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जंगलराज सरकार ने बिहार में अपहरण और जबरन वसूली का उद्योग बिठाया है: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
लालू जी और नीतीश जी इतने लंबे समय तक रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर की जरूरतें पूरी नहीं की गई: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
हमारी योजना बिहार का विकास करना है और इसके लिए हमें आपके मदद की जरुरत है। हमें रूकावट करने वाली सरकार को हटाना होगा: प्रधानमंत्री
महास्वार्थबंधन ने 60 साल तक बिहार को लूटा है; हमें उन्हें अब और कोई मौका नहीं देना चाहिए: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली
जंगलराज बिहार में अपने चरम पर है, इस वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच 4000 से ज्यादा अपहरण के मामले सामने आए हैं: प्रधानमंत्री #परिवर्तनरैली

भारत माता की जय

मंच पर विराजमान बिहार के हमारे वरिष्ठ साथी श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधान परिषद् के सदस्य श्रीमान कुशवाहा जी, हम पार्टी के अध्यक्ष और तारापुर से उम्मीदवार श्रीमान शकुनी चौधरी जी, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह, श्री पाटिल, पूर्व सांसद श्री सूरजभान सिंह, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के महासचिव श्रीमान शिवराज सिंह जी, मुंगेर की सांसद श्रीमती वीणा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान रणधीर सिंह, मुंगेर नगर निगम की मेयर श्रीमती कुमकुम देवी, मुंगेर नगर निगम की डिप्टी मेयर सुश्री बेबी चंकी, सूर्यगढ़ से उम्मीदवार श्री प्रेम रंजन जी, भाजपा से लखीसराय के विधानसभा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा जी, भाजपा मुंगेर से उम्मीदवार श्री प्रणव यादव जी, लोजपा से जमालपुर से उम्मीदवार श्री मानसुख कुंवर जी, सुभाष चन्द्र बोस जी, बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।

सभी को इस विराट जन समुदाय का आशीर्वाद मिला है और यह इस बात का सबूत है कि अब बिहार में क्या होने वाला है। एक सच बता दूँ, मैं गुजरात में कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहा और गुजरात में लम्बे अरसे तक लोगों ने भाजपा को सरकार बनाने का अवसर दिया लेकिन कभी सुबह 10-11 बजे ऐसी रैली करनी हो तो हम नहीं कर पाएंगे। हम शाम के समय का इंतज़ार करते हैं। मैं हैरान हूँ कि आप लोग सोते हो कि नहीं सोते हो। ये दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत है कि हवा का रुख़ किस तरफ़ चल रहा है। देश के पोलिटिकल पंडितों को इस बार अपने सारे राजनीतिक समीक्षा के आधार बदलने के लिए बिहार ने मज़बूर कर दिया। लम्बे अरसे तक बिहार की राजनीति की चर्चा या तो कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द रहती थी या कुछ जातियों के इर्द-गिर्द रहती थी; पहली बार बिहार का चुनाव युवाओं के जोश के आस-पास केन्द्रित हुआ है, पहली बार चुनाव विकास के विचार पर केन्द्रित हुआ है। मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक पंडितों को इस बात पर मुहर लगाने के दिन आ गए हैं।

आज 8 अक्टूबर है। मुझे मुंगेर की उस धरती पर आने का सौभाग्य मिला है जहाँ योग को आधुनिक रूप दिया गया। पूरे विश्व को मुंगेर ने आकर्षित किया और यही मुंगेर जैसी कई योगपीठ है देश में जिसने दुनिया के 190 से ज्यादा देशों को योग मनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने 8 अक्टूबर को याद इसलिए किया क्योंकि 1979 में इसी दिन हमने हमारे प्राणप्रिय नेता आदरणीय जयप्रकाश नारायण को खो दिया था। जयप्रकाश नारायण जी में मौत से भी मुकाबला करने की ताक़त थी। उन्होंने अंग्रेज़ों के नाकों में दम कर दिया था। आजादी के बाद वे सुशासन के लिए लड़ते रहे, भ्रष्टाचार से लड़ते रहे, देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया और संपूर्ण क्रांति का मंत्र लेकर के देश के नौजवानों में एक नई चेतना भर दी थी लेकिन जयप्रकाश बाबू, कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि हमारे बीच से चले गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस देश में आपातकाल लगाया था। हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया था और जयप्रकाश नारायण जी को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था और यहीं उनकी बीमारी आई और उन्हें ले गई। दुर्भाग्य देखिये कि को कभी जयप्रकाश नारायण जी का गीत गाते थे, यही लोग उस कांग्रेस के साथ बैठे हैं जिस कांग्रेस ने जयप्रकाश बाबू को जेल के अन्दर बंद कर दिया था। ये स्वार्थ की राजनीति नहीं है तो क्या है; ये जयप्रकाश नारायण जी के साथ धोखा नहीं है तो क्या है। राम मनोहर लोहिया जीवनभर गैर-कांग्रेसी विचारों के लिए जूझते रहे। उसी राम मनोहर लोहिया का नाम लेने वाले लोग आज कांग्रेस द्वारा पिलाये गए पानी को पीकर के हमें कोसते हैं। इसलिए मैं कहने आया हूँ कि हमें बिहार के भाग्य को बदलना है और मेरा यह विश्वास है कि बिहार के ये नौजवान बिहार की तक़दीर भी बदलेंगे, बिहार की तस्वीर भी बदलेंगे।

मैं आज मुंगेर की इस धरती पर आया हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मुझे नंदलाल बोस जी को स्मरण करना चाहिए। यहाँ बहुत कम लोगों को उनके विषय में सुनने का अवसर मिला होगा। तारापुर में जन्मे नंदलाल बोस, जिस प्रकार बाबा अम्बेदकर ने भारत को संविधान दिया, उस संविधान को नया रूप-रंग देने का काम मुंगेर के लाल नंदलाल बोस ने किया। अलग-अलग खण्डों में 22 चित्र, जो आज भी हमारे संविधान का मूल तत्त्व है, वे 22 चित्र, उसकी सजावट, उसका रंग-रोगन इसी मुंगेर की धरती के बेटे नंदलाल बोस ने किया था। मैं आज उनको आदरपूर्वक नमन करता हूँ। कला, संस्कृति, ये बिहार के रग-रग में हैं और जब भी मौका मिला, इसने अपना असली रूप दिखाया है इसलिए पूरा देश बिहार का गौरवगान करता है, बिहार का आदर और सम्मान करता है।

भाईयों-बहनों, जब मैं जयप्रकाश जी को याद करता हूँ तो स्वाभाविक... पुराना मुंगेर जिला था; अब तो उसके हिस्से हो गए। सिमरिया में राष्ट्रकवि दिनकर का जन्म हुआ था और उनकी वह कविता जिसने पूरे देश के नौजवानों को प्रेरित किया था, “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”, इसी को लेकर के इतिहास का नौजवान चल पड़ा था। इस बार इस चुनाव में बिहार के भाग्य को बदलने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।

मेरा जन्म गुजरात की धरती पर हुआ है। ये वो धरती है जहाँ चरखाधारी मोहन महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। ये वो धरती है जहाँ के चक्रधारी द्वारकाधीश भगवन श्रीकृष्ण थे। और देखिये आज भी इस धरती पर द्वारकाधीश की परंपरा कैसी चल रही है। श्रीकृष्ण के संस्कारों की छाया उस धरती को कितनी प्रेरणा देती है, यही तो कारण है कि वहां हमारे यहाँ जो यदुवंशी लोग हैं जिन्होंने देश को श्वेत क्रांति दी और आज दूध के क्षेत्र में अमूल जैसी कई डेयरियाँ गुजरात की प्रसिद्ध है। भारत में श्वेत क्रांति का केंद्र बिंदु गुजरात बन गया था। श्रीकृष्ण की परंपरा को उन्होंने गौ-पालन करके निभाया।

लेकिन यहाँ के एक नेता क्या-क्या खा गए और उन्होंने यदुवंशियों का अपमान किया है। लालू जी चुनाव आते हैं, जाते हैं लेकिन आप ये मत भूलिये कि यही यदुवंश के लोग थे जो आपके साथ खड़े रहे थे और तब जाकर आपको सत्ता के सिंहासन तक जाने का अवसर मिला था। आज यदुवंश के लोग अगर आपको सवाल करते हैं तो आप उन पर क्या-क्या आरोप लगते हो। इतना गंभीर आरोप उन्होंने लगाया है कि यदुवंशी क्या खाते हैं। ये यदुवंश का अपमान है कि नहीं? ये बिहार का अपमान है कि नहीं? और जब यदुवंश का गुस्सा भड़क गया तो वो कह रहे हैं कि मेरे भीतर शैतान प्रवेश कर गया। मेरे मन में एक सवाल उठता है कि शैतान को यही ठिकाना मिला क्या, पूरे हिन्दुस्तान में, पूरे विश्व में कोई ठिकाना नहीं मिला; मिला तो सिर्फ़ लालू जी का ठिकाना मिला। मुझे बताईये, आपके घर, आपके गाँव, आपके मोहल्ले आया आपके शरीर में शैतान आने की हिम्मत कर सकता है? जैसे रिश्तेदार आता है और हम पहचान लेते हैं; उन्होंने शैतान को पहचान भी लिया। अब मुझे बताईये कि जहाँ शैतान रहने की हिम्मत कर सकता है, जहाँ शैतान को रहने के लिए अच्छी खातिरदारी मिल सकती है, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह हो सकती है क्या? इसलिए शैतान ने जिसका पता ढूंढ लिया है, उस पते पर कभी हम देखेंगे भी नहीं।

अब तो बिहार को बचाना है, इसे आगे बढ़ाना है। अब तक तो हम सोचते थे कि हमारी लड़ाई इंसानों से है, पहली बार पता चला कि इंसानों के अन्दर शैतान पहुँच जाता है और वो हमारे पीछे पड़ा हुआ है। आप कल्पना कीजिये, बिहार में आजादी के बाद राज किसने किया? 35 साल तक राज किया कांग्रेस ने, और 25 साल तक राज किया इन बड़े-छोटे भाईयों ने। जिन्होंने ये 60 साल बिहार को लूटा है, अब वो आकर के स्वार्थबंधन बना रहे हैं और छोटा नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को और अधिक बर्बाद होने देना है? बिहार को तबाही से मुक्त कराना है? 60 साल तक जिन्होंने बिहार के भविष्य को रौंद डाला है, क्या ऐसे ‘महास्वार्थबंधन’ को अब बिहार में जगह देनी चाहिए? हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति होनी चाहिए कि नहीं?

इस कांग्रेस पार्टी की जब सामने से आने की ताकत ख़त्म हो गई है तो पिछले दरवाजे से आ गए हैं। आज कांग्रेस के नेता अपने किसी नेता का गुणगान गाने की ताकत खो चुके हैं। कांग्रेस का ऐसा हाल कभी देश ने देखा नहीं था और उसका कारण हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में छोटा या बड़ा राजनेता हो; किसी कस्बे या विचारधारा का हो; सार्वजनिक जीवन में अहंकार कितना विनाश करता है, उसका उदाहरण कांग्रेस पार्टी है। ये जनता है, चुप रहती लेकिन समय आने पर चुन-चुन कर हिसाब चुकता करती है। लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के अहंकार का क्या हुआ, ये सब जानते हैं इस बार बिहार के चुनाव में अहंकार कैसे पराजित होने वाला है, ये बिहार के नौजवान करके दिखाने वाले हैं।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ये चुनाव सीधा-सीधा दो बातों पर है; निर्णय आपको करना है। एक तरफ जंगलराज है और एक तरफ विकासराज है। जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि जंगलराज फिर से आने देना चाहिए? अभी भनक आ गई है। बिहार सरकार के खुद के आंकड़े, जनवरी से जुलाई के आंकड़े कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज का जो सबसे बड़ा उद्योग लगा था वह था - अपहरण करो, फ़िरौती लो। जनवरी से जुलाई के आंकड़े जो बिहार सरकार ने घोषित किये हैं, उसके हिसाब से 4000 घटनाएं अपहरण की हुई हैं। अब आप मुझे बताईये कि क्या फिर से ये अपहरण के दिन आने देने हैं?

आपको याद है आने वाले दिनों में त्यौहार का मौसम है, दुर्गापूजा की धूम होगी, विजयादशमी का महोत्सव आएगा, रामलीला चलेगी; आपमें से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा या बहुत बचपन के दिन होंगे; दुर्गा मंडप में जाना हो और मां शाम को रोकती थी और कहती थी कि अब सूरज ढालने वाला है और बाहर नहीं जा सकते; मां को यहीं से नमन कर लो; ये दिन थे कि नहीं थे? रामलीला हुआ करती थी लेकिन शाम के समय में लोग जाने से डरते थे। त्यौहार के दिनों में कोई अगर नई गाड़ी खरीद ले तो बेचारे तो चिंता रहती थी कि यहाँ के किसी नेता को पता चल गया तो उसके चेले-चपाटे यहाँ से आकर के गाड़ी उठाकर ले जाएंगे। गाड़ी भी जाएगी, पैसे भी जाएंगे और मांगने गए तो जान भी चली जाएगी। ये दिन बिहार ने देखे हैं कि नहीं देखें हैं? इसलिए मैं कहता हूँ कि बिहार में चुनाव विकासराज के लिए होना चाहिए न कि जंगलराज के लिए।

भाईयों-बहनों, बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ कुछ इलाकों में इतना पानी है, जिस पानी के लिए हिन्दुस्तान के बहुत सारे इलाके तरसते हैं और बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहाँ नौजवान भरे पड़े हैं। यहाँ किसी को कुछ भी न आए और सिर्फ़ यहाँ के पानी और जवानी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया जाए तो बिहार का जीवन बदल जाएगा। यहाँ ऐसी सरकारें आई हैं जब बिहार का पानी भी बर्बाद हुआ और यहाँ की जवानी भी पलायन कर गई। मुझे बिहार का पानी और यहाँ की जवानी, इन दोनों पर मेरा भरोसा है जो न सिर्फ़ बिहार को बल्कि पूरे हिन्दुस्तान को बदलेंगे। मैं यह विश्वास लेकर यहाँ आया हूँ।

पानी का सही प्रबंध हो और जवानी को सही अवसर मिले; देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा लेकिन पानी गया तो गया और हम तो जानते हैं कि बिहार में एक और उद्योग चल पड़ा है, रेत की चोरी करने का सारी नदियों का कितना बुरा हाल है। नदी के किनारे पर रहने वाले लोग बालू चोरों के कारण कितने परेशान हैं, वो यहाँ के लोग भली-भांति जानते हैं। पानी तो नहीं बचा, बालू तक नहीं बचने दिया इन लोगों ने और यह बिहार की बर्बादी का कारण बना। ये आवश्यक है कि हमें बिहार के विकास की ओर ध्यान केन्द्रित करना है। मैं जरा पूछना चाहता हूँ इन नेताओं से कि मोदी-मोदी की माला जपते रहते हैं। आपका प्यार अलग है; आप मोदी-मोदी बोलते हो तो उनकी नींद खराब होती है।

भाईयों-बहनों, बिहार के ये दोनों महाशय रेल मंत्री थे कि नहीं? इतने साल रेल मंत्री रहे कि नहीं रहे? कोई मुझे बताये कि मुंगेर के रेल पुल का काम कर पाए? ये पूरा होना चाहिए कि नहीं? उन्होंने किया? वो तो बिहार के थे, रेल मंत्री रहे लेकिन मुंगेर का पुल नहीं बना; पटना का पुल लटका पड़ा है। ये इनके इरादे हैं और इसलिए मैं ये कहने आया हूँ कि हमें विकास की गाड़ी को तेज़ चलाना है। मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ। 11वीं, 12वीं पंचवर्षीय योजना, क्या हुआ? यहां के मुख्यमंत्री जी ने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था। 2010 के चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में नहीं आऊंगा, वोट नहीं मांगूंगा; ये कहा था? उन्होंने वचन का पालन किया? आपके साथ धोखा किया कि नहीं? बिजली तो छोड़ो, उन्होंने कैसी सरकार चलाई है; मैं बता रहा हूँ।

11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना, बिहार को गाँवों में बिजली के लिए 8215 करोड़ रुपये दिल्ली से मिले लेकिन ये लोग बिहार में ऐसी सरकार चला रहे हैं, 8000 करोड़ में से सिर्फ़ 1300 करोड़ का खर्च कर पाए। खर्च करने की भी ताकत नहीं है; न ताकत है और न इरादा है और जब तक उनका बंटवारा तय नहीं होता बात आगे चलती नहीं और इसलिए काम आगे रुकी पड़ी है। मैंने सपना देखा है कि 2022 में जब आज़ादी के 75 साल होंगे, मैं हिन्दुस्तान के हर गाँव में 24 घंटे बिजली पहुँचाना चाहता हूँ। मैं जहाँ जाता हूँ, बिजली की बात को आगे बढ़ा रहा हूँ और एक बार बिजली आती है तो सिर्फ़ दीया जलता है, ऐसा नहीं है; पूरी ज़िन्दगी रौशन हो जाती है, पीढ़ी रौशन हो जाती है; रोजगार मिलते हैं; शिक्षा मिलती है; कारखाने लगने लगते हैं; किसान को अपने उत्पाद में मूल्य वृद्धि का अवसर मिलता है और इसलिए बिजली को आगे बढ़ाना, बिजली से जीवन में सुधार लाना, एक बहुत बड़े काम का बीड़ा हमने उठाया है और काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 30 सालों में जितनी बिजली का उत्पादन नहीं हुआ, उतनी बिजली का उत्पादन हमने एक साल में करके दिखाया है। अगर काम करने वाली सरकार हो तो काम कैसे होता है, ये हमने करके दिखाया है।

मैं जंगलराज का उदाहरण देना चाहता हूँ। मैं आपको याद कराना चाहता हूँ। जनवरी 2014, याद कीजिये, सुकराबाद पुलिस स्टेशन; 70 साल के एक बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को पुलिस उठाकर ले गई क्योंकि बिजली को बिल झूठा आया था (बिजली आई नहीं लेकिन बिजली को बिल जरूर आया)। सुकराबाद पुलिस स्टेशन में 70 साल के बुजुर्ग श्री देविका चौधरी जी को इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। भाईयों-बहनों, पुलिस थाने में बुलाकर निर्दोष लोगों को मरने का कारोबार चला लेकिन इन नेताओं को कोई चिंता नहीं थी। एक ऐसी सरकार जो यहाँ के समाज और जीवन को तबाह कर रही है, इससे बिहार को बचाना है।

हमारी सरकार ने 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज बिहार के विकास के लिए दिया। उनको इससे भी बुरा लग गया। अब वे यह कोशिश करने लग गए कि ये पैकेज बिहार को न मिले। अब बिहार की जनता उन्हें पैकेज रोकने का अवसर नहीं देने वाली क्योंकि बिहार को अब विकास चाहिए। और हमने जो पैकेज कहा है, उसमें एक-एक चीज़ लिख-लिख कर कहा है, ज़िम्मेवारी के साथ कहा है। मुंगेर में पुल बनाना, 2300 करोड़ रूपया; नेशनल हाईवे – 80 मुंगेर सेक्शन को चार लेन करना, 1200 करोड़ रूपया; क्यूल-गया रेलवे लाइन 123 किमी, 1300 करोड़ रूपया; क्यूल-तिलैया रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, 87 किमी, 85 करोड़ रूपया; तीन पहाड़ राजमहल सहित अम्मापाली हाट, क्यूल रेलवे लाइन का विद्युतीकरण आदि, 247 किमी और करीब-करीब 280 करोड़ रूपया। पैकेज में मुंगेर को क्या मिलेगा, इसका पूरा खांका बनाकर घोषित किया है और दिल्ली सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमें मौका दीजिए। बिहार में मुझे रोड बनाना है, शिक्षा पर काम करना है, आरोग्य का काम करना है, बिजली का काम करना है, नदियों का काम करना है, किसानों के कल्याण का काम करना है। आप बस एक काम कर दीजिये, ये जो रूकावट करने वाली सरकार है, उसे हटा दीजिये और बिहार में यहाँ आकर शैतान बैठना नहीं चाहिए। अब शैतान को बिहार में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में कहीं पर भी ठिकाना नहीं मिलना चाहिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि भारी संख्या में मतदान कीजिये, एनडीए के सभी साथी दलों के साथ भाजपा को विजयी बनाईये। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बांधकर पूरी ताक़त से बोलिये-

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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October 25, 2021
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“In post-independence India, health infrastructure did not get the required attention for a very long time and citizens had to run from pillar to post for proper treatment, leading to worsening of the condition and financial strain”
“Government at the Center and in the state understands the pain of the poor, downtrodden, oppressed, backward and middle class”
“Through PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission an entire ecosystem for services from treatment to critical research will be created in every corner of the country”
“PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission, along with health, is also a medium of aatmnirbharta.”
“Heart of Kashi is the same, the mind is the same, but sincere efforts are being made to improve the body”
“Today, from technology to health, unprecedented facilities are being created in BHU. Young friends from all over the country are coming here for studies”

हर-हर, महादेव !

मैं शुरु करु अब आप लोग इजाज़त दे, तो मैं बोलना शुरु करुँ। हर-हर महादेव, बाबा विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा की नगरी काशी की पुण्य भूमि के सभी बंधु एवं भगिनी लोगन के प्रणाम बा। दीपावली, देव दीपावली, अन्नकूट, भईयादूज ,प्रकाशोत्सव एवंम आवै वाले डाला छठ क आप सब लोगन के बहुत – बहुत शुभकामना। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, यूपी के ऊर्जावान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया जी, यूपी सरकार के अन्यमंत्री गण केंद्र के हमारे एक और साथी महेंद्रनाथ पांडे जी, राज्य के एक और मंत्री अनिल राजभर जी, नीलकंठ तिवारी जी, रविंद्र जायसवाल जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद में हमारी साथी श्रीमती सीमा द्विवेदी जी, बी.पी.सरोज जी, वाराणसी की मेयर श्रीमती मृदुला जायसवाल जी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, टेक्नोलॉजी के माध्यम से देश के कोने-कोने से जुड़े हेल्थ प्रोफेशनल्स, जिला अस्पताल, मेडिकल संस्थान और यहां उपस्थित बनारस के मेरे भाइयों और बहनों।

देश ने कोरोना महामारी से अपनी लड़ाई में 100 करोड़ वैक्सीन डोज के बड़े पड़ाव को पूरा किया है। बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से, मां गंगा के अविरल प्रताप से, काशीवासियों के अखंड विश्वास से, सबको वैक्सीन- मुफ्त वैक्सीन का अभियान सफलता से आगे बढ़ रहा है। मैं आप सभी स्वजनों का आदर पूर्वक वंदन करता हूं। आज ही कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में मुझे उत्तर प्रदेश को 9 नए मेडिकल कॉलेज अर्पण करने का सौभाग्य मिला हैं। इससे पूर्वांचल और पूरे यूपी के करोड़ों गरीबों, दलितों-पिछड़ों-शोषितों-वंचितों को ऐसे समाज के सब वर्गों को बहुत फायदा होगा, दूसरे शहरों के बड़े अस्पतालों के लिए उनकी जो भागदौड़ होती थी, वो कम होगी।

साथियों,

मानस में एक सोरठा है –

मुक्ति जन्म महि जानि,ज्ञान खानिअघ हानि कर।

जहं बस सम्भु भवानि,सो कासी सेइअ कस न।।

अर्थात्, काशी में तो शिव और शक्ति साक्षात निवास करते हैं। ज्ञान का भंडार काशी तो कष्ट और क्लेश दोनों से मुक्त करती है। फिर स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी बड़ी योजना, बीमारियों कष्टों से मुक्ति का इतना बड़ा संकल्प, इसकी शुरुआत के लिए काशी से बेहतर जगह और क्या हो सकती है? काशी के मेरे भाईयों- बहनों आज इस मंच पर दो बड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। एक भारत सरकार का और पूरे भारत के लिए 64 हजार करोड़ से भी ज्यादा रकम का यह कार्यक्रम आज काशी की पवित्र धरती से लाँच हो रहा है। और दूसरा काशी और पूर्वाचँल के विकास के हजारों करोड़ के कार्यक्रमों का लोकार्पण और एक प्रकार से मैं कहूँ कि पहले वाला कार्यक्रम और यहाँ का कार्यक्रम सब मिलाके मैं कहूँ आज करीब- करीब 75 हजार करोड़ रुपये के कामों का आज यहाँ निर्णय या लोकार्पण हो रहा है। काशी से शुरू होने जा रही इस योजनाओं में महादेव का आशीर्वाद भी है। और जहां महादेव का आशीर्वाद है वहां तो कल्याण ही कल्याण है, सफलता ही सफलता है। और जब महादेव का आर्शीवाद होता है तो कष्टों से मुक्ति भी स्वाभाविक है।

साथियों,

आज यूपी सहित पूरे देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को ताकत देने के लिए, भविष्य में महामारियों से बचाव के लिए हमारी तैयारी उच्च स्तर की हो, गांव और ब्लॉक स्तर तक हमारे हेल्थ सिस्टम में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता आए, इसके लिए आज काशी से मुझे 64 हज़ार करोड़ रुपए का आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला है। आज काशी के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण अभी किया गया है। इसमें सड़कों से लेकर घाटों की सुंदरता, गंगा जी और वरुणा की साफ-सफाई, पुलों, पार्किंग स्थलों, BHU में अनेक सुविधाओं से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट । त्योहारों के इस मौसम में, जीवन को सुगम, स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए काशी में हो रहा ये विकास पर्व, एक प्रकार से पूरे देश को नई ऊर्जा, नई शक्ति, नया विश्वास देने वाला है। इसके लिए काशी सहित आज में काशी की धरती से 130 करोड़ देशवासियों को हिन्दुस्तान के कोन- कोने को हिन्दुस्तान के गाँव को हिन्दुस्तान के शहर को हर किसी को बहुत-बहुत बधाई !

भाइयों और बहनों,

हमारे यहां हर कर्म का मूल आधार आरोग्य माना गया है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया गया निवेश, हमेशा उत्तम निवेश माना गया है। लेकिन आज़ादी के बाद के लंबे कालखंड में आरोग्य पर, स्वास्थ्य सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितनी देश को जरूरत थी। देश में जिनकी लंबे समय तक सरकारें रहीं, उन्होंने देश के हेल्थकेयर सिस्टम के संपूर्ण विकास के बजाय, उसे सुविधाओं से वंचित रखा। गांव में या तो अस्पताल नहीं, अस्पताल थे तो इलाज करने वाला नहीं। ब्लॉक के अस्पताल में गए तो टेस्ट की सुविधा नहीं। टेस्ट हों, टेस्ट हो भी जाए भी तो नतीजों को लेकर भ्रम रहा, सटीक होने पर शंका, जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि जो गंभीर बीमारी डिटेक्ट हुई है, उसमें तो सर्जरी होगी। लेकिन जो सर्जरी होनी है उसकी तो वहां सुविधा ही नहीं है, इसलिए फिर और बड़े अस्पताल भागो, बड़े अस्पताल में उससे ज्यादा भीड़, लंबा इंतज़ार। हम सभी गवाह हैं कि मरीज़ और उसका पूरा परिवार ऐसी ही परेशानियों से उलझता रहता था। जिंदगी जूझने में चली जाती थी इससे एक तो गंभीर बीमारी कई बार और ज्यादा बिगड़ जाती है, ऊपर से गरीब पर जो अनावश्यक आर्थिक बोझ पढ़ता है, वो अलग।

साथियों,

हमारे हेल्थकेयर सिस्टम में जो बड़ी कमी रही, उसने, गरीब और मिडिल क्लास में इलाज को लेकर हमेशा बनी रहने वाली चिंता पैदा कर दी। आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन - देश के हेल्थकेयर सिस्टम के इसी कमी को दूर का एक समाधान है। भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने में हम तैयार हों, सक्षम हों, इसके लिए अपने हेल्थ सिस्टम को आज तैयार किया जा रहा है। कोशिश ये भी है की बीमारी जल्दी पकड़ में आए, जांच में देरी ना हो। लक्ष्य ये है कि आने वाले 4-5 सालों में देश के गांव से लेकर ब्लॉक, जिला, रीजनल और नेशनल लेवल तक क्रिटिकल हेल्थकेयर नेटवर्क को सशक्त किया जाए। विशेष रूप से जिन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव अधिक है, जो हमारे पहाड़ी और नॉर्थ ईस्ट के राज्य हैं, उन पर और अधिक फोकस किया जा रहा है। जैसे उत्तराखंड हैं हिमाचल है।

साथियों,

देश के हेल्थ सेक्टर के अलग-अलग गैप्स को एड्रेस करने के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के 3 बड़े पहलू हैं। पहला, डाइअग्नास्टिक और ट्रीटमेंट के लिए विस्तृत सुविधाओं के निर्माण से जुड़ा है। इसके तहत गांवों और शहरों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं, जहां बीमारियों को शुरुआत में ही डिटेक्ट करने की सुविधा होगी। इन सेंटरों में फ्री मेडिकल कंसलटेशन, फ्री टेस्ट, फ्री दवा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। समय पर बीमारी का पता चलेगा तो बीमारियों के गंभीर होने की आशंका कम होगी। गंभीर बीमारी की स्थिति में उसके इलाज के लिए 600 से अधिक जिलों में, क्रिटिकल केयर से जुड़े 35 हजार से ज्यादा नए बेड्स तैयार किए जाएंगे। बाकी लगभग सवा सौ जिलों में रैफरल की सुविधा दी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए ट्रेनिंग और दूसरी कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए 12 केंद्रीय अस्पतालों में ज़रूरी सुविधाएं विकसित करने पर भी काम हो रहा है। इस योजना के तहत राज्यों में भी सर्जरी से जुड़े नेटवर्क को सशक्त करने के लिए 24x7 चलने वाले 15 इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स भी तैयार किए जाएंगे।

साथियों,

योजना का दूसरा पहलू, रोगों की जांच के लिए टेस्टिंग नेटवर्क से जुड़ा है। इस मिशन के तहत, बीमारियों की जांच, उनकी निगरानी कैसे हो, इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा। देश के 730 जिलों में इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और देश में चिन्हित साढ़े 3 हज़ार ब्लॉक्स में, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स बनाई जाएंगी। 5 रीजनल नेशनल सेंटर्स फॉर डिज़ीज कंट्रोल, 20 मेट्रोपॉलिटन यूनिट्स और 15 BSL लैब्स भी इस नेटवर्क को और सशक्त करेंगी।

भाइयों और बहनों,

इस मिशन का तीसरा पहलू महामारी से जुड़े रिसर्च संस्थानों के विस्तार का है, उनको सशक्त बनाने का है। इस समय देश में 80 Viral Diagnostics और research labs हैं। इनको और बेहतर बनाया जाएगा। महामारियों में बायोसेफ्टी लेवल-3 की लैब्स चाहिए। ऐसी 15 नई लैब्स को ऑपरेशनल किया जाएगा। इसके अलावा देश में 4 नए National Institutes of Virology और एक National institute for one health भी स्थापित किया जा रहा है। दक्षिण एशिया के लिए WHO का रीजनल रिसर्च प्लेटफॉर्म भी रिसर्च के इस नेटवर्क को सशक्त करेगा। यानि आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के माध्यम से देश के कोने-कोने में इलाज लेकर क्रिटिकल रिसर्च तक, एक पूरा इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।

साथियों,

वैसे यह काम दशकों पहले हो जाने चाहिए थे। लेकिन हाल क्या है उसका वर्णन मुझे कहने की मुझे ज़रुरत नही है हम पिछले 7 साल से लगातार सुधार कर रहे हैं लेकिन अब एक बहुत बड़े स्केल पर, बहुत बड़े aggressive approach के साथ इस काम को करना है। कुछ दिन पहले आपने देखा होगा मैनें दिल्ली में पूरे देश के लिए एक गति- शक्ति एक बहुत बड़ा देशव्यापी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यक्रम को लाँच किया था। आज यह दूसरा, करीब 64 हजार रुपये का हेल्थ को ही ले करके, आरोग्य को ले करके, बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए देश के हर नागरिक को स्वस्थ रखने के लिए इतना बड़ा एक मिशन ले करके आज काशी की धरती से हम देशभर में निकल रहे हैं।

साथियों,

जब ऐसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, तो इससे हेल्थ सर्विस तो बेहतर होती ही है, इससे रोज़गार का भी एक पूरा वातावरण विकसित होता है। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, लैब, फार्मेसी, साफ-सफाई, ऑफिस, ट्रैवल-ट्रांसपोर्ट, खान-पान, ऐसे अनेक प्रकार के रोज़गार इस योजना से बनने वाले हैं। हमने देखो है एक बड़ा अस्पताल बनता है तो उसके आसपास एक पूरा शहर बस जाता है। जो अस्पताल से जुड़ी गतिविधियों के रोज़ी रोटी का केंद्र बन जाता है। बहुत बड़ी आर्थिक गतिविधि का केंद्र बन जाता है। और इसलिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी माध्यम है। ये एक होलिस्टिक हेल्थकेयर के लिए हो रहे प्रयासों की एक कड़ी है। होलिस्टिक हेल्थकेयर यानि जो सभी के लिए सुलभ हो, जो सस्ता हो और सबकी पहुंच में हो। होलिस्टिक हेल्थकेयर यानि जहां हेल्थ के साथ ही वेलनेस पर भी फोकस हो। स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन, उज्जवला योजना, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, ऐसे अनेक अभियानों ने देश के करोड़ों गरीबों को बीमारी से बचाया है, उन्हें बीमार होने से बचाया है। आयुष्मान भारत योजना ने दो करोड़ से ज्यादा गरीबों का अस्पताल में मुफ्त इलाज भी करवाया है। इलाज से जुड़ी अनेक परेशानियों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के ज़रिए हल किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,

हमसे पहले बरसों तक जो सरकार में रहे, उनके लिए स्वास्थ्य सेवा, पैसा कमाने, घोटाले का जरिया रही है। गरीब की परेशानी देखकर भी, वो उनसे दूर भागते रहे। आज केंद्र और राज्य में वो सरकार है जो गरीब, दलित, शोषित-वंचित, पिछड़े, मध्यम वर्ग, सभी का दर्द समझती है। देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए हम दिन-रात एक कर रहे हैं। पहले जनता का पैसा घोटालों में जाता था, ऐसे लोगों की तिजोरियों में जाता था, आज बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में पैसा लग रहा है। इसलिए आज इतिहास की सबसे बड़ी महामारी से भी देश निपट रहा है और आत्मनिर्भर भारत के लिए लाखों करोड़ रुपए का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना रहा है।

साथियों,

मेडिकल सुविधाएं बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या भी उतनी ही तेजी से बढ़े। यूपी में जिस तेजी के साथ नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, उसका बहुत अच्छा प्रभाव मेडिकल की सीटों और डॉक्टरों की संख्या पर पड़ेगा। ज्यादा सीटें होने की वजह से अब गरीब माता-पिता का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना देख सकेगा और उसे पूरा कर सकेगा।

भाइयों और बहनों,

आजादी के बाद 70 साल में देश में जितने डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों से पढ़कर निकले हैं, उससे ज्यादा डॉक्टर अगले 10-12 वर्षों में देश को मिलने जा रहे हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि मेडिकल क्षेत्र में कितना बड़ा काम देश में हो रहा है। जब ज्यादा डॉक्टर होंगे तो देश के कोने-कोने में, गांव-गांव में उतनी ही आसानी से डॉक्टर उपलब्ध होंगे। यही नया भारत है जहां अभाव से आगे बढ़कर हर आकांक्षा की पूर्ति के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,

अतीत में चाहे देश में हो या फिर उत्तर प्रदेश में, जिस प्रकार काम हुआ, अगर वैसे ही काम होता तो आज काशी की स्थिति क्या होती ? दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी को, भारत की सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक काशी को इन्होंने अपने हाल पर छोड़ रखा था। वो लटकते बिजली के तार, उबड़-खाबड़ सड़कें, घाटों और गंगा मैया की दुर्दशा, जाम, प्रदूषण, अव्यवस्था, यही सबकुछ चलता रहा। आज काशी का हृदय वही है, मन वही है, लेकिन काया को सुधारने का ईमानदारी से प्रयास हो रहा है। जितना काम वाराणसी में पिछले 7 साल में हुआ है, उतना पिछले कई दशकों में नहीं हुआ।

भाइयों और बहनों,

रिंग रोड के अभाव में काशी में जाम की क्या स्थिति होती थी, इसे आपने सालों साल अनुभव किया है। ‘नो एंट्री’ के खुलने का इंतज़ार तो बनारस वालों की आदत बन गया था। अब रिंग रोड बनने से प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, दिल्ली, कोलकाता, कहीं भी आना-जाना हो तो शहर में आ करके शहर वालों को परेशान करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी । यही नहीं, रिंग रोड अब गाज़ीपुर के बिरनोन तक फोर लेन नेशनल हाईवे से जुड़ गई है। जगह-जगह सर्विस रोड की सुविधाएं भी दी गई हैं। इससे अनेक गांवों के साथ-साथ प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर और बिहार, नेपाल तक आवाजाही सुविधानजक हो गई है। इससे यात्रा तो आसान होगी ही, व्यापार-कारोबार को गति मिलेगी, ट्रांसपोर्ट की कीमत कम होगी।

भाईयों और बहनों,

जब तक देश में एक डेडीकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ना हो, तब तक विकास की गति अधूरी रहती है। वरुणा नदी पर दो पुल बनने से दर्जनों गांवों के लिए अब शहर आना-जाना आसान हुआ है। इससे एयरपोर्ट आने जाने वाले प्रयागराज, भदोही और मिर्जापुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी। कालीन उद्योग से जुड़े साथियों को भी लाभ होगा और मां विन्ध्यवासिनी के दर्शन करने के लिए एयरपोर्ट से सीधे मिर्जापुर जाने के इच्छुक मां भक्तों को भी सुविधा मिलेगी। सड़कों, पुलों, पार्किंग स्थलों से जुड़े ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स आज काशीवासियों को समर्पित किए गए हैं, जिससे शहर और आसपास जीवन और अधिक सुगम होगा। रेलवे स्टेशन पर बने आधुनिक एग्जीक्यूटिव लाउंज से यात्रियों की सहूलियत और बढ़ेगी।

साथियों,

गंगा जी की स्वच्छता और निर्मलता के लिए बीते सालों में व्यापक काम किया जा रहा है, जिसका परिणाम आज हम आज अनुभव भी कर रहे हैं। घरों से गंदा पानी गंगा जी में ना जाए, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अब रामनगर में 5 नालों से बहने वाले सीवेज को ट्रीट करने के लिए आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट काम करना शुरु कर चुका है। इससे आसपास की 50 हज़ार से अधिक आबादी को सीधा लाभ हो रहा है। गंगा जी ही नहीं, बल्कि वरुणा की स्वच्छता को लेकर भी प्राथमिकता के आधार पर काम हो रहा है। लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रही वरुणा, अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच चुकी थी। वरुणा को बचाने के लिए ही चैनलाइजेशन की योजना पर काम किया गया। आज स्वच्छ जल भी वरुणा में पहुंच रहा है, 13 छोटे-बड़े नालों को भी ट्रीट किया जा रहा है। वरुणा के दोनों किनारे पाथवे, रेलिंग, लाईटिंग, पक्के घाट, सीढ़ियां, ऐसी अनेक सुविधाओं का भी निर्माण पूरा हो रहा है।

साथियों,

काशी आध्यात्म के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी एक अहम केंद्र है। काशी सहित संपूर्ण पूर्वांचल के किसानों की उपज को देश-विदेश के बाज़ारों तक पहुंचाने के लिए बीते सालों में अनेक सुविधाएं विकसित की गई हैं। पैरिशेबल कार्गो सेंटर्स से लेकर पैकेजिंग और प्रोसेसिंग का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को यहां विकसित किया गया है। इसी कड़ी में लाल बहादुर शास्त्री फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट का आधुनिकीकरण हुआ है, जो रेनोवेशन हुआ है, उससे किसानों को बहुत सुविधा होने वाली है। शहंशाहपुर में बॉयो- सीएनजी प्लांट के बनने से बायोगैस भी मिलेगी और हज़ारों मैट्रिक टन ऑर्गनिक खाद भी किसानों को उपलब्ध होगी।

भाइयों और बहनों,

बीते सालों की एक और बड़ी उपलब्धि अगर काशी की रही है, तो वो है BHU का फिर से दुनिया में श्रेष्ठता की तरफ अग्रसर होना। आज टेक्नॉलॉजी से लेकर हेल्थ तक, BHU में अभूतपूर्व सुविधाएं तैयार हो रही हैं। देशभर से यहां युवा साथी पढ़ाई के लिए आ रहे हैं। यहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं के लिए जो आवासीय सुविधाएं बनी हैं, वो युवा साथियों को बेहतर करने में मददगार सिद्ध होगी। विशेष रूप से सैकड़ों छात्राओं के लिए जो होस्टल की सुविधा तैयार हुई है, उससे मालवीय जी के विजन को साकार करने में और बल मिलेगा। बेटियों को उच्च और आधुनिक शिक्षा देने के लिए जिस संकल्प के साथ वो जीयें, उसको सिद्ध करने में हमें मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

विकास के ये सभी प्रोजेक्ट आत्मनिर्भरता के हमारे संकल्प को सिद्ध करने वाले हैं। काशी और ये पूरा क्षेत्र तो मिट्टी के अद्भुत कलाकारों, कारीगरों और कपड़े पर जादूगरी बिखेरने वाले बुनकरों के लिए जाना जाता है। सरकार के प्रयासों से बीते 5 साल में वाराणसी में खादी और दूसरे कुटीर उद्योगों के उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत और बिक्री में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसलिए एक बार फिर मैं यहां से सभी देशवासियों से आग्रह करुंगा कि इस दीवाली हमें, अपने इन साथियों की दीपावली का भी ध्यान रखना है। अपने घर की सजावट से लेकर, अपने कपड़ों और दीवाली के दीयों तक, लोकल के लिए हमें वोकल रहना है। धन तेरस से लेकर दीवाली तक लोकल की जमकर खरीदारी करेंगे तो, सबकी दीवाली खुशियों से भर जाएगी। और जब मैं लोकल से वोकल की बात करता हूँ, तो मैनें देखा है कि हमारे टीवी वाले भी सिर्फ मिट्टी के दीये दिखाते हैं। वोकल फॉर लोकल सिर्फ दीयों तक सीमित नहीं है भई, हर चीज़ में वो उत्पादन जिसमें मेरे देशवासियों का पसीना है, जिस उत्पादन में मेरे देश की मिट्टी की सुगंध है, वो मेरे लिए है। और एक बार हमारी आदत बन जाएगी देश की चीज़े खरीदने की तो उत्पादन भी बढ़ेगा, रोजगार भी बढ़ेगा, गरीब से गरीब को काम भी मिलेगा और यह काम सब मिल करके कर सकते हैं, सबके प्रयास से बहुत बड़ा परिवर्तन हम लोग ला सकते हैं।

साथियों,

एक बार फिर आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए पूरे देश को और विकास के अनेक प्रोजेक्ट्स के लिए काशी को, बहुत-बहुत बधाई। आप सबको आने वाले सभी त्योहारों की फिर से एक बार अनेक- अनेक अग्रिम शुभकामनाएं बहुत- बहुत धन्यवाद !