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कनाडा के लोकप्रिय एवं सफल प्रधानमंत्री,मेरे परम मित्र श्री स्टीफन हार्पर जी ,श्रीमती लौरें हार्पर जी और विशाल संख्या में आये हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (13)

 कनाडा की जनता उनका हृदय से धन्‍यवाद करता हूं... जिस प्रकार से कनाडा ने मेरा स्‍वागत किया है सम्‍मान किया है,जिस उमंग और उत्‍साह के साथ उन्‍होंने अपने प्‍यार को प्रकट किया है मैं इसके लिए प्रधानमंत्री जी का और कनाडा का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद व्‍यक्‍त करता हूं,लेकिन यह सम्‍मान किसी व्‍यक्ति का नहीं है,यह सम्‍मान नरेंद्र मोदी का नहीं है,यह सम्‍मान सवा सौ करोड़ हिंदुस्‍तानियों का है और कनाडा में भारत की पहचान नरेंद्र मोदी ने नहीं बनाई है,कनाडा में भारत की पहचान आप सब मेरे देशवासियों ने बनाई है। आपकी बदौलत,आपका पुरूषार्थ,आपका जीवन,मिलजुलकर के सबको साथ लेकर के चलने की हमारी परंपरा,उसको आपने भलीभांति यहां पर जीकर के दिखाया है। कनाडा का हर नागरिक आपके प्रति गौरव अनुभव करता है। आदर-सत्‍कार के साथ आपका नाम लेता है और जब दुनिया के किसी भी देश में किसी भारतीय की पराक्रम की गाथा सुनते हैं तो सीना चौड़ा हो जाता है और कनाडा में बसने वाले हमारे भारतीयों ने अपने सफल कारोबार के माध्‍यम से,अपने सफल जीवन के माध्‍यम से भारत की आन,बान,शान को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। इस शहर के साथ तो मेरा नाता पुराना रहा है। पहले भी आना हुआ है और तब मैं कुछ नहीं था। कोई जानता भी नहीं था। तब भी इस शहर ने मुझे जो प्‍यार दिया था,इतने ढेर सारे कार्यक्रम मेरे हुए थे। इतने लोगों से मेरा मिलना हुआ था और इसलिए आज मैं उस धरती पर फिर से एक बार आकर ,नई जिम्‍मेदारी के साथ आया हूं,तब मैं यहां रहने वाले मेरे सभी भारतीय भाईयों और बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

मेरा कनाडा के कारोबार से बड़ा अच्‍छा संबंध रहा,मेरा बहुत अच्‍छा अनुभव रहा। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री रहा कई वर्षों तक और मुख्‍यमंत्री के कालखंड में मैं एक Vibrant Gujrat InvestorSummitकरता था। 2003 में पहली बार किया। पूरी कल्‍पना नई थी और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कनाडा वो देश है जो 2003 से गुजरात का partner countryबना। एक developed countryके लिए किसी देश के छोटे से राज्‍य के साथ partner countryबनना यह निर्णय छोटा नहीं होता है,लेकिन कनाडा ने वो निर्णय किया और अब तक निभाया है। मैं इसके लिए कनाडा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं कल रात यहां पहुंचा,कल रात चला जाऊंगा लेकिन कनाडा के प्‍यार को मैं कभी भुला नहीं पाऊंगा। आज कल तो विमानों की सेवा इतनी अच्‍छी हो गई है कि 15-17-20..... घंटे में आप भारत से कनाडा पहुंच सकते हो। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को आने में 42 साल लग गए। ये भी बड़ी विचित्रता देखिए कि भारत और कनाडा मिलकर स्पेस में तो प्रगति कर रहे हैं, लेकिन धरती पर कतराते रहते थे। जिस बात को 42 साल बीत गए, उसको मैंने दस महीने के भीतर-भीतर कर दिया।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (8)

मैं जानता हूं कि भारत की शक्ति और भारत की आवश्‍यकता ....कनाडा की संपत्ति और कनाडा का सामर्थ्‍य : इंडिया प्‍लस कनाडा; आप कल्‍पना कर सकते हो। हम दुनिया में कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभर सकते हैं| भारत को जिन-जिन प्राकृतिक संपदाओं की जरूरत है उन सारी प्राकृति संपदाओं की पूर्ति कनाडा से हो सकती है। मेरे हिंदुस्‍तान में किसान खेत में मजदूरी करता है, मेहनत करता है, पसीना बहाता है और जब उसको फर्टीलाइजर की जरूरत होती है तो पोटाश कनाडा से आता है। यहां पर इतनी प्राकृतिक संपदा है.. एक बार यहां के एक राज्‍य के प्रीमियर गुजरात आये थे। मैंने उनसे कहा कि मेरा राज्‍य ऐसा है.. तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। मैंने कहा कि मेरे यहां हीरे की खदानें नहीं हैं, लेकिन मेरे लोगों का कौशल ऐसा है, Entrepreneurshipमें इतना दम है कि दुनिया में दस में से नौ हीरे ऐसे हैं जिस पर किसी न किसी भारतीय का हाथ लगा हुआ होता है। उनको मैंने कहा कि आपके पास हीरे की खदानें हैं, कच्‍चा हीरा मुझे दे दीजिए। मैं आपको मूल्‍य वृद्धि करके वापस लौटा दूंगा और आपके कच्‍चे हीरे पर हिंदुस्‍तान के पसीने की महक दुनिया में आपकी ताकत को चार गुना बढ़ा देगी। यह सामर्थ्‍य है दोनों देशों में। इस सामर्थ्‍य को जोड़ने का एक नया युग आज प्रारंभ हुआ है। आज जो हमने निर्णय किए हैं, मिल बैठ करके, खुलकर के बातें हुईं हैं और एक मित्रतापूर्ण माहौल में हुई हैं। एक दूसरे को समझने में अब हमें कोई तकलीफ नहीं है और इसलिए मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि इंडिया और कनाडा का यह संसार बहुत लंबा चलने वाला है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मेरे मित्र श्रीमान हार्पर का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं|

 भाईयों और बहनों पिछले वर्ष जब भारत में चुनाव का मौसम था, चुनाव तो वहां चल रहे थे लेकिन नारे यहां से सुनाई देते थे। नतीजे तो वहां आये थे। लेकिन मिठाई यहां बांटी जा रही थी। वहां पर लोग दिन में खुशी मना रहे थे, आप आधी रात में मना रहे थे। मेरे भाईयों  और बहनों, दस महीने पहले सिर्फ सरकार बदली थी। लेकिन आज मैं दस महीनों के बाद कह सकता हूं कि जन-जन का मन भी बदला है। सरकार बदली है, उससे क्‍या होगा?ये तो समय कहेगा, लेकिन मन के बदलने से क्‍या कुछ हो सकता है इसको मैं भली-भांति समझ सकता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (9)

हम लोग जब छोटे थे, तो सिनेमा का एक गीत सुना करते थे – “देख तेरे संसार की हालत क्‍या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान।“  उस समय एक पीड़ा थी, व्‍यथा की बात थी, उस गीत में। मैं आज उस गीत को नए रूप में देख रहा हूं कि इंसान बदला है। उस समय पीड़ा थी कि कितना बदल गया इंसान और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कितना अच्‍छा बन गया इंसान। बदला है, बदला है। कोई कल्‍पना कर सकता है? मैंने देश के गरीब भाईयों और बहनों को कहा कि आप बैंक में खाता खोलिए। हमारे यहां मेरे जन्‍म से पहले ही बैंक तो चल रही थी, देश आजाद होने के बाद भी बैंक चल रही थी, कांग्रेस सरकार ने श्रीमति इंदिरा गांधी की सरकार थी तब बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया था, ताकि बैंक गरीबों के काम आये। लेकिन इसके बावजूद भी दस करोड़ से अधिक परिवार ऐसे थे यानी करीब-करीब 40 प्रतिशत से अधिक जनता ऐसी थी, जिनके नसीब में बैंक का खाता खोलना नहीं था। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी कि मुझे बैंक में खाते खुलवाने हैं और.. एक जमाना था.. आप भी हिन्‍दुस्‍तान में रहे हैं, बैंक में जाते थे तो बैंक का अफसर नीचे से ऊपर देखता भी नहीं था और अगर आप उसका ध्‍यान आकर्षित करने की कोशिश करें, तो काटने के लिए आता था – देखते नहीं हो मैं काम कर रहा हूं!  इंसान बदल गया, बैंक वाले भी बदल गये, यही बैंक के कर्मचारी.. आज मैं उन पर गर्व करता हूं,  उनका अभिनंदन करता हूं कि वो गांव-गांव गये, गरीब के घर गये और 14 करोड़ बैंक खाते खोले| 14 करोड़ ! मतलब कि करीब करीब तीन कनाडा और यह काम सौ दिन में पूरा किया उन्होंने ..सौ दिन में | इंसान बदला है !! भारत का जन मन जो बदला है यह उसका उदाहरण है सरकार सिर्फ नहीं बदली है..जन मन बदला है | जब बैंक खाते खोलने की बारी आई तो.. गरीब के पास पैसे नहीं, बैंक खाता क्‍या खोलेगा और इसलिए हमने कहा था कि जीरो बैलेंस से एकाउंट खोलेंगे। जीरो बैलेंस| बैंक वालों को शुरू में तो थोड़ा ये था कि भई ये क्‍या कर रहे हो आप? हमने कहा कि भई क्‍या जाता, है दो कागज पर उनका नाम लिखना है, बैंक एकाउंट खोलना है, जाता क्‍या है तुम्‍हारा। वो बोलें कि कुछ तो देना चाहिए उन्‍हें। हमने कहा क्‍या देना है, उसने पसीना बहाया है, क्या लेना है , दे दो बैंक का खाता दे दो। मैंने गरीबों को कहा था कि आपको पैसे बैंक में रखने की जरूरत नहीं है, खाता खोल दीजिए, फिर आगे देखेंगे। लेकिन मेरे नौजवान साथियों, दोस्‍तों। जन-मन बदला है, तो कैसे बदला है.. मैंने गरीब को कहा था कि तुम्‍हें बैंक में पैसे डालने की जरूरत नहीं है, मुफ्त में खाता खोल देंगे। लेकिन गरीब की अमीरी भी तो कुछ चीज होती है। गरीब की अमीरी की भी अपनी एक ताकत होती है और मैं आज गर्व से कहता हूं, उन गरीबों के सामने सर को झुकाकर उनका अभिनंदन करता हूं, उन्‍होंने 14 हजार करोड़ रूपया बैंक में जमा करवाया। ये गरीबों की अमीरी, ये बदले हुए जन-मन की निशानी है। देश में एक नया विश्‍वास पैदा हुआ है। सरकार बदली है, इसलिए सब बदलेगा ऐसा नहीं है। बदलने का मेरा विश्‍वास इसलिए है कि जन-मन बदला है । “जन मन गण अधिनायक” जो  कहते हैं न, वो जन-मन बदला है। हमारे देश में आप जब विदेश से आते थे, एयरपोर्ट पर उतरने ही आपकी शिकायत क्‍या रहती थी? कि गंदगी बहुत है, सफाई नहीं है, ऐसा ही लगता था न? हमने तय किया कि काम कठिन है, लेकिन करना चाहिए और हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? जिनको गंदगी करनी थी वे गंदगी करके चले गए लेकिन हम सफाई करके जाएंगे। आज जन-मन ऐसा बदला है कि हर दिन एकाध खबर तो कहीं-कहीं से आती है कि फलाने बैंक के सारे Employee Saturday-Sundayको सफाई करने निकले हैं, फलाने कॉलेज के Studentsसफाई करने के लिए निकले हैं, फलाने मंदिर के सारे संत सफाई करने के लिए निकले हैं, फलाना एम. एल. ए. सफाई कर रहा है, एम पी सफाई कर रहा है, चारों तरफ कहीं न कहीं से खबर आ रही है। मैंने देखा.. आप कभी सचिन तेंदुलकर की वेबसाइट पर जाओगे तो उन्‍होंने अपना एक वीडियो रखा है। उन्‍होंने मुंबई में एक फुटपाथ तय की, रोज सुबह चार बजे जाते थे अपने दोस्‍तों को ले करके। महीने भर गए और पूरी उसकी सफाई करके उसको बढि़या से पार्क में Convert कर दिया। लोग आकर बैठते हैं। सरकार ने नहीं किया, नागरिक कर रहे हैं। दो बेटियां.. एक नगालैंड से और एक बनारस से, दो बेटियां बनारस में एकठ्ठी हुईं और उनका मन कर गया कि काशी की घाटों की सफाई करें और आज मैं हैरान हूं कि उन दो बेटियों ने काम शुरू किया, धीरे-धीरे नौजवान जुड़ते गए और उन्‍होंने पूरे प्रभु घाट को साफ कर दिया। आज लोग जा करके, विदेश के लोग वहां जा करके घंटों तक गंगा के सामने बैठते हैं। देश विशाल है, गंदगी बहुत है, पुरानी है, वक्‍त लगेगा लेकिन जन-मन बदला है, उसका ये उदाहरण है। हमने कहा कि स्‍कूल में टॉयलेट बनाना है, उसमें भी Girl Childके लिए टॉयलट बनाना है। लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री का काम होता है ये क्‍या ? लेकिन ये थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है, औरों को जो बनाना है बना दें, मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने हैं। लोगों को लगता है कि यह प्रधानमंत्री का काम होता है क्‍या,लेकिन यह थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है। औरों को जो बनाना है बना दे,मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने है। और बूंद-बूंद से जैसे समुद्र भर जाता है, छोटे-छोटे कामों से हिंदुस्‍तान की शक्‍ल सूरत बदल जाएगी यह मेरा विश्‍वास है| दोस्‍तों और मेरा विश्‍वास है सवा सौ करोड़ देशवासी एक कदम भी चलें तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाता है। एक दिन मेरे मन में विचार आया कि जिसके पास पैसे हैं सप्‍ताह में दो दिन तो Dinner किसी बढि़या से होटल में करता होगा। 15-20 हजार को बिल देकर के वापस आता है। क्‍या ऐसे लोगों ने भी गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेनी चाहिए क्‍या?उनको शोभा देता है क्‍या?एम.पी है,एम.एल.ए हैं,मंत्री हैं 400 रुपये की सब्सिडी । मैंने ऐसे ही बातों बातों में कह दिया कि भई यह अच्‍छा नहीं लगता,हमारे जेब में दम है तो हमने क्‍यों लेनी चाहिए,गरीब लें,गरीब को मिलनी भी चाहिए। लेकिन जिसके पास संभावना है वो क्‍यों ले?और सब्सिडी से पका हुआ खाना शोभा देता है क्‍या?मैंने सार्वजनिक रूप से नहीं कहा था दोस्‍तों। ऐसे ही बातों बातों में अपने साथियों से बीच बात कर रहा था तो बात फैलनी लगी और बात फैलने लगी आज भी मेरे साथियों का जन मन बदला है। बदला हुआ जन मन ने क्‍या किया?करीब चार लाख लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी। यानी करीब-करीब देश की तिजोरी में 200 करोड़ रुपये बच गया। Two hundred crore rupees. कोई हुकुम नहीं,कानून नहीं,कुछ नहीं,हर व्‍यक्ति को लगने लगा है कि अब देश इंतजार नहीं करेगा। देश को आगे बढ़ना है और हम बढ़ाएंगे यह जन-मन का विश्‍वास बढ़ा है और मैं यह जितनी बातें बता रहा हूं वो मोदी ने नहीं की है। देश के सामान्‍य नागरिक ने की है। सामान्‍य नागरिक के मन में एक नया मिजाज पैदा हुआ है। एक आनंददायक घटना मैं देख रहा हूं और मैंने फिर Publicly एक बार Announce किया। Publicly ऐसा कहा मैंने लोगों से सार्वजनिक रूप से अभी 5-6 दिन पहले ही कहा है। मैंने कहा कि मेरा सबसे आग्रह है कि जिसके जेब में दम है,वो गैस की सब्सिडी लेना छोड़ दे। मुझे विश्‍वास है कि लोग छोड़ देंगे। लेकिन मैंने उनसे एक बात और कही। मैंने कहा कि जो लोग गैस की सब्सिडी छोड़ेंगे,वो पैसा मैं सरकार की तिजोरी में नहीं डालूंगा,इसका मतलब यह नहीं कि मेरी जेब में डालूंगा। मैंने कहा कि जो गरीब परिवार है, जिनके घर में लकड़ी से जलने वाला चूल्‍हा है, जहां गरीब माँ लकड़ी से चूल्‍हा जलाती है। पूरे घर में धुंआ होता है, छोटे बच्‍चे दिन-रात रोते रहते हैं, धुएं में बैठ नहीं पाते, बीमार हो जाते हैं। मैं यह गैस सिलेंडर उन गरीब परिवारों को दूंगा और उससे उस परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य को लाभ होगा। लकड़ी जलना बंद होगा तो जंगल बचेंगे, धुंआ नहीं होगा तो पर्यावरण बचेगा।जंगल बचेगा तो पर्यावरण में वृद्धि होगी, एक इंसान सब्सिडी छोड़ता है, कितने फायदे हो सकते हैं, जिसका आप अनुमान लगा सकते हैं और जन-मन बदला है, उसके कारण यह परिणाम आ रहा है। आपको हैरानी होगी, सबसे बड़ी सरप्राइज घटना बता दूं, मेरे लिए भी सरप्राइज है। लेकिन वो सुखद.. आश्‍चर्य है मेरे लिए। एक अखबार के मालिक ने मुझे चिट्ठी लिखी है। बताईये सुखद आश्‍चर्य है या नहीं है। अखबार के मालिक ने चिट्ठी लिखी है और उसमें मुझे लिखा है कि मोदी जी, जो देश मूड है उससे लगता है.. और हमने हमारे अखबार की एक नीति बनाई है और वो नीति ये है कि सप्‍ताह में एक दिन हमारा अखबार सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव न्‍यूज ही छापेगा। ये छोटी घटना नहीं है मित्रों ! भले आज एक अखबार ने काम शुरू किया है लेकिन खुद हो करके, सामने हो करके कहना और ये विचार मैंने नहीं दिया है। अब्‍दुल कलाम हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति जी वो बार-बार कहते थे कि पॉजिटिव का कॉलम बनाईए, मैंने कभी कहने की हिम्‍मत नहीं की थी। लेकिन मुझे खुशी हुई कि बदले हुए जन-मन.. कहां-कहां उसका फैलाव हो रहा है, कैसे बात पहुंच रही है, उससे लगता है कि देश.. आप जिन सपनों को लेकर जीते हैं, आप ही आंखों के सामने वो सपने साकार होते हुए आप देखेंगे ये मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (6)

हमारे देश में कई समस्‍याएं हैं लेकिन उन समस्‍याओं का समाधान एक ही जड़ी-बूटी में है। सब दु:खों की दवाई एक ही जड़ी-बूटी है। वो जड़ी-बूटी मोदी नहीं है, उस जड़ी बूटी का नाम है- विकास। हमारी सभी समस्‍याओं का समाधान है कि हम देश में विकास के एजेंडा पर आगे बढ़ें। हम विकास करें और मैं बताता हूं भाईयों और बहनों कि भारत के अंदर ताकत है, सिर्फ अवसर चाहिए। पिछले दस साल में हमारे देश में प्रति दिन जो रोड का Construction होता था वो 2 किलोमीटर होता था Per Dayऔर पिछले दस महीने से  Per Day 11 किलोमीटर होता है यानी आप देख सकते हैं कि विकास.. 11 किलोमीटर है ...यानी बहुत बड़ी बात नहीं बता रहा लेकिन तुलनात्‍मक रूप से पता चलेगा कि हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं। भाईयों और बहनों, विकास का रास्‍ता ही देश को आगे ले जाएगा।

आप कल्‍पना कीजिए कि भारत के पास आज कौन सी बड़ी संपत्ति है? मेरे नौजवान साथियों: भारत के पास वो संपत्ति है, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है और वो है –भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम उम्र की है। हिंदुस्तान नौजवान है| 80 करोड़ नौजवान जिस देश के पास हों.. 160 करोड़ मजबूत भुजाएं हों, 80 करोड़ सपने हों, वो देश क्‍या नहीं कर सकता?यह एक बहुत बड़ी संपत्ति है हमारी और इसलिए विकास के केंद्र में, मेरे दिमाग में ये 80 करोड़ नौजवान हैं, जिनके हाथ में हुनर हो, जिनको रोजगार के अवसर हों, वे मिट्ठी में से सोना बनाने की ताकत रखते हैं और देश सोने की चिडि़या फिर एक बार बन सकता है दोस्‍तों। ये आत्‍मविश्‍वास उन सवा सौ करोड़ देशवासियों के आर्शीवाद से पनपा है। ये आत्‍मविश्‍वास उन 80 करोड़, 35 साल से कम उम्र के नौजवानों की आंखों में से पैदा हुआ है और मैं दुनिया को कहता हूं कि दुनिया कल्‍पना करे , प्रगतिशील देश कल्‍पना करें, समृद्ध देश कल्‍पना करें, 2030 : 2030 के बाद उनके पास कितने ही कारखाने होंगे, कितने ही काम होंगे, उनके पास Work Force होगा क्‍या ? दुनिया के सभी समृद्ध देशों में उम्र बहुत तेजी से बढ़ रही है। जवानी मुरझा रही है और तब अगर जवानी मुरझा गई तो उस देश को चलाने की ताकत बाहर से लानी पड़ेगी। पूरे विश्‍व को 2030 के बाद जो Work Force की जरूरत होने वाली है वो एक ही जगह से मिलने वाला है, उस जगह का नाम है – हिन्‍दुस्‍तान | इसलिए हम अभी से इस बात पर ध्‍यान केंद्रित कर रहे हैं और उसमें हमारी प्राथमिकता है Skill Development... हमारा मिशन है Skill India| पहले भारत की पहचान थी- Scam India। हम बनाना चाहते हैं Skill Indiaऔर इसलिए Skill Development  को प्राथमिकता देना चाहते हैं और Skill Development में भी मेरे मन में अलग-अलग कल्‍पनाएं हैं। एक तो हम अभी से दुनिया का Mapping करना चाहते हैं कि किस देश को किस प्रकार के मानव बल की आवश्‍यकता होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Maths और Science के Teachers की जरूरत होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Nurses चाहिएं। दुनिया के कई देश हैं जहां हाथ से काम करने वाले कारीगर चाहिए। अलग-अलग प्रकार की आवश्‍यकताएं हैं। दुनिया की Mapping करके, जिसको जिस प्रकार के Work Force की जरूरत पड़ेगी उसका अनुमान लगाया जा सकता है, उस प्रकार का Work Force अभी से तैयार करने के लिए Skill Development मिशन.. और Skill Development में दुनिया में आज जिसके पास बढि़या से बढि़या Skill Development की व्‍यवस्‍थाएं, योजनाएं हैं सबको मैं भारत में लाना चाहता हूं, दूसरा Skill Development वो हो जिसमें Enterpreneur तैयार हो। नए स्टार्ट अप, नई पीढ़ी, नए-नए व्‍यवसाय में खुद जुटें, स्‍वरोजगार में आगे आए किसी से नौकरी पाने के लिए इंतजार न करे, वो Job Seeker न बने, वो Job Creater बने। भले दो को नौकरी दें, पांच को दें लेकिन वो Job Creater बने। उनके लिए जो Skill Development होनी चाहिए, उस पर बल देना चाहिए, तीसरा जो खुद रोजी-रोटी कमाने के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनके लिए उस प्रकार का Skill Development| इस तरह Skill Development पर बल दे करके, Value Addition करके.. और हमारे देश में दुर्भाग्‍य से कोई कितना भी बदमाश व्‍यक्ति क्‍यों न हो? लेकिन अगर खादी का बढि़या कुर्ता पहन करके, लंबा कुर्ता पहन करके आ जाए या कोट पैंट और टाई पहन करके आ जाए और अपने घर की घंटी बजाए, तो हम कहेंगे कि आइये-आइये बैठिए, क्‍या काम है? लेकिन कोई बेचारा गरीब मजदूर, ऑटो रिक्‍शा वाला, कपड़े गंदे हों और वो आ करके घंटी बजाए और पूछे कि फलाने भाई कहां गये तो हम कहते हैं कि अरे चलो चलो ! ये कोई टाईम है क्‍या? भागो शाम को आना!क्‍यों? हमारे मन में Labour के प्रति जो Dignity चाहिए, उसका अभाव भर गया है। जब तक एक सामान्‍य व्‍यक्ति की Dignity.. ये हमारा स्‍वभाव नहीं होगा, Dignity of Labour, ये हमारी प्रकृति नहीं होगी, तो शायद दुनिया जो हमसे मांग रही है उसको हम गौरव से नहीं कर पाएंगे। मैं आज गर्व से कहता हूं कि दुनिया में जिस प्रकार से युवा पीढ़ी को हम देख रहे हैं, भारत की युवा पीढ़ी भी जो भी काम मिले, बिना शर्म के, बिना संकोच के, वह करने को तैयार है। कोई संकोच नहीं, कोई शर्म नहीं, वो मेहनत करने को तैयार है। ये जन-मन बदला है, उसी का परिणाम है। नौजवान का मिजाज बदला है,वो मेहनत करने को तैयार है, काम करने को तैयार है, हम उसे अवसर देना चाहते हैं, Human Resources Development, इस पर हम ध्‍यान केंद्रित करना चाहते हैं, उसके साथ-साथ हम थोड़ा ऊपर के लेयर का भी सोच सकते हैं। भारत के पास Talent है।Talent में कोई कमी नहीं है।हमारे टैलेंट का सबसे बड़ा सबूत है- भारत ने अभी मंगलयान भेजा है। Mars पर हम गये और छोटी-छोटी जगहों पर वे Mars पर जाने वाले सारे पुर्जे तैयार हुए। हिंदुस्‍तान के पांच छह राज्‍यों में छोटे-छोटे Small Scale Industry वालों के यहां एक-एक पुर्जा बना। हमारे Scientist जो हैं, नौजवान हैं, उनका Talent देखिए। उन्होंने  पहुंचा दिया मंगलयान।दुनिया में हम पहला देश हैं जो पहले ही Trial में सफल हो गये और मंगलयान में हमारे Talent का कमाल देखिए। हॉलीवुड की फिल्‍म पर जितना खर्चा होता है न, उससे कम खर्चे में मंगलयान पहुंच गया। आप अगर दिल्‍ली में, लखनऊ में, कानपुर में, हैदराबाद में, बंगलोर में ऑटो रिक्‍शा में अगर जाते हैं तो एक किलोमीटर का करीब दस रूपया खर्चा आता है। मंगलयान पर हमारा खर्चा सिर्फ सात रूपया किलोमीटर आया है। मैं कहना यह चाहता हूं कि देश के पास Talent है। क्‍या कारण है कि आईटी की दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान के नौजवानों ने नाम रोशन किया। कनाडा में भी हिंदुस्‍तान के आईटी के नौजवान अपना करतब  दिखा रहे हैं। अमेरिका में भी हिंदुस्‍तान के नौजवान आईटी में अपना करतब दिखा रहे हैं। उंगलियां तो उनकी हैं, लेकिन मेरे नौजवान दोस्‍तों जवाब हमें खोजना पड़ेगा कि बुद्धि वहां से है, उंगलियां उसकी चल रही हैं, लेकिन Googleभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता? Microsoftभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता?

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (11)

Talentवो ही है काम वही कर रहे हैं, मुझे वो माहौल बदलना है, ये हमारे TalentedYouthको अवसर देना है, ताकि वो Innovationकरें। आने वाले दिनों में दुनिया को क्‍या चाहिए? अपने Innovationसे वो दें। इसलिए छोटे-छोटे से काम के लिए एक मजदूर को जिस प्रकार का Skill Development चाहिए वो हमारे Talented Youthके लिए, Innovation के लिए अवसर चाहिए। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमने इस बार हमारे बजट में कार्यक्रम रखा है –AIM –Atal Innovation Mission. हम नौजवानों को अवसर देना चाहते हैं। कहने का तात्‍पर्य यह है कि देश को आगे ले जाने के लिए हमारी युवा शक्ति का जो सामर्थ्‍य है, जो हमारी सबसे बड़ी संपदा है और यह संपदा केवल भारत के अपने लिए नहीं, पूरे विश्‍व के अंदर काम आने वाली संपदा हमारे पास है। भले हमारे पास हीरे की खदानें नहीं होगी, भले हमारे पास गैस के भंडार नहीं होंगे, भले हमारे पास पेट्रोलियम के भंडार नहीं होंगे, हमें यू‍रेनियम बाहर से लाना पड़ता होगा, लेकिन हमारे पास जो ताकत है उस ताकत के भरोसे हम दुनिया में देश की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। ये विश्‍वास ले करके हम आगे बढ़ रहे हैं।

आज हमने कनाडा में एक बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया। मेरी इस यात्रा में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हमने फ्रांस में किया, दूसरा महत्‍वपूर्ण निर्णय आज हमने कनाडा में किया, बाकी तो बहुत महत्‍वपूर्ण हुआ है, लेकिन दो चीज ऐसी हैं, जिनकी तरफ लोगों का ध्‍यान नहीं गया है। पता नहीं जब मैं वापस पहुंचूंगा तो तब जाएगा कि नहीं जाएगा या तो कहीं और ध्‍यान होगा अभी लोगों का लेकिन हो सकता है कि चार छह महीने के बाद ध्‍यान दें। फ्रांस में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ, वो यह हुआ कि हम लोग Nuclear Energyके लिए दुनिया भर से रियेक्‍टर मांगते थे। हर कोई देश हाथ ऊपर कर देता था, बात चलती थी, दो चार साल बात चलती थी, फिर बात ऊपर हो जाती थी। बहुत लंबे अरसे से विषय Pendingथा, कोई देने को तैयार नहीं था क्‍योंकि सबको लगता है कि कहीं बम न बना दें और जो बनाते हैं उनको कोई रोकता नहीं है, रोक पाते भी नहीं। जो गांधी का देश है, जिसने कभी दुनिया में किसी पर आक्रमण नहीं किया, जिसने शांति के शहादत मोल ली है। ऐसे हम लोग हैं| उनको कई वर्षों के लिए भटकना पड़ता है। इस बार हमने फ्रांस के अंदर एक कंपनी के साथ भारत की एक कंपनी का MOUहुआ है। मेरे लिए खुशी की बात है कि सबसे बड़ा काम होने वाला है कि अब वो रियेक्‍टर भारत में बनेगा। अब रियेक्‍टर तो बनेगा लेकिन NuclearEnergyके लिए यूरेनियम चाहिए। यूरेनियम आपका कनाडा मुझे देगा। पूरी दुनिया GlobalWarmingके कारण परेशान है,Climate Changeकी चर्चा है, Air Conditionedकमरों में सर्वाधिक एनर्जी का उपयोग करके Climateकी चर्चा की Meetingहुआ करती है। भारत अगर Environment Protectionमें सफल होता है तो दुनिया का 1/6 जिम्मा हम अकेले उठा सकते हैं। उसमें सबसे बड़ा काम है Clean Energyऔर उस Clean Energyमें Nuclear Energyकी ताकत बहुत है। इसलिए हम रियेक्‍टर बनाएंगे, हम कनाडा से यूरेनियम लेंगे, हम Nuclear Energyबनाएंगे और दुनिया को जिस चीज की चिंता है- Climate Changeकी उसमें मददगार होने का काम हिंदुस्‍तान बीड़ा उठाएगा।

भारत के राष्‍ट्र ध्‍वज में चार रंग हैं। हम बोलते हैं तिरंगा, रंग चार हैं, लेकिन वो हमारी विशेषता है। मैं एक चतुर्रंगी क्रांति का सपना ले करके चल रहा हूं, चतुर्रंगी क्रांति का। भारत का तिरंगा झंडा, जिसको देखते हम जिसमें कि चार रंग हैं –Saffron है, Whiteहै, Green है और बीच में Blueहै। अशोक चक्र है Blue Colourका। मैं चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख करके चल रहा हूं। चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख रहा हूं.. केसरिया रंग.. अब कुछ लोगों को तो केसरिया रंग का अर्थ भी ढंग से मालूम नहीं है। वो अपनी मन-मर्जी का अर्थ करते रहते हैं, वो उनका काम है करते रहें। Saffron Colour,ये ऊर्जा का रंग है, Energy का रंग है। सूर्य का सात घोड़ों का रथ देखते हैं तो Saffron Colourका दिखाई देता है। ये ऊर्जा क्रांति करनी है हिंदुस्‍तान में। इसलिए Nuclear Energy, Solar Energy,Wind Energy, Biomassसे बनने वाली Energy, Energy Saving,इन सारे विषयों को एक साथ चलाया है।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (5)

हमारे देश में कुछ तो Terminologyएक दम से बदल रही है। भारत कभी भी.. ज्‍यादा से ज्‍यादा चर्चा मेगावाट की करता था, कि भई इतने मेगावाट, इतने मेगावाट। पहली बार देश में गीगावाट की चर्चा होनी शुरू हुई है। वरना हमारा.. क्रिकेट में भी Lastके जो बॉलर वगैरह खेलने जाते हैं, सेंचुरी की कहां चर्चा करते हैं?.. तो मेगावाट के आस-पास खेलते थे, पहली बार सरकार गीगावॉट की परिभाषा ले करके चल रही है और 175 गीगावाट Renewable Energyकी तरफ हम जा रहे हैं, 100 गीगावाट Solar Energy, 75 गीगावाट Wind Energy| यह सपना देखा है। Energysaving.. LED Bulbका एक पूरा मूवमेंट खड़ा किया है। स्‍कूलों में बच्‍चों को बताते है, बिजली बचाने के लिए अपने घर में माहौल बनाओ। LED Bulbऔर Transparency.. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक साल पहले जो सरकार थी, उस समय 2012-13 के कार्यक्रम में LEDका Bulbसरकार 350 रूपये में लेती थी। कितना? ये सरकार 85 रूपये में लेती है। ये Transparencyहै कि नहीं है, है कि नहीं है, भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, ईमानदारी आई कि नहीं आई, ईमानदारी से काम हो सकता है कि नहीं हो सकता। हर छोटी चीज में यदि ध्‍यान बारीकी से रखा जाए,तो बदलाव लाया जा सकता है। जन-मन बदला है दोस्‍तों इसलिए परिस्थितियां पलट रही हैं। दूसरा Revolutionहै –White Revolution.हमारे देश में, दुनिया में दूध देने वाले पशुओं की तुलना में हमारे यहां Productivityबहुत ज्‍यादा नहीं है। जो काम दो दूध देने वाले पशुओं से होना चाहिए,उतना काम करने के लिए हमको 20 पशु पालने पड़ते हैं, क्योंकि उसका लालन-पालन करने के लिए जिन चीजों को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना चाहिए, हम नहीं बढ़ा पाते। गांव के गरीब के पास यदि एक पशु हो,तो उसको जिंदगी में कभी देखना न पड़े, उसकी Productivityकैसे बढ़े, वैज्ञानिक तौर-तरीके कैसे आएं और हिंदुस्‍तान में सेकेंड White Revolutionकैसे हो,उस पर हम बल दे रहे हैं। तीसरा, Green Revolution .. Green Revolutionमें वही बात, अब जमीन पहले पांच एकड़ थी, दो भाई थे, अब पांच एकड़ में दस भाई हो गए, दो भाई के बच्‍चे हो गए, उनके बेटे हो गए, अब इतना बड़ा परिवार दस बीघा जमीन में कैसे चलेगा? वो परिवार तब चलेगा कि हम सीमित जमीन में भी Productivityकैसे बढ़ाएं। इसके लिए एक काम हमने उठाया है –Soil Health Card.इंसान की Healthके लिए जैसे HealthCardहोता है,  वैसे धरती माता की तबीयत के लिए Health Cardहो । कहीं हमारी पृथ्‍वी मां बीमार तो नहीं है?  हमारी पृथ्‍वी मां को जो खाना चाहिए, वो नहीं खिलाते,कुछ और खिला दिया, ऐसा तो नहीं है? माँ को कैसे बचाएं, इसलिए हमने अभियान उठाया है धरती मां की रक्षा करने का। Soil Health Cardका मिशन चलाया है। पानी बचाना, ये दुनिया पर बहुत बड़ा जिम्‍मा आ पड़ा है। Per Drop More Cropएक-एक बूंद से फसल कैसे ज्‍यादा पैदा हो?उस पर हम बल देना चाहते हैं, जो पैदा हो उसका Value Additionकैसे हो, मूल्‍य वृद्धि कैसे हो?किसान का माल .. Forward Linkageकैसे उसको मिले, Green Revolution.. हिंदुस्‍तान में सेकेंड Green Revolutionके लिए, भारत का जो पूर्वी हिंदुस्‍तान है, जिसकी जब चर्चा होती है, तो गरीबी के नाम पर होती है, वो सबसे समृ‍द्ध बन सकता है। बिहार हो, ओडि़शा हो, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, पश्चिम बंगाल हो, असम हो, जहां विपुल मात्रा में पानी है। इसलिए हमारा फोकस है सेकेंड Green Revolutionऔर स्‍पेशल फोकस है हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में, वहां के किसान और गांव की जिंदगी को बदलना है। चौथा है, Blue Revolution, Blueक्रांति करनी है। BlueRevolutionजब मैं कहता हूं तब, एक नीला आसमान। पर्यावरण के संकटों से मुक्‍त नीला आसमान। Environment Protectionकी चिंता करते हुए नीला आसमान। मैं Manufacturing में कहता हूं – Zero Defect,  Zero Effectजो पैदा करें,उसमें कोई Defect न हो और ऐसे पैदा करे कि Environmentपर Effectन हो। Zero Defect,  Zero Effect,नीला आसमान। और दूसरा नीला समुंदर के पानी का रंग। नीला आसमान भी चाहिए, वो भी Revolutionकरना है और सामुद्रिक शक्ति का भी Revolutionहोना चाहिए। मेरे मछुआरे, उनकी आर्थिक स्थिति सुधरनी चाहिए। समंदर के अंदर प्राकृतिक संपदा पड़ी है। गैस और पेट्रोलियम के भंडार पड़े हैं। इन प्राकृतिक संपदाओं का सर्वाधिक उपयोग मानव जाति के लिए कैसे हो, Blue Revolutionकरना है, Saffron  Revolution, WhiteRevolution, Blue Revolution,Green Revolution, Blue Revolution| जल-थल नभ सबकुछ.. और इसलिए भाईयों और बहनों विकास की उन नई-नई ऊचाईयों को पार कर रहे हैं। आप कनाडा के भाईयों और बहनों कुछ बातें हैं जो मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। ओसीआई और पीआईओ.. मैंने जब Madison Squareपर बोल रहा था,तो मैंने वादा किया था। इन दोनों को Mergeकर देंगे, वो काम पूरा कर दिया है। हर किसी को पीआईओ कार्ड हो, वो ओसीआई की तरह ही, उसको सारी सुविधाएं दी जाएंगी। दूसरी बात है, ओसीआई पूरे जीवन के लिए मिलेगा। पहले वो सिर्फ 15 साल के लिए था। आपको पता होगा, आप में से जो बड़ी आयु के लोग वहां आ करके रहते होंगे, छुट्टियों में, तो हमारे यहां यह नियम था, उसको हर 15 दिन में एक बार पुलिस थाने ले जा करके बताना पड़ता था कि मैं वही हूं और कुछ गलत नहीं कर रहा हूं। मुझे बताइये कि आप पर मुझे भरोसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?  करना चाहिए कि नहीं चाहिए? जन-मन बदला है दोस्‍तों! इसलिए हमने तय किया है कि ओसीआई कार्ड वालों को पुलिस थाने में हाजिरी लगाने की जरूरत नहीं है। ओसीआई को चार पीढ़ी तक विदेश गए लोग.. अब उनको इसमें समाहित कर दिया गया है। चार पीढ़ी तक को स्‍वीकार कर लिया गया है। कुछ जगह पर अभी कुछ चीजें Processमें हैं। अगले पांच छह महीनों में सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

 एक ई-पोर्टल हमने शुरू किया है, जिसका आप फायदा ले सकते हैं। ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, फीडबैक ये सारी चीजें ई-पोर्टल के अंदर हैं। ई-पोर्टल का नाम है, मदद। एक ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया है, जिसके द्वारा भी आपको कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो तो इमीग्रेशन ऑफिस जाना नहीं पड़ेगा। आप उसी के द्वारा अपना काम कर सकते हैं, आपका समय बच सकता है। जो भारत के बाहर रहने वाले लोग हैं, जिनको ऑनलाइन अप्‍लीकेशन करने हैं,वे ई-माइग्रेशन इस व्‍यवस्‍था के तहत कर सकते हैं। आपने देखा है कि दुनिया में कुछ न कुछ देशों में संकट चलते रह‍ते हैं और हमारे भारतीय भाई-बहन बड़े उदार रहते हैं, उनको हम समझाते हैं कि भई निकलो, मुसीबत आ रही है। उनको लगता है नहीं-नहीं ये तो अच्‍छे लोग हैं, हमें कुछ नहीं होगा। वो निकलते नहीं हैं। हम यमन में जनवरी महीने से कह रहे थे कि निकलो!निकलो! कहते थे नहीं। आखिरकार,हमें अभी निकालना पड़ा चार हजार लोगों को, मुश्किल से ले करके आये हैं। पिछले दस महीने में West Asia में जो मुसीबतें आईं हैं, करीब 17 हजार भारतीयों को सुरक्षित बचा करके वापस लाने का काम किया है। देशवासियों मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं, संकट की घड़ी में हम पासपोर्ट के रंग नहीं देखते हैं। अपनों के लिए जो भी करना पड़ता है, पूरी शक्ति लगा करके करते हैं। लेकिन विश्‍व में रहने वाले भारतीयों से भी हमारा आग्रह रहेगा कि हम संकटों में फंसे नहीं, समय रहते हम जागरूकता पूर्वक अपने विषयों को आगे बढ़ाये तो अच्‍छा होगा।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (7)

पहली बार हमने प्‍लानिंग कमीशन की जगह पर नीति आयोग बनाया है और नीति आयोग में एक पैराग्राफ.. प्रवासी भारतीयों को भी एक शक्ति के रूप में माना गया है। वो भी एक बहुत बड़ी भारत की विकास की ताकत है और उसके लिए भी भारत को सोचते रहना चाहिए। ये पहली बार एक Specific काम उनके लिए तय किया है। उसके चार्टर में इसको लिखा गया है। कनाडा के मित्रों के लिए एक खुश खबरी है। इलैक्‍ट्रोनिक टूरिस्‍ट वीजा, इसकी व्‍यवस्‍था हमने कर दी है, बहुत ही जल्‍द इसका लाभ आपको मिलेगा। दूसरी बात, मुझे मालूम है कि आप बोलेंगे नहीं,लेकिन कभी-कभी आपको भी वीजा लेने में तकलीफ पड़ती है, पड़ती है न? अब हमने तय किया है कि दस साल के लिए देंगे। अगर जन-मन बदला है,तो भरोसा भी बढ़ना चाहिए और भरोसे से दुनिया चलती है मेरे दोस्तों ! इसको ले करके हम चलने वाले हैं और चल रहे हैं। भाईयों और बहनों,काफी लंबी बातें कर ली आपसे, मुझे आनंद आया, आपने स्‍वागत किया, सम्‍मान किया। मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि हमारा देश, हम जो भी पढ़े हैं, जो भी अनुभव पाया है, दुनिया में कहीं से भी जो Disciplineसीखें हैं, जो भी अच्‍छा है हमारे पास, कहीं से भी मिला हो, वो हमारे देश के लिए भी काम आना चाहिए, हमारे देश के उन गरीबों के लिए भी काम आना चाहिए। जो हमारे लोग यहां आये हैं, हम ये न भूलें कि आज जो हम पहुंचें हैं जहां पर उसके मूल में किसी न किसी गरीब ने हमारे लिए कुछ न कुछ तो छोड़ा होगा। किसी न किसी ने कष्‍ट झेला होगा,तब हमारी जिंदगी बनी है। मानवता का तो यही तकाजा है कि जिन्‍होंने हमें दिया है हमें उनको भी तो कुछ लौटाना है। इस बात को ले करके आप चलें। भारत के प्रति हमारी भक्ति अपरमपार बनी रहे। मैं फिर एक बार, कनाडा ने मेरा जो स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, प्रधानमंत्री जी ने इतना समय दिया, उनके मंत्रि-परिषद के इतने वरिष्‍ठ लोग आ करके बैठे, यहां के सभी सांसद आ करके बैठे, मैं उनका सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं। कनाडा और भारत की दोस्‍ती एक ऐसी युक्ति है, जो शक्तियों का संवर्धन करती है और ये ऐसी शक्ति है.. मान लीजिये हम Mathematic में a2 + b2करें तो Result क्‍या आता है? लेकिन मान लीजिए (a+b)2 तो Resultआता है a2 +2ab+b2 ... Extra 2ab मिलता है कि नहीं मिलता है? ये Extra 2ab कहां से आया? तो भारत और कनाडा जब मिलता है तो Extra 2ab निकलता है। यह हमारी ताकत है। उस ताकत को लेकर आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं फिर एक बार आप सबका धन्‍यवाद करता हूं। मेरी तरफ से आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं और समाज के सब लोगों ने मेरा इतना सम्‍मान किया, आशीर्वाद दिए, मैं सदा सर्वदा आपके इस प्रेम को याद रखूंगा। आपके आशीर्वाद की ताकत को याद रखूंगा। मैं आपको सबको वंदन करते हुए मेरी बात को विराम करता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए –भारत माता की जय। ऐसे नहीं, आवाज हिंदुस्‍तान तक जानी चाहिए।

भारत माता की जय।

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Everyone has to take the vaccine and always keep in mind - 'Dawai Bhi, Kadai Bhi': PM Modi

আমার প্রিয় দেশবাসী, নমস্কার, আজ আপনাদের সঙ্গে ‘মন কি বাত’ এমন এক সময় করছি যখন করোনা আমাদের সবার ধৈর্য ও আমাদের সবার দুঃখ সহ্য করার সীমার পরীক্ষা নিচ্ছে। আমাদের অনেক নিজেদের লোক অসময়ে আমাদের ছেড়ে চলে গেছেন । করোনার প্রথম ঢেউ সাফল্যের সঙ্গে মোকাবিলা করার পরে দেশ আত্মবিশ্বাসে ভরপুর হয়ে উঠেছিল, কিন্তু এই তুফান দেশকে নাড়িয়ে দিয়েছে। বন্ধুরা, বিগত দিনে এই সংকটের সঙ্গে মোকাবিলা করার জন্য আমরা বিভিন্ন দপ্তরের বিশেষজ্ঞের সঙ্গে দীর্ঘ আলোচনা করেছি। আমাদের ওষুধ প্রস্তুতকারক শিল্পের লোকেরা হোক, টিকা উৎপাদকরা হোক, অক্সিজেনের উৎপাদনের সঙ্গে যুক্ত লোকেরাই হোক বা চিকিৎসা জগতের অভিজ্ঞরা, নিজেদের গুরুত্বপূর্ণ পরামর্শ সরকারকে দিয়েছেন। এই সময় আমাদের এই লড়াই জেতার জন্য বিশেষজ্ঞ আর বৈজ্ঞানিক পরামর্শকে অগ্রাধিকার দিতে হবে। রাজ্য সরকারের প্রচেষ্টাকে এগিয়ে নিয়ে যাবার জন্য ভারত সরকার সম্পূর্ণ শক্তি দিয়ে পাশে দাঁড়িয়েছে। রাজ্য সরকারগুলিও নিজেদের দায়িত্ব পালন করার চেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে। বন্ধুরা, করোনার বিরুদ্ধে এই সময় দেশের ডাক্তার আর স্বাস্থ্যকর্মীরা অনেক বড় লড়াই করে যাচ্ছেন। বিগত এক বছরে ওঁদের এই অসুখ নিয়ে সব রকমের অভিজ্ঞতা হয়েছে। এই সময় মুম্বাইয়ের বিখ্যাত ডাক্তার শশাঙ্ক যোশী জি আমাদের সঙ্গে রয়েছেন। ডাক্তার শশাঙ্ক জির করোনার চিকিৎসা আর এর সঙ্গে যুক্ত গবেষণার তৃণমূলস্তরে অভিজ্ঞতা আছে। তিনি ইন্ডিয়ান কলেজ অফ ফিজিশিয়ানস এর ডিন ছিলেন। আসুন কথা বলি ডাক্তার শশাঙ্কের জি সঙ্গে:-
মোদিজী - নমস্কার ডাক্তার শশাঙ্ক জি
ডাক্তার - নমস্কার স্যার।
মোদিজী - কিছুদিন আগেই আপনার সঙ্গে কথা বলার সুযোগ হয়েছিল। আপনার মতামতের স্পষ্টতা আমার খুব ভালো লেগে ছিল। আমার মনে হয়েছে দেশের সমস্ত নাগরিকের আপনার মতামত জানা প্রয়োজন। যেসব কথা শুনতে পাই, সেগুলোই একটি প্রশ্নের আকারে আপনার সামনে তুলে ধরছি। ডাক্তার শশাঙ্ক আপনারা এই সময় দিন রাত জীবন রক্ষার কাজে নিযুক্ত আছেন। সবার আগে আমি চাইবো যে আপনি দ্বিতীয় ঢেউএর বিষয়ে সবাইকে বলুন। চিকিৎসার দিক থেকে এটা কিভাবে আলাদা। আর কি কি সাবধানতা জরুরি।
ডাক্তার শশাঙ্ক - ধন্যবাদ স্যার, এই যে দ্বিতীয় ঢেউ এসেছে, এটা দ্রুততার সঙ্গে এসেছে। যতটা প্রথম ঢেউ ছিল তার থেকে এই ভাইরাস বেশি দ্রুততার সঙ্গে বেড়ে চলেছে। কিন্তু ভালো কথা এই যে তার থেকেও দ্রুত গতিতে সুস্থও হচ্ছে আর মৃত্যু হার অনেক কম। এর মধ্যে দু'তিনটে তফাৎ আছে। প্রথমত, এটা যুবক যুবতীদের আর বাচ্চাদের মধ্যেও অল্প দেখা দিচ্ছে, । প্রথমে যেমন লক্ষণ ছিল শ্বাসকষ্ট, শুকনো কাশি, জ্বর সেগুলো তো সব আছেই । তার সঙ্গে গন্ধ পাওয়া, স্বাদ না থাকাও আছে। আর লোকেরা একটু ভয়ে আছেন। ভীতসন্ত্রস্ত হওয়ার কোন প্রয়োজন নেই ৮0 থেকে ৯0 শতাংশ লোকের মধ্যে এগুলির কোন লক্ষণ দেখা যাচ্ছে না। এই মিউটেশন - মিউটেশন যা বলা হচ্ছে ঘাবড়ানোর কিছু নেই। এই মিউটেশন হতেই থাকে যেভাবে আমরা জামা কাপড় বদলাই সেই ভাবেই ভাইরাস নিজের রং বদলাচ্ছে। আর সেই জন্যেই একেবারেই ভয় পাওয়ার কিছু নেই। আমরা এই ঢেউটাও পার হয়ে যাব। ওয়েভ আসে যায়, আর এই ভাইরাস আসা যাওয়া করতে থাকে। তো এটাই আলাদা আলাদা লক্ষণ। আর চিকিৎসার দিক থেকে আমাদের সতর্ক থাকতে হবে। ১৪ থেকে ২১ দিনের এইযে কোভিডের টাইম টেবিল আছে। এই সময়ের মধ্যেই ডাক্তারি পরামর্শ নেওয়া জরুরি।
মোদিজী- ডাক্তার শশাঙ্ক, আমার জন্য আপনি যে বিশ্লেষণ করে বলেছিলেন তা খুবই উৎসাহজনক। আমি অনেক চিঠি পেয়েছি। যার মধ্যে চিকিৎসার বিষয়েও মানুষের মধ্যে অনেক আশঙ্কা আছে। কিছু ওষুধের চাহিদা খুব বেশি। এজন্য আমি চাই যে কোভিডের চিকিৎসার ব্যাপারেও আপনি অবশ্যই লোকেদের বলুন।
ডাক্তার শশাঙ্ক - হ্যাঁ স্যার, ক্লিনিক্যাল ট্রিটমেন্ট লোকেরা অনেক দেরিতে শুরু করেন। মনে করেন নিজে থেকেই রোগ সেরে যাবে। এই ভরসাতেই থাকেন। আর মোবাইলে আসা বার্তা উপর ভরসা রাখেন। অথচ যদি সরকারি নির্দেশ পালন করেন তাহলে এই কঠিন পরিস্থিতির সম্মুখীন হতে হয় না। কোভিডে ক্লিনিক ট্রিটমেন্ট প্রটোকল আছে, যার মধ্যে তিন রকমের তীব্রতা আছে। হালকা বা মাইল্ড কোভিড, মধ্যম বা মডারেট কোভিড, আর তীব্র বা Severe কোভিড। যেটা হালকা কোভিড, সেটার জন্য আমরা অক্সিজেনের মনিটরিং করে থাকি। পালসের মনিটরিং করে থাকি, জ্বরের মনিটরিং করে থাকি, জ্বর বেড়ে গেলে কখনো কখনো প্যারাসিটামল এর মত ওষুধের ব্যবহার করে থাকি। আর নিজেদের ডাক্তারের সঙ্গে যোগাযোগ করা উচিত। যদি মডারেট কোভিড হয়ে থাকে, মধ্যম কোভিড হোক বা তীব্র গভীর হোক, সেক্ষেত্রে ডাক্তারি পরামর্শ নেওয়া খুবই জরুরী। সঠিক এবং সস্তা ওষুধ পাওয়া যাচ্ছে। এরমধ্যে স্টেরয়েড আছে সেটা প্রাণ বাঁচাতে পারে, যেটা ইনহেলার দিতে পারে। ট্যাবলেটও দেওয়া যেতে পারে। আর এর সঙ্গেই প্রাণবায়ু ౼ অক্সিজেন সেটাও দিতে হয়। আর এই জন্য ছোট ছোট চিকিৎসা আছে। কিন্তু সচরাচর যেটা হচ্ছে, একটা নতুন পরীক্ষামূলক ওষুধ আছে, যার নাম রেমডেসিভির। এই ওষুধে অবশ্যই একটা জিনিস হয়, সেটা হল হাসপাতালে দু-তিনদিন কম থাকতে হয়। আর সুস্থ হওয়ার ক্ষেত্রে অল্পবিস্তর সাহায্য পাওয়া যায়। আর এই ওষুধ কখন কাজ করে, যখন প্রথমে ৯ থেকে ১0 দিনে দেওয়া হয়ে থাকে। আর এটা পাঁচদিনই দিতে হয়। এই যে লোকেরা রেমডিসিভিরের পেছনে দৌড়চ্ছে, এর কোনো দরকার নেই। এই ওষুধটার কাজ অল্পই। যাঁদের অক্সিজেনের প্রয়োজন হয়, যারা হাসপাতালে ভর্তি হন, আর ডাক্তার যখন বলেন তখন নিতে হয়। তাই এটা সবাইকে বোঝানো খুবই জরুরী। আমরা প্রাণায়াম করব, আমাদের শরীরে যে Lungs আছে সেটাকে একটু এক্সপ্যান্ড করব, আর আমাদের রক্ত পাতলা করার যে ইনজেকশন আছে যেটাকে আমরা হেপারিন বলে থাকি। এইসব ছোট ছোট ওষুধ দিলে ৯৮% লোক ঠিক হয়ে যান। তাই পজিটিভ থাকা অত্যন্ত জরুরী। ট্রিটমেন্ট প্রোটোকলে ডাক্তারের পরামর্শ নেওয়া খুবই জরুরী। আর যেসব দামি দামি ওষুধ আছে, সেগুলির পিছনে দৌড়ানোর কোন প্রয়োজন নেই। স্যার, আমাদের কাছে ভালো চিকিৎসা ব্যবস্থা আছে। প্রাণবায়ু অক্সিজেন আছে। ভেন্টিলেটরেরও সুবিধা আছে। সবকিছুই আছে স্যার। আর কখনো কখনো যদি এই ওষুধ পাওয়া যায় তাহলে চাহিদাসম্পন্ন লোকেদেরই দেওয়া উচিত। তাই এই বিষয়ে অনেক ভুল ধারণা আছে। আর এর জন্য স্পষ্ট করে বলতে চাই স্যার যে আমাদের কাছে বিশ্বের সবথেকে ভাল চিকিৎসার ব্যবস্থা আছে। আপনি দেখবেন সুস্থতার হার ভারতে সবথেকে ভালো আপনি যদি ইউরোপের সঙ্গে তুলনা করেন। আমেরিকাতে রোগী সেরে উঠছেন আমাদের ট্রিটমেন্ট প্রটোকলে স্যার।
মোদিজী - ডাক্তার শশাঙ্ক আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। ডাক্তার শশাঙ্ক আমাদের যা জানালেন তা অত্যন্ত জরুরী এবং আমাদের সব কাজে লাগবে। বন্ধুরা আমি আপনাদের সকলের কাছে অনুরোধ করছি, আপনাদের যদি যেকোনো তথ্য জানার থাকে, আর কোনো আশংকা থাকে তাহলে সঠিক সুত্র থেকে জেনে নেবেন। আপনাদের যে পারিবারিক চিকিৎসক আছেন, আশেপাশের যে ডাক্তার আছেন আপনারা তাদের ফোন করে যোগাযোগ করুন। এবং সঠিক পরামর্শ নিন। আমি দেখতে পাচ্ছি যে আমাদের অনেক ডাক্তারই নিজেরাই এই দায়িত্ব নিচ্ছেন। অনেক ডাক্তার সোশ্যাল মিডিয়ার মাধ্যমে লোকেদের সচেতন করছেন। ফোনে, হোয়াটসঅ্যাপেও কাউন্সেলিং করছেন। অনেক হাসপাতালের ওয়েবসাইট আছে সেখানে এই সংক্রান্ত বিষয়ে জানার ব্যবস্থা আছে। আর সেখানে আপনারা ডাক্তারের পরামর্শও নিতে পারবেন। এটা খুবই প্রশংসনীয়। আমার সঙ্গে শ্রীনগর থেকে ডাক্তার নাবিদ নাজির শাহ্ রয়েছেন। ডাক্তার নাবিদ শ্রীনগরের এক সরকারী মেডিকেল কলেজের প্রফেসর। নবীদ জি নিজের তত্ত্বাবধানে অনেক করোনা পেশেন্টকে সারিয়ে তুলেছেন। আর রমজানের এই পবিত্র মাসে ডাক্তার নাবিদ নিজের কর্তব্য পালন করছেন। তিনি আমার সঙ্গে কথা বলার জন্য সময় বের করেছেন। আসুন ওঁর সঙ্গে কথা বলি।
মোদিজী - নাবিদ জি নমস্কার।
নাবিদ - নমস্কার স্যার।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ ‘’মন কি বাত’’ এর আমাদের শ্রোতারা এই কঠিন সময়ে প্যানিক ম্যানেজমেন্টের বিষয়ে জানতে চেয়েছেন। আপনি আপনার অভিজ্ঞতা থেকে তাঁদের কি পরামর্শ দেবেন ?
নাবিদ - দেখুন যখন করোনা শুরু হয়েছিল, তখন কাশ্মীরে যে প্রথম কোভিড হসপিটাল হিসেবে চিহ্নিত হয়েছিল সেটা ছিল আমাদের সিটি হসপিটাল। যেটা আসলে মেডিকেল কলেজের অধীনে। সে সময়টা এক ভয়ের পরিবেশ ছিল। কোভিডের সংক্রমণ হলেই লোকেরা মনে করতেন তাঁদের মৃত্যদণ্ড দেওয়া হয়েছে। আর এর ফলে আমাদের হাসপাতালের চিকিৎসক মহল এবং প্যারা মেডিকেল কর্মীদের মধ্যেও ভয়ের সঞ্চার হয়েছিল যে তাঁরা এই রোগীদের কিভাবে চিকিৎসা করবে? সংক্রমণ হওয়ার মত বিপদ নেই তো! কিন্তু যেমন যেমন সময় এগিয়েছে, আমরাও দেখলাম যে, যদি সম্পূর্ণভাবে আমরা সুরক্ষা সংক্রান্ত পোষাক পরি এবং সুরক্ষা বিধি মেনে চলি তাহলে আমরাও সুরক্ষিত থাকতে পারবো। আর আমাদের যে বাকি কর্মীরা আছেন তারাও সুরক্ষিত থাকতে পারেন। আর এর পরে আমরা দেখতে পেলাম রোগী বা কিছু লোক অসুস্থ ছিলেন যাঁরা উপসর্গ হীন, যাদের মধ্যে রোগের কোনো লক্ষণ ছিল না। আমরা দেখলাম ৯0 থেকে ৯৫ শতাংশের বেশি সমস্ত রোগী কোনো ওষুধ ছাড়াই সুস্থ হয়ে উঠেছেন। প্রাথমিক পর্যায়ে মানুষের মধ্যে করোনার যে ভয় ছিল সময়ের সঙ্গে সঙ্গে সেটা অনেক কমে গিয়েছে। আজ যখন করোনার এই দ্বিতীয় ঢেউ এসেছে তখনও আমাদের আতঙ্কিত হওয়ার প্রয়োজন নেই। এই সময়েও যে সুরক্ষা বিধি আছে আর মান্য বিধি আছে, যদি সেগুলো ওপর আমরা গুরুত্ব দিই, যেমন মাস্ক পরা, হাতে স্যানিটাইজার ব্যবহার করা, এ ছাড়াও শারীরিক দূরত্ব বজায় রাখা বা জমায়েত এড়িয়ে যেতে পারি তাহলে আমরা আমাদের দৈনন্দিন কাজকার্মও খুব ভালোভাবে করে যেতে পারব। তাহলে এই রোগের হাত থেকে সুরক্ষিত থাকতে পারবো।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ, টিকার ব্যাপারেও মানুষের মধ্যে নানা রকম প্রশ্ন আছে যেমন টিকার মাধ্যমে কতটা সুরক্ষা পাওয়া যাবে ? টিকা নেওয়ার পর কতটা নিশ্চিন্ত থাকতে পারবো? আপনি এ প্রসঙ্গে কিছু বলুন যাতে শ্রোতাদের উপকার হয়।
ডাক্তার নাবিদ - যখন করোনার সংক্রমণের সন্মুখিন হলাম, তখন থেকে আজ পর্যন্ত আমাদের কাছে কোভিড-19 এর সঠিক কার্যকরী চিকিৎসা পদ্ধতি নেই। ফলে আমরা দুটো জিনিস দিয়ে এই রোগের বিরুদ্ধে লড়াই করতে পারি। একটা রোগ প্রতিরোধ ব্যবস্থা, আর আমরা প্রথম থেকেই বলে আসছি যে যদি কোন যথাযথ টিকা আমাদের কাছে আসে তাহলে সেটা আমাদের এই রোগের হাত থেকে মুক্তি দিতে পারে। আর এখন আমাদের দেশে দুটো টিকা এইসময় আছে, কোভ্যাকসিন এবং কোভিশিল্ড। যেগুলো এখানেই তৈরি হওয়া ভ্যাকসিন। কোম্পানিগুলো যখন পরীক্ষা নিরীক্ষা করেছে, তখন দেখা গেছে যে সেগুলির কার্যকারিতা ৬০% এর বেশি। আর যদি আমরা জম্মু- কাশ্মীরের কথা বলি তাহলে আমাদের এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলে এখনো পর্যন্ত ১৫ থেকে ১৬ লক্ষ মানুষ এই টিকা নিয়েছেন। হ্যাঁ সোশ্যাল মিডিয়াতে অনেক ভ্রান্ত ধারণা বা গুজব ছড়ান হয়েছে যে এগুলোর পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আছে। কিন্তু এখনো পর্যন্ত আমাদের এখানে যে সমস্ত টিকা প্রয়োগ হয়েছে সেখানে কোন পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া পাওয়া যায়নি। সাধারণত টিকা নেওয়ার পর কারও জ্বর আসা, সারা শরীর ব্যথা বা লোকাল সাইড অর্থাৎ ইনজেকশনের জায়গায় ব্যথা হওয়া এমনই পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আমরা প্রত্যেকের মধ্যে দেখেছি। তেমন কোনো বিরূপ প্রতিক্রয়া আমরা দেখি নি। আর হ্যাঁ, দ্বিতীয় কথা মানুষের মধ্যে এই আশঙ্কাও ছিল যে কিছু লোক টিকাকরণের পরে পজিটিভ হয়েছেন। সেখানে কোম্পানী থেকেই বলা ছিল টিকাকরণের পরেও সংক্রমণের সম্ভাবনা থাকতে পারে এবং পজেটিভ হতে পারে। কিন্তু সেক্ষেত্রে রোগের ভয়াবহতা কম থাকবে। অর্থাৎ তিনি পজেটিভ হতে পারেন কিন্তু জীবনহানির আশংকা কম। তাই টিকাকরণ নিয়ে ভ্রান্ত ধারণা মাথা থেকে সরিয়ে ফেলা উচিত। পয়লা মে থেকে আমাদের সমগ্র দেশে যাদের ১৮ বছরের বেশি বয়স তাদের ভ্যাকসিন দেওয়ার কর্মসূচি শুরু হবে। তাই সবার কাছে এটাই আবেদন করব যার যখন সময় আসবে, আপনারা আসুন টিকা নিন এবং নিজেকেও রক্ষা করুন। আর সামগ্রিকভাবে আমাদের সমাজ ও আমাদের এলাকা এর ফলে কোভিড ১৯ র সংক্রমণ থেকে সুরক্ষিত হয়ে উঠবে।
মোদিজী - ডাক্তার নাবিদ আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। এবং আপনাকে রমজানের পবিত্র মাসে অনেক অনেক শুভকামনা জানাই।
ডাক্তার নাবিদ - অনেক অনেক ধন্যবাদ।
মোদিজী - বন্ধুগণ করোনার এই সংকটকালে ভ্যাকসিনের গুরুত্ব সকলেই উপলব্ধি করতে পারছেন। এর জন্য আমি চাই যে ভ্যাকসিন নিয়ে কোনরকম অপপ্রচারে কান দেবেন না। আপনারা সকলেই জানেন যে ভারত সরকারের তরফ থেকে সমস্ত রাজ্য সরকারকে ফ্রি ভ্যাক্সিন পাঠানো হয়েছে যার সুফল ৪৫ বছর বয়সের ঊর্ধ্বের লোকেরা পেতে পারবেন। এখন তো পয়লা মে থেকে দেশে ১৮ বছরের ঊর্ধ্বে সকল ব্যক্তির টিকা পাবেন। এবার দেশের কর্পোরেট সেক্টর কোম্পানিগুলোও নিজেদের কর্মচারীদের টিকা দেওয়ার অভিযানে অংশগ্রহণ করতে পারবেন। আমি এটাও বলতে চাই যে ভারত সরকারের পক্ষ থেকে বিনামূল্যে টিকার যে কর্মসূচি এখন চলছে সেটা আগামী দিনেও চলবে। আমি রাজ্যগুলোকেও বলতে চাইছি যে তারা ভারত সরকারের এই বিনামূল্যে টিকা অভিযানের সুবিধা নিজের নিজের রাজ্যের যত বেশি সংখ্যক মানুষের কাছে পৌঁছে দিক। বন্ধুগণ, আমরা সবাই জানি এই রোগের প্রকোপের ফলে আমাদের পক্ষে নিজেকে, নিজের পরিবারকে দেখাশোনা করা মানসিকভাবে কতটা দুরূহ হয়ে ওঠে। কিন্তু আমাদের হাসপাতালের নার্সিং কর্মীদের তো সেই কাজটাই একনাগাড়ে অসংখ্য রোগীদের জন্য একসঙ্গে করতে হয়। এই সেবাভাবই আমাদের সমাজের সবচেয়ে বড় শক্তি। নার্সিং সেবাদান আর পরিশ্রমের ব্যাপারে সবথেকে ভালো বলতে পারবেন কোন নার্স। এইজন্য আমি রায়পুরের ডাক্তার বি আর আম্বেদকর মেডিকেল কলেজ হাসপাতালে সেবারত সিস্টার ভাবনা ধুপ জি কে ‘’মন কি বাত’’এ আমন্ত্রণ জানিয়েছি। তিনি অসংখ্য করোনা রোগীদের দেখাশোনা করেছেন। আসুন ওঁর সঙ্গে কথা বলি।
মোদি - নমস্কার ভাবনা জি।
ভাবনা - মাননীয় প্রধানমন্ত্রী জি নমস্কার।
মোদি - ভাবনা জি ?
ভাবনা - ইয়েস স্যার।
মোদি - ‘’মন কি বাত’’ এর শ্রোতাদের আপনি অবশ্যই এটা বলুন যে আপনার পরিবারে এতগুলো দায়িত্ব পালন, এতগুলো অর্থাৎ মাল্টি টাস্ক, আর তার পরেও আপনি করোনা রোগীদের সেবা করছেন, করোনা রোগীদের সঙ্গে কাজ করে আপনার যে অভিজ্ঞতা দেশবাসী অবশ্যই শুনতে চাইবেন। কারণ যারা সিস্টার হন , যারা নার্স হন তারা রোগীদের সবথেকে কাছের হয়ে থাকেন, আর সব থেকে দীর্ঘ সময় তাঁরা রোগীদের সঙ্গে থাকেন। তাই তাঁরা সমস্ত জিনিস খুব সূক্ষ্ম ভাবে বুঝতে পারেন। আপনি বলুন।
ভাবনা - জি স্যার। আমার টোটাল কোভিড অভিজ্ঞতা দু মাসের স্যার। আমরা ১৪ দিন ডিউটি করি আর ১৪ দিন পরে আমাদের রেস্ট দেওয়া হয়, তারপর দুই মাস পরে আমাদের এই কোভিড ডিউটি রিপিট হয় স্যার। যখন আমার প্রথম কোভিড ডিউটি পড়ল তখন আমি সবার প্রথমে আমার পরিবারের সদস্যদের এই কোভিড ডিউটির কথা জানাই। সেটা মে মাসের কথা, আমি যখনি এটা জানালাম সবাই ভয় পেয়ে গেল, বললেন ঠিক করে কাজ করতে, একটা আবেগঘন পরিস্থিতির তৈরি হয়েছিল। মাঝে যখন আমার মেয়ে জিজ্ঞেস করেছিল যে মা তুমি কোভিড ডিউটিতে যাচ্ছ সেইসময়টা আমার জন্য খুব আবেগের ছিল। কিন্তু যখন আমি কোভিড রোগীদের পাশে গেলাম, দেখলাম তাঁরা আরো বেশি ভীতিগ্রস্ত। কোভিডের নামে সবাই এত ভয় পেয়েছিল, যে ওঁরা বুঝতেই পারছিল না যে ওঁদের সঙ্গে কি হতে চলছে? আর আমরা এরপর কি করবো। আমরা ওঁদের ভয় দূর করার জন্য ওঁদের খুব ভালো স্বাস্থ্যকর পরিবেশ দিয়েছি, স্যার। কোভিড ডিউটির প্রথমেই আমাদের পিপিই কিট পরতে বলা হয়েছিল, পিপিই কিট পরে ডিউটি করা খুব কঠিন কাজ। স্যার, আমাদের জন্য খুবই কষ্টদায়ক ছিল। আমি দু মাসের ডিউটিতে সব জায়গায় ১৪ দিন করে ডিউটি করেছি ওয়ার্ডে আইসিইউ তে, আইসোলেশনে এ স্যার।
মোদি জি – অর্থাৎ সব মিলিয়ে আপনি প্রায় একবছর এই কাজটা করছেন।
ভাবনা – ইয়েস স্যার, ওখানে যাওয়ার আগে আমি জানতাম না আমার সহকর্মী কারা, আমরা দলগতভাবে কাজ করেছি। রোগীদের যে সব সমস্যা ছিল আমরা নিজেদের মধ্যে আলোচনা করে নিতাম। আমরা রোগীদের সম্বন্ধে জানলাম, ওঁদের লজ্জা দূর করলাম। অনেক লোক এমন ছিল যাঁরা কোভিডের নামে ভয় পেত। যখন আমরা তাঁদের ইতিহাস লিখতাম, কোভিডের সমস্ত উপসর্গ তাঁদের মধ্যে পাওয়া যেত কিন্তু ওঁরা ভয়ের জন্য নমুনা পরীক্ষা করাতে চাইতেন না। তখন আমরা ওঁদের বোঝাতাম, স্যার যখন তীব্রতা বেড়ে যেত , ততক্ষনে ওঁদের ফুসফুস সংক্রমিত হয়ে থাকতো এবং আইসিইউ এর প্রয়োজন হতো। তখন সঙ্গে তাঁদের পুরো পরিবার আসতো। এরকম এক দুটো কেস আমি দেখেছি স্যার। আর শুধু এটাই করিনি। সমস্ত বয়সের সঙ্গেই কাজ করেছি স্যার আমি। যার মধ্যে ছোট বাচ্চাও ছিল। মহিলা, পুরুষ, প্রবীণ সব রকম রোগী ছিল স্যার। ওদের সবার সঙ্গেই আমি কথা বলেছি। তো সবাই বলে যে আমি ভয়ের কারণে আসতে পারিনি। সবার কাছ থেকেই আমরা এই উত্তর পেয়েছি স্যার। তাই আমরা ওঁদের বুঝিয়েছি স্যার। যে ভয় পাওয়ার কিছু নেই। আপনারা আমাদের সহযোগিতা করুন। আমরাও আপনাদের সহযোগিতা করব। আপনার যে নিয়মগুলি আছে সেটা মেনে চলুন। আমরা এইটুকুই ওঁদের জন্য করতে পেরেছি স্যার।
মোদিজী - ভাবনা জি, আপনার সঙ্গে কথা বলে আমার খুব ভালো লেগেছে, আপনি অনেক কথা জানালেন। আপনার নিজের অভিজ্ঞতার কথা বললেন তাই অবশ্যই দেশবাসীর কাছে এর একটা ইতিবাচক বার্তা পৌঁছবে। আপনাকে অনেক অনেক ধন্যবাদ ভাবনা জি।
ভাবনা - থ্যাংক ইউ সো মাচ স্যার থ্যাংক ইউ সো মাচ। জয় হিন্দ।
মোদিজী - জয় হিন্দ।
ভাবনা জী এবং আপনাদের মত হাজার হাজার নার্স ভাই বোনেরা নিজেদের দায়িত্ব খুব ভালোভাবে পালন করছেন। এটা আমাদের সবার জন্যই প্রেরণাদায়ক।আপনারা আপনাদের নিজেদের স্বাস্থের দিকেও ভাল করে নজর দিন। নিজেদের পরিবারের দিকেও মনোযোগ দিন।
বন্ধুরা, বেঙ্গালুরু থেকে সিস্টার সুরেখা জী এখন আমাদের সঙ্গে আছেন।সুরেখা জী কে সি জেনারেল হাসপাতালের সিনিয়ার নার্সিং অফিসার .আসুন তাঁর অভিজ্ঞতাও শুনি-
মোদী জী- নমস্কার সুরেখা জী,
সুরেখা- আমি আমাদের দেশের প্রধান মন্ত্রীর সঙ্গে কথা বলতে পেরে সত্যি গর্বিত ও সম্মানিত বোধ করছি।
মোদীজী- সুরেখা জী আপনি ও আপনার সহকর্মী নার্স এবং হাসপাতালের কর্মীরা অসাধারণ কাজ করছেন। ভারতবর্ষ আপনাদের কাছে কৃতজ্ঞ। কোভিড -১৯ এর বিরুদ্ধে যারা লড়াই করছেন সেই সব নাগরিকদের আপনি কি বলতে চান?
সুরেখা জী- হ্যাঁ স্যার, একজন দায়িত্বশীল নাগরিক হওয়ার সুবাদে আমি সবাইকে বলতে চাই যে নিজের প্রতিবেশিদের সঙ্গে ভাল ব্যবহার করুন। প্রাথমিক পর্যায়ে পরীক্ষা ও সঠিক ট্র্যাকিং মৃত্যুহার কমাতে সাহায্য করবে, এবং আরো বলতে চাই যে যদি কোন লক্ষণ দেখেন তবে সঙ্গে সঙ্গে নিজেকে আলাদা রাখুন ও নিকটবর্তী কোন চিকিৎসকের পরামর্শ নিয়ে অবিলম্বে চিকিৎসা শুরু করুন।সমাজে এই রোগ সম্বন্ধে সচেতনতা জরুরী, আমাদের আশাবাদী হওয়া উচিত,ভয় পাবেন না ও দুশিন্তা করবেন না। এতে রোগীর অবস্থা আরো খারাপ হয়ে যায়।আমরা আমাদের সরকারের কাছে কৃতজ্ঞ ও একটা টিকার জন্য গর্বিতও। আমি টিকা নিয়েছি। আমি আমার অভিজ্ঞতা থেকে ভারতের নাগরিকদের একটা কথা বলতে চাইব যে কোন টিকাই সঙ্গে সঙ্গে ১০০ ভাগ নিরাপত্তা দিতে পারেনা । প্রতিরোধ ক্ষমতা বাড়তে ও সময় লাগে। টিকা নিতে ভয় পাবেন না। নিজেরা টিকা নিন, এর সামান্য কিছু পার্শ্ব প্রতিক্রিয়া আছে। আমি বলতে চাই সবাই বাড়িতে থাকুন, সুস্থ থাকুন, অসুস্থ মানুষদের থেকে দূরে থাকুন, বার বার নাকে মুখে চোখে অকারণে হাত দেবেন না। শারীরিক দুরত্ব বজায় রাখুন, সঠিক ভাবে মাস্ক পরুন, বারবার হাত ধুয়ে নিন এবং ঘরোয়া শুশ্রুষাগুলি যতটা সম্ভব পালন করুন। আয়ূর্বেদিক কোয়াত পান করুন,গরম জলের ভাপ নিন গার্গল করুন ও নিশ্বাস প্রশ্বাসের কিছু ব্যায়াম করতে পারেন, সবশেষ কিন্তু শেষ কথা নয়, সামনের সারিতে থাকা কোভিড যোদ্ধাদের প্রতি শ্রদ্ধা রাখুন। আমরা আপনাদের সমর্থন ও সহযোগিতা চাই। আমরা এক সঙ্গে লড়াই করব, এভাবেই আমরা অতিমারীকে হারাতে পারব। মানুষের জন্য এটাই আমার বার্তা স্যার।
মোদীজী- ধন্যবাদ সুরেখা জী ।
সুরেখা জী--ধন্যবাদ স্যার ।
সুরেখা জী, সত্যিই আপনি খুব কঠিন সময়ে হাল ধরে আছেন। আপনি নিজের যত্ন নিন। আপনার পরিবারের প্রতিও আমার অনেক অনেক শুভেচ্ছা রইল। আমি দেশবাসীকেও বলতে চাই যে যেমনটা ভাবনা জী ও সুরেখা জী নিজেদের অভিজ্ঞতা থেকে বললেন, করোনার সঙ্গে লড়বার জন্য ইতিবাচক মানসিকতা বজায় রাখা খুব জরুরী, দেশবাসীকে এটা বজায় রাখতে হবে।
বন্ধুরা, ডাক্তার এবং নার্সিং স্টাফেরদের সঙ্গে সঙ্গে ল্যাব টেকনিশিয়ান ও অ্যাম্বুলেন্স ড্রাইভারদের মতো ফ্রন্টলাইন ওয়ার্কাররাও ঈশ্বরের মতো কাজ করছেন । যখন কোনো আম্বুল্যান্স কোনো রোগীর কাছে পৌঁছয় তখন তাকে দেবদূত বলে মনে হয়। এঁদের সবার কাজের ব্যাপারে এঁদের অভিজ্ঞতার ব্যাপারে দেশের সবার জানা উচিত।আমার সঙ্গে এখন এমনই এক ভদ্রলোক আছেন শ্রী প্রেম বর্মা , যিনি একজন অ্যাম্বুল্যান্স ড্রাইভার, এঁর নাম শুনেই তা বোঝা যায়। প্রেম বর্মা জী নিজের কাজ, নিজের কর্তব্য সম্পুর্ণ প্রেম ও নিষ্ঠা র সঙ্গে করেন। আসুন ওঁর সাথে কথা বলি-
মোদী জী- নমস্কার প্রেম জী,
প্রেম জী- নমস্কার মোদীজি,
মোদীজী- ভাই প্রেম ,
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার ,
মোদীজী- আপনি আপনার কাজের ব্যাপারে
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার ,
মোদী জী- একটু বিস্তারিত ভাবে জানান, আপনার যা অভিজ্ঞতা সেটাও জানান,
প্রেম জী-আমি ক্যাটের অ্যাম্বুলেন্স ড্রাইভার, যখনই কন্ট্রোল আমাদের ট্যাবে কল করে, ১০২ থেকে যখন কল গুলো আসে আমরা রোগীদের কাছে চলে যাই। এইভাবে আমি দু বছর ধরে ক্রমাগত এই কাজটিই করে আসছি। নিজের কিট পরে নিজের গ্লাভস মাস্ক পরে, রোগী যেখানে ড্রপ করতে বলেন, যেকোনো হসপিটালে, আমরা যত তাড়াতাড়ি সম্ভব তাকে সেখানে পৌঁছে করি।
মোদীজী- আপনি টিকার দুটো ডোজই পেয়ে গেছেন নিশ্চয়।
প্রেম জী- হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- তাহলে অন্যরা টিকা নিক। এইব্যাপারে আপনি কি বলতে চান?
প্রেম জী- নিশ্চয় স্যার। সবারই এই ডোজ নেওয়া উচিত আর এটা পরিবারের জন্যেও ভালো। এখন আমার মা বলেন এই চাকরী ছেড়ে দাও। আমি বলেছি, মা, যদি আমি চাকরি ছেড়ে বসে থাকি তবে রোগীদের কে কিভাবে পৌঁছে দেবে? কারন এই করোনার সময়ে সবাই পালাচ্ছে।সবাই চাকরি ছেড়েছুড়ে চলে যাচ্ছে। মা ও আমায় বলেন এই চাকরি ছেড়ে দিতে। আমি বলেছি না মা আমি চাকরি ছাড়ব না।
মোদীজী- মাকে কষ্ট দেবেন না, মাকে বুঝিয়ে বলবেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ ,
মোদী জি- কিন্তু এই যে আপনি মায়ের কথা বললেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদী জী- এটা খুবই মর্মস্পর্শী,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী-আপনার মাকেও,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী- আমার প্রণাম জানাবেন,
প্রেম জী- নিশ্চয়,
মোদীজী- হ্যাঁ
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজি-প্রেম জী আমি আপনার মাধ্যমে ,
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী- এই যারা অ্যাম্বুল্যান্স চালায় আমাদের সেই ড্রাইভাররাও
প্রেম জী- হ্যাঁ
মোদীজী - বড় ঝুঁকি নিয়ে কাজ করছেন,
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজী- আর সবার মায়েরা কি ভাবেন,
প্রেম জী- নিশ্চয় স্যার,
মোদীজী- এই কথা যখন শ্রোতা দের কাছে পৌঁছবে।
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজি- আমি নিশ্চিত জানি যে তাদের ও হৃদয় স্পর্শ করবে।
প্রেম জী- হ্যাঁ,
মোদীজি- প্রেম জি অনেক অনেক ধন্যবাদ আপনি তো প্রায় প্রেমের গঙ্গা বইয়ে দিচ্ছেন।
প্রেম জী- ধন্যবাদ স্যার,
মোদীজী- ধন্যবাদ ভাই,
প্রেম জী- ধন্যবাদ,
বন্ধুরা, প্রেমজী এবং আরো এরকম হাজার হাজার মানুষ,আজ নিজের জীবন বাজি রেখে মানুষের সেবা করে চলেছেন।করোনার বিরুদ্ধে এই লড়াইয়ে যতো জীবন বাঁচছে তাতে অ্যম্বুলেন্স ড্রাইভারদের ও বিশাল বড় অবদান আছে। প্রেম জী আপনাকে ও সারাদেশে আপনার সব সঙ্গীকে আমি অনেক অনেক সাধুবাদ জানাই। আপনি সময়ে পৌঁছোন, জীবন বাঁচান।
আমার প্রিয় দেশবাসী,এটা ঠিক যে করোনায় বহু মানুষ সংক্রমিত হচ্ছেন , কিন্তু করোনায় সুস্থ হয়ে ওঠা মানুষের সংখ্যাও কিন্তু ততোটাই।গুরুগ্রামের প্রীতি চতুর্বেদী ও সম্প্রতি করোনা কে হারিয়ে দিয়েছেন। প্রীতি জী “মন কি বাত” এ আমাদের সাথে যুক্ত হচ্ছেন। তাঁর অভিজ্ঞতা আমাদের সবার খুব কাজে লাগবে।
মোদীজী- প্রীতি জি নমস্কার
প্রীতি জি- নমস্কার স্যার আপনি কেমন আছেন?
মোদীজী- আমি ভাল আছি, সবথেকে আগে আমি আপনাকে কোভিড-১৯ এ
প্রীতি জি – হ্যাঁ
মোদীজী- সাফল্যের সঙ্গে লড়বার জন্যে
প্রীতি জি –হ্যাঁ
মোদীজী-প্রশংসা জানাই
প্রীতি জি – অনেক ধন্যবাদ স্যার
মোদীজী- আপনার স্বাস্থ্য আরো দ্রুত ভালো হয়ে উঠুক এই কামনা করি
প্রীতি জি –ধন্যবাদ স্যার
মোদীজী- প্রীতি জি
প্রীতি জি –হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- এতে কি শুধু আপনিই অসুস্থ হয়েছিলেন নাকি আপনার পরিবারের অন্যান্য সদস্যরাও সংক্রমিত হয়েছিলেন?
প্রীতি – না না স্যার আমারি শুধু হয়েছিল।
মোদিজি- যাক ঈশ্বরের অসীম কৃপা। আচ্ছা আমি চাই
প্রীতি –হ্যাঁ স্যার।
মোদিজি- যে আপনি যদি আপনার কষ্টের সময়ের অভিজ্ঞতার কথা সবাইকে জানান তবে হয়তো শ্রোতারাও এই রকম সময়ে কিভাবে নিজেদের সামলাবেন তার একটা পথনির্দেশ পাবেন।
প্রীতি ---হ্যাঁ স্যার নিশ্চয়।স্যার গোড়ার দিকে আমার খুব কুঁড়েমি , খুব আলস্য আলস্য লাগত আর তার পরে না আমার গলা একটু একটু খুশ খুশ করতে লাগল, এরপর আমার মনে হল যে এগুলো লক্ষণ , তাই আমি টেস্ট করাবার জন্যই টেস্ট করালাম , পরের দিন রিপোর্ট আসা মাত্রই যেই দেহলাম আমি পজিটিভ, আমি নিজেকে কোয়ারান্টিন করে ফেললাম।একটা ঘরে আইসোলেট করে আমি ডাক্তারদের সাথে পরামর্শ করলাম ।ওদের বলে দেওয়া ওষুধও শুরু করে দিলাম।
মোদীজি- তাহলে আপনার এই পদক্ষেপ নেবার কারণে আপনার পরিবার রক্ষা পেল।
প্রীতি- হ্যাঁ স্যার, সবারই টেষ্ট পরে করানো হয়ে ছিল। সবাই নেগেটিভ ছিল। আমিই পজিটিভ ছিলাম। আগেই আমি নিজেকে একটা ঘরে আইসোলেট করে নিয়ে ছিলাম। নিজের প্রয়োজনের সব জিনিসপত্র নিয়ে আমি নিজেই ঘরে বন্ধ ছিলাম। তার সঙ্গে সঙ্গে আমি ডাক্তারদের দেওয়া ওষুধ ও শুরু করে দিয়ে ছিলাম।স্যার আমি না ওষুধের সঙ্গে যোগ ব্যায়াম, আয়ূর্বেদিক ও শুরু করে দিয়ে ছিলাম, আর আমি কোয়াত খাওয়াও শুরু করেছিলাম। আর স্যার রোগ প্রতিরোধ ক্ষমতা তৈরি করবার জন্য আমি যখনই খেতাম হেলদি ফুড, মানে প্রোটিন সমৃদ্ধ খাবার খেতাম। আমি প্রচুর ফ্লুইড খেয়েছি, স্টিম নিয়েছি গার্গল করেছি আর গরম জল খেয়েছি। আমি সারাদিন ধরে এই সব করেছি রোজ। আর স্যার সব থেকে বড় কথা আমি বলতে চাই যে একদম ঘাবড়াবেন না। মানসিক ভাবে খুব স্ট্রং থাকতে হবে, যার জন্য আমি যোগ ব্যায়াম , ব্রিদিং এক্সারসাইজ করতাম, ওটা করলে আমার খুব ভাল লাগতো।
মোদীজী- হ্যাঁ আচ্ছা প্রীতি জী যখন আপনার এই প্রক্রিয়া সম্পুর্ণ হয়ে গেল। আপনি সংকট মুক্ত হলেন
প্রীতি- হ্যাঁ
মোদীজি- এখন আপনার রিপোর্টও নেগেটিভ
প্রীতি- হ্যাঁ স্যার
মোদীজী- তাহলে আপনি আপনার স্বাস্থের জন্য, এখন কি করছেন?
প্রীতি- স্যার প্রথমত আমি যোগ ব্যায়াম বন্ধ করিনি
মোদীজি- হ্যাঁ
প্রীতি-ঠিক আছে, আমি এখোনো কোয়াত খাচ্ছি আর নিজের রোগ প্রতিরোধ ক্ষমতা ভাল রাখবার জন্য আমি সুষম স্বাস্থ্যকর খাবার খাচ্ছি এখনো।
মোদীজি-হ্যাঁ
প্রীতি- আমি যেমন আগে নিজেকে খুব অবহেলা করতাম সেদিকে এখন খুব মনোযোগ দিচ্ছি ।
মোদিজি- ধন্যবাদ প্রীতি জি
প্রীতি- অনেক ধন্যবাদ স্যার
মোদীজি-আপনি আমাদের যা জানালেন আমার মনে হয় এটা বহু মানুষের কাজে লাগবে , আপনি সুস্থ থাকুন আপনার পরিবারের লোকেরা সুস্থ থাকুক, আপনাকে আমার অনেক অনেক শুভেচ্ছা ।
আমার প্রিয় দেশবাসী, আজ যেমন আমাদের চিকিৎসা পরিষেবার সঙ্গে যুক্ত লোকেরা, সামনের সারিতে থাকা কর্মীরা দিন রাত সেবার কাজ করে যাচ্ছেন ।তেমনই সমাজের অন্য লোকেরাও এই সময়ে পিছিয়ে নেই। দেশ আবার একবার একজোট হয়ে করোনার বিরুদ্ধে লড়াই করছে । এই সময়ে আমি দেখতে পাচ্ছি কেউ কোয়ারান্টিনে থাকা পরিবারের জন্য ওষুধ পৌঁছে দিচ্ছে , কেউ সব্জী দুধ ফল ইত্যাদি পৌঁছে দিচ্ছে । কেউ বিনা মূল্যে রোগীদের অ্যাম্বুল্যান্স পরিষেবা দিচ্ছে। এই কঠিন সময়েও দেশের বিভিন্ন প্রান্তে স্বেচ্ছাসেবী সংস্থাগুলি এগিয়ে এসে অন্যের সাহায্যের জন্য যেটুকু করা সম্ভব করার চেষ্টা করছে। এবার গ্রামেও নতুনভাবে সচেতনতা দেখা যাচ্ছে । কঠোর ভাবে কোভিড নিয়মের পালন করে মানুষ নিজের গ্রামকে করোনা থেকে বাঁচাচ্ছেন, যারা বাইরে থেকে আসছেন তাদের জন্যেও সঠিক ব্যাবস্থা করা হচ্ছে। শহরেও তরুণ প্রজন্ম এগিয়ে এসেছেন। নিজেদের এলাকায় যাতে করোনা কেস না বাড়ে তার জন্য স্থানীয় বাসিন্দারা মিলিত প্রচেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছেন।অর্থাৎ এক দিকে দেশ দিনরাত হাসপাতাল, ভেন্টিলেটর আর ওষুধ নিয়ে কাজ করছে তো অন্য দিকে দেশের মানুষ ও জানপ্রাণ দিয়ে করোনার চ্যালেঞ্জের সঙ্গে যুদ্ধ করছে।এই চিন্তাটা আমাদের অনেক শক্তি দেয়, অনেক বিশ্বাস দেয়। যা যা চেষ্টা হচ্ছে তা বিরাট বড় সমাজ সেবা। এতে সমাজের শক্তি বাড়ে।
আমার প্রিয় দেশবাসী আজ মন কি বাত এর পুরো আলোচনাটাই আমি করোনা মহামারীর ওপরেই রেখেছিলাম কারণ এই রোগকে হারানোই এখন আমাদের প্রাথমিকতা। আজ ভগবান মহাবীর জয়ন্তীও। এর জন্য আমি প্রত্যেক দেশবাসীকে শুভেচ্ছা জানাই।ভগবান মহাবীরের বার্তা আমাদের তপস্যা ও আত্মসংযমের প্রেরনা দেয়। এখন রমজানের পবিত্র মাসও চলছে, সামনে বুদ্ধপূর্ণিমা। গুরু তেগবাহাদুরের চারশোতম প্রকাশ পর্বও আছে। আর একটি গুরুত্বপূর্ণ দিন পঁচিশে বৈশাখ –রবীন্দ্রজয়ন্তীও আছে, এগুলো সবই আমাদের নিজেদের কর্তব্য করে যাওয়ার প্রেরণা দেয়। একজন নাগরিক হওয়ার সুবাদে আমরা আমাদের নিজেদের জীবনে যতটা কুশলতার সঙ্গে নিজেদের কর্তব্য পালন করব, ততই দ্রুতগতিতে সংকট মুক্ত হয়ে আমরা ভবিষ্যতের পথে এগিয়ে যাব। এই কামনার সঙ্গে আমি আপনাদের সবাইকে আবার একবার বলতে চাই যে টিকা সবাইকে নিতে হবে এবং সাবধান ও থাকতে হবে। ‘দবাই ভী- কড়াই ভী’। এই মন্ত্র কখোনোই ভুললে চলবেনা। আমরা একসঙ্গে খুব তাড়াতাড়ি এই বিপদ থেকে বেরিয়ে আসব। এই বিশ্বাস সহ আপনাদের সবাইকে অনেক অনেক ধন্যবাদ। নমস্কার।