନୀ ଅସ୍ତ୍ରଶସ୍ତ୍ର ଏବଂ ବିସ୍ଫୋରକର ଆବଶ୍ୟକତାକୁ ପୂରଣ କରିବ, ସେତେବେଳେ ଅନ୍ୟ କମ୍ପାନୀ ସେନା ପାଇଁ ଯାନବାହାନ ଉତ୍ପାଦନ କରିବ। ଏହିଭଳି, ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ଅସ୍ତ୍ରଶସ୍ତ୍ର ଏବଂ ସରଞ୍ଜାମ ହେଉ, ସେନାବାହିନୀର ଆରାମଦାୟକ ସାମଗ୍ରୀ ହେଉ, ଅପଟିକାଲ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ହେଉ, ଅବା ପୁଣି ପାରାଚ୍ୟୁଟ ହେଉ- ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି ଭାରତର ହିଁ କମ୍ପାନୀ ନା କେବଳ ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଦକ୍ଷତା ହାସଲ କରୁ, ବରଂ ବିଶ୍ୱର ଏକ ବ୍ରାଣ୍ଡ ହେଉ। ପ୍ରତିଦ୍ୱନ୍ଦିତାମୂଳକ ଦର ହେଉଛି ଆମର ଶକ୍ତି, ଗୁଣାତ୍ମକ ଏବଂ ବିଶ୍ୱସନୀୟତା ଆମର ପରିଚୟ ହେବା ଦରକାର।

ସାଥୀଗଣ,

ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଛି ଯେ ଏହି ନୂତନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଦ୍ୱାରା, ଆମର ଏଠାରେ ଗୋଳାବାରୁଦ କାରଖାନାରେ ଯେଉଁ ପ୍ରତିଭା ଅଛନ୍ତି, ଯାହା କିଛି ନୂଆ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କୁ ନିଜ ପ୍ରତିଭା ଦେଖାଇବା ପାଇଁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସ୍ୱାଧୀନତା ମିଳିବ। ଯେତେବେଳେ ଏହି ପ୍ରକାରର ବିଶେଷଜ୍ଞମାନଙ୍କୁ ନବସୃଜନର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥାଏ, କିଛି କରି ଦେଖାଇବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ବହୁତ ଚମତ୍କାର କରି ଦେଖାଇ ଥାଆନ୍ତି । ଆପଣ ନିଜର ବିଶେଷଜ୍ଞମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା, ଯେଉଁ ଉତ୍ପାଦ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରି ଦେଖାଇବେ, ତାହା ଭାରତର ପ୍ରତିରକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରର କ୍ଷମତା ବୃଦ୍ଧି କରିବ, ଏହା ସହିତ ସ୍ୱାଧୀନତା ପରେ ଯେଉଁ ଏକ ବ୍ୟବଧାନ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥିଲା, ତାହା ମଧ୍ୟ ଦୂର ହୋଇ ପାରିବ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ କୌଣସି ମଧ୍ୟ ଦେଶ ହେଉ ଅବା କୌଣସି ମଧ୍ୟ କମ୍ପାନୀ, ତାହାର ଅଭିବୃଦ୍ଧି ଏବଂ ବ୍ରାଣ୍ଡମୂଲ୍ୟ ତାହାର ଗବେଷଣା ଏବଂ ନବସୃଜନ ଦ୍ୱାରା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥାଏ। ସଫ୍ଟଓୟାରରୁ ନେଇ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ, ଭାରତର ଅଭିବୃଦ୍ଧି, ଭାରତର ନୂତନ ପରିଚୟ ହେଉଛି ଏହାର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଉଦାହରଣ। ଏଥିପାଇଁ, ମୋର ସମସ୍ତ ସାତୋଟି କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକୁ ମଧ୍ୟ ବିଶେଷ ଅନୁରୋଧ ଯେ ଗବେଷଣା ଏବଂ ନବସୃଜନ ଆପଣଙ୍କର କାର୍ଯ୍ୟ ସଂସ୍କୃତିର ଅଂଶ ହେବା ଉଚିତ। ଏହାକୁ ପ୍ରାଥମିକତା ମିଳିବା ଉଚିତ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ କେବଳ ବିଶ୍ୱର ବଡ଼ କମ୍ପାନୀ ସହିତ ତୁଳନା କରାଯିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ ବରଂ ଭବିଷ୍ୟତର ଟେକ୍ନୋଲୋଜିର ମଧ୍ୟ ନେତୃତ୍ୱ ନେବାର ଅଛି। ଏଥିପାଇଁ, ଏହା ଜରୁରୀ ଯେ ଆପଣ ନୂଆକିଛି ଚିନ୍ତା କରନ୍ତୁ, ଗବେଷଣା ଚିନ୍ତାଧାରା ସମ୍ପନ୍ନ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଅଧିକରୁ ଅଧିକ ସୁଯୋଗ ଦିଅନ୍ତୁ, ସେମାନଙ୍କୁ ଚିନ୍ତା କରିବା ପାଇଁ ସ୍ୱାଧୀନତା ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତୁ। ମୁଁ ଦେଶର ଷ୍ଟାର୍ଟ-ଅପ୍ସମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ କହିବି, ଏହି ସାତୋଟି କମ୍ପାନୀ ମାଧ୍ୟମରେ ଆଜି ଦେଶ ଯେଉଁ ନୂତନ ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିଛି, ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଏହାର ଅଂଶ ପାଲଟନ୍ତୁ। ଆପଣଙ୍କର ଗବେଷଣା, ଆପଣଙ୍କ ଉତ୍ପାଦ କିଭଳି ଏହି କମ୍ପାନୀ ସହିତ ମିଶି ଜଣେ ଅନ୍ୟ ଜଣଙ୍କର କ୍ଷମତା ଦ୍ୱାରା ଲାଭାନ୍ୱିତ ହୋଇ ପାରିବେ, ଏହା ଉପରେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଚିନ୍ତା କରିବା ଉଚିତ।

ସାଥୀଗଣ,

ସରକାର ସମସ୍ତ କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକୁ ଏକ ଉନ୍ନତ ଉତ୍ପାଦନ ବାତାବରଣ ଦେବା ସହିତ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ଷମ ସ୍ୱାୟତତା ମଧ୍ୟ ଦେଇଛି। ଏହା ସହିତ ହିଁ, ଏହା ମଧ୍ୟ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରାଯାଇଛି ଯେ ଏହି କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକର କର୍ମଚାରୀମାନଙ୍କର ହିତ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ସୁରକ୍ଷିତ ରହିବ। ମୋର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଦେଶକୁ ଆପଣଙ୍କ ଅଭିଜ୍ଞତାରୁ ବହୁତ ଲାଭ ମିଳିବ, ଆଉ ଆମେ ସମସ୍ତେ ମିଳିମିଶି ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତର ନିଜ ସଂକଳ୍ପକୁ ପୂରଣ କରିବା।

ଏହି ଭାବନାର ସହିତ ପୁଣିଥରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବିଜୟାଦଶମୀର ବହୁତ- ବହୁତ ଶୁଭକାମନା। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ- ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!